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  • पंजाब केसरी' लाला लाजपत राय की जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अर्पित की भावांजलि: राष्ट्र सदा कृतज्ञ रहेगा

    पंजाब केसरी' लाला लाजपत राय की जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अर्पित की भावांजलि: राष्ट्र सदा कृतज्ञ रहेगा


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान स्वाधीनता संग्राम सेनानी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के स्तंभ रहे ‘पंजाब केसरी’ लाला लाजपत राय की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन किया है। बुधवार को भोपाल में जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने लाला जी के अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और उनके महान बलिदान को याद करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाला लाजपत राय एक ऐसे महानायक थे, जिन्होंने अपनी अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा और स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा, “श्रद्धेय लाला लाजपत राय जी का बलिदान और उनके द्वारा दिया गया नेतृत्व भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने गुलामी की बेड़ियों में जकड़े लाखों भारतीयों के भीतर आजादी की अलख जगाई और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।

    स्वतंत्रता संग्राम के लाल को सलाम

    लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रसिद्ध ‘लाल-बाल-पाल’ लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल की तिकड़ी के प्रमुख सदस्य थे। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक सुधारों का भी मार्गदर्शक रहा है।

    सांयकाल की लाठी और ब्रिटिश साम्राज्य का पतन डॉ. यादव ने उन ऐतिहासिक क्षणों को भी याद किया जब साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला जी ने अंग्रेजों की लाठियां खाते हुए कहा था कि मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की अंतिम कील साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके इन शब्दों ने भारतीय जनमानस में वह ऊर्जा भरी जिसने अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

    बलिदान के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता

    मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज का आत्मनिर्भर भारत उन्हीं महान बलिदानियों के सपनों का भारत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे लाला लाजपत राय जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लें और राष्ट्र सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। डॉ. यादव ने ट्वीट और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से भी चित्र साझा कर ‘पंजाब केसरी’ को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

  • उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीं शुभकामनाएं, राष्ट्र निर्माण में UP के योगदान को सराहा

    उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीं शुभकामनाएं, राष्ट्र निर्माण में UP के योगदान को सराहा

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के समस्त नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को भारतीय संस्कृति का केंद्र बताते हुए राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली परंपराओं, आध्यात्मिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत का संगम है। उन्होंने कहा: भारतीय संस्कृति महान परंपराओं और राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में उत्तर प्रदेश का योगदान अतुलनीय और प्रेरणादायी है। प्रभु श्री राम और श्री कृष्ण की यह पावन धरा आज प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रही है।

    विकास और सुशासन की कामना

    मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के निरंतर उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सफलता के नए शिखर छुएगा। उन्होंने आगे कहा सांस्कृतिक एकता मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। दोनों राज्य मिलकर एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार कर रहे हैं। समृद्धि का पथ डॉ. यादव ने कामना की कि गौरवशाली उत्तर प्रदेश विकास, समृद्धि और सुशासन के पथ पर इसी तरह निरंतर अग्रसर बना रहे और देश की अर्थव्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान देता रहे।

    क्यों मनाया जाता है UP दिवस

    गौरतलब है कि 24 जनवरी 1950 को ही तत्कालीन यूनाइटेड प्रोविंस का नाम बदलकर ‘उत्तर प्रदेश’ किया गया था। साल 2018 से प्रतिवर्ष इस दिन को स्थापना दिवस के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह बधाई दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच सौहार्द और परस्पर सहयोग की भावना को और प्रगाढ़ करती है।

  • सशक्त बेटी, समृद्ध मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटियों को दी शुभकामनाएं

    सशक्त बेटी, समृद्ध मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटियों को दी शुभकामनाएं


    भोपाल । राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की सभी बेटियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। मुख्यमंत्री ने बेटियों को राष्ट्र और समाज की आधारशिला बताते हुए उनके सशक्तिकरण के प्रति अपनी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। शनिवार 24 जनवरी को जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेटियाँ केवल हमारे घरों की रौनक ही नहीं बल्कि हमारी गौरवशाली संस्कृति मानवीय संवेदनाओं और भविष्य के उज्ज्वल भारत की नींव हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जब बेटियों को सही शिक्षा सुरक्षा और समान अवसर मिलते हैं तो वे अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्र को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का सामर्थ्य रखती हैं।

    बेटियां हमारी संस्कृति और भविष्य की आधारशिला

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालिकाओं के आत्मविश्वास को बढ़ावा देते हुए कहा आज हमारी बेटियां शिक्षा और तकनीक से लेकर खेल के मैदान तक हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं। मैं कामना करता हूँ कि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार करें। मध्य प्रदेश सरकार हर बेटी को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है।

    मध्य प्रदेश: बेटियों के लिए अनुकूल नीतियां

    मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि राज्य सरकार लाड़ली लक्ष्मी जैसी अभिनव योजनाओं के माध्यम से बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा और विवाह तक सहायता सुनिश्चित कर रही है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां हर बालिका स्वयं को सुरक्षित महसूस करे और उसे विकास के पर्याप्त अवसर मिलें। राष्ट्रीय बालिका दिवस के इस मौके पर प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बेटियों के अधिकारों, उनके पोषण और शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

  • जननायक को नमन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत रत्न स्व. कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

    जननायक को नमन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत रत्न स्व. कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर दी श्रद्धांजलि


    भोपाल। सामाजिक न्याय के पुरोधा और जननायक के नाम से विख्यात भारत रत्न स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने कर्पूरी ठाकुर के सादगीपूर्ण जीवन और पिछड़ों के उत्थान के लिए किए गए उनके ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए उन्हें सामाजिक समानता का सच्चा प्रतीक बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर का संपूर्ण जीवन राष्ट्र निर्माण और समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को मुख्यधारा में लाने के लिए समर्पित था। उन्होंने कहा गरीबों, शोषितों और वंचितों के कल्याण के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर जी द्वारा किया गया त्याग और अटूट समर्पण हम सभी के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है। उनका सादगीपूर्ण राजनीतिक जीवन हमें सदैव निष्काम समाज सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।

    सामाजिक न्याय के प्रणेता थे कर्पूरी ठाकुर

    स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर का भारतीय राजनीति में स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें उनकी ईमानदारी और दलितों-पिछड़ों के अधिकारों की वकालत के लिए जाना जाता है।सामाजिक समानता: मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि कर्पूरी ठाकुर ने शासन व्यवस्था में समानता लाने के जो बीज बोए थे, उन्हीं पर चलते हुए आज की सरकारें वंचितों के सशक्तिकरण का कार्य कर रही हैं।

    भारत रत्न का सम्मान मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार द्वारा उन्हें भारत रत्न मरणोपरांत से सम्मानित करना, उनके संघर्षों और भारतीय लोकतंत्र के प्रति उनके योगदान का सच्चा सम्मान है। मुख्यमंत्री के इस नमन ने प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में कर्पूरी ठाकुर की विरासत और उनके आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को पुन दोहराया है।

     सामाजिक न्याय के पुरोधा और जननायक के नाम से विख्यात भारत रत्न स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने कर्पूरी ठाकुर के सादगीपूर्ण जीवन और पिछड़ों के उत्थान के लिए किए गए उनके ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए उन्हें सामाजिक समानता का सच्चा प्रतीक बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर का संपूर्ण जीवन राष्ट्र निर्माण और समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को मुख्यधारा में लाने के लिए समर्पित था। उन्होंने कहा गरीबों, शोषितों और वंचितों के कल्याण के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर जी द्वारा किया गया त्याग और अटूट समर्पण हम सभी के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है। उनका सादगीपूर्ण राजनीतिक जीवन हमें सदैव निष्काम समाज सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।

    सामाजिक न्याय के प्रणेता थे कर्पूरी ठाकुर

    स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर का भारतीय राजनीति में स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें उनकी ईमानदारी और दलितों-पिछड़ों के अधिकारों की वकालत के लिए जाना जाता है।सामाजिक समानता: मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि कर्पूरी ठाकुर ने शासन व्यवस्था में समानता लाने के जो बीज बोए थे, उन्हीं पर चलते हुए आज की सरकारें वंचितों के सशक्तिकरण का कार्य कर रही हैं।

    भारत रत्न का सम्मान मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार द्वारा उन्हें भारत रत्न मरणोपरांत से सम्मानित करना, उनके संघर्षों और भारतीय लोकतंत्र के प्रति उनके योगदान का सच्चा सम्मान है। मुख्यमंत्री के इस नमन ने प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में कर्पूरी ठाकुर की विरासत और उनके आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को पुन दोहराया है।

  • प्रखर राष्ट्रवाद के प्रतीक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाला साहेब ठाकरे की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि

    प्रखर राष्ट्रवाद के प्रतीक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाला साहेब ठाकरे की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि


    भोपाल। प्रखर हिंदुत्व और सशक्त राष्ट्रवादी विचारधारा के ध्वजवाहक शिवसेना के संस्थापक स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे की जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने बाला साहेब के व्यक्तित्व को अदम्य साहस और निर्भीकता का पर्याय बताते हुए राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि बाला साहेब ठाकरे मात्र एक राजनेता नहीं, बल्कि एक प्रखर राष्ट्रवादी विचारधारा के जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचितों श्रमिकों और समाज के गरीब तबकों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बाला साहेब का जीवन साहस स्वाभिमान और बिना किसी समझौते के की गई निर्भीक राष्ट्र सेवा का एक अनुपम उदाहरण है जो आज भी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र है।

    डॉ. यादव ने आगे कहा कि देश की एकता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए बाला साहेब द्वारा उठाए गए कदम सदैव इतिहास में दर्ज रहेंगे। उनके ओजस्वी विचार और जनहित के प्रति उनकी कटिबद्धता ने भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट स्थान बनाया है। मुख्यमंत्री के इस नमन ने एक बार फिर बाला साहेब की उन स्मृतियों को ताजा कर दिया है जहाँ उन्होंने सदैव राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वोपरि रखा।

  • विद्या की देवी का आशीष: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बसंत पंचमी पर प्रदेशवासियों को दीं मंगलकामनाएं

    विद्या की देवी का आशीष: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बसंत पंचमी पर प्रदेशवासियों को दीं मंगलकामनाएं


    भोपाल। ऋतुराज बसंत के आगमन और ज्ञान, कला एवं संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना के महापर्व ‘बसंत पंचमी’ के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस पावन पर्व पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और नागरिकों के बौद्धिक उत्कर्ष की मंगलकामना की है।

    अपने शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसंत पंचमी का यह उत्सव हमारे जीवन में नवीन ऊर्जा और नई चेतना का संचार करता है। उन्होंने विशेष रूप से प्रार्थना की कि अक्षर, स्वर और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की असीम कृपा हम सभी पर बनी रहे। मुख्यमंत्री ने कामना की कि मां शारदे का आशीर्वाद सभी के जीवन को अगाध ज्ञान, अद्भुत सृजनशीलता, अपार सुख और स्थायी समृद्धि से परिपूर्ण करे।

    मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ज्ञान ही वह प्रकाश है जो समाज को उन्नति के मार्ग पर ले जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि बसंत पंचमी का दिन हमें विद्या और शिक्षा के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देता है। मध्यप्रदेश की धरती, जो सदा से ही ज्ञान और अध्यात्म का केंद्र रही है वहां यह पर्व नई ऊंचाइयों को छूने का संकल्प लेने का अवसर है।

    राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश के शिक्षण संस्थानों और घरों में आज सुबह से ही उल्लास का माहौल है। बसंती परिधानों और पीले फूलों के साथ मां सरस्वती का पूजन अर्चन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की इन शुभकामनाओं ने उत्सव के आनंद को और बढ़ा दिया है जो प्रदेश की सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान करती हैं।

  • तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा': मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेताजी की जयंती पर दी पराक्रम दिवस की बधाई

    तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा': मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेताजी की जयंती पर दी पराक्रम दिवस की बधाई


    भोपाल। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर समूचा देश आज उन्हें नमन कर रहा है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नेताजी की जयंती यानी ‘पराक्रम दिवस’ पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने नेताजी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचार और राष्ट्रभक्ति का जज्बा आज भी हर भारतीय के रगों में जोश भर देता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का व्यक्तित्व अद्वितीय साहस और अप्रतिम त्याग की प्रतिमूर्ति था। उन्होंने जिस ओजस्वी नेतृत्व के साथ ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी, वह भारतीय इतिहास का सबसे गौरवशाली अध्याय है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि नेताजी का जीवन और उनके द्वारा दी गई कुर्बानियां राष्ट्रभक्ति का एक ऐसा शाश्वत स्रोत हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को भी सदैव मार्गदर्शित करती रहेंगी।

    डॉ. यादव ने कहा कि आज का यह पराक्रम दिवस हमें नेताजी के उन सिद्धांतों की याद दिलाता है, जहाँ राष्ट्रहित सर्वोपरि था। उनका प्रेरक व्यक्तित्व प्रत्येक भारतीय को साहस कर्तव्य बोध और देश के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नेताजी के संघर्षों से सीख लें और देश को सशक्त बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं।

    उल्लेखनीय है कि नेताजी की अदम्य भावना को सम्मान देने के लिए भारत सरकार उनकी जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाती है। मध्यप्रदेश में भी इस अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं में देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो नेताजी के जय हिंद और ‘चलो दिल्ली’ जैसे नारों की गूँज को आज भी जीवंत रखे हुए हैं।

  • भोपाल: RGPV कैंपस में छात्रा की संदिग्ध मौत; स्टाफ से विवाद के बाद बीटेक फर्स्ट ईयर की सव्याश्री ने की आत्महत्या

    भोपाल: RGPV कैंपस में छात्रा की संदिग्ध मौत; स्टाफ से विवाद के बाद बीटेक फर्स्ट ईयर की सव्याश्री ने की आत्महत्या


    भोपाल। राजधानी के प्रतिष्ठित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के गर्ल्स हॉस्टल में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बीटेक फर्स्ट ईयर की एक छात्रा का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। मृतका की पहचान सव्याश्री मुनागला (19) के रूप में हुई है, जो धार जिले की रहने वाली थी।

    विवाद और खामोशी: मौत से पहले क्या हुआ?
    शुरुआती जांच में एक गंभीर पहलू सामने आया है।

    बताया जा रहा है कि सुसाइड से पहले सव्याश्री का हॉस्टल की एक महिला स्टाफ के साथ तीखा विवाद हुआ था।
    अकेली थी छात्रा: सव्याश्री की रूममेट 10 जनवरी से छुट्टी पर थी, जिसका फायदा उठाकर उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
    संदेह का घेरा: वार्डन के मुताबिक, छात्रा एक दिन की छुट्टी के बाद लौटी थी। लौटने पर हुई ‘सामान्य पूछताछ’ और स्टाफ के साथ हुई ‘बहस’ के बीच की कड़ियों को पुलिस जोड़ने में जुटी है।

    जांच के अहम बिंदु: मोबाइल और लैपटॉप में छिपे हैं राज
    पुलिस और FSL (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की टीम ने मौके पर पहुंचकर बारीकी से मुआयना किया।
    कोई सुसाइड नोट नहीं: कमरे से कोई लिखित नोट नहीं मिला है, जिससे गुत्थी और उलझ गई है।

    डिजिटल फुटप्रिंट्स: पुलिस ने सव्याश्री का स्मार्टफोन और लैपटॉप जब्त कर लिया है।

    साइबर टीम यह पता लगाएगी कि क्या वह किसी बाहरी दबाव या साइबर बुलिंग का शिकार तो नहीं थी।

    दरवाजे का लॉक: टीआई विजेंद्र मर्सकोले के अनुसार, पुलिस के पहुंचने से पहले ही दरवाजा खोला जा चुका था, जिसका लॉक टूटा हुआ मिला।

    घटनाक्रम: एक नजर में
    बुधवार रात सव्याश्री ने मेस में डिनर किया, व्यवहार सामान्य था।
    गुरुवार दोपहर जब वह काफी देर तक बाहर नहीं आई, तो सहेलियों ने वार्डन को सूचना दी।
    पुलिस कार्रवाई गेट तोड़कर शव को नीचे उतारा गया और हमीदिया मर्चुरी भेजा गया।

    प्रशासन पर सवाल
    हॉस्टल में छात्रा और स्टाफ के बीच हुई नोक-झोंक ने अब तूल पकड़ लिया है। परिजन और साथी छात्र यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या स्टाफ का व्यवहार इतना प्रताड़ित करने वाला था कि छात्रा को जान देनी पड़ी?
    धार से परिजनों के पहुंचने के बाद शुक्रवार को शव का पोस्टमॉर्टम होगा। पुलिस का कहना है कि कॉल डिटेल्स और परिजनों के बयानों के आधार पर जल्द ही FIR की दिशा तय की जाएगी।
    डिस्क्लेमर: आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। यदि आप या आपके आसपास कोई तनाव में है, तो कृपया मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट या हेल्पलाइन नंबरों से मदद लें।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि; बोले– युवाओं के लिए अनंत प्रेरणास्रोत है उनका शौर्य

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि; बोले– युवाओं के लिए अनंत प्रेरणास्रोत है उनका शौर्य


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भारतीय इतिहास के महान योद्धा, त्याग और बलिदान के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने उनके अदम्य साहस और देशप्रेम को नमन करते हुए उन्हें भारतीय अस्मिता का रक्षक बताया।

    शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि महाराणा प्रताप मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले महानायक थे। उनका जीवन वीरता, पराक्रम और संघर्ष की एक ऐसी गाथा है, जो हर पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करती है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि महाराणा प्रताप ने कठिन परिस्थितियों में भी कभी झुकना स्वीकार नहीं किया और अपने संकल्पों से मुगल साम्राज्य को चुनौती दी।

    युवाओं के मार्गदर्शक हैं उनके आदर्श डॉ. यादव ने आगे कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जीवन और उनके आदर्श वर्तमान समय के युवाओं के लिए अनंत प्रेरणास्रोत हैं। उनका संघर्ष और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा हमें यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि महाराणा प्रताप के दिखाए गए मार्ग और उनके वीरतापूर्ण संघर्ष से आने वाली पीढ़ियाँ सदैव मार्गदर्शन प्राप्त करती रहेंगी। उल्लेखनीय है कि मेवाड़ के महान शासक महाराणा प्रताप का निधन 19 जनवरी 1597 को हुआ था। आज उनकी पुण्यतिथि पर देश भर में उन्हें याद कर नमन किया जा रहा है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने NDRF के स्थापना दिवस पर दीं शुभकामनाएँ; बोले- जवानों का साहस और सेवा भाव गर्व का विषय

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने NDRF के स्थापना दिवस पर दीं शुभकामनाएँ; बोले- जवानों का साहस और सेवा भाव गर्व का विषय


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल NDRF के स्थापना दिवस के अवसर पर बल के सभी अधिकारियों और जवानों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। सोमवार को जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में NDRF द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों और उनके समर्पण की सराहना की।

    ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के ध्येय को किया नमन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि NDRF ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ के पावन ध्येय वाक्य के साथ कार्य करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि चाहे भीषण प्राकृतिक आपदा हो या कोई अन्य विषम परिस्थितियाँ, यह बल हमेशा संकट के समय रक्षक बनकर खड़ा रहता है। मुख्यमंत्री ने बल की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में बचाव कार्यों के लिए NDRF का समर्पण अनुकरणीय है।

    साहस और सेवा भाव पर जताया गौरव मुख्यमंत्री ने अपने शुभकामना संदेश में जवानों के जज्बे को सलाम किया। उन्होंने कहा कि NDRF के जवानों का अदम्य साहस, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और निस्वार्थ सेवा भाव न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित करता है। संकट की हर घड़ी में अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा करने का उनका संकल्प प्रेरणादायी है। उल्लेखनीय है कि NDRF स्थापना दिवस प्रतिवर्ष 19 जनवरी को मनाया जाता है। देश में आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए इस बल का गठन किया गया था, जिसने समय-समय पर अपनी विशेषज्ञता से हजारों लोगों की जान बचाई है।