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  • बांग्लादेश पर चीन का बड़ा दांव! वांग यी ने भारत-अमेरिका को दिया साफ संदेश

    बांग्लादेश पर चीन का बड़ा दांव! वांग यी ने भारत-अमेरिका को दिया साफ संदेश


    नई दिल्ली। चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बीजिंग दौरे पर पहुंचे बांग्लादेश के विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने चीनी विदेश मंत्री Wang Yi से मुलाकात की, जिसके बाद चीन ने ऐसा बयान दिया जिसे भारत और अमेरिका के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। वांग यी ने साफ कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन के संबंध किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं और न ही इन रिश्तों पर किसी बाहरी देश का असर होना चाहिए। माना जा रहा है कि यह इशारा India और United States की ओर था।

    बांग्लादेश की नई सरकार और चीन की सक्रियता
    फरवरी में नई बीएनपी सरकार बनने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले महीने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री Tarique Rahman भी चीन दौरे पर जा सकते हैं।

    बैठक के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। चीन ने बांग्लादेश को हरसंभव समर्थन देने की बात कही।

    बेल्ट एंड रोड परियोजना पर जोर
    वांग यी ने कहा कि चीन बांग्लादेश के विकास में सबसे भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    ताइवान मुद्दे पर चीन को मिला समर्थन
    बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने “वन चाइना पॉलिसी” का समर्थन करते हुए कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और बीजिंग ही पूरे चीन की वैध सरकार है। इसे चीन के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

    दक्षिण एशिया में बदल रहे समीकरण
    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन लगातार दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश के साथ बढ़ती नजदीकियां भारत और अमेरिका दोनों के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती हैं।

  • बंगाल में BJP की बढ़त से बांग्लादेश में बढ़ी बेचैनी, ‘घुसपैठ’ पर क्या शुरू होगा नया विवाद?

    बंगाल में BJP की बढ़त से बांग्लादेश में बढ़ी बेचैनी, ‘घुसपैठ’ पर क्या शुरू होगा नया विवाद?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बढ़त ने भारत के साथ-साथ बांग्लादेश में भी सियासी हलचल तेज कर दी है। चुनाव परिणामों पर नजर रख रहे बांग्लादेश के नेताओं ने पहले ही संभावित स्थिति को लेकर चिंता जताई थी, जो अब फिर चर्चा में है। सवाल उठ रहा है कि अगर बंगाल में BJP सरकार बनाती है, तो क्या अवैध प्रवासियों यानी कथित ‘घुसपैठियों’ पर कार्रवाई तेज होगी और इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।

    दरअसल, बांग्लादेश की राजनीति में यह मुद्दा पहले ही उठ चुका है। बांग्लादेश की एक पार्टी के सांसद अख्तर हुसैन ने संसद में आशंका जताई थी कि अगर पश्चिम बंगाल में BJP सत्ता में आती है, तो भारत में रह रहे बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा जा सकता है। उनके मुताबिक, ऐसा होने पर बांग्लादेश को एक बड़े शरणार्थी संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि “प्रवासियों का सैलाब” देश में लौट सकता है, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं।

    भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। BJP लगातार इस मुद्दे को उठाती रही है और अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती रही है। ऐसे में बंगाल में उसकी संभावित जीत को इस नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2001 में भारत में करीब 1.2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी प्रवासी होने का अनुमान था। वहीं, कुछ स्वतंत्र रिपोर्ट्स के अनुसार यह संख्या 2026 तक 1.5 से 2 करोड़ के बीच हो सकती है। पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना में जनसंख्या बदलाव को अक्सर इस मुद्दे से जोड़कर देखा जाता है।

    लेकिन असली चुनौती इन लोगों की पहचान को लेकर है। बड़ी संख्या में लोग फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को भारतीय नागरिक साबित कर चुके हैं, जिससे उन्हें चिन्हित करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, अगर भारत इन्हें वापस भेजना चाहता है, तो बांग्लादेश की सहमति जरूरी होगी। अगर ढाका इन लोगों को अपना नागरिक मानने से इनकार करता है, तो यह मामला और जटिल हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल कानून या प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है। बांग्लादेश इस मुद्दे को अपनी संप्रभुता और सम्मान से जोड़कर देखता है, जबकि भारत इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन के नजरिए से देखता है।

    2024 के बाद बांग्लादेश की राजनीति में आए बदलाव के चलते वहां की सरकार पर घरेलू दबाव भी बढ़ा है कि वह भारत के प्रति सख्त रुख अपनाए। हालांकि, नई सरकार की ओर से भारत के साथ संबंध सामान्य रखने के संकेत भी दिए गए हैं, लेकिन ‘घुसपैठ’ का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील और संभावित विवाद का कारण बन सकता है।

    ऐसे में बंगाल चुनाव के नतीजे सिर्फ एक राज्य की सत्ता तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इसके असर क्षेत्रीय राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह मुद्दा सियासी बयानबाजी तक सीमित रहता है या वास्तव में किसी बड़े कूटनीतिक टकराव का रूप लेता है।

  • सरमा के बयान से भड़का कूटनीतिक विवाद: बांग्लादेश ने भारत के उच्चायुक्त को तलब कर जताया कड़ा विरोध

    सरमा के बयान से भड़का कूटनीतिक विवाद: बांग्लादेश ने भारत के उच्चायुक्त को तलब कर जताया कड़ा विरोध


    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक नया तनाव उभरकर सामने आया है, जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई। गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और इस तरह की टिप्पणियों को ‘काउंटरप्रोडक्टिव’ बताया।

    विवाद की जड़ 26 अप्रैल को दिया गया वह बयान है, जिसमें हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया था कि असम में पकड़े गए 20 विदेशी नागरिकों को ‘पुश बैक’ कर बांग्लादेश भेज दिया गया। इस बयान के सामने आते ही बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ढाका ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी से दोनों देशों के बीच भरोसे पर असर पड़ सकता है और द्विपक्षीय संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा होता है।

    बांग्लादेश के अधिकारियों ने भारतीय प्रतिनिधि के समक्ष यह भी कहा कि सीमा, प्रवासन और नागरिकता जैसे विषय बेहद संवेदनशील होते हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच पहले से स्थापित कूटनीतिक तंत्र के जरिए ही बातचीत होनी चाहिए। सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयान न केवल गलतफहमी बढ़ाते हैं, बल्कि सहयोग की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकते हैं।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत होने के बावजूद कुछ मुद्दों को लेकर संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम से लेकर अब तक दोनों देशों ने सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग बनाए रखा है। हालांकि अवैध प्रवासन, सीमा प्रबंधन और राजनीतिक बयानबाजी जैसे विषय समय-समय पर तनाव की वजह बनते रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया विवाद भले ही बयानबाजी तक सीमित हो, लेकिन इसका असर कूटनीतिक संवाद पर पड़ सकता है। ऐसे में दोनों देशों के लिए जरूरी है कि वे संवाद और संयम के जरिए इस तरह के मुद्दों को सुलझाएं, ताकि लंबे समय से बने भरोसे और साझेदारी को नुकसान न पहुंचे।

    फिलहाल, यह मामला इस बात का संकेत है कि पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल नीतियां ही नहीं, बल्कि नेताओं की भाषा और सार्वजनिक बयान भी उतने ही अहम होते हैं

  • बांग्लादेश में मंदिर पुजारी की संदिग्ध मौत, पेड़ से लटका मिला शव; हत्या का आरोप

    बांग्लादेश में मंदिर पुजारी की संदिग्ध मौत, पेड़ से लटका मिला शव; हत्या का आरोप


    ढाका। बांग्लादेश में एक हिंदू मंदिर से जुड़े पुजारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। घर से लापता होने के तीन दिन बाद उनका शव पेड़ से लटका मिला, जिसके बाद अल्पसंख्यक समुदाय ने इसे हत्या बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, कोक्स बाजार सदर उपजिला के खुरुशकुल यूनियन स्थित शिव-काली मंदिर के पुजारी और संरक्षक 40 वर्षीय नयन साधु का शव चटगांव जिले के दोहाजारी क्षेत्र के पास पहाड़ी इलाके में बरामद किया गया। वे मंदिर की देखरेख के साथ पूजा-अर्चना का कार्य भी संभालते थे।

    तीन दिन पहले हुए थे लापता

    स्थानीय पुलिस के मुताबिक 19 अप्रैल की शाम दो अज्ञात व्यक्ति नयन साधु को अपने साथ ले गए थे। इसके बाद से वह लापता थे। तीन दिन बाद गांव के बाहरी क्षेत्र में उनका शव मिला। पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का।

    समुदाय ने उठाए सवाल

    घटना के बाद बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

    परिषद से जुड़ी काजल देबनाथ ने सवाल उठाया कि एक छोटे और दूरदराज मंदिर के साधारण देखरेखकर्ता को निशाना बनाने के पीछे क्या कारण हो सकता है।

    वहीं बांग्लादेश पूजा उत्सव परिषद की कोक्स बाजार इकाई के महासचिव जॉनी धर ने कहा कि लापता होने के तीन दिन बाद शव मिलने से हत्या की आशंका और गहरी हो गई है।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। नयन साधु की पत्नी ने 19 अप्रैल को गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।

    सांप्रदायिक घटनाओं पर चिंता

    गौरतलब है कि बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद की हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 की पहली तिमाही में देश में सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

    इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • बांग्लादेश में हिन्दुओं पर फिर हमले…. मुस्लिम युवक की हत्या के बाद फूंके अल्पसंख्यकों के घर और दुकानें

    बांग्लादेश में हिन्दुओं पर फिर हमले…. मुस्लिम युवक की हत्या के बाद फूंके अल्पसंख्यकों के घर और दुकानें


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) के उत्तर-पश्चिमी जिले रंगपुर (Northwestern district Rangpur) और पश्चिमी जिले कुश्तिया (Western district Kushtia) में शनिवार को भारी हिंसा और तनाव की खबरें सामने आईं। एक मुस्लिम आध्यात्मिक गुरु की हत्या के बाद भड़की भीड़ ने रंगपुर में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों को निशाना बनाया। हैरानी की बात यह है कि मृतक के परिजनों द्वारा हिंदुओं का हाथ होने से इनकार किए जाने के बावजूद भीड़ ने इस समुदाय पर हमला बोल दिया। पुलिस इसे मुख्य मामले से ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी साजिश करार दे रही है।

    ढाका से लगभग 300 किलोमीटर दूर रंगपुर के दासपारा बाजार इलाके में शनिवार को एक मुस्लिम आध्यात्मिक गुरु रकीब हसन की बेरहमी से हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच के अनुसार, हसन की हत्या कथित तौर पर एक ड्रग तस्कर मोहम्मद मोमिन ने पुरानी रंजिश के चलते की थी।

    हालांकि, हत्या के कुछ ही घंटों बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। एक उग्र भीड़ ने दासपारा बाजार में स्थित हिंदुओं के घरों और दुकानों पर हमला बोल दिया। स्थानीय समाचार पत्र ‘प्रथम आलो’ के अनुसार, इस क्षेत्र में हिंदू समुदाय के लगभग सौ से अधिक परिवार रहते हैं। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावरों ने तोड़फोड़ के साथ-साथ लूटपाट की भी कोशिश की।


    ध्यान भटकाने के लिए हुए हमले

    रंगपुर के पुलिस कमिश्नर मोहम्मद मजीद अली ने मीडिया को बताया कि पुलिस असली हत्यारों की तलाश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा एक तीसरे पक्ष की साजिश है ताकि पुलिस का ध्यान रकीब हसन की हत्या के मामले से भटकाया जा सके। उन्होंने कहा, “हमने उन लोगों की पहचान कर ली है जिन्होंने हिंदू घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृतक रकीब की मां नूरजहां बेगम ने स्वयं बयान दिया कि इस हत्या में हिंदू समुदाय का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हमारा हिंदुओं साथ कोई विवाद नहीं है। हम सिर्फ अपने बेटे के असली हत्यारों की गिरफ्तारी चाहते हैं।”


    इस्लाम के अपमान का आरोप

    रंगपुर की घटना के समांतर ही ढाका से 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित कुश्तिया जिले में भी हिंसा की एक बड़ी वारदात हुई। यहां एक स्कूल शिक्षक और आध्यात्मिक हस्ती शमीम रजा जहांगीर की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई। उन पर इस्लाम के अपमान का आरोप लगाया गया था। दौलतपुर थाना पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने न केवल जहांगीर की जान ली, बल्कि उनके कम से कम सात अनुयायियों को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया। उग्र भीड़ ने जहांगीर के आश्रम को भी आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने बताया कि जहांगीर को इससे पहले 2021 में भी कट्टरपंथी संगठनों की शिकायतों पर विवादास्पद गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया था।


    स्थिति संभालने की कोशिश

    इन दोहरे हमलों के बाद प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रंगपुर और कुश्तिया में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) की तैनाती की है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।

    बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के आंकड़े डराने वाले हैं। ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच देश में सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वे कट्टरपंथी तत्वों पर नकेल कसें और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

  • बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत… संकट में भारत ने की मदद… 5000 टन अतिरिक्त Diesel भेजा

    बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत… संकट में भारत ने की मदद… 5000 टन अतिरिक्त Diesel भेजा


    ढाका।
    पश्चिम एशिया (West Asia.) में चल रहे संघर्ष के कारण बांग्लादेश (Bangladesh.) में पेट्रोल-डीजल का भारी संकट मंडरा रहा है। इस बीच भारत ने पड़ोसी देश की मदद करते हुए 5,000 टन अतिरिक्त डीजल (5,000 Tonnes Additional Diesel) की सप्लाई की है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार रात इस बात की पुष्टि की। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के महाप्रबंधक (वाणिज्यिक) मो. मुर्शेद हुसैन आजाद ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि भारत से 5,000 टन अतिरिक्त डीजल बांग्लादेश पहुंच गया है।

    इस नई खेप के साथ, बांग्लादेश को हाल के दिनों में भारत से कुल 15,000 टन डीजल मिल चुका है। 28 मार्च को 6,000 टन अतिरिक्त डीजल भेजने के लिए पंपिंग की प्रक्रिया की जाएगी। भारत ने आगामी अप्रैल माह में 40,000 टन डीजल की आपूर्ति करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे बांग्लादेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है।

    कैसे पहुंच रहा है डीजल?
    इस डीजल की सप्लाई असम स्थित ‘नुमालीगढ़ रिफाइनरी’ से की जा रही है। यह ईंधन ‘भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन’ के जरिए बांग्लादेश के पारबतीपुर डिपो तक भेजा जाता है। साल 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए बड़े जन आंदोलन के बाद इस मैत्री पाइपलाइन का संचालन रोक दिया गया था।

    हाल ही में फरवरी में हुए आम चुनावों के बाद, जब तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार ने सत्ता संभाली, तो इस पाइपलाइन को फिर से बहाल कर दिया गया। फिर से शुरू होने के बाद से अब तक इसी पाइपलाइन के माध्यम से 15,000 टन डीजल भेजा जा चुका है।

    बांग्लादेश में डीजल की मांग और आयात की स्थिति
    ऊर्जा विशेषज्ञ एजाज अहमद ने बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की वार्षिक डीजल मांग 40 लाख टन है, जो पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। विदेशों से आयात होने वाले कच्चे तेल में से केवल 5 लाख टन को ही बांग्लादेश की ‘ईस्टर्न रिफाइनरी’ में रिफाइन किया जा सकता है। बाकी की जरूरत पूरी करने के लिए सीधा रिफाइंड डीजल ही आयात करना पड़ता है। अपनी डीजल आपूर्ति के लिए बांग्लादेश मुख्य रूप से भारत, सिंगापुर और मध्य पूर्व पर निर्भर है।

  • बांग्लादेश से यूनुस के जाते ही सुधरने लगे रिश्ते…. अगले महीने भारत आएंगे विदेश मंत्री रहमान

    बांग्लादेश से यूनुस के जाते ही सुधरने लगे रिश्ते…. अगले महीने भारत आएंगे विदेश मंत्री रहमान


    नई दिल्ली।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का शासन खत्म होने ही भारत बांग्लादेश (India-Bangladesh) के रिश्ते पटरी पर लौटने लगे हैं। इसकी शुरुआत बांग्लादेश के विदेश मंत्री (Foreign Minister) की भारत यात्रा से हो सकती है। मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान (Foreign Minister Khalilur Rahman) अगले महीने भारतीय राजधानी की एक संक्षिप्त यात्रा पर आ सकते हैं। यह इसीलिए अहम है क्योंकि ढाका में तारिक रहमान की सरकार बनने के बाद बांग्लादेशी विदेश मंत्री की यह पहली विदेश यात्रा होगी।

    यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों ही देश संबंधों में आए भारी तनाव के बाद रिश्तों को दोबारा मजबूत बनाने की कोशिशें कर रही हैं। सूत्रों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि रहमान 8 अप्रैल को मॉरीशस में होने वाले हिंद महासागर सम्मेलन में जाते समय नई दिल्ली में रुक सकते हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि रहमान यूनुस सरकार का भी हिस्सा रह चुके हैं और वे तब पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Prime Minister Tariq Rahman) के मंत्रिमंडल में उनका नाम काफी चौंकाने वाला कदम था।

    इससे पहले भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने पिछले महीने ढाका में रहमान से मुलाकात की थी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से उन्हें जल्द से जल्द भारत आने का निमंत्रण दिया था। हालांकि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पहली विदेश यात्रा के बारे में ढाका की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों का मानना है कि इस बात की संभावना कम है कि तारिक रहमान पहले दौरे पर भारत या चीन जाएंगे।

    इसकी वजह यह है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार ने यह संकेत दिए हैं कि उसकी विदेश नीति किसी भी क्षेत्रीय शक्ति के पक्ष में नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेशी प्रधानमंत्री भूटान या मालदीव की यात्रा कर सकते हैं। सूत्रों ने बताया, “प्रधानमंत्री रहमान इस क्षेत्र के भीतर मजबूत संबंध बनाना चाहते हैं और उन क्षेत्रीय नेताओं के प्रति अपना आभार भी व्यक्त करना चाहते हैं जो उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे।”

  • सलमान आगा ने रन आउट विवाद पर खेल भावना का पाठ पढ़ाया

    सलमान आगा ने रन आउट विवाद पर खेल भावना का पाठ पढ़ाया



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज सलमान आगा ने बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे वनडे में अपने विवादित रन आउट के बाद खेल भावना (sportsman spirit) पर जोर देते हुए नया संदेश दिया। पारी के 39वें ओवर में बांग्लादेश के कप्तान मेहदी हसन मिराज गेंदबाजी कर रहे थे। चौथी गेंद पर मोहम्मद रिजवान का शॉट सीधे नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े सलमान आगा की ओर गया। मिराज ने गेंद उठाई और देखा कि सलमान अभी क्रीज के बाहर थे, इसके बाद उन्होंने तुरंत रन आउट के लिए अंपायर से अपील की। थर्ड अंपायर ने नियम के तहत उन्हें आउट करार दिया।

    घटना के बाद सलमान आगा ने कहा कि वे समझते हैं कि मिराज ने नियम के दायरे में ही सही काम किया। लेकिन अगर उन्हें मौका मिलता, तो वे नियम से ऊपर खेल भावना को चुनते। उन्होंने कहा, “यह बस उस पल की गरमा-गरमी थी। मैं हमेशा नियम का पालन करता हूं, लेकिन खेल में स्थिति चाहे जैसी भी हो, खेल भावना सबसे ऊपर होनी चाहिए।”

    सलमान ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा, “जो मेहदी ने किया, वह नियम के दायरे में सही है। अगर उन्हें लगता है कि यह सही है, तो यह सही है। लेकिन मेरे नजरिए से, मैं चीजें अलग तरह से करता। मैं हमेशा खेल भावना को प्राथमिकता दूंगा।” उनके इस बयान ने साबित किया कि क्रिकेट में सिर्फ नियमों का पालन ही नहीं बल्कि खेल भावना की भी उतनी ही अहमियत है।

    सलमान आगा का यह दृष्टिकोण खिलाड़ियों और फैन्स के लिए सीखने योग्य है। उन्होंने यह संदेश दिया कि खेल में जीत और हार महत्वपूर्ण है, लेकिन खेल भावना और ईमानदारी सबसे ऊपर होनी चाहिए। फैन्स ने उनके इस बयान को सराहा और इसे क्रिकेट के लिए सकारात्मक संदेश माना। यह घटना याद दिलाती है कि नियम के भीतर खेलते हुए भी खिलाड़ी खेल की आत्मा को हमेशा कायम रख सकते हैं।

    इस तरह सलमान आगा ने अपने रन आउट विवाद को अवसर में बदलते हुए खेल भावना की मिसाल पेश की। उनके बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्रिकेट में सम्मान और ईमानदारी हमेशा जीत से ऊपर हैं।

  • बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद भी हिंदुओं पर हमले जारी… फिर हुई दो की हत्या

    बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद भी हिंदुओं पर हमले जारी… फिर हुई दो की हत्या


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यकों (Minorities) के लिए हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। नई सरकार (New government) आने के बाद भी हिंदुओं और हिंदू मंदिरों (Hindu Temples) पर हमले का सिलसिला नहीं रुका है। पिछले एक हफ्ते में अलग-अलग घटनाओं में दो हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। वहीं, चार अन्य लोग, जिसमें एक पुजारी भी शामिल है, मंदिर के बाहर बम धमाके में घायल हो गए हैं। बांग्लादेश के दक्षिणपंथी ग्रुप, जातियो हिंदुओ मोहाजोतो ने इसकी जानकारी दी है। 6 मार्च और 7 मार्च को बोगुरा और कॉक्स बाजार में दो व्यक्तियों की हत्या कर दी गई, जबकि 8 मार्च को चुमिल्ला शहर में पूजा के दौरान एक हिंदु मंदिर पर क्रूड बम फेंके गए, जिससे काफी डर फैल गया।


    मंदिर पर हमले की पुष्टि

    बांग्लादेश समाचार की एक रिपोर्ट में कालीगाछ टाला काली मंदिर पर हमले की पुष्टि की है। कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी तौहीदुल अनवर ने बताया कि पुरोहित केशोब चक्रवर्ती, साथ ही अन्य दो लोगों को अस्पताल में उपचार मिला। मंदिर समिति के अध्यक्ष सजोल कुमार चंदा ने कहाकि धमाका धार्मिक समारोह के दौरान हुआ। सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर एक नकाबपोश व्यक्ति को धमाके से थोड़ी देर पहले मंदिर में प्रवेश करते और एक बैग छोड़ते हुए दिखाया गया। घायल पुजारी केशब चक्रवर्ती ने बताया कि बम विस्फोट के बाद, मेरे सामने एक सफेद चीज गिरी…बाद में, धुआं देखकर, दूसरों ने मुझे बताया कि यह एक बम था।


    क्षेत्र में फैल गई घबराहट

    विस्फोट के बाद क्षेत्र में घबराहट फैल गई। पहले धमाके के बाद, हमलावरों ने कथित तौर पर नजदीकी बौद्ध मंदिर और एक निजी ऑफिस के पास दो और साधारण बम फोड़ दिए। मेट्रोपॉलिटन पूजा उत्सव फ्रंट के संयोजक श्यामल कृष्ण ने स्थल का दौरा किया और जिम्मेदारों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया।

    उन्होंने कहाकि जो लोग शांतिपूर्ण वातावरण को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें जल्दी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। घटना के बाद पुलिस अधिकारियों, जिनमें कुमिला के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद अनीसुज्जमान भी शामिल थे, ने स्थल का दौरा किया और जांच में सहायता के लिए एक एंटी बम स्क्वॉड को बुलाया गया।

  • बंगाल में पकड़े गए बांग्लादेश के दो आरोपी, युवा नेता हादी की हत्या में बताए जा रहे शामिल

    बंगाल में पकड़े गए बांग्लादेश के दो आरोपी, युवा नेता हादी की हत्या में बताए जा रहे शामिल


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सीमा के पास पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर बांग्लादेश के युवा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शरिफ उस्मान हादी की हत्या में शामिल होने का आरोप है।

    पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बोंगांव सीमा क्षेत्र में छापेमारी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ा। पुलिस के मुताबिक आरोपी भारत में छिपे हुए थे और मौका मिलते ही वापस बांग्लादेश भागने की योजना बना रहे थे।

    गुप्त सूचना के बाद हुई कार्रवाई

    पुलिस को सूचना मिली थी कि बांग्लादेश में गंभीर अपराध करने के बाद दो लोग अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए हैं। इसके बाद STF ने बोंगांव इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया।

    7 और 8 मार्च की रात छापेमारी कर दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी पहचान राहुल उर्फ फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों पर हत्या और वसूली जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं।

    मेघालय सीमा से भारत में घुसे

    जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी मेघालय सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे। इसके बाद वे अलग-अलग जगहों पर घूमते रहे और अंत में पश्चिम बंगाल के बोंगांव इलाके में पहुंच गए।

    पुलिस को शक है कि वे कुछ समय तक सीमा के पास छिपे रहने के बाद फिर से बांग्लादेश भागने की योजना बना रहे थे।

    ढाका में हुई थी गोली मारकर हत्या

    जानकारी के अनुसार 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर इलाके में शरिफ उस्मान हादी पर उस समय हमला किया गया था जब वह रिक्शा से यात्रा कर रहे थे। हमलावरों ने करीब से गोली चलाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

    बेहतर इलाज के लिए 15 दिसंबर को उन्हें एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा गया, लेकिन 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

    हत्या के बाद ढाका में प्रदर्शन

    हादी की मौत के बाद ढाका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग की थी। उस समय मोहम्मद यूनुस ने इस घटना के बाद राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया था।

    बताया जाता है कि हादी को फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनाव में ढाका-8 सीट से संभावित उम्मीदवार माना जा रहा था।

    आगे की जांच जारी

    पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे और भारत में आने के बाद आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया।