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  • भोपाल की सड़कों पर जानलेवा गड्ढे और जलभराव से लोग परेशान निगम परिषद में कई मुद्दों पर बात लेकिन सड़कों पर खामोशी

    भोपाल की सड़कों पर जानलेवा गड्ढे और जलभराव से लोग परेशान निगम परिषद में कई मुद्दों पर बात लेकिन सड़कों पर खामोशी


    भोपाल राजधानी भोपाल में लगातार हो रही बारिश ने शहर की सड़कों की हालत खराब कर दी है। कई इलाकों में सड़कें उखड़ चुकी हैं और जगह जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी इन गड्ढों में भर जाने के कारण वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ गया है। कई जगह सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि जर्जर सड़कों की समस्या लगातार बढ़ रही है लेकिन जिम्मेदार स्तर पर इसका स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा है।

    इसी बीच बुधवार को भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित हुई। बैठक में नगर निगम से जुड़े कई अहम प्रस्तावों और मुद्दों पर पार्षदों तथा निगम प्रशासन के बीच चर्चा हुई। भवनों को किराए पर देने से लेकर फर्नीचर और स्टेशनरी की खरीद तथा मल्टीलेवल पार्किंग के ठेके जैसे विषय बैठक में उठाए गए। निगम परिषद की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ी लेकिन शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों की समस्या चर्चा का हिस्सा नहीं बन सकी।

    बारिश के बाद भोपाल के कई इलाकों में सड़कों की स्थिति लगातार खराब हुई है। कहीं सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है तो कहीं बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी बन चुके हैं। जिन सड़कों पर पहले से छोटे गड्ढे थे वे लगातार बारिश के कारण और गहरे हो गए हैं। पानी भरने के बाद इनकी वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहन अचानक गड्ढे में गिरने पर असंतुलित हो सकते हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति ज्यादा जोखिम भरी हो जाती है।

    शहर के लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में सड़कों की स्थिति हर साल खराब होती है और कई स्थानों पर मरम्मत के बाद भी समस्या दोबारा सामने आ जाती है। नागरिक चाहते हैं कि केवल गड्ढों को मिट्टी या मलबे से भरने के बजाय सड़क की स्थायी मरम्मत की जाए ताकि बारिश के बाद दोबारा वही स्थिति पैदा न हो। कई लोगों का यह भी कहना है कि नगर निगम और संबंधित विभागों को बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत करानी चाहिए।

    नागरिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता उन सड़कों की है जहां दिनभर भारी यातायात रहता है। इन मार्गों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या रास्ता बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं पैदल राहगीरों के लिए जलभराव वाली सड़कें और खुले या गहरे गड्ढे अलग परेशानी पैदा कर रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक में जब कई प्रशासनिक और ठेके से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई तो शहर की जर्जर सड़कों का विषय सामने नहीं आने पर नागरिकों के बीच सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मांग है कि राजधानी की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को भी परिषद की प्राथमिकता में शामिल किया जाए। भोपालवासियों का कहना है कि सड़कों की समस्या सीधे उनकी रोजमर्रा की आवाजाही और सुरक्षा से जुड़ी है इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    फिलहाल बारिश का दौर जारी रहने के कारण सड़कों की स्थिति और खराब होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में शहरवासियों की नजर अब नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर है कि गड्ढों और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कब शुरू होती है और लोगों को इस परेशानी से कब राहत मिलती है।

  • भोपाल में कमर्शियल सीलिंग के खिलाफ सड़क पर उतरे व्यापारी! मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज की मांग तेज

    भोपाल में कमर्शियल सीलिंग के खिलाफ सड़क पर उतरे व्यापारी! मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज की मांग तेज


    भोपाल  भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शहर में हजारों नोटिस जारी होने के बाद कारोबारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने प्रदर्शन और चक्काजाम किया और सरकार के सामने तीन विकल्प रखे। व्यापारियों का कहना है कि या तो भोपाल का मास्टर प्लान लागू किया जाए या गुजरात की तर्ज पर मिक्स्ड लैंड यूज की व्यवस्था की जाए या फिर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई को तत्काल रोका जाए। इन मांगों पर समाधान नहीं निकला तो व्यापारियों ने अनिश्चितकाल के लिए भोपाल बंद करने की चेतावनी दी है।

    10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने सरकार से कार्रवाई के बीच कारोबारियों को राहत देने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से लोग इन इलाकों में कारोबार कर रहे हैं और इसी व्यवसाय से उनके परिवारों की रोजी रोटी चल रही है। व्यापारियों का दावा है कि कार्रवाई का दायरा बढ़ा तो बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और उनसे जुड़े कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि यदि कारोबार बंद हो गया तो बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च कैसे चलेगा।

    हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के कारोबारी राहुल जैन ने भी नोटिस मिलने के बाद चिंता जताई। उनका कहना है कि कई दुकानदार पहले से कर्ज में हैं। व्यापारियों का तर्क है कि उनकी संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई है बिजली के कमर्शियल मीटर लगाए गए हैं और नगर निगम को संपत्ति कर सहित दूसरे करों का भुगतान भी किया जाता रहा है। ऐसे में अब कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई किए जाने से कारोबारियों में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ रही है।

    इस पूरे विवाद में मास्टर प्लान का मुद्दा भी केंद्र में आ गया है। व्यापारियों और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर नया मास्टर प्लान लागू होता तो शहर के अलग अलग हिस्सों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जा सकती थी। व्यापारियों का दावा है कि भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 1995 में आया था और इसके बाद प्रस्तावित नया प्लान लंबे समय से लंबित है। इसी बीच शहर का विस्तार लगातार होता गया और कई ऐसे इलाकों में कारोबार शुरू हो गए जहां अब कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की जा रही है।

    सीलिंग कार्रवाई के विरोध में पहली बार बड़ी संख्या में ब्यूटिशियन और महिला कारोबारी भी सड़क पर उतरीं। प्रदर्शन के दौरान एक ब्यूटिशियन ने सड़क पर ही मेकअप करके विरोध जताया। उनका कहना है कि ब्यूटी पार्लर सैलून और छोटे कारोबारों से बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार जुड़ा है। यदि इन्हें बंद कराया गया तो सिर्फ दुकानदार ही नहीं बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारी और उनके परिवार भी प्रभावित होंगे।

    दूसरी ओर नगर निगम ने रहवासी भवनों के कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर सर्वे और नोटिस की कार्रवाई तेज कर दी है। निगम के मुताबिक अब तक 7158 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सोमवार तक 6589 नोटिस दिए गए थे जबकि मंगलवार को 569 नए नोटिस जारी किए गए। निगम के सर्वे में संपत्ति कर रिकॉर्ड के आधार पर 62 हजार 500 से ज्यादा ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं जहां रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे का दायरा बढ़ने के साथ नोटिस की संख्या और बढ़ सकती है।

    नगर निगम की कार्रवाई केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाली है। मुख्य सड़कों के साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे किया जा रहा है। नदी और तालाब के किनारे ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में बने भवनों की भी जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन और अनुमति के विपरीत निर्माण से जुड़े मामलों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

    निगम की ओर से बताया गया है कि कई मामलों में नोटिस के बाद निर्धारित समय पूरा होने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिभोग उल्लंघन के मामलों की जांच के बाद अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे और संबंधित लोगों को उल्लंघन समाप्त करने के लिए अंतिम सूचना दी जाएगी। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इधर व्यापारियों ने सरकार को तीन विकल्प देकर साफ कर दिया है कि वे कार्रवाई के खिलाफ पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। व्यापारियों की मांग है कि भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए और मिक्स्ड लैंड यूज की व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि इससे शहर की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

    फिलहाल भोपाल में नगर निगम की कार्रवाई और व्यापारियों के विरोध के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम नियमों के पालन को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है तो दूसरी तरफ व्यापारी अपने कारोबार और रोजगार को लेकर समाधान की मांग कर रहे हैं। अब सरकार के रुख पर नजर रहेगी कि वह व्यापारियों की मांगों पर क्या रास्ता निकालती है। अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला तो व्यापारियों की ओर से भोपाल बंद और बड़े आंदोलन की चेतावनी आने वाले दिनों में राजधानी की सियासत और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

  • निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर

    निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर


    भोपाल  भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक बुधवार 19 अगस्त को ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित होने जा रही है। साल के पहले नियमित परिषद सम्मेलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बैठक के एजेंडे में शहर की मौजूदा समस्याओं से जुड़े जनहित के मुद्दे शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि राजधानी की सड़कें बारिश के बाद बदहाल हो चुकी हैं कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है और सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं। इसके बावजूद इन अहम मुद्दों को परिषद की बैठक के एजेंडे में जगह नहीं दी गई है। ऐसे में बैठक के हंगामेदार रहने के आसार जताए जा रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक की शुरुआत पार्षदों के सवाल जवाब से होगी। इसके बाद एजेंडे में शामिल प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। बताया गया है कि सम्मेलन में नगर निगम की खाली हुई एक बिल्डिंग को किराए पर दिए जाने से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। विपक्ष का कहना है कि जब शहर के सामने बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई सवाल खड़े हैं तो परिषद की बैठक में इन विषयों पर प्राथमिकता से चर्चा होनी चाहिए।

    बारिश के बाद भोपाल की सड़कों की स्थिति विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। राजधानी में कई स्थानों पर सड़कें उखड़ी हुई हैं और कुछ इलाकों में सड़क निर्माण या दूसरे कामों के कारण रास्ते प्रभावित हैं। तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का सवाल है कि शहर की ऐसी स्थिति के बीच सड़क और जलभराव जैसे मुद्दे परिषद की बैठक में चर्चा का हिस्सा क्यों नहीं बनाए गए।

    सफाई व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष नगर निगम को घेरने की तैयारी में है। कई इलाकों में बारिश के बाद कचरा जमा होने और जल निकासी से जुड़ी शिकायतों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि शहर की सफाई और बुनियादी सुविधाएं सीधे तौर पर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हैं। ऐसे में परिषद की बैठक में इन विषयों पर पार्षदों को सवाल पूछने और अधिकारियों से जवाब लेने का मौका मिलना चाहिए।

    नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने एजेंडे को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर बैठक में शहर सरकार की ओर से जनहित के मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं दी जाती। उन्होंने दावा किया कि पिछली बैठक में भी जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की मांग की गई थी लेकिन विपक्ष की बात नहीं सुनी गई। अब एक बार फिर शहर की प्रमुख समस्याओं को एजेंडे से बाहर रखने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

    सीनियर पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने भी भोपाल की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक शहर की कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और तेज बारिश के बाद राजधानी के बड़े हिस्से में पानी भरने की स्थिति बनी। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था भी कई स्थानों पर ठीक नहीं है। विपक्ष इन सभी मुद्दों को परिषद की बैठक में उठाने की तैयारी में है।

    यह सम्मेलन इस साल का पहला ऐसा परिषद सम्मेलन बताया जा रहा है जिसमें पार्षदों को सवाल जवाब के जरिए शहर से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा। इससे पहले इस साल दो सम्मेलन हुए हैं लेकिन उनमें एक महिला सशक्तिकरण और दूसरा कचरे के नए नियमों से संबंधित था। इन बैठकों में पार्षदों के सवाल जवाब का सामान्य प्रारूप नहीं था।

    अब बुधवार की बैठक में विपक्ष के तेवर और सत्ता पक्ष के जवाब पर सबकी नजर रहेगी। एजेंडे में जनहित के मुद्दों की कमी को लेकर विपक्ष पहले ही अपनी रणनीति स्पष्ट कर चुका है। ऐसे में सड़क जलभराव सफाई और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल बैठक में जोरदार तरीके से उठने की संभावना है। अगर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होती है तो निगम परिषद का यह सम्मेलन हंगामेदार हो सकता है।

  • भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन! चक्काजाम के बीच आत्मदाह की चेतावनी से गरमाया माहौल

    भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन! चक्काजाम के बीच आत्मदाह की चेतावनी से गरमाया माहौल


    भोपाल। भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों का गुस्सा मंगलवार को सड़क पर दिखाई दिया। दुकानों और प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में व्यापारी और महिलाएं रोशनपुरा चौराहे पर पहुंचीं और करीब पौने दो घंटे तक चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और सरकार से कार्रवाई रोककर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिला कारोबारी भी शामिल रहीं।

    व्यापारियों का कहना है कि भोपाल के कई इलाकों में वर्षों से छोटे और बड़े कारोबार संचालित हो रहे हैं। इन कारोबारों से सिर्फ दुकान मालिक ही नहीं बल्कि कर्मचारी और उनके परिवार भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में अचानक सीलिंग की कार्रवाई होने से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित होने की आशंका है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार ऐसा रास्ता निकाले जिससे नियमों का पालन भी हो सके और लंबे समय से चल रहे कारोबार भी पूरी तरह बंद न हों।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ व्यापारी मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश करने लगे। हालांकि पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाली सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया था। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की। बाद में प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान भी गाया।

    इस आंदोलन में महिला कारोबारियों की मौजूदगी भी खास रही। ब्यूटी पार्लर और छोटे व्यवसाय चलाने वाली महिलाओं ने सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ अलग अंदाज में विरोध जताया। एक ब्यूटिशियन ने सड़क पर ही मेकअप करके अपना विरोध दर्ज कराया। महिला व्यापारियों का कहना था कि ब्यूटी पार्लर और इस तरह के छोटे कारोबार बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं। अगर इन प्रतिष्ठानों को बंद किया जाता है तो इसका सीधा असर कारोबारियों के साथ काम करने वाले कर्मचारियों पर भी पड़ेगा।

    प्रदर्शन में शामिल व्यापारियों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की। उनका कहना था कि यदि उनकी समस्याओं पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़ा किया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों की ओर से आंदोलन उग्र करने और आत्मदाह जैसे कदम उठाने की चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसी चेतावनियों को लेकर प्रशासन और पुलिस के सामने स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।

    व्यापारियों ने भोपाल के मास्टर प्लान को जल्द लागू करने की मांग भी उठाई है। थोक बाजार व्यापारी संघ के अभिषेक रब्बू के मुताबिक शहर में मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि जिन इलाकों में लंबे समय से कारोबार चल रहे हैं वहां व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। व्यापारियों ने गुजरात की तर्ज पर अनधिकृत विकास नियमितीकरण कानून 2022 जैसे प्रावधान लागू करने की मांग भी रखी है।

    व्यापारियों का तर्क है कि कई संपत्तियों की बाकायदा रजिस्ट्री हुई है और नगर निगम की ओर से इन संपत्तियों से संपत्ति कर भी लिया जाता है। ऐसे में वर्षों से संचालित कारोबारी गतिविधियों पर अचानक नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ी है। उनका कहना है कि यदि नियमों से जुड़ी कोई समस्या है तो सरकार को पहले समाधान और नियमितीकरण का रास्ता तलाशना चाहिए।

    फिलहाल रोशनपुरा चौराहे पर हुए प्रदर्शन के बाद व्यापारियों ने आंदोलन खत्म कर दिया है लेकिन उन्होंने साफ संकेत दिया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज हो सकता है। अब निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर हैं। एक तरफ नगर निगम की कार्रवाई और दूसरी तरफ कारोबारियों की रोजी रोटी से जुड़ी चिंता के बीच भोपाल में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाने की संभावना है।

  • MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल

    MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं का गवाह बना। कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच पर शिवलिंग को कंधे पर उठाते नजर आए तो कहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री की तुलना भगवान द्वारिकाधीश से कर दी। देवास में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान नेताओं की भीड़ एक खुली जीप पर भारी पड़ गई और कुछ नेता नीचे जा गिरे। वहीं छतरपुर में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोककर अपने स्कूल और सड़क से जुड़ी समस्याएं सामने रख दीं। इन घटनाओं के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इनकी खूब चर्चा हो रही है।

    इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिवलिंग भेंट किया। शिवलिंग हाथ में लेते ही मुख्यमंत्री ने उसे अपने कंधे पर उठा लिया। उनका यह अंदाज फिल्म बाहुबली के चर्चित दृश्य की याद दिलाता नजर आया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पल का वीडियो बनाया जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। इसके बाद इस दृश्य को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया।

    इसी कार्यक्रम में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री को लेकर अपने संबोधन में भगवान द्वारिकाधीश का संदर्भ दिया। उन्होंने चंदन नगर में सड़क निर्माण से जुड़ी मांग रखते हुए मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की अपील की। संबोधन के दौरान महापौर से एक और दिलचस्प गलती हो गई। वे मंत्री तुलसी सिलावट का नाम लेना चाह रहे थे लेकिन जुबान फिसलने के कारण उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को जल संसाधन मंत्री बता दिया। मुख्यमंत्री के इशारे के बाद महापौर ने तुरंत अपनी गलती सुधार ली।

    उधर देवास के कांटाफोड़ में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान एक अलग ही तस्वीर सामने आई। यात्रा में शामिल होने के लिए एक खुली जीप में कई कांग्रेस नेता सवार हो गए। बताया गया कि जीप में 10 से ज्यादा लोग मौजूद थे। पीछे अधिक वजन होने के कारण जीप का अगला हिस्सा ऊपर उठ गया और पीछे बैठे कुछ नेता नीचे जा गिरे। इस दौरान पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनीष चौधरी और पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े समेत कई नेता जीप में मौजूद थे। हादसे में एक महिला कांग्रेस नेता के घायल होने की बात सामने आई है जिन्हें उपचार के दौरान टांके लगाए गए।

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस के सबका साथ जैसे राजनीतिक नारों को लेकर भी चुटकी ली गई। हालांकि रैली के दौरान वाहन पर क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की स्थिति सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े करती है।

    छतरपुर के बसराही गांव में मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला बच्चों ने रोक लिया। मंत्री चंदला विधानसभा क्षेत्र से गुजर रहे थे तभी बच्चों ने रास्ते में आकर उनसे अपने स्कूल और गांव की समस्याओं के बारे में बात की। बच्चों ने स्कूल तक खराब सड़क स्कूल की बाउंड्री वॉल और बिजली से जुड़ी परेशानियां बताईं। मंत्री ने वाहन से उतरकर बच्चों की बातें सुनीं और समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया।

    यह घटना इस मायने में भी खास रही कि बच्चों ने बिना किसी झिझक के सीधे मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। गांव की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों को लेकर बच्चों की सक्रियता ने लोगों का ध्यान खींचा है। अब देखना होगा कि बच्चों की ओर से बताई गई समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन कितनी तेजी से कदम उठाता है।

    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों से जुड़ी एक चर्चा भी सामने आई है। राजधानी में हाल ही में पदस्थ हुए एक आईएएस अधिकारी को सरकारी बंगला आवंटित होने और उसमें उनकी पसंद के अनुसार रेनोवेशन शुरू होने की बात कही जा रही है। इसी बीच अधिकारी की कटारा हिल्स इलाके में एक निजी बंगले में रुचि की चर्चा भी प्रशासनिक हलकों में है। हालांकि इस मामले से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़ी इन घटनाओं ने एक ही दिन में कई रंग दिखा दिए। मुख्यमंत्री का शिवलिंग उठाने वाला अंदाज हो या महापौर की जुबान फिसलने का मामला कांग्रेस नेताओं का जीप से गिरना हो या बच्चों का मंत्री का काफिला रोककर अपनी बात कहना इन सभी घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।

  • भोपाल में टैक्सी हड़ताल का सीधा असर: रेलवे स्टेशन पर घंटों कैब का इंतजार ऑटो बना सहारा तो किराया भी बढ़ा

    भोपाल में टैक्सी हड़ताल का सीधा असर: रेलवे स्टेशन पर घंटों कैब का इंतजार ऑटो बना सहारा तो किराया भी बढ़ा


    भोपाल । भोपाल में टैक्सी चालक संघ की हड़ताल का असर अब आम यात्रियों पर साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार रात 12 बजे से Ola Uber और दूसरी ऐप आधारित कैब सेवाओं का संचालन बंद होने के बाद बुधवार सुबह भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्टेशन पहुंचने वाले कई यात्रियों ने ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन लंबे इंतजार के बावजूद वाहन उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसे में यात्रियों को मजबूरी में ऑटो और दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों का आरोप है कि कैब सेवा बंद होने का फायदा उठाकर कुछ ऑटो चालक सामान्य किराए से डेढ़ से दो गुना तक किराया मांग रहे हैं।

    स्टेशन पर बाहर से आने वाले यात्रियों को सामान के साथ काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। कई लोगों के साथ बच्चे और बुजुर्ग भी थे जिससे परेशानी और बढ़ गई। यात्री आकांक्षा ने बताया कि वह करीब आधे घंटे से कैब का इंतजार कर रही थीं। उनके घुटने में परेशानी है और उनके साथ दो बेटियां भी हैं। एक बच्ची की उम्र दो साल और दूसरी की आठ साल है। उन्हें रोहित नगर स्थित अपोलो अस्पताल जाना था लेकिन कैब उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे विकल्प तलाशने पड़े।

    इसी तरह कर्नाटक से भोपाल पहुंचे यात्री सत्यम को सुल्तानिया अस्पताल जाना था। उन्होंने बताया कि वह उत्तराखंड के रहने वाले हैं और कर्नाटक से भोपाल पहुंचे हैं। उन्होंने काफी देर तक ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन वाहन नहीं मिला। इसके बाद उन्हें स्टेशन के बाहर दूसरे साधन तलाशने पड़े। ऐसे यात्रियों के लिए हड़ताल के दौरान ऑटो ही प्रमुख विकल्प बन गया है।

    इस बीच टैक्सी चालक संगठनों की ओर से हड़ताल को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ उनकी मुख्य मांग टैक्सी का उचित और स्थायी किराया तय करने की है। ड्राइवरों का कहना है कि पेट्रोल और दूसरे ईंधन की कीमतों के साथ वाहन की किस्त बीमा मरम्मत और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है जबकि कंपनियों की ओर से मिलने वाला किराया उनकी लागत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

    संघ की मांग है कि सरकार टैक्सी के लिए प्रति किलोमीटर उचित किराया तय करे। संगठन पहले ही 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर के साथ टाइम चार्ज और बेस फेयर की मांग कर चुका है। इसके अलावा प्राइवेट नंबर की कार बाइक और ई रिक्शा के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग भी की जा रही है। संगठन का आरोप है कि ऐसे वाहनों के एग्रीगेटर सेवाओं में इस्तेमाल से कमर्शियल टैक्सी चालकों की कमाई प्रभावित होती है।

    हड़ताल के दौरान भोपाल स्टेशन पर यात्रियों को छोड़ने पहुंच रही कुछ कैब को संगठन से जुड़े लोगों द्वारा रोकने की बात भी सामने आई है। अवधपुरी से स्टेशन पहुंचे एक यात्री ने बताया कि उनकी कैब को भी स्टेशन पर रोक लिया गया और उन्हें किराया भुगतान करने नहीं दिया गया। हालांकि आरटीओ की ओर से साफ कहा गया है कि ओवरचार्जिंग की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

    टैक्सी संगठनों की ओर से 19 अगस्त को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना प्रदर्शन करने की बात कही गई है। संगठन मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन देकर अपनी मांगों के जल्द समाधान की मांग करेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन टैक्सी बंद में बदला जा सकता है।

    हड़ताल का सबसे ज्यादा असर रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट बस स्टैंड और शहर के प्रमुख इलाकों के बीच सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ने की संभावना है। संगठन ने आम लोगों को हो रही परेशानी के लिए खेद जताते हुए कहा है कि ड्राइवर अपनी आजीविका से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन कर रहे हैं और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।

  • भोपाल में अब 20 ई-बसों से आसान होगा सफर! रोज 10 से 12 हजार यात्रियों को फायदा दिव्यांगों के लिए भी खास सुविधा

    भोपाल में अब 20 ई-बसों से आसान होगा सफर! रोज 10 से 12 हजार यात्रियों को फायदा दिव्यांगों के लिए भी खास सुविधा


    भोपाल  भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मंगलवार से राजधानी की सड़कों पर 10 नई इलेक्ट्रिक बसें दौड़ना शुरू करेंगी। इसके साथ ही भोपाल में ई-बसों की कुल संख्या बढ़कर 20 हो जाएगी। नई बसों के संचालन से बैरागढ़ कोलार रोड बावड़ियाकलां और शहर के कई प्रमुख इलाकों के बीच सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि सभी ई-बसें एमपी नगर से होकर गुजरेंगी। इससे नौकरीपेशा लोगों के साथ स्कूल कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों और रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को राहत मिलने की संभावना है।

    भोपाल में फिलहाल 10 ई-बसें तीन प्रमुख रूट पर संचालित की जा रही हैं। इन बसों में रोजाना औसतन करीब 4500 यात्री सफर कर रहे हैं। इनमें छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की संख्या भी अच्छी खासी बताई गई है। अब 10 नई बसें जुड़ने के बाद रोजाना करीब 10 से 12 हजार यात्रियों के सफर करने की उम्मीद है। यानी ई-बस सेवा का विस्तार शहर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को और मजबूत करेगा।

    नई व्यवस्था में बैरागढ़ से सलैया तक जाने वाला B35 रूट महत्वपूर्ण है। यह बस चिरायु अस्पताल और बैरागढ़ मार्केट से शुरू होकर लालघाटी कलेक्ट्रेट हमीदिया अस्पताल रॉयल मार्केट पीर गेट कमला पार्क रोशनपुरा और एमपी नगर होते हुए बावड़िया चौराहा आकृति ईको सिटी और सलैया तक जाएगी। इस रूट से पुराने शहर के कई हिस्सों को नए विकसित इलाकों से जोड़ने में मदद मिलेगी।

    B36 रूट कोच फैक्ट्री से कोलार रोड तक रहेगा। यह बस कोच फैक्ट्री भोपाल रेलवे स्टेशन पुष्पा नगर अशोका गार्डन सुभाष नगर चेतक ब्रिज बोर्ड ऑफिस और एमपी नगर से होते हुए 1100 क्वार्टर मनीषा मार्केट बंसल अस्पताल चूनाभट्टी मंदाकिनी चौराहा और गेहूंखेड़ा होते हुए कोलार रोड तक जाएगी। इस रूट से शहर के मध्य हिस्से और कोलार क्षेत्र के बीच आने जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिल सकती है।

    वहीं B37 रूट बैरागढ़ ई-बस डिपो से आईएसबीटी तक रहेगा। यह बस बैरागढ़ मार्केट लालघाटी कलेक्ट्रेट हमीदिया अस्पताल रॉयल मार्केट शाहजहांनाबाद नादरा बस स्टैंड भारत टॉकीज जहांगीराबाद पीएचक्यू मिंटो हॉल बिड़ला मंदिर वल्लभ भवन जिला न्यायालय और डीबी मॉल होते हुए आईएसबीटी पहुंचेगी।

    इन ई-बसों की एक खासियत दिव्यांग यात्रियों के लिए दी गई सुविधा भी है। बस में हाइड्रोलिक डोर की व्यवस्था की गई है जिसके जरिए व्हीलचेयर और ट्राइसाइकिल इस्तेमाल करने वाले यात्री आसानी से चढ़ और उतर सकेंगे। हाइड्रोलिक डोर के सामने दो व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल खड़ी करने जितनी जगह भी उपलब्ध कराई गई है। इससे सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक और समावेशी बनाने में मदद मिलेगी।

    भोपाल के ट्रैफिक को देखते हुए ई-बसों का आकार भी महत्वपूर्ण है। इनकी लंबाई करीब 9 मीटर है जबकि शहर में चलने वाली कई पारंपरिक सिटी बसों की लंबाई 12 मीटर तक होती है। कम लंबाई वाली ई-बसें अपेक्षाकृत तंग सड़कों और अधिक ट्रैफिक वाले इलाकों में संचालन के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकती हैं। ई-बसों की संख्या बढ़ने से राजधानी में सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मजबूत होगा और आने वाले समय में यात्रियों को ज्यादा सुविधाजनक सफर मिलने की उम्मीद है।

  • भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव, सुबह 11:30 से शुरू होगी सेवा; छुट्टियों में रात 8:30 बजे तक दौड़ेगी ट्रेन

    भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव, सुबह 11:30 से शुरू होगी सेवा; छुट्टियों में रात 8:30 बजे तक दौड़ेगी ट्रेन


    भोपाल  भोपाल मेट्रो अब नई समय सारणी के साथ यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ गई है। सोमवार से भोपाल मेट्रो का नया शेड्यूल लागू हो गया है। इसके तहत यात्रियों को सप्ताह के सभी दिनों में हर 15 मिनट के अंतराल पर मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। नई व्यवस्था के मुताबिक सोमवार से शनिवार तक मेट्रो कुल 62 फेरे लगाएगी जबकि रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में ट्रेनों के 70 फेरे संचालित किए जाएंगे। मेट्रो के नए समय को इस तरह तय किया गया है कि यात्रियों को पूरे परिचालन समय के दौरान नियमित अंतराल पर ट्रेन मिल सके।

    नए शेड्यूल के अनुसार सुभाष नगर स्टेशन से पहली मेट्रो सुबह 11:30 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन एम्स की ओर जाएगी। वहीं एम्स स्टेशन से पहली मेट्रो दोपहर 12 बजे सुभाष नगर के लिए रवाना होगी। सोमवार से शनिवार तक मेट्रो सेवा सुबह 11:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक उपलब्ध रहेगी। सुभाष नगर स्टेशन से इन दिनों आखिरी मेट्रो शाम 7 बजे रवाना होगी जबकि एम्स स्टेशन से अंतिम ट्रेन शाम 7:30 बजे चलेगी। इस अवधि में दोनों दिशाओं को मिलाकर कुल 62 फेरे लगाए जाएंगे।

    रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में यात्रियों को मेट्रो की सुविधा एक घंटे ज्यादा समय तक मिलेगी। इन दिनों सेवा सुबह 11:30 बजे शुरू होकर रात 8:30 बजे तक जारी रहेगी। सुभाष नगर से आखिरी मेट्रो रात 8 बजे रवाना होगी जबकि एम्स स्टेशन से अंतिम मेट्रो रात 8:30 बजे चलेगी। रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर दोनों दिशाओं में कुल 70 ट्रिप संचालित किए जाएंगे। इस तरह छुट्टी वाले दिनों में मेट्रो से सफर करने वाले लोगों को अतिरिक्त समय और ज्यादा ट्रिप का फायदा मिलेगा।

    भोपाल मेट्रो का संचालन अब दोनों ट्रैक पर किया जा रहा है। नई समय सारणी में ट्रेनों के बीच 15 मिनट का समान अंतराल रखा गया है। इससे यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खासकर नियमित रूप से मेट्रो का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव काफी उपयोगी माना जा रहा है। यात्री अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार आसानी से बना सकेंगे।

    मेट्रो प्रबंधन ने यात्रियों के लिए स्टेशन पहुंचने और सुरक्षा जांच से जुड़ी व्यवस्था को भी स्पष्ट किया है। पहली मेट्रो के निर्धारित प्रस्थान समय से करीब 15 मिनट पहले यात्रियों के लिए स्टेशन खोले जाएंगे। इससे यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश करने सुरक्षा जांच पूरी करने और प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। टिकटिंग की सुविधा भी निर्धारित प्रवेश और निकास द्वार पर उपलब्ध रहेगी।

    सुभाष नगर स्टेशन पर गेट नंबर 3 केंद्रीय विद्यालय स्टेशन पर गेट नंबर 3 बोर्ड ऑफिस स्टेशन पर गेट नंबर 3 एमपी नगर स्टेशन पर गेट नंबर 3 रानी कमलापति स्टेशन पर गेट नंबर 2 डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट नंबर 3 अलकापुरी स्टेशन पर गेट नंबर 3 और एम्स स्टेशन पर गेट नंबर 1 पर मैनुअल टिकटिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी। नई टाइमिंग और नियमित 15 मिनट के अंतराल से भोपाल मेट्रो सेवा के इस्तेमाल को आसान बनाने की कोशिश की गई है। अब यात्रियों को सप्ताह के अधिकांश दिनों में तय अंतराल पर ट्रेन मिलेगी जबकि रविवार और सार्वजनिक अवकाश पर अतिरिक्त परिचालन समय का लाभ भी मिलेगा।

  • भोपाल में सजेगा अनुभव और हुनर का मंच, MCU के अभ्युदय 2026 में पीयूष मिश्रा समेत 50 पूर्व छात्र करेंगे संवाद

    भोपाल में सजेगा अनुभव और हुनर का मंच, MCU के अभ्युदय 2026 में पीयूष मिश्रा समेत 50 पूर्व छात्र करेंगे संवाद


    भोपाल । भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सोमवार से तीन दिवसीय सत्रारंभ कार्यक्रम अभ्युदय 2026 का आगाज होने जा रहा है। इस बार आयोजन को मैं और मेरा विश्वविद्यालय थीम के साथ खास रूप दिया गया है। कार्यक्रम के पहले दिन 18 अगस्त को बॉलीवुड और रंगमंच के चर्चित अभिनेता लेखक गीतकार और गायक पीयूष मिश्रा विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। वह सुबह 10:30 बजे विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।

    अभ्युदय 2026 को इस बार केवल नए सत्र के स्वागत कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है बल्कि इसे विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के बीच संवाद का बड़ा मंच बनाया गया है। विश्वविद्यालय के मीडिया हेड डॉ. पवित्र श्रीवास्तव के अनुसार आयोजन की सबसे खास बात यह रहेगी कि एमसीयू के करीब 35 वर्षों के इतिहास में पढ़कर निकले लगभग 50 पूर्व विद्यार्थी पहली बार एक साथ सत्रारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे। अलग अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके ये पूर्व छात्र नए विद्यार्थियों से सीधे संवाद करेंगे और उन्हें पढ़ाई के साथ करियर की दिशा समझने में मदद करेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान पूर्व विद्यार्थियों के लिए दस अलग अलग संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में पूर्व छात्र अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा करेंगे। साथ ही मीडिया और संचार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच रोजगार और करियर की नई संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे नए विद्यार्थियों को यह समझने का मौका मिलेगा कि विश्वविद्यालय में हासिल की गई शिक्षा को व्यावहारिक दुनिया में किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

    अभ्युदय 2026 की एक और खासियत इसका अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव है। इस बार एमसीयू के पूर्व विद्यार्थी अमेरिका ब्रिटेन कनाडा ऑस्ट्रेलिया दुबई सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका सहित सात देशों से कार्यक्रम से जुड़ेंगे। विदेशों में अपनी पेशेवर पहचान बनाने वाले ये पूर्व छात्र भी नए विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। इनमें प्रिंट मीडिया टेलीविजन डिजिटल मीडिया मीडिया मैनेजमेंट विज्ञापन जनसंपर्क प्रशासन और राजनीति जैसे अलग अलग क्षेत्रों में काम कर रहे पूर्व विद्यार्थी शामिल हैं।

    पहले दिन पीयूष मिश्रा की मौजूदगी भी विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण रहेगी। अभिनेता के साथ साथ लेखक गीतकार और गायक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पीयूष मिश्रा युवाओं के बीच अपने अनुभव साझा करेंगे। उनका रचनात्मक सफर और रंगमंच से लेकर सिनेमा तक का अनुभव विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है। उनके संवाद के जरिए विद्यार्थियों को रचनात्मक क्षेत्रों में करियर की चुनौतियों और संभावनाओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

    तीन दिनों तक चलने वाले अभ्युदय 2026 का समापन 20 अगस्त को होगा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद रजनीश होंगे। खास बात यह है कि वह भी एमसीयू के पूर्व विद्यार्थी रहे हैं। ऐसे में आयोजन का समापन भी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच जुड़ाव की भावना को मजबूत करने वाला होगा।

    कुल मिलाकर अभ्युदय 2026 नए विद्यार्थियों के लिए केवल सत्रारंभ कार्यक्रम नहीं बल्कि अनुभवों से सीखने और करियर की नई दिशाओं को समझने का अवसर बनने जा रहा है। वरिष्ठ कलाकारों से संवाद और देश विदेश में सक्रिय पूर्व छात्रों की मौजूदगी के जरिए विश्वविद्यालय इस आयोजन को अपने 35 वर्षों के सफर और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

  • विभाजन विभीषिका दिवस पर CM का बड़ा संदेश, बोले- बंटवारे का दर्द आज भी व्यथित करता है मन

    विभाजन विभीषिका दिवस पर CM का बड़ा संदेश, बोले- बंटवारे का दर्द आज भी व्यथित करता है मन


    भोपाल। विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को भोपाल के शौर्य स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने तथा विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले लोगों को याद किया। मुख्यमंत्री ने शौर्य स्मारक परिसर में नवनिर्मित डिजिटल लाइब्रेरी का शुभारंभ भी किया। इस डिजिटल लाइब्रेरी में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और देश के गौरवशाली इतिहास से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने लाइब्रेरी की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और वहां मौजूद डिजिटल सामग्री के बारे में जानकारी ली।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल दक्षिण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की तिरंगा यात्रा को शौर्य स्मारक तिराहे से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा भारत माता चौराहा यानी डिपो चौराहा तक पहुंची। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चल रहा हर घर तिरंगा अभियान देशभर में राष्ट्रभक्ति और जनभागीदारी का उत्सव बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश के अलग अलग हिस्सों में तिरंगा पूरे सम्मान और गर्व के साथ लहरा रहा है।

    विभाजन विभीषिका दिवस के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने 1947 के उस दौर को याद किया जब भारत के विभाजन के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर और संपत्ति छोड़कर पलायन करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया और इस त्रासदी की पीड़ा को याद कर आज भी मन व्यथित हो उठता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय से सीख लेते हुए देशवासियों को एकता भाईचारे और अखंड राष्ट्रीय भावना को और मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन केवल सीमाओं के बदलने की घटना नहीं थी बल्कि इससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए। लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा और अनेक परिवारों ने अपनों को खोया। ऐसे में विभाजन विभीषिका दिवस का उद्देश्य इतिहास की उस त्रासदी को याद करना और आने वाली पीढ़ियों को उसके बारे में जानकारी देना भी है। शौर्य स्मारक में आयोजित कार्यक्रम के जरिए इसी इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

    इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम और देश के इतिहास से जुड़ी सामग्री को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। इससे युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न पहलुओं और देश के लिए बलिदान देने वाली विभूतियों के योगदान को समझने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कांग्रेस पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सत्य को नहीं जानती तो सत्याग्रह की बात कैसे करेगी। उन्होंने पार्टी को आत्ममंथन और आत्ममूल्यांकन करने की सलाह देते हुए अपने राजनीतिक विचार रखे। हालांकि कार्यक्रम का मुख्य केंद्र विभाजन की त्रासदी को याद करना और राष्ट्रभक्ति तथा राष्ट्रीय एकता का संदेश देना रहा।

    डॉ. मोहन यादव ने भारत के भविष्य को लेकर भी अपना संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और युवा देश है तथा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र के साथ राष्ट्रीय विकास में भागीदारी की बात कही।

    शौर्य स्मारक में आयोजित कार्यक्रम ने स्वतंत्रता दिवस से पहले भोपाल में राष्ट्रभक्ति का माहौल और मजबूत किया। एक तरफ विभाजन की पीड़ा को याद कर इतिहास से सीख लेने का संदेश दिया गया तो दूसरी ओर तिरंगा यात्रा के जरिए देश के प्रति सम्मान और एकता की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से राष्ट्रीय एकता भाईचारे और देश की अखंडता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाने की अपील की।