Tag: Bhopal

  • जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल । भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

     भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

  • भोपाल में प्रशासनिक ढांचे का बड़ा बदलाव! बनेगा कमिश्नर-कलेक्ट्रेट का नया आधुनिक परिसर

    भोपाल में प्रशासनिक ढांचे का बड़ा बदलाव! बनेगा कमिश्नर-कलेक्ट्रेट का नया आधुनिक परिसर



    नई दिल्ली। भोपाल में प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर में जल्द ही कमिश्नर और कलेक्ट्रेट की नई अत्याधुनिक बिल्डिंग बनाई जाएगी। इसके साथ ही आईजी पुलिस कार्यालय, नजूल अधिकारी बैरागढ़ और भोपाल शहर के अन्य महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालयों के लिए भी नए भवन प्रस्तावित हैं।

    इस संबंध में बुधवार को संभागायुक्त संजीव सिंह की अध्यक्षता में अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें निर्माण की रूपरेखा, शिफ्टिंग प्रक्रिया और विभागवार जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए गए।

    15 विभागों को खाली करने होंगे दफ्तर
    पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 15 विभागों को अपने वर्तमान कार्यालय खाली करने होंगे। संभागायुक्त ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे शिफ्टिंग के लिए स्पष्ट टाइम लिमिट तय करें ताकि निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से शुरू किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने स्टाफ की संख्या के आधार पर आवश्यक स्थान का निर्धारण जल्द से जल्द करे। साथ ही एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो निर्माण एजेंसी के साथ समन्वय स्थापित कर सके।

    नए परिसर में क्या होगा खास?
    योजना के तहत कलेक्टर कार्यालय के सामने स्थित शासकीय कार्यालयों की जगह एक समेकित प्रशासनिक परिसर विकसित किया जाएगा। इसमें शामिल होंगे।

    नवीन आयुक्त कार्यालय

    कलेक्टर कार्यालय भोपाल

    आईजी पुलिस कार्यालय

    नजूल अधिकारी बैरागढ़

    भोपाल शहर के अन्य शासकीय कार्यालय

    संभागायुक्त ने स्पष्ट किया कि योजना में कोई नया कार्यालय जोड़ा नहीं जाएगा और न ही किसी वर्तमान कार्यालय को बाहर रखा जाएगा।

    मुख्यालय स्तर से मांगी गई शिफ्टिंग की जानकारी
    बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी विभाग अपने-अपने मुख्यालय स्तर पर शिफ्टिंग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि प्रक्रिया में देरी न हो। कलेक्टर कार्यालय से प्रभावित विभागों की सूची तैयार कर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    बैठक में हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर चंद्रमौली शुक्ला, संयुक्त आयुक्त डॉ. विनोद यादव, उपायुक्त राजस्व किरण गुप्ता, एडीएम पी.सी. शाक्य सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी विभागों से उनके कर्मचारियों की संख्या और आवश्यक स्पेस की विस्तृत जानकारी ली गई।
  • भोपाल में अयोध्या बायपास चौड़ीकरण: 10 लेन सड़क के लिए हटेंगी झुग्गियां, पुनर्वास को लेकर बढ़ी चिंता

    भोपाल में अयोध्या बायपास चौड़ीकरण: 10 लेन सड़क के लिए हटेंगी झुग्गियां, पुनर्वास को लेकर बढ़ी चिंता



    नई दिल्ली। राजधानी भोपाल में नेशनल हाईवे-146 पर अयोध्या बायपास को 10 लेन में विकसित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना तेज़ी से आगे बढ़ रही है। आशाराम तिराहा से रत्नागिरी तिराहे तक लगभग 16 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है। परियोजना के तहत आनंद नगर में एक फ्लाईओवर का निर्माण भी प्रस्तावित है। प्रशासन का दावा है कि इससे शहर में यातायात का दबाव कम होगा और भोपाल को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

    हालांकि, इस विकास कार्य की आड़ में कई परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। सड़क चौड़ीकरण के चलते अब तक 146 दुकानों को हटाया जा चुका है। इसके अलावा तीन धार्मिक स्थलों, एक वार्ड कार्यालय और एक पुलिस चौकी को भी स्थानांतरित किया जा रहा है। अब बारी केसर बस्ती की है, जहां करीब 90 झुग्गियों को हटाने की तैयारी की जा रही है।

    प्रशासन द्वारा झुग्गीवासियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं, जिससे बस्ती में रहने वाले परिवारों में चिंता का माहौल है। इन परिवारों का कहना है कि वे पिछले लगभग 50 वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं और उनके पास वैकल्पिक आवास की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रभावित लोगों का आरोप है कि न तो उन्हें उचित मुआवजे की स्पष्ट जानकारी दी गई है और न ही पुनर्वास की ठोस योजना बताई गई है।

    बस्ती के रहवासियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना पुनर्वास के उन्हें हटाना अन्याय होगा। उनका तर्क है कि अचानक बेघर होने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होगी। कई परिवार दिहाड़ी मजदूरी या छोटे-मोटे काम करके अपना जीवनयापन करते हैं, ऐसे में दूर किसी अज्ञात स्थान पर बसाए जाने से उनकी आजीविका पर भी संकट खड़ा हो सकता है।

    मामले को लेकर स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने भी हस्तक्षेप किया है। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला, मोहित सक्सेना और रीतेश सोनी सहित अन्य प्रतिनिधि केसर बस्ती पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उनका कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन गरीबों को उजाड़कर नहीं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पहले प्रत्येक प्रभावित परिवार के पुनर्वास और उचित मुआवजे की लिखित एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, उसके बाद ही हटाने की कार्रवाई की जाए।

    यह मामला एक बार फिर विकास और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन का सवाल खड़ा करता है। बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शहर के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन इनके कारण प्रभावित होने वाले लोगों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास, बुनियादी सुविधाएं और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

    अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है। क्या चौड़ीकरण की रफ्तार के बीच विस्थापित होने वाले परिवारों को न्याय मिल पाएगा, या विकास की दौड़ में उनकी आवाज दबकर रह जाएगी यह आने वाला समय ही तय करेगा।

  • मध्य प्रदेश का महाबजट तैयार, 4.70 लाख करोड़ के करीब आकार; 18 फरवरी को विधानसभा में होगा पेश

    मध्य प्रदेश का महाबजट तैयार, 4.70 लाख करोड़ के करीब आकार; 18 फरवरी को विधानसभा में होगा पेश


    भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार इस बार राज्य का बजट आकार करीब 4.70 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 4.21 लाख करोड़ रुपये के बजट से लगभग 12 प्रतिशत अधिक होगा। बजट 18 फरवरी को विधानसभा में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश की आर्थिक दिशा और विकास की प्राथमिकताएं स्पष्ट होंगी।

    बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बजट का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। बैठक में विकास योजनाओं वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति पर विशेष चर्चा हुई। सरकार इस बार राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने पर खास जोर दे रही है ताकि राज्य की वित्तीय स्थिति संतुलित और मजबूत बनी रहे। वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ विकास की रफ्तार बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती और प्राथमिकता दोनों है।

    सूत्रों के मुताबिक इस बार पूंजीगत व्यय कैपिटल एक्सपेंडिचर में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। इसका सीधा असर बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ेगा। सड़क पुल सिंचाई परियोजनाएं शहरी अधोसंरचना शिक्षा संस्थानों का विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर बड़े निवेश की तैयारी है। सरकार का मानना है कि पूंजीगत निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

    विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ हो रहा है। इस दौरान बजट प्रस्तुति के अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत विषयों पर चर्चा होगी। यह बजट मोहन यादव सरकार का तीसरा प्रमुख बजट माना जा रहा है जिससे जनता और विभिन्न वर्गों को काफी उम्मीदें हैं।

    सरकार के संकेत हैं कि इस बजट में किसान कल्याण योजनाओं को मजबूती दी जाएगी। कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुधार सिंचाई विस्तार और समर्थन मूल्य से जुड़ी व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के लिए प्रावधान बढ़ने की संभावना है। युवाओं के लिए कौशल विकास स्टार्टअप प्रोत्साहन और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाने जैसे कदम भी बजट का हिस्सा बन सकते हैं।

    ग्रामीण विकास पेयजल बिजली और आवास योजनाओं के लिए भी पर्याप्त राशि आवंटित किए जाने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का मॉडल पेश करेगा और प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। अब निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं जब विधानसभा में इस ‘महाबजट का औपचारिक ऐलान होगा।

  • राजधानी भोपाल में पानी और गोमांस का विस्फोट कांग्रेस का ISBT निगम कार्यालय घेराव रावण रूपी पुतला दहन

    राजधानी भोपाल में पानी और गोमांस का विस्फोट कांग्रेस का ISBT निगम कार्यालय घेराव रावण रूपी पुतला दहन


    भोपाल में बीते एक महीने से गोमांस मिलने और गंदे पानी की सप्लाई को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच सोमवार 9 फरवरी को कांग्रेस ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ISBT स्थित नगर निगम कार्यालय का घेराव कर नगर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला ने किया। इस दौरान महापौर मालती राय और एमआईसी सदस्यों को राजधानी की अव्यवस्था का जिम्मेदार ठहराते हुए रावण रूपी पुतला दहन किया गया।

    प्रदर्शन के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ता निगम कार्यालय में प्रवेश करने की कोशिश करते नजर आए जिस पर पुलिस से धक्का मुक्की भी हुई। कार्यकर्ताओं के हाथों में महापौर का 11 सिर वाला बड़ा कटआउट था। इसमें एक सिर महापौर का जबकि शेष दस सिर उन अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बताए गए जिन्हें कांग्रेस ने गोमांस और दूषित पानी के संकट का जिम्मेदार बताया।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भोपाल में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। शहर के कई इलाकों में पानी की सप्लाई में सीवेज मिल रहा है जिससे आम नागरिकों की सेहत खतरे में है। उन्होंने कहा कि जिस तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से 33 लोगों की मौत हो चुकी है उसी तरह भोपाल में भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कई इलाकों में सीवेज और पानी की लाइनें साथ साथ बिछी हैं और लीकेज के कारण गंदा पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है।

    कांग्रेस का कहना है कि वार्ड कार्यालयों में होने वाली जल सुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। लोगों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। कुछ मामलों में तो नाले के पानी को भी पीने योग्य बताकर जनता को गुमराह किया गया। हाल ही में एक मीडिया जांच में वार्ड कर्मचारी द्वारा नाली के पानी को पीने योग्य बताने का मामला सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    गोमांस मामले को लेकर भी कांग्रेस ने नगर निगम और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू ने कहा कि स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मामले में केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया गया है जबकि असली जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि स्लॉटर हाउस से जुड़ा प्रस्ताव खुद एमआईसी की बैठक में पारित हुआ था फिर भी महापौर और एमआईसी सदस्यों को बचाया जा रहा है।

    गोमांस मामले की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई जब जहांगीराबाद थाना प्रभारी मान सिंह चौधरी ने एफआईआर दर्ज की। इसमें 17 दिसंबर को कंटेनर नंबर यूपी 15 जेटी 4286 में मांस मिलने का जिक्र किया गया। 18 दिसंबर को वेटनरी अस्पताल जहांगीराबाद में 265 क्विंटल मांस के सैंपल लिए गए जबकि शेष मांस कंटेनर चालक को सुपुर्द कर दिया गया। बाद में मथुरा की फोरेंसिक लैब जांच में मांस के गोवंशीय होने की पुष्टि हुई।

    इस खुलासे के बाद हिंदूवादी संगठनों ने अरेरा हिल्स थाने के सामने प्रदर्शन किया और पुलिस ने जिंसी स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस में दस्तावेज जब्त किए। कांग्रेस का कहना है कि यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण का नतीजा है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में QR कोड वाले फर्जी डॉक्टर ने कई लोगों को लूटा… ऐसा हुआ भंडाफोड़

    MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में QR कोड वाले फर्जी डॉक्टर ने कई लोगों को लूटा… ऐसा हुआ भंडाफोड़


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भोपाल (Bhopal) में हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) से एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया । यहां एक जालसाज (Fraudulent) डॉक्टर ( Doctor) बनकर मरीजों के परिजनों को लूट रहा था। आरोपी जितेंद्र खागरे केवल फोन पर ही डॉक्टर नहीं बनता था, बल्कि अस्पताल के भीतर जाकर परिजनों से आमने-सामने मिलता था और उनका भरोसा जीतकर इलाज के नाम पर पैसे ऐंठता था। जांच में पता चला है कि इस बड़े घोटाले में कथित तौर पर अस्पताल के ही कुछ कर्मचारी शामिल थे, जो मरीजों की निजी जानकारी, वार्ड नंबर और बीमारी की रिपोर्ट आरोपी को लीक करते थे। बदले में इन कर्मचारियों को 20 प्रतिशत तक का कमीशन मिलता था।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक जालसाजी का तरीका बेहद शातिर थी। वह परिजनों को फोन कर डराता था कि उनका मरीज खतरे में है और जल्दी इलाज या टेस्ट के लिए तुरंत पैसे जमा करने होंगे। एक मामले में उसने दिल की बीमारी से जूझ रहे बच्चे के पिता को एक महीने तक इंतजार करने के बजाय तुरंत इकोकार्डियोग्राम कराने का झांसा देकर 10,000 रुपये ऐंठ लिए। उसने पिता से कहा कि आप पैसे भेजिए और मैं तुरंत टेस्ट करवा दूंगा। बाद में मैं एंबुलेंस का इंतजाम भी करवा दूंगा। एक अन्य पीड़ित को उसने डराया कि उसकी गर्भवती पत्नी और नवजात की जान जोखिम में है और उनसे हजारों रुपये ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस को मिले ऑडियो रिकॉर्डिंग से खुलासा हुआ है कि वह क्यूआर कोड भेजकर तुरंत पेमेंट का दबाव बनाता था और पैसे मिलते ही नंबर ब्लॉक कर देता था।


    10 परिवारों के साथ ठगी

    अस्पताल प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस और साइबर टीम ने आरोपी को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया है। अब तक कम से कम 10 परिवारों के साथ ठगी की बात सामने आई है, जिनमें से तीन पीड़ितों ने 30,000 रुपये से अधिक के नुकसान की बात की है। पुलिस अब उन संदिग्ध अस्पताल कर्मचारियों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने डेटा लीक कर इस गैंग की मदद की। अस्पताल के अधीक्षक ने लोगों को सचेत किया है कि कोई भी असली डॉक्टर या स्टाफ कभी क्यूआर कोड भेजकर पैसे नहीं मांगता, और ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत सुरक्षा विभाग या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

    वहीं पुलिस प्रमुख (सीएसपी) अनिल बाजपेयी ने कहा, हमने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जो हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों के रिश्तेदारों से डॉक्टर बनकर संपर्क करता था और उन्हें ठगता था। हमें अधीक्षक से शिकायत मिली, जिसके आधार पर कोहेफिजा पुलिस स्टेशन और क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तारी की। अपने बयान में उसने बताया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे जानकारी दी थी। संभव है कि वे एक गैंग के रूप में काम कर रहे थे।

  • फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर नहीं थम रहा विवाद, भोपाल में फिर प्रदर्शन जारी

    फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर नहीं थम रहा विवाद, भोपाल में फिर प्रदर्शन जारी

    भोपाल। साेशल मीडिया प्लेटफार्म ओटीटी पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक दिन पहले हुए प्रदर्शन के बाद भोपाल में ब्राह्मण समाज ने शुक्रवार को एक बार फिर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

    एमपी नगर इलाके में हुए इस प्रदर्शन में फिल्म के टाइटल, संवाद, निर्देशन और कलाकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा कि वे किसी भी तरह की सफाई स्वीकार नहीं करेंगे और फिल्म को किसी भी कीमत पर रिलीज नहीं होने देंगे।

    प्रदर्शन के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि फिल्मों को समाज का दर्पण कहा जाता है, लेकिन इस फिल्म के जरिए एक पूरे समाज को गलत और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना जिम्मेदारी के इस तरह का कंटेंट लॉन्च करना गंभीर चूक है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    सरकार पर भी निशाना

    पुष्पेंद्र मिश्रा ने सरकार और प्रशासन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एफआईआर की मांग के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर “सोए हुए हैं”। यूजीसी नियमों और सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की नीतियां समाज को बांटने का काम कर रही हैं।

    मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूतों से रगड़ा

    प्रदर्शन के दौरान फिल्म से जुड़े कलाकारों के खिलाफ नारे लगाए गए। इसी बीच अभिनेता मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूतों से रगड़कर प्रतीकात्मक विरोध किया गया, जिससे मौके पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।

  • MP में 30 से ज्यादा जिलों में कोहरे की चादर, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सबसे प्रभावित..

    MP में 30 से ज्यादा जिलों में कोहरे की चादर, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सबसे प्रभावित..

    भोपाल। मध्य प्रदेश का आधा से अधिक हिस्सा कोहरे की चपेट में है। गुरुवार सुबह भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और 30 से अधिक जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाया हुआ है। मौसम विभाग ने इस दौरान गाड़ी चलाते समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

    बुधवार को दिन में ठंडी हवाओं के चलते अधिकतर शहरों का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कोहरे के कारण विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। मौसम विभाग ने कहा है कि सुबह के समय अनिवार्य होने पर ही सफर करें और गाड़ी चलाते समय फॉग लाइट का इस्तेमाल करते हुए धीमी गति अपनाएं। शुक्रवार को भी कोहरे का अलर्ट जारी है।

    किस जिलों में कोहरा छाया
    मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार सुबह भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सागर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर जिलों में कोहरे का प्रभाव है।

    अगले दो दिन का मौसम

    6 फरवरी: ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर में घना कोहरा रहेगा। भोपाल, गुना, अशोकनगर, इंदौर, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, विदिशा, सीहोर, रायसेन सहित कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का असर रहेगा।

    7 फरवरी: अधिकांश जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का अनुमान है। इस दिन बारिश की संभावना नहीं है।

    इस मौसम के पीछे की वजह
    उत्तर भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के कारण प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे। पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों में पहुंच रही हैं। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होने वाला है, जिसका असर प्रदेश में नजर आएगा। 10 फरवरी से मावठे गिरने की संभावना है।

  • भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल /मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, आरपीएफ और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कछुए तस्करी का मामला पकड़ा है। रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान 311 कछुए बरामद किए गए और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

    भोपाल के बैरागढ़ के संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने बैग चेकिंग के दौरान दो बैगों में कुल 311 कछुए पकड़े। आरोपी अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार रेलवे कोच में अटेंडर का काम करता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि ढाई हजार रुपए की लालच में वह कछुओं को देवास और इंदौर भेजने के लिए ले जा रहा था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग को जानकारी दी गई। तुरंत स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग का स्टाफ मौके पर पहुंचा और आरोपी को हिरासत में लिया। आरपीएफ की पूछताछ में यह सामने आया कि रविंद्र कश्यप नामक व्यक्ति ने ढाई हजार रुपए की लालच देकर आरोपी से कछुए तस्करी कराई।

    फिलहाल आरोपी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 पंजीबद्ध किया गया है। STF मामले की जांच में जुटी है और आरोपी से विस्तार से पूछताछ की जा रही है। आज उसे माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।यह मामला वन्यजीव तस्करी और रेलवे सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है

  • BCCI अध्यक्ष चुनाव: गोविंद गोयल ने किया बड़ा दावा, चैंबर बनेगा व्यापारियों की आवाज पार्किंग से लॉजिस्टिक हब तक फोकस

    BCCI अध्यक्ष चुनाव: गोविंद गोयल ने किया बड़ा दावा, चैंबर बनेगा व्यापारियों की आवाज पार्किंग से लॉजिस्टिक हब तक फोकस



    भोपाल। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (BCCI) के 1 फरवरी को अध्यक्ष सहित चुनाव होंगे, जबकि 2 फरवरी को नतीजे घोषित होंगे। चुनाव प्रचार में अब तेजी आ गई है और उन्नति पैनल के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार गोविंद गोयल शहर के बाजारों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के बीच सक्रिय संपर्क में हैं।
    गोयल का दावा है कि उनकी अध्यक्षता में चैंबर सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि व्यापारियों की सशक्त आवाज बनेगा।

    गोयल ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर व्यापारियों को चैंबर की भविष्य की दिशा से अवगत कराया है। उनके संकल्प पत्र में पुराने शहर के बाजारों की पार्किंग समस्या का स्थायी समाधान प्रमुख रूप से शामिल है। इसके लिए मैकेनाइज्ड और मल्टीलेवल पार्किंग विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

    साथ ही गोयल ने भोपाल को राष्ट्रीय स्तर का लॉजिस्टिक हब बनाने, थोक फार्मा और मेडिकल ट्रेड का केंद्र विकसित करने, और बैरागढ़ को टेक्सटाइल हब के रूप में ब्रांडिंग करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए चैंबर को उनके लिए “लड़ने वाली संस्था” बनाया जाएगा।

    गोयल ने कहा कि वे पिछले पांच दशकों से व्यापार, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं और हमेशा व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए आगे बढ़ते रहे हैं। उन्होंने सराफा व्यापारियों की समस्याओं और ट्रांसपोर्टर्स पर लगे 123 करोड़ रुपये के जुर्माने जैसे मुद्दों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।

    उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर व्यापारियों ने उन्हें मौका दिया तो वह पूरे जोश और ऊर्जा के साथ काम करेंगे और व्यापारिक चुनौतियों के समाधान के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।

    उन्नति पैनल की पूरी टीम
    उन्नति पैनल में अध्यक्ष गोविंद गोयल, उपाध्यक्ष अरविंद जैन, आदित्य जैन मन्या, अमित गोयल, महामंत्री विनोद जैन (MPT), मंत्री अजय देवनानी, संजीव जैन, सुनील जैन, कोषाध्यक्ष प्रदीप सेवानी, सह कोषाध्यक्ष हेमंत अग्रवाल, अतिरिक्त कोषाध्यक्ष अमित कुमार बिंदल शामिल हैं।

    कार्यकारिणी के लिए दीपक दुबे, राजेश गुप्ता, अमित जैन, कृष्ण गोपाल मुखरैया, मनोज कुमार साहू, कमल भंडारी, सचिन जैन, तेजेंद्र चावला, अनिल मिश्रा, अखिलेश मित्तल, वात्सायन जैन, भरत गुप्ता, आदित्य सिंघई, सुलभ मित्तल, जवाहर कोटवानी, स्मिथ जैन और अभिषेक जैन उम्मीदवार हैं।

    पहली बार टेंडर वोटिंग, 22 वोट डाले गए
    इस बार चैंबर चुनाव में पहली बार टेंडर वोटिंग और उम्मीदवारों के फोटो वाले मतपत्र का प्रावधान किया गया है।

    मुख्य चुनाव अधिकारी एडवोकेट पी.सी. कोठारी ने बताया कि 1 फरवरी को अनुपलब्ध रहने वाले मतदाताओं के लिए टेंडर वोटिंग की सुविधा दी गई, जिसमें 22 वोट डाले गए।

    चुनाव के लिए लगभग 170 सदस्यों की टीम तैनात की गई है। वोटिंग और काउंटिंग पॉलीटेक्निक कॉलेज चौराहा स्थित मानस भवन में होगी। गोविंद गोयल के सामने पूर्व अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली भी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हैं, जिन्होंने अपना घोषणा पत्र जारी किया है।