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  • भोपाल में खौफनाक वारदात: गांव जाने से पत्नी ने किया इनकार तो पति ने गला दबाकर उतारा मौत के घाट; 14 महीने पहले ही हुई थी दोनों की दूसरी शादी

    भोपाल में खौफनाक वारदात: गांव जाने से पत्नी ने किया इनकार तो पति ने गला दबाकर उतारा मौत के घाट; 14 महीने पहले ही हुई थी दोनों की दूसरी शादी


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी के छोला मंदिर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ रहने के ठिकाने को लेकर हुए मामूली विवाद में एक पति इस कदर हैवान बन गया कि उसने अपनी ही पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी। वारदात की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने आरोपी पति को हिरासत में ले लिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
    शादी के 14 महीने और मौत का मंजर मृतक महिला और आरोपी पति हेमराज जो पेशे से सब्जी का ठेला लगाता है दोनों की यह दूसरी शादी थी। महज 14 महीने पहले ही दोनों एक-दूसरे के साथ वैवाहिक बंधन में बंधे थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले कुछ समय से दोनों के बीच रहने की जगह को लेकर अनबन चल रही थी। हेमराज चाहता था कि वे अपने पैतृक गांव में जाकर रहें जबकि पत्नी भोपाल शहर को छोड़कर गांव जाने के लिए तैयार नहीं थी।विवाद ने लिया हिंसा का रूप घटना वाले दिन इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई।
    विवाद इतना बढ़ा कि गुस्से में आकर हेमराज ने अपनी पत्नी का गला दबा दिया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी घबराया नहीं बल्कि उसने खुद ही पत्नी के मायके वालों को फोन कर घटना की जानकारी दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार सूचना मिलते ही छोला थाना पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पति को पकड़ लिया गया है। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जिसके बाद हत्या की धाराओं के तहत औपचारिक मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • भोपाल में SC-ST-OBC महासम्मेलन: 20 मांगों का ज्ञापन, सरकार पर आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर हमला

    भोपाल में SC-ST-OBC महासम्मेलन: 20 मांगों का ज्ञापन, सरकार पर आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर हमला



    भोपाल । भोपाल के भेल दशहरा मैदान में रविवार को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (SC-ST-OBC) के संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों लोग शामिल हुए। सम्मेलन में नेताओं ने सामाजिक न्याय, आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और न्याय व्यवस्था में समान अधिकार की मांग को लेकर सरकार पर तीखा विरोध जताया। मंच से कहा गया कि ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग आज भी शिक्षा, नौकरी, प्रशासन और न्याय व्यवस्था में बराबरी का अधिकार नहीं पा रहे हैं और संविधान में दिए गए अधिकारों का लाभ इन्हें पूरी तरह नहीं मिल रहा है।

    संयुक्त मोर्चा ने मुख्यमंत्री के नाम 20 मांगों का ज्ञापन देने की बात कही।

    इसमें मुख्य रूप से आरक्षण को जनसंख्या के अनुसार बढ़ाने, ओबीसी के 13% रोके गए पद तुरंत भरने, सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण, निजी और आउटसोर्स कामों में भी आरक्षण, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, सफाई कर्मचारियों को नियमित करने, न्याय व्यवस्था में ओबीसी-एससी-एसटी का उचित प्रतिनिधित्व, छात्रवृत्ति और छात्रावास बढ़ाने जैसी मांगें शामिल हैं। मोर्चा ने चेतावनी भी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन तेज किया जाएगा।

    महासम्मेलन के दौरान पूर्व विधायक और संपूर्ण बुंदेलखंड जन जागरण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरडी प्रजापति ने कथावाचकों धीरेंद्र शास्त्री और अनिरुद्ध आचार्य के विवादित बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रजापति ने कहा कि महिलाओं के बारे में “25 साल की लड़कियां” और “100 बार बेचो” जैसे अपमानजनक बयान देना किसी भी धर्म या शास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।

    उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विधवा महिला का सिंदूर हटना उसे “खाली प्लॉट” बना देता है और समाज को अपनी बहन-बेटियों को जमीन की तरह ‘खरीदा-बेचा’ जाना चाहिए।

    प्रजापति ने यह भी कहा कि कुछ कथावाचक और धर्मगुरु करोड़ों लोगों की भीड़ जुटाकर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो और धर्म-शास्त्र का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कड़ी निगरानी होनी चाहिए।

    अपने संबोधन में प्रजापति ने प्रधानमंत्री और मौजूदा व्यवस्था पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि मेहनत करने वाला वर्ग हाशिए पर है, जबकि धर्म और चंदे के सहारे प्रभावशाली लोग लाभ ले रहे हैं।

    उन्होंने आदिवासी समाज के मुद्दों पर जंगल कटाई और संसाधनों के दोहन को आदिवासी समुदाय के अस्तित्व के लिए खतरा बताया।

    महासम्मेलन में उपस्थित नेताओं ने यह भी कहा कि आदिवासी सलाहकार परिषद को मजबूत किया जाए और PESA कानून पूरी तरह लागू किया जाए। साथ ही डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाएं ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर हाईकोर्ट परिसर में स्थापित करने और बाबा साहब के अपमान से जुड़े मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई।

    इस तरह भोपाल में हुए इस महासम्मेलन ने सरकार पर आरक्षण, सामाजिक न्याय और संविधानिक अधिकारों के कार्यान्वयन को लेकर दबाव बढ़ा दिया है, साथ ही कथावाचकों के विवादित बयानों को लेकर सामाजिक स्तर पर भी नया राजनीतिक और सांस्कृतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

  • इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई

    इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई


    नई दिल्ली। इंदौर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें भोपाल का अबान शकील मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। पुलिस ने अबान को इंदौर में ड्रग डिलीवरी के इंतजार के दौरान गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अबान गोवा, इंदौर, मुंबई, दिल्ली और भोपाल जैसे कई बड़े शहरों में एमडी ड्रग की सप्लाई में सक्रिय था। इस गिरोह में दो युवतियां भी पैडलर के रूप में शामिल थीं, जिन्हें अबान और उसके साथी वैभव उर्फ बाबा शर्मा मोटे कमीशन और ड्रग की फ्री खुराक का लालच देकर तस्करी के काम में जोड़ते थे।
    पुलिस ने अबान की निशानदेही पर दो युवतियों और बाबा शर्मा को भी गिरफ्तार किया है।

    इंदौर पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि अबान और बाबा शर्मा अंतरराज्यीय एमडी तस्कर गिरोह के सदस्य हैं और यह गिरोह चार से पांच राज्यों में ड्रग तस्करी कर रहा था। जांच के दौरान यह तथ्य भी उजागर हुआ कि इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में आरोपी बाबा शर्मा, अलीशा मसीह और नेहा पार्टीज का आयोजन करते थे। इन पार्टियों में एंट्री फीस 10 से 15 हजार रुपए तक ली जाती थी और रईसजादों को ड्रग खपाने का काम किया जाता था।

    पुलिस ने बताया कि अबान अपनी पार्टीज के जरिए युवाओं को आकर्षित करता था और बाद में उन्हें एमडी की खुराक देकर पार्टी कल्चर के नाम पर नशे का आदी बनाता था। इसके बाद वही युवतियां और अन्य सदस्य ड्रग सप्लाई के लिए आगे काम करते थे। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से गोवा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, मुंबई सहित अन्य शहरों में पार्टीज आयोजित करते रहे हैं।

    अब तक इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हुई हैं।

    इंदौर पुलिस ने अबान के साथ कनाड़िया, मुंबई और देवास से गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी वैभव उर्फ बाबा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अबान और युवतियों के साथ मिलकर एमडी ड्रग्स की तस्करी करता था।

    पुलिस के मुताबिक, गिरोह गोवा सहित कई राज्यों के पब, बार और क्लबों में एमडी ड्रग की सप्लाई करता था और इसकी कीमत लगभग 10 हजार रुपए प्रति ग्राम थी। पुलिस अभी आरोपी से एमडी ड्रग्स के सोर्स के बारे में पूछताछ कर रही है और उसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी भी संभव है।

    इस बीच, अबान शकील का नाम ड्रग तस्करी में फंसने के बाद भोपाल डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (बीडीसीए) ने उसे अपनी प्रारंभिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है। बीडीसीए ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। अबान बीडीसीए का आजीवन सदस्य भी था। पुलिस ने बताया कि अबान कोहेफिजा इलाके में स्थित सैफिया कॉलेज मैदान के पास बने करोड़ों रुपए कीमत के बंगले में रहता था और उसके घर के पोर्च पर लग्जरी कारें खड़ी रहती थीं।
    इस मामले में इंदौर के कनाड़िया थाने में अपराध क्रमांक 37/2025 के तहत धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक आरोपियों से कुल 15.95 ग्राम एमडी ड्रग्स, बिना नंबर की इको स्पोर्ट्स कार, थार और एक एसयूवी जब्त की गई है। पुलिस का कहना है कि अबान थार जीप से भोपाल-इंदौर के पब और लाउंज में ड्रग सप्लाई करता था और उसके लिए लड़कियां भी पैडलर का काम करती थीं।

    इंदौर क्राइम ब्रांच और कनाड़िया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अबान की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच तेज कर दी है, जिससे जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है।

  • हे राम! गौमांस कांड पर सन्नाटा: न पुलिस के पास जवाब, न नगर निगम को खबर, स्लॉटर हाउस ट्रक से मिले मांस

    हे राम! गौमांस कांड पर सन्नाटा: न पुलिस के पास जवाब, न नगर निगम को खबर, स्लॉटर हाउस ट्रक से मिले मांस


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए गौमांस कांड ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि स्लॉटर हाउस के ट्रक में मिला गौमांस आखिर कहां से आया और जिन गायों का वध किया गया वे कहां से लाई गई थीं। न तो नगर निगम के पास इसका कोई ठोस जवाब है और न ही पुलिस इस दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखा पा रही है। मामला 17-18 दिसंबर की दरमियानी रात का है जब भोपाल के स्लॉटर हाउस से जुड़े एक ट्रक में गौमांस मिलने की पुष्टि हुई थी। इस खुलासे के बाद शहर में हड़कंप मच गया था और हिंदू संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने मामले में 24 दिसंबर को स्लॉटर हाउस संचालक असलम कुरैशी को गिरफ्तार जरूर किया लेकिन जांच की रफ्तार शुरुआत से ही सवालों के घेरे में है।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने असलम कुरैशी का रिमांड तक नहीं मांगा। न्यायालय में पेशी के दौरान पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड की मांग नहीं की जिसके चलते कोर्ट ने असलम को सीधे जेल भेज दिया। जानकारों का मानना है कि रिमांड न लेने से कई अहम जानकारियां सामने आने का मौका गंवा दिया गया जिससे पूरे मामले की तह तक पहुंचना अब और मुश्किल हो गया है। मध्यप्रदेश में गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 के तहत गौहत्या या गौमांस के परिवहन जैसे मामलों में सात साल तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे में जांच में हो रही ढिलाई सीधे तौर पर आरोपी को लाभ पहुंचा सकती है। अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि गायें किस जिले या किस राज्य से लाई गई थीं उनके परिवहन की अनुमति थी या नहीं और क्या इसमें किसी संगठित गिरोह की भूमिका है।

    नगर निगम की भूमिका भी इस पूरे मामले में संदेह के घेरे में आ गई है। स्लॉटर हाउस नगर निगम के अधीन आता है इसके बावजूद निगम की ओर से अब तक असलम कुरैशी के खिलाफ स्लॉटर हाउस के दुरुपयोग को लेकर कोई अलग से एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या निगम प्रशासन जानबूझकर मामले को हल्का रखने की कोशिश कर रहा है या फिर आंतरिक लापरवाही इसके पीछे कारण है। राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा गरमाता जा रहा है। विपक्ष सरकार और प्रशासन पर आरोप लगा रहा है कि जानबूझकर जांच को कमजोर किया जा रहा है जबकि सत्तापक्ष इसे कानून के तहत कार्रवाई का मामला बता रहा है। फिलहाल भोपाल में गौमांस कहां से आया कौन जिम्मेदार है और इसके पीछे कौन-सी बड़ी साजिश छिपी है इन सभी सवालों के जवाब अभी अधर में लटके हुए हैं।

  • गोपाल भार्गव के सरकारी बंगले में मरीजों का आशियाना: भोपाल में बना प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम

    गोपाल भार्गव के सरकारी बंगले में मरीजों का आशियाना: भोपाल में बना प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम


    भोपाल। भोपाल के 74 बंगला क्षेत्र का बंगला नंबर बी-1, जो सागर जिले के रहली से विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का सरकारी आवास है, अब मरीजों का ठिकाना बन गया है। यह बंगला पहले मंत्री के रूप में भार्गव को आवंटित हुआ था, लेकिन अब यह बीमार बच्चों और मरीजों के लिए विशेष सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
    बच्चों के लिए प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम
    गोपाल भार्गव की पुत्रवधु शिल्पी भार्गव ने इस बंगले में बीमार बच्चों, विशेषकर दिल से जुड़ी बीमारियों वाले बच्चों के लिए एक खास गेस्ट रूम तैयार कराया है। यह कमरे प्ले स्कूल की तरह सजाया गया है, जिसमें झूले, खिलौने और बच्चों के लिए विशेष बिस्तरों की व्यवस्था है। बच्चों का मनोबल बनाए रखने के लिए दीवारों पर रंग-बिरंगे कार्टून और आकर्षक पेंटिंग्स बनाई गई हैं।

    50 बिस्तरों के तीन हॉल
    बंगले में मरीजों के रहने के लिए तीन रेनोवेटेड हॉल बनाए गए हैं, जिनमें कुल 50 बिस्तरों की सुविधा है।

    मरीजों के आने-जाने, रुकने और इलाज के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। साथ ही एम्बुलेंस सेवा, भोजन और अस्पताल में इलाज कराने की पूरी सुविधा भी दी गई है।

    फ्री भोजन और खास मेन्यू
    बंगले में रहने वाले मरीजों के लिए सुबह नाश्ता, चाय और दो टाइम फ्री भोजन की सुविधा है। इस किचन को “गोपाल जी की रसोई” नाम दिया गया है। भोजन में मलाई कोफ्ता, मटर पनीर, पालक पनीर, बैगन भर्ता, आलू टमाटर, दाल मखनी, मूंग दाल, जीरा राइस, हलवा, खिचड़ी, गरम रोटियाँ, अचार, पापड़, चटनी और सलाद जैसी विविध और पौष्टिक डिशेज़ शामिल हैं।

    एम्बुलेंस सेवा और पंजीकरण
    हर रविवार को गढ़ाकोटा स्थित निज निवास गणनायक से तीन एम्बुलेंस भोपाल के लिए मरीजों को लेकर रवाना होती हैं।

    मरीजों का पंजीकरण गढ़ाकोटा में किया जाता है और भोपाल पहुंचते ही कर्मचारी आधार कार्ड, बीमारी की जानकारी और अस्पताल का नाम लेकर मरीजों को भर्ती कराते हैं।

    पूरी सुविधा निशुल्क
    गोपाल भार्गव के क्षेत्र के मरीजों को आने-जाने, रुकने, खाने और इलाज की पूरी सुविधा नि:शुल्क दी जाती है। इलाज आयुष्मान कार्ड या मुख्यमंत्री सहायता योजना के माध्यम से कराया जाता है। यदि इनसे मदद न मिले तो गोपाल भार्गव अपने निजी फंड से इलाज की व्यवस्था करते हैं।

    बच्चों के लिए अनुकूल वातावरण
    शिल्पी भार्गव ने यह व्यवस्था बच्चों के मनोबल को ध्यान में रखकर बनाई है। उनका उद्देश्य था कि जब बच्चे इलाज के लिए आएं तो उन्हें डर या असहजता महसूस न हो। इसलिए गेस्ट रूम को प्ले स्कूल जैसा सजाया गया और वातावरण को अनुकूल बनाया गया।

    लंबे समय से चल रही व्यवस्था
    अभिषेक भार्गव ने बताया कि यह व्यवस्था 2004 से शुरू है, जब गोपाल भार्गव मंत्री थे। उस समय भी मरीजों के आने-जाने, रहने, खाने और इलाज की सुविधा दी जाती थी। अब यह प्रकल्प निजी स्तर पर जारी है।

    जीवन और मृत्यु के लिए भी सुविधा
    गोपाल भार्गव का परिवार न केवल इलाज, बल्कि मृत्यु और अंतिम संस्कार की सुविधा भी प्रदान करता है। मरीज की मृत्यु होने पर शव घर तक पहुंचाने की व्यवस्था, बरमान घाट पर अस्थि विसर्जन और पंडित व नाई की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

    निजी खर्च और धर्म
    इस पूरे प्रकल्प में सरकारी मदद सीमित है। बंगले में साज-सज्जा और मरीजों की सुविधाएं निजी खर्च से ही संचालित होती हैं। गोपाल भार्गव का धर्म और ध्येय वाक्य है, “निरंतर कर्म” और यह दर्शन उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देता है।

    गोपाल भार्गव और उनके परिवार द्वारा स्थापित यह व्यवस्था न केवल बीमार बच्चों और मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है, बल्कि यह मानवता और सेवा का अद्वितीय उदाहरण भी पेश करती है।

  • सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा

    सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा


    नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रधान पीठ ने नई दिल्ली में बुधवार को इंदौर, भोपाल और राजस्थान के शहरों में पेयजल में सीवेज की मिलावट से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लिया। NGT ने मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। ट्रिब्यूनल ने इंदौर में गंदे पानी के कारण मौतों और भोपाल में पेयजल में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया मिलने के मामलों का हवाला दिया।
    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इंदौर में गंदे पानी के सेवन से मौतें हुई हैं, जबकि भोपाल के कुछ इलाकों में ट्यूबवेल से रिसाव के कारण पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। वहीं, राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर और अजमेर जैसे शहरों में पुरानी और जर्जर पाइपलाइन प्रणाली के चलते सीवेज के पानी का पेयजल में मिलना जारी है। ग्रेटर नोएडा में भी सीवेज मिला पानी पीने से कई लोग बीमार पड़े, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
    एनजीटी ने इन घटनाओं को गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला माना। पीठ ने संबंधित राज्य सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से स्पष्ट जवाब तलब किया है। कहा गया है कि यह मामला पर्यावरणीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, जिम्मेदारी तय करने और नागरिकों के सुरक्षित पेयजल के अधिकार की रक्षा के लिए विचाराधीन रहेगा।

    इसके अलावा, NGT ने मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामलों को भी संज्ञान में लिया। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और कोयला खदान परियोजनाओं के लिए 50 से 100 वर्ष पुराने लगभग 15 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं या काटे जाने का प्रस्ताव है। सिंगरौली, खंडवा, विदिशा, भोपाल और इंदौर में भारी संख्या में पेड़ों की कटाई से वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य वन विभागों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तक शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी।

  • ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज

    ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज


    भोपाल । भोपाल ट्रेन देरी से चलने पर यात्री जल्दबाजी में टिकट कैंसिल करने की गलती न करें क्योंकि ऐसा करने से उन्हें न तो पूरा रिफंड मिलेगा और न ही मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा स्वीकार होगा। भोपाल के एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने यह स्पष्ट किया कि यदि यात्री ट्रेन के लेट होने के कारण बिना रेलवे की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए टिकट कैंसिल कर देते हैं तो वे मुआवजे से हाथ धो सकते हैं। यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए एक अहम संदेश है जो ट्रेन के समय से लेट होने पर बिना सही प्रक्रिया का पालन किए जल्दबाजी में टिकट कैंसिल कर देते हैं।

    क्या है पूरा मामला

    भोपाल के एक निवासी ने सितंबर 2023 में भोपाल से नई दिल्ली जाने के लिए आंध्रप्रदेश एक्सप्रेस में AC-2 श्रेणी का टिकट बुक किया था। ट्रेन निर्धारित समय से करीब तीन घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंची। इस देरी के कारण यात्री की आगे की यात्रा भी प्रभावित हुई, क्योंकि उसे नई दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस का कनेक्शन छूट गया। इस स्थिति में यात्री ने दोनों यात्रा टिकट कैंसिल करवा दिए। लेकिन, जब उसे पूरा रिफंड नहीं मिला तो उसने रेलवे पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि सिर्फ ट्रेन की देरी के आधार पर टिकट कैंसिल करना और रिफंड की मांग करना सही नहीं है। यदि यात्री ने रेलवे द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है, तो उसे पूरा रिफंड और मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा नहीं मिल सकता।

    उपभोक्ता आयोग का फैसला

    उपभोक्ता आयोग ने यह कहा कि जब भी ट्रेन की देरी हो, तो यात्री को पहले रेलवे द्वारा दी जाने वाली अन्य सुविधाओं और विकल्पों का लाभ उठाना चाहिए, जैसे कि मुआवजे के लिए आवेदन करना या ट्रेनों का अन्य विकल्प तलाशना। सिर्फ टिकट कैंसिल करके और बिना प्रक्रिया का पालन किए मुआवजे का दावा करना गलत है और यह न केवल यात्रियों के लिए बल्कि रेलवे के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। यह फैसला यात्रियों को यह सिखाता है कि ट्रेन लेट होने पर घबराहट में कोई जल्दबाजी का कदम न उठाएं और सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का नुकसान न हो।

  • इंदौर पानी त्रासदी: सिर्फ ‘ट्रेलर’, देश के छह बड़े शहरों में भी दूषित पानी से बढ़ रही स्वास्थ्य आपातस्थिति

    इंदौर पानी त्रासदी: सिर्फ ‘ट्रेलर’, देश के छह बड़े शहरों में भी दूषित पानी से बढ़ रही स्वास्थ्य आपातस्थिति


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत और कई गंभीर बीमारियों की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह मामला सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी दूषित पानी पीने से नागरिकों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इंदौर की यह त्रासदी एक चेतावनी की तरह है, जिससे पता चलता है कि कई शहरों में पानी की गुणवत्ता पर नियंत्रण की व्यवस्था गंभीर रूप से कमजोर है।

    इंदौर हादसे की जांच में सामने आया कि देश के सात बड़े शहर पानी की गुणवत्ता मानकों पर फेल हो गए हैं।

    इन शहरों में गुजरात का गांधीनगर, तेलंगाना का हैदराबाद, उत्तर प्रदेश का ग्रेटर नोएडा, मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल, और हरियाणा के रोहतक और झज्जर शामिल हैं। गांधीनगर में दूषित पानी के कारण टाइफाइड के 108 मामले दर्ज किए गए, और दो लोगों की मौत भी हुई। हैदराबाद में छह सैंपल में से चार में सीवेज, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और औद्योगिक वेस्ट पाए गए।
     इसके चलते नगर निगम ने जमीन के नीचे के पानी पर रोक लगा दी है।

    दूषित पानी के सेवन से आम लोगों में दस्त, उल्टी, हैजा, टाइफाइड और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां देखी जा रही हैं।

    कुछ मामलों में गिलियन बैरे सिंड्रोम जैसे न्यूरोलॉजिकल रोग भी सामने आए हैं। इसके मुख्य लक्षणों में लगातार दस्त और उल्टी, तेज बुखार और कमजोरी, चक्कर आना या पेशाब कम होना, शरीर या आंखों में पीलापन और बच्चों एवं बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन के संकेत शामिल हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इन शहरों में पानी की शुद्धता पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो यह केवल स्वास्थ्य आपात स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक संकट भी पैदा कर सकता है। नागरिकों को साफ और सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम और राज्य सरकारों की ओर से तत्काल कदम उठाना बेहद जरूरी है।

    इंदौर की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि दूषित पानी सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों में स्वास्थ्य सुरक्षा की गंभीर चुनौती बन गई है। इसलिए प्रशासन को अब निष्क्रियता छोड़कर, सख्त निरीक्षण और त्वरित सुधार लागू करना होगा, ताकि लोगों की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।

  • भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली, CM मोहन यादव ने किसानों को हरी झंडी दिखाकर किया ‘कृषक कल्याण वर्ष’ का शुभारंभ

    भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली, CM मोहन यादव ने किसानों को हरी झंडी दिखाकर किया ‘कृषक कल्याण वर्ष’ का शुभारंभ




    भोपाल।
    भोपाल में रविवार का दिन किसानों के नाम रहा, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोकता बायपास स्थित आरटीओ कार्यालय के पास से 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री खुद ट्रैक्टर की स्टेयरिंग संभालते नजर आए और रैली में शामिल होकर किसानों के साथ कदम से कदम मिलाया। उनके साथ कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और विधायक रामेश्वर शर्मा भी ट्रैक्टर पर सवार रहे। सैकड़ों ट्रैक्टरों की कतार और किसानों का उत्साह राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही दृश्य रच रहा था।

    रैली को रवाना करने से पहले कोकता बायपास क्षेत्र ‘बोल बम’ और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए इतिहास और आस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन आज वही सोमनाथ मंदिर फिर से अपने वैभव में भोलेनाथ के जयकारों से गूंज रहा है।

    उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके संकल्प से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। साथ ही मुख्यमंत्री ने अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण को 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया।

    ट्रैक्टर रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह पिछले वर्ष पूरे प्रदेश में ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ मनाया गया था, उसी तर्ज पर अब सरकार ने पूरे साल को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। यह केवल एक दिन या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सालभर किसानों के हित में योजनाबद्ध और निरंतर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि इस वर्ष के अंत तक किसानों की आय, खेती की लागत और उत्पादन से जुड़े कई ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि कृषक कल्याण वर्ष केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। अब प्रदेश के 16 विभाग मिलकर किसानों के लिए काम करेंगे, ताकि खेती से जुड़े हर पहलू को मजबूत किया जा सके।

    उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर इस समय लगभग 16 प्रतिशत की गति से बढ़ रही है और इसे और आगे ले जाने के लिए किसानों की आय बढ़ाने तथा लागत घटाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रैली के दौरान कहा कि हेलिकॉप्टर से आते समय जहां नजर गई, वहां ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिखाई दे रहे थे। यह तो सिर्फ झांकी है, आने वाले समय में किसान कल्याण की तस्वीर और भी बड़ी होगी।

    रैली के बाद मुख्यमंत्री जंबूरी मैदान पहुंचे, जहां ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों को सरकार की आगामी योजनाओं, कार्यक्रमों और कार्ययोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य खेती को केवल परंपरागत कार्य न मानकर उसे लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित रोजगार का माध्यम बनाना है।

    कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत सरकार का विशेष फोकस उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर रहेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी को एकीकृत करते हुए जिला स्तरीय क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाओं, उच्च उत्पादकता और कृषि प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। एग्री-टेक, ड्रोन सेवाएं, एफपीओ प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि और समृद्ध ग्रामीण क्षेत्र मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसी कारण राज्य सरकार लगातार कृषि बजट में बढ़ोतरी कर रही है। समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी, सोयाबीन उत्पादकों के लिए भावांतर योजना, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना और रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना जैसी कई योजनाएं पहले से संचालित हैं।

    कृषक कल्याण वर्ष-2026 के माध्यम से इन सभी योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा।

    इस भव्य ट्रैक्टर रैली और कार्यक्रम के चलते भोपाल की कई सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया। कोकता बायपास, मिसरोद-सलैया क्षेत्र, खजूरी कला, पटेल नगर चौराहा, प्रेस्टीज कॉलेज के आसपास और जंबूरी मैदान तक जाने वाले मार्गों पर विशेष ट्रैफिक प्लान लागू रहा। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।

    कुल मिलाकर, 1101 ट्रैक्टरों की यह रैली केवल एक शक्ति प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों को केंद्र में रखकर विकास की नई कहानी लिखने जा रही है। ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के जरिए सरकार का लक्ष्य अन्नदाता के सम्मान, आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।

  • भोपाल में 30 हजार किसान निकालेंगे ट्रैक्टर रैली, ट्रैफिक डायवर्शन और जाम से बचने के लिए देखें रूट प्लान

    भोपाल में 30 हजार किसान निकालेंगे ट्रैक्टर रैली, ट्रैफिक डायवर्शन और जाम से बचने के लिए देखें रूट प्लान


    भोपाल । आज भोपाल में कृषि कल्याण वर्ष का शुभारंभ होने जा रहा है, जिसमें 30 हजार से अधिक किसान भाग लेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन जम्बूरी मैदान में होगा, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत करेंगे। इस आयोजन में 1101 ट्रैक्टरों और 800 से 900 बसों के माध्यम से किसान प्रदेशभर से पहुंचेंगे। ऐसे में राजधानी भोपाल में भारी ट्रैफिक और मार्गों पर बदलाव होने की संभावना है, जिससे जाम और यात्रा में परेशानी हो सकती है।

    ट्रैफिक डायवर्शन की जानकारी

    जम्बूरी मैदान जाने वाले मार्गों पर भारी वाहनों की एंट्री रोक दी गई है, और कई मुख्य सड़कें डायवर्ट की जाएंगी। खासतौर पर उन रास्तों पर ज्यादा दबाव रहेगा, जो ट्रैक्टर रैली और किसानों के वाहन ले जा रहे होंगे। इसके अलावा, परीक्षार्थियों के लिए विशेष मार्ग व्यवस्था की गई है, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी परीक्षा में शामिल हो सकें।

    मुख्य रूट डायवर्शन और वैकल्पिक मार्ग

    भोपाल मिसरोद-सलैया क्षेत्र 11 मील बायपास रोड, खजूरी कला, पटेल नगर चौराहा, प्रेस्टीज कॉलेज के सामने लाइन अप। भोपाल फंदा ब्लॉक-बैरासिया रोड खजूरी सड़क, मोबारकपुर बायपास, लांबाखेड़ा बायपास चौराहा, चोपड़ा कला बायपास चौराहा, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सामने लाइन अप। रायसेन और विदिशा से आने वाले ट्रैक्टर संबंधित मार्गों से होते हुए प्रेस्टीज कॉलेज के सामने लाइन अप करेंगे।

    जम्बूरी मैदान पार्किंग

    जन सामान्य जीप/कार/दो पहिया वाहन गोविन्दपुरा टर्निंग, महात्मा गांधी चौराहा, सेंट जेवियर स्कूल के सामने। वीआईपी वाहन: गोविन्दपुरा टर्निंग, महात्मा गांधी चौराहा, अयप्पा मंदिर, गैस गोदाम, सेंट जेवियर स्कूल के सामने। मीडिया वाहन गोविन्दपुरा टर्निंग, महात्मा गांधी चौराहा, जम्बूरी मैदान पानी की टंकी के पास।

    ऑप्शनल मार्ग

    बोर्ड ऑफिस, गोविन्दपुरा टर्निंग, अन्नानगर, सद्भावना चौराहा, महात्मा गांधी चौराहा, सेंट जेवियर स्कूल, अवधपुरी तिराहा तक मार्ग पर अत्यधिक यातायात रहेगा। इसके अलावा, पटेल नगर बायपास, आनंद नगर, रत्नागिरी तिराहा, पिपलानी पेट्रोल पंप तक मार्ग पर भी भारी दबाव रहेगा।

    विशेष मार्ग व्यवस्था
    परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए पिपलानी चौराहा से पटेल नगर चौराहा तक विशेष मार्ग व्यवस्था की गई है। वहीं, भारी वाहनों के लिए भोपाल-बाईपास खजूरी सड़क से 11 मील तक पर डायवर्जन लागू होगा।

    किसान रैली में शामिल होने वाले जिलों की सूची

    भोपाल से 601, विदिशा से 250 और रायसेन से 250 ट्रैक्टर रैली में शामिल होंगे। इसके अलावा, द्वितीय कार्यक्रम सभा और कृषि कल्याण वर्ष के शुभारंभ में 30,000 किसान भाग लेंगे। इसमें भोपाल से 12,000, सिहोर और रायसेन से 6,000-6,000, विदिशा से 4,000, राजगढ़ और नर्मदापुरम से 1,000-1,000 किसान शामिल होंगे।