एशियन गेम्स मिस करने का दर्द छलका नीरज चोपड़ा का भावुक पोस्ट बोले दोस्त टखने के बारे में नहीं पूछते


नई दिल्ली। भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा इस समय एशियन गेम्स 2026 में मैदान पर उतरने के बजाय बाहर से भारतीय खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे हैं। टखने की लिगामेंट इंजरी के कारण नीरज को इस प्रतियोगिता से हटना पड़ा है। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता और एशियन गेम्स के दो बार के चैंपियन नीरज के लिए यह फैसला आसान नहीं रहा। अब उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए बताया है कि भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका गंवाना उन्हें कितना परेशान कर रहा है।

नीरज ने LinkedIn पर लिखा कि एशियन गेम्स उनके करियर के सबसे खास आयोजनों में से एक रहे हैं। उन्होंने 2018 जकार्ता और 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में जैवलिन थ्रो का गोल्ड मेडल जीता था। ऐसे में इस बार प्रतियोगिता से बाहर रहना उनके लिए भावनात्मक रूप से काफी मुश्किल है। उन्होंने नागोया पहुंची भारतीय टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह खिलाड़ियों के साथ चलना और प्रतियोगिता का हिस्सा बनना मिस करेंगे लेकिन बाहर से टीम को अपना समर्थन देते रहेंगे।

नीरज ने बताया कि वह टखने की लिगामेंट चोट से जूझ रहे हैं। काफी विचार करने के बाद उन्हें एशियन गेम्स में नहीं उतरने का फैसला स्वीकार करना पड़ा। उनके मुताबिक किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में देश की उम्मीदों के साथ मैदान पर उतरना सम्मान की बात है लेकिन उस मौके से दूर रहना उन्हें तकलीफ देता है। चोट के कारण वह डायमंड लीग फाइनल से भी बाहर हो चुके हैं। उनकी हालिया बड़ी प्रतियोगिता लॉजेन डायमंड लीग रही थी जहां वह श्रीलंका के रुमेश पथिरागे के बाद दूसरे स्थान पर रहे थे।

नीरज के करियर में चोटों के कारण पहले भी ब्रेक आया है। 2019 में उन्हें दाएं हाथ की कोहनी की सर्जरी करानी पड़ी थी। 2022 में ग्रोइन इंजरी के कारण वह कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके थे। 2023 में मसल स्ट्रेन ने उनकी तैयारियों को प्रभावित किया जबकि 2024 में एडडक्टर की परेशानी के कारण उन्होंने एक प्रतियोगिता से नाम वापस लिया था। अब टखने की चोट ने उनके 2026 सीजन को प्रभावित किया है।

इस पूरे दौर में नीरज ने दोस्तों के साथ को खास महत्व दिया है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी लंबे समय तक ट्रेनिंग यात्रा और प्रतियोगिताओं के कारण घर से दूर रहते हैं। ऐसे में आसपास के लोगों का साथ उन्हें सकारात्मक और जमीन से जुड़ा रखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में हमेशा सलाह की जरूरत नहीं होती। कई बार किसी दोस्त का फोन करना और खेल या चोट से अलग किसी विषय पर बातचीत करना ही काफी होता है।

नीरज ने बताया कि उनके कुछ दोस्त जानते हैं कि वह इस समय अच्छी जगह पर नहीं हैं लेकिन फोन करने पर वे उनसे टखने के बारे में सवाल नहीं करते। वे सामान्य बातें करते हैं हंसते हैं पुरानी यादें साझा करते हैं और मिलने की योजनाएं बनाते हैं। नीरज के मुताबिक ऐसी बातचीत उन्हें याद दिलाती है कि जिंदगी सिर्फ अगली प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है। उनका यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारतीय दल एशियन गेम्स में अपनी चुनौती पेश कर रहा है और नीरज मैदान से दूर रहकर टीम का समर्थन कर रहे हैं।