अगर आप आर्थिक तंगी या रुकावटों से परेशान हैं, तो रविवार के दिन एक खास उपाय किया जा सकता है। इस दिन तीन झाड़ू खरीदकर घर में रखें और अगले दिन यानी सोमवार को इन्हें किसी मंदिर में दान कर दें। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
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रविवार के वास्तु उपाय: आज करें ये आसान उपाय, सूर्य देव की कृपा से मिलेगी सफलता
नई दिल्ली। रविवार का दिन सूर्य भगवान को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, उन्हें जीवन में सफलता, आत्मविश्वास और सम्मान मिलता है। वहीं सूर्य कमजोर होने पर कार्यों में बाधाएं, आत्मविश्वास की कमी और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में आज के दिन कुछ खास वास्तु उपाय अपनाकर सूर्य देव की कृपा पाई जा सकती है।सबसे पहला और महत्वपूर्ण उपाय है सूर्य देव की पूजा। सुबह स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य को जल अर्पित करें। इसके साथ ही घर में सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करना भी शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि यह चित्र पूर्व दिशा में ही लगाया जाए और वह खंडित या टूटा हुआ न हो, वरना इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अगर आप आर्थिक तंगी या रुकावटों से परेशान हैं, तो रविवार के दिन एक खास उपाय किया जा सकता है। इस दिन तीन झाड़ू खरीदकर घर में रखें और अगले दिन यानी सोमवार को इन्हें किसी मंदिर में दान कर दें। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।वास्तु के अनुसार सूर्य देव का संबंध लाल और नारंगी रंग से होता है। इसलिए घर की सजावट में इन रंगों का उपयोग करना शुभ माना जाता है। आप चाहें तो घर में लाल रंग के फूल या पौधे भी लगा सकते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वातावरण ऊर्जावान बना रहता है।इसके अलावा, घर को साफ-सुथरा रखना और पूर्व दिशा को अव्यवस्थित न होने देना भी बेहद जरूरी है। यह दिशा सूर्य की मानी जाती है, इसलिए यहां स्वच्छता और रोशनी बनाए रखना लाभकारी होता है।इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाकर न सिर्फ आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, बल्कि आत्मविश्वास और सफलता की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं। नियमित रूप से इन उपायों का पालन करने से जीवन में स्थिरता और प्रगति दोनों संभव हो सकती हैं। -

Census 2027: अब घर बैठे खुद भरें जनगणना फॉर्म, जानिए पूरा ऑनलाइन प्रोसेस
नई दिल्ली। देश में पहली बार Census 2027 को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। इस बार नागरिकों को Self Enumeration यानी खुद से ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा दी गई है। इससे अब जनगणना अधिकारी के घर आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा आप खुद ही घर बैठे अपनी और परिवार की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।यह प्रक्रिया आसान, सुरक्षित और समय बचाने वाली है, जिसे पूरा करने में करीब 15 से 20 मिनट का समय लगता है। सरकार ने इसके लिए एक आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया है, जहां से आप पूरी प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। बाद में अधिकारी इस जानकारी का सत्यापन करेंगे।
ऐसे करें Census 2027 का ऑनलाइन फॉर्म भरना
सबसे पहले आधिकारिक जनगणना पोर्टल पर जाएं। वहां अपना राज्य चुनें और स्क्रीन पर दिए गए कैप्चा को भरकर आगे बढ़ें। इसके बाद घर के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें। मोबाइल नंबर पर आए OTP से वेरिफिकेशन पूरा करना होगा।OTP वेरिफिकेशन के बाद आपको अपनी पसंद की भाषा चुननी होगी। फिर एड्रेस डिटेल भरनी होगी, जिसमें जिला, पिन कोड और लोकेशन जैसी जानकारी शामिल होती है।
अगले चरण में आपको अपने घर से जुड़ी जानकारी देनी होगी जैसे मकान पक्का है या कच्चा, दीवार और छत किस प्रकार की है आदि। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों की डिटेल भरनी होगी, जिसमें उम्र, लिंग, शिक्षा और अन्य आवश्यक जानकारी शामिल होती है।
इसके अलावा आपको घर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी देनी होगी, जैसे पानी, बिजली, शौचालय, इंटरनेट, टीवी, वाहन आदि। यह डेटा सरकार को सामाजिक और आर्थिक योजनाएं बनाने में मदद करेगा।
सबमिट करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
फॉर्म पूरा भरने के बाद सभी जानकारी को एक बार ध्यान से जरूर जांच लें। कोई भी गलती आगे परेशानी का कारण बन सकती है। जब आप पूरी तरह संतुष्ट हों, तब ही फाइनल सबमिट करें।सबमिट करने के बाद आपको एक रेफरेंस आईडी मिलेगी, जिसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। इसी आईडी के जरिए आगे आपकी जानकारी को ट्रैक और वेरिफाई किया जाएगा।
क्यों खास है यह डिजिटल जनगणना?
इस नई डिजिटल प्रक्रिया का उद्देश्य डेटा को ज्यादा सटीक, तेज और पारदर्शी तरीके से इकट्ठा करना है। इससे सरकार को योजनाएं बनाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। साथ ही, यह नागरिकों के लिए भी सुविधाजनक है क्योंकि वे अपनी जानकारी खुद और सही तरीके से दर्ज कर सकते हैं। -

इंदौर में IPL सट्टा गिरोह का भंडाफोड़: घर से वेबसाइट के जरिए चला रहा था खेल, सूदखोरी का भी खुलासा
नई दिल्ली। इंदौर में आईपीएल मैचों के दौरान अवैध सट्टेबाजी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां क्राइम ब्रांच ने एक युवक को उसके घर से गिरफ्तार किया। आरोपी अपने घर में बैठकर टीवी पर मैच देखते हुए मोबाइल फोन और वेबसाइट के जरिए सट्टा संचालित कर रहा था। पुलिस ने मौके से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित नकदी बरामद की है और अब पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।मामले का खुलासा करते हुए राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी, जिसके बाद धर्मराज कॉलोनी स्थित घर पर दबिश दी गई। यहां से शुभम उर्फ मोनू यादव को पकड़ा गया, जो उस समय लाइव आईपीएल मैच पर सट्टा लगवा रहा था।पुलिस के अनुसार, आरोपी दो मोबाइल फोन के जरिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सट्टेबाजी करवा रहा था। मौके से दो मोबाइल, एक एलईडी टीवी और करीब एक लाख रुपए का सामान जब्त किया गया है। मोबाइल फोन की जांच में लाखों रुपए के लेन-देन के सबूत भी मिले हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सट्टे का यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है।पूछताछ में सामने आया कि आरोपी “Allpanelexch9.co.website” नाम की साइट के जरिए लोगों को सट्टा खेलने के लिए आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराता था। इसके बदले वह तय रकम वसूलता था। इतना ही नहीं, वह लोगों को सट्टा खेलने के लिए पैसे उधार भी देता था और उस पर ब्याज वसूलता था, जिससे सूदखोरी का एंगल भी इस मामले में जुड़ गया है।जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी शहर के कई लोगों को गेमिंग के लिए कॉइन्स उपलब्ध कराता था, जिससे वे ऑनलाइन सट्टा खेल सकें। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, ट्रांजेक्शन और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों के दौरान इस तरह की अवैध गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिन पर नजर रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। क्राइम ब्रांच अब इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। -

इंदौर नवकारसी विवाद गरमाया: सोशल मीडिया पर ‘कोल्ड वॉर’, संतों की एंट्री के बाद भी नहीं थमा टकराव
नई दिल्ली। इंदौर में महावीर जन्म कल्याणक के अवसर पर आयोजित नवकारसी कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद अब गहराता जा रहा है। लगभग एक महीने बाद भी यह मामला शांत होने के बजाय और उलझता नजर आ रहा है। श्वेतांबर जैन समाज के विभिन्न गुटों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं और यह विवाद अब सोशल मीडिया तक फैल गया है, जहां आरोप-प्रत्यारोप और प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।विवाद को और हवा तब मिली जब महासंघ की ओर से 29 दिन बाद जारी स्पष्टीकरण को समाज के कई वर्गों ने असंतोषजनक बताया। लोगों का मानना है कि इस बयान में संतुलन और संवेदनशीलता की कमी रही, जिससे स्थिति साफ होने के बजाय और अधिक सवाल खड़े हो गए। इस बीच, मानहानि नोटिस दिए जाने से मामला और अधिक गंभीर हो गया है।विवाद को शांत करने के प्रयास में जैन संत आचार्य मुक्तिसागर सूरि ने हस्तक्षेप किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से समाज के दोनों पक्षों से संयम और संवाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांत—क्षमा, सहिष्णुता और अहिंसा ही इस स्थिति से बाहर निकलने का मार्ग दिखा सकते हैं। उनका सवाल था कि “आखिर कब तक हम इस तरह आपस में उलझते रहेंगे?”आचार्य ने अपने संदेश में यह भी कहा कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान टकराव नहीं बल्कि संवाद और समझ से होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे शरीर के अंग आपस में टकराने पर भी हम उन्हें दंडित नहीं करते, उसी तरह समाज में भी सहनशीलता जरूरी है। उन्होंने सभी जैन संप्रदायों से भविष्य में एकजुट होकर आयोजन करने का सुझाव दिया, ताकि समाज में एकता का संदेश जाए।
दरअसल, यह पूरा विवाद नवकारसी कार्यक्रम के दौरान ट्रैक्टर खड़े होने से शुरू हुआ था, जिसे बाद में इवेंट कंपनी की गलती बताया गया। कंपनी संचालक ने लिखित में माफी भी मांग ली थी, लेकिन इसके बावजूद मामला शांत नहीं हुआ। उल्टा, बाद में जारी पत्र और आरोपों को लेकर नई बहस छिड़ गई।इस बीच, श्री नाकोड़ा जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अक्षय जैन द्वारा महासंघ को 50 लाख रुपए का मानहानि नोटिस भेजे जाने से विवाद और बढ़ गया है। समाज के कई वरिष्ठों का मानना है कि यह विवाद कुछ लोगों के अहंकार और नेतृत्व में समन्वय की कमी के कारण इतना लंबा खिंच गया।समाज के भीतर गुटबाजी और आंतरिक राजनीति की चर्चा भी अब खुलकर होने लगी है। कई लोग इसे संगठनात्मक वर्चस्व की लड़ाई बता रहे हैं, जिससे सामाजिक समरसता प्रभावित हो रही है।वरिष्ठ नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने भी दोनों पक्षों से अपील की है कि वे अहंकार छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाएं। उनका कहना है कि यह विवाद केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब पूरे जैन समाज की एकता और सौहार्द पर असर डाल रहा है।
फिलहाल, संतों की अपील के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा, लेकिन उम्मीद अब भी बनी हुई है कि संवाद और समझ के जरिए समाधान निकलेगा और समाज एक बार फिर एकजुट होकर आगे बढ़ेगा। -

आधे मध्यप्रदेश में मौसम का कहर: बारिश के साथ 50 Km/घंटा तक आंधी, 27 जिलों में अलर्ट
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रदेश के आधे हिस्से में आज तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। खासतौर पर ग्वालियर और जबलपुर समेत 27 जिलों में मौसम को लेकर विशेष चेतावनी जारी की गई है।
रविवार को कई इलाकों में बादल छाने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश और ओले गिरने की भी संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय सिस्टम के सक्रिय होने के कारण हो रहा है, जिसका असर पूरे मध्यप्रदेश के बड़े हिस्से में देखने को मिलेगा।
तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना है। ग्रामीण इलाकों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है, वहीं शहरी क्षेत्रों में भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से खुले स्थानों, कमजोर निर्माण और बिजली के खंभों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।
हालांकि, इस मौसम बदलाव से भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिलेगी। पिछले कई दिनों से तापमान 40 डिग्री के पार बना हुआ था, जिससे लोग परेशान थे। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे मौसम सुहावना हो सकता है।
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों और कृषि उपकरणों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज जहां एक ओर गर्मी से राहत देगा, वहीं दूसरी ओर तेज आंधी और ओलावृष्टि के कारण सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
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NEET UG 2026: इंदौर में 23 हजार स्टूडेंट्स की परीक्षा आज, 57 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा और खास इंतज़ाम
नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश की सबसे बड़ी परीक्षा NEET (UG) 2026 आज रविवार, 3 मई को इंदौर में आयोजित की जा रही है। इस बार जिले में कुल 57 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 23,160 परीक्षार्थी अपने भविष्य की दिशा तय करने के लिए परीक्षा देंगे। पिछले साल आई व्यवस्थागत चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस बार जिला प्रशासन ने व्यापक और सख्त तैयारियां की हैं, ताकि परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए आईसीटीएसएल की विशेष बस सेवा सुबह 9 बजे से शुरू की गई है, जो शहर के प्रमुख बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से संचालित हो रही हैं। चार प्रमुख रूट तय किए गए हैं सांवेर, आईआईटी सिमरोल, आईआईएम और महू ताकि छात्रों को समय पर उनके केंद्रों तक पहुंचाया जा सके। परीक्षा समाप्ति के बाद शाम 5 बजे से वापसी के लिए भी बसों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है और संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। हर केंद्र पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। साथ ही, परीक्षा केंद्रों के आसपास अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। सभी केंद्रों पर मेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है, जबकि पांच प्रमुख केंद्रों पर एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहेगी। दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जिससे उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।बिजली आपूर्ति को लेकर भी इस बार खास तैयारी की गई है। यदि किसी केंद्र पर बिजली बाधित होती है, तो तत्काल जनरेटर बैकअप उपलब्ध रहेगा। अभिभावकों के लिए केंद्रों के बाहर टेंट और पेयजल की व्यवस्था भी की गई है, ताकि उन्हें गर्मी में राहत मिल सके।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू बनी रहे, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाए और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों की सतत मॉनिटरिंग की जाए। इसके लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट और उड़नदस्ते लगातार मैदान में रहेंगे और समय-समय पर निरीक्षण करेंगे।गौरतलब है कि पिछले वर्ष खराब मौसम, तेज आंधी और बिजली कटौती के कारण कई परीक्षार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इस बार उन्हीं अनुभवों से सीख लेते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत और सख्त बनाया है।जिला प्रशासन ने सभी परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे समय पर अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचें और किसी भी भ्रामक जानकारी या अफवाहों पर ध्यान न दें। यह परीक्षा न केवल उनके करियर, बल्कि उनके सपनों की दिशा तय करने वाली है और इस बार इंदौर पूरी तैयारी के साथ इसके लिए तैयार है। -

प्रेग्नेंसी में योगासन के फायदे: मां और बच्चे दोनों की सेहत को मिलता है मजबूत सपोर्ट
नई दिल्ली। गर्भावस्था में योग से शरीर और मन दोनों को फायदा मिलता है। आयुष मंत्रालय ने बताया कि योग करने से प्रसव आसान होता है, तनाव कम होता है और मां-बच्चे की सेहत बेहतर रहती है।गर्भावस्था हर महिला के जीवन का एक बेहद खास और संवेदनशील समय होता है, जहां शरीर में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं। इस दौरान सही देखभाल और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयुष मंत्रालय लगातार गर्भवती महिलाओं को योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देता रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित योग करने से न केवल शरीर मजबूत और लचीला बनता है, बल्कि मानसिक शांति भी बनी रहती है। यह समय अक्सर महिलाओं के लिए तनाव, चिंता और थकान से भरा हो सकता है, लेकिन योग इन सभी समस्याओं को काफी हद तक कम करने में मदद करता है।
गर्भावस्था में महिलाओं को अक्सर पीठ दर्द, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में कठिनाई और नींद की समस्या जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हल्के और सुरक्षित योगासन इन समस्याओं से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। योग शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे ऊर्जा बनी रहती है और थकान कम महसूस होती है।
आयुष मंत्रालय के विशेषज्ञों के अनुसार, योग न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है बल्कि यह मानसिक संतुलन भी बनाए रखता है। गर्भवती महिला जब शांत और तनावमुक्त रहती है, तो उसका सीधा सकारात्मक असर बच्चे के विकास पर भी पड़ता है। यही कारण है कि योग को मां और बच्चे दोनों के लिए लाभकारी माना गया है।
योग का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह प्रसव प्रक्रिया को आसान बनाता है। नियमित अभ्यास से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और लचीलापन बढ़ता है, जिससे डिलीवरी के समय शरीर बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देता है। साथ ही प्रसव के बाद रिकवरी भी तेज होती है।
आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि गर्भावस्था के हर चरण में योग अलग-अलग तरीके से लाभ देता है। शुरुआती महीनों में हल्के प्राणायाम और स्ट्रेचिंग, जबकि बाद के महीनों में डॉक्टर की सलाह से ही सरल और सुरक्षित योगासन करने चाहिए।
मंत्रालय ने मदर्स डे (10 मई) के मौके पर खास अपील की है कि हर गर्भवती महिला योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए। उनका कहना है कि “एक स्वस्थ मां ही एक स्वस्थ बच्चे की पहली नींव होती है।”
विशेषज्ञों की राय है कि योग को बिना विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर महिला की स्थिति अलग होती है। सही मार्गदर्शन के साथ किया गया योग न केवल सुरक्षित होता है, बल्कि यह मां और बच्चे दोनों के लिए एक मजबूत और स्वस्थ भविष्य की नींव भी रखता है।
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इंदौर में ज़हरीला पानी: भागीरथपुरा कांड के बाद भी नहीं थमा संकट, देवगुराड़िया में हालात भयावह
नई दिल्ली। इंदौर में भागीरथपुरा जलकांड की भयावह यादें अभी ताज़ा ही हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में दूषित पानी का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा। अब देवगुराड़िया पंचायत क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं, जहां भीषण गर्मी के बीच लोगों को न सिर्फ पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि जो पानी उपलब्ध है वह भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र के ट्रेंचिंग ग्राउंड और सीएनजी प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी जमीन में रिसकर भूजल को प्रदूषित कर रहा है। नतीजा यह है कि बोरिंग से निकलने वाला पानी बदबूदार, पीले रंग का और डीजल जैसी परत वाला हो गया है। यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही दैनिक उपयोग के लिए सुरक्षित। कई घरों में तो इस पानी से बर्तन तक पीले पड़ रहे हैं और उनमें मोटी परत जम रही है।स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग अब त्वचा रोगों और बाल झड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि उनके बाल तेजी से गिर रहे हैं, जबकि पुरुषों में भी यही समस्या देखी जा रही है। बच्चों में खुजली, चकत्ते और एलर्जी जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पानी में टीडीएस (घुले ठोस पदार्थ) की मात्रा अत्यधिक होने के कारण यह समस्याएं हो रही हैं।स्थानीय निवासी अनिल चौधरी बताते हैं कि घरों में लगे आरओ फिल्टर भी दो-तीन महीने में खराब हो जा रहे हैं। वहीं, कई लोगों का कहना है कि पानी गर्म करने पर बर्तनों में मोटी परत जम जाती है और दाल तक ठीक से नहीं पकती। कुछ मामलों में तो बोरिंग के पानी में ड्रेनेज का पानी मिलने की शिकायत भी सामने आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।पानी की इस गंभीर समस्या के बीच टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। लेकिन टैंकर भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो रहे, जिससे लोगों को 600 से 700 रुपये तक खर्च कर पानी मंगवाना पड़ रहा है। यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा जलाने और गंदे अपशिष्ट के गलत निपटान से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मवेशियों की मौत और पर्यावरण प्रदूषण भी चिंता का विषय बन चुके हैं। कई इलाकों देवगुराड़िया, पत्थर मुंडला, मानसरोवर और श्रीजी वैली में पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।हालात से नाराज़ लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे जन आंदोलन करेंगे और सड़क जाम जैसे कदम उठाने पर मजबूर होंगे। वहीं, पंचायत और प्रशासन के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी असमंजस बना हुआ है।विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ड वाटर में मौजूद खनिज त्वचा और बालों के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। इससे त्वचा में जलन, रूखापन, एलर्जी और बालों की कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। फिलहाल लोगों को अस्थायी राहत के तौर पर पानी को शुद्ध करने या फिटकरी के उपयोग की सलाह दी जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान अभी भी दूर नजर आ रहा है। -

प्रोटीन-फाइबर से भरपूर काला नमक चावल: वजन और पाचन दोनों के लिए फायदेमंद
नई दिल्ली। आज की बदलती जीवनशैली में लोग सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि सेहत को बेहतर बनाने के लिए भी अपने खाने के विकल्पों पर ध्यान देने लगे हैं। इसी बदलाव के बीच एक पारंपरिक लेकिन बेहद पौष्टिक अनाज फिर से चर्चा में है—काला नमक चावल।इसे कई जगहों पर “बुद्धा राइस” या “महात्मा बुद्ध का महाप्रसाद” भी कहा जाता है। इसकी खास बात सिर्फ इसका स्वाद या सुगंध नहीं, बल्कि इसमें मौजूद पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा है, जो इसे सामान्य सफेद चावल से कहीं अधिक खास बनाती है।
काला नमक चावल में आयरन, जिंक, प्रोटीन और फाइबर जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं। ये सभी तत्व शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर जिंक इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करता है, जबकि प्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण और शरीर की ऊर्जा बनाए रखने में सहायक होता है।
इस चावल का सबसे बड़ा फायदा इसका कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स है। यही कारण है कि यह डायबिटीज मरीजों के लिए एक बेहतर विकल्प माना जाता है। यह खाने के बाद ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने नहीं देता, जिससे शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी है। यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और वजन नियंत्रण में मदद मिलती है। जो लोग वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए यह एक प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है।
काला नमक चावल हृदय स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद आयरन शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में मदद करता है, जबकि जिंक और अन्य पोषक तत्व रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं। इससे दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है।
महिलाओं और बच्चों के लिए भी यह चावल काफी फायदेमंद माना जाता है। बढ़ते बच्चों में यह पोषण की कमी को पूरा करने में मदद करता है, वहीं महिलाओं में आयरन की कमी को दूर कर ऊर्जा स्तर बनाए रखने में सहायक होता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी नए खाद्य पदार्थ को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और जरूरतें भी अलग होती हैं।
कुल मिलाकर काला नमक चावल सिर्फ एक पारंपरिक अनाज नहीं, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है, जो स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन देता है।
