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  • अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना

    अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे प्रतिष्ठित और स्क्रीन पर तहलका मचाने वाली जोड़ियों का जिक्र होता है, तो अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। सत्तर और अस्सी के दशक में इन दोनों दिग्गज कलाकारों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कारी तालमेल दिखाया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और दर्शकों के बीच यह माना जाने लगा था कि जिस फिल्म में ये दोनों साथ हैं, उसका सुपरहिट होना तय है। इस ब्लॉकबस्टर जोड़ी की लोकप्रियता का आलम यह था कि इनकी एक कल्ट क्लासिक फिल्म रिलीज के बाद लगातार पांच सालों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी थी, जो अपने आप में एक अटूट कीर्तिमान है। इन दोनों महानायकों ने मुख्य भूमिकाओं से लेकर खास कैमियो रोल्स तक, कुल ९ फिल्मों में एक साथ स्क्रीन शेयर कर सिल्वर स्क्रीन पर अपनी दोस्ती और अभिनय का लोहा मनवाया।

    इस बेमिसाल जोड़ी के करियर और हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल १९७५ में आई फिल्म ‘शोले’ एक मील का पत्थर साबित हुई। निर्देशक रमेश सिप्पी की इस एक्शन-ड्रामा फिल्म में जय और वीरू के किरदारों में अमिताभ और धर्मेंद्र ने जिगरी दोस्ती की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की, जो आज आधी सदी बीत जाने के बाद भी मुहावरा बनी हुई है। यह फिल्म न केवल उस दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, बल्कि मुंबई के मिनर्वा थिएटर में लगातार पांच सालों तक चलकर इसने इतिहास रच दिया। इसी साल इस सुपरहिट जोड़ी की एक और क्लासिक फिल्म ‘चुपके चुपके’ रिलीज हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी यह बेहतरीन कॉमेडी फिल्म बंगाली सिनेमा की रीमेक थी। फिल्म में दोनों की कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी और एसडी बर्मन के संगीत से सजे इसके गाने आज भी चाव से सुने जाते हैं।

    एक्शन और कॉमेडी के बाद इस जोड़ी ने साल १९८० में आई फिल्म ‘राम बलराम’ के जरिए थ्रिलर जॉनर में अपनी धाक जमाई। विजय आनंद द्वारा निर्देशित इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में दोनों ने ऐसे दो भाइयों का किरदार निभाया था, जिनका पालन-पोषण धोखे से उनके माता-पिता के हत्यारे चाचा ने किया था। इसके अलावा यह जोड़ी ऋषिकेश मुखर्जी की ही एक और कल्ट फिल्म ‘गुड्डी’ में भी एक साथ नजर आई थी। हालांकि इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेत्री जया बच्चन की थी, लेकिन धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री की असलियत दिखाते हुए इसमें बेहद प्रभावी कैमियो रोल किए थे, जिसने फिल्म की कहानी को एक नया आयाम दिया था।

    सिल्वर स्क्रीन पर नए प्रयोग करने के मामले में भी यह जोड़ी पीछे नहीं रही। साल १९७७ में रिलीज हुई फिल्म ‘चरणदास’ एकमात्र ऐसी अनूठी फिल्म है, जिसमें अमिताभ और धर्मेंद्र दोनों ने कव्वाली गायकों के रूप में एक विशेष और बेहद दिलचस्प भूमिका निभाई थी। आशा भोसले और मुकेश की आवाज में सजे इस फिल्म के कव्वाली गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इसके बाद निर्देशक दुलल गुहा की फिल्म ‘दोस्त’ में भी अमिताभ बच्चन ने ‘आनंद’ नाम के किरदार में एक बेहद प्रभावशाली कैमियो किया था, जहां मुख्य भूमिका में धर्मेंद्र मौजूद थे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजी इस फिल्म में दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा था।

    इन दोनों सितारों की जुगलबंदी का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिसमें एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘जादूगर’ शामिल है। इस रहस्यमयी कहानी में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने क्रमशः वीरेंद्र और फ्रैंक जेम्स की भूमिकाएं निभाकर दर्शकों को चौंका दिया था, जिसकी पृष्ठभूमि एक सुनसान हवेली से जुड़ी थी। इसके बाद फिल्म ‘दिल्लगी’ में भी दोनों का जादू देखने को मिला, जहां अमिताभ बच्चन का रोल भले ही छोटा था, लेकिन एक गंभीर और सीधे-सादे प्रोफेसर की भूमिका निभा रहे धर्मेंद्र के साथ उनकी ऑनस्क्रीन मौजूदगी ने फिल्म की रौनक बढ़ा दी थी। इसके अतिरिक्त इस लिस्ट में एक अन्य फिल्म ‘हम कौन हैं’ का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जिसमें इस महान जोड़ी ने अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

  • न मनमुटाव, न तलाक, फिर भी ३७ सालों से अलग शहरों में रह रहे हैं अलका याग्निक और नीरज कपूर, खुद सिंगर ने खोला इस अनोखे रिश्ते का राज

    न मनमुटाव, न तलाक, फिर भी ३७ सालों से अलग शहरों में रह रहे हैं अलका याग्निक और नीरज कपूर, खुद सिंगर ने खोला इस अनोखे रिश्ते का राज


    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत पर दशकों तक राज करने वाली दिग्गज गायिका अलका याग्निक की सुरीली आवाज से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन उनकी निजी जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। अलका याग्निक ने साल १९८९ में बिजनेसमैन नीरज कपूर से शादी की थी, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि शादी के करीब ३७ साल बीत जाने के बाद भी यह कपल एक-दूसरे से अलग रहता है। अमूमन फिल्म इंडस्ट्री में अलग रहने का मतलब मनमुटाव या तलाक माना जाता है, मगर इस जोड़े के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है। दोनों के बीच आज भी अटूट प्यार और आपसी समझ कायम है। दरअसल, अलका याग्निक के पति नीरज कपूर मूल रूप से मेघालय की राजधानी शिलांग के रहने वाले हैं और वहीं रहकर अपना पूरा बिजनेस संभालते हैं, जबकि अलका अपने काम के सिलसिले में मुंबई में रहती हैं।

    इस अनोखे रिश्ते की शुरुआत एक पारिवारिक जुड़ाव से हुई थी। नीरज कपूर की आंटी और अलका याग्निक की मां बचपन में क्लासमेट हुआ करती थीं। इसी पारिवारिक कनेक्शन के चलते नीरज जब मुंबई आए, तो उनकी पहली मुलाकात अलका से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला बढ़ा और यह दोस्ती गहरी मोहब्बत में बदल गई। उस दौर में दोनों के बीच रात-रात भर फोन पर बातें हुआ करती थीं और जब घर पर फोन का भारी-भरकम बिल आया, तब जाकर अलका की मां को इस अफेयर की भनक लगी। अलका उस समय तक यह पूरी तरह तय कर चुकी थीं कि वह जीवनसाथी के रूप में सिर्फ नीरज को ही चुनेंगी। हालांकि, जब दोनों ने अपने परिवारों के सामने शादी की इच्छा जताई, तो अलका के माता-पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ खड़े हो गए।

    घरवालों के विरोध की सबसे बड़ी वजह दोनों के करियर और अलग-अलग शहर थे। नीरज शिलांग में पूरी तरह सेटल थे और अलका उस दौर में अपने सिंगिंग करियर के पीक पर थीं, जिसके कारण उनका मुंबई में रहना बेहद जरूरी था। माता-पिता का मानना था कि एक पार्टनर मुंबई में और दूसरा शिलांग में रहेगा, तो इतनी दूरी के बीच शादी का चलना नामुमकिन हो जाएगा। हालांकि, अलका और नीरज के दृढ़ निश्चय के आगे आखिरकार दोनों परिवारों को झुकना पड़ा और साल १९८९ में दोनों पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह के बंधन में बंध गए। शादी के शुरुआती दिनों में दोनों ने एक बीच का रास्ता निकाला था, जिसके तहत तय हुआ था कि अलका एक महीने के लिए शिलांग जाएंगी और नीरज अगले महीने मुंबई आएंगे।

    शादी के तुरंत बाद अलका याग्निक का करियर इतनी तेजी से चमका कि उनके लिए एक दिन के लिए भी मुंबई छोड़ना पूरी तरह नामुमकिन हो गया। साल १९९० में उनकी बेटी सायशा का जन्म हुआ और उसके ठीक बाद जनवरी १९९१ में उनका गाना ‘एक दो तीन’ ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। इस सफलता ने अलका को बॉलीवुड की सबसे व्यस्त गायिका बना दिया। अलका बताती हैं कि उनके पति अक्सर मजाक में उन्हें चिढ़ाते हैं कि वह अलका के करियर के लिए तो बहुत लकी साबित हुए, लेकिन अपने खुद के वैवाहिक जीवन के लिए अनलकी रहे। खुद अलका भी मानती हैं कि पूरी जिंदगी अलग-अलग शहरों में रहने की वजह से जब भी वे लंबे समय बाद मिलते हैं, तो एक-दूसरे के तौर-तरीकों को दोबारा समझने में दो-चार दिन का समय लग जाता है, लेकिन इस दूरी ने उनके रिश्ते के विश्वास को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

  • परदे पर शराबी का अमर अभिनय करने वाले केष्टो मुखर्जी की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते वक्त सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    परदे पर शराबी का अमर अभिनय करने वाले केष्टो मुखर्जी की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते वक्त सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास में कई ऐसे कलाकारों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है, जिनकी रील और रीयल लाइफ में जमीन-आसमान का अंतर था। एक ऐसे ही बेमिसाल अभिनेता थे केष्टो मुखर्जी, जिन्होंने परदे पर हमेशा एक पक्के शराबी का किरदार निभाकर दर्शकों को लोटपोट किया, लेकिन असल जिंदगी में उन्होंने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया। अपनी खास कॉमिक टाइमिंग, अनूठी शारीरिक भाषा और लड़खड़ाती जुबान से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले केष्टो मुखर्जी ने अपने करियर में ९० से भी अधिक फिल्मों में काम किया, मगर उनका यह मुकाम कड़े संघर्षों और बेहद अजीबो-गरीब दौर से गुजरकर हासिल हुआ था। कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे केष्टो को बचपन से ही अभिनय का गहरा शौक था, जिसके चलते उन्होंने शुरुआती दिनों में नुक्कड़ नाटकों और रंगमंच का रुख किया था।

    कोलकाता के रंगमंच पर सक्रियता के दौरान मशहूर फिल्मकार ऋत्विक घटक की पारखी नजर उन पर पड़ी। घटक ने केष्टो की असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी बांग्ला फिल्म ‘नागरिक’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका दे दी। किस्मत का खेल देखिए कि यह फिल्म साल १९५२ में बनकर पूरी हो चुकी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे सिनेमाघरों तक पहुंचने में पूरे २५ साल लग गए। जब यह फिल्म १९७७ में रिलीज हुई, तब तक ऋत्विक घटक इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। अपने गुरु और मार्गदर्शक के निधन के गहरे सदमे के कारण केष्टो मुखर्जी ने इस फिल्म को अपने जीवन में कभी नहीं देखा। कोलकाता में कई बंगाली फिल्मों का हिस्सा रहने के बावजूद केष्टो को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था, जिससे न तो उनके भीतर की अभिनय की भूख मिट रही थी और न ही परिवार का गुजारा हो पा रहा था।

    आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए केष्टो मुखर्जी ने एक दिन आंखों में बड़े सपने लिए मायानगरी बॉम्बे का रुख किया। बॉम्बे आकर उन्होंने नए सिरे से काम की तलाश शुरू की और किसी तरह दिग्गज निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से संपर्क साधे रखा। ऋषिकेश मुखर्जी ने उनकी अभिनय क्षमता का सम्मान करते हुए अपनी फिल्म ‘मुसाफिर’ में उन्हें एक स्ट्रीट डांसर का बेहद छोटा सा रोल दिया। इस छोटे से ब्रेक के बाद भी बॉम्बे जैसे बड़े शहर में खुद को स्थापित करने के लिए उनका संघर्ष थमा नहीं था। इसी जद्दोजहद के बीच एक दिन वह महान फिल्मकार बिमल रॉय से मिलने उनकी फिल्म के सेट पर पहुंच गए। बिमल रॉय उस समय शूटिंग के बेहद व्यस्त शेड्यूल में व्यस्त थे, इसलिए केष्टो वहीं एक कोने में बैठकर घंटों तक उनके फ्री होने का इंतजार करने लगे।

    काफी देर बाद जब बिमल रॉय फुर्सत में आए और केष्टो उनके सामने पहुंचे, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि फिलहाल उनके पास कोई काम नहीं है और वह बाद में आएं। इस साफ इनकार के बाद भी केष्टो वहां से हिले नहीं, जिससे चिढ़कर बिमल रॉय ने उनसे पूछ लिया कि क्या तुम भौंक सकते हो, क्योंकि उन्हें अपनी फिल्म के एक दृश्य के लिए कुत्ते की आवाज की जरूरत थी। आम तौर पर ऐसा तीखा सवाल सुनकर कोई भी स्वाभिमानी कलाकार वहां से चला जाता, लेकिन केष्टो ने धैर्य रखा और तुरंत पूरी शिद्दत के साथ सेट पर ही कुत्ते की आवाज निकालने लगे। उनकी इस अप्रत्याशित हरकत और अभिनय के प्रति गजब का समर्पण देखकर बिमल रॉय पूरी तरह हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत केष्टो को अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया।

    इस ऐतिहासिक घटना के बाद केष्टो मुखर्जी की बॉलीवुड में राह आसान हो गई और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद हास्य कलाकारों में शुमार हो गए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। महज ५६ वर्ष की उम्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने उनके इस सुनहरे सफर पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया। वह मुंबई के समीप स्थित एक प्रसिद्ध गणपति मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान अगले ही दिन दिल का दौरा पड़ने के कारण इस महान कलाकार का असमय निधन हो गया।

  • वास्तविक जीवन में मदिरा को हाथ न लगाने वाले हास्य अभिनेता की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते समय हुए सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    वास्तविक जीवन में मदिरा को हाथ न लगाने वाले हास्य अभिनेता की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते समय हुए सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे विलक्षण कलाकार हुए हैं, जिनकी ऑन-स्क्रीन छवि और वास्तविक जीवन के आचरण में जमीन-आसमान का अंतर था। इस फेहरिस्त में सबसे लोकप्रिय नामों में से एक नाम दिवंगत अभिनेता केष्टो मुखर्जी का है। केष्टो मुखर्जी ने रुपहले पर्दे पर हमेशा एक ऐसे शराबी के किरदारों को जीवंत किया, जिसे देखकर दर्शक अपनी हंसी नहीं रोक पाते थे। आम जनता उन्हें असल जिंदगी में भी शराबी समझने की भूल कर बैठती थी, जबकि हकीकत यह थी कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया था। उनका पूरा सफरनामा कला के प्रति अटूट निष्ठा, कड़े संघर्षों और अप्रत्याशित मोड़ों की एक अनूठी दास्तान है।

    पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मे केष्टो मुखर्जी को बचपन से ही अभिनय का गहरा शौक था, जिसके कारण उन्होंने बेहद कम उम्र में ही नुक्कड़ नाटकों और स्थानीय रंगमंच से अपने अभिनय सफर की शुरुआत कर दी थी। रंगमंच पर उनकी शानदार प्रतिभा को देखकर उस दौर के महान बंगाली फिल्मकार ऋत्विक घटक बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने केष्टो को अपनी प्रतिष्ठित बांग्ला फिल्म ‘नागरिक’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका की पेशकश की। नियति का खेल देखिए कि यह फिल्म साल 1952 में ही बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे रिलीज होने में पूरे 25 साल का लंबा समय लग गया। जब यह फिल्म 1977 में सिनेमाघरों में पहुंची, तब तक ऋत्विक घटक इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। अपने गुरु के जाने के गम में केष्टो मुखर्जी इतने भावुक हो गए थे कि उन्होंने इस फिल्म को जीवनभर कभी नहीं देखा।

    कोलकाता के सिनेमाई हलकों में कई बंगाली फिल्मों का हिस्सा रहने के बावजूद केष्टो मुखर्जी को वह पहचान और आर्थिक संबल नहीं मिल पा रहा था, जिसके वह हकदार थे। न तो उनके परिवार का गुजारा ठीक से हो पा रहा था और न ही उनके भीतर के कलाकार की भूख शांत हो रही थी। आखिरकार, अपनी आंखों में एक बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना संजोकर उन्होंने देश की आर्थिक राजधानी और मायानगरी बॉम्बे का रुख किया। मुंबई आने के बाद शुरुआती दिन बेहद तंगहाली और संघर्ष में बीते। उन्होंने हार न मानते हुए लगातार प्रयास किए और किसी तरह मशहूर निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से संपर्क स्थापित किया। ऋषिकेश मुखर्जी ने उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए अपनी फिल्म ‘मुसाफिर’ में उन्हें एक स्ट्रीट डांसर का बहुत छोटा सा रोल दिया, जिससे उनके हिंदी सिनेमा के सफर का आधिकारिक तौर पर आगाज हुआ।

    बॉम्बे में खुद को स्थापित करने की इसी जद्दोजहद के दौरान केष्टो मुखर्जी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक वाकया सामने आया, जब वह काम की तलाश में महान फिल्ममेकर बिमल रॉय के सेट पर पहुंचे थे। बिमल रॉय उस समय अपनी फिल्म की शूटिंग में बेहद व्यस्त थे और केष्टो बिना थके घंटों एक कोने में खड़े होकर उनकी फुर्सत का इंतजार करते रहे। काफी देर बाद जब बिमल रॉय की नजर उन पर पड़ी, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि फिलहाल उनके पास देने के लिए कोई काम नहीं है और वह बाद में आएं। इसके बावजूद केष्टो वहां से नहीं गए। कुछ समय बाद बिमल रॉय ने जब दोबारा उन्हें वहीं खड़ा देखा, तो वह थोड़े असहज और चिढ़ गए। उन्होंने केष्टो से पूछा कि क्या तुम भौंक सकते हो, मुझे अपनी फिल्म के एक दृश्य के लिए कुत्ते की प्रामाणिक आवाज की जरूरत है, क्या तुम यह कर पाओगे।

    यह एक ऐसा सवाल था जो किसी भी स्वाभिमानी अभिनेता को निराश और आहत कर सकता था, लेकिन केष्टो मुखर्जी ने इसे एक बड़ी चुनौती और अवसर के रूप में स्वीकार किया। वह कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हुए और फिर पूरे समर्पण के साथ सेट पर ही जोर-जोर से कुत्ते की आवाज निकालने लगे। उनकी इस अप्रत्याशित और सजीव प्रस्तुति ने बिमल रॉय समेत पूरे सेट पर मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। बिमल रॉय के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे और उन्होंने केष्टो की प्रतिभा का लोहा मानते हुए तुरंत उन्हें अपनी फिल्म के लिए अनुबंधित कर लिया। इस घटना के बाद केष्टो मुखर्जी के लिए बॉलीवुड के दरवाजे पूरी तरह खुल गए और उन्होंने अपने पूरे करियर में 90 से अधिक फिल्मों में अपनी विशिष्ट अदाकारी का लोहा मनवाया।

    सफलता के शिखर पर पहुंचने और दर्शकों को दशकों तक हंसाने वाले इस महान कलाकार का अंत बेहद दुखद रहा। मात्र 56 वर्ष की आयु में नियति ने उन्हें हमसे छीन लिया। एक दिन जब वह मुंबई के पास स्थित एक प्रसिद्ध गणपति मंदिर में दर्शन करने के लिए अपनी कार से जा रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण सड़क हादसे में केष्टो मुखर्जी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद दुर्घटना के अगले ही दिन दिल का दौरा पड़ने के कारण इस महान हास्य अभिनेता का असमय निधन हो गया।

  • मुगल-ए-आजम के सेट से सामने आया इतिहास का अनसुना पन्ना: मधुबाला के हुस्न के दीवाने थे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो

    मुगल-ए-आजम के सेट से सामने आया इतिहास का अनसुना पन्ना: मधुबाला के हुस्न के दीवाने थे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी बेमिसाल खूबसूरती और जीवंत अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री मधुबाला का जादू सिर्फ देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं था। हाल ही में सामने आए ऐतिहासिक और सिनेमाई संस्मरणों के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी इस कदर हुस्न की मल्लिका के दीवाने थे कि वे अक्सर उनसे मिलने के लिए भारत आया करते थे। यह उस दौर की बात है जब मधुबाला अपनी सर्वकालिक महान फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग में व्यस्त थीं। उस समय जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति में कोई बहुत बड़ा नाम नहीं थे, बल्कि एक बेहद पढ़े-लिखे, हैंडसम और उभरते हुए युवा राजनेता के तौर पर मुंबई के दौरों पर आते-जाते रहते थे।

    मध्य प्रदेश। इस ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्से की पृष्ठभूमि साल 1950 के दशक के अंतिम वर्षों से जुड़ती है। यह वह दौर था जब एक तरफ मधुबाला और महानायक दिलीप कुमार के बीच के रिश्तों में गंभीर तल्खी आ चुकी थी और उनका सालों पुराना संबंध टूटने की कगार पर था। ठीक उसी समय जुल्फिकार अली भुट्टो की जिंदगी में मधुबाला की एंट्री हुई। भुट्टो अक्सर मुंबई प्रवास के दौरान ‘मुगल-ए-आजम’ के भव्य सेट पर पहुंच जाते थे, जहां वे घंटों बैठकर मधुबाला को अभिनय करते हुए निहारते थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा और यह दोस्ती गहरी होती चली गई। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, दोनों अक्सर फिल्म के सेट पर ही एक साथ दोपहर का भोजन करते थे और भुट्टो हमेशा मधुबाला के करीब रहने का बहाना ढूंढते थे।

    इस रिश्ते का सबसे जटिल पहलू यह था कि जब जुल्फिकार अली भुट्टो मधुबाला के करीब आ रहे थे, तब वे पहले से ही शादीशुदा थे और उनकी शादी शिरीन नामक महिला से हो चुकी थी। इसके बावजूद मधुबाला की जादुई शख्सियत के आकर्षण में बंधकर भुट्टो ने अपनी शादीशुदा जिंदगी की परवाह नहीं की। मीडिया रिपोर्ट्स और उस दौर के राजनैतिक-सिनेमाई गलियारों के दावों के अनुसार, भुट्टो ने एक दिन अपने दिल की बात खुलकर मधुबाला के सामने रख दी थी और उनके समक्ष बकायदा विवाह का प्रस्ताव भी पेश किया था। वे हर हाल में मधुबाला को अपनी जीवनसंगिनी बनाना चाहते थे और इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार थे।

    मधुबाला उस दौर में जुल्फिकार भुट्टो की बुद्धिमत्ता और उनके व्यक्तित्व का सम्मान जरूर करती थीं और उनके साथ पर्याप्त समय भी बिताती थीं, लेकिन वे एक बेहद व्यावहारिक महिला भी थीं। उन्हें इस बात का पूरा संज्ञान था कि भुट्टो न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि एक दूसरे देश की सक्रिय राजनीति का हिस्सा भी हैं। ऐसे किसी संवेदनशील मोड़ पर शादी जैसा बड़ा और गंभीर फैसला लेना उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन के लिए सही नहीं था। यही कारण रहा कि मधुबाला ने भुट्टो के प्रेम प्रस्ताव को बेहद शालीनता से ठुकरा दिया और अपने रिश्ते को एक सीमित दायरे से आगे नहीं बढ़ने दिया। आखिरकार उन्होंने भुट्टो से अपनी दूरियां बना लीं और इस तरह राजनीति और कला का यह अध्याय हमेशा के लिए अधूरा रह गया।

    इस अधूरी प्रेम कहानी के अंत के बाद दोनों की राहें पूरी तरह जुदा हो गईं। जुल्फिकार अली भुट्टो से अलग होने के तुरंत बाद साल 1960 में मधुबाला ने मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार से शादी कर ली। इसके कुछ समय बाद ही वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गईं और महज 36 वर्ष की अल्पायु में साल 1969 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दूसरी ओर, जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे और देश के विदेश मंत्री, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बने। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था और साल 1979 में तख्तापलट के बाद महज 51 वर्ष की आयु में भुट्टो को पाकिस्तान में फांसी दे दी गई।

  • रिलीज से पहले ही ‘वेलकम टू द जंगल’ का बड़ा धमाका, IMDb की मोस्ट अवेटेड फिल्मों की लिस्ट में पहुंची नंबर 1 पर

    रिलीज से पहले ही ‘वेलकम टू द जंगल’ का बड़ा धमाका, IMDb की मोस्ट अवेटेड फिल्मों की लिस्ट में पहुंची नंबर 1 पर


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता Akshay Kumar की बहुप्रतीक्षित फिल्म Welcome to the Jungle रिलीज से पहले ही लगातार सुर्खियां बटोर रही है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर जारी किया गया था, जिसे दर्शकों और फिल्म समीक्षकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली। अब फिल्म ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। IMDb की मोस्ट अवेटेड इंडियन फिल्मों की सूची में ‘वेलकम टू द जंगल’ पहले स्थान पर पहुंच गई है।

    फिल्म के ट्रेलर को रिलीज के महज दो दिनों के भीतर 28 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। यूट्यूब पर ट्रेलर लगातार ट्रेंड कर रहा है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा तेज है। कॉमेडी, एक्शन और मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

    फिल्म का निर्देशन Ahmed Khan ने किया है। खास बात यह है कि इस फिल्म के जरिए अक्षय कुमार एक बार फिर लोकप्रिय ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी में वापसी कर रहे हैं। इससे पहले भी इस फ्रेंचाइजी की फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था और अब इसके नए अध्याय से भी बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं।

    ट्रेलर के अनुसार फिल्म की कहानी हास्य और भ्रम की घटनाओं पर आधारित है। इसमें अक्षय कुमार एक संघर्षरत अभिनेता की भूमिका में दिखाई देते हैं, जो अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान वह एक सफल अभिनेत्री, जिसका किरदार Jacqueline Fernandez निभा रही हैं, के साथ एक फिल्म की शूटिंग के लिए गांव पहुंचता है। हालांकि गांव के लोग पूरी टीम को असली सेना का दल समझ लेते हैं और उनसे एक खतरनाक अपराधी से बचाने की गुहार लगाते हैं। इसके बाद शुरू होता है भ्रम, कॉमेडी और रोमांच से भरपूर घटनाओं का सिलसिला।

    फिल्म में कई बड़े कलाकार नजर आने वाले हैं, जिनमें Jackie Shroff भी शामिल हैं। मल्टीस्टारर कास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार की गई इस फिल्म को लेकर ट्रेड एक्सपर्ट्स भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।

    अक्षय कुमार की हालिया फिल्मों की बात करें तो वह हाल ही में एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आए थे, जिसे Priyadarshan ने निर्देशित किया था। फिल्म ने वैश्विक स्तर पर अच्छी कमाई की और दर्शकों का मनोरंजन किया। अब सभी की निगाहें 26 जून को रिलीज होने जा रही ‘वेलकम टू द जंगल’ पर टिकी हैं।

    इस फिल्म के बाद अक्षय कुमार कई बड़े प्रोजेक्ट्स में दिखाई देने वाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार वह आगामी फिल्म ‘हैवान’ में नजर आएंगे, जिसमें उनके साथ Saif Ali Khan भी दिखाई देंगे। इसके अलावा वह Golmaal 5 का भी हिस्सा होंगे, जिसका निर्देशन Rohit Shetty कर रहे हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि ‘गोलमाल 5’ में अक्षय कुमार एक अलग और संभवतः नकारात्मक भूमिका में नजर आ सकते हैं। हालांकि निर्माताओं की ओर से इस बारे में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

    फिलहाल ‘वेलकम टू द जंगल’ की बढ़ती लोकप्रियता और IMDb रैंकिंग यह संकेत दे रही है कि फिल्म रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बना चुकी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 26 जून को सिनेमाघरों में उतरने के बाद यह बॉक्स ऑफिस पर कितना बड़ा कमाल दिखा पाती है।

  • एक दिन में 47 फिल्में साइन करने वाला बॉलीवुड स्टार, पहली ही फिल्म ने बनाया सुपरस्टार, फिर फीका पड़ गया करियर

    एक दिन में 47 फिल्में साइन करने वाला बॉलीवुड स्टार, पहली ही फिल्म ने बनाया सुपरस्टार, फिर फीका पड़ गया करियर


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। हालांकि, हर किसी की सफलता लंबे समय तक कायम नहीं रह पाती। अभिनेता Rahul Roy की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय था जब फिल्म निर्माता उनके साथ काम करने के लिए कतार में खड़े रहते थे और उनके पास फिल्मों की इतनी भरमार थी कि उन्होंने एक ही दिन में 47 फिल्में साइन कर ली थीं।

    हाल ही में राहुल रॉय टीवी शो लाफ्टर शेफ्स में नजर आए, जहां उनके फिल्मी करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया। शो के दौरान अभिनेता Karan Kundrra ने राहुल से पूछा कि क्या उन्होंने एक दिन में 150 फिल्में साइन की थीं। इस पर राहुल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह आंकड़ा गलत है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 150 नहीं, बल्कि 47 फिल्में एक ही दिन में साइन की थीं। यह सुनकर शो में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए।

    राहुल रॉय को सबसे ज्यादा पहचान फिल्म Aashiqui से मिली थी। यह उनकी पहली फिल्म थी और रिलीज होते ही देशभर में जबरदस्त हिट साबित हुई। फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री Anu Aggarwal नजर आई थीं। रोमांटिक कहानी और यादगार संगीत के कारण ‘आशिकी’ ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। फिल्म की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि राहुल रॉय को लंबे समय तक ‘आशिकी बॉय’ के नाम से जाना जाता रहा।

    एक इंटरव्यू में राहुल रॉय ने बताया था कि ‘आशिकी’ सिनेमाघरों में करीब छह महीने तक हाउसफुल चली थी। फिल्म की सफलता ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया और उनके पास फिल्मों के प्रस्तावों की बाढ़ आ गई। निर्माता और निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेने के लिए उत्सुक रहते थे। इसी दौरान उन्होंने 47 फिल्मों पर हस्ताक्षर कर दिए।

    हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में फिल्में साइन करना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ। राहुल ने बाद में स्वीकार किया था कि उनके पास सभी फिल्मों के लिए समय नहीं था। मजबूरी में उन्हें कई प्रोजेक्ट छोड़ने पड़े और लगभग 21 निर्माताओं को उनकी एडवांस राशि भी लौटानी पड़ी। यह उनके करियर का एक ऐसा दौर था जब लोकप्रियता अपने चरम पर थी, लेकिन सही प्रबंधन न होने के कारण वह उसका पूरा लाभ नहीं उठा सके।

    फिल्मों के अलावा राहुल रॉय रियलिटी शो की दुनिया में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। वे वर्ष 2007 में प्रसारित हुए Bigg Boss के पहले सीजन के विजेता रहे थे। बिग बॉस की ट्रॉफी जीतने के बाद भी उनके करियर को वैसी रफ्तार नहीं मिल सकी जैसी ‘आशिकी’ के दौर में देखने को मिली थी।

    राहुल रॉय ने अपने करियर में 28 से अधिक फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी बाद की अधिकांश फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं। धीरे-धीरे उनका स्टारडम कम होता गया और वे फिल्मी दुनिया से दूर होते चले गए।

    हाल के वर्षों में राहुल रॉय सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे हैं। कुछ समय पहले एक कंटेंट क्रिएटर के साथ रील वीडियो बनाने को लेकर उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। आलोचनाओं का जवाब देते हुए राहुल ने कहा था कि वह ईमानदारी से काम कर रहे हैं और मेहनत करके अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि लोग उनकी इतनी चिंता करते हैं तो उन्हें बेहतर काम दिलाने में मदद करें।

    राहुल रॉय की कहानी बॉलीवुड में सफलता और संघर्ष दोनों का अनोखा उदाहरण है। एक दौर में जहां वे इंडस्ट्री के सबसे चर्चित सितारों में शामिल थे, वहीं आज उनकी यात्रा नई पीढ़ी के कलाकारों को सफलता के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश देती है।

  • 52 साल के साथ और 41 साल के वैवाहिक रिश्ते को किया सलाम, किरण खेर के जन्मदिन पर अनुपम खेर का भावुक संदेश चर्चा में

    52 साल के साथ और 41 साल के वैवाहिक रिश्ते को किया सलाम, किरण खेर के जन्मदिन पर अनुपम खेर का भावुक संदेश चर्चा में

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री और सांसद किरण खेर के जन्मदिन के अवसर पर अभिनेता अनुपम खेर ने एक भावुक संदेश साझा कर उन्हें विशेष अंदाज में शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर साझा किया गया उनका यह पोस्ट तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और प्रशंसकों के साथ-साथ फिल्म जगत की कई हस्तियों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है।

    अनुपम खेर ने अपनी पत्नी किरण खेर के साथ एक खूबसूरत तस्वीर साझा करते हुए उनके लिए प्यार, सम्मान और आभार से भरा संदेश लिखा। उन्होंने अपने लंबे साथ को याद करते हुए कहा कि वह किरण को पांच दशक से अधिक समय से जानते हैं और इस दौरान उन्होंने उनसे जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं। अभिनेता ने अपने संदेश में उनके अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाल जीवन और लंबी उम्र की कामना भी की।

    अपने भावनात्मक संदेश में अनुपम खेर ने कहा कि जीवन में कई सीखें ऐसी होती हैं जो समय के साथ धीरे-धीरे समझ में आती हैं। उन्होंने लिखा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि उन्होंने किरण से केवल शब्दों के माध्यम से नहीं, बल्कि उनके जीवन जीने के तरीके से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने किरण की हिम्मत, ईमानदारी, मित्रता और व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उनके जीवन में होने के लिए धन्यवाद भी व्यक्त किया।

    सोशल मीडिया पर साझा किया गया यह संदेश लोगों को काफी पसंद आ रहा है। प्रशंसकों ने इसे एक सच्चे और मजबूत रिश्ते की मिसाल बताया है। कई लोगों ने टिप्पणी करते हुए दोनों की जोड़ी की प्रशंसा की और किरण खेर को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने भी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देकर उन्हें बधाई संदेश भेजे।

    अनुपम और किरण खेर की प्रेम कहानी लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है। दोनों की पहली मुलाकात थिएटर के दिनों में हुई थी, जब वे अभिनय की दुनिया में अपने शुरुआती कदम रख रहे थे। समय के साथ दोनों के बीच मित्रता गहरी हुई और बाद में यह रिश्ता जीवनसाथी के रूप में आगे बढ़ा। वर्ष 1985 में दोनों ने विवाह किया और तब से वे भारतीय मनोरंजन जगत के सबसे चर्चित और सम्मानित दंपतियों में गिने जाते हैं।

    किरण खेर ने फिल्मों, टेलीविजन और सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई है। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। वहीं अनुपम खेर भारतीय सिनेमा के सबसे अनुभवी और बहुमुखी कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने देश और विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

    जन्मदिन के अवसर पर साझा किया गया यह संदेश केवल शुभकामना भर नहीं, बल्कि एक लंबे और मजबूत रिश्ते की झलक भी प्रस्तुत करता है। वर्षों के साथ, विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित इस संबंध ने अनेक लोगों को प्रेरित किया है। सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रियाएं इस बात का प्रमाण हैं कि दर्शक आज भी इस जोड़ी को उतना ही पसंद करते हैं जितना पहले करते थे।

    किरण खेर के जन्मदिन पर मिला यह विशेष संदेश उनके प्रशंसकों के लिए भी यादगार बन गया है। अभिनेता के शब्दों में झलकता स्नेह, सम्मान और अपनापन इस अवसर को और अधिक खास बना रहा है।

  • रॉयल ब्लू साड़ी में छाईं Madhuri Dixit, 'मां बहन' की सफलता के बीच फिर दिखा धक-धक गर्ल का शाही अंदाज

    रॉयल ब्लू साड़ी में छाईं Madhuri Dixit, 'मां बहन' की सफलता के बीच फिर दिखा धक-धक गर्ल का शाही अंदाज


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय और सदाबहार अभिनेत्रियों में शुमार Madhuri Dixit आज भी अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्टाइल से करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करती हैं। तीन दशक से अधिक लंबे करियर के बाद भी उनका आकर्षण जरा भी कम नहीं हुआ है। यही वजह है कि जब भी उनका कोई नया लुक सामने आता है, वह सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बन जाता है।

    हाल ही में सामने आई तस्वीरों में माधुरी दीक्षित रॉयल ब्लू रंग की खूबसूरत कढ़ाईदार साड़ी में नजर आ रही हैं। उनका यह एथनिक लुक भारतीय पारंपरिक फैशन की खूबसूरती को बेहद शानदार तरीके से प्रस्तुत करता है। साड़ी पर की गई बारीक कारीगरी, आकर्षक बॉर्डर और संतुलित रंग संयोजन पूरे लुक को शाही स्पर्श दे रहा है। इसके साथ पहने गए पारंपरिक झुमके, कंगन और सलीकेदार हेयरस्टाइल उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं।

    माधुरी की यह तस्वीरें इस बात का प्रमाण हैं कि क्लासिक फैशन कभी पुराना नहीं होता। हल्के मेकअप और उनकी सदाबहार मुस्कान ने पूरे लुक को और भी प्रभावशाली बना दिया है। फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह अंदाज शादी, पारिवारिक समारोहों और त्योहारों के लिए बेहतरीन प्रेरणा साबित हो सकता है।

    अभिनय की बात करें तो माधुरी दीक्षित ने अपने करियर में कई यादगार फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। Tezaab, Dil, Beta, Hum Aapke Hain Koun..!, Dil To Pagal Hai और Devdas जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड की सबसे सफल अभिनेत्रियों की सूची में शामिल किया।

    समय के साथ उन्होंने खुद को लगातार नए दौर के अनुसार ढाला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उन्होंने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। The Fame Game और Maja Ma जैसे प्रोजेक्ट्स में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। हाल के वर्षों में वह नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उतनी ही लोकप्रिय बनी हुई हैं जितनी अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं।

    इन दिनों उनकी चर्चित फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है। दर्शकों और समीक्षकों ने उनके अभिनय की सराहना की है। फिल्म में उनके दमदार किरदार और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह आज भी इंडस्ट्री की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शामिल हैं।

    फैशन हो, अभिनय हो या फिर डिजिटल मनोरंजन की दुनिया, माधुरी दीक्षित हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। उनका यह नया साड़ी लुक एक बार फिर यह साबित करता है कि वह केवल बॉलीवुड की धक-धक गर्ल ही नहीं, बल्कि भारतीय फैशन और ग्लैमर जगत की सबसे प्रभावशाली स्टाइल आइकन्स में से एक हैं।

  • बॉक्स ऑफिस की चिंता आज भी बरकरार, ‘धमाल 4’ के ट्रेलर लॉन्च पर अजय देवगन ने बताया क्यों होती है घबराहट

    बॉक्स ऑफिस की चिंता आज भी बरकरार, ‘धमाल 4’ के ट्रेलर लॉन्च पर अजय देवगन ने बताया क्यों होती है घबराहट

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता Ajay Devgn इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म Dhamaal 4 को लेकर चर्चा में हैं। लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी की चौथी किस्त के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम में अभिनेता ने अपनी फिल्मों को लेकर खुलकर बात की और यह स्वीकार किया कि लंबे अनुभव के बावजूद हर नई फिल्म की रिलीज से पहले उन्हें घबराहट महसूस होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में महीनों की मेहनत और समर्पण लगा होता है, इसलिए रिलीज के समय थोड़ा दबाव और उत्सुकता स्वाभाविक होती है।

    ट्रेलर लॉन्च के दौरान मीडिया से बातचीत में अजय देवगन ने बताया कि किसी फिल्म की सफलता केवल कलाकारों के लिए नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे दल के लिए महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि जब किसी प्रोजेक्ट पर लंबे समय तक मेहनत की जाती है तो यह उम्मीद भी रहती है कि दर्शक उसे पसंद करें। यही कारण है कि रिलीज के करीब आने पर उत्साह के साथ-साथ चिंता भी बनी रहती है।

    अभिनेता ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्षों के अनुभव के बाद भी यह भावना समाप्त नहीं होती। उनके अनुसार हर फिल्म एक नई चुनौती होती है और हर बार दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में शामिल सभी लोग चाहते हैं कि उनका काम दर्शकों तक पहुंचे और उन्हें पसंद आए। इसी वजह से रिलीज के समय स्वाभाविक रूप से मानसिक दबाव महसूस होता है।

    बातचीत के दौरान अजय देवगन से बॉलीवुड में सीक्वल फिल्मों की लगातार बढ़ती लोकप्रियता को लेकर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि किसी भी सीक्वल की सफलता का सबसे बड़ा आधार उसके किरदार होते हैं। जब दर्शक किसी फिल्म के पात्रों को पसंद करने लगते हैं और उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं, तब कहानी को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि सफल फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकत उसके यादगार किरदार होते हैं।

    अजय देवगन ने उदाहरण देते हुए बताया कि दर्शक कई लोकप्रिय फिल्मों के पात्रों को उनके नाम से पहचानते हैं। यही जुड़ाव समय के साथ सीक्वल फिल्मों की मांग को बढ़ाता है। उनका मानना है कि यदि दर्शकों को पात्रों और उनकी दुनिया में रुचि बनी रहती है, तो अगली कड़ी के प्रति उत्सुकता स्वतः पैदा हो जाती है।

    ‘धमाल’ फ्रेंचाइजी का सफर वर्ष 2007 में शुरू हुआ था और पहली फिल्म को दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया था। इसके बाद आई दूसरी और तीसरी फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता हासिल की। तीसरे भाग में अजय देवगन की एंट्री हुई थी, जिसने फ्रेंचाइजी को एक नया आयाम दिया। अब चौथे भाग को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि कॉमेडी और मनोरंजन से भरपूर यह फ्रेंचाइजी भारतीय दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बना चुकी है। यही कारण है कि ‘धमाल 4’ को लेकर भी सकारात्मक माहौल बना हुआ है। ट्रेलर को मिली प्रतिक्रिया ने फिल्म के प्रति उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।

    अब दर्शकों की निगाहें फिल्म की रिलीज पर टिकी हैं। 10 जुलाई को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही ‘धमाल 4’ से निर्माताओं और कलाकारों को बड़ी उम्मीदें हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकप्रिय फ्रेंचाइजी का यह नया अध्याय बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करता है।