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  • राज्यसभा और विधान परिषद के फैसलों से तेज हुई सियासी बहस, क्या गठबंधन संतुलन साधने में भाजपा की नई रणनीति?

    राज्यसभा और विधान परिषद के फैसलों से तेज हुई सियासी बहस, क्या गठबंधन संतुलन साधने में भाजपा की नई रणनीति?

    नई दिल्ली । बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के हालिया राजनीतिक फैसलों ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। राज्यसभा और विधान परिषद की दो सीटों से जुड़े निर्णयों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भाजपा गठबंधन सहयोगियों को मजबूत करने की रणनीति के तहत अपने परंपरागत समर्थक वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रही है। इन घटनाक्रमों को आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    चर्चा की शुरुआत उस समय हुई जब नवादा से लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद विवेक ठाकुर द्वारा खाली की गई राज्यसभा सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को भेजा गया। इसके बाद विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे के पश्चात सहयोगी दल के नेता और मंत्री दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ। लगातार दो महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर सहयोगी दल के नेताओं को मिलने के बाद विभिन्न राजनीतिक हलकों में इस रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा लंबे समय से बिहार में अपने पारंपरिक सामाजिक आधार के साथ-साथ व्यापक सामाजिक संतुलन की रणनीति पर काम करती रही है। ऐसे में पिछड़े वर्ग के प्रभावशाली समुदायों को प्रतिनिधित्व देना आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक भूमिका को भी इसी व्यापक सामाजिक और गठबंधन समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है।

    दूसरी ओर, पार्टी के परंपरागत समर्थक माने जाने वाले भूमिहार समाज को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह समुदाय कई दशकों से भाजपा के प्रमुख समर्थक वर्गों में शामिल रहा है और राज्य के अनेक विधानसभा क्षेत्रों में उसका प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पार्टी के कुछ निर्णयों को लेकर समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच प्रतिनिधित्व संबंधी सवाल उठ रहे हैं।

    हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के विभागीय बदलाव और अन्य संगठनात्मक फैसलों को भी कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसी बहस से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन निर्णयों को लेकर कोई सार्वजनिक असहमति या आधिकारिक विवाद सामने नहीं आया है। वहीं पार्टी के भीतर भी किसी बड़े नेता ने इन फैसलों पर खुलकर विरोध दर्ज नहीं कराया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे सामाजिक रूप से विविध राज्य में चुनावी सफलता केवल किसी एक समुदाय के समर्थन पर निर्भर नहीं होती। गठबंधन की मजबूती, विभिन्न सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों के बीच समन्वय चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसी कारण कई बार राजनीतिक दल अपने संगठनात्मक हितों के साथ-साथ गठबंधन की आवश्यकताओं को भी प्राथमिकता देते हैं।

    फिलहाल यह स्पष्ट संकेत नहीं हैं कि इन फैसलों का पार्टी के परंपरागत वोट बैंक पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है। हालांकि राजनीतिक चर्चाओं और सामाजिक स्तर पर इस विषय पर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सीटों के वितरण से इस बहस की दिशा काफी हद तक तय होगी।

    बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन सहयोगियों और अपने पारंपरिक समर्थक वर्ग के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। आने वाले समय में टिकट वितरण, चुनावी अभियान और सामाजिक समीकरणों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को किस प्रकार आगे बढ़ाती है और इन राजनीतिक फैसलों का चुनावी परिदृश्य पर कितना प्रभाव पड़ता है।

  • सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में

    सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में


    भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीति और प्रशासन से जुड़ी कई घटनाएं शनिवार को चर्चा का केंद्र बनी रहीं। एक ओर संसद में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उसके विरोध प्रदर्शन को सड़क छाप राजनीति करार दिया तो दूसरी ओर भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। इसी बीच अनूपपुर जिले से सामने आया एक वीडियो सरकारी व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत बयां करता नजर आया जिसमें एक नर्स मोबाइल नेटवर्क की तलाश में पेड़ पर चढ़कर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की कोशिश करती दिखाई दी।

    राज्यसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब विपक्ष ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सभापति की ओर से अनुमति नहीं मिलने पर विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में लोकतंत्र की मर्यादा को तार तार किया जा रहा है और विपक्ष केवल अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और ऐसे व्यवहार को कभी स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा और सदन में नारेबाजी होती रही।

    इधर दिल्ली में भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या पार्टी उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटने के बाद फिलहाल वे सांसद के रूप में सक्रिय हैं लेकिन अमित शाह से मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग अलग अर्थ निकाल रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

    राजनीति के साथ साथ प्रशासनिक व्यवस्था की एक तस्वीर अनूपपुर जिले से सामने आई जिसने सभी का ध्यान खींचा। पुष्पराजगढ़ के गन्नागोडा स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक नर्स ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए पेड़ पर चढ़ गई। स्वास्थ्य केंद्र में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उसे मजबूरी में यह तरीका अपनाना पड़ा। वायरल वीडियो में नर्स यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि जब तक ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं लग जाएगी तब तक वह नीचे नहीं उतरेगी। यह घटना ग्रामीण इलाकों में डिजिटल व्यवस्था और नेटवर्क की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े करती है।

    उधर दतिया उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। मतदान संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक दल अपने अपने दावे कर रहे हैं। इसी बीच यह चर्चा भी सामने आई कि मतदान से पहले एक होटल में हुई रणनीतिक बैठक में विरोधी दल के साथ कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन्हें राजनीतिक तौर पर दूसरे खेमे के करीबी माना जाता है। बताया जा रहा है कि बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए होटल के सीसीटीवी कैमरे तक बंद करा दिए गए थे। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन चुनावी नतीजों से पहले इस तरह की चर्चाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

    संसद की तल्ख बहस हो या संगठन की गतिविधियां अथवा सरकारी व्यवस्था की चुनौतियां मध्य प्रदेश से जुड़ी ये घटनाएं फिलहाल राजनीति और प्रशासन दोनों की दिशा पर सवाल भी खड़े कर रही हैं और चर्चा भी बटोर रही हैं। अब सबकी नजर आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों पर टिकी हुई है।

  • दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। मतदान को लेकर मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह 10 बजे तक 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीण इलाकों सहित कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मतदान प्रक्रिया शाम 6 बजे तक जारी रहेगी।

    मतदान शुरू होने से पहले तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खराबी सामने आई। मतदान केंद्र क्रमांक 186 पर वीवीपैट, 108 पर बैलेटिंग यूनिट (BU) और 290 पर कंट्रोल यूनिट (CU) में समस्या आने पर मॉक पोल के दौरान सभी एजेंटों और कैमरों की मौजूदगी में उपकरण बदल दिए गए। इसके बाद निर्धारित समय पर मतदान शुरू कराया गया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि तकनीकी खामी का समय रहते समाधान कर लिया गया था, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    इधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाते हुए मतदान का बहिष्कार किया। सूचना मिलने पर एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता भाजपा के अहंकार का जवाब देगी। वहीं भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ में दर्शन कर प्रदेश और दतिया के विकास, युवाओं को रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने मतदान केंद्र क्रमांक 158 पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और भाजपा के पक्ष में भारी मतदान होने का दावा किया।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर 2 लाख 20 हजार 400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

  • यूपी चुनाव से पहले 'जयंती राजनीति' तेज, भाजपा-सपा महापुरुषों के जरिए साध रहीं जातीय समीकरण

    यूपी चुनाव से पहले 'जयंती राजनीति' तेज, भाजपा-सपा महापुरुषों के जरिए साध रहीं जातीय समीकरण

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने जातीय और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) अपने-अपने परंपरागत वोट बैंक को साधने के लिए संतों, समाज सुधारकों और महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। इसके लिए दोनों दलों ने प्रदेशभर में लंबे अभियान और आयोजनों की रूपरेखा तैयार की है।

    भाजपा ने संत रविदास महाराज की जयंती को केंद्र में रखकर करीब सात महीने तक चलने वाला ‘समरसता संकल्प अभियान’ शुरू करने का फैसला किया है। वहीं, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति पर आगे बढ़ रही सपा बुधवार को पूरे प्रदेश में महाराजा दक्ष प्रजापति की जयंती पर जिला और महानगर स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है।

    महापुरुषों के जरिए सामाजिक संदेश देने की तैयारी
    हाल के महीनों में डॉ. भीमराव आंबेडकर और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर भी सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने व्यापक स्तर पर आयोजन किए थे। अब भाजपा ने संत रविदास महाराज के जीवन और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से 20 फरवरी 2027 (संत रविदास जयंती) तक विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है।

    इस अभियान के दौरान धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से समता, सामाजिक न्याय, सेवा और मानवता के संदेश का प्रचार किया जाएगा।

    सपा भी जयंती आयोजनों पर दे रही जोर
    समाजवादी पार्टी भी विभिन्न समाजों के महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कर अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर महाराजा दक्ष प्रजापति जयंती मनाई जा रही है। इसके बाद 5 अगस्त को पार्टी संस्थापक नेताओं में शामिल जनेश्वर मिश्र की जयंती पर भी परंपरागत कार्यक्रम होंगे।

    भाजपा करेगी पुजारियों का सम्मान
    गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भाजपा महानगर इकाई शहर के सभी दस मंडलों में कार्यक्रम आयोजित करेगी। महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला के अनुसार, इस दौरान शहर के 100 मंदिरों के पुजारियों का सम्मान किया जाएगा। इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    पांच महीनों में सपा के कई आयोजन
    मार्च से जुलाई के बीच सपा ने विभिन्न महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर करीब 11 कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें कांशीराम, सम्राट अशोक, महर्षि कश्यप, महाराजा निषादराज गुहा, महात्मा ज्योतिराव फुले, डॉ. भीमराव आंबेडकर, अहिल्याबाई होल्कर, महारानी दुर्गावती, छत्रपति साहूजी महाराज, बाबा लक्खी शाह बंजारा और फूलन देवी से जुड़े आयोजन शामिल रहे।

    भाजपा के प्रमुख आयोजन
    भाजपा ने भी इस वर्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, अहिल्याबाई होल्कर और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित कई महापुरुषों की जयंती और स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन किया। आंबेडकर जयंती के अवसर पर दीपोत्सव, प्रतिमा स्वच्छता अभियान और सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

    कार्यकर्ताओं से जुड़ाव पर भी जोर
    चुनावी तैयारियों के बीच जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी संगठन के कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने की भी कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं के जन्मदिन और वैवाहिक वर्षगांठ की शुभकामनाओं के साथ-साथ उनके कार्यक्रमों में व्यक्तिगत उपस्थिति दर्ज कराकर संगठनात्मक संबंध मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने के बाद भी ओडिशा भाजपा में मजबूत पकड़, धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत से मिले राजनीतिक संकेत

    केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने के बाद भी ओडिशा भाजपा में मजबूत पकड़, धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत से मिले राजनीतिक संकेत

    नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार ओडिशा पहुंचे वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान का पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार स्वागत किया। नीट पेपर लीक विवाद के बीच मंत्री पद से उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि ओडिशा में उनके स्वागत और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने संकेत दिया कि संगठन के भीतर उनकी राजनीतिक पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है।

    धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय तक केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और ओडिशा भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में उनकी पहचान रही है। उनके इस्तीफे के बाद भाजपा के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन व्यक्त किया था। संसद में भी एनडीए के कई सांसदों ने उनका स्वागत कर उनके प्रति सम्मान और समर्थन का संदेश दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम संगठन में उनके प्रभाव को दर्शाता है।

    राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि मंत्री पद से हटने के बाद उनकी प्रशासनिक भूमिका भले बदल गई हो, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर उनका अनुभव और नेटवर्क भाजपा के लिए अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। पार्टी के भीतर लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण उनकी पकड़ संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत मानी जाती है।

    धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उनकी सक्रियता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और संघ परिवार से जुड़ी रही है। उनके पिता देवेंद्र प्रधान भी राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे और केंद्रीय मंत्री का दायित्व निभा चुके थे। वर्ष 2014 के बाद केंद्र में भाजपा सरकार बनने के साथ धर्मेंद्र प्रधान राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख नेताओं में शामिल हुए और विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

    ओडिशा में भाजपा के विस्तार में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। पिछले एक दशक में उन्होंने संगठन को मजबूत करने और राज्य में पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए लगातार काम किया। वर्ष 2017 के स्थानीय निकाय चुनावों तथा 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन को मजबूत करने में उनकी रणनीतिक भूमिका की चर्चा होती रही है। राज्य में लंबे समय तक सत्तारूढ़ रहे राजनीतिक दल के मुकाबले भाजपा को मजबूत विकल्प बनाने के प्रयासों में भी उनका योगदान माना जाता है।

    हालांकि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि ओडिशा भाजपा में नेतृत्व की भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ेगी। राज्य में मौजूदा सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषक नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होंगे और इन चुनावों में संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका पर भी ध्यान रहेगा।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि किसी नेता का प्रभाव केवल सरकारी पद से नहीं, बल्कि संगठन में उसकी स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं से जुड़ाव और नेतृत्व क्षमता से भी तय होता है। ओडिशा दौरे के दौरान मिले स्वागत ने यह संकेत दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान अभी भी राज्य की भाजपा राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि भविष्य में उनकी संगठनात्मक और राजनीतिक भूमिका किस रूप में आगे बढ़ती है।

  • संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जाएंगे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम

    संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जाएंगे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम

    नई दिल्ली । संत गुरु रविदास महाराज के समता, सेवा और सामाजिक न्याय के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक राष्ट्रव्यापी पहल की शुरुआत की है। जमशेदपुर में एक औपचारिक घोषणा के दौरान इस ‘समरसता संकल्प अभियान’ की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई। यह व्यापक अभियान आषाढ़ पूर्णिमा से प्रारंभ होकर माघ पूर्णिमा तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रीय, राज्य, जिला, मंडल और ग्राम स्तर तक विविध सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    इस अभियान का मुख्य ध्येय संत रविदास द्वारा प्रतिपादित ‘बेगमपुरा’ के उस दर्शन को साकार करना है, जो शोषण और भेदभाव से मुक्त समाज की परिकल्पना पर आधारित है। संगठन का मानना है कि विकसित भारत के निर्माण में समाज के सभी वर्गों की समान सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के प्रत्येक स्तर पर सद्भाव और समरसता का वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    अभियान के तहत कई बड़े कार्यक्रमों की योजना तैयार की गई है। इसके शुरुआती चरण में शाम को दीप महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ ही वाराणसी स्थित पवित्र स्थल की पावन मिट्टी से भरे कलश देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में भेजे जाएंगे। इसके अलावा पंजाब के जालंधर से वाराणसी तक एक भव्य समरसता यात्रा भी निकाली जाएगी। एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा के माध्यम से आम जनमानस को संत रविदास के विचारों से जोड़ने का प्रयास होगा।

    सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए पूरे अभियान के दौरान संत संपर्क, छात्रावास संपर्क, समरसता संवाद, भजन-कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला चलेगी। इसके तहत समाज के प्रबुद्ध जनों और संतों से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर इन सभी गतिविधियों के सुचारू संचालन और समन्वय के लिए जिला और मंडल स्तर पर विशेष आयोजन समितियों का गठन भी शुरू कर दिया गया है।

  • प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    नई दिल्ली। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में अपनी बात रखने वाले लोगों को आलोचना और प्रतिक्रिया का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए अपने संदेश में कंगना ने प्रदर्शनकारियों के व्यवहार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

    कंगना रनौत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सड़कों पर जिन प्रदर्शनकारियों को आम लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर उनकी अभद्र और आपत्तिजनक सामग्री के कारण जनता में नाराजगी बढ़ी है। कंगना ने कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखता है, तो उसे दूसरों की प्रतिक्रिया सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने आगे लिखा कि यदि कोई सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो जनता भी उसके प्रति नाराजगी व्यक्त कर सकती है। कंगना के अनुसार यदि किसी को सरकार या देश की नीतियों से असहमति है और वह सार्वजनिक मंचों पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है, तो उन लोगों को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है जो देश और सरकार का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी राय रखने का समान अधिकार है।

    अपनी पोस्ट में कंगना ने न्यूटन के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए लिखा कि हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि यदि अब तक लोग कारण और प्रभाव के सिद्धांत को नहीं समझ पाए हैं, तो मौजूदा परिस्थितियां उन्हें यह बात अच्छी तरह समझा देंगी। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और समर्थक व आलोचक दोनों अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

    दरअसल, हाल के दिनों में छात्र आंदोलन और उससे जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इन्हीं घटनाओं के संदर्भ में कंगना लगातार अपनी प्रतिक्रिया देती रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने प्रदर्शनकारियों की भाषा और विरोध के तरीके पर सवाल उठाते हुए कई पोस्ट साझा किए थे। उन्होंने कुछ वायरल वीडियो का उल्लेख करते हुए प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की थी।

    कंगना ने इससे पहले एक अन्य पोस्ट में प्रदर्शनकारी युवाओं को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा था कि उन्होंने एक साथ इतनी अभद्रता पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने कुछ वीडियो को परेशान करने वाला बताते हुए युवाओं की भाषा, व्यवहार और परवरिश पर भी सवाल उठाए थे। उनके इन बयानों ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया था और विभिन्न वर्गों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

    भाजपा सांसद होने के साथ-साथ कंगना रनौत सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। उनके कई बयान पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुके हैं। इस बार भी उनका ताजा बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हालांकि, इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों या संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • बांकीपुर सीट पर फिर कमल खिलने का दावा, नितिन नवीन बोले- जनता का विश्वास आज भी BJP के साथ

    बांकीपुर सीट पर फिर कमल खिलने का दावा, नितिन नवीन बोले- जनता का विश्वास आज भी BJP के साथ


    नई दिल्ली । 
    बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की जीत का विश्वास जताते हुए कहा कि बांकीपुर की जनता का लंबे समय से भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर भरोसा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों का समर्थन इस बार भी भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में दिखाई देगा और विकास के मुद्दे पर जनता एक बार फिर पार्टी के साथ खड़ी होगी।

    नितिन नवीन ने कहा कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का जनाधार कई दशकों से मजबूत रहा है। उनके अनुसार यह विश्वास केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता और पार्टी के बीच लगातार बने संबंधों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा के समय से ही इस क्षेत्र में भाजपा को व्यापक जनसमर्थन मिलता रहा है और पार्टी ने हमेशा जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करने का प्रयास किया है।

    उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने राजनीति को सेवा और विकास के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया है। उनका कहना था कि जनता ने हमेशा उन कार्यों को महत्व दिया है जिनका सीधा लाभ क्षेत्र के लोगों को मिला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस बार भी मतदाता विकास, सुशासन और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता देते हुए भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा के पक्ष में मतदान करेंगे।

    विपक्षी दलों की चुनौती से जुड़े सवाल पर नितिन नवीन ने कहा कि लोकतंत्र में हर दल को चुनाव लड़ने का अधिकार है, लेकिन जनता अंततः उसी उम्मीदवार और दल का चयन करती है जिसने क्षेत्र के विकास के लिए लगातार कार्य किया हो। उन्होंने कहा कि वह स्वयं इस विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं और अपने कार्यकाल के दौरान विकास परियोजनाओं तथा जनसुविधाओं को प्राथमिकता दी गई। उनका मानना है कि यही काम भाजपा के पक्ष में सकारात्मक माहौल तैयार करेगा।

    उन्होंने बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक हालात का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने पिछले वर्षों में विकास और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखा है। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था में कानून-व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि जनता एक बार फिर भाजपा को समर्थन देती है तो विकास कार्यों की गति और तेज होगी तथा क्षेत्र में नई योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

    बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान प्रस्तावित है, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी। यह उपचुनाव इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट रिक्त हो गई थी। वह इस क्षेत्र से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं, जबकि उनके पिता भी कई बार इसी सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। वर्ष 1995 से यह सीट भाजपा के कब्जे में रही है, जिससे इस चुनाव का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।

    इस बार मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है। भाजपा ने नीरज सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। वहीं जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में सभी दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है और अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ मतदाताओं की नजर भी 30 जुलाई के मतदान और 3 अगस्त को घोषित होने वाले परिणामों पर टिकी हुई है। यही नतीजे तय करेंगे कि बांकीपुर की जनता इस बार किस उम्मीदवार और किस राजनीतिक दल पर अपना भरोसा जताती है।

  • मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

    मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की ड्रीम गर्ल और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता हेमा मालिनी ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया था तब उनके पति और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र इसके पक्ष में नहीं थे। इसका कारण किसी राजनीतिक मतभेद से ज्यादा उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता थी। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान होने वाली भारी भीड़ और लगातार हेलिकॉप्टर से यात्रा करना धर्मेंद्र को हमेशा परेशान करता था।

    हेमा मालिनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से उन्हें अलग अलग राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए भेजा जाता था जहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी। ऐसी परिस्थितियों को देखकर धर्मेंद्र हमेशा चिंतित रहते थे। वह बार बार उनसे सुरक्षित रहने की सलाह देते और पूछते कि क्या इतना जोखिम उठाना वास्तव में जरूरी है। चुनाव प्रचार के दौरान हेलिकॉप्टर से लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने पर भी उन्हें काफी चिंता रहती थी। हालांकि हेमा मालिनी का कहना है कि पार्टी की जिम्मेदारी होने के कारण उन्हें अपना दायित्व निभाना पड़ता था।

    उन्होंने बताया कि राजनीति की ओर उनका झुकाव वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ जब उन्होंने अभिनेता और भाजपा नेता विनोद खन्ना के लिए चुनाव प्रचार किया था। उसी दौरान उन्होंने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन और स्नेह देखा। उन्होंने कहा कि जब भी चुनावी सभाओं में विशाल भीड़ उमड़ती थी तो उन्हें विश्वास ही नहीं होता था कि इतने लोग उन्हें देखने और सुनने आए हैं। लोगों का यह प्रेम उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक अनुभव था।

    हेमा मालिनी ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने राजनीति में आने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। लेकिन उनकी मां ने उन्हें समझाया कि अब केवल अभिनय तक सीमित रहने के बजाय देश के लिए भी योगदान देने का समय आ गया है। उनकी मां ने उन्हें बताया कि भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे बड़े और सम्मानित नेता हैं तथा यह अवसर देश सेवा का माध्यम बन सकता है। मां की यह बात उनके मन को छू गई और उन्होंने राजनीति में सक्रिय होने का निर्णय ले लिया।

    एक्ट्रेस ने अपने पहले चुनाव से जुड़ा एक और रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी के सामने स्पष्ट शर्त रखी थी कि यदि वह चुनाव लड़ेंगी तो केवल मथुरा लोकसभा सीट से ही लड़ेंगी क्योंकि वह भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त हैं और मथुरा से उनका विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव है। बाद में पार्टी ने उनकी इच्छा का सम्मान किया और उन्हें मथुरा से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने इस दौरान दिवंगत नेताओं सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के सहयोग को भी याद करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

    फिल्मी दुनिया में दशकों तक अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीतने वाली हेमा मालिनी आज राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में मनोरंजन और जनसेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका यह अनुभव बताता है कि परिवार की चिंताओं और व्यक्तिगत दुविधाओं के बावजूद यदि उद्देश्य स्पष्ट हो तो जीवन में नए रास्ते अपनाए जा सकते हैं।

  • दतिया में बीजेपी की अग्निपरीक्षा नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी और जातीय समीकरणों के बीच फंसा उपचुनाव

    दतिया में बीजेपी की अग्निपरीक्षा नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी और जातीय समीकरणों के बीच फंसा उपचुनाव


    दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं बल्कि बदले हुए राजनीतिक समीकरण बन गए हैं। पूर्व गृह मंत्री और लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद चुनावी माहौल बदलता नजर आ रहा है। पार्टी ने उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है लेकिन जमीन पर नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव और समर्थकों की भावनाएं अब भी चुनावी चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।

    ग्रामीण इलाकों में कई मतदाता आज भी नरोत्तम मिश्रा को दादा के नाम से याद करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में उनकी सक्रिय भूमिका रहती थी। ऐसे में टिकट बदलने के फैसले के बाद कुछ समर्थकों में नाराजगी दिखाई दे रही है। हालांकि पार्टी इसे पूरी तरह नियंत्रित करने का दावा कर रही है।

    पिछले करीब 18 वर्षों में दतिया बीजेपी संगठन में नरोत्तम मिश्रा का मजबूत प्रभाव रहा। इस दौरान उनका समर्थक नेटवर्क बूथ स्तर तक सक्रिय रहा और चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी काफी हद तक इसी टीम के पास रही। अब नए उम्मीदवार के साथ पार्टी को बूथ स्तर पर संगठन को फिर से सक्रिय करना पड़ रहा है। पुराने कार्यकर्ता दोबारा मैदान में जरूर उतरे हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर उनका जनसंपर्क पहले जैसा मजबूत नहीं माना जा रहा।

    इसी चुनौती को देखते हुए बीजेपी ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। अब तक आठ मंत्री क्षेत्र में प्रचार कर चुके हैं जबकि 20 विधायकों को अलग अलग शक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी भी लगातार मतदाताओं तक पहुंचने में जुटे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि व्यापक संगठनात्मक अभियान से संभावित नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।

    नरोत्तम मिश्रा भी चुनावी अभियान से पूरी तरह दूर नहीं हैं। उन्हें चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है और उनके फोटो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रचार सामग्री में प्रमुखता से लगाए गए हैं। हालांकि उनका प्रचार करने का तरीका अलग है। वे उम्मीदवार के साथ मंच साझा करने के बजाय स्वयं घर घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।

    नरोत्तम मिश्रा ने समर्थकों की नाराजगी के सवाल पर कहा कि अब पार्टी में कोई असंतुष्ट नहीं है और सभी कार्यकर्ता भाजपा की जीत के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने उन्हें लंबे समय तक विधायक और मंत्री बनने का अवसर दिया और अब वे केवल एक कार्यकर्ता के रूप में संगठन की जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस उपचुनाव में जातीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। खासकर ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में दतिया का उपचुनाव केवल उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं बल्कि संगठन की मजबूती स्थानीय नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।