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  • ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन का भूमिपूजन फिर टला, अमित शाह का दौरा अब दिवाली के बाद

    ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन का भूमिपूजन फिर टला, अमित शाह का दौरा अब दिवाली के बाद


    ग्वालियर । ग्वालियर में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के भूमिपूजन का इंतजार एक बार फिर बढ़ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 29 अक्टूबर को प्रस्तावित ग्वालियर दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन का भूमिपूजन किया जाना था। दौरा दूसरी बार टलने से आयोजन की तैयारियों पर भी असर पड़ा है। अब दिवाली के बाद कार्यक्रम की नई तारीख तय होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन के अनुसार एक से दो दिन में नई प्रस्तावित तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

    ग्वालियर के साडा क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना औद्योगिक विकास और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके लिए पहले 12 अक्टूबर को भूमिपूजन का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया था लेकिन अमित शाह की व्यस्तता के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद 29 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी। इस बार भी कार्यक्रम आगे बढ़ने से परियोजना के औपचारिक शुभारंभ का इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आयोजन की नई तारीख अभी अंतिम रूप से घोषित नहीं हुई है।

    अमित शाह के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियां शुरू कर दी थीं। एयरपोर्ट से मेला ग्राउंड तक सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की योजना बनाई जा रही थी। वीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों के बीच समन्वय और आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा था। कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी साडा के साथ मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को सौंपी गई है। दौरा स्थगित होने के बाद अब नई तारीख के अनुसार व्यवस्थाओं को दोबारा तैयार करना होगा।

    प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार और तकनीकी क्षेत्र पर केंद्रित होना है। योजना के तहत साडा क्षेत्र में करीब 170 एकड़ जमीन पर टेलीकॉम टेक्नोलॉजी से जुड़ा एकीकृत इकोसिस्टम विकसित किया जाना है। मध्यप्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग के बीच हुए समझौता ज्ञापन के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य दूरसंचार उपकरणों के निर्माण और आधुनिक डिजिटल तकनीक से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

    परियोजना में 5जी और भविष्य की 6जी तकनीक से संबंधित उपकरणों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा। शुरुआती स्तर पर करीब 2000 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 4500 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों की घोषणा की गई है। भविष्य में इस क्षेत्र में आठ से नौ हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर विकसित करने का लक्ष्य भी रखा गया है। यदि योजना के मुताबिक औद्योगिक गतिविधियां आगे बढ़ती हैं तो ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में तकनीकी कौशल वाले युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

    टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ आपूर्ति श्रृंखला और सहायक कारोबार के विस्तार की भी संभावना है। हालांकि इन संभावित लाभों को जमीन पर उतारने के लिए परियोजना का समय पर विकास और निवेश का वास्तविक क्रियान्वयन अहम होगा। फिलहाल सभी की नजर भूमिपूजन की नई तारीख पर टिकी है। दिवाली के बाद अमित शाह के ग्वालियर दौरे की तारीख तय होने के साथ ही आयोजन और परियोजना के अगले चरण को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।

  • हेमंत खंडेलवाल ने कहा- अमित शाह ने सहकारिता को दी नई दिशा, मध्यप्रदेश में 50 लाख लीटर दूध कलेक्शन का लक्ष्य

    हेमंत खंडेलवाल ने कहा- अमित शाह ने सहकारिता को दी नई दिशा, मध्यप्रदेश में 50 लाख लीटर दूध कलेक्शन का लक्ष्य


    मध्यप्रदेश:
    की राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश में सहकारिता को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र की दिशा बदली है और प्रदेश में दुग्ध क्रांति की शुरुआत की गई है। खंडेलवाल ने राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में अमित शाह की मौजूदगी को प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    खंडेलवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश में अब तक 1700 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियां बनाई जा चुकी हैं। सांची और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच हुए समझौता ज्ञापन के बाद प्रदेश में दूध का कलेक्शन बढ़कर 12 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। उनके मुताबिक प्रदेश के गौपालकों को अब दूध के लिए 8.50 रुपये प्रति लीटर अधिक दाम मिल रहा है। इससे दूध उत्पादन से जुड़े कृषकों की आय में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह है कि दूध से किसानों की आय बढ़े, गोबर से खाद बने और सरकार के सहयोग से समृद्धि आए। सहकारिता के जरिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

    भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार इसी दिशा में काम कर रही है। उन्होंने आगामी वर्षों में दूध कलेक्शन को 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का संकल्प जताया। खंडेलवाल के अनुसार मध्यप्रदेश में दूध से आय आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस लक्ष्य के लिए दुग्ध सहकारी समितियों और दूध उत्पादन से जुड़े किसानों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सम्मेलन में दुग्ध उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने की बात भी सामने रखी गई।

    भोपाल में आयोजित इस राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में सहकारिता और दुग्ध क्षेत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश में दूध कलेक्शन बढ़ाने और दुग्ध उत्पादकों की आय में वृद्धि के लिए सहकारी मॉडल को मजबूत करने की बात कही गई। खंडेलवाल ने सहकारिता, दुग्ध उत्पादन और गोपालकों की आय को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उनके बयान के अनुसार, मौजूदा 12 लाख लीटर प्रतिदिन के दूध कलेक्शन को आने वाले वर्षों में 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

    खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश में दूध से आय आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही गोबर से खाद तैयार करने और सरकार के सहयोग से समृद्धि लाने की दिशा में काम करने की बात उन्होंने कही। उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में हुए काम को आगे बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया। सम्मेलन में कही गई बातों के अनुसार, आने वाले वर्षों में दूध कलेक्शन बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना इस दिशा में प्रमुख लक्ष्य हैं।

  • देर रात भोपाल पहुंचे अमित शाह… आज गोपालक सम्मेलन में होंगे शामिल, देंगे कई सौगातें

    देर रात भोपाल पहुंचे अमित शाह… आज गोपालक सम्मेलन में होंगे शामिल, देंगे कई सौगातें


    भोपाल।
    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) शुक्रवार देररात भोपाल पहुंचे। यहां सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल (Hemant Khandelwal) ने स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री अमित शाह शनिवार को राजधानी में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में शामिल होंगे। इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य जुटेंगे। इसके अलावा वे नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और मध्य प्रदेश सरकार व केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच लंबित विषयों पर बैठक करेंगे।

    राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित होगा। इसमें भोपाल के अलावा सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम समेत कई जिलों से गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य पहुंचेंगे। सम्मेलन में कृषक कल्याण वर्ष के तहत किए गए कार्यों और बलराम कृषि महोत्सव की जानकारी अमित शाह को दी जाएगी। गृह, पशुपालन, सहकारिता, लोक निर्माण और परिवहन विभाग की ओर से अपने-अपने कार्यों और योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। सम्मेलन में दुग्ध उत्पादन और सहकारिता को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी।


    उज्जैन में डेयरी प्लांट का वर्चुअल भूमि-पूजन करेंगे

    अमित शाह उज्जैन में तीन लाख लीटर प्रसंस्करण क्षमता वाले अत्याधुनिक डेयरी प्लांट का वर्चुअल तरीके से भूमि-पूजन करेंगे। वे भोपाल में तैयार 40 हजार लीटर उत्पादन क्षमता वाले फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल के परिसर में बनाई गई सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला और मिनी डेयरी संयंत्र शिवपुरी का शुभारंभ भी करेंगे।


    नए आपराधिक कानूनों पर प्रदर्शनी का उद्घाटन

    अमित शाह भेल दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों को लेकर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद होटल ताज लेक फ्रंट में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच लंबित विषयों पर बैठक होगी। नारकोटिक्स को लेकर प्रेस वार्ता भी उनके कार्यक्रम में शामिल है। शाह IISER के विस्तारित परिसर भौरी का शिलान्यास भी करेंगे। इसके बाद IISER के मुख्य परिसर में स्वामी विवेकानंद की नवनिर्मित प्रतिमा के अनावरण एवं शिलान्यास समारोह में शामिल होंगे।


    शनिवार का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

    सुबह 11 बजे: होटल ताज लेक फ्रंट से सड़क मार्ग से भेल दशहरा मैदान के लिए रवाना होंगे।
    सुबह 11:25 बजे: भेल दशहरा मैदान पहुंचेंगे।
    सुबह 11:30 से दोपहर 12:00 बजे तक: नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।
    दोपहर 12:05 से 1:05 बजे तक: भेल दशहरा मैदान में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में शामिल होंगे।
    दोपहर 1:05 बजे: भेल दशहरा मैदान से होटल ताज के लिए रवाना होंगे।
    दोपहर 1:30 बजे: होटल ताज लेक फ्रंट पहुंचेंगे।
    दोपहर 1:30 से 2:15 बजे तक: लंच के लिए समय आरक्षित रहेगा।
    दोपहर 2:15 से शाम 4:15 बजे तक: होटल ताज में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच लंबित विषयों पर बैठक करेंगे।
    शाम 4:15 से 5:15 बजे तक: समय आरक्षित रहेगा। इस दौरान नारकोटिक्स पर प्रेस वार्ता निर्धारित है।
    शाम 5:15 बजे: होटल ताज लेक फ्रंट से सड़क मार्ग से IISER के विस्तारित परिसर, भौरी के लिए रवाना होंगे।
    शाम 5:40 बजे: IISER के विस्तारित परिसर, भोपाल बायपास रोड, भौरी पहुंचेंगे।
    शाम 5:45 से 6:00 बजे तक: IISER के विस्तारित परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होंगे।
    शाम 6 बजे: IISER के विस्तारित परिसर से IISER मुख्य परिसर, भौरी के लिए रवाना होंगे।
    शाम 6:05 बजे: IISER मुख्य परिसर, भौरी पहुंचेंगे।
    शाम 6:10 से 7:25 बजे तक: स्वामी विवेकानंद की नवनिर्मित प्रतिमा के अनावरण एवं शिलान्यास समारोह में शामिल होंगे।
    शाम 7:30 बजे: IISER मुख्य परिसर, भौरी से सड़क मार्ग से भोपाल स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे।
    शाम 7:45 बजे: भोपाल स्टेट हैंगर पहुंचेंगे।
    शाम 7:50 बजे: विशेष विमान से भोपाल से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

  • किशाऊ बांध परियोजना को लेकर आज अमित शाह की मौजूदगी में 6 राज्यों के बीच होगा बड़ा समझौता

    किशाऊ बांध परियोजना को लेकर आज अमित शाह की मौजूदगी में 6 राज्यों के बीच होगा बड़ा समझौता


    चंडीगढ़/शिमला।
    किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना (Kishau Multipurpose Dam Project) को लेकर मंगलवार को छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (Memorandum) पर हस्ताक्षर होंगे। इससे हरियाणा (Haryana) को सिंचाई के लिए 836.39 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस परियोजना के लिए हरियाणा को करीब 579 करोड़ रुपये का खर्च उठाना होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) की मौजूदगी में यह समझौता होगा, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी शामिल होंगे। इंजीनियर इन चीफ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि यह समझौता हरियाणा को सिंचाई के क्षेत्र में दूरगामी लाभ देगा।

    किशाऊ बांध हिमाचल के सिरमौर और उत्तराखंड के देहरादून जिले की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत करीब 15,624 करोड़ रुपये है। इसमें 12,096 करोड़ रुपये जल घटक पर खर्च होंगे, जिसका 90 फीसदी केंद्र सरकार वहन करेगी।


    हिमाचल की शर्तों पर समझौता

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि हिमाचल प्रदेश बिजली उत्पादन की लागत का वित्तीय बोझ नहीं उठाएगा। जून में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस पर सहमति बनी थी। दिल्ली और राजस्थान हिमाचल के बिजली घटक की लागत में हिस्सा देंगे। इसके बदले हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत हिमाचल को परियोजना से 211 मेगावाट बिजली मिलेगी और करीब 600 करोड़ रुपये का वार्षिक लाभ होने का अनुमान है।

  • 2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

    2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

    मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि वर्ष 2029 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में UCC लागू हो चुका है और उन्हें भरोसा है कि बाकी राज्यों में भी इसे तय समयसीमा से पहले लागू किया जाएगा।

    अमित शाह ने रविवार को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। UCC के तहत विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में धर्म से अलग समान कानून की व्यवस्था किए जाने का प्रावधान है।

    आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का किया जिक्र

    गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की सुरक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा को हर क्षेत्र में प्राथमिकता दी गई है।

    शाह ने कहा कि 2014 से पहले देश की राजनीति में भ्रष्टाचार, जातिवाद और परिवारवाद का बोलबाला था, जबकि भाजपा सरकार आने के बाद राजनीति का आधार प्रदर्शन और कामकाज बना है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश और रक्षा नीति भी मजबूत हुई है तथा इसमें ‘इंडिया फर्स्ट’ को प्राथमिकता दी जा रही है।

    भारत की आर्थिक प्रगति का भी किया उल्लेख

    अमित शाह ने भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत पहले कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन अब दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने पहली तिमाही में GDP की 7.8 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

    गृह मंत्री ने अनुच्छेद 370, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की स्थिति का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक ये ऐसे मुद्दे थे, जो लंबे समय तक देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बने रहे।

    मणिपुर में NRC पर नेताओं से बातचीत जारी

    मणिपुर में 1951 को आधार वर्ष मानकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने से जुड़े सवाल पर शाह ने कहा कि राज्य के नेताओं और राजनीतिक दलों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय होने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी।

    अवैध घुसपैठ को लेकर गृह मंत्री ने सरकार का रुख दोहराते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान की जाएगी और उन्हें देश से बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक अवैध घुसपैठिए की पहचान कर उसे हटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मातृभाषा को प्राथमिकता देने की वकालत

    भाषा को लेकर जारी बहस के बीच अमित शाह ने मातृभाषा को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य के नेतृत्व को इस विषय का समाधान निकालना चाहिए। शाह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भाषा के मुद्दे पर लोगों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

    सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोगों के विरोध करने के अधिकार का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में इमरजेंसी नहीं लगाई जा सकती।

    चीन पर संवेदनशील जानकारी साझा करने से इनकार

    चीन और अन्य संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों पर अमित शाह ने सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी साझा करने से सशस्त्र बलों को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को देश की रक्षा क्षमता पर पूरा भरोसा है।

    17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’

    अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ की भी घोषणा की। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा।

    17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन है। अभियान में भाजपा, NDA के सहयोगी दल, सामाजिक संगठन और आम लोग शामिल होंगे। इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा जिलों, लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों तथा बूथ स्तर तक ले जाया जाएगा।

    शाह ने कहा कि अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन, उनकी उपलब्धियों और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को सामने रखा जाएगा। अभियान के तहत 12 तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गांवों में स्थानीय भाषाओं में संगीत और नाटक के कार्यक्रम भी होंगे, जिन्हें ‘अनटोल्ड स्टोरीज ऑफ नमो सेवा’ नाम दिया गया है।

    फडणवीस बोले- जनकल्याण पर रहेगा जोर

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार और भाजपा मिलकर ‘सेवा संकल्प अभियान’ में हिस्सा लेंगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में NDA के सभी सहयोगी दल अभियान के साथ हैं।

    फडणवीस के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन का अपना महत्व है। अभियान का उद्देश्य आम लोगों के जीवन में बदलाव लाना और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाना है।

  • कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, कहा- 15 साल में बसाया घर, फिर बेघर मत होने दो

    कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, कहा- 15 साल में बसाया घर, फिर बेघर मत होने दो

    नई दिल्ली। कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PM पैकेज) के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। लगातार मिल रही धमकियों के बीच कर्मचारियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर तत्काल सुरक्षा कदम उठाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे करीब 15 साल से घाटी में अपने जीवन को दोबारा बसाने की कोशिश कर रहे हैं और अब उन्हें फिर से विस्थापन की ओर धकेले जाने का डर सताने लगा है।

    ऑल PM पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने चिट्ठी के माध्यम से कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंताओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि भले ही ऊपर से हालात सामान्य दिखाई देते हों, लेकिन जमीन पर डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। कई परिवार अपनी सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं।

    कर्मचारियों ने कहा है कि हाल के दिनों में सामने आई हर धमकी उन्हें 1990 के दशक की घटनाओं की याद दिलाती है। उस दौर में धमकी भरे पत्र और नोटिस डर का माहौल बनाने के शुरुआती संकेत बने थे। इसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। अब दोबारा धमकी भरे पत्र सामने आने से कर्मचारियों के बीच पुराने भय की स्थिति बन रही है।

    पिछले कुछ हफ्तों के दौरान PM पैकेज के तहत घाटी में तैनात कर्मचारियों को लगातार धमकियां मिलने की बात सामने आई है। कई पत्रों में उन्हें सरकारी नौकरी छोड़ने की चेतावनी दी गई है और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इन मामलों में यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) नाम के संगठन का उल्लेख सामने आया है।

    कर्मचारियों की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब उनका निजी डेटा ऑनलाइन लीक होने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर कुछ कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक साझा किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे घाटी में रह रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है।

    कर्मचारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं। वहीं, जहां ट्रांजिट कॉलोनियां बनाई गई हैं, वहां भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों ने आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और उसे मजबूत करने की मांग की है।

    अमित शाह को लिखी चिट्ठी में धमकियों की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। कर्मचारियों ने PM पैकेज के तहत काम कर रहे लोगों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है। साथ ही ऐसा प्रभावी सिस्टम बनाने की मांग की गई है, जिसके जरिए किसी कर्मचारी को धमकी मिलने पर वह तुरंत शिकायत दर्ज करा सके और समय पर सुरक्षा सहायता मिल सके।

    कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे कश्मीर घाटी छोड़ना नहीं चाहते। उनका कहना है कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने उस जीवन को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है, जो कई दशक पहले उजड़ गया था। वर्ष 2022 में राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। अब नई धमकियों ने एक बार फिर उनकी सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नौकरी और सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न किया जाए। वे कश्मीर में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षित माहौल चाहते हैं।

  • अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे

    अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के एक बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। अन्नामलाई ने दावा किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें दिल्ली बुलाकर पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी संभालने और लंबे समय तक राजधानी में रहने को कहा था। हालांकि उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और तमिलनाडु में रहकर लोगों के बीच काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने कहा कि उनके लिए राज्य में रहकर जनता के मुद्दों पर काम करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    अन्नामलाई के मुताबिक अमित शाह ने उनसे दिल्ली आकर जिम्मेदारी संभालने और करीब तीन साल से अधिक समय तक वहां रहने को कहा था। उन्होंने अमित शाह से स्पष्ट तौर पर कहा कि यह उनके लिए सही नहीं रहेगा। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु में ही रहकर सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के लिए काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने यह भी कहा कि वह बीजेपी के भीतर रहें या पार्टी से बाहर हों लेकिन जिन सिद्धांतों पर अमित शाह के साथ काम किया है उन्हें हमेशा अपने काम में आगे बढ़ाते रहेंगे।

    उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु बीजेपी में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। अन्नामलाई अब वी द लीडर आंदोलन से भी जुड़े हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य तमिलनाडु के लोगों के हितों के लिए काम करना और सामाजिक बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाना है।

    मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर भी अन्नामलाई ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर उन्होंने हमेशा आवाज उठाई है। उनका दावा है कि जब वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे तब भी तमिलनाडु बीजेपी ने मेकेदातु परियोजना का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के लोगों को पीने का पानी मिलना चाहिए लेकिन इसके लिए तमिलनाडु के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

    अन्नामलाई ने कहा कि जब किसी परियोजना का असर दो राज्यों पर पड़ता है तो दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह ईमानदार नेता हैं और गलत काम नहीं करते।

    तमिलनाडु सरकार पर निशाना साधते हुए अन्नामलाई ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार को कम से कम एक साल काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए और उसके बाद उसके प्रदर्शन का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ठीक से काम नहीं करती है तो वह सबसे पहले सवाल उठाएंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से जल्दबाजी में हंगामा करने के बजाय सरकार को काम करने का मौका देने की अपील की।

    हालांकि अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार रोकने के दावों के बावजूद कुछ जगहों पर रिश्वतखोरी फिर शुरू हो गई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मंत्रियों के खिलाफ उनके पास कथित ऑडियो सबूत भी हैं। अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि वह एक साल बाद मुद्दा उठाने से पहले ही सरकार को आगाह कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके मंत्री भी उसी नीति पर चलें।

    अन्नामलाई के बयान ने एक तरफ बीजेपी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ा दी है तो दूसरी तरफ तमिलनाडु की राजनीति में उनके अगले कदम पर भी निगाहें टिक गई हैं। दिल्ली की जिम्मेदारी को ठुकराकर राज्य में सक्रिय रहने का उनका दावा आने वाले समय में उनकी राजनीतिक रणनीति के लिए कितना अहम साबित होगा यह देखना दिलचस्प होगा।

  • संसद की तस्वीर बनी सियासत का केंद्र, टीएमसी सांसद की मौजूदगी से ममता बनर्जी पर उठे सवाल

    संसद की तस्वीर बनी सियासत का केंद्र, टीएमसी सांसद की मौजूदगी से ममता बनर्जी पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । संसद की कैंटीन में हुई एक सामान्य मुलाकात की तस्वीर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय और आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ एक ही टेबल पर भोजन करते नजर आए। तस्वीर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में दोनों नेताओं के भाजपा से नजदीकियां बढ़ने और संभावित दलबदल की अटकलें शुरू हो गईं। हालांकि टीएमसी नेताओं ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संसद परिसर की सामान्य सामाजिक मुलाकात बताया है।

    तस्वीर वायरल होने के बाद सबसे पहले सौगत रॉय ने पूरे घटनाक्रम पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि संसद की कैंटीन में वे पहले से बैठे थे, बाद में अमित शाह और भाजपा के अन्य नेता उसी मेज पर आकर बैठे और कुछ ही देर में वहां से चले गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान किसी तरह की राजनीतिक बातचीत नहीं हुई। उनका कहना था कि भाजपा की ओर से संपर्क किए जाने की चर्चा निराधार है और वास्तविकता यह है कि उनकी पार्टी उन नेताओं से संपर्क कर रही है जो एनडीए में चले गए हैं, ताकि उन्हें वापस लाया जा सके।

    दूसरी ओर शत्रुघ्न सिन्हा ने भी तस्वीर को लेकर उठे विवाद को अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा उनके पुराने मित्र हैं और संसद में साथ बैठकर भोजन करना कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने दोहराया कि इस मुलाकात का राजनीति या पार्टी बदलने जैसी किसी संभावना से कोई संबंध नहीं है।

    टीएमसी के अन्य नेताओं ने भी तस्वीरों को लेकर चल रही चर्चाओं को खारिज किया। सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक कुणाल घोष ने कहा कि संसद या विधानसभा जैसे सार्वजनिक स्थानों पर अलग-अलग दलों के नेताओं का मिलना-जुलना सामान्य प्रक्रिया है। ऐसी तस्वीरों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विचारधारा और राजनीतिक प्रतिबद्धता किसी तस्वीर से तय नहीं होती।

    हालांकि पार्टी के भीतर से अलग स्वर भी सुनाई दिए। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने तस्वीरों को ध्यान से देखा है और संभव है कि इसके पीछे कोई रणनीति हो। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से उनका कोई संबंध नहीं है और राजनीति में इस तरह की गतिविधियां होती रहती हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल के दिनों में राज्य की राजनीति में कई नेताओं के दल बदलने और राजनीतिक समीकरण बदलने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में संसद की कैंटीन में सामने आई यह तस्वीर भी चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि फिलहाल न तो सौगत रॉय और न ही शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा में शामिल होने जैसी किसी संभावना के संकेत दिए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के भीतर अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच सामाजिक संबंध और औपचारिक मुलाकातें लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं। इसलिए केवल एक तस्वीर के आधार पर किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में यदि इस घटनाक्रम पर कोई नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है, तभी इन अटकलों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

  • ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं

    ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह और महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की सराहना की है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भारत के खेल इतिहास में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर दौड़ में भारत के लिए पहला पदक जीतना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह सफलता देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी और आने वाले वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    गुलवीर सिंह ने ग्लासगो में बारिश के बीच बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार दौड़ लगाई। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी भारतीय धावक पूरे मुकाबले में शीर्ष धावकों के साथ बने रहे और अंतिम लैप में जबरदस्त गति दिखाते हुए 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। इससे पहले उनके नाम एशियन गेम्स का कांस्य पदक और एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दो स्वर्ण पदक भी दर्ज हैं।

    वहीं महिला वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर कौर ने भी भारत का गौरव बढ़ाया। उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग में कुल 227 किलोग्राम भार उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। स्नैच राउंड में हरजिंदर ने 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने 240 किलोग्राम कुल वजन उठाकर जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबे हेमन ने 218 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

    हरजिंदर की उपलब्धि पर अमित शाह ने कहा कि वेटलिफ्टिंग में भारत का पदक जीतने का सिलसिला लगातार जारी है। उन्होंने लिखा कि यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है तथा भविष्य में भी उनसे ऐसे ही उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग हमेशा से भारत के सबसे मजबूत खेलों में शामिल रही है और इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों ने इस परंपरा को कायम रखा है। दूसरी ओर एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक पदक यह संकेत देता है कि अब भारत लंबी दूरी की दौड़ जैसी चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

    गुलवीर सिंह और हरजिंदर कौर की इन उपलब्धियों ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के अभियान को नई मजबूती दी है। दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से देशवासियों में उत्साह है और भारतीय दल से आगामी मुकाबलों में भी पदकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह बोले- BJP में पद नहीं, देश और छात्रों का हित सर्वोपरि

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह बोले- BJP में पद नहीं, देश और छात्रों का हित सर्वोपरि


    नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में किसी भी पद से अधिक महत्व देश, युवाओं और विद्यार्थियों के हित का है। उन्होंने कहा कि प्रधान का इस्तीफा इसी सोच और संगठन की कार्यशैली का प्रतीक है।

    अमित शाह ने शनिवार देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्र, युवा पीढ़ी और छात्र हैं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी सिद्धांत को दर्शाता है।

    छात्रों के हित में लिया गया फैसला
    धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और NEET पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा था कि यह निर्णय छात्रों के भविष्य की रक्षा और जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।

    पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के लिए सरकार प्रतिबद्ध
    अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधार लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं और इससे NEET में सफल विद्यार्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित होगा।

    प्रधान के कार्यकाल की उपलब्धियों का किया उल्लेख
    गृह मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री के रूप में किए गए कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं को बढ़ावा देने, पीएम श्री स्कूलों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहन, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने में प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए भी कई अहम पहल कीं। अमित शाह के अनुसार उनका कार्यकाल विकसित भारत के लक्ष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिचायक रहा।