Tag: BJP

  • TMC सांसद की सिगरेट पीते वीडियो ने मचाई हलचल BJP ने ममता बनर्जी से मांगा जवाब

    TMC सांसद की सिगरेट पीते वीडियो ने मचाई हलचल BJP ने ममता बनर्जी से मांगा जवाब


    नई दिल्ली । लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस TMC के सांसद कीर्ति आजाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसमें वह सदन के अंदर ई-सिगरेट पीते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में कीर्ति आजाद कैमरे की ओर कई बार देख रहे हैं और फिर चुपके से अपना हाथ मुंह के पास ले जाते हैं जिससे यह संकेत मिलता है कि वह ई-सिगरेट की कश ले रहे हैं। हालांकि वीडियो में ई-सिगरेट या धुआं स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।

    भाजपा ने इस वीडियो पर त्वरित प्रतिक्रिया दी है और ममता बनर्जी से सवाल किया है कि उनके सांसद ने सदन के अंदर इस तरह का व्यवहार क्यों किया। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने वीडियो को शेयर करते हुए कहा यह व्यक्ति मानो संसद के अंदर नियमों और कानूनों को नजरअंदाज करने में कोई शर्म महसूस नहीं करता। उन्होंने कहा सदन में इस तरह का व्यवहार बिल्कुल अस्वीकार्य है। ममता बनर्जी को इस पर जवाब देना चाहिए।

    इस वीडियो के वायरल होने के बाद भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखित शिकायत सौंपते हुए इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि कीर्ति आजाद लंबे समय से सदन में ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं जो सदन के नियमों के खिलाफ है।

    यह घटना तब सामने आई जब पिछले हफ्ते लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान अनुराग ठाकुर ने एक TMC सांसद द्वारा ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया था। हालांकि उन्होंने उस वक्त सांसद का नाम नहीं लिया था लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया कि वह कीर्ति आजाद की ओर इशारा कर रहे थे। भाजपा ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा है कि संसद जैसे प्रतिष्ठित स्थल पर इस तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि लोकसभा अध्यक्ष इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं और ममता बनर्जी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।

  • मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी

    मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी


    नई दिल्ली । मणिपुर में मंगलवार रात हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर राज्य में तनाव का माहौल बन गया है। बिष्णुपुर जिले के बाहरी इलाकों में खासकर चूड़ाचांदपुर जिले की सीमा से लगे तोरबंग और फौगाकचाओ इखाई इलाकों के पास कई बार गोलीबारी हुई जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। अधिकारियों के मुताबिक गोलीबारी के कारणों और इसके मकसद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

    घटना के बाद सुरक्षा बलों को घटनास्थल पर भेजा गया और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में ताजा गोलीबारी ने पहले से भड़क चुके जातीय संघर्ष को और उग्र बना दिया है। मणिपुर में 3 मई 2023 से जारी हिंसा के बाद यह पहली बार नहीं है जब गोलीबारी की घटना सामने आई है।

    इस बीच राज्य में सरकार गठन की कवायद भी जारी है। बीजेपी नेतृत्व ने मणिपुर में स्थिरता लाने के लिए राज्य के बीजेपी विधायकों के साथ कई दौर की बातचीत की है। इनमें कुकी और मैतेई समुदाय के बीजेपी विधायक भी शामिल हैं। मणिपुर विधानसभा के स्पीकर सत्यब्रत और पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह समेत 34 विधायक हाल ही में पार्टी नेतृत्व से मिलने के लिए एक साथ बैठे थे। यह मुलाकातें हिंसा के बाद पहली बार हुई थीं जब दोनों समुदायों के विधायक एक साथ बातचीत में शामिल हुए थे।

    राज्य में जातीय हिंसा के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है और सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बीजेपी नेतृत्व का उद्देश्य मणिपुर में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करते हुए राज्य में एक मजबूत और समावेशी सरकार का गठन करना है।बीजेपी के नेताओं का कहना है कि विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली और समझौते के आधार पर ही राज्य में शांति की स्थिति बहाल की जा सकती है। हालांकि मणिपुर में संघर्ष की जड़ें गहरी हैं और हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा कई बार सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा चुकी है। मणिपुर में बढ़ती हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच राज्य के लिए आगामी समय में स्थिरता लाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा

    दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा


    नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है। आज राजधानी में AQI 500 के पार पहुंच गया है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है और विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई है। स्थिति के मद्देनजर नेशनल कैपिटल में GRAP 4 लागू कर दिया गया है।

    AAP ने उठाया केंद्र और दिल्ली सरकार पर सवाल
    AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि “यह सरकार लगभग एक साल से सत्ता में है, लेकिन प्रदूषण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बंद कमरे में भी धुंध दिखाई दे रही है। CM को यह नहीं पता कि AQI क्या होता है। एक्सपर्ट्स को आगे आना चाहिए और मुख्यमंत्री को पीछे हट जाना चाहिए।”

    GRAP 4: क्या है नियम
    GRAP-IV के तहत राज्य और केंद्रीय एजेंसियों को NCR में हवा की गुणवत्ता सुधारने के उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

    बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में क्लास 5 तक हाइब्रिड मोड में पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है।

    क्लास 6 से 11 तक फिजिकल क्लास बंद करने का विकल्प भी राज्य सरकारों को दिया गया है।

    प्रदूषण का स्वास्थ्य पर असर
    दिल्ली-NCR में लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं हो रही हैं।

    डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर संभव हो तो अगले कुछ हफ्तों तक दिल्ली से बाहर जाने पर विचार किया जाए।

    दिल्ली में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण GRAP 4 लागू किया गया है, लेकिन विपक्ष और AAP का कहना है कि केंद्र और दिल्ली सरकार इस गंभीर समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। राजधानीवासियों के लिए फिलहाल सफर और बाहरी गतिविधियों में सावधानी बरतना आवश्यक है।

  • दो वर्ष पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड: सांसद-विधायक मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर देंगे अपने क्षेत्र के कार्यों की जानकारी

    दो वर्ष पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड: सांसद-विधायक मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर देंगे अपने क्षेत्र के कार्यों की जानकारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सफलतापूर्वक दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस अवसर को चिह्नित करने के लिएसरकार ने अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को जनता के बीच ले जाने की एक सुनियोजित रणनीति तैयार की है।

    जनता के बीच सरकार की उपलब्धियां

    राज्य सरकार की दो वर्ष की उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने का जिम्मा प्रभारी मंत्रियों को सौंपा गया है। शनिवार कोसभी प्रभारी मंत्रियों ने अपने-अपने जिलों में पत्रकारवार्ता आयोजित की। इन प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विस्तार से बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने पिछले दो वर्षों में जनता के हित में कौन-कौन से महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
    उपलब्धियों की जानकारी देने के अलावामंत्रियों ने अपने व्यक्तिगत विभागों के कामकाज का ब्योरा भी जनता के समक्ष रखा। यह प्रयास सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रदर्शित करने पर केंद्रित है।

    सांसद और विधायकों का रिपोर्ट कार्ड

    इस प्रचार अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य के सांसदों और विधायकों के प्रदर्शन को भी शामिल करता है। यह सुनिश्चित किया गया है कि केवल सरकार की ही नहींबल्कि क्षेत्रवार जनप्रतिनिधियों के कार्यों की जानकारी भी उच्च स्तर पर संकलित की जाए। योजना के अनुसारसभी सांसद और विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पिछले दो वर्षों के दौरान किए गए विकास कार्योंयोजनाओं के क्रियान्वयनऔर महत्वपूर्ण पहलों का विवरण तैयार करेंगे। 

    वे यह पूरी जानकारी एक पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपकर उन्हें अवगत कराएंगे। यह कदम न केवल जनप्रतिनिधियों को अपने कार्यों का लेखा-जोखा तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करेगाबल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय को भी राज्य के हर क्षेत्र में हो रहे जमीनी स्तर के विकास की एक स्पष्ट तस्वीर प्रदान करेगा। यह पहल पार्टी और सरकार के भीतर एक आंतरिक रिपोर्ट कार्ड और प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली के रूप में भी कार्य कर सकती है। इस प्रकारमोहन सरकार की दो साल की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार एक बहु-आयामी दृष्टिकोण से किया जा रहा हैजिसमें सरकारी विभागों के कामकाजमंत्रियों की रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन का समावेश है।

  • CAA से बाबरी तक, बंगाल में ध्रुवीकरण का सियासी खेल; इस चुनौती से कैसे निपटेगी TMC?

    CAA से बाबरी तक, बंगाल में ध्रुवीकरण का सियासी खेल; इस चुनौती से कैसे निपटेगी TMC?


    नई दिल्‍ली । सीएए से लेकर एनआरसी और एसआईआर से लेकर बाबरी तक पूरे पश्चिम बंगाल(West Bengal) का सियासी पारा हाई है. हिंदू-मुस्लिम (Hindu-Muslim)और बंगाली बनाम बाहरी(Bengalis versus outsiders) जैसे समीकरणों से इतर मुर्शिदाबाद जिले से निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)के बाबरी प्लान ने बंगाल के चुनावी समर को दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा दिया है. इसी आधार पर दावा किया जा रहा है कि 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर होगी. 2019 में बीजेपी का मिशन बंगाल अधूरा रह गया था, इसलिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) हर हाल में सत्ता हासिल करना चाहती है.

    सीएए-एनआरसी और एसआईआर तक मुद्दे कई हैं…
    बीजेपी 10 सालों से आक्रामक होकर ममता बनर्जी को घेर रही है. एंटी इनकमबेंसी से इतर वो टीएमसी पर सनातन और हिंदुओं की अपेक्षा करने का आरोप लगाती आई है. ऐसे कुछ सवालों का जवाब ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी रणनीति से दे चुकी हैं. बंगाल में मुसलमानों पर करम और हिंदुओं पर सितम करने जैसे आरोपों से जूझ रही टीएमसी सुप्रीमों ने ऐसे आरोप खारिज करने के लिए दुर्गा माता के मंत्र पढ़कर सुना चुकी हैं.

    सीएए, एनआरसी और बेटियों के बलात्कार और हत्या जैसे अपराधों यानी लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर भी बीजेपी टीएमसी को घेर रही है. कुल मिलाकर लाख टके का सवाल ये है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस नए ध्रुवीकरण वाले मुद्दे से कैसे निपटेंगी. बंगाल में 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं जो वामदलों की सफाए के बाद से टीएमसी को वोट करते आए हैं.

    टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर चुके हैं. हुमायूं ओवीसी की पार्टी एआईएमआईएम और अन्य दलों संग अलायंस करके चुनाव लड़ना चाह रहे हैं. ताकि बंगाल में किंग मेकर की भूमिका में आ सकें.

    पुराना कार्ड चलेगा?
    ध्रुवीकरण की कथित खेल को ध्यान में रखते हुए बीजेपी इस बार हर हाल में बंगाल में भगवा लहराना चाहती है. ये मुद्दा किसे फायदा करेगा और किसे बैकफायर करेगा इसका जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है. ममता बनर्जी और TMC हुमायूं कबीर को BJP की बी पार्टी बताकर काउंटर कर सकती हैं. वो पहले भी दावा करती रही हैं कि बीजेपी असदुद्दीन ओवैसी को मुसलमान वोटों का बंटवारा करने के लिए खड़ा करती है. ऐसे में चुनावी तारीखों का ऐलान होने से पहले ममता बनर्जी जनता से अपील कर रही हैं कि BJP को सत्ता से दूर रखने के लिए लोग केवल और केवल टीएमसी को चुने.

    SIR, पहचान की राजनीति और ‘बंगाली अस्मिता’
    TMC ध्रुवीकरण वाली चुनौती का सामना ‘बंगाली अस्मिता’ के कार्ड से कर सकती है. ये ‘ट्रंप’ कार्ड ‘दीदी’ का आजमाया हुआ नुस्खा है. 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने बड़े प्रभावी ढंग से इसका इस्तेमाल किया. बंगाली बनाम बाहरी का मुद्दा उठाकर अपना किला बचा चुकीं ममता बनर्जी अब शाकाहार और मांसाहार की जंग के सहारे नया नैरेटिव देने की कोशिश कर रही हैं.

    कुछ समय पहले भगवद्गीता पाठ के आयोजन स्थल के पास नॉनवेज बेचने पर एक शख्स के साथ मारपीट हुई थी. तब नैरेटिव गढ़ा गया कि बीजेपी देश को शाकाहार की ओर धकेल रही है, जो बहुलतावाद और बंगाल की पहचान के खिलाफ है. सूत्रों के मुताबिक एसआईआर और अन्य मुद्दों से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ी है, जिससे उनके वोट टीएमसी के पक्ष में लामबंद हो सकते हैं. ऐसी खबरों के बीच सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा इसे लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगा.

  • कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह

    कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह


    नई दिल्‍ली । पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने बयानों से राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने बीजेपी के कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं से कोई सलाह नहीं ली जाती। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने का दर्द अभी भी ताजा है, इसलिए कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं उठता।

    बीजेपी पर हमला:
    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में बड़े फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं की राय की कोई अहमियत नहीं है, हालांकि उनके पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है। इस बयान के साथ उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को पूरी तरह से नकारा किया।

    प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ, सिद्धू पर प्रहार:
    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि मोदी जी का पंजाब के प्रति विशेष स्नेह है। वहीं, नवजोत कौर सिद्धू पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अमरिंदर ने सिद्धू और उनकी पत्नी को ‘अस्थिर’ करार दिया।

    अकाली दल से गठबंधन की जरूरत पर जोर:
    पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए, अमरिंदर सिंह ने बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन करने की सलाह दी। उनका मानना था कि बिना गठबंधन के पंजाब में सरकार बनाना मुश्किल है।

    ‘आप’ सरकार पर तीखा हमला:
    आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी अमरिंदर सिंह ने करारा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब अब सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान केवल टीवी पर चुटकुले सुनाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में असली फैसले दिल्ली से किए जा रहे हैं और मान केवल नाममात्र के मुख्यमंत्री हैं। इसके अलावा, अमरिंदर ने पंजाब को ‘भिखारी राज्य’ करार दिया, जो मुफ्त योजनाओं की वजह से बर्बाद हो गया है।

    बीजेपी-अकाली गठबंधन पर प्रतिक्रिया:
    अमरिंदर सिंह के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन के सुझाव पर बीजेपी नेताओं ने खारिज कर दिया और कहा कि पार्टी अकेले पंजाब में चुनाव लड़ेगी। हालांकि, अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस सुझाव का समर्थन किया और कहा कि बीजेपी पंजाब में अकेले सरकार नहीं बना सकती।

    AAP का पलटवार:
    आम आदमी पार्टी ने अमरिंदर सिंह के ‘भिखारी राज्य’ वाले आरोपों पर तीखा पलटवार किया। ‘आप’ के नेताओं ने अमरिंदर सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि उनकी सरकार के दौरान खनन और केबल माफिया फल-फूल रहे थे। ‘आप’ ने यह भी कहा कि पंजाब की जनता ने पिछले भ्रष्ट शासन के खिलाफ खड़े होकर ‘आप’ को बहुमत दिया।

    कांग्रेस और ‘आप’ का तंज:
    कांग्रेस और ‘आप’ ने कैप्टन के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन सुझाव पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों दल अकेले ही इतने कमजोर हैं कि उनका गठबंधन भी किसी असरदार बदलाव का कारण नहीं बनेगा।

    इस तरह, कैप्टन अमरिंदर सिंह के हमले और उनके सुझावों पर विभिन्न दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। पंजाब की राजनीतिक स्थिति में यह बयान एक नई बहस का आगाज कर सकते हैं।

  • अमरिंदर सिंह का बयान: कहा- भाजपा में मुझसे सलाह नहीं ली जाती, लेकिन कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं

    अमरिंदर सिंह का बयान: कहा- भाजपा में मुझसे सलाह नहीं ली जाती, लेकिन कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं


    ई दिल्‍ली । पंजाब(Punjab) के पूर्व मुख्यमंत्री (Chief Minister)और भारतीय जनता पार्टी(Bharatiya Janata Party) के नेता अमरिंदर सिंह(Amarinder Singh) ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया। भाजपा के कामकाज की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विपरीत, पार्टी उनसे परामर्श नहीं कर रही है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस में लौटने की संभावना को पूरी तरह खारिज किया।

    मीडिया को दिए इंटरव्यू में अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्हें जिस तरह से मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था, उससे वह अब भी आहत हैं, इसलिए कांग्रेस में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि भाजपा में सभी निर्णय दिल्ली में लिए जाते हैं और जमीनी नेताओं से परामर्श नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है, लेकिन मैं खुद को उन पर थोप नहीं सकता।’

    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मोदी का पंजाब के लिए विशेष स्नेह है और वह राज्य के लिए कुछ भी करेंगे। नवजोत कौर सिद्धू के इस बयान पर कि पंजाब में 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देने वाला मुख्यमंत्री बनता है, सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी को अस्थिर बताया और सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। सिंह ने कहा कि भाजपा पंजाब में तभी मजबूत हो सकती है जब वह शिरोमणि अकाली दल के साथ हाथ मिलाए। उन्होंने दावा किया कि दोनों दल अंततः एक साथ आएंगे, क्योंकि पंजाब में गठबंधन के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसा
    वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब आतंकवाद के वर्षों के बाद सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसते हुए कहा कि वह केवल टीवी पर आते हैं और चुटकुले सुनाते हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि मुफ्त की योजनाओं के कारण पंजाब भिखारी राज्य बन गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मान केवल नाममात्र के मुखिया हैं, जबकि पंजाब के असली फैसले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ले रहे हैं। सिंह ने लोगों से स्थिरता के लिए भाजपा पर विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि भारत की सुरक्षा पंजाब के हितों से जुड़ी हुई है।

  • अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात

    अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं के घोषणाएं और वादे चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये देने का वादा किया है। उन्होंने इसे बीजेपी के बिहार चुनाव में दिए गए 10,000 रुपये के वादे का जवाब बताया। इस घोषणा पर अयोध्या की महिलाओं की क्या राय है, यह जानने के लिए यूपी Tak की टीम ने गांव में जाकर उनकी प्रतिक्रिया ली।

    महिलाओं ने की उम्मीदें जाहिर

    अयोध्या के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने इस योजना पर अपनी राय दी और अपनी उम्मीदों का इज़हार किया। एक स्थानीय महिला सुंदर कली ने कहा, अखिलेश यादव का यह प्रस्ताव अच्छा है, हम लोग मजदूरी करते हैं, इससे अच्छा होगा कि हमें पैसा मिले। अभी सरकार की तरफ से हमें कुछ नहीं मिलता, केवल मजदूरी करते हैं। अगर अखिलेश यादव देंगे तो ठीक है, नहीं तो हम अपना काम करते रहेंगे।

    विकास की उम्मीदें भी बनीं मुद्दा

    वहीं कश्मीरा देवी ने कहा, हम लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। अगर सरकार कुछ मदद करेगी तो अच्छा रहेगा, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। सरकार बढ़िया नहीं काम कर रही है, जो विकास करेगा हम उसके साथ रहेंगे। विमला देवी ने भी कहा, समाजवादी सरकार के समय पेंशन मिलती थी और सड़कें बनती थीं। अब कुछ नहीं मिल रहा है। हमें विकास और रोजगार दोनों चाहिए।

    महिलाओं की मांग-पैसा नहीं, विकास और रोजगार भी चाहिए

    ममता नाम की महिला ने कहा, यह अच्छा है कि पैसा मिलेगा, इससे हमारी रोज़ी-रोटी में मदद होगी। गरीब बच्चों को भी फायदा होगा, लेकिन सिर्फ पैसा नहीं, हमें काम भी चाहिए। अगर पैसा मिलेगा तो वोट देंगे, नहीं मिला तो कोई बात नहीं। वहीं अन्य महिलाओं ने भी इस योजना का स्वागत किया, लेकिन साफ किया कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो वे वोट नहीं देंगी।

    योगी सरकार से तुलना

    महिलाओं ने योगी सरकार की योजनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें विधवा पेंशन के रूप में 2,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन इसके बावजूद गांव में विकास की कमी महसूस हो रही है। रोज़मर्रा की सुविधाओं और रोजगार के मामले में उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    समाजवादी पार्टी और बीजेपी का मुकाबला

    अखिलेश यादव का यह वादा महिलाओं के बीच उम्मीद और नाखुशी का मिश्रित असर छोड़ रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि वे सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि स्थिरता, रोजगार और विकास के लिए भी वोट देंगे। यह साफ है कि महिलाएं अपनी जिंदगी में सुधार और अपने गांव के विकास को भी उतना ही महत्व देती हैं जितना कि चुनावी वादों को।

  • असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान पैसा नहीं विचारधारा तय करती है वोट

    असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान पैसा नहीं विचारधारा तय करती है वोट


    नई दिल्ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में मतदान के पैटर्न को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि असम में वोट केवल सरकारी योजनाओं या नकद सहायता पर निर्भर नहीं होते.बल्कि यह विचारधारा और पहचान से तय होते हैं। उनका मानना है कि कई समुदाय अपने राजनीतिक निर्णय केवल आर्थिक प्रोत्साहन या सरकारी लाभ से नहीं.बल्कि अपनी विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर लेते हैं।

    एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में उन्होंने इस बारे में विस्तार से बात की। सरमा ने स्पष्ट किया कि असम के मुस्लिम मतदाता.जिनकी संख्या राज्य में महत्वपूर्ण है.अक्सर अपनी वोटिंग पसंद को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं। उनका कहना था कि चाहे सरकार 10 हजार रुपये दे या 1 लाख रुपये.कुछ समुदाय.खासकर मुस्लिम मतदाता.उसी सरकार को वोट नहीं देंगे यदि वह सरकार उनकी विचारधारा और पहचान से मेल नहीं खाती।

    नकद सहायता को नकारा

    एक सवाल के जवाब में.जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या असम में महिलाओं को बिहार की तरह नकद सहायता दी जा सकती है.तो उन्होंने इसे साफ तौर पर खारिज कर दिया। उनका कहना था कि चुनाव में वोटिंग का आधार केवल वित्तीय लाभ नहीं है। वह मानते हैं कि हर समुदाय अपने राजनीतिक विकल्पों का चयन विचारधारा और पहचान के आधार पर करते हैं.न कि केवल आर्थिक प्रोत्साहन पर।

    जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता

    मुख्यमंत्री सरमा ने असम में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि 2021 में राज्य की मुस्लिम आबादी लगभग 38% थी.और हर दशक में यह 4-5% बढ़ रही है। यदि यह वृद्धि दर जारी रही.तो 2027 तक मुस्लिम आबादी 40% तक पहुंच सकती है। सरमा ने कहा कि यदि मुस्लिम आबादी 50% से अधिक हो गई.तो अन्य समुदायों की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान पर दबाव बढ़ सकता है।

    व्यक्तिगत संबंध वोट में नहीं बदलते

    सीएम हिमंत सरमा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत संबंध मिया समुदाय की महिलाओं और कई मुस्लिम परिवारों के साथ अच्छा है.लेकिन चुनाव में यह जुड़ाव वोट में तब्दील नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही मुस्लिम मतदाता कांग्रेस के पक्ष में वोट करें.भाजपा अपनी स्थिति असम में बनाए रख सकती है।

    सरमा ने अंत में कहा..असम में मेरे अपने वे लोग हैं.जो खुद को असमी और भारतीय पहचान से जोड़ते हैं।. उनका यह बयान इस बात को स्पष्ट करता है कि उनकी सरकार की प्राथमिकता राज्य के असमी और भारतीय पहचान के लोगों पर है.और उनकी राजनीतिक नीतियां इसी पर आधारित हैं।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का यह बयान असम की राजनीति और वोटिंग पैटर्न को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने यह साफ किया कि असम में वोटिंग सिर्फ सरकारी योजनाओं या नकद सहायता पर नहीं.बल्कि विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित होती है। इसके साथ हीउन्होंने राज्य में बढ़ती मुस्लिम आबादी और उसके प्रभाव पर भी चिंता जताई।

    उनका यह बयान असम की राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है.क्योंकि यह दर्शाता है कि वह न केवल चुनावी रणनीतियों को बल्कि राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को भी ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियां बना रहे हैं।

  • दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार, लखनऊ में डिप्टी सीएम के आवास से पकड़ा गया

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार, लखनऊ में डिप्टी सीएम के आवास से पकड़ा गया


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़े ठग का पर्दाफाश हुआ है, जो खुद को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का प्रतिनिधि बताकर लोगों से ठगी कर रहा था। आरोपी, नोएडा निवासी दशरथ पाल को शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास से गिरफ्तार किया गया। वह कई शहरों में सत्ता और संगठन के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठने का काम कर चुका था।

    कैसे पकड़ा गया ठग?
    आरोपी दशरथ पाल ने उपमुख्यमंत्री के आवास पर शिष्टाचार भेंट देने का दावा करते हुए पहुंचने की कोशिश की। उपमुख्यमंत्री की टीम को पहले ही सूचना मिल गई थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति उनके आवास तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। जब वह अंदर गया, तो सतर्कता टीम ने उसकी पहचान जांची और पाया कि वह दिल्ली बीजेपी नेतृत्व से कोई संबंध नहीं रखता। इसके बाद उसे तत्काल पुलिस के हवाले कर दिया गया।

    ठगी की वारदातें
    पूछताछ में सामने आया कि दशरथ पाल नोएडा, बुलंदशहर, मेरठ और लखनऊ जैसे शहरों में कई लोगों से ठगी कर चुका था। वह खुद को बीजेपी के बड़े नेताओं का प्रतिनिधि बताकर लोगों को काम करने का वादा करता और बदले में पैसों की मांग करता था। अब पुलिस उसकी जांच कर रही है कि उसने कितने लोगों से ठगी की और उसके पीछे कोई गिरोह तो नहीं है।

    डिप्टी सीएम का कड़ा संदेश
    घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस तरह के लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन की छवि खराब करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मौर्य ने इस मामले में कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

    पुलिस की जांच जारी
    पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि उसने किस-किस व्यक्ति से ठगी की और उसके पास कितने पैसे हैं। पुलिस आरोपी के नेटवर्क और पुराने मामलों की भी जांच कर रही है, ताकि उसकी अन्य ठगी की वारदातों का भी खुलासा हो सके।