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  • राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से की भेंट, पंजाब से जुड़े मुद्दों पर केंद्र से सहयोग का आग्रह

    राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से की भेंट, पंजाब से जुड़े मुद्दों पर केंद्र से सहयोग का आग्रह

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से राज्यसभा सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच पंजाब से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुलाकात को राज्य के विकास, जनकल्याण और कानून-व्यवस्था की स्थिति को मजबूत करने के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। हरभजन सिंह ने इस मुलाकात की जानकारी स्वयं साझा करते हुए बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार से पंजाब के हितों की रक्षा और विकास कार्यों को गति देने के लिए सहयोग की अपील की है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हरभजन सिंह के राजनीतिक रुख को लेकर भी चर्चा बनी हुई है और उनकी यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    हरभजन सिंह भारतीय क्रिकेट टीम के एक सफल और अनुभवी खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने अपनी गेंदबाजी से देश को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाने में योगदान दिया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और राज्यसभा सांसद के रूप में पंजाब के मुद्दों को उठाने का कार्य किया। हाल के वर्षों में वे पंजाब से जुड़े विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक विषयों पर सक्रिय रूप से अपनी राय रखते रहे हैं। अमित शाह से उनकी यह मुलाकात ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में सुरक्षा व्यवस्था, विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को लेकर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान पंजाब की वर्तमान परिस्थितियों, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और विकास परियोजनाओं को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। हरभजन सिंह ने राज्य के हितों को प्राथमिकता देने की बात रखते हुए केंद्र से सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के विकास के लिए मजबूत समन्वय और प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है, जिससे आम जनता को सीधे लाभ मिल सके। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी विभिन्न मुद्दों को ध्यान से सुना और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

    यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राजनीतिक हलकों में हरभजन सिंह के हालिया रुख को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। पंजाब में कुछ राजनीतिक समूहों द्वारा इस मुलाकात को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की जा रही है, जबकि समर्थक इसे विकास के दृष्टिकोण से एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं। राज्यसभा सांसद के रूप में हरभजन सिंह लगातार पंजाब से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाने का प्रयास कर रहे हैं और यह मुलाकात भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।

    कुल मिलाकर यह बैठक पंजाब की राजनीति और विकास के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है, जिसमें केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया है।

  • यूसीसी पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- वनवासियों की परंपराओं से नहीं होगी छेड़छाड़, धर्मांतरण पर भी दी सख्त चेतावनी

    यूसीसी पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- वनवासियों की परंपराओं से नहीं होगी छेड़छाड़, धर्मांतरण पर भी दी सख्त चेतावनी

    नई दिल्ली ।यूनिफॉर्म सिविल कोड और जनजातीय समाज को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा बयान देते हुए वनवासी समाज को आश्वस्त करने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर जो आशंकाएं फैलाई जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है और जनजातीय समुदाय की परंपराओं, अधिकारों तथा सांस्कृतिक पहचान पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद यूसीसी को लेकर चल रही बहस को नया आयाम मिल गया है।

    एक बड़े जनजातीय सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि समाज में एक भ्रम फैलाया जा रहा है कि यूसीसी लागू होने के बाद जनजातीय समुदाय अपनी संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली से वंचित हो जाएगा। उन्होंने इस धारणा को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि वनवासी समाज के अधिकारों और परंपराओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में उनके सांस्कृतिक मूल्यों के साथ हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि जहां-जहां यूसीसी लागू किया गया है, वहां जनजातीय समाज को विशेष प्रावधानों के तहत अलग रखा गया है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय परंपराएं, सामाजिक ढांचे और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित बनी रहे। उन्होंने वनवासी समाज से अपील करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम में आने की आवश्यकता नहीं है।

    इस दौरान गृह मंत्री ने धर्मांतरण के विषय पर भी स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म और परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। लेकिन लालच, दबाव या किसी अन्य माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल पहचान की रक्षा करने का संदेश भी दिया।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारतीय परंपराओं और धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए वनवासी समाज और सनातन संस्कृति के ऐतिहासिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में जनजातीय समाज की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करने में उनका योगदान विशेष रहा है।

    इसके अलावा उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में विकास और बदलाव को लेकर भी कई बातें रखीं। उन्होंने कहा कि अब दूरस्थ और वन क्षेत्रों में विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और सरकार इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के जरिए जनजातीय समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    यूसीसी और जनजातीय अधिकारों को लेकर दिया गया यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह विषय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है, क्योंकि इससे कानून, संस्कृति और सामाजिक संरचना जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हुए हैं।

  • अमित शाह का ‘स्मार्ट बॉर्डर’ प्लान: घुसपैठ पर कड़ा संदेश, सुरक्षा होगी हाई-टेक

    अमित शाह का ‘स्मार्ट बॉर्डर’ प्लान: घुसपैठ पर कड़ा संदेश, सुरक्षा होगी हाई-टेक

    नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए एक बड़े और महत्वाकांक्षी “स्मार्ट बॉर्डर” प्लान की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगी लगभग 6,000 किलोमीटर लंबी सीमा को तकनीक आधारित और पूरी तरह अभेद्य बनाना है।

    नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force) द्वारा आयोजित वार्षिक रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार देश से हर घुसपैठिए को खोजकर बाहर करेगी। उन्होंने कहा कि भारत की सीमाओं पर अब किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ या जनसांख्यिकीय बदलाव की साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    गृह मंत्री ने बताया कि “स्मार्ट बॉर्डर” परियोजना के तहत सीमा सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा। इसमें ड्रोन, रडार, हाई-टेक कैमरे, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जिससे सीमा पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सकेगा। उनका कहना था कि पारंपरिक सुरक्षा प्रणाली अब बदलते खतरे के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

    अमित शाह ने कहा कि भारत की सीमाओं को इस समय कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें घुसपैठ, ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी, नकली मुद्रा, मवेशियों की अवैध आवाजाही और संगठित अपराध शामिल हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

    गृह मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल घुसपैठ रोकना नहीं, बल्कि उन सभी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजना भी है, जो अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया।

    उन्होंने सीमा सुरक्षा बल के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को पहले से पहचानना और उसके अनुसार रणनीति बनाना बेहद जरूरी है।

    अमित शाह ने यह भी दावा किया कि 2014 के बाद देश की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव आया है और सरकार ने आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए।

    इस योजना के तहत केंद्र सरकार आने वाले समय में सीमा सुरक्षा से जुड़े राज्यों और एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाएगी। इसके अलावा सीएपीएफ जवानों के कल्याण और नशा तस्करी के खिलाफ बड़े अभियान की भी तैयारी की जा रही है।

    कुल मिलाकर, “स्मार्ट बॉर्डर” योजना को सरकार की एक बड़ी सुरक्षा रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका लक्ष्य आधुनिक तकनीक के जरिए भारत की सीमाओं को और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाना है।

  • हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग… दिए ये निर्देश

    हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग… दिए ये निर्देश


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने रविवार को दिल्ली में एक हाई लेवल मीटिंग (High Level Meeting.) में देश में संभावित बाढ़ और हीट वेव (Floods and Heat Waves) से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमें ‘जीरो कैजुअल्टी डिजास्टर मैनेजमेंट’ के लिए काम करना होगा.

    मीटिंग में देश के हर राज्य में बाढ़ संकट प्रबंधन टीमों (FCMT) के गठन, हीटवेव से कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान को न्यूनतम रखने और मौसम संबंधी योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर फोकस किया गया।

    इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और सेंट्रल वाटर कमीशन के मौसम और बाढ़ संबंधी पूर्वानुमान के समय को 3 दिन से बढ़ाकर 7 दिन करने की बात भी कही गई।


    एनडीएमए के दिशानिर्देशों का पालन

    गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि आपदाओं को लेकर नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के पालन की राज्य, जिला और नगरपालिका स्तर पर नियमित समीक्षा की जानी चाहिए।

    जल संचय और चेक डैम परियोजनाओं के जरिए जलस्तर सुधारने और जल संरक्षण की संभावनाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया. इसके अलावा कैम्पा फंड का इस्तेमाल पर्यावरण संतुलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को और प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है.

    साथ ही, कम से कम 60 जोखिम वाली झीलों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं. सभी राज्यों में स्टेट-लेवल इंटीग्रेटेड रिज़र्वॉयर ऑपरेशंस लागू करने पर भी जोर दिया गया. मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार की बात भी कही गई.

  • बंगाल का नया CM कौन…. आज MLAs संग अमित शाह की बैठक पर सभी की नजरें

    बंगाल का नया CM कौन…. आज MLAs संग अमित शाह की बैठक पर सभी की नजरें


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) के नतीजों के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य की कमान किसके हाथों में होगी। भारतीय जनता पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस बरकरार है। इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज कोलकाता में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक हाई-प्रोफाइल बैठक करने वाले हैं। बैठक के बाद जल्द ही राज्य के अगले सीएम के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा।


    अमित शाह और मोहन चरण माझी को अहम जिम्मेदारी

    पार्टी आलाकमान ने विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्य पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।


    बैठक में कैसे तय होगा विधायक दल का नेता?

    आज होने वाली इस बैठक में दोनों पर्यवेक्षक सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे। सूत्रों के अनुसार, शाह व्यक्तिगत स्तर पर और सामूहिक रूप से विधायकों से बात करेंगे ताकि मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति बनाई जा सके। विधायकों की राय जानने के बाद विधायक दल के नेता और अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता शमिक भट्टाचार्य बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं, जिसके बाद इस फैसले को आधिकारिक रूप दिया जाएगा।


    9 मई को होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह

    नए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। इस बीच राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच रहे हैं। पीएम मोदी की मौजूदगी पश्चिम बंगाल की राजनीति में होने जा रहे इस बड़े बदलाव को और भी खास बनाएगी।


    रेस में और कौन?

    नंदीग्राम के बाद भवानीपुर में भी जीत का परचम लहराने वाले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे शुभेंदु अधिकारी का नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहा है। हालांकि बीजेपी अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती रही है। शुभेंदु के अलावा कुछ अन्य नामों पर भी चर्चा गर्म है।

    सुकांत मजूमदार: प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनके शांत स्वभाव और आरएसएस (RSS) के साथ उनके गहरे जुड़ाव को देखते हुए उन्हें एक ‘डार्क हॉर्स’ माना जा रहा है।

    दिलीप घोष: पार्टी को जमीनी स्तर पर खड़ा करने वाले दिलीप घोष का नाम भी चर्चा से बाहर नहीं है। उनका आक्रामक अंदाज कार्यकर्ताओं में जोश भरता है।

    महिला कार्ड या नया चेहरा: महिला वोटरों को साधने के लिए बीजेपी किसी महिला विधायक या फिर केंद्र से किसी अनुभवी चेहरे को भी बंगाल की कमान सौंप सकती है।

    पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया, जिससे राज्य में टीएमसी के लगातार 15 वर्षों के शासन का अंत हो गया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की।

  • बंगाल हत्या कांड पर गरमाई सियासत, AAP ने अमित शाह से पूछा—कहां गई केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था?

    बंगाल हत्या कांड पर गरमाई सियासत, AAP ने अमित शाह से पूछा—कहां गई केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था?

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है। इस घटना को लेकर आम आदमी पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और केंद्र सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने इस हत्या की निंदा करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था और केंद्रीय सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता बताया है।

    AAP की ओर से कहा गया है कि जब राज्य में पहले से ही भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, तो इसके बावजूद इस तरह की हत्या होना कई सवाल खड़े करता है। पार्टी ने पूछा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षा बलों के बावजूद यह गोलीबारी कैसे हुई और जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

    <blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”hi” dir=”ltr”>कहाँ है बंगाल में वो 2.5 लाख केंद्रीय बल, जिसे इसीलिए तैनात किया गया था ताकि कोई घटना न हो? क्या इस गोलीकांड की ज़िम्मेदारी गृह मंत्री लेंगे, जो वहाँ पूरे राज्य की कमान संभाले हुए हैं?<br><br>अगर भाजपा बंगाल के सबसे बड़े नेता के करीबी को भी गोली से नहीं बचा पाई, तो आम जनता को क्या… <a href=”https://t.co/iX0lFDM0vR”>https://t.co/iX0lFDM0vR</a></p>&mdash; Priyanka Kakkar (@PKakkar_) <a href=”https://twitter.com/PKakkar_/status/2052092247286710542?ref_src=twsrc%5Etfw”>May 6, 2026</a></blockquote> <script async src=”https://platform.twitter.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script>
    इस मामले को लेकर AAP प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए सवाल उठाया है कि क्या गृह मंत्री इस घटना की जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी बड़े राजनीतिक नेता के करीबी को ही सुरक्षा नहीं मिल पा रही है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा। पार्टी ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए देश की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई है।

    यह घटना उस समय हुई जब चंद्रनाथ रथ अपनी कार से यात्रा कर रहे थे और अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। गोलीबारी में उनकी मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। पुलिस ने इसे सुनियोजित हमला मानते हुए जांच शुरू कर दी है और कई एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है।

    हत्या के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अलग-अलग राजनीतिक दल इस घटना को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। कुछ इसे कानून व्यवस्था की विफलता बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक साजिश का हिस्सा मान रहे हैं। इस बीच इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार जांच में जुटी है।

    AAP ने अपने बयान में यह भी कहा है कि अगर देश में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं। पार्टी ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह घटना अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है।

  • बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता

    बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में भाजपा (BJP) की शानदार जीत के बाद अब नई सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है। शपथ ग्रहण नौ मई को कोलकाता (Kolkata.) के ब्रिगेड परेड ग्राउंड (Brigade Parade Ground) में सुबह दस बजे होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगते ही तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो आठ मई को भाजपा विधायकों की बैठक होगी। इस सबमें सबसे अहम बात है पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का बंगाल जाना।

    अमित शाह (Amit Shah) के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद शायद यह पहला मौका होगा कि जब वह किसी राज्य के नतीजे सामने आने के बाद बतौर पर्यवेक्षक उस राज्य का दौरा करेंगे। भाजपा के इतिहास पर नजर डालें तो यह कोई सामान्य घटना नहीं है। ऐसे में कयासों का दौर शुरू हो चुका है।


    कौन बनेगा बंगाल का मुख्यमंत्री?

    भाजपा ने असम और बंगाल में शानदार जीत दर्ज की है। असम में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) का नाम तय माना जा रहा है। पूरे देश की निगाहें बंगाल पर टिकी हुई हैं। राज्य में सरकार बनाने की कवायद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर जा सकते हैं। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शपथ ग्रहण से पहले गृह मंत्री का दौरा कई मायनों में अहम है। पर्यवेक्षक के रूप में गृह मंत्री दौरे के दौरान कई अहम फैसले कर सकते हैं। इसमें मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्रियों के नाम पर रणनीति बनेगी। बैठक में पश्चिम बंगाल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।

    बंगाल के भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने की रेस में शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वह ममता बनर्जी के कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें पार्टी ने दो दो सीटों से उतारा था। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर टीएमसी को मात दी है। पिछली बार उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। इस चुनाव में उन्होंने भवानीपुर में भी ममता को ही मात दी है। इससे उनका कद भाजपा में और बड़ा हो गया है। हालांकि अमित शाह के पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद से यह चर्चा जरूर होने लगी है कि अगर सबकुछ सामान्य तरीके से होना होता तो गृह मंत्री खुद बतौर पर्यवेक्षक बंगाल का दौरा नहीं करते।


    शुभेंदु नहीं तो कौन बनेगा बंगाल का CM?

    भारतीय जनता पार्टी ने राज्यों में मुख्यमंत्री चुनने में हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दिल्ली इसका ताजा उदाहरण हैं। तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए भाजपा ने ऐसे नाम को आगे बढ़ाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अब अमित शाह के दौरे के बाद से सवाल उठ रहा है कि बंगाल में भी भाजपा ऐसा ही कुछ तो नहीं करने जा रही है। हालांकि, बाकी राज्यों की तुलना में बंगाल की स्थिति काफी अलग है। यहां भाजपा को ऐसे नेतृत्व की जरूरत होगी जो पार्टी के भविष्य के हित में हो।

  • 5 राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज: बंगाल में 9 मई को शपथ ग्रहण की तैयारी, BJP ने शाह-नड्डा को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

    5 राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज: बंगाल में 9 मई को शपथ ग्रहण की तैयारी, BJP ने शाह-नड्डा को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी



    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 9 मई को शपथ ग्रहण की तैयारी बताई जा रही है।

    शपथ ग्रहण की तैयारी
    BJP नेताओं के मुताबिक, 9 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण हो सकता है। यह दिन रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिसे बंगाल में खास सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है।सरकार गठन और विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए BJP ने बड़े नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी हैअमित शाह को पश्चिम बंगाल का केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है, जबकि जेपी नड्डा को असम की जिम्मेदारी दी गई है।

    अन्य राज्यों में भी हलचल
    चुनाव के बाद तमिलनाडु में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। वहीं एम के स्टालिन ने इस्तीफा सौंप दिया है और कहा है कि उनकी पार्टी विपक्ष की भूमिका निभाएगी।

    बदला सियासी गणित
    इन चुनाव नतीजों के बाद देश की राजनीति का समीकरण बदलता नजर आ रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक, कई बड़े विपक्षी चेहरों को झटका लगा है और सत्ता संतुलन में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

    जमीनी स्तर की कहानियां भी खास
    बंगाल में कुछ सीटों पर दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले। कांग्रेस के एक उम्मीदवार का नाम पहले वोटर लिस्ट से हट गया था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के बाद बहाल हुआ और उन्होंने चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया।

    नेताओं के बयान
    BJP नेताओं ने जीत का श्रेय संगठन और रणनीति को दिया है, जबकि विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। ममता बनर्जी ने भी कुछ सीटों पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं और इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया देने की बात कही है।

    अब सबसे बड़ी चुनौती नई सरकारों के सामने वादों को पूरा करने और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की होगी। खासतौर पर आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर फैसले अहम रहेंगे। कुल मिलाकर, 5 राज्यों के चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति को नई दिशा दे दी है, जहां सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अगला कदम बेहद अहम होने वाला है।

  • शुभेन्दु 1 सीट से लड़ना चाहते थे….अमित शाह ने दिया 2 सीटों का फॉर्मूला… ममता को दिखाया 2021 का रीकैप

    शुभेन्दु 1 सीट से लड़ना चाहते थे….अमित शाह ने दिया 2 सीटों का फॉर्मूला… ममता को दिखाया 2021 का रीकैप


    कोलकाता।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी (Trinamool Congress supremo Mamata Banerjee) को 2021 का रीकैप दिखा दिया। सोमवार को जब नतीजे घोषित हुए तो एक बार फिर भाजपा हैवी वेट शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने उन्हें हरा दिया, लेकिन इस बार मैदान भवानीपुर का रहा। इसके अलावा अधिकारी ने नंदीग्राम से भी जीत दर्ज कर ली है। अब खबर है कि अधिकारी सिर्फ एक ही सीट से लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें दो सीटों से लड़ाने का फॉर्मूला केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने दिया था।


    जब अमित शाह ने बताई भवानीपुर की इनसाइड स्टोरी

    भवानीपुर सीट ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता था। इस बार भी वह इस सीट से चुनाव लड़ रहीं थीं। 2 अप्रैल को गृह मंत्री शाह भवानीपुर में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। तब उन्होंने कहा था, ‘शुभेंदु दा हमारे नंदीग्राम से लड़ना चाहते थे। मैंने शुभेंदु दा को कहा था कि सिर्फ नंदीग्राम नहीं, ममता के घर में जाकर उसको हराना है।’

    भवानीपुर सीट पर जीत के बाद अधिकारी ने बताया कि मतगणना के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री शाह लगातार उनके संपर्क में थे और इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले को लेकर चिंता जताई थी।


    शुभेंदु अधिकारी ने 17 हजार का अंतर कवर किया

    भाजपा नेता और टीएमसी प्रमुख के बीच भवानीपुर में रोमांचक मुकाबला देखने को मिला था। यहां शुरुआती दौर में अधिकारी ने लीड हासिल कर ली थी, लेकिन कुछ राउंड काउंटिंग के बाद बनर्जी आगे आ गईं थीं। यहां तक कि एक समय पर वह करीब 17 हजार मतों से आगे भी चल रही थीं, लेकिन जैसे-जैसे राउंड बढ़े और अंतर कम होता गया।

    अंतिम नतीजा आया कि अधिकारी ने 20 राउंड की काउंटिंग के बाद बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। उन्हें कुल 73 हजार 917 वोट मिले थे। जबकि, बनर्जी को 58 हजार 812 वोट मिले। इस सीट पर तीसरे स्थान पर लेफ्ट नेता श्रीजीब बिस्वास रहे और चौथे पर महज 1257 वोट पाने वाले कांग्रेस नेता प्रदीप प्रसाद थे।


    डबल धमाका

    ऐसा ही नतीजा नंदीग्राम से भी देखने को मिला, जहां अधिकारी ने अपने पूर्व करीबी और टीएमसी प्रत्याशी पवित्र कर को 9 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। यहां उन्होंने 1 लाख 27 हजार 301 वोट पाकर जीत दर्ज की। सीट पर कांग्रेस पांचवें स्थान पर रही और महज 794 वोट ही हासिल कर सकी।


    जीत के क्या बोले अधिकारी

    अधिकारी ने इसे निर्णायक राजनीतिक क्षण बताया है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, जीत का प्रमाणपत्र दिखाते हुए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि बनर्जी को उनके गढ़ में हराना प्रतीकात्मक और रणनीतिक, दोनों ही दृष्टि से अहम है। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत महत्वपूर्ण है। ममता बनर्जी को हराना काफी मायने रखता है।’

    अधिकारी ने दावा किया कि यह चुनाव परिणाम ममता के राजनीतिक करियर के अंत का संकेत है। उन्होंने कहा, ‘यह जीत हिंदुत्व की जीत है।’ उन्होंने दावा किया कि विभिन्न वर्गों, यहां तक कि अन्य दलों के पारंपरिक समर्थकों ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन क्षेत्र में वामपंथी मतदाताओं के एक वर्ग ने उनका समर्थन किया, जिससे तृणमूल कांग्रेस विरोधी वोटों को एकजुट करने में मदद मिली।

  • बंगाल में बीजेपी की ‘सुनामी’ के संकेत, स्वाति मालीवाल बोलीं- खत्म होगी गुंडागर्दी और तुष्टिकरण की राजनीति

    बंगाल में बीजेपी की ‘सुनामी’ के संकेत, स्वाति मालीवाल बोलीं- खत्म होगी गुंडागर्दी और तुष्टिकरण की राजनीति

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त बढ़त बना ली है और बहुमत के आंकड़े को पार करती नजर आ रही है। 294 सीटों वाली विधानसभा में 148 का आंकड़ा जादुई माना जाता है, जिसे बीजेपी शुरुआती ट्रेंड्स में पार करती दिखाई दे रही है।

    इसी बीच आम आदमी पार्टी छोड़कर हाल ही में बीजेपी में शामिल हुईं राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इस संभावित जीत को “ऐतिहासिक बदलाव” बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी नेतृत्व को बधाई देते हुए कहा कि बंगाल में दशकों से चली आ रही हिंसा, गुंडागर्दी और वोट बैंक की राजनीति अब खत्म होने की ओर है।

    मालीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजेपी सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि असम और पुडुचेरी में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आ रहा है।

    चुनावी रुझानों में यह भी देखने को मिल रहा है कि बीजेपी सीमावर्ती इलाकों, आदिवासी क्षेत्रों और औद्योगिक बेल्ट में मजबूत पकड़ बना रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को कोलकाता और कुछ पारंपरिक गढ़ों में बढ़त मिल रही है।

    सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना में पहले पोस्टल बैलेट और फिर ईवीएम वोटों की गिनती की जा रही है। शुरुआती आंकड़े भले ही अंतिम नतीजे न हों, लेकिन जो तस्वीर उभर रही है, वह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।