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  • मास्टर प्लान के लिए भोपाल में दौड़े शहरवासी: मसूद ने सरकार को घेरा अरेरा कॉलोनी की जर्जर सड़कें भी जल्द बनाएं

    मास्टर प्लान के लिए भोपाल में दौड़े शहरवासी: मसूद ने सरकार को घेरा अरेरा कॉलोनी की जर्जर सड़कें भी जल्द बनाएं


    भोपाल । भोपाल में लंबे समय से अटके मास्टर प्लान को लागू कराने की मांग अब सड़क तक पहुंच गई है। राजधानी में बुधवार को कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की अगुआई में रन फॉर मास्टर प्लान दौड़ आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में युवा महिलाएं छात्र व्यापारी और शहर के अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। 11 नंबर बस स्टॉप से शुरू हुई इस मैराथन के जरिए लोगों ने सरकार से भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू करने की मांग उठाई। दौड़ के दौरान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों को लेकर आवाज बुलंद की गई। प्रतिभागियों का कहना था कि राजधानी जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए स्पष्ट मास्टर प्लान बेहद जरूरी है क्योंकि इसके अभाव में विकास कार्यों से लेकर जमीन के उपयोग और यातायात व्यवस्था तक कई स्तरों पर परेशानियां सामने आ रही हैं।

    विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि भोपाल का मास्टर प्लान करीब दो दशक से अटका हुआ है और इसका खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उज्जैन का मास्टर प्लान सामने आ सकता है तो भोपाल का मास्टर प्लान आखिर क्यों अटका हुआ है। उनका कहना था कि एक ही प्रदेश में शहरों के लिए अलग अलग रवैया नहीं होना चाहिए। भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी है और यहां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास की स्पष्ट दिशा तय होना जरूरी है।

    मसूद ने कहा कि इस आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं बल्कि शहर के लोगों की बुनियादी जरूरतें हैं। बच्चे युवा महिलाएं व्यापारी और आम नागरिक एक ही मांग कर रहे हैं कि भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं लेकिन शहर के विकास के मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक मास्टर प्लान के अभाव में कई क्षेत्रों में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    इस दौरान मास्टर प्लान के साथ अरेरा कॉलोनी और आई टू से आई एट क्षेत्र की सड़कों का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया गया। इन इलाकों में सीवेज लाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की हालत खराब होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। मसूद ने मांग की कि सड़क निर्माण का काम तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क का भूमिपूजन कौन करता है या निर्माण का श्रेय किसे मिलता है इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। जरूरत यह है कि लोगों को जल्द राहत मिले और पूरी अरेरा कॉलोनी की सड़कों को व्यवस्थित तरीके से बनाया जाए।

    मैराथन में स्पाइडर मैन का मास्क पहनकर पहुंचे एक युवक ने भी लोगों का ध्यान खींचा। खुद को स्पीडी बताने वाले युवक ने कहा कि वह भोपाल के भविष्य के लिए मास्टर प्लान लागू कराने की मांग को लेकर दौड़ में शामिल हुआ है। उसका कहना था कि मास्टर प्लान के अभाव में शहर में ट्रैफिक और आम लोगों की आवाजाही से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं।

    भोपाल में मास्टर प्लान के लंबे समय से लंबित रहने का असर जमीन के उपयोग नए निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत नगर निगम की ओर से की जा रही सीलिंग कार्रवाई को लेकर भी व्यापारियों और संपत्ति मालिकों में चिंता बनी हुई है। शहर में विकास के नियमों को लेकर स्पष्टता नहीं होने से कई लोगों के सामने असमंजस की स्थिति है। ऐसे में रन फॉर मास्टर प्लान के जरिए उठी आवाज ने सरकार के सामने राजधानी के भविष्य की योजना को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

  • इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन

    इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन


    भोपाल। मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर धरने पर बैठे रहे और मंगलवार को दोबारा सड़क जाम कर दिया। आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह बंद रही, जबकि इंदौर के एमवाय अस्पताल में भी इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। इमरजेंसी सेवाएं हालांकि जारी रखी गई हैं।

    इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिलने वाले 14 हजार 337 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है और वे लंबे समय से इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे अस्पतालों में लगातार ड्यूटी करते हैं और मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

    भोपाल में आंदोलन के कारण हमीदिया अस्पताल की ओपीडी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। रिपोर्ट के मुताबिक ओपीडी में 1500 से ज्यादा मरीज मौजूद थे। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन जूनियर डॉक्टरों के काम से हटने के बाद पर्चे बनाने और मरीजों को देखने की व्यवस्था प्रभावित हो गई। फिलहाल वरिष्ठ चिकित्सक और जीएमसी के प्रोफेसर मरीजों को देख रहे हैं। इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को इलाज मिल सके।

    वहीं कमला पार्क क्षेत्र में प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। सीएम हाउस की ओर जाने वाले रास्तों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। पुराने शहर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हुई और रोशनपुरा से रॉयल मार्केट तक जाम की स्थिति बनी। पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर व्यवस्था संभालने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का सड़क पर बैठना जारी रहने से आसपास के इलाकों में भी यातायात दबाव बढ़ गया।

    इससे पहले सोमवार को सीएम हाउस की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए। पुलिस का कहना है कि इमरजेंसी गेट की ओर बढ़ने के दौरान धक्कामुक्की की स्थिति बनी जिसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

    मंगलवार को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई दोनों मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद स्टाइपेंड के मामले पर फिर बातचीत किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनकी दूसरी मांग प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दोनों मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इंदौर में भी भोपाल की घटना के विरोध में डॉक्टरों ने रैली निकालकर अपना समर्थन जताया है। ऐसे में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं पर आंदोलन का असर फिलहाल जारी है।

  • 5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन

    5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। जबलपुर में प्रमुख पेंशनर संगठनों की संयुक्त बैठक में सरकार के सामने अपनी मांगें रखने के साथ आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा की गई। पेंशनरों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दिवाली से पहले उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के करीब 5 लाख पेंशनर भोपाल में विशाल रैली निकालेंगे। संगठन ने जरूरत पड़ने पर अर्धनग्न प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी है।

    जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल के मीटिंग हॉल में हुई बैठक में नगर निगम विद्युत मंडल और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों से जुड़े पेंशनर संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई राहत का लंबित एरियर रहा। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से महंगाई राहत के एरियर का भुगतान रुका हुआ है और पेंशनरों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से एरियर सहित भुगतान जल्द करने की मांग की है।

    पेंशनरों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि 5 लाख रुपए तक के आयुष्मान कार्ड की सुविधा होने के बावजूद कई पेंशनरों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई अस्पतालों में इलाज से इनकार किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। संगठनों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश में भी उत्तर प्रदेश बिहार और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पेंशनरों के लिए बेहतर और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू की जाए ताकि इलाज के लिए उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    बैठक में नेताओं को मिलने वाली पेंशन का मुद्दा भी उठाया गया। पेंशनर संगठनों ने देश में एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू करने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना है कि एक कर्मचारी को जीवनभर एक पेंशन पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है जबकि कई नेताओं को अलग-अलग पदों के आधार पर एक से अधिक पेंशन मिलने की व्यवस्था है। संगठन ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू होने से सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कम हो सकता है।

    पेंशनर संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सितंबर के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके बाद नवंबर में जबलपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी भी है। इसी सम्मेलन में संगठन के आगामी कार्यक्रमों और नेतृत्व से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।

    बैठक में शामिल पेंशनर संगठनों ने सरकार से टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। हालांकि संगठनों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो प्रदेशभर के पेंशनर एकजुट होकर भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और पेंशनर संगठनों के बीच यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

  • 20 सितंबर को भोपाल में दिखेगा RSS का विशाल अनुशासन और संगठन: 30 हजार स्वयंसेवक करेंगे परेड-योग-दंड प्रयोग, होसबाले होंगे मुख्य अतिथि

    20 सितंबर को भोपाल में दिखेगा RSS का विशाल अनुशासन और संगठन: 30 हजार स्वयंसेवक करेंगे परेड-योग-दंड प्रयोग, होसबाले होंगे मुख्य अतिथि


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। आगामी 20 सितंबर को ऐतिहासिक लाल परेड ग्राउंड पर विशाल शाखा संगम आयोजित किया जाएगा जिसमें भोपाल विभाग के करीब 30 हजार स्वयंसेवकों के शामिल होने की संभावना है। बड़ी संख्या में पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवकों की मौजूदगी के कारण इस आयोजन को संघ के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में माना जा रहा है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य रूप से शामिल होंगे और स्वयंसेवकों को मार्गदर्शन देंगे।

    लाल परेड ग्राउंड पर यह आयोजन दोपहर बाद करीब 3 बजे शुरू होगा। शाखा संगम में भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले भोपाल प्रताप भोजपुर तात्या टोपे और विद्युत नगर संगठनात्मक जिलों के स्वयंसेवक एक साथ जुटेंगे। संघ की विभिन्न शाखाओं से जुड़े हजारों स्वयंसेवक इस कार्यक्रम में पूर्ण गणवेश में पहुंचेंगे। इतनी बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण के चलते आयोजन की तैयारियां भी बड़े स्तर पर की जा रही हैं।

    शाखा संगम के दौरान स्वयंसेवकों के अनुशासन और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन भी देखने को मिलेगा। हजारों स्वयंसेवक एक साथ समता यानी परेड करेंगे। इसके अलावा शारीरिक व्यायाम दंड प्रयोग और योग का सामूहिक प्रदर्शन भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। संघ की दृष्टि से भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख नगरों और बस्तियों की शाखाओं का यह एक बड़ा एकत्रीकरण होगा। आयोजन के माध्यम से संगठन की गतिविधियों और समाज जीवन में उसकी भूमिका को भी सामने रखा जाएगा।

    यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के आयोजन से भी जुड़ा हुआ है। संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में अलग अलग गतिविधियों और कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में संघ ने विभिन्न क्षेत्रों में मुहल्ला शाखाओं के गठन और विस्तार पर भी जोर दिया है। भोपाल में आयोजित होने वाले शाखा संगम में इन मुहल्ला शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवकों की भी बड़ी भागीदारी रहने की संभावना है। इसे मुहल्ला स्तर पर संगठन विस्तार के बाद एक बड़े सामूहिक जुटान के रूप में देखा जा रहा है।

    कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी को भी विशेष माना जा रहा है। वे स्वयंसेवकों को संगठन समाज और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। युवाओं से संवाद भी कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। हाल के समय में युवाओं और विशेष रूप से Gen-Z से जुड़े मुद्दों पर देशभर में चर्चा बढ़ी है। ऐसे में संघ भी युवाओं से संवाद और परिचर्चा के माध्यम से उनकी सोच और सामाजिक भागीदारी से जुड़े विषयों पर सक्रिय दिखाई दे रहा है।

    भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर इससे पहले भी संघ का बड़ा आयोजन हो चुका है। कोरोना काल के प्रतिबंध हटने के बाद 11 दिसंबर 2022 को यहां भव्य शारीरिक प्रकटोत्सव आयोजित किया गया था। उस कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए थे और दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे थे। उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और समाज के गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

    अब एक बार फिर 20 सितंबर को लाल परेड ग्राउंड पर होने वाला शाखा संगम भोपाल में संघ का बड़ा संगठनात्मक आयोजन बनने जा रहा है। 30 हजार स्वयंसेवकों की भागीदारी पर केंद्रित इस कार्यक्रम में अनुशासन शारीरिक प्रदर्शन संगठनात्मक एकजुटता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेश प्रमुख रूप से दिखाई देंगे। राजधानी में होने वाले इस विशाल जुटान पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों की भी नजर रहेगी।

  • जिम 365 डिग्री में करोड़ों की टैक्स चोरी का आरोप! CGST की 30 अफसरों वाली टीम ने 5 ठिकानों पर मारा छापा

    जिम 365 डिग्री में करोड़ों की टैक्स चोरी का आरोप! CGST की 30 अफसरों वाली टीम ने 5 ठिकानों पर मारा छापा


    भोपाल। राजधानी भोपाल में टैक्स चोरी के मामले में सेंट्रल जीएसटी यानी CGST ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने जिम 365 डिग्री के पांच अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी कर जांच शुरू की है। शुरुआती जांच में एक करोड़ रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला सामने आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों को जांच के दौरान बिलिंग व्यवस्था में अनियमितताएं मिलने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि जिम में ग्राहकों को बिल जारी नहीं किए जा रहे थे और इसी के जरिए टैक्स चोरी की जा रही थी।

    CGST की कार्रवाई जिम संचालक कुरैशी से जुड़े चूनाभट्टी कोहेफिजा बावड़िया कलां सिंधी कॉलोनी और जेके रोड स्थित प्रतिष्ठानों पर की गई। पांचों स्थानों पर एक साथ पहुंची टीम ने जिम के दस्तावेजों बिलिंग रिकॉर्ड और टैक्स से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच की। कार्रवाई इतनी बड़ी थी कि इसके लिए करीब 30 अधिकारियों की टीम लगाई गई। यह कार्रवाई प्रधान आयुक्त CGST एन पदमश्री के निर्देश पर की गई जबकि एडिशनल कमिश्नर जी मनिगंडा स्वामी के नेतृत्व में जांच दल ने पांचों ठिकानों पर कार्रवाई को अंजाम दिया।

    जांच में सितंबर 2025 के बाद लागू हुए जीएसटी नियमों से जुड़े प्रावधान भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार नियमों में बदलाव के बाद संबंधित संस्थाओं के लिए टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद ऐसे प्रतिष्ठानों को 5 प्रतिशत जीएसटी जमा करना जरूरी था। जांच एजेंसी का आरोप है कि जिम संचालक की ओर से यह टैक्स जमा नहीं किया जा रहा था। इससे पहले ऐसे प्रतिष्ठानों पर 18 प्रतिशत जीएसटी का प्रावधान लागू था लेकिन नियमों में बदलाव के बाद टैक्स की दर में संशोधन किया गया।

    CGST अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि जिम की ओर से ग्राहकों से ली जाने वाली राशि का रिकॉर्ड किस तरह रखा गया और टैक्स का भुगतान नियमों के अनुसार किया गया या नहीं। शुरुआती जांच में एक करोड़ रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला सामने आने के बाद अब विभाग सभी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है। कार्रवाई पूरी होने के बाद टैक्स चोरी की वास्तविक राशि तय की जाएगी और नियमानुसार जिम संचालक से बकाया टैक्स की राशि जमा कराई जा सकती है।

    बताया गया कि CGST की टीम ने कार्रवाई एक दिन पहले शुरू की थी लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद रात के समय जिम 365 डिग्री के प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया था। अगले दिन अधिकारी फिर से संबंधित ठिकानों पर पहुंचकर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि टैक्स चोरी का वास्तविक आंकड़ा कितना है और इसमें किन स्तरों पर नियमों का उल्लंघन किया गया।

    इधर भोपाल के अलावा राजगढ़ जिले के सारंगपुर में भी स्टेट जीएसटी विभाग ने बड़े किराना कारोबारियों के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। टीम ने दुकानों की बिलिंग व्यवस्था बिक्री और जीएसटी अनुपालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। विभाग के पहुंचने की सूचना मिलते ही कुछ दुकानदार दुकानें बंद कर चले गए जबकि कुछ प्रतिष्ठानों पर संचालक मौजूद नहीं मिले।

    सारंगपुर में बिना बिल सामान बेचने और ग्राहकों से जीएसटी सहित राशि लेने के बावजूद बिल जारी नहीं करने की शिकायतों के आधार पर निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान कुछ प्रतिष्ठान अनरजिस्टर्ड भी मिले। अधिकारियों के अनुसार कुछ दुकानों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए से कम पाया गया है और ऐसे मामलों में जीएसटी नियमों के तहत पात्रता की जांच की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी प्रतिष्ठान के अनरजिस्टर्ड मिलने पर तत्काल कार्रवाई तय नहीं होती। निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर नहीं माने इंटर्न डॉक्टर, MP में OPD का बहिष्कार: हमीदिया में इलाज प्रभावित, CM हाउस के रास्ते बंद

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर नहीं माने इंटर्न डॉक्टर, MP में OPD का बहिष्कार: हमीदिया में इलाज प्रभावित, CM हाउस के रास्ते बंद


    भोपाल । मध्यप्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब और तेज हो गया है। सोमवार सुबह से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। पुलिस की कार्रवाई से नाराज इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद रखने का फैसला किया है। भोपाल के साथ ही इंदौर रतलाम और अन्य शहरों के सरकारी अस्पतालों में भी इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का असर देखने को मिल रहा है। ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने से इलाज और जांच के लिए अस्पताल पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है।

    राजधानी भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर से कमला पार्क क्षेत्र की सड़क पर बैठे हुए हैं। डॉक्टरों ने सड़क पर प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर आधिकारिक रूप से बातचीत नहीं होती और स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों में भी पुलिस बल तैनात किया गया है।

    भोपाल के हमीदिया अस्पताल में आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ओपीडी सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। प्रदर्शन के कारण ओपीडी पूरी तरह बंद रही जबकि ऑपरेशन थिएटर के काम का भी बहिष्कार किया जा रहा है। इलाज और जांच के लिए दूरदराज से पहुंचे मरीजों को परेशान होना पड़ा। अस्पताल के तीन गेटों में से केवल गेट नंबर दो से प्रवेश की व्यवस्था की गई है। इमरजेंसी गेट बंद होने के कारण आपातकालीन मरीजों को भी इसी गेट से अस्पताल में प्रवेश करना पड़ रहा है जिससे अस्पताल के बाहर वाहनों और लोगों की आवाजाही बढ़ गई है और ट्रैफिक पर भी दबाव बना हुआ है।

    इधर इंदौर में भी इंटर्न डॉक्टरों ने एमवाय अस्पताल परिसर में विरोध रैली निकालकर आंदोलन को समर्थन दिया। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के विरोध में इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर एकजुट हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। उनका आरोप है कि भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया जिसके विरोध में अब प्रदेश के अलग अलग शहरों में भी प्रदर्शन तेज हो गया है।

    आंदोलन के बीच डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला की अध्यक्षता में वरिष्ठ डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई। बैठक में इंटर्न डॉक्टरों की दो प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई जिसमें स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा शामिल रहा। स्वास्थ्य मंत्री ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री के वापस आने के बाद इस मुद्दे पर फिर से चर्चा किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे केवल मौखिक आश्वासन पर आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उनका साफ कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश मिलने तक उनका विरोध जारी रहेगा। डॉक्टरों ने यह भी तर्क दिया है कि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया गया है इसलिए मध्यप्रदेश सरकार को भी इस दिशा में जल्द निर्णय लेना चाहिए।

    फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी है लेकिन आंदोलन समाप्त होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक ओर सरकार समाधान के लिए बातचीत कर रही है तो दूसरी ओर इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में आंदोलन का सीधा असर सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है और लोगों की नजर अब सरकार और डॉक्टरों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हुई है।

  • भोपाल में 8 हजार कारोबारियों को नोटिस, 190 दुकानें सील: चौथे दिन बदली तस्वीर, मामला सुप्रीम कोर्ट में

    भोपाल में 8 हजार कारोबारियों को नोटिस, 190 दुकानें सील: चौथे दिन बदली तस्वीर, मामला सुप्रीम कोर्ट में


    भोपाल । राजधानी भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई अचानक धीमी पड़ गई है। तीन दिनों तक लगातार कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया लेकिन चौथे दिन शहर में एक भी सीलिंग नहीं हुई। कार्रवाई रुकने के साथ ही छोटे व्यापारियों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अलग-अलग कार्रवाई को लेकर विवाद और तेज हो गया है। उधर रहवासियों नगर निगम और नगरीय प्रशासन के अधिकारी अपने-अपने पक्ष के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

    भोपाल में 31 अगस्त से शुरू हुई कार्रवाई के पहले दिन नगर निगम ने 109 प्रतिष्ठानों को बंद कराया था। इसके बाद 1 सितंबर को 61 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की गई जबकि 2 सितंबर को केवल 20 प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इस तरह तीन दिनों में कुल 190 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। लेकिन चौथे दिन 3 सितंबर को शहर में कहीं भी सीलिंग नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि टीम हाईकोर्ट में जमीन से जुड़े मामलों में व्यस्त रही जिसके कारण सीलिंग की कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद कार्रवाई में आई इस अचानक नरमी को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

    मामले में रहवासियों ने नगर निगम की कार्रवाई पर पक्षपात का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि अरेरा कॉलोनी के जिन बड़े मॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर रहवासियों ने शिकायतें की थीं उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जबकि छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। इसी आधार पर रहवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज पेश कर अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में छोटे और बड़े प्रतिष्ठानों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

    इस बीच नगरीय प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी दिल्ली पहुंच गए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार और निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने इस मामले में वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों से भी चर्चा की है। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में नगर निगम कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट और आगे की स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

    सीलिंग कार्रवाई के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी माना है कि इस कार्रवाई से भोपाल के व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा रास्ता तलाशने का प्रयास कर रही है जिससे कानून का पालन भी हो और आम लोगों तथा व्यापारियों को अनावश्यक नुकसान भी न उठाना पड़े। मंत्री ने भोपाल के मास्टर प्लान को जल्द जारी करने की बात भी कही है। ऐसे में सीलिंग विवाद के बीच मास्टर प्लान को लेकर सरकार का अगला फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नगर निगम अब तक एक महीने के भीतर 8 हजार से अधिक दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को नोटिस जारी कर चुका है। कई स्थानों पर 24 घंटे के भीतर रहवासी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद कई दुकानदारों ने प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद करने के पोस्टर और बैनर भी लगा दिए।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ा हुआ है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और हाईकोर्ट से दुकानदारों को मिले राहत आदेश भी निरस्त कर दिए थे। अब 15 सितंबर की सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि भोपाल में सीलिंग कार्रवाई दोबारा तेज होगी या सरकार और प्रभावित व्यापारियों के लिए कोई नया समाधान निकाला जाएगा। फिलहाल 190 सीलिंग के बाद चौथे दिन की जीरो कार्रवाई ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।

  • मध्यप्रदेश में कान्हा की भक्ति का महासंगम: 7500+ मंदिरों में आज गूंजेगा जय श्रीकृष्ण

    मध्यप्रदेश में कान्हा की भक्ति का महासंगम: 7500+ मंदिरों में आज गूंजेगा जय श्रीकृष्ण

    भोपाल। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को पूरा मध्यप्रदेश कृष्ण भक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की ओर से प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर श्रीकृष्ण पर्व का आयोजन किया जा रहा है। घर-घर गोकुल घर-घर गोपाल की संकल्पना के साथ 55 जिलों के 111 स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दौरान प्रदेश के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया है और श्रद्धालुओं के लिए भव्य दर्शन की व्यवस्थाएं की गई हैं।

    श्रीकृष्ण पर्व के दौरान 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं भक्ति लोक परंपराओं और जीवन दर्शन पर आधारित प्रस्तुतियां देंगे। नृत्य-नाटिका रासलीला भजन लोकगायन और शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन के अलग-अलग प्रसंग मंच पर जीवंत किए जाएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध लोक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी व्यापक मंच प्रदान करना है।

    मुख्यमंत्री निवास पर श्रीकृष्ण पर्व का विशेष आयोजन आकर्षण का केंद्र रहेगा। यहां 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। जन्मोत्सव के दौरान मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों को माखन-मिश्री लड्डू गोपाल की प्रतिमा और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर केंद्रित पुस्तक भेंट करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री महू के जानापाव पहुंचकर परशुराम-श्रीकृष्ण लोक का भूमिपूजन करेंगे। यहां भगवान परशुराम द्वारा श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका और प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

    भोपाल में इस्कॉन पटेल नगर हरे कृष्ण लैंड रायसेन रोड पर जन्माष्टमी महोत्सव भव्य रूप से मनाया जाएगा। यहां करीब एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। मंदिर को जैसलमेर की पारंपरिक थीम पर सजाया जा रहा है और थाईलैंड से मंगाए गए विशेष ऑर्किड फूलों का उपयोग भी किया जाएगा। हरे कृष्ण महामंत्र का निरंतर कीर्तन होगा जबकि श्रीकृष्ण कथा और रुक्मिणी कल्याणम् नामक भक्तिमय नाट्य प्रस्तुति प्रमुख आकर्षण रहेगी।

    उज्जैन के नारायणा धाम में पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन के दौरान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता गुरु सांदीपनि आश्रम माखन चोरी जन्म और बाल लीलाओं से लेकर गीता उपदेश तक के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा और श्रीकृष्ण द्वारा 64 कलाओं व 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त करने की परंपरा को नृत्य-नाटिका के जरिए जीवंत किया जाएगा।

    पन्ना अमझेरा और महिदपुर सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भी श्रीकृष्ण के अलग-अलग प्रसंगों पर आधारित कार्यक्रम होंगे। मथुरा प्रवेश गोवर्धन धारण सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंग लोक प्रस्तुतियों और नृत्य-नाटिकाओं के माध्यम से मंचित किए जाएंगे। ग्वालियर रायसेन इंदौर गुना छतरपुर शिवपुरी झाबुआ नीमच मंदसौर और मुरैना सहित कई जिलों में शाम को विशेष कार्यक्रम होंगे।

    जन्माष्टमी की रात भोपाल के इस्कॉन मंदिरों गोपाल मंदिर बांके बिहारी मंदिर बिड़ला मंदिर करुणा धाम और अन्य कृष्ण मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंदिरों में विशेष श्रृंगार अभिषेक भजन-कीर्तन और जन्मोत्सव के आयोजन होंगे। कुल मिलाकर इस बार श्रीकृष्ण पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत लोक कला और नई पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों से जोड़ने का एक बड़ा प्रयास भी बनेगा।

  • 190 प्रतिष्ठान बंद कराने का दावा और जमीनी हकीकत कुछ और: भोपाल की सीलिंग कार्रवाई में खुली दुकानों ने खड़े किए कई सवाल

    190 प्रतिष्ठान बंद कराने का दावा और जमीनी हकीकत कुछ और: भोपाल की सीलिंग कार्रवाई में खुली दुकानों ने खड़े किए कई सवाल


    भोपाल । भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई लगातार चर्चा में बनी हुई है। नगर निगम जहां बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर कमर्शियल गतिविधियां बंद कराने का दावा कर रहा है वहीं जमीनी तस्वीर कुछ अलग ही दिखाई दे रही है। शहर के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी समेत कई स्थानों पर ऐसे मामले सामने आए हैं जहां एक ही बिल्डिंग में कुछ दुकानों के बाहर व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने का पोस्टर लगा हुआ है जबकि ठीक बगल की दुकानें खुली मिलीं। इस स्थिति ने नगर निगम की कार्रवाई की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    नगर निगम का दावा है कि अब तक करीब 190 प्रतिष्ठानों ने स्वेच्छा से अपनी व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी हैं। बंद किए गए प्रतिष्ठानों के बाहर यह सूचना भी लगाई गई है कि नगर निगम के आदेश के अनुसार भवन में कमर्शियल गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। हालांकि कई जगह इस दावे और वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई दिया। अरेरा कॉलोनी में एक तीन मंजिला भवन के ग्राउंड फ्लोर पर दो दुकानों के शटर बंद मिले और उन पर बंदी का पोस्टर लगा था लेकिन उसी के पास एक अन्य दुकान खुली हुई दिखाई दी। इसी तरह एक टेलरिंग शॉप के बाहर कारोबार बंद करने का बैनर लगा था लेकिन भवन का गेट खुला मिला जिससे कार्रवाई को लेकर सवाल उठे।

    एक अन्य मामला पहले होटल के रूप में संचालित भवन का है जिसे कार्रवाई के बाद बंद कराया गया। इसके बाद वहां निज निवास का बोर्ड लगा दिया गया। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि कार्रवाई के बाद संबंधित भवनों की वास्तविक स्थिति की निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है। यही वजह है कि नगर निगम की सीलिंग और नोटिस कार्रवाई अब व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी बहस का विषय बन गई है।

    शहर के 10 नंबर मार्केट में भी कार्रवाई को लेकर भेदभाव के आरोप सामने आए हैं। कुछ प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर बंद कराया गया जबकि आसपास कई अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलती दिखाई दीं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने वाले पक्ष का कहना है कि कार्रवाई छोटे कारोबारियों तक सीमित दिखाई दे रही है जबकि बड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ समान स्तर पर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी साक्ष्यों के साथ अपनी बात रखने की तैयारी की जा रही है।

    कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों का गुस्सा भी लगातार बढ़ रहा है। बीते दिनों सीलिंग कार्रवाई के विरोध में हजारों व्यापारियों ने प्रदर्शन किया और कई दुकानों को बंद रखा गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान शहर के प्रमुख इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। इसके बाद कोलार रोड क्षेत्र में भी व्यापारी संगठनों के आह्वान पर बाजार बंद रखा गया। व्यापारियों का कहना है कि अचानक की जा रही कार्रवाई से उनका कारोबार और रोजी रोजगार प्रभावित हो रहा है।

    दरअसल यह पूरा मामला आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद नगर निगम पर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दबाव है। इसी कारण शहर में नोटिस और सीलिंग की प्रक्रिया तेज की गई है। रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती कमर्शियल गतिविधियों से ट्रैफिक शोर भीड़ और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम की कार्रवाई सभी प्रतिष्ठानों पर समान रूप से होगी या फिर बंदी के पोस्टर और खुली दुकानों का विरोधाभास इस पूरे अभियान पर सवाल खड़े करता रहेगा।

  • फर्जी IAS मामले में नया VIDEO वायरल: विधानसभा में प्रोबेशनर होने का दावा, कथित ठगी के बाद अब सहेलियों की भूमिका पर सवाल

    फर्जी IAS मामले में नया VIDEO वायरल: विधानसभा में प्रोबेशनर होने का दावा, कथित ठगी के बाद अब सहेलियों की भूमिका पर सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में फर्जी IAS बनकर कथित तौर पर लोगों को ठगने के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़े नए VIDEO सामने आने के बाद पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। अशोकनगर के चंदेरी से शुरू हुए इस मामले की कड़ियां अब भोपाल तक पहुंच चुकी हैं और विधानसभा परिसर में बनाए गए एक VIDEO ने तृप्ति की कथित फर्जी अफसर वाली पहचान पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। VIDEO में तृप्ति अपनी दो सहेलियों के साथ विधानसभा परिसर के बाहर घूमती और ब्लॉग बनाती नजर आ रही है। लाल साड़ी में दिखाई दे रही तृप्ति को उसकी एक सहेली सीनियर अधिकारी बताती है जबकि तृप्ति खुद को प्रोबेशनर बताते हुए मजाक में कहती नजर आती है कि उनकी हरकतों को देखकर कोई उन्हें अधिकारी नहीं मानेगा।

    विधानसभा परिसर के बाहर शूट किए गए VIDEO में तृप्ति की सहेली कहती है कि वे विधानसभा अटेंड करने आई हैं और उन्होंने अपना पहला ब्लॉग बनाने का फैसला किया है। बातचीत के दौरान तृप्ति और उसकी सहेलियों के बीच हंसी मजाक भी होता है। एक सहेली कहती है कि वे दोनों प्रोबेशनर्स हैं जबकि तृप्ति पहले से उनकी सीनियर हैं। तृप्ति भी इस बातचीत में खुद को सीनियर बताते हुए अपनी सहेलियों के साथ दोस्ताना व्यवहार करने की बात कहती है। यह VIDEO सामने आने के बाद पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या ऐसे वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों का इस्तेमाल लोगों के बीच खुद को असली सरकारी अधिकारी साबित करने के लिए किया जाता था।

    तृप्ति पर आरोप है कि वह अलग अलग जगहों पर खुद को IAS अधिकारी और मध्य प्रदेश पर्यटन निगम की बड़ी अधिकारी बताकर लोगों का भरोसा जीतती थी। चंदेरी में उसके खिलाफ चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 9 लाख 80 हजार रुपए लेने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने तृप्ति और उसके भाई सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच के दौरान भोपाल में भी उसके खिलाफ 39 लाख 17 हजार रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया। शिकायत के अनुसार एक व्यक्ति से होटल और रिसॉर्ट की संपत्ति लीज पर दिलाने के नाम पर 35 लाख 30 हजार रुपए और नौकरी लगवाने के नाम पर 3 लाख 87 हजार रुपए लिए गए।

    जांच में यह भी सामने आया है कि तृप्ति के पास कथित तौर पर सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री मौजूद थी। पुलिस को CBI लिखा पहचान पत्र और सरकारी लेटरहेड जैसे दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा भारत सरकार लिखा एक इनोवा वाहन भी पुलिस जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन चीजों का इस्तेमाल लोगों पर सरकारी अधिकारी होने का प्रभाव डालने के लिए किया जाता था या नहीं।

    पुलिस जांच में मंत्रालय और IAS अधिकारियों के नामों की सूची मिलने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि तृप्ति जरूरत पड़ने पर अधिकारियों के नाम लेकर खुद को उनके करीब बताती थी जिससे लोगों का भरोसा आसानी से जीता जा सके। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इस कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था और कितने लोग इसके प्रभाव में आए।

    भोपाल के मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो होटल रिसॉर्ट की लीज दिलाई गई और न ही नौकरी लग सकी। पैसे वापस मांगने पर कथित तौर पर केवल 1 लाख रुपए लौटाए गए जबकि बाकी रकम को लेकर विवाद बढ़ने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले में तृप्ति के भाई और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    विधानसभा परिसर के VIDEO सामने आने के बाद अब पुलिस की नजर तृप्ति के पूरे नेटवर्क पर है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि उसकी सहेलियों और अन्य सहयोगियों को कथित फर्जी पहचान के बारे में कितनी जानकारी थी। चंदेरी से भोपाल तक फैले मामलों और विधानसभा परिसर के VIDEO ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस पूछताछ और जांच से इस कथित फर्जी IAS नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।