Tag: Bhopal News

  • NEET-UG री-एग्जाम 2026: कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा आज, भोपाल-इंदौर समेत प्रदेशभर में हाई अलर्ट

    NEET-UG री-एग्जाम 2026: कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा आज, भोपाल-इंदौर समेत प्रदेशभर में हाई अलर्ट


    मध्यप्रदेश । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के री-एग्जाम को लेकर रविवार को मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा आयोजित की जा रही है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सतना, खंडवा और अन्य जिलों में हजारों अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

    भोपाल में 32 परीक्षा केंद्रों पर करीब 13,774 अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं, जबकि इंदौर में 14 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। ग्वालियर में लगभग 5 हजार, जबलपुर में 10 हजार, छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना जताई गई है।

    इस बार परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। परीक्षा सामग्री ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है तथा सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की निगरानी में सामग्री केंद्रों तक पहुंचाई गई। सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। अभ्यर्थियों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा है और इसके लिए अतिरिक्त मशीनों तथा कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

    परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्रों पर सुबह 11 बजे से रिपोर्टिंग, बायोमेट्रिक जांच और फ्रिस्किंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से अतिरिक्त 65 मिनट का समय भी प्रदान किया जाएगा।

    परीक्षा को लेकर ड्रेस कोड का भी सख्ती से पालन कराया जा रहा है। छात्रों को हल्के रंग के साधारण कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर, ईयरफोन, बेल्ट, आभूषण, पर्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। धार्मिक या पारंपरिक पोशाक पहनकर आने वाले अभ्यर्थियों को अतिरिक्त जांच प्रक्रिया के कारण समय से पहले पहुंचने की सलाह दी गई है।

    री-एग्जाम के लिए आने वाले छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोपाल, विदिशा, नर्मदापुरम, गुना और अशोकनगर रेलवे स्टेशनों पर विशेष हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं। यहां छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने, परिवहन सुविधाओं और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

    हालांकि कुछ अभ्यर्थियों को अंतिम समय में परीक्षा केंद्र बदलने जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। मुरैना के एक छात्र का केंद्र ग्वालियर से बदलकर भोपाल कर दिया गया, जिससे उसे अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ी। वहीं कई छात्रों ने पिछले डेढ़ महीने को तनाव और अनिश्चितता से भरा बताया। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों ने मानसिक दबाव बढ़ाया, लेकिन अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने पहुंचे हैं।

    प्रदेशभर में प्रशासन, पुलिस और परीक्षा एजेंसियों की निगरानी में परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के प्रयास जारी हैं। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परीक्षा पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

  • NEET-UG 2026 के लिए हाई अलर्ट: सेंटरों पर CCTV-जैमर, डॉक्टर और टाइम डिस्प्ले की व्यवस्था, छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलेगी

    NEET-UG 2026 के लिए हाई अलर्ट: सेंटरों पर CCTV-जैमर, डॉक्टर और टाइम डिस्प्ले की व्यवस्था, छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलेगी


    मध्यप्रदेश । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए मध्य प्रदेश में व्यापक तैयारियां की गई हैं। 21 जून को आयोजित होने वाली इस परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और रेलवे समेत सभी संबंधित विभाग हाई अलर्ट पर हैं। प्रदेश के सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरे और सिग्नल जैमर लगाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की नकल या तकनीकी गड़बड़ी की संभावना को खत्म किया जा सके।

    राजधानी भोपाल में इस बार 13,774 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। इसके लिए 32 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिला कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सभी केंद्र प्रभारियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर परीक्षा प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि कई बार एक जैसे नाम वाले केंद्रों के कारण अभ्यर्थी भ्रमित हो जाते हैं, इसलिए केंद्रों के नाम और लोकेशन स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं। परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए दिशा-सूचक बोर्ड भी लगाए जाएंगे।

    परीक्षार्थियों को समय का सही अंदाजा रहे, इसके लिए प्रत्येक केंद्र के बाहर बड़ी डिजिटल घड़ी लगाई जाएगी। वहीं किसी छात्र की तबीयत खराब होने की स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टर और मेडिकल टीम भी तैनात रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    भोपाल के अलावा छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना है। ग्वालियर में 25 केंद्रों पर करीब 5 हजार छात्र परीक्षा देंगे। यहां बायोमैट्रिक अटेंडेंस, CCTV निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोपहर 1 बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इंदौर, भोपाल और रतलाम के बीच विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन 20 जून को संचालित होगी, जिससे विभिन्न शहरों से आने वाले छात्र समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकेंगे। ट्रेन में 13 स्लीपर, 2 जनरल और 2 एसएलआर कोच सहित कुल 17 कोच लगाए जाएंगे।

    जबलपुर में पहली बार परीक्षार्थियों के लिए विशेष बस सेवा शुरू की जा रही है। यहां 23 परीक्षा केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र परीक्षा देंगे। अभिभावकों के लिए शेड, बैठने की व्यवस्था, कूलर, पंखे और अस्थायी कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सभी केंद्रों पर 20 जून को सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं का ट्रायल भी किया जाएगा।

    प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों की आवाजाही बेहद सुरक्षित तरीके से होगी। सुरक्षा व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी रहेगी और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा। कुल मिलाकर NEET-UG 2026 को लेकर प्रदेश में अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं, ताकि लाखों छात्रों का भविष्य तय करने वाली यह परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल में संपन्न हो सके।

  • भोपाल में 24 घंटे में बदली पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट, 46 में से 24 के तबादले रद्द होने पर उठे सवाल

    भोपाल में 24 घंटे में बदली पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट, 46 में से 24 के तबादले रद्द होने पर उठे सवाल


    भोपाल । राजधानी भोपाल में पटवारियों के तबादलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा 15 जून को जारी स्थानांतरण आदेश में जिन 46 पटवारियों का तबादला किया गया था, उनमें से 24 पटवारियों को महज 24 घंटे के भीतर राहत मिल गई। 16 जून को जारी संशोधित सूची में इन कर्मचारियों के नाम हटा दिए गए, जिससे उनके तबादले स्वतः निरस्त हो गए। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार, 15 जून को जारी सूची में ऐसे पटवारियों को शामिल किया गया था जो लंबे समय से एक ही तहसील या क्षेत्र में पदस्थ थे। इनमें अधिकांश कर्मचारी हुजूर और कोलार तहसीलों में पांच से आठ वर्षों से कार्यरत थे। कुछ पटवारी अपनी गृह तहसील में भी पदस्थ थे। स्थानांतरण नीति के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को दूसरे क्षेत्र में भेजने का प्रावधान है, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई थी।

    हालांकि अगले ही दिन कैबिनेट बैठक के बाद स्थानांतरण की समय-सीमा बढ़ने के फैसले के बीच देर रात एक संशोधित सूची जारी की गई। इस नई सूची में 24 पटवारियों के नाम हटा दिए गए। सूत्रों के अनुसार संशोधित आदेश में शामिल अधिकांश कर्मचारी भी हुजूर और कोलार क्षेत्र से जुड़े हुए थे। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि प्रभावशाली संपर्कों और राजनीतिक पहुंच के चलते कुछ कर्मचारियों ने अपने नाम सूची से हटवा लिए।

    विवाद को और हवा तब मिली जब उन नामों को भी राहत मिलने की जानकारी सामने आई, जो पूर्व में एक चर्चित मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में सामने आ चुके थे। इनमें निधि नेमा और किशोर सिंह दांगी के नाम प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पूरे मामले को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।

    स्थानांतरण से राहत पाने वाले कर्मचारियों में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जो वर्ष 2015 से लेकर 2022 तक लगातार एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहे हैं। इनमें सदाशिव गौंड, नरेंद्र रैकवार, केवल सिंह कौर, रेनु पटेल, बुजकिशोर नागर, अभिषेक शर्मा, मुकुल सराठे, दीक्षा शर्मा, संदीप शर्मा, प्रियंका सिंह, सौरभ सोलंकी, प्रदीप पटेल, पूजा ठाकुर, प्रियंका दुबे और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।

    इस मामले में राजनीतिक प्रभाव की चर्चा भी जोरों पर है। संशोधित सूची से बाहर हुए 24 पटवारियों में से 20 हुजूर तहसील और 4 कोलार क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं। ये दोनों क्षेत्र विधायक रामेश्वर शर्मा के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। वहीं बैरसिया क्षेत्र से केवल एक नाम हटने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से राजनीतिक हस्तक्षेप की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

    स्थानांतरण नीति के तहत जिले में कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं किए जा सकते। भोपाल जिले में वर्तमान में 243 पटवारी पदस्थ हैं, जिसके अनुसार अधिकतम 47 तबादले संभव हैं। पहले 46 पटवारियों के तबादले किए गए और फिर संशोधित सूची जारी होने से कुल 76 स्थानांतरण संबंधी आदेशों की स्थिति बन गई। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त किए गए आदेश भी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, इसलिए नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

    इसके अलावा आदेश जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। स्थानांतरण नीति की कंडिका-42 के अनुसार सभी आदेश ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से जारी किए जाने चाहिए। जबकि 15 जून का आदेश हस्ताक्षरित स्वरूप में जारी हुआ था और 16 जून का संशोधित आदेश ई-ऑफिस से निकाला गया। इतना ही नहीं, संशोधित आदेश में पूर्व आदेश को स्पष्ट रूप से निरस्त करने का उल्लेख भी नहीं किया गया है।

    अब इस पूरे मामले के सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंचने और उच्चस्तरीय जांच की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

  • भोपाल में हाईटेंशन लाइन पर चढ़ा युवक, तारों पर चलता रहा; 57 मिनट की मशक्कत के बाद क्रेन से बचाया गया

    भोपाल में हाईटेंशन लाइन पर चढ़ा युवक, तारों पर चलता रहा; 57 मिनट की मशक्कत के बाद क्रेन से बचाया गया

    भोपाल । राजधानी भोपाल के एमपी नगर इलाके में गुरुवार सुबह एक हैरान कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया, जब एक युवक अचानक हाईटेंशन बिजली के खंभे पर चढ़ गया और कुछ ही देर में बिजली के तारों पर चलता हुआ दिखाई दिया। इस खतरनाक दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद लोगों की सांसें थम गईं। देखते ही देखते आसपास बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    घटना शासकीय प्रेस के सामने की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक अचानक बिजली के पोल पर चढ़ गया और फिर हाईटेंशन लाइन तक पहुंच गया। कई मिनटों तक वह तारों के बीच चलता और इधर-उधर घूमता रहा। लोगों को डर था कि कहीं युवक करंट की चपेट में न आ जाए या संतुलन बिगड़ने से नीचे न गिर पड़े।

    घटना की सूचना मिलते ही एमपी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले इलाके को सुरक्षित कराया और लोगों को बिजली के खंभे तथा तारों से दूर रहने की सलाह दी। इसके बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए गए। पुलिस, बिजली कंपनी और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

    करीब 57 मिनट तक चले इस अभियान के दौरान युवक को लगातार समझाइश दी जाती रही। अधिकारियों ने धैर्य और सतर्कता के साथ उससे बातचीत की ताकि वह किसी भी तरह का जोखिम भरा कदम न उठाए। आखिरकार युवक को शांत कर नीचे आने के लिए तैयार किया गया और क्रेन की सहायता से उसे सुरक्षित जमीन पर उतार लिया गया। युवक के नीचे आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।

    पुलिस जांच में युवक की पहचान 42 वर्षीय श्रवण कुमार निवासी हरदा के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार वह करीब पांच वर्ष पहले तक हरदा पोस्ट ऑफिस में अस्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। एक आपराधिक मामले में नाम आने के बाद उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। तब से वह नौकरी में पुनर्बहाली के लिए लगातार प्रयास कर रहा था।

    बताया गया कि श्रवण कुमार गुरुवार सुबह हरदा से भोपाल पहुंचा था। वह एमपी नगर स्थित डाक विभाग के कार्यालय में अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी नौकरी बहाल करने की मांग रखना चाहता था। हालांकि, उसकी अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी। इससे निराश होकर वह कार्यालय से बाहर निकला और कुछ ही देर बाद बिजली के पोल पर चढ़ गया।

    इस घटना के दौरान पुलिस ने बिजली कंपनी को भी तत्काल सूचना दी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जब तक युवक सुरक्षित नीचे नहीं उतर जाता, तब तक लाइन चालू न की जाए। हालांकि राहत की बात यह रही कि उस समय लाइन मेंटेनेंस कार्य के कारण संबंधित बिजली लाइन पहले से ही बंद थी। इसी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

    यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रही, बल्कि मानसिक तनाव और रोजगार संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल पुलिस युवक से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की जांच जारी है।

  • पेंशन शिकायत पर भड़के मंत्री विश्वास सारंग, वार्ड प्रभारी को लगाई फटकार

    पेंशन शिकायत पर भड़के मंत्री विश्वास सारंग, वार्ड प्रभारी को लगाई फटकार


    मध्य प्रदेश । भोपाल में जनसमस्याओं के निराकरण के लिए आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब कुछ महिलाओं ने पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत सीधे खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के सामने रखी। शिकायत सुनते ही मंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित वार्ड प्रभारी को तत्काल तलब कर जवाब मांगा। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मंत्री विश्वास सारंग के निवास पर प्रतिदिन आयोजित होने वाले जनदर्शन कार्यक्रम में नरेला विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-59 स्थित अन्ना नगर की निवासी मंदा सोनवानी, सहला सेनवानी, सुशीला विश्वकर्मा और सोमा सुरेश पहुंचीं। महिलाओं ने मंत्री को बताया कि वे शासन की पेंशन योजनाओं के लिए पात्र हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या के समाधान के लिए पहले भी कई बार प्रयास किए गए, लेकिन किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई।

    महिलाओं की शिकायत सुनने के बाद मंत्री सारंग ने तुरंत संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। प्रारंभिक जानकारी मिलने पर उन्होंने वार्ड क्रमांक-59 के प्रभारी रमीजुद्दीन को मौके पर बुलाने के निर्देश दिए। कुछ ही देर में वार्ड प्रभारी के पहुंचने पर मंत्री ने उनसे पेंशन प्रकरणों में हुई देरी और लापरवाही के संबंध में जवाब तलब किया।

    मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र लोगों तक समय पर लाभ पहुंचाना है। यदि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमी मानी जाएगी। उन्होंने वार्ड प्रभारी को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों की तत्काल समीक्षा कर पात्र लोगों को पेंशन का लाभ दिलाया जाए।

    जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चेतावनी दी कि आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसलिए सभी विभागीय अधिकारियों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।

    मंत्री सारंग ने यह भी कहा कि जनदर्शन कार्यक्रम का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, ताकि लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके। ऐसे कार्यक्रमों में प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में इस तरह की शिकायतें दोबारा सामने न आएं और प्रत्येक पात्र हितग्राही को समय पर योजना का लाभ मिले।

    इस घटनाक्रम के बाद संबंधित अधिकारियों ने लंबित पेंशन प्रकरणों की जांच और निराकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही प्रभावित महिलाओं सहित अन्य पात्र हितग्राहियों को भी पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा। मंत्री की सख्ती को प्रशासनिक जवाबदेही और जनहित के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

  • स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी

    स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी


    मध्य प्रदेश । भरोसेमंद और तेज डिलीवरी के लिए जानी जाने वाली स्पीड पोस्ट सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भोपाल में एक पार्सल की डिलीवरी में हुई देरी ने न केवल डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए पीड़ित उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।

    मामला भोपाल निवासी ज्योति शर्मा से जुड़ा है। उन्होंने 12 जनवरी 2026 को अरेरा हिल्स उप डाकघर से स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक पार्सल भेजा था। इस पार्सल में धार्मिक महत्व की पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता, शुद्ध घी से बनी मिठाइयां और कुछ कपड़े रखे गए थे। पार्सल को सुरक्षित और शीघ्र पहुंचाने के लिए उन्होंने 1228 रुपए का शुल्क भी जमा किया था। स्पीड पोस्ट सेवा का चयन इस विश्वास के साथ किया गया था कि पार्सल तय समय सीमा के भीतर अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा।

    दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन ज्योति शर्मा द्वारा भेजा गया एक अन्य स्पीड पोस्ट पार्सल मात्र तीन दिनों में अपने गंतव्य तक पहुंच गया। लेकिन दूसरा पार्सल सात दिन बाद, यानी 19 जनवरी को पहुंचा। एक ही दिन और एक ही सेवा के तहत भेजे गए दो पार्सलों की डिलीवरी अवधि में इतना बड़ा अंतर उपभोक्ता के लिए चिंता का विषय बन गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पार्सल को किसी दूरस्थ क्षेत्र में नहीं बल्कि अपेक्षाकृत नजदीकी स्थान पर भेजा गया था, जहां सामान्य परिस्थितियों में स्पीड पोस्ट दो से तीन दिन के भीतर पहुंच जाती है। ऐसे में सात दिन की देरी को सामान्य नहीं माना जा सकता था। आयोग ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि डाक विभाग देरी के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाया।

    जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच क्रमांक-1, जिसमें अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय शामिल थे, ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जब कोई उपभोक्ता अतिरिक्त शुल्क देकर प्रीमियम सेवा लेता है तो समयबद्ध सेवा प्रदान करना विभाग की जिम्मेदारी बन जाती है। केवल यह कह देना कि पार्सल अंततः डिलीवर हो गया, विभाग को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता।

    आयोग ने अपने आदेश में कहा कि समय पर डिलीवरी न होना और उसके पीछे उचित कारण न बता पाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर डाक विभाग को उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 5 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपए देने के निर्देश दिए गए हैं। कुल 8 हजार रुपए की यह राशि दो माह के भीतर भुगतान करनी होगी। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो विभाग को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।

    यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो समयबद्ध सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करते हैं। आयोग का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि सेवा प्रदाताओं को अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करना होगा और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेह भी बनना पड़ेगा।

  • भोपाल फिर बनेगा निवेश का केंद्र, जनवरी में हो सकती है दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

    भोपाल फिर बनेगा निवेश का केंद्र, जनवरी में हो सकती है दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों का स्वागत करने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार अगले वर्ष जनवरी में दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) आयोजित करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। उद्योग विभाग और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) ने आयोजन की प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि यह समिट न केवल निवेश आकर्षित करने का बड़ा मंच बनेगी, बल्कि प्रदेश की औद्योगिक छवि को और मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    फरवरी 2025 में आयोजित पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को बड़ी सफलता मिली थी। दो दिवसीय इस आयोजन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और इसमें देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया था। उस दौरान मध्य प्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। अब सरकार को उम्मीद है कि दूसरी जीआईएस में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है तथा प्रदेश नए निवेश रिकॉर्ड बना सकता है।

    सूत्रों के अनुसार आगामी समिट के लिए कई संभावित स्थलों का निरीक्षण किया जा चुका है। इनमें लाल परेड ग्राउंड, नीलबड़-रातीबड़ क्षेत्र में ज्यूडिशियल एकेडमी के आसपास की जमीन तथा राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का परिसर शामिल है। अंतिम निर्णय इस आधार पर लिया जाएगा कि आयोजन में कितने निवेशक, उद्योगपति और विदेशी प्रतिनिधि भाग लेने वाले हैं। पिछली बार मानव संग्रहालय परिसर में हुए आयोजन को भव्य रूप दिया गया था और पूरे शहर को विशेष रूप से सजाया गया था।

    सरकार इस बार केवल भव्यता पर ही नहीं, बल्कि आयोजन की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पिछली समिट के दौरान सामने आई तकनीकी खामियों और ध्वनि संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अलग से रणनीति बनाई जा रही है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में अधिकारियों ने इन मुद्दों की समीक्षा की और बेहतर व्यवस्थाओं के निर्देश दिए।

    निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में कोलार रोड स्थित सतगढ़ी क्षेत्र में 172 एकड़ भूमि पर मल्टी-प्रोडक्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना है। सरकार का मानना है कि ऐसे औद्योगिक क्लस्टर निवेशकों को आकर्षित करने में मददगार साबित होंगे।

    हालांकि पिछली जीआईएस के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण कार्य विवादों में भी रहे। फाउंटेन और अन्य सजावटी कार्यों पर हुए खर्च को लेकर जांच हुई और कई अनियमितताओं के आरोप सामने आए। लोकायुक्त तक पहुंची शिकायतों के बाद जांच में रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर मिलने की बात सामने आई थी। ऐसे में इस बार सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही पर अधिक जोर देती दिखाई दे रही है।

    कुल मिलाकर दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट मध्य प्रदेश के लिए निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर लेकर आ सकती है। यदि सरकार पिछली कमियों को दूर कर बेहतर आयोजन करने में सफल रहती है तो भोपाल एक बार फिर देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा सकता है।

  • भोपाल के रेस्टोरेंट में सेंडविच से निकली मरी हुई मक्खी, ग्राहक ने की शिकायत; फूड सेफ्टी विभाग करेगा जांच

    भोपाल के रेस्टोरेंट में सेंडविच से निकली मरी हुई मक्खी, ग्राहक ने की शिकायत; फूड सेफ्टी विभाग करेगा जांच


    भोपाल  राजधानी भोपाल में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक मामला सामने आया है। शहर के प्लेटिनम प्लाजा स्थित एक रेस्टोरेंट में परोसे गए चीज सेंडविच में मरी हुई मक्खी मिलने की शिकायत ने ग्राहकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। मामले की शिकायत फूड सेफ्टी विभाग तक पहुंच चुकी है और विभाग द्वारा जांच की तैयारी की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार अशोका गार्डन निवासी शोभा अहिरवार 15 जून को दोपहर करीब 12:30 बजे प्लेटिनम प्लाजा स्थित शर्मा चाइनिज फास्ट फूड रेस्टोरेंट पहुंची थीं। यहां उन्होंने चीज सेंडविच ऑर्डर किया। शोभा का आरोप है कि सेंडविच खाते समय उन्हें उसमें कोई कीड़ा दिखाई दिया। जब उन्होंने उसे ध्यान से देखा तो वह मरी हुई मक्खी निकली। इस घटना के बाद उन्होंने तत्काल रेस्टोरेंट के कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी।

    ग्राहक का कहना है कि खाने जैसी संवेदनशील चीज में इस तरह की लापरवाही सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद रेस्टोरेंट प्रबंधन ने मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत फूड एंड सेफ्टी विभाग को ई-मेल के माध्यम से भेजी और कार्रवाई की मांग की।

    शोभा अहिरवार ने बताया कि उन्होंने सेंडविच के लिए 219 रुपए का भुगतान किया था। हालांकि उनका कहना है कि मुद्दा पैसों का नहीं बल्कि खाद्य गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य का है। उन्होंने सेंडविच में मिली मक्खी के फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड किए, जिन्हें शिकायत के साथ विभाग को उपलब्ध कराया गया है।

    दूसरी ओर, मामले पर रेस्टोरेंट की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। बिल पर दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर कैशियर सौरभ भीमरे ने बताया कि सोमवार को ग्राहक की शिकायत प्राप्त हुई थी। उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट में खाद्य सामग्री तैयार करने के दौरान साफ-सफाई और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है। उनके अनुसार मक्खी सेंडविच तक कैसे पहुंची, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है। हालांकि ग्राहक की शिकायत को गंभीरता से सुना गया और उनकी बात पर ध्यान दिया गया है।

    अब इस पूरे मामले में फूड सेफ्टी विभाग की भूमिका अहम हो गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की जाएगी। जांच के दौरान रेस्टोरेंट की स्वच्छता व्यवस्था, खाद्य सामग्री के रखरखाव, किचन की स्थिति और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की पड़ताल की जा सकती है। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।

    यह घटना एक बार फिर खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता और गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाने-पीने की वस्तुओं में इस प्रकार की गड़बड़ी उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच और प्रभावी कार्रवाई से ही लोगों का भरोसा कायम रखा जा सकता है। फिलहाल सभी की नजरें फूड सेफ्टी विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगी।

  • धर्मेंद्र प्रधान के भोपाल दौरे से पहले युकां-एनएसयूआई नेताओं को हिरासत में लिया गया, NEET मुद्दे पर प्रदर्शन की थी तैयारी

    धर्मेंद्र प्रधान के भोपाल दौरे से पहले युकां-एनएसयूआई नेताओं को हिरासत में लिया गया, NEET मुद्दे पर प्रदर्शन की थी तैयारी


    मध्‍य प्रदेश । राजधानी भोपाल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के दौरे से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें विरोध प्रदर्शन करने से रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई, जबकि पुलिस इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बता रही है।

    जानकारी के अनुसार युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता NEET परीक्षा और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच पुलिस ने कई नेताओं को उनके घरों से तथा कुछ को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के आसपास से हिरासत में ले लिया।

    हिरासत में लिए गए नेताओं में युवक कांग्रेस के शहर अध्यक्ष अमित खत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार शामिल हैं। संगठन के अनुसार दोनों को उनके निवास स्थान से पुलिस अपने साथ ले गई। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया और अन्य कार्यकर्ताओं को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने से हिरासत में लिया गया। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे को भी कांग्रेस कार्यालय के बाहर से पुलिस ने हिरासत में लिया।

    युवक कांग्रेस और एनएसयूआई लंबे समय से NEET परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। संगठन के नेताओं का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों से छात्रों का विश्वास प्रभावित हुआ है और इसी कारण वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

    इस बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने भी केंद्रीय मंत्री के दौरे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही समस्याओं के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपेक्षा है।

    सिंघार ने मऊगंज की छात्रा आकांक्षा के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। उन्होंने दावा किया कि सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

    उधर भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और गड़बड़ियों पर कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भोपाल में प्रधानमंत्री Narendra Modi के कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे हैं।

    फिलहाल हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई और संभावित विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।

  • BU के नाम बदलने पर छात्रों की दो टूक: ‘नाम नहीं, सुविधाएं बदलें’; बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

    BU के नाम बदलने पर छात्रों की दो टूक: ‘नाम नहीं, सुविधाएं बदलें’; बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रिया


    मध्‍य प्रदेश । भोपाल स्थित Barkatullah University का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ किए जाने के प्रस्ताव ने छात्रों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। राज्य सरकार की ओर से सामने आए इस प्रस्ताव पर विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अधिकांश छात्रों का मानना है कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाली शिक्षा, शोध कार्य और सुविधाओं से बनती है।

    छात्रों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर हो, समय पर परीक्षाएं हों, परिणाम घोषित किए जाएं और शोध के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो इससे विद्यार्थियों को अधिक लाभ मिलेगा। कई छात्रों ने यह भी कहा कि नाम परिवर्तन की बजाय प्रशासन को कैंपस की बुनियादी व्यवस्थाओं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और प्लेसमेंट सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

    हालांकि कुछ छात्रों ने प्रस्तावित नाम परिवर्तन का समर्थन भी किया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम स्थानीय इतिहास, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा होना चाहिए। ऐसे छात्रों का मानना है कि ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ नाम भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे सकता है।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विश्वविद्यालय के नाम में बदलाव की चर्चा हो रही है। स्थापना के समय इसका नाम ‘भोपाल यूनिवर्सिटी’ था। बाद में प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी Maulana Barkatullah के सम्मान में इसका नाम बदलकर बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी रखा गया था। अब एक बार फिर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव सामने आने से बहस तेज हो गई है।

    शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का भी मानना है कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा उसके अकादमिक प्रदर्शन, शोध उपलब्धियों और छात्रों की सफलता से तय होती है। ऐसे में नाम परिवर्तन के साथ-साथ संस्थान की गुणवत्ता और संसाधनों को बेहतर बनाने पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।

    फिलहाल प्रस्ताव को लेकर छात्रों और आम लोगों के बीच चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में सरकार इस विषय पर क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। लेकिन छात्रों का एक बड़ा वर्ग यही संदेश दे रहा है कि विश्वविद्यालय की असली पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि उसके काम और उपलब्धियों से बनती है।