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  • ‘गदर’ के पहले ही दिन घबरा गई थीं अमीषा पटेल, अमरीश पुरी के साथ पहला सीन बना यादगार; दिग्गज अभिनेता की सादगी ने जीता दिल

    ‘गदर’ के पहले ही दिन घबरा गई थीं अमीषा पटेल, अमरीश पुरी के साथ पहला सीन बना यादगार; दिग्गज अभिनेता की सादगी ने जीता दिल


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘गदर’ को 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अभिनेत्री अमीषा पटेल ने फिल्म से जुड़ी कई यादगार बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दौर में जब उन्हें दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के साथ काम करने का अवसर मिला, तब वह बेहद घबराई हुई थीं। हालांकि शूटिंग के दौरान अमरीश पुरी के व्यवहार और सहयोगी स्वभाव ने उनकी सारी झिझक दूर कर दी थी।

    अमीषा पटेल ने कहा कि दर्शकों के बीच अमरीश पुरी की पहचान एक सशक्त और प्रभावशाली अभिनेता के रूप में थी। फिल्मों में उनके निभाए गए नकारात्मक किरदारों ने उन्हें एक अलग पहचान दी थी, लेकिन वास्तविक जीवन में उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग था। वह बेहद सरल, सहज और मजाकिया स्वभाव के इंसान थे। उनके साथ काम करने का अनुभव आज भी उनकी सबसे खास यादों में शामिल है।

    अभिनेत्री ने बताया कि ‘गदर’ उनके करियर की शुरुआती फिल्मों में से एक थी। उस समय वह इंडस्ट्री में नई थीं और बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव भी सीमित था। ऐसे में फिल्म के पहले दिन ही उनका महत्वपूर्ण दृश्य अमरीश पुरी के साथ रखा गया था। यह एक भावनात्मक दृश्य था, जिसे फिल्म की कहानी में अहम स्थान प्राप्त था। इतने बड़े कलाकार के साथ पहला ही सीन होने के कारण वह अंदर से काफी घबराई हुई थीं।

    उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने आने से पहले उनके मन में कई तरह के सवाल और आशंकाएं थीं। उन्हें डर था कि कहीं वह दृश्य ठीक तरह से न कर पाएं या किसी तरह की गलती न हो जाए। लेकिन जैसे ही शूटिंग शुरू हुई, अमरीश पुरी ने अपने व्यवहार से माहौल को सहज बना दिया। उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह एक नई कलाकार हैं और उनके सामने इंडस्ट्री के सबसे अनुभवी अभिनेताओं में से एक मौजूद हैं।

    अमीषा ने बताया कि अमरीश पुरी सेट पर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा के साथ मौजूद रहते थे। वह कलाकारों और तकनीकी टीम के साथ घुलमिलकर रहते थे तथा माहौल को हल्का बनाए रखते थे। उनकी यही विशेषता उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी। एक बड़े अभिनेता होने के बावजूद उनके व्यवहार में किसी प्रकार का अहंकार नहीं था। यही कारण था कि उनके साथ काम करना किसी सीखने की प्रक्रिया से कम नहीं था।

    अभिनेत्री ने यह भी याद किया कि उस समय उनकी पहली फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई थी और दर्शक उन्हें पहचानते भी नहीं थे। बावजूद इसके अमरीश पुरी ने उन्हें पूरा सम्मान दिया और हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया। उनके सहयोग से वह अपने किरदार को बेहतर ढंग से निभाने में सफल रहीं। अमीषा के अनुसार, किसी नए कलाकार के लिए ऐसा समर्थन बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    ‘गदर’ भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में सनी देओल, अमीषा पटेल और अमरीश पुरी की भूमिकाओं को दर्शकों ने खूब सराहा था। विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की थी और इसके संवाद व किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।

    फिल्म की सफलता के वर्षों बाद भी कलाकारों द्वारा साझा की गई ऐसी यादें दर्शकों को उस दौर से जोड़ती हैं। अमीषा पटेल के ताजा बयान ने एक बार फिर यह दिखाया है कि बड़े कलाकारों की असली पहचान केवल उनके अभिनय से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और सहयोगी स्वभाव से भी बनती है। अमरीश पुरी की यही विशेषताएं उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल करती हैं।

  • ‘खुद को थप्पड़ मारने का मन करता था’, अक्षय कुमार ने सुनाया संघर्ष और बदलाव का किस्सा, बोले- आखिरी सांस तक कैमरे के सामने रहना चाहता हूं

    ‘खुद को थप्पड़ मारने का मन करता था’, अक्षय कुमार ने सुनाया संघर्ष और बदलाव का किस्सा, बोले- आखिरी सांस तक कैमरे के सामने रहना चाहता हूं

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सबसे सक्रिय और सफल अभिनेताओं में शामिल अक्षय कुमार ने अपने लंबे फिल्मी सफर, करियर के उतार-चढ़ाव और खुद को लगातार बदलते रहने की प्रक्रिया पर खुलकर बात की है। करीब साढ़े तीन दशक से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय अभिनेता ने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा भी था जब उन्हें अपनी ही फिल्मों को देखकर निराशा होती थी और महसूस होता था कि यदि उन्होंने अपने अभिनय और किरदारों में बदलाव नहीं किया तो उनका करियर एक सीमित दायरे में सिमट सकता है।

    अक्षय कुमार ने कहा कि फिल्म उद्योग में 35 वर्षों का सफर तय करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भी वह इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ काम करते रहेंगे। अभिनेता ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि जीवन के अंतिम क्षणों तक वह कैमरे के सामने सक्रिय रहें और अभिनय करते रहें। उनके अनुसार काम ही उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है और वही उन्हें आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है।

    अपने शुरुआती करियर को याद करते हुए अक्षय ने बताया कि जब उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था तब उनका मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से सफल होना था। शुरुआती वर्षों में उन्होंने लगातार एक्शन फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे उनकी पहचान एक एक्शन स्टार के रूप में बन गई। हालांकि समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि एक ही तरह की भूमिकाएं निभाने से उनकी रचनात्मक संभावनाएं सीमित हो रही हैं।

    अभिनेता ने कहा कि करियर के लगभग एक दशक बाद जब उन्होंने अपनी पुरानी फिल्मों को दोबारा देखा तो उन्हें लगा कि वह खुद को दोहराने लगे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में उन्हें अपनी छवि बदलने की जरूरत महसूस हुई। यही वह समय था जब उन्होंने नए प्रयोग करने का निर्णय लिया और पारंपरिक एक्शन फिल्मों से आगे बढ़कर अलग-अलग विधाओं में काम शुरू किया।

    अक्षय कुमार के अनुसार यह बदलाव आसान नहीं था क्योंकि इंडस्ट्री और दर्शकों की नजर में उनकी छवि एक्शन हीरो की बन चुकी थी। बावजूद इसके उन्होंने जोखिम उठाया और कॉमेडी, रोमांस, सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों तथा विभिन्न प्रकार के किरदारों को अपनाया। उन्होंने माना कि यही निर्णय उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और इससे उन्हें एक बहुमुखी अभिनेता के रूप में पहचान मिली।

    फिल्मी जानकारों का भी मानना है कि अक्षय कुमार ने समय-समय पर अपने अभिनय और फिल्मों के चयन में बदलाव कर खुद को प्रासंगिक बनाए रखा है। एक्शन फिल्मों से शुरुआत करने वाले अभिनेता ने बाद में कॉमेडी, पारिवारिक, सामाजिक और प्रेरणादायक विषयों पर आधारित फिल्मों में भी सफलता हासिल की। यही कारण है कि वह लंबे समय तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय बने रहे।

    वर्तमान में भी अक्षय कुमार कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। उनकी आने वाली फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। अभिनेता का कहना है कि आज भी वह हर नए किरदार को सीखने और बेहतर बनने के अवसर के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार कलाकार के लिए सबसे जरूरी चीज लगातार सीखते रहना और खुद को समय के अनुसार विकसित करना है।

    अक्षय कुमार की यह सोच उनके लंबे करियर की सफलता का महत्वपूर्ण कारण मानी जाती है। उन्होंने यह साबित किया है कि फिल्म उद्योग में केवल लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि निरंतर बदलाव और मेहनत भी लंबे समय तक टिके रहने के लिए जरूरी है। यही वजह है कि तीन दशक से अधिक समय बाद भी वह हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त और चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं।

  • अक्षय कुमार के प्यार में ट्विंकल खन्ना का खुलासा आमिर खान का रिएक्शन चर्चा में

    अक्षय कुमार के प्यार में ट्विंकल खन्ना का खुलासा आमिर खान का रिएक्शन चर्चा में


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की पुरानी शूटिंग कहानियां एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। इस बार चर्चा का केंद्र बनी हैं ट्विंकल खन्ना औरआमिर खान की फिल्म मेला से जुड़ी एक मजेदार घटना। यह किस्सा उस समय का है जब दोनों कलाकार एक साथ फिल्म मेला की शूटिंग कर रहे थे और सेट पर माहौल हल्का फुल्का और हंसी मजाक से भरा रहता था।

    बताया जाता है कि एक इंटरव्यू और लॉन्च इवेंट के दौरान ट्विंकल खन्ना ने खुद इस पुराने अनुभव का जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान एक सीन के बीच जब आमिर खान ने उनसे काम को लेकर सवाल किया तो ट्विंकल ने मजाक में कह दिया कि वह उस समय अपने निजी जीवन के बारे में सोच रही थीं और उनका ध्यान काम पर नहीं था। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह उस समय अक्षय कुमार के बारे में सोच रही थीं।

    ट्विंकल की इस बात पर सेट का माहौल थोड़ा बदल गया और आमिर खान का रिएक्शन भी चर्चा का विषय बन गया। ट्विंकल ने हंसते हुए बताया था कि आमिर इतने रिएक्टिव हो गए थे कि वह मजाक में उन्हें थप्पड़ मारने तक की बात पर पहुंच गए थे। हालांकि यह सब पूरी तरह मजाकिया अंदाज में कहा गया था और शूटिंग सेट के हल्के माहौल को दिखाता है।

    इसी बातचीत में आमिर खान ने भी ट्विंकल के साथ काम करने के अनुभव को साझा किया था। उन्होंने कहा था कि ट्विंकल का सेंस ऑफ ह्यूमर काफी अलग और तेज है और वह अक्सर सेट पर लोगों को अपनी बातों से हंसा देती हैं। आमिर ने यह भी मजाक में कहा था कि ट्विंकल कई बार ऐसी बातें कर देती हैं जो सीधे दिल पर लगती हैं लेकिन उनका अंदाज मनोरंजक होता है।

    ट्विंकल खन्ना ने एक और दिलचस्प किस्सा साझा किया था जिसमें उन्होंने बताया कि आमिर खान अपने काम को लेकर कितने गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि एक बार एक सीन को लेकर आमिर डायरेक्टर से बात करने गए थे लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो वह थोड़े भावुक हो गए और अकेले जाकर सेट पर एक कोने में खड़े हो गए थे। ट्विंकल के अनुसार यह पल उनके लिए थोड़ा हैरान करने वाला था क्योंकि आमिर हमेशा अपने काम को लेकर बहुत डेडिकेटेड रहते हैं।

    वहीं करण जौहर की मौजूदगी में भी यह पूरा किस्सा और रोचक हो गया था क्योंकि बातचीत के दौरान हंसी मजाक का माहौल बना रहा और सभी ने इस घटना को एक हल्के फुल्के अंदाज में लिया।

    ट्विंकल खन्ना ने साल 2001 में फिल्मी करियर को अलविदा कह दिया था। कई फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने एक्टिंग छोड़कर राइटिंग की दुनिया में कदम रखा। आज वह एक सफल लेखिका के रूप में जानी जाती हैं और उनकी कई किताबें पाठकों के बीच काफी लोकप्रिय रही हैं।

    यह पूरा किस्सा आज भी फैंस के बीच इसलिए चर्चा में रहता है क्योंकि इसमें बॉलीवुड के बड़े सितारों का एक अनोखा और मजेदार अंदाज देखने को मिलता है जहां प्रोफेशनल सेट पर भी हल्के फुल्के पल यादगार बन जाते हैं।

  • देवदास: एक प्रेम कहानी जिसने दर्द को अमर बना दिया, 16 साल तक लिखने से डरते रहे लेखक

    देवदास: एक प्रेम कहानी जिसने दर्द को अमर बना दिया, 16 साल तक लिखने से डरते रहे लेखक


    नई दिल्ली। भारतीय साहित्य और सिनेमा के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जो समय की सीमाओं को पार कर लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है ‘देवदास’। एक ऐसा किरदार, जिसके दर्द को दर्शकों ने अपना दर्द समझा, जिसकी अधूरी मोहब्बत ने लाखों दिलों को छुआ और जिसकी त्रासदी ने उसे अमर बना दिया।

    देवदास का जन्म वर्ष 1901 में महान साहित्यकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की कल्पना में हुआ था। कहा जाता है कि यह कहानी कहीं न कहीं उनके अपने जीवन के अनुभवों और भावनाओं से प्रेरित थी। लेकिन लेखक को इस किरदार को लेकर एक डर था। उन्हें लगता था कि उनका नायक आदर्शवादी नहीं है। वह प्रेम में असफल होता है, शराब का सहारा लेता है और अंततः दुखद मृत्यु को प्राप्त होता है। शायद इसी वजह से शरत चंद्र ने इस रचना को करीब 16 वर्षों तक प्रकाशित नहीं किया।

    आखिरकार 1917 में जब ‘देवदास’ उपन्यास प्रकाशित हुआ, तो उसने साहित्य जगत में तहलका मचा दिया। लोगों को इस कहानी में अपना दर्द दिखाई देने लगा। देवदास की अधूरी प्रेम कहानी, पारो के प्रति उसका समर्पण और समाज की बंदिशों के आगे उसकी हार ने पाठकों को भावुक कर दिया।

    साहित्य से निकलकर जब देवदास सिनेमा के पर्दे पर पहुंचा, तो उसकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ गई। वर्ष 1928 में इस पर पहली मूक फिल्म बनी। इसके बाद 1936 में महान गायक-अभिनेता के.एल. सहगल ने देवदास को पर्दे पर जीवंत कर दिया। लेकिन 1955 में दिलीप कुमार ने जिस गहराई और संवेदनशीलता से इस किरदार को निभाया, उसने देवदास को भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर बना दिया।

    साल 2002 में निर्देशक संजय लीला भंसाली ने इस क्लासिक कहानी को भव्य अंदाज में पेश किया। फिल्म में शाहरुख खान ने देवदास, ऐश्वर्या राय ने पारो और माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी का किरदार निभाया। फिल्म के भावनात्मक दृश्यों और भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद 2009 में अनुराग कश्यप ने आधुनिक अंदाज में ‘देव डी’ बनाकर इस कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाया।

    आज तक ‘देवदास’ पर 14 से अधिक फिल्में और रूपांतरण बन चुके हैं। शायद यही उसकी सबसे बड़ी सफलता है कि एक सदी से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह किरदार लोगों के दिलों में जिंदा है। प्रेम, विरह, त्याग और आत्मसंघर्ष का यह प्रतीक भारतीय साहित्य और सिनेमा की सबसे अमर धरोहरों में गिना जाता है।

    देवदास सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है, जो हर उस इंसान को छूती है जिसने कभी प्रेम किया हो, खोया हो या दर्द को करीब से महसूस किया हो।

  • '3 इडियट्स' के सीक्वल पर राजकुमार हिरानी का बड़ा बयान; रैंचो, फरहान और राजू की जिंदगी में 20 साल बाद आए पारिवारिक और मानसिक तनाव पर केंद्रित होगी नई कहानी

    '3 इडियट्स' के सीक्वल पर राजकुमार हिरानी का बड़ा बयान; रैंचो, फरहान और राजू की जिंदगी में 20 साल बाद आए पारिवारिक और मानसिक तनाव पर केंद्रित होगी नई कहानी

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शुमार ‘3 इडियट्स’ के सीक्वल को लेकर दर्शकों का लंबा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। प्रख्यात फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी ने इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट की प्रगति और इसकी मूल कहानी को लेकर पहली बार आधिकारिक रूप से स्थिति साफ की है। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी फिल्म का कथानक कॉलेज जीवन या पुरानी यादों के इर्द-गिर्द बिल्कुल भी नहीं बुना जाएगा। इसके बजाय, कहानी को समय के चक्र में आगे बढ़ाते हुए मुख्य किरदारों के वयस्क जीवन, उनके पारिवारिक दायित्वों और समकालीन युग की वास्तविक चुनौतियों के साथ पर्दे पर उतारा जाएगा।

    निर्देशक ने इस बात की पुष्टि की है कि वह वर्तमान में इस महत्वाकांक्षी सीक्वल की पटकथा के लेखन पर बेहद गंभीरता से काम कर रहे हैं। यद्यपि स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देने में अभी काफी समय और रचनात्मक प्रयास बाकी हैं, लेकिन इसकी वैचारिक दिशा पूरी तरह तय हो चुकी है। सीक्वल में मूल फिल्म की कहानी से करीब 15 से 20 साल आगे का समय दिखाया जाएगा। दर्शकों के चहेते तीनों मुख्य किरदारों—रैंचो, फरहान और राजू की जिंदगी अब कॉलेज के दिनों से बहुत आगे निकल चुकी है। वे अब न केवल विवाहित हैं, बल्कि बच्चों के माता-पिता भी बन चुके हैं, जिससे कहानी में एक परिपक्व और नया दृष्टिकोण देखने को मिलेगा।

    राजकुमार हिरानी के अनुसार, फिल्म का मुख्य फोकस इस बात पर होगा कि उम्र के इस नए पड़ाव पर आने वाले मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक तनाव का सामना यह तीनों दोस्त किस प्रकार करते हैं। जहां साल 2009 में रिलीज हुई मूल फिल्म ‘3 इडियट्स’ में देश की शिक्षा प्रणाली पर तीखा व्यंग्य करते हुए युवाओं को अपने जुनून का पालन करने का एक मजबूत संदेश दिया गया था, वहीं सीक्वल में भी एक व्यापक सामाजिक मुद्दा उठाया जाएगा। निर्देशक ने हंसते हुए इस बात पर मुहर लगाई है कि इस बार भी फिल्म के माध्यम से समाज को एक बहुत बड़ा और प्रासंगिक संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है, जो आज के दौर के परिवारों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा।

    इस नए सफर में दर्शकों को अपने पुराने और पसंदीदा चेहरे एक बार फिर पर्दे पर एक साथ देखने को मिलेंगे। सीक्वल के लिए आमिर खान उर्फ फुंसुक वांगडू (रैंचो), आर माधवन उर्फ फरहान कुरैशी, शर्मन जोशी उर्फ राजू रस्तोगी और करीना कपूर खान उर्फ पिया सहस्रबुद्धे की मुख्य भूमिकाओं में वापसी पूरी तरह पक्की मानी जा रही है। हालांकि, मूल फिल्म के अन्य बेहद लोकप्रिय किरदारों जैसे चतुर रामलिंगम (ओमी वैद्य), वीरू सहस्रबुद्धे उर्फ वायरस (बोमन ईरानी), मोना सिंह और जावेद जाफरी के किरदारों को नए कथानक में किस प्रकार शामिल किया जाएगा, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    उल्लेखनीय है कि अभिजात जोशी और राजकुमार हिरानी द्वारा संयुक्त रूप से लिखित ‘3 इडियट्स’ एक कड़क सैटायरिकल कॉमेडी-ड्रामा थी, जिसने बॉक्स ऑफिस के तत्कालीन तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। फिल्म के अंत में रैंचो को लद्दाख में एक सफल वैज्ञानिक और शिक्षक के रूप में, फरहान को एक स्थापित वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और राजू को एक कॉर्पोरेट अधिकारी के रूप में सेटल होते दिखाया गया था। अब, दो दशकों के बाद इन किरदारों के जीवन में आए बदलावों और उनकी नई सामाजिक-पारिवारिक लड़ाइयों को देखने के लिए सिनेमाप्रेमियों के बीच अभी से भारी उत्साह देखा जा रहा है।

  • 'सिकंदर' के सेट पर फिजियोथेरेपी और भारी सुरक्षा घेरे के बीच काम होने का हुआ प्रामाणिक खुलासा

    'सिकंदर' के सेट पर फिजियोथेरेपी और भारी सुरक्षा घेरे के बीच काम होने का हुआ प्रामाणिक खुलासा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत के शीर्ष अभिनेताओं में शुमार सलमान खान के पेशेवर जीवन और उनकी कार्यशैली को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है। अभिनेता विशाल वशिष्ठ ने फिल्म ‘सिकंदर’ के निर्माण के दौरान सेट पर बने वास्तविक हालातों को साझा करते हुए बताया कि सुपरस्टार सलमान खान ने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों, मानसिक तनाव और असहनीय शारीरिक दर्द के बावजूद इस फिल्म के फिल्मांकन को पूरा किया था। यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब इस फिल्म के निर्माण और अभिनेता की सेट पर उपस्थिति को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही थीं। सह-कलाकार के इस बयान ने अभिनेता के काम के प्रति उनके गहरे समर्पण और उच्च व्यावसायिक प्रतिबद्धता को मजबूती से रेखांकित किया है।

    इस फिल्म के निर्माण का दौर अभिनेता के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के लिहाज से बेहद संवेदनशील और अत्यंत कठिन माना जा रहा था। साल 2024 में अपने बेहद करीबी मित्र और अनुभवी राजनेता बाबा सिद्दीकी की अचानक हुई हत्या के बाद सलमान खान गहरे मानसिक आघात और भावनात्मक संकट से गुजर रहे थे। इसके साथ ही, लगातार मिल रही सुरक्षा धमकियों के कारण उनके इर्द-गिर्द सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा करना पड़ा था। इस प्रकार के भारी सुरक्षा घेरे, मानसिक तनाव और हर पल बने रहने वाले जान के खतरे के बीच सेट पर आकर काम करना पूरी टीम और स्वयं अभिनेता के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य बन चुका था।

    मानसिक और बाहरी दबावों के अलावा अभिनेता उस समय गंभीर शारीरिक समस्याओं और असहनीय कष्ट से भी जूझ रहे थे। फिल्म के मुख्य दृश्यों के फिल्मांकन के दौरान सलमान खान की पसली में गंभीर चोट आई थी, जिससे उन्हें उठने-बैठने, झुकने और सामान्य रूप से चलने में भी तीव्र दर्द का सामना करना पड़ रहा था। सेट पर मौजूद रहे सह-कलाकारों के अनुसार, यह कोई बनाई हुई कहानी नहीं थी बल्कि पूरी टीम ने इस दर्द को बेहद करीब से महसूस किया था। अभिनेता जैसे-तैसे बेहद धीमी गति से चलकर कैमरे के सामने अपने दृश्यों को पूरा करते थे और निर्देशक के कट बोलते ही तुरंत अपनी फिजियोथेरेपी प्रक्रिया के लिए चले जाते थे।

    इस भीषण शारीरिक कष्ट के बावजूद फिल्म की कहानी की मांग के अनुसार उन्हें लगातार भारी एक्शन दृश्यों की शूटिंग करनी पड़ी थी, जिसे उन्होंने बिना किसी शिकायत के पूरा किया। विशाल वशिष्ठ ने अभिनेता की प्रशंसा करते हुए कहा कि मनोरंजन उद्योग में इतने लंबे समय तक रहने और शीर्ष मुकाम पर होने के बाद भी उनका ऐसा समर्पण देखना किसी भी कलाकार के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। सेट के बाहर उनके जीवन में क्या खतरनाक उथल-पुथल चल रही थी, इसका नकारात्मक प्रभाव उन्होंने कभी भी अपने काम की गति और सेट के माहौल पर नहीं पड़ने दिया।

    यह प्रामाणिक बयान हाल ही में निर्देशक एआर मुरुगाडोस के उन कथनों के परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, जिसमें उन्होंने फिल्म के कठिन शेड्यूल और शूटिंग के समय में किए गए बड़े बदलावों का जिक्र किया था। आंतरिक और बाहरी चुनौतियों के कारण कई बार दिन के शेड्यूल को रात में बदलना पड़ा था, जिससे क्रू को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। सह-कलाकार के इस नए वक्तव्य ने साफ कर दिया है कि समय में हुए वे बदलाव किसी लापरवाही का परिणाम नहीं बल्कि अभिनेता की गंभीर चिकित्सीय स्थिति और सुरक्षा कारणों की अनिवार्य आवश्यकता थे।

  • शाहिद कपूर की फिल्म की रिलीज के बाद दर्शकों में बढ़ा सिनेमाई उत्साह, 'अल्फा' और 'वेलकम टू द जंगल' सहित इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर टिकीं सबकी नजरें

    शाहिद कपूर की फिल्म की रिलीज के बाद दर्शकों में बढ़ा सिनेमाई उत्साह, 'अल्फा' और 'वेलकम टू द जंगल' सहित इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर टिकीं सबकी नजरें

    नई दिल्ली । भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म ‘कॉकटेल 2’ की भव्य रिलीज के साथ ही दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के सिनेमाघरों में दस्तक देने के तुरंत बाद मनोरंजन जगत की प्रतिष्ठित ट्रैकिंग वेबसाइट आईएमडीबी ने दर्शकों की पसंद और उत्सुकता के आधार पर मोस्ट एंटीसिपेटेड यानी सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली आगामी हिंदी फिल्मों की सूची को अपडेट कर दिया है। इस नई सूची से साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले हफ्तों में सिनेमाघरों से लेकर विभिन्न डिजिटल और टेलीविजन प्लेटफॉर्म्स पर बड़े सितारों के बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट्स दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इस सूची में सबसे पहला और बड़ा नाम निर्देशक अहमद खान के मार्गदर्शन में बन रही मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म ‘वेल्कम टू द जंगल’ का है। अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, रवीना टंडन, अरशद वारसी और दिशा पाटनी जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी यह बड़े बजट की फिल्म आगामी 26 जून को सीधे सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। हाल ही में जारी हुए इसके ट्रेलर ने दर्शकों के बीच पहले ही भारी उत्सुकता पैदा कर दी है, जिससे इसे बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    थिएटर रिलीज की इस कतार में अगला बड़ा नाम निर्देशक इंद्र कुमार की सुपरहिट कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ का है। साल 2007 में शुरू हुई इस मशहूर सीरीज के चौथे भाग में अजय देवगन, रितेश देशमुख, रवि किशन, संजय मिश्रा और जावेद जाफरी जैसे कलाकार अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को गुदगुदाने के लिए लौट रहे हैं। कॉमेडी शैली की यह फिल्म अगले महीने की 10 तारीख यानी 10 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी, जिसे लेकर सिनेमाप्रेमियों के बीच जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है।

    एक्शन और थ्रिलर के शौकीनों के लिए यशराज फिल्म्स के चर्चित स्पाई यूनिवर्स की अगली बड़ी पेशकश ‘अल्फा’ भी सिनेमाघरों में तहलका मचाने को तैयार है। शिव रवैल द्वारा निर्देशित इस कड़क स्पाई थ्रिलर फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में हैरतअंगेज एक्शन करती नजर आएंगी। बॉबी देओल और अनिल कपूर जैसे मजबूत अभिनेताओं से सजी इस फिल्म में सुपरस्टार ऋतिक रोशन का एक विशेष कैमियो भी शामिल किया गया है, जो दर्शकों के लिए बड़ा सरप्राइज होगा। यह फिल्म आगामी 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

    सिल्वर स्क्रीन के अलावा डिजिटल स्पेस और टेलीविजन क्षेत्र में भी मनोरंजन का बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। निर्देशक सिद्धार्थ पी मल्होत्रा की बहुप्रतीक्षित थ्रिलर फिल्म ‘इक्का’ आगामी 10 जुलाई को सीधे नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम की जाएगी, जिसमें सनी देओल एक कड़क वकील की मुख्य भूमिका में अक्षय खन्ना और दिया मिर्जा के साथ स्क्रीन साझा करते दिखेंगे। वहीं दूसरी ओर, प्रख्यात फिल्म निर्माता राजकुमार हिरानी भी डिजिटल माध्यम में अपना पहला कदम रख रहे हैं। उनके निर्देशन में बनी कॉमेडी क्राइम सारांश सीरीज ‘प्रीतम पेड्रो’ 3 जुलाई को जियो हॉटस्टार पर रिलीज होगी, जिसमें विक्रांत मैसी, संजय दत्त और बोमन ईरानी मुख्य भूमिकाओं में हैं। छोटे पर्दे की बात करें तो कलर्स टीवी पर 29 जून से एक नया धारावाहिक ‘जूही मुही’ शुरू हो रहा है, जिसमें ईशा सिंह एक ऑटिस्टिक बच्ची का चुनौतीपूर्ण किरदार निभा रही हैं और उनके साथ वरिष्ठ अभिनेता संजय सूरी भी अहम भूमिका में नजर आएंगे।

  • रणवीर सिंह विवाद से आगे बढ़े फरहान अख्तर, सुपरस्टार सलमान खान को लेकर दो भागों में मेगा बजट फिल्म बनाने की योजना

    रणवीर सिंह विवाद से आगे बढ़े फरहान अख्तर, सुपरस्टार सलमान खान को लेकर दो भागों में मेगा बजट फिल्म बनाने की योजना

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे फिल्म उद्योग और प्रशंसकों के बीच हलचल मचा दी है। अभिनेता रणवीर सिंह के साथ चल रहे ‘डॉन 3’ विवाद की सुर्खियों के बीच, मशहूर निर्माता-निर्देशक फरहान अख्तर अब बॉलीवुड के सुल्तान सलमान खान के साथ एक महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम करने की योजना बना रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दिग्गज एक बड़े बजट की पीरियोडिक ड्रामा फिल्म के लिए हाथ मिला सकते हैं, जो यदि धरातल पर उतरती है, तो सिनेमाई इतिहास में पहली बार होगा जब सलमान खान और फरहान अख्तर किसी प्रोजेक्ट में एक साथ नजर आएंगे।

    ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सुपरस्टार सलमान खान और एक्सेल एंटरटेनमेंट के कर्ता-धर्ता फरहान अख्तर पिछले एक महीने से लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं और उनके बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। प्रोजेक्ट से जुड़े करीबी सूत्रों का दावा है कि सलमान खान को फिल्म की शुरुआती स्क्रिप्ट और इसकी मूल अवधारणा काफी पसंद आई है और उन्होंने इस ऐतिहासिक कहानी में अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है। बताया जा रहा है कि फरहान जिस फिल्म को लेकर सलमान के साथ चर्चा कर रहे हैं, वह एक विशाल ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित दो भागों (टू-पार्ट्स) में रिलीज होने वाली फिल्म होगी।

    हालांकि, दोनों पक्षों के बीच चल रही यह बातचीत अभी अपने बेहद शुरुआती चरण में है और अभी तक किसी भी तरह का कानूनी या लिखित पेपर वर्क शुरू नहीं किया गया है। शुरुआती सहमति बनने के बाद दोनों ही पार्टियां इस अनूठे सहयोग को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट से जुड़ी आधिकारिक घोषणा और विस्तृत जानकारी इस साल के अंत तक सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल फिल्म के निर्देशक का नाम तय नहीं किया गया है, क्योंकि फरहान अख्तर इस प्रोजेक्ट को केवल प्रोड्यूस (निर्माण) करेंगे। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इस फिल्म की शूटिंग अगले साल यानी 2027 के शुरुआती महीनों में शुरू की जा सकती है।

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब फरहान अख्तर और रणवीर सिंह के बीच ‘डॉन 3’ को छोड़ने को लेकर गहरा विवाद चल रहा है। दरअसल, रणवीर सिंह द्वारा अचानक इस बहुप्रतीक्षित फिल्म से कदम पीछे खींचने के बाद फरहान ने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लाइज (FWICE) में अभिनेता की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद संगठन ने असहयोग का निर्देश भी जारी किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इस बीच उद्योग में ऐसी अफवाहें भी उड़ी थीं कि सलमान खान ने दोनों के बीच सुलह कराने की मध्यस्थता की है, लेकिन बाद में इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

    दूसरी ओर, सलमान खान इन दिनों अपने अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में भी व्यस्त हैं। वह जल्द ही निर्देशक अपूर्व लाखिया की फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (जिसका पूर्व नाम बैटल ऑफ गलवान था) में कर्नल बी संतोष बाबू की मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे, जिसमें उनके साथ चित्रांगदा सिंह भी अहम किरदार में हैं। ऐसे में फरहान अख्तर के प्रोडक्शन हाउस के तहत बनने वाली इस नई पीरियोडिक फिल्म से जुड़ने की खबर ने इंडस्ट्री का पारा बढ़ा दिया है, हालांकि इस संबंध में अभी तक सलमान खान या फरहान अख्तर की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या पुष्टि साझा नहीं की गई है।

  • जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में साठ और सत्तर के दशक में सिल्वर स्क्रीन
     राज करने वाली सदाबहार अभिनेत्री आशा पारेख की पेशेवर जिंदगी जितनी चकाचौंध और सफलताओं से भरी रही, उनकी निजी जिंदगी में उतनी ही खामोशी और त्याग की एक अनूठी कहानी छिपी रही। अपनी बेमिसाल खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय के दम पर करोड़ों प्रशंसकों को अपना दीवाना बनाने वाली इस महान अदाकारा ने अपनी असल जिंदगी में प्यार की एक ऐसी गरिमापूर्ण मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बेहद सम्मान के साथ की जाती है। उन्होंने एक शादीशुदा मर्द से सच्ची मोहब्बत तो की, लेकिन समाज में ‘घर तोड़ने वाली’ कहलाने का कलंक झेलने की बजाय ताउम्र कुंवारी रहने का रास्ता चुना।

    इस निश्छल और मूक प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष उन्नीस सौ उनसठ में हुई थी, जब मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक नासिर हुसैन ने युवा आशा पारेख की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी फिल्म ‘दिल देके देखो’ में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर एक बड़ा ब्रेक दिया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसके बाद इस जोड़ी ने एक के बाद एक कई शानदार और जुबली फिल्में सिनेमा जगत को दीं। सेट पर एक साथ लगातार काम करने के दौरान आशा पारेख कब अपने निर्देशक को दिल दे बैठीं, उन्हें खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ और दूसरी तरफ नासिर हुसैन के दिल में भी उनके लिए वही सम्मानजनक भावनाएं थीं।

    नासिर हुसैन के लिए अपने दिल में बेइंतहा मोहब्बत और कशिश होने के बावजूद आशा पारेख ने कभी भी अपने हक के लिए उनके सामने कोई जिद या शर्त नहीं रखी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह थी कि नासिर हुसैन पहले से ही शादीशुदा थे और बाल-बच्चों के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे थे। अभिनेत्री के भीतर के नैतिक मूल्यों ने उन्हें कभी इस बात की इजाजत नहीं दी कि उनके व्यक्तिगत सुख या प्यार की खातिर किसी दूसरी औरत का सुहाग और एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर जाए। उन्होंने अपने दिल की आवाज को दबाकर दूसरे के आशियाने की हिफाजत करना ज्यादा जरूरी समझा।

    दशकों तक इस खामोश दर्द और मोहब्बत को अपने सीने में दफन रखने के बाद, आशा पारेख ने वर्ष दो हजार सत्रह में प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा ‘द हिट गर्ल’ में इस राज से पर्दा उठाया था। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में स्वीकार किया था कि नासिर हुसैन ही उनकी जिंदगी के एकमात्र ऐसे पुरुष थे जिनसे उन्होंने बेहद शिद्दत से प्यार किया था। लेकिन किसी का घर उजाड़कर अपनी खुशियों का महल खड़ा करना उनके संस्कारों के खिलाफ था, यही वजह थी कि उन्होंने नासिर हुसैन पर शादी का दबाव बनाने की बजाय खुद अकेले जिंदगी काटने का एक बेहद कठिन और साहसिक निर्णय लिया।

    अपनी पूरी जिंदगी तन्हाई और अकेलेपन में गुजारने के बाद भी इस उम्र में पद्मश्री और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री के मन में अपने अतीत के फैसलों को लेकर कोई मलाल, कड़वाहट या शिकायत नहीं है। उनका हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि किसी दूसरे को दुख देकर हासिल की गई खुशी कभी भी स्थायी और सच्ची नहीं हो सकती। आज बयासी वर्ष से अधिक की उम्र पार कर चुकीं आशा पारेख अपने इस फैसले पर अडिग रहते हुए पूरे आत्मसम्मान, सुकून और गरिमा के साथ अपनी एकाकी जिंदगी का आनंद ले रही हैं, जो आज के दौर के रिश्तों के लिए एक बहुत बड़ी नजीर है।

  • सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम

    सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं जो फिल्मों की सफलता से इतर सेट पर घटित विवादित वाकयों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। अस्सी के दशक में भी एक ऐसा ही वाकया सामने आया था, जिसने तत्कालीन फिल्म जगत में भारी सनसनी मचा दी थी। यह पूरा मामला हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के सुपरस्टार विनोद खन्ना और दिग्गज अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से जुड़ा हुआ है। वर्ष उन्नीस सौ अस्सी में आई फिल्म ‘प्रेम धर्म’ की शूटिंग के दौरान एक बेहद संवेदनशील और अंतरंग दृश्य को फिल्माते समय ऐसा घटनाक्रम हुआ कि सेट पर मौजूद हर व्यक्ति हैरान रह गया।

    इस बहुचर्चित फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्मकार महेश भट्ट कर रहे थे, जो अपनी फिल्मों में दृश्यों को बेहद यथार्थवादी और भावुक बनाने के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के एक खास सीक्वेंस के लिए विनोद खन्ना और डिंपल कपाड़िया के बीच एक बेहद इंटीमेट और इमोशनल सीन शूट किया जाना तय हुआ था। इस दृश्य को अधिक वास्तविक रूप देने और कलाकारों की झिझक दूर करने के उद्देश्य से निर्देशक महेश भट्ट ने सेट की सभी लाइटों को काफी धीमा करवा दिया था और मुख्य कैमरा टीम को छोड़कर बाकी पूरी यूनिट को भी उस स्थान से थोड़ा दूर रहने के निर्देश दिए गए थे।

    जैसे ही कैमरे ने रोल करना शुरू किया, विनोद खन्ना ने स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार अपनी सह-कलाकार डिंपल कपाड़िया को चूमना शुरू कर दिया। दृश्य के पूरा होते ही निर्देशक महेश भट्ट ने लाउडस्पीकर पर ‘कट’ की घोषणा की, लेकिन विनोद खन्ना दृश्य की भावुकता और तीव्रता में इस कदर खो चुके थे कि उन्होंने निर्देशक की आवाज नहीं सुनी। ‘कट’ बोले जाने के बाद भी वे लगातार डिंपल कपाड़िया को किस करते रहे, जिससे सेट पर असहज स्थिति पैदा हो गई। डिंपल कपाड़िया को शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि उनके सह-कलाकार आखिर क्या कर रहे हैं।

    माहौल को अचानक गंभीर और अजीब होते देख निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी जगह से उठकर बेहद जोर-जोर से ‘कट’ बोलना शुरू किया, जिसके बाद कहीं जाकर विनोद खन्ना होश में आए और पीछे हटे। इस अप्रत्याशित और अचानक हुई घटना से युवा अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया पूरी तरह स्तब्ध और गहरे सदमे में आ गईं। उन्हें विनोद खन्ना के इस अनपेक्षित व्यवहार पर भारी गुस्सा भी आया और वे तुरंत सेट से भागकर सीधे अपने मेकअप रूम की तरफ चली गईं।

    अपने स्वाभिमान और गरिमा को ठेस पहुंचने से आहत अभिनेत्री ने मेकअप रूम के भीतर पहुंचकर खुद को अंदर से पूरी तरह बंद कर लिया और बाहर आने से साफ मना कर दिया। सेट पर पैदा हुए इस गंभीर तनाव को देखते हुए निर्देशक महेश भट्ट ने तुरंत स्थिति को संभाला और वे स्वयं डिंपल कपाड़िया के कमरे के बाहर पहुंचे। उन्होंने अभिनेत्री से इस पूरी घटना के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी और उन्हें आश्वस्त किया कि यह केवल एक भूल थी। दूसरी तरफ, सुपरस्टार विनोद खन्ना भी अपनी इस अनियंत्रित हरकत के बाद बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे थे।

    बॉलीवुड के गलियारों में आज भी इस किस्से को संवेदनशीलता के साथ याद किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि चकाचौंध भरी फिल्मों के निर्माण के दौरान कई बार कलाकारों के लिए स्थितियां कितनी असहज और चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। हालांकि, बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सुलझा लिया गया था, लेकिन सेंसर बोर्ड की कैंची और सेट पर मचे इस बवाल के कारण यह फिल्म और इससे जुड़ा यह विवाद हमेशा-कहमेशा के लिए फिल्मी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।