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  • भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब

    भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब


    भोपाल । भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में ऑडिट आपत्तियों के बावजूद भुगतान किए जाने का मुद्दा गरमा गया। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने वित्तीय मामलों पर सवाल उठाते हुए वर्ष 2024-25 और 2026-27 की ऑडिट आपत्तियों के बावजूद किए गए भुगतानों का हिसाब मांगा। इस पर मेयर इन काउंसिल यानी एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने जवाब देते हुए कहा कि भुगतान नियमानुसार किए गए हैं और कोई दस्तावेज नहीं छिपाया गया है। सवाल-जवाब के दौरान दोनों के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई। बैठक में बजट और विकास कार्यों से जुड़े कई प्रस्ताव चर्चा के लिए रखे जाने हैं लेकिन शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों जैसे जनहित के मुद्दे एजेंडे में शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने नाराजगी जताई।

    नगर निगम परिषद का सम्मेलन आईएसबीटी स्थित मीटिंग हॉल में शुरू हुआ। बैठक के प्रारंभ में परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने सरकार द्वारा नियुक्त 12 एल्डरमैन और नए निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार का परिचय कराया। अहिरवार ने तीन दिन पहले ही पदभार संभाला है। बैठक में महापौर मालती राय भी मौजूद रहीं। कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने छुट्टी के दिन परिषद का सम्मेलन बुलाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने निगम एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि छुट्टी के दिन सदन का संचालन नहीं किया जा सकता। इस पर अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने उन्हें समझाइश दी जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।

    प्रश्नकाल के दौरान ऑडिट आपत्तियों से जुड़े भुगतानों का मामला उठा। नेता प्रतिपक्ष ने संबंधित वित्तीय मामलों पर सवाल करते हुए जवाब मांगा तो एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि सभी भुगतान नियमों के अनुसार किए गए हैं और किसी तरह की जानकारी छिपाई नहीं गई है। इसी दौरान वर्ष 2026-27 के प्रावधानिक बजट में प्रस्तावित राशि से तैयार योजना के आय-व्यय पर भी सवाल किया गया। शुक्ला ने प्रश्न में बताई गई 108 करोड़ रुपये की राशि पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नगर निगम का प्रावधानिक बजट 3938.45 करोड़ रुपये का है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल हाउसिंग फॉर ऑल योजना का बजट ही लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के बीच है। इसके बाद उन्होंने बजट से संबंधित जानकारी देना शुरू किया।

    बैठक के एजेंडे में नगर निगम के नए मुख्यालय के सर्विस ब्लॉक को 10 साल के लिए देने और इसके बाद अगले 10 साल के लिए नवीनीकरण से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा गर्ल्स कॉलेज के पास स्थित सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर के संचालन और अमृत 2.0 योजना के लिए 493.49 करोड़ रुपये का ऋण लेने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग के हॉल को किराए पर देने का प्रस्ताव भी परिषद के सामने रखा गया है। इन प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान पार्षदों की ओर से सवाल उठाए जाने की संभावना है।

    दूसरी ओर विपक्ष ने शहर की बदहाल सड़कों और बारिश के बाद खराब हुई अंदरूनी सड़कों का मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं होने पर नाराजगी जताई। विपक्ष का कहना है कि सड़कें और गड्ढे आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़े मुद्दे हैं और इन पर परिषद में चर्चा होनी चाहिए। पार्षदों की ओर से शहर में वैध और अवैध होर्डिंग्स सहित अन्य नागरिक समस्याओं पर भी सवाल उठाए जाने की संभावना है। ऐसे में बैठक में वित्तीय प्रस्तावों के साथ शहर की बुनियादी सुविधाओं और जनता से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर व्यापारियों का मोर्चा, कन्वर्जन फीस 5% करने और सीलिंग रोकने की मांग, अब किसान भी उठाएंगे आवाज

    भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर व्यापारियों का मोर्चा, कन्वर्जन फीस 5% करने और सीलिंग रोकने की मांग, अब किसान भी उठाएंगे आवाज


    भोपाल । भोपाल मास्टर प्लान-2047 के नए ड्राफ्ट को लेकर विरोध तेज होने लगा है। योजना पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए शुक्रवार को सबसे पहले व्यापारी शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश यानी टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचे। व्यापारियों ने व्यावसायिक भू-उपयोग कन्वर्जन फीस फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर और सीलिंग की कार्रवाई से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए। दूसरी ओर भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान भी अपनी जमीन और खेती से जुड़े मुद्दों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी में हैं। इससे मास्टर प्लान के प्रस्तावों पर व्यापारियों और किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

    व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि कन्वर्जन फीस एकमुश्त और कुल पांच प्रतिशत तय की जाए। उनका कहना है कि निर्धारित फीस जमा करने के बाद उन्हें पूरा कमर्शियल एफएआर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही पुराने बाजारों को राहत देने और सीलिंग की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है। व्यापारियों का मानना है कि व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े नियम स्पष्ट और व्यावहारिक होने चाहिए ताकि कारोबारियों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

    व्यापारियों के बाद अब किसानों की आपत्तियां भी मास्टर प्लान के लिए अहम होने वाली हैं। भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान शाहपुरा स्थित टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचकर अपनी चिंताएं अधिकारियों के सामने रखेंगे। इससे पहले गुरुवार को नीलबड़ में किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया था। किसानों का आरोप है कि नए ड्राफ्ट में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने के प्रस्ताव से उनकी निजी जमीन खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है।

    किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि रखा गया था। वर्ष 2031 के लिए तैयार किए गए पहले के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान होने की बात कही जा रही है। अब नए ड्राफ्ट में बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान चाहते हैं कि जमीन का उपयोग बदलने से पहले उनकी आपत्तियों और अधिकारों पर गंभीरता से विचार किया जाए। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने भी किसानों की ओर से कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की बात कही है।

    मास्टर प्लान में बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण की सीमा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ इलाकों में आम लोगों के मकानों पर निर्माण संबंधी पाबंदियों की आशंका है जबकि एलडीआर में शामिल कुछ क्षेत्रों में निर्माण की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। आलोचकों का दावा है कि इससे प्रभावशाली लोगों के बंगलों और फार्म हाउस वाले इलाकों को फायदा मिल सकता है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित नियमों निर्माण अनुमतियों और जमीन के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

    किसानों ने मेंडोरा मेंडोरी सेवनिया गौंड और केरवा वुड्स जैसे क्षेत्रों में भू-उपयोग और जमीन की सरकारी गाइडलाइन में बदलाव पर भी चिंता जताई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मेंडोरी के केरवा वुड्स क्षेत्र में कृषि भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन वर्ष 2025-26 में एक करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर थी जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर तीन करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर हो गई। हालांकि सरकारी गाइडलाइन में बढ़ोतरी का अर्थ यह नहीं है कि वास्तविक बाजार मूल्य भी उसी अनुपात में बढ़ गया है।

    किसानों की मांग है कि भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए और कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है इसलिए जमीन के भविष्य से जुड़े फैसले लेते समय किसानों की सहमति और समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    टीएंडसीपी की संयुक्त संचालक इंदू त्रिपाठी के मुताबिक नियमानुसार 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटाइज किया जाएगा और इसके बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यापारियों और किसानों की मांगों पर सुनवाई के दौरान क्या निर्णय सामने आते हैं और भोपाल के विकास की प्रस्तावित योजना में किन बदलावों पर विचार किया जाता है।

  • जेपी अस्पताल में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, वेतन और स्टाइपेंड के लिए भूख हड़ताल जारी, तीन महीने की सैलरी और पांच महीने का भुगतान अटका

    जेपी अस्पताल में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, वेतन और स्टाइपेंड के लिए भूख हड़ताल जारी, तीन महीने की सैलरी और पांच महीने का भुगतान अटका


    भोपाल। भोपाल के जयप्रकाश जिला अस्पताल यानी जेपी अस्पताल में वेतन और स्टाइपेंड के भुगतान को लेकर डॉक्टरों का विरोध तेज हो गया है। बकाया राशि नहीं मिलने और वेतन में कथित कटौती से नाराज तीन डॉक्टर 21 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। गुरुवार को भी उनका आंदोलन जारी रहा और वे रातभर अस्पताल परिसर में डटे रहे। डॉक्टरों का कहना है कि भुगतान का भरोसा मिलने के बावजूद उनके खाते में पूरी राशि नहीं आई है। ऐसे में उन्होंने बकाया भुगतान और वेतन में कटौती के कारणों को स्पष्ट करने की मांग उठाई है।

    अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बरथरे के मुताबिक वे बुधवार से भूख हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह सिविल सर्जन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने एक महीने का वेतन जारी करने की बात कही थी। डॉक्टरों को उम्मीद थी कि इससे उनकी आर्थिक परेशानी कुछ कम होगी लेकिन जब उन्होंने खाते में आई राशि की जांच की तो भुगतान पूरा नहीं मिला। उनका आरोप है कि एक महीने का वेतन जारी करने की बात कहे जाने के बावजूद खाते में कम राशि आई है। इसी वजह से उनकी नाराजगी और बढ़ गई।

    इस आंदोलन में शामिल पीजी छात्र डॉ. शुभम कश्यप की परेशानी भी गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार उनका पांच महीने का स्टाइपेंड अब तक बकाया है। उनका कहना है कि उन्हें एक महीने का स्टाइपेंड भी नहीं मिला है। इसके अलावा पिछले तीन साल में स्टाइपेंड बढ़ने के बाद मिलने वाला एरियर भी लंबित है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने मांग की है कि उनके बकाया भुगतान की स्थिति स्पष्ट की जाए और लंबित राशि जल्द जारी की जाए।

    डॉक्टरों के मुताबिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बरथरे और पीजीएमओ ऑर्थोपेडिक्स डॉ. रविंद्र पाल का करीब तीन महीने का वेतन बकाया होने की शिकायत है। वहीं डॉ. शुभम कश्यप पांच महीने के स्टाइपेंड और एरियर का इंतजार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वेतन और स्टाइपेंड समय पर मिलना जरूरी है क्योंकि इससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें और आर्थिक जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। भुगतान में लगातार देरी होने से उनके सामने मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।

    डॉक्टरों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब एक महीने का वेतन देने की बात कही गई थी तो खाते में पूरी राशि क्यों नहीं पहुंची। वे चाहते हैं कि भुगतान में देरी और कथित कटौती के पीछे के कारणों की जानकारी दी जाए। उनका कहना है कि जब तक बकाया राशि और भुगतान संबंधी शिकायतों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है।

    फिलहाल जेपी अस्पताल में तीन डॉक्टरों की भूख हड़ताल ने वेतन और स्टाइपेंड भुगतान की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से भुगतान में देरी और कथित कटौती को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी डॉक्टरों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और लंबित भुगतान का समाधान कब तक हो पाता है।

  • बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग

    बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग


    नई दिल्ली। भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध तेज होने लगा है। प्रस्तावित योजना में 66 गांवों की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव किए जाने की आशंका से किसान चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि खेती की जमीन को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव उनकी आजीविका पर असर डाल सकता है। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने अपनी जमीन बचाने और प्रस्तावित बदलावों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए पदयात्रा शुरू की। किसान मुगालिया छाप से नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय तक पहुंचकर ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन पुलिस ने नीलबड़ में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। पुलिस की ओर से पहले से व्यवस्था किए जाने की वजह यह बताई गई कि पिछली बार किसान भोपाल शहर तक पहुंच गए थे।

    किसानों की मुख्य मांग है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग पहले की तरह खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि जिस जमीन पर किसान वर्षों से खेती कर रहे हैं उसी से उनके परिवारों का भरण पोषण होता है। यदि इन जमीनों को दूसरी आरक्षित श्रेणियों में शामिल कर दिया गया तो खेती करने और भविष्य में जमीन का उपयोग करने को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। किसानों का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए मास्टर प्लान में कोई भी बदलाव करने से पहले प्रभावित ग्रामीणों की बात सुनी जानी चाहिए।

    किसान अनोखी सिंह पटेल ने आरोप लगाया कि बड़ा तालाब के संरक्षण के नाम पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि का लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि वे बड़ा तालाब के संरक्षण के महत्व को समझते हैं लेकिन इसके नाम पर कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव करने से पहले स्थानीय लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वर्षों से खेती कर रहे परिवारों के भविष्य को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है। इसी वजह से किसान प्रस्तावित ड्राफ्ट में किए गए बदलावों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराना चाहते हैं।

    किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि निर्धारित था। इसके बाद वर्ष 2031 के मास्टर प्लान के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान रखा गया था। हालांकि बाद में वह मास्टर प्लान निरस्त हो गया। अब मौजूदा ड्राफ्ट में बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव की आशंका को लेकर किसान विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई योजना तैयार करते समय पुराने प्रावधानों और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    किसानों ने भोजताल संरक्षण जोन-1 यानी BIZ-1 और जोन-2 यानी BIZ-2 को हटाने की मांग भी उठाई है। किसान अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक खेती उनकी आय का प्रमुख स्रोत है और कृषि भूमि का उपयोग कृषि के लिए ही बनाए रखना जरूरी है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी जमीनों को दूसरी श्रेणियों में शामिल किया जाता है तो उनके सामने भविष्य में कई तरह की व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि प्रस्तावित बदलावों पर पुनर्विचार किया जाए और उनकी आपत्तियों का उचित समाधान निकाला जाए।

    किसानों का एक बड़ा सवाल ग्रामसभाओं में सहमति लेने को लेकर भी है। उनका आरोप है कि वर्ष 2031 के मास्टर प्लान की प्रक्रिया के दौरान नए ड्राफ्ट को तैयार करने में पंचायतों से सहमति लेने का आश्वासन दिया गया था लेकिन मौजूदा प्रस्ताव में संबंधित गांवों की सहमति नहीं ली गई। किसान चाहते हैं कि पहले सभी 66 गांवों में ग्रामसभाएं आयोजित की जाएं और प्रस्तावित भू-उपयोग पर विस्तार से चर्चा हो। उनका कहना है कि किसानों की समस्याएं और आपत्तियां सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। फिलहाल मास्टर प्लान को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है और वे अपनी मांगों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • हॉस्टल में खाने की गुणवत्ता पर सवाल, भोपाल में छात्राओं का प्रदर्शन, बोलीं- भोजन में कीड़े निकलते हैं और पानी भी साफ नहीं

    हॉस्टल में खाने की गुणवत्ता पर सवाल, भोपाल में छात्राओं का प्रदर्शन, बोलीं- भोजन में कीड़े निकलते हैं और पानी भी साफ नहीं


    भोपाल। भोपाल के कटारा हिल्स स्थित गर्ल्स हॉस्टल में भोजन और पेयजल की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं ने बुधवार सुबह प्रदर्शन किया। छात्राओं ने हॉस्टल में परोसे जाने वाले खाने में कीड़े निकलने और पीने का पानी साफ नहीं होने की शिकायत की है। उनका कहना है कि छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। भोजन और पानी जैसी जरूरी व्यवस्थाओं में लापरवाही से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका है। अपनी समस्याओं को लेकर छात्राओं ने हॉस्टल परिसर में आवाज उठाई और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर व्यवस्था सुधारने की मांग की।

    प्रदर्शन कर रही छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं है। उनके मुताबिक खाने में कीड़े निकलने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। छात्राओं ने सवाल उठाया कि छात्रावास में रहने वाली लड़कियों को यदि साफ और सुरक्षित भोजन नहीं मिलेगा तो उनके स्वास्थ्य की देखभाल कैसे होगी। उनका कहना है कि भोजन तैयार करने और परोसने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। खाने की गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि छात्राओं को किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

    छात्राओं ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि हॉस्टल में वाटर कूलर और साफ पीने के पानी की व्यवस्था में कमियां हैं। छात्रावास में रहने वाली छात्राओं के लिए स्वच्छ पेयजल बेहद जरूरी है क्योंकि दूषित पानी से पेट संबंधी संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में पानी की नियमित सफाई और उसकी गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। छात्राओं ने मांग की कि वाटर कूलर की साफ-सफाई कराई जाए और पीने के लिए सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जाए।

    स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI भोपाल के बैनर तले छात्राओं ने हॉस्टल परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने भोजन और पानी के साथ-साथ छात्रावास की स्वच्छता और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि हॉस्टल केवल रहने की जगह नहीं है बल्कि छात्राओं की पढ़ाई और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए यहां ऐसा वातावरण होना चाहिए जिसमें छात्राएं बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। बुनियादी सुविधाओं में कमी होने से उनकी दिनचर्या और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

    प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने प्रशासन से मांग की कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय भोजन की गुणवत्ता में सुधार पेयजल की उचित व्यवस्था और परिसर की साफ-सफाई पर नियमित निगरानी जरूरी है। छात्राओं ने उम्मीद जताई कि संबंधित अधिकारी मामले में तत्काल कार्रवाई करेंगे और हॉस्टल में रहने वाली सभी छात्राओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    अब इस मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि शिकायतों की जांच में भोजन या पेयजल की व्यवस्था में खामियां मिलती हैं तो उन्हें जल्द दूर किया जाना चाहिए। छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को स्वच्छ भोजन सुरक्षित पेयजल और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है। फिलहाल छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर प्रशासन का ध्यान समस्याओं की ओर आकर्षित किया है।

  • भोपाल में नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पेट्रोल डालकर लगाई थी आग, पुलिस हर पहलू से कर रही जांच

    भोपाल में नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पेट्रोल डालकर लगाई थी आग, पुलिस हर पहलू से कर रही जांच


    भोपाल। भोपाल में छह महीने पहले प्रेम विवाह करने वाली 20 वर्षीय नवविवाहिता की आग में गंभीर रूप से झुलसने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना गांधीनगर इलाके में अचारपुरा के पास मीणा चौराहे की बताई जा रही है। युवती ने 18 अक्टूबर को कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी। गंभीर हालत में उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां बुधवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल घटना के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जानकारी जुटा रही है।

    पुलिस के मुताबिक मृतका की पहचान दीपाली प्रजापति के रूप में हुई है। वह मूल रूप से छिंदवाड़ा की रहने वाली थी। दीपाली की सोशल मीडिया के जरिए भोपाल निवासी रोहित कुशवाह से दोस्ती हुई थी। बातचीत बढ़ने के बाद दोनों ने करीब छह महीने पहले प्रेम विवाह कर लिया था। शादी के बाद दीपाली अपने पति के साथ करोंद की पूजा कॉलोनी स्थित ससुराल में रह रही थी। रोहित एक निजी कंपनी में डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता है जबकि दीपाली गृहिणी थी। कम उम्र में प्रेम विवाह करने वाले इस दंपती की जिंदगी में हुई इस दुखद घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रोहित के बयान के मुताबिक दीपाली अपनी एक सहेली के साथ बिना बताए ग्वालियर घूमने गई थी और 17 अक्टूबर को भोपाल लौटी थी। उसी रात उसने घबराहट होने की बात कही और चाय पीने के लिए बाहर चलने को कहा। इसके बाद रोहित उसे चाय पिलाने के लिए लेकर गया। वापस लौटते समय दीपाली ने कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोग भी हैरान रह गए। रोहित ने आग की लपटों में घिरी पत्नी को बचाने की कोशिश की। इस दौरान उसके हाथ भी झुलस गए। गंभीर रूप से घायल दीपाली को उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। हालांकि कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद बुधवार सुबह उसकी मौत हो गई।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। एएसआई जेएस पाटिल के अनुसार इस मामले में मर्ग कायम किया गया है और घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है। परिवार की ओर से मौत को लेकर किसी तरह का संदेह भी व्यक्त नहीं किया गया है। इसके बावजूद पुलिस घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए संबंधित लोगों के बयान और अन्य जरूरी जानकारियां जुटा रही है।

    पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि आखिर किन परिस्थितियों में दीपाली ने यह कदम उठाया। घटना से पहले उसकी मानसिक स्थिति क्या थी और उस रात वास्तव में क्या हुआ था इसकी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। छह महीने पहले शुरू हुए वैवाहिक जीवन का इस तरह अंत होने से परिवार और परिचितों में दुख का माहौल है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • घर भी सुरक्षित नहीं, भोपाल में आवारा कुत्ते ने 8 साल के बच्चे को बुरी तरह काटा, 5 दिन में 15 लोग बने शिकार

    घर भी सुरक्षित नहीं, भोपाल में आवारा कुत्ते ने 8 साल के बच्चे को बुरी तरह काटा, 5 दिन में 15 लोग बने शिकार


    भोपाल। भोपाल में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर के शाहजहांनाबाद स्थित नूर महल लाल मस्जिद रोड पर कुत्तों के हमलों से स्थानीय लोग दहशत में हैं। यहां हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि आवारा कुत्ते घरों में घुसकर भी लोगों पर हमला कर रहे हैं। ताजा मामला आठ वर्षीय इब्राहिम का है जिसे एक कुत्ते ने घर में घुसकर बुरी तरह काट लिया। हमले में बच्चे के चेहरे पर गंभीर घाव हो गए जिसके बाद उसे तत्काल हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों को उसके चेहरे की सर्जरी करनी पड़ी। परिजनों के मुताबिक इब्राहिम पिछले पांच दिनों से अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस घटना ने इलाके में बच्चों और उनके परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    जानकारी के मुताबिक 16 अक्टूबर को इब्राहिम पर आवारा कुत्ते ने हमला किया था। कुत्ते ने उसके चेहरे पर चार जगह काट लिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद परिजन बिना देर किए उसे हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया और सर्जरी की। बच्चे के मामा फैजान ने बताया कि डॉक्टरों ने फिलहाल ऑपरेशन किया है और उम्मीद जताई है कि इससे इब्राहिम की हालत में सुधार होगा। हालांकि यदि घाव ठीक नहीं होते हैं तो दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। परिवार बच्चे के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहा है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि लाल मस्जिद रोड और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सुबह नमाज के लिए मस्जिद जाने वाले लोगों को भी कुत्तों के पीछे पड़ने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार लोगों को रास्ता बदलकर या बचते हुए निकलना पड़ता है। रहवासी मोहम्मद अली ने बताया कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। वहीं वासिद खान का कहना है कि बच्चों के स्कूल आने-जाने में भी खतरा बना रहता है। अभिभावकों को हर समय डर रहता है कि कहीं कोई कुत्ता बच्चों पर हमला न कर दे।

    रहवासी इब्राहिम अली दाऊदी के अनुसार इलाके में 50 से ज्यादा आवारा कुत्तों के झुंड घूमते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले पांच दिनों में ये कुत्ते 15 से अधिक लोगों को काट चुके हैं। लगातार हो रही घटनाओं से नाराज रहवासियों ने उत्तर क्षेत्र के विधायक आतिफ अकील वार्ड पार्षद और नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की है। लोगों ने मांग की है कि हमलावर कुत्तों को पकड़कर उचित कार्रवाई की जाए ताकि बच्चों बुजुर्गों और अन्य नागरिकों को राहत मिल सके।

    दूसरी ओर भोपाल में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनकी नसबंदी पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अनुमान के मुताबिक शहर में करीब सवा लाख स्ट्रीट डॉग्स हैं। नगर निगम इस वित्तीय वर्ष में कुत्तों की नसबंदी के लिए 3.30 करोड़ रुपये का बजट रख चुका है। प्रति कुत्ते पर करीब 1100 रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। निगम के रिकॉर्ड के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच कुल 25 हजार 214 कुत्तों की नसबंदी की गई। नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है जहां से उन्हें पकड़ा गया था। ऐसे में स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि लाखों रुपये खर्च होने और लगातार कार्रवाई के बावजूद आवारा कुत्तों के हमलों पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है। अब रहवासियों की मांग है कि नगर निगम इस समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान निकाले ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे या नागरिक को ऐसी गंभीर घटना का सामना न करना पड़े।

  • MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश

    MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश


    भोपाल । विजयादशमी के अवसर पर मध्य प्रदेश में मंगलवार को शस्त्र पूजन के आयोजन किए गए। राजधानी भोपाल में नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सारंग और सांसद आलोक शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की। विजयादशमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में सनातन परंपराओं और शस्त्र पूजन के महत्व पर भी जोर दिया गया।

    भोपाल पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में महापौर मालती राय विधायक भगवानदास सबनानी कमिश्नर कर्मवीर शर्मा पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और संयुक्त पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पूजा में भाग लिया। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति साहस और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी परंपरा के तहत भोपाल में भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने समाज और प्रदेश में शांति तथा समृद्धि बनाए रखने की कामना की।

    मंत्री विश्वास सारंग ने विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उनके मुताबिक विजयादशमी लोगों को सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने शस्त्रों को शक्ति साहस और राष्ट्र की सुरक्षा का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं में शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है। यह परंपरा लोगों को अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश देती है।

    सारंग ने कहा कि सनातन परंपराएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे लोगों को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी बोध कराती हैं। विजयादशमी के अवसर पर शस्त्रों की पूजा इसी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस दिन लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का संकल्प लेते हैं और समाज में सकारात्मकता तथा सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

    भोपाल के अलावा मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विजयादशमी पर शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। शस्त्र पूजन की परंपरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें शक्ति के साथ जिम्मेदारी और सुरक्षा के भाव को भी जोड़ा जाता है। पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन को औपचारिक स्वरूप दिया।

    विजयादशमी का पर्व देशभर में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है तो कहीं शस्त्र पूजन के माध्यम से शक्ति और कर्तव्य के महत्व को याद किया जाता है। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने प्रदेश में सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की।

  • 2 से 20 फीट तक के रावण, कहीं कुंभकरण तो कहीं मेघनाथ, भोपाल में दशहरे के लिए सजा खास बाजार, महंगे हुए पुतले

    2 से 20 फीट तक के रावण, कहीं कुंभकरण तो कहीं मेघनाथ, भोपाल में दशहरे के लिए सजा खास बाजार, महंगे हुए पुतले


    भोपाल । दशहरे के पर्व को लेकर भोपाल में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर में इन दिनों एक अनोखा बाजार लोगों का ध्यान खींच रहा है। यहां कपड़े या घरेलू सामान नहीं बल्कि रावण कुंभकरण और मेघनाथ के रंग-बिरंगे पुतले बिक रहे हैं। लिंक रोड नंबर-2 के आसपास कई जगहों पर सजे इस बाजार में लोग परिवार के साथ पुतले खरीदने पहुंच रहे हैं। बाजार में 2 फीट से लेकर 20 फीट तक ऊंचे पुतले उपलब्ध हैं। वहीं विशेष ऑर्डर पर 40 फीट या उससे अधिक ऊंचाई के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं। इनकी कीमत आकार और बनावट के अनुसार 800 रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक बताई जा रही है।

    भोपाल में दशहरे के अवसर पर बड़े स्तर पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शहर में 18 से अधिक स्थानों पर प्रमुख आयोजन होंगे। इसके अलावा गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में भी बड़ी संख्या में रावण दहन किया जाएगा। अनुमान है कि शहर में 7 हजार से ज्यादा जगहों पर पुतले जलाए जाएंगे। इसी मांग को देखते हुए तुलसीनगर लिंक रोड नंबर-2 सेकंड स्टॉफ बांसखेड़ी ईंटखेड़ी और पंचशील नगर सहित कई इलाकों में कारीगर पिछले डेढ़ से दो महीने से पुतले बनाने में जुटे हुए हैं। इस काम में 300 से अधिक कारीगर लगे हैं।

    कारीगरों ने अब तैयार पुतलों को सड़क किनारे बिक्री के लिए सजा दिया है। सोमवार को बाजार में खरीदारों की अच्छी भीड़ दिखाई दी। कई लोगों ने पहले ही अपनी जरूरत के हिसाब से पुतलों की बुकिंग करा दी थी। मंगलवार शाम तक खरीदारी जारी रहने की उम्मीद है। बड़े पुतलों को बनाने में खास मेहनत और समय लगता है। कारीगरों के मुताबिक एक बड़े पुतले को तैयार करने में करीब एक सप्ताह तक लग सकता है। इसके लिए बांस का ढांचा तैयार किया जाता है और फिर उस पर कपड़ा कागज तथा अन्य सजावटी सामग्री लगाई जाती है।

    इस बार पुतलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पुतले बनाने में इस्तेमाल होने वाले बांस सूत और कागज के दाम बढ़ने से लागत पर असर पड़ा है। कारीगर राखी पटेल के मुताबिक पहले जो बांस 150 रुपये में मिलता था उसकी कीमत बढ़कर 200 रुपये हो गई है। इसी तरह सूत के दाम 120 रुपये से बढ़कर 180 रुपये तक पहुंच गए हैं। कागज की कीमत भी 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये बताई गई है। सामग्री महंगी होने के कारण ग्राहकों को भी पहले की तुलना में अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

    करोंद से खरीदारी करने पहुंचे अजय सोनी ने बताया कि इस बार पुतलों की कीमतों में करीब 500 से 1000 रुपये तक का अंतर देखने को मिल रहा है। उन्होंने वॉटरप्रूफ पुतला खरीदने की कोशिश की लेकिन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कागज वाला पुतला लेना पड़ा। बारिश की आशंका के चलते इस बार कुछ कारीगरों ने पानी से बचाव के लिए विशेष पुतले भी तैयार किए हैं। हालांकि हर आकार और हर कीमत में ऐसे पुतले उपलब्ध हों यह जरूरी नहीं है।

    रावण के पुतलों के साथ मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले भी खरीदारों को मिल रहे हैं। इनमें आकर्षक वेशभूषा और हथियारों के जरिए इन्हें खास रूप दिया जाता है। सामान्य तौर पर पुतले बिना पटाखों के बनाए जाते हैं। यदि खरीदार पटाखे लगवाना चाहते हैं तो लागत और कीमत बढ़ जाती है। बड़े पुतलों में बांस कपड़ा धागा और कागज अधिक मात्रा में इस्तेमाल होता है। इन्हें बनाने में तीन से चार कारीगरों की मेहनत भी लगती है।

    इस बार कारीगरों के सामने सबसे बड़ी चिंता मौसम को लेकर है। मंगलवार को बारिश की संभावना जताई गई है। इससे पुतलों के भीगने और बिक्री प्रभावित होने का डर बना हुआ है। वर्ष 2022 में दशहरे के दौरान तेज बारिश के कारण कई जगह पुतले भीग गए थे और आयोजनों में परेशानी आई थी। बांसखेड़ी क्षेत्र में कुछ कारीगरों को पुतले बस स्टॉप में रखकर बचाने पड़े थे जिससे नुकसान भी हुआ था। अब तीन साल बाद फिर बारिश की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में कारीगरों को उम्मीद है कि मौसम साथ देगा और दशहरे से पहले अधिक से अधिक पुतलों की बिक्री हो सकेगी।

  • भोपाल में कुएं में मिला युवक का शव, दो साल से चल रहा था इलाज, मर्ग कायम कर मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस

    भोपाल में कुएं में मिला युवक का शव, दो साल से चल रहा था इलाज, मर्ग कायम कर मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस


    भोपाल । भोपाल के सुखी सेवनिया इलाके में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब सुरभि कॉलेज के पास स्थित एक कुएं में 23 वर्षीय युवक का शव मिला। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कुएं से बाहर निकलवाया। मृतक की पहचान विशाल वंशकार पिता छोटेलाल वंशकार निवासी सुखी सेवनिया के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विशाल पिछले चार दिनों से घर नहीं लौटा था। हालांकि परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज नहीं कराई थी। युवक का शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
    जानकारी के अनुसार रविवार सुबह सुरभि कॉलेज के पास स्थित कुएं में ग्रामीणों ने एक युवक का शव देखा। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को कुएं से बाहर निकलवाया। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने पर मृतक के परिजनों को सूचना दी गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी भेजा गया। रविवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
    मृतक के बड़े भाई राजेश वंशकार ने बताया कि विशाल के दिमाग का पिछले करीब दो साल से इलाज चल रहा था। उनके अनुसार बीते कुछ समय से उसकी मानसिक स्थिति में परेशानी बढ़ गई थी। वह कई-कई दिनों तक बिना किसी को बताए घर से बाहर चला जाता था और फिर कुछ समय बाद वापस लौट आता था। परिवार के मुताबिक पहले भी उसके घर से बाहर रहने की ऐसी स्थिति बनती रही थी।
    परिजनों ने बताया कि इसी वजह से जब विशाल चार दिनों तक घर नहीं लौटा तो उन्होंने उसकी गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई। परिवार को उम्मीद थी कि वह पहले की तरह खुद ही वापस आ जाएगा। हालांकि इस बार उसका शव कुएं में मिलने की खबर सामने आई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिजनों ने किसी व्यक्ति पर संदेह जताते हुए कोई आरोप नहीं लगाया है।
    पुलिस अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि विशाल कुएं तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। युवक के घर से निकलने से लेकर शव मिलने तक की घटनाओं को समझने के लिए सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। कुएं में गिरने की आशंका समेत अन्य संभावित परिस्थितियों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। अभी मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हुई है।
    सुखी सेवनिया पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारणों को समझने में मदद मिलेगी। जांच के दौरान जरूरी तथ्यों और परिस्थितियों का भी सत्यापन किया जाएगा। फिलहाल मामले में किसी तरह की आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत कैसे हुई। घटना ने इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।