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  • बांग्लादेश में कंडोम की भारी किल्लत, 50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर

    बांग्लादेश में कंडोम की भारी किल्लत, 50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर

    नई दिल्‍ली। शेख हसीना की सरकार के पतन के साथ ही बांग्लादेश अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। वहां हर दिन उपद्रव देखने को मिल जा रहे हैं। इस सबके बीच एक गंभीर संकट सामने आ खड़ी हुई है। बांग्लादेश इन दिनों कंडोम की भारी किल्लत का सामना कर रहा है। इसके कारण जन्मदर में भी बीते 50 वर्षों में भारी उछाल हुआ है। बांग्लादेश का यह ताजा संकट फंड की कमी और मानव संसाधन की भारी कमी के कारण उत्पन्न हुआ है। इसकी वजह से बीते कुछ वर्षों में गर्भनिरोधकों की आपूर्ति लगातार घटती गई है, जिसका सीधा असर देश की जनसंख्या वृद्धि पर पड़ रहा है।

    स्थिति यह है कि परिवार नियोजन महानिदेशालय के पास उपलब्ध कंडोम का स्टॉक मात्र 39 दिनों के लिए बचा है। ऐसे में अगले वर्ष की शुरुआत में कम से कम एक महीने तक कंडोम वितरित नहीं किए जा सकेंगे। इससे परिवार नियोजन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
    50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर

    यह संकट ऐसे समय सामने आया है जब देश में कुल प्रजनन दर के मामले में पिछले 50 वर्षों में पहली बार वृद्धि दर्ज की गई है। मल्टीपल इंडिकेटर क्लस्टर सर्वे 2025 के अनुसार, प्रजनन दर 2024 के 2.3 से बढ़कर 2.4 हो गई है। विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गर्भनिरोधकों की कमी बनी रही तो प्रजनन दर और बढ़ सकती है।
    गर्भनिरोधकों के उपयोग में भारी गिरावट

    सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की विवाहित महिलाओं में गर्भनिरोधकों का उपयोग 2019 के 62.7% से घटकर 58.2% रह गया है। आधुनिक गर्भनिरोधकों तक पहुंच भी 77.4% से घटकर 73.5% रह गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि गर्भनिरोधकों की उपलब्धता और प्रजनन दर के बीच सीधा संबंध है।
    कोविड के बाद बिगड़ी स्थिति

    बांग्लादेश के अधिकारियों के मुताबिक, कोविड-19 महामारी (2020) के दौरान गर्भनिरोधकों की मांग तो बढ़ी, लेकिन सरकार ने उस समय परिवार नियोजन को प्राथमिकता नहीं दी। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त वहां की मीडिया आुटलेट ‘द डेलीस्टार’ को बताया कि 2023 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने करीब एक साल तक गर्भनिरोधकों की खरीद रोक दी, जिससे आपूर्ति में भारी अंतर आ गया।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2019 में कंडोम की आपूर्ति 97.48 लाख थी, जो सितंबर 2025 तक घटकर 41.52 लाख रह गई। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने पिछले महीने सभी पांच गर्भनिरोधकों की खरीद के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी है, लेकिन खरीद प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि सीमित मात्रा में कंडोम की खरीद की जा रही है, फिर भी अगले साल एक महीने तक सप्लाई बाधित रह सकती है।

    ढाका विश्वविद्यालय के जनसंख्या विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमीनुल इस्लाम का कहना है कि गर्भनिरोधकों और स्टाफ की कमी ने जन्म नियंत्रण गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर प्रजनन दर पर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में कई दंपति दो से अधिक बच्चे चाहने लगे हैं, जो चिंता का विषय है।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील


    अयोध्या । बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग का मामला गरमा गया है। इस घटना को लेकर अयोध्या के संत समाज ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। संत समाज का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। सीताराम योग सदन मंदिर के महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने बांग्लादेश में जारी हिंसा को अमानवीय बताया और कहा कि बांग्लादेश के जिहादी लोग हिंदुओं को ढूंढ-ढूंढकर अपना निशाना बना रहे हैं और ये पूरे हिंदू धर्म पर हमला है।

    उन्होंने कहा कि पहले दीपू चंद्र दास को मारा और आग लगा दीफिर एक और हिंदू शख्स को मारा और एक छोटी बच्ची को भी नहीं छोड़ा। वहां की सरकार जिहादियों की तरह काम करती है और बांग्लादेश को एक इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहती है। उन्होंने आगे पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि इसका असर भारत पर देखने को भी मिलेगा। अब समय आ गया है कि सरकार को बांग्लादेश के बॉर्डर खोल देने चाहिए और वहां फंसे हिंदुओं को बचाना चाहिए। जैसे पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया थावैसे ही बांग्लादेश के कट्टरपंथियों को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन चलाना चाहिए।

    अयोध्याधाम के साकेत भवन मंदिर के सीताराम दास जी महाराज ने भी अपील की है कि केंद्र सरकार सेना और सशस्त्र बल का सहारा लेकर हिंदुओं को बचाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में इंसानियत नहीं बची है और मैं पीएम से निवेदन करता हूं कि राफेलतेजस और ब्रह्मोस क्या कर रहे हैं? अभी तक भारत में बांग्लादेश को मिला लेना चाहिए था और कड़ा सबक सिखाना चाहिए। बता दें कि बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीटा और फिर पेड़ से बांधकर आग लगा दी। इस घटना के सात दिन बाद एक अन्य हिंदू युवक को भी भीड़ ने मार डाला। 29 साल के अमृत मंडल उर्फ सम्राट को गांव की भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया।

  • बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा

    बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा


    नई दिल्ली । बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने 17 सालों के बाद घर वापसी की है। रहमान ने घर लौटने पर मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए देश के लोगों का दिल से शुक्रिया अदा किया। दूसरी ओर बांग्लादेश में हफ्तेभर में लगातार दूसरे अल्पसंख्यक हिंदू की हत्या का मामला सामने आया है। इन मुद्दों को लेकर पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने आईएएनएस से खास बातचीत की।

    पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने कहाकुछ हफ्तों में हिंदू युवक की हत्या की यह दूसरी घटना सामने आई हैजिसमें ज्यादातर सांप्रदायिक नफरत की वजह से हत्या की गई है। इससे कई तरह की चिंताएं पैदा हुई हैं। सबसे पहलेइससे पता चलता है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा पक्की करने के लिए संघर्ष कर रही है।

    उन्होंने आगे कहादूसरा यह बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में गहरी पैठ जमाए हुए ‘इस्लामवाद’ को दिखाता हैजिसमें पार्टियां अपने विरोधियों से ज्यादा मुस्लिम समर्थक और कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैं। तीसराइससे यह सवाल उठता है कि क्या 12 फरवरी के चुनाव के बाद सांप्रदायिक दुश्मनी की यह लहर कम हो जाएगी या अगर ये ताकतें सत्ता में आती हैंतो क्या हालात और बिगड़ सकते हैं।

    तारिक रहमान की वापसी को लेकर महेश सचदेवा ने कहा17 साल के निर्वासन के बादतारिक रहमान बांग्लादेश लौट आए हैं। इस बात का चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता हैक्योंकि 12 फरवरी के चुनाव में बीएनपी को सबसे आगे देखा जा रहा है। उन्होंने सुलह वाली बातें कहीइस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश मुसलमानों और ईसाइयों समेत सभी का है। निर्वासन के दौरान देश के विकास की तारीफ की और अवामी लीग सरकार के सुधारों को भी माना। जानकार बांग्लादेश की मौजूदा उथल-पुथल के बीच भारत और उनके आर्थिक और सामाजिक एजेंडे पर नरम रुख पर नजर रख रहे हैं।

    बता देंढाका नॉर्थ सिटी यूनिट ने पुरबाचल इलाके में जुलाई 36 एक्सप्रेसवे पर बीएनपी ने सफाई अभियान चलाया। इस सड़क का इस्तेमाल तारिक रहमान की रैली के लिए किया गया था। जुलाई 36 एक्सप्रेसवे को 300-फीट रोड के नाम से जाना जाता है। सफाई अभियान के दौरान ढाका नॉर्थ सिटी कॉर्पोरेशन डीएसीसी के वर्करपार्टी कार्यकर्ता और 300 किराए के सफाई कर्मचारी शामिल रहे और कचरे-मलबे को हटाया।

    ढाका नॉर्थ बीएनपी के संयोजक अमीनुल हक ने इस अभियान का नेतृत्व किया। कचरे को जल्दी हटाने के लिए सोलह ट्रक किराए पर लिए गए। इसके अलावाराजधानी के अलग-अलग इलाकों से 300 सफाई कर्मचारी लाए गए। इस बीचडीएनसीसी के सफाई कर्मचारी भी सड़क से कचरा साफ करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

  • दीपू चंद्र दास की बांग्लादेश में जलाए जाने की घटना पर जाह्नवी कपूर का गुस्सा बोलीं यही पाखंड हमें तबाह कर देगा

    दीपू चंद्र दास की बांग्लादेश में जलाए जाने की घटना पर जाह्नवी कपूर का गुस्सा बोलीं यही पाखंड हमें तबाह कर देगा


    नई दिल्ली। हाल ही में बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास को जिंदा जला दिया गया था। इस बर्बरता ने हर किसी को हिला दिया। अब जाह्नवी कपूर ने बांग्लादेश लिंचिंग पर रिएक्शन दिया है। जाह्नवी कपूर ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक लंबा चौड़ा नोट लिखकर बांग्लादेश में हुई दर्दनाक घटनाक पर गुस्सा जाहिर किया है। इस घटना ने एक्ट्रेस को अंदर तक हिला दिया है। उन्होंने सवाल उठाया है।

    बांग्लादेश लिंचिंग पर बोलीं जाह्नवी कपूर

    जाह्नवी कपूर ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा बांग्लादेश में जो हो रहा है वह बर्बर है। यह नरसंहार है और यह कोई अकेली घटना नहीं है। अगर आपको इस अमानवीय पब्लिक लिंचिंग के बारे में नहीं पता तो इसके बारे में पढ़ें वीडियो देखें सवाल पूछें। और अगर इन सबके बावजूद आपको गुस्सा नहीं आता तो यही पाखंड हमें तबाह कर देगा। हम दुनिया के दूसरे कोने में होने वाली चीजों पर रोते रहेंगे जबकि हमारे अपने भाई-बहनों को जिंदा जला दिया जाएगा।

    जाह्नवी कपूर ने आगे कहा किसी भी और हर तरह के उग्रवाद को हमारी इंसानियत भूलने से पहले ही सामने लाना और उसकी निंदा करना जरूरी है। हम प्यादे हैं जो मानते हैं कि हम एक अनदेखी लाइन के दोनों तरफ रहते हैं। इसे पहचानें और खुद को ज्ञान से लैस करें ताकि आप उन मासूम जिंदगियों के लिए आवाज उठा सकें जो इस सांप्रदायिक क्रॉस फायर में लगातार खत्म हो रही हैं और आतंकित हो रही हैं।

    जाह्नवी कपूर की अपकमिंग फिल्म
    बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर इन दिनों अपनी फिल्म होमबाउंड को लेकर चर्चा में हैं जो ऑस्कर 2026 में जाने के लिए सिलेक्ट हुई है। आखिरी बार एक्ट्रेस को वरुण धवन के साथ फिल्म सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी में देखा गया था। वह राम चरण के साथ पेड्डी मूवी में नजर आएंगी।

  • Bangladesh: दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार

    Bangladesh: दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) के मयमनसिंह के भालुका इलाके में ईशनिंदा (Blasphemy) के आरोप में 25 वर्षीय फैक्ट्री कर्मचारी दीपू चंद्र दास (Factory worker Deepu Chandra Das) की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में अधिकारियों ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रशासन ने यह कार्रवाई हत्या के दो दिन बाद की है। इस घटना में भीड़ ने दीपू की हत्या कर उसके शव को एक मुख्य मार्ग पर पेड़ से लटकाकर आग लगा दी थी और घटना का लाइव प्रसारण भी किया था।

    मयमनसिंह रैपिड एक्शन बटालियन (रैब) के कार्यालय ने शनिवार को बताया कि गिरफ्तार किए गए 10 लोगों में से सात को उसने और तीन अन्य को पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर पकड़ा है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लिमोन सरकार (19), तारेक हुसैन (19), माणिक मियां (20), इरशाद अली (39), निझुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38), मिराज हुसैन (46), अजमल सगीर (26), शाहीन मियां (19) और नजमुल (21) के रूप में हुई है।

    रैब के अपर पुलिस अधीक्षक शम्सुज्जामन ने बताया कि गिरफ्तार व्यक्तियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस को सौंप दिया जाएगा। रैब का दावा है कि फैक्ट्री के एक फ्लोर मैनेजर आलमगीर हुसैन ने दीपू चंद्र दास को नौकरी से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने के बाद उसे आक्रोशित भीड़ के हवाले कर दिया था। रैब निदेशक नैमुल हसन ने बताया कि इस मामले में फ्लोर मैनेजर और उसी फैक्ट्री के क्वालिटी मैनेजर मिराज हुसैन आकन को भी गिरफ्तार किया गया है। जांचकर्ता इस बात का जवाब खोजने का प्रयास कर रहे हैं कि पुलिस को बुलाने के बजाय युवक को भीड़ के हवाले क्यों किया गया। उन्होंने संदेह जताया कि इसके पीछे पुरानी रंजिश या भीड़ का दबाव उद्देश्य हो सकता है।

    इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया हुई है। लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक मुस्लिम सहकर्मी ने मामूली बात पर दीपू को सजा देने के लिए उस पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया था। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इसे 21वीं सदी को शर्मसार करने वाली बर्बरता और मानवता की हार बताया। उन्होंने बंगलादेश नेतृत्व से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी घटना पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार से बंगलादेशी अधिकारियों के समक्ष अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाने का आग्रह किया है।

  • बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी

    बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं वहीं राजनीतिक माहौल में भी गर्माहट बढ़ गई है। नेताओं ने भारत के खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर दिया है। इस बीच नेशनल सिटिजन पार्टी के प्रमुख संयोजक हसनत अब्दुल्ला ने तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने बांग्लादेश के चुनावी प्रक्रिया में दखल दिया तो इसका असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ेगा और वे एक-दूसरे से अलग-थलग हो जाएंगे।

    यह बयान पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को लेकर आया है जिन्हें “सेवल सिस्टर्स” के नाम से जाना जाता है। इनमें अरुणाचल प्रदेश असम मणिपुर मेघालय नगालैंड मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। हसनत का यह बयान एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है कि अगर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप किया गया तो इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

    हसनत ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की सरकार के खिलाफ विदेशी एजेंटों को समर्थन देने वालों को बांग्लादेश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका आरोप था कि शेख हसीना और उनके समर्थक अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए भारत का समर्थन लेते हैं जिससे बांग्लादेश की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।

    हसनत ने आगे कहा “यदि भारत ने उन ताकतों को शरण दी जो बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता का उल्लंघन करती हैं तो इसका परिणाम गंभीर होगा और यह पूरे क्षेत्र में अशांति पैदा करेगा।” बांग्लादेश के इस वरिष्ठ नेता का मानना है कि भारत को अपनी नीतियों में बदलाव लाकर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए वरना दोनों देशों के बीच रिश्ते और भी तनावपूर्ण हो सकते हैं।

    यह बयान बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक तनाव और शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध को भी दर्शाता है। हालांकि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में बदलाव के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को सुधारने की आवश्यकता है ताकि दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक माहौल बना रहे।

  • बांग्लादेश में चुनावी तारीख घोषित, शेख हसीना की पार्टी ने किया खारिज, कहा- यूनुस के बस की बात नहीं

    बांग्लादेश में चुनावी तारीख घोषित, शेख हसीना की पार्टी ने किया खारिज, कहा- यूनुस के बस की बात नहीं


    नई दिल्‍ली । पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना(Sheikh Hasina) की पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग ने 12 फरवरी, 2026 के लिए घोषित चुनावी तारीख को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आवामी लीग ने बांग्लादेश(Bangladesh) चुनाव आयोग के इस कदम को गैर-कानूनी बताया है। पार्टी ने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता और मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस(Muhammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार एक किलर-फासीस्ट(killer-fascist) गिरोह की तरह काम कर रही है, जो किसी भी हाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और सहभागी चुनाव नहीं करा सकती।

    अवामी लीग का कड़ा बयान
    गुरुवार को जारी एक तीखे बयान में पार्टी ने कहा कि उसने गैरकानूनी, कब्जाधारी, हत्यारे-फासीस्ट यूनुस गिरोह के गैरकानूनी निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम का गहन अध्ययन किया है और यह स्पष्ट है कि मौजूदा प्रशासन पूरी तरह पक्षपाती है। पार्टी के अनुसार उनके नियंत्रण में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनता की इच्छा का प्रतिबिंब सुनिश्चित करना असंभव है।

    अवामी लीग ने अपने बयान में कहा- यह अब स्पष्ट है कि मौजूदा कब्जाधारी सत्ता पूरी तरह पक्षपाती है और उनके नियंत्रण में सामान्य, स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल संभव नहीं। चुनाव जनता की लोकप्रियता का पैमाना हैं। अवामी लीग एक चुनाव-उन्मुख पार्टी है और जनता के सामने खड़े होने की क्षमता, साहस और ताकत रखती है।

    ऐतिहासिक भूमिका और चुनावी विरासत का उल्लेख
    अवामी लीग ने जोर देकर कहा कि अपनी स्थापना से लेकर अब तक उसने 13 राष्ट्रीय चुनावों में हिस्सा लिया है, जिनमें से 9 बार विजयी होकर सरकार बनाई है। पार्टी ने दावा किया कि उसकी भागीदारी के बिना चुनाव करवाना देश को गहरे संकट में धकेलने के बराबर है। पार्टी ने साफ कहा कि बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव कराना यूनुस के बस की बात नहीं है।

    पार्टी की मुख्य मांगें
    – अवामी लीग ने चुनाव कार्यक्रम को खारिज करते हुए कई बड़े कदमों की मांग की है:
    – पार्टी पर लगाए गए सभी प्रतिबंध तत्काल हटाए जाएं
    – शेख हसीना सहित नेताओं पर दर्ज फर्जी मामलों को वापस लिया जाए
    – सभी राजनीतिक बंदियों को बिना शर्त रिहा किया जाए
    – मौजूदा अंतरिम सरकार को हटाकर एक तटस्थ केयरटेकर सरकार बनाई जाए, जो स्वतंत्र और सहभागी चुनाव करा सके
    – पार्टी ने कहा कि देश की आजादी की अगुवाई करने वाली पार्टी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखने की कोशिश राष्ट्र को अस्थिरता की ओर ले जाएगी।

    CEC का ऐलान: 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय चुनाव और जनमत संग्रह
    इससे पहले बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ए.एम.एम. नासिर उद्दीन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणा की कि देश में 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय चुनाव होंगे। यह चुनाव अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद होने वाला पहला राष्ट्रीय मतदान होगा, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाया था।

    उसी दिन जुलाई चार्टर पर एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी कराया जाएगा। इस चार्टर में कार्यपालिका की शक्तियां सीमित करने और न्यायपालिका को मजबूत करने जैसे बड़े सुधार प्रस्तावित हैं। मतदान देश की 300 संसदीय सीटों पर एक साथ होगा- यह बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार ट्विन पोल्स होंगे।

    चुनावी प्रक्रिया की समयरेखा
    – नामांकन दाखिल: 29 दिसंबर 2025 से
    – चुनाव प्रचार: 22 जनवरी 2026 से शुरू
    – चुनाव प्रचार समाप्ति: मतदान से 48 घंटे पहले

    आगामी चुनाव का संभावित मुकाबला
    विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनाव में मुख्य प्रतिस्पर्धा इन दलों के बीच रहने की संभावना है:
    – बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP)- नेतृत्व बेगम खालिदा जिया
    – जमात-ए-इस्लामी
    – नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP)- जिसने 2024 के छात्र आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

    अवामी लीग की अनुपस्थिति चुनावी परिदृश्य को जटिल बना सकती है, और उसकी सख्त आपत्तियों के कारण बांग्लादेश का राजनीतिक तापमान एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है।

  • Bangladesh: पूर्व PM खालिदा जिया की हालत बेहद नाजुक… लंदन ले जाने की योजना भी टली

    Bangladesh: पूर्व PM खालिदा जिया की हालत बेहद नाजुक… लंदन ले जाने की योजना भी टली


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) की पूर्व प्रधानमंत्री (Former Prime Minister) और तीन बार देश का नेतृत्व कर चुकीं खालिदा जिया (Khaleda Zia) की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। लंदन ले जाने की तैयारी कई दिनों से चल रही थी, लेकिन डॉक्टरों ने एक बार फिर उनकी यात्रा टाल दी है। शनिवार को मेडिकल बोर्ड ने साफ कहा कि इस समय खालिदा जिया का विदेश जाना सुरक्षित नहीं है। इसी वजह से लंदन रवाना करने की योजना अनिश्चित काल के लिए टाल दी गई।

    डॉक्टरों के मुताबिक, खालिदा जिया को फिलहाल ढाका के एवरकेयर अस्पताल के CCU में रखा गया है। 80 साल की जिया को पिछले महीने सीने में गंभीर संक्रमण होने के बाद भर्ती कराया गया था। उनकी हालत लगातार उठ-बैठ रही है, इसलिए मेडिकल बोर्ड ने यात्रा को ‘जोखिम भरा’ बताया। डॉक्टरों का कहना है कि एयर एम्बुलेंस तैयार है, लेकिन मरीज की स्थिति यात्रा योग्य होने पर ही उड़ान होगी।


    एयर एम्बुलेंस दो बार टली

    पहले तय था कि जिया शुक्रवार को लंदन रवाना होंगी, लेकिन कतर की ओर से भेजी जा रही एयर एम्बुलेंस तकनीकी खराबी के कारण ढाका नहीं पहुंच सकी। बाद में मीडिया रिपोर्ट में दावा हुआ कि कतर ने जर्मनी से दूसरा विमान मंगवाया, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि मरीज की हालत अब यात्रा की अनुमति नहीं देती। BNP नेता डॉक्टर जाहिद हुसैन ने बताया कि जिया की विदेश यात्रा उनकी सेहत सुधरते ही कराई जाएगी।

    बेटे तारीक की पत्नी ढाका पहुंचीं
    खालिदा जिया के बेटे और BNP के कार्यवाहक प्रमुख तारीक रहमान लंदन में रहते हैं और कई कानूनी कारणों से बांग्लादेश नहीं लौट पा रहे। हालांकि उनकी पत्नी जुबैदा रहमान शुक्रवार को ढाका पहुंच गईं ताकि जिया को लंदन ले जाने की प्रक्रिया में सहयोग कर सकें। तारीक रहमान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे मां के पास आना चाहते हैं, लेकिन यह निर्णय सिर्फ उनके हाथों में नहीं है।

    हेलीकॉप्टर लैंडिंग की भी तैयारी
    जिया की हालत बिगड़ने के बाद सेना और वायुसेना ने एवरकेयर अस्पताल की छत पर हेलीकॉप्टर लैंडिंग ट्रायल भी किया था। योजना यह थी कि जरूरत पड़ने पर सीधे अस्पताल से उन्हें एयरपोर्ट ले जाया जाएगा। इससे साफ होता है कि सरकार और चिकित्सा बोर्ड पूरी प्रक्रिया को बेहद गंभीरता से संभाल रहे हैं। BNP नेता देशभर में मस्जिदों और मंदिरों में जिया के स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ और प्रार्थना कर रहे हैं। बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक स्थिति के बीच BNP पहले ही मुख्य राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर चुकी है। अब खालिदा जिया की खराब सेहत ने पार्टी के भविष्य को और संवेदनशील बना दिया है।