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  • बंगाल में BJP की बढ़त से बांग्लादेश में बढ़ी बेचैनी, ‘घुसपैठ’ पर क्या शुरू होगा नया विवाद?

    बंगाल में BJP की बढ़त से बांग्लादेश में बढ़ी बेचैनी, ‘घुसपैठ’ पर क्या शुरू होगा नया विवाद?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बढ़त ने भारत के साथ-साथ बांग्लादेश में भी सियासी हलचल तेज कर दी है। चुनाव परिणामों पर नजर रख रहे बांग्लादेश के नेताओं ने पहले ही संभावित स्थिति को लेकर चिंता जताई थी, जो अब फिर चर्चा में है। सवाल उठ रहा है कि अगर बंगाल में BJP सरकार बनाती है, तो क्या अवैध प्रवासियों यानी कथित ‘घुसपैठियों’ पर कार्रवाई तेज होगी और इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।

    दरअसल, बांग्लादेश की राजनीति में यह मुद्दा पहले ही उठ चुका है। बांग्लादेश की एक पार्टी के सांसद अख्तर हुसैन ने संसद में आशंका जताई थी कि अगर पश्चिम बंगाल में BJP सत्ता में आती है, तो भारत में रह रहे बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा जा सकता है। उनके मुताबिक, ऐसा होने पर बांग्लादेश को एक बड़े शरणार्थी संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि “प्रवासियों का सैलाब” देश में लौट सकता है, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं।

    भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। BJP लगातार इस मुद्दे को उठाती रही है और अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती रही है। ऐसे में बंगाल में उसकी संभावित जीत को इस नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2001 में भारत में करीब 1.2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी प्रवासी होने का अनुमान था। वहीं, कुछ स्वतंत्र रिपोर्ट्स के अनुसार यह संख्या 2026 तक 1.5 से 2 करोड़ के बीच हो सकती है। पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना में जनसंख्या बदलाव को अक्सर इस मुद्दे से जोड़कर देखा जाता है।

    लेकिन असली चुनौती इन लोगों की पहचान को लेकर है। बड़ी संख्या में लोग फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को भारतीय नागरिक साबित कर चुके हैं, जिससे उन्हें चिन्हित करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, अगर भारत इन्हें वापस भेजना चाहता है, तो बांग्लादेश की सहमति जरूरी होगी। अगर ढाका इन लोगों को अपना नागरिक मानने से इनकार करता है, तो यह मामला और जटिल हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल कानून या प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है। बांग्लादेश इस मुद्दे को अपनी संप्रभुता और सम्मान से जोड़कर देखता है, जबकि भारत इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन के नजरिए से देखता है।

    2024 के बाद बांग्लादेश की राजनीति में आए बदलाव के चलते वहां की सरकार पर घरेलू दबाव भी बढ़ा है कि वह भारत के प्रति सख्त रुख अपनाए। हालांकि, नई सरकार की ओर से भारत के साथ संबंध सामान्य रखने के संकेत भी दिए गए हैं, लेकिन ‘घुसपैठ’ का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील और संभावित विवाद का कारण बन सकता है।

    ऐसे में बंगाल चुनाव के नतीजे सिर्फ एक राज्य की सत्ता तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इसके असर क्षेत्रीय राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह मुद्दा सियासी बयानबाजी तक सीमित रहता है या वास्तव में किसी बड़े कूटनीतिक टकराव का रूप लेता है।

  • बंगाल में BJP की बढ़त के पीछे अमित शाह की रणनीति बनी सबसे बड़ा फैक्टर, चुनावी खेल पूरी तरह बदला

    बंगाल में BJP की बढ़त के पीछे अमित शाह की रणनीति बनी सबसे बड़ा फैक्टर, चुनावी खेल पूरी तरह बदला

    नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों ने इस बार राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। शुरुआती आंकड़ों में भाजपा कई सीटों पर आगे दिखाई दे रही है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक ध्यान जिस बात पर जा रहा है, वह है भाजपा की रणनीतिक तैयारी और उसके पीछे माने जा रहे प्रमुख नेतृत्व की भूमिका।

    चुनाव से काफी पहले ही राज्य में पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर काम शुरू कर दिया था। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया और स्थानीय मुद्दों को गहराई से समझने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य यह था कि पार्टी केवल बड़े मंचों तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सके।

    इस पूरी रणनीति के केंद्र में एक स्पष्ट योजना दिखाई दी, जिसमें जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करना और अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावशाली चेहरों को आगे लाना शामिल था। इससे पार्टी को उन इलाकों में भी समर्थन मिलने लगा, जहां पहले उसकी स्थिति कमजोर मानी जाती थी।

    चुनावी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लगातार जनता के बीच रखा गया। इनमें कानून व्यवस्था, सुरक्षा, भ्रष्टाचार और विकास से जुड़े विषय प्रमुख रहे। साथ ही रोजगार और निवेश को लेकर भी मजबूत संदेश दिया गया, जिससे युवाओं और शहरी वर्ग तक पहुंच बनाने में मदद मिली।

    अभियान के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को भी एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में सामने रखा गया। कई जनसभाओं में यह बात प्रमुखता से उठाई गई कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। इसके साथ ही विकास मॉडल को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई, जिसमें भविष्य की दिशा को लेकर अलग दृष्टिकोण पेश किया गया।

    पूरे चुनावी अभियान के दौरान संगठनात्मक स्तर पर लगातार निगरानी और समन्वय बनाए रखा गया। रणनीति केवल चुनावी रैलियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे हर स्तर पर लागू किया गया। कार्यकर्ताओं को लगातार दिशा-निर्देश दिए जाते रहे, जिससे अभियान में निरंतरता बनी रही।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में भाजपा की बढ़त केवल किसी एक कारण से नहीं है, बल्कि यह कई स्तरों पर की गई तैयारियों का परिणाम है। संगठन की मजबूती, जमीनी संपर्क और मुद्दों की स्पष्टता ने इस स्थिति को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    फिलहाल रुझानों में भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। हालांकि अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी, लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है और आगे आने वाले समय में इसके असर और भी गहरे दिखाई दे सकते हैं।

  • पीएम मोदी का पुराना बयान फिर बना चर्चा का केंद्र, बंगाल चुनाव रुझानों ने बढ़ाया सियासी तनाव

    पीएम मोदी का पुराना बयान फिर बना चर्चा का केंद्र, बंगाल चुनाव रुझानों ने बढ़ाया सियासी तनाव

    नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच राजनीतिक माहौल लगातार बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। जैसे-जैसे शुरुआती रुझान सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं और नए विश्लेषणों का दौर शुरू हो गया है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना बयान अचानक फिर से सुर्खियों में आ गया है, जिसने पूरे राजनीतिक वातावरण को और अधिक गर्म कर दिया है।

    यह बयान उस समय दिया गया था जब बिहार में भाजपा को बड़ी जीत मिली थी। उस अवसर पर प्रधानमंत्री ने राजनीतिक संकेतों के तौर पर कहा था कि बिहार की जीत का असर केवल उसी राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव आगे चलकर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। उस समय इसे एक राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा गया था, लेकिन अब जब बंगाल में मतगणना के शुरुआती रुझान सामने आ रहे हैं, तो वही बयान फिर से चर्चा का विषय बन गया है।

    वर्तमान रुझानों में कई सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प स्थिति में पहुंच गया है। कुछ क्षेत्रों में एक दल मजबूत बढ़त बनाए हुए है, तो कुछ जगहों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। इस स्थिति ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को और अधिक जटिल बना दिया है। हर राउंड की गिनती के साथ तस्वीर बदलती जा रही है, जिससे किसी भी नतीजे पर अभी अंतिम राय बनाना मुश्किल हो गया है।

    राज्य के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। मतदाताओं का रुझान अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग दिशा में जाता हुआ नजर आ रहा है, जिससे यह चुनाव और भी रोमांचक बन गया है। राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह चुनाव वास्तव में किसी बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है या फिर अंतिम परिणाम कुछ और ही तस्वीर पेश करेंगे।

    इसी बीच पीएम मोदी का पुराना बयान फिर से वायरल होने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। समर्थक और विरोधी दोनों ही इसे अपने-अपने नजरिए से समझाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग इसे पहले से दी गई राजनीतिक रणनीति का संकेत मान रहे हैं, तो कुछ इसे केवल एक सामान्य राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं। लेकिन मौजूदा माहौल ने इस बयान को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

    प्रशासन की ओर से भी मतगणना प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परिणाम घोषित होने तक पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो।

    फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें अंतिम परिणामों पर टिकी हुई हैं। जैसे-जैसे गिनती आगे बढ़ेगी, राजनीतिक तस्वीर और अधिक स्पष्ट होती जाएगी। लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जहां हर बयान और हर रुझान का अपना अलग राजनीतिक महत्व बन गया है।

  • सात सीटों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त, कुछ जगह मुकाबला रोमांचक…

    सात सीटों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त, कुछ जगह मुकाबला रोमांचक…

    नई दिल्ली।देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों की मतगणना जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राजनीतिक माहौल लगातार बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। शुरुआती रुझानों ने कई जगहों पर स्पष्ट बढ़त और कुछ स्थानों पर कड़े मुकाबले की तस्वीर पेश की है। कुल मिलाकर सात विधानसभा सीटों पर हुए इन उपचुनावों ने सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, जहां हर अपडेट के साथ समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

    महाराष्ट्र की बारामती सीट इस पूरे चुनावी परिदृश्य का सबसे अहम केंद्र बनी हुई है। यहां से सुनेत्रा पवार आगे चल रही हैं और मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। इस सीट पर मतदाताओं का रुझान शुरुआत से ही खास चर्चा में रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र राज्य की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाता आया है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार यहां मुकाबला एक तरफ झुकता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे राजनीतिक विश्लेषक भी इसके संभावित परिणामों पर नजर बनाए हुए हैं।

    इसी राज्य की राहुरी सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अक्षय कर्डिले ने बढ़त हासिल कर ली है। वे लगातार मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी पीछे चलते नजर आ रहे हैं। इस सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान दोनों प्रमुख दलों ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन शुरुआती रुझानों में भाजपा का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है।

    कर्नाटक की दावणगेरे साउथ सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार ने बढ़त बना रखी है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार पीछे चल रहे हैं। वहीं इसी राज्य की बागलकोट सीट पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार आगे चल रहे हैं और भाजपा उम्मीदवार दूसरे स्थान पर हैं। यह स्थिति कर्नाटक में चुनावी प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना रही है, क्योंकि दोनों दल अलग-अलग सीटों पर बढ़त और नुकसान का सामना कर रहे हैं।

    त्रिपुरा की धर्मनगर सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। यहां मतगणना के शुरुआती चरण से ही पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है। इसी तरह गुजरात की उमरेठ सीट पर भी भाजपा ने मजबूत पकड़ बनाई हुई है और उम्मीदवार ने बड़ी बढ़त दर्ज की है। नागालैंड की कोरिडांग सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार मामूली अंतर से आगे हैं, जिससे यहां मुकाबला अभी पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।

    इन सभी सीटों के शुरुआती रुझानों से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि कई राज्यों में सत्तारूढ़ दल का प्रभाव अभी भी मजबूत बना हुआ है, जबकि कुछ स्थानों पर विपक्षी दलों ने भी कड़ा संघर्ष किया है। हालांकि अभी अंतिम परिणाम आना बाकी है, इसलिए कई सीटों पर स्थिति बदलने की संभावना भी बनी हुई है।

    कुल मिलाकर इन उपचुनावों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक सक्रिय और रोचक बना दिया है। हर राउंड की गिनती के साथ बढ़त और हार का अंतर बदल रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि अंतिम नतीजे तक किसी भी तरह का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अब सभी की नजरें अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

  • बंगाल में BJP को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद…. रिजल्ट बाद हिंसा से निपटने की तैयारियां शुरू…

    बंगाल में BJP को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद…. रिजल्ट बाद हिंसा से निपटने की तैयारियां शुरू…


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद के बीच भाजपा (BJP) ने चुनाव बाद की स्थितियों से निपटने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। परिणाम जो भी हों, पार्टी के निर्वाचित विधायक बिना बुलाए अपना क्षेत्र नहीं छोंड़ेंगे। स्थानीय संगठन के नेताओं को भी नतीजों के बाद कुछ दिन तक अपने ही क्षेत्र में रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विरोधी खेमे की किसी भी तरह का संभावित हिंसा से निपटा जा सके।

    वर्ष 2021 में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पश्चिम बंगाल में कई हिंसक घटनाएं हुईं थी। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया था। इसी को देखते हुए भाजपा अपने समर्थकों की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरत रही है।

    सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने नतीजे आने के बाद की स्थितियों के लिए पूरे संगठन को जरूरी निर्देश दिए हैं। उसके निर्वाचित विधायक भी बिना बुलाए कोलकाता नहीं पहुंचेंगे। संगठन के प्रमुख लोग भी कुछ दिनों तक अपने क्षेत्रों में ही रहेंगे और सुरक्षा स्थितियों पर नजर रखेंगे। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने भी अगले आदेश तक बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की विभिन्न क्षेत्रों में तैनाती सुनिश्चित की है।

    भाजपा ने अपने नेताओं से कहा है कि नतीजे आने के बाद भी उसका वार रूम काम करेगा और वहां पर हर क्षेत्र की स्थिति के बार में जानकारी दी जा सकेगी, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। पार्टी नेता इस बारे में लगातार बैठकें कर भावी स्थितियों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। दो मई को कोलकाता में होने वाली पार्टी की बड़ी बैठक में मुख्य मुद्दा मतगणना को लेकर रहेगा, लेकिन उसके बाद की स्थिति को लेकर भी चर्चा संभव है।


    मतगणना केंद्रों पर गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं : चुनाव आयोग

    पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में किसी भी मतगणना केंद्र पर किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी की जा रही है। सीईओ ने स्ट्रांगरूमों में ईवीएम से कथित छेड़छाड़ और गड़बड़ियों के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया।

    कोलकाता में गुरुवार को मतगणना केंद्रों पर जमकर हंगामा हुआ था। तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता और प्रत्याशी कुणाल घोष व शशि पांजा ने धरना दिया था। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर के सखावत स्कूल में बने मतगणना केंद्र में पहुंच गई थीं।


    टीएमसी की याचिका पर आज होगी सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें बंगाल में मतगणना केंद्रों पर सिर्फ केंद्रीय कर्मियों की पर्यवेक्षकों के तौर पर तैनाती के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई थी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ सुनवाई करेगी।

  • Harbhajan Singh की सुरक्षा पर HC सख्त: कहा- परिवार को खरोंच तक नहीं आनी चाहिए

    Harbhajan Singh की सुरक्षा पर HC सख्त: कहा- परिवार को खरोंच तक नहीं आनी चाहिए


    नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर Harbhajan Singh की सुरक्षा को लेकर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि हरभजन सिंह और उनके परिवार को किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। यह आदेश उनकी सुरक्षा बहाल करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

    दरअसल, 24 अप्रैल को हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़कर Bharatiya Janata Party (BJP) का दामन थामा। इसके तुरंत बाद पंजाब पुलिस ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली थी। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने जालंधर स्थित उनके घर के बाहर CRPF की तैनाती कर दी। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पर्याप्त नहीं है और परिवार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    याचिका में हरभजन सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा बिना किसी नोटिस और खतरे के ताजा आकलन के हटा दी गई, जिसे उन्होंने मनमाना निर्णय बताया। इसके बाद कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 12 मई को होगी। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि हरभजन सिंह और उनके परिवार के किसी भी सदस्य को शारीरिक नुकसान न पहुंचे।

    सुरक्षा हटने के बाद उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी हुआ। AAP कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की और दीवारों पर ‘गद्दार’ लिखा। याचिका में यह भी कहा गया कि 25 और 26 अप्रैल को उनके घर पर भीड़ ने हमला किया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उस समय हरभजन सिंह मुंबई में थे और उन्हें इस घटना की जानकारी फोन के जरिए मिली।

    याचिका में यह भी कहा गया कि सुरक्षा हटाने के बाद पुलिस को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार अब पंजाब सरकार को हरभजन सिंह और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

    इस मामले ने सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बदलाव के बीच संतुलन के सवाल को भी उजागर किया है। हरभजन सिंह की याचिका और कोर्ट के आदेश ने साफ कर दिया कि किसी भी नागरिक, खासकर सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं की सुरक्षा सर्वोपरि है।

  • पश्चिम बंगाल में Exit Poll से BJP में उत्साह….. दलितों के साथ मुसलमानों का वोट भी मिला

    पश्चिम बंगाल में Exit Poll से BJP में उत्साह….. दलितों के साथ मुसलमानों का वोट भी मिला


    कोलकाता।
    ज्यादातर एग्जिट पोल्स (Exit Polls) में इस बार पश्चिम बंगाल (West Bengal) में भाजपा (BJP) की जीत का अनुमान लगाया गया है। गुरुवार को सामने आए टुडेज चाणक्य के एग्जिट पोल (Todays Chanakya Exit Poll) में भाजपा को बंपर जीत मिलती दिख रही। बीजेपी को 192 तो टीएमसी (TMC) को 100 सीटें मिल सकती हैं। दोनों के बीच 10 फीसदी वोट शेयर का अंतर रह सकता है। सर्वे में दावा किया गया है कि इस बार भाजपा को पश्चिम बंगाल में मुसलमानों का भी वोट मिल रहा, जबकि 67 फीसदी दलित भी भाजपा पर भरोसा जता रहे।

    टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल के अनुसार, भाजपा को आठ फीसदी मुस्लिम वोट मिल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस को 71 फीसदी वोट मुस्लिमों का मिल सकता है। 67 फीसदी दलित वोट भाजपा को, जबकि 22 फीसदी टीएमसी को मिलने का अनुमान है। 61 फीसदी ओबीसी वोट भाजपा के खाते में जा सकते हैं, जबकि 27 फीसदी वोट टीएमसी को मिल सकता है। 53 फीसदी एसटी वोट भाजपा को और 40 फीसदी टीएमसी को मिल सकता है। वहीं, इसमें तीन फीसदी प्लस माइनस मार्जिन दिया गया है।

    भाजपा 48 फीसदी वोटों के साथ इस बार राज्य में 192 सीटें जीत सकती है। इसमें मार्जिन 11 सीटों का दिया गया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा सकता है। ममता बनर्जी की पार्टी महज 100 सीटों पर सिमट सकती है। उसे 38 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, 14 फीसदी वोट अन्य के खाते में जा सकते हैं, जोकि सीटों में कन्वर्ट होकर दो होंगे। इसमें भी मार्जिन दो का रखा गया है।


    ममता ने उठाए एग्जिट पोल पर सवाल

    ममता बनर्जी ने विभिन्न एग्जिट पोल्स पर सवाल उठाते हुए टीएमसी की बड़ी जीत का दावा किया। बनर्जी ने भरोसा जताया कि चार मई को बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद TMC ही सरकार बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी गिनती के दौरान किसी भी तरह का खेल नहीं होने देगी। बनर्जी ने एक वीडियो संदेश में कहा, “एग्जिट पोल भाजपा के दफ्तर से आए हैं। ये आंकड़े मनगढ़ंत हैं, जिनका मकसद TMC कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना है।”

    ज्यादातर बंगाल एग्जिट पोल्स में भाजपा की जीत का अनुमान है। मैट्रिज के अनुसार, टीएमसी को 125-140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भाजपा 146-161 सीटें जीत सकती है। इसके अलावा, पी मार्क्यू के अनुसार, भाजपा को 150-175 सीटें, टीएमसी को 118-138 सीटें मिल सकती हैं। पोल डायरी के अनुसार, भाजपा 142-171 और टीएमसी 99-127 सीटें जीत सकती है। वहीं, पीपुल्स पल्स एग्जिट पोल ने बताया है कि टीएमसी की जीत होगी और उसे 177-187 सीटें मिल सकती हैं। भाजपा को 95-110 सीटें मिलेंगी।

  • AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

    AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता से जुड़ी कंपनी पर पंजाब में बड़ी कार्रवाई हुई है। उनकी कंपनी ट्राइडेंट ग्रुप की धौला स्थित फैक्ट्री पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने छापेमारी की।

    जानकारी के अनुसार, दोपहर में प्रदूषण विभाग की टीम नौ वाहनों के काफिले के साथ फैक्ट्री परिसर में पहुंची। टीम में लगभग 10 अधिकारी शामिल थे, जो फैक्ट्री के अंदर मौजूद रहकर प्लांट और जरूरी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं। यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के की गई, जिससे फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, विभाग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रूटीन निरीक्षण है या किसी विशेष शिकायत के आधार पर की गई जांच। इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। इसे राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

    उधर, राजिंदर गुप्ता के भाजपा में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। चंडीगढ़ में उनके आवास की दीवारों पर “गद्दार” तक लिखा गया था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर सुरक्षा बढ़ा दी थी। राजिंदर गुप्ता पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों में गिने जाते हैं और पद्मश्री से सम्मानित भी रह चुके हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

  • दिल्ली MCD में बीजेपी का दबदबा: प्रवेश वाही बने मेयर, डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर चुनी गईं

    दिल्ली MCD में बीजेपी का दबदबा: प्रवेश वाही बने मेयर, डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर चुनी गईं


    नई दिल्ली:
    दिल्ली नगर निगम (MCD) के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा जीत दर्ज करते हुए सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाई है। रोहिणी ईस्ट से तीन बार के पार्षद प्रवेश वाही को दिल्ली का नया मेयर चुना गया, जबकि आनंद विहार की पार्षद डॉ. मोनिका पंत डिप्टी मेयर निर्वाचित हुईं। आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रक्रिया से दूर रहने के कारण मुकाबला काफी आसान हो गया।

    मेयर पद के लिए हुए मतदान में प्रवेश वाही को कुल 156 वोट मिले। उन्हें इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के 14 पार्षदों का भी समर्थन मिला। वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार हाजी ज़राफ़ को सिर्फ 9 वोट ही प्राप्त हुए। डिप्टी मेयर पद पर भी बीजेपी की जीत उतनी ही मजबूत रही। आनंद विहार से पार्षद डॉ. मोनिका पंत को 156 वोट मिले और वे निर्वाचित हुईं। चुनाव से पहले दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व में पार्टी कार्यालय में बैठक कर सांसदों और पार्षदों को वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा स्थायी समिति के लिए भी चुनाव हुए, जिसमें बीजेपी के जय भगवान यादव और मनीष चड्ढा के साथ आम आदमी पार्टी की पार्षद जलज चौधरी को शामिल किया गया।

    प्रवेश वाही का राजनीतिक सफर
    प्रवेश वाही नगर निगम की राजनीति में लंबे अनुभव वाले नेता हैं। वे रोहिणी-ईस्ट वार्ड से तीसरी बार पार्षद चुने गए हैं। उनका राजनीतिक करियर 1980 के दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी से जुड़कर शुरू हुआ था। वे 2007 में पहली बार पार्षद बने और इसके बाद 2012 और 2022 में भी जीत हासिल की। लगभग दो दशक के अनुभव के दौरान वे उत्तर दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष और रोहिणी ज़ोन के चेयरमैन जैसे पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। 2004 से 2007 के बीच वे मंडल अध्यक्ष भी रहे। संगठन और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें मेयर की जिम्मेदारी सौंपी।

    डॉ. मोनिका पंत की प्रोफाइल
    डिप्टी मेयर बनीं डॉ. मोनिका पंत पेशे से मेडिकल प्रैक्टिशनर हैं और उनकी पहचान एक शिक्षित व साफ छवि वाली नेता के रूप में है। उन्होंने 2001 में इंडियन बोर्ड ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन से एमडी (A.M.) की डिग्री प्राप्त की। 48 वर्षीय पंत आनंद विहार वार्ड से पार्षद हैं और 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की थी। वे दिल्ली बीजेपी महिला मोर्चा की महामंत्री भी रह चुकी हैं। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास लगभग 13.96 करोड़ रुपये की संपत्ति है और उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनके पति आशीष पंत चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं।

    स्टैंडिंग कमेटी में नई टीम
    मेयर और डिप्टी मेयर के साथ एमसीडी की अहम स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का भी चयन किया गया। बीजेपी की ओर से बेगमपुर के पार्षद जय भगवान यादव और पहाड़गंज के मनीष चड्ढा शामिल हुए, जबकि आम आदमी पार्टी की ओर से शालीमार बाग की पार्षद जलज चौधरी को जगह मिली।

    इस चुनाव में बीजेपी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती साफ दिखाई दी। आम आदमी पार्टी के चुनाव से बाहर रहने के फैसले ने पार्टी की राह और आसान कर दी, जबकि कांग्रेस को बेहद कम समर्थन मिला। अब नए नेतृत्व के सामने दिल्ली में सफाई व्यवस्था सुधारने और निगम प्रशासन को मजबूत बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

  • अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम

    अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली, जब एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य की मौजूदा सरकार और सत्ताधारी दल पर गंभीर आरोप लगाए। अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि राज्य में जनता अब बदलाव चाहती है और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ माहौल बनता जा रहा है।

    अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि पहले चरण के मतदान के बाद राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है और विपक्ष को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार कई क्षेत्रों में जनता ने मौजूदा सरकार के खिलाफ मतदान किया है, जो आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता अब एक नई दिशा और नई सरकार चाहती है।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विशेष रूप से टीएमसी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में एक प्रकार की सिंडिकेट व्यवस्था सक्रिय है, जो प्रशासन और विकास कार्यों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भाजपा को सत्ता मिलती है, तो इस तरह की व्यवस्थाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और पारदर्शी शासन स्थापित किया जाएगा।

    अमित शाह ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में आने पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाएगी। उनके अनुसार राज्य में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाना और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाना प्राथमिकता होगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    अपने भाषण में उन्होंने महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी और युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी योजनाएं लागू की जाएंगी, जिससे राज्य में आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सके।

    किसानों की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को लेकर भी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है और बाजार व्यवस्था में असंतुलन की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई सरकार बनने पर किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी और उनकी आय बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    इसके अलावा उन्होंने राज्य में अधूरे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि कई परियोजनाएं लंबे समय से पूरी नहीं हो पाई हैं। उन्होंने वादा किया कि यदि भाजपा को अवसर मिलता है, तो इन लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा ताकि जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    पूरे भाषण में अमित शाह ने मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि राज्य में एक नए प्रशासनिक मॉडल की जरूरत है, जो पारदर्शिता, विकास और सुशासन पर आधारित हो। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है।