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  • पटना SP का वीडियो वायरल, बोले- ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा’, यह कहकर खुद सबसे आगे दौड़े

    पटना SP का वीडियो वायरल, बोले- ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा’, यह कहकर खुद सबसे आगे दौड़े


    पटना। बिहार की राजधानी पटना में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक (SP) संकेत कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में वह पुलिसकर्मियों को सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं, ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोड़ूंगा।’ इसके कुछ ही सेकंड बाद वह खुद सबसे आगे बढ़कर प्रदर्शनकारियों की ओर दौड़ते दिखाई देते हैं।

    यही वीडियो पूरे दिन सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना रहा। कुछ लोगों ने इसे पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने वाला नेतृत्व बताया, जबकि कई लोगों ने उनके शब्दों और शैली पर सवाल भी उठाए। फिलहाल इस वायरल वीडियो को लेकर पटना पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    वीडियो में क्या दिखा?
    वायरल वीडियो में जेपी गोलंबर के पास का तनावपूर्ण माहौल दिखाई देता है। छात्र प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग की ओर तेजी से बढ़ते नजर आते हैं, जबकि पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती है। इसी दौरान SP संकेत कुमार अपने जवानों के बीच पहुंचकर ऊंची आवाज में चेतावनी देते हैं। इसके बाद वह खुद पुलिस टीम के साथ आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारियों की दिशा में दौड़ पड़ते हैं। वीडियो के यही कुछ सेकंड सबसे ज्यादा साझा किए जा रहे हैं।

    क्यों कर रहे थे छात्र प्रदर्शन?
    गुरुवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) सहित कई छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पटना के जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन किया। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया गया, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। भीड़ के आगे बढ़ने पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हुई और देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए।

    लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस
    स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। इसके बाद लाठीचार्ज किया गया, फिर वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों की तरफ से पथराव की भी सूचना सामने आई। इस झड़प में गांधी मैदान थाना प्रभारी और एक महिला पुलिसकर्मी घायल हो गईं। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। काफी देर तक जेपी गोलंबर और आसपास का इलाका तनावपूर्ण बना रहा।

    मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ी भीड़
    छात्रों का एक बड़ा समूह मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगा था। पुलिस पहले से अलर्ट थी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री आवास से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। जब भीड़ पीछे नहीं हटी, तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाया। इसके बाद धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए, हालांकि राजधानी के कई हिस्सों में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

    राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
    पटना की घटना के बाद बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। इसी दिन पटना में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प को लेकर दरभंगा में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। लहेरियासराय टावर चौक पर भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के झंडे के साथ सड़क पर उतरे और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की।

    भाजपा जिला अध्यक्ष ने लगाए आरोप
    दरभंगा भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य नारायण मन्ना ने आरोप लगाया कि पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक विरोध की सीमा से बाहर की घटना है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।

  • आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले

    आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले


    नई दिल्‍ली । आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में कोरोना के मामले सामने आने के बाद बिहार में भी मामले सामने आ रहे हैं. बिहार के भागलपुर जिले में एक 65 साल के बुजुर्ग और उनकी 35 साल की बेटी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. दोनों को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल यानी जेएलएनएमसीएच में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है. अस्पताल अधीक्षक एचपी दुबे ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. शुरुआत में दुबे ने दूसरे मरीज को बुजुर्ग की पत्नी बताया था, लेकिन बाद में उन्होंने साफ किया कि वह उनकी बेटी हैं.

    अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक बुजुर्ग की तबीयत 15 जुलाई को बिगड़ी थी. शुरुआत में उनका इलाज एक निजी क्लिनिक में हुआ, लेकिन कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर उन्हें जेएलएनएमसीएच रेफर किया गया.

    रविवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और आरटी-पीसीआर जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद जब उनके संपर्क में आए लोगों की जांच की गई तो उनकी बेटी भी पॉजिटिव पाई गईं.

    अस्पताल अधीक्षक दुबे ने बताया कि दोनों मरीजों को गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया है और डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी हालत पर नजर रख रही है और इलाज कर रही है. उन्होंने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया है और जिला कार्यक्रम प्रबंधक को निर्देश दिया गया है कि दोनों मरीजों के आसपास रहने वाले लोगों की भी जांच कराई जाए.

    भागलपुर जिला प्रशासन ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर दोनों पॉजिटिव मामलों की पुष्टि की है. जेएलएनएमसीएच के मेडिसिन विभाग के प्रमुख राजकमल चौधरी ने कहा कि दोनों मरीजों की हालत स्थिर है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है. जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें लेकिन घबराएं नहीं. प्रशासन ने कहा कि सही सावधानी और समय पर इलाज से कोरोना के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

  • बिहार-बंगाल समेत पूर्वोत्तर में आज भारी बारिश का अलर्ट… अन्य हिस्सों में साफ रहेगा मौसम

    बिहार-बंगाल समेत पूर्वोत्तर में आज भारी बारिश का अलर्ट… अन्य हिस्सों में साफ रहेगा मौसम


    नई दिल्ली।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार, 14 जुलाई को पूर्वोत्तर भारत (Northeast India), बिहार (Bihar) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में एक और दिन भारी बारिश (Heavy rain) का अनुमान लगाया है. वहीं उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून की गतिविधियां कमजोर रहने की उम्मीद है।

    मौसम का यह पैटर्न दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में चल रहे ठहराव को दिखाता है, जिसमें मॉनसून ट्रफ हिमालय की तलहटी के करीब खिसक रही है. नतीजतन, भारी बारिश की गतिविधियां देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में केंद्रित हो गई हैं, जबकि अन्य बड़े हिस्सों में बारिश कमजोर पड़ गई है।

    IMD के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों तक पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहेगी।

    सबसे अधिक बारिश मेघालय में होने की उम्मीद जताई जा रही है, जहां कुछ जगहों पर 20 सेमी से अधिक बारिश हो सकती है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश की संभावना है.

    यह अनुमान पिछले 24 घंटों में हुई भारी बारिश के बाद लगाया गया है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बहुत ज़्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय और त्रिपुरा में बहुत भारी बारिश हुई है. अरुणाचल प्रदेश, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से भी 7 से 11 सेमी के बीच भारी बारिश की सूचना मिली है.

    IMD ने इस लगातार बारिश का कारण कई सक्रिय मौसम प्रणालियों को बताया है, जिनमें श्री गंगानगर से मणिपुर तक फैली मॉनसून ट्रफ, दक्षिण बांग्लादेश, उत्तरी बंगाल की खाड़ी और पूर्वी बांग्लादेश के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन, और उत्तर-पश्चिम बिहार से मणिपुर तक फैली एक ट्रफ शामिल हैं. मध्य पाकिस्तान के ऊपर बना एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) भी उत्तरी भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है.

  • राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    नई दिल्ली । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पिछले कुछ समय से सार्वजनिक गतिविधियों में अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच पार्टी ने बिहार की राजधानी पटना में 15 जुलाई को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है। अब यह कार्यक्रम 17 जुलाई को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित किए जाने की तैयारी की जा रही है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ‘छात्रों की गूंज’ अभियान कांग्रेस द्वारा शिक्षा से जुड़े मुद्दों और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत राहुल गांधी को विभिन्न राज्यों में छात्रों के साथ संवाद करना था। पटना में होने वाला कार्यक्रम भी इसी श्रृंखला का हिस्सा था, लेकिन अंतिम समय में इसके स्थगित होने से राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम को पटना से देहरादून स्थानांतरित करने के पीछे बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक चुनौतियां एक प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में प्रदेश इकाई के भीतर बढ़ी आंतरिक खींचतान को देखते हुए नेतृत्व ने कार्यक्रम के स्थान में बदलाव का निर्णय लिया। इसके बाद उत्तराखंड में आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

    इसी बीच राहुल गांधी की सार्वजनिक अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले करीब 20 दिनों से उनकी ओर से कोई सार्वजनिक कार्यक्रम, प्रेस संबोधन या सोशल मीडिया गतिविधि सामने नहीं आई है। पार्टी के भीतर से यह जानकारी सामने आई है कि वह विदेश यात्रा पर हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम या विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उनकी वापसी को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

    सूत्रों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति के कारण कांग्रेस को पहले से निर्धारित कई कार्यक्रमों में बदलाव करना पड़ा है। पटना के अलावा प्रयागराज में प्रस्तावित एक कार्यक्रम भी स्थगित किए जाने की चर्चा है। पार्टी अब आगामी आयोजनों की नई रूपरेखा तैयार कर रही है ताकि अभियान की गति प्रभावित न हो और विभिन्न राज्यों में निर्धारित कार्यक्रम समय पर आयोजित किए जा सकें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी राज्यों में कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व की सक्रिय मौजूदगी महत्वपूर्ण होगी। ऐसे समय में किसी भी बड़े कार्यक्रम के स्थगित होने से राजनीतिक संदेश पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर पार्टी का कहना है कि अभियान जारी रहेगा और आवश्यक परिस्थितियों के अनुसार कार्यक्रमों में बदलाव करना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।

    फिलहाल कांग्रेस की ओर से देहरादून में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां जारी हैं। पार्टी का उद्देश्य छात्रों से संवाद के माध्यम से शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है। वहीं राहुल गांधी की वापसी के बाद उनके आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक गतिविधियों पर भी सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पार्टी की ओर से आधिकारिक कार्यक्रमों की नई रूपरेखा सामने आने की संभावना है।

  • बिहार में अपराध पर सख्ती की बड़ी तैयारी, 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट से तेज होगी सुनवाई और समयबद्ध मिलेगा न्याय

    बिहार में अपराध पर सख्ती की बड़ी तैयारी, 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट से तेज होगी सुनवाई और समयबद्ध मिलेगा न्याय

    नई दिल्ली ।  बिहार सरकार ने अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार जल्द ही 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी, ताकि गंभीर आपराधिक मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से लंबित मामलों की संख्या घटेगी, न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में अपराध से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन और प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करना तथा अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सरकार का विश्वास है कि समय पर न्याय मिलने से आम लोगों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।

    राज्य सरकार के अनुसार इन विशेष अदालतों के माध्यम से हत्या, लूट, दुष्कर्म, अपहरण और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होने पर अदालतों पर बढ़ता बोझ भी कम होगा और पीड़ित पक्ष को अपेक्षाकृत कम समय में न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे न्यायिक प्रणाली की कार्यक्षमता में भी सुधार आने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि अपराधियों के खिलाफ त्वरित फैसले और समयबद्ध सजा कानून के प्रति सम्मान और भय दोनों को मजबूत करेंगे। न्याय मिलने में होने वाली अनावश्यक देरी अक्सर पीड़ितों और गवाहों के लिए चुनौती बनती है। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    बिहार सरकार का कहना है कि न्यायिक सुधार केवल अदालतों की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्य की कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से भी है। यदि गंभीर अपराधों का त्वरित निपटारा होगा तो अपराध करने वालों के बीच स्पष्ट संदेश जाएगा कि कानून का उल्लंघन करने पर शीघ्र कार्रवाई और सजा निश्चित है। इससे अपराध की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायता मिलने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का भी मानना है कि फास्ट ट्रैक अदालतें तभी अधिक प्रभावी साबित होंगी, जब इनके साथ पर्याप्त न्यायिक अधिकारी, अभियोजन तंत्र, पुलिस जांच और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। समयबद्ध सुनवाई के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होगा, ताकि मामलों के निस्तारण की गति बनी रहे और प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ सके।

    सरकार का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, तेज और भरोसेमंद बनाना है। 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि यह योजना निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लागू होती है तो इससे न केवल लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

  • मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा

    मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा


    पटना। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े गबन मामले के बाद बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने अपने अधीन आने वाले मंदिरों और मठों की वित्तीय निगरानी को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। परिषद ने अब सभी पंजीकृत मंदिरों और मठों से हर तीन महीने में आय-व्यय और खातों का विवरण लेने की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।

    परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन ने बताया कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अधीन करीब 4,500 मंदिर और मठ आते हैं। अब तक इन सभी संस्थानों का वर्ष में एक बार ऑडिट कराया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत त्रैमासिक स्तर पर भी खातों की समीक्षा की जाएगी, ताकि दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

    अब हर तिमाही होगी वित्तीय निगरानी
    प्रो. रणवीर नंदन के अनुसार, वार्षिक ऑडिट में मंदिरों और मठों को प्राप्त दान, उसके उपयोग और खर्च का विस्तृत रिकॉर्ड जांचा जाता है। परिषद यह सुनिश्चित करती है कि दान की राशि का उपयोग केवल मंदिरों और मठों के रखरखाव, विकास और आवश्यक कार्यों पर ही किया जाए।

    उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत हर तीन महीने में खातों का विवरण लेने से किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता की समय रहते पहचान की जा सकेगी और निगरानी व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी।

    प्रत्येक मंदिर की अपनी न्यास समिति
    परिषद अध्यक्ष ने बताया कि परिषद के अधीन आने वाले प्रत्येक मंदिर और मठ की अपनी अलग न्यास समिति होती है। यही समिति स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों और खर्च से जुड़े निर्णय लेती है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की भूमिका निर्माण और अन्य कार्यों के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने तथा प्रशासनिक निगरानी बनाए रखने की होती है।

    पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में पहल
    परिषद का मानना है कि नियमित वित्तीय समीक्षा से दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मंदिरों और मठों की वित्तीय व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया है।

    अयोध्या मामले के बाद बढ़ी सतर्कता
    अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला इन दिनों जांच के दायरे में है। शिकायत के आधार पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की जांच कर रहा है। इस प्रकरण में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि संबंधित ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

  • सुरक्षा घटाने के फैसले पर गरमाई सियासत, लालू यादव ने कहा- सब कुछ नीतीश कुमार ने ही करवाया

    सुरक्षा घटाने के फैसले पर गरमाई सियासत, लालू यादव ने कहा- सब कुछ नीतीश कुमार ने ही करवाया

    नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को नया मुद्दा दे दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

    बुधवार को लालू प्रसाद यादव ने अपनी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा वापस लिए जाने के मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका रही है। लालू यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और अब सभी की निगाहें सत्ताधारी दल की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

    दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध थी। सुरक्षा में बदलाव के फैसले के बाद दोनों नेताओं ने उन्हें उपलब्ध कराई गई नई सुरक्षा व्यवस्था स्वीकार करने के बजाय वापस करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही परिवार के अन्य प्रमुख सदस्यों ने भी सुरक्षा वापस कर दी। इस फैसले ने मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले ऐसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था जैसे प्रशासनिक निर्णयों को भी राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित है, जबकि सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल निर्धारित नियमों और समीक्षा प्रक्रिया के आधार पर तय किए जाते हैं।

    इस बीच पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि यदि भविष्य में उनके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उनके इस बयान ने विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। विपक्षी दल इस मामले को जनता के बीच प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं।

    आरजेडी लगातार इस फैसले का विरोध कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि राजनीतिक सम्मान और गरिमा से जुड़ा विषय है। पार्टी का आरोप है कि राज्य के वरिष्ठ नेताओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया है, वह उचित नहीं माना जा सकता। आरजेडी नेताओं ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग भी उठाई है।

    वहीं दूसरी ओर सरकार से जुड़े नेताओं का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण निर्धारित मानकों और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। उनके अनुसार इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक भावना या पक्षपात की गुंजाइश नहीं होती। हालांकि विपक्ष इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है और लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है।

    फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था का यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। साथ ही यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाती हैं तथा राजनीतिक दल इसे किस तरह जनता के बीच लेकर जाते हैं।

  • Bihar: वैशाली में बंद गोदाम में छुपा रखी थी 70 लाख की प्रतिबंधित सिरप जब्त… 175 कार्टन जब्त

    Bihar: वैशाली में बंद गोदाम में छुपा रखी थी 70 लाख की प्रतिबंधित सिरप जब्त… 175 कार्टन जब्त


    वैशाली।
    बिहार (Bihar) के वैशाली जिले (Vaishali district) से नशे के अवैध कारोबार (Illegal Drug Trade) का एक बड़ा मामला सामने आया है. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर औद्योगिक थाना क्षेत्र में स्थित सिपेट संस्था के पास एक बंद पड़े गोदाम में छापेमारी कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप (Banned Cough Syrup) बरामद किया है. इस कार्रवाई में पुलिस ने 175 कार्टन कफ सिरप जब्त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत 60 से 70 लाख रुपये बताई जा रही है. बरामद की गई कुल मात्रा करीब 2100 लीटर है।


    गोदाम के अंदर कार्टन में छिपाकर रखी गई थी सिरप

    जानकारी के अनुसार पुलिस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि इस इलाके में एक बंद गोदाम का इस्तेमाल अवैध रूप से नशीले पदार्थों के भंडारण के लिए किया जा रहा है. सूचना की पुष्टि होने के बाद सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने दंडाधिकारी की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर गोदाम की तलाशी ली. जब गोदाम को खोला गया तो अंदर रखे गए कार्टनों को देखकर पुलिस भी हैरान रह गई. वहां बड़ी संख्या में प्रतिबंधित कफ सिरप के कार्टन छिपाकर रखे गए थे।

    पुलिस ने सभी कार्टनों को जब्त कर लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है. हालांकि छापेमारी के दौरान मौके से किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकी. लेकिन जांच में यह पता चला है कि इस गोदाम को पटना निवासी आकाश कुमार नाम के व्यक्ति ने लीज पर ले रखा था. प्रारंभिक जांच में उसके इस अवैध कारोबार में संलिप्त होने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद उसके खिलाफ औद्योगिक थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।


    नशे के रूप में इस्तेमाल होती सिरफ

    सदर एसडीपीओ सुबोध कुमार ने बताया कि बरामद कफ सिरप की बड़ी खेप को नशे के रूप में अवैध इस्तेमाल के लिए जमा किया गया था. उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है कि यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाना था. इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध नशे के कारोबार को लेकर हड़कंप मच गया है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस पूरे रैकेट का खुलासा किया जाएगा और इसमें शामिल अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी.

  • बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार

    बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार


    मुजफ्फरपुर।
    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (Medical Entrance Examination) NEET का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. पिछले महीने ही पेपर लीक (Paper leak) के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे. मामला इतना बढ़ा कि परीक्षा को लेकर बड़े स्तर पर जांच शुरू हुई, कई गिरफ्तारियां हुईं और कई राज्यों में छापेमारी तक हुई. अब जबकि 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित होने जा रही है, उससे पहले बिहार (Bihar) से सामने आई एक घटना ने फिर अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है.

    मुजफ्फरपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो NEET परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों और उनके परिजनों से ऑनलाइन ठगी (Online Fraud) कर रहा था. गिरोह टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था. पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले गिरोह के मुख्य आरोपी को जेल भेजा जा चुका है. अब तक कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।


    टेलीग्राम पर बिक रहा था फर्जी पेपर

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया पर ऐसे ग्रुप और चैनल चला रहे थे, जहां NEET परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था. छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनके पास परीक्षा से पहले ही पेपर पहुंच जाएगा और इसके बदले मोटी रकम मांगी जाती थी. परीक्षा की तैयारी में जुटे हजारों छात्र और उनके परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में ऐसे झांसों का शिकार बन जाते थे. आरोपियों ने इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर ठगी का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।


    एक सूचना और खुल गई पूरी परत

    मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के अनुसार, 2 जून को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से संचालित एक गिरोह NEET परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर उसे टेलीग्राम के जरिए बेच रहा है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बालूघाट स्थित एक किराये के मकान पर छापेमारी की. वहां से गिरोह के मुख्य आरोपी मनीष झा को गिरफ्तार किया गया. तलाशी के दौरान उसके कब्जे से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुआ. शुरुआती जांच में ही कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई।


    बनाई गई विशेष जांच टीम

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया. पुलिस अधीक्षक नगर के पर्यवेक्षण और एएसपी नगर-1 के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया. मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंकिंग लेनदेन की पड़ताल के बाद पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में सफलता मिली. लगातार चलाए गए अभियान के दौरान नगर थाना क्षेत्र से हर्ष, अमन कुमार और कन्हैया कुमार उर्फ मानव को गिरफ्तार किया गया. वहीं सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से हर्ष कनोडिया को दबोच लिया गया।


    पूछताछ में खुला ठगी का तरीका

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे टेलीग्राम के माध्यम से छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क करते थे. उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि परीक्षा से पहले असली प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा. आरोपी पहले कुछ नमूना सामग्री भेजते थे और फिर ऑनलाइन भुगतान की मांग करते थे. रकम मिलने के बाद या तो फर्जी प्रश्नपत्र भेज दिया जाता था या फिर संपर्क तोड़ दिया जाता था. जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से प्राप्त धनराशि मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती थी, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।


    मोबाइल से मिले अहम सुराग

    गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. पुलिस अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है. माना जा रहा है कि इनके जरिए कई राज्यों के छात्रों और अभिभावकों से संपर्क किया गया था. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं. पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है।


    21 जून की परीक्षा से पहले अलर्ट

    अब जबकि 21 जून को परीक्षा आयोजित होनी है, पुलिस और प्रशासन अभ्यर्थियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि कोई भी संस्था, व्यक्ति या सोशल मीडिया चैनल परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करता है तो उस पर भरोसा न करें. विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया पर सक्रिय ऐसे गिरोह छात्रों की मानसिक स्थिति और भविष्य की चिंता का फायदा उठाते हैं. इसलिए किसी भी संदिग्ध संदेश, लिंक या ऑफर से बचना जरूरी है।


    पुलिस की चेतावनी

    पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. मामले में अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. फिलहाल मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि परीक्षा सीजन शुरू होते ही साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को किसी शॉर्टकट के बजाय अपनी मेहनत और तैयारी पर भरोसा करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

  • चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

    चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । देश के सर्राफा और कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजारों से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) तक चांदी के दाम दबाव में दिखाई दिए, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच बाजार की दिशा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाल के दिनों में लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही चांदी में आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    5 जून 2026 के कारोबारी सत्र में देश के कई प्रमुख बाजारों में चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के सर्राफा बाजारों में चांदी के भाव पिछले सत्रों की तुलना में नीचे आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल स्थानीय मांग और आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी बड़ा प्रभाव है।

    कमोडिटी बाजार में भी चांदी के वायदा कारोबार पर दबाव साफ दिखाई दिया। MCX पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों में प्रति किलोग्राम कई हजार रुपये तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि विभिन्न एक्सपायरी और कॉन्ट्रैक्ट अवधि के अनुसार दरों में अंतर बना रहा, फिर भी पूरे बाजार में कमजोरी का रुख स्पष्ट दिखाई दिया।

    स्थानीय स्पॉट मार्केट में भी चांदी की कीमतें नरम रहीं। व्यापारियों के अनुसार हाल के उच्च स्तरों के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है। इसके कारण खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन निवेशकों के लिए बाजार की दिशा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसी धातुएं अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों को सुरक्षित रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

    भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। हालांकि ऐसे समय में आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का व्यवहार अपेक्षाकृत सतर्क बना हुआ है।

    कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, अमेरिकी डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार के संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।

    चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है जो निवेश या आभूषण खरीदारी की योजना बना रहे हैं। वहीं निवेशकों के लिए यह समय बाजार की गतिविधियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।