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  • भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग

    भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठनों का दावा है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के कई इलाकों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसके चलते जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने अपनी ओर से कराई गई पानी की जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए कहा कि जांचे गए करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म यानी मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए हैं।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान के अनुसार इस महीने 30 बस्तियों से 63 पानी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई गई। इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। उनका दावा है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों तक दूषित पेयजल पहुंच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ा तालाब से सप्लाई होने वाले पानी के लगभग 90 प्रतिशत नमूने तथा कोलार डैम से आने वाले पानी के करीब 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में प्रभावित पाए गए।

    संगठनों का आरोप है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से सटे इलाकों के निवासी लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि इसके कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में भी टाइफाइड के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यूनियन कार्बाइड परिसर का भूजल जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुका है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

    वहीं भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में भी पेयजल में मल मिलने की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को सीवर लाइन और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने निर्धारित समय में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनका दावा है कि वर्षों बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की भी मांग की।

    हालांकि इस मामले में नगर निगम या संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में संगठनों के दावों की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म

    भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म


    भोपाल । भोपाल में किसानों के आंदोलन ने दो दिनों तक राजधानी की रफ्तार लगभग थाम दी। मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर नर्मदापुरम हरदा सीहोर समेत कई जिलों से आए हजारों किसानों ने ऐसा दबाव बनाया कि आखिरकार सरकार को बातचीत की मेज पर आना पड़ा। किसान एक के बाद एक 22 बैरिकेड पार करते हुए मुख्यमंत्री निवास से महज एक किलोमीटर पहले तक पहुंच गए। उनके सामने केवल तीन बैरिकेड शेष थे। इसी दौरान सरकार ने वार्ता का रास्ता अपनाया और देर रात आंदोलन समाप्त हो गया।

    आंदोलन के चलते रोशनपुरा न्यू मार्केट और मुख्यमंत्री निवास के आसपास का पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। कई स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी जबकि प्रमुख मार्गों पर स्कूल बसों और गिट्टी से भरे डंपरों को बैरिकेड के रूप में खड़ा कर यातायात रोकने की कोशिश की गई। इसके बावजूद किसानों का काफिला लगातार आगे बढ़ता रहा और पुलिस की अधिकांश रणनीतियां नाकाम साबित हुईं।

    सुबह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों से संवाद कर समस्याओं का समाधान निकालने की बात कही थी। लेकिन जब प्रदर्शनकारी रोशनपुरा तक पहुंच गए तब सरकार ने कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना विश्वास सारंग और कृष्णा गौर सहित चार मंत्रियों की समिति गठित कर किसान नेताओं से बातचीत शुरू कराई। मंत्रालय में करीब दो घंटे चली चर्चा के बाद सरकार ने कई अहम घोषणाएं कीं।

    सरकार ने मूंग खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का फैसला लिया। इसके साथ ही खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 10 अगस्त तक और खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में खाद वितरण हाईब्रिड व्यवस्था के तहत किया जाएगा जिसमें आधार नंबर मोबाइल नंबर और वितरण का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज रहेगा।

    हालांकि किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है लेकिन उनकी मूल मांग अब भी पूरी नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी मूंग की फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए और वे इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि आगे भी जरूरत पड़ी तो आंदोलन दोबारा किया जाएगा।

    इस आंदोलन के दौरान पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए। नर्मदापुरम हरदा इटारसी और भैरूंदा सहित कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश हुई। करीब 60 किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया गया लेकिन बाद में उन्हें छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद किसान बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचने में सफल रहे और सरकार को अंततः वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ा।

    इधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि केंद्र ने मध्य प्रदेश को देश में सबसे अधिक 4.54 लाख टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि पहले स्वीकृत कोटे की पूरी खरीदी की जाए उसके बाद अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जाएगा।

    करीब दो दिन तक चले इस आंदोलन के बाद देर रात किसानों ने धरना समाप्त कर दिया और वापस लौटना शुरू किया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन खत्म होने के बाद गुरुवार से स्कूल और सामान्य यातायात पूर्ववत संचालित होंगे।

  • भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर

    भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर


    भोपाल । राजधानी भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। शहर की सड़कों पर पहली बार वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया है। टिकटिंग सॉफ्टवेयर की सफल टेस्टिंग और खाली बसों के ट्रायल रन के बाद गुरुवार सुबह से इन बसों में आम यात्रियों का सफर भी शुरू हो गया। शुरुआती चरण में तीन प्रमुख रूटों पर 10 एसी ई बसें चलाई जा रही हैं। सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को एयर कंडीशनर सुविधा का लाभ लेने के लिए कोई अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। न्यूनतम किराया 7 रुपए और अधिकतम 40 रुपए निर्धारित किया गया है जो पहले से संचालित लाल सिटी बसों के बराबर ही है।

    नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होते हुए बैरागढ़ और चिचली तक तथा चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होकर कोच फैक्ट्री तक किया जा रहा है। इसके अलावा कोलार से एमपी नगर के बीच भी तीन बसें चलाई जा रही हैं जिससे शहर के हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    ई बसों की शुरुआत से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा जो रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। कोलार निवासी ममता जोशी ने बताया कि उन्होंने नयापुरा से एमपी नगर तक एसी बस में सफर किया और केवल 17 रुपए किराया लगा। उनके अनुसार सफर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आरामदायक और सुविधाजनक रहा।

    इन इलेक्ट्रिक बसों में आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। पहली बार दिव्यांग यात्रियों के लिए हाइड्रोलिक डोर की व्यवस्था की गई है जिससे व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल के साथ आसानी से बस में चढ़ा और उतरा जा सकेगा। बस के भीतर इतनी जगह भी उपलब्ध कराई गई है कि दो व्हीलचेयर एक साथ खड़ी रह सकें। इसके अलावा प्रत्येक बस में छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इन बसों का आकार भी विशेष रूप से तैयार किया गया है। नई इलेक्ट्रिक बसों की लंबाई करीब 9 मीटर है जबकि पुरानी सिटी बसें लगभग 12 मीटर लंबी थीं। कम लंबाई होने के कारण ये बसें संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से संचालित हो सकेंगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी।

    फिलहाल शहर में 30 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं जिनमें से पहले चरण में 10 बसों का संचालन शुरू किया गया है। दूसरे चरण में 10 और बसें सड़कों पर उतरेंगी जबकि 15 अगस्त को प्रदेश स्तरीय लोकार्पण कार्यक्रम के बाद सभी 30 बसें नियमित रूप से यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही अगले 10 से 12 दिनों में 20 और नई इलेक्ट्रिक बसें भोपाल पहुंचने की संभावना है जिससे शहर का इलेक्ट्रिक बस बेड़ा और मजबूत होगा।

    इन बसों के संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार किए गए हैं जहां 11 चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए गए हैं। इससे नियमित संचालन के दौरान बसों की चार्जिंग में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। नगर निगम का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और शहर के लोगों को सुरक्षित आरामदायक तथा पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

  • मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान

    मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बनी रही। मूंग की शत प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर नर्मदापुरम संभाग से पैदल पहुंचे हजारों किसान राजधानी की सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। दिनभर चले प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बाद देर रात सरकार ने किसानों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई जिसके बाद आंदोलन धीरे धीरे समाप्त होने लगा और किसानों ने सड़कें खाली करना शुरू कर दीं।

    किसानों का कहना था कि मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी न हो। इसके अलावा खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था को भी समाप्त करने की मांग उठाई गई। किसानों का आरोप था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती जिससे खेती प्रभावित होती है और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर डेरा डाल दिया। बाणगंगा चौराहे समेत कई स्थानों पर किसान देर रात तक जमे रहे। सरकार की ओर से मांगें स्वीकार करने की घोषणा के बाद भी प्रदर्शनकारी तत्काल हटने को तैयार नहीं हुए और लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू की।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ किसानों के कपड़े फट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पहुंचे जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद उनका जत्था मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रोशनपुरा चौराहे से मुख्यमंत्री निवास तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर बसों और डंपरों से बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने विरोध दर्ज कराने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही दाल बाटी बनाकर भोजन तैयार किया। किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचे जिन्होंने सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना करते हुए हवन किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी का सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

    सरकार ने देर रात जारी बयान में किसानों की कई मांगें स्वीकार करने की घोषणा की। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि प्रदेश सरकार अब 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करेगी। नर्मदापुरम सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है जबकि समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार ने किसानों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की अपील भी की।

    सरकार की घोषणा के बाद अधिकांश किसानों ने देर रात वापस लौटना शुरू कर दिया और राजधानी की सड़कों पर यातायात धीरे धीरे सामान्य होने लगा। हालांकि किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि घोषित फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।

  • मुख्‍यमंत्री बोले- पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे नजदीक रहते हैं तो वह भोपाल है

    मुख्‍यमंत्री बोले- पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे नजदीक रहते हैं तो वह भोपाल है


    बाघों की धरती पर संरक्षण का नया संकल्प: मध्य प्रदेश ने एक हजार टाइगर की ओर बढ़ाए कदम

    भोपाल । देश में सर्वाधिक बाघों वाले राज्य मध्य प्रदेश ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को नए संकल्प के साथ दोहराया। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश बाघ संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

    उन्‍होंने कहा, वर्ष 2022 की गणना में 785 बाघों वाला मध्य प्रदेश अब आगामी गणना में एक हजार बाघों के आंकड़े के करीब पहुंचने की उम्मीद कर रहा है। इस अवसर पर रातापानी टाइगर रिजर्व का लोगो जारी किया गया, पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का लोकार्पण हुआ तथा वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने वाली अनेक पहलें सामने आईं।

    बाघ संरक्षण में अग्रणी बना मध्य प्रदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश आज देश में बाघ संरक्षण का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। प्रदेश की वन संपदा, संरक्षित क्षेत्र और वन विभाग के समर्पित प्रयासों ने बाघों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है। वर्ष 2022 की बाघ गणना में प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे और वर्तमान प्रयासों को देखते हुए अगली गणना में यह संख्या एक हजार के करीब पहुंचने की संभावना है। उन्होंने इसे वन विभाग, स्थानीय समुदायों और जनभागीदारी की बड़ी उपलब्धि बताया।

    वन्यजीव संरक्षण को नई तकनीक और नई पहचान
    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और संरक्षण कार्यों के लिए उपलब्ध कराए गए विशेष वाहनों का लोकार्पण किया। उन्होंने रातापानी टाइगर रिजर्व के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया तथा पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का शुभारंभ किया। जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। सक्रिय वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े वृत्तचित्रों के टीजर जारी कर संरक्षण अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

    प्रकृति संरक्षण भारतीय संस्कृति का मूल विचार
    मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा के अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली भारतीय परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत सदियों से प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को जीवन का आधार मानता आया है। वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने का विचार भारतीय ज्ञान परंपरा में बहुत पहले से स्वीकार किया गया था। प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की यही भावना आज भी हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।

    भोपाल के आसपास बाघों की विशेष मौजूदगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ मानव आबादी के सबसे निकट सुरक्षित रूप से निवास करते हैं तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार बाघों के साथ-साथ नदियों में घड़ियालों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पहले प्रदेश में छोड़े गए घड़ियाल दूसरे राज्यों की ओर चले जाते थे, अब ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं जिससे उनका सुरक्षित संरक्षण मध्य प्रदेश में ही सुनिश्चित हो सके। हाथियों की आवाजाही से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए किए गए प्रयासों के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

    वन विभाग के कार्यों की सराहना
    मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं, फिर भी वन विभाग के साथ काम करने में उन्हें विशेष संतोष मिलता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान-प्रदान और संरक्षण सहयोग को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे जैव विविधता के संरक्षण को नई गति मिल रही है।

    सम्मानित हुए वन संरक्षण के प्रहरी
    इस अवसर पर वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने कहा कि अच्छा जंगल वही है, जहां बाघ, बाघिन और उनके शावक सुरक्षित हों। उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण प्रकृति, जल स्रोतों और मानव जीवन की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। समारोह में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वन कर्मियों, वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों तथा विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया।

    इसके अलावा राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के पद्मश्री सम्मानित सदस्यों का अभिनंदन भी किया गया। कार्यक्रम में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

    भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी तेज बना रहा। मूंग की सरकारी खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और अन्य मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने के लिए जुटे। हालांकि पुलिस ने एम्प्री के पास वीर सावरकर सेतु पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें रोक दिया। प्रशासन ने बसों की चार परतों वाली बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों का रास्ता बंद कर दिया, लेकिन कुछ किसान बैरिकेड पर चढ़ गए और बाद में बसों पर भी चढ़कर विरोध जताया। पुलिस ने समझाइश देकर उन्हें नीचे उतारा जिसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

    प्रदर्शन के दौरान कई किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध दर्ज कराया और अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए तो कई किसानों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन और यज्ञ किया। आंदोलन स्थल पर किसानों ने सड़क किनारे ही दाल-बाटी बनाकर भोजन किया। रातभर आंदोलन में डटे रहने के बाद कई किसान वहीं खुले आसमान के नीचे आराम करते भी नजर आए। आंदोलन में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली और बड़ी संख्या में Gen Z युवाओं ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

    किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि मूंग खरीदी की मौजूदा व्यवस्था और ई-टोकन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह जाते हैं। प्रदर्शनकारी सरकार से इन समस्याओं का स्थायी समाधान और एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं।

    आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया। इसका असर होशंगाबाद रोड, नर्मदापुरम रोड और आसपास के इलाकों में देखने को मिला जहां लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया कि किसानों से संवाद के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है जो आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर चर्चा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सकारात्मक सुझावों का स्वागत करती है लेकिन यह भी जरूरी है कि आंदोलन के कारण आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।

    वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हजारों किसान अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें रोकने में लगी हुई है। उन्होंने किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

    राजधानी में जारी यह आंदोलन अब केवल किसानों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।

  • भोपाल में किसान आंदोलन बना संघर्ष और परिवार की कहानी बेटियों ने खिलाया खाना पत्नी ने कहा खाली हाथ मत लौटना

    भोपाल में किसान आंदोलन बना संघर्ष और परिवार की कहानी बेटियों ने खिलाया खाना पत्नी ने कहा खाली हाथ मत लौटना


    भोपाल । भोपाल में जारी किसान आंदोलन अब केवल सरकारी नीतियों के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह किसानों के संघर्ष उनके परिवारों की उम्मीदों और गांव की आर्थिक हकीकत की मार्मिक कहानी बन गया है। राजधानी के होशंगाबाद रोड पर हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। इस आंदोलन के बीच कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने हर किसी को भावुक कर दिया। कहीं दो बेटियां अपने किसान पिता के लिए घर का बना खाना लेकर पहुंचीं तो कहीं एक पत्नी ने अपने पति को साफ शब्दों में कह दिया कि इस बार मांगें मनवाकर ही घर लौटना।

    संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में निकली किसान क्रांति पैदल यात्रा नर्मदापुरम जिले के बरखेड़ा से शुरू होकर भोपाल पहुंची है। किसान मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी खाद वितरण व्यवस्था में सुधार और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    आंदोलन के बीच कटारा हिल्स में रहने वाली प्रगति पटेल और उनकी बहन प्रकृति पटेल अपने पिता के लिए भोजन लेकर धरना स्थल पहुंचीं। दोनों भोपाल में पढ़ाई कर रही हैं। प्रगति ने कहा कि उन्होंने बचपन से अपने पिता को खेतों में मेहनत करते देखा है लेकिन मेहनत के अनुरूप उन्हें कभी उचित मूल्य नहीं मिला। उनका कहना था कि यदि किसान खेती करना छोड़ देगा तो देश की खाद्य व्यवस्था पर संकट खड़ा हो जाएगा। दोनों बहनों ने कहा कि अपने अधिकारों की लड़ाई में डरने का सवाल ही नहीं उठता और वे अपने पिता के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी हैं।

    हरदा से आए किसान अशोक गुर्जर ने बताया कि इस बार भीषण गर्मी में कड़ी मेहनत कर मूंग की फसल तैयार की लेकिन सरकार पूरी उपज खरीदने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि घर से निकलते समय उनकी पत्नी ने उन्हें सिर्फ एक बात कही कि इस बार मांगें पूरी कराकर ही वापस आना। चाहे जितना समय लगे लेकिन खाली हाथ मत लौटना। अशोक का कहना है कि गांव में किसान लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहा है और खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है।

    कई किसानों ने आंदोलन के दौरान अपनी आर्थिक परेशानियां भी साझा कीं। हरदा के किसान बृजेश जाट ने बताया कि मूंग की खेती में उन्होंने गेहूं की पूरी कमाई लगा दी लेकिन सीमित खरीदी की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि दो महीने से बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर पाए। फीस नहीं भरने पर स्कूल बस संचालकों ने बच्चों को बस में बैठाने से मना कर दिया और स्कूल प्रशासन ने भी चेतावनी दे दी। उनका कहना है कि किसान परिवार आज सम्मान और अस्तित्व दोनों की लड़ाई लड़ रहा है।

    वहीं किसान दीपक पटवारे ने बताया कि आठ दिन पहले उनके पिता का घुटना बदलने का ऑपरेशन हुआ था लेकिन इसके बावजूद वे आंदोलन में शामिल होने भोपाल पहुंचे। खुद कमर दर्द की समस्या से जूझ रहे दीपक बेल्ट बांधकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास लगभग 200 क्विंटल मूंग की उपज है लेकिन सरकारी खरीदी सीमित होने से पूरी फसल बिक नहीं पा रही है। परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों की पढ़ाई के बावजूद उन्होंने आंदोलन को प्राथमिकता दी है।

    कई किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए कठिनाइयों का सामना करना पड़े तो भी वे आंदोलन जारी रखेंगे। किसानों का मानना है कि यह केवल फसल की कीमत का मुद्दा नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और खेती की सुरक्षा की लड़ाई है।

    राजधानी भोपाल में जारी यह आंदोलन अब केवल नारों तक सीमित नहीं है बल्कि परिवार के त्याग संघर्ष और उम्मीदों की ऐसी तस्वीर बन गया है जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है।

  • राजधानी भोपाल बना किसान आंदोलन का केंद्र सड़क पर हवन भोजन और अर्धनग्न प्रदर्शन सीएम हाउस की सुरक्षा कड़ी कई रास्ते बंद

    राजधानी भोपाल बना किसान आंदोलन का केंद्र सड़क पर हवन भोजन और अर्धनग्न प्रदर्शन सीएम हाउस की सुरक्षा कड़ी कई रास्ते बंद


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर किसान आंदोलन का केंद्र बन गई है। मूंग की सरकारी खरीदी ई टोकन व्यवस्था में सुधार न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर हजारों किसान दूसरे दिन भी आंदोलन पर डटे हुए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे इस प्रदर्शन ने अब और उग्र रूप ले लिया है। सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने के लिए कई किसान अर्धनग्न होकर धरने पर बैठे हैं जबकि प्रदर्शन स्थल पर सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन कर सरकार से किसानों के हित में निर्णय लेने की प्रार्थना भी की गई।

    किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई खेती की बढ़ती लागत और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। मूंग की पूरी सरकारी खरीदी सुनिश्चित करने ई टोकन प्रणाली को पारदर्शी बनाने और सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी वजह से किसानों ने राजधानी में डेरा डालकर आंदोलन को निर्णायक रूप देने का फैसला किया है।

    धरना स्थल पर किसानों का जीवन भी संघर्ष की मिसाल बन गया है। कई किसान पूरी रात खुले आसमान के नीचे रहे और सुबह जहां जगह मिली वहीं आराम करते नजर आए। दोपहर होते ही कई समूहों ने सड़क किनारे चूल्हे जलाए और दाल बाटी बनाकर सामूहिक भोजन किया। किसानों का कहना है कि वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार होकर आए हैं और मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने प्रदेश के जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेताओं को भी प्रदर्शन स्थल पर आकर उनके साथ भोजन करने और उनकी समस्याएं सुनने का निमंत्रण दिया।

    आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में महिलाएं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं और हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लिखे। उन्होंने किसानों के संघर्ष को परिवार और समाज की लड़ाई बताते हुए आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

    सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किसानों ने सद्बुद्धि यज्ञ भी किया। यज्ञ के माध्यम से उन्होंने प्रार्थना की कि सरकार किसानों की पीड़ा को समझे और उनकी जायज मांगों को जल्द स्वीकार करे। कई किसानों ने अपनी आर्थिक बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है और यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

    किसानों के मुख्यमंत्री आवास घेराव के ऐलान को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। एम्स के पास वीर सावरकर सेतु सहित कई संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और यातायात को दूसरे रास्तों से मोड़ा जा रहा है। इसके कारण होशंगाबाद रोड एम्स बंसल प्लाजा कटारा हिल्स और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर जाम जैसी स्थिति बनी रही जिससे आम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और यातायात पर दबाव कम हो।

    फिलहाल राजधानी में आंदोलन और प्रशासन दोनों आमने सामने की स्थिति में हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है। अब प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार किसानों से बातचीत कर कोई समाधान निकालती है या आंदोलन और तेज होता है।

  • अवैध बैनर-होर्डिंग पर हाई कोर्ट सख्त: शिकायत मिलते ही 24 घंटे में कार्रवाई, जिम्मेदारों पर एफआईआर के निर्देश

    अवैध बैनर-होर्डिंग पर हाई कोर्ट सख्त: शिकायत मिलते ही 24 घंटे में कार्रवाई, जिम्मेदारों पर एफआईआर के निर्देश


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में अब अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर-होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले में अहम आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर अवैध बैनर और होर्डिंग हटाए जाएं। इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

    न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने यह आदेश वैध होर्डिंग पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगाए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2022 में दिए गए निर्देशों और 1 नवंबर 2019 के शासन परिपत्र का अक्षरशः पालन किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के विपरीत लगाए गए विज्ञापन और बैनर किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

    इस फैसले का प्रभाव भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगा। भोपाल नगर निगम के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि अदालत के आदेश के अनुरूप विशेष अभियान चलाकर अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक होर्डिंग हटाए जाएंगे। नगर निगम के अनुसार पहले चरण में सर्वे कराया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी स्ट्रक्चर चिन्हित किए जाएंगे। अयोध्या बायपास क्षेत्र में पहले ही पांच अवैध यूनिपोल हटाए जा चुके हैं। साथ ही संबंधित संस्था की बैंक गारंटी जब्त करने और बकाया शुल्क वसूलने जैसी कार्रवाई भी की गई है।

    आउटडोर मीडिया नियम-2017 के अनुसार बिना अनुमति लगाए गए फ्लेक्स, पोस्टर, कटआउट, सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना स्थापित विज्ञापन संरचनाएं, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के प्रतिबंधित दायरे में लगे होर्डिंग, ट्रैफिक संकेतों को ढंकने वाले विज्ञापन, फुटपाथ और सर्विस रोड पर लगाए गए यूनिपोल तथा निर्धारित मानकों से बड़े या असुरक्षित स्ट्रक्चर पूरी तरह अवैध माने जाते हैं।

    भोपाल में वीआईपी रोड, एमपी नगर, लिंक रोड, होशंगाबाद रोड, रायसेन रोड, अयोध्या बायपास, बैरसिया रोड, लालघाटी और गांधी नगर सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे होर्डिंग लगे होने की बात सामने आई है जो नियमों के अनुरूप नहीं हैं। अनुमान है कि शहर में लगभग 20 प्रतिशत होर्डिंग किसी न किसी रूप में नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

    दरअसल, यह मामला इंदौर की एक विज्ञापन कंपनी द्वारा दायर याचिका के बाद अदालत पहुंचा था। कंपनी का कहना था कि उसने नगर निगम से विधिवत अनुमति लेकर विज्ञापन संरचनाएं स्थापित की हैं, लेकिन उन पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगा दिए जाते हैं। इससे न केवल संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है बल्कि कंपनी को आर्थिक हानि भी होती है।

    अदालत के इस आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि शहरों में अवैध बैनर और होर्डिंग पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इससे यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, सार्वजनिक स्थानों की सुंदरता बढ़ेगी, वैध विज्ञापन एजेंसियों के हित सुरक्षित रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा

  • 1000 करोड़ की धोखाधड़ी केस में बड़ा खुलासा: हवाला से भोपाल पहुंचता था करोड़ों का कैश, कोडवर्ड था '100 दाने'

    1000 करोड़ की धोखाधड़ी केस में बड़ा खुलासा: हवाला से भोपाल पहुंचता था करोड़ों का कैश, कोडवर्ड था '100 दाने'


    कटनी । कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों से जुड़े लगभग 1000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार रायपुर के खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गोयनका का एक संगठित हवाला नेटवर्क भोपाल तक फैला हुआ था, जिसके जरिए करोड़ों रुपये की नकदी रियल एस्टेट कारोबार में खपाई जाती थी। इस मामले में कोलकाता पुलिस पहले ही महेंद्र गोयनका को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां अब उसके आर्थिक नेटवर्क की परतें खोल रही हैं।

    जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि भोपाल के रियल एस्टेट कारोबारी राजेश शर्मा और महेंद्र गोयनका के बीच लंबे समय से कारोबारी संबंध थे। दिसंबर 2024 में हुई छापेमारी के दौरान जब्त रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और वित्तीय दस्तावेजों से यह संकेत मिले कि भोपाल के नीलबड़, रातीबड़, चंदनपुरा, फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी क्षेत्र में जमीन खरीदने के लिए हवाला के जरिए बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाई गई।

    जांच एजेंसियों के अनुसार जमीन खरीदने का पूरा मॉडल दो हिस्सों में बांटा गया था। पहला भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया जाता था, जिसे रजिस्ट्री में दर्ज किया जाता था। दूसरा बड़ा हिस्सा नकद के रूप में हवाला चैनल के जरिए जमीन विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता था। इसी प्रक्रिया के जरिए टैक्स चोरी के साथ-साथ करोड़ों रुपये का काला धन भी रियल एस्टेट में लगाया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि रायपुर से भोपाल तक नकदी पहुंचाने की जिम्मेदारी महेंद्र गोयनका के कर्मचारी अशोक रैकवार के पास थी, जबकि भोपाल में रकम प्राप्त करने और आगे जमीन मालिकों तक पहुंचाने का काम राजेश शर्मा के कर्मचारी राजेश तिवारी संभालते थे। पूरे लेनदेन का रिकॉर्ड एक अन्य कर्मचारी दीपक तुलसानी रखता था। अधिकारियों के मुताबिक एक बार में करीब 8 करोड़ रुपये तक की नकदी हवाला के जरिए भेजी गई।

    सबसे चौंकाने वाला खुलासा लेनदेन के तरीके को लेकर हुआ है। जांच में पता चला कि हवाला नेटवर्क में पहचान सुनिश्चित करने के लिए व्हाट्सएप पर 10 और 20 रुपये के नोट की तस्वीरें भेजी जाती थीं। जब दोनों पक्षों के पास एक जैसी तस्वीर होती थी, तभी नकदी की डिलीवरी की जाती थी। इसके अलावा बातचीत में “दाने” शब्द का इस्तेमाल कोडवर्ड के रूप में किया जाता था। “100 दाने” का मतलब एक करोड़ रुपये माना जाता था। राजेश शर्मा ने अपने मोबाइल में महेंद्र गोयनका का नंबर “एमजी भाई वन” नाम से सेव कर रखा था और लेनदेन का पूरा हिसाब भी इसी नाम से दर्ज मिलता है।

    जांच में यह भी सामने आया कि चंदनपुरा क्षेत्र में गोयनका की कंपनियों निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, यूरो प्रतीक और यूरा पेलेट्स के नाम पर करीब 54 एकड़ जमीन खरीदी गई। इस सौदे की वास्तविक कीमत करीब 110 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि रजिस्ट्री में केवल 65.10 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया। बाकी लगभग 45 करोड़ रुपये हवाला के जरिए नकद पहुंचाए गए। इसी तरह फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी गांव में भी कई जमीनों की खरीद में बैंकिंग और नकद भुगतान का मिश्रित मॉडल अपनाने के आरोप सामने आए हैं।

    अब 10 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद महेंद्र गोयनका को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां उसकी जमानत याचिका पर भी सुनवाई हो सकती है। वहीं इस कथित 1000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में गोयनका की पत्नी, भाई सहित छह आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां पूरे हवाला नेटवर्क, काले धन के प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

    Tags: भोपाल, महेंद्र गोयनका, हवाला नेटवर्क, संजय पाठक, रियल एस्टेट, काला धन, मध्य प्रदेशजिले के विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों से जुड़े लगभग 1000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार रायपुर के खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गोयनका का एक संगठित हवाला नेटवर्क भोपाल तक फैला हुआ था, जिसके जरिए करोड़ों रुपये की नकदी रियल एस्टेट कारोबार में खपाई जाती थी। इस मामले में कोलकाता पुलिस पहले ही महेंद्र गोयनका को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां अब उसके आर्थिक नेटवर्क की परतें खोल रही हैं।

    जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि भोपाल के रियल एस्टेट कारोबारी राजेश शर्मा और महेंद्र गोयनका के बीच लंबे समय से कारोबारी संबंध थे। दिसंबर 2024 में हुई छापेमारी के दौरान जब्त रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और वित्तीय दस्तावेजों से यह संकेत मिले कि भोपाल के नीलबड़, रातीबड़, चंदनपुरा, फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी क्षेत्र में जमीन खरीदने के लिए हवाला के जरिए बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाई गई।

    जांच एजेंसियों के अनुसार जमीन खरीदने का पूरा मॉडल दो हिस्सों में बांटा गया था। पहला भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया जाता था, जिसे रजिस्ट्री में दर्ज किया जाता था। दूसरा बड़ा हिस्सा नकद के रूप में हवाला चैनल के जरिए जमीन विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता था। इसी प्रक्रिया के जरिए टैक्स चोरी के साथ-साथ करोड़ों रुपये का काला धन भी रियल एस्टेट में लगाया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि रायपुर से भोपाल तक नकदी पहुंचाने की जिम्मेदारी महेंद्र गोयनका के कर्मचारी अशोक रैकवार के पास थी, जबकि भोपाल में रकम प्राप्त करने और आगे जमीन मालिकों तक पहुंचाने का काम राजेश शर्मा के कर्मचारी राजेश तिवारी संभालते थे। पूरे लेनदेन का रिकॉर्ड एक अन्य कर्मचारी दीपक तुलसानी रखता था। अधिकारियों के मुताबिक एक बार में करीब 8 करोड़ रुपये तक की नकदी हवाला के जरिए भेजी गई।

    सबसे चौंकाने वाला खुलासा लेनदेन के तरीके को लेकर हुआ है। जांच में पता चला कि हवाला नेटवर्क में पहचान सुनिश्चित करने के लिए व्हाट्सएप पर 10 और 20 रुपये के नोट की तस्वीरें भेजी जाती थीं। जब दोनों पक्षों के पास एक जैसी तस्वीर होती थी, तभी नकदी की डिलीवरी की जाती थी। इसके अलावा बातचीत में “दाने” शब्द का इस्तेमाल कोडवर्ड के रूप में किया जाता था। “100 दाने” का मतलब एक करोड़ रुपये माना जाता था। राजेश शर्मा ने अपने मोबाइल में महेंद्र गोयनका का नंबर “एमजी भाई वन” नाम से सेव कर रखा था और लेनदेन का पूरा हिसाब भी इसी नाम से दर्ज मिलता है।

    जांच में यह भी सामने आया कि चंदनपुरा क्षेत्र में गोयनका की कंपनियों निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, यूरो प्रतीक और यूरा पेलेट्स के नाम पर करीब 54 एकड़ जमीन खरीदी गई। इस सौदे की वास्तविक कीमत करीब 110 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि रजिस्ट्री में केवल 65.10 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया। बाकी लगभग 45 करोड़ रुपये हवाला के जरिए नकद पहुंचाए गए। इसी तरह फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी गांव में भी कई जमीनों की खरीद में बैंकिंग और नकद भुगतान का मिश्रित मॉडल अपनाने के आरोप सामने आए हैं।

    अब 10 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद महेंद्र गोयनका को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां उसकी जमानत याचिका पर भी सुनवाई हो सकती है। वहीं इस कथित 1000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में गोयनका की पत्नी, भाई सहित छह आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां पूरे हवाला नेटवर्क, काले धन के प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।