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  • भोपाल में कुएं में मिला युवक का शव, दो साल से चल रहा था इलाज, मर्ग कायम कर मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस

    भोपाल में कुएं में मिला युवक का शव, दो साल से चल रहा था इलाज, मर्ग कायम कर मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस


    भोपाल । भोपाल के सुखी सेवनिया इलाके में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब सुरभि कॉलेज के पास स्थित एक कुएं में 23 वर्षीय युवक का शव मिला। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कुएं से बाहर निकलवाया। मृतक की पहचान विशाल वंशकार पिता छोटेलाल वंशकार निवासी सुखी सेवनिया के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विशाल पिछले चार दिनों से घर नहीं लौटा था। हालांकि परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज नहीं कराई थी। युवक का शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
    जानकारी के अनुसार रविवार सुबह सुरभि कॉलेज के पास स्थित कुएं में ग्रामीणों ने एक युवक का शव देखा। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को कुएं से बाहर निकलवाया। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने पर मृतक के परिजनों को सूचना दी गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी भेजा गया। रविवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
    मृतक के बड़े भाई राजेश वंशकार ने बताया कि विशाल के दिमाग का पिछले करीब दो साल से इलाज चल रहा था। उनके अनुसार बीते कुछ समय से उसकी मानसिक स्थिति में परेशानी बढ़ गई थी। वह कई-कई दिनों तक बिना किसी को बताए घर से बाहर चला जाता था और फिर कुछ समय बाद वापस लौट आता था। परिवार के मुताबिक पहले भी उसके घर से बाहर रहने की ऐसी स्थिति बनती रही थी।
    परिजनों ने बताया कि इसी वजह से जब विशाल चार दिनों तक घर नहीं लौटा तो उन्होंने उसकी गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई। परिवार को उम्मीद थी कि वह पहले की तरह खुद ही वापस आ जाएगा। हालांकि इस बार उसका शव कुएं में मिलने की खबर सामने आई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिजनों ने किसी व्यक्ति पर संदेह जताते हुए कोई आरोप नहीं लगाया है।
    पुलिस अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि विशाल कुएं तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। युवक के घर से निकलने से लेकर शव मिलने तक की घटनाओं को समझने के लिए सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। कुएं में गिरने की आशंका समेत अन्य संभावित परिस्थितियों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। अभी मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हुई है।
    सुखी सेवनिया पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारणों को समझने में मदद मिलेगी। जांच के दौरान जरूरी तथ्यों और परिस्थितियों का भी सत्यापन किया जाएगा। फिलहाल मामले में किसी तरह की आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत कैसे हुई। घटना ने इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

  • भोपाल के कॉलेज में गरबा आयोजन पर विवाद, बाहरी युवकों की एंट्री और गानों को लेकर भिड़े लोग, पुलिस से कार्रवाई की मांग

    भोपाल के कॉलेज में गरबा आयोजन पर विवाद, बाहरी युवकों की एंट्री और गानों को लेकर भिड़े लोग, पुलिस से कार्रवाई की मांग


    भोपाल। भोपाल के सेम कॉलेज में गरबा आयोजन के दौरान विवाद का मामला सामने आया है। घटना से जुड़े वीडियो में बजरंग दल के एक कार्यकर्ता को युवक को थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है। विवाद की वजह फिल्मी गानों पर गरबा करने और कॉलेज में बाहरी युवकों को प्रवेश देने को लेकर जताई गई आपत्ति बताई जा रही है। मामले में बजरंग दल की ओर से बिलखिरिया थाने में शिकायत आवेदन देकर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि घटना के सभी पहलुओं और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
    विश्व हिंदू परिषद के मध्य भारत प्रांत मंत्री जितेंद्र चौहान ने आरोप लगाया कि नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजन धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े होते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में फिल्मी और अश्लील गाने बजाने के बजाय पारंपरिक गरबा और धार्मिक गीतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर आयोजन के दौरान प्रवेश व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि कार्यक्रम में ऐसे युवक भी मौजूद थे जो कॉलेज के विद्यार्थी नहीं थे।
    जितेंद्र चौहान के मुताबिक स्थानीय छात्रों से गरबा आयोजन के दौरान फिल्मी गाने बजाए जाने की जानकारी मिलने के बाद बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे थे। इसके बाद संगठन के अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। चौहान ने स्पष्ट किया कि वीडियो में जिस युवक को थप्पड़ मारे जाते दिखाई दे रहे हैं वह बजरंग दल का कार्यकर्ता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ भी बदसलूकी और मारपीट की गई। ऐसे में वीडियो में दिखाई देने वाली घटना और संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट के आरोपों की अलग-अलग परिस्थितियों में जांच किए जाने की जरूरत है।
    बिलखिरिया थाना प्रभारी को दिए गए शिकायत आवेदन में पुष्पराज यादव ने खुद को भोपाल जिला बजरंग दल का प्रमुख बताया है। आवेदन के मुताबिक 16 अक्टूबर की रात करीब साढ़े आठ बजे उन्हें सेम कॉलेज में गरबा आयोजन के दौरान फिल्मी गानों पर डांस होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह अपने साथियों शिवम कुशवाह और यश द्विवेदी के साथ कॉलेज पहुंचे। शिकायत में शिवम कुशवाह को मां कंकाली प्रखंड मंत्री और यश द्विवेदी को बजरंग दल का जिला संयोजक बताया गया है।
    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कॉलेज परिसर में मुस्लिम समुदाय के दो से अधिक युवक मौजूद थे। आवेदन के अनुसार जब कार्यकर्ताओं ने फिल्मी गाने बंद करने और आयोजन के स्वरूप पर आपत्ति जताई तो वहां मौजूद युवकों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। शिकायत में कॉलेज फैकल्टी के नीरज गुप्ता पर बाउंसर बुलाकर कार्यकर्ताओं को बाहर निकलवाने की धमकी देने और संबंधित युवकों का पक्ष लेने का आरोप भी लगाया गया है। आवेदन में समीर आलम समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
    जितेंद्र चौहान ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में होने वाले गरबा आयोजनों में धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने आयोजकों से पारंपरिक गीतों के इस्तेमाल और प्रवेश व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने की अपील की। साथ ही कहा कि संगठन ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग करेगा और जरूरत पड़ने पर विरोध भी करेगा। फिलहाल इस पूरे मामले में युवक को थप्पड़ मारने की घटना और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं।

  • भोपाल के न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, 50 फीट के दायरे में 3 छोले-भटूरे की दुकानें, आग बुझाने के इंतजाम अधूरे

    भोपाल के न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, 50 फीट के दायरे में 3 छोले-भटूरे की दुकानें, आग बुझाने के इंतजाम अधूरे


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के बाद भी दुकानों में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। करीब 900 दुकानों वाले इस व्यस्त बाजार में कपड़े और ज्वेलरी की दुकानों के बीच छोले-भटूरे की दुकानों में भट्टियां सुलग रही हैं। इन दुकानों में ग्राहकों के लिए नाश्ता तैयार किया जा रहा है लेकिन सुरक्षा इंतजामों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। जांच के दौरान कुछ दुकानों में फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं मिली। वहीं अग्निशामक यंत्र होने के बावजूद कर्मचारियों को उनका इस्तेमाल करने की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है।
    रिपोर्ट के मुताबिक जिस बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी थी उसके आसपास भी इसी तरह की दुकानें संचालित हो रही हैं। एक दुकान से करीब 50 फीट की दूरी पर तीन अन्य छोले-भटूरे की दुकानें होने की जानकारी सामने आई है। यहां छोटे किचन में भटूरे तले जा रहे हैं। दुकानों के आसपास कपड़े और अन्य सामान की मौजूदगी के कारण आग लगने की स्थिति में नुकसान बढ़ने की आशंका है। बाजार में बड़ी संख्या में ग्राहकों की आवाजाही के कारण सुरक्षा व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
    जांच में कलकत्ता छोले-भटूरे की दुकान पर कई कमियां सामने आईं। यहां जिस जगह पर छोले तैयार किए जा रहे थे उसके ऊपर धूप से बचने के लिए रिट्रैक्टेबल अवनिंग लगी हुई थी। दुकान में आग बुझाने का यंत्र मौजूद था लेकिन उसे चलाने का प्रशिक्षण कर्मचारियों को नहीं होने की बात बताई गई। आग लगने की स्थिति में केवल अग्निशामक यंत्र का मौजूद होना पर्याप्त नहीं है बल्कि कर्मचारियों को उसका सही इस्तेमाल करना भी आना चाहिए।
    देहली छोले-भटूरे की दुकान में किचन बेहद छोटा बताया गया है। यहां दो कर्मचारी मुश्किल से बैठकर भटूरे तल पाते हैं। ऐसी जगह पर आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा बिजली के तार भी खुले मिले। पंजाब छोले-भटूरे की दुकान में फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं होने की जानकारी सामने आई। वहां भी बिजली के खुले तार और कोने में रखे अग्निशामक यंत्र पाए गए।
    फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के मुताबिक दुकानों में अग्निशामक यंत्र और व्यावसायिक उपयोग के लिए उपयुक्त गैस सिलेंडर होना चाहिए। उन्होंने जांच में भट्टियां मिलने और बिजली सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र नहीं होने की बात कही। रिपोर्ट के अनुसार कुछ दुकानों में कर्मचारियों के बैठने और काम करने की व्यवस्था भी सुरक्षित नहीं पाई गई। इन कमियों को देखते हुए संबंधित दुकानों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना पर जोर दिया जा रहा है।
    न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि 8 अक्टूबर को बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में लगी आग आसपास की दुकानों और रेहड़ियों तक फैल गई थी। आग की चपेट में पांच अन्य बड़ी दुकानों और 12 से अधिक रेहड़ियों के आने की खबर थी। इस घटना में करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया। दुकानदारों और कर्मचारियों को जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा था और कुछ लोगों को चोटें भी आई थीं।
    पुलिस ने इस मामले में दुकान संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। शुरुआती जांच के मुताबिक भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गई थीं। नगर निगम आग से बचाव के इंतजामों की जांच कर रहा है। इस कार्रवाई के बीच सवाल उठ रहा है कि बाजार में नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन पहले क्यों सुनिश्चित नहीं किया गया।
    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आ चुके हैं। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में आग लगने के दौरान इसके काम नहीं करने की बात सामने आई। सिस्टम की प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे। बैरागढ़ के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में पहले हुए बड़े अग्निकांड के बाद लगाए गए उपकरणों की देखरेख पर भी चिंता जताई गई है।
    न्यू मार्केट की मौजूदा स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हादसों के बाद ही सुरक्षा जांच तेज होती है। व्यस्त बाजारों में नियमित निरीक्षण खुले बिजली के तारों को दुरुस्त करना कर्मचारियों को आग बुझाने का प्रशिक्षण देना और अग्निशामक उपकरणों को चालू हालत में रखना बेहद जरूरी है। प्रशासन की ओर से दुकानों की शिफ्टिंग और जांच की कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

  • भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक

    भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक


    भोपाल । भोपाल के जंबूरी मैदान में गुरुवार को भोजपाल गरबा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव की शुरुआत की। इस दौरान गरबा की आकर्षक प्रस्तुतियों और भक्ति गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मुख्यमंत्री ने भजन गायन भी किया और प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मां दुर्गा से सभी के सुख समृद्धि और कल्याण की कामना की। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति परंपराओं और विरासत पर गर्व करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और समाज कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए उसे अपनी जड़ों से जुड़ा रहना चाहिए। जिन समाजों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है वे विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। यहां कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है और मातृशक्ति के रूप में भी पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि नारी नारायणी हैं और शक्ति का प्रतीक हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें साहस पराक्रम और आत्मविश्वास की प्रेरणा देते हैं। शक्ति की भक्ति में ही सभी का कल्याण निहित है। नवरात्रि का पर्व केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें अपनी परंपराओं को समझने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का अवसर भी प्रदान करता है।
    मुख्यमंत्री ने लोगों से समाज में सद्भाव बढ़ाने और महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों की सार्थकता तभी है जब उनके माध्यम से समाज में प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत हो। लोगों को गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशियां लाने का संकल्प भी लेना चाहिए। भोजपाल गरबा महोत्सव में भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारतीय परंपराओं की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में भोजपाल महोत्सव मेला समिति के संयोजक विकास वीरानी और समिति के अध्यक्ष सुनील यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भोजपाल गरबा महोत्सव लगातार भव्य और व्यापक होता गया है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं। गरबा केवल नृत्य का कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह शक्ति की आराधना से मिलने वाली शांति खुशी और उत्साह को सामूहिक रूप से व्यक्त करने का माध्यम है। ऐसे आयोजन लोगों को एक साथ लाने और आपसी मेलजोल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेल और शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि लोग स्वस्थ और सक्रिय रह सकें।
    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में प्रमुख त्योहार और सांस्कृतिक आयोजन सामूहिक उत्साह के साथ मनाए जाएं। मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव सर्दियों में भोपाल उत्सव और जन्माष्टमी जैसे आयोजनों के माध्यम से सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का अवसर देते हैं और समाज में एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत के बढ़ते मान सम्मान का भी उल्लेख किया। उन्होंने आशा जताई कि वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने तक भारत हर क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल होगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति और गौरव का परचम पूरी दुनिया में ऊंचा रखने का आह्वान किया। साथ ही लोगों को आगामी दशहरे की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए अपनी परंपराओं को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया। भोजपाल गरबा महोत्सव का शुभारंभ भक्ति उल्लास और सांस्कृतिक गौरव के माहौल में हुआ।

  • भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में जमानत पर टिकी नजरें, CBI के नए आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

    भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में जमानत पर टिकी नजरें, CBI के नए आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई


    भोपाल । भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की चार्जशीट में आरोपों में बदलाव के बाद जमानत याचिका पर नए कानूनी आधारों के साथ विचार किया जाएगा। पहले मामले में दहेज मृत्यु से संबंधित धारा लगाई गई थी लेकिन जांच के बाद आरोपपत्र में इसे हटाकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप शामिल किया गया है। ऐसे में अब अदालत बदली हुई कानूनी स्थिति और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखकर जमानत आवेदन पर सुनवाई करेगी।
    इससे पहले जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने गिरिबाला सिंह को जमानत आवेदन में संशोधन करने की अनुमति दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान उनकी ओर से आवेदन में दहेज मृत्यु से संबंधित आरोप को हटाने और नए आरोप के अनुरूप जरूरी बदलाव करने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने इस संशोधन की अनुमति देते हुए कहा था कि बदली हुई परिस्थितियों के आधार पर जमानत पर बहस करने से पहले आवेदन में आवश्यक सुधार किया जाए। CBI की चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु का आरोप हटाकर धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ा गया है।
    ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनकी ससुराल में हुई थी। 33 वर्षीय ट्विशा फंदे पर मिली थीं। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। मौत के बाद उनके परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। शुरुआती मामले में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु और क्रूरता सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया था। हालांकि ये आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अदालत द्वारा साबित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
    मामले में भोपाल की जिला अदालत ने 15 मई को गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। इस आदेश को मृतका के परिजनों और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। 27 मई को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत का आदेश निरस्त कर दिया था। उस समय अदालत ने केस डायरी में दर्ज बयानों और पोस्टमार्टम से जुड़े तथ्यों सहित कई पहलुओं पर विचार किया था। इसके बाद गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को जांच के दौरान हिरासत में लिया गया।
    ट्विशा के परिजनों ने शुरुआती पोस्टमार्टम और जांच को लेकर सवाल उठाए थे और दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर 24 मई को दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने भोपाल में दोबारा पोस्टमार्टम किया। CBI की चार्जशीट में शामिल रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण फंदे से दम घुटना बताया गया और मृत्यु को आत्महत्या माना गया। रिपोर्ट में ऐसी महत्वपूर्ण चोटों के नहीं मिलने की बात भी कही गई जो हमले या संघर्ष का संकेत देती हों।
    CBI ने जांच के दौरान डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की भी पड़ताल की। जांच से संबंधित रिपोर्टों में चैट और कॉल रिकॉर्ड सहित ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने आरोपपत्र में कथित मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप रखे हैं। अब गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट बदले हुए आरोपों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करेगा। वहीं ट्विशा शर्मा केस की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई संभावित बताई गई है। जमानत पर अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, हाईकोर्ट से स्टे हटते ही होगा शिफ्ट, तब तक 13 सख्त शर्तें लागू

    भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, हाईकोर्ट से स्टे हटते ही होगा शिफ्ट, तब तक 13 सख्त शर्तें लागू


    भोपाल । भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बैरागढ़ के एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने यहां संचालित 15 पटाखा दुकानों के खिलाफ आदेश जारी करते हुए उन्हें जनसुरक्षा के लिए खतरा माना है। प्रशासन की योजना है कि जबलपुर हाईकोर्ट से संबंधित मामलों में लगा स्थगन हटते ही इस बाजार को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। तब तक कारोबारियों को सुरक्षा से जुड़ी 13 शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रशासन का कहना है कि पटाखों के कारोबार में लापरवाही से आग लगने और बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
    एसडीएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत इन दुकानों को लोक न्यूसेंस यानी जनसामान्य के लिए परेशानी और खतरे का कारण मानते हुए आदेश जारी किया है। इस मामले से जुड़े 12 रिट याचिका और आठ अवमानना प्रकरण जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित हैं। अदालत ने इन मामलों में अपना आदेश सुरक्षित रखा है और फिलहाल स्थगन भी लागू है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि न्यायालय का स्थगन हटने के बाद दुकानों को अन्य स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। तब तक मौजूदा दुकानदारों को निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
    आदेश के अनुसार कारोबारियों को विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करना होगा। दुकानों में अग्नि सुरक्षा और विद्युत सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसके साथ ही यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण पर भी ध्यान देना होगा। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य होगा। तय ध्वनि सीमा से अधिक आवाज करने वाले पटाखों और कार्बाइड गन जैसे प्रतिबंधित सामान की बिक्री पर रोक रहेगी। दुकानदारों को अग्नि सुरक्षा की मॉक ड्रिल कराने के साथ फायर एनओसी और विद्युत सुरक्षा से जुड़े आवश्यक दस्तावेज एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत करने होंगे।
    प्रशासन ने आदेश के पालन की जिम्मेदारी संबंधित तहसीलदार नगर निगम के उपायुक्त और थाना प्रभारी को सौंपी है। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने पर दुकान मालिक को छह महीने तक के कारावास का दंड भुगतना पड़ सकता है। इन प्रावधानों का उद्देश्य बाजार में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।
    एसडीएम ने अपने आदेश में 12 जून 2026 की रात सोनी पटाखा दुकान में लगी भीषण आग का भी उल्लेख किया है। इस दुकान के पास पेट्रोल पंप स्थित है और आग वहां तक पहुंचने की आशंका पैदा हो गई थी। प्रशासन के मुताबिक यदि यह हादसा दिन के समय होता तो बड़े स्तर पर जनहानि हो सकती थी। हलालपुरा मार्केट के आसपास पटाखा दुकानों के अलावा बसों का संचालन और चार्टर बसों का टर्मिनल भी है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में यात्रियों और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन सकती है।
    हलालपुरा पटाखा मार्केट की सुरक्षा को लेकर चिंता नई नहीं है। वर्ष 2024 में हरदा पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद भोपाल में पटाखा दुकानों और गोदामों की जांच की गई थी। उस दौरान कुछ स्थानों पर तय सीमा से अधिक स्टॉक और सुरक्षा नियमों में खामियां सामने आई थीं। तत्कालीन बैरागढ़ एसडीएम आदित्य जैन ने भी हलालपुरा बाजार को खतरनाक बताते हुए दुकानों और गोदामों को शहरी सीमा से बाहर गैर आवासीय क्षेत्र में स्थानांतरित करने की जरूरत बताई थी। जांच में आसपास रहवासी इलाकों मैरिज गार्डन और पेट्रोल पंप की मौजूदगी को जोखिम का कारण माना गया था।
    बताया जाता है कि वर्ष 1997 से पहले भोपाल का थोक पटाखा बाजार कबाड़खाना क्षेत्र में था। वहां एक हादसे के बाद प्रशासन ने कारोबारियों को हलालपुरा में जगह दी थी। उस समय आसपास आबादी कम थी लेकिन अब क्षेत्र में रिहायशी बस्तियां और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ चुकी हैं। ऐसे में पटाखा बाजार की सुरक्षा और स्थानांतरण का मुद्दा फिर महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है और तब तक प्रशासन ने कारोबारियों को सुरक्षा संबंधी सभी शर्तों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

  • दान की जमीन गिरवी रखकर बैंक से लिया करोड़ों का कर्ज, लोन डूबने पर बेटियों के जरिए मुकदमा कराने का आरोप, बिल्डर दंपती पर कार्रवाई

    दान की जमीन गिरवी रखकर बैंक से लिया करोड़ों का कर्ज, लोन डूबने पर बेटियों के जरिए मुकदमा कराने का आरोप, बिल्डर दंपती पर कार्रवाई


    भोपाल । भोपाल में बेटियों के नाम दान की जा चुकी जमीन को गिरवी रखकर बैंक से दो करोड़ रुपए का कर्ज लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू ने बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि दंपती ने जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी अहम जानकारी पंजाब नेशनल बैंक से छिपाई और इसी संपत्ति के आधार पर अपनी कंपनी के लिए ओवरड्राफ्ट लिमिट मंजूर कराई। कर्ज की अदायगी नहीं होने पर जब बैंक ने वसूली की प्रक्रिया शुरू की तो जमीन की मालकिन बताई गई बेटियों के जरिए अदालत में मुकदमा दायर कराया गया। ईओडब्ल्यू ने पूरे घटनाक्रम और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह कार्रवाई की है।

    मामला भोपाल के बावड़ियाकलां इलाके की 526.83 वर्गमीटर व्यावसायिक जमीन से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2007 में शादाब गृह निर्माण सहकारी समिति की ओर से जारी टेंडर में जीशान अली अकेले बोलीदाता थे। इसके बाद पांच फरवरी 2008 को जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम हुई। करीब पांच साल बाद 10 जुलाई 2013 को जीशान ने हिबानामा तैयार कर यह जमीन अपनी तीन बेटियों के नाम कर दी। इनमें से दो बेटियां उस समय नाबालिग थीं। जांच के अनुसार जीशान ने वर्ष 2018 में बैंक को लिखे एक पत्र में भी जमीन बेटियों के नाम करने की बात स्वीकार की थी।

    आरोप है कि जमीन का हस्तांतरण होने के बावजूद 24 सितंबर 2015 को जीशान अली की कंपनी रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स कॉलोनाइजर्स के लिए दो करोड़ रुपए की ओवरड्राफ्ट लिमिट मंजूर कराई गई। इस प्रक्रिया में बैंक को जमीन बेटियों के नाम किए जाने की जानकारी नहीं दी गई। जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार लीगल सर्च रिपोर्ट में भी नाबालिग के हित से जुड़े कॉलम में नन दर्ज था। ईओडब्ल्यू इस पहलू की जांच कर रही है कि जमीन के वास्तविक मालिकाना हक से संबंधित जानकारी बैंक के सामने किस तरह रखी गई और ऋण मंजूर कराने की प्रक्रिया में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।

    जांच में फरवरी 2015 की एक अन्य घटना का भी उल्लेख है। उस समय जीशान और नाजनीन ने अपनी नाबालिग बेटी के नाम दर्ज एक दूसरे प्लॉट को बेचने के लिए जिला अदालत से अनुमति ली थी। ईओडब्ल्यू ने इस तथ्य को नाबालिग की संपत्ति से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी के संदर्भ में देखा है। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।

    वर्ष 2017 में कंपनी का कर्ज खाता एनपीए हो गया। इसके बाद बैंक ने वसूली की कार्रवाई शुरू करने की तैयारी की। बैंक की ओर से तीन जनवरी 2018 को सरफेसी नोटिस जारी किए जाने से पहले ही चार अक्टूबर 2017 को बेटियों के जरिए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया था। इसमें दावा किया गया कि जमीन उनकी संपत्ति है और बैंक उसे जब्त नहीं कर सकता। बैंक ने इस मुकदमे को वसूली की कार्रवाई रोकने के लिए की गई मिलीभगत का हिस्सा बताया था। सिविल कोर्ट से दावा खारिज होने के बाद मामला ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण यानी डीआरएटी इलाहाबाद पहुंचा।

    आठ मार्च 2019 को ऋण वसूली न्यायाधिकरण ने बैंक के पक्ष में फैसला देते हुए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया। इसके बावजूद बैंक का 2 करोड़ 7 लाख 86 हजार 807 रुपए से अधिक बकाया बताया गया है। ईओडब्ल्यू ने इसी पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। कंपनी की डायरेक्टर और गारंटर रहीं जीशान की मां का निधन हो चुका है इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। अब जांच में ऋण से जुड़े दस्तावेजों और जमीन के हस्तांतरण की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।

  • भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच

    भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि दुकान में जल रही भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी। इसके बाद आग की लपटें तेजी से फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। इस हादसे में कई दुकानों और एक दर्जन से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद करोड़ों रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। अब पुलिस के साथ नगर निगम भी बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती कर रहा है।

    जांच के मुताबिक बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में भट्टी जल रही थी। उसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैलती चली गईं। देखते ही देखते आग ने आसपास की चार अन्य दुकानों को भी प्रभावित किया। इनमें आम्रपाली रेस्टोरेंट विजय स्टोर एक कैफे और मोबाइल की दुकान शामिल थीं। हादसे के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक आग की शुरुआत भट्टी के पास रखे कपड़े से हुई थी।

    दूसरी ओर नगर निगम यह भी जांच कर रहा है कि संबंधित दुकान में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं। फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच के बाद इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यह घटना एक बार फिर बाजारों में अग्नि सुरक्षा और दुकानों के आसपास रखे सामान से पैदा होने वाले खतरे को लेकर सवाल खड़े करती है।

    आग लगने के दौरान दमकल वाहनों को बाजार में आगे बढ़ने में परेशानी हुई थी। दुकानों के सामने रखे सामान और रेहड़ियों के कारण रास्ता बाधित होने की बात सामने आई थी। इसी के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई और दो दमकल वाहनों को बाजार में चलाकर रास्तों की स्थिति देखी गई। जहां दमकलों के आगे बढ़ने में बाधा आई वहां निगम के अमले ने सामान जब्त किया।

    नगर निगम अब रेहड़ी संचालकों को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग की जा रही है। दुकानदारों को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित सीमा से आगे सामान रखने पर कार्रवाई होगी।

    इस घटना के बाद बाजार में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर व्यापक सवाल भी उठ रहे हैं। हादसे वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर दो अन्य छोले-भटूरे की दुकानें संचालित हो रही हैं। आसपास नमकीन की दुकानें भी हैं जहां भट्टियां जलती हैं। ऐसे में सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है।

    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय रही है। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसकी प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे थे। जुमेराती इब्राहिमपुरा नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत अन्य बाजारों में भी सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच की जरूरत है।

    बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 17 दिसंबर 2017 को लगी आग में 100 से ज्यादा कपड़ा दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। इसके बाद फायर सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए थे लेकिन उनके रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। न्यू मार्केट की घटना ने साफ कर दिया है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है। समय पर जांच नियमित रखरखाव और दमकल वाहनों के लिए रास्ते खुले रखना भी उतना ही जरूरी है।


  • दो साल से उच्च पद का प्रभार फिर भी नियमित प्रमोशन नहीं, एमपी के 32 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी, जल्द फैसले की मांग तेज

    दो साल से उच्च पद का प्रभार फिर भी नियमित प्रमोशन नहीं, एमपी के 32 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी, जल्द फैसले की मांग तेज


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति का मामला लंबे समय से लंबित है। दूसरी ओर जनजातीय कार्य विभाग ने 264 उच्च श्रेणी शिक्षकों और प्रधानपाठकों को व्याख्याता के पद पर पदोन्नति देने के आदेश जारी कर दिए हैं। दोनों विभागों की इस अलग-अलग स्थिति को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों में नाराजगी सामने आई है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने सवाल उठाया है कि जब मुख्यमंत्री की ओर से निर्देश दिए जाने की बात कही जा रही है तो फिर स्कूल शिक्षा विभाग में पात्र शिक्षकों की पदोन्नति के आदेश जारी करने में देरी क्यों हो रही है।
    शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर दोनों विभागों की स्थिति अब कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। शासकीय शिक्षक संगठन का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग में समान योग्यता और अर्हता के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को पदोन्नति के अवसर मिलने चाहिए। संगठन के मुताबिक जनजातीय कार्य विभाग में पिछले कुछ महीनों के दौरान सहायक शिक्षक से उच्च श्रेणी शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक से व्याख्याता के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक शिक्षक सहायक शिक्षक माध्यमिक शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक संवर्ग के अनेक पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति अब भी अटकी हुई है।
    शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया अलग-अलग दिखाई दे रही है। संगठन का तर्क है कि यदि दोनों विभागों में शिक्षकों की योग्यता अर्हता और सेवा शर्तें समान हैं तो पदोन्नति के अवसरों में अंतर नहीं होना चाहिए। संगठन ने शासन और संबंधित विभाग से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
    मामले का एक अहम पहलू उन शिक्षकों से भी जुड़ा है जो करीब दो साल पहले से उच्च पद का प्रभार संभाल रहे हैं। संगठन के अनुसार इन शिक्षकों को अब तक नियमित पदोन्नति के आदेश नहीं मिले हैं। उच्च पद की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद नियमित पदोन्नति नहीं मिलने से कर्मचारियों के सेवा संबंधी हित प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है। प्रभार और नियमित पदोन्नति के बीच अंतर होने के कारण शिक्षकों को अपने भविष्य और सेवा लाभों को लेकर स्पष्टता की जरूरत महसूस हो रही है।
    शिक्षक संगठन का कहना है कि लंबे समय तक पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने से पात्र कर्मचारियों के करियर पर असर पड़ता है। साथ ही विभागीय व्यवस्था में भी असंतोष बढ़ सकता है। संगठन ने मांग की है कि स्कूल शिक्षा विभाग सभी लंबित मामलों की समीक्षा करे और नियमानुसार पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ देने के लिए जल्द निर्णय ले। उच्च पद का प्रभार संभाल रहे शिक्षकों के मामलों का भी प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने की मांग की गई है।
    संगठन ने शासन से पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की अपील की है। इससे शिक्षकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके मामलों पर कब तक निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षक पदोन्नति आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस मांग पर कब तक निर्णय लेता है और लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
  • माफी मांगने के बाद भी नहीं रुकी पिटाई, भोपाल के स्कूल में चौथी के छात्र के साथ मारपीट का आरोप, पिता ने मांगी सख्त कार्रवाई

    माफी मांगने के बाद भी नहीं रुकी पिटाई, भोपाल के स्कूल में चौथी के छात्र के साथ मारपीट का आरोप, पिता ने मांगी सख्त कार्रवाई


    भोपाल । भोपाल के फादर एग्नेल स्कूल में चौथी कक्षा के एक छात्र के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घटना 8 अक्टूबर की बताई जा रही है। छात्र के पिता उजेर अहमद ने गांधी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए स्कूल के प्रिंसिपल मनोहर काटा पर बेटे के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। पिता के मुताबिक घटना के बाद बच्चे के चेहरे और कंधे पर चोट के निशान दिखाई दिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि बच्चे को सुनने में परेशानी होने लगी और घर पहुंचने के बाद चक्कर आने से वह गिर गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चे का हमीदिया अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया है।
    बच्चे के पिता उजेर अहमद के अनुसार 8 अक्टूबर को उनका बेटा स्कूल से घर लौटा तो उसने अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। बच्चे ने कथित तौर पर कहा कि स्कूल के प्रिंसिपल मनोहर काटा ने उसके साथ मारपीट की। पिता का कहना है कि मारपीट के दौरान बच्चा माफी मांगता रहा लेकिन इसके बावजूद पिटाई नहीं रुकी। घर पहुंचने पर जब परिजनों ने बच्चे की स्थिति देखी तो उन्हें उसके चेहरे और कंधे पर चोट के निशान नजर आए। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद बच्चे को कान से ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था। इसके अलावा उसे चक्कर आने की शिकायत भी हुई जिसके बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से लिया।
    पिता ने बताया कि घटना के दिन ही उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला किया। उनके मुताबिक 8 अक्टूबर की रात करीब 11 से 11:30 बजे के बीच वह गांधी नगर थाने पहुंचे और शिकायत दी। उजेर अहमद का कहना है कि शिकायत के बाद से उन्हें जांच जारी होने और मेडिकल रिपोर्ट मंगाए जाने की जानकारी दी जा रही है। हालांकि उनके अनुसार अभी तक मामले में कार्रवाई को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। पिता ने पुलिस से मांग की है कि शिकायत पर गंभीरता से जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
    उजेर अहमद ने यह आरोप भी लगाया है कि स्कूल से जुड़े एक व्यक्ति ने फोन करके उनसे समझौता करने के लिए कहा। पिता का कहना है कि वह मामले में समझौता करने के बजाय निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उन्होंने संबंधित प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की है। उनका कहना है कि बच्चे की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और स्कूल में ऐसी घटना के आरोपों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
    इस मामले में फिलहाल स्कूल प्रबंधन और संबंधित प्रिंसिपल का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में घटना को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट से ही चोटों की प्रकृति तथा घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मामले में स्कूल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद घटनाक्रम की तस्वीर और साफ हो सकती है।
    स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन के तरीकों को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा दिलाने की उम्मीद से स्कूल भेजते हैं। ऐसे में किसी छात्र के साथ मारपीट का आरोप सामने आने पर निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। फिलहाल बच्चे के पिता ने कार्रवाई की मांग की है और अब इस मामले में पुलिस जांच तथा मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।