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  • MLA रेस्ट हाउस विवाद ने लिया नया मोड़ आरोपी पक्ष ने थाने में पिटाई का लगाया आरोप अब होगी पुलिस जांच

    MLA रेस्ट हाउस विवाद ने लिया नया मोड़ आरोपी पक्ष ने थाने में पिटाई का लगाया आरोप अब होगी पुलिस जांच


    नई दिल्ली। भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित एमएलए रेस्ट हाउस के बाहर कांग्रेस विधायक दिनेश गुर्जर के बेटे देवराज सिंह गुर्जर से कथित मारपीट के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। घटना में आरोपी बनाए गए लक्की यादव की मां ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत कर पुलिस कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

    आरोपी पक्ष की ओर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घटना के दौरान पहले उनके बेटों के साथ एमएलए रेस्ट हाउस के बाहर मारपीट की गई। इसके बाद अरेरा हिल्स थाने में भी पुलिस की मौजूदगी में उनके बेटों के साथ कथित रूप से मारपीट हुई। शिकायत में कहा गया है कि दोनों युवकों के शरीर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण उनकी शिकायत पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई।

    पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने शिकायत मिलने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर विधायक पुत्र देवराज सिंह गुर्जर ने भी पूरे घटनाक्रम को लेकर अपना पक्ष रखा है। उनके अनुसार 24 जून की रात वह मालवीय नगर स्थित एमएलए रेस्ट हाउस स्थित अपने आवास की बालकनी में टहल रहे थे। इसी दौरान घर के बाहर कुछ युवक शराब पी रहे थे। उन्हें वहां से हटने के लिए कहने पर विवाद शुरू हो गया।

    देवराज का आरोप है कि विरोध करने पर चारों युवक उनके घर की सीढ़ियों तक पहुंच गए और शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगे। मना करने पर उनके साथ मारपीट और छीनाझपटी की गई। उन्होंने बताया कि शोर सुनकर उनके दोस्त मौके पर पहुंचे और बीच बचाव कर उन्हें बचाया। आरोप है कि जाते समय युवक उन्हें धमकी देकर वहां से चले गए।

    घटना के बाद देवराज ने जेपी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया और अरेरा हिल्स थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।

    अब आरोपी पक्ष की ओर से लगाए गए नए आरोपों के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। पुलिस दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान क्या हुआ और किस पक्ष के आरोप सही हैं। फिलहाल पुलिस ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है और कहा है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा

    सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार की गई प्रमिला तिवारी के खिलाफ कई अन्य पीड़ित भी सामने आए। जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसे फर्जी भर्ती रैकेट का खुलासा हुआ जिसने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के भरोसे और सपनों दोनों को निशाना बनाया।

    जानकारी के अनुसार गिरोह बेरोजगार युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। आरोप है कि युवाओं से दो लाख से पांच लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी और बदले में उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए जाते थे। इन नियुक्ति पत्रों में एम्स, वन विभाग, रेलवे, बैंक और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में नियुक्ति दर्शाई जाती थी। कई युवाओं को तो भारतीय वन सेवा अधिकारी, बैंक क्लर्क और रेलवे कर्मचारी तक नियुक्त किए जाने का दावा किया गया।

    मामले को और गंभीर बनाता है फर्जी दस्तावेजों का स्वरूप। जांच में ऐसे नियुक्ति पत्र सामने आए हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग से संबंधित भर्ती दिखाते हुए मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। आरोप है कि जालसाजों ने दस्तावेजों को इतना वास्तविक बनाने की कोशिश की कि पीड़ितों को किसी प्रकार का संदेह न हो। यही वजह रही कि कई युवा लंबे समय तक खुद को चयनित कर्मचारी मानते रहे और बाद में ठगी का शिकार होने का पता चला।

    पीड़ितों के अनुसार गिरोह भरोसा जीतने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। युवाओं को सरकारी कार्यालयों के आसपास बुलाया जाता था ताकि उन्हें लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध है। गिरोह के अन्य सदस्य खुद को पहले से चयनित कर्मचारी बताकर विश्वास पैदा करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी नियुक्ति भी इसी माध्यम से हुई है, जिससे नए अभ्यर्थी आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।

    जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रमिला तिवारी और उसके सहयोगियों के पास बेरोजगार युवाओं की शैक्षणिक जानकारी और मोबाइल नंबर पहले से उपलब्ध थे। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि युवाओं का व्यक्तिगत डाटा कहीं से अवैध रूप से प्राप्त किया गया था। अब पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि आखिर यह संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।

    टीटी नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी नियुक्ति पत्रों, बैंक लेनदेन और आरोपियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने युवाओं को अब तक ठगी का शिकार बनाया गया है।

    यह मामला बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं के साथ किए जा रहे संगठित अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें और किसी भी व्यक्ति को नौकरी दिलाने के नाम पर रकम न दें।

  • ग्राहक अधिकारों की बड़ी जीत: होटल रेडिसन पर जुर्माना, अतिरिक्त वसूली और मानसिक प्रताड़ना का देना होगा हर्जाना

    ग्राहक अधिकारों की बड़ी जीत: होटल रेडिसन पर जुर्माना, अतिरिक्त वसूली और मानसिक प्रताड़ना का देना होगा हर्जाना


    भोपाल। भोपाल में उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने प्रतिष्ठित होटल रेडिसन के खिलाफ फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी। करीब चार वर्ष पुराने इस मामले में आयोग ने होटल प्रबंधन को अतिरिक्त वसूली गई राशि लौटाने के साथ ही उपभोक्ता को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।

    मामला वर्ष 2022 का है जब हुकुम सिंह अपने चार साथियों के साथ भोपाल स्थित होटल रेडिसन में ठहरे थे। होटल में ठहरने के दौरान उन्होंने पानी की एक बोतल खरीदी जिसके लिए उनसे 175 रुपये वसूले गए जबकि बोतल पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य केवल 60 रुपये था। ग्राहक ने मौके पर इस पर आपत्ति दर्ज कराई लेकिन होटल प्रबंधन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

    लंबी सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले का निपटारा करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। आयोग ने माना कि होटल और रेस्तरां जैसी संस्थाएं अपने यहां उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं सेवा गुणवत्ता और माहौल के आधार पर कुछ उत्पादों के लिए एमआरपी से अधिक कीमत वसूल सकती हैं। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिरिक्त वसूली गई राशि पर मनमाने तरीके से जीएसटी लगाना नियमों के अनुरूप नहीं है और ऐसा करना उपभोक्ता हितों के खिलाफ माना जाएगा।

    आयोग ने होटल रेडिसन की सेवा में कमी पाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आदेश के अनुसार होटल को ग्राहक से अतिरिक्त वसूली गई 10.80 रुपये की राशि वापस करनी होगी। इसके अलावा मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 5000 रुपये का मुआवजा तथा कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के रूप में 3000 रुपये का भुगतान भी करना होगा। इस तरह होटल को कुल मिलाकर लगभग 8000 रुपये की राशि उपभोक्ता को देनी होगी।

    उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो होटल प्रबंधन को पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह फैसला न केवल संबंधित उपभोक्ता के लिए राहत लेकर आया है बल्कि उन सभी ग्राहकों के लिए एक उदाहरण बन गया है जो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और गलत वसूली के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उपभोक्ता संरक्षण कानूनों की प्रभावशीलता को दर्शाता है और व्यावसायिक संस्थानों को भी यह संदेश देता है कि ग्राहकों के साथ पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उपभोक्ता आयोग का यह फैसला आने वाले समय में ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है और उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग बनाएगा।

  • मिशन 2047 के नाम पर देशविरोधी साजिश ATS जांच में चौंकाने वाले खुलासे ब्रेनवॉश से टारगेट नेटवर्क तक का दावा

    मिशन 2047 के नाम पर देशविरोधी साजिश ATS जांच में चौंकाने वाले खुलासे ब्रेनवॉश से टारगेट नेटवर्क तक का दावा


    मध्यप्रदेश । भोपाल में आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी ATS द्वारा की जा रही जांच में कथित आतंकी मॉड्यूल से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं। एजेंसी की हिरासत में मौजूद आरोपियों से पूछताछ के दौरान ऐसे इनपुट मिले हैं जिनके आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और सामने आई जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार आरोपी इजहार उल हक से पूछताछ में एक कथित नेटवर्क और उसके उद्देश्यों को लेकर कई दावे सामने आए हैं। पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से बताया कि कुछ लोग एक विशेष एजेंडे के तहत काम कर रहे थे और सोशल मीडिया तथा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एजेंसियां इन दावों की गहन जांच कर रही हैं।

    ATS के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में थे। टेलीग्राम और वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग कथित तौर पर संवाद और विचारों के आदान प्रदान के लिए किया जा रहा था। एजेंसी अब इन डिजिटल संपर्कों और चैट रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कर रही है ताकि नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उसके विस्तार का पता लगाया जा सके।

    पूछताछ में आरोपी फराज से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक फराज पिछले कई वर्षों से कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसकी पहचान कुछ ऐसे लोगों से कराई गई थी जो विदेश में बैठे कथित हैंडलर्स से जुड़े बताए जा रहे हैं। एजेंसी अब इन संपर्कों की प्रामाणिकता और उनके संभावित प्रभाव की जांच कर रही है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर वैचारिक प्रभाव डालकर लोगों को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। इसी कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

    सूत्रों के अनुसार कुछ आरोपियों ने विभिन्न राज्यों के लोगों के संपर्क में होने की बात भी स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क किन क्षेत्रों तक सक्रिय था और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

    ATS अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। एजेंसी यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा। इसी कारण जांच से जुड़ी जानकारियों को सावधानीपूर्वक परखा जा रहा है।

    इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल माध्यमों के जरिए फैलाए जाने वाले कट्टरपंथी विचारों और संदिग्ध नेटवर्क की चुनौती को सामने ला दिया है। जांच एजेंसियां लगातार ऐसे तत्वों पर नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं कि किसी भी प्रकार की अवैध या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

  • करंट का कहर और सिस्टम की लापरवाही सड़कों पर फैले तारों के जाल में उलझ रही जिंदगियां

    करंट का कहर और सिस्टम की लापरवाही सड़कों पर फैले तारों के जाल में उलझ रही जिंदगियां


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक भले ही धीमी हो लेकिन लोगों की जान पर मंडरा रहा खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर जलभराव और गड्ढों की समस्या के बीच अब बिजली के लटकते तार भी मौत का कारण बन रहे हैं। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों में बिजली व्यवस्था की बदहाली साफ दिखाई दे रही है जहां बाजारों कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर तारों का जाल लोगों की सुरक्षा को चुनौती दे रहा है।

    मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की हालिया रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेशभर में 1963 विद्युत दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 1102 लोगों की मौत हुई जबकि 329 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इतना ही नहीं 1492 पशुओं की भी करंट लगने से जान चली गई। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में औसतन हर दिन तीन लोगों की मौत बिजली हादसों में हो रही है और लगभग हर आठ घंटे में एक व्यक्ति करंट का शिकार बन रहा है।

    भोपाल की स्थिति भी किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। शहर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त इलाकों में बिजली के तार खुलेआम लटकते दिखाई देते हैं। न्यू मार्केट जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में जहां प्रतिदिन हजारों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं वहां खंभों और दुकानों के बीच फैले तार दुर्घटना को आमंत्रण देते नजर आते हैं। पुराने भोपाल की संकरी गलियों में कई स्थानों पर बिजली के तार मकानों की बालकनियों से सटे हुए हैं जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

    शहर के अन्य हिस्सों में भी हालात चिंताजनक हैं। रोशनपुरा चौराहे पर बिजली के तार खंभों से नीचे जमीन तक झूलते दिखाई देते हैं। कमलापति रेलवे स्टेशन के सामने कई जगह तार लोगों के सिर तक पहुंच रहे हैं। एमपी नगर के कोचिंग हब क्षेत्र में छात्रों की भीड़ के बीच सड़कों के ऊपर उलझे तार सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। वहीं 10 नंबर मार्केट क्षेत्र में एक तार जमीन से महज चार फीट की ऊंचाई पर लटका हुआ देखा गया जो किसी भी राहगीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान ऐसे खुले और झूलते तारों से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बारिश के पानी और नमी के कारण करंट फैलने की आशंका बढ़ जाती है जिससे आम नागरिकों के साथ पशुओं की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। इसके बावजूद कई इलाकों में लंबे समय से शिकायतों के बाद भी सुधार कार्य नहीं हो पाए हैं।

    मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा नियमों की अनदेखी जारी रही तो बिजली अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि जमीनी स्तर पर इसका असर अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है।

    प्रदेश में बढ़ते बिजली हादसे इस बात का संकेत हैं कि केवल निर्देश और चेतावनियां पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत है कि प्रशासन और बिजली कंपनियां तत्काल प्रभाव से जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर सुधार कार्य शुरू करें। क्योंकि जब तक सड़कों पर लटकते ये मौत के तार हटाए नहीं जाते तब तक हर बारिश के साथ किसी नई दुर्घटना का खतरा बना रहेगा।

  • एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही

    एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही


    भोपाल । भोपाल के रायसेन रोड पर रविवार रात उस समय अफरा तफरी मच गई जब नगर निगम का एक कंटेनरनुमा ट्रक अचानक आग की चपेट में आ गया। घटना एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के सामने की है जहां से गुजर रहे ट्रक के केबिन से अचानक धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते धुआं आग की लपटों में बदल गया और ट्रक का अगला हिस्सा जलने लगा। घटना के दौरान सड़क पर मौजूद लोगों और ट्रक कर्मचारियों ने साहस दिखाते हुए आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई।

    जानकारी के अनुसार नगर निगम का यह ट्रक आदमपुर स्थित कचरा खंती से वापस लौट रहा था। रात के समय जब वाहन रायसेन रोड पर एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने पहुंचा तब चालक को केबिन से धुआं निकलता दिखाई दिया। उसने तुरंत वाहन रोका और नीचे उतरकर देखा तो केबिन के निचले हिस्से में आग लग चुकी थी। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

    आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद लोग मदद के लिए आगे आए। कुछ लोगों ने अपनी गाड़ियों में रखी पानी की बड़ी बोतलें निकालकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। कर्मचारियों और राहगीरों ने मिलकर आग पर पानी डाला लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि उसे नियंत्रित करना आसान नहीं था। कुछ ही मिनटों में आग ने ट्रक के अगले हिस्से और टायरों को अपनी चपेट में ले लिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के बाद काफी समय तक दमकल वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब आधे घंटे तक आग धधकती रही और लोग अपने स्तर पर उसे बुझाने की कोशिश करते रहे। इस दौरान सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ और आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    घटना के बाद जब ट्रक के दस्तावेजों की जांच की गई तो एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र वर्ष 2021 में ही समाप्त हो चुका था। इसके अलावा ट्रक का इंश्योरेंस वर्ष 2019 से नवीनीकृत नहीं कराया गया था। इतना ही नहीं वाहन का परमिट भी वैध नहीं पाया गया। इस खुलासे ने नगर निगम के वाहन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फिटनेस जांच और समय पर रखरखाव से ऐसे हादसों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। यदि वाहन की तकनीकी जांच समय पर होती रहे तो शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याओं का पहले ही पता लगाया जा सकता है।

    फिलहाल घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है जो राहत की बात है। हालांकि इस हादसे ने नगर निगम की व्यवस्थाओं और पुराने वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

  • मां की दवा बनी मौत की वजह पेट दर्द में खाई शुगर की गोली युवती की चली गई जान

    मां की दवा बनी मौत की वजह पेट दर्द में खाई शुगर की गोली युवती की चली गई जान


    भोपाल । भोपाल के बैरागढ़ इलाके से एक दर्दनाक घटना सामने आई है जहां दवा लेने में हुई कथित गलती एक युवती की जान पर भारी पड़ गई। पेट दर्द और ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान 28 वर्षीय युवती ने अपनी नियमित दवा के साथ गलती से मां की शुगर की दवा भी खा ली। इसके कुछ समय बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान वंदना मीणा के रूप में हुई है जो बैरागढ़ क्षेत्र के गांव बेटा की रहने वाली थी। वंदना अपने परिवार के साथ रहती थी और लंबे समय से ब्लड प्रेशर तथा पेट दर्द की समस्या से जूझ रही थी। परिजनों ने बताया कि रविवार देर रात उसे अचानक पेट दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उसने अपनी नियमित दवा ली लेकिन इसी दौरान गलती से अपनी मां की शुगर नियंत्रित करने वाली दवा भी खा ली।

    दवा लेने के कुछ समय बाद वंदना की हालत बिगड़ने लगी। उसे बेचैनी महसूस हुई और स्वास्थ्य तेजी से खराब होने लगा। परिवार के सदस्य घबरा गए और तत्काल उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया और हालत को संभालने का प्रयास किया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका।

    इलाज के दौरान सोमवार तड़के वंदना ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन ने मामले की सूचना बैरागढ़ पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेजा गया जहां सोमवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था और दवा के सेवन का इसमें कितना योगदान रहा।

    जानकारी के अनुसार वंदना के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। वह परिवार के छह भाई बहनों में शामिल थी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उसका जीवन सामान्य रूप से चल रहा था लेकिन एक छोटी सी चूक ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घटना के बाद घर में शोक का माहौल है और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अलग अलग बीमारियों की दवाओं को बिना जांचे परखे लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेष रूप से मधुमेह और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की दवाओं का असर शरीर पर अलग तरीके से पड़ता है। इसलिए दवा लेते समय पूरी सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

    फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर दवा सेवन में सतर्कता की आवश्यकता की गंभीर याद दिलाती है।

  • आवासीय भवनों में चल रहे कारोबार पर सख्ती: भोपाल में निगम का अभियान शुरू, अरेरा कॉलोनी-रोहित नगर से कार्रवाई

    आवासीय भवनों में चल रहे कारोबार पर सख्ती: भोपाल में निगम का अभियान शुरू, अरेरा कॉलोनी-रोहित नगर से कार्रवाई


    मध्यप्रदेश । भोपाल में अब आवासीय भवनों को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। शहर के प्रमुख पॉश इलाकों अरेरा कॉलोनी और रोहित नगर से इस अभियान की शुरुआत की गई है, जहां निगम के सर्वे दलों ने ऐसे भवनों की पहचान कर कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में कोलार, बावड़िया कला, शाहपुरा, गुलमोहर और अन्य इलाकों में भी इसी तरह का अभियान चलाया जाएगा।

    नगर निगम की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में 4 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई से पहले शुरू की गई है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अनधिकृत निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन और स्वीकृत उपयोग के विपरीत भवनों के इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। इसी के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने स्थानीय निकायों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    भोपाल नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने सभी जोनों में विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें मौके पर जाकर यह जांच कर रही हैं कि जिन भवनों को आवासीय उपयोग के लिए अनुमति दी गई थी, उनमें कहीं अस्पताल, बैंक, होटल, शोरूम, दुकान, कार्यालय या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां तो संचालित नहीं हो रहीं। जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जा रहा है, वहां संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है।

    नोटिस में मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 और नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 का उल्लेख करते हुए भवन स्वामी से संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो निगम एकपक्षीय कार्रवाई कर सकता है। इसमें जुर्माना, उपयोग परिवर्तन शुल्क या अन्य कानूनी कदम भी शामिल हो सकते हैं।

    नगर निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि चार वर्ष पहले किए गए सर्वे में केवल अरेरा कॉलोनी में 83 और रोहित नगर में 67 मामलों सहित 150 से अधिक ऐसे भवन चिन्हित हुए थे, जहां आवासीय अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। अधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ी है। इसलिए इस बार केवल पुराने रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय नए सिरे से भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार भोपाल में करीब 25 हजार संपत्तियां ऐसी हैं जो रिकॉर्ड में अब भी आवासीय श्रेणी में दर्ज हैं, लेकिन उनसे व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर वसूला जा रहा है। ऐसे मामलों में भूमि उपयोग और भवन अनुमति की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।

    नगर निगम का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य शहर में नियोजित विकास सुनिश्चित करना, यातायात और पार्किंग संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करना तथा भवन उपयोग से जुड़े नियमों का पालन कराना है। आने वाले दिनों में यह कार्रवाई पूरे शहर में व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकती है।

  • NEET-UG 2026: भोपाल में ट्रैफिक एडवायजरी जारी, परीक्षार्थियों को समय से निकलने की सलाह

    NEET-UG 2026: भोपाल में ट्रैफिक एडवायजरी जारी, परीक्षार्थियों को समय से निकलने की सलाह


    मध्यप्रदेश । भोपाल में रविवार को आयोजित होने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर नगरीय यातायात पुलिस ने व्यापक ट्रैफिक एडवायजरी जारी की है। शहर के 32 परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में शामिल होने वाले हजारों अभ्यर्थियों की सुविधा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। मेट्रो निर्माण कार्य के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना है, इसलिए परीक्षार्थियों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

    यातायात पुलिस के अनुसार आनंद नगर स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल तक पहुंचने वाले मार्ग प्रभात चौराहा से पिपलानी क्षेत्र के बीच मेट्रो निर्माण के कारण संकरे हो गए हैं। ऐसे में टीटी नगर, एमपी नगर, कोलार रोड और पुराने शहर से आने वाले विद्यार्थियों को चेतक ब्रिज, गोविंदपुरा, भेल, महात्मा गांधी चौराहा और पिपलानी पेट्रोल पंप होते हुए परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है।

    इसी प्रकार गौतम नगर स्थित शासकीय गीतांजलि कन्या पीजी कॉलेज के आसपास भी मेट्रो निर्माण कार्य जारी है। डीआईजी बंगला चौराहा से सिंधी कॉलोनी और काजी कैंप तक का मार्ग प्रभावित है। इस केंद्र पर जाने वाले अभ्यर्थियों को नादरा बस स्टैंड, अग्रवाल धर्मशाला, छोला गणेश मंदिर, जेपी ब्रिज तिराहा और डीआईजी बंगला चौराहा मार्ग का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

    पुलिस प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा ताकि विद्यार्थियों को शांत वातावरण मिल सके। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के आसपास वाहन पार्किंग की अनुमति भी नहीं होगी। यातायात पुलिस ने अभिभावकों और आम नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वे अनावश्यक रूप से परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ न लगाएं।

    अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा के दिन किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए अपने केंद्र का पहले से निरीक्षण कर लें और निर्धारित समय से कम से कम 30 मिनट पहले घर से निकलें। इससे ट्रैफिक जाम या मार्ग परिवर्तन की स्थिति में भी वे समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच सकेंगे।

    यातायात पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान किसी भी आपात स्थिति या मार्ग संबंधी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 7049104825, 7049104640 तथा व्हाट्सएप नंबर 7587602055 पर संपर्क किया जा सकता है। प्रशासन ने नागरिकों से नियमों का पालन कर परीक्षा व्यवस्था को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है।

  • श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्म का संगम, ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ सिद्धचक्र महामंडल विधान

    श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्म का संगम, ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ सिद्धचक्र महामंडल विधान


    मध्यप्रदेश । राजधानी भोपाल के वर्धमान नगर स्थित दाता कॉलोनी में रविवार को धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री महावीर जैन मंदिर परिसर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ विधिवत रूप से किया गया। आयोजन के पहले दिन मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की उपस्थिति से गुलजार रहा और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

    कार्यक्रम की शुरुआत जिनालय से निकाली गई भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। गाजे-बाजे, धार्मिक जयघोष और भजनों के बीच निकली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण किए और हाथों में अष्ट द्रव्य लेकर भगवान की भक्ति में भावपूर्ण भजन गाते हुए यात्रा को भव्य स्वरूप प्रदान किया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं के जयकारों से वातावरण धर्ममय हो उठा।

    धार्मिक अनुष्ठानों से गूंजा मंदिर परिसर
    प्रवक्ता अंशुल जैन के अनुसार इस पुण्य आयोजन में मालती (स्व.) अनोखी लाल जैन कठनेरा परिवार ने पुण्यार्जक परिवार के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। धर्म इंद्र सविता नवीन एवं दिगंबर दीक्षा चंदना द्वारा विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ अनुष्ठानों में भाग लिया। कलश यात्रा के पश्चात देव आज्ञा, गुरु आज्ञा, मंडप शुद्धि, पात्र शुद्धि तथा अन्य पारंपरिक विधि-विधानों का आयोजन किया गया। वैदिक और जैन परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुई इन धार्मिक क्रियाओं ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।

    28 जून को होगी पूर्णाहुति
    आठ दिनों तक चलने वाला यह पावन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 28 जून को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। इस दौरान प्रतिदिन विशेष पूजन, अभिषेक, धार्मिक प्रवचन और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन समिति के अनुसार श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि अधिक से अधिक लोग धर्म लाभ प्राप्त कर सकें।

    कार्यक्रम में मनोज बांगा, विनोद (एमपीटी), विजय जैन, विनोद जैन, प्रमोद, विकास, निखिलेश, वीरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन और श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सफलता और समाज की सुख-समृद्धि के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।

    यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और सामूहिक सहभागिता को भी मजबूत करने का संदेश देता है।