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  • एक साल से बंद पड़े छात्रसंघ कक्ष का ताला खुलते ही सामने आया चौंकाने वाला सच, नकदी और रिवॉल्वर बरामद होने पर सियासत गरमाई

    एक साल से बंद पड़े छात्रसंघ कक्ष का ताला खुलते ही सामने आया चौंकाने वाला सच, नकदी और रिवॉल्वर बरामद होने पर सियासत गरमाई

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित प्रतिष्ठित सुरेंद्रनाथ कॉलेज इन दिनों एक सनसनीखेज मामले को लेकर चर्चा के केंद्र में है। कॉलेज परिसर के एक वर्ष से बंद पड़े छात्रसंघ कक्ष को खोले जाने के बाद वहां से बड़ी मात्रा में नकदी, एक रिवॉल्वर और अन्य सामग्री मिलने का दावा किया गया है। इस घटनाक्रम ने न केवल शैक्षणिक जगत को चौंकाया है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। मामले के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है और जांच की मांग तेज हो गई है।

    जानकारी के अनुसार कॉलेज प्रशासन ने राज्य सरकार के निर्देशों के बाद छात्रसंघ से संबंधित कक्षों और निधियों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी क्रम में लंबे समय से बंद पड़े छात्रसंघ कक्ष को खोला गया। बताया जा रहा है कि कमरे की सफाई और निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को वहां रखी अलमारियों और बक्सों में बड़ी मात्रा में नकदी मिली। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बरामद रकम करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, लंबे समय तक बंद रहने के कारण नकदी का एक हिस्सा खराब अवस्था में पाया गया।

    मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। निरीक्षण के दौरान कमरे से एक रिवॉल्वर और कुछ अन्य वस्तुएं भी मिलने का दावा किया गया है। इन बरामदगी की खबर सामने आते ही कॉलेज परिसर और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई। शिक्षा संस्थान में इस तरह की सामग्री मिलने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी इस पूरे मामले की जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

    घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि बरामद नकदी की उत्पत्ति और उसके संभावित उपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय सहित केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग उठाई है। भाजपा का आरोप है कि यह मामला केवल कॉलेज प्रशासन तक सीमित नहीं हो सकता और इसकी गहन जांच आवश्यक है।

    दूसरी ओर, मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया लगातार बढ़ रही है। विपक्षी दल इस घटना को राज्य की शिक्षा व्यवस्था और संस्थागत पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख स्थान ले सकता है।

    कॉलेज प्रशासन का कहना है कि बरामद सामग्री की सूचना संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि नकदी और अन्य सामान वहां कब से रखा गया था तथा उसका वास्तविक स्रोत क्या है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की निगाहें जांच एजेंसियों और प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं।

  • निसांका-मेंडिस का बल्ला गरजा, श्रीलंका ने पहले वनडे में वेस्टइंडीज को 41 रन से हराया

    निसांका-मेंडिस का बल्ला गरजा, श्रीलंका ने पहले वनडे में वेस्टइंडीज को 41 रन से हराया


    Sri Lanka national cricket team ने वेस्टइंडीज दौरे का आगाज शानदार जीत के साथ किया। किंग्स्टन के Sabina Park में खेले गए पहले वनडे मुकाबले में श्रीलंका ने हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन करते हुए West Indies cricket team को 41 रन से मात दी। इस जीत के साथ श्रीलंका ने वनडे सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 303 रन बनाए। टीम की शुरुआत भले ही जल्दी झटका लगने से हुई, लेकिन इसके बाद Pathum Nissanka और Kusal Mendis ने पारी को मजबूती दी। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 136 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

    निसांका ने 103 गेंदों पर 79 रन की संयमित पारी खेली, जिसमें 9 चौके और एक छक्का शामिल रहा। वहीं कुशल मेंडिस ने सिर्फ 62 गेंदों में 72 रन ठोकते हुए रनगति को तेज बनाए रखा। कप्तान Charith Asalanka ने 45 रन का उपयोगी योगदान दिया, जबकि अंत में Janith Liyanage ने 29 गेंदों पर नाबाद 44 रन बनाकर टीम का स्कोर 300 के पार पहुंचाया।

    304 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत ठीक रही। John Campbell और Justin Greaves ने पहले विकेट के लिए 50 रन जोड़े। हालांकि इसके बाद नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे।

    कप्तान Shai Hope ने जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए 56 रन बनाए और टीम को मुकाबले में बनाए रखने की कोशिश की। Roston Chase ने 33 रन और जस्टिन ग्रीव्स ने 45 रन का योगदान दिया, लेकिन कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका।

    श्रीलंका की ओर से तेज गेंदबाज Dushmantha Chameera जीत के सबसे बड़े नायक साबित हुए। उन्होंने 67 रन देकर 4 महत्वपूर्ण विकेट झटके और वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। Maheesh Theekshana ने दो विकेट हासिल किए, जबकि Wanindu Hasaranga को एक सफलता मिली।

    वेस्टइंडीज की पूरी टीम 49.2 ओवर में 262 रन पर सिमट गई और श्रीलंका ने 41 रन की प्रभावशाली जीत दर्ज कर सीरीज में बढ़त बना ली। निसांका और मेंडिस की साझेदारी तथा चमीरा की घातक गेंदबाजी इस जीत की सबसे बड़ी वजह रही।

  • घर लौटने से पहले छिन गई जिंदगी, फ्लाइट का इंतजार कर रहे उज्जैन के मंजूर अहमद हमले का शिकार

    घर लौटने से पहले छिन गई जिंदगी, फ्लाइट का इंतजार कर रहे उज्जैन के मंजूर अहमद हमले का शिकार


    मध्य प्रदेश । उज्जैन के राज रॉयल कॉलोनी निवासी मंजूर अहमद (50) की मौत की खबर ने पूरे परिवार और इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले में उनकी जान चली गई। घटना में 63 अन्य लोग घायल हुए हैं और एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा है।

    परिजनों के अनुसार मंजूर अहमद अपने भांजे की शादी में शामिल होने भारत आने वाले थे। उनकी 3 जून को कुवैत से मुंबई की फ्लाइट थी और 4 जून की सुबह उन्हें उज्जैन पहुंचना था। परिवार के सदस्य उनकी अगवानी के लिए तैयारियां कर रहे थे, लेकिन इसी बीच यह दुखद खबर आ गई।

    मंजूर अहमद के बेटे मोहम्मद अनस ने बताया कि मंगलवार शाम उनकी पिता से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया था कि वे कुवैत से मुंबई पहुंचेंगे और वहां से ट्रेन के जरिए नागदा आएंगे। परिवार के लोग उन्हें लेने जाने वाले थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी।

    बताया जाता है कि मंजूर अहमद फ्लाइट पकड़ने के लिए कुवैत एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर मौजूद थे। इसी दौरान एयरपोर्ट पर ड्रोन और मिसाइल हमला हुआ। हमले में टर्मिनल को गंभीर नुकसान पहुंचा और मंजूर अहमद की मौके पर ही मौत हो गई।

    परिवार के इकलौते कमाने वाले थे
    मंजूर अहमद पिछले करीब 30 वर्षों से खाड़ी देश में रहकर काम कर रहे थे। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उन्हीं के कंधों पर थी। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा हैं, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं। बेहतर भविष्य और बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने वर्षों तक घर से दूर रहकर मेहनत की।

    परिजनों के मुताबिक वे आखिरी बार अक्टूबर 2025 में उज्जैन आए थे। उस समय उन्होंने परिवार से कहा था कि अब वे पहले की तुलना में अधिक बार घर आया करेंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

    शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू
    परिवार के सदस्य मोहम्मद सलीम ने बताया कि मंजूर अहमद का पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि शव कुवैत से अहमदाबाद पहुंचेगा, जहां से सड़क मार्ग के जरिए उज्जैन लाया जाएगा। सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होने पर अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जा सकता है।

    भारत ने हमले की निंदा की
    भारत सरकार और भारतीय दूतावास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नागरिकों और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना अस्वीकार्य है तथा सभी पक्षों से ऐसे हमले रोकने की अपील की है। भारतीय दूतावास भी पीड़ित परिवार के संपर्क में है और आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है।

  • पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार

    पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार


    मध्य प्रदेश । इंदौर में लगातार गहराते जल संकट को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जबलपुर स्थित Madhya Pradesh High Court की अवकाशकालीन पीठ ने नगर निगम को मानसून पूर्व जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े जरूरी कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति Pranay Verma और Jai Kumar Pillai की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वर्षा जल के अधिकतम उपयोग और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाए जाना आवश्यक है।

    यह जनहित याचिका Rajlakshmi Foundation की ओर से दायर की गई है। याचिका में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से गिरते भूजल स्तर, सूखते तालाबों, झीलों, कुओं और बावड़ियों की स्थिति पर चिंता जताई गई है। साथ ही यह भी बताया गया कि कई पारंपरिक जल स्रोतों से जुड़े फीडर चैनल और मोहरियां अवरुद्ध हो चुकी हैं, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है।

    याचिका में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, शहर में बढ़ते कंक्रीटीकरण, जलाशयों में सीवेज प्रदूषण, पाइपलाइन लीकेज, परित्यक्त बोरवेल और उपचारित अपशिष्ट जल के सीमित उपयोग जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा ग्रामीण और पेरी-अर्बन क्षेत्रों के वाटरशेड संरक्षण और पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    विशेष रूप से असराबाद खुर्द, मिर्जापुर, रालामंडल, लिम्बोदी, बिलावली, छोटी बिलावली और पिपल्यापाला जैसे जलाशयों के वैज्ञानिक पुनर्जीवन की मांग याचिका में की गई है। इन जल स्रोतों को इंदौर की पारंपरिक जल-श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है, जो भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को निर्देश दिया कि अगले सात दिनों के भीतर सार्वजनिक सूचना जारी कर सभी सरकारी भवनों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, अपार्टमेंट्स, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और अन्य संस्थानों को अपने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई, डी-सिल्टिंग और उन्हें पूरी तरह क्रियाशील बनाने के लिए निर्देशित किया जाए।

    अदालत ने यह भी कहा कि पहली भारी मानसूनी बारिश से पहले प्राथमिकता वाले जलाशयों से जुड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स, फीडर चैनलों, झीलों के इनलेट और आउटलेट, मोहरियों तथा रिचार्ज चैनलों की आपात सफाई कराई जाए। कोर्ट का मानना है कि यदि इन मार्गों को समय रहते साफ कर दिया जाए तो बारिश का पानी बहकर नष्ट होने के बजाय भूजल रिचार्ज और जलाशयों के पुनर्भरण में उपयोग हो सकेगा।

    जल संकट जैसे गंभीर मुद्दे पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 8 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें नगर निगम द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के समक्ष रखी जाएगी।

  • 15 जून से शुरू होंगे भीमाशंकर के दर्शन, उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने लागू किए नए नियम

    15 जून से शुरू होंगे भीमाशंकर के दर्शन, उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने लागू किए नए नियम

    नई दिल्ली। भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखने वाले महाराष्ट्र के पुणे स्थित प्रसिद्ध भीमाशंकर मंदिर के कपाट आगामी 15 जून 2026 से श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए जाएंगे। विकास और जीर्णोद्धार कार्यों के चलते पिछले करीब पांच महीनों से इस ऐतिहासिक मंदिर में आम भक्तों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगी हुई थी। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर चल रहे निर्माण कार्यों को सुचारू रूप से पूरा करने और सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने के उद्देश्य से जनवरी महीने से ही मंदिर को बंद रखने का निर्णय लिया था। अब बुनियादी ढांचे के विकास का पहला चरण पूरा होने के बाद शिव भक्तों का लंबा इंतजार समाप्त होने जा रहा है और मंदिर परिसर एक बार फिर जय भोलेनाथ के जयकारों से गुंजायमान होने के लिए तैयार है।

    इस धार्मिक स्थल को अस्थाई रूप से बंद किए जाने का मुख्य कारण आगामी वर्ष 2027 में नासिक के त्र्यंबकेश्वर तीर्थ में आयोजित होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला है। इस वैश्विक आयोजन के दौरान महाराष्ट्र के सभी प्रमुख और पौराणिक तीर्थस्थलों पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होने की संभावना है। इसी भविष्यगामी भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा भीमाशंकर मंदिर परिसर में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू करवाए गए थे। इन पांच महीनों की अवधि के दौरान मंदिर के मुख्य मुख्य मार्ग, प्रवेश व निकास द्वारों को चौड़ा करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के ठहरने और विश्राम करने के लिए विशेष बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है ताकि कुंभ मेले के समय किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो।

    प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भीमाशंकर मंदिर में दर्शन व्यवस्था को पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए कई कड़े और नए नियम भी लागू किए जा रहे हैं। अब यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए पूर्व ऑनलाइन पंजीकरण कराना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। दर्शन के लिए स्लॉट बुक करने की ऑनलाइन प्रक्रिया 5 जून 2026 से मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दी जाएगी। मंदिर प्रबंधन समिति ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती दौर में प्रतिदिन केवल सीमित संख्या में ही पंजीकृत श्रद्धालुओं को गर्भगृह और मुख्य परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, जिससे कतार प्रबंधन को बेहतर ढंग से संभाला जा सके और वीआईपी व आम भक्तों के बीच संतुलन बना रहे।

    प्रशासन ने देश भर से आने वाले शिव भक्तों से अपील की है कि वे मंदिर के नए नियमों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग न केवल एक महान धार्मिक केंद्र है, बल्कि यह अपने अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और वन्यजीव अभ्यारण्य के लिए भी दुनिया भर के पर्यटकों और ट्रैकर्स के बीच बेहद लोकप्रिय है। सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित होने के कारण यहां पहुंचने का मार्ग पहाड़ी और घुमावदार है। श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाने के लिए पुणे जंक्शन और कर्जत रेलवे स्टेशन से राज्य परिवहन की विशेष बसों और टैक्सियों की संख्या में भी बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे जून के महीने में मानसून की शुरुआत के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परिवहन संबंधी समस्या का सामना न करना पड़े।

  • निर्जला एकादशी 2026: व्यापार में उन्नति और मानसिक शांति के लिए इस बार बेहद खास हैं ये ज्योतिषीय उपाय

    निर्जला एकादशी 2026: व्यापार में उन्नति और मानसिक शांति के लिए इस बार बेहद खास हैं ये ज्योतिषीय उपाय

    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को बेहद खास और पवित्र माना गया है। इस वर्ष निर्जला एकादशी का महापर्व 25 जून 2026 को मनाया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह केवल एक पारंपरिक उपवास नहीं है, बल्कि व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक दिशा में ले जाने का एक बड़ा माध्यम है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए पूरी निष्ठा से व्रत का पालन करते हैं, उन्हें साल भर की सभी चौबीस एकादशियों के समान ही पुण्यफल प्राप्त होता है। ज्योतिषीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्रत व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ उसकी मानसिक क्षमताओं का विकास करने में भी सहायक सिद्ध होता है।

    इस पावन पर्व का संबंध महाभारत काल की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कथा से जुड़ा हुआ है। पांडव भाइयों में भीमसेन अपनी अत्यधिक भूख के कारण हर महीने आने वाली एकादशियों का नियमित व्रत रखने में असमर्थ थे। अपनी इस विवशता को लेकर जब वे महर्षि वेदव्यास जी के पास पहुंचे, तब व्यास जी ने उन्हें एक सरल किंतु बेहद कठिन मार्ग सुझाया। उन्होंने भीम को समझाया कि यदि वे ज्येष्ठ मास की इस मुख्य एकादशी पर बिना पानी पिए पूर्ण निष्ठा के साथ निर्जल उपवास रखें, तो उन्हें वर्ष भर की समस्त एकादशियों का लाभ एक साथ मिल जाएगा। भीम ने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए इस कठिन व्रत को पूरा किया, जिसके बाद से ही सनातन समाज में इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाने लगा।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निर्जला एकादशी का सीधा संबंध ब्रह्मांड में चंद्रमा की ऊर्जा से माना गया है। इस दिन किया जाने वाला मानसिक और शारीरिक संयम व्यक्ति के चित्त को स्थिर रखता है और उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करता है। यह विशेष तिथि भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति के तत्वों को अत्यधिक बल प्रदान करती है, जिसके कारण यह दिन केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं रहता बल्कि कुंडली में ग्रहों के संतुलन को ठीक करने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। यही वजह है कि करियर और व्यापार में लंबे समय से गतिरोध का सामना कर रहे जातकों के लिए इस दिन कुछ विशेष उपायों को आजमाना बेहद फलदायी माना जाता है।

    इस शुभ अवसर पर व्यापारिक और आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए पीपल के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु का स्मरण करने का विधान है। सुबह या शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जाकर ‘ओम् नमो नारायणाय’ मंत्र का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर हल्दी व केसर मिश्रित गंगाजल का छिड़काव करने से राहु और केतु के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और घरेलू कलह का नाश होता है। आर्थिक समृद्धि के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के चरणों में ग्यारह पीली कौड़ियां रखकर उन पर हल्दी का तिलक लगाने और पूजा के बाद उन्हें तिजोरी में सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है, जिससे अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रहता है।

    विद्यार्थियों के लिए भी यह दिन एकाग्रता बढ़ाने का एक उत्तम अवसर लेकर आता है। जो छात्र पढ़ाई में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, वे अपनी अध्ययन सामग्री पर हल्दी का छोटा तिलक लगाकर विष्णु सहस्त्रनाम का श्रवण कर सकते हैं, जिससे उनकी स्मरण शक्ति मजबूत होती है। सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से इस दिन स्वयं निर्जल रहकर बेजुबान पक्षियों के लिए स्वच्छ जल पात्र की व्यवस्था करना सूर्य और गुरु ग्रह को शुभ फल देने के लिए प्रेरित करता है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर शंखध्वनि करने से वातावरण शुद्ध होता है और व्यापारिक निर्णय लेने की क्षमता में स्पष्टता आती है। इस दिन परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर कम से कम आधा घंटा विष्णु कथा का पाठ करने से आपसी मतभेद दूर होते हैं। व्रत की पूर्णता के लिए केवल भूखा-प्यासा रहना ही काफी नहीं है, बल्कि इस दिन क्रोध, असत्य और किसी के अपमान की भावना का पूरी तरह त्याग कर मन को शुद्ध रखना अनिवार्य माना गया है।

  • पाकिस्तान में फ्रांसीसी महिला से दरिंदगी के दोषियों को होगी फांसी: उच्च न्यायालय ने खारिज की अपील, वैश्विक स्तर पर न्यायिक कड़ेपन का समर्थन

    पाकिस्तान में फ्रांसीसी महिला से दरिंदगी के दोषियों को होगी फांसी: उच्च न्यायालय ने खारिज की अपील, वैश्विक स्तर पर न्यायिक कड़ेपन का समर्थन

    नई दिल्ली। पाकिस्तान की न्यायपालिका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित और संवेदनशील ‘लाहौर मोटरवे सामूहिक दुष्कर्म मामले’ में एक अत्यंत कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। लाहौर उच्च न्यायालय (LHC) ने इस बर्बर कांड के दो मुख्य दोषियों, आबिद अली और शफकत अली की फांसी की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। दोनों दोषियों ने साल 2021 में आतंकवाद निरोधी अदालत (ATC) द्वारा दी गई मौत की सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने अभियोजन पक्ष के पुख्ता सबूतों के आलोक में सिरे से खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद अब दोनों अपराधियों की मौत की सजा का क्रियान्वयन तय माना जा रहा है, जिसने वैश्विक स्तर पर भी मानवाधिकारों और महिला सुरक्षा से जुड़े संगठनों का ध्यान आकर्षित किया है।

    यह अत्यंत क्रूर और खौफनाक घटना 9 सितंबर 2020 की है, जब पाकिस्तानी मूल की एक फ्रांसीसी महिला अपने तीन मासूम बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर कार से यात्रा कर रही थी। देर रात अचानक कार का ईंधन समाप्त हो जाने के कारण उनका परिवार सुनसान सड़क के किनारे असहाय स्थिति में फंस गया था। महिला अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार के दरवाजे बंद कर भीतर ही मदद की प्रतीक्षा कर रही थी। इसी दौरान हथियारों से लैस हमलावरों ने वाहन की खिड़की का शीशा तोड़कर महिला को जबरन बाहर घसीट लिया और उसके ही रोते-बिलखते बच्चों के सामने बंदूक की नोक पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया। अपराधी वहां से भागने से पहले पीड़ित परिवार से नकदी, आभूषण और बैंक कार्ड भी लूट ले गए थे।

    इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद पूरे पाकिस्तान में जनाक्रोश भड़क उठा था और कार्यस्थलों तथा सार्वजनिक मार्गों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानूनों की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन हुए थे। जनभावनाएं उस समय और अधिक उग्र हो गई थीं, जब तत्कालीन लाहौर पुलिस प्रमुख उमर शेख ने प्रशासनिक विफलता को छुपाने के लिए उल्टा पीड़िता के समय और मार्ग चयन पर ही अनुचित सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, बढ़ते दबाव के बीच पुलिस प्रशासन ने अपराधियों को पकड़ने के लिए एक व्यापक वैज्ञानिक अभियान चलाया। जांचकर्ताओं ने अत्याधुनिक मोबाइल फोन डेटा विश्लेषण और घटनास्थल से एकत्र किए गए डीएनए नमूनों की सहायता से आरोपियों को दबोचा था। बाद में न्यायिक कार्यवाही के दौरान पीड़िता ने भी दोनों की पहचान की थी और एक आरोपी ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।

    उच्च न्यायालय में अपील की सुनवाई के दौरान दोषियों के विधिक सलाहकारों ने दलील दी थी कि जांच एजेंसी की प्रक्रिया में कई तकनीकी कमियां हैं और साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हैं। इसके विपरीत, सरकारी वकीलों ने अदालत के समक्ष अकाट्य वैज्ञानिक (डीएनए) और तकनीकी (सेलुलर लोकेशन) प्रमाण प्रस्तुत किए, जो सीधे तौर पर अपराधियों की अपराध स्थल पर उपस्थिति और संलिप्तता को प्रमाणित करते थे। उच्च न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को वैध मानते हुए स्पष्ट किया कि निचली अदालत का फैसला पूर्णतः न्यायसंगत था। इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसिद्ध वैश्विक उद्यमी और टेस्ला प्रमुख एलन मस्क ने भी सोशल मीडिया पर ‘शाबाश पाकिस्तान’ लिखते हुए न्यायिक कड़ेपन की सराहना की और कहा कि पश्चिमी देशों को भी हिंसक अपराधों के खिलाफ ऐसे ही कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।

  • खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी

    खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी


    मध्य प्रदेश । इंदौर के विश्वप्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव किया जाने वाला है। आगामी सिंहस्थ और भविष्य में बढ़ने वाली भक्तों की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य द्वार को चौड़ा करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत वर्तमान प्रवेश द्वार को लगभग 10 फीट चौड़ा बनाया जाएगा, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगी।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार हाल ही में आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में समिति अध्यक्ष एवं इंदौर कलेक्टर Shivam Verma तथा नगर निगम आयुक्त Kshitij Singhal सहित अन्य अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया।

    निर्णय के बाद विकास कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। सबसे पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार पर लगी लगभग 150 किलो चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया है। यह चांदी वर्षों से मंदिर के प्रवेश द्वार की शोभा बढ़ा रही थी। अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसके पुनः उपयोग या स्थापना को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार, गर्भगृह का द्वार चौड़ा होने से श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के दर्शन करने में अधिक सुविधा मिलेगी। वर्तमान में विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है। सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण भी कराया जा रहा है। इसके लिए Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science (एसजीएसआईटीएस) की विशेषज्ञ टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया है। इंजीनियरों ने दीवारों, द्वार और आसपास की संरचना की तकनीकी जांच की है, ताकि विस्तार कार्य के दौरान मंदिर की मूल संरचना सुरक्षित रहे।

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्माण कार्य की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी। यदि रिपोर्ट अनुकूल रहती है तो आगामी दिनों में गर्भगृह के द्वार को चौड़ा करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

    खजराना गणेश मंदिर न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यह विकास कार्य मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर

    क्लीनचिट के बदले 3 लाख की डील! लोकायुक्त के भीतर भ्रष्टाचार का कथित नेटवर्क उजागर


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक कथित स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त के अधिकारियों और कर्मचारियों पर जांच प्रभावित करने, क्लीनचिट दिलाने और मामलों को कमजोर करने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए हैं। इस खुलासे ने प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों में से एक की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार, लोकायुक्त कार्यालय के एक टेक्नीशियन ने कथित तौर पर दावा किया कि डीएसपी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से जांच में राहत दिलाई जा सकती है। आरोप है कि एक मामले में क्लीनचिट दिलाने के लिए 3 लाख रुपये और अन्य स्तरों पर अलग-अलग रकम की मांग की गई। स्टिंग में शामिल बातचीत में एक महिला डीएसपी द्वारा कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि “चोरी सब करते हैं, जो पकड़ाया वही चोर होता है”, जिसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया।

    कथित बातचीत के दौरान अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया, नोटिस, वॉयस सैंपल और दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा की। आरोप है कि जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी और ट्रांसक्रिप्ट तक उपलब्ध कराने की पेशकश की गई। इतना ही नहीं, कथित तौर पर पैसे नहीं मिलने पर संबंधित पक्ष पर दबाव बनाने और जांच प्रभावित करने जैसी बातें भी सामने आईं।

    मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि लोकायुक्त द्वारा प्रस्तुत खात्मा रिपोर्टों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच विशेष अदालत ने लोकायुक्त की ओर से पेश की गई कई खात्मा रिपोर्टों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने जांच में कमियां, अधूरे साक्ष्य और आवश्यक गवाहों के बयान दर्ज न किए जाने जैसी खामियों की ओर संकेत किया।

    आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में ट्रैप कार्रवाई की संख्या बढ़ी है, लेकिन दोषसिद्धि के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इससे जांच की गुणवत्ता और अभियोजन की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्था पर ही ऐसे आरोप लगते हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है।

    हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या लोकायुक्त संगठन की ओर से अंतिम और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने और सक्षम एजेंसियों द्वारा तथ्यों की पुष्टि होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

  • बंगाल में नंबर गेम बनाम कानूनी लड़ाई: 58 विधायकों के दावे के बावजूद टीएमसी पर नियंत्रण आसान नहीं, स्पीकर की भूमिका होगी सबसे अहम

    बंगाल में नंबर गेम बनाम कानूनी लड़ाई: 58 विधायकों के दावे के बावजूद टीएमसी पर नियंत्रण आसान नहीं, स्पीकर की भूमिका होगी सबसे अहम

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर पनपे एक बड़े बागी गुट ने विधानसभा के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों के अपने साथ होने का दावा ठोक दिया है। इस संख्या बल ने देश को कुछ समय पहले हुए महाराष्ट्र के शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) विवाद की याद दिला दी है। हालांकि, देश के संवैधानिक कानून और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों के आलोक में देखा जाए, तो बागी गुट के लिए केवल 58 विधायकों के समर्थन के दम पर पूरी पार्टी पर नियंत्रण हासिल कर लेना इतना आसान नहीं होने वाला है। इस पूरे सियासी घमासान को सुलझाने और यह तय करने में कि वास्तविक तृणमूल कांग्रेस कौन सी है, पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और कानूनी कसौटियों से बंधी होगी।

    इस पूरे मामले के कानूनी पहलुओं को समझें तो साल 2003 में संसद द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण संशोधन के बाद संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) से पैराग्राफ 3 को पूरी तरह हटा दिया गया था। इस पैराग्राफ के हटने से पहले तक यदि किसी पार्टी के एक-तिहाई विधायक अलग होते थे, तो वे पार्टी में ‘विभाजन’ या स्प्लिट का तर्क देकर अयोग्यता की कार्रवाई से बच जाते थे। परंतु अब कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। वर्तमान नियमों के तहत यदि किसी राजनीतिक दल या उसके विधायी विंग में कोई फूट होती है और दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर करते हैं, तो कोई भी गुट स्वतः ही खुद को मूल या असली पार्टी होने का वैधानिक दावा नहीं कर सकता।

    सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना विवाद की लंबी सुनवाई के बाद अपने ऐतिहासिक फैसले में यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया था कि दलबदल के मामलों में केवल विधानसभा के भीतर का नंबर गेम असली पार्टी का निर्धारण नहीं कर सकता। देश की शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जब किसी दल में दो स्पष्ट फाड़ हो जाते हैं, तो विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं पर विचार करते समय स्पीकर को अंधमूल्यांकन या केवल सिरों की गिनती करने से बचना होगा। अध्यक्ष को यह जांचना अनिवार्य है कि विधानसभा के बाहर, यानी मूल राजनीतिक संगठन में पार्टी का नेतृत्व ढांचा कैसा है और आम कार्यकर्ताओं तथा संगठन के पदाधिकारियों का झुकाव किस तरफ है। कोर्ट ने साफ कहा था कि यह महज आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि संगठन की मूल आत्मा को पहचानना अनिवार्य है।

    अदालत के आदेशानुसार, असली पार्टी की पहचान करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को उस दल के मूल संविधान, नियमों और विनियमों को सर्वोपरि मानना होगा जो पार्टी के आंतरिक नेतृत्व के ढांचे को परिभाषित करते हैं। यदि विवाद के दौरान दोनों गुट अपने-अपने फायदे के हिसाब से पार्टी संविधान के अलग-अलग रूप या दस्तावेज पेश करते हैं, तो अध्यक्ष को केवल उसी दस्तावेज को वैध और प्रामाणिक मानना होगा जो राजनीतिक विवाद शुरू होने से ठीक पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के पास आधिकारिक तौर पर जमा था। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि कोई भी बागी गुट रातों-रात बहुमत के प्रभाव में आकर पार्टी के मूल नियमों और लोकतांत्रिक ढांचे में मनमाना संशोधन न कर सके।

    इस संवैधानिक स्थिति को देखते हुए साफ है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ खड़ा हुआ बागी गुट यदि सिर्फ 58 विधायकों के हस्ताक्षर दिखाकर खुद को असली टीएमसी घोषित करने की मांग करता है, तो विधानसभा अध्यक्ष उसे सीधे मान्यता नहीं दे सकते। पश्चिम बंगाल के स्पीकर को कानूनन बाध्य होकर विधायकों की संख्या के अतिरिक्त, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज टीएमसी के सांगठनिक ढांचे, पार्टी अध्यक्ष की शक्तियों और मुख्य संगठन की जमीनी स्थिति को भी अपनी जांच के दायरे में लाना होगा। ऐसे में जब तक संगठन पर पकड़ साबित नहीं होती, तब तक बागी विधायकों पर अयोग्यता की तलवार लटकती रहेगी और टीएमसी पर पूर्ण नियंत्रण का उनका सपना कानूनी दांवपेंच में उलझा रहेगा।