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  • मध्य प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत: ट्रांसफर प्रक्रिया में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, वैकल्पिक दस्तावेज होंगे मान्य

    मध्य प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत: ट्रांसफर प्रक्रिया में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, वैकल्पिक दस्तावेज होंगे मान्य

    मध्य प्रदेश: के शिक्षकों को स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया के बीच बड़ी राहत मिली है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया में विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए शिक्षकों को वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी है। इस निर्णय से उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी जो मैरिज सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं होने के कारण आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।

    राज्य में चल रही ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों ने शिकायत की थी कि वर्षों पहले विवाह होने के बावजूद उनके पास विवाह प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे निर्धारित श्रेणी के अंतर्गत आवेदन करने से वंचित हो रहे थे। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठनों ने लगातार विभाग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए नियमों में व्यावहारिक बदलाव की मांग की थी।

    शिक्षक संगठनों का तर्क था कि कई शिक्षकों का विवाह दो दशक या उससे भी पहले हुआ है, जब विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया वर्तमान की तरह व्यापक नहीं थी। ऐसे मामलों में विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता उन्हें अनावश्यक परेशानी में डाल रही थी। विभाग ने इन आपत्तियों पर विचार करते हुए अब वैकल्पिक दस्तावेजों को स्वीकार करने का निर्णय लिया है।

    नए निर्देशों के अनुसार शिक्षक विवाह प्रमाण पत्र के स्थान पर लोकसेवक समग्र कार्ड, सेवा पुस्तिका का सत्यापित पृष्ठ अथवा अन्य मान्य दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर वैवाहिक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। विभाग के इस कदम को शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

    गौरतलब है कि ऑनलाइन ट्रांसफर आवेदन की समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले यह राहत दी गई है। इससे उन शिक्षकों को विशेष लाभ मिलेगा जो दस्तावेजी बाधाओं के कारण आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्थानांतरण सूची 27 या 28 जून तक जारी की जा सकती है। ऐसे में अंतिम चरण में किया गया यह बदलाव बड़ी संख्या में आवेदकों को प्रक्रिया में शामिल रहने का अवसर देगा।

    हालांकि सभी वर्गों के शिक्षकों की समस्याओं का समाधान अभी नहीं हो पाया है। विशेष रूप से दिव्यांग शिक्षकों के बीच कुछ नियमों को लेकर असंतोष बना हुआ है। दिव्यांगता प्रमाण पत्र के संबंध में निर्धारित शर्तों को लेकर कई शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शासन के नियमों के अनुसार उनके पास वैध प्रमाण पत्र मौजूद हैं, फिर भी एक वर्ष के भीतर जारी प्रमाण पत्र की मांग के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    शिक्षा विभाग का यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यावहारिक और शिक्षक हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल दस्तावेज संबंधी बाधाएं कम होंगी, बल्कि स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और भागीदारी भी बढ़ेगी। अब शिक्षकों की निगाहें स्थानांतरण सूची के प्रकाशन और लंबित मांगों पर विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

  • मुख्यमंत्री पर आरोपों को बीजेपी ने बताया बेबुनियाद, हेमंत खंडेलवाल बोले- विकास से घबराकर कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार की राजनीति

    मुख्यमंत्री पर आरोपों को बीजेपी ने बताया बेबुनियाद, हेमंत खंडेलवाल बोले- विकास से घबराकर कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार की राजनीति

    मध्य प्रदेश:  की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेकर लगाए गए आरोपों पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रही है, लेकिन प्रदेश की जनता ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं जिससे जनता के बीच गलत संदेश पहुंचे। उनके अनुसार आरोपों में प्रस्तुत की गई जानकारी वास्तविक दस्तावेजों और रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती।

    खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की भूमि संबंधी जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में चुनावी नामांकन के दौरान जो संपत्ति विवरण प्रस्तुत किया गया था, उसमें और वर्तमान स्थिति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम दर्ज भूमि का क्षेत्रफल पहले जैसा ही है और उनकी पत्नी के नाम दर्ज कृषि भूमि में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। पार्टी का दावा है कि आरोपों के माध्यम से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने उन व्यावसायिक संस्थाओं और भूमि स्वामित्व से जुड़े आरोपों का भी खंडन किया जिनका उल्लेख राजनीतिक विवाद में किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों और संपत्तियों का नाम लेकर आरोप लगाए गए हैं, उनके संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड सार्वजनिक हैं और उनमें किसी प्रकार की अनियमितता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री संबंधित एक कंपनी के निदेशक पद से वर्षों पहले अलग हो चुके थे और उसके बाद की गतिविधियों से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

    मुख्यमंत्री के परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी भाजपा ने आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज भूमि और संपत्तियों के संबंध में जो दावे किए गए हैं, वे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। साथ ही जिन रिश्तेदारों का उल्लेख आरोपों में किया गया है, उनका स्वतंत्र अस्तित्व है और उनके कार्यों को मुख्यमंत्री या उनके परिवार से जोड़ना उचित नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित पक्ष स्वयं भी कानूनी और सार्वजनिक स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।

    भाजपा ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश सरकार विकास, निवेश, उद्योग, कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है, जिससे विपक्ष असहज महसूस कर रहा है। इसी कारण ध्यान भटकाने के लिए आरोपों की राजनीति की जा रही है।

    खंडेलवाल ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस का रवैया हमेशा नकारात्मक रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब-जब प्रदेश में पिछड़े वर्ग से आने वाले नेताओं ने नेतृत्व संभाला, तब-तब उन्हें राजनीतिक रूप से घेरने और कमजोर करने की कोशिश की गई। भाजपा का आरोप है कि वर्तमान मुख्यमंत्री के खिलाफ भी इसी मानसिकता के तहत अभियान चलाया जा रहा है।

    प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा जहां आरोपों को निराधार बता रही है, वहीं विपक्ष अपने दावों पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

  • भोपाल में JEE अभ्यर्थी रहस्यमय परिस्थितियों में लापता, मोबाइल और जरूरी सामान घर पर छोड़कर निकला, पुलिस की तलाश जारी

    भोपाल में JEE अभ्यर्थी रहस्यमय परिस्थितियों में लापता, मोबाइल और जरूरी सामान घर पर छोड़कर निकला, पुलिस की तलाश जारी

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र के अचानक लापता हो जाने का मामला सामने आया है। छात्र के रहस्यमय परिस्थितियों में घर से गायब होने के बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और छात्र की तलाश के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

    जानकारी के अनुसार लापता छात्र कृष धाकड़ पिछले करीब दो वर्षों से भोपाल में रहकर संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) की तैयारी कर रहा था। वह ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कर रहा था और शहर के कोलार रोड क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहा था। परिवार के अनुसार उसकी पढ़ाई नियमित रूप से चल रही थी और हाल के दिनों में किसी विशेष परेशानी या विवाद की जानकारी सामने नहीं आई थी।

    परिजनों का कहना है कि बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात लगभग तीन बजे के आसपास कृष घर से बाहर निकल गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि वह अपना मोबाइल फोन, निजी दस्तावेज और अन्य आवश्यक सामान घर पर ही छोड़ गया। सुबह जब परिवार के सदस्यों ने उसे घर में नहीं पाया तो पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई।

    छात्र के अचानक लापता होने की खबर मिलने के बाद स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने छात्र के कमरे, उसके सामान और आसपास के क्षेत्र की जानकारी एकत्रित की। चूंकि छात्र का मोबाइल फोन घर पर ही मिला है, इसलिए उसकी लोकेशन या कॉल रिकॉर्ड के आधार पर तत्काल कोई सुराग नहीं मिल सका। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब अन्य तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

    पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों का प्रयास है कि यह पता लगाया जा सके कि छात्र घर से निकलने के बाद किस दिशा में गया और उसके बाद उसकी गतिविधियां क्या रहीं। इसके अलावा आसपास के इलाकों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की भी जांच की जा रही है ताकि छात्र की मौजूदगी से जुड़ा कोई सुराग मिल सके।

    परिवार के सदस्य लगातार छात्र के परिचितों, मित्रों और रिश्तेदारों से संपर्क कर रहे हैं। हालांकि अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है जिससे उसके संभावित ठिकाने का पता चल सके। छात्र के अचानक बिना मोबाइल और आवश्यक सामान के घर छोड़ने की घटना ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यही कारण है कि पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों पर अक्सर शैक्षणिक दबाव और भविष्य को लेकर मानसिक तनाव भी रहता है। हालांकि वर्तमान मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि जांच प्रारंभिक चरण में है और पुलिस सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी व्यक्ति को छात्र के संबंध में कोई जानकारी मिलती है या वह कहीं दिखाई देता है तो तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचित करने का अनुरोध किया गया है। प्रशासन का कहना है कि छात्र की सुरक्षित बरामदगी उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए सभी आवश्यक संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।

    फिलहाल परिवार छात्र के सकुशल लौटने की उम्मीद लगाए हुए है, जबकि पुलिस जांच को लगातार आगे बढ़ा रही है। मामले से जुड़े हर संभावित सुराग की जांच की जा रही है और अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही छात्र के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकेगी।

  • भोपाल से लापता 6 साल का मासूम मथुरा में मिला सुरक्षित, अकेले ट्रेन में पहुंचा, 100 से ज्यादा जवानों की मेहनत लाई रंग

    भोपाल से लापता 6 साल का मासूम मथुरा में मिला सुरक्षित, अकेले ट्रेन में पहुंचा, 100 से ज्यादा जवानों की मेहनत लाई रंग

    मध्य प्रदेश।  की राजधानी भोपाल से लापता हुए छह वर्षीय मासूम अंश मैना के सुरक्षित मिलने से उसके परिवार के साथ-साथ पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। चार दिनों तक चली व्यापक तलाश और विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयासों के बाद बच्चे को उत्तर प्रदेश के मथुरा से सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया कि समय पर की गई सतर्कता और समन्वित कार्रवाई किसी भी चुनौतीपूर्ण मामले में सकारात्मक परिणाम दे सकती है।

    जानकारी के अनुसार अंश अपनी मां के साथ भोपाल के रॉयल मार्केट क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल आया था। उसकी मां का उपचार चल रहा था। मंगलवार सुबह अस्पताल परिसर से बाहर निकलने के बाद बच्चा वापस नहीं लौटा, जिसके बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई। काफी तलाश के बाद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

    शिकायत दर्ज होते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी। अस्पताल और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। जांच में बच्चा एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के साथ दिखाई दिया। पुलिस ने उस व्यक्ति तक पहुंचकर पूछताछ की तो पता चला कि दोनों कुछ दूरी तक साथ रहे थे, लेकिन बाद में अलग हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने बच्चे की गतिविधियों का क्रमवार पता लगाने के लिए शहरभर के कैमरों और स्थानीय सूचनाओं का सहारा लिया।

    जांच में सामने आया कि अंश नवबहार सब्जी मंडी क्षेत्र से अलग होने के बाद अकेले ही आगे बढ़ता रहा। वह शहर के कई व्यस्त इलाकों से गुजरते हुए करीब चार किलोमीटर तक पैदल चलता रहा। इसके बाद वह भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन पहुंच गया। स्टेशन के निगरानी कैमरों की फुटेज में बच्चा अकेले प्लेटफॉर्म पर घूमते और बाद में पातालकोट एक्सप्रेस में सवार होते हुए दिखाई दिया।

    जैसे ही पुलिस को यह महत्वपूर्ण सुराग मिला, रेलवे अधिकारियों और रेलवे सुरक्षा बल को तत्काल अलर्ट जारी किया गया। ट्रेन के संभावित मार्ग और स्टेशनों की जानकारी साझा की गई ताकि बच्चे को जल्द से जल्द सुरक्षित ढूंढा जा सके। विभिन्न स्तरों पर समन्वय स्थापित करते हुए रेलवे नेटवर्क के माध्यम से लगातार निगरानी रखी गई।

    इसी दौरान मथुरा रेलवे स्टेशन पर तैनात रेलवे सुरक्षा बल के जवानों की नजर ट्रेन में अकेले बैठे एक बच्चे पर पड़ी। पूछताछ और प्रारंभिक सत्यापन के बाद यह पुष्टि हुई कि वह भोपाल से लापता अंश ही है। जवानों ने उसे तत्काल सुरक्षा में लिया और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं शुरू की गईं।

    भोपाल पुलिस की एक टीम मथुरा पहुंची और स्थानीय बाल कल्याण अधिकारियों के सहयोग से बच्चे को अपने संरक्षण में लेकर वापस भोपाल लाई। अधिकारियों के अनुसार बच्चे के साथ किसी प्रकार की आपराधिक घटना या अपहरण जैसी स्थिति के संकेत नहीं मिले हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि वह भटकते हुए रेलवे स्टेशन पहुंच गया था और अनजाने में ट्रेन में सवार हो गया।

    इस पूरे अभियान में शहर के कई थानों की पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल और अन्य संबंधित एजेंसियों के 100 से अधिक अधिकारियों एवं जवानों ने भाग लिया। लगातार चार दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद बच्चे का सुरक्षित मिलना न केवल परिवार के लिए राहत भरी खबर है, बल्कि यह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता तथा समन्वित कार्यप्रणाली का भी महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

  • भोपाल में दर्दनाक सड़क हादसा: आयशर की टक्कर से पेट्रोल पंप कर्मचारी की मौत, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

    भोपाल में दर्दनाक सड़क हादसा: आयशर की टक्कर से पेट्रोल पंप कर्मचारी की मौत, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया


    भोपाल । राजधानी भोपाल के खजूरी थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नाइट ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे एक पेट्रोल पंप कर्मचारी की आयशर वाहन की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 30 वर्षीय नितेश यादव पुत्र अशोक यादव निवासी आमना खेड़ी के रूप में हुई है। नितेश भैंसा खेड़ी स्थित एक पेट्रोल पंप पर सेल्समैन के पद पर कार्यरत था। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात वह अपनी नियमित ड्यूटी पर था। ड्यूटी समाप्त होने के बाद वह सुबह बाइक से अपने घर लौट रहा था।

    सुबह करीब 10:15 बजे जब नितेश खजूरी सड़क क्षेत्र के पास एक मोड़ से गुजर रहा था, तभी सामने से आ रहे एक आयशर वाहन ने उसकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नितेश गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के बाद आयशर चालक वाहन लेकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। इसके बाद चालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सूचना मिलते ही खजूरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर थाने में खड़ा कर लिया है।

    प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    नितेश यादव की निजी जिंदगी भी जिम्मेदारियों से भरी हुई थी। करीब छह वर्ष पहले उसकी शादी हुई थी और वह दो बच्चों का पिता था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उसी के कंधों पर थी। उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पोस्टमॉर्टम के बाद गुरुवार दोपहर शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

    अस्पताल की मर्चुरी के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार इस हादसे को लेकर स्तब्ध हैं। मोहल्ले और परिचितों में भी घटना को लेकर शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग के गंभीर खतरे की याद दिलाता है। एक पल की असावधानी ने न केवल एक युवक की जान ले ली, बल्कि उसके परिवार को जीवनभर का दुख दे दिया।

  • मनुआभान टेकरी कांड में बड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को उम्रकैद, डीएनए साक्ष्यों ने दिलाई सजा

    मनुआभान टेकरी कांड में बड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को उम्रकैद, डीएनए साक्ष्यों ने दिलाई सजा


    भोपाल । भोपाल के बहुचर्चित मनुआभान टेकरी दुष्कर्म एवं हत्या कांड में आखिरकार न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने मामले के दोनों आरोपियों अविनाश साहू और जस्टिन राज को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 8-8 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले के साथ वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले का महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय समाप्त हुआ है।

    यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था और उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था। घटना 30 अप्रैल 2019 की है, जब आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा अपनी 16 वर्षीय बुआ और उसके मित्र अविनाश साहू के साथ मनुआभान टेकरी घूमने गई थी। आरोप है कि टेकरी पर दोनों आरोपियों ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और फिर पहचान छिपाने के उद्देश्य से पत्थर से उसका सिर कुचलकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को लगभग 100 फीट गहरी खाई में स्थित एक गुफा में छिपा दिया था ताकि किसी को घटना की जानकारी न मिल सके।

    घटना के बाद आरोपी खुद को निर्दोष साबित करने के लिए छात्रा की तलाश का नाटक करते रहे। जब बालिका के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली तो कोहेफिजा थाना पुलिस ने पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन शुरुआत में कोई सफलता नहीं मिली। जांच के दौरान पुलिस को अविनाश साहू के बयानों में लगातार विरोधाभास दिखाई दिया। संदेह गहराने पर पुलिस ने उससे गहन पूछताछ की, जिसके बाद उसने पूरी वारदात कबूल कर ली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने खाई में छिपाया गया छात्रा का शव बरामद किया।

    जांच के दौरान पुलिस ने डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को एकत्रित किया। पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म, हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की सिफारिश भी की थी।

    हालांकि बाद में सीबीआई ने पुलिस की डीएनए रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दोनों आरोपियों को क्लीन चिट देने का प्रयास किया और अदालत में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। लेकिन अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और उससे विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद मामले का ट्रायल जारी रहा और उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा वैज्ञानिक जांच रिपोर्टों का गहन परीक्षण किया गया।

    लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा है। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों की संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं। इसी आधार पर दोनों दोषियों को कठोर सजा सुनाई गई।

    यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक साक्ष्य और सतत न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सकता है। प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल इस प्रकरण में आया फैसला न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को भी मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

  • मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी

    मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी


    भोपाल  मानसून की आमद से पहले राजधानी भोपाल में तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने आने लगी है। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल एमपी नगर में एक साल पहले धंसी सड़क आज भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है और हजारों वाहन चालकों व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय भी नहीं हुआ है।

    एमपी नगर स्थित बोर्ड ऑफिस चौराहे और एमपी नगर चौराहे के बीच की सड़क 17 जुलाई 2025 को अचानक धंस गई थी। जांच में सामने आया था कि यह सड़क एक पुराने नाले के ऊपर बनी हुई थी। शुरुआती स्तर पर सड़क की मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद आसपास का हिस्सा भी कमजोर पड़ने लगा और फिर सड़क के दूसरे हिस्से में भी धंसाव की आशंका पैदा हो गई। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने स्थायी समाधान के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने का निर्णय लिया।

    बताया जाता है कि जिस नाले के ऊपर सड़क बनी हुई है, वह लगभग 50 साल पुराना है। इसे मजबूत बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने रेलवे अंडरपास की तर्ज पर प्री-कास्ट तकनीक से नया स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बनाई। हालांकि यह परियोजना शुरुआत से ही बाधाओं में घिरी रही। दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी एजेंसी ने काम में रुचि नहीं दिखाई। दोनों बार टेंडर निरस्त करने पड़े। तीसरी बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सका।

    पिछले चार महीनों से चल रहे इस काम ने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। ज्योति टॉकीज चौराहे से बोर्ड ऑफिस चौराहे तक आने-जाने वाले लोगों को रोज लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। सड़क की एक लेन बंद होने के कारण ट्रैफिक का दबाव दूसरी सड़कों पर बढ़ गया है। चेतक ब्रिज से आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।

    स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब बारिश होती है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान निर्माणाधीन क्षेत्र में इतना पानी भर गया कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। सड़क पर घुटनों तक पानी जमा हो गया और वाहन रेंगते हुए निकलते दिखाई दिए। कई कारें पानी में फंस गईं और लोगों को घंटों जाम तथा अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।

    चिंता की बात यह है कि जिस नई तकनीक के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा रहा था, उसके बावजूद जलभराव की समस्या बरकरार दिखाई दे रही है। सड़क की जिस लेन का निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है, वहां भी पानी भरने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे परियोजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

    एमपी नगर जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र में रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही होती है। अनुमान है कि करीब पांच लाख लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में सड़क निर्माण की धीमी गति और जलनिकासी व्यवस्था की खामियां नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं। मानसून शुरू होने से पहले यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

  • भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी


    भोपाल भोपाल में एक बार फिर खराब इंजीनियरिंग और बिना जमीनी हकीकत को समझे किए गए विकास कार्यों का मामला सामने आया है। शहर के ऐशबाग क्षेत्र में 90 डिग्री ब्रिज के बाद वार्ड क्रमांक 32 में बनाए गए फुटपाथ को इस तरह रेलिंग से घेर दिया गया है कि अब वह पैदल यात्रियों की सुविधा के बजाय उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है। जिस फुटपाथ का निर्माण लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, वह अब किसी बंद पिंजरे जैसा दिखाई दे रहा है।

    सड़क किनारे किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत लगभग तीन फीट ऊंची लोहे की जाली लगाई गई है। इस रेलिंग के कारण राहगीरों का सीधे फुटपाथ पर पहुंचना मुश्किल हो गया है। कुछ चुनिंदा स्थानों पर प्रवेश और निकास के लिए कट पॉइंट बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश स्थानों पर ठेला संचालकों और अन्य अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। परिणामस्वरूप पैदल चलने वाले लोगों को फुटपाथ का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

    कई स्थानों पर स्थिति और भी विचित्र है। फुटपाथ के एक ओर तीन फीट ऊंची लोहे की रेलिंग है, जबकि दूसरी ओर पहले से बनी पक्की दीवार मौजूद है। ऐसे में पैदल यात्री बीच में फंसकर रह जाते हैं और उन्हें सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जिसने मूल उद्देश्य को ही समाप्त कर दिया है।

    क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया है कि जब कोई भी सार्वजनिक परियोजना नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई जाती है, तो उसकी डिजाइन और उपयोगिता का आकलन किए बिना मंजूरी कैसे दी जाती है। लोगों का कहना है कि बस या सार्वजनिक परिवहन से उतरने वाले यात्री सीधे फुटपाथ तक नहीं पहुंच सकते। इससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नागरिकों ने इसे सरकारी धन की बर्बादी और योजना निर्माण में गंभीर लापरवाही करार दिया है।

    मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। निगम के कार्यपालन यंत्री (ईई) एन.के. डेहरिया ने बताया कि संबंधित इंजीनियर से जानकारी मांगी गई है कि यह कार्य किस मद और किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि फुटपाथ के उपयोग में लोगों को दिक्कत हो रही है तो आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने स्वयं स्थल निरीक्षण करने की बात भी कही है।

    वहीं वार्ड की पार्षद आरती अनेजा का कहना है कि क्षेत्र में अतिक्रमण और शराबियों के जमावड़े की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। ठेकेदार ने आश्वासन दिया था कि रेलिंग लगाने के बावजूद लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी, लेकिन मौके पर पहुंचकर देखने पर स्थिति अलग मिली। पार्षद ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान डिजाइन लोगों के लिए असुविधाजनक है तो इसमें बदलाव कराया जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि विकास कार्यों में तकनीकी योजना और जमीनी जरूरतों के बीच तालमेल कितना जरूरी है। यदि परियोजनाएं नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के बजाय मुश्किलें खड़ी करने लगें, तो उनकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

  • राख’ में भोपाल के प्रसन्न सोनी का दमदार अभिनय, जटिल किरदार ने खींचा ध्यान

    राख’ में भोपाल के प्रसन्न सोनी का दमदार अभिनय, जटिल किरदार ने खींचा ध्यान


    नई दिल्ली अमेजन प्राइम वीडियो की नई क्राइम-थ्रिलर वेब सीरीज ‘राख’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। वर्ष 1978 की पृष्ठभूमि पर आधारित इस सीरीज में एक पुराने अपराध और उससे जुड़े रहस्यों की परतें धीरे-धीरे खोली जाती हैं। इस सीरीज में बॉलीवुड अभिनेता अली फज़ल मुख्य भूमिका में नजर आते हैं, जबकि सोनाली बेंद्रे, आमिर बशीर और राकेश बेदी जैसे अनुभवी कलाकार भी अहम किरदार निभा रहे हैं। इसी मजबूत स्टारकास्ट के बीच भोपाल के युवा रंगकर्मी प्रसन्न सोनी ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
    ‘धनीराम’ का चुनौतीपूर्ण किरदार और गहरी मनोस्थिति

    प्रसन्न सोनी ने इस सीरीज में ‘धनीराम’ का किरदार निभाया है, जो कई परतों वाला और मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद जटिल है। यह किरदार अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर समाज के सामने सामान्य जीवन जीता है और भीतर ही भीतर संघर्षों से जूझता रहता है।  धनीराम समलैंगिक है, लेकिन सामाजिक दबावों के चलते वह अपनी सच्चाई छिपाकर पत्नी के साथ एक पारंपरिक वैवाहिक जीवन भी जीता है। इस दोहरे जीवन को पर्दे पर उतारना प्रसन्न के लिए एक बड़ी अभिनय चुनौती थी। सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि इस सीरीज में धनीराम की पत्नी का किरदार प्रसन्न की वास्तविक जीवन पत्नी भारती ने निभाया है। भारती, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से प्रशिक्षित अभिनेत्री हैं और पहले भी फिल्मों व रंगमंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं।

    अली फज़ल के साथ काम और अभिनय का अनुभव

    प्रसन्न सोनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में उन्हें अली फज़ल जैसे बड़े कलाकार के साथ स्क्रीन साझा करने का मौका मिला, जो उनके लिए सीखने का एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि ‘धनीराम’ जैसे किरदार को निभाने के लिए भावनात्मक गहराई और मानसिक स्तर पर तैयारी बेहद जरूरी थी।

    राष्ट्रीय सम्मान की ओर बढ़ता सफर

    हाल ही में प्रसन्न सोनी को वर्ष 2024 के लिए प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान संगीत नाटक अकादमी द्वारा देशभर के युवा कलाकारों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। इसके अलावा भोपाल के तबला वादक रामेंद्र सिंह सोलंकी को भी इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है, जिससे मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत हुई है।

    रंगमंच से वेब सीरीज तक का सफर

    प्रसन्न सोनी लंबे समय से रंगमंच से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अभिनय, लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में लगातार काम करते हुए सामाजिक विषयों और मानवीय संवेदनाओं को मंच पर जीवंत किया है। उनकी यही निरंतर साधना उन्हें राष्ट्रीय पहचान तक लेकर आई है। ‘राख’ में मिला यह किरदार उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो रहा है, जो उन्हें आने वाले समय में और बड़े प्रोजेक्ट्स की ओर ले जा सकता है।

  • सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

    सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

    मध्यप्रदेश । भोपाल में आयोजित साइबर सिक्योरिटी और स्टेट डाटा सिक्योरिटी पर राज्य स्तरीय कंसल्टेटिव वर्कशॉप के दौरान मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साइबर सुरक्षा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh का नाम लिए बिना उन पर परोक्ष टिप्पणी भी की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्हें अर्थशास्त्र का बड़ा जानकार माना जाता था, लेकिन जीरो बैलेंस खाते की उपयोगिता और उसके व्यापक सामाजिक प्रभाव को वे भी नहीं समझ पाए थे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुलवाकर वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी। साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डाटा सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पहले सीमाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता मानी जाती थी, लेकिन डिजिटल युग में नागरिकों का डाटा और ऑनलाइन लेनदेन भी उतने ही संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में ठगी जा रही है, जो बेहद गंभीर विषय है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महू में अत्याधुनिक स्टेट डाटा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। यह केंद्र राज्य सरकार और Military College of Telecommunication Engineering के सहयोग से विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में शोध और विशेषज्ञता विकसित करना समय की आवश्यकता है।

    उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा केवल चर्चा का विषय नहीं बल्कि जवाबदेही का मामला है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विभागों को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के डाटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    कार्यशाला में एडीजी इंटेलिजेंस साई मनोहर ने साइबर अपराधों से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 14 वर्षों में साइबर अपराधों में 77 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में हर वर्ष हजारों साइबर शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि साइबर हेल्पलाइन की क्षमता बढ़ाए जाने के बाद अब तक जनता के 137 करोड़ रुपए साइबर ठगी से बचाए जा चुके हैं।

    उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या सेना का अधिकारी बताकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

    साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। हालांकि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी सेवा या डाटा सिस्टम पर साइबर हमला होता है तो उसका सीधा असर आम जनता और शासन की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

    कार्यशाला में देशभर के साइबर विशेषज्ञों, रक्षा संस्थानों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। उनके सुझावों के आधार पर राज्य में साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी।