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  • विवाद के बीच AIFF ने दी सफाई, खेल भावना बनाए रखने की अपील

    विवाद के बीच AIFF ने दी सफाई, खेल भावना बनाए रखने की अपील


    नई दिल्ली। भारतीय फुटबॉल में नस्लवाद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इंडियन सुपर लीग के एक मैच के बाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक फैन को खिलाड़ी पर नस्लवादी टिप्पणी करते देखा गया। यह घटना श्री कांतीरावा स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान हुई।

    AIFF ने दिखाई सख्ती, जांच के आदेश
    ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि खेल में किसी भी तरह के भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। फेडरेशन ने मामले को अपनी अनुशासन समिति को सौंप दिया है, जो स्वतंत्र रूप से जांच करेगी।

    खिलाड़ी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी
    यह विवाद केरला ब्लास्टर्स एफसी के डिफेंडर फालू नदिये को लेकर सामने आया। वीडियो में एक दर्शक द्वारा उन पर नस्लवादी टिप्पणी किए जाने का आरोप है, जिससे पूरे फुटबॉल समुदाय में आक्रोश फैल गया।

    AIFF की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
    AIFF ने अपने बयान में कहा कि वह नस्लवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाता है।
    “जो लोग हमारे स्टेडियम में नफरत लाते हैं, उनके लिए हमारे खेल में कोई जगह नहीं है।”
    फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक इस मामले पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की जाएगी।

    क्लब ने भी जताई कड़ी आपत्ति
    केरला ब्लास्टर्स ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे “घिनौना” बताया। क्लब ने कहा कि खिलाड़ियों की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है और मामले की जानकारी आधिकारिक रूप से लीग और फेडरेशन को दे दी गई है।

    खिलाड़ियों की सुरक्षा और फैंस के व्यवहार पर सवाल
    इस घटना ने एक बार फिर भारतीय फुटबॉल में खिलाड़ियों की सुरक्षा और दर्शकों के व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोक सकती है।

  • अंबेडकर जयंती पर CM मोहन यादव का नमन बाबा साहेब को बताया संविधान का शिल्पकार

    अंबेडकर जयंती पर CM मोहन यादव का नमन बाबा साहेब को बताया संविधान का शिल्पकार


    भोपाल । भोपाल में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर पूरे प्रदेश में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा साहेब को भावपूर्ण नमन किया और उन्हें भारतीय संविधान का शिल्पकार तथा सामाजिक न्याय का महान पुरोधा बताया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. अंबेडकर ने जीवनभर शिक्षा समानता और अधिकारों के आधार पर एक सशक्त और समतामूलक भारत की नींव रखी। उनके विचार आज भी देश के विकास और सामाजिक उत्थान की दिशा में मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का योगदान केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं था बल्कि उन्होंने समाज के वंचित शोषित और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए संघर्ष को जीवन का उद्देश्य बनाया।

    सीएम यादव ने यह भी कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आए। उनके प्रयासों ने देश में एक ऐसी व्यवस्था की नींव रखी जिसमें हर व्यक्ति को समान अधिकार और अवसर मिल सकें।

    इस अवसर पर प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें श्रद्धांजलि सभाएं, विचार गोष्ठियां और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम शामिल रहे। लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर बाबा साहेब के विचारों को याद किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

    मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार बाबा साहेब के सिद्धांतों और उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए समाज के हर वर्ग के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समता न्याय और अधिकार आधारित समाज की स्थापना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस प्रकार अंबेडकर जयंती का यह अवसर न केवल श्रद्धांजलि का दिन रहा बल्कि सामाजिक एकता और समानता के संदेश को मजबूत करने का भी प्रतीक बना।

  • मिथिला की अनूठी परंपरा जुड़ शीतल, प्रकृति और आशीर्वाद का संगम बनकर देती है शांति और संतुलन का संदेश

    मिथिला की अनूठी परंपरा जुड़ शीतल, प्रकृति और आशीर्वाद का संगम बनकर देती है शांति और संतुलन का संदेश


    नई दिल्ली:मिथिला क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में जुड़ शीतल एक ऐसा पर्व है जिसे केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं बल्कि प्रकृति, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन के संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। यह त्योहार हर वर्ष गर्मी की शुरुआत के साथ मनाया जाता है और इसे नववर्ष की प्रतीकात्मक शुरुआत भी माना जाता है। मौसम में बदलाव के साथ जब तापमान बढ़ने लगता है, तब यह पर्व जीवन में शीतलता, संयम और सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश देता है।

    इस दिन घरों में विशेष परंपराओं का पालन किया जाता है। परिवार की महिलाएं सुबह उठकर घर के सभी सदस्यों पर घड़े का ठंडा और बासी पानी छिड़कती हैं। इसे आशीर्वाद और स्वास्थ्य सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। बच्चों को विशेष रूप से आशीर्वाद दिया जाता है ताकि वे स्वस्थ, शांत और संतुलित जीवन जी सकें। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि गर्मी से बचाव और शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक प्रदान करने की पारंपरिक विधि भी मानी जाती है।

    जुड़ शीतल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रकृति से जुड़ाव है। इस दिन लोग अपने घरों के पेड़ पौधों पर पानी डालते हैं और पर्यावरण के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। तुलसी के पौधे को विशेष रूप से महत्व दिया जाता है और उसे जल अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। यह जीवन में पवित्रता, संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देता है।

    इस पर्व में मटके और पानी का विशेष महत्व होता है। कई घरों में मटके से धीरे धीरे पानी टपकाने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे जीवन में निरंतरता, संयम और संसाधनों के संतुलित उपयोग का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा यह भी संदेश देती है कि जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग सोच समझकर करना चाहिए ताकि भविष्य के लिए संतुलन बना रहे।

    खगोलीय दृष्टि से यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि सूर्य इस अवधि में अपनी राशि परिवर्तन प्रक्रिया के दौरान मौसम में बदलाव लाता है। दिन लंबे होने लगते हैं और गर्मी धीरे धीरे अपने प्रभाव को बढ़ाने लगती है। इसी समय कई धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की शुरुआत भी मानी जाती है, जिससे इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

    जुड़ शीतल केवल एक परंपरा नहीं बल्कि जीवन में शांति, शीतलता, प्रकृति के प्रति सम्मान और पारिवारिक एकता का गहरा संदेश देने वाला पर्व है। यह आधुनिक जीवन में भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और लोगों को प्रकृति के साथ संतुलन में रहने की प्रेरणा देता है।

  • सड़क पार करते समय हादसा: सिर में गंभीर चोट, अस्पताल में तोड़ा दम

    सड़क पार करते समय हादसा: सिर में गंभीर चोट, अस्पताल में तोड़ा दम


    नई दिल्ली। ग्वालियर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सोमवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। गुब्बारा फाटक के पास सड़क पार कर रहे 62 वर्षीय सुरेंद्र सिंह राठौर को तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया।

    सिर में गंभीर चोट, अस्पताल में तोड़ा दम
    हादसे में बुजुर्ग के सिर में गंभीर चोट आई। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार चोट काफी गंभीर थी, जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    परिजनों का आरोप: ऑटो ने मारी टक्कर
    मृतक के भतीजे विक्रांत ने आरोप लगाया कि टक्कर एक ऑटो ने मारी थी। उनका कहना है कि हादसे के बाद बुजुर्ग ऑटो में फंस गए और कुछ दूरी तक घिसटते रहे, लेकिन चालक वाहन लेकर मौके से भाग गया।

    CCTV में कैद हुई घटना
    घटनास्थल के पास लगी एक दुकान के CCTV कैमरे में हादसा रिकॉर्ड हुआ है। फुटेज में वाहन टक्कर मारने के बाद बुजुर्ग को घसीटते हुए नजर आ रहा है। हालांकि, पुलिस को जो फुटेज मिला है, वह दूरी के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

    आरोपी वाहन की तलाश जारी
    थाना प्रभारी के अनुसार आसपास के अन्य CCTV कैमरों की भी जांच की जा रही है, ताकि आरोपी वाहन की पहचान की जा सके। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जल्द ही आरोपी तक पहुंचने का दावा किया है।

    लोगों ने दिखाई मदद, फिर भी नहीं बच सकी जान
    हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोग मदद के लिए दौड़े और घायल को अस्पताल पहुंचाया। लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी, जिससे इलाके में शोक का माहौल है।

  • इनकम टैक्स सिस्टम में सुधार: ‘फॉर्म 141’ से आसान होगी TDS प्रक्रिया

    इनकम टैक्स सिस्टम में सुधार: ‘फॉर्म 141’ से आसान होगी TDS प्रक्रिया


    नई दिल्ली।आयकर विभाग ने टैक्स प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए ‘फॉर्म 141’ शुरू किया है। यह एक कंसोलिडेटेड चालान-कम-स्टेटमेंट है, जो अब तक इस्तेमाल हो रहे चार अलग-अलग TDS फॉर्म की जगह लेगा। इससे करदाताओं को अलग-अलग फॉर्म भरने की झंझट से राहत मिलेगी।

    इन चार फॉर्म की जगह लेगा नया फॉर्म
    फॉर्म 141 में निम्न चार TDS फॉर्म को एक साथ शामिल किया गया है:

    फॉर्म 26QB – संपत्ति खरीद पर TDS

    फॉर्म 26QC – किराए पर TDS

    फॉर्म 26QD – कॉन्ट्रैक्ट/प्रोफेशनल भुगतान पर TDS

    फॉर्म 26QE – वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर TDS

    अब इन सभी के लिए अलग-अलग फाइलिंग की जरूरत नहीं होगी।

    किन मामलों में होगा इस्तेमाल
    नए नियमों के अनुसार फॉर्म 141 का उपयोग इन स्थितियों में किया जा सकेगा:

    ₹50,000 प्रति माह तक के किराए पर TDS

    ₹50 लाख या उससे अधिक की संपत्ति खरीद पर TDS

    ऐसे व्यक्ति/HUF द्वारा ₹50 लाख से अधिक के प्रोफेशनल, कमीशन या कॉन्ट्रैक्ट भुगतान (जो टैक्स ऑडिट के अंतर्गत नहीं आते)

    क्रिप्टोकरेंसी या NFT जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर भुगतान

    फॉर्म भरने के लिए जरूरी जानकारी
    फॉर्म 141 भरते समय करदाताओं को निम्न जानकारी देनी होगी:

    कटौतीकर्ता (payer) और प्राप्तकर्ता (payee) का PAN

    पता, मोबाइल नंबर और ईमेल

    लेन-देन का प्रकार और भुगतान का तरीका

    यह फॉर्म आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘e-Pay Tax’ सेक्शन के जरिए भरा जा सकता है।

    एक फॉर्म में कई विक्रेताओं की एंट्री
    विशेषज्ञों के अनुसार इस नए सिस्टम में एक बड़ा बदलाव यह है कि अब फॉर्म की संख्या विक्रेताओं (sellers) के आधार पर नहीं बल्कि खरीदारों (buyers) के आधार पर तय होगी। यानी एक ही फॉर्म में कई विक्रेताओं की जानकारी दर्ज की जा सकती है, जिससे प्रक्रिया और आसान हो जाएगी।

    डिजिटल टैक्स सिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
    सरकार का यह कदम डिजिटल टैक्स फाइलिंग को और मजबूत करेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि त्रुटियों की संभावना भी कम होगी और अनुपालन (compliance) आसान बनेगा।

  • बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज हुआ मंथन, सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नामों पर केंद्रित राजनीतिक चर्चा

    बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज हुआ मंथन, सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नामों पर केंद्रित राजनीतिक चर्चा


    नई दिल्ली : बिहार में एनडीए की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज, नेतृत्व चयन पर भाजपा और जदयू में गहन मंथन, सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नाम चर्चा में

    बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले भारी बहुमत के बाद राज्य की राजनीति में सरकार गठन और नेतृत्व चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 202 सीटों के मजबूत समर्थन के साथ एनडीए अब सत्ता गठन की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। इस स्थिति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों और संभावनाओं को और अधिक बढ़ा दिया है।

    गठबंधन के भीतर भाजपा और जदयू दोनों ही दल अपने अपने स्तर पर नेतृत्व संतुलन को लेकर विचार विमर्श कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ऐसे चेहरे की तलाश की जा रही है जो संगठनात्मक मजबूती के साथ प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक स्वीकार्यता भी रखता हो। इसी बीच सम्राट चौधरी का नाम प्रमुख दावेदारों में तेजी से उभरकर सामने आया है, जिन्हें संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय और प्रभावशाली नेता माना जा रहा है।

    इसके साथ ही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन से लंबे समय तक जुड़े रहने और पार्टी की वैचारिक धारा में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें भी एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका अनुभव और संगठनात्मक पकड़ नेतृत्व चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    जदयू और भाजपा के बीच सत्ता संतुलन और भविष्य की रणनीति को लेकर आंतरिक स्तर पर लगातार संवाद जारी है। नेतृत्व को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और गठबंधन के शीर्ष स्तर पर होने वाली बैठक के बाद ही तय किया जाएगा। इस प्रक्रिया ने बिहार की राजनीति में नई रणनीतिक हलचल पैदा कर दी है, जहां हर संभावित निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल मुख्यमंत्री पद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीतिक दिशा और विकास नीति को भी प्रभावित करेगा। ऐसे में नेतृत्व चयन को लेकर हर कदम बेहद सोच समझकर उठाया जा रहा है ताकि गठबंधन की स्थिरता और जन समर्थन दोनों को बनाए रखा जा सके।

  • खनन क्षेत्र को राहत: लो-ग्रेड आयरन ओर के इस्तेमाल पर नए नियम लागू

    खनन क्षेत्र को राहत: लो-ग्रेड आयरन ओर के इस्तेमाल पर नए नियम लागू


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कम गुणवत्ता (लो-ग्रेड) वाले लौह अयस्क के बेहतर उपयोग और बर्बादी रोकने के लिए अहम कदम उठाया है। खान मंत्रालय ने इसके लिए प्राइसिंग नियमों में बदलाव करते हुए नया ढांचा तैयार किया है, जिससे ऐसे अयस्क का आर्थिक रूप से उपयोग संभव हो सके।

    नई प्राइसिंग व्यवस्था से स्पष्टता
    नए नियमों के तहत 45% से कम आयरन (Fe) कंटेंट वाले अयस्क जैसे बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट (BHQ) और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (BHJ) के लिए अलग से मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है। 35% से 45% Fe कंटेंट वाले अयस्क की औसत बिक्री कीमत (ASP) अब 45-51% ग्रेड के अयस्क की ASP का 75% होगी। 35% से कम Fe कंटेंट वाले अयस्क की ASP 50% तय की गई है।

    पहले क्या थी समस्या?
    पहले लो-ग्रेड अयस्क के लिए अलग प्राइसिंग सिस्टम नहीं था। रॉयल्टी और अन्य शुल्क उच्च ग्रेड (45-51%) अयस्क के आधार पर तय होते थे, जिससे लो-ग्रेड अयस्क को प्रोसेस करना आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो जाता था। यही वजह थी कि बड़ी मात्रा में यह संसाधन बेकार चला जाता था।

    नई तकनीक से बढ़ेगा उपयोग
    सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीकों की मदद से BHQ और BHJ जैसे लो-ग्रेड अयस्क को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाले स्टील निर्माण योग्य मटेरियल में बदला जा सकता है। नई प्राइसिंग नीति इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करेगी।

    रॉयल्टी नियमों में भी बदलाव
    नए नियमों के तहत यदि कच्चे अयस्क (ROM) को प्रोसेस करने से उसकी कीमत घटती है, तो रॉयल्टी का निर्धारण प्रोसेसिंग से पहले की स्थिति (प्रारंभिक स्क्रीनिंग) के आधार पर किया जाएगा। इससे कीमत को कृत्रिम रूप से कम दिखाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

    स्टील इंडस्ट्री और संसाधन संरक्षण को फायदा
    सरकार के मुताबिक इस कदम से:

    हाई-ग्रेड अयस्क पर निर्भरता कम होगी

    स्टील उद्योग को कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति मिलेगी

    खनिज संसाधनों का संरक्षण होगा

    बेकार माने जाने वाले अयस्क का भी उपयोग बढ़ेगा

  • मार्च में महंगाई बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंची, वैश्विक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता से घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव

    मार्च में महंगाई बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंची, वैश्विक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता से घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली:देश में खुदरा महंगाई दर मार्च 2026 में बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं के बजट पर हल्का लेकिन स्पष्ट दबाव देखने को मिला है। यह आंकड़ा फरवरी के 3.21 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा अधिक है, लेकिन अभी भी यह स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर जारी भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने भारत की कीमतों पर असर डाला है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बदलाव के कारण परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ी है, जिसका प्रभाव धीरे धीरे अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है। इसका सीधा असर घरेलू खर्चों पर पड़ रहा है और उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर दबाव बन रहा है।

    खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी मिला जुला रुझान देखा गया है। कुछ सब्जियों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कुछ खाद्य पदार्थों जैसे प्याज, आलू और दालों के दामों में गिरावट भी देखने को मिली है। इसके बावजूद खाद्य महंगाई दर मार्च में बढ़कर 3.87 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो फरवरी की तुलना में अधिक है।

    ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आई वृद्धि भी महंगाई के आंकड़ों को ऊपर ले जाने में एक महत्वपूर्ण कारण रही है। एलपीजी सिलेंडर और अन्य ईंधन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। ऊर्जा लागत में वृद्धि का असर सीधे तौर पर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे अन्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होती हैं।

    सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को प्रभावित किया है। निवेश और बाजार में अनिश्चितता के कारण इनकी मांग बढ़ी है, जिससे कीमतों में रिकॉर्ड स्तर की वृद्धि दर्ज की गई है।

    हालांकि राहत की बात यह है कि मौजूदा महंगाई दर अभी भी केंद्रीय बैंक के मध्यम लक्ष्य चार प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था फिलहाल स्थिर स्थिति में बनी हुई है, लेकिन बाहरी झटकों का असर लगातार महसूस किया जा रहा है।

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मुख्य रूप से सप्लाई साइड दबाव का परिणाम है, जिसमें वैश्विक तनाव, तेल बाजार की अस्थिरता और मौसम आधारित प्रभाव शामिल हैं। नीति निर्धारक फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

    आने वाले समय में महंगाई की दिशा काफी हद तक मानसून, वैश्विक बाजार और भू राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है तो इसका असर घरेलू कीमतों पर और अधिक स्पष्ट हो सकता है।

  • गर्मी में गन्ने का रस है अमृत समान, शरीर को रखे ठंडा और मजबूत

    गर्मी में गन्ने का रस है अमृत समान, शरीर को रखे ठंडा और मजबूत


    नई दिल्ली। मौसम में बदलाव हो रहा है और गर्मी अब धीरे-धीरे बढ़ रही है गर्मी जैसे ही बढ़ने लगती है। कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होने लगती है। आपकी इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ जाती है सही खान-पान गर्मी में करना बहुत जरूरी होता है वरना कई प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। गर्मी में गाने का रस पीना बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह आपको सेहतमंद रखने में मदद करता है चलिए जानते हैं कैसे।

    गन्ने के रस के फायदे

    गर्मियों के मौसम में जब तेज धूप और गर्मी से शरीर थकान महसूस करता है, तब गन्ने का रस सबसे अच्छा प्राकृतिक पेय साबित होता है।औषधीय गुणों से भरपूर ये ठंडा रस शरीर को न केवल तुरंत एनर्जी देता है, बल्कि सेहत का भी ध्यान रखता है।गन्ने का रस शरीर को तरोताजा करने के साथ-साथ आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाता है, पाचन तंत्र को सुधारता है और पीलिया जैसी बीमारी में राहत पहुंचाता है।

    कई बीमारियों के लिए है रामबाण

    गन्ने के रस से सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि गुड़, शीरा जैसे कई उपयोगी उत्पाद भी बनते हैं।आयुर्वेद में गन्ने के रस को मूत्रवर्धक, शीतलक, रेचक और टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।यह पेशाब में जलन, पेशाब न आने की समस्या और रक्तस्राव में भी राहत देता है। यूनानी चिकित्सा में इसे पीलिया के मरीजों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है।

    इस लिए आपको गर्मी में गन्ने का रस जरूर पीना चाहिए।गर्मियों में गन्ने का रस पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और गर्मी से होने वाली थकान दूर होती है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स तनाव कम करने में मददगार है
  • सैलरी और शोषण के आरोपों से गरमाया पीथमपुर 500 मजदूरों ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा

    सैलरी और शोषण के आरोपों से गरमाया पीथमपुर 500 मजदूरों ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा


    पीथमपुर । मध्यप्रदेश के धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में श्रमिक असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में दिल्ली एनसीआर में वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अब इसका असर मध्यप्रदेश के औद्योगिक इलाकों में भी दिखने लगा है। पीथमपुर स्थित सेक्टर 3 में मदरसन कंपनी की यूनिट 1 के बाहर लगभग 500 महिला और पुरुष कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी है जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हलचल मच गई है।

    कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन लंबे समय से आर्थिक शोषण कर रहा है और काम के निर्धारित घंटे लागू नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि उनसे आठ घंटे से अधिक काम कराया जाता है लेकिन इसके बदले में उचित वेतन नहीं दिया जाता जिससे बढ़ती महंगाई के दौर में जीवनयापन मुश्किल होता जा रहा है।

    हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ कर्मचारियों को हाल ही में नौकरी से निकाल दिया गया है। इस कार्रवाई को कर्मचारियों ने दबाव बनाने और डराने की रणनीति बताया है। इससे अन्य कर्मचारियों में भी आक्रोश बढ़ गया है और वे सामूहिक रूप से विरोध में उतर आए हैं।

    प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में शामिल रश्मि नामक कर्मचारी ने बताया कि कंपनी में न तो काम के घंटे तय हैं और न ही महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को छुट्टी नहीं दी जाती और किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी सुविधा या डॉक्टर की व्यवस्था भी कंपनी परिसर में मौजूद नहीं है।

    कर्मचारियों की मुख्य मांगों में निकाले गए साथियों की तत्काल बहाली वेतन में वृद्धि और काम के घंटे तय करना शामिल है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस आंदोलन का असर अब अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी देखने को मिल रहा है जहां कर्मचारी एकजुट होकर समर्थन जता रहे हैं। कंपनी गेट पर लगातार नारेबाजी और प्रदर्शन जारी है जिससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर निगरानी बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासनिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं ताकि मामला शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सके। यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक अधिकारों और कार्यस्थल की स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।