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  • ‘मराठी मुंबई’ बचाने की चुनौती, किरीट सोमैया ने शिवसेना और विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

    ‘मराठी मुंबई’ बचाने की चुनौती, किरीट सोमैया ने शिवसेना और विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप


    मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM पर ‘मराठी मुंबई’ को ‘मुस्लिम मुंबई’ बनाने की साजिश का आरोप लगाया। सोमैया ने दावा किया कि 1947 में मुंबई की मुस्लिम आबादी 8.8% थी, जो 2011 तक बढ़कर 20.58% हो गई और वर्तमान में लगभग 25% तक पहुँच चुकी है। उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि 2050 तक मुस्लिम आबादी 30% और हिंदू आबादी 50% हो जाएगी।

    किरीट सोमैया ने शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट पर कोविड काल के दौरान कफन और बॉडी बैग घोटाले का भी आरोप लगाया।

    उन्होंने बताया कि पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने 1,500 रुपए में उपलब्ध बॉडी बैग की जगह 6,719 रुपए प्रति बैग की दर से ठेका कंपनी को दिया, जिससे 2,000 करोड़ रुपए का कथित घोटाला हुआ। सोमैया ने कहा कि किशोरी पेडनेकर इस मामले में जमानत पर हैं, बावजूद इसके उद्धव ठाकरे ने उन्हें चुनावी टिकट दिया।

    उन्होंने जोर देकर कहा, हम मुंबई को मुस्लिम नहीं होने देंगे। सोमैया ने जनसंख्या आंकड़ों, मेयर पद और चुनावी साजिशों को लेकर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।

  • उपेंद्र कुशवाहा की RLM पर संकट: तीन नाराज विधायक दिल्ली में BJP से मिले, पार्टी में टूट की अटकलें तेज!

    उपेंद्र कुशवाहा की RLM पर संकट: तीन नाराज विधायक दिल्ली में BJP से मिले, पार्टी में टूट की अटकलें तेज!




    नई दिल्ली।
     बिहार की सियासत में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के लिए संकट के बादल गहरे होते जा रहे हैं। पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के चार विधायकों में से तीन के नाराज चलने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। बाजपट्टी से रामेश्वर महतो, मधुबनी से माधव आनंद और दिनारा से आलोक कुमार सिंह की नाराजगी ने RLM के भीतर विभाजन की आशंका बढ़ा दी है।

    शपथ ग्रहण समारोह में असंतोष
    सूत्रों के अनुसार, नाराजगी की जड़ हालिया शपथ ग्रहण समारोह में देखने को मिली।

    उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को बिना सदन सदस्य के मंत्री बनवाया, जबकि तीनों विधायकों की उम्मीद थी कि उन्हें ही मंत्री बनाया जाएगा। इस फैसले से पार्टी के भीतर ठंडा माहौल बन गया और विधायकों ने असंतोष जाहिर करना शुरू कर दिया।

    दिल्ली में BJP से मुलाकात
    नाराज विधायकों की राजनीतिक सक्रियता चर्चा में आई। हाल ही में ये तीनों विधायक भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मिलने दिल्ली गए। इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में कयासों का बाजार गर्म कर दिया।

    खास बात यह है कि ये विधायक उपेंद्र कुशवाहा द्वारा आयोजित लिट्टी भोज कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए, जिससे उनकी असहमति और स्पष्ट हुई।

    एकजुटता की तस्वीर
    तीनों विधायकों ने दिल्ली में एक तस्वीर साझा की, जिसमें वे एक साथ बैठे नजर आए। तस्वीर के कैप्शन में लिखा हम सब एकजुट हैं, आज भी साथ हैं और आगे भी साथ रहेंगे। एनडीए की मजबूती और बिहार के सर्वांगीण विकास के संकल्प के साथ, हम साथ-साथ हैं। जय एनडीए। राजनीतिक विश्लेषक इसे संकेत मान रहे हैं कि ये विधायक कुशवाहा का साथ छोड़कर सीधे BJP में शामिल हो सकते हैं या पार्टी पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं।

    RLM में टूट की संभावना
    अब सवाल यह है कि क्या ये विधायक उपेंद्र कुशवाहा पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं? क्या वे BJP के साथ जा सकते हैं या अपना अलग गुट बना सकते हैं? विशेषज्ञ मानते हैं कि RLM के चार विधायकों में से तीन की नाराजगी पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर कर सकती है। कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता फिलहाल पार्टी के भीतर स्थिर सदस्य मानी जा रही हैं।

    महायुति गठबंधन पर असर
    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर ये विधायक कुशवाहा का साथ छोड़ते हैं, तो RLM की सियासी पकड़ कमजोर हो जाएगी और बिहार में महायुति गठबंधन संकट में पड़ सकता है। पार्टी नेतृत्व की रणनीति और विधायकों के फैसलों पर पूरी नजर रखी जा रही है।
    बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम साफ करता है कि छोटे दलों की आंतरिक असहमति बड़े गठबंधन को भी प्रभावित कर सकती है। RLM के भविष्य और उपेंद्र कुशवाहा की सियासी मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर उठाए गए कदम और विधायकों की गतिविधियां बिहार की सियासी दिशा तय करेंगी।

  • BJP में स्वागत है… CM मोहन यादव ने RSS की तारीफ पर दिग्विजय सिंह को दिया ऑफर

    BJP में स्वागत है… CM मोहन यादव ने RSS की तारीफ पर दिग्विजय सिंह को दिया ऑफर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने भाजपा (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) (Rashtriya Swayamsevak Sangh – RSS) की संगठनात्मक शक्ति की प्रशंसा करने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने दिग्विजय को राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री ने ठुकरा दिया।

    दिग्विजय सिंह ने शनिवार को आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक शक्ति की सराहना करते ‘एक्स’ पर एक पुरानी तस्वीर साझा की थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं तथा उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने पोस्ट में कहा था, ‘‘कोरा वेबसाइट पर मुझे यह फोटो मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।’’

    विवाद खड़ा होने पर सिंह ने कहा था कि उन्होंने केवल संगठन और इसकी शक्ति की तारीफ की है, अन्यथा वह आरएसएस और मोदी के घोर विरोधी हैं। दिग्विजय सिंह की ओर से आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक शक्ति की सराहना किए जाने के बारे में एक समाचार चैनल से बातचीत में मोहन यादव ने रविवार को इंदौर में कहा कि भाजपा है ही इस लायक कि उसकी तारीफ की जाए। उन्होंने कहा, ‘‘दिग्विजय सिंह जी को भी बधाई। आइए, भाजपा में आपका स्वागत है।’’

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के बाद रविवार शाम भोपाल पहुंचे दिग्विजय सिंह से जब मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से भाजपा में शामिल होने को लेकर दिए गए प्रस्ताव के बारे में पूछा गया तो वह ‘अरे छोड़िए’ कहकर आगे बढ़ गए। राजनीतिक हलकों में दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के रूप में देखा जा रहा है।

  • 200 लोग लाओ 2 करोड़ के काम पाओ' ग्वालियर प्रभारी मंत्री का पार्षदों को बड़ा ऑफरअमित शाह के दौरे की तैयारी

    200 लोग लाओ 2 करोड़ के काम पाओ' ग्वालियर प्रभारी मंत्री का पार्षदों को बड़ा ऑफरअमित शाह के दौरे की तैयारी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने आगामी 25 दिसंबर को प्रस्तावित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर कमर कस ली है। इस महत्वपूर्ण दौरे को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रभारी मंत्री ने एक अनोखा ऑफर पेश किया है। उन्होंने भाजपा पार्षद दल की बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो पार्षद कार्यक्रम में 200 लोगों की भीड़ लेकर आएगाउसके वार्ड में 2 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्ताव पास कराए जाएंगे।

    बाल भवन में हुई पार्षद दल की बैठक

    नगर निगम के बाल भवन स्थित नवीन टीएलसी कक्ष में आयोजित इस बैठक में प्रभारी मंत्री ने पार्षदों के साथ सीधा संवाद किया। बैठक का मुख्य एजेंडा अमित शाह के भव्य स्वागत और जनसभा में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करना था। सिलावट ने प्रत्येक पार्षद को जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों से कम से कम 200-200 लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाना है।

    वाहनों की चिंता छोड़ेंहम करेंगे व्यवस्था

    बैठक के दौरान जब पार्षदों ने लोगों को लाने-ले जाने के संसाधनों पर सवाल उठाएतो प्रभारी मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया। उन्होंने कहा”वाहनों की चिंता आप लोग बिल्कुल न करेंवह सारी व्यवस्था हम सरकार संगठन कराएंगे। आपका काम बस लोगों को प्रेरित कर कार्यक्रम तक पहुंचाना है।

    कार्यकाल खत्म होने से पहले पूरे होंगे काम

    मंत्री तुलसीराम सिलावट ने पार्षदों को लुभाते हुए कहा कि अब आप लोगों के कार्यकाल में केवल डेढ़ साल का समय शेष रह गया हैइसलिए विकास की रफ्तार बढ़ाने का यह सही मौका है। उन्होंने प्रत्येक पार्षद को दो-दो करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। जब पार्षदों ने बजट और वित्तीय वर्ष को लेकर सवाल कियातो मंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया”आपका कार्यकाल समाप्त होने से पहले ये सभी काम जमीन पर उतर जाएंगे।

    सीएम से मुलाकात का भी बोनस ऑफर

    भीड़ जुटाने के इस टारगेट के साथ प्रभारी मंत्री ने एक और बड़ा दांव खेला है। उन्होंने पार्षदों को मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाने का भी ऑफर दिया। माना जा रहा है कि इस रणनीति के जरिए पार्टी स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना चाहती है ताकि केंद्रीय नेतृत्व के सामने ग्वालियर की ताकत दिखाई जा सके मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 दिसंबर । टारगेट प्रति वार्ड कम से कम 200 लोगों की उपस्थिति। इनाम प्रति पार्षद 2 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति। रणनीति कार्यकाल समाप्त होने से पहले विकास कार्यों को गति देना।

  • जबलपुर में बीजेपी नेत्री का नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार धर्म परिवर्तन विवाद पर वीडियो वायरल

    जबलपुर में बीजेपी नेत्री का नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार धर्म परिवर्तन विवाद पर वीडियो वायरल


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में बीजेपी की जिला उपाध्यक्ष अंजू भार्गव का एक विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो में अंजू भार्गव ने एक नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार किया है। यह घटना 20 दिसंबर को जबलपुर के गोरखपुर क्षेत्र स्थित एक चर्च परिसर में हुई थी। बताया गया है कि अंजू भार्गव और अन्य हिंदू संगठन के लोग कथित तौर पर धर्म परिवर्तन का विरोध कर रहे थे।
    उनका आरोप था कि चर्च में नेत्रहीन बच्चों का धर्म परिवर्तन किया जा रहा था। इस दौरान एक नेत्रहीन महिला के साथ अंजू भार्गव की बहस हो गई और वीडियो में अंजू भार्गव महिला का मुंह दबाते हुए उसे अपशब्द कहती नजर आ रही हैं। वायरल वीडियो में यह भी दिखाया गया कि भार्गव ने महिला का हाथ पकड़कर धक्का-मुक्की की और कहा कि अगले जन्म में भी वह अंधी ही रहेगी।

    इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस ने भाजपा को घेरते हुए पार्टी पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे क्रूरता का उदाहरण बताते हुए भाजपा की आलोचना की और कहा कि पार्टी अपनी कथनी और करनी में अंतर दिखा रही है।

    भाजपा की चुप्पी

    इस मामले पर अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि इस घटना के बाद से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी है।

    पुलिस का बयान

    इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी ने बीच-बचाव करते हुए स्थिति को शांत करने की कोशिश की लेकिन वीडियो में जो दिखाया गया वह पूरे मामले को और संवेदनशील बना रहा है।यह घटना मध्य प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक माहौल को और तंग कर सकती है जहां धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दे अक्सर विवादों का कारण बनते हैं।

  • भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता

    भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता


    नागपुर । महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को निकाय चुनावों में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कुल 288 जिलों के निकायों में से 215 में महायुति ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की हैजिसमें भाजपा ने 129 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। लेकिन भाजपा को सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत कम्पटी नगरपालिका परिषद में मिलीजहां 40 साल बाद पहली बार उसे सत्ता हासिल हुई है। कम्पटी नगरपालिका परिषद में भाजपा के कैंडिडेट अजय अग्रवाल ने 103 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। हालांकिकांग्रेस के कैंडिडेट शाकूर नागानी ने चुनाव परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह पूरे दिन चुनाव में आगे चल रहे थेलेकिन आखिरी समय में गड़बड़ी कर के अजय अग्रवाल को जिताया गया।

    यह चुनाव परिणाम नागपुर जिले में काफी चर्चा में रहाखासकर इस सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी के कारण। एक और दिलचस्प बात यह रही कि बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच की नेता सुलेखा कुंभारे ने इस सीट पर अजय कदम को कैंडिडेट बनाया था। हालांकिभाजपा ने इस बार उनका समर्थन नहीं कियाक्योंकि पार्टी को इस बार महाराष्ट्र में भगवा लहर की उम्मीद थी। कुंभारे ने यह भी दावा किया कि नितिन गडकरी उन्हें अपनी बहन मानते रहे हैंलेकिन भाजपा ने उनका समर्थन नहीं किया।नागपुर की इस महत्वपूर्ण नगरपालिका परिषद में भाजपा की 40 साल बाद जीत एक बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है।

    कांग्रेस के भीतर भी टिकट बंटवारे को लेकर विवाद उभरेऔर यह सवाल उठने लगा कि भाजपा अब बीएमसी में जीत की कोशिश कर सकती है।
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नागपुर संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद इस नगरपालिका परिषद में भाजपा की जीत का यह लंबे समय से इंतजार थाजो अब समाप्त हुआ। कांग्रेस ने भी अपनी स्थिति को लेकर सवाल उठाएऔर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने यह कहा कि बीएमसी में कांग्रेस का कोई वजूद नहीं हैक्योंकि पिछले 30 सालों से वे ही लगातार जीत रहे हैं। इन नतीजों के बादविपक्षी गठबंधन महाअघाड़ी में भी विवाद शुरू हो गया हैजो भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति में और भी हलचल पैदा कर सकता है।

  • मोहन भागवत ने कहाआरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना गलतमुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज किया

    मोहन भागवत ने कहाआरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना गलतमुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज किया


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कोलकाता में आरएसएस 100 व्याख्यान माला कार्यक्रम के दौरान संघ के बारे में अहम बयान दिया। भागवत ने कहा कि आरएसएस का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और इसे भारतीय जनता पार्टी भा,ज,पा, के नजरिए से देखना गलत है। उन्होंने साफ किया कि संघ और भाजपा अलग-अलग संगठन हैंजिनकी भूमिकाएं भी अलग हैंभले ही भाजपा के कई नेता संघ से जुड़े हुए हों।

    भागवत ने कहायदि आप संघ को समझना चाहते हैंतो इसका अनुभव करना पड़ेगा। अगर आप इसे सिर्फ एक और सेवा संगठन मानते हैंतो आप गलत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघ का काम कभी भी संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं समझा जाना चाहिए। बहुत से लोग संघ को भाजपा से जोड़कर देखते हैंलेकिन यह एक बड़ी गलती है। संघ को राजनीति से परे और समाज की भलाईसुरक्षा और एकता के लिए काम करने वाला संगठन माना जाना चाहिए।

    संघ प्रमुख ने मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को भी पूरी तरह से नकारा किया। भागवत ने कहाऐसी धारणा पूरी तरह से तथ्यों के बजाय कथाओं पर आधारित है। हमारा काम पारदर्शी है और जो लोग हमारे काम को समझते हैंउन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि हम कट्टर राष्ट्रवादी हैंजो हिंदुओं की सुरक्षा के लिए काम करते हैंलेकिन हम मुस्लिम विरोधी नहीं हैं। उन्होंने आलोचकों से आग्रह किया कि वे संघ का दौरा करें और इसे सीधे समझें। भागवत ने संघ के मुख्य उद्देश्य को भी स्पष्ट कियाजिसमें नैतिक रूप से ईमानदार और गुणी व्यक्तियों का निर्माण करना हैजो सेवामूल्यों और राष्ट्रीय गौरव से प्रेरित हों और देश के विकास में योगदान करें। उन्होंने कहासंघ का उद्देश्य किसी से दुश्मनी रखना नहीं हैबल्कि समाज में एकता और सहयोग को बढ़ावा देना है।

    इसके अलावाभागवत ने भारतीय समाज को एकजुट करने की आवश्यकता पर बल दिया और हिंदू समुदाय को अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों की ओर लौटने की अपील की। बंगाल की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंदराजा राम मोहन रॉय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों को याद कियाजिनकी सामाजिक सुधार में अहम भूमिका थी। उन्होंने खास तौर पर राजा राम मोहन रॉय की तारीफ कीजो सामाजिक बदलाव की दिशा में अग्रणी थेऔर कहा कि आरएसएस उसी सुधारात्मक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

    भागवत ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य भारत को एक बार फिर विश्वगुरु बनाना है और इसके लिए समाज को तैयार करना संघ का कर्तव्य है। इसके तहतसंघ ने अपनी शताब्दी समारोह के अवसर पर कोलकातादिल्लीमुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में लेक्चर और सेशन आयोजित करने की योजना बनाई हैताकि जनता को संघ के काम और उद्देश्य को समझने का मौका मिल सके। इस दौरानभागवत ने लोगों से अपील की कि वे संघ के बारे में राय बनाने से पहले तथ्यों का अध्ययन करेंऔर अन्य स्रोतों की बजाय खुद संघ के काम को देखें।

  • अमित मालवीय के खिलाफ FIR को लेकर सियासी घमासान TMC नेता की शिकायत पर जांच शुरू

    अमित मालवीय के खिलाफ FIR को लेकर सियासी घमासान TMC नेता की शिकायत पर जांच शुरू


    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी के आईटी सेल के राष्ट्रीय प्रभारी अमित मालवीय एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। पश्चिम बंगाल के नरेंद्रपुर थाने में उनके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप लगाया गया है कि उनके पोस्ट से राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और इससे देश की एकता और संप्रभुता को खतरा उत्पन्न हो सकता है। यह शिकायत अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस टीएमसी के राज्य महासचिव और प्रवक्ता तन्मय घोष की ओर से की गई है।

    टीएमसी नेता ने क्यों दर्ज कराई शिकायत

    तन्मय घोष ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि अमित मालवीय ने 19 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जो पोस्ट साझा किया उसकी भाषा और संदर्भ बेहद आपत्तिजनक है। शिकायत के अनुसार यह पोस्ट लोगों को उकसाने वाला है और राज्य की शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। टीएमसी नेता का आरोप है कि पोस्ट के जरिए सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल सरकार सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाना बनाया गया है जिससे समाज में भय और अविश्वास का माहौल बन सकता है।

    कानूनी कार्रवाई की मांग

    शिकायत पत्र में तन्मय घोष ने पुलिस से मांग की है कि अमित मालवीय के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता समेत अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इस तरह के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट समाज को बांटने का काम करते हैं और इन्हें नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा नेता जानबूझकर संवेदनशील मुद्दों को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।

    पुलिस ने क्या कहा जांच जारी
    नरेंद्रपुर थाना पुलिस के अनुसार उन्हें शिकायत प्राप्त हो चुकी है और उसकी पुष्टि भी कर ली गई है। फिलहाल इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट की सामग्री की गहन जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रारंभिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला एफआईआर दर्ज करने योग्य है या नहीं।

    किस पोस्ट पर मचा विवाद

    विवादित पोस्ट में अमित मालवीय ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई एक तोड़फोड़ की घटना का जिक्र किया था। उन्होंने दावा किया था कि इस्लामी भीड़ ने बंगाली कला और संस्कृति के ऐतिहासिक केंद्र छायानाट भवन को नुकसान पहुंचाया है। इसके साथ ही उन्होंने चरमपंथ पर चिंता जताते हुए पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति को गंभीर बताया और ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। इसी बयान को लेकर अब बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

  • प्रियंका और राहुल गांधी के बीच परिवारिक कलह केंद्रीय मंत्री ने झगड़े का दावा किया

    प्रियंका और राहुल गांधी के बीच परिवारिक कलह केंद्रीय मंत्री ने झगड़े का दावा किया


    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक कलह को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच गंभीर विवाद चल रहा है जिससे राहुल गांधी ने परिवार और पार्टी से लड़कर विदेश जाने का निर्णय लिया। बिट्टू ने कहा राहुल गांधी का विदेश में होना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस परिवार में कुछ गहरे मतभेद हैं। राहुल गांधी पार्टी और परिवार से झगड़कर विदेश गए हैं जबकि उनकी बहन प्रियंका गांधी भी लगातार अपनी बात रख रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के अंदर ‘टीम प्रियंका बनाम टीम राहुल’ का झगड़ा अब खुलकर सामने आ चुका है।

    केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जर्मनी में हैं जहां उनकी तस्वीरें दिखाई दी हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए दुनिया भर में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेताओं को महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि वे अपनी आंतरिक लड़ाई में उलझे हुए हैं। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस की आंतरिक कलह का दावा किया था और इसे टीम प्रियंका बनाम टीम राहुल के रूप में पेश किया था। पूनावाला ने कहा था कांग्रेस की आंतरिक कलह अब बाहर आ गई है जो कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति के लिए चिंता का विषय है।

    बिट्टू के बयान के बाद कांग्रेस से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर कोई बड़ा विवाद चल रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान न आने से अटकलें और भी तेज हो गई हैं। इस आंतरिक कलह को लेकर भाजपा ने कांग्रेस को घेरते हुए सवाल उठाए हैं जबकि कांग्रेस के नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

  • सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं

    सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं


    नई दिल्ली । भारत सरकार ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित 51 बक्सों में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय पीएमएमएल को वापस करने की मांग की है। यह दस्तावेज 2008 में तात्कालिक प्रधानमंत्री संग्रहालय से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया है। सरकार ने इन दस्तावेजों को निजी संपत्ति मानने से इनकार करते हुए कहा है कि ये सार्वजनिक अभिलेख हैं और इनकी सार्वजनिक पहुंच जरूरी है।

    केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस मुद्दे पर कहा यह कोई निजी पारिवारिक दस्तावेज नहीं हैं। ये भारत के पहले प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय अभिलेख हैं और इन्हें सार्वजनिक अभिलेखागार में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन दस्तावेजों की अदला-बदली को लेकर संसद में कई बार चर्चा हो चुकी है लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया।

    विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक सवाल उठाया कि क्या 2025 में पीएमएमएल के निरीक्षण के दौरान नेहरू के दस्तावेज गायब पाए गए थे। इसके जवाब में शेखावत ने साफ किया कि ये दस्तावेज लापता नहीं हैं बल्कि सोनिया गांधी के पास हैं और उनका स्थान पूरी तरह से ज्ञात है। उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज 2008 में विधिवत तरीके से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन वे अब भी वापस नहीं किए गए हैं।

    शेखावत ने आगे कहा सोनिया गांधी से यह पूछा जाना चाहिए कि क्यों ये दस्तावेज अब तक वापस नहीं किए गए जबकि कई बार पीएमएमएल की ओर से पत्र भेजे गए हैं। अगर कुछ छिपाया जा रहा है तो क्या यह सही है? उन्होंने यह भी जोड़ा कि इतिहास को सही तरीके से समझने और उसमें सही दृष्टिकोण विकसित करने के लिए इन दस्तावेजों तक सभी को पहुंच मिलनी चाहिए। विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए शेखावत से पूछा कि क्या अब वह माफी मांगेंगे क्योंकि यह स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज गायब नहीं थे। कांग्रेस ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक लाभ के लिए तूल दे रही है।

    कुल मिलाकर यह मामला अब एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ सरकार ने नेहरू के दस्तावेजों को सार्वजनिक अभिलेखागार में रखने की जरूरत जताई है वहीं कांग्रेस और गांधी परिवार की ओर से इसे एक निजी और परिवारिक अधिकार बताया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर ममता बनर्जी और सोनिया गांधी किस तरह की प्रतिक्रिया देती हैं और सरकार इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाती है।