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  • बांग्लादेश में इस बार जन्माष्टमी पर नहीं दिखेगी पहले जैसी रौनक…. सरकार ने रद्द किया अवकाश

    बांग्लादेश में इस बार जन्माष्टमी पर नहीं दिखेगी पहले जैसी रौनक…. सरकार ने रद्द किया अवकाश


    ढाका।
    जैसे-जैसे जन्माष्टमी (Janmashtami) के साथ अन्य हिंदू त्योहारों (Hindu Festivals Holidays) की समय नजदीक आ रहा है, बांग्लादेश (Bangladesh) में सरकार के प्रति हिंदुओं में रोष बढ़ता ही जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि बांग्लादेश सरकार (Bangladesh Government) ने जन्माष्टमी को मिलने वाला सरकारी अवकाश रद्द कर दिया है। ढाकेश्वरी मंदिर, चट्टग्राम, सिलहट समेत कई मंदिरों में जन्माष्टमी मनाई जानी है, लेकिन इस बार यहां जन्माष्टमी को आधिकारिक छुट्टी नहीं रहेगी।

    खबरों के मुताबिक, इस वर्ष 2 जनवरी को ही बांग्लादेश में सरस्वती पूजा, जन्माष्टमी, दुर्गाष्टमी और बुद्ध पूर्णिमा की सरकारी छुट्टियां रद्द कर दी गईं। हिंदू जागृति समिति व इसकी अगुवाई में हिंदुओं ने इसका भारी विरोध किया है। हसीना के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की हिंसा के चलते ढाका, सिलहट, खुलना, कुमिला, जेसोर और मीरपुर में बड़े-बड़े जुलूस नहीं निकाले जा रहे हैं इस बार भी यहां उत्साह फीका रहेगा। देश के अखबार प्रोथोम आलो के मुताबिक, इस बार मंदिरों में जन्माष्टमी समारोह तो होंगे लेकिन दस दिन पूर्व से बाजारों में जो उत्साह देखा जाता था वह इस बार नहीं है। बांग्लादेश में एक समय रहा है जब हिंदू पर्वों के लिए मंदिरों में उत्साह होता था और बड़े बड़े उत्सव तथा जुलूस निकाले जाते थे, लेकिन अब देश में पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल जैसी उमंग नहीं दिख रही।


    सरकार का दावा, मंदिरों में विशेष सुरक्षा प्रबंध

    बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने सियासी उथल-पुथल के समय अल्पसंख्यक सुरक्षा के बाद कहा है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन की तरफ से मंदिरों के लिए विशेष सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। हालांकि बांग्लादेश हिंदू जागरण मंच के प्रवक्ता निहार हलदर ने कहा, अभी समुदाय में डर है। कुछ मंदिरों में जनमाष्टमी पर शोभायात्राएं निकाली जाएंगी लेकिन ज्यादातर जगहों पर पहले जैसी रंगत नहीं रहेगी।

  • बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन

    बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश अपनी वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए चीन निर्मित J-10CE मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की खरीद की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित सौदे को देश के व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा बताया जा रहा है। इसके साथ ही अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी हेलीकॉप्टर और ड्रोन प्रणालियां खरीदने की योजना पर भी काम चल रहा है।

    बांग्लादेश सरकार के अनुसार, J-10CE और अटैक हेलीकॉप्टरों से संबंधित प्रस्ताव पर खरीद समितियों ने मसौदा तैयार कर लिया है। अब इन दस्तावेजों को सशस्त्र बल प्रभाग और संबंधित मंत्रालयों से मंजूरी मिलने का इंतजार है। सरकार की योजना उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर खरीद को मौजूदा वित्तीय वर्ष में आगे बढ़ाने या अगले बजट में शामिल करने की है।

    J-10CE चीन का चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। यह अलग-अलग प्रकार के हवाई अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बांग्लादेश की ओर से विमान की क्षमताओं और लागत को खरीद प्रक्रिया में महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि समान श्रेणी के कुछ पश्चिमी लड़ाकू विमानों की तुलना में चीनी विकल्प अपेक्षाकृत कम लागत में उपलब्ध हो सकते हैं।

    बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार जाहेद उर रहमान ने J-10CE के युद्ध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य संघर्ष का हवाला दिया। हालांकि, किसी राफेल विमान को J-10CE द्वारा मार गिराए जाने की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस दावे को लेकर अलग-अलग विरोधाभासी बातें सामने आती रही हैं, इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं है।

    ढाका की प्रस्तावित खरीद केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। सरकार अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी परिवहन के लिए हेलीकॉप्टर और मानव रहित हवाई प्रणालियों यानी ड्रोन की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य बांग्लादेश की वायुसेना और व्यापक सुरक्षा ढांचे को आधुनिक तकनीक से मजबूत करना बताया गया है।

    J-10CE की संभावित खरीद का क्षेत्रीय प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांग्लादेश भारत का पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक तथा सुरक्षा संबंध रहे हैं। ऐसे में ढाका की सैन्य खरीद में चीन की भूमिका बढ़ने पर दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों पर चर्चा स्वाभाविक है।

    हालांकि, प्रस्तावित खरीद को अभी अंतिम सौदा नहीं माना जा सकता। मसौदा समझौतों को विभिन्न सरकारी स्तरों पर मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना है। इसके बाद ही विमान और अन्य रक्षा उपकरणों की वास्तविक खरीद, संख्या, कीमत तथा आपूर्ति से जुड़ी शर्तें स्पष्ट हो सकेंगी।

    बांग्लादेश सरकार इस रक्षा योजना को अपनी रणनीतिक निर्णय क्षमता से भी जोड़ रही है। सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि देश अब अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश और रक्षा नीति से जुड़े फैसले लेने पर अधिक जोर दे रहा है। इसी संदर्भ में चीन से लड़ाकू विमान खरीदने की चर्चा को स्वतंत्र रणनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

    J-10CE सौदा आगे बढ़ता है तो यह बांग्लादेश की वायुसेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सामरिक उपयोगिता विमान की संख्या, हथियार प्रणाली, प्रशिक्षण, रखरखाव और परिचालन क्षमता पर निर्भर करेगी। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ढाका ने खरीद प्रक्रिया को औपचारिक स्तर पर आगे बढ़ा दिया है और संबंधित प्रस्ताव मंजूरी के चरण में पहुंच चुके हैं।

  • बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल

    बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल


    ढाका।
    बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या का मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। पुलिस ने हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अहम साक्ष्य सामने नहीं लाए जा रहे हैं।

    सबसे गंभीर सवाल परिवार की महिला सदस्यों से कथित दुष्कर्म को लेकर उठ रहा है। हालांकि, दुष्कर्म के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की रिपोर्ट में महिलाओं के साथ दुष्कर्म का उल्लेख नहीं किया गया है।

    शवगृह कर्मचारी के दावे से बढ़ा विवाद

    स्थानीय मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन में शवगृह के एक कर्मचारी ने महिलाओं के शवों से कथित तौर पर वीर्य मिलने का दावा किया। इस दावे के बाद मामले में दुष्कर्म की आशंका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र फॉरेंसिक या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना कि हत्या से पहले निश्चित तौर पर दुष्कर्म हुआ था, फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    चारों की गला घोंटकर हत्या

    पुलिस रिपोर्ट के अनुसार स्कूल शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे की गला घोंटकर हत्या की गई। मामले में गणपति के रिश्तेदार मुग्धो दास और सिद्धार्थ दास को गिरफ्तार किया गया है।

    स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि हत्या में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    जांच डिटेक्टिव ब्रांच को सौंपी गई

    विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर डिटेक्टिव ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    इस बीच हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। संगठनों ने मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फॉरेंसिक जांच में दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि होती है और क्या हत्या में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। इन दोनों सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग

    Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में गुरुवार को नया राष्ट्रपति (New President) चुनने के लिए मतदान होने जा रहा है. 35 सालों के लंबे समय के बाद ये पहली बार है जब देश के राष्ट्रपति पद के लिए सीधे संसद में वोट डाले जाएंगे। राष्ट्रपति पद की रेस में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (Mirza Fakhrul Islam Alamgir) और 11 दलीय विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद (Oli Ahmed) के बीच है.

    चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान जातीय संसद (संसद भवन) में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा. निर्वाचन आयोग ने 16 अगस्त को ही दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध करार दिया था।

    मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बीएनपी का प्रमुख चेहरा हैं, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद बीर बिक्रम जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय विपक्षी मोर्चे के उम्मीदवार हैं.


    BNP की बैठक में भावुक हुए फखरुल

    बुधवार को BNP संसदीय दल की बैठक के दौरान फखरुल ने अपनी ही पार्टी के सांसदों से समर्थन की अपील की. लंबे समय तक पार्टी के महासचिव रहे फखरुल बैठक में बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए.

    उन्होंने सांसदों से कहा, ‘अगर मेरे कार्यकाल के दौरान मुझसे कोई भूल हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो मैं माफी मांगता हूं. उन्होंने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता न करने का संकल्प भी लिया.


    शुक्रवार को नए राष्ट्रपति लेंगे शपथ

    चुनावी नतीजों के तुरंत बाद नए राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे.

    बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद ये पद खाली हुआ था. संविधान के तहत पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है. फिलहाल सभपति (स्पीकर) हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति पद पर हैं।


    BNP का पलड़ा भारी

    इस साल 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बीएनपी ने सत्ता में वापसी की थी. संसद में बीएनपी के पास दो-तिहाई से ज्यादा का बहुमत है. ऐसे में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के घोषित उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पेशे से अर्थशास्त्री रहे फखरुल 1990 के दशक में बीएनपी में शामिल हुए थे. वो पहले कृषि राज्य मंत्री और स्थानीय सरकार मंत्री भी रह चुके हैं।

  • ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा

    ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा


    नई दिल्ली ।
    डार्विन के मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले में बांग्लादेश ने बड़ा उलटफेर करते हुए मेजबान ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से पराजित कर दिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही बांग्लादेश ने टेस्ट श्रृंखला का आगाज धमाकेदार अंदाज में किया है। खेल के हर विभाग में ऑस्ट्रेलियाई टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके बाद पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का गुस्सा भड़क उठा है। पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग, मार्क वॉ और मैथ्यू हेडन ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए टीम प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मार्क वॉ ने इस हार को ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर करार दिया है। उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में इतना बड़ा उलटफेर नहीं देखा। वॉ ने रेखांकित किया कि बांग्लादेश की टीम अपने दो प्रमुख तेज गेंदबाजों के बिना मैदान पर उतरी थी, इसके बावजूद उसने ऑस्ट्रेलिया की पूरी तरह से मजबूत टीम को पछाड़ दिया। उनके अनुसार, यह पराजय गाबा में वेस्टइंडीज के हाथों मिली हार से भी अधिक चौंकाने वाली है।

    दूसरी ओर पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने इस हार को बेहद शर्मनाक बताते हुए टीम में बड़े बदलावों की वकालत की है। पोंटिंग का मानना है कि अब समय आ गया है जब ऑस्ट्रेलियाई टीम को भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि टीम को तुरंत नए सलामी बल्लेबाज और नंबर 3 के स्थान पर बदलाव करने की आवश्यकता है। पहले व्यापक बदलावों के पक्ष में न रहने वाले पोंटिंग ने स्वीकार किया कि इस करारी हार ने पूरी स्थिति बदल दी है।

    इसी बीच पूर्व दिग्गज मैथ्यू हेडन ने भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम की नाकामी पर चिंता जताई और सलाह दी कि ट्रेविस हेड को पुनः नंबर 5 के स्थान पर भेजा जाना चाहिए। मैच के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने भी बांग्लादेशी टीम के बेहतर प्रदर्शन की सराहना की और अपनी टीम की नाकामियों को स्वीकार किया। मध्य प्रदेश सहित दुनिया भर के क्रिकेट विशेषज्ञों की नजरें अब आगामी मुकाबले पर टिकी हैं।

    श्रृंखला के दूसरे टेस्ट मैच से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम पर मानसिक दबाव साफ दिखाई दे रहा है। पूर्व दिग्गजों के कड़े रुख और मीडिया में हो रही आलोचनाओं के बाद आगामी मैच के लिए ऑस्ट्रेलियाई प्लेइंग-11 में बड़े बदलाव होना लगभग तय माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रबंधन इन दिग्गजों के सुझावों पर किस तरह अमल करता है।

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    ऑस्ट्रेलिया बनाम बांग्लादेश डार्विन टेस्ट, मार्क वॉ रिकी पोंटिंग फोटो, पैट कमिंस ऑस्ट्रेलियाई टीम इंजरी, ट्रेविस हेड टेस्ट क्रिकेट

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    बांग्लादेश से हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में भूचाल, दिग्गजों ने उठाई टीम में बड़े बदलावों की मांग

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  • भारत द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को मिले दो द्विपक्षीय निमंत्रणों पर बांग्लादेश सरकार ने व्यस्तता का हवाला दिया।

    भारत द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को मिले दो द्विपक्षीय निमंत्रणों पर बांग्लादेश सरकार ने व्यस्तता का हवाला दिया।


    नई दिल्ली । 
    भारत की ओर से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को दिए गए दो अलग-अलग आधिकारिक निमंत्रणों पर पड़ोसी देश की ओर से अभी तक कोई अंतिम प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ढाका की ओर से संकेत दिए गए हैं कि प्रस्तावित भारत यात्रा का अंतिम ढांचा प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम और दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय बातचीत की प्रगति पर निर्भर करेगा।

    भारत ने सितंबर महीने में आयोजित होने जा रहे आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के विशेष सत्र के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया है। इसके अतिरिक्त एक पृथक द्विपक्षीय वार्ता के लिए भी नई दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि, बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अभी पर्याप्त समय शेष है और सरकार इस दौरान कई महत्वपूर्ण घरेलू व संवैधानिक प्राथमिकताओं में व्यस्त है।

    विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बिम्सटेक संगठन के वर्तमान अध्यक्ष के नाते भारत ने बांग्लादेश को ब्रिक्स सम्मेलन के संपर्क सत्र में शामिल होने का विशेष अवसर प्रदान किया है। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से बने तनावपूर्ण माहौल को सामान्य बनाना और द्विपक्षीय वार्ता के जरिए आपसी संबंधों को नई दिशा देना है।

    ढाका में अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकार सभी देशों के साथ सकारात्मक संबंधों की पक्षधर है। यदि आगामी दिनों में स्थितियां अनुकूल रहती हैं और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो निश्चित रूप से भारत यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। दोनों पड़ोसी मुल्कों के शीर्ष नेतृत्व के बीच प्रत्यक्ष संवाद से कई लंबित क्षेत्रीय व व्यापारिक मुद्दों के हल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बांग्लादेश में बीते समय में हुए राजनीतिक बदलावों के बाद से ही नई दिल्ली और ढाका के बीच रणनीतिक व कूटनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे समय में शीर्ष स्तर की यह प्रस्तावित बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। द्विपक्षीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि व्यापार, सुरक्षा और ऊर्जा संकट जैसे संवेदनशील विषयों पर दोनों देशों का मिलकर काम करना बेहद आवश्यक है।

    अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की इस हलचल का सीधा असर भारत के विभिन्न राज्यों और व्यापारिक साझेदारियों पर भी देखा जा सकता है। मध्य प्रदेश जैसे औद्योगिक और कृषि प्रधान राज्य, जो वस्त्र और हस्तशिल्प निर्यात से जुड़े हैं, वे भी पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक स्थिरता की उम्मीद रखते हैं। मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक घरानों और नीति निर्माताओं की नजरें भी इन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बनी रहती हैं।

    दक्षिण एशियाई कूटनीति में बिम्सटेक और ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका आने वाले समय में और अधिक निर्णायक होने की संभावना है। यदि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री इस सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो यह क्षेत्र में आर्थिक सहयोग और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध हो सकता है।

    हाल के समय में पैदा हुए गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों के राजनयिक लगातार संपर्क में हैं। अब सभी की नजरें ढाका के अंतिम आधिकारिक निर्णय पर टिकी हुई हैं कि क्या ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता संभव हो पाती है या नहीं।

  • भारत बांग्लादेश क्रिकेट मैच, BCCI टीम इंडिया, बांग्लादेश क्रिकेट टीम, ढाका क्रिकेट स्टेडियम, भारत बांग्लादेश सीरीज

    भारत बांग्लादेश क्रिकेट मैच, BCCI टीम इंडिया, बांग्लादेश क्रिकेट टीम, ढाका क्रिकेट स्टेडियम, भारत बांग्लादेश सीरीज

    नई दिल्ली ।भारत और बांग्लादेश के बीच सितंबर 2026 में प्रस्तावित वनडे और टी20 सीरीज को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। भारतीय क्रिकेट टीम इस दौरे पर जाएगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला फिलहाल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के हाथ में नहीं है। बांग्लादेश में मौजूदा परिस्थितियों और खिलाड़ियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को देखते हुए बीसीसीआई ने इस मामले में भारत सरकार की मंजूरी को जरूरी बताया है।

    प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार भारतीय टीम को बांग्लादेश दौरे पर तीन वनडे और तीन टी20 मुकाबले खेलने हैं। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस सीरीज को आयोजित करने को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है और उसने भारतीय बोर्ड के सामने दौरे को लेकर अपनी तैयारी भी जाहिर की है। दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड के बीच इस विषय पर बातचीत जारी है, लेकिन भारतीय टीम की यात्रा को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।

    बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बोर्ड सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले में अपने स्तर पर अंतिम फैसला नहीं लेना चाहता। ऐसे में भारत सरकार के संबंधित विभागों से बातचीत की जाएगी और सरकारी मंजूरी मिलने के बाद ही दौरे पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया जाएगा। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को बोर्ड की प्राथमिकता माना जा रहा है।

    बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 29 अगस्त से 15 सितंबर के बीच प्रस्तावित व्हाइट बॉल सीरीज के लिए समय भी निर्धारित रखा है। इस अवधि में तीन वनडे और तीन टी20 मैच कराने की योजना है। हालांकि, भारतीय टीम के दौरे की पुष्टि सरकार की सुरक्षा समीक्षा और मंजूरी पर निर्भर करेगी। अगर अनुमति मिलती है तो निर्धारित अवधि में सीरीज आयोजित की जा सकती है।

    इस पूरे मामले में भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुरक्षा परिस्थितियों का आकलन करने के बाद सरकार की ओर से बीसीसीआई को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भारतीय खिलाड़ी बांग्लादेश की राजधानी ढाका जाएंगे या दौरा आगे के लिए टाल दिया जाएगा।

    इस सीरीज का इतिहास भी मौजूदा स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और बांग्लादेश के बीच यह दौरा मूल रूप से 2024 में प्रस्तावित था। उस समय बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और बाद में हुए राजनीतिक बदलाव के कारण दोनों देशों के बीच परिस्थितियां बदल गई थीं। इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तावित क्रिकेट दौरे को आगे के लिए स्थगित कर दिया गया था।

    अब 2026 में इस सीरीज को दोबारा आयोजित करने की योजना सामने आई है। हालांकि, पहले की परिस्थितियों और वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय पक्ष किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहता। क्रिकेट बोर्ड के लिए खिलाड़ियों की सुरक्षा से समझौता नहीं करना प्राथमिकता है।

    अगर भारत सरकार दौरे को मंजूरी देती है तो अगस्त के अंत और सितंबर के दौरान दोनों टीमों के बीच सीमित ओवरों की सीरीज देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का प्रस्तावित कार्यक्रम प्रभावित होगा।

    फिलहाल दोनों क्रिकेट बोर्ड के बीच संपर्क बना हुआ है और अंतिम निर्णय के लिए सरकारी स्तर पर सुरक्षा आकलन का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार के रुख के बाद ही भारत-बांग्लादेश सीरीज के आयोजन और भारतीय टीम के दौरे को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बांग्लादेश, भारत के सामने जताई कड़ी नाराजगी और प्रत्यर्पण की मांग दोहराई

    दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बांग्लादेश, भारत के सामने जताई कड़ी नाराजगी और प्रत्यर्पण की मांग दोहराई


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हसीना को भारत में मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। ढाका ने आरोप लगाया कि हसीना और उनके सहयोगियों ने भारत की जमीन से बांग्लादेश और उसके लोगों के खिलाफ जहरीली बयानबाजी की। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम को लेकर उसने पहले ही भारत सरकार के सामने अपनी चिंता रखी थी, इसके बावजूद प्रेस कॉन्फ्रेंस होने दी गई।

    बांग्लादेश सरकार ने हसीना के बयानों को इतिहास की धारा को पलटने की नाकाम कोशिश करार दिया। ढाका का कहना है कि जिस समय बांग्लादेश में जुलाई क्रांति की दूसरी बरसी मनाई जा रही थी, उसी समय भारत से हसीना का मीडिया को संबोधित करना वहां के लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने इसे देश की संप्रभुता और जुलाई आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के प्रति अपमान बताया। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा और नागरिकों की मौत से जुड़े तथ्यों का भी हवाला दिया।

    ढाका ने हसीना और उनके सहयोगियों के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग देश को दोबारा उस दौर में नहीं ले जाना चाहते, जिसे वह फासीवाद का अंधेरा दौर बताता है। बांग्लादेश सरकार ने यह भी कहा कि देश किसी दूसरे राष्ट्र का क्लाइंट स्टेट नहीं बनेगा। इस बयान से स्पष्ट है कि हसीना के राजनीतिक भविष्य और उनके भारत में रहने को लेकर ढाका का रुख अभी भी बेहद सख्त है।

    बांग्लादेश ने भारत के साथ संबंधों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह भारत के साथ संप्रभु समानता, आपसी सम्मान और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप के आधार पर रचनात्मक संबंध चाहता है। हालांकि, इसी के साथ ढाका ने हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा फिर उठा दिया। बांग्लादेश ने कहा कि वर्ष 2013 में दोनों देशों के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत वह शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कई बार कर चुका है, लेकिन भारत की ओर से उसकी मांग पर अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

    बांग्लादेश सरकार के मुताबिक, हसीना को भारत में खुले तौर पर मीडिया से बातचीत का अवसर मिलना वहां के लोगों के लिए बेहद पीड़ादायक है। ढाका ने आशंका जताई कि इस तरह की घटनाएं भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। दूसरी ओर, भारत में मौजूद हसीना की सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर बांग्लादेश की आपत्ति इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच उनके प्रत्यर्पण का मुद्दा अभी भी संवेदनशील बना हुआ है।

    शेख हसीना को लेकर बांग्लादेश का रुख आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। ढाका एक तरफ भारत के साथ बेहतर और सम्मानजनक संबंधों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हसीना के प्रत्यर्पण और दिल्ली में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। ऐसे में दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक मतभेदों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग

    ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में बिजली और गैस की कमी के बीच ऊर्जा संकट लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए बांग्लादेश ने भारत से सीमा पार पाइपलाइन के जरिए डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति करने की अपील की है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ ईंधन सुरक्षा को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

    बांग्लादेश के पावर, एनर्जी और मिनरल रिसोर्सेज मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के साथ बैठक के बाद ऊर्जा सहयोग को चर्चा के प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश पहले से ही पाइपलाइन के माध्यम से भारत से डीजल आयात करता है और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उसने भारत से इसकी आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है।

    बांग्लादेश इस समय बिजली उत्पादन के लिए जरूरी ईंधन और गैस की उपलब्धता को लेकर दबाव का सामना कर रहा है। ऊर्जा की मांग पूरी करने के लिए डीजल की पर्याप्त आपूर्ति महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में भारत से अतिरिक्त ईंधन मिलने पर बांग्लादेश की घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है और बिजली उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार महत्वपूर्ण हुआ है। दोनों देशों के बीच बिजली के आदान-प्रदान के साथ ईंधन आपूर्ति और सीमा पार ऊर्जा संपर्क से जुड़ी व्यवस्थाएं भी विकसित हुई हैं। इसी सहयोग के तहत भारत से बांग्लादेश तक डीजल पहुंचाने के लिए सीमा पार पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जाता है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया। बांग्लादेश की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत के साथ ऊर्जा संबंध दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े हैं। पड़ोसी देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए सहयोग को आगे बढ़ाना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए डीजल आपूर्ति ने बांग्लादेश की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है। अप्रैल की शुरुआत में इस पाइपलाइन के माध्यम से भारत से बांग्लादेश को करीब 5,000 टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति शुरू हुई थी। उस समय पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के बीच ईंधन आयात पर दबाव बढ़ने की आशंका थी। ऐसे माहौल में पाइपलाइन के जरिए आपूर्ति को बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

    मौजूदा बिजली और गैस संकट के बीच बांग्लादेश की अतिरिक्त डीजल मांग से दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों का महत्व और बढ़ गया है। यदि भारत की ओर से अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराई जाती है, तो इससे बांग्लादेश को बिजली उत्पादन और परिवहन समेत कई क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    ऊर्जा सहयोग के साथ दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी इस समय चर्चा के केंद्र में हैं। सीमा पार बिजली और ऊर्जा संपर्क को मजबूत करने से क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति देने की संभावना है। बांग्लादेश की ताजा अपील ऐसे समय आई है जब वह अपनी तत्काल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भरोसेमंद ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है।

  • बांग्लादेश के पूर्व कप्तान शाकिब अल हसन के आवास पर पथराव और आगजनी की कोशिश, जांच में जुटी पुलिस

    बांग्लादेश के पूर्व कप्तान शाकिब अल हसन के आवास पर पथराव और आगजनी की कोशिश, जांच में जुटी पुलिस

    नई दिल्ली । बांग्लादेश में गहराते राजनीतिक संकट के बीच पूर्व राष्ट्रीय क्रिकेट कप्तान शाकिब अल हसन के मगुरा स्थित पैतृक आवास पर अज्ञात उपद्रवियों ने हमला कर दिया। हमलावरों ने उनके मकान पर जमकर पथराव किया, जिससे खिड़कियों के कांच टूट गए और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी और पूरे इलाके में सुरक्षा के सख्त इंतजाम कर दिए गए हैं। राहत की बात यह रही कि घटना के समय घर के भीतर कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई।

    प्राथमिक जांच के अनुसार, हमलावरों ने मकान के मुख्य प्रवेश द्वार को भी निशाना बनाया और वहां आग लगाने का प्रयास किया। पुलिस और फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उपद्रवियों की पहचान के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, हालांकि अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

    शाकिब अल हसन बांग्लादेश के एक प्रमुख खिलाड़ी होने के साथ-साथ हालिया वर्षों में सक्रिय राजनीति का हिस्सा भी रहे हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के शासनकाल में आम चुनाव लड़ा था और संसद सदस्य चुने गए थे। खेल के साथ-साथ राजनीति में उनकी भागीदारी के कारण वे अक्सर विभिन्न सार्वजनिक चर्चाओं और विवादों के केंद्र में रहे हैं। देश में हुए बड़े तख्तापलट के बाद से ही उनका राजनीतिक करियर और व्यक्तिगत जीवन काफी संवेदनशील स्थिति में बना हुआ है।

    यह हमला उस वक्त हुआ जब शाकिब ने घटना से कुछ ही समय पहले एक वर्चुअल सम्मेलन में हिस्सा लिया था, जहां देश के मौजूदा हालात पर विचार-विमर्श किया जा रहा था। इस कार्यक्रम के तुरंत बाद उनके आवास पर हुए हमले को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे बिना जांच पूरी हुए किसी भी नतीजे पर पहुंचने से बच रहे हैं और सभी संभावित कोणों से मामले की पड़ताल की जा रही है।

    देश में सत्ता परिवर्तन के बाद से शाकिब अल हसन बांग्लादेश से बाहर ही रह रहे हैं। उनके खिलाफ कई नए आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिस पर उन्होंने पहले बयान दिया था कि पर्याप्त सुरक्षा मिलने की स्थिति में ही वे स्वदेश लौटने पर विचार करेंगे। फिलहाल वे विदेशों में आयोजित विभिन्न टी20 क्रिकेट लीगों में खेल रहे हैं। मध्य प्रदेश सहित दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसक इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए हैं और खिलाड़ी की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

    इस घटना के बाद बांग्लादेशी खेल जगत और प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है ताकि किसी भी अन्य अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। अब हर किसी की निगाहें पुलिस जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस हमले के पीछे छिपे वास्तविक चेहरों और उनकी मंशा का खुलासा हो सकेगा।