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  • दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र

    दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र


    भोपाल । मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार अब पूरी तरह गर्मा चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। चुनावी सभाओं में विकास के मुद्दों के साथ साथ तंज व्यंग्य और राजनीतिक बयानबाजी भी सुर्खियां बटोर रही है। नेताओं के बयान और चुनावी रणनीतियां इस उपचुनाव को लगातार दिलचस्प बना रही हैं।

    भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया है लेकिन प्रचार अभियान में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका भी बेहद अहम नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दतिया में आयोजित चुनावी सभा के दौरान आशुतोष तिवारी और नरोत्तम मिश्रा को मंच पर साथ खड़ा करते हुए दोनों को राम लक्ष्मण की जोड़ी बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोग इसे भाजपा की ऐसी रणनीति बता रहे हैं जिसमें प्रत्याशी के साथ वरिष्ठ नेता की लोकप्रियता का भी पूरा लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है।

    इसी बीच दतिया में सड़क किनारे खड़े एक पुराने टैंकर ने भी चुनावी माहौल को नया मोड़ दे दिया। टैंकर पर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम लिखा होने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। कांग्रेस नेताओं ने इसे लेकर भाजपा पर तंज कसते हुए दावा किया कि पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता को राजनीतिक रूप से पीछे कर दिया है। हालांकि भाजपा नेताओं ने इस तरह की टिप्पणियों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया।

    उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी दतिया में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि उनका पूरा ध्यान दतिया उपचुनाव पर है और कांग्रेस इस सीट को हर हाल में जीतना चाहती है। भाजपा ने भी इस बयान पर पलटवार किया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जीतू पटवारी आजकल हर जगह घूम रहे हैं लेकिन उनका अपना कोई हल्का नहीं है। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई।

    चुनावी प्रचार के दौरान नेताओं ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को भी अपने अपने तरीके से उठाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी की पृष्ठभूमि को लेकर बयान दिए तो कांग्रेस ने लोकतंत्र में जनता को सबसे बड़ा बताया। दोनों दल अपने समर्थकों को यह भरोसा दिलाने में जुटे हैं कि वही जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दतिया पहुंचकर भाजपा के पक्ष में प्रचार किया। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल की बिजली व्यवस्था का जिक्र करते हुए पुराने दिनों का उदाहरण दिया और अपने खास अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा। उनके भाषण और मंचीय प्रस्तुति को लेकर भी सभा में मौजूद लोगों के बीच खूब चर्चा रही।

    राजनीतिक हलकों में चुनाव प्रचार से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी चर्चा का विषय बना। भाजपा की एक संगठनात्मक बैठक के दौरान एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने मजाकिया अंदाज में संगठन के एक पदाधिकारी से मुख्यमंत्री बनने की बात कह दी। इस टिप्पणी पर कुछ देर के लिए बैठक में मौजूद नेताओं के बीच हल्की मुस्कान और हास्य का माहौल बन गया।

    दतिया उपचुनाव में अब प्रचार अंतिम दौर में पहुंच रहा है। दोनों प्रमुख दल अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। आने वाले दिनों में चुनावी बयानबाजी और रणनीतियां और तेज होने की संभावना है जबकि अंतिम फैसला मतदाता अपने वोट के जरिए करेंगे।

  • छात्र आंदोलन पर स्तुति मिश्रा की पोस्ट वायरल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा की पत्नी के समर्थन से बढ़ी चर्चा

    छात्र आंदोलन पर स्तुति मिश्रा की पोस्ट वायरल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा की पत्नी के समर्थन से बढ़ी चर्चा


    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा की पत्नी स्तुति मिश्रा का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों राजनीतिक और सोशल मीडिया गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने दिल्ली में NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील की है।

    स्तुति मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके आंदोलन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समन्वय और संवाद के माध्यम से समाधान निकलना चाहिए। बड़े पदों पर बैठे लोगों को जिद नहीं करनी चाहिए, बल्कि बच्चों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने लिखा कि यदि छात्र सरकार से उम्मीद नहीं करेंगे तो फिर किससे करेंगे। उनके अनुसार, प्रेम और सहानुभूति किसी भी समस्या के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और हर बच्चे को सम्मान व संवेदनशील व्यवहार मिलना चाहिए।

    पोस्ट के शुरुआती संस्करण में उन्होंने यह भी लिखा था कि गलती होने पर क्षमा मांगने से कोई छोटा नहीं होता और जो लोग इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें दंड मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि छात्रों की मांगों को सुनना आवश्यक है और उनके साथ न्याय होना चाहिए। हालांकि, पोस्ट वायरल होने के बाद उन्होंने इस हिस्से को संपादित कर हटा दिया।

    स्तुति मिश्रा का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद इसे लेकर विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि, उन्होंने बाद में अपने संदेश में संशोधन करते हुए केवल छात्रों के प्रति संवेदनशीलता और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

    यह पहला अवसर नहीं है जब स्तुति मिश्रा का कोई सोशल मीडिया पोस्ट सुर्खियों में आया हो। इससे पहले बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर उन्होंने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए लिखा था कि भविष्य में बैंक होम लोन और कार लोन की तरह पेट्रोल-डीजल लोन भी ईएमआई पर उपलब्ध कराएंगे। उस पोस्ट के वायरल होने के बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी टिप्पणी पर सफाई भी दी थी।

    वर्तमान पोस्ट ने एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, इसे लेकर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • दतिया पहुंचे सिंधिया का बड़ा दावा, बोले- भाजपा की जीत तय; पेपर लीक दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    दतिया पहुंचे सिंधिया का बड़ा दावा, बोले- भाजपा की जीत तय; पेपर लीक दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई


    ग्वालियर । दतिया उपचुनाव के प्रचार अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के स्टार प्रचारक ज्योतिरादित्य सिंधिया शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे, जहां से वे पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में चुनाव प्रचार के लिए दतिया रवाना हुए। ग्वालियर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए सिंधिया ने भरोसा जताया कि दतिया की जनता एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास जताएगी और पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भारी मतों से जीत दर्ज करेंगे।
    सिंधिया ने कहा कि दतिया उपचुनाव केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि विकास और क्षेत्र की प्रगति का चुनाव है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने दतिया के विकास के लिए लगातार काम किया है और आगे भी विकास की यह गति जारी रहेगी। उनके मुताबिक, जनता विकास के मुद्दे पर मतदान करेगी और भाजपा का परचम लहराएगी।
    चुनावी चर्चा के साथ-साथ सिंधिया ने देशभर में चर्चा का विषय बने NEET पेपर लीक मामले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी देश का भविष्य हैं और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जिन लोगों ने परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है।
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार परीक्षा में धांधली और पेपर लीक जैसे अपराधों पर कठोर कार्रवाई के लिए कानून को और मजबूत बना रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।
    सिंधिया ने कहा कि लाखों छात्र दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल छात्रों के साथ अन्याय नहीं, बल्कि देश के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट संदेश दिया है कि युवाओं के भविष्य से समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

    दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा ने अपने सभी वरिष्ठ नेताओं को प्रचार में उतार दिया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में है, जबकि कांग्रेस भी जीत के लिए जोरदार प्रचार अभियान चला रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में दतिया का चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक होने की संभावना है।

  • पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन

    पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के पूर्व आईएएस अधिकारी और चर्चित लेखक नियाज़ खान ने सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा जाहिर कर एक नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना जरूरी हो गया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

    नियाज़ खान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि उनके हिंदू उदारवादी विचारों के कारण कांग्रेस उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने भी उनके साथ हमेशा अलग व्यवहार किया और प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें कभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दीं। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा भी उन्हें अपने साथ जोड़ने की इच्छुक नहीं रही।

    पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि यदि भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी राजनीति में सक्रिय रूप से उतरती है तो वह उस पार्टी से जुड़ने पर विचार करेंगे। उनका कहना है कि वर्तमान समय में राजनीति ही समाज और देश की सबसे बड़ी सेवा का माध्यम बन चुकी है। इसलिए यदि व्यवस्था में बदलाव लाना है तो राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना आवश्यक है।

    नियाज़ खान प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ साहित्य जगत में भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने ‘ब्राह्मण द ग्रेट’, ‘ब्राउन डेजर्ट IV-786’ और ‘बी रेडी टू डाई’ जैसे कई चर्चित उपन्यास लिखे हैं। उनकी किताबें अक्सर सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर केंद्रित रही हैं, जिसके कारण वे समय-समय पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा भी बने हैं।

    सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने उनके राजनीति में आने के फैसले का स्वागत किया, जबकि कुछ ने उनके बयान को लेकर सवाल भी उठाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह का इस तरह खुलकर अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं सार्वजनिक करना चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।

    हालांकि, नियाज़ खान ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उनका बयान केवल अपनी इच्छा और संभावित विकल्पों को लेकर है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में वह वास्तव में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनते हैं या नहीं और यदि बनते हैं तो किस राजनीतिक मंच से अपनी नई पारी की शुरुआत करते हैं।

  • पेपर लीक पर न हो राजनीति, संसद में चर्चा करने के लिए सरकार तैयार: भाजपा

    पेपर लीक पर न हो राजनीति, संसद में चर्चा करने के लिए सरकार तैयार: भाजपा


    नई दिल्ली।
    पेपर लीक के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह विषय देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम बनाने के बजाय संसद में गंभीरता से चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और चाहती है कि सदन में इसकी हर बारीकी पर विचार हो, ताकि छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।

    भाजपा मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। पार्टी के अनुसार, देश के बच्चे ही भारत का भविष्य हैं और उनकी मेहनत तथा सपनों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण सरकार इस विषय पर गंभीर है और हर पहलू पर चर्चा के लिए तैयार है।

    उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने अपने आरोपों में केवल कुछ राज्यों का जिक्र क्यों किया, जबकि कांग्रेस और इंडी गठबंधन शासित राज्यों में भी कई बार पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि छात्रों के हित की बात की जा रही है, तो फिर सभी राज्यों की घटनाओं पर समान रूप से चर्चा क्यों नहीं हो रही है।

    नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का रवैया चयनात्मक है और उनका उद्देश्य छात्रों को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेना है। पार्टी ने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित है, तो उसे सभी राज्यों में हुई घटनाओं पर समान दृष्टि रखनी चाहिए।

    भाजपा ने उदाहरण देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सर्विस सेलेक्शन बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जहां कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार है। हिमाचल प्रदेश में स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आया, जहां कांग्रेस की सरकार है। झारखंड में झारखंड एकेडमिक काउंसिल की हिंदी और विज्ञान परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है।

    इसी तरह तेलंगाना में इंटरमीडिएट भाषा परीक्षा तथा एसएससी भाषा परीक्षा में पेपर लीक के मामले सामने आए। भाजपा ने कहा कि वहां कांग्रेस की सरकार है, जिसे सीपीआई का समर्थन प्राप्त है। तमिलनाडु में बी.एड. पाठ्यक्रम की परीक्षा का पेपर लीक हुआ। पश्चिम बंगाल में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया, जहां तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी। पंजाब में पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड की ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक की घटना हुई, जबकि केरल में लोक सेवा आयोग (पीएससी) की 26 परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगे। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक में, जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां भी परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आया।

    नड्डा ने कहा कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं और देश के विभिन्न राज्यों में ऐसी घटनाओं की सूची काफी लंबी है। इसलिए किसी एक सरकार या एक राजनीतिक दल को निशाना बनाने के बजाय पूरे देश में परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने पर चर्चा होनी चाहिए।

    भाजपा ने कहा कि छात्रों की मांगों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। यह एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है, जिस पर संसद में गहन और सार्थक चर्चा की आवश्यकता है। पार्टी ने कहा कि वह इस विषय पर सभी तथ्यों के साथ चर्चा करने और समाधान निकालने के लिए तैयार है।

    उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने शाम चार बजे अपने प्रस्तुतीकरण में लगभग 150 पेपर लीक मामलों का उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार, इन सभी दावों की जांच की जाएगी और सरकार हर तथ्य तथा हर सवाल का जवाब जनता के सामने रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा ने दोहराया कि इस विषय पर राजनीति के बजाय तथ्यों और समाधान पर आधारित चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश के छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन के बीच सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- दलितों, किसानों के बाद अब छात्रों को बनाया जा रहा निशाना

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन के बीच सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- दलितों, किसानों के बाद अब छात्रों को बनाया जा रहा निशाना

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बीच विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए लगातार अलग-अलग वर्गों को भड़काने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले दलितों, वंचितों और किसानों के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया और अब छात्रों को आंदोलन के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि झूठे नैरेटिव के जरिए जनता को गुमराह करने की रणनीति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 के आम चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान विपक्ष ने कई ऐसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिनका उद्देश्य जनता के बीच भ्रम पैदा करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान और आरक्षण को लेकर भी भ्रामक प्रचार किया गया। उनके अनुसार लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने संविधान और आरक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने का काम किया है तथा समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है।

    मुख्यमंत्री ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे। उनका दावा था कि उस दौरान भी लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि देश के बाहर धार्मिक और सामाजिक उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों के मुद्दों पर विपक्ष उतनी मुखरता नहीं दिखा पाया, जितनी घरेलू राजनीतिक विरोध के दौरान दिखाई गई।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन समाज के विभिन्न वर्गों के बीच गलत जानकारी फैलाकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, क्योंकि वही देश के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके अनुसार शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर रचनात्मक संवाद होना चाहिए, न कि भ्रम और टकराव का वातावरण बनाया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, किसानों और युवाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की गई हैं। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय और विकास को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है और इसी दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

    दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज बनी हुई है। विपक्ष सरकार से विभिन्न मांगों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार चर्चा और संवाद के माध्यम से समाधान की बात कह रही है। इसी राजनीतिक माहौल के बीच मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर छात्रों को राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाने का आरोप लगाया।

    मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है। एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे विपक्ष की राजनीति पर सीधा जवाब बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए छात्र और युवा हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने की बात कह रहा है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

  • विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना

    विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन से लेकर मुख्यमंत्री कक्ष तक राजनीतिक हलचल तेज रही। दिन की शुरुआत समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से हुई, जबकि दिन का समापन पेपर लीक मामले और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के सामने कांग्रेस विधायकों के धरने के साथ हुआ। पूरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

    सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में समान नागरिक संहिता के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान तीन सांकेतिक शव रखे गए, जिन पर भाजपा, आरएसएस और एबीवीपी के नाम लिखे कफन ओढ़ाए गए। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि सरकार बेरोजगारी, किसानों और युवाओं के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए अन्य विषयों को प्राथमिकता दे रही है।

    इसके बाद सरकार ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक सदन में पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में सरकार ने बहुमत के आधार पर UCC सहित चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए।

    विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से राय लेना जरूरी था। सरकार का पक्ष था कि विधेयक पूरी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लाया गया है और इसे पारित किया जाना आवश्यक है।

    शाम को कांग्रेस ने दिल्ली में पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा विधानसभा में उठाया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के सामने धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उनका कहना था कि पेपर लीक जैसे मामलों का असर देशभर के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है, इसलिए इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

    सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिस विषय को लेकर कांग्रेस चर्चा चाहती है, वह राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला है। सरकार ने विधानसभा के नियमों का हवाला देते हुए चर्चा से इनकार किया और विपक्ष के विरोध को राजनीतिक प्रदर्शन बताया।

    दिनभर चले घटनाक्रम ने एक बार फिर विधानसभा के मानसून सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद गर्म बना दिया। एक ओर सरकार ने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया, तो दूसरी ओर विपक्ष ने छात्रों, युवाओं और संविधान से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।

  • धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान

    धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान


    मध्य प्रदेश। दिल्ली में छात्रों के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं की हिरासत के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। विधानसभा परिसर से लेकर राजभवन तक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई घटनाएं चर्चा का केंद्र बनीं, जिनमें एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की नारेबाजी में हुई चूक, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का कांग्रेस विधायक के साथ हल्का-फुल्का व्यवहार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की गिरफ्तारी जैसी तस्वीरें सामने आईं।

    छात्र संगठन एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते समय कुछ कार्यकर्ताओं के मुंह से गलती से “नरेंद्र मोदी जिंदाबाद” के नारे निकल गए। हालांकि तुरंत गलती का एहसास होने पर नारे बदल दिए गए, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया।

    उधर मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने दिल्ली की घटना के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया। इसी दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धरना स्थल पर पहुंचे और कांग्रेस विधायकों से बातचीत की। चर्चा के बाद लौटते समय उन्होंने कांग्रेस विधायक विजय चौरे के गाल पर हल्के अंदाज में थपथपाया। इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं और यह दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    राजभवन के सामने भी कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते रहे।

    धरने से पहले जारी एक वीडियो संदेश में जीतू पटवारी से भी जुबान फिसल गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में धरने पर बैठे हैं, जबकि प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया था। इस बयान को लेकर भी राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर टिप्पणियां देखने को मिलीं।

    विधानसभा के भीतर कांग्रेस ने छात्रों, रोजगार, आरक्षण और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने नाटक के माध्यम से भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी पर निशाना साधा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और किसानों के मुद्दों की अनदेखी कर रही है।

    भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया। पार्टी नेताओं का कहना था कि कांग्रेस जनता के मुद्दों के बजाय केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रही है। भाजपा विधायक हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को फिल्मों में अभिनय करना चाहिए।

    इसी बीच विधानसभा के मानसून सत्र से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी सामने आया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहले दिन सदन में देरी से पहुंचे। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि देर रात तक फुटबॉल विश्व कप फाइनल देखने के कारण सुबह समय पर नहीं उठ सके। यह प्रसंग भी सत्ता और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

  • मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित

    मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन राजनीतिक टकराव और तीखी बहसों के नाम रहा। दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव के तहत इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और लगातार शोरगुल के चलते कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कांग्रेस विधायकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई और आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है। विपक्ष ने यह भी कहा कि छात्रों के सम्मान और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के विरोध को केवल राजनीतिक प्रदर्शन और मीडिया में सुर्खियां बटोरने का प्रयास बताया।

    शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली में छात्रों के साथ हुई घटना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्रों का अपमान किया गया और उनके खिलाफ बल प्रयोग हुआ। उन्होंने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की। जवाब में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह मामला मध्य प्रदेश के अधिकार क्षेत्र से बाहर का है और विधानसभा के नियमों के अनुसार इस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सूचना निर्धारित समय के बाद दी गई थी।

    सदन में प्रश्नकाल के दौरान भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा गया। विधायकों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था, आदिवासियों की जमीन, किसानों के लंबित मुआवजे, केन-बेतवा परियोजना, भोपाल सिटी लिंक परियोजना पर लगाए गए जुर्माने, वसीयत के आधार पर नामांतरण और चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जैसे विषयों पर सरकार को घेरा।

    शिवपुरी की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना पर कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने 167 करोड़ रुपये की परियोजना में भ्रष्टाचार और किसानों तक पानी नहीं पहुंचने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्षों बाद भी किसानों को परियोजना का लाभ नहीं मिला और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसके जवाब में मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि परियोजना पूरी हो चुकी है और हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी तकनीकी खामियां होंगी, वहां जांच कराकर सुधार कराया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी परियोजना का निरीक्षण कर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।

    पेसा एक्ट और सोलर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी सदन में गूंजा। विधायक बाला बच्चन ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसानों को नोटिस दिए जा रहे हैं। हालांकि राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि से जुड़े मामलों में स्थानीय समुदाय के अधिकारों और सामूहिक हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

    सत्र के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक को सदन ने पारित कर दिया। इसके बाद मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता समाप्त किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

    मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा के भीतर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, जनहित के मुद्दों पर बहस और विधायी कार्यवाही एक साथ देखने को मिली। आने वाले दिनों में भी किसानों, शिक्षा, आदिवासी अधिकारों और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर सदन में तीखी बहस जारी रहने की संभावना है।