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  • भोपाल संभाग के युवाओं की रीवा यात्रा शुरू मुकुंदपुर सफारी से पुरवा प्रपात तक देखेंगे पर्यटन की खूबसूरती

    भोपाल संभाग के युवाओं की रीवा यात्रा शुरू मुकुंदपुर सफारी से पुरवा प्रपात तक देखेंगे पर्यटन की खूबसूरती


    भोपाल । भोपाल से रीवा की यात्रा पर निकले युवाओं के दल को उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा मध्यप्रदेश सरकार की मां तुझे सलाम योजना के तहत आयोजित की गई है। दो दिवसीय इस भ्रमण के दौरान भोपाल संभाग के युवा रीवा जिले के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों को करीब से जानेंगे। इस यात्रा का आयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से किया गया है। दल में भोपाल के साथ सीहोर रायसेन विदिशा और राजगढ़ जिले के युवा शामिल हैं। यात्रा का उद्देश्य युवाओं को प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थलों और उनकी सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक विशेषताओं से परिचित कराना है।

    युवाओं को रीवा भ्रमण के दौरान महामृत्युंजय मंदिर संग्रहालय मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी पुरवा प्रपात और बसामन मामा गौ अभ्यारण्य जैसे स्थानों पर ले जाया जाएगा। इन स्थलों के माध्यम से युवाओं को रीवा की धार्मिक परंपरा प्राकृतिक संपदा वन्यजीव और स्थानीय पर्यटन की विविधता को समझने का अवसर मिलेगा। रीवा संभाग लंबे समय से अपने जलप्रपात जंगलों और ऐतिहासिक तथा धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। इसी वजह से क्षेत्र में पर्यटन को आर्थिक गतिविधियों और रोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।

    यात्रा को रवाना करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश और विशेष रूप से विंध्य क्षेत्र में पर्यटन के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। रीवा संभाग प्राकृतिक सुंदरता से समृद्ध है। यहां मौजूद वन जलप्रपात धार्मिक स्थल और वन्यजीव क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने मैहर चित्रकूट और अमरकंटक जैसे धार्मिक स्थलों के साथ मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी पन्ना नेशनल पार्क संजय टाइगर रिजर्व बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और संजय दुबरी अभ्यारण्य का भी उल्लेख किया। ऐसे पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं और कनेक्टिविटी के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर क्षेत्रीय विकास को गति मिल सकती है।

    रीवा में पर्यटन को बढ़ावा देने में बेहतर कनेक्टिविटी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा सड़क और रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही हवाई संपर्क में भी सुधार हुआ है। कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटकों के लिए रीवा पहुंचना आसान हो रहा है और आसपास के पर्यटन स्थलों को भी एक साथ देखने की संभावना बढ़ रही है। सप्ताहांत में आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह सुविधा उपयोगी हो सकती है।

    उप मुख्यमंत्री ने रीवा के 750 मेगावाट क्षमता वाले सोलर प्लांट का भी जिक्र किया। उन्होंने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में बड़ी संख्या में गौवंश के संरक्षण और प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। उनके मुताबिक ऐसे प्रयास पर्यटन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़े हैं।

    कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विकास में युवा पीढ़ी की भागीदारी महत्वपूर्ण है। यात्रा के माध्यम से युवाओं को मध्यप्रदेश की प्राकृतिक सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। संभागीय खेल अधिकारी एमके धौलपुरी के अनुसार दो दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में युवाओं को रीवा के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी भी रही।

  • फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट

    फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट


    भोपाल। भोपाल और ग्वालियर से जुड़े फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच में अब एजेंट नेटवर्क की कड़ियां सामने आने लगी हैं। बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट हासिल करने के मामले में एसटीएफ ने पांचवीं गिरफ्तारी की है। भोपाल से पासपोर्ट एजेंट नसीम अख्तर को पकड़ा गया है। पूछताछ में सामने आया है कि वह 20 से ज्यादा पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में शामिल रहा। जांच के दौरान कच्छ और नागपुर के मठों के पतों का इस्तेमाल कर भोपाल से करीब 25 से 30 पासपोर्ट बनवाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    एसटीएफ के मुताबिक इस नेटवर्क में पासपोर्ट बनवाने के लिए लोगों से करीब 20 हजार रुपए तक लिए जाते थे। पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर आवेदन से लेकर पासपोर्ट तैयार होने तक की ज्यादातर प्रक्रिया एजेंट संभालता था। इसी कड़ी में नसीम अख्तर की भूमिका सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसी उन सभी पासपोर्ट और उनमें इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है जिनमें नसीम की भूमिका बताई गई है।

    पूछताछ में नसीम ने बताया कि वह वर्ष 2016 से भोपाल के एमपी नगर इलाके में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करता था। इसी कारोबार के दौरान वह पासपोर्ट संबंधी काम से जुड़ गया और बाद में पासपोर्ट एजेंट के तौर पर काम करने लगा। इसी दौरान भोपाल पासपोर्ट कार्यालय के बाहर उसकी मुलाकात मित्यानंद भिक्षु उर्फ रेयाल चौधरी भिक्षु से हुई। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और कथित तौर पर पासपोर्ट बनवाने का काम शुरू हुआ।

    जांच के अनुसार मित्यानंद भिक्षु नसीम को पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों के नाम और दस्तावेज उपलब्ध कराता था। नसीम उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करता था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों की उत्पत्ति कहां से हुई और आवेदन में दर्ज पहचान तथा वास्तविक पहचान के बीच कितना अंतर था।

    नसीम के खिलाफ नागपुर में पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। एसटीएफ इस पुराने मामले और वर्तमान नेटवर्क के बीच किसी संभावित कड़ी की भी पड़ताल कर रही है।

    एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक इस मामले में नसीम से पहले प्रियान चौधरी जय चौधरी रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब नसीम पांचवां गिरफ्तार आरोपी है। जांच के लिए एसटीएफ की छह टीमें कई राज्यों में दबिश और पूछताछ कर रही हैं। करीब 25 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि रियाल करीब 10 साल पहले भारत आया था। आरोप है कि उसने 2021-22 के आसपास बौद्ध भिक्षुओं के नाम पर नेटवर्क तैयार करना शुरू किया। इसके बाद साथियों के भारतीय नाम से दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हीं के आधार पर पासपोर्ट बनवाए गए।

    मामले की जांच में कई ऐसे पासपोर्ट धारकों की जानकारी सामने आई है जिनके वास्तविक नाम और पासपोर्ट में दर्ज नाम अलग पाए गए हैं। यानी दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर पहचान बदलकर पासपोर्ट हासिल किए गए। एसटीएफ अब इन पासपोर्ट धारकों के विदेश यात्रा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का खुलासा होने की संभावना है।

  • विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क

    विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क


    भोपाल। भोपाल में गणपति विसर्जन का दौर शुरू होने वाला है लेकिन विसर्जन घाटों तक पहुंचने वाले कई प्रमुख रास्ते अभी भी बदहाल हैं। 22 सितंबर से गणपति विसर्जन शुरू होगा जबकि 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के मौके पर बड़े चल समारोह निकलेंगे। 26 सितंबर तक विसर्जन का सिलसिला जारी रहेगा। ऐसे में बड़ी झांकियों ट्रकों और जुलूसों की आवाजाही के दौरान सड़कों पर मौजूद गड्ढे और उखड़ी गिट्टी परेशानी बढ़ा सकती है। लोक निर्माण विभाग ने सड़कों के मेंटेनेंस के लिए 30 सितंबर की डेडलाइन तय की है लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण स्थायी पैचवर्क का काम प्रभावित हो रहा है।

    भोपाल में पीडब्ल्यूडी की करीब 174 किलोमीटर सड़कों का मेंटेनेंस परफॉर्मेंस गारंटी के तहत संबंधित ठेकेदारों को करना है। फिलहाल बड़े गड्ढों में गिट्टी और छोटे गड्ढों में कोल्ड मिक्स डालकर अस्थायी सुधार किया जा रहा है। हालांकि बारिश और लगातार वाहनों की आवाजाही के कारण यह सामग्री ज्यादा समय तक टिक नहीं पा रही है। स्थायी पैचवर्क के लिए हॉट मिक्स प्लांट से काम कराने की जरूरत है जिसके लिए करीब एक सप्ताह तक मौसम साफ रहना जरूरी बताया जा रहा है।

    पुराने शहर से कमलापति घाट की ओर जाने वाले मार्ग पर भी कई जगह सड़क की हालत खराब है। जिंसी से मोती मस्जिद के बीच करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में दर्जनों बड़े गड्ढे बताए जा रहे हैं। वहीं प्रोफेसर कॉलोनी से गायत्री मंदिर तक करीब 6.50 किलोमीटर के रास्ते पर भी सड़क सुधार का काम बाकी है। भदभदा घाट की ओर जाने वाले लिंक रोड 3 मुख्य मार्ग 2 नेहरू नगर तुलसी नगर और भदभदा नीलबड़ सीहोर मार्ग पर कई जगह गिट्टी उखड़ चुकी है।

    शाहपुरा और कलियासोत क्षेत्र के विसर्जन रूट पर भी अरेरा हिल्स गुलमोहर इकोसिटी दानिशकुंज बावड़ियाकलां और कलियासोत से चेतक ब्रिज तक सड़क सुधार की जरूरत है। अयोध्या बायपास करोंद पलासी बंगरसिया और बावड़ियाकलां मार्ग पर फिलहाल गड्ढों में गिट्टी डाली जा रही है।

    इधर प्रेमपुरा घाट के विसर्जन मार्ग पर मेट्रो निर्माण की बैरिकेडिंग भी चुनौती बनी हुई है। सड़क के एक हिस्से में बैरिकेडिंग होने के कारण करीब 4.5 मीटर चौड़ा रास्ता ही बचा है। गुरुवार शाम एसीपी ट्रैफिक अजय बाजपेयी ने डिपो से भदभदा चौराहे के बीच सड़क की चौड़ाई इंचीटेप से नापी। बड़ी झांकियों और ट्रकों की आवाजाही के लिए दोनों तरफ करीब 6-6 मीटर जगह की जरूरत बताई गई है। इसके बाद मेट्रो से बैरिकेड्स पीछे करने के निर्देश दिए गए।

    बारिश ने समस्या और बढ़ा दी है। गुरुवार शाम हुई बारिश के बाद बैरागढ़ मेन रोड स्थित विसर्जन घाट के पहुंच मार्ग पर पानी और कीचड़ जमा हो गया। ऐसे में प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विसर्जन से पहले प्रमुख रास्तों को सुरक्षित और सुगम बनाने की है। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के अनुसार मेंटेनेंस का काम शुरू है और प्रमुख सड़कों के गड्ढे भरे जा रहे हैं। हालांकि स्थायी सुधार के लिए मौसम साफ होना जरूरी है।

  • महावर-सिंदूर वाला लाल पानी कुत्तों को रखता है दूर? भोपाल में वायरल देसी नुस्खे का हुआ रियलिटी चेक

    महावर-सिंदूर वाला लाल पानी कुत्तों को रखता है दूर? भोपाल में वायरल देसी नुस्खे का हुआ रियलिटी चेक


    भोपाल। भोपाल की कई गलियों में इन दिनों घरों के बाहर लाल पानी से भरी प्लास्टिक की बोतलें टंगी नजर आ रही हैं। लोगों के बीच मान्यता है कि इन बोतलों को गेट के बाहर लटकाने से आवारा कुत्ते घर के आसपास नहीं आते और गंदगी से भी राहत मिलती है। कुछ लोग इसे पुराना देसी नुस्खा बताते हैं तो कुछ इसे बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखते हैं। हालांकि इस दावे के पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक आधार सामने नहीं आया है।

    नेहरू नगर में रहने वाली अमाया यादव बताती हैं कि उन्होंने बचपन से ही कई घरों के बाहर लाल पानी की बोतलें टंगी देखी हैं। इसी वजह से वह भी अपने घर के बाहर ऐसी बोतल लगाती हैं। उनके मुताबिक पानी में महावर सिंदूर या लाल रंग मिलाकर बोतल तैयार की जाती है और फिर इसे घर के गेट के बाहर टांग दिया जाता है। लोगों का मानना है कि इससे आवारा कुत्ते घर के आसपास आने से बचते हैं।

    भोपाल के कई इलाकों में यह तरीका देखने को मिल रहा है। अयोध्या बायपास से लेकर अवधपुरी नेहरू नगर रचना नगर गौतम नगर इंद्रपुरी बावड़ियाकलां कोलार कटारा और लालघाटी तक कई घरों के बाहर लाल पानी वाली बोतलें नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि कई लोग इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं जानते। उन्हें बस इतना पता है कि आसपास के दूसरे घरों में ऐसी बोतलें लगी हैं और इसलिए उन्होंने भी अपने घर के बाहर इसे लगा लिया।

    निशि पटेल के मुताबिक लोगों में यह धारणा है कि कुत्तों को लाल रंग इंसानों की तरह साफ दिखाई नहीं देता। उनका मानना है कि हवा में हिलती हुई बोतल और उसमें दिखाई देने वाला प्रतिबिंब कुत्तों को असहज करता है और वे घर से दूर चले जाते हैं। कुछ बुजुर्ग इस परंपरा को बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव से भी जोड़ते रहे हैं।

    दीपांशी पटेल भी बताती हैं कि कई लोगों को इस नुस्खे की असली वजह मालूम नहीं है। उनका कहना है कि एक घर के बाहर बोतल देखकर दूसरे लोग भी इसे अपनाने लगते हैं और धीरे धीरे यह पूरे मोहल्ले में आम हो जाता है। कुछ लोगों को लगता है कि लाल पानी और रोशनी के प्रतिबिंब के कारण कुत्ते डर सकते हैं।

    लेकिन वेटरनरी स्पेशलिस्ट डॉ. ब्रजेश गुप्ता इस दावे को वैज्ञानिक आधार वाला नहीं मानते। उनका कहना है कि कुत्ते इंसानों की तरह सभी रंगों को अलग अलग तरीके से नहीं देख पाते। उनके अनुसार कुत्तों की रंग पहचान सीमित होती है और वे नीले तथा पीले रंग को अपेक्षाकृत बेहतर देख सकते हैं। ऐसे में सिर्फ लाल रंग की बोतल देखकर कुत्तों के भागने का कोई पुख्ता वैज्ञानिक तर्क नहीं है।

    इस दावे की हकीकत जानने के लिए भोपाल में रियलिटी चेक भी किया गया। रिपोर्टर ने कुछ इलाकों में कुत्तों के सामने लाल पानी से भरी बोतल रखकर देखा। इस दौरान कुत्तों पर इसका कोई खास असर नजर नहीं आया। न तो वे बोतल देखकर वहां से भागे और न ही उन्होंने पानी रखे जाने पर किसी तरह की आक्रामक प्रतिक्रिया दी। इससे साफ है कि लाल पानी की बोतल को कुत्तों को दूर रखने का पक्का वैज्ञानिक उपाय मानने से पहले उसके दावे और वास्तविक असर में फर्क समझना जरूरी है।

  • ढाई लाख दीपों से जगमगाएगा भोपाल शहर से गांव तक सेवा संकल्प की रोशनी 31 अस्पतालों में रक्तदान शिविर भी

    ढाई लाख दीपों से जगमगाएगा भोपाल शहर से गांव तक सेवा संकल्प की रोशनी 31 अस्पतालों में रक्तदान शिविर भी


    भोपाल। भोपाल में गुरुवार की शाम सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ के अवसर पर आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान राजधानी के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब ढाई लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। शहर में 17 और ग्रामीण क्षेत्र में 11 स्थानों पर होने वाला यह सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन केवल रोशनी का आयोजन नहीं होगा बल्कि सेवा समर्पण सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण का संदेश भी देगा। ऐतिहासिक स्मारकों से लेकर प्रमुख चौराहों घाटों मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों तक दीपों की रोशनी नजर आएगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में देवस्थलों तालाबों और सामुदायिक परिसरों को भी दीपों से सजाया जाएगा।

    राजधानी के अलग अलग हिस्सों में होने वाले इस आयोजन के जरिए शहर के गौरवशाली इतिहास आस्था शौर्य और आधुनिक विकास की झलक भी देखने को मिलेगी। सामूहिक रूप से जलने वाले हजारों दीप लोगों को सेवा और सकारात्मकता की साझा भावना से जोड़ने का प्रयास करेंगे। हर वार्ड में कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है जिससे अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

    ग्रामीण क्षेत्र भी इस अभियान का अहम हिस्सा रहेगा। ग्राम पंचायत चंदेरी के रामदेव बाबा मंदिर प्रांगण से लेकर अरेड़ी के अमृत सरोवर तक कई स्थानों पर दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। ईमलिया में तालाब मंदिर के पास पाटनिया में हनुमान मंदिर ईंटखेड़ी सड़क पर नदी के पास अमोनी में पटेल बाबा मंदिर और सिकंदराबाद के सामुदायिक शेड में भी दीप जलाए जाएंगे। इसके अलावा बगरोदा बरखेड़ी बाजयाफ्त बरखेड़ा बोन्दर और फंदा कलां सहित कई स्थानों पर भी सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन होगा। इन आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक एकता सामूहिक सहभागिता और ग्राम विकास का संदेश पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

    सेवा संकल्प अभियान के तहत केवल दीप प्रज्ज्वलन ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य और रक्तदान से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। भोपाल जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक रक्तदान शिविरों का व्यापक अभियान चलेगा। इसके लिए जिले के 31 अस्पतालों और ब्लड सेंटरों को चिन्हित किया गया है। जिला चिकित्सालय भोपाल के अलावा शहर के कई निजी अस्पतालों मेडिकल संस्थानों और ब्लड सेंटरों में रक्तदान शिविर आयोजित होंगे। अभियान के दौरान लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सके।

    स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अन्य कार्यक्रम भी अभियान का हिस्सा होंगे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरखेड़ी देव में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक भीमनगर में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण और गोदभराई कार्यक्रम होगा। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर आवश्यक टीकाकरण भी किया जाएगा।

    नरेला विधानसभा क्षेत्र में दीप प्रज्ज्वलन का विशेष आयोजन होगा। यहां सवा लाख दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मंत्री विश्वास सारंग के सरकारी आवास पर भी दीपों से विशेष सजावट की जाएगी। यहां 25 फीट ऊंचे दीप स्तंभ में 9125 दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। इसके साथ ही सेवा और समर्पण के 25 वर्ष विषय पर विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

    इस तरह भोपाल में होने वाला दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत को सामूहिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास करेगा। शहर से गांव तक जलने वाले दीप सामाजिक एकता स्वास्थ्य सेवा और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के साथ अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाएंगे।

  • PHE में फाइलों की खींचतान से ठप हुआ भुगतान ठेकेदारों ने ढोल नगाड़ों के साथ किया प्रदर्शन अब बिल लगाने के निर्देश

    PHE में फाइलों की खींचतान से ठप हुआ भुगतान ठेकेदारों ने ढोल नगाड़ों के साथ किया प्रदर्शन अब बिल लगाने के निर्देश


    भोपाल । भोपाल में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी PHE के प्रमुख अभियंता कार्यालय जल भवन के बाहर बुधवार को ठेकेदारों ने ढोल नगाड़ों के साथ धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया। एकल नल जल योजना से जुड़े ठेकेदार लंबे समय से लंबित भुगतान की मांग कर रहे हैं। ठेकेदारों का कहना है कि काम पूरा करने के बाद भी उनके बिलों का भुगतान अटका हुआ है। उनका आरोप है कि मामले की जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद भुगतान की समस्या का समाधान नहीं हुआ जिसके बाद उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

    इस पूरे मामले में विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच फाइलों के मूवमेंट को लेकर चल रहा विवाद भी सामने आया है। प्रमुख अभियंता संजय अंधवान और अपर संचालक वित्त अंजू सिंह के बीच वित्तीय फाइलों को लेकर टकराव की स्थिति बताई जा रही है। इसी वजह से भुगतान से जुड़ी कई फाइलों की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात सामने आई है। अधिकारियों के बीच फाइलों को लेकर खींचतान का असर ठेकेदारों के भुगतान पर पड़ा और जून 2026 से लगाए गए कई बिल अब तक लंबित बताए जा रहे हैं।

    अपर संचालक वित्त अंजू सिंह की विभाग में करीब दो महीने पहले पदस्थापना हुई थी। इसके बाद उन्होंने भुगतान से जुड़ी फाइलों को लेकर अधीनस्थ कर्मचारियों और बाद में PHE के ईएनसी से स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद की स्थिति सामने आई। विभाग की ओर से इसी महीने अपर संचालक वित्त को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।

    नोटिस में एसएनएस स्पर्श प्रणाली के जरिए होने वाले भुगतान की प्रगति का भी उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि 5 सितंबर को अपर मुख्य सचिव ने भुगतान व्यवस्था की समीक्षा की थी। जिलों से मांग आने के बावजूद समय पर राशि जारी नहीं होने से भुगतान में देरी की बात नोटिस में कही गई। न्यायालयीन मामलों में गणना पत्रक के सत्यापन और अनुमोदन से जुड़ी प्रक्रिया में देरी का भी उल्लेख किया गया और तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया था।

    दूसरी ओर अपर संचालक वित्त की ओर से भी फाइलों के संचालन को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। उनकी ओर से ई फाइल में भुगतान प्रक्रिया और बजट आवंटन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कुछ फाइलों में वित्तीय पोर्टल के इस्तेमाल और अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

    प्रदर्शन के बाद अब ठेकेदारों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। जल निगम के एमडी वीएस चौधरी कोलसानी ने कहा कि विभाग के पास बजट उपलब्ध है और जिन ठेकेदारों के बिल लंबित हैं उनके बिल लगाए जाएं ताकि भुगतान की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपर संचालक वित्त और ईएनसी के बीच फाइलों के मूवमेंट को लेकर टकराव की स्थिति है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब नजर इस बात पर है कि लंबित बिलों की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है। ठेकेदारों का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि विभागीय स्तर पर वित्तीय फाइलों की प्रक्रिया में देरी का सीधा असर काम करने वाले ठेकेदारों के भुगतान पर पड़ रहा है। अब विभाग के सामने चुनौती लंबित बिलों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की भी है।

  • UCC के विरोध में भोपाल पहुंचे ओवैसी RSS पर लगाया एजेंडा चलाने का आरोप भाजपा विधायक को दी चुनौती

    UCC के विरोध में भोपाल पहुंचे ओवैसी RSS पर लगाया एजेंडा चलाने का आरोप भाजपा विधायक को दी चुनौती


    नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी मंगलवार को भोपाल पहुंचे। उन्होंने सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए समान नागरिक संहिता यानी UCC का विरोध किया। यह सभा AIMIM के UCC विरोधी अभियान का हिस्सा थी। इस दौरान ओवैसी ने मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय को UCC से बाहर रखने और मुसलमानों को इसके दायरे में लाने को लेकर सवाल उठाए।

    ओवैसी ने कहा कि मध्यप्रदेश की आबादी में आदिवासियों की बड़ी हिस्सेदारी है और उनकी अलग संस्कृति परंपराएं तथा सामाजिक व्यवस्थाएं हैं। उनके मुताबिक इन्हीं कारणों से आदिवासियों को UCC से बाहर रखा गया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि अलग संस्कृति और परंपराओं को आधार मानकर एक समुदाय को UCC से अलग रखा जा सकता है तो मुसलमानों को इसके दायरे में क्यों लाया जा रहा है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के जरिए RSS का एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है।

    सभा में ओवैसी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान है। उन्होंने UCC के जरिए हिंदू मैरिज एक्ट हिंदू सक्सेशन एक्ट और अडॉप्शन एंड कस्टडी से जुड़े प्रावधानों को गैर हिंदुओं पर लागू करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 25 26 और 29 का उल्लेख करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों की बात कही।

    ओवैसी ने केंद्र में भाजपा के सहयोगी दलों से भी UCC को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की अपील की। उन्होंने TDP JDU चिराग पासवान एचडी कुमारस्वामी और जयंत चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि यदि इन दलों का भाजपा से कुछ वैचारिक अंतर अभी भी है तो उन्हें UCC का विरोध करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब समान नागरिक संहिता को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है।

    भोपाल की सभा में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का मुद्दा भी उठा। ओवैसी ने काजी कैंप से जुड़े उनके पुराने मिसाइल वाले बयान का जिक्र करते हुए उन्हें काजी कैंप आने की चुनौती दी। उन्होंने इस क्षेत्र से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम के योगदानकर्ताओं के नाम भी गिनाए और कहा कि भोपाल की इस जमीन का अपना ऐतिहासिक महत्व है।

    ओवैसी ने भाजपा शासित राज्यों में मस्जिदों और कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाए। हालांकि ये आरोप उनके राजनीतिक वक्तव्य के तौर पर सामने आए। उन्होंने सागर में जहरीली शराब के मामले का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की। लव जिहाद से जुड़े सवाल पर ओवैसी ने कहा कि यदि दो बालिग अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं तो उन्हें रोकने का अधिकार सरकार या किसी अन्य व्यक्ति को नहीं होना चाहिए।

    सभा के दौरान ओवैसी ने सोवियत यूनियन का उदाहरण देते हुए RSS पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वहां कम्युनिस्ट शासन के दौरान मदरसों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद मुस्लिम परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई घर पर जारी रखी। भोपाल में हुई इस सभा के दौरान UCC के साथ धार्मिक स्वतंत्रता सामाजिक पहचान अल्पसंख्यक अधिकार और राजनीतिक मुद्दों पर ओवैसी ने अपनी पार्टी का पक्ष रखा।

  • लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर

    लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में पात्र हितग्राहियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले शुरू हुई इस योजना में जहां शुरुआत में बड़ी संख्या में महिलाओं को शामिल किया गया था वहीं अब पात्रता की शर्तों और अन्य कारणों के चलते हजारों महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 से सितंबर 2026 के बीच करीब 21 हजार 150 महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं। इसके साथ ही योजना शुरू होने के बाद तीन साल में करीब 6 लाख 26 हजार महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो चुके हैं।

    विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 को लाड़ली बहना योजना में 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार महिलाएं पात्र हितग्राही थीं। सितंबर 2026 तक यह संख्या घटकर 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 रह गई। यानी करीब आठ महीने की अवधि में ही 21 हजार से ज्यादा नाम कम हो गए। यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं चल रही है। ऐसे में एक तरफ नए हितग्राही नहीं जुड़ रहे हैं और दूसरी तरफ पात्रता पूरी नहीं करने वाली महिलाओं के नाम लगातार हटाए जा रहे हैं।

    योजना की शुरुआत में अक्टूबर 2023 में करीब 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 महिलाएं योजना में शामिल थीं। इसके बाद आपत्तियों और पात्रता की जांच के दौरान 2 लाख 18 हजार 858 नाम हटाए गए। इसके बाद पात्र हितग्राहियों की संख्या करीब 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। समय के साथ यह संख्या और कम होती चली गई।

    अधिकारियों के मुताबिक लाड़ली बहना योजना में पात्रता के लिए अधिकतम उम्र 60 वर्ष निर्धारित है। जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो जाती है उनके नाम योजना की सूची से हटा दिए जाते हैं। इसके अलावा किसी हितग्राही की मृत्यु होने या अन्य पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने की स्थिति में भी नाम बाहर किया जाता है। इसी वजह से योजना के आंकड़ों में लगातार कमी देखने को मिल रही है।

    दूसरी ओर नए नाम नहीं जुड़ने के कारण योजना में शामिल महिलाओं की संख्या बढ़ने की संभावना फिलहाल कम है। योजना की शुरुआत जून 2023 में 1000 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता के साथ हुई थी। सरकार ने इसे पांच साल में बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह करने का निर्णय लिया था। शुरुआत के करीब चार महीने बाद मासिक राशि बढ़ाकर 1250 रुपए कर दी गई थी। इसके बाद नवंबर 2025 से इसमें 250 रुपए की और बढ़ोतरी की गई और वर्तमान में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।

    विभाग की ओर से पात्रता के आधार पर हितग्राहियों की समीक्षा लगातार जारी है। ऐसे में दिसंबर 2026 के अंत तक योजना में शामिल महिलाओं की संख्या और घट सकती है। खासकर उम्र की सीमा पूरी करने वाली महिलाओं और अन्य कारणों से अपात्र पाए जाने वाले हितग्राहियों के नाम सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बीच योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से मौजूदा संख्या में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है।

  • भोपाल में आधी रात सड़क पर हंगामा वकील की कार के आगे थार लगाकर की अभद्रता

    भोपाल में आधी रात सड़क पर हंगामा वकील की कार के आगे थार लगाकर की अभद्रता


    भोपाल।  भोपाल के कोहेफिजा थाना क्षेत्र में रविवार रात रैश ड्राइविंग को लेकर हुआ विवाद उस समय गंभीर हो गया जब थार सवार युवकों ने एक वकील की कार रोककर उसके साथ अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। घटना दाता कॉलोनी के पास रात करीब 11:45 बजे की बताई जा रही है। एडवोकेट शादाब खान का आरोप है कि थार सवार करीब 7 से 8 युवकों ने उनकी कार के आगे अपनी गाड़ी खड़ी कर रास्ता रोक दिया। इसके बाद युवकों ने उन्हें और उनके भाइयों को घेर लिया और विवाद करने लगे।

    शादाब खान के मुताबिक 13 सितंबर की रात वे अपने भाइयों के साथ ढाबे पर खाना खाने के बाद कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उन्हें कुछ युवक थार से तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए नजर आए। उन्होंने युवकों को रैश ड्राइविंग नहीं करने की समझाइश दी। आरोप है कि उनकी यह बात युवकों को नागवार गुजरी और उन्होंने दाता कॉलोनी के पास आगे जाकर उनकी कार रोक ली।

    वकील का कहना है कि थार सवार युवकों ने उनकी कार के आगे अपनी गाड़ी लगा दी जिसके बाद करीब 7 से 8 युवक कार को घेरकर खड़े हो गए। उन्होंने शादाब और उनके भाइयों के साथ कथित तौर पर अभद्रता शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर कुछ युवक बेसबॉल बैट लेकर भी पहुंचे। शादाब ने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इसी बीच दूसरे वाहन से पहुंचे एक व्यक्ति पर पिस्टल दिखाने का भी आरोप लगाया गया है।

    घटना के दौरान शादाब खान ने अपने मोबाइल फोन से पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। विवाद के बाद वे कोहेफिजा थाने पहुंचे और पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। हालांकि पुलिस के मुताबिक सामने आए वीडियो में किसी युवक के हाथ में पिस्टल स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में पुलिस वीडियो फुटेज और दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है।

    घटना के कुछ समय बाद दूसरा पक्ष भी कोहेफिजा थाने पहुंचा। दूसरे पक्ष की ओर से भी शादाब खान और उनके साथियों के खिलाफ अभद्रता और धमकी देने के आरोप लगाए गए। इस तरह मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पुलिस के सामने आई है।

    पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत प्राप्त कर ली है लेकिन फिलहाल किसी भी पक्ष की शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस घटनास्थल से जुड़े वीडियो और दोनों पक्षों के बयानों की जांच कर रही है। जांच के बाद आरोपों की वास्तविकता सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल इस घटना ने भोपाल में सड़क पर मामूली विवाद के बढ़कर गंभीर स्थिति तक पहुंचने को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रैश ड्राइविंग को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते कार रोकने और धमकी देने तक पहुंच गया।

  • अब तेजी से होगी 50 लाख हितग्राहियों की रजिस्ट्री एक अधिकारी को रोज 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य

    अब तेजी से होगी 50 लाख हितग्राहियों की रजिस्ट्री एक अधिकारी को रोज 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आबादी की जमीन और मकान पर मालिकाना हक पाने का इंतजार कर रहे लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा हितग्राहियों को जमीन और आवास का कानूनी मालिकाना हक दिलाने की प्रक्रिया 17 सितंबर से शुरू होने जा रही है। खास बात यह है कि हितग्राहियों को रजिस्ट्री के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से मुफ्त रजिस्ट्री का अभियान शुरू किया जाएगा। सरकार ने इस काम को तेजी से पूरा करने के लिए अब रजिस्ट्री कराने वाले अधिकारियों की संख्या भी बढ़ा दी है।

    स्वामित्व योजना के तहत पहले करीब 48.80 लाख हितग्राहियों का चयन किया गया था लेकिन अब यह संख्या 50 लाख से अधिक हो गई है। प्रदेश सरकार ने करीब तीन महीने पहले ही इन हितग्राहियों को मुफ्त रजिस्ट्री की सुविधा देने के फैसले को मंजूरी दी थी। अब इसके क्रियान्वयन की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से आबादी की जमीन पर रह रहे लोगों को उनके घर और जमीन का वैध मालिकाना हक उपलब्ध कराना है।

    रजिस्ट्री की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने राजस्व निरीक्षक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक के साथ पंचायत समन्वय अधिकारी तथा सहायक विकास विस्तार अधिकारी को भी सब रजिस्ट्रार के अधिकार दे दिए हैं। नए नोटिफिकेशन के मुताबिक राजस्व निरीक्षक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत उप पंजीयक की शक्तियां दी गई हैं। वे अपने निर्धारित जिले और क्षेत्र में स्वामित्व योजना के पात्र हितग्राहियों की आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कर सकेंगे।

    इसी तरह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पंचायत समन्वय अधिकारी और सहायक विकास विस्तार अधिकारी को उनके पदस्थ जिले के जनपद क्षेत्र में उप पंजीयक के रूप में रजिस्ट्री करने का अधिकार दिया गया है। इससे अलग अलग क्षेत्रों में एक साथ रजिस्ट्री का काम शुरू किया जा सकेगा और लोगों को रजिस्ट्री के लिए लंबी प्रक्रिया या इंतजार से राहत मिलने की उम्मीद है।

    सरकार ने रजिस्ट्री की रफ्तार बढ़ाने के लिए अधिकारियों के सामने लक्ष्य भी तय किया है। अधिकार प्राप्त प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को रोजाना कम से कम 40 रजिस्ट्री करने का लक्ष्य दिया गया है। रजिस्ट्रीकर्ता के रूप में संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी का नाम दर्ज रहेगा। इससे बड़ी संख्या में हितग्राहियों की रजिस्ट्री कम समय में पूरी करने की योजना है।

    इससे पहले प्रदेश के सभी तहसीलदारों को भी स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के लिए सब रजिस्ट्रार के अधिकार दिए जा चुके हैं। अब राजस्व और पंचायत विभाग के अन्य अधिकारियों को अधिकार मिलने से रजिस्ट्री कराने वाले अधिकारियों का दायरा और बढ़ गया है।

    हालांकि योजना के इस प्रावधान को लेकर पटवारियों में नाराजगी भी है। प्रदेश के पटवारी इस बात का विरोध कर रहे हैं कि रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के तौर पर उनका नाम दर्ज किया जा रहा है। उनका कहना है कि भविष्य में रजिस्ट्री से संबंधित कोई कानूनी विवाद सामने आता है तो उनके बचाव की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। ऐसे में उन्हें अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया में उलझना पड़ सकता है। सरकार के सामने अब एक ओर जहां लाखों लोगों को जल्द मालिकाना हक देने की चुनौती है वहीं दूसरी ओर रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की आशंकाओं का समाधान करना भी अहम होगा।