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  • Bangladesh में हिंदुओं की आबादी 8% … मगर चुनाव में 300 सीटों में से मात्र 3 हिंदू चुने गए सांसद

    Bangladesh में हिंदुओं की आबादी 8% … मगर चुनाव में 300 सीटों में से मात्र 3 हिंदू चुने गए सांसद


    ढाका।
    बांग्लादेश चुनाव (Bangladesh Election) पूरा हो गया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh Nationalist Party) को 209 सीटों पर जीत हासिल हुई है. तारिक रहमान (Tariq Rahman) पीएम बन सकते हैं. जमात-ए-इस्लामी (Jamaat-e-Islami) को 68 और छात्रों वाली पार्टी NCP को सिर्फ 6 सीटों पर वोट मिला. चुनाव के बाद अब जो आंकड़े आए हैं, वह हैरान करने वाले हैं. खासकर हिंदुओं की जीत को लेकर. दरअसल बांग्लादेश की कुल आबादी करीब 16.5 करोड़ है. 2022 की जनगणना के मुताबिक इनमें 1 करोड़ 31 लाख से ज्यादा हिंदू हैं. यानी देश की करीब 8 प्रतिशत आबादी हिंदू समुदाय से आती है. यह कोई छोटी संख्या नहीं है. लेकिन 2026 के ताजा संसदीय चुनाव में हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद कम रह गया है. 300 सीटों वाली संसद में इस बार सिर्फ 3 हिंदू सांसद चुने गए हैं. यह आंकड़ा तब आया है जब हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा देखी गई है।


    बांग्लादेश चुनाव में कितने हिंदू जीते?

    पहले हिंदुओं की बड़ी संख्या अवामी लीग (AL) से होती थी. AL क्योंकि बैन है, इसलिए तीनों हिंदू उम्मीदवार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जीते हैं.
    गायेश्वर चंद्र रॉय- ढाका-3 सीट से
    निताई रॉय चौधरी – मगरी-2 सीट से
    एडवोकेट दिपेन देवान – रंगामाटी सीट से
    इसके अलावा साचिंग प्रू नाम के एक और अल्पसंख्यक उम्मीदवार ने बंदरबन से जीत दर्ज की, लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम है.


    जमात का हिंदू कैंडिडेट हारा

    ध्यान देने वाली बात यह है कि जमात-ए-इस्लामी ने इस बार एक हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को खुलना-1 सीट से मैदान में उतारा था. लेकिन वे चुनाव हार गए. इसका मतलब यह हुआ कि जमात के टिकट पर कोई भी अल्पसंख्यक उम्मीदवार जीत नहीं पाया.


    पहले क्या स्थिति थी?

    रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना के लंबे कार्यकाल के दौरान संसद में हिंदू सांसदों की संख्या इससे कहीं ज्यादा रही थी.
    2009-2014 की संसद में 16 हिंदू सांसद थे
    2014-2019 में यह संख्या बढ़कर 17 (और आरक्षित सीटों के साथ 20 तक) पहुंची
    2019-2024 में करीब 14 अल्पसंख्यक सांसद थे
    यानी पहले जहां 14 से 20 के बीच हिंदू सांसद होते थे, अब संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है. 2006-09 तक बांग्लादेश में केयरटेकर सरकार रही. ऐसे में हम कह सकते हैं कि यह 20 साल में सबसे कम संख्या है. यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है।


    कितने हिंदू उम्मीदवार मैदान में थे?

    इस चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे. इनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं. 60 में से 22 राजनीतिक दलों ने अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे थे. BNP ने 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 4 जीत पाए. लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम रही.


    सवाल क्यों उठ रहे हैं?

    देश की लगभग 8 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद संसद में 1 प्रतिशत से भी कम प्रतिनिधित्व होना चिंता का विषय माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय कई इलाकों में निर्णायक भूमिका निभाता है, लेकिन टिकट वितरण और चुनावी गणित में उनकी हिस्सेदारी सीमित रह जाती है. इसके अलावा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रहा।

    बांग्लादेश चुनाव में कितनी महिलाएं जीतीं?
    इस बार चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या भी बहुत कम रही. हालांकि 7 महिलाओं ने जीत दर्ज की, जिनमें ज्यादातर बीएनपी से थीं. जमात-ए-इस्लामी के कुछ बयानों ने महिलाओं की भागीदारी पर भी विवाद खड़ा किया था।

  • यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट

    यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट


    नई दिल्ली। भारत को लेकर बांग्लादेश में हालिया घटनाक्रम लगातार सुर्खियों में है। इसी बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस की एक पुरानी टिप्पणी फिर चर्चा में आ गई है। वर्ष 2025 में यूनुस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर उत्साहित नजर आए थे। तब उन्होंने दावा किया था कि ऊंचे टैरिफ और ज्यादा लागत के चलते भारतीय उद्योग, खासकर टेक्सटाइल सेक्टर, भारत छोड़कर बांग्लादेश में निवेश करेंगे।

    अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन को दिए एक इंटरव्यू में यूनुस ने कहा था कि अमेरिका के भारी टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियां भारत में उत्पादन करना छोड़ेंगी और बांग्लादेश में फैक्ट्रियां लगाएंगी, क्योंकि वहां लागत कम है और टैरिफ भी अपेक्षाकृत कम हैं। हालांकि मौजूदा हालात उनकी इस भविष्यवाणी से बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं।

    खुद का टेक्सटाइल सेक्टर संकट में

    जनवरी 2026 के अंत तक बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग गंभीर संकट में फंस गया है। जहां एक ओर भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर बयानबाजी की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर देश की घरेलू टेक्सटाइल मिलें बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन BTMA ने ऐलान किया है कि 1 फरवरी 2026 से देशभर की टेक्सटाइल मिलें अनिश्चितकाल के लिए बंद की जाएंगी।

    BTMA अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल के अनुसार मिल मालिक बैंक कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। उद्योग की पूंजी 50 प्रतिशत से अधिक घट चुकी है और कई यूनिट पहले ही ताले लगा चुकी हैं। उद्योग का आरोप है कि भारत से आयातित सस्ते सूत ने स्थानीय बाजार को नुकसान पहुंचाया है। करीब 12 हजार करोड़ टका का तैयार माल गोदामों में बिना बिके पड़ा है। वहीं गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के चलते उत्पादन क्षमता भी 50 प्रतिशत तक गिर गई है। संगठन ने सरकार से 10 से 30 काउंट के सूत पर ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा खत्म करने और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

    भारत–EU समझौता बढ़ाएगा दबाव

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह समझौता बांग्लादेश के गारमेंट निर्यात के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अभी LDC श्रेणी में होने के कारण बांग्लादेश को EU बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलती है, जबकि भारत को करीब 12 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है।

    समझौता लागू होने के बाद भारत को भी शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा। भारत के पास कपास और सूत जैसे कच्चे माल की मजबूत उपलब्धता है, जिससे उसके उत्पाद सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हो सकते हैं। वहीं बांग्लादेश 2026-27 तक LDC सूची से बाहर हो जाएगा, जिससे उसका ड्यूटी-फ्री लाभ समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूरोपीय बाजार में भारत से प्रतिस्पर्धा करना उसके लिए बेहद कठिन होगा। फिलहाल EU में हर तीसरा व्यक्ति बांग्लादेशी डेनिम पहनता है, लेकिन इस डील के बाद भारत इस बाजार का बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में कर सकता है।

    कुल मिलाकर, जहां मोहम्मद यूनुस भारतीय कंपनियों के बांग्लादेश आने की उम्मीद जता रहे थे, वहीं जमीनी सच्चाई यह है कि बांग्लादेश का अपना टेक्सटाइल आधार और बैकवर्ड लिंकेज तेजी से कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।

  • क्या पाकिस्तान ने बांग्लादेश को झांसा दिया? वर्ल्ड कप ड्रामेबाजी की चौंकाने वाली इनसाइड स्टोरी

    क्या पाकिस्तान ने बांग्लादेश को झांसा दिया? वर्ल्ड कप ड्रामेबाजी की चौंकाने वाली इनसाइड स्टोरी


    नई दिल्ली। वर्ल्ड कप का रोमांच बढ़ता जा रहा है और इसी बीच बांग्लादेश- पाकिस्तान के बीच चल रही ड्रामेबाजी ने सबकी नज़रें खींच ली हैं। इस विवाद की कहानी केवल मैदान तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक बहस में बदल गई है। insiders के अनुसार, पाकिस्तान की रणनीति ने बांग्लादेश को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां से वापसी मुश्किल लग रही है।

    सबसे पहले क्या हुआ?

    पाकिस्तान ने शुरुआत में बांग्लादेश के साथ मैत्रीपूर्ण रुख दिखाया, मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर मिलनसारता का भाव पैदा किया। फिर धीरे-धीरे टेंशन बढ़ाने वाली बातें और रणनीतिक संकेत सामने आने लगे। यही “ललचाने” की रणनीति बांग्लादेश को भावनात्मक रूप से कमजोर करने का काम कर रही है, कहा जा रहा है।

    फिर क्या हुआ?
    जैसे ही टूर्नामेंट आगे बढ़ा, पाकिस्तान ने अपने मैच और रणनीति के जरिए बांग्लादेश की टीम पर दबाव बढ़ाया।

    बांग्लादेश के खिलाड़ियों के ऊपर बढ़ते दबाव, टीम की असमंजस स्थिति और रणनीतिक उलझनों ने “ड्रामा” का रंग बढ़ा दिया।

    और फिर ‘धोखा’ का दावा…
    कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को मैनिपुलेटिव रणनीति के तहत फंसा दिया, जिससे बांग्लादेश के लिए मैच की स्थिति और भी कठिन हो गई।लेकिन यह बात अभी अधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे “सूत्रों के अनुसार” ही देखा जा रहा है।

    वर्ल्ड कप ड्रामेबाजी की असली वजह क्या है?
    विश्लेषकों का कहना है कि क्रिकेट में ऐसे ड्रामे अक्सर स्ट्रेटेजिक और मानसिक खेल का हिस्सा होते हैं।
    किसी भी टीम की कमजोरी को पकड़कर माइंड गेम खेलना भी एक रणनीति होती हैऔर इस बार पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच यह खेल ज़्यादा तीखा दिख रहा है।

    क्या है आगे?
    अब सबकी नजरें बांग्लादेश के अगले मैच पर हैं, जहां यह टीम अपने मानसिक दबाव को पार कर सकेगी या नहीं। और पाकिस्तान की रणनीति क्या अगले मैचों में भी असर दिखाएगीयह समय ही बताएगा।

  • बांग्लादेश में हिंदू युवक की जघन्य हत्या, BNP नेता ने कार से कुचलकर कर उतारा मौत के घाट

    बांग्लादेश में हिंदू युवक की जघन्य हत्या, BNP नेता ने कार से कुचलकर कर उतारा मौत के घाट


    नई दिल्ली। बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में BNP नेता अबुल हाशेम सुजन ने पेट्रोल पंप कर्मचारी रिपन साहा को 5,000 टका का पेट्रोल बिना भुगतान करने पर अपनी जीप से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी और ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है।

    बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की दर्दनाक हत्या ने देश में सनसनी फैला दी है। राजबाड़ी जिले के पेट्रोल पंप पर काम करने वाले 30 वर्षीय रिपन साहा को कथित तौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता अबुल हाशेम सुजन ने अपनी ब्लैक लैंड क्रूजर जीप से कुचल दिया।

    घटना शुक्रवार की सुबह लगभग 4:30 बजे हुई।

    पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार, सुजन ने अपने वाहन में करीब 5,000 टका का ऑक्टेन भरवाया, लेकिन भुगतान किए बिना भागने की कोशिश की। रिपन ने वाहन रोककर भुगतान की मांग की तो आरोपी और उनके ड्राइवर कमल हुसैन ने गुस्से में आकर अपशब्द कहे और गाड़ी तेज कर दी।

    सीसीटीवी में साफ दिखा क्रूर हमला
    पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि रिपन पेट्रोल पंप के पास खड़ा था, वहीं सुजन की गाड़ी आती है, रिपन भुगतान मांगता है और फिर अचानक गाड़ी तेज कर दी जाती है।रिपन को गाड़ी के नीचे कुचलते हुए देखा गया। सिर और चेहरे को बुरी तरह कुचला गया। घटनास्थल से शव ढाका-खुलना हाईवे पर पड़ा मिला।

     रिपन की सिर और चेहरे को बुरी तरह कुचला गया और वह मौके पर ही मृत हो गया। शव बाद में ढाका-खुलना हाईवे पर पड़ा मिला।

    BNP नेता समेत दो गिरफ्तार
    पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया और अबुल हाशेम सुजन को उनके गांव बारो मुरारीपुर से गिरफ्तार किया। उनके ड्राइवर कमल हुसैन को भी हिरासत में लिया गया।

    राजबाड़ी सदर पुलिस स्टेशन के ओसी खोंडकर जियाउर रहमान ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर दोनों को हिरासत में लिया गया है।

    हिंदू समुदाय में भय का माहौल
    स्थानीय हिंदू समुदाय में इस घटना के बाद दहशत का माहौल है। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के पैटर्न से जुड़ी मानी जा रही है। कई रिपोर्टों में इसे सांप्रदायिक हिंसा के रूप में देखा जा रहा है, जबकि पुलिस इसे मुख्य रूप से भुगतान विवाद बता रही है।
    इस घटना ने स्थानीय हिंदू समुदाय में भय और आक्रोश बढ़ा दिया है। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच यह घटना एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकती है। जबकि पुलिस इसे भुगतान विवाद बता रही है, कई लोगों का मानना है कि यह हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक कड़ी है। 

  • T20 वर्ल्ड कप 2026: बांग्लादेश ने भारतीय मूल ICC अधिकारी को वीजा न देकर विवाद खड़ा किया

    T20 वर्ल्ड कप 2026: बांग्लादेश ने भारतीय मूल ICC अधिकारी को वीजा न देकर विवाद खड़ा किया


    नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की तरफ से उठाए जा रहे कदम लगातार विवादों का कारण बन रहे हैं। ताजा विवाद तब सामने आया जब बांग्लादेश ने भारतीय मूल के एक वरिष्ठ ICC अधिकारी को वीजा देने से इनकार कर दिया। यह कदम क्रिकेट जगत में बेहद असहज और शर्मनाक माना जा रहा है और ICC तथा बांग्लादेश के बीच तनाव और बढ़ गया है।

    बांग्लादेश की ओर से यह मांग की जा रही है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 में उसके भारत में होने वाले चार ग्रुप मैचों को श्रीलंका में शिफ्ट किया जाए।

    भारत और श्रीलंका इस टूर्नामेंट के सह-मेजबान हैं, लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने में समय कम होने के कारण शेड्यूल में बदलाव करना मुश्किल माना जा रहा है।

    ICC ने इस मसले को सुलझाने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को बांग्लादेश भेजा था। इनमें से एक भारतीय मूल का अधिकारी भी था। लेकिन बांग्लादेश सरकार ने उसे वीजा देने में देरी की और अंततः वीजा नहीं दिया। नतीजतन ICC का प्रतिनिधिमंडल अधूरा रह गया और केवल एंटी करप्शन यूनिट एवं सिक्योरिटी प्रमुख एंड्रयू एफग्रेव ही ढाका पहुंच सके।

    ICC अधिकारियों का यह दौरा मुख्य रूप से सुरक्षा चिंताओं को दूर करने और BCB को आश्वस्त करने के लिए था कि भारत में बांग्लादेशी टीम को किसी भी तरह का खतरा नहीं है। ICC का मानना है कि भारत में सभी टीमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरे में ICC अधिकारी BCB के साथ-साथ बांग्लादेश के युवा और खेल मंत्रालय के पदाधिकारियों से भी चर्चा कर रहे थे।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बांग्लादेश के चार मैच भारत में तय हैं

    कोलकाता के ईडन गार्डन्स में तीन और मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक। हाल में बांग्लादेश में हिंदू युवकों की हत्या के विरोध में भारत में विरोध-प्रदर्शन और कुछ विवादित घटनाओं के बाद BCB ने भारत में मैचों को कराने पर असमर्थता जताई और शिफ्ट करने की मांग उठाई।

    अब ICC के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह टूर्नामेंट की निष्पक्षता, सुरक्षा और शेड्यूल को बनाए रखते हुए इस विवाद को कैसे सुलझाता है। अगर यह विवाद समय रहते नहीं सुलझा तो T20 वर्ल्ड कप 2026 की छवि और आयोजन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

  • भारत के सेना प्रमुख ने दिया जवाब, पाकिस्तान के साथ मिलकर थर्ड फ्रंट बना रहा है बांग्लादेश?

    भारत के सेना प्रमुख ने दिया जवाब, पाकिस्तान के साथ मिलकर थर्ड फ्रंट बना रहा है बांग्लादेश?


    नई दिल्‍ली। सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने पाकिस्तान और चीन के बाद बांग्लादेश की ओर से तीसरे मोर्चे की आशंकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ भारत के सैन्य नेतृत्व की बातचीत होती रहती है और अभी वहां से इस तरह के कोई संकेत नहीं है। जनरल द्विवेदी ने मंगलवार को यहां वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में सवालों के जवाब में यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि क्या पाकिस्तान और चीन के बाद अब बांग्लादेश की ओर से भारत के लिए तीसरा मोर्चा खुल गया है।
    उन्होंने स्पष्ट किया कि वैसे सेना वहां स्थिति पर निरंतर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले लिए यह समझना जरूरी है कि बांग्लादेश में कैसी सरकार है। उन्होंने कहा, ‘यदि वह एक अंतरिम सरकार है तो हमें यह देखना होगा कि वह जो कदम उठा रही है वह चार से पांच वर्षों के लिए हैं या केवल चार से पांच महीनों के लिए हैं। यह सोचना होगा कि क्या हमें तुरंत किसी प्रतिक्रिया की आवश्यकता है या नहीं।’

    उन्होंने कहा कि दूसरी बात यह है कि अभी तीनों सेनाओं के चैनल पूरी तरह खुले हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं वहां के सेना प्रमुख के साथ नियमित संपर्क में हूं। इसी तरह अन्य माध्यमों से भी हमारा संपर्क बना हुआ है। हमने वहां एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था, जिसने सभी संबंधित लोगों से मुलाकात की। इसी प्रकार नौसेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख ने भी बातचीत की है।

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    सेना प्रमुख ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या संपर्क की कमी न हो। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि आज की स्थिति में तीनों सेनाओं द्वारा जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वे किसी भी रूप में भारत के खिलाफ नहीं हैं।’

    पाकिस्तान और चीन की सेनाओं के साथ बांग्लादेश की सेनाओं की बढ़ती नजदीकियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि क्षमता बढ़ाना एक एक सतत प्रक्रिया है। भारत भी ऐसा कर रहा है और अन्य देश भी। उन्होंने कहा कि वैसे भारतीय सेना वहां की स्थिति पर निरंतर नजर रखे हुए है और स्थिति की निगरानी कर रही है।

  • मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…

    मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…


    मुंबई।
    हाल के दिनों में भारत (India) में घुसपैठियों (Intruders) का मुद्दा काफी गर्म है। असम (Assam ) से लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) और अन्य सीमावर्ती राज्यों में यही चर्चा में है। एसआईआर (ASI) के जरिए वोटर लिस्ट (Voter list) में सुधार करके घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद चल रही है। इस बीच मुंबई से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक मुंबई में बड़ी संख्या में मुसलमान (Muslim) बांग्लादेश और म्यांमार (Bangladesh and Myanmar) से अवैध रूप से लोग आकर बसे हुए हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन लोगों ने यहां आने के बाद वोटर कार्ड और आधार कार्ड जैसे वैध भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए हैं। जिस प्रक्रिया के जरिए इन अवैध प्रवासियों को मुंबई में बसाया जा रहा है, उसे ‘मलवानी पैटर्न’ कहा जाता है।


    कुल 61 इलाके

    रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई में कुल ऐसे 61 इलाके चिह्नित किए गए हैं, जहां पर अवैध प्रवासी मिले हैं। इस रिपोर्ट के कुल कुल सात हजार से अधिक लोगों से इंटरव्यू किए गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरव्यू में यह सामने आया कि इसमें से 3014 लोगों ने बिना वीजा-पासपोर्ट के ही भारत में एंट्री की। इसमें भी 96 फीसदी लोग मुसलमान हैं जो बांग्लादेश और म्यांमार से भारत में आए हुए हैं। इस रिसर्च को अंजाम देने वाले एक प्रोफेसर ने बताया कि गरीब लोग बांग्लादेश छोड़ देते हैं। वह भारत में आते हैं और यहां आकर जाली दस्तावेज बनवा लेते हैं। यहां पर वो वोटर बन जाते हैं और नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट डालने लगते हैं। ‘ग्रे रेलिजियस नेटवर्क’ के चलते इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है।


    एजेंटों की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अवैध प्रवासियों के पास नकली दस्तावेज आता कहां से है। इसमें बताया गया है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में एजेंट्स हैं। यह लोग सात हजार से लेकर 30 हजार रुपए तक में सभी पहचान पत्र मुहैया करा देते हैं। रिसर्च में शामिल प्रोफेसर ने बताया कि अवैध रूप से भारत आने वाला स्थानीय एजेंट से मिलता है। इसके बाद एजेंट एक तय कीमत पर उन्हें वोटर कार्ड से लेकर आधार और पैन कार्ड तक मुहैया कराता है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम पिछले 12-13 साल से काम कर रहा है। इससे अवैध प्रवासियों के लिए भारत में बसना आसान हो जाता है। एक बार वोटर कार्ड मिल जाने के बाद इनके लिए चीजें काफी आसान हो जाता है।


    स्थानीय नेताओं की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया कि मुंबई में छह विधानसभा क्षेत्रों, एक लोकसभा सीट और 56 म्यूनिसिपल वार्डों में इन अवैध वोटरों का असर है। इसके मुताबिक जितने लोगों का सर्वे किया गया, उनमें से 73 फीसदी लोगों के पास वोटर कार्ड मौजूद था। अवैध प्रवासियों को बसाने के लिए किसी दलदली इलाके में एक अवैध बस्ती बसाई जाती है। इसके बाद बिना डोम के मस्जिद बनाई जाती है। स्थानीय प्रभावशाली नेता इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाते हैं। इसके बाद नकली दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। फिर स्थानीय वोटर लिस्ट में बदलाव कर दिया जाता है। फिर उनके फंडिंग का इंतजाम किया जाता है।

  • ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल

    ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल


    गुवाहाटी।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव के बावजूद, बांग्लादेश (Bangladesh) अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (Bangladesh Petroleum Corporation- BPC) ने भारत की सरकारी तेल कंपनी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (Numaligarh Refinery Limited- NRL) से 180,000 मीट्रिक टन डीजल आयात करने का फैसला किया है। इस आयात की कुल लागत लगभग 14.62 अरब टका होगी जो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ बदल सकती है। यह सौदा 2026 के लिए हुआ है।

    यह फैसला 6 जनवरी को ढाका में हुई सरकारी खरीद सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने की। सरकार संचालित बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसी) इस डीजल का आयात करेगी। भुगतान का कुछ हिस्सा बीपीसी अपने बजट से करेगी, जबकि शेष राशि बैंक लोन के माध्यम से जुटाई जाएगी।

    सूत्रों के अनुसार, आयात लागत एनआरएल के साथ बातचीत के बाद तय की गई है। असम स्थित एनआरएल ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) की सहायक कंपनी है। इस सौदे की कुल वैल्यू 119.13 मिलियन डॉलर तय की गई है, जो 83.22 डॉलर प्रति बैरल की बेस कीमत पर 5.50 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर आधारित है। अंतिम लागत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार बदलती रहेगी।

    पत्रकारों के सवालों के जवाब में बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन सलाहकार मुहम्मद फौजुल कबीर खान ने कहा कि यह आयात पिछले सरकार के कार्यकाल में हस्ताक्षरित 15 वर्षीय दीर्घकालिक समझौते के तहत किया जा रहा है।

    एनआरएल की रिफाइनरी असम राज्य में स्थित है। डीजल को पहले सिलीगुड़ी तक ले जाया जाता है और फिर भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से बांग्लादेश पहुंचाया जाता है। यह पाइपलाइन 2022-23 में चालू हुई थी, जिससे परिवहन लागत और समय में काफी बचत हुई है। इससे पहले डीजल रेलवे वैगनों से आयात किया जाता था। यह आयात बांग्लादेश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत किया है।

    हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, अल्पसंख्यकों पर हमले और अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग जारी है। बांग्लादेश की सालाना डीजल मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है और भारत इसका विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक जरूरतें राजनीतिक तनाव से ऊपर हैं, जिससे ऐसे समझौते बरकरार रहते हैं।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्‍याचार जारी, चोरी के शक में नहर में छलांग लगाने से मौत

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्‍याचार जारी, चोरी के शक में नहर में छलांग लगाने से मौत

    ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। चोरी के संदेह में भीड़ के पीछा करने से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार दोपहर भंडारपुर गांव के निवासी मिथुन का शव बरामद किया।
    यह घटना पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तीव्र वृद्धि के बीच हुई है। मिथुन सरकार की मौत पिछले कुछ दिनों में सामने आई क्रूर हमलों की श्रृंखला में यह नई घटना है।

    हिंदू, बौद्ध और ईसाई एकता परिषद ने एक बयान जारी कर दिसंबर महीने में कम से कम 51 लक्षित घटनाओं का खुलासा किया है, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं। परिषद ने आगजनी, बलात्कार और लूटपाट के मामलों का विस्तृत विवरण देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है कि ये अत्याचार 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होते हैं।

    परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना किया है, लेकिन वर्तमान समय में संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक चिंता का खतरनाक संयोजन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब उस समय हो रहा जब देश 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि शेख हसीना सरकार के 2024 में गिरने के बाद अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है।

    वहीं, मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया हत्याएं कोई छिटपुट त्रासदी नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की अपने सबसे कमजोर नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता में आई व्यापक विफलता के संकेत हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरिम प्रशासन की स्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी; चोरी के शक में पीछा, नहर में छलांग लगाने से गई जान

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी; चोरी के शक में पीछा, नहर में छलांग लगाने से गई जान

    बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। चोरी के संदेह में भीड़ के पीछा करने से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।

    पुलिस ने मंगलवार दोपहर भंडारपुर गांव के निवासी मिथुन का शव बरामद किया। यह घटना पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तीव्र वृद्धि के बीच हुई है। मिथुन सरकार की मौत पिछले कुछ दिनों में सामने आई क्रूर हमलों की श्रृंखला में यह नई घटना है।

    हिंदू, बौद्ध और ईसाई एकता परिषद ने एक बयान जारी कर दिसंबर महीने में कम से कम 51 लक्षित घटनाओं का खुलासा किया है, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं। परिषद ने आगजनी, बलात्कार और लूटपाट के मामलों का विस्तृत विवरण देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है कि ये अत्याचार 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होते हैं।

    परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना किया है, लेकिन वर्तमान समय में संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक चिंता का खतरनाक संयोजन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब उस समय हो रहा जब देश 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि शेख हसीना सरकार के 2024 में गिरने के बाद अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है।

    पिछले कुछ दिनों में हुई अन्य घटनाएं…

    5 जनवरी को जेसोर जिले में हिंदू व्यापारी और समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक राणा कांति बैरागी की गोली मारकर हत्या
    5 जनवरी को ही नरसिंगदी में किराने की दुकान मालिक मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या
    3 जनवरी को शरियतपुर जिले में खोकोन चंद्र दास पर हमला, इलाज के दौरान अस्पताल में मौत
    इससे पहले दिसंबर में राजबारी में अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या और मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीटकर हत्या कर शव जलाने की घटनाएं सामने आई थीं।
    वहीं, मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया हत्याएं कोई छिटपुट त्रासदी नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की अपने सबसे कमजोर नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता में आई व्यापक विफलता के संकेत हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरिम प्रशासन की स्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है।