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  • भोपाल के DB मॉल के सामने खंभे में दौड़ रहा था करंट, छूने से BJP युवा मोर्चा नेता की मौत

    भोपाल के DB मॉल के सामने खंभे में दौड़ रहा था करंट, छूने से BJP युवा मोर्चा नेता की मौत


    भोपाल। राजधानी भोपाल के एमपी नगर में रविवार रात दर्दनाक हादसे में भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की करंट लगने से मौत हो गई। वे परिवार के साथ डीबी मॉल में खरीदारी करने पहुंचे थे। सड़क पार करते समय उन्होंने स्ट्रीट लाइट के खंभे को पकड़ लिया, जिसमें करंट दौड़ रहा था। हादसे में उनकी पत्नी भी करंट की चपेट में आईं, लेकिन उन्होंने खुद को बिजली के संपर्क से अलग कर लिया।

    सड़क पार करते समय खंभे को पकड़ा, लगा जोरदार झटका

    जानकारी के मुताबिक, दिव्यऋषि तिवारी रविवार रात परिवार के साथ डीबी मॉल में खरीदारी करने आए थे। परिवार का वाहन सड़क की दूसरी तरफ खड़ा था। खरीदारी के बाद परिवार के सदस्य सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान दिव्यऋषि ने सड़क किनारे लगे स्ट्रीट लाइट के खंभे को पकड़ लिया।

    खंभे में पहले से करंट दौड़ रहा था। जैसे ही उन्होंने उसे हाथ लगाया, उन्हें जोरदार बिजली का झटका लगा। बताया जा रहा है कि खंभे से एक तार निकला हुआ था और इसी तार के कारण खंभे में करंट आने की बात सामने आई है।

    हादसे के दौरान उनकी पत्नी भी बिजली की चपेट में आ गईं। हालांकि, उन्होंने किसी तरह खुद को करंट के संपर्क से अलग कर लिया। दिव्यऋषि को ज्यादा करंट लगने से उनकी हालत गंभीर हो गई।

    ट्रैफिक पुलिस ने मौके पर दिया CPR

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मी तुरंत मदद के लिए पहुंचे। ट्रैफिक हेड कांस्टेबल जगदीश दांगी के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने दिव्यऋषि तिवारी को मौके पर ही CPR देने की कोशिश की।

    इसके बाद उन्हें तत्काल नर्मदा अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें AIIMS ले जाने की सलाह दी। पुलिसकर्मी उन्हें लेकर AIIMS पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दिव्यऋषि तिवारी को मृत घोषित कर दिया।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। परिवार के साथ शॉपिंग के लिए निकले दिव्यऋषि की अचानक मौत से परिजन सदमे में हैं।

    खंभे से निकला तार अलग कराया गया

    ट्रैफिक हेड कांस्टेबल जगदीश दांगी ने बताया कि परिवार ने वाहन सड़क की दूसरी तरफ खड़ा किया था। सड़क पार करते समय खंभे से निकले तार के कारण पति-पत्नी करंट की चपेट में आए। पत्नी खुद को बिजली के संपर्क से अलग करने में कामयाब रहीं, लेकिन दिव्यऋषि को ज्यादा करंट लगा।

    पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में यह खंभा मेट्रो या PWD से जुड़ा बताया जा रहा है। हादसे के बाद पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए खंभे से निकले तार को अलग करवा दिया, ताकि वहां दोबारा किसी व्यक्ति के करंट की चपेट में आने का खतरा न रहे।

    खुले तार और स्ट्रीट लाइट के खंभों की सुरक्षा पर सवाल

    हादसे के बाद सड़क किनारे लगे स्ट्रीट लाइट के खंभों और खुले तारों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने हादसे के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    घटना ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगे बिजली और स्ट्रीट लाइट के खंभों की नियमित जांच और मेंटेनेंस किस तरह किया जा रहा है। खासकर ऐसे स्थानों पर, जहां बड़ी संख्या में लोग रोजाना आते-जाते हैं, खुले तार या करंट का रिसाव गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

    जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि खंभे में करंट कैसे पहुंचा और उससे निकले खुले तार की स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार था।

    पुलिस घटनास्थल से जुड़े तथ्यों के साथ वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्था की भी पड़ताल कर रही है। खंभा किस विभाग के अधीन है और बिजली का संपर्क वहां तक कैसे पहुंचा, इन बिंदुओं की भी जांच की जा रही है।

    जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटा रही है।

  • भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल: के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के व्यवस्थित विकास के उद्देश्य से तैयार किए गए इस प्रारूप में संरक्षित वन क्षेत्रों से होकर कई सड़कों के निर्माण का प्रावधान किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इन प्रावधानों से जंगलों और बाघों के आवास क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

    ड्राफ्ट में भोपाल के संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर एक दर्जन से अधिक सड़कों का प्रस्ताव बताया गया है। इनमें 18 मीटर, 24 मीटर और 60 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रावधान शामिल हैं। जिन क्षेत्रों में इन सड़कों का प्रस्ताव किया गया है, वहां बाघों की आवाजाही और प्रजनन गतिविधियां होने की बात कही गई है। इन वन क्षेत्रों को संरक्षित दर्जा भी प्राप्त है।

    मामले में कालियाखेड़ा, करवा चौथ, मंडोर और मंदोरी सहित कुछ वन क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। इन इलाकों में बाघों की मौजूदगी और आवाजाही लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। साथ ही, इन क्षेत्रों की जमीन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। आरोप लगाया गया है कि ऐसी जमीनों पर प्रभावशाली लोगों के हित जुड़े हुए हैं।

    कांग्रेस का कहना है कि इससे पहले प्रस्तावित मास्टर प्लान 2031 में भी जंगलों के बीच सड़क नेटवर्क विकसित करने के प्रावधान किए गए थे। उस समय दावे और आपत्तियां आमंत्रित किए जाने पर बड़ी संख्या में लोगों ने इन प्रावधानों का विरोध किया था। दावा है कि उस प्रक्रिया के दौरान 1500 से अधिक आपत्तियां दर्ज हुई थीं।

    कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने मास्टर प्लान के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई स्तर पर गड़बड़ियां की गई हैं। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जंगलों को नुकसान पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।

    दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया ने इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके लिए विभिन्न प्रावधानों और संबंधित दिशा-निर्देशों का अध्ययन किया गया है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के जंगलों को किसी भी स्थिति में बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उनके अनुसार, विकास के साथ वन संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

    मास्टर प्लान 2047 का उद्देश्य आने वाले वर्षों में भोपाल के विस्तार और बुनियादी ढांचे को दिशा देना है, लेकिन संरक्षित वन क्षेत्रों से प्रस्तावित सड़कें अब इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस का प्रमुख विषय बन गई हैं। एक ओर शहर के विकास और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र, बाघों के आवास और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

    अब इस ड्राफ्ट पर आने वाली आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी दौरान यह स्पष्ट होगा कि संरक्षित वन क्षेत्रों से संबंधित प्रस्तावों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। फिलहाल मास्टर प्लान 2047 को लेकर राजनीतिक पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुके हैं और जंगलों के संरक्षण तथा शहरी विकास के बीच संतुलन का मुद्दा केंद्र में आ गया है।

  • उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार, 27 सितंबर को उज्जैन के दौरे पर हैं। इस दौरान वे शहर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में विकास कार्यों का भूमिपूजन, लोकार्पण और अन्य गतिविधियां निर्धारित हैं। इसके साथ ही वे सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों की सौगात देंगे। उज्जैन में कार्यक्रम पूरे करने के बाद मुख्यमंत्री भोपाल के लिए रवाना होंगे, जहां शाम को भी उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्यमंत्री का उज्जैन दौरा सुबह से ही शुरू हो गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे सुबह 7 बजे दशहरा मैदान पहुंचे। यहां सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद सुबह 7:55 बजे मुख्यमंत्री वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचे। सुबह के कार्यक्रम पूरे होने के बाद दिन के अन्य आयोजनों की तैयारियां की गईं।

    मुख्यमंत्री का अगला प्रमुख कार्यक्रम महाकाल मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा। निर्धारित समय के अनुसार, वे सुबह 10:45 बजे महाकाल मंदिर के पार्किंग परिसर में अन्न क्षेत्र के सामने पहुंचेंगे। इसके बाद सुबह 10:50 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान विकास कार्यों से जुड़े भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन करेंगे और तैयार कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। इसके अलावा, सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया जाएगा। इस आयोजन में प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को सुनने का कार्यक्रम भी शामिल है। धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    महाकाल मंदिर परिसर में निर्धारित कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:40 बजे वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचेंगे। यहां से आगे के कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी करेंगे। इसके बाद दोपहर 2 बजे वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शाजापुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की ऑनलाइन सहभागिता निर्धारित है।

    दोपहर 2:20 बजे मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से उज्जैन हेलीपैड पहुंचेंगे। इसके बाद दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे के बीच हेलीकॉप्टर से भोपाल के स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे। राजधानी पहुंचने के बाद उनका अगला कार्यक्रम पार्टी कार्यालय में निर्धारित है। दोपहर 3:25 बजे वे कार से पार्टी कार्यालय पहुंचेंगे और 3:30 बजे स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां का कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    मुख्यमंत्री का दिन का कार्यक्रम यहीं समाप्त नहीं होगा। शाम 6:30 बजे वे भोपाल के रविंद्र भवन पहुंचेंगे। यहां निर्धारित स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वे कार से वापस अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    इस प्रकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 27 सितंबर का कार्यक्रम उज्जैन और भोपाल के बीच निर्धारित है। उज्जैन में विकास कार्यों के भूमिपूजन, लोकार्पण और धार्मिक नगरी से जुड़े आयोजनों में भाग लेने के बाद वे राजधानी में शाम के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। पूरे दिन के दौरे में धार्मिक, विकासात्मक, कृषि और संगठनात्मक गतिविधियां उनके कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी।

  • भोपाल के स्पा सेंटरों पर लगातार छापेमारी से बढ़ी हलचल, कथित देह व्यापार के नेटवर्क की पुलिस कर रही जांच

    भोपाल के स्पा सेंटरों पर लगातार छापेमारी से बढ़ी हलचल, कथित देह व्यापार के नेटवर्क की पुलिस कर रही जांच


    मध्य प्रदेश:
    की राजधानी भोपाल में स्पा सेंटरों की आड़ में कथित अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई के बाद पूरे मामले को लेकर जांच का दायरा बढ़ गया है। शहर में अब तक चार स्पा सेंटरों पर छापेमारी की जा चुकी है। इन कार्रवाइयों के दौरान कई युवक-युवतियों को संदिग्ध परिस्थितियों में पाए जाने के बाद हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई ने इस बात की पड़ताल तेज कर दी है कि क्या अलग-अलग स्पा सेंटरों में सामने आई गतिविधियों के पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है। साथ ही यह भी जांच का हिस्सा है कि इन सेंटरों में काम करने वाली युवतियां किस तरह यहां तक पहुंचीं और क्या उन्हें किसी समूह या गिरोह के माध्यम से जोड़ा गया था।

    भोपाल में पुलिस आयुक्त के निर्देश पर क्राइम ब्रांच और संबंधित थाना पुलिस की टीमों ने अलग-अलग इलाकों में स्पा सेंटरों पर दबिश दी। होशंगाबाद रोड स्थित आशिमा मॉल के एक स्पा सेंटर, इंद्रपुरी क्षेत्र के एक अन्य स्पा सेंटर, एमपी नगर और दूसरे इलाकों में कार्रवाई की गई। पुलिस टीमों ने मौके से कई लोगों को पकड़ा और उनके बारे में जानकारी जुटाने के साथ पूछताछ शुरू की।

    लगातार सामने आ रही कार्रवाइयों के बाद पुलिस अब केवल संबंधित स्पा सेंटरों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनसे जुड़े संभावित संपर्कों और गतिविधियों की भी जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सेंटरों का संचालन किस तरह होता था, वहां काम करने वाले लोगों का आपस में क्या संपर्क था और क्या इन स्थानों के बीच कोई सीधा संबंध मौजूद है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, स्पा सेंटरों में अनैतिक गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में टीमों ने एक साथ दबिश दी और मौके से कई युवक-युवतियों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

    मामले में किसी बड़े रैकेट या गिरोह की मौजूदगी को लेकर भी जांच की जा रही है। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के दौरान मिलने वाली जानकारी का विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन घटनाओं के पीछे कोई संगठित व्यवस्था है या फिर अलग-अलग स्थानों पर स्वतंत्र रूप से ऐसी गतिविधियां संचालित हो रही थीं।

    जांच का एक अन्य पहलू होटलों से सामने आए कुछ वीडियो भी हैं। पुलिस इन वीडियो की भी पड़ताल कर रही है, ताकि मामले से जुड़े लोगों और गतिविधियों के बीच संभावित संबंधों की जानकारी मिल सके। चार स्पा सेंटरों पर कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ने से आने वाले समय में और लोगों से पूछताछ या अन्य कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

    फिलहाल पुलिस ने यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि भोपाल में सामने आए सभी मामलों के पीछे एक ही संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार लोगों से पूछताछ, उपलब्ध जानकारी और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह सामने आएगा कि कथित गतिविधियों में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनके बीच किस तरह का संपर्क था।

  • मध्य प्रदेश के सात शहरों में 351 बसों के साथ आज से शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा, यात्रियों को मिलेगी नई सुविधा

    मध्य प्रदेश के सात शहरों में 351 बसों के साथ आज से शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा, यात्रियों को मिलेगी नई सुविधा

    मध्य प्रदेश: में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत शुक्रवार, 25 सितंबर को 351 बसों के साथ की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल के गोविंदपुरा स्थित बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल होंगे। इस सेवा का उद्देश्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित करना और यात्रियों को शहरों के भीतर तथा एक शहर से दूसरे शहर तक आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना है।

    योजना के पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को शामिल किया गया है। इन सात शहरों में कुल 351 बसों का संचालन शुरू होगा। इनमें 120 बसें इंटरसिटी सेवा के लिए और 231 बसें इंट्रासिटी सेवा के लिए निर्धारित की गई हैं। इंटरसिटी बसें अलग-अलग शहरों के बीच यात्रियों को आवागमन की सुविधा देंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के अंदर संचालित होंगी।

    बसों का शहरवार वितरण भी निर्धारित किया गया है। इंदौर में सबसे अधिक 145 बसें चलाई जाएंगी। इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। भोपाल में कुल 106 बसें संचालित होंगी, जिनमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें रहेंगी। जबलपुर में 67 बसों का संचालन होगा। इनमें 14 बसें शहरों के बीच और 53 बसें शहर के भीतर चलेंगी।

    इसके अलावा रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में तीन और भिंड में दो इंटरसिटी बसें शुरू की जाएंगी। इस तरह पहले चरण में बड़े शहरों के साथ अन्य क्षेत्रों को भी सार्वजनिक बस सेवा से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।

    परिवहन विभाग ने इंटरसिटी बसों के लिए किराया दो रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया है। भोपाल में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के साथ पीएम बस सेवा का संचालन किया जा रहा है। वहीं इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित अन्य शहरों में बस सेवाओं को एक विभागीय व्यवस्था के तहत संचालित करने की योजना है।

    सेवा के शुभारंभ से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार देर रात बीएचईएल दशहरा मैदान पहुंचे और कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने मंच, सभा स्थल और यात्रियों तथा कार्यक्रम से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने बसों का निरीक्षण किया और वहां मौजूद चालकों से बातचीत भी की। इस दौरान परिवहन सचिव मनीष सिंह भी मौजूद रहे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 21 साल बाद प्रदेश में लोक परिवहन बस सेवा की शुरुआत की जा रही है। उन्होंने आधुनिक ई-बसों और सुविधायुक्त बसों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से नगरों और जिलों तक विस्तारित करने की बात कही। योजना के तहत बस स्टॉप, बस स्टैंड, इलेक्ट्रॉनिक सुविधाओं और बेहतर नियंत्रण व्यवस्था को विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

    सरकार की योजना सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का विस्तार करते हुए यात्रियों को सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराने की है। पहले चरण में सात शहरों से शुरू हो रही यह सेवा आगे प्रदेश के अन्य नगरों और जिलों तक पहुंचाई जाएगी। इसके तहत बसों के संचालन और परिवहन सुविधाओं को व्यवस्थित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

  • मध्य प्रदेश में 20 साल बाद सुगम परिवहन की शुरुआत, पहले चरण में 351 बसें चलेंगी, रात में भी मिलेगी सेवा

    मध्य प्रदेश में 20 साल बाद सुगम परिवहन की शुरुआत, पहले चरण में 351 बसें चलेंगी, रात में भी मिलेगी सेवा

    मध्य प्रदेश: में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की जा रही है। करीब 20 साल बाद प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को नए स्वरूप में विकसित करने की दिशा में यह पहल की गई है। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक, किफायती और बेहतर कनेक्टिविटी वाला सफर मिल सकेगा। योजना का पहला चरण 351 बसों के साथ शुरू होगा।

    इस सेवा के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड सहित विभिन्न शहरों में बसें संचालित की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2031 तक पूरे प्रदेश में 15 हजार बसें चलाने का है। इस लक्ष्य के पूरा होने पर प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का विस्तार होगा और अधिक लोगों को नियमित बस सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    नई व्यवस्था में यात्रियों को निर्धारित स्टॉप पर बसों का इंतजार कम करना पड़ेगा। बसों के संचालन का अंतराल मार्ग और सेवा के अनुसार 5 से 30 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है। कुछ मार्गों पर यात्रियों को हर 10 से 15 मिनट में बस मिलने की सुविधा भी मिलेगी। इससे रोजाना कामकाज, पढ़ाई और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए बस से यात्रा करने वाले लोगों को सहूलियत होगी।

    यात्रियों को बसों की जानकारी हासिल करने के लिए भी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मोबाइल फोन पर बस की लाइव लोकेशन देखी जा सकेगी। इसके अलावा ऑनलाइन टिकट की सुविधा भी मिलेगी। इससे यात्रियों को बस के आने का अनुमान लगाने और टिकट प्राप्त करने में आसानी होगी। निर्धारित किराया व्यवस्था लागू होने से मनमाने किराए पर भी नियंत्रण रखने का प्रयास किया जाएगा।

    बसों का किराया लगभग दो रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे नियमित यात्रियों को यात्रा खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर भी जोर दिया गया है। इन बसों से सीधे धुएं का उत्सर्जन नहीं होगा, जिससे वायु प्रदूषण कम करने में सहायता मिल सकती है। भोपाल जैसे शहर में, जहां झीलों और पर्यावरण का विशेष महत्व है, इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उपयोगी माना जा रहा है।

    नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक व्यवस्थाएं भी उपलब्ध रहेंगी। बसों में सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन लगाए जाएंगे। इससे यात्रा के दौरान सुरक्षा संबंधी जरूरतों पर ध्यान दिया जा सकेगा। दिव्यांग यात्रियों के लिए भी बसों में चढ़ने और उतरने की सुविधा बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।

    इस सेवा की एक महत्वपूर्ण विशेषता रात में भी बसों का संचालन है। इससे देर शाम या रात के समय यात्रा करने वाले लोगों को सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिल सकेगा। खासकर उन यात्रियों को फायदा हो सकता है, जिन्हें कामकाज या अन्य कारणों से सामान्य समय के बाद भी आवागमन करना पड़ता है।

    कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिए प्रदेश में बस यात्रा को अधिक नियमित, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की योजना है। पहले चरण में 351 बसों से शुरू होने वाली यह व्यवस्था आगे चलकर बड़े परिवहन नेटवर्क का हिस्सा बनेगी। वर्ष 2031 तक 15 हजार बसों के संचालन का लक्ष्य पूरा करने के लिए आने वाले वर्षों में सेवा का विस्तार किया जाएगा।

  • भोपाल वकील-पुलिस विवाद में निलंबित थाना प्रभारी राजन अहिरवार ने वीडियो जारी कर जांच को लेकर रखी अपनी बात

    भोपाल वकील-पुलिस विवाद में निलंबित थाना प्रभारी राजन अहिरवार ने वीडियो जारी कर जांच को लेकर रखी अपनी बात

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में वकील और पुलिसकर्मियों के बीच हुआ विवाद अब जांच और कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच गया है। मामले में दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबन के बाद राजन अहिरवार ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष सामने रखा है।

    राजन अहिरवार ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि उनकी जांच से महिला पुलिस अधिकारी को दूर रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक उनकी बात सही तरीके से नहीं पहुंच पाई। प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपना मोबाइल फ्लाइट मोड पर रखा था और सुबह वीडियो पोस्ट कर अपनी बात सार्वजनिक की।

    विवाद के मामले में अधिवक्ता राकेश रावल की शिकायत पर जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार और दो अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दूसरी ओर पुलिस की तरफ से भी राकेश रावल के खिलाफ सरकारी काम में रुकावट डालने, बदसलूकी और मारपीट के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।

    विवाद के बाद डीसीपी जोन-1 ने थाना प्रभारी राजन अहिरवार के साथ कॉन्स्टेबल यश लखेरा और आरक्षक रामस्वरूप को निलंबित कर दिया। कार्रवाई के बाद जहांगीराबाद थाने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर हरि किशन लोहिया को सौंपी गई है। पुलिस विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच जारी है।

    मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। कार्रवाई की मांग को लेकर मंगलवार रात वकील जहांगीराबाद थाने में देर रात करीब तीन बजे तक प्रदर्शन करते रहे। इसके बाद बुधवार को भी अधिवक्ताओं ने कोर्ट चौराहे पर प्रदर्शन किया और रास्ते बंद कर दिए।

    विवाद की शुरुआत 22 सितंबर की शाम गणेश विसर्जन के दौरान खटलापुरा इलाके में हुई बताई गई है। आरक्षक हरि ओम वर्मा की शिकायत के अनुसार, उस समय उनकी ड्यूटी इलाके में लगाई गई थी। इसी दौरान एक लाल रंग की कार वहां पहुंची। आरक्षक ने चालक को आगे जाने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कार सड़क पर खड़ी कर दी गई।

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों और अधिवक्ता राकेश रावल के बीच बहस हुई। आरक्षक हरि ओम वर्मा ने आरोप लगाया कि राकेश रावल ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और धमकी भी दी। आरक्षक के अनुसार, घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई और इसके बाद थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई।

    दूसरी ओर अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस तरह दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ रही है।

    निलंबन के बाद थाना प्रभारी राजन अहिरवार की ओर से सामने आए वीडियो ने मामले को एक और मोड़ दिया है। उन्होंने अपनी जांच से महिला पुलिस अधिकारी को अलग रखने की मांग करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचने में कमी का दावा किया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच पुलिस विभाग की ओर से की जा रही है और इसी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    नई दिल्ली । भारतीय सर्राफा बाजार में 24 सितंबर 2026, गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख कीमती धातुओं के भाव में कमजोरी दर्ज की गई है। सोने की कीमत में 390 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई, जबकि चांदी का भाव करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक फिसल गया।

    सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के बाद 22 कैरेट गोल्ड का भाव अधिकांश प्रमुख शहरों में 1,39,060 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे पहुंच गया है। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,750 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम हो गई है। अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर दर्ज किया गया है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,700 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दिल्ली में दोनों कैरेट के भाव में गिरावट के बाद ये कीमतें सामने आई हैं।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट गोल्ड का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,51,600 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    कोलकाता में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट की कीमत 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। लखनऊ में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट गोल्ड 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी सोने की कीमतें प्रमुख शहरों के करीब रहीं। यहां 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    सोने के साथ चांदी के भाव में भी आज कमजोरी आई है। पिछले दिन की तुलना में चांदी की कीमत में करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद अधिकांश शहरों में चांदी का भाव 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया है।

    24 सितंबर को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में आई गिरावट से सर्राफा बाजार में दोनों धातुओं के भाव नीचे आए हैं। अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर है, जबकि चांदी का भाव अधिकांश शहरों में करीब 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है।

    अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर में लागू ताजा भाव की जानकारी लेना जरूरी है, क्योंकि शहर के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है।

  • बच्चों की कल्पनाओं को मिलेगा शब्दों का आकाश, भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन

    बच्चों की कल्पनाओं को मिलेगा शब्दों का आकाश, भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन


    भोपाल। बच्चों की दुनिया में एक छोटी-सी कहानी भी बड़ा सपना जगा सकती है, कविता की दो पंक्तियां उनके भीतर संवेदना का दीप जला सकती हैं और किसी बाल पात्र का साहस उन्हें जीवन की कठिनाइयों से लड़ना सिखा सकता है। इसी बाल मन की कल्पनाशीलता, जिज्ञासा और संवेदना को साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

    दरअसल, अर्चना प्रकाशन न्यास के तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से बाल साहित्यकार और साहित्यप्रेमी शामिल होंगे। सम्मेलन के साथ बाल साहित्य पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी और मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इस आयोजन को साहित्य के साथ बाल अधिकार, संस्कार, रचनात्मकता और बाल मनोविज्ञान के व्यापक विमर्श से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    देशभर के बाल साहित्यकारों का होगा संगम

    भोपाल में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन बाल साहित्य को केंद्र में रखकर देश के विभिन्न क्षेत्रों के रचनाकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। अर्चना प्रकाशन न्यास की बैठक में सम्मेलन के आयोजन का निर्णय लिया गया। बैठक में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दवे, अर्चना प्रकाशन न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश चन्द्र, मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा, साहित्यकार उमेश सिंह, नुसरत मेंहदी, बाल साहित्यकार महेश सक्सेना, गोपेश्वर बाजपेयी, गोकुल सोनी, मीनू पांडे, गीत धीर, मृदुल त्यागी, सुदर्शन व्यास, देविदयाल सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

    सम्मेलन में प्रदेश के बाहर से आने वाले बाल साहित्यकारों की सहभागिता से मध्य प्रदेश के रचनाकारों को भी देश के अन्य क्षेत्रों में लिखे जा रहे बाल साहित्य से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इससे विचारों, अनुभवों और रचनात्मक प्रयोगों का आदान-प्रदान संभव होगा।

    बाल साहित्य को मनोरंजन तक सीमित करने की जरूरत नहीं

    इस बैठक के दौरान इस बात पर भी विमर्श हुआ कि बाल साहित्य बच्चों के मनोरंजन का माध्यम भर नहीं है। वह उनके व्यक्तित्व निर्माण, भाषा विकास, कल्पनाशक्ति, नैतिक बोध और सामाजिक संवेदनाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कहानी और कविता के माध्यम से बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझना शुरू करते हैं। प्रकृति, परिवार, मित्रता, देश, समाज, विज्ञान, इतिहास और मानवीय संबंधों के प्रति उनकी दृष्टि विकसित होती है।

    आज डिजिटल माध्यमों के विस्तार के बीच बच्चों के पढ़ने की आदत और उनके सामने उपलब्ध सामग्री का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य की आवश्यकता और बढ़ जाती है। सम्मेलन इस प्रश्न पर भी सार्थक विमर्श का अवसर दे सकता है कि आज के बच्चे के लिए कैसा साहित्य लिखा जाए, जो उसकी भाषा में हो, उसकी जिज्ञासाओं को समझे और उसे अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य के प्रति तैयार करे।

    बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता से जुड़ेगा संवेदनशील पक्ष

    मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इस आयोजन को एक व्यापक सामाजिक संदर्भ प्रदान करती है। बाल साहित्य में बच्चों के अधिकार, सुरक्षा, सम्मान, समान अवसर, शिक्षा, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से स्थान दिया जा सकता है। बच्चों के लिए लिखने वाले साहित्यकार यदि बाल मन की वास्तविक चुनौतियों को समझकर रचना करें तो साहित्य उनके लिए सिर्फ कल्पना की दुनिया नहीं रहेगा, बल्कि जीवन को समझने का माध्यम भी बनेगा।

    आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि “बाल साहित्य बच्चे के मन तक पहुंचने का सबसे सहज और प्रभावी माध्यम है। एक अच्छी कहानी बच्चे को आनंद देने के साथ ही वह उसके भीतर संवेदना, जिज्ञासा, आत्मविश्वास और सही-गलत को समझने की दृष्टि भी विकसित करती है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस प्रकार के प्रयासों को इसलिए महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि बच्चों के अधिकारों की बात कानून और संस्थागत व्यवस्था तक सीमित नहीं रह सकती। समाज में बच्चों के प्रति संवेदनशील वातावरण बनाने में साहित्य और संस्कृति की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।”

    उन्होंने कहा कि “मध्य प्रदेश में बाल साहित्यकारों और बाल अधिकारों से जुड़े संस्थानों के बीच संवाद बढ़ना प्रदेश के बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।”

    साहित्य अकादमी की सहभागिता से रचनाकारों को मिलेगा मंच

    मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी की सहभागिता सम्मेलन को प्रदेश की साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ती है। साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दावे कहते हैं, अकादमी लंबे समय से प्रदेश में साहित्यिक विमर्श और रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों में सक्रिय रही है। बाल साहित्यकार सम्मेलन के माध्यम से प्रदेश के वरिष्ठ और नवोदित बाल साहित्यकारों के बीच संवाद का यहां एक सुखद अवसर बन सकता है।

    उन्‍होंने कहा, यह आयोजन नई पीढ़ी के लेखकों को बाल साहित्य की बदलती जरूरतों को समझने और अपनी रचनाओं को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने के लिए प्रेरित कर सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब बच्चों के लिए साहित्य लिखने में भाषा की सरलता के साथ विषयों की आधुनिकता भी आवश्यक हो गई है, साहित्यिक संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

    मध्य प्रदेश को क्या मिलेगा

    इस संबंध में अर्चना प्रकाशन न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन का सबसे बड़ा संभावित लाभ यह होगा कि भोपाल बाल साहित्य के राष्ट्रीय संवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकेगा। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले साहित्यकार अपने अनुभव और रचनात्मक दृष्टि लेकर आएंगे। इससे मध्य प्रदेश के बाल साहित्यकारों को राष्ट्रीय स्तर के रचनाकारों से संवाद का अवसर मिलेगा।

    उन्‍ळोंने बताया कि दूसरा महत्वपूर्ण लाभ प्रदेश के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य की उपलब्धता और उसके प्रति जागरूकता बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। विद्यालयों, पुस्तकालयों, शिक्षकों, अभिभावकों और साहित्यकारों के बीच यदि बाल साहित्य को लेकर संवाद बढ़ता है तो बच्चों में पढ़ने की संस्कृति को भी बल मिल सकता है। इसके अलावा स्थानीय प्रतिभाओं को सामने लाने का है। मध्य प्रदेश के अनेक छोटे शहरों और कस्बों में बाल साहित्य लिखने वाले रचनाकार सक्रिय हैं। राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन से उन्हें व्यापक मंच मिल सकता है और उनके साहित्य को प्रदेश से बाहर पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    बाल साहित्य प्रदर्शनी होगी आकर्षण का केंद्र

    सम्मेलन के अवसर पर बाल साहित्य पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। यह प्रदर्शनी बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और साहित्यप्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकती है। बाल पुस्तकों और साहित्यिक सामग्री के माध्यम से यह समझने का अवसर मिलेगा कि अलग-अलग समय में बच्चों के लिए साहित्य किस प्रकार विकसित हुआ है और आज के दौर में उसकी दिशा क्या होनी चाहिए।

    ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा

    सम्मेलन में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागियों के लिए पंजीयन लिंक जारी किया गया है। प्रतिभागी लिंक पर अपना विवरण भरकर सम्मेलन के लिए पंजीयन करा सकेंगे। आयोजकों की ओर से देश के विभिन्न क्षेत्रों के बाल साहित्यकारों से इसमें सहभागिता का आह्वान किया गया है।

    उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब बच्चों की दुनिया तेजी से बदल रही है। मोबाइल स्क्रीन और डिजिटल सामग्री के बीच पुस्तक, कहानी और कविता के साथ बच्चे का रिश्ता बनाए रखना एक बड़ी सामाजिक आवश्यकता बन गया है। यह बाल साहित्यकारों, साहित्यिक संस्थाओं और बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों का साझा संवाद बच्चों के लिए ऐसी रचनात्मक दुनिया तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जहां कल्पना को उड़ान मिले, संवेदना को भाषा मिले और हर बच्चे को अपने सपनों को शब्द देने का अवसर मिले।

  • भोपाल में चलती बाइक पर दोस्त की गोली मारकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार; पिस्टल देने वालों की तलाश तेज

    भोपाल में चलती बाइक पर दोस्त की गोली मारकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार; पिस्टल देने वालों की तलाश तेज

    भोपाल: के निशातपुरा थाना क्षेत्र की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में चलती बाइक पर गोली मारकर की गई हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी अलीम उर्फ अल्लू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर अपने दोस्त तासी उर्फ इकलास की देशी पिस्टल से गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। पुलिस ने उसे घटना के करीब 12 घंटे के भीतर जिला रायसेन से गिरफ्तार किया।

    पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई देशी पिस्टल भी बरामद कर जब्त कर ली है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने हत्या के पीछे पुरानी रंजिश को वजह बताया है। मामले में पुलिस आरोपी से घटना से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ कर रही है।

    पूछताछ में अलीम ने बताया कि करीब एक साल पहले मृतक तासी उर्फ इकलास का उसके दोस्त ताहिर उर्फ अय्यू से विवाद हुआ था। उस समय अलीम ने अपने दोस्त ताहिर की मदद की थी। इसी विवाद के बाद तासी आरोपी अलीम से भी रंजिश रखने लगा था। आरोपी के अनुसार, मृतक की ओर से उसे धमकी भी दी जाती थी।

    करीब 15 दिन पहले दोनों के बीच एक बार फिर विवाद हुआ था। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि लगातार बनी रंजिश के चलते उसने तासी की हत्या करने की योजना बनाई। इसके बाद वह गंजबासौदा में रहने वाले अपने रिश्तेदार आसिफ के पास पहुंचा।

    आरोपी के अनुसार, वहीं से उसे देशी पिस्टल मिली। हथियार हासिल करने के बाद वह भोपाल आया और तासी की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी के बताए स्थान और उसकी निशानदेही के आधार पर घटना में इस्तेमाल की गई पिस्टल बरामद कर ली है।

    घटना 20 सितंबर रविवार की बताई गई है। तासी अपने एक दोस्त के साथ सुबह मछली पकड़ने के लिए निकला था। इसी दौरान अलीम भी उनके साथ लिफ्ट लेकर बाइक पर पीछे बैठ गया। चलती बाइक के दौरान आरोपी ने तासी को गोली मार दी।

    गोली लगने के बाद तासी की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी की तलाश तेज कर दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसे रायसेन जिले से पकड़ लिया। गिरफ्तारी के साथ ही हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया गया है।

    मामले में अब पुलिस का फोकस हथियार उपलब्ध कराने वाले लोगों तक पहुंचने पर है। पुलिस के अनुसार, घटना में हथियार उपलब्ध कराने वाले साहन और आसिफ की तलाश की जा रही है। दोनों की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस आरोपी से हत्या की योजना, हथियार हासिल करने की प्रक्रिया और वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों के बारे में पूछताछ कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या से पहले आरोपी ने किस तरह तैयारी की और वारदात को अंजाम देने के बाद वह रायसेन कैसे पहुंचा।

    पुलिस की शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश हत्या की प्रमुख वजह के तौर पर सामने आई है। हालांकि, मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। हथियार उपलब्ध कराने के आरोपों की पुष्टि और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका सामने आने के बाद जांच की तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।