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  • गुफानुमा खदानों का अंत शहडोल में अवैध कोयला माफिया पर बड़ी कार्रवाई

    गुफानुमा खदानों का अंत शहडोल में अवैध कोयला माफिया पर बड़ी कार्रवाई

    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में अवैध कोयला खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है लंबे समय से जानलेवा खतरा बनी गुफानुमा सुरंगों पर आखिरकार बुलडोजर चला दिया गया यह कार्रवाई न सिर्फ अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए की गई बल्कि स्थानीय लोगों और मवेशियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी बेहद जरूरी मानी जा रही थी

    जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के बटुरा और टिकुरीटोला इलाकों में जमीन के नीचे बनाई गई ये खदानें किसी हादसे का इंतजार करती नजर आ रही थीं संकरी और गहरी सुरंगों के जरिए अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा था जो कभी भी धंस सकती थीं और बड़ी जनहानि का कारण बन सकती थीं

    लगातार मिल रही शिकायतों और बढ़ते खतरे को देखते हुए अमलाई पुलिस और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की टीम ने संयुक्त अभियान चलाया मौके पर पहुंची टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से करीब पांच गुफानुमा सुरंगों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और उन्हें मिट्टी से पाटकर बंद कर दिया गया

    कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र को पुलिस की निगरानी में सुरक्षित किया गया और खुले गड्ढों को भी भर दिया गया ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना की आशंका को खत्म किया जा सके प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है

    बताया जा रहा है कि इन अवैध खदानों को पहले भी कई बार बंद कराया जा चुका है लेकिन खनन माफिया हर बार नए तरीके से सुरंगें खोदकर फिर से कोयला निकालना शुरू कर देते हैं यही वजह है कि इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए व्यापक कार्रवाई की है

    यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि अवैध खनन सिर्फ कानून का उल्लंघन ही नहीं बल्कि लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा है ऐसे में जरूरी है कि इस तरह की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके

  • अब सिर्फ CJI ही सुनेंगे अर्जेंट केस सुप्रीम कोर्ट का बड़ा नियम बदलाव

    अब सिर्फ CJI ही सुनेंगे अर्जेंट केस सुप्रीम कोर्ट का बड़ा नियम बदलाव


    नई दिल्ली । देश की न्यायिक व्यवस्था में एक अहम बदलाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई को लेकर नया नियम लागू किया है इस नए निर्देश के मुताबिक अब ऐसे मामले जिनमें तुरंत सुनवाई जरूरी हो और जिन्हें नियमित सूचीबद्ध प्रक्रिया का इंतजार नहीं कराया जा सकता उनका उल्लेख केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI के समक्ष ही किया जाएगा

    इस फैसले के बाद अब किसी भी अन्य जज या पीठ के सामने ऐसे मामलों को पेश करने की अनुमति नहीं होगी भले ही मुख्य न्यायाधीश किसी संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे हों यह बदलाव 6 अप्रैल को जारी एक आधिकारिक परिपत्र के माध्यम से लागू किया गया है

    पहले की व्यवस्था में यह प्रावधान था कि यदि मुख्य न्यायाधीश उपलब्ध नहीं हैं या किसी अन्य महत्वपूर्ण पीठ में व्यस्त हैं तो अत्यावश्यक मामलों को उच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठ जज के सामने उल्लेख किया जा सकता था इससे मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती थी लेकिन अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया गया है

    नए नियम के तहत अदालत संख्या 1 यानी मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में ही ऐसे मामलों का उल्लेख किया जाएगा और किसी अन्य पीठ के समक्ष इसे प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं होगी इस कदम को न्यायिक प्रक्रिया में एकरूपता और स्पष्टता लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है

    इस बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया उन्होंने विभिन्न राज्यों में न्यायिक परिसरों के शिलान्यास के दौरान कहा कि देशभर में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है

    उन्होंने यह भी कहा कि संविधान निर्माताओं ने न्याय तक आसान पहुंच को बेहद महत्वपूर्ण माना था और इसी सोच के तहत हर राज्य में उच्च न्यायालय की स्थापना को संवैधानिक जिम्मेदारी बनाया गया उनका मानना है कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करना केवल कानूनी जरूरत नहीं बल्कि लोकतंत्र के प्रति एक गंभीर प्रतिबद्धता भी है सुप्रीम कोर्ट का यह नया नियम न्यायिक कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव माना जा रहा है अब देखना यह होगा कि इससे अत्यावश्यक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया कितनी प्रभावी और तेज हो पाती है

  • सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान

    सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान


    शाजापुर । मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ते सड़क हादसे एक बार फिर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं और ताजा मामला आगर मालवा जिले से सामने आया है जहां तेज रफ्तार का कहर एक और जान ले गया। सुसनेर से कुरावर जा रही एक निजी यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई जिससे मौके पर अफरा तफरी और चीख पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि एक दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार यह बस सुसनेर से कुरावर की ओर जा रही थी तभी बड़ागांव के पास चालक बस पर नियंत्रण खो बैठा और वाहन सड़क किनारे पलट गया। बस के पलटते ही यात्रियों में चीख पुकार मच गई और कई लोग अंदर ही फंस गए। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और स्थानीय लोगों की मदद से बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया।

    घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को नलखेड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो पाई है और पुलिस उसकी शिनाख्त करने में जुटी हुई है।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में बस की तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है हालांकि तकनीकी खराबी या अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि यातायात नियमों का पालन और वाहनों की नियमित जांच बेहद जरूरी है। खासकर निजी बसों में ओवरस्पीडिंग और लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाएं आम होती जा रही हैं जो यात्रियों की जान के लिए खतरा बन रही हैं।

    जरूरत इस बात की है कि प्रशासन सख्ती दिखाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और लोगों में भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए ताकि इस तरह के दर्दनाक हादसों को रोका जा सके। फिलहाल इस दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है और लोग घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • Punjab: जालंधर में AAP नेता लक्की ओबेरॉय की गोली मार कर हत्या, गुरुद्वारे के बाहर निकलते समय हुआ हमला

    Punjab: जालंधर में AAP नेता लक्की ओबेरॉय की गोली मार कर हत्या, गुरुद्वारे के बाहर निकलते समय हुआ हमला


    नई दिल्ली ।पंजाब के जालंधर में आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता लक्की ओबेरॉय की 6 फरवरी की सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई. यह सनसनीखेज वारदात मॉडल टाउन इलाके में स्थित एक गुरुद्वारे के बाहर उस समय हुईजब लक्की ओबेरॉय अरदास के बाद बाहर निकलकर अपनी कार में बैठने वाले थे. तभी पहले से घात लगाए बैठे 2 अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गयाजहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अचानक हुई इस फायरिंग से इलाके में अफरा-तफरी मच गई. गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे. घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मोटरसाइकिल पर सवार होकर मौके से फरार हो गए.
    पुलिल कर रही है जांच
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी गई है. रुद्वारे और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही हैताकि हमलावरों की पहचान की जा सके कि कौन लोग थे और लक्की को क्यों निशाना बनाया गया. इस हत्या के बाद पुलिस अपनी जांच का दायरा कई पहलुओं तक बढ़ा रही है. पुरानी रंजिश से लेकर किसी बदमाश गैंग द्वारा वारदात को अंजाम देने या जिम्मेदारी लेने के एंगल तकहर संभावित कारण की गहन जांच की जा रही है.

    आम नागरिकों के लिए क्या उम्मीद बची- कांग्रेस

    पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने राज्य में कानून-व्यवस्था की विफलता के लिए आम आदमी पार्टीसरकार को जिम्मेदार ठहराया है. हत्या की खबर सामने आते ही बाजवा ने एक्स पर पोस्ट कर कहाजालंधर के एक गुरुद्वारे के बाहर आप नेता लकी ओबेरॉय की दिनदहाड़े हुई चौंकाने वाली हत्या ने इस भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है. अगर सत्ताधारी दल के नेता ही सुरक्षित नहीं हैंतो आम नागरिकों के लिए क्या उम्मीद बची है? उन्होंने आगे सवाल कियापंजाब आज भयगिरोह हिंसा और प्रशासनिक गतिरोध की चपेट में हैजबकि AAP सरकार जनसंपर्क और बहानेबाजी में व्यस्त है. मुख्यमंत्री भगवंत मान को जवाब देना होगाइस पूर्ण व्यवस्था के पतन के लिए कौन जिम्मेदार है?

  • सिनेमा जगत को बड़ा झटका: साउथ एक्टर कमल रॉय ने 54 की उम्र में तोड़ा दम.

    सिनेमा जगत को बड़ा झटका: साउथ एक्टर कमल रॉय ने 54 की उम्र में तोड़ा दम.


    नई दिल्‍ली । साउथ फिल्म इंडस्ट्री के लिए आज का दिन एक दुखद खबर लेकर आया है। प्रसिद्ध अभिनेता कमल रॉय का 54 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की वजह दिल का दौरा बताया गया है। कमल रॉय ने फिल्मों में अक्सर खलनायक की भूमिका निभाई और अपनी दमदार एक्टिंग के लिए जाने जाते थे। वे तीन बहनों के इकलौते भाई थे, जिनमें से सभी साउथ फिल्मों की चर्चित एक्ट्रेस हैं। इस मामले में फैन्स और इंडस्ट्री के लोग शोक व्यक्त कर रहे हैं। उनके निधन से साउथ सिनेमा में शोक की लहर है, क्योंकि कमल रॉय ने अपनी फिल्मों और स्क्रीन प्रेजेंस से कई दर्शकों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

    दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत
    अभिनेता कमल रॉय का निधन दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ। 54 साल के कमल रॉय ने अपनी अंतिम सांसें चेन्नई स्थित अपने घर में लीं। खबरों के मुताबिक, उनका निधन अचानक हुआ और इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। अभी तक उनके परिवार की ओर से अंतिम संस्कार या श्रद्धांजलि कार्यक्रम को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। कमल रॉय की फिल्मी करियर और उनके योगदान को याद करते हुए फैन्स और फिल्म जगत के लोग सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

    तीन मशहूर बहनों के इकलौते भाई
    कमल रॉय का संबंध साउथ फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने फिल्मी परिवार से था। उनकी बहनें उर्वशी, कल्पना और कलारंजिनी साउथ सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेसेस में शुमार हैं। परिवार में उनका एक और भाई भी था, प्रिंस, जिनका कुछ साल पहले निधन हो गया। फिल्मी परिवेश में जन्म लेने के बावजूद कमल रॉय ने अपने अभिनय और भूमिकाओं से अपनी अलग पहचान बनाई। चाहे खलनायक की भूमिका हो या इंटेंस ड्रामा, उन्होंने हर किरदार में अपनी छाप छोड़ी और दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। उनकी बहनों के साथ यह फिल्मी कनेक्शन और उनके व्यक्तिगत अभिनय करियर ने उन्हें साउथ सिनेमा का एक अहम चेहरा बना दिया।

    कमल रॉय का अभिनय सफर
    कमल रॉय ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत टीवी सीरियल युवजनोत्सवम से की थी, जिसने उन्हें अभिनय की दुनिया में पहला मंच दिया। इसके बाद उन्होंने मलयालम सिनेमा में कई यादगार फिल्मों में काम किया। उनके करियर की हिट फिल्मों में कोलीलक्कम, किंगिनी, सयुज्यम, मंजू, कल्याण सौगंधिकम, वचलम, शोभनम, द किंग मेकर और लीडर शामिल हैं। मलयालम फिल्मों में अपनी सफलता के बाद कमल रॉय ने साउथ की अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी अभिनय किया और दर्शकों के बीच अपनी अलग छवि बनाई।

  • बांग्लादेश संकट के बीच पाकिस्तान की गीदड़भभकी, इशाक डार बोले– पानी रोकना युद्ध की कार्रवाई के बराबर

    बांग्लादेश संकट के बीच पाकिस्तान की गीदड़भभकी, इशाक डार बोले– पानी रोकना युद्ध की कार्रवाई के बराबर


    नई दिल्ली
    /इस्लामाबाद:बांग्लादेश में जारी राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखे बयान देकर माहौल गरमाने की कोशिश की है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत पर सिंधु जल संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि पानी की आपूर्ति रोकी जाती है तो इसे युद्ध की कार्रवाई के तौर पर देखा जाएगा।इशाक डार ने यह बयान शुक्रवार 19 दिसंबर को मीडिया से बातचीत के दौरान दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान ने चिनाब नदी के जल प्रवाह में बदलाव को लेकर भारत से औपचारिक रूप से स्पष्टीकरण मांगा है।

    भारत संधि को कमजोर कर रहा है

    डार ने आरोप लगाया कि भारत लगातार 1960 की सिंधु जल संधि को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहाहमने इस साल अप्रैल में भारत की ओर से संधि से एकतरफा हटने जैसे कदम देखे लेकिन अब जो हो रहा है वह समझौते के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला है। इसका असर न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ जाएगी।
    पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री का कहना था कि भारत की ये कार्रवाइयां केवल तकनीकी मुद्दा नहीं हैं बल्कि इसके गंभीर रणनीतिक और मानवीय परिणाम हो सकते हैं।

    पहलगाम हमले के बाद बदले हालात

    गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े और दंडात्मक कदम उठाए थे। इन्हीं में से एक कदम था सिंधु जल संधि को स्थगित करना।यह संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई थी जो भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। दशकों से यह संधि दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद कायम रही है लेकिन हालिया घटनाओं ने इसे फिर विवाद के केंद्र में ला दिया है।

    कृषि और आजीविका पर खतरे का दावा

    इशाक डार ने दावा किया कि भारत द्वारा किए जा रहे कथित जल प्रवाह में हेरफेर के कारण पाकिस्तान के सिंधु आयुक्त को अपने भारतीय समकक्ष को पत्र लिखकर जवाब मांगना पड़ा है।उन्होंने कहा कि कृषि चक्र के अहम समय में पानी के प्रवाह में बदलाव पाकिस्तान के किसानों खाद्य सुरक्षा और आम नागरिकों की आजीविका के लिए सीधा खतरा है।डार के मुताबिक सिंधु बेसिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उसमें किसी भी तरह का असंतुलन गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

    बाढ़ और सूखे का खतरा

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने संधि के तहत जरूरी जल विज्ञान संबंधी डेटा साझा करना पूर्व सूचना देना और संयुक्त निगरानी तंत्र को लगभग बंद कर दिया है।उनका कहना है कि इससे पाकिस्तान को अचानक बाढ़ या लंबे सूखे जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।इशाक डार ने चेतावनी भरे लहजे में कहापानी की आपूर्ति को हथियार बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इसे युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।

    चिनाब में पानी छोड़े जाने से बढ़ा विवाद

    पाकिस्तान की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि भारत ने हाल ही में बिना पूर्व सूचना के चिनाब नदी में पानी छोड़ा जिससे पाकिस्तान में बाढ़ जैसे हालात की आशंका पैदा हो गई। इस कदम के बाद इस्लामाबाद में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई।
    विश्लेषकों का मानना है कि आंतरिक और क्षेत्रीय दबावों के बीच पाकिस्तान एक बार फिर जल मुद्दे को कूटनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। भारत की ओर से फिलहाल इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

  • घने कोहरे ने ली चार जिंदगियां: यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, बसों और कारों में लगी आग

    घने कोहरे ने ली चार जिंदगियां: यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, बसों और कारों में लगी आग


     
    नई दिल्ली/ उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में मंगलवार तड़के घने कोहरे ने ऐसा कहर बरपाया कि यमुना एक्सप्रेसवे पर एक भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। थाना बलदेव क्षेत्र के अंतर्गत माइलस्टोन 127 के पास सुबह करीब चार बजे सात बसों और दो कारों की आपस में टक्कर हो गई। टक्कर के बाद कई वाहनों में आग लग गई, जिससे चार लोगों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक यात्री घायल हो गए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय एक्सप्रेसवे पर दृश्यता बेहद कम थी। घना कोहरा इतना अधिक था कि कुछ मीटर आगे तक देख पाना भी मुश्किल हो रहा था। इसी दौरान एक तेज रफ्तार बस आगे चल रहे वाहन से टकरा गई। अचानक हुई इस टक्कर के बाद पीछे से आ रही बसें और कारें एक के बाद एक भिड़ती चली गईं, जिससे कुछ ही पलों में पूरा इलाका अफरा-तफरी में बदल गया।टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पांच बसों और दो कारों में देखते ही देखते आग भड़क उठी। आग लगते ही कई यात्री वाहनों के अंदर फंस गए। चीख-पुकार और धमाकों की आवाज से आसपास के गांवों में दहशत फैल गई। स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और अपनी जान जोखिम में डालकर राहत कार्य में जुट गए। कई लोगों को बसों की खिड़कियां तोड़कर बाहर निकाला गया।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ वाहनों को पूरी तरह जलने से बचाया नहीं जा सका। करीब 20 एंबुलेंस की मदद से लगभग 150 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर जिला अस्पताल और नजदीकी निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

    जिला अधिकारी सीपी सिंह ने हादसे में चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि घायलों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है और सभी का इलाज जारी है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया गया, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस दर्दनाक हादसे का संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और मृतकों के परिजनों को आवश्यक सहायता प्रदान की जाए। साथ ही, हादसे के कारणों की गहन जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

    प्रशासन ने क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया है और यमुना एक्सप्रेसवे पर यातायात धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। अधिकारियों ने खास तौर पर सर्दियों के मौसम में कोहरे के दौरान वाहन चालकों से सतर्क रहने, गति सीमित रखने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है।यह हादसा एक बार फिर से यह चेतावनी देता है कि घने कोहरे में लापरवाही और तेज रफ्तार कितनी जानलेवा साबित हो सकती है।