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  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।

  • MP: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को दी चेतावनी… बोले- अपने पास दर्जनभर विभाग रखोगे तो फंस जाओगे

    MP: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को दी चेतावनी… बोले- अपने पास दर्जनभर विभाग रखोगे तो फंस जाओगे


    भोपाल।
    कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Senior leader Digvijaya Singh) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें दर्जनभर विभाग अपने पास नहीं रखने चाहिए, नहीं तो किसी दिन फंस जाएंगे।

    उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री यादव एक मिल मजदूर के बेटे हैं लेकिन वह अगर गड़बड़ी करेंगे तो उन्हें बख्शा भी नहीं जाएगा। कांग्रेस ने एक खबर का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री यादव पर उज्जैन में कथित तौर पर जमीन घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी ने इसे ‘महाकाल’ की जमीन की लूट’ करार दिया था और मुख्यमंत्री यादव के इस्तीफे और आरोपों की न्यायिक जांच की मांग की है।

    इसी मुद्दे पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मोहन यादव जी, आपने 12-12 विभाग अपने पास रख रखे हैं। बहुत गलती कर रहे हो। फंस जाओगे। गलती करेगा अधिकारी, पैसा खाएगा अधिकारी और फंसोगे आप। मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास वर्तमान में सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय, एवं ऐसे अन्य समस्त विभाग हैं जो किसी अन्य मंत्री को न सौंपा गया है।

    सिंह ने कहा कि वह भी 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं लेकिन कभी उन पर कोई आरोप नहीं लगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान (केंद्रीय कृषि मंत्री) ने एक-एक फाइल ढूंढी लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा, मोहन यादव जी आप भी उसकी जांच कर लें, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि मेरे पास कोई विभाग ही नहीं था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि इसमें इनकी कौन-कौन सी कंपनियां हैं और कौन-कौन लोग इनके इस कथित भूमि घोटाले में शामिल हैं।


    दिग्विजय सिंह बोले- हम बख्शेंगे नहीं

    उन्होंने आगे कहा,मैं तो मोहन यादव जी को राय-मशविरा देने के लिए आया हूं। ऐसा मत करो! आप एक मिल मजदूर के बेटे हो। मुख्यमंत्री बने हो, नाम कमाओ! पैसा जो कमा रहे हो न, जिसका हिसाब पता नहीं किस-किस को देना पड़ रहा है आपको। हमारी सहानुभूति है इस मामले में। दिग्विजय सिंह ने कहा, मुख्यमंत्री पर यदि आरोप लगते हैं तो हम लोग आपको बख्शेंगे नहीं।

    उन्होंने कहा, यह मत समझना कि हमको आप खरीद लोगे। हम कोई बिकाऊ माल नहीं हैं, हम टिकाऊ माल हैं। बिकाऊ माल जो था, गया भाजपा में। ये सब कांग्रेसी जो यहां बैठे हैं, सब टिकाऊ माल हैं। लड़ाई लड़ने के लिए हम तैयार हैं और लड़ाई लड़ेंगे।

  • MP: CM मोहन यादव ने प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू में रात्रि चौपाल लगाकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं

    MP: CM मोहन यादव ने प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू में रात्रि चौपाल लगाकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं


    बैतूल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने शनिवार को बैतूल जिले के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू (Kukru Hill Station) में रात्रि चौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद किया। चौपाल के दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके निराकरण के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी ग्रामीण को पटवारी, थानेदार या अन्य अधिकारी द्वारा परेशान किया जाता है तो वे सीधे उन्हें अवगत कराएं. रात्रि चौपाल में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के सामने गांव में हाईस्कूल, पेयजल व्यवस्था और 20 बिस्तरों वाले अस्पताल की मांग रखी. मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी.उन्होंने पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए तालाब निर्माण के निर्देश दिए. वहीं बालिका छात्रावास, जामूखेड़ी मार्ग और बुंदियाखुर्द पुलिया निर्माण की स्वीकृति देने की घोषणा भी की।


    शुरू होगी ग्रामीण बस सेवा

    मुख्यमंत्री ने कुकरू को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बात कहते हुए बताया कि अगले माह से यहां ग्रामीण बस सेवा शुरू की जाएगी, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को प्रदेश में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है. उन्होंने किसानों से खेती के साथ पशुपालन को अपनाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की अपील की. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को 25 गाय या 25 भैंस पालन के लिए 40 लाख रुपये तक की ऋण सहायता दी जाएगी, जिसमें 10 लाख रुपये सरकार वहन करेगी. साथ ही कोदो-कुटकी की समर्थन मूल्य पर खरीदी जारी रहने की बात भी कही।


    राखी बंधवाई, भजन गाया और ग्रामीणों के साथ बिताया समय

    रात्रि चौपाल के दौरान स्थानीय कोरकू समाज के कलाकारों ने पारंपरिक गीत और नृत्य प्रस्तुत किए. मुख्यमंत्री भी ग्रामीणों के साथ घुलमिल गए और ‘गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो’ भजन गाकर सभी का मन मोह लिया. इस दौरान शिपा शनवारे ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी. मुख्यमंत्री ने बच्चों से भी मुलाकात की और उन्हें स्नेहपूर्वक दुलार किया।


    महिलाओं की सराहना, योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश

    स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने मुख्यमंत्री को बताया कि वो कृषि सखी, जेंडर सखी, बकरी पालन, भैंस पालन, मुर्गी पालन और सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं और कई महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं. मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए किसान सम्मान निधि और लाडली बहना योजना की जानकारी ली और पात्र किसानों की ई-केवाईसी शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए. उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को सूक्ष्म व लघु उद्योगों से जोड़ने, आजीविका भवन और कोदो-कुटकी प्रसंस्करण इकाई के लिए ऋण सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।


    सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने की अपील

    मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च से बचने, सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने और मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है. रात्रि चौपाल के बाद मुख्यमंत्री ने एक ग्रामीण के घर भोजन किया और रात्रि विश्राम के लिए कुकरू स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस पहुंचे. इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री एवं सांसद दुर्गादास उइके, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही विधायक महेंद्र सिंह चौहान, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, संभागायुक्त श्रीकांत बनोठ, आईजी मिथलेश कुमार शुक्ला, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण उपस्थित रहे।

  • MP में CM मोहन यादव का बड़ा फैसला….शासकीय नौकरी में दो बच्चों की अधिकतम सीमा समाप्त

    MP में CM मोहन यादव का बड़ा फैसला….शासकीय नौकरी में दो बच्चों की अधिकतम सीमा समाप्त


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) और इसके लिए आवेदन करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब उन्हें 2 बच्चों वाले नियम का पालन नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को ना सिर्फ नए प्रस्ताव को वापस लेने का आदेश दिया, बल्कि पुराने नियमों को भी खत्म करने को कहा है। यादव ने प्रस्तावित सिविल सर्विसेज रूल्स के मसौदे से उस नियम को हटाने का आदेश दिया, जिसके तहत सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम दो बच्चों की सीमा निर्धारित करने की बात कही गई थी।

    मोहन यादव ने आधिकारिक पोर्टल से ट्राफ्ट को तुरंत हटाने को कहा है। हालांकि, यह नियम प्रदेश में काफी पुराना है। 2001 में सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रावधान को लागू किया था। इसके तहत दो से अधिक जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सीधी भर्ती या विभागों में नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

    सीएम ने नया आदेश प्रकाशित करने को कहा
    मध्य प्रदेश में 2001 में लागू किए गए नियम के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले लोग सरकारी नौकरी के योग्य नहीं थे। इसके अलावा एमपी सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स 1965 के तहत दो से अधिक बच्चे होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार माना जाता था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अब तक के सबी नियमों को हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने नया मसौदा तैयार करने का आदेश दिया है।

    नए मसौदे के बाद सीएम का ऐक्शन
    दरअसल, मध्य प्रदेश में सेवा की सामान्य शर्तें नियम 2026 का मसौदा तैयार किया गया था और इस पर आम लोगों से 15 जून तक सुझाव मांगे गए थे। इसमें लाए गए कई नए नियमों के बीच बच्चे वाले पुराने नियम को भी शामिल किया गया था। लेकिन अब मोहन यादव सरकार ने इसे खत्म करने का आदेश दे दिया है।

  • यूका फैक्ट्री का कचरा हटने से भोपाल से मिटा गैस त्रासदी का कलंक, अब जमीन का करेंगे प्रबंधनः CM मोहन यादव

    यूका फैक्ट्री का कचरा हटने से भोपाल से मिटा गैस त्रासदी का कलंक, अब जमीन का करेंगे प्रबंधनः CM मोहन यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal gas tragedy) को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण बताया. कहा कि इस भयानक घटना ने नागरिकों और पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।

    CM यादव विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान की शुरुआत की गई। सीएम यादव ने कहा, “भोपाल गैस त्रासदी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण है. यह सबसे भयानक घटना थी जिसने आम नागरिकों और पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।


    फैक्ट्री के कचरे का हुआ सफल निपटारा

    मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़े कचरे का निपटारा कर दिया है. उन्होंने आगे कहा, “इससे भोपाल की धरती से गैस त्रासदी का कलंक मिट गया है. अब राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड की जमीन के सही प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    बता दें कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से बेहद जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था. इसमें कम से कम 5,479 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग अपंग हो गए. इसे दुनिया की सबसे बुरी औद्योगिक त्रासदियों में से एक माना जाता है।


    ग्रीन एनर्जी और वन्यजीवों का सह-अस्तित्व

    CM यादव ने कहा कि राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई अहम पहल की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित ऊर्जा के लिए सौर, पवन, बायोमास और जलविद्युत परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, और सांची, खजुराहो व अन्य जगहों पर बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं।

    वन्यजीव संरक्षण के साथ सह-अस्तित्व का बेहतरीन उदाहरण पेश करने का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि राज्य में तेंदुओं को लाने के अलावा असम से जंगली भैंसें भी लाई गई हैं.

    उन्होंने कहा, “पर्यावरण संरक्षण की मूल अवधारणा हमारी सनातन संस्कृति में निहित है. 5 तत्वों से बनी इस सृष्टि के संरक्षण के लिए हर तत्व का महत्व हमारी पूजा-पद्धति, खान-पान और प्रार्थनाओं में मौजूद है. सनातन संस्कृति में एक पेड़ को दस पुत्रों के बराबर माना जाता है. पर्यावरण संरक्षण हमारी जीवनशैली में झलकता है.”

    यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है. यादव ने कहा कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत राज्य में नदियों, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण का पवित्र कार्य चल रहा है.

    इस मौके पर वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार और वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक बरनवाल समेत कई अन्य लोग मौजूद थे. अहिरवार ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हवा, पानी और पेड़ों को बचाना बहुत जरूरी है।

  • उज्जैन में धार्मिक आयोजन की तैयारी तेज: शिप्रा परिक्रमा को लेकर अहम बैठक

    उज्जैन में धार्मिक आयोजन की तैयारी तेज: शिप्रा परिक्रमा को लेकर अहम बैठक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Ujjain में हर वर्ष आयोजित होने वाली शिप्रा तीर्थ परिक्रमा इस बार भी भव्य रूप में शुरू होने जा रही है। 25 मई को सुबह 9 बजे रामघाट से मां क्षिप्रा और धर्म ध्वजा के पूजन के साथ यात्रा का शुभारंभ होगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

     सीएम मोहन यादव होंगे शामिल
    इस वर्ष परिक्रमा के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री Mohan Yadav स्वयं कार्यक्रम में शामिल होंगे। वे 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर रामघाट पर मां क्षिप्रा को चुनरी अर्पित करेंगे और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे। भाजपा नगर मंडल की बैठकों में यात्रा की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं ताकि आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाया जा सके।

     रामघाट से शुरू होकर शहर के मार्गों से गुजरेगी यात्रा
    परिक्रमा की शुरुआत रामघाट से होगी, जिसके बाद यह नृसिंह घाट, लालपुल और त्रिवेणी होते हुए शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए वापस रामघाट पहुंचेगी। 26 मई को गंगा दशहरा के दिन यात्रा का समापन होगा, जहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

     23 वर्षों पुरानी परंपरा
    यह परिक्रमा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 23 वर्ष पहले मां शिप्रा के संरक्षण और धार्मिक आस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। तब से यह परंपरा लगातार जारी है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।

     भव्य आयोजन की तैयारियां तेज
    इस वर्ष आयोजन को सफल और भव्य बनाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सेवा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

    शिप्रा तीर्थ परिक्रमा 2026 न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी मजबूत करती है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी इस आयोजन को और अधिक भव्य और महत्वपूर्ण बना देगी।

  • काफिला विवाद के बाद नेताओं को CM की सीख: ‘कोई भड़काए तो खुद संभलना होगा’, BJP ने दिखाई सख्ती

    काफिला विवाद के बाद नेताओं को CM की सीख: ‘कोई भड़काए तो खुद संभलना होगा’, BJP ने दिखाई सख्ती



    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में निगम, मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में नियुक्त नेताओं के काफिला और शक्ति प्रदर्शन विवाद के बाद अब सरकार और संगठन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं। भोपाल में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साफ संदेश दिया कि नेताओं को खुद अनुशासन में रहना होगा और किसी के उकसावे में आने से बचना होगा।

    CM बोले- सोशल मीडिया की ‘तीसरी आंख’ सब देख रही
    प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आज सोशल मीडिया हर गतिविधि पर नजर रखता है। नेताओं को समझदारी और संयम के साथ काम करना होगा।उन्होंने कहा, “अगर कोई आपको उलझाए या भड़काए तो उससे बचना आपको ही है। कोई दूसरा आपका मददगार नहीं होगा। आप खुद जवाबदार हैं।”

    मुख्यमंत्री ने नेताओं को सलाह दी कि शुरुआत के एक-दो महीने काम को समझने और सीखने में लगाएं। नियम-कानून के दायरे में रहकर काम करें और अपने संस्थानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास करें।

    उन्होंने यह भी कहा कि अहंकार से केवल नुकसान होगा। सरकार जब चाहे जिम्मेदारी बदल सकती है, इसलिए पद को सेवा का माध्यम मानकर काम करें।

    हेमंत खंडेलवाल बोले- दुखी मन से करनी पड़ी कार्रवाई
    Hemant Khandelwal ने हालिया विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ घटनाओं की वजह से संगठन को दुखी मन से कार्रवाई करनी पड़ी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपेक्षा है कि पार्टी के लोग ताकतवर बनें, लेकिन उस ताकत का इस्तेमाल जनता और कार्यकर्ताओं की सेवा के लिए होना चाहिए।

    खंडेलवाल ने कहा कि निगम-मंडलों में नियुक्त सभी लोगों का चयन मेरिट के आधार पर हुआ है और संगठन उनसे अनुशासन तथा जिम्मेदारी की अपेक्षा करता है।

    प्रदेश प्रभारी की चेतावनी- रोज जाएगी रिपोर्ट
    बीजेपी प्रदेश प्रभारी Mahendra Singh ने नेताओं को साफ तौर पर चेतावनी दी कि अब उनके कामकाज और व्यवहार की नियमित मॉनिटरिंग होगी।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तक रोज रिपोर्ट पहुंचेगी कि कौन क्या कर रहा है, उसका व्यवहार कैसा है और परिवार की भूमिका कितनी है। सरकार और संगठन दोनों मिलकर परफॉर्मेंस का मूल्यांकन करेंगे।साथ ही नेताओं को सोशल मीडिया सक्रिय रखने, अनुशासन बनाए रखने और सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने की सलाह भी दी गई।

    18 विभागों के अधिकारियों ने दी ट्रेनिंग
    प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। नेताओं को वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक प्रक्रिया, अधिकार, जिम्मेदारियां और विभागीय समन्वय को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई।

    अधिकारियों ने समझाया कि निगम-मंडलों में काम करते समय सरकारी नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन कैसे करना है ताकि शासन व्यवस्था प्रभावित न हो।

    काफिला और शक्ति प्रदर्शन बना था विवाद की वजह
    हाल ही में कई निगम-मंडल अध्यक्षों द्वारा पदभार ग्रहण करने के दौरान बड़े-बड़े काफिले और वाहन रैलियां निकाली गई थीं। इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीजेपी संगठन को दिल्ली स्तर तक नाराजगी झेलनी पड़ी थी।

    इसके बाद पार्टी ने सख्त रुख अपनाते हुए भिंड किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह ठाकुर को पद से हटा दिया। वहीं पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर को नोटिस जारी कर उनके अधिकार फिलहाल फ्रीज कर दिए गए।

    मंत्रियों और अफसरों से टकराव रोकने की तैयारी
    सरकार नहीं चाहती कि निगम-मंडलों में नियुक्त नेताओं और विभागीय मंत्रियों या अफसरों के बीच अधिकारों को लेकर टकराव की स्थिति बने। इसी वजह से प्रशिक्षण में अधिकारों की सीमा और प्रशासनिक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।

  • कूनो नेशनल पार्क में चीतों की नई शुरुआत, CM मोहन यादव ने दो चीतों को खुले जंगल में छोड़ा

    कूनो नेशनल पार्क में चीतों की नई शुरुआत, CM मोहन यादव ने दो चीतों को खुले जंगल में छोड़ा

    श्योपुर। श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में सोमवार को उस समय महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो मादा चीतों को खुले जंगल में रिलीज किया। ये दोनों चीते अफ्रीकी देश बोत्सवाना से हाल ही में भारत लाए गए थे। मुख्यमंत्री रविवार शाम कूनो पहुंचे थे और वहीं रात्रि विश्राम के बाद सोमवार सुबह कूनो नदी किनारे स्थित रिलीज साइट पर पहुंचे। जैसे ही चीतों को जंगल में छोड़ा गया, वे तेजी से प्राकृतिक वातावरण की ओर दौड़ पड़े, जिसे देखकर वन विभाग के अधिकारी और उपस्थित अमला उत्साहित नजर आया।

    चीता प्रोजेक्ट और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया

    भारत में चीता पुनर्स्थापन परियोजना की शुरुआत लगभग साढ़े तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर की गई थी। इसके तहत अफ्रीकी देशों से चीतों को लाकर कूनो नेशनल पार्क में बसाया जा रहा है। हाल ही में बोत्सवाना से कुल 9 चीते भारत लाए गए थे, जिनमें 5 मादा और 4 नर शामिल हैं। सभी चीतों को पहले क्वारंटीन और फिर सॉफ्ट बाड़ों में रखा गया था। एक महीने की निगरानी के बाद इनमें से दो चीतों को पहली बार खुले जंगल में छोड़ा गया है, जबकि बाकी चीतों को चरणबद्ध तरीके से रिलीज किया जाएगा।

    प्रदेश में चीता स्टेट की पहचान और भविष्य की योजना

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अब चीता स्टेट के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है और यह परियोजना लगातार सफल हो रही है। वर्तमान में कूनो और गांधी सागर क्षेत्र में कुल 57 चीते मौजूद हैं, जिनमें से अधिकांश कूनो नेशनल पार्क में हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें सुरक्षित वातावरण में धीरे-धीरे प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार किया जा रहा है। इस अवसर पर कई मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और वन विभाग के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। सरकार का मानना है कि यह परियोजना देश में जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के प्रथम जत्थे को हरी झंडी दिखाकर करेंगे रवाना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के प्रथम जत्थे को हरी झंडी दिखाकर करेंगे रवाना


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज गुरुवार को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 1 से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ के प्रथम जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह गौरवशाली यात्रा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अंतर्गत निकाली जा रही है। भारत की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व–2026 (8 से 11 जनवरी 2026) का शुभारंभ ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर से किया गया है।

    मध्यप्रदेश से पहली बार निकलने वाली इस विशेष यात्रा में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से 1,100 श्रद्धालुओं का दल सम्मिलित होगा। यह रेलगाड़ी भोपाल और उज्जैन रेलवे स्टेशनों से भी तीर्थयात्रियों को अपने साथ लेकर सोमनाथ की ओर प्रस्थान करेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ की पावन धरा पर आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, दर्शन और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता करेंगे।

    संचालक संस्कृति एन.पी. नामदेव ने बताया कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का उद्देश्य देशभर के राज्यों के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, हजार वर्षों के संघर्ष और आस्था का स्मरण करना है। यह उत्सव राष्ट्र की गौरवमयी विरासत के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। यह पर्व केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनरुत्थान और राष्ट्रीय अस्मिता का महाकुंभ है। इसका उद्देश्य देशवासियों को उन हजार वर्षों के लंबे संघर्ष और आस्था की याद दिलाना है, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी भारतीय सांस्कृतिक ज्योति को बुझने नहीं दिया। सोमनाथ मंदिर, जो हमारे राष्ट्रीय गौरव और अडिग श्रद्धा का प्रतीक है, वहीं से इस पावन पर्व की प्रेरणा ली गई है जिससे भावी पीढ़ी अपनी विरासत पर गर्व कर सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय भावना को और अधिक सशक्त करेगी। श्रद्धा और भक्ति के इस अनूठे संगम का समापन 11 मई, 2026 को होगा, जब यह दल सोमनाथ महादेव का आशीर्वाद और सांस्कृतिक गौरव की स्मृतियां लेकर वापस लौटेगा। यह यात्रा जन-जन के मन में स्वाभिमान और श्रद्धा का नया संचार करेगी।

  • भोपाल से सोमनाथ यात्रा की शुरुआत, CM मोहन यादव दिखाएंगे हरी झंडी

    भोपाल से सोमनाथ यात्रा की शुरुआत, CM मोहन यादव दिखाएंगे हरी झंडी


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। पहली बार ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ गुरुवार को भोपाल से रवाना होगी। इस विशेष ट्रेन को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (RKMP) के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
    इस यात्रा में प्रदेशभर से लगभग 1100 श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। यह पहल संस्कृति विभाग द्वारा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026’ के अंतर्गत आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और राष्ट्रीय गौरव को और मजबूत करना बताया जा रहा है।
    इस यात्रा का संबंध गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर से है, जिसे भारत के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यह मंदिर भारतीय इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इसी पृष्ठभूमि में इस विशेष यात्रा की शुरुआत की गई है।
    यह मध्य प्रदेश से पहली बार आयोजित होने वाली ऐसी धार्मिक ट्रेन यात्रा है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालु एक साथ सोमनाथ धाम की ओर प्रस्थान करेंगे। यह ट्रेन भोपाल के साथ-साथ उज्जैन रेलवे स्टेशन से भी यात्रियों को अपने साथ लेकर आगे बढ़ेगी।
    यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सोमनाथ मंदिर में दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही वहां आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक गतिविधियों में भी उनकी सहभागिता होगी।
    सरकारी स्तर पर इस यात्रा को सांस्कृतिक एकता और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की यात्राएं लोगों को भारत की समृद्ध विरासत और परंपराओं से जोड़ने में मदद करती हैं।
    मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। स्टेशन परिसर में सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और यात्री सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि यात्रा सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
    यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि इसे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और श्रद्धा के विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है।