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  • गोलीकांड में नया खुलासा: महिला और नाबालिग समेत 5 आरोपी गिरफ्त में

    गोलीकांड में नया खुलासा: महिला और नाबालिग समेत 5 आरोपी गिरफ्त में


    मध्यप्रदेश। सागर जिले के मोतीनगर थाना क्षेत्र स्थित गौंड बब्बा चबूतरा इलाके में हुए सनसनीखेज गोलीकांड में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक नाबालिग भी शामिल है। इसके साथ ही इस हत्याकांड में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर पांच हो गई है, जबकि मुख्य आरोपी यश अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

    यह घटना 21 मई की रात करीब 10:30 बजे की है, जब पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने फरियादी ओम साहू और उसके भाई मयंक साहू के साथ विवाद शुरू कर दिया था। विवाद के दौरान गाली-गलौज और मारपीट के बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक आरोपी ने अवैध हथियार से फायर कर दिया। गोली लगने से मयंक साहू गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसी दौरान हमले में ओम साहू पर चाकू से वार भी किया गया था।

    घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज की और साइबर सेल व मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया। शनिवार को इसी कार्रवाई के तहत पुलिस ने तुत्तू उर्फ शैलेंद्र रैकवार (22 वर्ष, निवासी तिरुपतिपुरम) और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया।

    इससे पहले शुक्रवार को भी पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 18 वर्षीय आर्यन आठिया, एक 16 वर्षीय नाबालिग और एक 60 वर्षीय महिला शामिल थी। इस तरह अब तक कुल पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।

    मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह के अनुसार, इस हत्याकांड में कुल छह आरोपी नामजद हैं, जिनमें से एक मुख्य आरोपी यश अभी फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

    पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही फरार आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • कोर्ट की सख्ती के बाद लखनऊ में सपा पार्षद को मिली शपथ, मेयर के अधिकार सीमित होने से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज


    नई दिल्ली। लखनऊ नगर निगम में लंबे समय से चल रहे पार्षद शपथ विवाद का अंत आखिरकार न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद हो गया। हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के अनुपालन में नगर निगम प्रशासन ने सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को औपचारिक रूप से शपथ दिलाई। यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और कानूनी बहस का भी बड़ा विषय बन गया था, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब निकाय चुनाव के परिणामों के बाद विजयी घोषित सपा पार्षद को शपथ दिलाने में देरी की गई। लगभग पांच महीने तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण मामला धीरे-धीरे अदालत तक पहुंच गया। याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि जानबूझकर शपथ ग्रहण में देरी की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। मामला पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए।

    हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल शपथ दिलाने का आदेश दिया, बल्कि लखनऊ नगर निगम के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारों पर भी सख्ती दिखाई। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन किया जाए, अन्यथा संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह माना जाएगा। इसी आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया गया।

    शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मेयर सुषमा खर्कवाल ने सपा पार्षद को पद की शपथ दिलाई। यह कदम न्यायालय के आदेश के अनुपालन के रूप में देखा गया, जिससे यह संदेश भी गया कि संवैधानिक प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना संभव नहीं है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम के भीतर चल रहे प्रशासनिक तनाव और राजनीतिक खींचतान को भी उजागर कर दिया है।

    इस विवाद की पृष्ठभूमि 2023 के निकाय चुनावों से जुड़ी हुई है, जहां एक सीट पर चुनाव परिणाम को लेकर कानूनी चुनौती दी गई थी। आरोप-प्रत्यारोप के बीच अदालत ने अंतिम रूप से सपा प्रत्याशी को विजयी घोषित किया, लेकिन शपथ ग्रहण में देरी के कारण मामला फिर से विवादों में आ गया। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक संतुलन दोनों पर प्रभाव डाला है।

    अब शपथ ग्रहण के बाद यह मामला औपचारिक रूप से समाप्त माना जा रहा है, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या हस्तक्षेप न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है। प्रशासनिक स्तर पर इस घटना को एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।

  • लखनऊ मेयर विवाद: हाई कोर्ट के आदेश के बाद सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को दिलाई गई शपथ, मेयर के अधिकार पहले ही सीज

    लखनऊ मेयर विवाद: हाई कोर्ट के आदेश के बाद सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को दिलाई गई शपथ, मेयर के अधिकार पहले ही सीज




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    लखनऊ नगर निगम में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आखिरकार सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिला दी गई। यह शपथ मेयर सुषमा खर्कवाल द्वारा हाई कोर्ट के आदेश के बाद कराई गई, क्योंकि अदालत ने समय सीमा तय करते हुए शपथ न दिलाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

    दरअसल, पार्षद निर्वाचित होने के करीब 5 महीने बाद भी ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिलाई गई थी। मामला लगातार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया था कि 29 मई तक हर हाल में शपथ दिलाई जाए, अन्यथा मेयर को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा और व्यक्तिगत हलफनामा देना होगा।

    कोर्ट ने इस मामले में मेयर सुषमा खर्कवाल के अधिकार भी सीज कर दिए थे, जिससे प्रशासनिक स्तर पर दबाव और बढ़ गया था। गुरुवार को आए आदेश के बाद मामला और तेज हो गया और रविवार को मेयर ने स्वयं सपा पार्षद को शपथ दिलाई।

    जानकारी के अनुसार, मेयर ने पहले अपनी तबीयत खराब होने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी थी, लेकिन शनिवार को डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने शपथ प्रक्रिया पूरी करने की पुष्टि की।

    यह पूरा विवाद 2023 के नगर निकाय चुनाव से जुड़ा है। वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज-3 में भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने सपा प्रत्याशी ललित किशोर तिवारी को हराया था। बाद में सपा प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार पर शपथ पत्र में गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।

    सुनवाई के बाद कोर्ट ने भाजपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द करते हुए ललित किशोर तिवारी को विजेता घोषित किया था। इसके बावजूद शपथ न दिलाए जाने को लेकर मामला लगातार विवादों में रहा, जो अब जाकर कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ।

  • सागर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: देसी पिस्टल और कारतूस के साथ 59 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

    सागर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: देसी पिस्टल और कारतूस के साथ 59 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार


    मध्यप्रदेश। सागर शहर में उस समय पुलिस को बड़ी सफलता मिली जब मोतीनगर थाना क्षेत्र की टीम ने एक 59 वर्षीय व्यक्ति को अवैध देसी पिस्टल और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया था कि आरोपी न्यू भोपाल बस स्टैंड के पीछे भगतसिंह वार्ड क्षेत्र में संदिग्ध हालत में घूम रहा है।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही आरोपी वहां से भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन टीम में शामिल आरक्षकों ने उसका पीछा कर उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी की तलाशी ली गई तो उसके पास से एक देसी मैगजीन युक्त पिस्टल और उसकी जेब से एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ।

    पकड़े गए आरोपी की पहचान मोहन उर्फ बबलू (59 वर्ष), निवासी राजीवनगर वार्ड के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों हथियारों को जब्त कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

    मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने यह अवैध हथियार कहां से प्राप्त किया और वह किस उद्देश्य से इसे लेकर घूम रहा था।

    प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच कर रही है।

  • सड़क पर मातम: जैन साध्वियों को कार ने कुचला, VIDEO सामने आने के बाद हड़कंप

    सड़क पर मातम: जैन साध्वियों को कार ने कुचला, VIDEO सामने आने के बाद हड़कंप


    मध्यप्रदेश। रीवा शहर में उस समय हड़कंप मच गया जब कलेक्ट्रेट के सामने तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे शांतिपूर्वक पैदल विहार कर रही तीन जैन साध्वियों को जोरदार टक्कर मार दी। यह पूरा हादसा 20 मई की दोपहर का बताया जा रहा है, जिसका सीसीटीवी फुटेज अब सामने आया है और जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

    वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि साध्वियां नियम अनुसार सड़क किनारे पैदल चल रही थीं, तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार अनियंत्रित कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौके पर ही अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तुरंत बचाव में जुट गए।

    हादसे में पूज्य श्रुति मति माता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उपसमिति माता ने इलाज के दौरान संजय गांधी अस्पताल में दम तोड़ दिया। वहीं तीसरी साध्वी आर्यिका माता की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।

    घटना के तुरंत बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन दो साध्वियों की जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद बुधवार को एक साध्वी का अंतिम संस्कार रीवा में ही किया गया, जिससे माहौल बेहद भावुक हो गया।

    हादसे को अंजाम देने के बाद कार चालक रशीद आबाद अली शाह मौके से फरार हो गया था। पुलिस की जांच में पता चला कि वह घटना के बाद करीब 270 किलोमीटर दूर जबलपुर तक भाग गया था, जहां बरगी पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    घटना के बाद जैन समाज में भारी आक्रोश है और इसे केवल दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही या संभावित साजिश के रूप में देखा जा रहा है। समाज ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और सभी डिजिटल व सीसीटीवी साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं।

    जैन समाज ने यह भी मांग की है कि देशभर में पैदल विहार करने वाले साधु-संतों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संत सुरक्षा नीति बनाई जाए। साथ ही दोषी को कठोर से कठोर सजा देने की अपील की गई है।

    इस घटना के विरोध में 25 मई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया गया है, जिसमें जैन समाज मौन रैली निकालकर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाएगा।

  • फाल्टा उपचुनाव: शांत मतदान के बाद गहराया राजनीतिक तनाव, दिलीप घोष ने टीएमसी पर साधा निशाना

    फाल्टा उपचुनाव: शांत मतदान के बाद गहराया राजनीतिक तनाव, दिलीप घोष ने टीएमसी पर साधा निशाना

    नई दिल्ली  /कोलकाता । पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा उपचुनाव की मतगणना से ठीक पहले राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। चुनावी माहौल भले ही मतदान के दिन शांतिपूर्ण रहा हो, लेकिन परिणाम से पहले राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राज्य सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने विपक्षी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि फाल्टा में वास्तविक मुकाबला पहले ही खत्म हो चुका है और विपक्षी खेमे के लोग परिस्थितियों से पीछे हट चुके हैं।

    दिलीप घोष ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि फाल्टा में जिस तरह का मतदान हुआ है, उससे यह स्पष्ट है कि जनता ने अपने मताधिकार का उपयोग बड़े स्तर पर किया है और अब परिणाम को लेकर किसी प्रकार का संशय नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह की अव्यवस्था नहीं रही और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और नियंत्रित वातावरण में संपन्न हुई।

    उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दल चुनावी मैदान में सक्रियता दिखाने में असफल रहे हैं और मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ कमजोर दिखाई दी है। उनके अनुसार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में जिस तरह की उम्मीद की जा रही थी, वैसा संघर्ष जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण जनता का रुझान स्पष्ट रूप से सकारात्मक दिशा में है।

    मतगणना से पहले बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच उन्होंने नगर निकाय से जुड़े मामलों पर भी टिप्पणी की और कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि कानून और व्यवस्था के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी मामलों की जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी।

    फाल्टा उपचुनाव को लेकर चुनावी प्रक्रिया पहले ही चर्चा में रही है। मतदान के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती सुनिश्चित की गई थी ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण माहौल रहा और मतदाताओं ने उत्साह के साथ भागीदारी की।

    गौरतलब है कि फाल्टा में पहले चरण के मतदान के बाद कुछ अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद निर्वाचन प्रक्रिया को दोबारा कराने का निर्णय लिया गया था। दोबारा मतदान के दौरान प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया। इसी वजह से इस बार मतदान अपेक्षाकृत अधिक शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माना जा रहा है।

    अब सभी की नजरें मतगणना पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि जनता ने किस राजनीतिक दल पर भरोसा जताया है। हालांकि, मतगणना से पहले ही सियासी बयानबाजी ने माहौल को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया है और दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।

  • धमकी और दबाव के आरोप से गरमाया मामला: शिक्षक गंभीर, पुलिस जांच में सवाल

    धमकी और दबाव के आरोप से गरमाया मामला: शिक्षक गंभीर, पुलिस जांच में सवाल


    मध्यप्रदेश।  रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सरकारी शिक्षक अनिल कुमार तिवारी जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनका परिवार अस्पताल के बाहर पिछले 48 घंटों से भीषण गर्मी में अन्न-जल त्यागकर न्याय की मांग पर डटा हुआ है।

    परिवार का आरोप है कि घटना के 72 घंटे बीत जाने के बाद भी न तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी प्रकार की गिरफ्तारी हुई है। इस देरी को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    मामला उस समय और गंभीर हो गया जब शिक्षक ने आत्महत्या का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने पहले अपनी कलाई की नस काटी और बाद में जहरीला पदार्थ खा लिया, जिसके बाद उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई। डॉक्टरों के अनुसार जहर पूरे शरीर में फैल चुका है और उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है।

    घटना से आहत उनकी पत्नी ने अस्पताल के बाहर पानी तक छोड़ दिया है और रोते हुए कहा कि यदि उनके पति को न्याय नहीं मिला तो वह भी जीवन समाप्त कर देंगी। वहीं बेटी ने भी साफ कहा है कि पूरा परिवार न्याय न मिलने पर सामूहिक आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होगा।

    परिजनों के अनुसार विवाद की शुरुआत एक पेड़ कटाई के मामले से हुई थी, जिसके बाद मामला थाने तक पहुंचा और वहीं से तनाव बढ़ता गया। आरोप है कि शिक्षक को झूठे केस में फंसाया गया और थाने में मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    शिक्षक द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी और एक पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि उन्हें बिना किसी अपराध के फंसाया गया और उनकी 28 साल की सेवा को बर्बाद कर दिया गया।

    परिवार का यह भी आरोप है कि पत्रकार ने पुलिस और प्रशासन में अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर उन्हें धमकाया और अपमानित किया। वहीं, शिक्षक ने अपने नोट में उच्च स्तरीय जांच या सीबीआई जांच की मांग भी की है।

    घटना के बाद 72 घंटे बीत जाने के बावजूद किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होने से आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। यह पूरा मामला अब प्रशासन, पुलिस और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

  • गुजरात के केसर आम की खुशबू पहुंची लंदन, हीथ्रो एयरपोर्ट पर छाया भारतीय आमों का जलवा

    गुजरात के केसर आम की खुशबू पहुंची लंदन, हीथ्रो एयरपोर्ट पर छाया भारतीय आमों का जलवा


    नई दिल्ली । गुजरात के Gujarat के विभिन्न क्षेत्रों जैसे जूनागढ़, कच्छ और तलाला से आने वाले केसर आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। इन आमों को निर्यात से पहले आधुनिक तकनीक से गुजरना पड़ता है, जिसमें डी-सेपिंग, हॉट वाटर ट्रीटमेंट और हाइड्रो-कूलिंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य न केवल आम को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है बल्कि उनकी गुणवत्ता और स्वाद को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाए रखना भी है।

    निर्यात प्रक्रिया के दौरान आमों को विशेष तापमान वाले गर्म पानी में उपचारित किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार के कीट या फंगल संक्रमण को खत्म किया जा सके। इसके बाद उन्हें ठंडे पानी में रखा जाता है जिससे उनका प्राकृतिक रंग, ताजगी और संरचना बनी रहती है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही आमों को पैक करके विभिन्न देशों जैसे इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा और खाड़ी देशों में भेजा जाता है।

    निर्यातकों के अनुसार, भारतीय आमों की सबसे बड़ी मांग केसर और हाफूस किस्म की होती है। इनकी सुगंध, मिठास और प्राकृतिक स्वाद दुनिया के अन्य देशों में मिलने वाले आमों से अलग और अधिक प्रभावशाली माना जाता है। यही कारण है कि भारतीय आम अब केवल एक फल नहीं बल्कि एक प्रीमियम वैश्विक उत्पाद बन चुके हैं।

    लंदन और आसपास के क्षेत्रों में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह आम केवल स्वाद का हिस्सा नहीं बल्कि अपने देश की यादों से जुड़ा एक भावनात्मक संबंध भी है। वहीं स्थानीय यूरोपीय उपभोक्ता भी अब भारतीय आमों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जिससे इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह आधुनिक तकनीक और संगठित कृषि प्रणाली के साथ उत्पादन और निर्यात जारी रहा तो आने वाले वर्षों में भारत के कृषि उत्पाद वैश्विक बाजार में और भी मजबूत स्थिति हासिल करेंगे।

  • रोशनी से डरती जिंदगी: रीवा के चार बच्चे दुर्लभ बीमारी से अंधेरे में जीने को मजबूर

    रोशनी से डरती जिंदगी: रीवा के चार बच्चे दुर्लभ बीमारी से अंधेरे में जीने को मजबूर


    मध्यप्रदेश। रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत देवखर (कोरियान टोला) से एक बेहद दर्दनाक और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जहां एक ही परिवार के चार मासूम बच्चे ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसने उनकी पूरी जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया है। इस बीमारी के कारण सूरज की रोशनी उनके लिए राहत नहीं बल्कि सजा बन गई है।

    सुग्रीव कोरी के परिवार के चार बच्चे अनामिका (5 वर्ष), रिया (9 वर्ष), प्रियांशु (13 वर्ष) और पुष्पेंद्र (10 वर्ष)—जन्म से ही एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी एल्बिनिज्म से पीड़ित हैं। इस बीमारी में शरीर में मेलानिन नामक तत्व नहीं बन पाता, जिसके कारण बच्चों की त्वचा, बाल और आंखों का रंग पूरी तरह सफेद है और उनकी दृष्टि भी बेहद कमजोर है।

    इन बच्चों की हालत इतनी गंभीर है कि तेज धूप या रोशनी में उनकी आंखों में तेज जलन और चुभन होती है। बाहर निकलते ही उनकी आंखें बंद हो जाती हैं और संतुलन बिगड़ने से वे गिर जाते हैं। यही कारण है कि ये मासूम बच्चे अधिकांश समय अंधेरे कमरों में रहने को मजबूर हैं।

    सबसे दुखद पहलू यह है कि उनकी शारीरिक स्थिति के कारण उन्हें समाज में भी उपहास का सामना करना पड़ता है। गांव के कुछ लोग और बच्चे उन्हें ‘अंग्रेज’ कहकर चिढ़ाते हैं, जिससे वे मानसिक रूप से और अधिक आहत हो गए हैं। धीरे-धीरे उन्होंने घर से बाहर निकलना भी कम कर दिया है।

    परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। माता-पिता मजदूरी कर किसी तरह घर चला रहे हैं। ऐसे में बच्चों का इलाज बड़े अस्पतालों में कराना उनके लिए संभव नहीं है। मां माया कोरी और मंजू कोरी ने भावुक होकर बताया कि बच्चे पढ़ना चाहते हैं, लेकिन धुंधली दृष्टि के कारण उन्हें अक्षर भी स्पष्ट दिखाई नहीं देते।

    इस बीच एक और गंभीर समस्या सामने आई है कि बच्चों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन मशीन में मैच नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उनका सरकारी राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं। इसके कारण परिवार को सरकारी राशन और योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

    इसके अलावा अब तक बच्चों का दिव्यांग प्रमाण पत्र भी नहीं बन सका है, जिससे वे पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी सहायता से वंचित हैं। यह स्थिति परिवार की मुश्किलों को और बढ़ा रही है।

    स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह मामला आनुवंशिक बीमारी का प्रतीत होता है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच कराकर उचित इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं जिला प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य टीम को गांव भेजने और आवश्यक सहायता देने की बात कही है। यह कहानी न केवल एक चिकित्सा चुनौती को दर्शाती है, बल्कि समाज और सिस्टम की जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

  • जहां सैनिकों का साहस बना बदलाव की पहचान: सीमावर्ती तंगधार में विकास की नई कहानी लिखी जा रही है

    जहां सैनिकों का साहस बना बदलाव की पहचान: सीमावर्ती तंगधार में विकास की नई कहानी लिखी जा रही है

    नई दिल्ली । देश के सीमावर्ती क्षेत्रों को अक्सर केवल सुरक्षा और रणनीतिक महत्व के नजरिए से देखा जाता रहा है, लेकिन अब इन इलाकों की तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। जम्मू-कश्मीर के तंगधार क्षेत्र में एक ऐसी नई पहल सामने आई है, जो वीरता और विकास को एक साथ जोड़ते हुए सीमाओं की नई पहचान बना रही है। बर्फ से ढके पहाड़ों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच तैयार किया गया शौर्य गाथा कॉम्प्लेक्स अब केवल एक संरचना नहीं बल्कि साहस, समर्पण, संस्कृति और जनसेवा का प्रतीक बनता जा रहा है। यह पहल दिखाती है कि सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रयास किए जा सकते हैं।

    कुपवाड़ा जिले के साधना पास के निकट शमशाबरी पर्वत श्रृंखला के बीच विकसित यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और रणनीतिक महत्व दोनों के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से दस हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह इलाका लंबे समय से अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विशेष महत्व रखता है। यहां तैनात सैनिक हर मौसम में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। अब इसी वीरभूमि पर विकास और पर्यटन की एक नई कहानी आकार लेती दिखाई दे रही है।

    इस विशेष परिसर को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यहां आने वाले लोग केवल पहाड़ों और बर्फीली वादियों का आनंद ही न लें, बल्कि उन सैनिकों के साहस, संघर्ष और बलिदान को भी महसूस कर सकें जो सीमाओं की रक्षा में लगातार डटे रहते हैं। परिसर में बनाए गए युद्ध स्मारक और संग्रहालय में सैन्य इतिहास की प्रेरणादायक झलक देखने को मिलती है। यहां वीर सैनिकों की कहानियों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे आने वाले लोगों को देशभक्ति और समर्पण की भावना का अनुभव हो सके।

    इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसका उद्देश्य केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में भी यह प्रयास महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान, पहाड़ी जीवनशैली और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है।

    इस परियोजना से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने पर स्थानीय युवाओं को नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। छोटे व्यवसाय, स्थानीय उत्पाद और पारंपरिक कलाएं भी इससे लाभान्वित हो सकती हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

    इसके अलावा यहां विकसित किया गया हेलिपैड स्थानीय लोगों के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकता है। खराब मौसम और कठिन रास्तों वाले क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं तथा राहत कार्यों को तेजी से संचालित करने में यह मददगार होगा। तंगधार की यह बदलती तस्वीर यह संदेश देती है कि सीमाओं की सुरक्षा के साथ विकास और जनसेवा को भी समान महत्व दिया जा सकता है। यह पहल शौर्य और सेवा की उस भावना को साकार करती दिखाई देती है जो देश की सीमाओं को नई संभावनाओं से जोड़ रही है।