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  • मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…

    मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…


    मुंबई।
    हाल के दिनों में भारत (India) में घुसपैठियों (Intruders) का मुद्दा काफी गर्म है। असम (Assam ) से लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) और अन्य सीमावर्ती राज्यों में यही चर्चा में है। एसआईआर (ASI) के जरिए वोटर लिस्ट (Voter list) में सुधार करके घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद चल रही है। इस बीच मुंबई से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक मुंबई में बड़ी संख्या में मुसलमान (Muslim) बांग्लादेश और म्यांमार (Bangladesh and Myanmar) से अवैध रूप से लोग आकर बसे हुए हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन लोगों ने यहां आने के बाद वोटर कार्ड और आधार कार्ड जैसे वैध भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए हैं। जिस प्रक्रिया के जरिए इन अवैध प्रवासियों को मुंबई में बसाया जा रहा है, उसे ‘मलवानी पैटर्न’ कहा जाता है।


    कुल 61 इलाके

    रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई में कुल ऐसे 61 इलाके चिह्नित किए गए हैं, जहां पर अवैध प्रवासी मिले हैं। इस रिपोर्ट के कुल कुल सात हजार से अधिक लोगों से इंटरव्यू किए गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरव्यू में यह सामने आया कि इसमें से 3014 लोगों ने बिना वीजा-पासपोर्ट के ही भारत में एंट्री की। इसमें भी 96 फीसदी लोग मुसलमान हैं जो बांग्लादेश और म्यांमार से भारत में आए हुए हैं। इस रिसर्च को अंजाम देने वाले एक प्रोफेसर ने बताया कि गरीब लोग बांग्लादेश छोड़ देते हैं। वह भारत में आते हैं और यहां आकर जाली दस्तावेज बनवा लेते हैं। यहां पर वो वोटर बन जाते हैं और नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट डालने लगते हैं। ‘ग्रे रेलिजियस नेटवर्क’ के चलते इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है।


    एजेंटों की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अवैध प्रवासियों के पास नकली दस्तावेज आता कहां से है। इसमें बताया गया है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में एजेंट्स हैं। यह लोग सात हजार से लेकर 30 हजार रुपए तक में सभी पहचान पत्र मुहैया करा देते हैं। रिसर्च में शामिल प्रोफेसर ने बताया कि अवैध रूप से भारत आने वाला स्थानीय एजेंट से मिलता है। इसके बाद एजेंट एक तय कीमत पर उन्हें वोटर कार्ड से लेकर आधार और पैन कार्ड तक मुहैया कराता है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम पिछले 12-13 साल से काम कर रहा है। इससे अवैध प्रवासियों के लिए भारत में बसना आसान हो जाता है। एक बार वोटर कार्ड मिल जाने के बाद इनके लिए चीजें काफी आसान हो जाता है।


    स्थानीय नेताओं की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया कि मुंबई में छह विधानसभा क्षेत्रों, एक लोकसभा सीट और 56 म्यूनिसिपल वार्डों में इन अवैध वोटरों का असर है। इसके मुताबिक जितने लोगों का सर्वे किया गया, उनमें से 73 फीसदी लोगों के पास वोटर कार्ड मौजूद था। अवैध प्रवासियों को बसाने के लिए किसी दलदली इलाके में एक अवैध बस्ती बसाई जाती है। इसके बाद बिना डोम के मस्जिद बनाई जाती है। स्थानीय प्रभावशाली नेता इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाते हैं। इसके बाद नकली दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। फिर स्थानीय वोटर लिस्ट में बदलाव कर दिया जाता है। फिर उनके फंडिंग का इंतजाम किया जाता है।

  • ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल

    ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल


    गुवाहाटी।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव के बावजूद, बांग्लादेश (Bangladesh) अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (Bangladesh Petroleum Corporation- BPC) ने भारत की सरकारी तेल कंपनी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (Numaligarh Refinery Limited- NRL) से 180,000 मीट्रिक टन डीजल आयात करने का फैसला किया है। इस आयात की कुल लागत लगभग 14.62 अरब टका होगी जो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ बदल सकती है। यह सौदा 2026 के लिए हुआ है।

    यह फैसला 6 जनवरी को ढाका में हुई सरकारी खरीद सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने की। सरकार संचालित बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसी) इस डीजल का आयात करेगी। भुगतान का कुछ हिस्सा बीपीसी अपने बजट से करेगी, जबकि शेष राशि बैंक लोन के माध्यम से जुटाई जाएगी।

    सूत्रों के अनुसार, आयात लागत एनआरएल के साथ बातचीत के बाद तय की गई है। असम स्थित एनआरएल ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) की सहायक कंपनी है। इस सौदे की कुल वैल्यू 119.13 मिलियन डॉलर तय की गई है, जो 83.22 डॉलर प्रति बैरल की बेस कीमत पर 5.50 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर आधारित है। अंतिम लागत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार बदलती रहेगी।

    पत्रकारों के सवालों के जवाब में बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन सलाहकार मुहम्मद फौजुल कबीर खान ने कहा कि यह आयात पिछले सरकार के कार्यकाल में हस्ताक्षरित 15 वर्षीय दीर्घकालिक समझौते के तहत किया जा रहा है।

    एनआरएल की रिफाइनरी असम राज्य में स्थित है। डीजल को पहले सिलीगुड़ी तक ले जाया जाता है और फिर भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से बांग्लादेश पहुंचाया जाता है। यह पाइपलाइन 2022-23 में चालू हुई थी, जिससे परिवहन लागत और समय में काफी बचत हुई है। इससे पहले डीजल रेलवे वैगनों से आयात किया जाता था। यह आयात बांग्लादेश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत किया है।

    हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, अल्पसंख्यकों पर हमले और अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग जारी है। बांग्लादेश की सालाना डीजल मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है और भारत इसका विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक जरूरतें राजनीतिक तनाव से ऊपर हैं, जिससे ऐसे समझौते बरकरार रहते हैं।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्‍याचार जारी, चोरी के शक में नहर में छलांग लगाने से मौत

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्‍याचार जारी, चोरी के शक में नहर में छलांग लगाने से मौत

    ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। चोरी के संदेह में भीड़ के पीछा करने से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार दोपहर भंडारपुर गांव के निवासी मिथुन का शव बरामद किया।
    यह घटना पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तीव्र वृद्धि के बीच हुई है। मिथुन सरकार की मौत पिछले कुछ दिनों में सामने आई क्रूर हमलों की श्रृंखला में यह नई घटना है।

    हिंदू, बौद्ध और ईसाई एकता परिषद ने एक बयान जारी कर दिसंबर महीने में कम से कम 51 लक्षित घटनाओं का खुलासा किया है, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं। परिषद ने आगजनी, बलात्कार और लूटपाट के मामलों का विस्तृत विवरण देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है कि ये अत्याचार 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होते हैं।

    परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना किया है, लेकिन वर्तमान समय में संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक चिंता का खतरनाक संयोजन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब उस समय हो रहा जब देश 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि शेख हसीना सरकार के 2024 में गिरने के बाद अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है।

    वहीं, मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया हत्याएं कोई छिटपुट त्रासदी नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की अपने सबसे कमजोर नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता में आई व्यापक विफलता के संकेत हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरिम प्रशासन की स्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी; चोरी के शक में पीछा, नहर में छलांग लगाने से गई जान

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी; चोरी के शक में पीछा, नहर में छलांग लगाने से गई जान

    बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। चोरी के संदेह में भीड़ के पीछा करने से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।

    पुलिस ने मंगलवार दोपहर भंडारपुर गांव के निवासी मिथुन का शव बरामद किया। यह घटना पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तीव्र वृद्धि के बीच हुई है। मिथुन सरकार की मौत पिछले कुछ दिनों में सामने आई क्रूर हमलों की श्रृंखला में यह नई घटना है।

    हिंदू, बौद्ध और ईसाई एकता परिषद ने एक बयान जारी कर दिसंबर महीने में कम से कम 51 लक्षित घटनाओं का खुलासा किया है, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं। परिषद ने आगजनी, बलात्कार और लूटपाट के मामलों का विस्तृत विवरण देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है कि ये अत्याचार 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होते हैं।

    परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना किया है, लेकिन वर्तमान समय में संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक चिंता का खतरनाक संयोजन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब उस समय हो रहा जब देश 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि शेख हसीना सरकार के 2024 में गिरने के बाद अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है।

    पिछले कुछ दिनों में हुई अन्य घटनाएं…

    5 जनवरी को जेसोर जिले में हिंदू व्यापारी और समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक राणा कांति बैरागी की गोली मारकर हत्या
    5 जनवरी को ही नरसिंगदी में किराने की दुकान मालिक मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या
    3 जनवरी को शरियतपुर जिले में खोकोन चंद्र दास पर हमला, इलाज के दौरान अस्पताल में मौत
    इससे पहले दिसंबर में राजबारी में अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या और मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीटकर हत्या कर शव जलाने की घटनाएं सामने आई थीं।
    वहीं, मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया हत्याएं कोई छिटपुट त्रासदी नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की अपने सबसे कमजोर नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता में आई व्यापक विफलता के संकेत हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरिम प्रशासन की स्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है।

  • बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख पहुंचे इस्लामाबाद… पाकिस्तान से फाइटर जेट खरीदने की तैयारी

    बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख पहुंचे इस्लामाबाद… पाकिस्तान से फाइटर जेट खरीदने की तैयारी


    इस्लामाबाद।
    बांग्लादेश (Bangladesh) अब पाकिस्तान (Pakistan) से फाइटर जेट (Fighter jet) खरीदने की फिराक में है। इसी सिलसिले में बांग्लादेश वायुसेना (Bangladesh Air Force) के एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान (Air Chief Marshal Hasan Mahmood Khan) ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान वायुसेना के चीफ एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू (Pakistan Air Force Chief Air Chief Marshal Zaheer Ahmed Babar Sidhu) से मुलाकात की। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और इसके बाद दोनों सैन्य नेताओं ने रक्षा सहयोग से संबंधित मामलों पर चर्चा की और समीक्षा की। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूर करने की दिशा में बांग्लादेश द्वारा पाकिस्तान के जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट की संभावित खरीद पर विस्तृत चर्चा की। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग, इंटर-सर्विसेस पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी।

    आईएसपीआर के अनुसार बांग्लादेश वायुसेना के एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान वायुसेना के चीफ एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और इसके बाद दोनों सैन्य नेताओं ने रक्षा सहयोग से संबंधित मामलों पर चर्चा की और समीक्षा की। यह विमान, जो चीन और पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित है, एक 4.5 जेनरेशन का मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट है, जिसमें आधुनिक चीनी एवियोनिक्स और हाई-रेंज हथियार हल्के एयरफ्रेम में एकीकृत हैं।

    बयान में आगे कहा गया कि बैठक में ऑपरेशनल सहयोग और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और एयरोस्पेस उन्नति में सहयोग पर जोर दिया गया। पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख बाबर सिद्हू ने अपने बंगलादेशी समकक्ष हसन खान को जेएफ-17 ब्लॉक तृतीय के हालिया उन्नयन के बारे में जानकारी दी तथा बंगलादेश वायुसेना को बेसिक से एडवांस्ड फ्लाइंग और विशेष कोर्स तक व्यापक प्रशिक्षण फ्रेमवर्क के माध्यम से समर्थन देने की पाकिस्तानी वायुसेना की प्रतिबद्धता दोहराई।

    बयान में आगे कहा गया कि बांग्लादेशी वायुसेना प्रमुख ने पाकिस्तानी वायुसेना के कॉम्बैट रिकॉर्ड की सराहना की और इसके ऑपरेशनल विशेषज्ञता से लाभ उठाने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने बंगलादेश वायुसेना के पुराने बेड़े के रखरखाव समर्थन और हवाई निगरानी बढ़ाने के लिए एयर डिफेंस राडार सिस्टम के एकीकरण में सहायता मांगी।

    सैन्य मीडिया विंग के अनुसार बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी वायुसेना की प्रमुख सुविधाओं का दौरा किया, जिसमें नेशनल आईएसआर एंड इंटीग्रेटेड एयर ऑपरेशंस सेंटर, पाकिस्तानी वायुसेना साइबर कमांड और नेशनल एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क शामिल हैं।

  • बांग्लादेश की मैच रिशेड्यूलिंग पर BCCI लगाएगा ब्रेक? भारत सरकार का रोल कितना अहम, 5 पॉइंट्स में समझिए

    बांग्लादेश की मैच रिशेड्यूलिंग पर BCCI लगाएगा ब्रेक? भारत सरकार का रोल कितना अहम, 5 पॉइंट्स में समझिए

    नई दिल्ली। मुस्ताफिजुर रहमान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ एक खिलाड़ी या एक टीम तक सीमित नहीं रहा है. यह मामला धीरे-धीरे इंटरनेशनल क्रिकेट और भारत-बांग्लादेश रिश्तों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने साफ शब्दों में कहा है कि वह भारत में सुरक्षित महसूस नहीं करता और इसलिए उसने ICC से मांग की है कि T20 वर्ल्ड कप 2026 में उसके मैच भारत की जगह श्रीलंका में कराए जाएं. इस मांग के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या BCCI इस रिशेड्यूलिंग को रोक सकता है और भारत सरकार की इसमें क्या भूमिका होगी.

    ICC की चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस

    अब तक इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की तरफ से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ICC चेयरमैन जय शाह ने शेड्यूल पर दोबारा विचार करने के संकेत दिए हैं, लेकिन जब तक ICC की तरफ से लिखित या आधिकारिक फैसला सामने नहीं आता, तब तक यह साफ नहीं है कि बांग्लादेश की मांग मानी जाएगी या नहीं. अगले कुछ दिनों में ICC, BCCI और BCB के बीच बैठक हो सकती है, जिसके बाद तस्वीर साफ होने की उम्मीद है.

    BCCI के अधिकार कितने मजबूत हैं?

    T20 वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन भारत और श्रीलंका की मेजबानी में हो रहा है. ऐसे में भारत में होने वाले मैचों की ग्राउंड लेवल की जिम्मेदारी BCCI के पास है. स्टेडियम, सिक्योरिटी, टिकटिंग, होटल और ट्रैवल जैसे सारे इंतजाम BCCI देख रही है. अगर ऐन मौके पर मैच दूसरी जगह शिफ्ट होते हैं तो इससे लॉजिस्टिक्स और रेवेन्यू दोनों पर असर पड़ेगा. ऐसे में BCCI के पास यह कहने का पूरा अधिकार है कि अब शेड्यूल बदलना आसान नहीं है.

    भारत सरकार की एंट्री क्यों अहम है

    यह मामला अब सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा. बांग्लादेश सरकार पहले ही IPL 2026 के टेलीकास्ट पर रोक लगाने जैसा सख्त कदम उठा चुकी है. ऐसे में वर्ल्ड कप मैचों की रिशेड्यूलिंग का फैसला दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को भी प्रभावित कर सकता है. BCCI किसी भी बड़े फैसले से पहले भारत सरकार से सलाह ले सकती है. हाल ही में पूर्व बांग्लादेशी पीएम खालिदा जिया का निधन हो गया था. उसके बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर उनके अंतिम संस्कार पर बांग्लादेश पहुंचे थे. उस दौरान दोनों ही तरफ से एक पॉजिटिव मैसेज गया था. इसलिए विदेश नीति और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार का रुख बेहद अहम होगा.

    ICC बांग्लादेश पर एक्शन ले सकता है?

    क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं, जब किसी टीम ने सुरक्षा कारणों से मैच खेलने से इनकार किया और उसे नुकसान उठाना पड़ा. 1996 और 2003 वर्ल्ड कप में ऐसा हो चुका है, जहां मैच न खेलने वाली टीमों को अंक गंवाने पड़े थे. यहां तक कि 2016 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था. ऐसे में अगर बांग्लादेश मैच खेलने से इनकार करता है तो ICC कार्रवाई कर सकता है, हालांकि भारत-पाकिस्तान मैचों के उदाहरण के चलते फैसला आसान नहीं होगा.

    बाकी टीमों की परेशानी भी बनेगी मुद्दा

    अगर बांग्लादेश के मैच भारत से हटाकर श्रीलंका किए जाते हैं तो उसके ग्रुप की बाकी टीमों को भी दिक्कत होगी. उन्हें भारत और श्रीलंका के बीच बार-बार सफर करना पड़ेगा, जो टाइट शेड्यूल में मुश्किल है। ऐसे में दूसरी टीमें भी आपत्ति जता सकती हैं.

    कुल मिलाकर, बांग्लादेश की मांग को मानना ICC के लिए आसान फैसला नहीं है. इसमें BCCI, भारत सरकार, दूसरी टीमें और करोड़ों फैंस सभी के हित जुड़े हुए हैं.

  • बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की कड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। मैमनसिंह जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वही इलाका है, जहां कुछ दिन पहले ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था।
    लगातार हो रही हत्याओं से पूरे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

    ताजा मामले में बांग्लादेश के ग्रामीण अर्धसैनिक बल अंसार के सदस्य बजेंद्र बिस्वास की जान चली गई। सोमवार, 29 दिसंबर की शाम करीब 6:45 बजे भालुका उपजिला क्षेत्र स्थित लबीब ग्रुप की गारमेंट फैक्ट्री सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड में यह घटना हुई। बजेंद्र बिस्वास वहां सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे और फैक्ट्री परिसर में बने अंसार बैरक में अपने साथियों के साथ रहते थे।

    पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बातचीत के दौरान बजेंद्र के साथी नोमान मियां ने कथित तौर पर मजाक में सरकारी शॉटगन उनकी ओर तान दी। कुछ ही पलों बाद अचानक गोली चल गई, जो बजेंद्र की बाईं जांघ में जा लगी। गंभीर रूप से घायल बजेंद्र को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    घटना के बाद पुलिस ने आरोपी नोमान मियां को हिरासत में ले लिया और वारदात में इस्तेमाल की गई शॉटगन जब्त कर ली है। संबंधित थाने के प्रभारी मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

    गौर करने वाली बात यह है कि बीते दो हफ्तों में यह इसी इलाके में हिंदू समुदाय से जुड़ी तीसरी हत्या है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या और अब बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर मौत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से भालुका और आसपास के क्षेत्रों में तनाव गहराता जा रहा है, जबकि स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दावे कर रहा है।

  • बांग्लादेश में कंडोम की भारी किल्लत, 50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर

    बांग्लादेश में कंडोम की भारी किल्लत, 50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर

    नई दिल्‍ली। शेख हसीना की सरकार के पतन के साथ ही बांग्लादेश अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। वहां हर दिन उपद्रव देखने को मिल जा रहे हैं। इस सबके बीच एक गंभीर संकट सामने आ खड़ी हुई है। बांग्लादेश इन दिनों कंडोम की भारी किल्लत का सामना कर रहा है। इसके कारण जन्मदर में भी बीते 50 वर्षों में भारी उछाल हुआ है। बांग्लादेश का यह ताजा संकट फंड की कमी और मानव संसाधन की भारी कमी के कारण उत्पन्न हुआ है। इसकी वजह से बीते कुछ वर्षों में गर्भनिरोधकों की आपूर्ति लगातार घटती गई है, जिसका सीधा असर देश की जनसंख्या वृद्धि पर पड़ रहा है।

    स्थिति यह है कि परिवार नियोजन महानिदेशालय के पास उपलब्ध कंडोम का स्टॉक मात्र 39 दिनों के लिए बचा है। ऐसे में अगले वर्ष की शुरुआत में कम से कम एक महीने तक कंडोम वितरित नहीं किए जा सकेंगे। इससे परिवार नियोजन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
    50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर

    यह संकट ऐसे समय सामने आया है जब देश में कुल प्रजनन दर के मामले में पिछले 50 वर्षों में पहली बार वृद्धि दर्ज की गई है। मल्टीपल इंडिकेटर क्लस्टर सर्वे 2025 के अनुसार, प्रजनन दर 2024 के 2.3 से बढ़कर 2.4 हो गई है। विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गर्भनिरोधकों की कमी बनी रही तो प्रजनन दर और बढ़ सकती है।
    गर्भनिरोधकों के उपयोग में भारी गिरावट

    सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की विवाहित महिलाओं में गर्भनिरोधकों का उपयोग 2019 के 62.7% से घटकर 58.2% रह गया है। आधुनिक गर्भनिरोधकों तक पहुंच भी 77.4% से घटकर 73.5% रह गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि गर्भनिरोधकों की उपलब्धता और प्रजनन दर के बीच सीधा संबंध है।
    कोविड के बाद बिगड़ी स्थिति

    बांग्लादेश के अधिकारियों के मुताबिक, कोविड-19 महामारी (2020) के दौरान गर्भनिरोधकों की मांग तो बढ़ी, लेकिन सरकार ने उस समय परिवार नियोजन को प्राथमिकता नहीं दी। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त वहां की मीडिया आुटलेट ‘द डेलीस्टार’ को बताया कि 2023 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने करीब एक साल तक गर्भनिरोधकों की खरीद रोक दी, जिससे आपूर्ति में भारी अंतर आ गया।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2019 में कंडोम की आपूर्ति 97.48 लाख थी, जो सितंबर 2025 तक घटकर 41.52 लाख रह गई। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने पिछले महीने सभी पांच गर्भनिरोधकों की खरीद के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी है, लेकिन खरीद प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि सीमित मात्रा में कंडोम की खरीद की जा रही है, फिर भी अगले साल एक महीने तक सप्लाई बाधित रह सकती है।

    ढाका विश्वविद्यालय के जनसंख्या विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमीनुल इस्लाम का कहना है कि गर्भनिरोधकों और स्टाफ की कमी ने जन्म नियंत्रण गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर प्रजनन दर पर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में कई दंपति दो से अधिक बच्चे चाहने लगे हैं, जो चिंता का विषय है।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता के खिलाफ अयोध्या के संत समाज का गुस्सा, केंद्र से की हस्तक्षेप की अपील


    अयोध्या । बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग का मामला गरमा गया है। इस घटना को लेकर अयोध्या के संत समाज ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। संत समाज का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। सीताराम योग सदन मंदिर के महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने बांग्लादेश में जारी हिंसा को अमानवीय बताया और कहा कि बांग्लादेश के जिहादी लोग हिंदुओं को ढूंढ-ढूंढकर अपना निशाना बना रहे हैं और ये पूरे हिंदू धर्म पर हमला है।

    उन्होंने कहा कि पहले दीपू चंद्र दास को मारा और आग लगा दीफिर एक और हिंदू शख्स को मारा और एक छोटी बच्ची को भी नहीं छोड़ा। वहां की सरकार जिहादियों की तरह काम करती है और बांग्लादेश को एक इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहती है। उन्होंने आगे पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि इसका असर भारत पर देखने को भी मिलेगा। अब समय आ गया है कि सरकार को बांग्लादेश के बॉर्डर खोल देने चाहिए और वहां फंसे हिंदुओं को बचाना चाहिए। जैसे पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया थावैसे ही बांग्लादेश के कट्टरपंथियों को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन चलाना चाहिए।

    अयोध्याधाम के साकेत भवन मंदिर के सीताराम दास जी महाराज ने भी अपील की है कि केंद्र सरकार सेना और सशस्त्र बल का सहारा लेकर हिंदुओं को बचाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में इंसानियत नहीं बची है और मैं पीएम से निवेदन करता हूं कि राफेलतेजस और ब्रह्मोस क्या कर रहे हैं? अभी तक भारत में बांग्लादेश को मिला लेना चाहिए था और कड़ा सबक सिखाना चाहिए। बता दें कि बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीटा और फिर पेड़ से बांधकर आग लगा दी। इस घटना के सात दिन बाद एक अन्य हिंदू युवक को भी भीड़ ने मार डाला। 29 साल के अमृत मंडल उर्फ सम्राट को गांव की भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया।

  • बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा

    बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के मुस्लिम समर्थक कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैंपूर्व राजदूत महेश सचदेवा


    नई दिल्ली । बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने 17 सालों के बाद घर वापसी की है। रहमान ने घर लौटने पर मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए देश के लोगों का दिल से शुक्रिया अदा किया। दूसरी ओर बांग्लादेश में हफ्तेभर में लगातार दूसरे अल्पसंख्यक हिंदू की हत्या का मामला सामने आया है। इन मुद्दों को लेकर पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने आईएएनएस से खास बातचीत की।

    पूर्व राजदूत महेश सचदेवा ने कहाकुछ हफ्तों में हिंदू युवक की हत्या की यह दूसरी घटना सामने आई हैजिसमें ज्यादातर सांप्रदायिक नफरत की वजह से हत्या की गई है। इससे कई तरह की चिंताएं पैदा हुई हैं। सबसे पहलेइससे पता चलता है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा पक्की करने के लिए संघर्ष कर रही है।

    उन्होंने आगे कहादूसरा यह बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में गहरी पैठ जमाए हुए ‘इस्लामवाद’ को दिखाता हैजिसमें पार्टियां अपने विरोधियों से ज्यादा मुस्लिम समर्थक और कट्टरपंथी दिखने की होड़ में हैं। तीसराइससे यह सवाल उठता है कि क्या 12 फरवरी के चुनाव के बाद सांप्रदायिक दुश्मनी की यह लहर कम हो जाएगी या अगर ये ताकतें सत्ता में आती हैंतो क्या हालात और बिगड़ सकते हैं।

    तारिक रहमान की वापसी को लेकर महेश सचदेवा ने कहा17 साल के निर्वासन के बादतारिक रहमान बांग्लादेश लौट आए हैं। इस बात का चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता हैक्योंकि 12 फरवरी के चुनाव में बीएनपी को सबसे आगे देखा जा रहा है। उन्होंने सुलह वाली बातें कहीइस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश मुसलमानों और ईसाइयों समेत सभी का है। निर्वासन के दौरान देश के विकास की तारीफ की और अवामी लीग सरकार के सुधारों को भी माना। जानकार बांग्लादेश की मौजूदा उथल-पुथल के बीच भारत और उनके आर्थिक और सामाजिक एजेंडे पर नरम रुख पर नजर रख रहे हैं।

    बता देंढाका नॉर्थ सिटी यूनिट ने पुरबाचल इलाके में जुलाई 36 एक्सप्रेसवे पर बीएनपी ने सफाई अभियान चलाया। इस सड़क का इस्तेमाल तारिक रहमान की रैली के लिए किया गया था। जुलाई 36 एक्सप्रेसवे को 300-फीट रोड के नाम से जाना जाता है। सफाई अभियान के दौरान ढाका नॉर्थ सिटी कॉर्पोरेशन डीएसीसी के वर्करपार्टी कार्यकर्ता और 300 किराए के सफाई कर्मचारी शामिल रहे और कचरे-मलबे को हटाया।

    ढाका नॉर्थ बीएनपी के संयोजक अमीनुल हक ने इस अभियान का नेतृत्व किया। कचरे को जल्दी हटाने के लिए सोलह ट्रक किराए पर लिए गए। इसके अलावाराजधानी के अलग-अलग इलाकों से 300 सफाई कर्मचारी लाए गए। इस बीचडीएनसीसी के सफाई कर्मचारी भी सड़क से कचरा साफ करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।