Chaitra Purnima 2026: शुभ योगों के साथ खास पूर्णिमा, जानें पूजा और व्रत का सही समय


नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है। यह तिथि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन स्नान, दान, जप और तप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा 1 और 2 अप्रैल को पड़ रही है, जिससे लोगों के मन में यह सवाल है कि व्रत और अनुष्ठान के लिए कौन सा दिन श्रेष्ठ रहेगा।

चैत्र पूर्णिमा तिथि का समय


द्रिक पंचांग के अनुसार

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल सुबह 7:06 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल सुबह 7:41 बजे

कब करें स्नान और दान
हिंदू धर्म में उदयतिथि का विशेष महत्व होता है।

1 अप्रैल को पूर्णिमा सूर्योदय के बाद शुरू हो रही है

2 अप्रैल को सूर्योदय के समय पूर्णिमा विद्यमान रहेगी

इसी कारण 2 अप्रैल को स्नान और दान करना अधिक शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, जरूरतमंदों को दान और धार्मिक कार्य करना विशेष फलदायी होता है।

कब रखें व्रत


पूर्णिमा व्रत आमतौर पर चंद्रोदय के आधार पर रखा जाता है।

1 अप्रैल को चंद्रोदय शाम 6:11 बजे होगा

2 अप्रैल को चंद्रोदय प्रतिपदा तिथि में होगा

इसलिए चैत्र पूर्णिमा का व्रत 1 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।

शुभ मुहूर्त और पूजा का समय

1 अप्रैल (व्रत और पूजा के लिए)

भगवान सत्यनारायण पूजा समय: सुबह 6:11 से 9:18 बजे

शाम को सूर्यास्त (6:39 बजे) के बाद प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा करें

रात में चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है

2 अप्रैल (स्नान और दान के लिए)

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:38 से 5:24

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:50

शुभ योगों का संयोग

1 अप्रैल को कई शुभ योग बन रहे हैं:

रवि योग: सुबह 6:11 से शाम 4:17

सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 4:17 से अगले दिन सुबह 6:10 तक

वृद्धि योग: दोपहर 2:51 तक

इसके बाद ध्रुव योग शुरू होगा

ये सभी योग पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।

चैत्र पूर्णिमा का महत्व

चैत्र पूर्णिमा के दिन व्रत रखने, स्नान और दान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। साथ ही सत्यनारायण कथा करने का भी विशेष महत्व होता है।