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  • आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज से पहले सुपरस्टार यश का पुराना पारिवारिक बयान इंटरनेट पर वायरल, सोशल मीडिया पर सिनेमाई मर्यादा और लैंगिक भेदभाव को लेकर छिड़ी बड़ी बहस

    आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज से पहले सुपरस्टार यश का पुराना पारिवारिक बयान इंटरनेट पर वायरल, सोशल मीडिया पर सिनेमाई मर्यादा और लैंगिक भेदभाव को लेकर छिड़ी बड़ी बहस

    नई दिल्ली । कन्नड़ सिनेमा से निकलकर देशव्यापी पहचान बनाने वाले सुपरस्टार यश इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का टीजर रिलीज होने के बाद से ही अभिनेता को लेकर सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, फिल्म की चर्चाओं के बीच अभिनेता का एक दशक पुराना बयान इंटरनेट पर अचानक दोबारा वायरल हो गया है, जिसने फिल्म जगत और दर्शकों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    यह पूरा मामला साल 2014 का है, जब अभिनेता यश ने मशहूर टॉक शो ‘वीकेंड विद रमेश’ में शिरकत की थी। इस बातचीत के दौरान उन्होंने फिल्मों में अपनी सीमाओं, ऑन-स्क्रीन रोमांटिक दृश्यों और अपने पारिवारिक मूल्यों को लेकर खुलकर बात की थी। उस समय दिए गए अपने इंटरव्यू में यश ने स्वीकार किया था कि सेट पर रोमांटिक सीन फिल्माते समय वह काफी असहज और नर्वस हो जाते थे। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी बताया था कि उनके इन दृश्यों को देखकर उनकी पत्नी राधिका और खुद उनकी मां भी उन पर हंसती थीं और कहती थीं कि उन्हें ठीक से रोमांस करना नहीं आता।

    इसी टॉक शो के दौरान यश ने एक बेहद महत्वपूर्ण सिद्धांत का जिक्र किया था, जिसे वह अपने अभिनय करियर में हमेशा लागू करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि वह आज भी जीवन में एक कड़ा नियम फॉलो करते हैं कि अगर वह किसी दृश्य को अपने माता-पिता के साथ बैठकर आराम से नहीं देख सकते, तो वह वैसा सीन स्क्रीन पर कभी नहीं करेंगे। उनका मानना था कि जिन दृश्यों को देखकर अभिनेता स्वयं या उसका परिवार असहज हो, उससे आम दर्शकों को भी परदे पर देखते समय निश्चित रूप से असहजता महसूस होती है।

    अब जबकि फिल्म ‘टॉक्सिक’ का टीजर दर्शकों के सामने आ चुका है, तो यश के इसी पुराने बयान के स्क्रीनशॉट और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स इस बयान को उनकी नई फिल्म के संदर्भ से जोड़कर देख रहे हैं। कुछ प्रशंसकों का कहना है कि यश हमेशा से अपनी फिल्मों की पारिवारिक मर्यादा को लेकर बेहद सतर्क रहे हैं और वे ‘टॉक्सिक’ में भी अपने इसी पुराने वादे और मूल्यों पर कायम रहेंगे।

    दूसरी तरफ, इस पुराने बयान के दोबारा सामने आने से इंटरनेट पर एक अलग सामाजिक और लैंगिक बहस भी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर यूजर्स का एक धड़ा इस फिल्म से जुड़ी उनकी सह-कलाकार कियारा आडवाणी को लेकर की जा रही टिप्पणियों और आलोचनाओं पर सवाल उठा रहा है। कई यूजर्स ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि जब यश खुद किसी फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और बोल्ड या एक्शन दृश्यों का हिस्सा बनते हैं, तो समाज उनके पारिवारिक जीवन, उनकी शादी या उनके बच्चों को लेकर कोई सवाल नहीं उठाता।

    इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कई सोशल मीडिया यूजर्स ने मनोरंजन उद्योग में आज भी मौजूद दोहरे मापदंडों को रेखांकित किया है। लोगों का कहना है कि यश के शादीशुदा और दो बच्चों के पिता होने के बावजूद समाज पुरुषों से उनके ऑन-स्क्रीन किरदारों को लेकर कम सवाल पूछता है, जबकि महिला अभिनेत्रियों को उनके दृश्यों के लिए आज भी अधिक जज किया जाता है। फिलहाल, ‘टॉक्सिक’ की रिलीज से पहले वायरल हुआ यह बयान फिल्म के प्रचार के साथ-साथ सिनेमा में कलाकारों की व्यक्तिगत सीमाओं और सामाजिक दृष्टिकोण पर विचार करने का एक नया जरिया बन गया है।

  • 77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट ने आधिकारिक रूप से निर्देशन की दुनिया से खुद को अलग करने का फैसला किया है। 77 वर्ष की आयु में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह भविष्य में किसी भी फिल्म का निर्देशन नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण और थिएटर से जुड़े रचनात्मक कार्यों में उनकी सक्रियता आगे भी बनी रहेगी, लेकिन निर्देशक के रूप में वापसी की संभावना अब नहीं है। उनके इस फैसले ने फिल्म उद्योग में लंबे समय से चली आ रही उनकी रचनात्मक यात्रा पर एक महत्वपूर्ण विराम लगा दिया है।

    महेश भट्ट ने अपने निर्णय के पीछे बदलते फिल्मी माहौल और रचनात्मक प्रक्रिया में आए बदलावों को प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि आज अधिकांश फिल्मों का स्वरूप पहले से तय रहता है, जिससे निर्देशक और कलाकार के लिए अपनी कल्पनाशीलता तथा स्वतंत्र सोच को पूरी तरह अभिव्यक्त करना पहले जैसा संभव नहीं रह गया है। उनके अनुसार कला का वास्तविक स्वरूप तभी सामने आता है, जब रचनाकार को प्रयोग करने और अपने दृष्टिकोण को खुलकर प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता मिले।

    उन्होंने कहा कि जब किसी फिल्म का लगभग हर पहलू पहले से निर्धारित हो और रचनात्मक निर्णयों की गुंजाइश सीमित हो जाए, तब निर्देशक की भूमिका भी पहले जैसी प्रभावी नहीं रह जाती। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति होती है और यदि वही सीमित हो जाए तो रचनात्मक संतुष्टि भी कम होने लगती है। इसी सोच ने उन्हें निर्देशन से स्थायी रूप से दूरी बनाने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

    महेश भट्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्देशन छोड़ने का अर्थ सिनेमा से पूरी तरह अलग होना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह बतौर निर्माता और थिएटर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी भागीदारी जारी रखेंगे। उनका उद्देश्य नए विचारों और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है, लेकिन कैमरे के पीछे निर्देशक की भूमिका निभाने की अब उनकी कोई इच्छा नहीं है।

    महेश भट्ट का फिल्मी सफर चार दशकों से भी अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1974 में की थी। शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन बाद के वर्षों में उन्होंने ऐसी कई फिल्में बनाई, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। संवेदनशील विषयों, मानवीय रिश्तों और सामाजिक मुद्दों पर आधारित उनकी फिल्मों ने उन्हें एक विशिष्ट निर्देशक के रूप में स्थापित किया।

    उनके निर्देशन में बनी कई फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। उन्होंने ऐसी कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा, जिन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ समाज और मानवीय भावनाओं पर भी गहरी छाप छोड़ी। लेखक के रूप में भी उन्होंने कई सफल फिल्मों में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपनी अलग रचनात्मक शैली विकसित की।

    निर्देशन से उनका पहला लंबा विराम वर्ष 1999 के बाद शुरू हुआ था। इसके करीब दो दशक बाद उन्होंने एक फिल्म के जरिए फिर से निर्देशन में वापसी की, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह वापसी अंतिम थी। उनके ताजा बयान के बाद यह लगभग तय हो गया है कि हिंदी सिनेमा को अब उनकी नई निर्देशित फिल्म देखने का अवसर नहीं मिलेगा। हालांकि फिल्म निर्माण और रचनात्मक परियोजनाओं में उनकी उपस्थिति आगे भी बनी रहेगी और उनके अनुभव का लाभ नई पीढ़ी के कलाकारों तथा फिल्मकारों को मिलता रहेगा।

  • जब गोविंदा की गिफ्ट की शर्ट को राजकुमार ने बना दिया रूमाल, बेबाक अंदाज का यह किस्सा आज भी फिल्मी दुनिया में है मशहूर

    जब गोविंदा की गिफ्ट की शर्ट को राजकुमार ने बना दिया रूमाल, बेबाक अंदाज का यह किस्सा आज भी फिल्मी दुनिया में है मशहूर


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राजकुमार केवल अपनी दमदार संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेबाक स्वभाव और अलग अंदाज के लिए भी याद किए जाते हैं। उनके व्यक्तित्व से जुड़े अनेक किस्से आज भी फिल्म जगत में चर्चा का विषय बने रहते हैं। इन्हीं चर्चित घटनाओं में अभिनेता गोविंदा द्वारा उपहार में दी गई शर्ट से जुड़ा एक किस्सा भी शामिल है, जिसे लोग आज भी बड़े दिलचस्प अंदाज में याद करते हैं।

    बताया जाता है कि फिल्म ‘जंगबाज’ की शूटिंग के दौरान गोविंदा ने सम्मान स्वरूप राजकुमार को एक आकर्षक शर्ट भेंट की थी। उन्हें उम्मीद थी कि वरिष्ठ अभिनेता इस उपहार को पहनेंगे। हालांकि कुछ समय बाद जब गोविंदा दोबारा सेट पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वही शर्ट अब अपने मूल रूप में नहीं थी। राजकुमार ने उसे कटवाकर रूमाल बनवा लिया था। यह देखकर गोविंदा आश्चर्यचकित रह गए। यह घटना बाद में राजकुमार के अनोखे और बेपरवाह व्यक्तित्व का चर्चित उदाहरण बन गई।

    राजकुमार का जन्म 8 अक्टूबर 1926 को तत्कालीन बलूचिस्तान में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनका वास्तविक नाम कुलभूषण पंडित था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में सेवा दी। अपने कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित स्वभाव के कारण उनकी पहचान एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में थी। हालांकि अभिनय के प्रति उनका झुकाव उन्हें अंततः फिल्मी दुनिया की ओर ले आया।

    फिल्मी सफर की शुरुआत एक संयोग से हुई। एक निर्माता से मुलाकात के बाद उन्हें अभिनय का अवसर मिला और उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर सिनेमा को अपना करियर बना लिया। शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उनकी अभिनय क्षमता और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं की श्रेणी में स्थापित कर दिया।

    अपने लंबे करियर में उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया और अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी दमदार आवाज, संवाद बोलने की विशिष्ट शैली और स्क्रीन पर प्रभावशाली उपस्थिति उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई। यही कारण रहा कि उनके कई संवाद और अंदाज आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

    राजकुमार को अपने अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले। उन्होंने गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के माध्यम से यह साबित किया कि मजबूत अभिनय किसी भी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हो सकता है। उनके योगदान को हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।

    जीवन के अंतिम वर्षों में वह गले के कैंसर से पीड़ित रहे, जिसका असर उनकी आवाज पर भी पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी गरिमा और आत्मविश्वास बनाए रखा। 3 जुलाई 1996 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्मों, संवादों और उनसे जुड़े अनोखे किस्सों के कारण वह आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार कलाकारों में गिने जाते हैं।

  • 'ग्लैमर के पीछे छिपी रही मेरी प्रतिभा', ज़ीनत अमान ने पुरानी कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

    'ग्लैमर के पीछे छिपी रही मेरी प्रतिभा', ज़ीनत अमान ने पुरानी कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सदाबहार और दिग्गज अभिनेत्री ज़ीनत अमान ने अपने दशकों पुराने फिल्मी सफर और समकालीन कार्यसंस्कृति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अतीत के अनुभवों को साझा करते हुए मनोरंजन जगत में अभिनेत्रियों के प्रति बनी संकीर्ण मानसिकता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ज़ीनत अमान के अनुसार, लंबे समय तक फिल्म उद्योग में उन्हें केवल एक ‘ग्लैमरस आइकन’ के रूप में ही देखा और प्रस्तुत किया गया, जिसके कारण उनकी वास्तविक अभिनय क्षमता, रचनात्मक सोच और बौद्धिक क्षमता को वह स्थान और सम्मान नहीं मिल सका, जिसकी वे हकदार थीं। पर्दे की चमकीली दुनिया ने उनके वास्तविक और गंभीर व्यक्तित्व को दर्शकों के सामने आने ही नहीं दिया।

    अपने दौर की सबसे चर्चित अभिनेत्रियां होने के बावजूद ज़ीनत अमान को इस बात का मलाल है कि समाज और फिल्मकारों ने उनके किरदारों के आधार पर ही उनकी एक अपरिवर्तनीय छवि गढ़ दी थी। उन्होंने बताया कि जब लोग उनसे व्यक्तिगत जीवन में मिलते थे, तो उनके संतुलित और वैचारिक स्वभाव को देखकर चकित रह जाते थे, क्योंकि वह उनकी फिल्मी छवि से बिल्कुल उलट था। उनका मानना है कि व्यावसायिक सफलता की अंधी दौड़ में तत्कालीन फिल्मकारों ने उनके लुक्स और स्क्रीन प्रेजेंस का तो भरपूर लाभ उठाया, लेकिन एक कलाकार के रूप में उनकी गहराई को समझने या उसे पर्दे पर उभारने का प्रयास बहुत कम किया गया।

    उस दौर की कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए दिग्गज अभिनेत्री ने कहा कि तब फिल्म निर्माण की पूरी प्रक्रिया पुरुष प्रधान मानसिकता से संचालित होती थी। सेट पर और स्क्रिप्टिंग के स्तर पर महिलाओं की राय या उनके रचनात्मक सुझावों को कोई खास तवज्जो नहीं दी जाती थी। अभिनेत्रियों से केवल यह अपेक्षा की जाती थी कि वे अपनी आकर्षक उपस्थिति, नृत्य और गानों के माध्यम से फिल्म के व्यावसायिक पक्ष को मजबूत करें। किसी दृश्य की प्रासंगिकता या किरदार के मनोवैज्ञानिक विकास में उनकी भागीदारी को हमेशा सीमित रखा जाता था, जो एक रचनात्मक कलाकार के रूप में उनके लिए काफी निराशाजनक था।

    पोशाक और प्रस्तुतीकरण के मुद्दों पर खुलकर बात करते हुए ज़ीनत अमान ने साझा किया कि व्यावसायिक आवश्यकताओं के नाम पर अक्सर उन पर अधिक बोल्ड और आकर्षक परिधान पहनने का दबाव बनाया जाता था। जबकि व्यक्तिगत स्तर पर वे बेहद सादगीपूर्ण और संतुलित जीवनशैली पसंद करती थीं। उस दौर में किसी भी महिला कलाकार की योग्यता का पैमाना उसकी अभिनय क्षमता से ज्यादा उसकी बाहरी सुंदरता और स्क्रीन अपील को माना जाता था, जिसने कई बेहतरीन प्रतिभाओं को एक खास दायरे में समेट कर रख दिया।

    हालांकि, उन्होंने वर्तमान सिनेमाई परिदृश्य में आ रहे बदलावों की सराहना भी की है। उनका मानना है कि आज की अभिनेत्रियों के पास बेहतर अवसर हैं, कहानियां अधिक सशक्त हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इसके बावजूद, वे इस बात से पूरी तरह इनकार नहीं करतीं कि आज भी महिलाओं को उनकी बाहरी बनावट और शारीरिक सुंदरता के तराजू पर तौलने की प्रवृत्ति मनोरंजन उद्योग में आंशिक रूप से जीवित है, जिसे पूरी तरह बदलने के लिए अभी और समय और वैचारिक परिपक्वता की आवश्यकता है।

    ज़ीनत अमान ने अपने इस विचार के जरिए फिल्म जगत और दर्शकों दोनों के सामने एक गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया है। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी कलाकार की वास्तविक पहचान और उसका मूल्यांकन उसके काम, अनुभव, समर्पण और रचनात्मक योगदान के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल इस बात पर कि वह पर्दे पर कितना ग्लैमरस दिखता है। ग्लैमर केवल इस पेशे का एक छोटा सा हिस्सा है, न कि किसी कलाकार के संपूर्ण अस्तित्व की परिभाषा।

    अपने समय में आधुनिकता, अदम्य आत्मविश्वास और लीक से हटकर किरदार निभाने के लिए जानी जाने वाली ज़ीनत अमान का यह आत्मनिरीक्षण नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी एक मार्गदर्शक की तरह है। उनका यह बयान केवल एक व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक व्यवस्था पर एक गंभीर टिप्पणी है जो कलाकारों को केवल एक स्टीरियोटाइप या ढांचे में बंद कर देखना पसंद करती है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भविष्य का सिनेमा कलाकारों की बौद्धिक और रचनात्मक क्षमता को अधिक महत्व देगा।

  • आईएमडीबी 2026 की सूची में शीर्ष पर रणबीर कपूर की 'रामायण', 'अल्फा' और 'किंग' जैसी महाफिल्मों को पछाड़ा

    आईएमडीबी 2026 की सूची में शीर्ष पर रणबीर कपूर की 'रामायण', 'अल्फा' और 'किंग' जैसी महाफिल्मों को पछाड़ा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा प्रेमियों के बीच आगामी फिल्मों को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण आईएमडीबी द्वारा जारी की गई साल 2026 की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों की हालिया सूची में देखने को मिला है। इस प्रतिष्ठित सूची में अभिनेता रणबीर कपूर की मुख्य भूमिका वाली पौराणिक फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ ने अन्य सभी बड़ी और बहुप्रतीक्षित फिल्मों को पछाड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्मों ने शानदार सफलता दर्ज की है, जिसके बाद अब साल के उत्तरार्ध में रिलीज होने वाली बड़ी फिल्मों पर दर्शकों की निगाहें टिकी हुई हैं। आईएमडीबी की यह रैंकिंग दर्शाती है कि आगामी महीनों में पौराणिक कथाओं, स्पाई थ्रिलर, एक्शन और ड्रामा शैलियों के बीच कड़ा मुकाबला होने वाला है, जिसमें फिलहाल ‘रामायण’ सबसे आगे चल रही है।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस महत्वाकांक्षी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों और समीक्षकों के बीच जबरदस्त चर्चा है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के मुख्य किरदार को जीवंत कर रहे हैं, जबकि दक्षिण भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आएंगी। इस फिल्म की स्टार कास्ट को लेकर भी खासा उत्साह है, जिसमें कन्नड़ सुपरस्टार यश रावण के रूप में, सनी देओल हनुमान की भूमिका में और टीवी व फिल्म अभिनेता रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा कर रहे हैं, जबकि यश भी इसके सह-निर्माता के रूप में जुड़े हुए हैं। यह फिल्म इस साल दिवाली के बड़े त्योहार पर सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके चलते इसे इस साल की सबसे बड़ी रिलीज माना जा रहा है।

    आईएमडीबी की इस सूची में दूसरे पायदान पर यशराज फिल्म्स के बैनर तले बन रही स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘अल्फा’ ने अपनी जगह बनाई है। शिव रवैल द्वारा निर्देशित इस फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में एक्शन करती नजर आएंगी। इनके साथ ही फिल्म में बॉबी देओल और अनिल कपूर भी महत्वपूर्ण किरदारों में शामिल हैं, जो फिल्म के आकर्षण को और बढ़ाते हैं। इस बहुप्रतीक्षित सूची में तीसरा स्थान कन्नड़ अभिनेता यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ को मिला है, जिसका निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

    सूची के चौथे स्थान पर बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की बहुचर्चित फिल्म ‘किंग’ का कब्जा है, जिसका निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं। इस फिल्म में शाहरुख खान के साथ दीपिका पादुकोण और सुहाना खान भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिससे यह फिल्म साल के अंत में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। इसके बाद पांचवें स्थान पर टी-सीरीज और देवगन फिल्म्स के संयुक्त निर्माण में बनी कॉमेडी फ्रैंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ शामिल है, जिसमें अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    सूची में ओटीटी प्लेटफॉर्म की बेहद लोकप्रिय सीरीज के सिनेमाई रूपांतरण ‘मिर्जापुर द मूवी’ को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला है, जिसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल, जितेंद्र कुमार और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार बड़े पर्दे पर धमाल मचाने आ रहे हैं। इसके साथ ही श्रद्धा कपूर की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘इथा’ भी इस सूची का हिस्सा बनी है, जिसका निर्देशन लक्ष्मण उत्तेकर कर रहे हैं। आगामी महीनों में होने वाली इन बड़ी रिलीज से स्पष्ट है कि भारतीय सिनेमा उद्योग के लिए साल 2026 का दूसरा भाग व्यावसायिक और रचनात्मक दोनों ही दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक होने वाला है।

  • भारतीय सिनेमा का गौरव: पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियां, कला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान की पूरी सूची

    भारतीय सिनेमा का गौरव: पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियां, कला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान की पूरी सूची

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत यानी बॉलीवुड में ऐसे कई प्रतिभावान कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय और कला के प्रति समर्पण से न केवल दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, बल्कि देश का नाम भी रोशन किया है। सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट और अमूल्य योगदान देने वाले इन सितारों को भारत सरकार द्वारा समय-समय पर देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से अलंकृत किया गया है। इस प्रतिष्ठित सूची में फिल्म उद्योग की कई ऐसी दिग्गज अभिनेत्रियों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपनी कलात्मक यात्रा से भारतीय सिनेमा को एक नया आयाम दिया है। इनमें से कुछ अभिनेत्रियां आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी।

    इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाली अभिनेत्रियों में बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ कही जाने वाली हेमा मालिनी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अपनी बेहतरीन अदाकारी और नृत्य कला के लिए प्रसिद्ध हेमा मालिनी को भारत सरकार द्वारा साल 2000 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। वहीं, हिंदी सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार मानी जाने वाली दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी को कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 2013 में इस गौरवपूर्ण नागरिक सम्मान से नवाजा गया था। भले ही वे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्में आज भी सिनेप्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।

    समीक्षकों द्वारा सराहे गए अभिनय और अपनी बेबाक शैली के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री और निर्माता कंगना रनौत को साल 2020 में पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किया गया था। सत्तर और अस्सी के दशक की अपनी संजीदा अदाकारी से समां बांधने वाली सदाबहार अभिनेत्री रेखा को साल 2010 में इस सम्मान से विभूषित किया गया था। उन्होंने ‘उमराव जान’ और ‘खूबसूरत’ जैसी यादगार फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाई हैं। नब्बे के दशक की लोकप्रिय और सफल अभिनेत्रियों में शामिल रवीना टंडन को हाल ही में वर्ष 2023 में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा इस राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय क्षमता के बल पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाली पूर्व विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय बच्चन को साल 2009 में पद्म श्री की उपाधि दी गई थी। वहीं, लीक से हटकर किरदारों को पर्दे पर जीवंत करने वाली सशक्त अभिनेत्री विद्या बालन को साल 2014 में इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त, बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी कला का परचम लहराने वाली ग्लोबल आइकन प्रियंका चोपड़ा को साल 2016 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से अलंकृत किया गया था।

    गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को सहजता से निभाने वाली उत्कृष्ट अभिनेत्री तब्बू और अपनी चुलबुली अदाकारी से करोड़ों फैंस के दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री काजोल को साल 2011 में एक साथ इस सर्वोच्च सम्मान के लिए चुना गया था। अपने जमाने की बेहद खूबसूरत और बोल्ड अभिनेत्री मानी जाने वाली शर्मिला टैगोर को सिनेमाई दुनिया में उनके विशेष योगदान हेतु साल 2005 में इस उपाधि से विभूषित किया गया था। इस सूची में भारतीय समानांतर सिनेमा की मजबूत स्तंभ रहीं दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल का नाम भी शामिल है, जिन्हें बहुत कम उम्र में, साल 1985 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। कला जगत में इन सभी महिलाओं का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

  • सलमान खान से अलग होने के बाद मुश्किल वक्त में भी ऐश्वर्या राय ने खुद को संभाला, फिल्म 'शब्द' की को-स्टार ने खोल दिए राज

    सलमान खान से अलग होने के बाद मुश्किल वक्त में भी ऐश्वर्या राय ने खुद को संभाला, फिल्म 'शब्द' की को-स्टार ने खोल दिए राज

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित जोड़ियों और उनके आपसी रिश्तों को लेकर समय-समय पर कई तरह की बातें सामने आती रही हैं। इसी क्रम में, फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में साथ काम कर चुकीं सह-कलाकार सादिया सिद्दीकी ने सुपरस्टार सलमान खान और ऐश्वर्या राय के बहुचर्चित ब्रेकअप के बाद के दौर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि निजी जीवन में चल रहे इतने बड़े उतार-चढ़ाव और मुश्किलों के बावजूद ऐश्वर्या राय ने जिस तरह खुद को संभाला और अपने काम के प्रति निष्ठा दिखाई, वह वाकई तारीफ के काबिल था।

    एक हालिया साक्षात्कार के दौरान जब सादिया सिद्दीकी से पूछा गया कि क्या साल 2005 में आई फिल्म ‘शब्द’ की शूटिंग के दौरान उन्हें ऐश्वर्या राय की व्यक्तिगत जिंदगी में चल रहे तनाव का कोई अंदाजा हुआ था? इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि उस फिल्म में ऐश्वर्या के साथ उनका कोई सीधा सीन नहीं था और वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत करीब से नहीं जानती थीं, लेकिन सेट पर उनके व्यवहार को देखकर कोई भी उनकी आंतरिक उथल-पुथल का अंदाजा नहीं लगा सकता था। उन्होंने अपनी भावनाओं और निजी जीवन की दिक्कतों को बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से छिपाकर रखा था।

    सह-कलाकार ने ऐश्वर्या राय के पेशेवर रवैये की जमकर सराहना करते हुए कहा कि वे हमेशा समय पर पूरी तैयारी के साथ सेट पर पहुंचती थीं। शूटिंग शुरू होने से पहले वे अपनी सभी पंक्तियों (लाइन्स) को अच्छी तरह याद रखती थीं, अपनी स्क्रिप्ट का गहराई से अध्ययन करती थीं और पूरे प्रोफेशनलिज्म के साथ अपना काम पूरा करती थीं। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं की परछाई को कभी भी अपने काम पर या सेट के माहौल पर नहीं पड़ने दिया।

    सादिया ने आगे बताया कि ऐश्वर्या अपने किरदारों को जीवंत करने के लिए काफी समर्पित थीं। वे दृश्यों को बेहतर बनाने के लिए बार-बार स्क्रिप्ट पढ़ती थीं और निर्देशक व साथी कलाकारों के साथ उस पर चर्चा करती थीं। वे अपने किरदार की मानसिक स्थिति और उसकी गहराई को समझने का पूरा प्रयास करती थीं, जो उनके एक बेहतरीन कलाकार होने का प्रमाण है। गौरतलब है कि साल 2005 में रिलीज हुई सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘शब्द’ में ऐश्वर्या राय के साथ संजय दत्त और जायद खान मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे।

    यदि दोनों कलाकारों के वर्तमान पेशेवर जीवन की बात करें, तो सलमान खान आने वाले समय में फिल्म ‘मातृभूमि’ में दिखाई देंगे, जिसका निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में होंगी। इसके अतिरिक्त, वे दक्षिण भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री नयनतारा के साथ भी एक अनाम फिल्म (एसवीसी63) पर काम कर रहे हैं, जिसका निर्देशन वामशी पैदिपल्ली कर रहे हैं और यह फिल्म साल 2027 की ईद के अवसर पर सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। दूसरी तरफ, ऐश्वर्या राय आखिरी बार साल 2023 में आई मणिरत्नम की ऐतिहासिक फिल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन’ में नजर आई थीं, जिसमें बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

  • फिल्म 'कोलोनी' में कलाकारों या स्टंटमैन ने नहीं, बल्कि ग्रुप डांसर्स ने निभाए रोंगटे खड़े कर देने वाले खूंखार एक्शन सीन्स

    फिल्म 'कोलोनी' में कलाकारों या स्टंटमैन ने नहीं, बल्कि ग्रुप डांसर्स ने निभाए रोंगटे खड़े कर देने वाले खूंखार एक्शन सीन्स

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में जब भी किसी फिल्म में खतरनाक और हैरतअंगेज एक्शन दृश्यों को फिल्माना होता है, तो आमतौर पर मुख्य अभिनेता खुद कमान संभालते हैं या फिर जोखिम भरे दृश्यों के लिए पेशेवर स्टंटमैन और बॉडी डबल की सेवाएं ली जाती हैं। लेकिन मनोरंजन जगत में हाल ही में एक ऐसा अनोखा प्रयोग देखने को मिला है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। साल 2026 में प्रदर्शित हुई एक नई फिल्म में बेहद पेचीदा और डरावने एक्शन सीक्वेंस को पूरा करने के लिए किसी स्टंटमैन को नहीं, बल्कि पेशेवर डांसर्स को अनुबंधित किया गया। इस अनूठे फैसले के पीछे की वजह फिल्म की बेहद अलग और जटिल पटकथा थी, जिसे सामान्य एक्शन कलाकारों के लिए कर पाना मुमकिन नहीं था।

    यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई चर्चित जॉम्बी थ्रिलर फिल्म ‘कोलोनी’ से जुड़ा हुआ है। यह फिल्म अपनी अनूठी कहानी के कारण पारंपरिक जॉम्बी फिल्मों से काफी अलग है। फिल्म की पटकथा के अनुसार, इसमें दिखाया गया वायरस इंसानी शरीर में प्रवेश करने के बाद एक अलग तरह का म्यूटेशन पैदा करता है, जिसे ‘हाइपर कोलिनेटेड’ कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि वायरस से संक्रमित होने वाले सभी लोग अलग-अलग व्यवहार करने के बजाय एक सामूहिक मस्तिष्क यानी ‘कलेक्टिव माइंड’ की तरह काम करते हैं। यदि किसी एक संक्रमित को कोई जानकारी मिलती है, तो वह संदेश तुरंत एक ही पल में बाकी सभी जॉम्बीज तक पहुंच जाता है।

    इसी सामूहिक अवधारणा को स्क्रीन पर जीवंत करने के लिए निर्देशक को बेहद बारीकी से कोरियोग्राफ किए गए दृश्यों की आवश्यकता थी। फिल्म में कई दृश्य ऐसे थे जहां दर्जनों जॉम्बीज को एक साथ मिलकर बेहद पेचीदा शारीरिक गतिविधियां और एक समान स्टंट करने थे। इन दृश्यों में जरा सी भी चूक पूरे तालमेल को बिगाड़ सकती थी। किसी सामान्य स्टंटमैन के लिए शरीर को इस हद तक लचीला बनाना और सामूहिक रूप से एक ही समय पर सटीक शारीरिक मुद्राएं प्रदर्शित करना काफी कठिन काम था। इस चुनौती से निपटने के लिए निर्माण टीम को ग्रुप डांसर्स की आवश्यकता महसूस हुई, जो न केवल चेहरे पर सटीक भाव ला सकें, बल्कि सामूहिक टाइमिंग और मूवमेंट में भी पूरी तरह निपुण हों।

    यही कारण था कि फिल्म के निर्माताओं ने इस काम के लिए करीब 20 अनुभवी डांसर्स की एक विशेष टीम को काम पर रखा। दर्शकों को थिएटर्स में जिन दृश्यों को देखकर यह लग रहा है कि वे अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स (VFX) या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए हैं, वे असल में इन डांसर्स की कड़ी मेहनत और शारीरिक दक्षता का नतीजा हैं। इन कलाकारों ने बिना किसी तकनीक के सहारा लिए स्क्रीन पर एक साथ सटीक मूव्स दिखाकर दृश्यों को बेहद डरावना और वास्तविक बना दिया है।

    इस अनोखे प्रयोग और बेहतरीन तकनीकी काम की बदौलत फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की तरफ से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) पर भी इस फिल्म को 7 के करीब रेटिंग हासिल हुई है, जो इस जॉनर की फिल्मों के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। जो सिनेमाप्रेमी इस फिल्म को घर बैठे देखने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अभी थोड़ा और धैर्य रखना होगा। चालू वर्ष में रिलीज होने के कारण यह फिल्म फिलहाल किसी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं कराई गई है और इसका आनंद अभी केवल सिनेमाघरों में ही लिया जा सकता है।

  • उर्फी जावेद ने धर्म और नाम बदलने के दावों को बताया पूरी तरह फर्जी, अफवाह फैलाने वालों को सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

    उर्फी जावेद ने धर्म और नाम बदलने के दावों को बताया पूरी तरह फर्जी, अफवाह फैलाने वालों को सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली। अपने बेबाक बयानों और अनूठे पहनावे के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाली अभिनेत्री उर्फी जावेद एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनके पहनावे का नहीं, बल्कि उनके नाम और धर्म परिवर्तन से जुड़ी एक बड़ी अफवाह का है। इंटरनेट पर पिछले कुछ दिनों से यह दावा किया जा रहा था कि अभिनेत्री ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है। इन खबरों के तेजी से वायरल होने के बाद अब खुद अभिनेत्री ने सामने आकर इन दावों के पीछे का पूरा सच बताया है और गलत जानकारी फैलाने वालों की जमकर क्लास लगाई है।

    दरअसल, सोशल मीडिया पर एक महिला द्वारा वीडियो साझा कर यह दावा किया गया था कि उर्फी जावेद ने अपना धर्म बदल लिया है और अब उनका नया नाम रीता भारद्वाज हो गया है। वीडियो में अभिनेत्री के पहनावे को लेकर भी कई तरह की नकारात्मक टिप्पणियां की गई थीं। इस तरह की भ्रामक खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उर्फी जावेद ने साफ किया कि उन्होंने कभी भी अपना नाम या मजहब नहीं बदला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी धर्म या रूढ़िवादी विचारधारा में विश्वास नहीं रखती हैं, इसलिए उनके बारे में ऐसी बातें करना पूरी तरह निराधार है।

    अभिनेत्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के अफवाह फैलाने वालों को नसीहत देते हुए कहा कि किसी के बारे में भी टिप्पणी करने से पहले पूरी जानकारी जुटा लेनी चाहिए। उन्होंने इंटरनेट का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति उनके पुराने टेलीविजन कार्यक्रमों की सूची और उनमें उनके नाम की जांच कर सकता है। अभिनेत्री ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनके काम या पहनावे की आलोचना की जा सकती है, लेकिन किसी के बारे में इस तरह की मनगढ़ंत और झूठी खबरें फैलाना पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना है।

    मिली जानकारी के अनुसार, इस विवाद के बढ़ने और अभिनेत्री द्वारा कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद संबंधित महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह वीडियो हटा दिया है और अभिनेत्री के अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है। उर्फी जावेद ने इस बात की पुष्टि करते हुए कुछ संदेशों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए और बताया कि झूठे दावों की पोल खुलने के बाद अब वास्तविकता सबके सामने आ चुकी है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत हमलों से प्रभावित नहीं होतीं, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    अगर उर्फी जावेद के पेशेवर जीवन की बात करें तो वे मनोरंजन जगत का एक जाना-माना नाम हैं। वे पिछले साल एक बड़े रियलिटी शो का हिस्सा रही थीं, जहां उन्होंने अपनी बेहतरीन रणनीति और खेल के दम पर जीत हासिल की थी। इसके अलावा वे कई अन्य लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिकों जैसे ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ और ‘कसौटी जिंदगी की 2’ में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुकी हैं। अभिनय के साथ-साथ वे कुछ डिजिटल शोज़ को बतौर होस्ट भी संभाल चुकी हैं और सोशल मीडिया पर उनकी एक बड़ी फैन फॉलोइंग है।

  • ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने जा रहे अभिनेता सनी देओल ने पुरानी यादें कीं ताजा, फिल्म 'दामिनी' के अपने आइकॉनिक वकील के किरदार पर खुलकर की बात

    ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने जा रहे अभिनेता सनी देओल ने पुरानी यादें कीं ताजा, फिल्म 'दामिनी' के अपने आइकॉनिक वकील के किरदार पर खुलकर की बात

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं में शुमार सनी देओल जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपना कदम रखने जा रहे हैं। अपनी आने वाली नई फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के विशेष अवसर पर अभिनेता ने अपने फिल्मी सफर और अतीत की कुछ बेहद खास यादों को साझा किया। इस दौरान उन्होंने साल 1993 में आई अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दामिनी’ में निभाए गए वकील के यादगार किरदार पर खुलकर बात की। अभिनेता ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने इस फिल्म में काम करने का फैसला लिया था, तब उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनका यह छोटा सा रोल दर्शकों के दिलों में इस कदर बस जाएगा और इतिहास रच देगा।

    अपनी आगामी कोर्टरूम ड्रामा फिल्म में भी सनी देओल एक बार फिर से वकील की भूमिका में नजर आने वाले हैं, जिसका सीधा जुड़ाव दर्शकों को उनकी पुरानी फिल्म से महसूस हो रहा है। ट्रेलर लॉन्च के कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इस समानता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि वह उस समय हर हाल में उस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने बताया कि मूल कहानी में शुरुआत में उनका कोई बड़ा रोल नहीं था, लेकिन निर्देशक और उनके निर्माता दोस्तों के साथ बातचीत के बाद उन्हें इस छोटे से कैरेक्टर के बारे में बताया गया। उन्होंने इसके लिए तुरंत हामी भर दी क्योंकि वे इस खूबसूरत कहानी से जुड़ना चाहते थे।

    अभिनेता ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा कि किसी भी कलाकार के लिए उसकी फिल्मों की यात्रा बेहद खूबसूरत होती है। उन्होंने सिनेमा प्रेमियों से फिल्मों का भरपूर आनंद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि कोई भी यह पहले से तय नहीं कर सकता कि कौन सा किरदार दर्शकों को कितना प्रभावित करेगा। ‘दामिनी’ के उस छोटे से रोल ने देश के कोने-कोने में लोगों को अपना मुरीद बना लिया था। अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उस फिल्म के बाद उन्हें काफी लंबे समय तक उस तरह का दमदार और प्रभावशाली कोर्टरूम ड्रामा किरदार निभाने का दोबारा मौका नहीं मिल सका था, जो अब जाकर उन्हें मिला है।

    इसी भव्य आयोजन के दौरान सनी देओल अपने परिवार और पिता को याद कर काफी भावुक भी नजर आए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में जब उनसे उनके पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के बारे में सवाल किया गया कि उन्हें उनके नाम से कितना गर्व महसूस होता है, तो सनी देओल खुद पर काबू नहीं रख पाए। उन्होंने बेहद संजीदगी और भरे गले से कहा कि वे हमेशा केवल अपने पापा के बेटे रहेंगे और उनके लिए इससे बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है। यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो गईं, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया।

    डिजिटल माध्यम पर रिलीज होने जा रही यह नई फिल्म एक बार फिर से सनी देओल को उसी पुरानी दहाड़ और कानूनी दांव-पेंच वाले अवतार में वापस लेकर आ रही है, जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों की तरफ से काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं और इसमें उनके साथ कई अन्य दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस नए प्रोजेक्ट से अभिनेता को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि यह उनके करियर की नई पारी की शुरुआत माना जा रहा है।