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  • भारत के न्योते पर बांग्लादेश की चुप्पी से बढ़ी हलचल, शेख हसीना प्रत्यर्पण और चीन से बढ़ती नजदीकी पर नजर

    भारत के न्योते पर बांग्लादेश की चुप्पी से बढ़ी हलचल, शेख हसीना प्रत्यर्पण और चीन से बढ़ती नजदीकी पर नजर


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे या नहीं, इसे लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है। भारत में 12-13 सितंबर के बीच ब्रिक्स बैठक होनी है। लगभग सभी देश इसमें शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन बांग्लादेश के शिखर सम्मेलन से दूरी बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब शेख हसीना के प्रत्यर्पण और तीस्ता नदी के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। साथ ही बांग्लादेश में चीन के बढ़ते दखल के भी संकेत मिल रहे हैं। भारत अब तक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को नई दिल्ली आने का दो बार न्योता दे चुका है।

    बुधवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान उनसे पीएम रहमान के ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया। सवाल सुनते ही उन्होंने चुप्पी साध ली और विषय बदलने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वह वहां अपने देश के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं हैं और उनसे महासभा के अध्यक्ष के रूप में ही सवाल किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई द्विपक्षीय मुद्दा है तो वह विदेश मंत्री के तौर पर उस पर अलग से बात कर सकते हैं।

    भारत का न्योता

    भारत ने रहमान को BIMSTEC शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भी बुलाया है। इसमें भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, बांग्लादेश, म्यांमा, नेपाल और भूटान शामिल हैं। हालांकि, भारत की तरफ से यह भी कहा जा चुका है कि रहमान के आने की अभी कोई पुष्टि नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी दी थी।

    इससे पहले जब रहमान प्रधानमंत्री बने, तब भारत ने उन्हें नई दिल्ली आने का न्योता दिया था। हालांकि, उस समय भी उनकी यात्रा की पुष्टि नहीं हुई थी और ऐसी खबरें सामने आई थीं कि रहमान चीन जाने की तैयारी कर रहे हैं। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने यात्रा उस समय के लिए टाल दी थी। बाद में वह म्यांमार और बीजिंग पहुंचे थे।

    एक ओर बांग्लादेश भारत के सामने अपनी शर्तें रख रहा है, वहीं बैठकों में डीजल सप्लाई बढ़ाने समेत कई तरह की मदद भी मांग रहा है।

    किस मूड में है बांग्लादेश

    अगस्त में बांग्लादेश ने कहा था कि प्रधानमंत्री को भारत यात्रा की कोई जल्दी नहीं है। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा था कि अगर राष्ट्रीय हितों के आधार पर किसी समझौते पर पहुंचा जाता है तो अगले सप्ताह या उसके अगले सप्ताह यात्रा हो सकती है। उन्होंने कहा था कि इसे लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। इससे पहले भी बांग्लादेश ने कहा था कि रहमान की यात्रा के लिए भारत को अनुकूल माहौल बनाना होगा।

    क्या शेख हसीना हैं वजह

    साल 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। बाद में जब 2026 में रहमान सरकार ढाका में आई, तो उनके प्रत्यर्पण की मांग तेज हो गई। हाल ही में एक और मंत्री जाहिद उर रहमान ने कहा है कि हसीना को भारत से लेकर आएंगे और उन्हें फांसी दे दी जाएगी। हालांकि, इससे पहले बांग्लादेश सरकार ने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री को सभी कानूनी सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

    प्रत्यर्पण के मुद्दे पर पहले से तनावपूर्ण रिश्ते तब और खराब हुए, जब हसीना ने भारत में रहते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की। बांग्लादेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही इस पर आपत्ति जताई थी और बाद में अपना रुख और सख्त कर लिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।

    क्या चीन है कारण

    जून में तारिक रहमान चीन की यात्रा पर पहुंचे थे और इस दौरान बांग्लादेश की ओर से बीजिंग से निवेश मांगने की खबरें सामने आई थीं। यात्रा के दौरान कई द्विपक्षीय समझौते भी हुए थे। बांग्लादेश ने बीजिंग से तीस्ता नदी के मुद्दे पर मदद मांगी थी। इसके अलावा मोंगला पोर्ट पर SEZ यानी स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाए जाने से जुड़ी डील भी चर्चा में रही थी। ढाका के इन कदमों को भारत बारीकी से देख रहा था।

  • भारत-बांग्लादेश के बीच फिर रेल सेवा शुरू करने की तैयारी….इसी सप्ताह हो सकती है बड़ी बैठक

    भारत-बांग्लादेश के बीच फिर रेल सेवा शुरू करने की तैयारी….इसी सप्ताह हो सकती है बड़ी बैठक


    नई दिल्ली।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के तनावपूर्ण संबंधों (Strained Relations) के बीच जल्द एक खुशखबरी मिलने के आसार हैं। खबर है कि भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) इस हफ्ते सीमा पार यात्री ट्रेन (Passenger Train) सेवाओं को फिर से शुरू करने पर चर्चा कर सकते हैं। ये सेवाएं 2024 में बांग्लादेश में हुई हिंसक अशांति के बाद से बंद हैं जिसके कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

    अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश रेलवे के अधिकारी मंगलवार से ढाका में अपने भारतीय अधिकारियों के साथ दो दिन की बैठक करेंगे। इसमें मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस सेवाओं को फिर से शुरू करने और एक नया रेलमार्ग शुरू करने की संभावना पर चर्चा होगी।


    जान ले स्टॉपेज

    इस मामले से अवगत बांग्लादेश रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, ‘हम कल से शुरू होने वाली IGRM यानी अंतर-सरकारी रेलवे बैठक में मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस जैसी रेलवे सेवाओं को फिर से शुरू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने वाले हैं।’ मैत्री एक्सप्रेस ढाका को कोलकाता से जोड़ती है, बंधन एक्सप्रेस खुलना को कोलकाता से जोड़ती है जबकि मिताली एक्सप्रेस पहले ढाका को न्यू जलपाईगुड़ी से जोड़ती थी। कोलकाता और न्यू जलपाईगुड़ी, दोनों पश्चिम बंगाल में हैं।


    किस मूड में है बांग्लादेश

    नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित राजशाही को कोलकाता से जोड़ने वाले एक नए रेल मार्ग का प्रस्ताव रख सकता है। बांग्लादेश की ओर से यह प्रस्ताव दिए जाने की भी संभावना है कि मैत्री एक्सप्रेस जमुना ब्रिज के बजाय हाल में बने पद्मा ब्रिज से होकर ढाका और कोलकाता के बीच चले।

    अधिकारी ने कहा, ‘अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन अगले महीने से फिर शुरू हो सकता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रेलवे अधिकारी भी इन सेवाओं को फिर से शुरू करने में रुचि रखते हैं।


    अब कैसे हैं रिश्ते

    भारत और बांग्लादेश ने सोमवार को द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की और ‘पारस्परिक विश्वास एवं आपसी लाभ के आधार पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने’ पर सहमति जताई। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने यहां प्रधानमंत्री के सलाहकार मो इस्माइल जबीउल्ला से मुलाकात की और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों पर चर्चा की।

    भारतीय उच्चायोग ने उम्मीद जताई कि दोनों संप्रभु देश पारस्परिक विश्वास और आपसी फायदे के आधार पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

  • महिला एशिया कप में भारत के बाद श्रीलंका अंतिम चार में पहुंचा, पाकिस्तान के पास आज सेमीफाइनल बचाने का आखिरी मौका

    महिला एशिया कप में भारत के बाद श्रीलंका अंतिम चार में पहुंचा, पाकिस्तान के पास आज सेमीफाइनल बचाने का आखिरी मौका

    नई दिल्ली । महिला एशिया कप 2026 के सेमीफाइनल की तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है। श्रीलंका ने बांग्लादेश को चार विकेट से हराकर अंतिम चार में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत के बाद श्रीलंका टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है। अब बाकी दो स्थानों के लिए मुकाबला रोमांचक हो गया है और पाकिस्तान की नजर आज हांगकांग के खिलाफ होने वाले मैच पर टिकी है।

    श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच मुकाबला बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा। बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका के सामने 115 रन का लक्ष्य रखा। लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान चमारी अटापट्टू महज एक रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद लगातार विकेट गिरने से टीम मुश्किल स्थिति में पहुंच गई।

    पावरप्ले के दौरान श्रीलंका ने कई महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए। इसके बाद विशमी गुणरत्ने और कविशा दिलहारी के आउट होने से परेशानी और बढ़ गई। एक समय श्रीलंका का स्कोर पांच विकेट पर सिर्फ 44 रन था। ऐसा लग रहा था कि बांग्लादेश मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना चुका है और श्रीलंका के लिए लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल होगा।

    इसी संकट के समय हर्षिता समरविक्रमा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने नीलक्षिका सिल्वा के साथ मिलकर छठे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी की। दोनों ने 38 रन जोड़कर श्रीलंका की उम्मीदों को जिंदा रखा। इसके बाद हर्षिता ने आखिरी ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया।

    श्रीलंका को आखिरी तीन ओवर में जीत के लिए 29 रन चाहिए थे। दबाव के बावजूद हर्षिता ने बड़े शॉट लगाने जारी रखे। 18वें ओवर में उन्होंने 16 रन जुटाए और अगले ओवर में 11 रन बनाकर टीम को जीत के बेहद करीब पहुंचा दिया। इसके बाद श्रीलंका ने 19वें ओवर की दूसरी गेंद पर लक्ष्य हासिल कर लिया और चार विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ श्रीलंका ने ग्रुप बी में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया। टीम ने ग्रुप चरण में लगातार तीन मुकाबले जीतकर अंतिम चार में जगह बनाई है। इससे पहले भारत भी ग्रुप चरण में लगातार जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल में पहुंच चुका है।

    भारत ग्रुप ए में शीर्ष स्थान हासिल कर चुका है और उसका सेमीफाइनल मुकाबला 10 सितंबर को खेला जाएगा। ग्रुप बी की दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम भारत से भिड़ेगी। वहीं श्रीलंका 11 सितंबर को सेमीफाइनल में ग्रुप ए की दूसरे स्थान वाली टीम के खिलाफ उतरेगा। दोनों सेमीफाइनल मुकाबले दुबई में खेले जाएंगे।

    अब पाकिस्तान के लिए आज का मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। पाकिस्तान को हांगकांग के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी ताकि वह सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर सके। भारत के खिलाफ पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा था, इसलिए टीम के लिए अब किसी भी तरह की चूक भारी पड़ सकती है।

    ग्रुप बी में बांग्लादेश के पास अभी भी एक मुकाबला बाकी है, जबकि ग्रुप ए में पाकिस्तान और हांगकांग के बीच मुकाबला स्थिति तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। ऐसे में महिला एशिया कप के अंतिम दो सेमीफाइनल स्थानों के लिए आने वाले मुकाबले बेहद निर्णायक रहने वाले हैं।

  • बांग्लादेश में इस बार जन्माष्टमी पर नहीं दिखेगी पहले जैसी रौनक…. सरकार ने रद्द किया अवकाश

    बांग्लादेश में इस बार जन्माष्टमी पर नहीं दिखेगी पहले जैसी रौनक…. सरकार ने रद्द किया अवकाश


    ढाका।
    जैसे-जैसे जन्माष्टमी (Janmashtami) के साथ अन्य हिंदू त्योहारों (Hindu Festivals Holidays) की समय नजदीक आ रहा है, बांग्लादेश (Bangladesh) में सरकार के प्रति हिंदुओं में रोष बढ़ता ही जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि बांग्लादेश सरकार (Bangladesh Government) ने जन्माष्टमी को मिलने वाला सरकारी अवकाश रद्द कर दिया है। ढाकेश्वरी मंदिर, चट्टग्राम, सिलहट समेत कई मंदिरों में जन्माष्टमी मनाई जानी है, लेकिन इस बार यहां जन्माष्टमी को आधिकारिक छुट्टी नहीं रहेगी।

    खबरों के मुताबिक, इस वर्ष 2 जनवरी को ही बांग्लादेश में सरस्वती पूजा, जन्माष्टमी, दुर्गाष्टमी और बुद्ध पूर्णिमा की सरकारी छुट्टियां रद्द कर दी गईं। हिंदू जागृति समिति व इसकी अगुवाई में हिंदुओं ने इसका भारी विरोध किया है। हसीना के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की हिंसा के चलते ढाका, सिलहट, खुलना, कुमिला, जेसोर और मीरपुर में बड़े-बड़े जुलूस नहीं निकाले जा रहे हैं इस बार भी यहां उत्साह फीका रहेगा। देश के अखबार प्रोथोम आलो के मुताबिक, इस बार मंदिरों में जन्माष्टमी समारोह तो होंगे लेकिन दस दिन पूर्व से बाजारों में जो उत्साह देखा जाता था वह इस बार नहीं है। बांग्लादेश में एक समय रहा है जब हिंदू पर्वों के लिए मंदिरों में उत्साह होता था और बड़े बड़े उत्सव तथा जुलूस निकाले जाते थे, लेकिन अब देश में पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल जैसी उमंग नहीं दिख रही।


    सरकार का दावा, मंदिरों में विशेष सुरक्षा प्रबंध

    बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने सियासी उथल-पुथल के समय अल्पसंख्यक सुरक्षा के बाद कहा है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन की तरफ से मंदिरों के लिए विशेष सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। हालांकि बांग्लादेश हिंदू जागरण मंच के प्रवक्ता निहार हलदर ने कहा, अभी समुदाय में डर है। कुछ मंदिरों में जनमाष्टमी पर शोभायात्राएं निकाली जाएंगी लेकिन ज्यादातर जगहों पर पहले जैसी रंगत नहीं रहेगी।

  • बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन

    बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश अपनी वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए चीन निर्मित J-10CE मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की खरीद की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित सौदे को देश के व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा बताया जा रहा है। इसके साथ ही अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी हेलीकॉप्टर और ड्रोन प्रणालियां खरीदने की योजना पर भी काम चल रहा है।

    बांग्लादेश सरकार के अनुसार, J-10CE और अटैक हेलीकॉप्टरों से संबंधित प्रस्ताव पर खरीद समितियों ने मसौदा तैयार कर लिया है। अब इन दस्तावेजों को सशस्त्र बल प्रभाग और संबंधित मंत्रालयों से मंजूरी मिलने का इंतजार है। सरकार की योजना उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर खरीद को मौजूदा वित्तीय वर्ष में आगे बढ़ाने या अगले बजट में शामिल करने की है।

    J-10CE चीन का चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। यह अलग-अलग प्रकार के हवाई अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बांग्लादेश की ओर से विमान की क्षमताओं और लागत को खरीद प्रक्रिया में महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि समान श्रेणी के कुछ पश्चिमी लड़ाकू विमानों की तुलना में चीनी विकल्प अपेक्षाकृत कम लागत में उपलब्ध हो सकते हैं।

    बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार जाहेद उर रहमान ने J-10CE के युद्ध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य संघर्ष का हवाला दिया। हालांकि, किसी राफेल विमान को J-10CE द्वारा मार गिराए जाने की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस दावे को लेकर अलग-अलग विरोधाभासी बातें सामने आती रही हैं, इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं है।

    ढाका की प्रस्तावित खरीद केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। सरकार अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी परिवहन के लिए हेलीकॉप्टर और मानव रहित हवाई प्रणालियों यानी ड्रोन की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य बांग्लादेश की वायुसेना और व्यापक सुरक्षा ढांचे को आधुनिक तकनीक से मजबूत करना बताया गया है।

    J-10CE की संभावित खरीद का क्षेत्रीय प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांग्लादेश भारत का पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक तथा सुरक्षा संबंध रहे हैं। ऐसे में ढाका की सैन्य खरीद में चीन की भूमिका बढ़ने पर दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों पर चर्चा स्वाभाविक है।

    हालांकि, प्रस्तावित खरीद को अभी अंतिम सौदा नहीं माना जा सकता। मसौदा समझौतों को विभिन्न सरकारी स्तरों पर मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना है। इसके बाद ही विमान और अन्य रक्षा उपकरणों की वास्तविक खरीद, संख्या, कीमत तथा आपूर्ति से जुड़ी शर्तें स्पष्ट हो सकेंगी।

    बांग्लादेश सरकार इस रक्षा योजना को अपनी रणनीतिक निर्णय क्षमता से भी जोड़ रही है। सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि देश अब अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश और रक्षा नीति से जुड़े फैसले लेने पर अधिक जोर दे रहा है। इसी संदर्भ में चीन से लड़ाकू विमान खरीदने की चर्चा को स्वतंत्र रणनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

    J-10CE सौदा आगे बढ़ता है तो यह बांग्लादेश की वायुसेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सामरिक उपयोगिता विमान की संख्या, हथियार प्रणाली, प्रशिक्षण, रखरखाव और परिचालन क्षमता पर निर्भर करेगी। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ढाका ने खरीद प्रक्रिया को औपचारिक स्तर पर आगे बढ़ा दिया है और संबंधित प्रस्ताव मंजूरी के चरण में पहुंच चुके हैं।

  • बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल

    बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल


    ढाका।
    बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या का मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। पुलिस ने हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अहम साक्ष्य सामने नहीं लाए जा रहे हैं।

    सबसे गंभीर सवाल परिवार की महिला सदस्यों से कथित दुष्कर्म को लेकर उठ रहा है। हालांकि, दुष्कर्म के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की रिपोर्ट में महिलाओं के साथ दुष्कर्म का उल्लेख नहीं किया गया है।

    शवगृह कर्मचारी के दावे से बढ़ा विवाद

    स्थानीय मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन में शवगृह के एक कर्मचारी ने महिलाओं के शवों से कथित तौर पर वीर्य मिलने का दावा किया। इस दावे के बाद मामले में दुष्कर्म की आशंका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र फॉरेंसिक या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना कि हत्या से पहले निश्चित तौर पर दुष्कर्म हुआ था, फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    चारों की गला घोंटकर हत्या

    पुलिस रिपोर्ट के अनुसार स्कूल शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे की गला घोंटकर हत्या की गई। मामले में गणपति के रिश्तेदार मुग्धो दास और सिद्धार्थ दास को गिरफ्तार किया गया है।

    स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि हत्या में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    जांच डिटेक्टिव ब्रांच को सौंपी गई

    विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर डिटेक्टिव ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    इस बीच हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। संगठनों ने मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फॉरेंसिक जांच में दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि होती है और क्या हत्या में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। इन दोनों सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग

    Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में गुरुवार को नया राष्ट्रपति (New President) चुनने के लिए मतदान होने जा रहा है. 35 सालों के लंबे समय के बाद ये पहली बार है जब देश के राष्ट्रपति पद के लिए सीधे संसद में वोट डाले जाएंगे। राष्ट्रपति पद की रेस में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (Mirza Fakhrul Islam Alamgir) और 11 दलीय विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद (Oli Ahmed) के बीच है.

    चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान जातीय संसद (संसद भवन) में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा. निर्वाचन आयोग ने 16 अगस्त को ही दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध करार दिया था।

    मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बीएनपी का प्रमुख चेहरा हैं, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद बीर बिक्रम जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय विपक्षी मोर्चे के उम्मीदवार हैं.


    BNP की बैठक में भावुक हुए फखरुल

    बुधवार को BNP संसदीय दल की बैठक के दौरान फखरुल ने अपनी ही पार्टी के सांसदों से समर्थन की अपील की. लंबे समय तक पार्टी के महासचिव रहे फखरुल बैठक में बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए.

    उन्होंने सांसदों से कहा, ‘अगर मेरे कार्यकाल के दौरान मुझसे कोई भूल हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो मैं माफी मांगता हूं. उन्होंने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता न करने का संकल्प भी लिया.


    शुक्रवार को नए राष्ट्रपति लेंगे शपथ

    चुनावी नतीजों के तुरंत बाद नए राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे.

    बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद ये पद खाली हुआ था. संविधान के तहत पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है. फिलहाल सभपति (स्पीकर) हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति पद पर हैं।


    BNP का पलड़ा भारी

    इस साल 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बीएनपी ने सत्ता में वापसी की थी. संसद में बीएनपी के पास दो-तिहाई से ज्यादा का बहुमत है. ऐसे में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के घोषित उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पेशे से अर्थशास्त्री रहे फखरुल 1990 के दशक में बीएनपी में शामिल हुए थे. वो पहले कृषि राज्य मंत्री और स्थानीय सरकार मंत्री भी रह चुके हैं।

  • ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा

    ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा


    नई दिल्ली ।
    डार्विन के मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले में बांग्लादेश ने बड़ा उलटफेर करते हुए मेजबान ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से पराजित कर दिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही बांग्लादेश ने टेस्ट श्रृंखला का आगाज धमाकेदार अंदाज में किया है। खेल के हर विभाग में ऑस्ट्रेलियाई टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके बाद पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का गुस्सा भड़क उठा है। पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग, मार्क वॉ और मैथ्यू हेडन ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए टीम प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मार्क वॉ ने इस हार को ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर करार दिया है। उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में इतना बड़ा उलटफेर नहीं देखा। वॉ ने रेखांकित किया कि बांग्लादेश की टीम अपने दो प्रमुख तेज गेंदबाजों के बिना मैदान पर उतरी थी, इसके बावजूद उसने ऑस्ट्रेलिया की पूरी तरह से मजबूत टीम को पछाड़ दिया। उनके अनुसार, यह पराजय गाबा में वेस्टइंडीज के हाथों मिली हार से भी अधिक चौंकाने वाली है।

    दूसरी ओर पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने इस हार को बेहद शर्मनाक बताते हुए टीम में बड़े बदलावों की वकालत की है। पोंटिंग का मानना है कि अब समय आ गया है जब ऑस्ट्रेलियाई टीम को भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि टीम को तुरंत नए सलामी बल्लेबाज और नंबर 3 के स्थान पर बदलाव करने की आवश्यकता है। पहले व्यापक बदलावों के पक्ष में न रहने वाले पोंटिंग ने स्वीकार किया कि इस करारी हार ने पूरी स्थिति बदल दी है।

    इसी बीच पूर्व दिग्गज मैथ्यू हेडन ने भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम की नाकामी पर चिंता जताई और सलाह दी कि ट्रेविस हेड को पुनः नंबर 5 के स्थान पर भेजा जाना चाहिए। मैच के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने भी बांग्लादेशी टीम के बेहतर प्रदर्शन की सराहना की और अपनी टीम की नाकामियों को स्वीकार किया। मध्य प्रदेश सहित दुनिया भर के क्रिकेट विशेषज्ञों की नजरें अब आगामी मुकाबले पर टिकी हैं।

    श्रृंखला के दूसरे टेस्ट मैच से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम पर मानसिक दबाव साफ दिखाई दे रहा है। पूर्व दिग्गजों के कड़े रुख और मीडिया में हो रही आलोचनाओं के बाद आगामी मैच के लिए ऑस्ट्रेलियाई प्लेइंग-11 में बड़े बदलाव होना लगभग तय माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रबंधन इन दिग्गजों के सुझावों पर किस तरह अमल करता है।

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  • भारत द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को मिले दो द्विपक्षीय निमंत्रणों पर बांग्लादेश सरकार ने व्यस्तता का हवाला दिया।

    भारत द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को मिले दो द्विपक्षीय निमंत्रणों पर बांग्लादेश सरकार ने व्यस्तता का हवाला दिया।


    नई दिल्ली । 
    भारत की ओर से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को दिए गए दो अलग-अलग आधिकारिक निमंत्रणों पर पड़ोसी देश की ओर से अभी तक कोई अंतिम प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ढाका की ओर से संकेत दिए गए हैं कि प्रस्तावित भारत यात्रा का अंतिम ढांचा प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम और दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय बातचीत की प्रगति पर निर्भर करेगा।

    भारत ने सितंबर महीने में आयोजित होने जा रहे आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के विशेष सत्र के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया है। इसके अतिरिक्त एक पृथक द्विपक्षीय वार्ता के लिए भी नई दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि, बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अभी पर्याप्त समय शेष है और सरकार इस दौरान कई महत्वपूर्ण घरेलू व संवैधानिक प्राथमिकताओं में व्यस्त है।

    विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बिम्सटेक संगठन के वर्तमान अध्यक्ष के नाते भारत ने बांग्लादेश को ब्रिक्स सम्मेलन के संपर्क सत्र में शामिल होने का विशेष अवसर प्रदान किया है। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से बने तनावपूर्ण माहौल को सामान्य बनाना और द्विपक्षीय वार्ता के जरिए आपसी संबंधों को नई दिशा देना है।

    ढाका में अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकार सभी देशों के साथ सकारात्मक संबंधों की पक्षधर है। यदि आगामी दिनों में स्थितियां अनुकूल रहती हैं और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो निश्चित रूप से भारत यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। दोनों पड़ोसी मुल्कों के शीर्ष नेतृत्व के बीच प्रत्यक्ष संवाद से कई लंबित क्षेत्रीय व व्यापारिक मुद्दों के हल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बांग्लादेश में बीते समय में हुए राजनीतिक बदलावों के बाद से ही नई दिल्ली और ढाका के बीच रणनीतिक व कूटनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे समय में शीर्ष स्तर की यह प्रस्तावित बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। द्विपक्षीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि व्यापार, सुरक्षा और ऊर्जा संकट जैसे संवेदनशील विषयों पर दोनों देशों का मिलकर काम करना बेहद आवश्यक है।

    अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की इस हलचल का सीधा असर भारत के विभिन्न राज्यों और व्यापारिक साझेदारियों पर भी देखा जा सकता है। मध्य प्रदेश जैसे औद्योगिक और कृषि प्रधान राज्य, जो वस्त्र और हस्तशिल्प निर्यात से जुड़े हैं, वे भी पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक स्थिरता की उम्मीद रखते हैं। मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक घरानों और नीति निर्माताओं की नजरें भी इन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बनी रहती हैं।

    दक्षिण एशियाई कूटनीति में बिम्सटेक और ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका आने वाले समय में और अधिक निर्णायक होने की संभावना है। यदि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री इस सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो यह क्षेत्र में आर्थिक सहयोग और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध हो सकता है।

    हाल के समय में पैदा हुए गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों के राजनयिक लगातार संपर्क में हैं। अब सभी की नजरें ढाका के अंतिम आधिकारिक निर्णय पर टिकी हुई हैं कि क्या ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता संभव हो पाती है या नहीं।

  • भारत बांग्लादेश क्रिकेट मैच, BCCI टीम इंडिया, बांग्लादेश क्रिकेट टीम, ढाका क्रिकेट स्टेडियम, भारत बांग्लादेश सीरीज

    भारत बांग्लादेश क्रिकेट मैच, BCCI टीम इंडिया, बांग्लादेश क्रिकेट टीम, ढाका क्रिकेट स्टेडियम, भारत बांग्लादेश सीरीज

    नई दिल्ली ।भारत और बांग्लादेश के बीच सितंबर 2026 में प्रस्तावित वनडे और टी20 सीरीज को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। भारतीय क्रिकेट टीम इस दौरे पर जाएगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला फिलहाल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के हाथ में नहीं है। बांग्लादेश में मौजूदा परिस्थितियों और खिलाड़ियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को देखते हुए बीसीसीआई ने इस मामले में भारत सरकार की मंजूरी को जरूरी बताया है।

    प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार भारतीय टीम को बांग्लादेश दौरे पर तीन वनडे और तीन टी20 मुकाबले खेलने हैं। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस सीरीज को आयोजित करने को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है और उसने भारतीय बोर्ड के सामने दौरे को लेकर अपनी तैयारी भी जाहिर की है। दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड के बीच इस विषय पर बातचीत जारी है, लेकिन भारतीय टीम की यात्रा को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।

    बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बोर्ड सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले में अपने स्तर पर अंतिम फैसला नहीं लेना चाहता। ऐसे में भारत सरकार के संबंधित विभागों से बातचीत की जाएगी और सरकारी मंजूरी मिलने के बाद ही दौरे पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया जाएगा। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को बोर्ड की प्राथमिकता माना जा रहा है।

    बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 29 अगस्त से 15 सितंबर के बीच प्रस्तावित व्हाइट बॉल सीरीज के लिए समय भी निर्धारित रखा है। इस अवधि में तीन वनडे और तीन टी20 मैच कराने की योजना है। हालांकि, भारतीय टीम के दौरे की पुष्टि सरकार की सुरक्षा समीक्षा और मंजूरी पर निर्भर करेगी। अगर अनुमति मिलती है तो निर्धारित अवधि में सीरीज आयोजित की जा सकती है।

    इस पूरे मामले में भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुरक्षा परिस्थितियों का आकलन करने के बाद सरकार की ओर से बीसीसीआई को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भारतीय खिलाड़ी बांग्लादेश की राजधानी ढाका जाएंगे या दौरा आगे के लिए टाल दिया जाएगा।

    इस सीरीज का इतिहास भी मौजूदा स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और बांग्लादेश के बीच यह दौरा मूल रूप से 2024 में प्रस्तावित था। उस समय बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और बाद में हुए राजनीतिक बदलाव के कारण दोनों देशों के बीच परिस्थितियां बदल गई थीं। इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तावित क्रिकेट दौरे को आगे के लिए स्थगित कर दिया गया था।

    अब 2026 में इस सीरीज को दोबारा आयोजित करने की योजना सामने आई है। हालांकि, पहले की परिस्थितियों और वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय पक्ष किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहता। क्रिकेट बोर्ड के लिए खिलाड़ियों की सुरक्षा से समझौता नहीं करना प्राथमिकता है।

    अगर भारत सरकार दौरे को मंजूरी देती है तो अगस्त के अंत और सितंबर के दौरान दोनों टीमों के बीच सीमित ओवरों की सीरीज देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का प्रस्तावित कार्यक्रम प्रभावित होगा।

    फिलहाल दोनों क्रिकेट बोर्ड के बीच संपर्क बना हुआ है और अंतिम निर्णय के लिए सरकारी स्तर पर सुरक्षा आकलन का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार के रुख के बाद ही भारत-बांग्लादेश सीरीज के आयोजन और भारतीय टीम के दौरे को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।