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  • यूपी विधानसभा में अनुपूरक बजट पर हंगामा, पांच मिनट ही बोल पाए CM योगी, सपा विधायक पर भड़के विस अध्‍यक्ष

    यूपी विधानसभा में अनुपूरक बजट पर हंगामा, पांच मिनट ही बोल पाए CM योगी, सपा विधायक पर भड़के विस अध्‍यक्ष


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बोलना शुरू करते ही समाजवादी पार्टी के विधायकों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर पहले चर्चा कराने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार शोर-शराबे के कारण मुख्यमंत्री करीब पांच मिनट ही अपनी बात रख सके और सदन की कार्यवाही बाधित हो गई।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष के हंगामे पर कहा कि अनुपूरक बजट पर चर्चा का एजेंडा पहले से तय था और यह प्रदेश की 25 करोड़ जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के लिए निर्धारित किया गया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने चर्चा में भाग लेने के बजाय व्यवधान पैदा करना उचित समझा।

    ‘विपक्ष का आचरण शर्मनाक’
    सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया लोकतांत्रिक और संवैधानिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष न तो सार्थक चर्चा में विश्वास रखता है और न ही सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलने देना चाहता है। उनके अनुसार विपक्ष लगातार सदन की कार्यवाही बाधित करने का प्रयास कर रहा है।

    तस्वीर दिखाने पर भड़के सतीश महाना
    मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष के एक विधायक ने उनसे जुड़ी तस्वीर सदन में दिखाई। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ी आपत्ति जताते हुए संबंधित विधायक को पूरे सत्र के लिए सदन से बाहर करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति होने पर विशेषाधिकार प्रस्ताव लाकर सदस्यता समाप्त करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। लगातार हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बाधित रही और विधानसभा का माहौल काफी देर तक गरमाया रहा।

  • दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी

    दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी


    दतिया । दतिया विधानसभा उपचुनाव में 6016 वोटों से मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित चुनाव से जुड़े मंत्री, पदाधिकारी और संगठन के प्रमुख नेता शामिल होंगे। इस बैठक में हार के कारणों का विश्लेषण करने के साथ-साथ संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी रणनीति और भीतरघात की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा बैठक में उपचुनाव के प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, राकेश शुक्ला सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में चुनावी प्रबंधन की हर स्तर पर समीक्षा होगी और यह भी देखा जाएगा कि किन कारणों से पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सूत्रों का कहना है कि दतिया शहर में भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन वहां कांग्रेस ने बढ़त बना ली जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला। संगठन की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ पार्षदों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और भीतरघात के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दर्जनभर पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है। समीक्षा बैठक के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    हार के बाद पार्टी के भीतर भी आत्ममंथन की आवाजें तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आत्ममंथन का समय बताते हुए दतिया उपचुनाव का उल्लेख किया। वहीं टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी खुद को शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच वाला बताने लगते हैं तब चुनाव परिणाम प्रभावित होना स्वाभाविक है। उनके इस बयान को भी संगठन के भीतर चल रही चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    भाजपा संगठन जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित कुछ स्थानीय पदाधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों की रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से केंद्रीय संगठन तक भेजी जा सकती है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।

    पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि प्रत्याशी बदलने के बाद संगठन के सभी कार्यकर्ता पूरी मजबूती से एकजुट नहीं हो पाए और इसका असर चुनाव परिणाम पर दिखाई दिया।

    समीक्षा बैठक में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। चुनाव के दौरान वायरल हुए कथित फर्जी पत्रों और भ्रामक पोस्ट की जांच कराई जाएगी। संगठन ऐसे लोगों की सूची भी तैयार कर रहा है जिन्होंने इन पोस्ट को प्रसारित किया था ताकि उनकी भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करती है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी हार की तथ्यपरक समीक्षा करेगी और भविष्य की चुनावी रणनीति को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

  • पेपर लीक पर भाजपा का विपक्ष पर पलटवार, कर्नाटक-झारखंड का मुद्दा उठाकर राहुल गांधी से पूछा बड़ा सवाल

    पेपर लीक पर भाजपा का विपक्ष पर पलटवार, कर्नाटक-झारखंड का मुद्दा उठाकर राहुल गांधी से पूछा बड़ा सवाल

    नई दिल्ली । पेपर लीक के मुद्दे पर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को प्रेस वार्ता कर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। भाजपा सांसद और पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष केवल चुनिंदा राज्यों के मामलों को राजनीतिक मुद्दा बनाता है, जबकि कर्नाटक और झारखंड में सामने आए कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामलों पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों को लेकर विपक्ष का रुख समान नहीं है।

    संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र लंबे समय से कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस की ओर से उनके समर्थन में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि संसद के भीतर भी विपक्ष इन मामलों को प्रमुखता से नहीं उठा रहा है। भाजपा का दावा है कि विपक्ष केवल उन्हीं मुद्दों को आगे बढ़ाता है जिनसे उसे राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना दिखाई देती है।

    भाजपा ने संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र के संचालन को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। संबित पात्रा ने कहा कि संसद का प्रत्येक सत्र जनता के धन से चलता है और इस पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन लगातार हंगामे के कारण प्रश्नकाल और कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के रवैये की वजह से महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में अपेक्षित चर्चा नहीं हो पा रही है।

    प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा ने कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे के एक बयान का भी उल्लेख किया। पार्टी ने दावा किया कि पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के संबंध में मंत्री की टिप्पणी असंवेदनशील थी। भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी प्रतिक्रिया देने की मांग करते हुए कहा कि उन्हें इस विषय पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। वहीं कांग्रेस की ओर से इस मामले में अलग-अलग अवसरों पर अपने विचार व्यक्त किए जाते रहे हैं।

    इधर झारखंड में राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी छात्र निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष से जांच एजेंसियों द्वारा कई दौर की पूछताछ भी की जा चुकी है। उन्होंने इससे पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बना हुआ है। विभिन्न राज्यों में सामने आए मामलों को लेकर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। वहीं अभ्यर्थियों की मांग है कि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राज्यों की राजनीति में भी प्रमुख बना रह सकता है।

  • पंकजा मुंडे के राजनीतिक भविष्य पर बढ़ी चर्चा, कांग्रेस नेता बोले- भाजपा छोड़ें, पहली ओबीसी महिला सीएम बनाने में करेंगे सहयोग

    पंकजा मुंडे के राजनीतिक भविष्य पर बढ़ी चर्चा, कांग्रेस नेता बोले- भाजपा छोड़ें, पहली ओबीसी महिला सीएम बनाने में करेंगे सहयोग


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में उस समय एक नया मोड़ देखने को मिला, जब राज्य सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता पंकजा मुंडे को विपक्षी खेमे से एक बड़ा राजनीतिक प्रस्ताव मिला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि यदि पंकजा मुंडे भाजपा का साथ छोड़ने का मन बनाती हैं, तो कांग्रेस और उसके सहयोगी दल उन्हें महाराष्ट्र की पहली ओबीसी महिला मुख्यमंत्री के रूप में समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं। यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब पंकजा मुंडे ने हाल ही में सार्वजनिक मंच से अपने संन्यास के संकेत दिए थे।

    विजय वडेट्टीवार ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि पंकजा मुंडे राज्य की एक कद्दावर ओबीसी नेता हैं और उन्हें इतनी जल्दी सार्वजनिक जीवन से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वे भाजपा त्यागती हैं, तो वे व्यक्तिगत रूप से पार्टी के शीर्ष कमान से सिफारिश करेंगे कि उन्हें कांग्रेस में ससम्मान शामिल किया जाए। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि यह उनका अपना निजी दृष्टिकोण है और इसे पार्टी का औपचारिक अधिकारिक निमंत्रण नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि इस विषय पर अंतिम मोहर केंद्रीय नेतृत्व ही लगाएगा।

    कांग्रेस नेता ने इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल में पिछड़ा वर्ग के प्रमुख चेहरों को हाशिये पर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं में उपेक्षा को लेकर भारी असंतोष व्याप्त है, क्योंकि उनकी निष्ठा और जनाधार को उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा है। वडेट्टीवार के अनुसार, पंकजा मुंडे की हालिया भावुक टिप्पणी इसी अंदरूनी घुटन और उपेक्षा का परिणाम मानी जा सकती है।

    उल्लेखनीय है कि पंकजा मुंडे ने बीते दिनों अपने गृहांचल पारली में बुनियादी विकास और सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। उन्होंने कहा था कि निरंतर प्रयासों के बावजूद क्षेत्र की स्थिति में अपेक्षित सुधार न होना उनके लिए निराशाजनक है। इसी क्रम में उन्होंने यह टिप्पणी की थी कि वे मौजूदा राजनीतिक ढर्रे से थक चुकी हैं और राजनीति को अलविदा कहने पर विचार कर रही हैं, यद्यपि उन्होंने यह भी जोड़ा था कि उन्होंने इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

    पंकजा मुंडे के इस बयान के बाद राज्य के सियासी गलियारों में कयासों का दौर बेहद तेज हो गया। मध्य प्रदेश समेत देशभर के राजनीतिक विश्लेषक महाराष्ट्र में बन रहे इस नए घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विपक्ष के कई अन्य नेताओं ने भी उनकी स्थिति पर सहानुभूति प्रकट करते हुए अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

    इस बीच, कांग्रेस नेता के इस लुभावने ऑफर पर पंकजा मुंडे या उनके करीबी सूत्रों की तरफ से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। दूसरी ओर, भाजपा संगठन ने भी इस सियासी बयानबाज़ी पर फिलहाल अपनी चुप्पी बरकरार रखी है। जानकारों का मानना है कि आगामी चुनाव से ठीक पहले इस प्रकार की हलचल महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों को नया आकार दे सकती है। अब सभी की निगाहें पंकजा मुंडे के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

  • सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने टीएमसी छोड़ी, भाजपा और तृणमूल दोनों पर साधा निशाना

    सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने टीएमसी छोड़ी, भाजपा और तृणमूल दोनों पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यधारा के राजनीतिक दलों से उनका मोहभंग हो चुका है। अब वे नेताजी के आदर्शों और सिद्धांतों पर आधारित एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। उनके इस निर्णय ने राज्य के राजनीतिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के महज चार माह के भीतर ही उन्होंने पार्टी से अलग होने का मन बना लिया। उन्होंने अप्रैल 2026 में तृणमूल का दामन थामा था। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल और मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा की कार्यशैली में कोई मौलिक अंतर नजर नहीं आता। दोनों ही दल जनहित के बुनियादी मुद्दों को किनारे कर केवल सत्ता केंद्रित राजनीति में लगे हुए हैं, जिससे आम जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं।

    अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभवों का जिक्र करते हुए चंद्र कुमार बोस ने कहा कि वे ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर चुके हैं। इन सभी राजनीतिक यात्राओं के बाद उन्हें अहसास हुआ कि वर्तमान राजनीतिक ढांचा उनके जनसेवा के उद्देश्यों और सोच से मेल नहीं खाता। देश को इस समय समावेशी राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और वास्तविक सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देने वाली राजनीति की सख्त जरूरत है।

    उन्होंने आगे कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचार ही उनकी राजनीति का मुख्य आधार रहे हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वे एक नई राजनीतिक पहल की नींव रखेंगे। इस नए मंच का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ना और राजनीति में नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना होगा। मध्य प्रदेश समेत देशभर के राजनीतिक हलकों में भी इस नए विचार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जहां समान विचारधारा वाले लोगों को एकजुट करने की तैयारी है।

    उल्लेखनीय है कि चंद्र कुमार बोस ने वर्ष 2016 में भाजपा की सदस्यता ली थी। वे पार्टी के राज्य उपाध्यक्ष रहने के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी भी रहे। हालांकि, नीतियों से असहमति के चलते उन्होंने 2023 में भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अप्रैल 2026 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे, लेकिन यह साथ भी महज चार महीने ही चल सका। तृणमूल कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस इस्तीफे और बयानों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

  • तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के खाते में गई। वहीं बिहार की बांकीपुर सीट पर मतगणना के दौरान जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं।

    बांकीपुर में प्रशांत किशोर आगे
    बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 27वें राउंड की मतगणना तक जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को 59,213 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 39,794 वोट प्राप्त हुए। इस तरह प्रशांत किशोर 19,419 वोटों से आगे चल रहे हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ मानी जाती है। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया।

    बढ़त के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातोंरात नहीं बदलेगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में लोग सकारात्मक बदलाव जरूर महसूस करेंगे। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से बिहार के लिए बेहतर मुख्यमंत्री चुनने की भी अपील की।

    दतिया में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत

    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। दिलचस्प बात यह रही कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र बूथ नंबर-121 पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। यहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले। जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि यह जनादेश देशभर में संदेश देगा और जनता बदलाव चाहती है।

    गुजरात के मंजलपुर में भाजपा की बड़ी जीत
    गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के अंतर से हराया। जीत के बाद सतीश पटेल ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने उन पर भी वैसा ही भरोसा जताया है जैसा पहले उनके नेतृत्व पर जताया था। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार भिखाभाई रबारी ने हार स्वीकार करते हुए मतदान के अंतिम चरण में भय का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाया।

    30 जुलाई को हुआ था मतदा

    तीनों विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। गुजरात की मंजलपुर सीट पर 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। तीनों राज्यों के उपचुनावों के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • ग्यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा में हलचल, सर्वे रिपोर्ट से कई विधायकों की बढ़ी चिंता

    ग्यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा में हलचल, सर्वे रिपोर्ट से कई विधायकों की बढ़ी चिंता

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आंतरिक सर्वे ने मुरादाबाद मंडल के कई विधायकों की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के लिए कराए गए सर्वे में कई क्षेत्रों में विधायकों के प्रति जनता की नाराजगी सामने आने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए सर्वे एजेंसी ने करीब 35 प्रतिशत विधायकों के टिकट बदलने का सुझाव दिया है।

    तीन सर्वे पूरे, चौथा अगस्त-सितंबर में संभव
    भाजपा प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के तहत अब तक तीन चरणों में सर्वे करा चुकी है। बताया जा रहा है कि तीनों सर्वे में कई क्षेत्रों में विधायकों के प्रति असंतोष एक समान रूप से सामने आया है। अगस्त-सितंबर में चौथे चरण का सर्वे भी कराए जाने की संभावना है, जिसके बाद पार्टी आगे की रणनीति तय कर सकती है।

    मुरादाबाद मंडल में बढ़ी बेचैनी
    मुरादाबाद मंडल को समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां की 27 विधानसभा सीटों में से फिलहाल भाजपा के पास 12 सीटें हैं, जबकि 14 सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। रामपुर की स्वार सीट भाजपा के सहयोगी दल अपना दल (एस) के खाते में है।

    मंडल के 12 भाजपा विधायकों में से 10 लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। केवल रामवीर सिंह (कुंदरकी) और आकाश सक्सेना (रामपुर) उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं।

    35% टिकट बदलने की चर्चा
    पार्टी सूत्रों के अनुसार, सर्वे एजेंसी ने जिन क्षेत्रों में जन असंतोष अधिक पाया है, वहां नए उम्मीदवार उतारने की सिफारिश की है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किन विधायकों के नाम इस सूची में हैं, लेकिन यह चर्चा तेज है कि मुरादाबाद मंडल के कुछ विधायक भी इस दायरे में आ सकते हैं। इससे संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच हलचल बढ़ गई है।

    भाजपा का आधिकारिक रुख
    भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर ने कहा कि पार्टी समय-समय पर सर्वे कराती रहती है। फिलहाल विधानसभा चुनाव के लिए टिकट आवेदन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और पार्टी का मुख्य फोकस एमएलसी चुनाव पर है।

    मंडल के लगातार दूसरी बार चुने गए भाजपा विधायक

    बलदेव सिंह औलख (बिलासपुर)
    राजबाला (मिलक)
    गुलाब देवी (चंदौसी)
    रितेश गुप्ता (मुरादाबाद नगर)
    राजीव तरारा (मंडी धनौरा)
    महेंद्र खड़गवंशी (हसनपुर)
    सुचि चौधरी (बिजनौर)
    सुशांत सिंह (बढ़ापुर)
    अशोक राणा (धामपुर)
    ओम कुमार (नहटौर)

    मंडल में भाजपा की स्थिति

    जिला भाजपा विधायक
    बिजनौर 4
    रामपुर 3
    मुरादाबाद 2
    अमरोहा 2
    संभल 1

    हालांकि टिकटों को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन आंतरिक सर्वे की चर्चाओं ने चुनाव से करीब एक साल पहले ही भाजपा के भीतर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

  • अदालत से बरी होने के बाद फिर चर्चा में बृजभूषण शरण सिंह, यूपी की राजनीति में वापसी को लेकर बढ़ी अटकलें

    अदालत से बरी होने के बाद फिर चर्चा में बृजभूषण शरण सिंह, यूपी की राजनीति में वापसी को लेकर बढ़ी अटकलें

    गोंडा। महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन शोषण मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी होने के बाद कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गए हैं। अदालत के फैसले के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या भाजपा उन्हें फिर सक्रिय भूमिका देगी या उनकी राजनीतिक विरासत फिलहाल परिवार के जरिए ही आगे बढ़ेगी।

    टिकट कटा, लेकिन क्षेत्र में बनी रही सक्रियता
    महिला पहलवानों के आरोप सामने आने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कैसरगंज सीट से बृजभूषण की जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के इस फैसले को कानूनी विवाद से दूरी बनाने की रणनीति माना गया। हालांकि, करण भूषण सिंह की जीत ने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्र में बृजभूषण का जनाधार और संगठनात्मक प्रभाव कायम है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट कटने के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग नहीं किया। देवीपाटन मंडल के विभिन्न जिलों में उनके लगातार कार्यक्रम होते रहे और समर्थकों से संपर्क बना रहा। अदालत से राहत मिलने के बाद उनके आवास पर जुटी समर्थकों की भीड़ को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    समर्थकों ने फैसले को बताया न्याय की जीत
    कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल उनके पिता की नहीं, बल्कि न्याय की जीत है। उन्होंने आरोप लगाने वालों और विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अदालत का फैसला सच्चाई की पुष्टि करता है।

    ‘एक बार फिर संसद जाऊंगा’ बयान फिर चर्चा में

    बृजभूषण शरण सिंह पहले भी सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि वे एक बार फिर संसद पहुंचेंगे। अदालत से बरी होने के बाद उनके इस बयान को नई राजनीतिक संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि कानूनी बाधाएं समाप्त होने के बाद उनके लिए सक्रिय राजनीति के रास्ते फिर खुल सकते हैं।

    भाजपा के सामने राजनीतिक संतुलन की चुनौती
    हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अदालत से राहत मिलने के बावजूद भाजपा का फैसला केवल कानूनी आधार पर नहीं होगा। पार्टी संगठन, सामाजिक संदेश, राष्ट्रीय छवि और चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर ही आगे की रणनीति तय करेगी।

    फिलहाल दो संभावनाओं पर सबसे अधिक चर्चा है
    2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है।
    यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 2029 के लोकसभा चुनाव में उनकी सक्रिय चुनावी वापसी भी संभव मानी जा रही है।
    हालांकि इन संभावनाओं पर भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।

    मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क बना बड़ी ताकत
    गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में बृजभूषण शरण सिंह का मजबूत संगठनात्मक आधार माना जाता है। परिवार की राजनीतिक मौजूदगी भी बरकरार है। उनके बेटे करण भूषण सिंह कैसरगंज से सांसद हैं, जबकि प्रतीक भूषण सिंह गोंडा जिले से विधायक हैं। ऐसे में अदालत के फैसले के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

    मामले की पृष्ठभूमि
    जनवरी 2023 में महिला पहलवानों की शिकायतों के बाद यह मामला सामने आया था। लगभग तीन वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया में 127 सुनवाई हुईं और 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 2 जुलाई 2026 को अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी कर दिया है।

  • उज्जैन पहुंचे CM मोहन यादव, पूर्व मंत्री पारस जैन को दी श्रद्धांजलि; परिवार से मिलकर जताया दुख

    उज्जैन पहुंचे CM मोहन यादव, पूर्व मंत्री पारस जैन को दी श्रद्धांजलि; परिवार से मिलकर जताया दुख

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सोमवार को उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री पारस जैन के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री हेलीपैड से सीधे पारस जैन के निवास पहुंचे और उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए दिवंगत नेता के योगदान को याद किया।

    मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में पूर्व मंत्री पारस जैन के निधन के बाद शोक का माहौल है। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे पारस जैन का निधन होने की खबर सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में दुख की लहर फैल गई। उनके निधन को पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के उज्जैन पहुंचने पर हेलीपैड पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री बिना किसी अन्य कार्यक्रम के सीधे पारस जैन के निवास पहुंचे। वहां उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी और परिवार के लोगों से मिलकर संवेदना व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व मंत्री और उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक पारस जैन का निधन अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि पारस जैन ने अपने राजनीतिक जीवन में जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई और लंबे समय तक समाज एवं संगठन के लिए कार्य किया।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता को याद करते हुए कहा कि पारस जैन का योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी पारस जैन को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री और कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल सहित अन्य नेताओं ने भी पारस जैन को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    पारस जैन उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके थे और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। भाजपा संगठन में उनकी पहचान एक अनुभवी और जमीन से जुड़े नेता के रूप में रही। लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी।

    उनके निधन के बाद उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने दुख व्यक्त किया है। अंतिम यात्रा से पहले मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके निवास पहुंचकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। पारस जैन के राजनीतिक योगदान और सामाजिक जुड़ाव को याद करते हुए लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं

  • दतिया उपचुनाव: 8वें राउंड तक कांग्रेस ने भाजपा को पछाड़ा, घनश्याम सिंह 6,583 वोट से आगे

    दतिया उपचुनाव: 8वें राउंड तक कांग्रेस ने भाजपा को पछाड़ा, घनश्याम सिंह 6,583 वोट से आगे


    दतिया। मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच जारी है। आठवें राउंड की गिनती पूरी होने तक कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने मुकाबले में मजबूत बढ़त बना ली है। वह भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी से 6,583 मतों से आगे चल रहे हैं। अब तक 15 में से आठ राउंड की मतगणना पूरी हो चुकी है, जबकि सात राउंड की गिनती शेष है।

    आठवें राउंड तक यह रही स्थिति
    आठवें राउंड में कांग्रेस को 6,828, भाजपा को 3,540 और आजाद समाज पार्टी (आसपा) को 1,303 वोट मिले। इसके साथ ही कुल मतों का आंकड़ा इस प्रकार है—
    घनश्याम सिंह (कांग्रेस): 38,264 वोट
    आशुतोष तिवारी (भाजपा): 31,681 वोट
    दामोदर यादव (आसपा): 11,754 वोट
    कांग्रेस ने इस चरण तक 6,583 वोटों की बढ़त बना ली है।

    पहले राउंड में भाजपा आगे, फिर कांग्रेस ने पलटी बाजी
    सुबह 8 बजे शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में मतगणना शुरू हुई। पहले राउंड में भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने 909 वोटों की बढ़त बनाई थी। हालांकि दूसरे, तीसरे और चौथे राउंड में कांग्रेस ने लगातार बढ़त हासिल कर मुकाबले का रुख बदल दिया। पांचवें राउंड में भाजपा ने कुछ अंतर कम किया, लेकिन छठे, सातवें और आठवें राउंड में कांग्रेस ने बढ़त लगातार बढ़ाते हुए निर्णायक स्थिति बना ली।

    नेता प्रतिपक्ष ने किया जीत का दावा
    मतगणना के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि दतिया की जनता का रुझान कांग्रेस के पक्ष में है और पार्टी की जीत तय है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के खिलाफ भी लड़ा गया। सिंघार ने यह भी कहा कि दतिया उपचुनाव का परिणाम 2028 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला साबित होगा।

    दोनों दलों को जीत का भरोसा
    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने दावा किया कि उनकी जीत का अंतर 12 से 15 हजार वोट तक पहुंच सकता है। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों के दम पर भाजपा ही जीत दर्ज करेगी।

    कड़ी सुरक्षा के बीच जारी मतगणना
    दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ था। मतगणना के लिए 21 टेबल लगाई गई हैं और करीब 350 अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मतगणना केंद्र को छावनी में तब्दील किया गया है और केवल अधिकृत पासधारकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।