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  • करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में करंट लगने की लगातार सामने आई घटनाओं के विरोध में किसानों और ग्रामीणों का आक्रोश राजधानी भोपाल तक पहुंच गया। जिले के कई गांवों से सैकड़ों किसान भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के गोविंदपुरा मुख्यालय पहुंचे और बिजली विभाग की कथित लापरवाही के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जर्जर बिजली लाइनों और झूलते तारों की बार-बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए, जिसके कारण कई गंभीर हादसे हुए। किसानों ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

    सीहोर जिले के बड़वेली, चंदेरी, बिलकिसगंज, ढाबला, मंगरखेड़ा, पचामा, पाली, जामुनिया, रामाखेड़ी और अन्य गांवों से पहुंचे किसानों ने समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में मुख्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि खेतों के ऊपर से गुजर रही जर्जर 11 केवी और एलटी लाइनें किसानों की जान के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था सुधारने में गंभीरता नहीं दिखाई।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बताया कि हाल के वर्षों में करंट की चपेट में आने से पांच किसान गंभीर हादसों का शिकार हुए। इनमें तीन किसानों की मौत हो चुकी है, जबकि दो किसानों के हाथ काटने पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि इन हादसों ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल दिया है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

    प्रदर्शनकारियों ने विद्युत मंडल के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की मांग की। किसानों ने यह भी कहा कि वे पहले मुख्यमंत्री कार्यालय, ऊर्जा मंत्री, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि यदि समय रहते बिजली लाइनों की मरम्मत और रखरखाव किया जाता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

    धरने के बाद प्रबंध निदेशक ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने हालांकि स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा और यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जानी चाहिए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

    इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने मानव अधिकार आयोग और महिला आयोग को भी ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। आयोग के अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने का भरोसा दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा और अन्य मांगें पूरी नहीं हुईं तो सीहोर, भोपाल, शाजापुर और उज्जैन सहित आसपास के जिलों के किसान संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

  • भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

    भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

     मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित निशातपुरा रेलवे स्टेशन निर्माण पूरा होने के बावजूद अब तक नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह स्टेशन पिछले लगभग तीन वर्षों से ट्रेनों के ठहराव का इंतजार कर रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उपयोग शुरू न होने के कारण रेलवे की योजना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

    करीब छह करोड़ रुपये की लागत से जून 2023 में तैयार किए गए इस रेलवे स्टेशन को यात्रियों की सुविधा और भोपाल जंक्शन पर बढ़ते परिचालन दबाव को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। स्टेशन पर प्लेटफॉर्म, टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह तैयार हैं। इसके बावजूद यहां न तो किसी यात्री ट्रेन का नियमित ठहराव शुरू हुआ है और न ही स्टेशन पर सामान्य रेल गतिविधियां दिखाई देती हैं।

    दिनभर स्टेशन परिसर लगभग सुनसान रहता है। विभिन्न दिशाओं से आने-जाने वाली ट्रेनें स्टेशन के सामने से गुजरती जरूर हैं, लेकिन उनका यहां ठहराव नहीं होता। परिणामस्वरूप स्टेशन का उपयोग नहीं हो पा रहा है और तैयार बुनियादी ढांचा निष्क्रिय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्टेशन का संचालन शुरू हो जाए तो आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को भी बड़ी सुविधा मिल सकती है।

    रेलवे की मूल योजना के अनुसार निशातपुरा स्टेशन को विकसित कर भोपाल जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम करना था। इसके साथ ही लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने, प्लेटफॉर्म उपलब्धता में सुधार करने और इंजन बदलने अथवा परिचालन संबंधी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को कम करने का लक्ष्य रखा गया था। इससे ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार की संभावना जताई गई थी।

    वर्तमान में पश्चिमी दिशा से आने वाली कई ट्रेनों को भोपाल जंक्शन पर प्लेटफॉर्म उपलब्ध होने का इंतजार करना पड़ता है। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निशातपुरा स्टेशन पूरी तरह चालू हो जाए तो कुछ परिचालन गतिविधियों को वहां स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे मुख्य स्टेशन पर दबाव कम होगा और रेल संचालन अधिक सुचारु बनाया जा सकेगा।

    हालांकि रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन का निर्माण पूरा होने के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण औपचारिकताएं शेष हैं। इनमें सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां, अंतिम निरीक्षण, आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती और परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके अलावा स्टेशन परिसर से जुड़े ड्रेनेज सिस्टम और पहुंच मार्ग के कुछ कार्य भी अभी पूरे किए जाने बाकी हैं।

    अधिकारियों के अनुसार इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद स्टेशन से ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा। रेलवे का दावा है कि शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है ताकि यात्रियों को इस नए स्टेशन का लाभ मिल सके। हालांकि संचालन शुरू होने की कोई निश्चित तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।

    फिलहाल निशातपुरा रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बावजूद यात्रियों की आवाजाही से दूर है। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों की उम्मीद है कि लंबित औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी और यह स्टेशन अपने निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप रेल नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बनकर भोपाल जंक्शन का भार कम करने के साथ क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगा।

  • MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप

    MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में वाहन चेकिंग (Vehicle Checking) के दौरान पुलिस (Police) की कथित लापरवाही का मामला सामने आया है. आरोप है कि चेकिंग के दौरान पुलिस की निगरानी में खड़ी एक स्कूटी (Scooty) को एक अज्ञात युवक लेकर फरार हो गया. शिकायतकर्ता का दावा है कि स्कूटी की चाबी पुलिस के पास थी और कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी ने वही चाबी अज्ञात युवक को सौंप दी. इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. पीड़ित ने मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, घटना 13 जुलाई की रात करीब 8 बजे भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर हुई. शिकायतकर्ता नदीम आलम का आरोप है कि वाहन चेकिंग के दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी सुजुकी बर्गमैन स्कूटी को रोक लिया था. उनका कहना है कि जांच के दौरान पुलिसकर्मियों ने स्कूटी की चाबी अपने पास रख ली थी और वाहन वहीं खड़ा था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ देर बाद वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर वही चाबी एक अज्ञात युवक को दे दी।


    चेकिंग के दौरान रोकी गई थी स्कूटी

    आरोप है कि युवक ने बिना किसी रोक-टोक के स्कूटी स्टार्ट की और मौके से फरार हो गया. नदीम आलम के मुताबिक, जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपनी स्कूटी वापस मांगी, तब उन्हें पता चला कि वाहन वहां से गायब हो चुका है. उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    पीड़ित का कहना है कि यदि स्कूटी की चाबी पुलिस के कब्जे में थी, तो वाहन किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ कैसे लग गया और वह वहां से कैसे निकल गया. घटना के बाद नदीम आलम ने पूरे मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से की है. उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उनकी स्कूटी जल्द से जल्द बरामद की जाए।

    शिकायत के बाद पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
    शिकायतकर्ता का दावा है कि सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है. उनका कहना है कि यदि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है. इस मामले के सामने आने के बाद वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. यदि शिकायतकर्ता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला माना जा सकता है. फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- विश्व स्तरीय विज्ञान कृतियां नई पीढ़ी को देंगी नवाचार की नई उड़ान

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- विश्व स्तरीय विज्ञान कृतियां नई पीढ़ी को देंगी नवाचार की नई उड़ान

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विज्ञान शिक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आंचलिक विज्ञान केंद्र में अत्याधुनिक अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने गैलरी का अवलोकन किया और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े आधुनिक प्रदर्शों को करीब से देखा। कार्यक्रम में विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल और तकनीकी प्रदर्शनियों की भी सराहना की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि कम लागत में तैयार की गई इस गैलरी में अधिकतम वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। यहां स्थापित विभिन्न वैज्ञानिक कृतियां विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करने के साथ उन्हें विज्ञान और नवाचार की ओर प्रेरित करेंगी। उन्होंने कहा कि विज्ञान से जुड़ी ये प्रस्तुतियां विश्व स्तरीय हैं और प्रदेश की वैज्ञानिक पहचान को नई मजबूती देंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर अनुसंधान और नवाचार तक नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। ऐसे समय में भोपाल में अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा की स्थापना विद्यार्थियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक पहल साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह गैलरी भविष्य की वैज्ञानिक पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मध्य प्रदेश देश के विकास और सांस्कृतिक विरासत दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि यह नई दीर्घा विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान के नवीनतम ज्ञान, शोध और तकनीकों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल राज्य की स्पेस पॉलिसी को मजबूती देने के साथ वैज्ञानिक सोच और नवाचार की संस्कृति को भी बढ़ावा देगी। नई शिक्षा नीति में भी स्पेस टेक्नोलॉजी को विशेष महत्व दिया गया है और यह गैलरी उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

    आंचलिक विज्ञान केंद्र में विकसित ‘हॉल ऑफ स्पेस एक्सप्लोरेशन’ को अत्याधुनिक और अनुभवात्मक विज्ञान गैलरियों में शामिल किया गया है। इसे राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद और भोपाल जिला प्रशासन के सहयोग से विकसित किया गया है। गैलरी में आगंतुकों को ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों तक की वैज्ञानिक यात्रा को आकर्षक और इंटरैक्टिव तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। यहां प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

    गैलरी में 30 से अधिक इंटरैक्टिव और इमर्सिव प्रदर्श स्थापित किए गए हैं। इनमें स्पेस फ्लाइट सिम्युलेटर, स्पेस वॉक, तीन-आयामी खगोलीय पिंडों का अवलोकन, अंतरिक्ष अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, स्पेस टूरिज्म, रॉकेट और अंतरिक्ष यान की कार्यप्रणाली, कक्षीय यांत्रिकी तथा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसी अवधारणाओं को सरल और रोचक तरीके से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही भारत की अंतरिक्ष यात्रा को भी विस्तार से दर्शाया गया है, जिसमें आर्यभट्ट, चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य-एल1 और आगामी गगनयान मिशन जैसी उपलब्धियों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।

    राज्य सरकार का मानना है कि यह अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, नवाचार और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। साथ ही यह मध्य प्रदेश की स्पेस पॉलिसी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • थार हटाने को कहा तो छीन ली लाइसेंसी रिवॉल्वर, भोपाल में किसान पर ताबड़तोड़ फायरिंग, तीन आरोपी गिरफ्तार

    थार हटाने को कहा तो छीन ली लाइसेंसी रिवॉल्वर, भोपाल में किसान पर ताबड़तोड़ फायरिंग, तीन आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली । भोपाल के मिसरोद इलाके में मामूली विवाद ने उस समय खूनी रूप ले लिया जब रास्ते में खड़ी थार हटाने के लिए हॉर्न बजाने पर तीन युवकों ने एक किसान पर हमला कर दिया। आरोपियों ने पहले किसान के साथ बेरहमी से मारपीट की और फिर उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर छीनकर उसी से दो गोलियां चला दीं। एक गोली किसान के पैर को चीरते हुए निकल गई जबकि दूसरी निशाने से चूक गई। पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई जिसके आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

    घटना शनिवार देर रात मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित सागर रॉयल होम्स सोसाइटी की है। घायल किसान की पहचान 33 वर्षीय हरीश कुमार राय के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार हरीश देर रात अपने घर लौट रहे थे। जब वह सोसाइटी के मुख्य गेट पर पहुंचे तो वहां एक थार वाहन खड़ा मिला जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था। उन्होंने वाहन हटाने के लिए कई बार हॉर्न बजाया लेकिन थार में बैठे युवकों ने रास्ता खाली नहीं किया। इसके बाद हरीश दूसरे गेट से अंदर जाकर अपनी गाड़ी पार्क करने लगे।

    कुछ ही देर बाद थार में सवार तीनों युवक भी पार्किंग में पहुंच गए और वाहन हटाने की बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने किसान के साथ मारपीट शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार युवकों ने डंडों से हमला किया और इसी दौरान हरीश की लाइसेंसी रिवॉल्वर छीन ली। इसके बाद आरोपियों ने उसी रिवॉल्वर से दो फायर किए। एक गोली हरीश के बाएं पैर में घुटने के नीचे लगी जिससे पैर में फ्रैक्चर हो गया जबकि दूसरी गोली किसी को नहीं लगी।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान घटनास्थल से दो खाली कारतूस बरामद किए गए। सीसीटीवी फुटेज में पूरी वारदात स्पष्ट रूप से दिखाई देने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस ने हर्षित पटेल 21 वर्ष अनुभव चौबे 19 वर्ष और लोकेश रघुवंशी 24 वर्ष के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं घायल किसान का अस्पताल में उपचार जारी है और डॉक्टरों की निगरानी में उसकी हालत पर नजर रखी जा रही है।

    यह घटना एक बार फिर सड़क पर होने वाले छोटे विवादों के खतरनाक रूप लेने की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। महज रास्ता खाली कराने के लिए हॉर्न बजाने जैसी सामान्य बात पर हिंसा और फायरिंग तक पहुंच जाना चिंता का विषय है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • भोपाल में निवेश के नाम पर 33 लाख की ठगी शेयर ट्रेडिंग और रियल एस्टेट का झांसा देकर दो लोगों को बनाया शिकार

    भोपाल में निवेश के नाम पर 33 लाख की ठगी शेयर ट्रेडिंग और रियल एस्टेट का झांसा देकर दो लोगों को बनाया शिकार


    भोपाल । राजधानी भोपाल में ऑनलाइन निवेश और रियल एस्टेट कारोबार के नाम पर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक बार फिर साइबर ठगों और निवेश के नाम पर भरोसा जीतने वाले आरोपियों ने दो अलग-अलग लोगों को अपना निशाना बनाकर कुल 33 लाख रुपए की ठगी कर ली। एक मामले में शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 23 लाख रुपए ऐंठ लिए गए जबकि दूसरे मामले में रियल एस्टेट कारोबार में निवेश का भरोसा दिलाकर फिजियोथेरेपिस्ट से 10 लाख रुपए हड़प लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला मिसरोद थाना क्षेत्र का है जहां सलैया निवासी 48 वर्षीय रोहित वर्मा साइबर ठगी का शिकार बने। निजी बैंक से सेवानिवृत्त रोहित वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर ट्रेडिंग से जुड़ा एक विज्ञापन देखा। विज्ञापन के माध्यम से उन्होंने एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड किया जिसके बाद उनसे संपर्क कर निवेश पर मोटे मुनाफे का दावा किया गया। शुरुआती बातचीत और भरोसा दिलाने के बाद आरोपियों ने उन्हें अलग-अलग चरणों में करीब 23 लाख रुपए निवेश करने के लिए तैयार कर लिया।

    जब निवेश की रकम बढ़ती गई तो रोहित वर्मा को भरोसा हो गया कि उन्हें अच्छा लाभ मिलेगा। लेकिन जब उन्होंने अपने निवेश की राशि और मुनाफा वापस मांगना शुरू किया तो आरोपियों ने संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की। पुलिस अब इस मामले में उपयोग किए गए बैंक खातों मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    दूसरा मामला निशातपुरा थाना क्षेत्र का है जहां पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट नीरज तिवारी को रियल एस्टेट कारोबार में निवेश का झांसा देकर 10 लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई। शिकायत के अनुसार उन्होंने अपने रिश्तेदार संजय तिवारी के कहने पर रियल एस्टेट कारोबार में निवेश के लिए 10 लाख रुपए दिए थे। शुरुआत में आरोपी ने कारोबार में अच्छा लाभ मिलने का भरोसा दिलाया लेकिन समय बीतने के बाद भी रकम वापस नहीं की।

    बताया गया कि पिछले वर्ष आरोपी ने केवल 2 लाख रुपए लौटाए और शेष राशि जल्द देने का आश्वासन देता रहा। लंबे समय तक टालमटोल के बाद जब पूरी रकम वापस नहीं मिली तो पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन निवेश और अधिक मुनाफे का लालच देने वाले विज्ञापनों से लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान ऐप या व्यक्ति के कहने पर बड़ी रकम निवेश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी और वैधता की जांच करना जरूरी है। वहीं रिश्तेदारी या जान-पहचान के आधार पर भी बिना लिखित दस्तावेज और कानूनी सुरक्षा के बड़ी रकम निवेश करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव या साइबर धोखाधड़ी की जानकारी तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू

    मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू


    भोपाल । भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक शुक्रवार को राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। मास्टर प्लान के लंबे समय से लागू नहीं होने के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक में तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी के विकास का सबसे अहम दस्तावेज ही लागू नहीं हो पा रहा है तो विकास समीक्षा बैठकों का क्या औचित्य रह जाता है। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप से माहौल और अधिक गरमा गया और बैठक में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

    विवाद के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी बात सांसद से हो रही थी ऐसे में बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसे है। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है और नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने दोनों नेताओं को रोकने और समझाने का प्रयास किया लेकिन वे वापस नहीं लौटे।

    बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने भी स्वीकार किया कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा। उनका मानना है कि राजधानी के भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

    बैठक के दौरान केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना भी जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े निर्माण तो हुए लेकिन नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इमारतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और दशहरा मैदान जैसी महत्वपूर्ण जगहों का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं ताकि उनकी बिक्री आसान हो और परियोजना की आय बढ़ सके।

    महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अलग बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया ताकि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन्हें गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए।

    बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन को लेकर भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार संभागायुक्त को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाए जबकि भोपाल और सीहोर के कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।

  • वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विरोध ताजुल मसाजिद से सरकार तक पहुंचेगा मुस्लिम समाज का संदेश

    वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विरोध ताजुल मसाजिद से सरकार तक पहुंचेगा मुस्लिम समाज का संदेश


    भोपाल । मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजधानी भोपाल में एक बड़े प्रतीकात्मक विरोध के रूप में सामने आने जा रहा है। शुक्रवार को ऐतिहासिक ताजुल मसाजिद में शहरभर से आने वाले नमाजी हाथों पर काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज अदा करेंगे और सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आपत्ति सरकार तक पहुंचाना है।

    जानकारी के अनुसार भोपाल के अलग अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोग जुमे की नमाज के लिए ताजुल मसाजिद पहुंचेंगे। नमाज के दौरान सभी लोग काली पट्टी बांधकर वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त करेंगे। आयोजकों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के निर्णय के विरोध में है।

    वक्फ बोर्ड के गठन के बाद से राजधानी में विरोध लगातार तेज होता गया है। सबसे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था। इसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर वर्तमान वक्फ बोर्ड को भंग करने और नियुक्ति संबंधी आदेश वापस लेने की मांग भी की गई। इस घटनाक्रम के बाद विरोध का दायरा लगातार बढ़ता गया।

    इसी बीच निकाह काजी मोहम्मद मआज़ खान नोमानी नदवी ने दीनी तालीमी बोर्ड के महासचिव पद से इस्तीफा देकर अपने वैचारिक मतभेद सार्वजनिक किए। उन्होंने वक्फ बोर्ड के कुछ सदस्यों के समर्थन पर असहमति जताते हुए अपने पद से अलग होने का फैसला लिया। उनके इस्तीफे के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया।

    पिछले दो दिनों के दौरान कई उलेमा और मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता के नाम पर वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम प्रतिनिधियों को शामिल कर रही है तो यही व्यवस्था अन्य धार्मिक संस्थाओं में भी समान रूप से लागू की जानी चाहिए। नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी इसी तरह की मांग उठाते हुए सभी धार्मिक संस्थाओं के लिए समान नीति अपनाने की बात कही।

    विवाद उस समय और गहरा गया जब मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के बाद कई धार्मिक पदाधिकारियों और संगठनों ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई। कुछ ने वीडियो संदेश जारी किए तो कई लोगों ने बयान देकर अपने विरोध को दर्ज कराया।

    आज ताजुल मसाजिद में होने वाला काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह अब तक हुए ज्ञापनों प्रदर्शन इस्तीफों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पहला बड़ा सामूहिक और प्रतीकात्मक आयोजन होगा। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है जबकि आयोजकों ने सभी लोगों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।

  • भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड

    भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है जहां लंबे समय से गंभीर बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे 60 वर्षीय बुजुर्ग ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है जबकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मृतक पिछले कई महीनों से पैरालिसिस की बीमारी से पीड़ित थे और इसी कारण गहरे अवसाद में चले गए थे।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान मनोहर लाल रैकवार पिता मोहनलाल रैकवार निवासी बेटा गांव बैरागढ़ के रूप में हुई है। वह पेशे से प्लंबर थे और अपने परिवार के साथ रहते थे। करीब आठ महीने पहले उन्हें पैरालिसिस का अटैक आया था जिसके बाद उनके शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं कर रहा था। बीमारी के चलते उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई थी और सामान्य काम भी दूसरों की मदद के बिना कर पाना मुश्किल हो गया था।

    परिजनों के अनुसार लगातार बिगड़ती सेहत और शारीरिक असहायता ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान कर दिया था। धीरे धीरे वह अवसाद की स्थिति में पहुंच गए थे और अधिकतर समय घर में ही रहते थे। बीमारी के कारण उनका सामाजिक और पेशेवर जीवन भी प्रभावित हो गया था जिससे उनकी चिंता और बढ़ती चली गई।

    शुक्रवार सुबह जब उनकी पत्नी नींद से उठकर घर की पहली मंजिल पर पहुंचीं तो उन्होंने मनोहर लाल को पाइप के सहारे बनाए गए फंदे पर लटका देखा। यह दृश्य देखकर उन्होंने तुरंत शोर मचाया जिसके बाद आसपास रहने वाले रिश्तेदार और पड़ोसी मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर उन्हें नीचे उतारा लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना तत्काल बैरागढ़ थाना पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बीमारी और उससे उपजे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या की आशंका सामने आई है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि गंभीर बीमारी केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक चलने वाली शारीरिक समस्याएं कई बार व्यक्ति को अवसाद और निराशा की ओर धकेल देती हैं। ऐसे समय में परिवार और समाज का भावनात्मक सहयोग तथा समय पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से मानसिक तनाव अवसाद या निराशा से जूझ रहा हो तो उसकी भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। समय पर संवाद और चिकित्सकीय सहायता कई बार किसी की जिंदगी बचा सकती है।

  • RGPV में बड़ा फेरबदल परीक्षा संचालन की कमान फिर प्रो. संजीव शर्मा को विभागीय जांच की तैयारी शुरू

    RGPV में बड़ा फेरबदल परीक्षा संचालन की कमान फिर प्रो. संजीव शर्मा को विभागीय जांच की तैयारी शुरू


    भोपाल । राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। प्रो. अर्चना तिवारी से परीक्षा नियंत्रक सहित सभी अतिरिक्त जिम्मेदारियां वापस ले ली गई हैं जबकि प्रो. संजीव शर्मा को फिर से परीक्षा नियंत्रक बनाया गया है। विश्वविद्यालय ने विभागीय जांच की तैयारी के भी निर्देश दिए हैं।

    भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए परीक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जून जुलाई 2026 की परीक्षाओं के सुचारु संचालन को ध्यान में रखते हुए परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी प्रो. अर्चना तिवारी से वापस लेकर प्रो. संजीव शर्मा को सौंप दी है। आदेश जारी होते ही यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

    विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रो. अर्चना तिवारी को परीक्षा नियंत्रक के पद से मुक्त करने के साथ ही परीक्षा संबंधी सभी कार्यों से तत्काल प्रभाव से अलग कर दिया गया है। इतना ही नहीं उनके कार्यालय में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को भी परीक्षा से जुड़े कार्यों से अलग करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि परीक्षा संचालन पूरी तरह नई व्यवस्था के तहत किया जा सके।

    प्रशासनिक फेरबदल केवल परीक्षा नियंत्रक के पद तक सीमित नहीं रहा। विश्वविद्यालय ने प्रो. अर्चना तिवारी को स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के प्रभारी निदेशक पद से भी हटा दिया है। उनकी जगह डॉ. जितेन्द्र अग्रवाल को अगले आदेश तक प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा प्रो. तिवारी से डायरेक्टर आईक्यूएसी सहित सभी अतिरिक्त प्रशासनिक दायित्व भी वापस ले लिए गए हैं।

    विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जून जुलाई परीक्षा सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा से बचने और परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से प्रो. संजीव शर्मा को दोबारा परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा और परीक्षा संचालन की पूरी जिम्मेदारी अब उनके पास होगी।

    इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विभागीय जांच की तैयारी है। आदेश की प्रतिलिपि में उपकुलसचिव स्थापना को निर्देश दिए गए हैं कि प्रो. अर्चना तिवारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने जांच अधिकारी नियुक्त करने और आरोप पत्र जारी करने के लिए अलग से प्रस्ताव तैयार किया जाए। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल जिम्मेदारियों में बदलाव तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि मामले की विस्तृत जांच भी कराना चाहता है।

    जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय जांच समिति की अंतरिम रिपोर्ट मिलने के बाद की गई है। समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में माना है कि परीक्षा प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने परीक्षा संचालन में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने में अपेक्षित स्तर की सावधानी नहीं बरती गई। इसी आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रशासनिक बदलाव का निर्णय लिया।

    विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश कुलपति की स्वीकृति से जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है। हालांकि आदेश में प्रस्तावित विभागीय जांच के विस्तृत कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है लेकिन प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब सभी की नजर विभागीय जांच की आगामी प्रक्रिया और उसकी अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।