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  • Bihar के सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी आग…. मची भगदड़

    Bihar के सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी आग…. मची भगदड़


    सहरसा।
    बिहार (Bihar) के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन (Simri Bakhtiyarpur Station) पर सोमवार तड़के बड़ा रेल हादसा टल गया। समस्तीपुर से सहरसा जा रही पैसेंजर ट्रेन (Passenger Train) (संख्या 63344) के इंजन (Engine) और उससे सटी एक बोगी में अचानक आग (Massive Fire) लग गई। घटना सुबह करीब 3 बजे की है। अंधेरे में ट्रेन से उठती लपटों और धुएं को देखकर स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया और यात्रियों के बीच अफरातफरी फैल गई।

    जानकारी के अनुसार, ट्रेन जैसे ही सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंची, उसके इंजन से धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लपटें पास की एक बोगी तक पहुंच गईं। उस समय अधिकांश यात्री नींद में थे। आग और धुएं का पता चलते ही बोगी में चीख-पुकार मच गई और यात्री जान बचाने के लिए बाहर निकलने लगे। स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों की मुस्तैदी से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    सूचना मिलते ही आरपीएफ, स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने में दमकल कर्मियों को करीब ढाई घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। सुबह लगभग 5:30 बजे आग पूरी तरह बुझा दी गई। इसके बाद सुबह 6 बजे के बाद रेल यातायात सामान्य हो सका।

    सिमरी बख्तियारपुर के स्टेशन अधीक्षक संजय कुमार सज्जन ने बताया कि घटना के कारण रेल परिचालन प्रभावित हुआ। इसके चलते कोसी एक्सप्रेस (सहरसा–पटना), जानकी एक्सप्रेस (मनिहारी–जयनगर), सहरसा–समस्तीपुर पैसेंजर और श्रावणी स्पेशल (सहरसा–देवघर) निर्धारित समय से देरी से चलीं। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करते रहे। रेलवे ने घटना के वास्तविक कारणों की जांच शुरू कर दी है।

  • राज्यसभा और विधान परिषद के फैसलों से तेज हुई सियासी बहस, क्या गठबंधन संतुलन साधने में भाजपा की नई रणनीति?

    राज्यसभा और विधान परिषद के फैसलों से तेज हुई सियासी बहस, क्या गठबंधन संतुलन साधने में भाजपा की नई रणनीति?

    नई दिल्ली । बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के हालिया राजनीतिक फैसलों ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। राज्यसभा और विधान परिषद की दो सीटों से जुड़े निर्णयों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भाजपा गठबंधन सहयोगियों को मजबूत करने की रणनीति के तहत अपने परंपरागत समर्थक वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रही है। इन घटनाक्रमों को आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    चर्चा की शुरुआत उस समय हुई जब नवादा से लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद विवेक ठाकुर द्वारा खाली की गई राज्यसभा सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को भेजा गया। इसके बाद विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे के पश्चात सहयोगी दल के नेता और मंत्री दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ। लगातार दो महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर सहयोगी दल के नेताओं को मिलने के बाद विभिन्न राजनीतिक हलकों में इस रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा लंबे समय से बिहार में अपने पारंपरिक सामाजिक आधार के साथ-साथ व्यापक सामाजिक संतुलन की रणनीति पर काम करती रही है। ऐसे में पिछड़े वर्ग के प्रभावशाली समुदायों को प्रतिनिधित्व देना आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक भूमिका को भी इसी व्यापक सामाजिक और गठबंधन समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है।

    दूसरी ओर, पार्टी के परंपरागत समर्थक माने जाने वाले भूमिहार समाज को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह समुदाय कई दशकों से भाजपा के प्रमुख समर्थक वर्गों में शामिल रहा है और राज्य के अनेक विधानसभा क्षेत्रों में उसका प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पार्टी के कुछ निर्णयों को लेकर समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच प्रतिनिधित्व संबंधी सवाल उठ रहे हैं।

    हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के विभागीय बदलाव और अन्य संगठनात्मक फैसलों को भी कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसी बहस से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन निर्णयों को लेकर कोई सार्वजनिक असहमति या आधिकारिक विवाद सामने नहीं आया है। वहीं पार्टी के भीतर भी किसी बड़े नेता ने इन फैसलों पर खुलकर विरोध दर्ज नहीं कराया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे सामाजिक रूप से विविध राज्य में चुनावी सफलता केवल किसी एक समुदाय के समर्थन पर निर्भर नहीं होती। गठबंधन की मजबूती, विभिन्न सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों के बीच समन्वय चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसी कारण कई बार राजनीतिक दल अपने संगठनात्मक हितों के साथ-साथ गठबंधन की आवश्यकताओं को भी प्राथमिकता देते हैं।

    फिलहाल यह स्पष्ट संकेत नहीं हैं कि इन फैसलों का पार्टी के परंपरागत वोट बैंक पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है। हालांकि राजनीतिक चर्चाओं और सामाजिक स्तर पर इस विषय पर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सीटों के वितरण से इस बहस की दिशा काफी हद तक तय होगी।

    बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन सहयोगियों और अपने पारंपरिक समर्थक वर्ग के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। आने वाले समय में टिकट वितरण, चुनावी अभियान और सामाजिक समीकरणों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को किस प्रकार आगे बढ़ाती है और इन राजनीतिक फैसलों का चुनावी परिदृश्य पर कितना प्रभाव पड़ता है।

  • सीवान हिंसा पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, छात्रों के साथ कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री से पूछा बड़ा सवाल

    सीवान हिंसा पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, छात्रों के साथ कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री से पूछा बड़ा सवाल

    नई दिल्ली । बिहार के सीवान जिले में बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा और फायरिंग की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए छात्रों के साथ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलने और बड़ी संख्या में छात्रों की गिरफ्तारी तथा उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और उन्हें रिहा करने संबंधी आश्वासन का क्या हुआ। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और सरकार अपने वादों से पीछे हट रही है।

    कांग्रेस नेता ने दिल्ली और बिहार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि विभिन्न राज्यों में छात्रों के आंदोलनों के प्रति एक जैसी कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ सख्ती की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने छात्रों से जुड़े मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    यह राजनीतिक प्रतिक्रिया उस समय सामने आई जब बिहार बंद के दौरान सीवान में प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और फायरिंग की घटनाओं के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घटना में तीन प्रदर्शनकारी गोली लगने से घायल हुए, जबकि पथराव और झड़प के दौरान जिला पुलिस अधीक्षक सहित कई पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

    घायल प्रदर्शनकारियों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा गया। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और स्थिति पर लगातार नजर रखी। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई।

    फायरिंग को लेकर विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर एके-47 से गोलियां चलाई गईं। हालांकि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। जिला पुलिस अधीक्षक ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदर्शनकारियों को गोली किसकी ओर से लगी। उन्होंने बताया कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्य सामने लाए जाएंगे।

    पुलिस के अनुसार, हिंसा और उपद्रव के मामले में अब तक 65 लोगों को हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से घटना की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    सीवान की घटना ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। एक ओर विपक्ष सरकार की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। अब सभी की नजर जांच के परिणाम और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • क्रिकेट में नाम अब पुलिस सेवा में सम्मान बिहार के आकाशदीप और मुकेश कुमार को मिला डीएसपी का पद

    क्रिकेट में नाम अब पुलिस सेवा में सम्मान बिहार के आकाशदीप और मुकेश कुमार को मिला डीएसपी का पद


    नई दिल्ली। बिहार के खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक दिन तब बना जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर आकाशदीप और मुकेश कुमार को राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में उप पुलिस अधीक्षक यानी डीएसपी पद पर नियुक्त किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह के दौरान दोनों खिलाड़ियों सहित कुल 21 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। यह नियुक्तियां मेडल लाओ नौकरी पाओ योजना के तहत दी गईं जिसका उद्देश्य उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मानजनक सरकारी सेवा प्रदान कर खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है।

    समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का यह कदम खिलाड़ियों के सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि पहली बार बिहार में किसी खिलाड़ी को डीएसपी जैसे उच्च पद पर नियुक्त किया गया है और इससे युवा खिलाड़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की नई प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार के खिलाड़ी ओलंपिक एशियन गेम्स कॉमनवेल्थ गेम्स विश्व कप और आईपीएल जैसे बड़े मंचों पर देश और राज्य का गौरव बढ़ाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने खेलों के विकास को लेकर सरकार की योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आगामी 15 सितंबर से पंचायत स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान अभियान शुरू किया जाएगा। चयनित खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि नालंदा में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना और राज्य में खेल अधोसंरचना के विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी घोषणा की कि पटना के मोइनुल हक स्टेडियम का पुनर्विकास कराया जा रहा है और इसके संचालन की जिम्मेदारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को सौंपी गई है। साथ ही पूरे बिहार में पिछले दो वर्षों के दौरान पांच हजार खेल मैदानों का निर्माण पूरा किया जा चुका है ताकि गांव स्तर तक खेल सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।

    नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद तेज गेंदबाज आकाशदीप ने इसे अपने जीवन का गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि वह रोहतास जिले के एक छोटे से गांव से आते हैं और शुरुआती दिनों में सीमित संसाधनों के बीच क्रिकेट खेलते थे। उस समय खेल को करियर के रूप में ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था लेकिन अब सरकार की ऐसी योजनाओं से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा। उन्होंने सासाराम में आधुनिक मल्टी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने की इच्छा भी जताई ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने भी बिहार सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला खिलाड़ियों के लिए बेहद प्रेरणादायक है। उनके अनुसार बिहार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है बल्कि जरूरत केवल उचित अवसर और बेहतर प्रशिक्षण की है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की नई नीति आने वाले वर्षों में राज्य से बड़ी संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    बिहार सरकार की यह पहल केवल सरकारी नियुक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि यह संदेश भी देती है कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मान और सुरक्षित भविष्य दोनों मिल सकते हैं। इससे राज्य के हजारों युवा खेलों को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित होंगे और बिहार खेलों के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा।

  • NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट ऐलान का JDU ने किया समर्थन, विपक्ष को दी सदन में चर्चा की नसीहत

    NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट ऐलान का JDU ने किया समर्थन, विपक्ष को दी सदन में चर्चा की नसीहत

    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा के बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इस कदम से दोषियों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का रास्ता मजबूत होगा। साथ ही यह भी उम्मीद जताई गई कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें कठोर सजा मिलेगी।

    जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि नीट पेपर लीक केवल परीक्षा में शामिल छात्रों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे लाखों अभिभावकों की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस घटना को लेकर चिंता और नाराजगी का माहौल है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा यह संदेश देती है कि सरकार मामले को गंभीरता से लेकर त्वरित न्याय सुनिश्चित करना चाहती है।

    उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाया जाए। यदि न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी तो इससे छात्रों और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे संयम बनाए रखें और न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखें, क्योंकि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की पूरी संभावना है।

    जेडीयू ने इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। नीरज कुमार ने कहा कि यदि इस विषय पर संसद के भीतर विस्तार से चर्चा होती तो पूरे मामले के अलग-अलग पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श संभव होता। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि सभी दलों को मिलकर परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राज्यों में अतीत में भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों से सबक लेते हुए राजनीतिक दलों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उनका मानना है कि परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले संगठित नेटवर्क और आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर साझा रणनीति तैयार की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    नीट पेपर लीक को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। विभिन्न शहरों में छात्र निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा को सरकार की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है तथा इससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा किस हद तक बहाल हो पाता है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक विमर्श को भी नई दिशा दे सकती हैं।

  • Bihar: मुजफ्फरपुर में गोल्ड फ्लैक के नाम से नकली सिगरेट बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़… 5 करोड़ की मशीनें जब्त

    Bihar: मुजफ्फरपुर में गोल्ड फ्लैक के नाम से नकली सिगरेट बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़… 5 करोड़ की मशीनें जब्त


    मुजफ्फरपुर।
    बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर जिले (Muzaffarpur district) में पुलिस ने ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली सिगरेट (Fake cigarettes) बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री (Illegal Factory) का भंडाफोड़ किया है. तुर्की थाना क्षेत्र के लक्की नंदलालपुर गांव में की गई इस कार्रवाई में लाखों रुपये की तैयार नकली सिगरेट, भारी मात्रा में कच्चा माल और करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनें जब्त की गई हैं।

    यह कार्रवाई पश्चिम-2 के एसडीपीओ अनिमेष चंद्र ज्ञानी और तुर्की थाना प्रभारी पंकज कुमार के नेतृत्व में की गई. पुलिस के अनुसार, आईटीसी की इंटेलिजेंस टीम पिछले एक महीने से इस फैक्ट्री की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी. पुख्ता जानकारी मिलने के बाद कंपनी के अधिकारियों ने तुर्की थाना पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पुलिस और कंपनी की टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी की।

    छापेमारी के दौरान फैक्ट्री और उससे जुड़े दो गोदामों से करीब 25 लाख रुपये मूल्य की गोल्ड फ्लैक ब्रांड के नाम पर तैयार की गई नकली सिगरेट बरामद हुई. इसके अलावा अन्य कंपनियों के नाम पर बनाई गई 10 से 12 लाख रुपये मूल्य की नकली सिगरेट भी जब्त की गई।

    पुलिस ने फैक्ट्री में लगी करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की मेड इन वियतनाम सिगरेट निर्माण मशीनें भी जब्त की हैं. इसके अलावा एक टाटा मैजिक, एक मालवाहक ऑटो, करीब सात मोटरसाइकिल और सिगरेट बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी बरामद किए गए. पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूर मौके से फरार हो गए. पुलिस ने पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेकर जब्त सामान की सूची तैयार की और आगे की जांच शुरू कर दी है।

    पश्चिम-2 के एसडीपीओ अनिमेष चंद्र ज्ञानी ने बताया कि फैक्ट्री में एक नामी ब्रांड के नाम और उसके कॉपीराइट का अवैध इस्तेमाल कर नकली सिगरेट तैयार की जा रही थी. इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।


    पुलिस की भनक लगते ही फैक्ट्री से फरार हुए मजदूर

    छापेमारी के बाद संबंधित कंपनी की लीगल ऑथराइज्ड टीम ने भी मौके का निरीक्षण किया. प्रारंभिक जांच के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट कंपनी मुख्यालय को भेज दी है. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कॉपीराइट का उल्लंघन कर नकली उत्पाद बनाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • पटना SP का वीडियो वायरल, बोले- ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा’, यह कहकर खुद सबसे आगे दौड़े

    पटना SP का वीडियो वायरल, बोले- ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोडूंगा’, यह कहकर खुद सबसे आगे दौड़े


    पटना। बिहार की राजधानी पटना में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक (SP) संकेत कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में वह पुलिसकर्मियों को सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं, ‘पीछे हटे तो नौकरी करने लायक नहीं छोड़ूंगा।’ इसके कुछ ही सेकंड बाद वह खुद सबसे आगे बढ़कर प्रदर्शनकारियों की ओर दौड़ते दिखाई देते हैं।

    यही वीडियो पूरे दिन सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना रहा। कुछ लोगों ने इसे पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने वाला नेतृत्व बताया, जबकि कई लोगों ने उनके शब्दों और शैली पर सवाल भी उठाए। फिलहाल इस वायरल वीडियो को लेकर पटना पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    वीडियो में क्या दिखा?
    वायरल वीडियो में जेपी गोलंबर के पास का तनावपूर्ण माहौल दिखाई देता है। छात्र प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग की ओर तेजी से बढ़ते नजर आते हैं, जबकि पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती है। इसी दौरान SP संकेत कुमार अपने जवानों के बीच पहुंचकर ऊंची आवाज में चेतावनी देते हैं। इसके बाद वह खुद पुलिस टीम के साथ आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारियों की दिशा में दौड़ पड़ते हैं। वीडियो के यही कुछ सेकंड सबसे ज्यादा साझा किए जा रहे हैं।

    क्यों कर रहे थे छात्र प्रदर्शन?
    गुरुवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) सहित कई छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पटना के जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन किया। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया गया, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। भीड़ के आगे बढ़ने पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हुई और देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए।

    लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस
    स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। इसके बाद लाठीचार्ज किया गया, फिर वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों की तरफ से पथराव की भी सूचना सामने आई। इस झड़प में गांधी मैदान थाना प्रभारी और एक महिला पुलिसकर्मी घायल हो गईं। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। काफी देर तक जेपी गोलंबर और आसपास का इलाका तनावपूर्ण बना रहा।

    मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ी भीड़
    छात्रों का एक बड़ा समूह मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगा था। पुलिस पहले से अलर्ट थी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री आवास से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। जब भीड़ पीछे नहीं हटी, तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाया। इसके बाद धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए, हालांकि राजधानी के कई हिस्सों में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

    राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
    पटना की घटना के बाद बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। इसी दिन पटना में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प को लेकर दरभंगा में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। लहेरियासराय टावर चौक पर भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के झंडे के साथ सड़क पर उतरे और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की।

    भाजपा जिला अध्यक्ष ने लगाए आरोप
    दरभंगा भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य नारायण मन्ना ने आरोप लगाया कि पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक विरोध की सीमा से बाहर की घटना है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।

  • आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले

    आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले


    नई दिल्‍ली । आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में कोरोना के मामले सामने आने के बाद बिहार में भी मामले सामने आ रहे हैं. बिहार के भागलपुर जिले में एक 65 साल के बुजुर्ग और उनकी 35 साल की बेटी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. दोनों को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल यानी जेएलएनएमसीएच में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है. अस्पताल अधीक्षक एचपी दुबे ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. शुरुआत में दुबे ने दूसरे मरीज को बुजुर्ग की पत्नी बताया था, लेकिन बाद में उन्होंने साफ किया कि वह उनकी बेटी हैं.

    अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक बुजुर्ग की तबीयत 15 जुलाई को बिगड़ी थी. शुरुआत में उनका इलाज एक निजी क्लिनिक में हुआ, लेकिन कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर उन्हें जेएलएनएमसीएच रेफर किया गया.

    रविवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और आरटी-पीसीआर जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद जब उनके संपर्क में आए लोगों की जांच की गई तो उनकी बेटी भी पॉजिटिव पाई गईं.

    अस्पताल अधीक्षक दुबे ने बताया कि दोनों मरीजों को गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया है और डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी हालत पर नजर रख रही है और इलाज कर रही है. उन्होंने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया है और जिला कार्यक्रम प्रबंधक को निर्देश दिया गया है कि दोनों मरीजों के आसपास रहने वाले लोगों की भी जांच कराई जाए.

    भागलपुर जिला प्रशासन ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर दोनों पॉजिटिव मामलों की पुष्टि की है. जेएलएनएमसीएच के मेडिसिन विभाग के प्रमुख राजकमल चौधरी ने कहा कि दोनों मरीजों की हालत स्थिर है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है. जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें लेकिन घबराएं नहीं. प्रशासन ने कहा कि सही सावधानी और समय पर इलाज से कोरोना के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

  • बिहार-बंगाल समेत पूर्वोत्तर में आज भारी बारिश का अलर्ट… अन्य हिस्सों में साफ रहेगा मौसम

    बिहार-बंगाल समेत पूर्वोत्तर में आज भारी बारिश का अलर्ट… अन्य हिस्सों में साफ रहेगा मौसम


    नई दिल्ली।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार, 14 जुलाई को पूर्वोत्तर भारत (Northeast India), बिहार (Bihar) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में एक और दिन भारी बारिश (Heavy rain) का अनुमान लगाया है. वहीं उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून की गतिविधियां कमजोर रहने की उम्मीद है।

    मौसम का यह पैटर्न दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में चल रहे ठहराव को दिखाता है, जिसमें मॉनसून ट्रफ हिमालय की तलहटी के करीब खिसक रही है. नतीजतन, भारी बारिश की गतिविधियां देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में केंद्रित हो गई हैं, जबकि अन्य बड़े हिस्सों में बारिश कमजोर पड़ गई है।

    IMD के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों तक पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहेगी।

    सबसे अधिक बारिश मेघालय में होने की उम्मीद जताई जा रही है, जहां कुछ जगहों पर 20 सेमी से अधिक बारिश हो सकती है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश की संभावना है.

    यह अनुमान पिछले 24 घंटों में हुई भारी बारिश के बाद लगाया गया है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बहुत ज़्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय और त्रिपुरा में बहुत भारी बारिश हुई है. अरुणाचल प्रदेश, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से भी 7 से 11 सेमी के बीच भारी बारिश की सूचना मिली है.

    IMD ने इस लगातार बारिश का कारण कई सक्रिय मौसम प्रणालियों को बताया है, जिनमें श्री गंगानगर से मणिपुर तक फैली मॉनसून ट्रफ, दक्षिण बांग्लादेश, उत्तरी बंगाल की खाड़ी और पूर्वी बांग्लादेश के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन, और उत्तर-पश्चिम बिहार से मणिपुर तक फैली एक ट्रफ शामिल हैं. मध्य पाकिस्तान के ऊपर बना एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) भी उत्तरी भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है.

  • राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    नई दिल्ली । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पिछले कुछ समय से सार्वजनिक गतिविधियों में अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच पार्टी ने बिहार की राजधानी पटना में 15 जुलाई को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है। अब यह कार्यक्रम 17 जुलाई को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित किए जाने की तैयारी की जा रही है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ‘छात्रों की गूंज’ अभियान कांग्रेस द्वारा शिक्षा से जुड़े मुद्दों और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत राहुल गांधी को विभिन्न राज्यों में छात्रों के साथ संवाद करना था। पटना में होने वाला कार्यक्रम भी इसी श्रृंखला का हिस्सा था, लेकिन अंतिम समय में इसके स्थगित होने से राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम को पटना से देहरादून स्थानांतरित करने के पीछे बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक चुनौतियां एक प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में प्रदेश इकाई के भीतर बढ़ी आंतरिक खींचतान को देखते हुए नेतृत्व ने कार्यक्रम के स्थान में बदलाव का निर्णय लिया। इसके बाद उत्तराखंड में आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

    इसी बीच राहुल गांधी की सार्वजनिक अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले करीब 20 दिनों से उनकी ओर से कोई सार्वजनिक कार्यक्रम, प्रेस संबोधन या सोशल मीडिया गतिविधि सामने नहीं आई है। पार्टी के भीतर से यह जानकारी सामने आई है कि वह विदेश यात्रा पर हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम या विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उनकी वापसी को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

    सूत्रों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति के कारण कांग्रेस को पहले से निर्धारित कई कार्यक्रमों में बदलाव करना पड़ा है। पटना के अलावा प्रयागराज में प्रस्तावित एक कार्यक्रम भी स्थगित किए जाने की चर्चा है। पार्टी अब आगामी आयोजनों की नई रूपरेखा तैयार कर रही है ताकि अभियान की गति प्रभावित न हो और विभिन्न राज्यों में निर्धारित कार्यक्रम समय पर आयोजित किए जा सकें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी राज्यों में कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व की सक्रिय मौजूदगी महत्वपूर्ण होगी। ऐसे समय में किसी भी बड़े कार्यक्रम के स्थगित होने से राजनीतिक संदेश पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर पार्टी का कहना है कि अभियान जारी रहेगा और आवश्यक परिस्थितियों के अनुसार कार्यक्रमों में बदलाव करना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।

    फिलहाल कांग्रेस की ओर से देहरादून में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां जारी हैं। पार्टी का उद्देश्य छात्रों से संवाद के माध्यम से शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है। वहीं राहुल गांधी की वापसी के बाद उनके आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक गतिविधियों पर भी सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पार्टी की ओर से आधिकारिक कार्यक्रमों की नई रूपरेखा सामने आने की संभावना है।