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  • विभाजन विभीषिका दिवस पर CM का बड़ा संदेश, बोले- बंटवारे का दर्द आज भी व्यथित करता है मन

    विभाजन विभीषिका दिवस पर CM का बड़ा संदेश, बोले- बंटवारे का दर्द आज भी व्यथित करता है मन


    भोपाल। विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को भोपाल के शौर्य स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने तथा विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले लोगों को याद किया। मुख्यमंत्री ने शौर्य स्मारक परिसर में नवनिर्मित डिजिटल लाइब्रेरी का शुभारंभ भी किया। इस डिजिटल लाइब्रेरी में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और देश के गौरवशाली इतिहास से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने लाइब्रेरी की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और वहां मौजूद डिजिटल सामग्री के बारे में जानकारी ली।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल दक्षिण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की तिरंगा यात्रा को शौर्य स्मारक तिराहे से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा भारत माता चौराहा यानी डिपो चौराहा तक पहुंची। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चल रहा हर घर तिरंगा अभियान देशभर में राष्ट्रभक्ति और जनभागीदारी का उत्सव बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश के अलग अलग हिस्सों में तिरंगा पूरे सम्मान और गर्व के साथ लहरा रहा है।

    विभाजन विभीषिका दिवस के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने 1947 के उस दौर को याद किया जब भारत के विभाजन के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर और संपत्ति छोड़कर पलायन करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया और इस त्रासदी की पीड़ा को याद कर आज भी मन व्यथित हो उठता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय से सीख लेते हुए देशवासियों को एकता भाईचारे और अखंड राष्ट्रीय भावना को और मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन केवल सीमाओं के बदलने की घटना नहीं थी बल्कि इससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए। लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा और अनेक परिवारों ने अपनों को खोया। ऐसे में विभाजन विभीषिका दिवस का उद्देश्य इतिहास की उस त्रासदी को याद करना और आने वाली पीढ़ियों को उसके बारे में जानकारी देना भी है। शौर्य स्मारक में आयोजित कार्यक्रम के जरिए इसी इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

    इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम और देश के इतिहास से जुड़ी सामग्री को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। इससे युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न पहलुओं और देश के लिए बलिदान देने वाली विभूतियों के योगदान को समझने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कांग्रेस पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सत्य को नहीं जानती तो सत्याग्रह की बात कैसे करेगी। उन्होंने पार्टी को आत्ममंथन और आत्ममूल्यांकन करने की सलाह देते हुए अपने राजनीतिक विचार रखे। हालांकि कार्यक्रम का मुख्य केंद्र विभाजन की त्रासदी को याद करना और राष्ट्रभक्ति तथा राष्ट्रीय एकता का संदेश देना रहा।

    डॉ. मोहन यादव ने भारत के भविष्य को लेकर भी अपना संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और युवा देश है तथा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र के साथ राष्ट्रीय विकास में भागीदारी की बात कही।

    शौर्य स्मारक में आयोजित कार्यक्रम ने स्वतंत्रता दिवस से पहले भोपाल में राष्ट्रभक्ति का माहौल और मजबूत किया। एक तरफ विभाजन की पीड़ा को याद कर इतिहास से सीख लेने का संदेश दिया गया तो दूसरी ओर तिरंगा यात्रा के जरिए देश के प्रति सम्मान और एकता की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से राष्ट्रीय एकता भाईचारे और देश की अखंडता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाने की अपील की।

  • भोपाल मेट्रो का अंडरग्राउंड मिशन तेज, दो TBM एक साथ कर रहीं खुदाई; 3.39 किमी सुरंग से जुड़ेंगे रेलवे स्टेशन और नादरा

    भोपाल मेट्रो का अंडरग्राउंड मिशन तेज, दो TBM एक साथ कर रहीं खुदाई; 3.39 किमी सुरंग से जुड़ेंगे रेलवे स्टेशन और नादरा


    भोपाल । भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना का अंडरग्राउंड काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। शहर के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों में सड़क यातायात का दबाव कम करने के लिए जमीन के करीब 60 फीट नीचे सुरंग तैयार की जा रही है। इस काम में लगी दोनों टनल बोरिंग मशीन यानी TBM एक साथ खुदाई कर रही हैं और अब तक करीब 260 मीटर सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है। खास बात यह है कि यह भूमिगत कॉरिडोर भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे बेहद व्यस्त इलाकों के नीचे से होकर गुजरेगा। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक अंडरग्राउंड रूट का पूरा काम अगले डेढ़ से दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

    भूमिगत सुरंग का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में दोनों TBM भोपाल रेलवे स्टेशन से ऐशबाग की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पहली टनल बोरिंग मशीन करीब 160 मीटर और दूसरी लगभग 100 मीटर सुरंग तैयार कर चुकी है। इस तरह दोनों मशीनें मिलकर करीब 260 मीटर भूमिगत रास्ता बना चुकी हैं। खुदाई के साथ ही सुरंग के भीतर प्री-कास्ट आरसीसी रिंग भी लगाई जा रही हैं। ये रिंग सुरंग की दीवारों को मजबूती देती हैं और जमीन के दबाव के बीच पूरे स्ट्रक्चर को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    भोपाल जैसे घनी आबादी वाले शहर में जमीन के नीचे इतनी बड़ी परियोजना को सुरक्षित तरीके से पूरा करना बड़ी चुनौती है। इसी वजह से निर्माण के दौरान आसपास के भवनों और दूसरी संरचनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। सुरंग के ऊपर मौजूद इमारतों में कंपन और जमीन के संभावित धंसाव यानी सेटलमेंट पर नजर रखने के लिए आधुनिक इंस्ट्रूमेंटेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इससे जमीन या किसी भवन में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।

    सुरंग के अंदर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। यहां फ्रेश एयर वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे भूमिगत हिस्से में पर्याप्त हवा पहुंचती रहे। इसके अलावा गैस मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए सुरंग के भीतर गैस की लगातार जांच की जा रही है। निर्माण स्थल पर 24 घंटे सुरक्षा निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

    भोपाल मेट्रो के इस प्रोजेक्ट की एक खास बात यह भी है कि मध्यप्रदेश में पहली बार इस तरह दो TBM को एक साथ भूमिगत सुरंग निर्माण में लगाया गया है। यह सुरंग ऐशबाग से सिंधी कॉलोनी के बीच तैयार की जा रही है और आगे भोपाल रेलवे स्टेशन तथा नादरा बस स्टैंड जैसे प्रमुख परिवहन केंद्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगी। TBM तकनीक को खासतौर पर ऐसे घने शहरी इलाकों के नीचे काम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जहां ऊपर सड़क, इमारतें और लगातार चलता यातायात मौजूद रहता है।

    इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर में भोपाल और नादरा नाम से दो भूमिगत स्टेशन बनाए जा रहे हैं। दोनों स्टेशनों की लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। TBM से बनने वाली मुख्य सुरंग की लंबाई करीब 3.39 किलोमीटर रहेगी। नादरा स्टेशन के आगे बड़ा बाग के पास करीब 143 मीटर लंबे स्लोप के जरिए मेट्रो दोबारा जमीन के ऊपर आएगी।

    अंडरग्राउंड स्टेशनों को यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर तीन प्रमुख स्तरों में तैयार किया जाएगा। ग्राउंड लेवल पर मुख्य प्रवेश और निकास, बस व वाहन ड्रॉप-ऑफ जोन, टिकट काउंटर और कमर्शियल दुकानें होंगी। कॉनकोर्स लेवल पर टिकटिंग व्यवस्था, ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन गेट, ग्राहक सहायता केंद्र, एस्केलेटर, लिफ्ट और प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं रहेंगी। सबसे नीचे प्लेटफॉर्म लेवल पर मेट्रो ट्रेन के प्लेटफॉर्म, डिजिटल डिस्प्ले, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा तथा आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    भोपाल में एम्स से करोंद चौराहे तक ऑरेंज लाइन का काम भी जारी है। सुभाषनगर से एम्स के बीच करीब 6 किलोमीटर लंबा प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले से मेट्रो संचालन के लिए तैयार है। अब इसी लाइन के दूसरे चरण में सुभाषनगर से करोंद के बीच काम आगे बढ़ रहा है। इस हिस्से में मेट्रो का एक महत्वपूर्ण भाग भूमिगत होगा। परियोजना को गति देने में भोपाल नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, रेलवे, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और शहरवासियों का सहयोग मिल रहा है। अंडरग्राउंड काम पूरा होने के बाद भोपाल के व्यस्ततम हिस्सों में सड़क के ऊपर यातायात के साथ जमीन के नीचे मेट्रो का नया विकल्प उपलब्ध होगा।

  • जेल पहुंचने के 48 घंटे बाद बंदी ने तोड़ा दम, शरीर पर मिले चोट के निशान; पुलिस पर गंभीर आरोप

    जेल पहुंचने के 48 घंटे बाद बंदी ने तोड़ा दम, शरीर पर मिले चोट के निशान; पुलिस पर गंभीर आरोप


    भोपाल भोपाल सेंट्रल जेल में बंद 35 वर्षीय बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान नीरज धाकड़ पुत्र केसर सिंह धाकड़ निवासी देवरी गांव तहसील गौहरगंज जिला रायसेन के रूप में हुई है। नीरज को सूखी सेवनिया पुलिस ने 7 अगस्त को सीमेंट चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे मेडिकल परीक्षण कराया गया और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए भोपाल सेंट्रल जेल भेज दिया गया। जेल पहुंचने के महज दो दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उपचार के दौरान रविवार सुबह हमीदिया अस्पताल में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के परिजन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजन का दावा है कि गिरफ्तारी के दौरान नीरज के साथ मारपीट की गई थी और उसके शरीर पर चोटों के निशान थे। उनका आरोप है कि पुलिस की कथित मारपीट के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी जान चली गई। हालांकि जेल प्रशासन ने इन आरोपों से अलग जानकारी दी है।

    सूखी सेवनिया थाने के प्रभारी अरुण शर्मा के अनुसार नीरज को सीमेंट चोरी के मामले में 7 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी का नियमानुसार मेडिकल परीक्षण कराया गया था और इसके बाद उसे भोपाल सेंट्रल जेल भेज दिया गया। दूसरी ओर नीरज की पत्नी पूजा ने आरोप लगाया है कि पति के शरीर पर चोट के निशान थे। उनका कहना है कि गिरफ्तारी के बाद से ही नीरज की तबीयत खराब थी और जेल पहुंचने के बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। परिजन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    वहीं भोपाल सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट मानवेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि नीरज को सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत हुई थी। उसकी स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे तत्काल उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल भेजा था। अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था लेकिन रविवार सुबह उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। जेल प्रशासन का कहना है कि बंदी को उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।

    बंदी की मौत के बाद मामले में न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान नीरज की गिरफ्तारी से लेकर थाने में रखे जाने की अवधि मेडिकल परीक्षण जेल में दाखिले और अस्पताल में उपचार तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी। इसके साथ ही परिजन की ओर से पुलिस पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की भी जांच होगी। पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम किया है। नीरज की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में अब जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले में अहम साबित होगी और यह साफ हो सकेगा कि बंदी की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

  • टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा

    टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा


    भोपाल । भोपाल में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर विवाद अब बड़े आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था से नाराज टैक्सी चालकों ने शनिवार को दोपहर 12 बजे लिंक रोड नंबर-1 स्थित चेनार पार्क में महाबैठक बुलाई है। भोपाल टैक्सी चालक संघ भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में शहरभर के ड्राइवर शामिल होंगे और उनकी समस्याओं व सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संघ का कहना है कि यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों ने किराया व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो आंदोलन को पूरे मध्य प्रदेश में फैलाया जा सकता है और अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला भी लिया जा सकता है।

    टैक्सी चालक संघ के मुताबिक 23 से 25 जून तक एयरपोर्ट राइड के बहिष्कार के दौरान कंपनियों पर दबाव बना था और कुछ राइड के किराए में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक सुधार किया गया था। हालांकि आंदोलन खत्म होने के बाद दोबारा पुराने किराए लागू कर दिए गए। ड्राइवरों का आरोप है कि अब कई छोटी राइड के लिए उन्हें महज 30 से 40 रुपये तक मिल रहे हैं जबकि पहले इसी तरह की बुकिंग पर 50 से 60 रुपये तक का भुगतान होता था। चालकों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत वाहन की सर्विसिंग बीमा परमिट और दूसरे खर्चों के बीच इतनी कम कमाई में परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

    संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले के अनुसार शनिवार की बैठक में सभी ड्राइवरों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह बैठक केवल किराया बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी किराया प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर है। संघ के मुताबिक सरकार को ऐसी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए जिसमें प्रत्येक राइड के लिए 50 से 60 रुपये का बेस फेयर तय हो। इसके साथ यात्रा के समय के आधार पर 1 से 1.50 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और वाहन की श्रेणी के अनुसार 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर लागू की जानी चाहिए।

    ड्राइवरों का कहना है कि केवल प्रतिशत के आधार पर किराया बढ़ाने से उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक वर्ष 2014 में एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था में बेस फेयर टाइम चार्ज और दूरी के हिसाब से भुगतान शामिल था लेकिन अब कई मामलों में केवल तय दूरी के आधार पर किराया दिया जाता है। इससे ट्रैफिक में फंसने या यात्री का इंतजार करने के दौरान ड्राइवर को अतिरिक्त समय का भुगतान नहीं मिलता।

    संघ के प्रस्तावित किराया मॉडल के अनुसार अरेरा हिल्स से राजा भोज एयरपोर्ट तक मौजूदा 246 से 282 रुपये का किराया बढ़कर करीब 416 से 552 रुपये तक हो सकता है। इसी तरह न्यू मार्केट से रेलवे स्टेशन का किराया 95 से 108 रुपये की जगह करीब 205 से 270 रुपये तक पहुंच सकता है। लालघाटी से एमपी नगर का किराया 152 से 167 रुपये से बढ़कर 302 से 401 रुपये और रातीबड़ थाना से भोपाल रेलवे स्टेशन का किराया 274 से 314 रुपये से बढ़कर 474 से 638 रुपये तक हो सकता है।

    टैक्सी चालकों की मांगों में निर्धारित किराया नीति लागू करने के अलावा एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी पर रोक निजी नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई अवैध बाइक टैक्सी संचालन पर रोक और ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था शामिल है। इससे पहले भी ड्राइवरों ने फटे कपड़े पहनकर और हाथों में कटोरा लेकर प्रदर्शन कर अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

    अब शनिवार की महाबैठक को आंदोलन की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। संघ का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो भोपाल से शुरू हुआ यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में टैक्सी सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।

  • ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज

    ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज


    भोपाल भोपाल में अपने घर से कारोबार करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि किसी रिहाइशी मकान में ब्यूटी पार्लर सैलून किराना दुकान कोचिंग सेंटर बुटीक क्लिनिक या किसी अन्य तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है तो अब वह नगर निगम की जांच के दायरे में आ सकती है। भोपाल नगर निगम ने ऐसे भवनों की पहचान के लिए पूरे शहर में व्यापक सर्वे की तैयारी शुरू कर दी है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक राजधानी में करीब एक लाख ऐसी प्रॉपर्टी हो सकती हैं जहां आवासीय भवनों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। सर्वे के दौरान यदि भवन उपयोग और संबंधित नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संपत्ति मालिकों को नोटिस दिया जाएगा और नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में सीलिंग जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

    नगर निगम ने शहर को 21 जोन में बांटकर विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें छोटे मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों और प्रमुख इलाकों तक रिहाइशी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी जुटाएंगी। जांच के दौरान संपत्ति कर रिकॉर्ड भवन के वास्तविक उपयोग सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी भवनों के इस्तेमाल की स्थिति देखी जाएगी। निगम का लक्ष्य करीब 10 से 15 दिनों में सर्वे पूरा करने का है और जहां नियमों का उल्लंघन सामने आएगा वहां मौके पर ही नोटिस देने की तैयारी है।

    नगर निगम के रिकॉर्ड में करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे मकान बताए जा रहे हैं जहां कारोबार तो चल रहा है लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए जरूरी अनुमति या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। यही वजह है कि निगम अब रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को भी जांचने जा रहा है।

    इस पूरी कार्रवाई के पीछे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी अहम हैं। 5 अगस्त की सुनवाई में अदालत ने अवैध निर्माण और रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। निगम को 15 सितंबर तक कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। ऐसे में सर्वे को समयसीमा के भीतर पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

    हालांकि व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग की कार्रवाई से छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। व्यापारियों का सुझाव है कि ब्यूटी पार्लर सैलून कोचिंग किराना जैसी छोटी गतिविधियों को राहत दी जाए और प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू की जाए। इसके तहत तय शर्तों के साथ एक ही क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। पार्किंग ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए चौड़ी सड़कों पर नियंत्रित व्यावसायिक उपयोग की व्यवस्था को भी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

    भोपाल में लंबे समय से मास्टर प्लान लागू नहीं होने को भी मौजूदा स्थिति की बड़ी वजह बताया जा रहा है। भोपाल की विकास योजना का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था और इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि शहर के विस्तार और बढ़ती कारोबारी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई लोगों ने आवासीय क्षेत्रों में ही कारोबार शुरू कर दिया।

    व्यापारियों का दावा है कि इन गतिविधियों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और कई कारोबारी व्यावसायिक दर से संपत्ति कर तथा अन्य शुल्क भी जमा करते हैं। अनुमान है कि व्यापक कार्रवाई होने पर करीब पांच लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब नगर निगम के सर्वे पर शहर के हजारों कारोबारियों और मकान मालिकों की नजर है। आने वाले दिनों में सर्वे के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से साफ होगा कि कितनी संपत्तियां नियमों के दायरे में आती हैं और कितनों पर कार्रवाई की स्थिति बनती है।

  • BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक से सजेगा भोपाल, CM के साथ लंच और संस्कृति पर बड़ा मंथन

    BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक से सजेगा भोपाल, CM के साथ लंच और संस्कृति पर बड़ा मंथन

     
    भोपाल । भोपाल शनिवार को ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक का गवाह बनेगा। ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 के तहत आयोजित इस बैठक में सदस्य देशों के संस्कृति मंत्री और प्रतिनिधिमंडल सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श करेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करना तथा साझा विरासत और रचनात्मक क्षेत्रों में नए अवसर तलाशना है।

    बैठक में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण संग्रहालयों के विकास रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही सदस्य देशों के बीच संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। बैठक का समापन ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा को अपनाने के साथ होगा। इस घोषणा के जरिए ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा दृष्टिकोण और आगे की दिशा तय की जाएगी।

    ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन की शुरुआत 5 अगस्त से हुई थी। सम्मेलन के दौरान अलग अलग देशों के प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया। शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्री और प्रतिनिधिमंडल भोपाल पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।

    बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विदेशी मेहमानों और प्रतिनिधिमंडलों के लिए दोपहर के भोजन का आयोजन करेंगे। इस दौरान मेहमानों को मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। लंच और डिनर के मेन्यू में प्रदेश की स्थानीय खानपान परंपरा को विशेष स्थान दिया गया है। दाल बाफले निमोना रिकमच गुइया की सब्जी चंबल का थोपा चंदिया बड़ा और मिलेट्स से तैयार कोदो तथा कुटकी जैसे व्यंजन मेहमानों को परोसे जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए वेस्टर्न और ओरिएंटल व्यंजनों की व्यवस्था भी की गई है।

    बैठक और लंच के बाद विदेशी मंत्री और प्रतिनिधिमंडल मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और बौद्ध विरासत को करीब से देखने के लिए सांची की यात्रा करेंगे। सांची को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में विशेष पहचान मिली हुई है। प्रतिनिधि बुद्ध जंबूदीप परिसर का भ्रमण करने के साथ ही विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का विशेष गाइडेड टूर करेंगे।

    सांची यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल चेतियागिरी मंदिर में दर्शन करेगा। इसके साथ ही योग और ध्यान सत्र में भी हिस्सा लिया जाएगा। शाम के समय बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित 3D प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो के जरिए मेहमानों को भारतीय बौद्ध विरासत की कहानी से परिचित कराया जाएगा।

    ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन का एक और महत्वपूर्ण आकर्षण मध्य प्रदेश की प्रागैतिहासिक विरासत से प्रतिनिधियों को परिचित कराना है। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय का वैकल्पिक भ्रमण भी रखा गया है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका अपनी प्राचीन शैल चित्रकला और प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

    इस सम्मेलन के जरिए भोपाल और मध्य प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर अपनी विरासत और परंपराओं को प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है। ब्रिक्स देशों के बीच संस्कृति के माध्यम से बढ़ता संवाद आने वाले समय में पर्यटन संग्रहालय कला रचनात्मक उद्योग और सांस्कृतिक आदान प्रदान के नए रास्ते खोल सकता है। सम्मेलन के बाद विदेशी मेहमानों की रवानगी होगी और भोपाल में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन मध्य प्रदेश की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान को एक नई मजबूती देगा।

  • ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति

    ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति


    भोपाल भोपाल में चल रहा ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है और शुक्रवार को राजधानी में संस्कृति और कला का अंतरराष्ट्रीय संगम देखने को मिलेगा। ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री भोपाल पहुंच रहे हैं जहां उनका पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया जा रहा है। सम्मेलन के तीसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण शाम को आयोजित होने वाला ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026 होगा। इस विशेष आयोजन में भारत के साथ ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के प्रख्यात संगीतकार और कलाकार एक मंच पर नजर आएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी जिसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के जरिए हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ब्रिक्स पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड के जरिए अलग अलग देशों की संगीत परंपराओं को एक सूत्र में पिरोया जाएगा।

    इस सांस्कृतिक महोत्सव में बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत विरासत की झलक देखने को मिलेगी। आर्केस्ट्रा की प्रस्तुतियों में पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसे कार्यक्रम विशेष आकर्षण होंगे। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य अलग अलग संस्कृतियों को संगीत के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ना और शांति तथा आपसी सहयोग का संदेश देना है। कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में आयोजित किया जाएगा जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ कला प्रेमियों को भी भारतीय और वैश्विक सांस्कृतिक विविधता का अनुभव मिलेगा।

    शाम के कार्यक्रम का एक और बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की विशेष प्रस्तुति अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को नृत्य और संगीत के माध्यम से मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके जरिए भीमबेटका सांची और खजुराहो जैसे विश्व धरोहर स्थलों से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन के संदीपनि आश्रम की कृष्ण लीला तक की सांस्कृतिक यात्रा कराई जाएगी। ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया है।

    भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर के अध्यात्म और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विदेशी मेहमानों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसी प्रस्तुति के माध्यम से अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 का आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। लंच और डिनर के मेन्यू में दाल बाफले निमोना रिकमच गुइया की सब्जी चंबल का थोपा चंदिया बड़ा तथा कोदो और कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन शामिल किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजन भी परोसे जाएंगे।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक होगी जिसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा को अपनाया जाएगा जो भविष्य में सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा रोडमैप तैयार करेगी। इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची जाएगा जहां वे सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन करेंगे। चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ योग और ध्यान सत्र भी होगा तथा शाम को 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो के जरिए बौद्ध इतिहास और कला को प्रदर्शित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। इस तरह भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन केवल कूटनीतिक संवाद का मंच नहीं बल्कि भारत और विशेष रूप से मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को दुनिया के सामने रखने का बड़ा अवसर बन गया है।

  • BRICS सम्मेलन में दिखेगी मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, 125 कलाकार देंगे गौरवगाथा की शानदार प्रस्तुति

    BRICS सम्मेलन में दिखेगी मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, 125 कलाकार देंगे गौरवगाथा की शानदार प्रस्तुति


    भोपाल भोपाल में आयोजित हो रहा BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। सम्मेलन के तीसरे दिन शुक्रवार को BRICS सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्रियों का भोपाल आगमन होगा। इस दौरान राजधानी में संस्कृति और कला का ऐसा संगम देखने को मिलेगा जिसमें भारत के साथ विभिन्न BRICS देशों की संगीत परंपराएं एक ही मंच पर नजर आएंगी। शाम को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में BRICS सांस्कृतिक महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम विभिन्न देशों के कलाकारों और संगीतकारों को एक साझा मंच पर लाकर सांस्कृतिक सहयोग और आपसी जुड़ाव का संदेश देगा।

    कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी। इसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के माध्यम से हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा प्रस्तुत की जाएगी। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण BRICS पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड रहेगा। इसके जरिए विभिन्न BRICS देशों की संगीत विरासत और शांति के साझा संदेश को सुरों के माध्यम से सामने रखा जाएगा। बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत परंपराओं को भी इस आयोजन में स्थान मिलेगा। पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसी आर्केस्ट्रा प्रस्तुतियां कार्यक्रम को और खास बनाएंगी।

    शाम का दूसरा बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को समर्पित अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार इस भव्य प्रस्तुति के जरिए प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके बाद भीमबेटका सांची और खजुराहो की विश्व धरोहर से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन की कृष्ण लीला तक मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक यात्रा दिखाई जाएगी।

    ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के प्रसिद्ध वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों की झलक भी देखने को मिलेगी। भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत को भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसी दौरान अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी मिलेगा।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। इसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में BRICS संस्कृति मंत्रियों की घोषणा अपनाई जाएगी जिसमें भविष्य के सांस्कृतिक सहयोग का रोडमैप तय होगा।

    इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची पहुंचेगा जहां विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन किया जाएगा। प्रतिनिधियों के लिए चेतियागिरी मंदिर दर्शन योग और ध्यान सत्र के साथ 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय का वैकल्पिक भ्रमण रखा गया है। इस तरह भोपाल का BRICS सम्मेलन केवल बैठकों तक सीमित न रहकर भारत और मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का बड़ा अवसर बन रहा है।

  • 18 महीने बाद जेल से बाहर आए RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, कोर्ट ने 10 लाख के मुचलके पर दी जमानत

    18 महीने बाद जेल से बाहर आए RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, कोर्ट ने 10 लाख के मुचलके पर दी जमानत


    भोपाल। आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को आखिरकार करीब 18 महीने बाद जेल से राहत मिल गई। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद बुधवार रात करीब 10:20 बजे उन्हें भोपाल सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। फरवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में बंद सौरभ शर्मा की रिहाई की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जेल के बाहर परिजन और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। लंबे समय से चर्चाओं में रहे इस बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सौरभ शर्मा की नियमित जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें 10 लाख रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। कोर्ट ने सौरभ शर्मा को ट्रायल कोर्ट की प्रत्येक सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इसके अलावा बिना न्यायालय की अनुमति के देश छोड़ने पर रोक लगाई गई है। साथ ही उन्हें किसी भी गवाह को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या जांच को प्रभावित करने जैसी किसी भी गतिविधि से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और संबंधित एजेंसियां चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं। ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन गवाहों और दस्तावेजों की संख्या काफी अधिक होने के कारण मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना कम है। ऐसे में किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्यायोचित नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें नियमित जमानत देने का निर्णय लिया।

    सौरभ शर्मा का नाम दिसंबर 2024 में उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना था, जब लोकायुक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग ने उनके ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई की थी। जांच के दौरान भोपाल के मेंडोरी क्षेत्र में खड़ी एक इनोवा कार से करीब 11 करोड़ रुपए नकद और 52 किलोग्राम सोना बरामद किया गया था। जांच एजेंसियों ने इस कार और बरामद संपत्ति का संबंध सौरभ शर्मा से जोड़ा था। इसके बाद उनकी और उनके सहयोगियों की कथित अघोषित संपत्तियों को लेकर कई बड़े खुलासे सामने आए थे।

    हालांकि जांच के दौरान सौरभ शर्मा लगातार इस बात से इनकार करते रहे कि मेंडोरी से बरामद नकदी और सोना उनका है। उन्होंने पूछताछ में इन संपत्तियों पर अपना स्वामित्व स्वीकार नहीं किया। यही कारण है कि आयकर विभाग और अन्य जांच एजेंसियों के सामने अब भी यह चुनौती बनी हुई है कि बरामद कैश और सोने के वास्तविक मालिक की पहचान कर अपनी जांच को अंतिम रूप दिया जाए।

    फिलहाल हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद सौरभ शर्मा को अस्थायी राहत जरूर मिल गई है, लेकिन उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। अब इस बहुचर्चित मामले की निगाहें ट्रायल कोर्ट की आगामी सुनवाई और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी रहेंगी।

  • भोपाल में पानी का संकट, बड़ा तालाब की सप्लाई प्रभावित; प्रभावित क्षेत्रों के लिए टैंकर की व्यवस्था

    भोपाल में पानी का संकट, बड़ा तालाब की सप्लाई प्रभावित; प्रभावित क्षेत्रों के लिए टैंकर की व्यवस्था


    भोपाल  भोपाल के हजारों परिवारों के लिए मंगलवार का दिन पानी की परेशानी लेकर आया है। शहर के प्रमुख जल स्रोत बड़ा तालाब से होने वाली जलापूर्ति आज पूरी तरह प्रभावित रहेगी। नगर निगम ने करबला पंप हाउस और मनुआभान टेकरी स्थित जलशोधन संयंत्र पर आवश्यक मरम्मत और तकनीकी सुधार कार्य के चलते कई इलाकों में पानी की सप्लाई बंद रखने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 7 बजे तक चलेगा जिसके कारण दोपहर और शाम के समय होने वाला जलप्रदाय पूरी तरह प्रभावित रहेगा। निगम ने भरोसा दिलाया है कि मरम्मत कार्य पूरा होते ही बुधवार से सभी प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

    नगर निगम के मुताबिक करबला पंप हाउस पर 800 एमएम व्यास की रॉ वॉटर पाइपलाइन में लीकेज को ठीक किया जाएगा जबकि मनुआभान टेकरी जलशोधन संयंत्र में जरूरी तकनीकी सुधार किए जाएंगे। इन दोनों कार्यों के कारण बड़ा तालाब से जुड़े जल वितरण नेटवर्क को कुछ समय के लिए बंद रखना जरूरी है ताकि मरम्मत सुरक्षित और प्रभावी तरीके से पूरी की जा सके। निगम का कहना है कि यह काम भविष्य में जलापूर्ति को बेहतर और बाधारहित बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    इस शटडाउन का असर करोंद सहित करीब 40 इलाकों पर पड़ेगा। जिन क्षेत्रों में आज पानी की सप्लाई नहीं होगी उनमें ब्लू मून कॉलोनी नवाब कॉलोनी प्रेम नगर सुंदर नगर प्रीत नगर शिवशक्ति नगर शिव नगर फेज 1 2 और 3 कल्याण नगर प्रताप नगर चंदन नगर रासलाखेड़ी बिहारी कॉलोनी पटेल नगर मालीखेड़ी भानपुर रोड हाउसिंग बोर्ड करोंद देवकी नगर अमन कॉलोनी कमल नगर सईद कॉलोनी पंचवटी कॉलोनी रतन कॉलोनी कृषक नगर रिंग गार्डन बृज कॉलोनी गोया कॉलोनी पूजा कॉलोनी शिवानी होम्स नवजीवन कॉलोनी छोला मंदिर सत्यज्ञान नगर शंकर नगर उड़िया बस्ती टिम्बर मार्केट नगर निगम कॉलोनी और चांदबाड़ी सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों के लोगों को पानी का उपयोग बेहद सोच-समझकर करने और आवश्यक जरूरतों के लिए पहले से पानी संग्रहित रखने की सलाह दी गई है।

    नगर निगम ने नागरिकों की परेशानी कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार की है। अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों से पानी की मांग प्राप्त होगी वहां निगम के टैंकर भेजे जाएंगे ताकि किसी भी इलाके में पेयजल संकट गहराने न पाए। नागरिक जरूरत पड़ने पर नगर निगम के संबंधित जोन कार्यालय या कंट्रोल रूम से संपर्क कर टैंकर की मांग दर्ज करा सकते हैं। निगम ने स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य निर्धारित समय पर पूरा होने के बाद बुधवार से सभी प्रभावित क्षेत्रों में पहले की तरह नियमित जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी।

    नगर निगम ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर जलापूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। इसलिए लोग धैर्य रखें और पानी का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें ताकि किसी भी परिवार को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।