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  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का किया पुण्य स्मरण, बताया प्रेरणापुंज

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का किया पुण्य स्मरण, बताया प्रेरणापुंज


    भोपाल । रविवार, 14 दिसम्बर 2025 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ और अत्यंत श्रद्धेय प्रचारक भगवत शरण माथुर जी को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में माथुर जी के बहुमूल्य योगदान और निस्वार्थ सेवाभाव को याद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का जीवन वास्तव में सेवा समर्पण और संगठनात्मक निष्ठा का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के हर पल को पूरी तन्मयता निष्ठा और लगन से समाज एवं संगठन की सेवा में समर्पित कर दिया।

    संगठन और समाज के लिए समर्पण

    डॉ. यादव ने आगे कहा कि माथुर जी ने न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सिद्धांतों को आत्मसात किया, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारकर एक आदर्श प्रस्तुत किया। उनका कार्यक्षेत्र व्यापक रहा और उन्होंने जहाँ भी कार्य किया वहाँ अपनी गहरी छाप छोड़ी। संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के रूप में उन्होंने लाखों कार्यकर्ताओं को राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में असंख्य युवाओं ने देश सेवा के मार्ग पर चलना सीखा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिस तरह माथुर जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी निष्ठा को अडिग रखा वह वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए एक महान सीख है। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए केवल लगन ही नहीं, बल्कि उस उद्देश्य के प्रति पूर्ण समर्पण भी आवश्यक है।

    प्रेरणापुंज बने रहेंगे श्रद्धेय माथुर जी
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माथुर जी को याद करते हुए कहा श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का जीवन हम सभी के लिए एक प्रेरणापुंज है। उनके द्वारा स्थापित सेवा के उच्च मानदंड हमें निरंतर स्मरण दिलाते रहेंगे कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन का अंतिम उद्देश्य जन कल्याण और राष्ट्र का उत्थान होना चाहिए।उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित और निस्वार्थ व्यक्तित्वों के कारण ही देश और समाज संगठनात्मक रूप से मजबूत होता है।
    डॉ. यादव ने माथुर जी के दिखाए गए मार्ग पर चलने और उनके मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।इस पुण्य स्मरण के अवसर पर, राज्य के कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने भी श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। उनका स्मरण केवल एक औपचारिकता नहीं है बल्कि देश के प्रति निःस्वार्थ सेवा के उनके आदर्शों को पुनर्जीवित करने का एक अवसर है।

  • MP में कड़ाके की ठंड इंदौर में पारा 4.5°C 10 साल में सबसे कम तापमान शीतलहर का असर

    MP में कड़ाके की ठंड इंदौर में पारा 4.5°C 10 साल में सबसे कम तापमान शीतलहर का असर


    इंदौर। मध्यप्रदेश में इस बार कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को प्रभावित किया है। बुधवार-गुरुवार की रात को तापमान फिर से 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर गया। खासकर इंदौर जो आम तौर पर ठंडे शहरों में आता है इस बार पचमढ़ी से भी ठंडा रहा। इंदौर में न्यूनतम तापमान 4.5°C दर्ज किया गया जो पिछले 10 सालों में सबसे कम तापमान है। वहीं पचमढ़ी में तापमान 4.8°C रहा। प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में भी ठंड का असर दिखा जैसे भोपाल 6.6°C ग्वालियर 9.2°C उज्जैन8.2°C और जबलपुर 8.5°C । मौसम विभाग के अनुसार अधिकांश शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे ही रहा।

    ठंड की वजह क्या है

    मौसम विभाग का कहना है कि जेट स्ट्रीम का प्रभाव इस ठंड का मुख्य कारण है। यह तेज हवा 12 किमी की ऊंचाई पर 222 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से बह रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में यह हवा ठंड को और बढ़ा रही है। इसके अलावा बर्फीली हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ का असर भी मध्यप्रदेश में ठंड की स्थिति को और तीव्र कर रहा है। बुधवार को भोपाल इंदौर राजगढ़ शाजापुर सीहोर और रायसेन में शीतलहर का असर देखा गया।

    पिछले कुछ वर्षों में सर्दी का रिकॉर्ड

    इस साल नवंबर में भी सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ा। भोपाल में नवंबर की शीतलहर ने 84 साल का रिकॉर्ड तोड़ा जबकि इंदौर में 25 सालों में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी। दिसंबर में भी यह सर्दी रिकॉर्ड तोड़ रही है। इंदौर में दिसंबर की सर्दी का पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड टूट गया है। इस साल के सर्दी के मौसम में सबसे कम तापमान 5.2°C दर्ज किया गया।

    दिसंबर में सर्दी का ट्रेंड

    मौसम विभाग के अनुसार दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड सबसे ज्यादा होती है। इन महीनों में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं जिससे तापमान में गिरावट आती है। इस बार ला नीना का प्रभाव भी सर्दी को बढ़ा रहा है। यह स्थिति ऐसे मौसम सिस्टम्स के कारण है जो पश्चिमी विक्षोभ के रूप में सक्रिय रहते हैं। इन सिस्टम्स के कारण मावठा यानी हल्की सर्दी की बारिश भी होती है जिससे ठंड और तेज हो जाती है।

    किस क्षेत्र में ज्यादा सर्दी रहेगी

    इस बार सर्दी का असर ग्वालियर चंबल और उज्जैन संभाग में अधिक रहेगा जहां बर्फीली हवाएं सीधे आ रही हैं। भोपाल सीहोर और विदिशा में भी ठंड का असर ज्यादा रहेगा। सागर संभाग निवाड़ी छतरपुर टीकमगढ़ पन्ना और रीवा में तेज ठंड रहेगी। जबलपुर और इंदौर के इलाके भी शीतलहर के असर में रहेंगे।

    ठंड का असर कब तक रहेगा

    मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर के अंत तक सर्दी का असर बना रहेगा। 20-22 दिन तक कोल्ड वेव चलने की संभावना है और जनवरी में यह ठंड और ज्यादा बढ़ सकती है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के सक्रिय रहने से सर्दी में और भी वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही बर्फीली हवाएं और ला नीना का असर इस ठंड को लंबा खींच सकता है।

    मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में सर्दी

    भोपाल में अब तक 3.1°C तापमान का रिकॉर्ड सबसे कम रहा है। 1966 में यह तापमान दर्ज किया गया था। पिछले कुछ वर्षों में भी दिसंबर में सर्दी ने अपने रिकॉर्ड तोड़े हैं। इंदौर में भी 25 सालों बाद इतनी कड़ी ठंड पड़ी है। मध्यप्रदेश में इस साल की ठंड ने आमजन को प्रभावित किया है और तापमान में लगातार गिरावट देखी जा रही है। जेट स्ट्रीम बर्फीली हवाएं और ला नीना जैसे मौसम प्रभाव ठंड को और तीव्र बना रहे हैं। इस ठंड का असर दिसंबर के अंत तक और बढ़ने की संभावना है जिससे ग्वालियर भोपाल उज्जैन सागर इंदौर जैसे इलाकों में ज्यादा ठंड पड़ने की संभावना है।

  • बंद हुई कंपनियों के वाहनों के लिए एचएसआरपी बनवाना हुआ मुश्किल भोपाल में दो हजार से अधिक वाहन मालिक परेशान

    बंद हुई कंपनियों के वाहनों के लिए एचएसआरपी बनवाना हुआ मुश्किल भोपाल में दो हजार से अधिक वाहन मालिक परेशान



    भोपाल ।
    भोपाल में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने की अनिवार्यता अब पुराने वाहन मालिकों के लिए समस्या बन गई है। यह समस्या खासतौर पर उन गाड़ियों के मालिकों के लिए है जो कंपनियां अब बंद हो चुकी हैं या जिन्होंने भारत में अपना कारोबार समेट लिया है। इन गाड़ियों पर एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाने का काम अब नहीं हो पा रहा है क्योंकि एचएसआरपी बनाने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों OEM और नंबर प्लेट निर्माता कंपनियों के बीच एक करार एग्रीमेंट होना जरूरी होता है ।
    ऐसी कंपनियों की गाड़ियों के मालिकों को अब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इन कंपनियों का कोई प्रतिनिधि या सिस्टम अब उपलब्ध नहीं है। इसका सीधा असर भोपाल में दो हजार से अधिक वाहन मालिकों पर पड़ रहा है जो अपने वाहन पर एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाने के लिए आरटीओ और डीलरों के चक्कर काट रहे हैं ।
    लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं निकल पा रहा है। यहां तक कि भोपाल में काम करने वाली प्रमुख नंबर प्लेट निर्माता कंपनियों जैसे रोजमाटा सेफ्टी प्राइवेट लिमिटेड एफटीए और सुजुकी इन कंपनियों की गाड़ियों के लिए एचएसआरपी बनाती हैं लेकिन जिन कंपनियों का अब अस्तित्व नहीं है उनके वाहन मालिकों के लिए यह प्रक्रिया ठप हो चुकी है।
    दरअसल एचएसआरपी व्यवस्था के तहत एक नंबर प्लेट बनाने वाली कंपनी को वाहन निर्माता कंपनी से एक एग्रीमेंट की आवश्यकता होती है जिससे पोर्टल पर डाटा प्रोसेस हो सके। अगर वाहन निर्माता कंपनी बंद हो गई है तो पोर्टल पर उनका डाटा प्रोसेस नहीं हो सकता और इस कारण उन गाड़ियों की नंबर प्लेट बनवाना संभव नहीं होता।
    इस प्रकार उन पुराने वाहनों के मालिकों के लिए जो बंद हो चुकी कंपनियों से संबंधित हैं एचएसआरपी नंबर प्लेट का मिलना एक बड़ा संकट बन गया है। कई वाहन मालिक महीनों से इस समस्या का समाधान ढूंढ़ रहे हैं लेकिन किसी भी तरह का ठोस समाधान सामने नहीं आ पा रहा है। ऐसे में वाहन मालिकों को विभिन्न अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
    इसके अलावा यह भी देखा गया है कि नए नियमों के तहत एचएसआरपी की अनिवार्यता बढ़ने से वाहन मालिकों की परेशानियां और भी बढ़ गई हैं खासकर उन गाड़ियों के मालिकों के लिए जिनकी कंपनियां अब बंद हो चुकी हैं। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक एचएसआरपी सिस्टम को लागू करने का उद्देश्य वाहनों की पहचान को सुनिश्चित करना और सुरक्षा बढ़ाना है लेकिन इस प्रक्रिया में पुराने वाहन मालिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

  • उत्तरी सर्द हवाओं से ठिठुरन8 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी

    उत्तरी सर्द हवाओं से ठिठुरन8 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में शीतलहर का दौर लगातार जारी है और उत्तरी बर्फीली हवाओं के प्रभाव से तापमान में गिरावट आ रही हैजिससे ठंड में और बढ़ोतरी हो रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में सर्दी का असर बढ़ने के साथ-साथ मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। मंगलवार को प्रदेश के 24 से अधिक शहरों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गयावहीं बुधवार को भी कई जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है।

    शीतलहर का प्रभावतापमान में गिरावट

    मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसारमंगलवार को शहडोल जिले में प्रदेश का सबसे कम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावाभोपालराजगढ़इंदौर और शाजापुर जैसे प्रमुख शहरों में भी शीतलहर का असर देखने को मिला। मौसम के शुष्क होने और उत्तरी बर्फीली हवाओं के चलते प्रदेश में ठिठुरन बनी हुई है। मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में शीतलहर के कारण लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए हैंखासकर सुबह और रात के समय में ठंड बहुत ज्यादा महसूस हो रही है।

    कई शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम

    मंगलवार को प्रदेश के 24 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से भी कम रहाजो ठंड की स्थिति को और गंभीर बना रहा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसारशीतलहर के कारण तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। इस दौरान दिन में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस नर्मदापुरम में रिकॉर्ड किया गयालेकिन रात के समय ठंडक बढ़ने से लोग परेशान हैं।

    आगे का मौसम तीन दिन तक शीतलहर का असर

    मौसम विभाग के मुताबिकअगले तीन दिनों तक शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है। बुधवार को भी प्रदेश के आठ प्रमुख जिलों में शीतलहर का प्रभाव रहेगा। इनमें भोपालविदिशासीहोरराजगढ़इंदौरशाजापुरजबलपुर और सिवनी शामिल हैं। इन जिलों में तापमान में और गिरावट आने की संभावना है और सर्द हवाओं के कारण लोगों को ठंड का सामना करना पड़ेगा।

    किसानों पर असर

    मध्य प्रदेश में किसानों के लिए यह मौसम फसलें बचाने के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शीतलहर का असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता हैखासकर वे फसलें जो ठंडी के प्रति संवेदनशील होती हैं। किसान अपनी फसलों की रक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठा सकते हैंजैसे कि फसल के ऊपर कंबल डालना या फिर शेड का इस्तेमाल करना।

    नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह

    मौसम विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी हैखासकर उन क्षेत्रों में जहां शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है। लोगों से यह भी अपील की गई है कि वे ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनें और खासकर सुबह और रात के समय बाहर जाने से बचें। सर्दी के मौसम में श्वसन संबंधित बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ जाता हैइसलिए स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतना जरूरी है। कुल मिलाकरमध्य प्रदेश में सर्दी का असर अगले कुछ दिनों तक बना रहने की संभावना है। प्रदेशवासियों को शीतलहर से बचने के लिए अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता है और साथ ही मौसम के मिजाज के अनुसार अपनी दिनचर्या को अनुकूलित करना होगा।

  • भोपाल में राष्ट्रीय बालरंग में विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों की हुई प्रस्तुति

    भोपाल में राष्ट्रीय बालरंग में विभिन्न राज्यों के लोक नृत्यों की हुई प्रस्तुति


    भोपाल । भोपाल के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय परिसर श्यामला हिल्स में शुक्रवार को राष्ट्रीय बालरंग की रंगारंग शुरूआत हुई। इसमें 19 राज्यों के बच्चों ने सहभागिता की।

    राष्ट्रीय बालरंग की शुरूआत में केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के बच्चों ने विकसित भारत 2047 की थीम पर लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। नृत्य में आंतकवाद के खिलाफ राष्ट्रीय एकता को दर्शाया गया। नृत्य में बच्चों ने कृषि, विज्ञान, उद्योग के साथ अन्य क्षेत्रों में हो रही प्रगति को आकर्षक ढ़ंग से प्रस्तुत किया। सामूहिक लोक नृत्य प्रस्तुति में लोक धुनों का बेहतर तरीके से उपयोग किया गया था। बालरंग में दूसरी प्रस्तुति आंध्रप्रदेश के स्कूली बच्चों ने लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में फसल कटाई के समय किसानों में उल्लास के क्षणों को संगीतमय प्रस्तुति के साथ प्रस्तुत किया गया।

    राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है बालरंग
    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक अमिताभ पाण्डेय ने बालरंग का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बालरंग समारोह के आयोजन में देशभर के बच्चों ने भोपाल की सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में विशिष्ट पहचान बनाई है। यह कार्यक्रम बच्चों में विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति को समझने का मौका देता है और इससे बच्चों में राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होती है। बालरंग में 19 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के करीब 375 बच्चे अपने राज्य के लोकरंगों की प्रस्तुतियाँ दे रहे है। इस समारोह में राजधानी भोपाल के करीब 2 हजार बच्चों ने विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत को देखा। समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग और मानव संग्रहालय के विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

    राष्ट्रीय एकता पर केन्द्रित है बालरंग
    भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है। राष्ट्रीय बालरंग समारोह में विभिन्न प्रांतों के स्कूल के छात्र-छात्राएँ शामिल होकर अपने कला-कौशल के उत्कृष्ट प्रदर्शन से अपने प्रदेश की वैभवशाली लोक संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं। विभिन्न प्रांतों के बच्चों के बीच संस्कृति का आदान-प्रदान होने से राष्ट्रीय एकता और सद्भाव की भावना मजबूत होती है।

  • मप्रः अब भोपाल में पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव

    मप्रः अब भोपाल में पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया 20 नवीन शिकारा नाव सेवा का शुभारंभ

    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजा भोज की नगरी भोपाल में लगभग एक हजार साल पहले बने बड़े तालाब में ‘शिकारा नाव’ सेवा का शुभारंभ ऐतिहासिक अवसर है। इन नवीन 20 शिकारों के माध्यम से पर्यटकों को कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील का आनंद, झीलों की नगरी भोपाल में ही मिल जाएगा।

    यह बात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को भोपाल के बोट क्लब पर ‘शिकारा नाव’ सेवा को झंडी दिखाने के बाद कही। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिकारों में पर्यटकों के लिए खान-पान एवं आरामदायक बैठक व्यवस्था की गई है। ये शिकारे प्रदेश के जल-पर्यटन (वॉटर टूरिज्म) को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलवाएंगे। प्रदेशवासी पर्यटन सेवा का लाभ उठाने के लिए आगे आएं। एम.पी. टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों को भी आगे बढ़ा रहा है। शिकारा सेवा का आनंद उठाते हुए पर्यटक स्वदेशी उत्पादों की खरीद भी कर पाएंगे। उन्हाेंने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य जीवों के पुनर्वास में भी इतिहास रचा है। आज अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को लेकर आपार संभावनाएं विद्यमान हैं। नर्मदा वैली सहित प्रदेश की बड़ी-बड़ी जल परियानाओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गतिविधियां को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पिछले एक साल में उज्जैन आने वाले पर्यटकों की संख्या 7 करोड़ के पार पहुंच गई।

    शिकारे की सैर का लिया आनंद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिकारों को झंडा दिखाने के बाद बड़े तालाब में शिकारे की सैर का आनंद लिया और उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गणमान्य नागरिकों ने शिकारा बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे एवं फलों का जायका लिया। साथ ही फ्लोटिंग बोट मार्केट से मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पारम्परिक कला बाघ और बटिक वस्त्रों, जैविक उत्पादों आदि की खरीदारी भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोट क्लब पर मौजूद छात्र-छात्राओं के साथ सेल्फी ली और अथितियों के साथ टेलीस्कोप से सूर्य के दर्शन किए। टेलीस्कोप की बोट क्लब पर व्यवस्था वैज्ञानिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल द्वारा की गई थी।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि राजधानी की इतनी बड़ी झील में शिकारा सेवा की शुरुआत बहुत आकर्षक है। इससे प्रदेश में पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

    देश के दिल भोपाल का विशेष दर्जा है : हरियाणा वि.स. अध्यक्ष हरविंदर

    शिकारा सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भोपाल सभी भारतवासियों के दिल के करीब है, यह शहर देशभर में अलग दर्जा हासिल किए हुए है। बड़े तालाब में शिकारे चलते देखने का दृश्य अविस्मरणीय है। वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेशवासियों को कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव भोपाल में होगा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव, डल झील के शिकारों के माध्यम से कश्मीर को मध्यप्रदेश ले आएं हैं। मध्यप्रदेश टूरिज्म की यह पहल सराहनीय है।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर शिकारों का संचालन किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सभी 20 शिकारों का निर्माण प्रदूषण रहित आधुनिक तकनीक से किया गया है। इनका निर्माण ‘फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन’ और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से हुआ है, जो जल के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक क्रिया नहीं करती। इससे बड़े तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूर्णतः सुरक्षित रहेगी। ये शिकारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा निर्मित किए गए हैं, जिनके द्वारा निर्मित शिकारे केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों द्वारा अत्यंत पसंद किए जा रहे हैं। भोपाल का बोट क्लब इन आकर्षक शिकारों के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। शिकारों पर नौकायन का आनंद लेने के साथ पर्यटक बर्ड वाचिंग, हैंडीक्रॉफ्ट प्रोडक्ट, स्थानीय व्यंजन, आर्गेनिक वेजिटेबल्स और फ्रूट्स आदि भी खरीद सकेंगे।

    इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, जिलाध्यक्ष रवींद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में पर्यटन प्रेमी उपस्थित थे।

  • श्योपुर: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने खुले जंगल में छोड़े तीन चीते

    श्योपुर: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने खुले जंगल में छोड़े तीन चीते

    श्योपुर। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस 4 दिसंबर के उपलक्ष्य में कूनो नेशनल पार्क पहुंचकर तीनों चीतों को खुले जंगल ने रिलीज किया। उन्होंने मादा चीता वीरा सहित उनके 9 माह के दो शावकों को जंगल में विचरण हेतु छोड़ा। श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में आयोजित चीता रिलीज कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन, श्योपुर जिले के प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, वन विभाग के राज्य मंत्री नागर सिंह चौहान, पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं केबिनेट मंत्री दर्जा तुरसनपाल बरिया, उपाध्याय राज्य मंत्री दर्जा सीताराम आदिवासी, अपर मुख्य सचिव वन विभाग अशोक वर्णवाल, कमिश्नर सुरेश कुमार, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा, पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल, शिवपुरी कलेक्टर रविन्द्र चौधरी, पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़, भाजपा जिला अध्यक्ष शशांक भूषण, पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय,बृजराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य महावीर सिंह सिसौदिया, कैलाश नारायण गुप्ता, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र जाट, सुजीत गर्ग, सीसीएफ उत्तम कुमार, डीएफओ कूनो आर थिरुकुराल, सामान्य केएस रंधा आदि अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कूनो नेशनल पार्क के पारोंद क्षेत्र में बनाए गए चीता रिलीज प्वाइंट से तीन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा गया, इसके साथ ही अब खुले जंगल में चीतों की संख्या 19 हो गई है।
    उल्लेखनीय हैं कि मध्यप्रदेश में 32 चीते है, मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 29 है, इसमें दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 8 चीतों सहित भारतीय भूमि कूनो नेशनल पार्क में जन्मे 21 शावक चीते शालिम हैं।
    पर्यटन के क्षेत्र में इंटरनेशनल स्तर पर पहचान बना रहा कूनो: सीएम
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने चीता रिलीज कार्यक्रम के उपरांत कहा कि श्योपुर जिले का कूनो नेशनल पार्क पर्यटन के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पहचाना बना रहा है, आज का दिन एतिहासिक दिन है, चीता दिवस पर सभी को बधाई देते हुए कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से भारत में चीतों की पुनर्जीवन की परियोजना सफल रही है, चीता प्रोजेक्ट के लिए हम उनके आभारी है, जो इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश की धरती को चूना, आज कूनो में 29 और गांधी सागर में 03 चीते है।
    कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के चलते रोजगार की नई संभावनाए उत्पन हुई है, चीता प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने वन विभाग के अमले को धन्यवाद भी दिया।
    चीता कैलेंडर का विमोचन
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस अवसर पर कूनो नेशनल पार्क के चीता कैलेंडर का विमोचन किया, इसके साथ ही शोविनियर शॉप का लोकार्पण भी किया गया। इसके अलावा क्लीनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री राइजिंग चीता इन कूनो नेशनल पार्क किताब का विमोचन भी किया गया। कूनो नेशनल पार्क के कैलेंडर के सभी पृष्ठों पर विभिन्न चीतों की तस्वीरों का प्रकाशन किया गया है।