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  • गंभीर जलवायु संकट की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 20290 तक भीषण गर्मी और सूखे की चपेट में होंगे 260 करोड़ लोग

    गंभीर जलवायु संकट की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 20290 तक भीषण गर्मी और सूखे की चपेट में होंगे 260 करोड़ लोग


    नई दिल्ली।
    दुनिया (World) तेजी से एक ऐसे जलवायु संकट (Climate Crisis) की ओर बढ़ रही है, जहां भीषण गर्मी और सूखा (Extreme heat and Drought)मिलकर अभूतपूर्व खतरा पैदा कर रहे हैं। जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित एक नई स्टडी के अनुसार अगर मौजूदा जलवायु नीतियों में ठोस बदलाव नहीं हुआ, तो सदी के अंत तक वैश्विक आबादी का करीब 28 फीसदी यानी लगभग 260 करोड़ लोग इस दोहरे संकट की चपेट में होंगे।

    अध्ययन के अनुसार इसका असर आज की तुलना में करीब पांच गुना तक बढ़ सकता है। अध्ययन के अनुसार 2001 से 2020 के बीच हर साल औसतन चार बार ऐसे हालात बने, जब भीषण गर्मी और सूखा एक साथ पड़े। यह आंकड़ा औद्योगिक काल 1850 से 1900 की तुलना में दोगुना है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2090 तक ऐसी घटनाएं साल में करीब 10 बार तक हो सकती हैं और हर घटना करीब दो हफ्ते तक असर डाल सकती है।


    इसे कहते हैं कंपाउंड एक्सट्रीम

    जब कई चरम मौसम घटनाएं एक साथ मिलकर प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती हैं तब इसे वैज्ञानिक भाषा में कंपाउंड एक्सट्रीम कहा जाता है। इससे फसलें तेजी से सूखती हैं, जल स्रोत सिकुड़ते हैं और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ खाद्य कीमतों में उछाल और लू से मौतों का जोखिम भी बढ़ता है। यह स्थिति वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी सीधा दबाव डाल सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो खुले में काम करते हैं।


    सही नीतियों से कम हो सकता है खतरा

    अगर देश पेरिस समझौते के तहत अपने जलवायु वादों को प्रभावी ढंग से लागू करें तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि आने वाले दशकों में अरबों लोगों के जीवन को सुरक्षित या असुरक्षित बना सकते हैं।


    अध्ययन का आधार और वैज्ञानिक निष्कर्ष

    अध्ययन के अनुसार 8 जलवायु मॉडलों पर आधारित 152 सिमुलेशन का विश्लेषण किया गया, जिसमें जनसंख्या वृद्धि और ग्लोबल वार्मिंग के विभिन्न परिदृश्यों को शामिल किया गया। ये परिदृश्य इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज,संयुक्त राष्ट्र की जलवायु संबंधी वैज्ञानिक संस्था (आईपीसीसी) की छठी आकलन रिपोर्ट पर आधारित हैं। इसके लिए 1961 से 1990 की अवधि को आधार बनाया गया।

  • जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: सोते छात्र पर फ्लाईओवर से फेंका गया एसिड, 50% झुलसा युवक

    जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: सोते छात्र पर फ्लाईओवर से फेंका गया एसिड, 50% झुलसा युवक


    नई दिल्ली। जबलपुर के मदनमहल थाना क्षेत्र में हुई एक सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया है। यहां 22 वर्षीय कॉलेज छात्र शिवांश बैन पर सोते समय फ्लाईओवर से अज्ञात हमलावर द्वारा एसिड फेंक दिया गया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया।
    घर के अंदर हुआ हमला
    घटना रविवार तड़के करीब 3:30 बजे की है। छात्र अपने घर के कमरे में सो रहा था, तभी फ्लाईओवर ब्रिज से फेंका गया एसिड छत को फाड़ते हुए सीधे उसके शरीर पर गिर गया। इसके बाद कमरे में आग जैसी स्थिति बन गई और वह बुरी तरह झुलस गया।
    50% तक झुलसा छात्र
    डॉक्टरों के मुताबिक, शिवांश के दोनों हाथ, सीना और कमर का हिस्सा लगभग 50 प्रतिशत तक जल चुका है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है।
    परिवार ने बचाई जान
    चीख सुनकर परिजन तुरंत कमरे में पहुंचे और कंबल डालकर आग बुझाई। इसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
    पहले भी हुई थी संदिग्ध घटना
    परिवार का कहना है कि करीब 10 दिन पहले भी घर पर पथराव की घटना हुई थी, जिसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
     पुलिस जांच में जुटी
    मदनमहल थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और फ्लाईओवर से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
    जबलपुर की यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि शहर में बढ़ते अपराध को लेकर भी चिंता बढ़ाती है।
  • बरगी डैम क्रूज हादसा: को-पायलट का दावा- इंजन खराब था, आखिरी पल तक फंसा रहा; 13 की मौत से हड़कंप

    बरगी डैम क्रूज हादसा: को-पायलट का दावा- इंजन खराब था, आखिरी पल तक फंसा रहा; 13 की मौत से हड़कंप

    नई दिल्ली। बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। 30 अप्रैल को हुए इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 22 लोग किसी तरह बचा लिए गए थे।

    हादसे में को-पायलट रहे महेश पटेल ने घटना के बाद बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि क्रूज का एक इंजन पहले से स्लो था और अचानक आई तेज हवाओं ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

    कैसे हुआ हादसा?
    महेश पटेल के अनुसार, क्रूज शाम करीब 5:16 बजे यात्रा पर निकला था। लौटते समय तेज हवाएं चलने लगीं, जिनकी रफ्तार लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई। उन्होंने बताया कि स्थिति बिगड़ने पर स्टाफ को लाइफ जैकेट बांटने के निर्देश दिए गए थे। उनका दावा है कि इसी दौरान क्रूज का एक इंजन काम करना बंद कर गया, जिससे संतुलन बिगड़ गया और क्रूज पानी में डूबने लगा।

     “आखिरी दम तक अंदर फंसा रहा”
    महेश पटेल ने कहा कि वे क्रूज के पायलट केबिन में थे और आखिरी समय तक अंदर ही फंसे रहे। बाद में पानी के दबाव से बाहर निकल पाए। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी को छोड़कर नहीं भागे और हालात बेहद भयावह थे।
    अनुभव और जिम्मेदारी
    पटेल ने बताया कि वे पिछले 10 साल से क्रूज संचालन कर रहे हैं और 2012 में उन्होंने ट्रेनिंग ली थी। उनका कहना है कि यदि उन्हें मौसम संबंधी चेतावनी या संचालन रोकने के निर्देश मिले होते, तो क्रूज कभी नहीं चलाया जाता।
     मेंटेनेंस और टिकट विवाद
    उन्होंने यह भी कहा कि क्रूज का आखिरी बड़ा मेंटेनेंस करीब 3 साल पहले हुआ था। साथ ही टिकट व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं, जहां कुछ यात्रियों के बिना टिकट होने की बात सामने आई है।
     कार्रवाई और जांच
    हादसे के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया चल रही है। इस बीच महेश पटेल को नौकरी से बर्खास्त भी किया गया है।
    बरगी डैम हादसा एक गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी चूक की ओर इशारा करता है, जिसकी जांच अभी जारी है।
  • डिहाइड्रेशन में रामबाण उपाय ओआरएस, शरीर में तुरंत बहाल करता है पानी और नमक का संतुलन

    डिहाइड्रेशन में रामबाण उपाय ओआरएस, शरीर में तुरंत बहाल करता है पानी और नमक का संतुलन


    नई दिल्ली।

    गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन जाती है। खासकर जब किसी व्यक्ति को दस्त, उल्टी या ज्यादा पसीना आने जैसी स्थिति होती है, तब शरीर तेजी से जरूरी तरल पदार्थ और नमक खोने लगता है। इस स्थिति में सही समय पर ध्यान न दिया जाए तो कमजोरी, चक्कर आना और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

    ऐसे हालात में स्वास्थ्य विशेषज्ञ ओआरएस को सबसे सरल और प्रभावी उपाय मानते हैं। ओआरएस यानी ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटैशियम की कमी को तेजी से पूरा करने में मदद करता है। यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करने का काम करता है और मरीज की हालत को बिगड़ने से रोकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब दस्त या उल्टी शुरू होती है, तो केवल पानी पीना पर्याप्त नहीं होता क्योंकि उससे सिर्फ प्यास बुझती है, लेकिन शरीर में खोए हुए नमक और मिनरल्स की भरपाई नहीं हो पाती। ओआरएस इसी कमी को पूरा करता है और शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।

    ओआरएस का इस्तेमाल बहुत आसान माना जाता है। इसे एक लीटर साफ पानी में घोलकर छोटे-छोटे घूंट में पिया जाता है, जिससे शरीर धीरे-धीरे हाइड्रेट होता रहता है। यह बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है, खासकर तब जब शरीर कमजोर हो रहा हो।

    डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है क्योंकि पसीने के जरिए भी शरीर से काफी मात्रा में पानी और नमक बाहर निकल जाता है। ऐसे में ओआरएस शरीर को तुरंत राहत देने में मदद करता है और अस्पताल जाने की जरूरत को भी कई मामलों में कम कर सकता है।

     ओआरएस को एक ऐसा सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है जो डिहाइड्रेशन जैसी समस्या से तेजी से राहत देने में मदद करता है और शरीर के जरूरी संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

  • रतलाम से किडनैप कर उज्जैन में युवक की हत्या, शराब पार्टी के बाद गला घोंटा; आरोपियों के घरों में आगजनी से तनाव

    रतलाम से किडनैप कर उज्जैन में युवक की हत्या, शराब पार्टी के बाद गला घोंटा; आरोपियों के घरों में आगजनी से तनाव


    नई दिल्ली। रतलाम जिले में हुए एक सनसनीखेज अपहरण और हत्या के मामले ने पूरे क्षेत्र में तनाव फैला दिया है। 22 वर्षीय मनीष माली को घर से किडनैप कर लगभग 90 किलोमीटर दूर उज्जैन ले जाया गया, जहां उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई।

     शराब पार्टी के बाद हत्या

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले शराब पी और फिर पुरानी रंजिश के चलते विवाद हुआ। इसी दौरान मनीष की गला दबाकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपियों ने शव को एक कमरे में लॉक कर दिया और मौके से फरार हो गए।

    पुरानी रंजिश बनी वजह

    जानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पुराना विवाद इस हत्या की जड़ में बताया जा रहा है। एक लड़की को लेकर हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ था, जो बाद में जानलेवा वारदात में बदल गया।

    पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

    पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी भी शामिल हैं। मामले में अपहरण के बाद हत्या की धाराएं जोड़ी गई हैं और जांच जारी है।

     गुस्साई भीड़ का प्रदर्शन

    हत्या की खबर के बाद परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने शव रखकर चक्काजाम किया और आरोपियों के घरों में तोड़फोड़ की। कुछ जगहों पर आगजनी की भी घटना हुई, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

    स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और कई स्थानों पर अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई।

     स्थिति पर नजर

    रतलाम और उज्जैन दोनों क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात है और हालात पर नजर रखी जा रही है ताकि आगे कोई अप्रिय घटना न हो।

    यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि पुरानी रंजिश और व्यक्तिगत विवाद कैसे गंभीर अपराध में बदल सकते हैं, जिससे पूरे इलाके की शांति प्रभावित हो जाती है।

  • उज्जैन शिक्षा विभाग में ‘लड्डू-मिठाई’ कोड से उगाही का खुलासा, WhatsApp चैटिंग वायरल

    उज्जैन शिक्षा विभाग में ‘लड्डू-मिठाई’ कोड से उगाही का खुलासा, WhatsApp चैटिंग वायरल

    उज्जैन के जिला शिक्षा केंद्र में इंजीनियरों से कथित उगाही और वित्तीय अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां कुछ इंजीनियरों के बीच WhatsApp ग्रुप में “लड्डू” और “मिठाई” जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल कर पैसों की मांग और लेन-देन की बातचीत की जा रही थी।

    जानकारी के मुताबिक, जिला शिक्षा केंद्र उज्जैन के अंतर्गत कार्यरत इंजीनियरों के ग्रुप में कई ऐसे मैसेज सामने आए हैं, जिनमें मान्यता की फाइलों को आगे बढ़ाने, डीपीसी निर्देशों और अन्य कार्यों के नाम पर रकम की मांग की बात की गई है।

    WhatsApp चैटिंग में क्या सामने आया?

    वायरल चैट्स में कथित तौर पर-

    • “भोपाल मिठाई भेजने” के नाम पर पैसे मांगने की बात
    • “लड्डू के लिए शेयर कलेक्ट” जैसे कोड वर्ड का उपयोग
    • UPI स्कैनर भेजकर ऑनलाइन भुगतान की मांग
    • एक दिन में 200 से ज्यादा फाइलों के निपटारे का दावा

    इन मैसेजों ने विभागीय कामकाज और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इंजीनियरों का पक्ष

    कुछ इंजीनियरों ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि “लड्डू” या “मिठाई” के नाम पर किसी तरह की वसूली नहीं की गई है और न ही ऐसा कोई निर्देश दिया गया था। वहीं, मामले में शामिल नामों पर स्पष्टीकरण देने की बात भी कही गई है।

    प्रशासन की प्रतिक्रिया

    जिला परियोजना समन्वयक (DPC) ने मामले पर हैरानी जताते हुए कहा है कि अगर किसी ने उनके नाम का दुरुपयोग कर पैसे मांगे हैं, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    जांच के संकेत

    मामले के सामने आने के बाद अब विभागीय स्तर पर जांच की संभावना बढ़ गई है। चैटिंग और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूतों की जांच की जा सकती है।

    उज्जैन में सामने आया यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें इस पर हैं कि जांच में क्या सच सामने आता है और क्या कार्रवाई होती है।

  • मोबाइल पर डांट से नाराज नाबालिग 18 दिन बाद मिली, पुलिस ने सुरक्षित परिजनों को सौंपा

    मोबाइल पर डांट से नाराज नाबालिग 18 दिन बाद मिली, पुलिस ने सुरक्षित परिजनों को सौंपा


    नई दिल्ली। उज्जैन जिले के बड़नगर थाना क्षेत्र से लापता हुई 16 वर्षीय नाबालिग को पुलिस ने 18 दिन बाद बदनावर क्षेत्र से सुरक्षित बरामद कर लिया है। परिजनों ने 14 अप्रैल 2026 को उसके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित की और तकनीकी जांच शुरू की। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज की मदद से जांच आगे बढ़ाई गई। इसके साथ ही मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया ताकि जल्द से जल्द नाबालिग का पता लगाया जा सके।

    लगातार तलाश के बाद 2 मई को पुलिस को सूचना मिली कि नाबालिग चंपेलिया गांव में मौजूद है। सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और उसे सुरक्षित बरामद कर लिया।

     पूछताछ में सामने आया कारण

    पुलिस पूछताछ में नाबालिग ने बताया कि मोबाइल चलाने को लेकर मां की डांट और मोबाइल छीन लिए जाने से वह नाराज हो गई थी। इसी कारण वह बिना बताए घर से निकल गई और बस से सीधे बदनावर पहुंच गई, जहां वह एक परिचित के घर रुकी थी।

     पुलिस की पुष्टि

    जांच में यह साफ हुआ कि इस दौरान उसके साथ किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने उसे सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया।

    यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि बच्चों के साथ संवाद और समझदारी से व्यवहार करना कितना जरूरी है, ताकि छोटी-छोटी बातों से ऐसे गंभीर मामले न बनें।

  • उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती: दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

    उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती: दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब


    नई दिल्ली। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान दिव्य और भव्य दृश्य देखने को मिला। भगवान महाकाल का विधि-विधान से पंचामृत पूजन कर आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसमें भांग, चंदन, बिल्वपत्र और रजत आभूषणों से बाबा को राजा स्वरूप में सजाया गया।

    भोर की पहली आरती के साथ ही मंदिर परिसर “हरिओम” के जयघोष और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया, जिसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद पारंपरिक रूप से भस्म अर्पित की गई, जिसे महाकाल पूजा का सबसे विशेष और पवित्र क्षण माना जाता है।

    भस्म अर्पण के दौरान महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से विशेष भस्म चढ़ाई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी क्षण भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। 

    नई दिल्ली। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान दिव्य और भव्य दृश्य देखने को मिला। भगवान महाकाल का विधि-विधान से पंचामृत पूजन कर आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसमें भांग, चंदन, बिल्वपत्र और रजत आभूषणों से बाबा को राजा स्वरूप में सजाया गया।

    भोर की पहली आरती के साथ ही मंदिर परिसर “हरिओम” के जयघोष और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया, जिसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद पारंपरिक रूप से भस्म अर्पित की गई, जिसे महाकाल पूजा का सबसे विशेष और पवित्र क्षण माना जाता है।
    भस्म अर्पण के दौरान महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से विशेष भस्म चढ़ाई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी क्षण भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला, रजत मुण्डमाल और सुगंधित पुष्पों से बाबा का दिव्य श्रृंगार किया गया।
    मोगरा और गुलाब के फूलों से सजे महाकाल का स्वरूप अत्यंत मनमोहक दिखाई दिया। आरती के दौरान भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने बड़े श्रद्धा भाव से देखा।
    इस पावन अवसर पर देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भस्म आरती के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
    भगवान महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और ऊर्जा का अद्वितीय अनुभव है, जो हर भक्त के मन को भक्ति से भर देता है।

  • जनगणना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: 289 कर्मचारियों को नोटिस, FIR तक की चेतावनी

    जनगणना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: 289 कर्मचारियों को नोटिस, FIR तक की चेतावनी


    नई दिल्ली।  इंदौर में जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। निगम कमिश्नर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी क्षितिज सिंघल ने कुल 289 अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
    यह कार्रवाई उन कर्मचारियों के खिलाफ की गई है जो 1 मई से लगातार सूचना दिए जाने के बावजूद ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए। प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कहा है कि यह मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।
     सख्त कार्रवाई की चेतावनी
    नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच प्रस्तावित की गई है। साथ ही जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
    प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी तत्काल ड्यूटी पर लौटें और अपना जवाब 4 मई शाम 5:30 बजे तक प्रस्तुत करें। तय समय सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
    प्रशासन का सख्त संदेश
    अधिकारियों ने साफ किया है कि जनगणना कार्य जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह देश की नीतियों और योजनाओं के लिए बेहद जरूरी डेटा संग्रह प्रक्रिया है।

    इंदौर प्रशासन की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी कार्यों में अनुशासन सर्वोपरि है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कर्मचारी समय पर जवाब देते हैं या उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है।

  • भारत के ‘रियल पैडमैन’ नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित, अक्षय कुमार निभा चुके रोल

    भारत के ‘रियल पैडमैन’ नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित, अक्षय कुमार निभा चुके रोल

    नई दिल्ली। महिलाओं की स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले भारत के प्रसिद्ध सोशल एंटरप्रेन्योर अरुणाचलम मुरुगनाथम को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि मिली है। ‘पैडमैन’ के नाम से पहचान बनाने वाले मुरुगनाथम ने रविवार को बताया कि उन्हें वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।

    तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचने का उनका सफर देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उनके जीवन संघर्ष और सामाजिक योगदान को बॉलीवुड में भी सराहा गया, जहां पैडमैन फिल्म के जरिए उनकी कहानी को बड़े पर्दे पर दिखाया गया। इस फिल्म में अक्षय कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

    नामांकन पर क्या बोले मुरुगनाथम?
    अपनी इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुणाचलम मुरुगनाथम ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि शुरुआत में उन्हें इस खबर पर विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि नोबेल पुरस्कार के लिए कोई व्यक्ति खुद या उसके करीबी नामांकन नहीं भेज सकते, बल्कि यह प्रक्रिया किसी तीसरे पक्ष द्वारा की जाती है। उनके अनुसार, पुडुचेरी स्थित अरविंद आई हॉस्पिटल के एक डीन और वहां कार्यरत अमेरिकी टीमों ने उनका नाम प्रस्तावित किया, जिसे 24 घंटे के भीतर स्वीकार कर लिया गया।

    नोबेल शांति पुरस्कार 2026 की स्थिति
    आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 के लिए कुल 287 उम्मीदवारों को नामांकित किया गया है। इनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल हैं। इस सूची में मुरुगनाथम का नाम शामिल होना उनके काम की वैश्विक अहमियत को दर्शाता है। हालांकि, अंतिम चयन प्रक्रिया काफी जटिल और बहु-स्तरीय होती है।

    कैसे होता है चयन?
    नोबेल समिति नामांकन के बाद विशेषज्ञों से विस्तृत मूल्यांकन कराती है। इसमें संबंधित क्षेत्र के विद्वानों, शोधकर्ताओं और अकादमिक विशेषज्ञों की राय ली जाती है। साथ ही उम्मीदवार के कार्यों से जुड़े रिसर्च पेपर और दस्तावेजों की गहन समीक्षा की जाती है, ताकि योग्य व्यक्ति या संस्था को ही यह सम्मान मिल सके।

    कौन हैं ‘रियल पैडमैन’?
    अरुणाचलम मुरुगनाथम ने ग्रामीण भारत में महिलाओं को सस्ते और सुरक्षित सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने एक कम लागत वाली मशीन विकसित की, जिससे स्थानीय स्तर पर पैड तैयार किए जा सकते हैं। इस पहल ने हजारों महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार किया।

    सिनेमा से समाज तक असर
    उनकी प्रेरणादायक कहानी को निर्देशक आर. बाल्की ने फिल्म पैडमैन के जरिए दर्शाया। 2018 में रिलीज हुई इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ राधिका आप्टे और सोनम कपूर भी नजर आई थीं। फिल्म ने समाज में मासिक धर्म और स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात करने का माहौल बनाया और राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हासिल की। आज वही ‘रियल पैडमैन’ वैश्विक मंच पर भारत का नाम रोशन करते हुए नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में शामिल हो चुके हैं।