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  • हसीना के सत्ता से हटने से पहले ही यूनुस को कमान सौंपने की हो गई थी तैयारी! इस दावे से बांग्लादेश में नई बहस शुरू

    हसीना के सत्ता से हटने से पहले ही यूनुस को कमान सौंपने की हो गई थी तैयारी! इस दावे से बांग्लादेश में नई बहस शुरू


    नई दिल्ली। बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने और मोहम्मद यूनुस के अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभालने से जुड़े घटनाक्रम पर नया विवाद खड़ा हो गया है। यूनुस के पूर्व प्रेस सचिव और समाचार एजेंसी AFP के पूर्व पत्रकार शफीकुल आलम ने दावा किया है कि हसीना के प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले ही छात्र नेताओं ने यूनुस को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने के लिए उनसे संपर्क की कोशिश शुरू कर दी थी। इस पूरी प्रक्रिया में AFP की फैक्ट-चेक टीम के तत्कालीन संपादक कदरुद्दीन शिशिर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। हालांकि, इस दावे से यह साबित नहीं होता कि सरकार गिराने की पूरी योजना पहले से तैयार थी।

    शफीकुल आलम के इस बयान के बाद बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के पीछे की रणनीति और अंतरिम सरकार के नेतृत्व के चयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आलम के मुताबिक, शिशिर ने छात्र नेताओं की ओर से यूनुस से संपर्क किया और दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत कराने में मदद की।

    कैसे हुई यूनुस और छात्र नेताओं के बीच बातचीत?
    शफीकुल आलम ने फेसबुक पोस्ट में बताया कि अगस्त 2024 में जब हसीना विरोधी आंदोलन तेज हो रहा था, तब छात्र नेता ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति की तलाश में थे, जो उनकी बात मोहम्मद यूनुस तक पहुंचा सके। उस समय AFP की फैक्ट-चेक टीम के संपादक कदरुद्दीन शिशिर ने यह जिम्मेदारी संभाली।

    आलम के अनुसार, शिशिर ढाका स्थित AFP कार्यालय में उनके पास ही बैठते थे और उन्होंने पूरी बातचीत गोपनीय तरीके से कराई। उन्होंने लिखा कि शिशिर ने छात्र नेताओं की ओर से सबसे पहले यूनुस से संपर्क किया और दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत का रास्ता बनाया।

    आलम ने दावा किया कि उस समय शेख हसीना की सरकार कमजोर पड़ रही थी, लेकिन यह संपर्क बेहद जोखिम भरा था। यदि सरकार को इसकी जानकारी मिल जाती तो शिशिर और AFP की पूरी टीम को कथित तौर पर ‘आइनाघर’ पहुंचा दिया जाता।

    ‘आइनाघर’ बांग्लादेश में एक कथित गुप्त हिरासत केंद्र के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है। हसीना शासन के दौरान यहां राजनीतिक विरोधियों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने, प्रताड़ित करने और उनकी हत्या किए जाने के आरोप लगते रहे हैं।

    आलम ने यह भी कहा कि शिशिर ने सरकार की कथित कार्रवाई से जुड़े वीडियो सबूत जुटाने शुरू कर दिए थे। AFP ने अगस्त 2024 के घटनाक्रम के दौरान बताया था कि इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच उसका ढाका ब्यूरो उन चुनिंदा स्थानों में शामिल था, जहां से बाहरी दुनिया तक खबरें पहुंचाई जा सकती थीं।

    हसीना के देश छोड़ने से पहले शुरू हुई थी यूनुस की भूमिका?
    शफीकुल आलम के दावे से यह सवाल उठ रहा है कि क्या मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने की बातचीत शेख हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो गई थी।

    बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़े जनआंदोलन में बदल गया। हिंसक प्रदर्शनों के बीच 5 अगस्त 2024 को हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा। वह भारत पहुंचीं।

    इसके अगले दिन, 6 अगस्त को छात्र आंदोलन के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव रखा था। इस घोषणा में नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद जैसे छात्र नेता शामिल थे। बाद में ये दोनों यूनुस सरकार में सलाहकार बने।

    8 अगस्त 2024 को पेरिस से ढाका लौटने के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार की जिम्मेदारी संभाली। शफीकुल आलम के ताजा बयान के मुताबिक, यूनुस को नेतृत्व सौंपने के लिए संपर्क की प्रक्रिया हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो चुकी थी। हालांकि, छात्र नेताओं की ओर से संभावित अंतरिम नेतृत्व पर बातचीत होना और पूरे सत्ता परिवर्तन की साजिश पहले से तैयार होना दो अलग-अलग बातें हैं।

    यूनुस का पुराना बयान भी फिर चर्चा में
    इस विवाद के बीच सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में मोहम्मद यूनुस की ओर से दिया गया बयान भी चर्चा में आ गया है। उस दौरान उन्होंने अपने विशेष सहायक महफूज आलम को पूरी क्रांति के पीछे का दिमाग बताया था।

    यूनुस ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन को अचानक हुआ घटनाक्रम मानने के बजाय व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया आंदोलन बताया था। उन्होंने कहा था कि इसकी नेतृत्व व्यवस्था इस तरह बनाई गई थी कि किसी एक नेता के पकड़े जाने पर भी आंदोलन जारी रह सके।

    यूनुस के उस बयान और शफीकुल आलम के ताजा दावे को जोड़कर अब आंदोलन की तैयारी और सत्ता परिवर्तन के बाद नेतृत्व तय करने की प्रक्रिया पर चर्चा हो रही है।

    हसीना की वापसी के बयान के बीच नया घटनाक्रम
    शफीकुल आलम का यह दावा ऐसे समय आया है, जब भारत में रह रहीं शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की बात दोहराई है। 19 अक्टूबर को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें गिरफ्तारी, प्रताड़ना या जान से मारे जाने का डर नहीं है।

    इसी बीच 28 अक्टूबर को ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के पूर्व फ्लाइट लेफ्टिनेंट के.एम. तहसिफ सौरी का शव तुराग नदी से बरामद किया गया। 28 वर्षीय तहसिफ का नाम उस वीडियो से जोड़ा गया था, जिसमें कथित तौर पर 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को देश छोड़ते हुए दिखाया गया था।

    तहसिफ को अगस्त 2024 में वायुसेना से सेवा मुक्त कर दिया गया था। उनके परिवार ने हत्या की आशंका जताई है, जबकि पुलिस के मुताबिक मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल उनकी मौत और हसीना के देश छोड़ने वाले वीडियो के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

    यूनुस का कार्यकाल खत्म, अब तारिक रहमान की सरकार
    बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने वाले मोहम्मद यूनुस ने फरवरी 2026 में पद छोड़ दिया। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बहुमत मिला और उसके नेता तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

    यूनुस के कार्यकाल में हसीना विरोधी आंदोलन से जुड़े कई छात्र नेताओं को अंतरिम सरकार में जगह मिली थी। बाद में इनमें से कुछ नेताओं ने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) बनाई, जिसने जमात गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा।

    अब शफीकुल आलम के बयान ने अगस्त 2024 के घटनाक्रम को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। हालांकि, उनके दावे को सत्ता परिवर्तन की पूर्व नियोजित साजिश का प्रमाण मानने के लिए स्वतंत्र पुष्टि और अतिरिक्त साक्ष्यों की जरूरत होगी।

  • योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर निशाना, बोले सत्ता परिवर्तन का रास्ता जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं

    योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर निशाना, बोले सत्ता परिवर्तन का रास्ता जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत में बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाली शक्तियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अराजकता के जरिए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां चुनाव सुधार, न्याय और लोकतंत्र जैसे मुद्दों की आड़ लेकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाली ताकतें युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण के बजाय अराजकता फैलाने के लिए करना चाहती हैं। उन्होंने युवाओं को देश के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनकी शक्ति का उपयोग राष्ट्रीय विकास के लिए होना चाहिए, न कि किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लोकतंत्र, चुनाव सुधार और न्याय से जुड़े नारों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों का सहारा लेकर देश में अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती जनता के विश्वास पर निर्भर करती है और इसे राजनीतिक षड्यंत्रों के जरिए कमजोर नहीं किया जा सकता।

    योगी आदित्यनाथ ने भारत के लोकतंत्र की तुलना एक विशाल वटवृक्ष से करते हुए कहा कि इसकी जड़ें जनविश्वास में हैं। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि उसे षड्यंत्रों और अस्थिरता पैदा करने वाली कोशिशों से हिलाया नहीं जा सकता। उनके बयान में जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सत्ता परिवर्तन का प्रमुख आधार बताया गया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में राजनीतिक विरोधियों पर यह आरोप भी लगाया कि वे सत्ता से दूर रहने के बाद अब अराजकता के माध्यम से राजनीतिक परिस्थितियों को बदलना चाहते हैं। उन्होंने ऐसे प्रयासों को सियासी साजिश करार देते हुए कहा कि देश को अस्थिरता की ओर धकेलकर सत्ता हासिल करने की कोशिश सफल नहीं होनी चाहिए।

    अपने बयान में योगी आदित्यनाथ ने कुछ राजनीतिक शक्तियों के लिए मारीच और कालनेमि जैसे पौराणिक पात्रों का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि जनता ने राजनीतिक दलों और नेताओं को पहचानकर ही उन्हें सत्ता से दूर रखा है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और किसी भी राजनीतिक दल को सत्ता हासिल करने के लिए जनादेश के अलावा दूसरे रास्ते नहीं अपनाने चाहिए।

    योगी आदित्यनाथ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब देश में चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। उनके संदेश में इन मुद्दों को लेकर सक्रिय शक्तियों पर देश में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, उनके बयान में किसी विशेष घटना या कथित साजिश के समर्थन में अलग से कोई विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में कहा कि भारत की जनता देश को अराजकता की आग में झोंककर सत्ता हासिल करने की कोशिशों को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने युवाओं की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में राजनीतिक बदलाव का आधार जनता का विश्वास और उसका जनादेश होना चाहिए।

  • रिजीम चेंज के बयान पर सियासी घमासान, राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए सत्ता परिवर्तन की साजिश के आरोप

    रिजीम चेंज के बयान पर सियासी घमासान, राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए सत्ता परिवर्तन की साजिश के आरोप

    नई दिल्ली ।देश में एसआईआर और चुनाव सुधारों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन के बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार बदलने के लिए अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव के जरिए सरकार बदलना है।

    लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधार, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष की मंशा को स्पष्ट करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग उसी तरह भारत में भी सत्ता बदलने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर सरकार बदलने और दूसरे देशों से प्रेरणा लेने संबंधी बयान दिए जा रहे हैं।

    भाजपा सांसद संबित पात्रा ने भी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बयान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन को मौजूदा संघर्ष का उद्देश्य बताने से विपक्ष की मंशा सामने आती है। एसआईआर के मुद्दे पर दिए गए बयानों को लेकर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह आंदोलन केवल चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए है या इसके पीछे सरकार बदलने का व्यापक राजनीतिक उद्देश्य भी है।

    विवाद की शुरुआत 15 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयानों के बाद हुई। इसमें प्रशांत भूषण के साथ सीजेपी नेता अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हुई थीं। प्रशांत भूषण ने कहा था कि यदि सरकार की कथित बर्बरता जारी रहती है, तो सरकार बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई नागरिक समाज और युवाओं के नेतृत्व में लड़ी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि वे ‘रिजीम चेंज’ चाहते हैं।

    इससे पहले 14 अक्टूबर को नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर एक संदेश दिया था। इसमें उन्होंने बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि वहां धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ चल रही लड़ाई और भारत में युवाओं की ओर से मोदी सरकार के खिलाफ किए जा रहे संघर्ष के बीच समानता है। उनके इस बयान को भी मौजूदा राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

    राजनाथ सिंह के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष चुनाव के माध्यम से सरकार बदलने की बात करता है। उन्होंने 1977 में हुए सत्ता परिवर्तन का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि उस समय भी सरकार नहीं बदली थी क्या। खेड़ा के अनुसार, विपक्ष का उद्देश्य आंदोलन और चुनावों के जरिए सत्ता परिवर्तन करना होता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना विपक्ष की राजनीतिक भूमिका का हिस्सा है। उन्होंने भाजपा नेताओं के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार बदलने के लिए चुनावी प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है।

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक संघर्ष को ‘दिमागी नक्सलियों’ और देशभक्त भारतीयों के बीच की लड़ाई बताया। साथ ही उन्होंने इसे संविधान में विश्वास रखने वालों और अराजकतावादियों के बीच का संघर्ष करार दिया।

    ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल, बांग्लादेश के आंदोलन के संदर्भ और सरकार बदलने की मांग को लेकर भाजपा तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर भाजपा नेता इन बयानों को अराजकता और सत्ता परिवर्तन की साजिश से जोड़ रहे हैं, वहीं कांग्रेस का कहना है कि चुनाव के जरिए सरकार बदलना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

  • शेख हसीना प्रत्यर्पण मामले में भारत का जवाब, बांग्लादेश को कहा- वापसी की समयसीमा अभी तय नहीं की जा सकती

    शेख हसीना प्रत्यर्पण मामले में भारत का जवाब, बांग्लादेश को कहा- वापसी की समयसीमा अभी तय नहीं की जा सकती

    नई दिल्ली ।शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने स्पष्ट किया है कि उनकी बांग्लादेश वापसी के लिए फिलहाल कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जा सकती। बांग्लादेश की ओर से हसीना को वापस भेजने का औपचारिक अनुरोध भारत को प्राप्त हुआ है और इस अनुरोध की कानूनी जांच की जा रही है। भारत के अनुसार, प्रत्यर्पण से जुड़ा मामला तय कानूनी, न्यायिक और कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी वजह से उनकी वापसी की कोई डेडलाइन निर्धारित नहीं की गई है।

    ढाका में आयोजित एक निजी चर्चा के दौरान भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर बांग्लादेश की ओर से लगातार की जा रही मांगों के बारे में सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हसीना की वापसी की समयसीमा के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश से मिले प्रत्यर्पण अनुरोध पर फिलहाल कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है और भारत इस मामले को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार देख रहा है।

    भारत को बांग्लादेश की ओर से शेख हसीना को वापस भेजने का औपचारिक अनुरोध मिल चुका है। इस अनुरोध की कानूनी समीक्षा वर्तमान में जारी है। भारत की ओर से यह संकेत दिया गया है कि मामले में किसी तरह की समयसीमा पहले से तय नहीं की जा सकती। प्रत्यर्पण से संबंधित निर्णय कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध प्रावधानों के आधार पर लिया जाएगा। इस दौरान भारत की ओर से मामले को न्यायिक और कूटनीतिक प्रक्रिया के दायरे में रखा गया है।

    शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच अचानक देश छोड़कर भारत आई थीं। उस समय बांग्लादेश में परिस्थितियां तेजी से बिगड़ रही थीं। हसीना उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं और उनकी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उनकी सरकार गिर गई और वह भारत आ गईं। भारत की ओर से उस समय कहा गया था कि तेजी से बिगड़ते हालात के बीच हसीना को भारत में आने की अनुमति देने के अलावा बहुत कम विकल्प मौजूद थे।

    भारत का कहना है कि उस समय हसीना को भारत आने की अनुमति देना सीमा पार बढ़ते संकट के बीच स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से जरूरी था। इसके बाद बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिति बदली और अब वहां तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार है। इस बदले राजनीतिक परिदृश्य के बीच शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग बांग्लादेश की ओर से लगातार की जा रही है।

    ढाका में बंगाल की खाड़ी संवाद 2026 के दौरान भी भारतीय उच्चायुक्त से इसी मुद्दे पर सवाल किया गया। उन्होंने दोहराया कि भारत फिलहाल हसीना की वापसी के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बता सकता। उनका कहना था कि प्रत्यर्पण अनुरोध कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है। ऐसे में आगे की कार्रवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी और फिलहाल उनकी वापसी की कोई डेडलाइन निर्धारित नहीं है।

  • बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू मंदिर में तैयार की जा रही 7 मूर्तियों से तोड़फोड़

    बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू मंदिर में तैयार की जा रही 7 मूर्तियों से तोड़फोड़


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) के टंगाइल जिले (Tangail district) में दुर्गा पूजा (Durga Puja) से पहले हिंदू मंदिर (Hindu temple) में तैयार की जा रही 7 प्रतिमाओं में अज्ञात लोगों ने तोड़फोड़ कर दी। यह घटना बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच मिर्जापुर उपजिला के जमुरकी पश्चिमपाड़ा स्थित मंदिर में हुई। स्थानीय अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में करीब 85 साल से जमुरकी आर्य समिति की देखरेख में दुर्गा पूजा आयोजित की जा रही है। इस घटना के बाद इलाके में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, जिन 7 प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया, उनमें मुख्य दुर्गा प्रतिमा भी शामिल थी। सभी प्रतिमाएं लगभग पूरी हो चुकी थीं और उनमें सिर्फ रंग भरने का काम बाकी था। जमुरकी आर्य समिति के अध्यक्ष प्रकाश बाकली ने बताया कि गुरुवार को जब वह अन्य समुदाय के लोगों के साथ मंदिर पहुंचे तो प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त हालत में पाया। उन्होंने कहा कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि तोड़फोड़ किसने की। मामले की औपचारिक शिकायत पुलिस से की गई है। अब उनकी मांग है कि पुलिस जिम्मेदार लोगों की पहचान करे और उन्हें कानून के तहत सजा दिलाए।


    पुलिस मामले की जांच कर रही

    घटना की सूचना मिलने के बाद टंगाइल के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद शमसुल आलम सरकार और सीनियर पुलिस अधिकारी मंदिर पहुंचे। अधिकारियों ने हिंदू समुदाय के लोगों को भरोसा दिलाया कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिले के सहायक पुलिस अधीक्षक मोहम्मद अदनान मुस्तफिज ने बताया कि कुछ प्रतिमाओं को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोषियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इलाके में जरूरी सुरक्षा इंतजाम भी किए गए हैं।


    सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना

    बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है और देश की आबादी में उनकी हिस्सेदारी करीब 7.95 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह समुदाय लंबे समय से सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करता रहा है। राजनीतिक और सामाजिक तनाव के अलग-अलग दौर में हिंदू समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। स्थानीय मंदिरों और प्रतिमाओं में तोड़फोड़ की घटनाएं भी इसी तरह की चुनौतियों का हिस्सा रही हैं। टंगाइल की ताजा घटना ऐसे समय हुई है जब दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही हैं और मंदिर में प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा था।

  • रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए यूरेनियम की खेप अटकी, पाकिस्तानी एयरस्पेस मंजूरी नहीं मिलने से विमान बांग्लादेश नहीं पहुंच सका

    रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए यूरेनियम की खेप अटकी, पाकिस्तानी एयरस्पेस मंजूरी नहीं मिलने से विमान बांग्लादेश नहीं पहुंच सका

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए रूस से भेजी जा रही यूरेनियम की खेप तय समय पर नहीं पहुंच सकी है। यूनिट-2 के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर आने वाले कार्गो विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं मिलने के कारण उसकी उड़ान प्रभावित हुई। अब यूरेनियम की नई खेप अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।

    बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम के मुताबिक, यूरेनियम लेकर आने वाले कार्गो विमान के 24 सितंबर को बांग्लादेश पहुंचने की उम्मीद थी। हालांकि, पाकिस्तानी एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिलने के कारण विमान तय कार्यक्रम के अनुसार नहीं पहुंच सका।

    एयरस्पेस क्लियरेंस नहीं मिलने की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। मंत्री ने बताया कि यूरेनियम की डिलीवरी के लिए नई तारीख प्रस्तावित की गई है और रूस की ओर से इसके अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचने की बात कही गई है।

    इस मामले में बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव शेख मोहम्मद तौहिदुल इस्लाम ने भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विमान के आने से पहले एयरपोर्ट पर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं और अधिकारी उसके पहुंचने का इंतजार कर रहे थे।

    उनके अनुसार, रोसाटॉम के संपर्क अधिकारी ने जानकारी दी कि एयरस्पेस क्लियर नहीं है। इसके चलते यूरेनियम को भेजना संभव नहीं हो सका। अब खेप की उड़ान को दोबारा निर्धारित किया जाना पड़ सकता है। हालांकि, इस दौरान यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किस देश की ओर से एयरस्पेस को ब्लॉक किया गया था।

    रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इसका निर्माण रूस की स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉरपोरेशन रोसाटॉम की तकनीकी सहायता से किया जा रहा है। परियोजना की निगरानी बांग्लादेश एटॉमिक एनर्जी कमीशन कर रहा है।

    यह संयंत्र बांग्लादेश के पाबना जिले के ईश्वरडी उपजिला के पाकशी यूनियन में पद्मा नदी के किनारे रूपपुर गांव में बनाया जा रहा है। परियोजना में तीसरी पीढ़ी के दो VVER-1200 रिएक्टर लगाए जा रहे हैं। दोनों रिएक्टरों की संयुक्त क्षमता 2,400 मेगावाट बेसलोड बिजली उत्पादन की होगी।

    रूपपुर परियोजना की यूनिट-1 के लिए लो-एनरिच्ड यूरेनियम फ्यूल की पहली खेप पहले ही रूस से बांग्लादेश पहुंच चुकी है। इस खेप में 164 नए फ्यूल असेंबली शामिल थे। इन्हें रूस के नोवोसिबिर्स्क केमिकल कंसंट्रेट्स प्लांट में तैयार किया गया था और भारी क्षमता वाले रूसी कार्गो विमान के जरिए ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट लाया गया था।

    ढाका पहुंचने के बाद रेडिएशन-शील्डेड कंटेनरों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पाबना के ईश्वरडी स्थित रूपपुर प्लांट तक पहुंचाया गया था। इसके लिए बांग्लादेश सेना और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी में विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था।

    अक्टूबर 2023 में प्लांट साइट पर यूरेनियम फ्यूल के आधिकारिक हैंडओवर का समारोह भी आयोजित किया गया था। अब यूनिट-2 के लिए आने वाली नई खेप की डिलीवरी एयरस्पेस क्लियरेंस से जुड़ी समस्या के कारण निर्धारित समय से आगे खिसक गई है। रूस की ओर से इसे अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचाने की नई समयसीमा बताई गई है।

  • भारत से रिश्ते नए सिरे से मजबूत करना चाहता है बांग्लादेश, विदेश राज्य मंत्री ने द्विपक्षीय बातचीत को बताया जरूरी

    भारत से रिश्ते नए सिरे से मजबूत करना चाहता है बांग्लादेश, विदेश राज्य मंत्री ने द्विपक्षीय बातचीत को बताया जरूरी

    नई दिल्ली । बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि ढाका नई दिल्ली के साथ ऐसा रिश्ता बनाना चाहता है, जो आपसी हितों पर आधारित हो। उन्होंने दोनों देशों के बीच सीधे संवाद को संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बताया।

    हुमायूं कबीर के मुताबिक भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए नहीं, बल्कि सीधे द्विपक्षीय स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को नए रिश्ते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आपसी हितों को प्राथमिकता देनी होगी।

    कबीर ने शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों को असहज बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ संबंधों को लेकर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने वाली सोच से बाहर निकलना होगा। उनका कहना था कि नई दिल्ली के साथ रिश्तों को संतुलित तरीके से देखा जाना चाहिए और इसे बांग्लादेश के दूसरे देशों के साथ संबंधों के व्यापक हिस्से के रूप में समझना चाहिए।

    बांग्लादेश का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में BRICS समिट अपने अंतिम दौर में है। बांग्लादेश ने कहा था कि उसके प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उन्हें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर निमंत्रण नहीं दिया गया था। ढाका के अनुसार, उन्हें BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया गया था। BIMSTEC बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का क्षेत्रीय संगठन है।

    इससे पहले अगस्त में भी प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा टल गया था। BRICS समिट से पहले भारत ने दोनों देशों के बीच अलग द्विपक्षीय बैठक के लिए उन्हें 22 अगस्त को भारत आने का निमंत्रण दिया था। हालांकि यात्रा से पहले ही यह कार्यक्रम स्थगित हो गया।

    उस समय बांग्लादेश ने भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया था। दोनों देशों के बीच इस विषय को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। उस दौरान हुमायूं कबीर ने कहा था कि माहौल अनुकूल होने पर द्विपक्षीय दौरे होंगे और जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ने की एक वजह शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके सार्वजनिक राजनीतिक बयानों को भी माना गया। 5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यह कार्यक्रम अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था।

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश सरकार ने आपत्ति जताई थी। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के संबंध सामान्य करने की कोशिशों को प्रभावित कर सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने दावा किया था कि भारत को पहले इस संबंध में आगाह किया गया था।

    भारत ने हालांकि शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार किया था। भारत का कहना था कि कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था की ओर से आयोजित किया गया था और सरकार का उससे कोई संबंध नहीं था। अब बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री की ओर से सीधे संवाद और आपसी हितों पर आधारित नए रिश्ते की बात दोनों देशों के संबंधों को लेकर ढाका के रुख को सामने रखती है।

  • भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश ने भारत के साथ हुए 101 समझौतों की समीक्षा शुरू कर दी है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के मुख्य व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने बताया कि सरकार इन सभी समझौतों की जांच कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि समीक्षा के बाद कुछ फैसलों का असर जल्द सामने आ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन समझौतों में बदलाव किया जाएगा और किन्हें समाप्त करने पर विचार होगा।

    नूरुल इस्लाम मोनी ने संसद सत्र समाप्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर सरकार की स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि भारत के साथ किए गए सभी 101 समझौतों की समीक्षा की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इनमें से कुछ समझौते खत्म किए जा सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब जल्द सामने आएगा। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष समझौते का नाम नहीं बताया।

    BNP नेता के मुताबिक, सरकार पिछली सरकार के कार्यकाल में लिए गए उन फैसलों की भी दोबारा समीक्षा कर रही है, जिन्हें देश के हित में सही नहीं माना गया था। उनका कहना है कि सरकार देश के हित को सबसे ऊपर रखकर पुराने फैसलों पर विचार कर रही है। ऐसे समझौतों में बदलाव की संभावना जताई गई है, जिनसे बांग्लादेश को नुकसान होने का आकलन किया जा रहा है।

    भारत के साथ हुए समझौतों की समीक्षा के बीच बंदरगाहों से जुड़े पुराने फैसले भी चर्चा में हैं। नूरुल इस्लाम मोनी ने चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से संबंधित नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले कुछ ऐसे नियम बनाए गए थे, जिनसे विदेशी जहाजों को अधिक फायदा मिला। उन्होंने कहा कि आगे होने वाले फैसलों में बांग्लादेश की जरूरतों और देश की संप्रभुता को सबसे अधिक महत्व दिया जाएगा।

    हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 101 समझौतों में से किन पर सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह यह भी सामने नहीं आया है कि किन समझौतों को बदला या समाप्त किया जा सकता है। BNP नेता ने केवल इतना संकेत दिया है कि समीक्षा के बाद कुछ फैसले जल्द सामने आ सकते हैं।

    इस बीच ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी BNP ने नाराजगी जताई है। नूरुल इस्लाम मोनी ने दिल्ली में हो रही बैठक में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित नहीं किए जाने पर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने इसे बांग्लादेश जैसे स्वतंत्र देश के लिए निराशाजनक बताया।

    ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने के मुद्दे पर भी मोनी ने भारत की ओर इशारा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस तरह भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने का मुद्दा बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक चर्चा में प्रमुखता से सामने आया है।

    फिलहाल समीक्षा की प्रक्रिया जारी है और किसी विशेष समझौते को बदलने या खत्म करने का आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। BNP नेता के अनुसार, आने वाले समय में सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो सकता है कि भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर बांग्लादेश की आगे की नीति किस दिशा में जाती है।

  • ब्रिक्स समिट में भाग नहीं लेगा बांग्लादेश… PM तारिक रहमान को न्योता नहीं मिलने का दिया हवाला

    ब्रिक्स समिट में भाग नहीं लेगा बांग्लादेश… PM तारिक रहमान को न्योता नहीं मिलने का दिया हवाला


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के आउटरीच सेशन में प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Prime Minister Tariq Rahman) के शामिल होने का न्योता ठुकरा दिया है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत तौर पर इस बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था, बल्कि यह न्योता BIMSTEC के मौजूदा चेयर को दिया गया था।

    बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में साफ किया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के BRICS समिट में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री को आमंत्रित ही नहीं किया गया, तो सरकार की ओर से किसी प्रतिनिधि को भेजने की भी कोई वजह नहीं है।


    ‘हमारे PM को किसने बुलाया? BIMSTEC चेयर को न्योता मिला था’

    हुमायूं कबीर ने कहा, “हम कैसे जाएंगे? क्या बांग्लादेश सरकार से किसी को आमंत्रित किया गया है? हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया था।” जब उनसे पूछा गया कि प्रधानमंत्री को न्योता दिए जाने की बात क्यों कही जा रही है, तो उन्होंने जवाब दिया, “आपको किसने बताया कि हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया गया था? BIMSTEC चेयर को आमंत्रित किया गया था। फिर आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं?”

    BRICS समिट का आउटरीच सेशन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होना है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ आउटरीच के लिए आमंत्रित किए गए नेता भी शामिल होंगे।


    भारत ने क्या कहा था?

    भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को BIMSTEC के मौजूदा चेयर के तौर पर 18वें BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। जायसवाल ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री के लिए एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण फरवरी से ही मौजूद है।

    बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि तारिक रहमान की भारत की पहली यात्रा बहुपक्षीय यात्रा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार भारत के साथ प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय यात्रा की व्यवस्था करने पर काम कर रही है और इसके लिए उचित समय का इंतजार किया जा रहा है।


    भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव के बीच आया फैसला

    बांग्लादेश का यह फैसला ऐसे समय आया है जब नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। इसकी वजहों में भारत में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदगी, उनके प्रत्यर्पण की मांग और पानी के बंटवारे से जुड़े समझौतों समेत कुछ अन्य लंबित मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा बांग्लादेश की चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी को भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव के संदर्भ में बताया गया है।

    फरवरी में भारत ने भेजे थे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला
    भारत ने 17 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बांग्लादेश भेजा था। वह 12 फरवरी के आम चुनाव के बाद तारिक रहमान की BNP सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। ओम बिरला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तारिक रहमान के लिए एक पत्र भी लेकर गए थे। इसमें प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष को बधाई दी थी और उन्हें पत्नी तथा बेटी के साथ भारत आने का निमंत्रण दिया था।

  • Women Asia Cup 2026 : बांग्लादेश को 40 रनों से हराकर फाइनल में पहुंची टीम इंडिया

    Women Asia Cup 2026 : बांग्लादेश को 40 रनों से हराकर फाइनल में पहुंची टीम इंडिया


    दुबई।
    महिला एशिया कप 2026 (Women Asia Cup 2026) के सेमीफाइनल (Semifinal) में बांग्लादेश (Bangladesh) को रौंदकर भारतीय महिला टीम (Indian Women’s Team) ने फाइनल का टिकट कटवा लिया है. दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में शेफाली वर्मा की 64 रनों की तूफानी पारी के दम पर भारत ने 149 रनों का स्कोर खड़ा किया. इसके जवाब में बांग्लादेश की महिला टीम (Bangladesh women’s team) 20 ओवरों में 6 विकेट खोकर 109 रन ही बना सकी. हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली टीम ने 40 रनों से मुकाबला जीत लिया।

    शुक्रवार (11 सितंबर) को पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच दूसरा सेमीफाइनल खेला जाएगा. ये मैच जीतने वाली टीम 13 सितंबर को भारत के खिलाफ फाइनल खेलेगी. बता दें कि अब तक हुए महिला एशिया कप के हर संस्करण में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया है. 10 में से 7 बार भारतीय महिला टीम एशिया कप की चैंपियन बनी है।

    बांग्लादेश के खिलाफ सेमीफाइनल में मिली शानदार जीत में आक्रामक बल्लेबाज शेफाली वर्मा का अहम योगदान रहा. उन्हें तीन जीवनदान मिले और उन्होंने इसका भरपूर फायदा उठाते हुए 40 गेंदों पर 64 रन बना दिए. इस दौरान शेफाली ने 7 चौके और 3 छक्के जड़े. उनकी इस पारी के दम पर भारत ने 149 रनों का स्कोर खड़ा किया।


    गेंदबाजी में चमकी दीप्ति शर्मा

    बल्ले से शेफाली वर्मा ने कोहराम मचाया तो गेंदबाजी में दीप्ति शर्मा का जलवा देखने को मिला. स्टार ऑलराउंडर ने 4 ओवर में 25 रन देकर 3 विकेट चटकाए. वहीं, नंदिनी शर्मा ने 10 रन देकर 2 विकेट चटकाए. बांग्लादेश की तरफ से शोर्ना अख्तर ने सबसे ज्यादा 22 रन बनाए और वो अंत तक नाबाद रहीं. 40 गेंदों पर 64 रनों की धमाकेदार पारी खेलने वाली स्टार बल्लेबाज शेफाली वर्मा को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया. एशिया कप 2026 में भारतीय महिला टीम की ये लगातार चौथी जीत है. इससे पहले ग्रुप स्टेज में भारत ने थाईलैंड, हांगकांग और पाकिस्तान को बुरी तरह रौंदा था।

    8वीं बार चैंपियन बनना चाहेगी टीम इंडिया
    एशिया कप में भारतीय महिला टीम का दबदबा रहा है. 2004 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट में 10 संस्करण हुए हैं और हर बार भारत ने फाइनल तक का सफर तय किया है. इसमें से 7 बार टीम इंडिया चैंपियन भी बनी है. अब हरमनप्रीत कौर एंड कंपनी की नजर 8वें खिताब पर होगी।