Tag: Bhopal News

  • दीपावली से पहले खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, ट्रेन से उतारते ही पकड़ा 700 किलो नकली पनीर, सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू

    दीपावली से पहले खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, ट्रेन से उतारते ही पकड़ा 700 किलो नकली पनीर, सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू


    नई दिल्ली। दीपावली से पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 700 किलो से अधिक एनालॉग पनीर जब्त किया है। यह खेप ट्रेन के जरिए मुरैना से भोपाल लाई गई थी। अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन के बाहर माल उतारे जाने के दौरान इसे अपने कब्जे में ले लिया। जब्त किए गए पनीर की कीमत करीब 2.5 लाख रुपये बताई गई है। अब विभागीय टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में पनीर किसके लिए मंगाया गया था और इसे किन दुकानों होटलों या रेस्टोरेंट तक पहुंचाया जाना था।

    जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मंगलवार देर रात करीब दो बजे कार्रवाई की। रेलवे स्टेशन पर पनीर के बड़े पैकेट पहुंचने के बाद टीम ने जांच शुरू की और माल को जब्त कर लिया। विभाग ने बिल्टी और बिल से संबंधित जानकारी के आधार पर प्रकरण दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की। बुधवार सुबह तक इस मामले में जांच जारी थी। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इसे लेकर सामने आई यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    सप्लाई कहां होनी थी इसकी जांच जारी

    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम अब खेप के पूरे सप्लाई नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों का पता लगाने पर जोर है कि पनीर मुरैना से किस व्यक्ति या कारोबारी ने भेजा था। भोपाल में इसे किसने मंगाया था और इसे किन प्रतिष्ठानों तक पहुंचाया जाना था। जांच में यदि किसी होटल रेस्टोरेंट डेयरी या अन्य कारोबारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जब्त माल के गंतव्य और उससे जुड़े लोगों के बारे में जांच की जा रही है।

    क्या होता है एनालॉग पनीर

    एनालॉग पनीर को आम तौर पर पारंपरिक दूध से बने पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है। इसे बनाने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी लागत अपेक्षाकृत कम होने के कारण कुछ बाजारों में इसकी मांग बनी रहती है। हालांकि इसकी सामग्री और पोषण संबंधी विशेषताएं असली दूध से बने पनीर से अलग हो सकती हैं। उपभोक्ताओं के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि वे जो उत्पाद खरीद रहे हैं उसकी सही पहचान और सामग्री की जानकारी उन्हें मिले।

    प्रदेश में प्रतिबंध के बाद भी सामने आया मामला

    करीब तीन महीने पहले मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया था। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी चिंता जताई थी और मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित राज्यों से संपर्क करने का फैसला किया था। इसके बावजूद भोपाल में बड़ी मात्रा में एनालॉग पनीर की खेप पहुंचने का मामला सामने आया है। इससे प्रतिबंध के पालन और खाद्य उत्पादों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    त्योहारों के दौरान दूध और उससे बने उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी सही पहचान सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि जब्त पनीर कहां खपाया जाना था और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

  • करवा चौथ पर मौसम डाल सकता है खलल, भोपाल में 8:26 और इंदौर में 8:34 बजे चंद्रोदय, जानें अपने शहर का समय

    करवा चौथ पर मौसम डाल सकता है खलल, भोपाल में 8:26 और इंदौर में 8:34 बजे चंद्रोदय, जानें अपने शहर का समय


    भोपाल। मध्य प्रदेश में गुरुवार 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखेंगी। सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद शुरू होने वाला यह व्रत रात में चंद्र दर्शन और पूजा के बाद पूरा किया जाता है। हालांकि इस बार मौसम महिलाओं की प्रतीक्षा बढ़ा सकता है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में चांद के निर्धारित समय पर निकलने के बावजूद उसका स्पष्ट दर्शन होने में देरी हो सकती है।

    खगोलीय गणनाओं के अनुसार मध्य प्रदेश में सबसे पहले सिंगरौली में रात करीब 8 बजकर 1 मिनट पर चंद्रमा दिखाई देने का अनुमान है। इसके बाद प्रदेश के अन्य जिलों में चंद्रोदय होगा। राजधानी भोपाल में रात 8 बजकर 26 मिनट पर जबकि इंदौर में रात 8 बजकर 34 मिनट पर चांद दिखने का अनुमान है। प्रदेश के पश्चिमी छोर पर स्थित आलीराजपुर में चंद्र दर्शन का समय रात करीब 8 बजकर 41 मिनट बताया गया है। इस तरह राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच चंद्रोदय के समय में लगभग 40 मिनट का अंतर हो सकता है।

    नेशनल अवॉर्डी विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के मुताबिक पृथ्वी के भौगोलिक विस्तार और अलग-अलग देशांतर स्थितियों के कारण हर जिले में चांद निकलने का समय एक जैसा नहीं होता। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित जिलों में चंद्रमा पहले दिखाई देता है जबकि पश्चिमी जिलों में इसके दर्शन कुछ देर बाद होते हैं। इसी वजह से सिंगरौली से आलीराजपुर तक चंद्र दर्शन के समय में अंतर देखने को मिलता है।

    बारिश और बादलों से बढ़ सकता है इंतजार

    करवा चौथ के दिन प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर सागर रीवा और शहडोल संभाग में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल इंदौर नर्मदापुरम उज्जैन ग्वालियर और चंबल संभाग में बादल छाए रह सकते हैं। मौसम की ऐसी स्थिति में चंद्रमा के क्षितिज पर आने के बाद भी उसका दीदार तुरंत नहीं हो पाएगा। ऊंची इमारतों पहाड़ियों और स्थानीय मौसम की वजह से भी चांद दिखाई देने में 10 से 15 मिनट की देरी हो सकती है। इसलिए महिलाओं को अपने जिले में बताए गए चंद्रोदय के समय के साथ आसमान की स्थिति पर भी ध्यान देना होगा।

    सरगी से होती है व्रत की शुरुआत

    करवा चौथ पर व्रत शुरू करने से पहले सुबह सरगी ग्रहण करने की परंपरा है। आमतौर पर सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। इसमें फल मिठाई मेवे और फेनी जैसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। दिनभर बिना भोजन और पानी के रहने से पहले पौष्टिक आहार लेना उपयोगी हो सकता है। व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए पर्याप्त पौष्टिक भोजन करना चाहिए। यदि किसी को मधुमेह या कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या है तो निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

    चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है व्रत

    करवा चौथ पर महिलाएं भगवान गणेश चौथ माता और चंद्र देव की पूजा करती हैं। परंपरा के अनुसार रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। इसके बाद व्रत खोलने की मान्यता है। कई परिवारों में करवा चौथ की कथा सुनने और पूजा की विधि पूरी करने का विशेष महत्व होता है।

    इस बार प्रदेश के अलग-अलग शहरों में चंद्र दर्शन का समय अलग रहेगा और मौसम भी भूमिका निभा सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने जिले के अनुमानित चंद्रोदय समय की जानकारी पहले से रखनी चाहिए। बादलों की वजह से चांद दिखाई देने में देरी हो तो धैर्य रखें और पूजा से जुड़ी परंपराओं का पालन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार करें।

  • ‘जीव-जगत-जगदीश्वर’ थीम पर सजा आध्यात्मिक मंच, आधुनिक तकनीक और ध्यान के संगम ने दिया शांति का संदेश

    ‘जीव-जगत-जगदीश्वर’ थीम पर सजा आध्यात्मिक मंच, आधुनिक तकनीक और ध्यान के संगम ने दिया शांति का संदेश


    भोपाल  । भोपाल में Healing for World Peace 2.0 का आयोजन व्यक्तिगत शांति और वैश्विक सद्भाव के संदेश के साथ संपन्न हुआ। इस आध्यात्मिक पहल का उद्देश्य लोगों को ध्यान योग और आत्मचिंतन के माध्यम से अपने भीतर शांति तलाशने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम की केंद्रीय थीम जीव-जगत-जगदीश्वर रही। इसके जरिए मानव जीवन प्रकृति और परम चेतना के बीच संबंध को समझने तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। आयोजन में पारंपरिक आध्यात्मिक विधाओं के साथ आधुनिक तकनीक का अनूठा मेल देखने को मिला।

    Healing for World Peace 2.0 को एक ऐसे साझा मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया जहां लोग रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर होकर अपने मन और विचारों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। कार्यक्रम में 360 डिग्री इमर्सिव विजुअल अनुभव और हेडफोन आधारित ऑडियो के माध्यम से प्रतिभागियों को एक अलग तरह का अनुभव देने का प्रयास किया गया। योग ध्यान एनर्जी हीलिंग और कथा जैमिंग जैसी गतिविधियों ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों को आत्मचिंतन करने और मानसिक संतुलन की अहमियत समझने का अवसर मिला।

    कार्यक्रम में ऊर्जा गुरु आयुष गुप्ता योगिनी आरविका गुप्ता और कथावाचिका पलक किशोरी की उपस्थिति ने आध्यात्मिक वातावरण को खास बनाया। आयोजन के दौरान यह संदेश दिया गया कि विश्व शांति की शुरुआत किसी बड़े बदलाव से पहले व्यक्ति के अपने भीतर से होती है। जब मनुष्य अपने विचारों भावनाओं और व्यवहार में संतुलन विकसित करता है तो उसका असर उसके परिवार और आसपास के समाज पर भी पड़ता है। इसी सकारात्मक प्रभाव को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाकर अधिक संवेदनशील और शांतिपूर्ण समाज की कल्पना की जा सकती है।

    आयोजन का उद्देश्य केवल लोगों को कुछ समय के लिए ध्यान और आध्यात्मिकता से जोड़ना नहीं था बल्कि शांति के विचार को निरंतर जनअभियान का रूप देना भी रहा। कार्यक्रम ने अलग अलग स्थानों और देशों से जुड़े प्रतिभागियों को साझा उद्देश्य के साथ जोड़ने का प्रयास किया। सामूहिक प्रार्थना सकारात्मक संकल्प और आध्यात्मिक जागरूकता के जरिए लोगों को यह समझाने पर जोर दिया गया कि समाज में शांति और सद्भाव कायम करने के लिए हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव और मानसिक दबाव के बीच ऐसे आयोजन लोगों को अपने लिए समय निकालने और जीवन को अधिक सजगता से देखने की प्रेरणा दे सकते हैं। योग और ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति अपने विचारों को समझने तथा भावनात्मक संतुलन विकसित करने की दिशा में प्रयास कर सकता है। कार्यक्रम में प्रस्तुत आध्यात्मिक विचारों का केंद्र भी यही रहा कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से होनी चाहिए और व्यक्ति की सकारात्मकता उसके व्यवहार के जरिए दूसरों तक पहुंच सकती है।

    आयोजकों की दीर्घकालिक परिकल्पना भोपाल को ध्यान आध्यात्मिकता आत्म-अन्वेषण और विश्व शांति से जुड़े आयोजनों के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की है। इस दिशा में ऐसे कार्यक्रमों को अहम माना जा रहा है जो विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों को साझा मंच पर लाकर संवाद और सकारात्मक सोच को बढ़ावा दें।

    इस आयोजन को सफल बनाने में कई शैक्षणिक संस्थानों संगठनों और सहयोगी भागीदारों का योगदान रहा। इनमें SAGE University Manasrovar College LNCT Sagar Group Taj Lakefront Sukoon-e-Bhopal WiseLife Madhya Pradesh Tourism MP Culture Department Media Square GA Studios Anantam Agarwal Jewellers और The Fifth Veda सहित अन्य सहयोगी शामिल रहे। आयोजकों ने दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दिलीप सूर्यवंशी और SAGE University के संजीव अग्रवाल सहित सभी सहयोगियों प्रतिभागियों और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    Healing for World Peace 2.0 का मूल संदेश यही रहा कि शांति की शुरुआत स्वयं से होती है। व्यक्ति जब अपने भीतर करुणा सकारात्मकता और संतुलन विकसित करता है तो वह अपने आसपास भी बेहतर वातावरण बनाने में योगदान दे सकता है। इसी सोच के साथ भोपाल में आयोजित यह पहल व्यक्तिगत जागरूकता को व्यापक सामाजिक सद्भाव और विश्व शांति के विचार से जोड़ने का प्रयास बनी।

  • भोपाल में शरद पूर्णिमा पर आस्था का महासंगम, रावतपुरा सरकार के सानिध्य में होगा कोटि हरिद्रा कुमकुम अर्चन

    भोपाल में शरद पूर्णिमा पर आस्था का महासंगम, रावतपुरा सरकार के सानिध्य में होगा कोटि हरिद्रा कुमकुम अर्चन


    भोपाल । शरद पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को राजधानी भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मां श्री राजराजेश्वरी को समर्पित भव्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा। सद्गुरु देव रावतपुरा सरकार के आयोजन में श्री राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुमकुम अर्चन यानी एक करोड़ अर्चन का विशेष पूजन होगा। इस कार्यक्रम को लेकर लाल परेड ग्राउंड में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजकों को उम्मीद है कि भोपाल सहित मध्यप्रदेश के अलग अलग जिलों से करीब 25 हजार श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने पहुंचेंगे। बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में बदलाव की तैयारी की है।

    कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार शाम 6 बजे से होगी। श्रद्धालुओं को शाम 5 बजकर 50 मिनट से पहले आयोजन स्थल पर पहुंचने की सलाह दी गई है। अनुष्ठान में मां राजराजेश्वरी को अर्पित की जाने वाली पूजन और हवन सामग्री देश के विभिन्न राज्यों के साथ पड़ोसी देश नेपाल से भी विशेष रूप से मंगवाई गई है। आयोजन में करीब 238 तरह की पूजन सामग्री का उपयोग किया जाएगा। आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने साथ चावल का एक दाना भी लेकर न आएं। अनुष्ठान की विशेष व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थल पर तैयारियां की गई हैं।

    शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पूजा अर्चना तथा विभिन्न अनुष्ठान किए जाते हैं। भोपाल में होने वाला यह आयोजन भी इसी धार्मिक आस्था से जुड़ा है। मां राजराजेश्वरी की आराधना और कोटि हरिद्रा कुमकुम अर्चन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। आयोजन स्थल पर लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए यातायात पुलिस ने विशेष योजना तैयार की है।

    श्रद्धालुओं की भीड़ और वाहनों के दबाव को देखते हुए सोमवार दोपहर 3 बजे से लाल परेड ग्राउंड के आसपास यातायात डायवर्ट किया जाएगा। शहर के सात प्रमुख चौराहों और आसपास के मार्गों पर जरूरत के अनुसार ट्रैफिक व्यवस्था बदली जाएगी। संगम टॉकीज तिराहा भारत टॉकीज चौराहा लिली तिराहा जिन्सी चौराहा एमपी नगर चौराहा रोशनपुरा और मछली घर क्षेत्र में वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। इन मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने की आशंका है।

    एमपी नगर और हबीबगंज की ओर से वीआईपी रोड पॉलिटेक्निक और एयरपोर्ट जाने वाले वाहन लिंक रोड नंबर एक रोशनपुरा बाणगंगा और पॉलिटेक्निक मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। वहीं हमीदिया रोड से रोशनपुरा की ओर जाने वाले यात्री और व्यावसायिक वाहन संगम तिराहा बजरिया 80 फीट रोड अशोका गार्डन प्रभात चौराहा सुभाष ओवरब्रिज डीबी मॉल और बोर्ड ऑफिस होकर जा सकेंगे।

    रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों के लिए भी वैकल्पिक रास्ते निर्धारित किए गए हैं। प्लेटफॉर्म नंबर छह और नादरा बस स्टैंड जाने वाले वाहन पॉलिटेक्निक रेतघाट रॉयल मार्केट और हमीदिया रोड का रास्ता अपना सकेंगे। प्लेटफॉर्म नंबर एक जाने के लिए सुभाष ओवरब्रिज प्रभात चौराहा और 80 फीट रोड का उपयोग किया जा सकता है। एयरपोर्ट और वीआईपी रोड की ओर जाने वाले वाहन लिंक रोड नंबर एक और बाणगंगा मार्ग से निकल सकेंगे।

    यातायात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपने मार्ग की जानकारी लें और संभव हो तो वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें। आयोजन के दौरान एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं रहेगा। धार्मिक आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए प्रशासन यातायात व्यवस्था पर नजर रखेगा।

  • भोपाल में कहां चल रहा था कच्ची शराब का धंधा, आधी रात छापे में टंकियों से मिला 1600 लीटर शराब का भंडार

    भोपाल में कहां चल रहा था कच्ची शराब का धंधा, आधी रात छापे में टंकियों से मिला 1600 लीटर शराब का भंडार

    भोपाल । राजधानी भोपाल में अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग ने रविवार रात शहर के अलग अलग इलाकों में सघन जांच अभियान चलाया। इस दौरान होटल ढाबों और रेस्टोरेंट में दबिश देकर अवैध शराब जब्त की गई। विभाग की कार्रवाई में एक ही दिन में 30 से ज्यादा प्रकरण बनाए गए। सबसे चौंकाने वाला मामला ग्राम बगोनिया से सामने आया जहां टंकियों में पानी की जगह हाथ भट्टी से तैयार की गई शराब भरकर रखी गई थी। आबकारी टीम ने मौके से करीब 1600 लीटर हाथ भट्टी शराब और लहान जब्त किया।

    आबकारी विभाग की यह कार्रवाई उपायुक्त आबकारी केसी अग्निहोत्री और सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र कुमार धाकड़ के निर्देश पर की गई। कंट्रोलर वर्षा उइके ने कार्रवाई के लिए अलग अलग टीमें गठित की थीं। ये टीमें रविवार रात शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचीं और संदिग्ध स्थानों पर जांच शुरू की। अभियान का उद्देश्य अवैध शराब की बिक्री और परिवहन पर रोक लगाना था। कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर जांच की गई और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर प्रकरण दर्ज किए गए।

    भीम नगर की झुग्गी बस्ती और टीला जमालपुरा क्षेत्र में भी आबकारी विभाग की टीम ने कार्रवाई की। सहायक जिला आबकारी अधिकारी शेखर लिखार ने भीम नगर क्षेत्र में जांच की जबकि सीमा कशीसिया की टीम ने टीला जमालपुरा में कार्रवाई की। इसी दौरान टीला जमालपुरा निवासी रमेश अडवाणी को ऑटो में देशी शराब ले जाते हुए पकड़ा गया। विभाग ने शराब के परिवहन से जुड़े मामले में कार्रवाई की।

    इस अभियान में ग्राम बगोनिया की कार्रवाई सबसे अहम रही। आबकारी उप निरीक्षक स्वाति बघेल ने टीम के साथ यहां दबिश दी। जांच के दौरान राहुल पिता प्रेम अहिरवार के पास से 1600 लीटर हाथ भट्टी शराब और लहान बरामद किया गया। जानकारी के मुताबिक शराब को टंकियों में भरकर रखा गया था। इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने के बाद विभाग ने जब्ती की कार्रवाई की। हाथ भट्टी शराब के निर्माण और भंडारण से जुड़े इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की गई।

    आबकारी विभाग ने भोपाल इंदौर रोड पर संचालित होटलों में भी जांच की। सहायक जिला आबकारी अधिकारी प्रीति उइके की टीम ने बैरागढ़ क्षेत्र के होटल रौनक होटल पटेल दआर्क किंग्स क्लबक बाना और बिग चिल की जांच की। टीम ने यहां शराब से संबंधित नियमों का परीक्षण किया और कार्रवाई की। इसके अलावा एमपी नगर क्षेत्र में होटल दिल्ली दरबार होटल वाइड और होटल एवेन्यू सहित अरेरा कॉलोनी के कुसीन कल्चर में भी जांच की गई।

    शरद मिश्रा और उनकी टीम ने इन स्थानों पर कार्रवाई की। विभाग के मुताबिक होटल और रेस्टोरेंट में की गई जांच के दौरान 26 प्रकरण दर्ज किए गए। अन्य इलाकों में हुई कार्रवाई को मिलाकर एक ही दिन में 30 से ज्यादा केस बनाए गए। इस अभियान के जरिए आबकारी विभाग ने अवैध शराब के भंडारण परिवहन और बिक्री के मामलों पर निगरानी बढ़ाने का संकेत दिया है।

    भोपाल में देर रात हुई इस कार्रवाई के बाद अब अवैध शराब के कारोबार से जुड़े मामलों पर विभाग की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। बड़ी मात्रा में हाथ भट्टी शराब और लहान की बरामदगी ने ग्रामीण क्षेत्र में अवैध शराब तैयार करने और उसे जमा करके रखने के मामले को सामने ला दिया है। वहीं शहर के होटलों और ढाबों में जांच से शराब संबंधी नियमों के पालन पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। आबकारी विभाग का यह अभियान अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण की दिशा में की गई कार्रवाई के रूप में सामने आया है।

  • पटना में खरगे के बयान से MP की राजनीति गरमाई, शिवराज से मोहन यादव तक ने उठाए सवाल

    पटना में खरगे के बयान से MP की राजनीति गरमाई, शिवराज से मोहन यादव तक ने उठाए सवाल


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर पटना में की गई टिप्पणी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का घेराव करेंगे। भाजपा कार्यकर्ता रेडक्रॉस हॉस्पिटल के सामने स्थित शिवाजी नगर चौराहे पर एकत्रित होंगे और वहां से पैदल मार्च करते हुए कांग्रेस कार्यालय पहुंचेंगे। इस प्रदर्शन के जरिए भाजपा कांग्रेस नेतृत्व से बयान पर जवाब मांगने की तैयारी में है।
    विवाद की शुरुआत रविवार को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई। बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर बापू सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भाषण दे रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनकी नीतियों पर टिप्पणी कर रहे थे। तभी सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि मोदी नहीं जाने वाले हैं। इसके जवाब में खरगे ने कहा कि मोदी का बाप भी जाएगा। इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में हंगामा हो गया और मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।

    मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि क्या खरगे ने सोनिया गांधी या राहुल गांधी के इशारे पर यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं है तो क्या कांग्रेस अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस्तीफा मांगेगी। शिवराज ने टिप्पणी को भारतीय संस्कृति और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब देने की मांग की।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी खरगे के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना राजनीति की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। खंडेलवाल ने सवाल किया कि खरगे इस तरह के बयान खुद देते हैं या इसके पीछे गांधी परिवार का कोई निर्देश होता है। उनके मुताबिक वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर अपनी भाषा और व्यवहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीति में मर्यादा बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारों का मतभेद स्वाभाविक है लेकिन विरोध करते समय भाषा और व्यवहार में गरिमा बनी रहनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना भी जरूरी है।

    भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और मंत्री विश्वास सारंग ने भी खरगे की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं विश्वास सारंग ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल उचित नहीं है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

    पटना के कार्यक्रम में टिप्पणी के बाद हंगामे की खबर भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक जिस व्यक्ति ने बीच में अपनी बात कही थी उसके साथ वहां मौजूद कुछ लोगों ने मारपीट की। बाद में उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसकी पूरी बात नहीं सुनी गई थी और वह कह रहा था कि विद्रोह के बिना मोदी नहीं जाएंगे। इस घटनाक्रम ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

    अब भोपाल में होने वाला भाजपा का प्रदर्शन इस राजनीतिक विवाद का अगला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। कांग्रेस कार्यालय के घेराव के दौरान भाजपा नेता खरगे के बयान को लेकर विरोध दर्ज कराएंगे। दूसरी ओर इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल विवाद का केंद्र बयान की भाषा और राजनीतिक नेताओं से सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा बना हुआ है।

  • हाथों में हथकड़ी फिर भी बेफिक्र आरोपी! भोपाल जिला अदालत के बाहर सिगरेट पीने और फोन चलाने का वीडियो वायरल

    हाथों में हथकड़ी फिर भी बेफिक्र आरोपी! भोपाल जिला अदालत के बाहर सिगरेट पीने और फोन चलाने का वीडियो वायरल


    भोपाल । भोपाल की जिला अदालत के बाहर पुलिस अभिरक्षा में मौजूद हथकड़ी पहने एक आरोपी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो में आरोपी पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में सिगरेट पीते हुए और मोबाइल फोन पर बातचीत करते हुए दिखाई दे रहा है। घटना का वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है जो रविवार को सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो के प्रसारित होने के बाद यह सवाल चर्चा में है कि अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरोपी को इस तरह की सुविधाएं कैसे मिल रही थीं।

    वायरल वीडियो में एक व्यक्ति के हाथों में हथकड़ी लगी दिखाई देती है। इसके बावजूद वह सामान्य अंदाज में सिगरेट पीता हुआ मोबाइल फोन पर बात करता नजर आ रहा है। वीडियो में आसपास पुलिसकर्मी भी मौजूद दिखाई देते हैं। ऐसे में यह मामला पुलिस अभिरक्षा के दौरान निगरानी और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के पालन से जुड़ा सवाल बन गया है।

    पुलिस अभिरक्षा में किसी आरोपी को अदालत में पेश करने या उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में हथकड़ी लगे व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन दिखाई देना और उसका सिगरेट पीना कई सवाल खड़े करता है। सबसे अहम सवाल यह है कि मोबाइल फोन उसे किसने उपलब्ध कराया और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में वह कितनी देर तक इसका इस्तेमाल करता रहा। हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर यह स्पष्ट नहीं किया जा सकता कि घटना से पहले और बाद में क्या परिस्थितियां थीं या मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी क्या थी।

    इस मामले में आरोपी की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो किस समय बनाया गया और उस दौरान आरोपी को अदालत परिसर के बाहर किस मामले में लाया गया था। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी किस थाने या पुलिस इकाई से संबंधित थे इसकी जानकारी भी फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम के सभी पहलुओं की पुष्टि होना अभी बाकी है।

    मामले को लेकर एक और महत्वपूर्ण सवाल संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और जवाबदेही का है। यदि वीडियो में दिखाई दे रही परिस्थितियां सही हैं तो यह जांच का विषय होगा कि आरोपी को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति किन परिस्थितियों में मिली और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया गया या नहीं। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो की प्रामाणिकता और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की आधिकारिक जांच जरूरी होगी।

    फिलहाल भोपाल पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस मामले में किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो की जांच की जाती है या नहीं और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर कोई स्पष्टीकरण जारी होता है या नहीं। वीडियो ने अदालत परिसर के बाहर पुलिस अभिरक्षा में निगरानी की व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • भोपाल में भूमिगत गैस लाइन में आग से मचा हड़कंप: छोला इलाके में ब्रिज के पास उठीं ऊंची लपटें; पुलिस ने भीड़ हटाई और फायर टीम ने पाया काबू

    भोपाल में भूमिगत गैस लाइन में आग से मचा हड़कंप: छोला इलाके में ब्रिज के पास उठीं ऊंची लपटें; पुलिस ने भीड़ हटाई और फायर टीम ने पाया काबू


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के छोला इलाके में शनिवार दोपहर थिंक गैस की भूमिगत पाइपलाइन में आग लगने से हड़कंप मच गया। घटना छोला ब्रिज के पास हुई जहां मेट्रो निर्माण का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जेसीबी से खुदाई के दौरान गैस पाइपलाइन में लीकेज हुआ और इसके बाद आग की लपटें उठने लगीं। बताया गया कि आग की लपटें करीब 10 फीट तक पहुंच रही थीं। अचानक लगी आग को देखकर आसपास मौजूद लोग घबरा गए और ब्रिज के पास लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने आग बुझाने का प्रयास किया और संबंधित गैस कंपनी से पाइपलाइन की सप्लाई बंद कराई गई। गैस की आपूर्ति बंद होने के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। घटना के बाद इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली।
    दोपहर साढ़े 12 बजे के आसपास हुई घटना
    जानकारी के अनुसार घटना शनिवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे की है। छोला ब्रिज के पास से थिंक गैस की भूमिगत पीएनजी पाइपलाइन गुजरती है। इसी क्षेत्र में मेट्रो निर्माण से जुड़ा काम किया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि खुदाई के दौरान जेसीबी से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई और गैस का रिसाव शुरू हो गया। इसके बाद आग लग गई और लपटें तेजी से ऊपर उठने लगीं। हालांकि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के दौरान आग की ऊंची लपटें देखकर आसपास मौजूद लोग सतर्क हो गए और मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया।
    पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को हटाया
    गैस लाइन में आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। ब्रिज के पास आग देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने लोगों को घटनास्थल से दूर किया ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए। छोला फायर टीम के फायर फाइटर पंकज यादव सहित अन्य कर्मचारियों ने आग बुझाने का मोर्चा संभाला। दमकलकर्मियों ने पानी की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। लेकिन गैस लाइन से रिसाव जारी रहने की स्थिति में आग को पूरी तरह बुझाना चुनौतीपूर्ण हो सकता था। ऐसे में गैस कंपनी से संपर्क कर लाइन बंद कराई गई।
    गैस सप्लाई बंद होने के बाद बुझी आग
    जानकारी के मुताबिक थिंक गैस कंपनी से पाइपलाइन की सप्लाई बंद कराई गई। इसके बाद दमकल टीम आग पर पूरी तरह काबू पाने में सफल रही। आग बुझने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत महसूस की। घटना में किसी के हताहत होने या घायल होने की जानकारी खबर में नहीं दी गई है। हालांकि इस तरह की घटनाओं में गैस रिसाव के कारण आग दोबारा भड़कने का खतरा बना रह सकता है इसलिए पाइपलाइन की जांच और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
    पहले भी सामने आ चुका है गैस लाइन लीकेज का मामला
    भोपाल में गैस पाइपलाइन लीकेज की यह पहली घटना नहीं है। खबर के अनुसार कुछ महीने पहले शाहपुरा थाने के सामने भी गैस लाइन में लीकेज हुआ था। छोला ब्रिज के पास हुई ताजा घटना ने निर्माण कार्य के दौरान भूमिगत पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मेट्रो और अन्य निर्माण परियोजनाओं के दौरान जमीन के नीचे मौजूद गैस तथा दूसरी उपयोगी सेवाओं की पाइपलाइन को नुकसान से बचाना जरूरी है। ऐसे मामलों में खुदाई से पहले संबंधित लाइनों की सही पहचान और सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतना महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल छोला ब्रिज के पास लगी आग पर काबू पा लिया गया है और घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

  • भोपाल के मास्टर प्लान पर किसानों और व्यापारियों ने उठाए सवाल, कृषि जमीन का लैंडयूज बदलने और 45 मीटर सड़क के प्रस्ताव का विरोध

    भोपाल के मास्टर प्लान पर किसानों और व्यापारियों ने उठाए सवाल, कृषि जमीन का लैंडयूज बदलने और 45 मीटर सड़क के प्रस्ताव का विरोध


    भोपाल । भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर विरोध और आपत्तियों का सिलसिला तेज हो गया है। अब तक योजना के प्रस्तावों पर 5000 से ज्यादा आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। इन आपत्तियों की छंटनी करने में करीब 15 दिन लगने का अनुमान है। इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से सुनवाई का शेड्यूल जारी किया जाएगा। बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में बदलाव कृषि भूमि के उपयोग में परिवर्तन अवैध निर्माण और चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव को लेकर लोगों ने सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं। शनिवार रात 12 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा बताई गई है। अंतिम समय में आवेदन करने वाले लोगों को तकनीकी परेशानी या समयसीमा को लेकर असमंजस का सामना न करना पड़े इसे लेकर भी मांग उठाई गई है।

    शाहपुरा स्थित टाउन एंड कंट्री प्लानिंग यानी टीएंडसीपी कार्यालय में पिछले दो दिनों से आपत्तियां दर्ज कराने के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ी हुई है। शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के साथ व्यापारी और स्थानीय रहवासी भी कार्यालय पहुंचे। लोगों ने मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में प्रस्तावित बदलावों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। कई लोगों की चिंता निर्माण और जमीन के उपयोग से जुड़े प्रावधानों को लेकर है। किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रहना चाहिए जबकि कुछ स्थानीय रहवासी प्रस्तावित चौड़ी सड़कों और अन्य नियोजन प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं।

    मास्टर प्लान पर आपत्ति और सुझाव देने की समयसीमा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने संयुक्त संचालक टीएंडसीपी को आवेदन भेजकर अंतिम तारीख और समय को लेकर स्पष्ट जानकारी देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि विभिन्न संस्थाएं और नागरिक समूह योजना पर आपत्तियां और सुझाव जुटा रहे हैं। ऐसे में अंतिम दिनों में कार्यालय बंद रहने या ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी परेशानी आने से किसी नागरिक की आपत्ति दर्ज होने से छूट सकती है। आवेदन में काउंटर चालू रखने स्टाफ की उपलब्धता और संपर्क अधिकारी की जानकारी वेबसाइट तथा नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करने की मांग भी की गई है। साथ ही आवेदन की रसीद पर तारीख समय आवक नंबर और जमा किए गए दस्तावेजों का विवरण दर्ज करने का सुझाव दिया गया है।

    क्रेडाई की ओर से भेजे गए आवेदन में मध्य प्रदेश राजपत्र में 25 सितंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट के संदर्भ में आपत्ति और सुझाव देने की समयसीमा का उल्लेख किया गया है। आवेदन के मुताबिक प्रकाशन का दिन छोड़कर 30 दिनों की गणना करने पर अंतिम दिन 25 अक्टूबर पड़ता है। इसी कारण विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि काउंटर ईमेल और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन किस तारीख और समय तक स्वीकार किए जाएंगे। अंतिम समयसीमा को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना इसलिए जरूरी है ताकि लोगों को आवेदन जमा करने में परेशानी न हो।

    मास्टर प्लान को लेकर किसानों की सबसे बड़ी चिंता बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि और उसके भू-उपयोग में प्रस्तावित बदलाव हैं। किसानों का आरोप है कि नए ड्राफ्ट में कुछ कृषि भूमि को दूसरी श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव है जिससे भविष्य में खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। किसान प्रतिनिधि अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक खेती ही कई परिवारों की आय का प्रमुख साधन है। इसी वजह से किसान भोजताल संरक्षण जोन एक यानी BIZ-1 और जोन दो यानी BIZ-2 को हटाने तथा कृषि भूमि का लैंडयूज कृषि ही बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।

    इसके अलावा बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में बदलाव को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि तालाब के जलग्रहण क्षेत्र और आसपास की जमीन के उपयोग से जुड़े फैसलों पर पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वहीं मिसरोद के रहवासियों की ओर से 45 मीटर चौड़ी सड़क के प्रस्ताव को हटाने की मांग भी उठाई गई है। किसानों और स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों में कृषि भूमि को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं।

    अब विभाग के सामने हजारों आपत्तियों की जांच और उनकी श्रेणीवार छंटनी करने की चुनौती है। छंटनी पूरी होने के बाद सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया जाएगा। इसके बाद संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलने की उम्मीद है। भोपाल मास्टर प्लान 2047 शहर के भविष्य के विकास और भूमि उपयोग से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसलिए किसानों व्यापारियों और रहवासियों की आपत्तियों पर सुनवाई और प्रस्तावों के प्रभावों का आकलन आने वाले समय में इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा रहेगा।

  • केरवा डैम के FTL और ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल, कहीं रिटेनिंग वॉल तो कहीं पानी में मिट्टी का भराव; NGT को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

    केरवा डैम के FTL और ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल, कहीं रिटेनिंग वॉल तो कहीं पानी में मिट्टी का भराव; NGT को सौंपी जाएगी रिपोर्ट


    भोपाल । भोपाल के केरवा डैम के आसपास अतिक्रमण और निर्माण से जुड़े मामलों को लेकर किए गए निरीक्षण में 19 स्थानों पर कथित अतिक्रमण दर्ज किए गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के आदेश के बाद गठित टीम ने डैम के फुल टैंक लेवल यानी FTL बफर जोन और ग्रीन बेल्ट का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में निजी निर्माणों के साथ मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम और जल संसाधन विभाग के निर्माणों का भी उल्लेख किया गया है। सूची में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह और पूर्व विधायक जितेंद्र डागा के परिवार से जुड़े निर्माणों का भी जिक्र है। निरीक्षण दल की रिपोर्ट एनजीटी में पेश की जानी है। फिलहाल रिपोर्ट में दर्ज विवरण और आरोपों के आधार पर मामलों की जांच तथा संबंधित निर्माणों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

    निरीक्षण के दौरान मेंडोरा बरखेड़ी बाज्याफ्त कुशलपुरा मुल्ला जी की टेकरी फतेहपुर डोगरा महुआखेड़ा और मीटूखेड़ी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में निर्माण और जमीन के भराव से जुड़ी गतिविधियां दर्ज की गईं। टीम ने GPS लोकेशन और समय के साथ तस्वीरें लीं। निरीक्षण में जलाशय के किनारे मिट्टी और पत्थरों का भराव पानी की ओर जाती रिटेनिंग वॉल सीमेंट कंक्रीट के पिलर और निर्माणाधीन परिसरों जैसी स्थितियां सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ जगहों पर डैम की सीमा दर्शाने वाली मुनारें गायब मिलीं जबकि एक स्थान पर सीमा चिह्न खिसकाए जाने की बात दर्ज की गई है। इससे FTL की वास्तविक सीमा निर्धारित करने को लेकर सवाल उठते हैं।

    रिपोर्ट में मेंडोरा गांव में सबसे अधिक 12 अतिक्रमण दर्ज होने की बात कही गई है। इनमें मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का पिकनिक रेस्टोरेंट और जल संसाधन विभाग का केरवा रेस्ट हाउस भी शामिल बताए गए हैं। पर्यटन निगम के परिसर में ग्रीन बेल्ट और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित भूमि पर निर्माण होने का उल्लेख है। वहीं जल संसाधन विभाग के रेस्ट हाउस के पास FTL क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट के पिलर बनाए जाने और बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की बात भी निरीक्षण विवरण में दर्ज है। इन मामलों में संबंधित विभागों की स्थिति और निर्माणों की अनुमति से जुड़े दस्तावेज अहम होंगे।

    निजी निर्माणों के संबंध में रिपोर्ट में अजय सिंह से जुड़ी भूमि पर FTL क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन पर पक्के कमरे होने का उल्लेख किया गया है। पूर्व विधायक जितेंद्र डागा की पत्नी निशा डागा से जुड़ी जमीन पर लगभग 0.93 हेक्टेयर क्षेत्र में मिट्टी और पत्थरों का भराव तथा निर्माण कार्य जारी होने की बात कही गई है। इसके अलावा कई अन्य लोगों के नाम भी सूची में शामिल हैं जिन पर FTL में रिटेनिंग वॉल बनाने या ग्रीन बेल्ट में निर्माण करने के आरोप दर्ज हैं। बरखेड़ी बाज्याफ्त क्षेत्र में प्रकाश झा से जुड़े PJP एस्टेट के संबंध में भी आरक्षित भूमि पर रिटेनिंग वॉल और RCC सड़कें होने का उल्लेख है। इन सभी विवरणों को निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।

    रिपोर्ट में कुशलपुरा क्षेत्र में डैम की सीमा बताने वाली मुनार खिसकाए जाने और FTL के भीतर बाउंड्री बनाकर पानी के बहाव को प्रभावित करने का आरोप भी दर्ज है। कुछ स्थानों पर निजी तालाब और व्यावसायिक गतिविधियां होने की बात कही गई है। मुल्ला जी की टेकरी में FTL के भीतर कई परतों वाली रिटेनिंग वॉल और बफर जोन या ग्रीन बेल्ट में बंगले का निर्माण दर्ज किया गया है। फतेहपुर डोगरा में जमीन के भराव और RCC दीवार के निर्माण का उल्लेख है। निरीक्षण दल ने इन गतिविधियों को तस्वीरों और ड्रोन के माध्यम से दर्ज करने की बात कही है।

    महुआखेड़ा में भी अतिक्रमण का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार एनजीटी ने 4 फरवरी 2026 के आदेश में वहां का कोपरा यानी मिट्टी और पत्थरों का भराव हटाने का निर्देश दिया था लेकिन निरीक्षण के समय यह मौजूद मिला। वहीं मीटूखेड़ी में केरवा नदी पर बिना अनुमति और वैज्ञानिक अध्ययन के सीमेंट कंक्रीट का पुल बनाए जाने की बात दर्ज की गई है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इससे नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ सकता है और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

    वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017 का नियम 4 आर्द्रभूमि में अतिक्रमण भराव और स्थायी निर्माण जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध से संबंधित है। जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 भी जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने का कानूनी आधार प्रदान करता है। अब निरीक्षण रिपोर्ट एनजीटी के सामने रखे जाने के बाद संबंधित निर्माणों की अनुमति नियमों के पालन और कथित अतिक्रमणों पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।