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  • हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी आज एक साथ बना खास संयोग सुबह निर्जला व्रत तो दोपहर में होगी बप्पा की स्थापना

    हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी आज एक साथ बना खास संयोग सुबह निर्जला व्रत तो दोपहर में होगी बप्पा की स्थापना


    भोपाल। भोपाल में आज धार्मिक आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ने से शहर में सुबह से लेकर रात तक धार्मिक आयोजनों की रौनक बनी रहेगी। दिन की शुरुआत महिलाओं के निर्जला व्रत से होगी। इसके बाद दोपहर में शुभ मुहूर्त में घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। शाम को प्रदोष काल में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती का विधि-विधान से पूजन करेंगी। इसके बाद रातभर जागरण और आराधना का सिलसिला चलेगा।

    तिथि भेद के कारण इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का यह विशेष संयोग बना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। गणेश प्रतिमा स्थापना के लिए सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इसी अवधि में घरों और गणेश पंडालों में विधि-विधान से भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी।

    हरतालिका तीज के अवसर पर महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखेंगी। शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाएगी। मान्यता के अनुसार महिलाएं इस दौरान सुखी दांपत्य जीवन और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। पूजन के बाद रातभर जागरण कर तीज की पूजा और आराधना की जाएगी। इस वजह से आज शहर के कई इलाकों में देर रात तक धार्मिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    गणेश उत्सव को लेकर भी भोपाल में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शहर में 300 से अधिक बड़े गणेश पंडाल सजकर तैयार हैं जबकि 700 से ज्यादा छोटी झांकियां और अन्य धार्मिक आयोजन भी बनाए गए हैं। रविवार सुबह से ही कई स्थानों पर गणपति बप्पा की अगवानी शुरू हो गई थी। सोमवार को शुभ मुहूर्त में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के साथ उत्सव का विधिवत आगाज होगा।

    टीटी नगर जहांगीराबाद जवाहर चौक कोलार मंगलवारा और बरखेड़ा पठानी सहित कई इलाकों में गणेश प्रतिमाओं की दुकानें सजी हुई हैं। रविवार को बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और पंडालों के लिए भगवान गणेश की प्रतिमाएं खरीदते नजर आए। बाजारों में गणेश प्रतिमाओं के साथ पूजा सामग्री और सजावट की वस्तुओं की भी मांग रही।

    वहीं हरतालिका तीज को लेकर भी शहर के प्रमुख बाजारों में महिलाओं की भीड़ दिखाई दी। न्यू मार्केट और दस नंबर समेत कई बाजारों में महिलाओं ने चूड़ी मेहंदी साड़ी और साज-श्रृंगार की सामग्री खरीदी। पूजन सामग्री की दुकानों पर भी दिनभर ग्राहकों की आवाजाही रही।

    तीज और गणेश चतुर्थी के बाद धार्मिक पर्वों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। 15 सितंबर को ऋषि पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन सप्त ऋषियों और अरुंधती का पूजन किया जाएगा। इसके बाद 19 सितंबर को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में भी भोपाल में धार्मिक आयोजनों और आस्था से जुड़े कार्यक्रमों की रौनक बनी रहेगी

  • भोपाल में कमर्शियल गतिविधियों पर बड़ा अपडेट मास्टर प्लान आया तो भी चुकानी होगी डायवर्सन की कीमत

    भोपाल में कमर्शियल गतिविधियों पर बड़ा अपडेट मास्टर प्लान आया तो भी चुकानी होगी डायवर्सन की कीमत


    भोपाल । भोपाल में आवासीय इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई के बीच अब लोगों की नजर नए मास्टर प्लान पर टिक गई है। सरकार नए मास्टर प्लान को लागू करने की तैयारी में है लेकिन इसके लागू होने के बाद भी आवासीय इलाकों में चल रहे कमर्शियल कारोबार को तुरंत राहत मिलने की संभावना नहीं है। अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ के मुताबिक यदि सरकार अभी मास्टर प्लान की घोषणा करती है तो इसे लागू होने में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। वहीं मिक्स्ड लैंड यूज के तहत आने वाले भवनों के डायवर्सन के लिए भी संबंधित लोगों को निर्धारित राशि चुकानी पड़ सकती है।

    भोपाल में फिलहाल वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर ही शहर का विकास हो रहा है। यानी करीब 21 साल पुराने प्लान के हिसाब से शहर की व्यवस्थाएं संचालित हो रही हैं जबकि इस दौरान आबादी और शहर का विस्तार काफी तेजी से हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक नया मास्टर प्लान समय पर लागू नहीं होने के कारण कई आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती चली गईं। अगर शहर के विस्तार के साथ नया मास्टर प्लान लागू होता तो कमर्शियल क्षेत्रों के लिए पहले से जगह तय होती और उसी हिसाब से सड़कें पार्किंग सीवेज बिजली और पानी जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाता।

    अब मिक्स्ड लैंड यूज को संभावित समाधान के तौर पर देखा जा रहा है। यदि सरकार अरेरा कॉलोनी बावड़ियाकलां रोहित नगर समेत कुछ बड़े इलाकों को मिक्स्ड लैंड यूज में शामिल करती है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि वहां चल रहे सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपने आप वैध हो जाएंगे। इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। संबंधित इलाकों में पार्किंग सीवेज बिजली पानी और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था भी करनी होगी।

    इसके अलावा जिन भवनों को कमर्शियल उपयोग के दायरे में लाया जाएगा उनके डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क चुकाना पड़ सकता है। यह राशि कितनी होगी इसका फैसला सरकार करेगी। विशेषज्ञ के अनुसार डायवर्सन की प्रक्रिया में भी करीब चार से छह महीने का समय लग सकता है। यानी मास्टर प्लान की घोषणा होने के बाद भी व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल राहत मिलना आसान नहीं होगा।

    पूरे मामले में अब सुप्रीम कोर्ट की 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई भी बेहद अहम मानी जा रही है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाई थी। साथ ही हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत वाले आदेश भी निरस्त कर दिए गए थे। नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी अदालत में पेश करनी है।

    इसी के चलते भोपाल में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तेज हुई। एक सप्ताह में आठ हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए गए जबकि करीब 190 प्रतिष्ठान स्वेच्छा से या सीलिंग के जरिए बंद किए गए। निगम को कुल 62 हजार नोटिस जारी करने थे लेकिन शुरुआती कार्रवाई में ही व्यापारियों और रहवासियों का विरोध सामने आ गया।

    निगम की कार्रवाई के खिलाफ व्यापारी कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं। रोशनपुरा और न्यू मार्केट में प्रदर्शन हुआ तो कोलार रोड समेत कई इलाकों में बाजार बंद रखे गए। अवधपुरी और रायसेन रोड पर भी विरोध देखने को मिला। अब सभी की निगाहें सरकार के नए मास्टर प्लान और सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर हैं। फिलहाल इतना साफ है कि मास्टर प्लान की घोषणा होने के बाद भी राहत की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी और मिक्स्ड लैंड यूज के तहत आने वाले भवनों को नियमों के साथ डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।

  • स्वाइन फ्लू को लेकर भोपाल में अलर्ट पहली मौत के बाद बढ़ी चिंता जानिए किन मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा

    स्वाइन फ्लू को लेकर भोपाल में अलर्ट पहली मौत के बाद बढ़ी चिंता जानिए किन मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा


    भोपाल । भोपाल में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण ने चिंता बढ़ा दी है। इस साल राजधानी में स्वाइन फ्लू से पहली मौत सामने आई है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 80 वर्षीय राम सिंह की गंभीर सांस संबंधी बीमारी के चलते मौत हो गई। वे पहले से ही हृदय रोग हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। डॉक्टरों के मुताबिक उम्र के साथ पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों के कारण ऐसे मरीजों में फ्लू का संक्रमण अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

    भोपाल में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 65 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 45 मरीज पिछले 12 दिनों के दौरान मिले हैं। यानी कुल मामलों का करीब 70 फीसदी हिस्सा बेहद कम समय में सामने आया है। मौसम में बदलाव नमी और ठंडक के बीच सर्दी खांसी बुखार और सांस से जुड़ी परेशानियों वाले मरीजों की संख्या भी अस्पतालों की ओपीडी में बढ़ रही है। ऐसे में वायरल रेस्पिरेटरी संक्रमण को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है।

    फिलहाल भोपाल में एच1एन1 की जांच सिर्फ एम्स में हो रही है। गांधी मेडिकल कॉलेज में नियमित जांच की सुविधा अभी शुरू नहीं हुई है। स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच गंभीर लक्षण वाले मरीजों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक गंभीर लक्षण वाले 232 मरीजों की जांच की जा चुकी है। डॉक्टरों का कहना है कि हर सर्दी खांसी या बुखार वाले मरीज को एच1एन1 की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। मरीज की उम्र उसकी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर जांच की सलाह देते हैं।

    गांधी मेडिकल कॉलेज में आरआईआरडी के अधीक्षक और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. लोकेंद्र दवे के अनुसार मौसम में बदलाव और नमी के कारण वायरल रेस्पिरेटरी बीमारियों के मामले बढ़ सकते हैं। एच1एन1 भी इसी तरह के संक्रमण का एक कारण है। हालांकि मौजूदा स्थिति को महामारी जैसी स्थिति नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञ के मुताबिक इंफ्लूएंजा के करीब 95 फीसदी मामले बिना अस्पताल में भर्ती हुए ठीक हो जाते हैं।

    फिर भी बुजुर्गों और हृदय रोग डायबिटीज या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे मरीजों में संक्रमण बढ़ने पर निमोनिया जैसी जटिलता हो सकती है। सांस लेने में परेशानी ऑक्सीजन का स्तर कम होना या लक्षणों का तेजी से बढ़ना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऑक्सीजन की कमी वाले गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर आईसीयू सपोर्ट की जरूरत भी पड़ सकती है।

    स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को खुद को अन्य लोगों से अलग रखना चाहिए। पर्याप्त आराम करने के साथ तरल पदार्थों का सेवन करना जरूरी है। मास्क लगाने और हाथों को नियमित रूप से साफ रखने से संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद मिल सकती है। सर्दी खांसी या बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा लेना उचित नहीं है। एंटीवायरल दवा डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए और निर्धारित दवा का पूरा कोर्स करना जरूरी है।

    एच1एन1 से बचाव के लिए इंफ्लूएंजा वैक्सीन भी उपलब्ध है। विशेषज्ञों के अनुसार हाई रिस्क वाले लोग डॉक्टर की सलाह से वैक्सीन लगवा सकते हैं। इसका सुरक्षा प्रभाव करीब 60 से 70 फीसदी तक बताया जाता है। एग एलर्जी वाले लोगों को वैक्सीन लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। राजधानी में तेजी से सामने आ रहे मामलों को देखते हुए खासकर बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी जा रही है।

  • हनुमान अंश की टीम का भोपाल में खास अंदाज में स्वागत कलाकारों से मिलेंगे दर्शक रविवार को भी शहर में रहेगा फिल्मी रंग

    हनुमान अंश की टीम का भोपाल में खास अंदाज में स्वागत कलाकारों से मिलेंगे दर्शक रविवार को भी शहर में रहेगा फिल्मी रंग


    भोपाल । भोपाल में फिल्म हनुमान अंश को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। फिल्म की टीम शनिवार को भोपाल पहुंच रही है जहां कलाकार सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच जाकर उनसे सीधा संवाद करेंगे। टीम में फिल्म में पार्वती माई गोपाल बहेलिया और चांद चोर जैसे किरदार निभाने वाले कलाकार शामिल हैं। इस दौरान दर्शकों को फिल्म के कलाकारों से सीधे मिलने और फिल्म से जुड़े अनुभव साझा करने का मौका मिलेगा। फिल्म की टीम शनिवार शाम अवधपुरी स्थित रीगल सिनेमा पहुंचेगी जहां ऑडियंस के साथ खास बातचीत का कार्यक्रम रखा गया है।

    फिल्म में गोपाल बहेलिया का किरदार अभिनेता भगवानदास पटेल ने निभाया है जबकि पार्वती माई की भूमिका नेहा परांजपे ने निभाई है। चांद चोर के किरदार में अभिषेम मिश्रा नजर आए हैं। टीम के भोपाल दौरे को लेकर दर्शकों में खास उत्सुकता है क्योंकि फिल्म धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं से जुड़ी कहानी को पर्दे पर प्रस्तुत करती है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी भोपाल में हनुमान अंश फिल्म देखी थी। फिल्म देखने के बाद उन्होंने इसकी विषयवस्तु और कलाकारों के काम की सराहना की थी।

    हनुमान अंश की टीम केवल शनिवार को ही नहीं बल्कि रविवार को भी भोपाल में दर्शकों के बीच मौजूद रहेगी। रविवार सुबह 11.30 बजे टीम बंसल प्लाजा मल्टीप्लेक्स पहुंचेगी। इसके बाद दोपहर 2.30 बजे डीबी मॉल में दर्शकों से मुलाकात की जाएगी। इस दौरान फिल्म के कलाकार ऑडियंस के साथ बातचीत करेंगे और फिल्म से जुड़े अनुभव साझा करेंगे। श्री हनुमान भक्त मंडल भी इस पूरे कार्यक्रम में टीम के साथ मौजूद रहेगा। मंडल से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि फिल्म के कलाकारों के साथ दर्शकों के संवाद को लेकर विशेष तैयारी की गई है।

    फिल्म की खास बात यह भी है कि इसमें मध्य प्रदेश की प्रतिभाओं को महत्वपूर्ण जगह मिली है। सागर जिले के दिव्यांग गायक सुनील लोधी ने फिल्म के लिए बुंदेली भजन गाया है। उनकी प्रतिभा पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच चुकी थी। मुख्यमंत्री ने उन्हें मुख्यमंत्री निवास बुलाकर सम्मानित किया था और एक लाख रुपये की सम्मान निधि भी दी थी। इसके साथ ही उनकी आंखों की रोशनी वापस लाने के उपचार में मदद का भरोसा दिया गया था। अब उनकी आवाज फिल्म का हिस्सा बनकर प्रदेश की लोक संस्कृति और बुंदेली संगीत को बड़े पर्दे तक पहुंचा रही है।

    फिल्म से जुड़े कलाकारों का भी मध्य प्रदेश से गहरा रिश्ता है। गोपाल का किरदार निभाने वाले भगवानदास पटेल जबलपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने थिएटर में करीब छह साल काम करने के बाद टीवी और फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों और वेब सीरीज में काम करने का अवसर मिला। मुझसे फ्रेंडशिप करोगे प्रेम रतन धन पायो थार रंगबाज और फोटोग्राफ जैसे प्रोजेक्ट में वे नजर आ चुके हैं। वहीं फिल्म से जुड़े गायक साधु तिवारी का संबंध ग्वालियर से है।

    इस तरह हनुमान अंश की टीम का भोपाल दौरा केवल फिल्म के प्रचार तक सीमित नहीं है बल्कि यह मध्य प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं और धार्मिक आस्था से जुड़े कलाकारों को दर्शकों के करीब लाने का भी अवसर बन रहा है। टीम के लगातार दो दिन भोपाल में रहने से फिल्म के प्रशंसकों के बीच उत्साह और बढ़ने की उम्मीद है।

  • भोपाल की कॉलेज कैंटीन में खाद्य सुरक्षा की खुली पोल सड़ी सब्जियों से लेकर एक्सपायर्ड ब्रेड तक मिलीं कई गंभीर खामियां

    भोपाल की कॉलेज कैंटीन में खाद्य सुरक्षा की खुली पोल सड़ी सब्जियों से लेकर एक्सपायर्ड ब्रेड तक मिलीं कई गंभीर खामियां


    भोपाल । भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए संचालित कैंटीन में खाद्य सुरक्षा और साफ सफाई को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान कैंटीन में सड़ी हुई प्याज मिली जबकि सैंडविच तैयार करने के लिए ऐसी ब्रेड का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसकी बेस्ट बिफोर अवधि करीब 10 दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने वाली कैंटीन में इस तरह की अनियमितताएं मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संचालकों को सुधार सूचना पत्र जारी कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

    जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने कॉलेज परिसर में संचालित नवीन कैंटीन का निरीक्षण किया था। इस दौरान खाद्य पदार्थों के निर्माण और उनके भंडारण से जुड़ी व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा गया। जांच के दौरान कैंटीन में साफ सफाई और हाइजीन की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य सामग्री को सुरक्षित तरीके से रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं थी। इसके अलावा भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और उसके भंडारण को लेकर भी कई कमियां सामने आईं।

    निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर मामला सैंडविच ब्रेड से जुड़ा सामने आया। कैंटीन में ऐसी ब्रेड का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसकी बेस्ट बिफोर अवधि लगभग 10 दिन पहले समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद उससे विद्यार्थियों के लिए सैंडविच तैयार किए जा रहे थे। कैंटीन में सड़ी हुई प्याज भी रखी मिली। खाद्य सामग्री की ऐसी स्थिति विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है क्योंकि कॉलेज कैंटीन में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र भोजन और नाश्ता करते हैं।

    अधिकारियों ने कैंटीन में इस्तेमाल होने वाले पेयजल की व्यवस्था की भी जांच की। इसके लिए आरओ और वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम तथा पानी की गुणवत्ता से संबंधित व्यवस्थाओं को देखा गया। निरीक्षण के दौरान कॉलेज परिसर में संचालित एक अन्य कैंटीन में भी स्वच्छता और खाद्य सामग्री के भंडारण से जुड़ी कमियां सामने आईं। यहां भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों की वेशभूषा भी निर्धारित स्वच्छता मानकों के अनुरूप नहीं मिली।

    खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोनों कैंटीन संचालकों को कमियों को गंभीरता से लेते हुए सुधार सूचना पत्र जारी किया है। अधिकारियों ने खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से संबंधित व्यवस्थाओं को नियमानुसार सुधारने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए दोनों कैंटीन से भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के नमूने भी लिए गए हैं।

    जांच के दौरान मटर का आटा और रिफाइंड सोयाबीन तेल के नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत लिए गए हैं। इन नमूनों को खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद उसमें सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी कार्रवाई के बाद अब कैंटीन संचालकों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही विद्यार्थियों की सेहत से जुड़े खाद्य मानकों को लेकर कॉलेज परिसर में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की जरूरत भी सामने आई है।

  • भोपाल में रिहायशी प्लॉट पर कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में दस्तावेज नहीं मिले तो होगी कार्रवाई

    भोपाल में रिहायशी प्लॉट पर कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में दस्तावेज नहीं मिले तो होगी कार्रवाई


    भोपाल । भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत के इस आदेश के बाद ऐसे लोगों और प्रतिष्ठानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो आवासीय जमीन का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया है कि यदि उनके पास आवासीय भूखंड पर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने की वैध अनुमति है तो उसके दस्तावेज सात दिन के भीतर भोपाल नगर निगम के सामने पेश करने होंगे। इसके बाद नगर निगम दस्तावेजों की जांच करेगा और यदि अनुमति वैध नहीं पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।

    हाईकोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब रिहायशी इलाकों में आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित जमीन पर होटल मॉल और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित किए जाने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय रहवासियों की ओर से लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं कि इस तरह की गतिविधियों से उनके इलाकों की व्यवस्था प्रभावित होती है। खासकर ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या के साथ शोर और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां बढ़ने की बात कही जाती रही है।

    अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में वैध अनुमति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र कुमार बड़जात्या मामले में वर्ष 2024 में दिए गए फैसले के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। इससे अब नगर निगम के लिए भी आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो गई है।

    इस मामले में याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि रिहायशी क्षेत्रों को व्यावसायिक गतिविधियों के अनियंत्रित विस्तार से बचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार अब नगर निगम के सामने न्यायिक निर्देश मौजूद हैं जिसके आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों की अनुमति की जांच की जा सकती है।

    रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को भी इस आदेश से उम्मीद जगी है। रहवासी लवनीश भाटी का कहना है कि कई इलाकों में लंबे समय से ट्रैफिक पार्किंग और दूसरी समस्याएं बनी हुई हैं। शिकायतों के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी रही है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद है कि नगर निगम जमीन पर प्रभावी कार्रवाई करेगा।

    संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी अदालत के आदेश का स्वागत किया है। समिति ने नगर निगम से मांग की है कि रिहायशी इलाकों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की अनुमति की जांच की जाए। जिन प्रतिष्ठानों के पास वैध अनुमति नहीं है उनके खिलाफ नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल आने वाले सात दिनों में संबंधित पक्षों को अपने दस्तावेज नगर निगम के सामने प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद दस्तावेजों की जांच और उनकी वैधता के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • MP हाईकोर्ट में खत्म हुआ तीन महीने का इंतजार, जस्टिस अल्पेश कोगजे बने स्थायी चीफ जस्टिस

    MP हाईकोर्ट में खत्म हुआ तीन महीने का इंतजार, जस्टिस अल्पेश कोगजे बने स्थायी चीफ जस्टिस


    भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को करीब तीन महीने के इंतजार के बाद स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। गुजरात हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने गुरुवार को भोपाल स्थित लोकभवन में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने उन्हें शपथ दिलाई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समेत प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। जस्टिस कोगजे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं।

    जस्टिस कोगजे की नियुक्ति के साथ ही अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को स्थायी नेतृत्व मिल गया है। पिछले करीब तीन महीने से जस्टिस विवेक रसिया कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे के नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री निवास पर नए मुख्य न्यायाधीश के सम्मान में लंच का आयोजन किया गया। शुक्रवार से जस्टिस कोगजे हाईकोर्ट में आधिकारिक रूप से अपना पदभार संभालेंगे।

    जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का लंबा न्यायिक और कानूनी अनुभव रहा है। उनका जन्म 16 जुलाई 1969 को हुआ था। उन्होंने 1990 में केमिस्ट्री से बीएससी की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद 1993 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसी साल उन्होंने गुजरात में वकालत शुरू की। करीब 33 वर्षों के कानूनी सफर में उन्होंने वकील से लेकर गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश और अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक का सफर तय किया है।

    जस्टिस कोगजे को आपराधिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने गुजरात सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में पैरवी की। वर्ष 2001 में वे असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर रहे। इसके बाद 2002 से 2007 तक एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर काम किया। वर्ष 2008 में वे सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स डिपार्टमेंट के स्टैंडिंग काउंसल बने। वर्ष 2011 में उन्हें स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और स्पेशल टास्क फोर्स के स्पेशल काउंसल की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान उन्होंने गोधरा दंगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में गुजरात सरकार का पक्ष रखा।

    6 अप्रैल 2016 को जस्टिस कोगजे को गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। करीब दो साल बाद 15 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर उन्होंने आपराधिक मामलों के अलावा सर्विस और लेबर विवाद तथा अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। कई मामलों में उनके फैसलों ने खासा ध्यान खींचा।

    वर्ष 2024 में पत्नी की हत्या के आरोपी पति को जमानत देने से इनकार करने वाले फैसले में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अदालत ने आरोपी के जांच को गुमराह करने के प्रयासों को गंभीरता से लिया था। वर्ष 2022 के कस्टोडियल डेथ मामले में भी जमानत से इनकार किया गया। इसके अलावा जल निकायों की सुरक्षा और अंधाधुंध लैंड फिलिंग को लेकर भी उनकी पीठ ने सख्त टिप्पणी की थी। औद्योगिक विवादों और वर्कमैन के अधिकारों से जुड़े मामलों में भी उनके कई अहम फैसले सामने आए।

    जस्टिस कोगजे 15 जुलाई 2031 को सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्हें करीब चार वर्ष दस महीने का कार्यकाल मिलेगा। अब उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक प्रशासन से जुड़े कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। शपथ ग्रहण समारोह में हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश और बड़ी संख्या में वकील भी मौजूद रहे।

  • कल्पना और नवजात की मौत से गरमाई सियासत, मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा पुलिस हिरासत में

    कल्पना और नवजात की मौत से गरमाई सियासत, मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा पुलिस हिरासत में


    रीवा। मध्यप्रदेश की राजनीति में रीवा के संजय गांधी अस्पताल से जुड़ा कल्पना मिश्रा मौत मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर भोपाल स्थित मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस कार्रवाई के दौरान धरना स्थल पर लगे पोस्टर और बैनर भी हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस विधायक की हिरासत के बाद इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। अभय मिश्रा सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हैं और वे लंबे समय से रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले को उठा रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सी सेक्शन के बाद कल्पना और उसके नवजात बच्चे दोनों की मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई और दो डॉक्टरों तथा दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया। इसके बाद अस्पताल अधीक्षक को भी पद से हटाया गया और पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए गए। हालांकि कल्पना मिश्रा के परिजन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR और सख्त कार्रवाई की मांग पर लगातार अड़े हुए हैं।

    इसी मामले को लेकर कांग्रेस ने आंदोलन तेज कर दिया है। अभय मिश्रा मंत्रालय के सामने धरना देकर सरकार से मामले में ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस ने धरना स्थल से उन्हें हिरासत में ले लिया जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। मामला केवल कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत तक सीमित नहीं रहा है बल्कि संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे अलग अलग आरोपों को भी राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

    अभय मिश्रा ने इससे पहले अस्पताल की पोस्टमॉर्टम व्यवस्था को लेकर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए थे और अस्पताल में निगरानी तथा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि इन आरोपों की किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रिपोर्ट से पुष्टि सामने नहीं आई है। दूसरी ओर अस्पताल से जुड़े अन्य मामलों को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। एक मामले में मरीज को मृत घोषित किए जाने और बाद में उसके जीवित होने की बात सामने आने के बाद जांच की मांग उठी। इसके अलावा एक युवक को गलत इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप तथा एक महिला मरीज के इलाज और देखरेख में लापरवाही के आरोपों ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इनमें से कुछ आरोपों को निराधार बताया है और कई मामलों में जांच की बात कही गई है।

    मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी सक्रिय हैं। उन्होंने रीवा में धरने के दौरान कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को भी निशाने पर लिया और जवाबदेही तय करने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती तब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।

    फिलहाल अभय मिश्रा को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ पीड़ित परिवार FIR और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहा है जबकि दूसरी ओर सरकार और अस्पताल प्रशासन जांच तथा पहले से की गई कार्रवाई का हवाला दे रहे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है क्योंकि इसी से तय होगा कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और पीड़ित परिवार को आखिर कब तक न्याय मिल पाता है।

  • मास्टर प्लान के लिए भोपाल में दौड़े शहरवासी: मसूद ने सरकार को घेरा अरेरा कॉलोनी की जर्जर सड़कें भी जल्द बनाएं

    मास्टर प्लान के लिए भोपाल में दौड़े शहरवासी: मसूद ने सरकार को घेरा अरेरा कॉलोनी की जर्जर सड़कें भी जल्द बनाएं


    भोपाल । भोपाल में लंबे समय से अटके मास्टर प्लान को लागू कराने की मांग अब सड़क तक पहुंच गई है। राजधानी में बुधवार को कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की अगुआई में रन फॉर मास्टर प्लान दौड़ आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में युवा महिलाएं छात्र व्यापारी और शहर के अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। 11 नंबर बस स्टॉप से शुरू हुई इस मैराथन के जरिए लोगों ने सरकार से भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू करने की मांग उठाई। दौड़ के दौरान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों को लेकर आवाज बुलंद की गई। प्रतिभागियों का कहना था कि राजधानी जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए स्पष्ट मास्टर प्लान बेहद जरूरी है क्योंकि इसके अभाव में विकास कार्यों से लेकर जमीन के उपयोग और यातायात व्यवस्था तक कई स्तरों पर परेशानियां सामने आ रही हैं।

    विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि भोपाल का मास्टर प्लान करीब दो दशक से अटका हुआ है और इसका खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उज्जैन का मास्टर प्लान सामने आ सकता है तो भोपाल का मास्टर प्लान आखिर क्यों अटका हुआ है। उनका कहना था कि एक ही प्रदेश में शहरों के लिए अलग अलग रवैया नहीं होना चाहिए। भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी है और यहां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास की स्पष्ट दिशा तय होना जरूरी है।

    मसूद ने कहा कि इस आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं बल्कि शहर के लोगों की बुनियादी जरूरतें हैं। बच्चे युवा महिलाएं व्यापारी और आम नागरिक एक ही मांग कर रहे हैं कि भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं लेकिन शहर के विकास के मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक मास्टर प्लान के अभाव में कई क्षेत्रों में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    इस दौरान मास्टर प्लान के साथ अरेरा कॉलोनी और आई टू से आई एट क्षेत्र की सड़कों का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया गया। इन इलाकों में सीवेज लाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की हालत खराब होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। मसूद ने मांग की कि सड़क निर्माण का काम तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क का भूमिपूजन कौन करता है या निर्माण का श्रेय किसे मिलता है इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। जरूरत यह है कि लोगों को जल्द राहत मिले और पूरी अरेरा कॉलोनी की सड़कों को व्यवस्थित तरीके से बनाया जाए।

    मैराथन में स्पाइडर मैन का मास्क पहनकर पहुंचे एक युवक ने भी लोगों का ध्यान खींचा। खुद को स्पीडी बताने वाले युवक ने कहा कि वह भोपाल के भविष्य के लिए मास्टर प्लान लागू कराने की मांग को लेकर दौड़ में शामिल हुआ है। उसका कहना था कि मास्टर प्लान के अभाव में शहर में ट्रैफिक और आम लोगों की आवाजाही से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं।

    भोपाल में मास्टर प्लान के लंबे समय से लंबित रहने का असर जमीन के उपयोग नए निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत नगर निगम की ओर से की जा रही सीलिंग कार्रवाई को लेकर भी व्यापारियों और संपत्ति मालिकों में चिंता बनी हुई है। शहर में विकास के नियमों को लेकर स्पष्टता नहीं होने से कई लोगों के सामने असमंजस की स्थिति है। ऐसे में रन फॉर मास्टर प्लान के जरिए उठी आवाज ने सरकार के सामने राजधानी के भविष्य की योजना को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

  • इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन

    इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन


    भोपाल। मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर धरने पर बैठे रहे और मंगलवार को दोबारा सड़क जाम कर दिया। आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह बंद रही, जबकि इंदौर के एमवाय अस्पताल में भी इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। इमरजेंसी सेवाएं हालांकि जारी रखी गई हैं।

    इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिलने वाले 14 हजार 337 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है और वे लंबे समय से इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे अस्पतालों में लगातार ड्यूटी करते हैं और मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

    भोपाल में आंदोलन के कारण हमीदिया अस्पताल की ओपीडी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। रिपोर्ट के मुताबिक ओपीडी में 1500 से ज्यादा मरीज मौजूद थे। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन जूनियर डॉक्टरों के काम से हटने के बाद पर्चे बनाने और मरीजों को देखने की व्यवस्था प्रभावित हो गई। फिलहाल वरिष्ठ चिकित्सक और जीएमसी के प्रोफेसर मरीजों को देख रहे हैं। इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को इलाज मिल सके।

    वहीं कमला पार्क क्षेत्र में प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। सीएम हाउस की ओर जाने वाले रास्तों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। पुराने शहर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हुई और रोशनपुरा से रॉयल मार्केट तक जाम की स्थिति बनी। पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर व्यवस्था संभालने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का सड़क पर बैठना जारी रहने से आसपास के इलाकों में भी यातायात दबाव बढ़ गया।

    इससे पहले सोमवार को सीएम हाउस की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए। पुलिस का कहना है कि इमरजेंसी गेट की ओर बढ़ने के दौरान धक्कामुक्की की स्थिति बनी जिसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

    मंगलवार को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई दोनों मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद स्टाइपेंड के मामले पर फिर बातचीत किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनकी दूसरी मांग प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दोनों मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इंदौर में भी भोपाल की घटना के विरोध में डॉक्टरों ने रैली निकालकर अपना समर्थन जताया है। ऐसे में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं पर आंदोलन का असर फिलहाल जारी है।