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  • नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर भड़के प्रवीण तारडे, बोले- नाना से बड़ा नहीं बॉलीवुड

    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर भड़के प्रवीण तारडे, बोले- नाना से बड़ा नहीं बॉलीवुड


    नई दिल्ली:
    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के कई कलाकारों की गैरमौजूदगी को लेकर मराठी अभिनेता और निर्देशक प्रवीण तारडे ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जो लोग नाना पाटेकर को अपना दोस्त मानते थे, उन्हें उनके अंतिम संस्कार में जरूर पहुंचना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्मी सितारों के नहीं आने से नाना पाटेकर की महानता कम नहीं होती। उनके मुताबिक, अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में किसानों का शामिल होना इस बात का प्रमाण था कि अभिनेता का जुड़ाव केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं था।

    नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उनके निधन की खबर से हिंदी और मराठी सिनेमा जगत में शोक की लहर फैल गई। उनका अंतिम संस्कार पुणे के पास स्थित उनके पैतृक गांव डोणजे में उनके फार्महाउस पर किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों, राजनीतिक हस्तियों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और मनोरंजन जगत की कुछ हस्तियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। हालांकि, बॉलीवुड के कई चर्चित कलाकारों की सीमित मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई।

    प्रवीण तारडे ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि नाना पाटेकर का कद किसी फिल्म उद्योग या सितारों की उपस्थिति से तय नहीं होता। उन्होंने अंतिम संस्कार में पहुंचे किसानों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से किसान नाना को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। तारडे ने किसानों के पसीने और मिट्टी से जुड़े जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए किसानों का सम्मान फिल्मी दुनिया के बड़े नामों से भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने नाना के ग्रामीण जीवन और किसानों के साथ उनके संबंधों को उनकी पहचान का अहम हिस्सा बताया।

    तारडे ने कहा कि नाना पाटेकर ने खुद को केवल बॉलीवुड के अभिनेता के रूप में पेश नहीं किया। वह अपनी पहचान किसान के रूप में भी बताते थे। इसी वजह से उनके अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी संख्या में मौजूदगी को तारडे ने खास महत्व दिया। उन्होंने कहा कि नाना का लोगों से जुड़ाव और उनके प्रति सम्मान उनकी वास्तविक विरासत को दर्शाता है। उनके मुताबिक, अभिनेता की लोकप्रियता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि अंतिम संस्कार में कितने फिल्मी सितारे पहुंचे।

    हालांकि, प्रवीण तारडे ने बॉलीवुड के कुछ लोगों की गैरमौजूदगी पर शिकायत भी जताई। उन्होंने कहा कि कम से कम उन लोगों को जरूर आना चाहिए था, जिन्हें नाना अपना दोस्त मानते थे। उन्होंने जैकी श्रॉफ और सुरेश वाडकर का उल्लेख करते हुए बताया कि ये दोनों नाना को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। तारडे ने मुंबई में किसी कम चर्चित कलाकार के निधन पर लोगों के बड़ी संख्या में पहुंचने और नाना के अंतिम संस्कार में सीमित बॉलीवुड मौजूदगी के बीच अंतर पर भी सवाल उठाए।

    नाना पाटेकर का अभिनय करियर हिंदी और मराठी सिनेमा में लंबे समय तक प्रभावशाली रहा। फिल्मों के अलावा वह किसानों और ग्रामीण समुदायों से जुड़े सामाजिक कार्यों के लिए भी पहचाने जाते थे। उनके अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी मौजूदगी ने उनके इस जुड़ाव को फिर चर्चा में ला दिया। प्रवीण तारडे की नाराजगी के बावजूद उनका कहना था कि बॉलीवुड के सितारों की गैरमौजूदगी से नाना का सम्मान कम नहीं होता। उनके लिए अभिनेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे किसान ही उनकी लोकप्रियता और लोगों के साथ उनके गहरे संबंधों की महत्वपूर्ण तस्वीर थे।

  • रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद नुसरत भरूचा ने अस्पताल से साझा की पहली तस्वीर, लिखा- पिक्चर अभी बाकी है दोस्त

    रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद नुसरत भरूचा ने अस्पताल से साझा की पहली तस्वीर, लिखा- पिक्चर अभी बाकी है दोस्त

    नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा ने रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद अस्पताल से अपनी पहली तस्वीर साझा की है। बाली में छुट्टियों के दौरान हुए हादसे में उन्हें गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद उन्हें मुंबई लाया गया और यहां उनकी सर्जरी हुई। अभिनेत्री की सेहत को लेकर चिंतित प्रशंसकों के बीच उनकी इस पोस्ट को पहला सार्वजनिक अपडेट माना जा रहा है। नुसरत ने सोशल मीडिया पर अस्पताल के कमरे से एक तस्वीर साझा की। इसके साथ उन्होंने जिंदगी को देखने के अपने नजरिए में आए बदलाव का जिक्र करते हुए लिखा, “हमेशा से सनसेट यानी सूर्यास्त के पीछे भागती रही हूं, और बस ऐसे ही… मेरा नजरिया बदल गया। लेकिन, पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।” अभिनेत्री ने इस संदेश के जरिए अपने इलाज की विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन उनकी पोस्ट से उनके प्रशंसकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    नुसरत ने शनिवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर यह तस्वीर साझा की थी। तस्वीर में अस्पताल के कमरे में एक बड़ी खिड़की के पास खाली रिक्लाइनिंग व्हीलचेयर दिखाई दे रही है। खिड़की के बाहर सूर्यास्त का दृश्य नजर आ रहा है। तस्वीर के साथ लिखे संदेश में अभिनेत्री ने सूर्यास्त को देखने के अपने पुराने शौक और हादसे के बाद बदले नजरिए का उल्लेख किया। उनका “पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त” वाला संदेश उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हादसे के बाद से प्रशंसक उनकी सेहत को लेकर लगातार चिंतित थे। ऐसे में अस्पताल से आई इस तस्वीर को उनके स्वास्थ्य से जुड़ा पहला सार्वजनिक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, अभिनेत्री ने अपनी मौजूदा स्थिति, सर्जरी के नतीजे या आगे के इलाज को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    जानकारी के अनुसार, नुसरत काम के सिलसिले में बाली गई थीं। बाद में यह यात्रा काम के साथ छुट्टियां बिताने का अवसर भी बन गई। इसी दौरान उनका एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई। उनकी टीम ने बाद में रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने की पुष्टि की थी। चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए मुंबई लाया गया, जहां उनकी सर्जरी हुई। मुंबई पहुंचने के बाद अभिनेत्री के कुछ वीडियो भी सामने आए थे, जिनमें वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर दिखाई दी थीं। इसके बाद अस्पताल से उनकी कोई तस्वीर सामने नहीं आई थी। अब उनकी नई पोस्ट से प्रशंसकों को उनके बारे में जानकारी मिली है, हालांकि उनकी रिकवरी को लेकर कोई विस्तृत चिकित्सकीय अपडेट उपलब्ध नहीं है।

    कामकाज की बात करें तो नुसरत भरूचा जल्द ही अभिनेता टाइगर श्रॉफ के साथ एक फिल्म में नजर आ सकती हैं। दोनों पहली बार किसी फिल्म में साथ काम करते दिखाई देंगे। हालांकि, इस परियोजना के शीर्षक और कलाकारों से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में अभिनेत्री की आगामी फिल्म को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। नुसरत इससे पहले भी विदेश में मुश्किल परिस्थिति का सामना कर चुकी हैं। साल 2023 में वह इजराइल में उस समय फंस गई थीं, जब वहां इजराइल-हमास युद्ध शुरू हुआ था। वह तेल अवीव में एक फिल्म महोत्सव में शामिल होने गई थीं। उस दौरान बम धमाकों और सायरन की आवाज के बीच उन्हें एक बेसमेंट में शरण लेनी पड़ी थी। भारतीय दूतावास और सरकार के प्रयासों के बाद 8 अक्टूबर 2023 को उन्हें सुरक्षित मुंबई वापस लाया गया था।

  • अमिताभ बच्चन की 7 खास आदतें, हर रविवार नंगे पैर फैंस से मिलने से लेकर दो घड़ियां पहनने तक, जानिए बिग बी की जिंदगी के दिलचस्प किस्से

    अमिताभ बच्चन की 7 खास आदतें, हर रविवार नंगे पैर फैंस से मिलने से लेकर दो घड़ियां पहनने तक, जानिए बिग बी की जिंदगी के दिलचस्प किस्से

    नई दिल्ली: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन 11 अक्टूबर को अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। शानदार अभिनय और दमदार आवाज के लिए पहचाने जाने वाले अमिताभ ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं। पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता की निजी जिंदगी से जुड़ी कुछ आदतें भी उन्हें चर्चा में रखती हैं। प्रशंसकों से मिलने का उनका खास अंदाज, लगातार ब्लॉग लिखना और काम के प्रति अनुशासन उनकी दिनचर्या के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर ऐसी ही कुछ आदतों और जीवन के अनुभवों पर नजर डालना दिलचस्प है, जिनमें प्रशंसकों के प्रति उनका जुड़ाव और मुश्किल समय में वापसी की कहानी भी शामिल है।

    अमिताभ बच्चन की सबसे चर्चित परंपराओं में से एक मुंबई स्थित उनके बंगले जलसा के बाहर प्रशंसकों से मुलाकात करना है। हर रविवार उनके चाहने वाले उनसे मिलने की उम्मीद में बंगले के बाहर इकट्ठा होते हैं। अमिताभ लंबे समय से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं और कई बार प्रशंसकों से मिलने के लिए नंगे पैर बाहर आते हैं। उनके इस अंदाज को प्रशंसकों के प्रति स्नेह और सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। इसके अलावा, अमिताभ सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं। उन्होंने अप्रैल 2008 में अपना ब्लॉग शुरू किया था, जिसके माध्यम से वह अपने विचार, अनुभव और जीवन से जुड़ी बातें साझा करते हैं। व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद ब्लॉग लेखन उनके लिए प्रशंसकों से जुड़े रहने का एक माध्यम बना हुआ है। किसी के काम की सराहना करने के लिए हाथ से पत्र लिखना और गुलदस्ता भेजना भी उनकी खास आदतों में शामिल बताया जाता है।

    अमिताभ बच्चन से जुड़ी एक अन्य दिलचस्प बात यह है कि वह दोनों हाथों से लिख सकते हैं। इस क्षमता को अंग्रेजी में एम्बिडेक्सट्रस कहा जाता है। इसके अलावा, उन्हें कई बार एक साथ दो घड़ियां पहने हुए भी देखा गया है। हालांकि, वह ऐसा किस वजह से करते हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है। उनकी दिनचर्या और फिटनेस को लेकर भी चर्चा होती रहती है। व्यस्त कार्यक्रम के बीच काम के लिए समय निकालना और अलग-अलग परियोजनाओं में सक्रिय रहना उनके कार्य अनुशासन को दर्शाता है। फिल्मों के साथ टेलीविजन कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में भी वह लगातार नजर आते रहे हैं। लंबे करियर के बाद भी विभिन्न माध्यमों पर उनकी सक्रियता बनी हुई है। उनके काम करने के तरीके और समय की पाबंदी को लेकर भी अक्सर बातें होती हैं।

    अमिताभ बच्चन के जीवन में कठिन दौर भी आया। 1990 के दशक में उनकी कंपनी अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एबीसीएल को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा था। इस मुश्किल समय के बाद उन्होंने फिल्मों में वापसी की और ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के माध्यम से टेलीविजन पर भी नई पहचान बनाई। उनका करियर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है, लेकिन उन्होंने काम जारी रखा और मनोरंजन जगत में अपनी सक्रियता बनाए रखी। उनके जीवन की यह यात्रा उनके पेशेवर संघर्ष का अहम हिस्सा है। प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता के साथ-साथ उनकी काम के प्रति प्रतिबद्धता भी चर्चा में रहती है।

    जन्मदिन के मौके पर अमिताभ बच्चन की इन आदतों और अनुभवों की चर्चा उनके व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती है। जलसा के बाहर प्रशंसकों से मुलाकात की परंपरा उनके प्रशंसकों के साथ लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को दिखाती है, जबकि ब्लॉग लेखन उन्हें अपने विचार सीधे साझा करने का अवसर देता है। दोनों हाथों से लिखने की क्षमता, एक साथ दो घड़ियां पहनने का अंदाज और हाथ से पत्र लिखकर दूसरों की सराहना करना उनकी जिंदगी से जुड़ी खास बातें हैं। वहीं, आर्थिक मुश्किलों के बाद फिल्मों और टेलीविजन में वापसी उनके लंबे पेशेवर सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

  • 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में हथियार रखने पर संजय दत्त ने मानी गलती, आज भी फैसले को लेकर है पछतावा

    1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में हथियार रखने पर संजय दत्त ने मानी गलती, आज भी फैसले को लेकर है पछतावा

    नई दिल्ली: अभिनेता संजय दत्त ने 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दौरान अपने घर में अवैध हथियार रखने के मामले को लेकर एक बार फिर अपनी गलती स्वीकार की है। उन्होंने इस फैसले पर अफसोस जताते हुए कहा कि उस समय अगर उन्होंने अपने दिल की आवाज सुनी होती, तो शायद वह ऐसा कदम नहीं उठाते। इस मामले में संजय दत्त को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था और उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ी थी। अभिनेता ने माना कि उस समय लिया गया उनका फैसला गलत था और उन्हें इसके गंभीर परिणामों का अंदाजा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि जिस देश में कोई व्यक्ति रहता है, वहां के कानूनों की जानकारी होना जरूरी है।

    शेखर सुमन के शो ‘शेखर टुनाइट’ में बातचीत के दौरान संजय दत्त ने उस घटना को याद किया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें हथियार रखने के मामले की गंभीरता का पता चला, तब उनका दिल उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए कह रहा था। इसके बावजूद उन्होंने अपने दिमाग की बात सुनी और यह सोचकर हथियार रखने का फैसला किया कि एक सप्ताह तक उन्हें अपने पास रखने में क्या नुकसान होगा। संजय दत्त ने कहा कि गलती उनकी थी और अगर उस समय उन्होंने अपने मन की चेतावनी को गंभीरता से लिया होता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। उनके मुताबिक, उस फैसले के इतने गंभीर नतीजे सामने आएंगे, इसका उन्हें पहले अंदाजा नहीं था।

    अभिनेता ने इस मामले के दौरान अपने परिवार को हुई परेशानी का भी जिक्र किया। संजय दत्त के मुताबिक, इस घटना ने उनके और उनके परिवार के लिए मुश्किल हालात पैदा कर दिए थे। कानूनी कार्रवाई के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा और कई साल तक इस मामले के परिणामों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कानूनों को समझने और उनका पालन करने की अहमियत बताई। संजय दत्त ने स्पष्ट किया कि उस समय लिया गया फैसला उनकी गलती थी और आज भी उन्हें उसका पछतावा है। उनके बयान से यह भी सामने आया कि वह उस घटना को अपने जीवन के ऐसे फैसले के रूप में देखते हैं, जिसके परिणाम उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक गंभीर साबित हुए।

    संजय दत्त ने बातचीत में अपने पिता सुनील दत्त से जुड़ा भावुक पल भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब पुलिस उन्हें हथकड़ी पहना रही थी, तब उनके पिता रोने लगे थे। बेटे के साथ इस तरह की कार्रवाई होते देख सुनील दत्त भावुक हो गए थे। संजय दत्त ने उस समय अपने पिता को संभालने की कोशिश की और उन्हें भरोसा दिलाया कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है तथा उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। हालांकि, पिता को इस स्थिति में देखकर संजय दत्त भी भावुक हो गए थे। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें खुद को मजबूत दिखाना पड़ा, ताकि उनके पिता को हिम्मत दे सकें। यह घटना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी कठिन रही।

    कामकाज की बात करें तो संजय दत्त फिल्म ‘धुरंधर’ में चौधरी असलम की भूमिका निभा चुके हैं। इस फिल्म में उनके अभिनय को दर्शकों का प्यार मिला। अब वह ‘खलनायक रिटर्न्स’ और अजय देवगन की फिल्म ‘रेंजर’ में नजर आने वाले हैं। पुराने मामले को याद करते हुए संजय दत्त ने अपनी गलती स्वीकार की और कानून की जानकारी रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनके बयान में उस फैसले को लेकर पछतावा और उसके गंभीर परिणामों की स्वीकारोक्ति प्रमुख रही।

  • नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार देर रात क्यों हुआ? बेटे मल्हार ने बताई वजह, सुबह निधन के बाद लिया था फैसला

    नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार देर रात क्यों हुआ? बेटे मल्हार ने बताई वजह, सुबह निधन के बाद लिया था फैसला

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा में निधन हो गया। 8 अक्टूबर की सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और उनकी पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना को अंतिम विदाई देने के लिए परिवार के सदस्यों के साथ उनके करीबी और फिल्म जगत से जुड़े कई लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार देर रात किए जाने को लेकर जब मल्हार से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसकी वजह बताई।

    मल्हार पाटेकर से पूछा गया कि अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया, जबकि कई अन्य लोग और फिल्म जगत की हस्तियां भी नाना को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचना चाहती थीं। सवाल में यह भी कहा गया कि बॉलीवुड के कई लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, ऐसे में उसी रात अंतिम विदाई देने की क्या जरूरत थी। इस पर मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार के फैसले के पीछे ऐसी कोई खास वजह नहीं थी, जैसा सवाल में पूछा जा रहा था।

    मल्हार ने बताया कि नाना पाटेकर के साथ यह घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई विशेष कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार रात में ही करना जरूरी था या अगले दिन नहीं किया जा सकता था। परिवार ने परिस्थितियों को देखते हुए उसी दिन उन्हें विदाई देने का निर्णय लिया। इस तरह मल्हार ने देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया।

    नाना पाटेकर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग शामिल हुए। नाना के चाहने वाले और करीबी भी उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा।

    नाना पाटेकर की तबीयत गोवा स्थित उनके फ्लैट में बिगड़ी थी। जानकारी के मुताबिक, उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ था। इसके बाद उनके बेटे मल्हार के अनुसार, घर पर मेडिकल टीम बुलाई गई। टीम जब पहुंची, तब नाना बेहोशी की हालत में थे। उन्हें बचाने की कोशिश की गई और फिर तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए प्रयास जारी रखे।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर नाना पाटेकर को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। मल्हार के बयान के अनुसार, सुबह घटना होने और काफी समय बीत जाने के कारण परिवार ने देर रात अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों ने नाना को श्रद्धांजलि दी और उन्हें याद किया।

  • नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, 75 साल की उम्र में हुआ निधन

    नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, 75 साल की उम्र में हुआ निधन

    नई दिल्ली: हिंदी और मराठी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा में उनके निधन के बाद गुरुवार, 8 अक्टूबर की देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना पाटेकर के अंतिम दर्शन और विदाई के लिए उनके परिवार के सदस्यों, करीबी लोगों और फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। हालांकि, देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर सवाल भी उठे। इस पर उनके बेटे मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार ने किसी विशेष वजह से अंतिम संस्कार में देरी नहीं की थी। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर के निधन की घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसी कारण परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।

    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे मल्हार से पूछा गया कि जब फिल्म जगत के कई लोग और अन्य परिचित उन्हें अंतिम विदाई देना चाहते थे, तो अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया। सवाल में यह भी कहा गया कि देर होने के कारण फिल्म उद्योग से जुड़े कई लोग अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंच सके। इस पर मल्हार ने कहा कि ऐसी कोई विशेष बात नहीं थी कि अंतिम संस्कार देर रात ही करना जरूरी था। उन्होंने बताया कि परिवार के सामने ऐसा कोई कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार अगले दिन किया जाता। चूंकि घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था, इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि अंतिम विदाई का समय परिवार के फैसले के अनुसार तय किया गया था।

    नाना पाटेकर को अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान मौजूद लोगों ने श्रद्धांजलि दी और ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, ‘नटसम्राट’ के लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग पहुंचे। इन लोगों ने नाना पाटेकर को अंतिम विदाई दी। उनके लंबे फिल्मी करियर और अभिनय के कारण उन्हें जानने वाले लोगों के लिए उनका निधन एक बड़ी क्षति है। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    नाना पाटेकर का निधन गोवा स्थित उनके फ्लैट में सीने में तेज दर्द होने के बाद हुआ। जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत बिगड़ने पर घर पर मेडिकल टीम पहुंची। उस समय वह बेहोशी की हालत में मिले। उन्हें बचाने के लिए चिकित्सकीय प्रयास किए गए और इसके बाद तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश जारी रखी। बताया गया कि डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नाना पाटेकर 75 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया और देर रात उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके बेटे मल्हार ने अंतिम संस्कार के समय को लेकर उठे सवालों पर परिवार का पक्ष स्पष्ट किया।

  • नाना पाटेकर ने किसानों के परिवारों के लिए छोड़ दी थी 1.5 करोड़ की कार, मदद के लिए बांटने को दिए थे चेक

    नाना पाटेकर ने किसानों के परिवारों के लिए छोड़ दी थी 1.5 करोड़ की कार, मदद के लिए बांटने को दिए थे चेक

    नई दिल्ली: अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर के साथ उनके अभिनय करियर के अलावा सामाजिक कार्यों से जुड़े कई किस्से भी चर्चा में हैं। किसानों और उनके परिवारों की मदद से जुड़ा ऐसा ही एक प्रसंग सामने आया है। लेखक रणबीर पुष्प ने एक बातचीत में नाना पाटेकर के बारे में बताते हुए कहा था कि उनके बारे में लोगों ने कई बार गलत राय बनाई। उन्होंने उन दावों को भी गलत बताया था, जिनमें नाना पाटेकर के गुस्सैल स्वभाव की वजह से प्रोड्यूसर्स को नुकसान होने की बात कही जाती थी। इसी बातचीत में उन्होंने नाना के किसानों के प्रति संवेदनशील रवैये से जुड़ा एक किस्सा साझा किया था।

    रणबीर पुष्प के मुताबिक, एक दिन नाना पाटेकर न्यूज देख रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों की आत्महत्या से जुड़ी खबर देखी, जिसमें एक पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ था। उस समय नाना अगले दिन करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार खरीदने वाले थे और खरीदारी से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। लेकिन किसानों के परिवार की स्थिति देखने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने तुरंत अपने दोस्त को फोन किया और कहा कि 15-15 हजार रुपये के चेक बनवाकर सभी किसानों को बांट दिए जाएं। इस किस्से के जरिए उनके किसानों के प्रति लगाव और जरूरतमंद परिवारों की मदद करने की सोच का उल्लेख किया गया था।

    नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे और उन्होंने NAAM फाउंडेशन की स्थापना की थी। किसानों की परेशानियों और उनके परिवारों की स्थिति को लेकर उनकी चिंता का जिक्र कई बार किया गया है। रणबीर पुष्प ने इसी संदर्भ में कहा था कि जो व्यक्ति किसानों के दुख को देखकर अपनी 1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने का फैसला बदल सकता है, वह किसी का बुरा कैसे सोच सकता है। किसानों के परिवारों की मदद से जुड़ा यह किस्सा नाना पाटेकर के सामाजिक सरोकारों को सामने रखता है।

    नाना पाटेकर के गुस्से से जुड़ा एक और किस्सा भी इसी बातचीत में बताया गया था। रणबीर पुष्प के मुताबिक, एक बार नाना ने किसी व्यक्ति को कार से प्लास्टिक की बोतल बाहर फेंकते हुए देखा। उन्होंने अपनी कार रोककर उस बोतल को उठाया। इसके बाद उन्होंने उस व्यक्ति की कार रुकवाई और शीशा नीचे करने को कहा। नाना ने उससे सवाल किया कि देश को साफ रखने की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने गांधीजी का जिक्र करते हुए कहा था कि गांधीजी चले गए हैं, लेकिन लोग अब भी इस धरती पर हैं और एक नागरिक के तौर पर देश को साफ रखना उनकी जिम्मेदारी है। इस घटना में उनका गुस्सा सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर था।

    नाना पाटेकर ने 75 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की और करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर दिया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। उनके निधन के साथ हिंदी और मराठी सिनेमा के एक चर्चित अभिनेता का करियर समाप्त हुआ। नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अभिनय की शुरुआत की और आगे चलकर हिंदी तथा मराठी फिल्मों में पहचान बनाई। उन्होंने अपने करियर में तीन नेशनल अवॉर्ड जीते थे और 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘वेलकम’, ‘अपहरण’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके काम को जाना जाता है।

  • शाहरुख खान की ‘किंग’ में करीना कपूर की स्पेशल एंट्री, ‘डैडी कूल’ गाने से 15 साल बाद साथ आएगी जोड़ी

    शाहरुख खान की ‘किंग’ में करीना कपूर की स्पेशल एंट्री, ‘डैडी कूल’ गाने से 15 साल बाद साथ आएगी जोड़ी

    नई दिल्ली: शाहरुख खान की आगामी एक्शन फिल्म ‘किंग’ को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म से जुड़ा नया अपडेट करीना कपूर को लेकर सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीना कपूर फिल्म में स्पेशल भूमिका में नजर आ सकती हैं और शाहरुख खान के साथ एक खास गाने में स्क्रीन शेयर कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो करीना कपूर और शाहरुख खान करीब 15 साल बाद एक साथ बड़े पर्दे पर दिखाई देंगे। दोनों की जोड़ी इससे पहले कई फिल्मों में नजर आ चुकी है और उनकी साथ में पिछली फिल्म 2011 में रिलीज हुई ‘रा.वन’ थी।

    बताया जा रहा है कि ‘किंग’ में करीना कपूर एक डांसर नंबर का हिस्सा बनेंगी। इस गाने का नाम ‘डैडी कूल’ बताया जा रहा है, जिसे बड़े स्तर पर फिल्माए जाने की तैयारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, करीना कपूर ने इस गाने की शूटिंग के लिए कथित तौर पर पांच दिन का समय दिया है। गाने की शूटिंग इसी महीने के अंत में दक्षिण अफ्रीका में होने की बात कही जा रही है। गाने को खास अंदाज में तैयार किया जा रहा है और निर्माताओं की कोशिश इसे फिल्म के यादगार हिस्सों में शामिल करने की है।

    ‘डैडी कूल’ गाने में शाहरुख खान और करीना कपूर का ऐसा अवतार देखने को मिलने की बात कही जा रही है, जिसे दर्शकों ने पहले नहीं देखा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, गाने में एक भारतीय और एक अंतरराष्ट्रीय कलाकार का सहयोग भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कलाकार और गायक से जुड़ी जानकारी फिलहाल गोपनीय रखी गई है। इस गाने को सचिन-जिगर ने तैयार किया है और इसकी शूटिंग बड़े पैमाने पर करने की तैयारी की जा रही है।

    करीना कपूर और शाहरुख खान इससे पहले ‘कभी खुशी कभी गम’ और ‘डॉन’ जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने इन फिल्मों में देखा है। इसके बाद दोनों ‘रा.वन’ में साथ नजर आए थे, जो 2011 में रिलीज हुई थी। ऐसे में ‘किंग’ में उनकी वापसी होती है तो यह करीब 15 साल बाद दोनों का स्क्रीन रीयूनियन होगा। फिल्म में करीना की मौजूदगी और शाहरुख के साथ उनके गाने को लेकर अभी रिपोर्ट्स के आधार पर ही जानकारी सामने आई है।

    ‘किंग’ का सह-लेखन और निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण गौरी खान, सिद्धार्थ आनंद और ममता आनंद मिलकर कर रहे हैं। फिल्म रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और मारफ्लिक्स पिक्चर्स के बैनर तले बनाई जा रही है। फिल्म में शाहरुख खान के अलावा सुहाना खान, दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, रानी मुखर्जी, जयदीप अहलावत, अरशद वारसी और राघव जुयाल जैसे कलाकार नजर आएंगे। ‘किंग’ 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

  • संजय दत्त के विवादित बयानों पर फिर बवाल, जेल से लेकर शांति और राजनीति तक इन मौकों पर घिरे अभिनेता

    संजय दत्त के विवादित बयानों पर फिर बवाल, जेल से लेकर शांति और राजनीति तक इन मौकों पर घिरे अभिनेता


    नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में शेखर सुमन के शो में गांधी जयंती विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत में शांति को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि देश के लोग बेहद अच्छे और बड़े दिल वाले हैं, लेकिन उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई और आलोचकों ने अभिनेता को घेर लिया। इसके बाद संजय दत्त ने पोस्ट कर सफाई दी कि उनकी बात एक स्क्रिप्टेड, हल्की-फुल्की और हास्यपूर्ण बातचीत के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

    यह पहली बार नहीं है जब संजय दत्त अपने शब्दों को लेकर विवादों में आए हों। सितंबर 2026 में महाराष्ट्र के एक कार्यक्रम के दौरान परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बोलने को कहा था। इस पर संजय दत्त ने मजाकिया अंदाज में अपनी येरवडा जेल की सजा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जेल में भी मराठी नहीं सीखी। वीडियो सामने आने के बाद उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई। मामला बढ़ने पर प्रताप सरनाईक ने बताया कि अभिनेता ने फोन करके स्पष्टीकरण दिया और कहा कि अगर उनके मजाक से कोई गलत संदेश गया हो तो वह माफी मांगते हैं। इससे पहले 2017 में फिल्म ‘भूमि’ के प्रमोशन के दौरान बेटी त्रिशाला दत्त को लेकर भी उन्होंने ऐसी टिप्पणी की थी, जिस पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा था कि अगर त्रिशाला फिल्म इंडस्ट्री में आना चाहती हैं तो उन्हें हिंदी भी सीखनी होगी। इसी बातचीत में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि त्रिशाला अभिनेत्री बनना चाहती थीं और वह उनकी टांगें तोड़ देना चाहते थे।

    साल 2012 में अमीषा पटेल से जुड़ा एक मामला भी चर्चा में रहा। एक समारोह में संजय दत्त ने उनके पहनावे को बहुत रिवीलिंग माना और उनसे कपड़े ढकने के लिए कहा। बाद में उनके दुपट्टे से उनका शरीर ढक दिया। इस पर सफाई देते हुए दत्त की तरफ से कहा गया कि वह अमीषा को बहन की तरह मानते हैं और इसी भावना से उन्होंने ऐसा किया था। 2007 में ‘कॉफी विद करण’ के दौरान महिलाओं के साथ संबंधों की संख्या को लेकर दिया गया उनका जवाब भी काफी चर्चित हुआ था। जब उनसे 50, 100, 150, 200 या उससे ज्यादा का विकल्प पूछा गया तो उन्होंने ‘ज्यादा’ कहा था। इसके बाद तीन इच्छाओं के सवाल पर उन्होंने पैसा, आजादी और महिलाएं बताई थीं। 2018 में फिल्म ‘संजू’ में भी उनकी जिंदगी से जुड़ी महिलाओं की संख्या का संदर्भ आया, जिसके बाद उनकी निजी जिंदगी को लेकर बहस हुई।

    साल 2009 में प्रतापगढ़ में समाजवादी पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में दी गई संजय दत्त की स्पीच भी विवादों में रही थी। तत्कालीन बसपा सरकार के दौर में सपा उम्मीदवार अक्षय प्रताप के समर्थन में सभा के दौरान उन्होंने जनता को ‘जादू की झप्पी’ देने की बात कही थी और कहा था कि मौका मिलने पर वह मायावती को भी ऐसा उपहार देना चाहेंगे। इस बयान पर बवाल हुआ और अभिनेता पर महिला को लेकर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगा। इसके अलावा 1993 के मुंबई बम धमाका मामले के दौरान उनके पिता सुनील दत्त से हुई बातचीत का भी जिक्र मिलता है। संजय दत्त के मुताबिक, पुलिस के सामने हथियार रखने की बात स्वीकार करने के बाद उन्होंने पिता से कहा था कि उनकी रगों में मुस्लिम खून है और वह शहर में हो रही घटनाओं को बर्दाश्त नहीं कर सके। यह सुनकर सुनील दत्त बेहद परेशान हुए थे।

    विवादित बयानों के मामले में संजय दत्त अकेले बॉलीवुड अभिनेता नहीं हैं। आमिर खान ने 2015 में देश में बढ़ती असहिष्णुता को लेकर अपनी पत्नी किरण राव की चिंता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि किरण ने भारत छोड़ने की बात तक पूछी थी और उन्हें अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर डर लगता था। इसके बाद आमिर की काफी आलोचना हुई और उन्हें देशद्रोही तक कहा गया। इसी साल शाहरुख खान ने भी असहिष्णुता पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और धार्मिक असहिष्णुता सबसे बड़ा अपराध है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर बवाल हुआ और उन्हें पाकिस्तान चले जाने जैसी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। बाद में शाहरुख ने कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था। 2018 में नसीरुद्दीन शाह ने अपने बच्चों को लेकर चिंता जताते हुए धर्म और भीड़ हिंसा से जुड़ी टिप्पणी की थी, जिसके बाद उनकी भी आलोचना हुई थी।

  • जावेद अख्तर ने फिल्म इंडस्ट्री को घेरने वालों को दिया जवाब, बोले समाज जैसा होगा सिनेमा भी वैसा ही बनेगा

    जावेद अख्तर ने फिल्म इंडस्ट्री को घेरने वालों को दिया जवाब, बोले समाज जैसा होगा सिनेमा भी वैसा ही बनेगा


    नई दिल्ली। जावेद अख्तर अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं और इस बार उन्होंने फिल्मों में बढ़ती बोल्डनेस और वल्गर गानों को लेकर अपनी बात रखी है। फिल्म इंडस्ट्री पर अश्लील या आपत्तिजनक गाने बनाने के आरोप लगाने वालों को जवाब देते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि सिनेमा समाज से अलग नहीं है। उनके मुताबिक जिस तरह का समाज होगा उसी तरह का मनोरंजन भी देखने को मिलेगा। उन्होंने इस बहस का जिम्मेदार केवल फिल्म इंडस्ट्री को मानने के बजाय दर्शकों की पसंद पर भी सवाल उठाया।

    एक इंटरव्यू के दौरान जावेद अख्तर से सवाल किया गया कि सिनेमा अक्सर यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से क्यों बचता है कि जब समाज सुधरेगा तब अच्छा कंटेंट बनेगा। इस सवाल के जवाब में उन्होंने सिनेमा की तुलना समाज की नब्ज से की। उन्होंने कहा कि अगर शरीर में बुखार है तो नब्ज में भी उसका असर दिखाई देगा। इसी तरह समाज में जिस तरह की प्रवृत्तियां मौजूद होंगी उनका असर फिल्मों और मनोरंजन की दुनिया में भी नजर आएगा।

    जावेद अख्तर ने अपनी बात समझाने के लिए पुराने दौर की फिल्मों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इसी समाज में दो बीघा जमीन बंदिनी सुजाता हीरा मोती और मदर इंडिया जैसी फिल्मों का निर्माण हुआ था। इन फिल्मों को दर्शकों ने पसंद भी किया। ऐसे में उनके मुताबिक सवाल यह होना चाहिए कि उसी समाज में समय के साथ ऐसी फिल्मों की जगह कुछ अलग तरह के कंटेंट ने कैसे बना ली।

    बोल्ड गानों को लेकर उन्होंने खास तौर पर दर्शकों की भूमिका पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि किसी विवादित या अश्लील गाने को बनाने में केवल एक व्यक्ति शामिल नहीं होता। उसे लिखने से लेकर संगीत तैयार करने गाने उसे फिल्माने और रिलीज करने तक कई लोग जुड़े होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर कुछ लोग ऐसा कंटेंट तैयार करते हैं तो समस्या उतनी बड़ी नहीं है लेकिन जब करोड़ों लोग उसी कंटेंट को पसंद करके उसे सुपरहिट बना देते हैं तब सवाल समाज की पसंद पर उठता है।

    जावेद अख्तर ने चोली के पीछे क्या है जैसे चर्चित गाने का उदाहरण देते हुए पूछा कि ऐसे गानों को फिल्म इंडस्ट्री अकेले हिट नहीं करा सकती। दर्शकों की पसंद और प्रतिक्रिया ही किसी गाने को लोकप्रिय बनाती है। उनके मुताबिक अगर दर्शक ऐसे कंटेंट को स्वीकार नहीं करेंगे तो उसे बनाने वालों के लिए भी उसे बार बार पेश करने की वजह कम हो जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों की पसंद का असर गंभीर और अच्छे सिनेमा पर भी पड़ता है। जावेद अख्तर ने मशहूर फिल्ममेकर श्याम बेनेगल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने शानदार और विचारोत्तेजक फिल्में बनाईं लेकिन सवाल यह है कि कितने दर्शकों ने उन्हें देखा और बड़े स्तर पर सफल बनाया।

    जावेद अख्तर की इस टिप्पणी ने एक बार फिर सिनेमा और समाज के रिश्ते को लेकर बहस शुरू कर दी है। उनका कहना है कि फिल्मों में बदलाव की चर्चा करते समय केवल कलाकारों और निर्माताओं को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। दर्शकों की पसंद भी तय करती है कि आने वाले समय में सिनेमा किस दिशा में आगे बढ़ेगा।