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  • नागोया एशियाई खेलों में भारत की बड़ी चुनौती, 17 मेडल के बाद सिर्फ एक गोल्ड, हांगझोउ के प्रदर्शन से कितना बदला समीकरण

    नागोया एशियाई खेलों में भारत की बड़ी चुनौती, 17 मेडल के बाद सिर्फ एक गोल्ड, हांगझोउ के प्रदर्शन से कितना बदला समीकरण


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारत के खाते में 24 सितंबर तक कुल 17 मेडल आ चुके हैं लेकिन इनमें गोल्ड सिर्फ एक है। भारत ने 7 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल भी जीते हैं। पदकों की कुल संख्या देखकर प्रदर्शन सामान्य नजर आ सकता है लेकिन मेडल टैली में भारत 14वें स्थान पर है और यही आंकड़ा भारतीय खेल व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े कर रहा है। खास बात यह है कि नागोया एशियन गेम्स की तैयारी के लिए पिछले तीन साल में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग इंटरनेशनल एक्सपोजर उपकरण कोचिंग और विशेषज्ञ सेवाओं पर 702.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम यानी TOPS के जरिए 97.84 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस तरह कुल सरकारी निवेश करीब 800.70 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।

    नागोया में भारत का एकमात्र गोल्ड महिला क्रिकेट टीम ने जीता है। भारतीय टीम ने श्रीलंका को 147 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद भारत को सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जरूर मिले लेकिन गोल्ड की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। यही आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इससे पहले हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 106 मेडल जीते थे। इनमें 28 गोल्ड 38 सिल्वर और 40 ब्रॉन्ज शामिल थे। भारत उस प्रदर्शन के साथ चौथे स्थान पर रहा था।

    हांगझोउ के बाद भारतीय खेलों से उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। पहली बार 100 से ज्यादा मेडल जीतने के बाद अब एशियन गेम्स में भारत के प्रदर्शन को उसी पैमाने पर देखा जा रहा है। हालांकि नागोया गेम्स अभी खत्म नहीं हुए हैं इसलिए अंतिम मेडल टैली आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। भारत के कई खेलों में अभी मुकाबले बाकी हैं और आने वाले दिनों में मेडल की संख्या बढ़ सकती है।

    इस बार भारत ने 501 खिलाड़ियों का दल उतारा है जिसमें 310 खिलाड़ी पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। टीम के साथ 265 सदस्यीय सपोर्ट स्टाफ भी मौजूद है। तैयारी पर खर्च की बात करें तो इंटरनेशनल एक्सपोजर पर 251.4 करोड़ रुपये घरेलू ट्रेनिंग पर 118.3 करोड़ रुपये उपकरणों पर 89.2 करोड़ रुपये विदेशी विशेषज्ञों पर 86.3 करोड़ रुपये और विदेशी ट्रेनिंग पर 39.8 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि तैयारी का दायरा काफी बड़ा रहा है।

    भारत की चुनौती केवल मेडल की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि अलग अलग खेलों में गोल्ड जीतने की क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। हांगझोउ में शूटिंग और एथलेटिक्स ने भारत को बड़ी संख्या में पदक दिलाए थे। एथलेटिक्स से 29 और शूटिंग से 22 पदक आए थे। शूटिंग ने 7 गोल्ड जबकि एथलेटिक्स ने 6 गोल्ड जीते थे। नागोया में शुरुआती चरण में इन खेलों से वैसी गोल्ड बढ़त दिखाई नहीं दी है।

    मेडल टैली में चीन जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भारत से आगे हैं। हांगझोउ में भी भारत इन देशों के बाद चौथे स्थान पर रहा था। ऐसे में नागोया भारतीय खेलों के लिए सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाने का मंच नहीं है बल्कि अलग अलग खेलों में मजबूत प्रदर्शन की क्षमता परखने का अवसर भी है। एशियन गेम्स का प्रदर्शन लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए नागोया के अंतिम आंकड़े आने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत कुल कितने मेडल जीतता है और उनमें गोल्ड की हिस्सेदारी कितनी रहती है।

  • आखिरी 500 मीटर में बदला पूरा मुकाबला सतनाम-सलमान ने ऐसे जीता रोइंग में ब्रॉन्ज मेडल

    आखिरी 500 मीटर में बदला पूरा मुकाबला सतनाम-सलमान ने ऐसे जीता रोइंग में ब्रॉन्ज मेडल


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। नागोया में गुरुवार को रोइंग के पुरुष डबल स्कल्स मुकाबले में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। भारतीय जोड़ी ने नागरागावा इंटरनेशनल रेगाटा कोर्स पर 6 मिनट 13.25 सेकेंड का समय दर्ज किया। मुकाबले में दोनों रोअर्स ने शुरुआत से ही दमदार प्रदर्शन किया और लंबे समय तक पदक की मजबूत स्थिति में बने रहे।

    सतनाम सिंह और सलमान खान 1500 मीटर तक दूसरे स्थान पर चल रहे थे। हालांकि आखिरी 500 मीटर में उनकी रफ्तार थोड़ी कम हुई और भारतीय जोड़ी तीसरे स्थान पर पहुंच गई। इसके बावजूद दोनों ने अपनी स्थिति बरकरार रखी और भारत के खाते में एक और पदक जोड़ दिया। चीन की यी शुडी और यीदे नी की जोड़ी ने 6 मिनट 9.37 सेकेंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। उज्बेकिस्तान की पावेल सोरिन और मेखरोजबेक मामातकुलोव की जोड़ी ने 6 मिनट 10.49 सेकेंड के समय के साथ सिल्वर हासिल किया।

    इस पदक के साथ सतनाम सिंह ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार रोइंग में मेडल जीता है। इससे पहले उन्होंने 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में पुरुषों के क्वाड्रपल स्कल्स इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। अब डबल स्कल्स में सलमान खान के साथ उनकी जोड़ी ने भारत को एक और पदक दिलाया है।

    उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले सलमान खान का रोइंग करियर साल 2018 में शुरू हुआ। वह भारतीय सेना के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में शामिल हुए थे। उनके कोचों ने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें रोइंग टीम का हिस्सा बनाया। शुरुआती दौर में उन्होंने बटालियन और इंटर सेंटर प्रतियोगिताओं में पदक जीते। एक समय ऐसा भी आया जब सलमान ने खेल छोड़ने के बारे में सोचा लेकिन कोचों के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। बाद में उन्हें आर्मी रोइंग नोड में प्रशिक्षण का मौका मिला।

    साल 2023 में सलमान को टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम में शामिल किया गया। 2024 एशियन रोइंग कप में गोल्ड जीतने के बाद उन्हें भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर प्रमोशन मिला।

    वहीं पंजाब के मानसा जिले के पट्टा मालुका गांव के सतनाम सिंह ने रोइंग से पहले नेशनल लेवल पर हैंडबॉल खेला था। 2018 में ओलंपियन स्वर्ण सिंह विर्क की सलाह पर उन्होंने रोइंग को अपनाया। इसके बाद उन्होंने तेजी से पहचान बनाई। सतनाम 2018 यूथ ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में भी खिताब जीत चुके हैं।

    इस मुकाबले में भारत को एक और पदक की उम्मीद थी। पुरुषों के सिंगल स्कल्स फाइनल में बलराज पंवार 6 मिनट 54.80 सेकेंड के समय के साथ चौथे स्थान पर रहे। वह 1500 मीटर तक दूसरे स्थान पर थे लेकिन अंतिम 500 मीटर में पीछे हो गए। इसके बावजूद सतनाम और सलमान की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रोइंग में भारत को ब्रॉन्ज दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया।

  • रोशिबिना देवी ने फिर बढ़ाया भारत का मान गोल्ड का सपना टूटा लेकिन लगातार तीसरे एशियन गेम्स में जीता मेडल

    रोशिबिना देवी ने फिर बढ़ाया भारत का मान गोल्ड का सपना टूटा लेकिन लगातार तीसरे एशियन गेम्स में जीता मेडल


    नई दिल्ली। भारत की स्टार वुशू खिलाड़ी रोशिबिना देवी नाओरेम ने एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। नागोया में आयोजित प्रतियोगिता के महिला 60 किलोग्राम सांडा वर्ग के फाइनल में रोशिबिना का सामना चीन की झांग शियाओयू से हुआ। खिताबी मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। झांग ने दोनों राउंड में 5-0 की बढ़त बनाकर मुकाबला कुल 10-0 से अपने नाम किया और गोल्ड मेडल जीता।

    रोशिबिना फाइनल में गोल्ड से जरूर चूक गईं लेकिन उनका एशियन गेम्स में पदक जीतने का सिलसिला लगातार तीसरी बार जारी रहा। वह 2018 के जकार्ता-पालेमबांग एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। इसके बाद 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। अब 2026 में भी सिल्वर जीतकर उन्होंने एशियन गेम्स में लगातार तीन संस्करणों में पदक जीतने की उपलब्धि हासिल कर ली है।

    रोशिबिना देवी एशियन गेम्स में वुशू के लगातार तीन पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उनके लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि तीनों पदक महिला 60 किलोग्राम सांडा वर्ग में ही आए हैं। 2018 में ब्रॉन्ज के बाद 2023 और 2026 में सिल्वर जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी निरंतरता दिखाई है।

    इस बार फाइनल मुकाबले में चीन की झांग शियाओयू ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी। पहले राउंड में झांग ने 5-0 से जीत दर्ज की और दूसरे राउंड में भी यही स्कोर दोहराया। इस तरह मुकाबला 10-0 के स्कोर पर समाप्त हुआ। रोशिबिना को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

    मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के क्वासिफाई गांव से आने वाली रोशिबिना देवी किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह इम्फाल स्थित SAI NCOE में प्रशिक्षण लेती हैं। महिला 60 किलोग्राम सांडा वर्ग में वह कोच मैबाम प्रेमकुमार सिंह की निगरानी में तैयारी करती हैं। शुरुआती दौर से ही वुशू में उनकी रुचि रही और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया।

    रोशिबिना ने 2019 साउथ एशियन गेम्स में सांडा 60 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा 2017 एशियन जूनियर वुशू चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड हासिल किया था। 2016 वर्ल्ड जूनियर वुशू चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता। 2023 मॉस्को वुशू स्टार चैंपियनशिप में भी उनके नाम गोल्ड रहा।

    उनकी उपलब्धियों को देखते हुए 2023 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसी वर्ष इंटरनेशनल वुशू फेडरेशन ने उन्हें Female Wushu Athlete of the Year Sanda का सम्मान भी दिया था। एशियन गेम्स 2026 का सिल्वर उनके पदकों की सूची में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है।

    गोल्ड मेडल मुकाबले में 10-0 की हार के बावजूद रोशिबिना का एशियन गेम्स रिकॉर्ड खास बन गया है। 2018 से शुरू हुआ उनका पदक सफर 2023 और फिर 2026 में भी जारी रहा। लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली भारतीय महिला वुशू खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

  • 14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल

    14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में इतिहास रच दिया है। पुरुष सिंगल्स स्पर्धा में मीणा ने भारत के लिए इस खेल का पहला एशियन गेम्स पदक अपने नाम किया। सेमीफाइनल में उन्हें जापान के ताकुया कुरोसाका के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण उनका ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया। इस उपलब्धि के साथ जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में भारत का नाम एशियन गेम्स के पदक विजेताओं में दर्ज करा दिया।

    मीणा का यह सफर आसान नहीं रहा। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने शेरविन नुगुइट के खिलाफ बेहद रोमांचक मुकाबला खेला। निर्णायक गेम में एक समय वह पीछे चल रहे थे लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लगातार चार अंक हासिल किए। इस वापसी ने उन्हें 4-3 से जीत दिलाई और इसी के साथ उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बना ली। क्वार्टर फाइनल की इस जीत के साथ ही भारत का सॉफ्ट टेनिस में पहला एशियन गेम्स पदक भी सुनिश्चित हो गया था। सेमीफाइनल में जापानी खिलाड़ी के खिलाफ हार के बाद मीणा का अभियान ब्रॉन्ज मेडल के साथ समाप्त हुआ।

    जय मीणा की सॉफ्ट टेनिस तक पहुंचने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। शुरुआत में उनकी दिलचस्पी क्रिकेट में थी और वह क्रिकेटर बनना चाहते थे। देवास के पायनियर पब्लिक स्कूल में दाखिले के बाद उनका ध्यान स्कूल में बने सॉफ्ट टेनिस कोर्ट की तरफ गया। शुरुआत में वह खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते थे और बाद में बॉल बॉय के तौर पर उनकी मदद करने लगे। इसी दौरान इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने खुद सॉफ्ट टेनिस खेलना शुरू कर दिया।

    स्कूल और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं से शुरुआत करने वाले जय मीणा ने जल्द ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने जापान जाकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। वर्ष 2022 में गुजरात में आयोजित 36वें नेशनल गेम्स में उन्होंने पुरुष सिंगल्स का गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने पुरुष टीम और डबल्स स्पर्धा में भी मध्य प्रदेश के लिए पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई।

    इसके बाद जय मीणा की उपलब्धियों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता रहा। वर्ष 2025 में वह पुरुष सिंगल्स के नेशनल चैंपियन बने। एशियन गेम्स 2022 में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। इसके साथ ही पुरुष टीम स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई।

    वर्ष 2024 में जय मीणा ने आध्या तिवारी के साथ वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारत को इस प्रतियोगिता में पहला पदक दिलाया। इसके बाद 2025 की एशियन सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया और इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

    जय मीणा के लिए एशियन गेम्स 2026 का ब्रॉन्ज मेडल उनके लंबे सफर की एक और बड़ी उपलब्धि है। टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप के एथलीट के रूप में यह उनका तीसरा एशियन गेम्स है। इससे पहले वह जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2022 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब नागोया में सॉफ्ट टेनिस का पहला भारतीय एशियन गेम्स पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है।

  • एशियन गेम्स में भारत का कबड्डी में दबदबा लगातार तीसरी जीत के साथ सेमीफाइनल का टिकट पक्का

    एशियन गेम्स में भारत का कबड्डी में दबदबा लगातार तीसरी जीत के साथ सेमीफाइनल का टिकट पक्का


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। बुधवार को टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में खेले गए ग्रुप ए के मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 48-25 से हराया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने ग्रुप चरण में लगातार तीसरी जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ अपना पदक भी सुनिश्चित कर लिया।

    सुनील कुमार की कप्तानी में भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत जापान के खिलाफ जीत के साथ की थी। इसके बाद दक्षिण कोरिया को भी भारत ने 63-31 के बड़े अंतर से हराया। बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और विरोधी टीम को दबाव में रखा। रेडिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार अंक जुटाए जबकि डिफेंस ने बांग्लादेश के रेडर्स को ज्यादा मौके नहीं दिए।

    पहले हाफ में भारत का दबदबा पूरी तरह नजर आया। टीम ने सफल रेड से 18 अंक हासिल किए और सात बोनस अंक अपने खाते में जोड़े। भारतीय डिफेंस ने बांग्लादेश को दो बार ऑलआउट भी किया। इसके चलते भारत ने हाफ टाइम तक 29-9 की मजबूत बढ़त बना ली। दूसरी तरफ बांग्लादेश की टीम भारतीय डिफेंस के सामने लगातार संघर्ष करती नजर आई। पहले हाफ में उसे पांच आउट अंक और तीन बोनस अंक ही मिल सके। एक सुपर टैकल से भी बांग्लादेश को अंक मिला लेकिन भारतीय टीम की बड़ी बढ़त पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा।

    दूसरे हाफ की शुरुआत में भारतीय टीम ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। अर्जुन देशवाल को देवांक दलाल की जगह मैदान पर उतारा गया। इसके बाद बांग्लादेश ने अपने खेल में सुधार किया और भारतीय टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की। बांग्लादेश ने दूसरे हाफ में आठ आउट अंक और आठ बोनस अंक हासिल किए। इसके बावजूद भारत ने अपनी लय नहीं टूटने दी। भारतीय टीम ने दूसरे हाफ में 19 अंक जुटाए और एक बार फिर बांग्लादेश को ऑलआउट किया।

    भारत ने पूरे मुकाबले के दौरान अपनी बढ़त को बनाए रखा और अंत में 48-25 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह जीत इसलिए भी अहम रही क्योंकि इसके साथ भारतीय टीम ने ग्रुप ए में लगातार तीसरी जीत दर्ज की और नॉकआउट चरण में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली।

    भारतीय टीम का ग्रुप चरण का आखिरी मुकाबला गुरुवार को चीनी ताइपे के खिलाफ होगा। सेमीफाइनल में जगह पहले ही पक्की होने के बाद इस मुकाबले में भी टीम की नजर अपनी जीत की लय बरकरार रखने पर होगी। कबड्डी प्रतियोगिता में सेमीफाइनल मुकाबले 25 सितंबर को खेले जाएंगे जबकि पुरुष वर्ग का स्वर्ण पदक मुकाबला 26 सितंबर को होगा।

    भारतीय पुरुष कबड्डी टीम एशियन गेम्स में अपने अभियान को खिताबी जीत तक पहुंचाने के इरादे से मैदान में है। बांग्लादेश के खिलाफ मिली जीत ने टीम को नॉकआउट चरण से पहले एक और मजबूत आधार दिया है। अब सेमीफाइनल में भारत का सामना किस टीम से होगा यह ग्रुप चरण के बाकी मुकाबलों के परिणाम के बाद तय होगा।

  • राइजा ढिल्लों चौथे और परिनाज धालीवाल आठवें स्थान पर व्यक्तिगत स्कीट में मेडल से रह गईं दूर

    राइजा ढिल्लों चौथे और परिनाज धालीवाल आठवें स्थान पर व्यक्तिगत स्कीट में मेडल से रह गईं दूर


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाज राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल ने टीम स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया लेकिन व्यक्तिगत स्कीट स्पर्धा में दोनों निशानेबाज मेडल जीतने से चूक गईं। आइची नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में राइजा ढिल्लों चौथे स्थान पर रहीं जबकि परिनाज धालीवाल को आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा। दोनों खिलाड़ियों ने क्वालिफिकेशन में 125 में से 111 शॉट का स्कोर हासिल करके फाइनल में जगह बनाई थी लेकिन पदक मुकाबले में उनका प्रदर्शन टीम स्पर्धा जैसा नहीं रहा।

    तीन दिनों तक चले क्वालिफिकेशन राउंड के बाद राइजा और परिनाज ने समान 111 का स्कोर बनाया। क्वालिफिकेशन में राइजा आठवें स्थान पर और परिनाज नौवें स्थान पर रहते हुए फाइनल के लिए पहुंचीं। फाइनल में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदक जीतने का मौका था लेकिन मुकाबला आगे बढ़ने के साथ दोनों निशानेबाज पोडियम की दौड़ से बाहर हो गईं। राइजा चौथे स्थान तक पहुंचीं जबकि परिनाज आठवें स्थान पर रहीं।

    इससे पहले महिला स्कीट टीम स्पर्धा में राइजा ढिल्लों परिनाज धालीवाल और माहेश्वरी चौहान की भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता था। भारतीय टीम ने क्वालिफिकेशन में कुल 331 का स्कोर हासिल किया था। चीन की टीम ने 347 के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाकिस्तान ने 336 के स्कोर के साथ रजत पदक अपने नाम किया। इस तरह महिला स्कीट टीम स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम पर जगह बनाकर देश के खाते में एक और पदक जोड़ा।

    शूटिंग में भारत का प्रदर्शन केवल महिला स्कीट टीम स्पर्धा तक सीमित नहीं रहा। पुरुषों की स्कीट टीम स्पर्धा में भी भारतीय निशानेबाजों ने कांस्य पदक हासिल किया। ओलंपियन अनंतजीत सिंह नरुका मैराज अहमद खान और भवतेघ सिंह की भारतीय टीम ने कुल 346 का स्कोर बनाया और तीसरा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में कतर ने स्वर्ण पदक जबकि कुवैत ने रजत पदक जीता। इस पदक के साथ आइची नागोया में शूटिंग में भारत के पदकों की संख्या सात तक पहुंच गई।

    पुरुषों की व्यक्तिगत स्कीट स्पर्धा के क्वालिफिकेशन में अनंतजीत सिंह नरुका भारतीय चुनौती को फाइनल तक पहुंचाने वाले एकमात्र निशानेबाज रहे। उन्होंने 125 में से 119 का स्कोर किया। वहीं मैराज अहमद खान ने 116 और भवतेघ सिंह ने 111 का स्कोर बनाया। दोनों निशानेबाज फाइनल में जगह नहीं बना सके।

    शूटिंग के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में भी भारतीय खिलाड़ियों को पदक के लिए इंतजार करना पड़ा। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर महिलाओं की व्यक्तिगत 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पांचवें स्थान पर रहीं। उन्होंने फाइनल में 181.1 का स्कोर किया लेकिन पोडियम तक नहीं पहुंच सकीं।

    महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल टीम स्पर्धा में भी भारत चौथे स्थान पर रहा। भारतीय टीम ने 1719 के स्कोर के साथ 44 एक्स दर्ज किए। वियतनाम ने समान 1719 के स्कोर के साथ 46 एक्स दर्ज करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। चीन ने 1735 और 56 एक्स के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि दक्षिण कोरिया ने 1730 और 55 एक्स के साथ रजत पदक अपने नाम किया।

    भारतीय शूटिंग दल ने एशियन गेम्स में अलग अलग स्पर्धाओं में लगातार चुनौती पेश की है। राइजा और परिनाज के लिए टीम स्पर्धा का कांस्य पदक उपलब्धि रहा लेकिन व्यक्तिगत मुकाबले में पदक से चूकना निराशाजनक रहा। अब भारतीय निशानेबाजों की नजर बाकी स्पर्धाओं पर होगी जहां टीम पदकों की संख्या को और बढ़ाने की कोशिश करेगी।

  • 19-0 फिर 17-1 और अब 20-1 भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियन गेम्स में गोलों का तूफान

    19-0 फिर 17-1 और अब 20-1 भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियन गेम्स में गोलों का तूफान


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम का शानदार अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। बुधवार को पूल बी के मुकाबले में भारत ने थाईलैंड को 20-1 के बड़े अंतर से हराकर टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की। गिफू प्रीफेक्चुरल ग्रीन स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और पूरे मैच के दौरान थाईलैंड की टीम पर दबाव बनाए रखा। इस जीत के साथ भारतीय टीम पूल बी में शीर्ष स्थान पर बनी हुई है।

    भारत की इस बड़ी जीत की सबसे बड़ी स्टार दीपिका रहीं जिन्होंने अकेले नौ गोल दागे। ड्रैग फ्लिक विशेषज्ञ दीपिका ने अपने सभी नौ गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए किए। उन्होंने लगातार भारतीय हमलों को गोल में बदलकर थाईलैंड की रक्षापंक्ति को मुश्किल में डाल दिया। दीपिका का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि इससे पहले उज्बेकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने आठ गोल किए थे। थाईलैंड के खिलाफ नौ गोल के साथ उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड बेहतर कर दिया। टूर्नामेंट में तीन मैचों के बाद दीपिका के नाम 20 गोल हो चुके हैं।

    भारत के लिए नवनीत कौर ने भी शानदार प्रदर्शन किया और चार गोल किए। रुतुजा पिसल ने हैट्रिक पूरी की। इसके अलावा नेहा लालरेम्सियामी साक्षी राणा और कप्तान सलीमा टेटे ने भी गोल कर टीम की जीत में योगदान दिया। भारतीय टीम के हमलों में लगातार तेजी और तालमेल नजर आया। पेनल्टी कॉर्नर के मौकों को भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार तरीके से भुनाया और थाईलैंड को वापसी का कोई बड़ा अवसर नहीं दिया।

    थाईलैंड की टीम पूरे मुकाबले में भारतीय डिफेंस पर ज्यादा दबाव नहीं बना सकी। उसे मैच का एकमात्र गोल चौथे क्वार्टर के अंतिम हिस्से में मिला। सुपांसा समंसो ने पेनल्टी कॉर्नर के जरिए गोल किया। उनके ड्रैग फ्लिक में हल्का डिफ्लेक्शन हुआ और गेंद भारतीय गोल में पहुंच गई। इसके बावजूद भारत की बढ़त इतनी बड़ी थी कि इस गोल से मुकाबले की दिशा पर कोई असर नहीं पड़ा।

    भारतीय टीम ने इससे पहले टूर्नामेंट की शुरुआत उज्बेकिस्तान के खिलाफ 19-0 की बड़ी जीत से की थी। इसके बाद भारत ने इंडोनेशिया को 17-1 से हराया। अब थाईलैंड के खिलाफ 20-1 की जीत के साथ भारत ने लगातार तीसरी बार बड़े अंतर से मुकाबला अपने नाम किया है। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय टीम ने कुल 56 गोल किए हैं जबकि उसके खिलाफ केवल दो गोल हुए हैं।

    भारतीय महिला हॉकी टीम का अगला मुकाबला शुक्रवार को जापान से होना है। यह मैच नॉकआउट चरण से पहले टीम के लिए अहम होगा। भारत की टीम 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में जीते गए कांस्य पदक से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश में है। महिला हॉकी में भारत ने आखिरी बार 1982 में एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीता था। इस बार टीम की नजर लंबे अंतराल के बाद फिर से स्वर्ण पदक हासिल करने पर है।

    लगातार तीन मुकाबलों में जिस तरह भारतीय टीम ने गोल किए हैं उससे उसका आक्रामक खेल बेहद प्रभावशाली नजर आया है। खासतौर पर दीपिका की पेनल्टी कॉर्नर पर शानदार फिनिशिंग टीम के लिए बड़ा हथियार बनी हुई है। अब जापान के खिलाफ मुकाबले में भारतीय टीम इसी लय को बरकरार रखना चाहेगी और नॉकआउट चरण से पहले अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश करेगी।

  • एशियन गेम्स में भारत का रोमांचक दिन बैडमिंटन टीम बाहर लक्ष्य सेन की वापसी से जगी उम्मीद क्रिकेट में 216 रन

    एशियन गेम्स में भारत का रोमांचक दिन बैडमिंटन टीम बाहर लक्ष्य सेन की वापसी से जगी उम्मीद क्रिकेट में 216 रन


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में मंगलवार का दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए उतार चढ़ाव भरा रहा। भारत की नजरें अलग अलग खेलों में पदक की दावेदारी मजबूत करने पर थीं लेकिन कई मुकाबलों में टीम को निराशा भी हाथ लगी। महिला बैडमिंटन टीम को जापान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 1-3 से हार का सामना करना पड़ा और इसके साथ ही उसका पदक अभियान समाप्त हो गया। वहीं पुरुष टेबल टेनिस टीम भी दक्षिण कोरिया के खिलाफ प्री क्वार्टर फाइनल में 0-3 से हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गई। दूसरी ओर पुरुष बैडमिंटन में लक्ष्य सेन ने शुरुआती झटके के बाद शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया।

    महिला बैडमिंटन क्वार्टर फाइनल में भारत और जापान के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पीवी सिंधू ने अकाने यामागुची के खिलाफ पहला गेम 23-21 से जीतकर भारत को अच्छी शुरुआत दिलाई लेकिन जापानी खिलाड़ी ने अगले दोनों गेम 21-18 और 21-11 से जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इसके बाद उन्नति हुड्डा को भी तोमोका मियाजाकी के खिलाफ 16-21 और 18-21 से हार मिली। त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने युकी फुकुशिमा और मायु मात्सुमोतो की जोड़ी को 21-17 और 21-16 से हराकर भारत की उम्मीदें बनाए रखीं लेकिन अगले मुकाबले में तन्वी शर्मा को नोजोमी ओकुहारा के खिलाफ 21-12 और 21-10 से हार का सामना करना पड़ा। इस नतीजे के साथ जापान ने 3-1 से जीत दर्ज कर भारतीय टीम को बाहर कर दिया।

    पुरुष बैडमिंटन में भारत और जापान के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबले में लक्ष्य सेन के सामने कोडाई नाराओका की चुनौती थी। पहले गेम में लक्ष्य को 11-21 से हार का सामना करना पड़ा। शुरुआत में जापानी खिलाड़ी ने फ्रंट कोर्ट पर लगातार प्रभावी शॉट खेले और लक्ष्य को दबाव में रखा। हालांकि दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने जोरदार वापसी की और नाराओका को केवल पांच अंक लेने दिए। लक्ष्य ने दूसरा गेम 21-5 से जीतकर मुकाबला निर्णायक गेम में पहुंचा दिया।

    टेबल टेनिस में भी भारतीय टीम को मुश्किल का सामना करना पड़ा। पुरुष टीम दक्षिण कोरिया के खिलाफ 0-3 से हार गई। हरमीत देसाई को जंग वूजिन ने 3-1 से हराया जबकि मानुष शाह को ओ जुनसुंग के खिलाफ पांच गेम तक चले मुकाबले में 2-3 से हार मिली। तीसरे मुकाबले में मानव ठक्कर को आन जेह्युन ने 3-1 से मात दी। इस हार के साथ भारतीय टीम का अभियान समाप्त हो गया।

    फेंसिंग में भी भारत को मिश्रित परिणाम मिले। पुरुष फॉयल के व्यक्तिगत मुकाबले में सचिन और सांसम हेमाश सिंह का सफर आगे नहीं बढ़ सका। दोनों को कजाकिस्तान के खिलाड़ियों के खिलाफ हार मिली। वहीं महिला एपी में तनिक्षा खत्री ने थाईलैंड की संग्गियो नत्पापत को 15-10 से हराकर राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। इससे इस स्पर्धा में भारत की उम्मीदें बनी हुई हैं।

    महिला क्रिकेट में भारत ने श्रीलंका के खिलाफ स्वर्ण पदक मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में तीन विकेट पर 216 रन बनाए। स्मृति मंधाना ने 79 रन की पारी खेलकर मजबूत आधार तैयार किया जबकि शेफाली वर्मा ने 48 रन बनाए। इसके बाद ऋचा घोष ने सिर्फ 22 गेंदों में 49 रन बनाकर भारतीय स्कोर को 216 तक पहुंचा दिया। श्रीलंका के सामने स्वर्ण पदक जीतने के लिए 217 रन का लक्ष्य रखा गया है।

    एशियन गेम्स में भारत का अभियान अभी जारी है और कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदक की दावेदारी मजबूत करने का मौका है। मंगलवार के मुकाबलों में जहां कुछ टीमों का सफर समाप्त हुआ वहीं क्रिकेट और फेंसिंग जैसे खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने उम्मीदें कायम रखी हैं।

  • 10 मीटर एयर राइफल में भारत का सटीक निशाना! रुद्रांक्ष हिमांशु और पार्थ ने सिल्वर जीतकर बढ़ाया देश का मान

    10 मीटर एयर राइफल में भारत का सटीक निशाना! रुद्रांक्ष हिमांशु और पार्थ ने सिल्वर जीतकर बढ़ाया देश का मान

    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाजों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। शूटिंग रेंज से भारत के लिए एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटिल हिमांशु ढिल्लों और पार्थ राकेश माने की तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में सिल्वर मेडल डाल दिया। 21 सितंबर को हुए मुकाबले में भारतीय टीम ने कुल 1890.1 अंक हासिल किए और दूसरे स्थान पर रहते हुए रजत पदक अपने नाम किया।

    भारत की इस टीम को चीन की मजबूत चुनौती का सामना करना पड़ा। चीन ने 1899.0 अंक हासिल कर गोल्ड मेडल जीता। चीन का स्कोर विश्व रिकॉर्ड के रूप में भी दर्ज हुआ। भारत और चीन के बीच 8.9 अंकों का अंतर रहा। दक्षिण कोरिया ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस पदक के साथ एशियन गेम्स 2026 में भारत के खाते में शूटिंग से तीन मेडल हो गए थे।

    भारतीय टीम के लिए रुद्रांक्ष पाटिल ने सबसे ज्यादा 631.8 अंक जुटाए। हिमांशु ढिल्लों ने 630.0 अंक हासिल किए जबकि पार्थ माने ने 628.3 अंकों का योगदान दिया। तीनों निशानेबाजों के संयुक्त प्रदर्शन ने भारत को पोडियम तक पहुंचाया। खास बात यह रही कि टीम स्पर्धा के प्रदर्शन ने व्यक्तिगत मुकाबले के लिए भी भारत की उम्मीदें बढ़ा दीं। रुद्रांक्ष और हिमांशु ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में भी जगह बनाई।

    रुद्रांक्ष ने क्वालिफिकेशन में 631.8 अंक के साथ तीसरा स्थान हासिल किया जबकि हिमांशु 630.0 अंक के साथ सातवें स्थान पर रहे। पार्थ माने 628.3 अंक के साथ 11वें स्थान पर रहे और व्यक्तिगत फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर सके। हालांकि टीम इवेंट में उनके योगदान ने भारत के सिल्वर मेडल में अहम भूमिका निभाई।

    भारत के लिए एशियन गेम्स के शूटिंग अभियान की शुरुआत भी शानदार रही थी। इससे पहले महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में इलावेनिल वलारिवन सोनम मस्कर और विदर्सा विनोद की टीम ने सिल्वर मेडल जीता था। इसके अलावा इलावेनिल ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में भी रजत पदक हासिल किया था। इस तरह पुरुष टीम के सिल्वर ने शूटिंग में भारत की पदक यात्रा को और मजबूत किया।

    इसके बाद पुरुषों की व्यक्तिगत 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। हिमांशु ढिल्लों ने सिल्वर और रुद्रांक्ष पाटिल ने ब्रॉन्ज मेडल जीता जबकि चीन के शेंग लिहाओ ने गोल्ड हासिल किया। यानी एक ही दिन भारत के इन दोनों निशानेबाजों ने टीम स्पर्धा के बाद व्यक्तिगत मुकाबले में भी पोडियम पर जगह बनाई।

    भारतीय शूटिंग दल का यह प्रदर्शन एशियन गेम्स 2026 में देश के अभियान के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। रुद्रांक्ष हिमांशु और पार्थ की टीम ने दबाव के बीच सटीक निशाने लगाकर भारत को एक और रजत पदक दिलाया है और शूटिंग में भारतीय खिलाड़ियों की मजबूत चुनौती को कायम रखा है।

  • एशियन गेम्स मिस करने का दर्द छलका नीरज चोपड़ा का भावुक पोस्ट बोले दोस्त टखने के बारे में नहीं पूछते

    एशियन गेम्स मिस करने का दर्द छलका नीरज चोपड़ा का भावुक पोस्ट बोले दोस्त टखने के बारे में नहीं पूछते


    नई दिल्ली। भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा इस समय एशियन गेम्स 2026 में मैदान पर उतरने के बजाय बाहर से भारतीय खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे हैं। टखने की लिगामेंट इंजरी के कारण नीरज को इस प्रतियोगिता से हटना पड़ा है। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता और एशियन गेम्स के दो बार के चैंपियन नीरज के लिए यह फैसला आसान नहीं रहा। अब उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए बताया है कि भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका गंवाना उन्हें कितना परेशान कर रहा है।

    नीरज ने LinkedIn पर लिखा कि एशियन गेम्स उनके करियर के सबसे खास आयोजनों में से एक रहे हैं। उन्होंने 2018 जकार्ता और 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में जैवलिन थ्रो का गोल्ड मेडल जीता था। ऐसे में इस बार प्रतियोगिता से बाहर रहना उनके लिए भावनात्मक रूप से काफी मुश्किल है। उन्होंने नागोया पहुंची भारतीय टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह खिलाड़ियों के साथ चलना और प्रतियोगिता का हिस्सा बनना मिस करेंगे लेकिन बाहर से टीम को अपना समर्थन देते रहेंगे।

    नीरज ने बताया कि वह टखने की लिगामेंट चोट से जूझ रहे हैं। काफी विचार करने के बाद उन्हें एशियन गेम्स में नहीं उतरने का फैसला स्वीकार करना पड़ा। उनके मुताबिक किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में देश की उम्मीदों के साथ मैदान पर उतरना सम्मान की बात है लेकिन उस मौके से दूर रहना उन्हें तकलीफ देता है। चोट के कारण वह डायमंड लीग फाइनल से भी बाहर हो चुके हैं। उनकी हालिया बड़ी प्रतियोगिता लॉजेन डायमंड लीग रही थी जहां वह श्रीलंका के रुमेश पथिरागे के बाद दूसरे स्थान पर रहे थे।

    नीरज के करियर में चोटों के कारण पहले भी ब्रेक आया है। 2019 में उन्हें दाएं हाथ की कोहनी की सर्जरी करानी पड़ी थी। 2022 में ग्रोइन इंजरी के कारण वह कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके थे। 2023 में मसल स्ट्रेन ने उनकी तैयारियों को प्रभावित किया जबकि 2024 में एडडक्टर की परेशानी के कारण उन्होंने एक प्रतियोगिता से नाम वापस लिया था। अब टखने की चोट ने उनके 2026 सीजन को प्रभावित किया है।

    इस पूरे दौर में नीरज ने दोस्तों के साथ को खास महत्व दिया है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी लंबे समय तक ट्रेनिंग यात्रा और प्रतियोगिताओं के कारण घर से दूर रहते हैं। ऐसे में आसपास के लोगों का साथ उन्हें सकारात्मक और जमीन से जुड़ा रखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में हमेशा सलाह की जरूरत नहीं होती। कई बार किसी दोस्त का फोन करना और खेल या चोट से अलग किसी विषय पर बातचीत करना ही काफी होता है।

    नीरज ने बताया कि उनके कुछ दोस्त जानते हैं कि वह इस समय अच्छी जगह पर नहीं हैं लेकिन फोन करने पर वे उनसे टखने के बारे में सवाल नहीं करते। वे सामान्य बातें करते हैं हंसते हैं पुरानी यादें साझा करते हैं और मिलने की योजनाएं बनाते हैं। नीरज के मुताबिक ऐसी बातचीत उन्हें याद दिलाती है कि जिंदगी सिर्फ अगली प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है। उनका यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारतीय दल एशियन गेम्स में अपनी चुनौती पेश कर रहा है और नीरज मैदान से दूर रहकर टीम का समर्थन कर रहे हैं।