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  • खेल हमारी संस्कृति का प्रमुख पक्ष, हमने बनाया है खेलों को शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    खेल हमारी संस्कृति का प्रमुख पक्ष, हमने बनाया है खेलों को शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेल हमेशा से हमारी भारतीय संस्कृति का एक अहम अंग रहा है। हमारे व्यक्तित्व के विकास में एक प्रमुख पक्ष के रूप में खेलों में हमारे जीवन को दिशा दी है। हमने खेलों को स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है। हमारे खिलाड़ी प्राय: हर खेल में देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खिलाड़ियों से आव्हान किया कि वे चाहे जिस किसी भी खेल के खिलाड़ी रहें, अपनी लगन और मेहनत से हमेशा अपना उत्कृष्ट देने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर में एक निजी स्कूल द्वारा आयोजित 7वें नेशनल रैंकिंग पिकलबॉल टूर्नामेंट-2025 को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश राज्य ऑलम्पिक एसोशिएशन के संरक्षक भी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिककाल से हमारी संस्कृति में खेलों का बड़ा योगदान रहा है। कई मामलों में भारतीयों ने अपने दौर से भी आगे बढ़कर विश्व में खेलों में नाम कमाया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के नवनिर्माण में खिलाड़ियों की भी अहम भूमिका है। खिलाड़ियों के योगदान से हम अपनी भावी पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक वातावरण तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल नए खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं, बल्कि खेल अधोसंरचना के विकास को भी नए आयाम मिल रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सबसे तेज गति से औद्योगिक प्रगति करने वाला राज्य बन रहा है। औद्योगिक विकास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाईयों, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। देश को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश का सर्वाधिक योगदान होगा।

    निजी स्कूल के अध्यक्ष श्री स्वप्निल कोठारी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुषार्थ से ही व्यक्तित्व का विकास होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल की रील से बाहर निकलें, मैदान में आकर परिश्रम करें, तभी वे देश के लिए पसीना और रक्त बहाने के योग्य बनेंगे। उन्होंने सभी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्प ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ में सक्रिय रूप से सहभागी बनकर अधिकतम योगदान देने की अपील की।

    कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट, विधायक श्री रमेश मेंदोला, श्री बलवंत, श्री गणेश अग्रवाल, श्री गोपाल अग्रवाल, श्री सुनील सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित थे। कार्यक्रम में विभिन्न खेलों में नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों का सम्मान भी किया गया।

  • लॉ एंड ऑर्डर से लेकर रोजगार तक CM मोहन यादव का बड़ा बयान: कहा-मंत्री का भाई भी नहीं बचा मार्गदर्शन मिला तो मंत्रिमंडल बदलेगा

    लॉ एंड ऑर्डर से लेकर रोजगार तक CM मोहन यादव का बड़ा बयान: कहा-मंत्री का भाई भी नहीं बचा मार्गदर्शन मिला तो मंत्रिमंडल बदलेगा


    भोपाल /मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल को 13 दिसंबर को दो साल पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने एक चर्चित अखबार के साथ से विशेष बातचीत में अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियों चुनौतियों और आने वाले तीन सालों के रोडमैप को विस्तार से रखा। बातचीत में लॉ एंड ऑर्डर नक्सलवाद रोजगार निवेश कृषि संकट मेट्रो प्रोजेक्ट और मंत्रिमंडल फेरबदल जैसे अहम मुद्दे केंद्र में रहे।

    कानून से ऊपर कोई नहीं मंत्री का भाई भी गिरफ्तार हुआa
    लॉ एंड ऑर्डर पर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार में कानून सबके लिए समान है।उन्होंने कहा अगर कोई गलत करेगा तो वह बचेगा नहीं। मंत्री का भाई भी कानून से ऊपर नहीं है उसे भी गिरफ्तार किया गया है। यही सुशासन है। CM के इस बयान को सख्त प्रशासनिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    नक्सलवाद पर बड़ी उपलब्धि
    मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनाया।उन्होंने कहा कि मंडला बालाघाट और डिंडौरी जैसे जिलों से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है।बीते एक साल में 10 नक्सलियों को ढेर किया गया और कई बार नक्सलियों ने सरेंडर किया। CM ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले नक्सली खुलेआम हिंसा करते थे लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    दिल्ली से सरकार चलने के आरोपों पर पलटवार

    विपक्ष के इस आरोप पर कि मध्य प्रदेश सरकार दिल्ली से चलाई जा रही है मुख्यमंत्री ने कहा-हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री गृह मंत्री और पार्टी नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलता है। केंद्र और राज्य के अच्छे संबंधों से ही विकास तेज होता है।रोजगार पर फोकस: 60 हजार से ज्यादा नौकरियां रोजगार को बड़ी चुनौती मानते हुए CM ने बताया कि बीते दो सालों में 60 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं।उन्होंने कहा- बिजली विभाग में 50 हजार पद, स्वास्थ्य विभाग में 42 हजार पद,पुलिस विभाग में 22500 से अधिक पद,मंजूर किए गए हैं। भविष्य में एक परीक्षा-एक भर्ती सिस्टम लागू करने की भी योजना है।

    पेपर लीक पर सख्ती
    भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के सवाल पर CM ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कोई बड़ा पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पारदर्शी और समयबद्ध परीक्षाएं सरकार की प्राथमिकता हैं।

    निवेश और इंडस्ट्रियल ग्रोथ
    CM ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निवेश सिर्फ कागजों में नहीं जमीन पर उतर रहा है।उन्होंने बताया कि 6 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है।सागर में खाद कारखाने और 30 हजार करोड़ के नए इंडस्ट्रियल पार्क का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास अब हर क्षेत्र में दिख रहा है।

    कृषि और खाद संकट पर जवाब
    कृषि आधारित वर्ष की घोषणा को लेकर CM ने कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है।उन्होंने माना कि कहीं-कहीं वितरण में दिक्कत आती है लेकिन अब SMS और होम डिलीवरी सिस्टम पर काम किया जा रहा है।

    भोपाल मेट्रो और मास्टर प्लान
    भोपाल मेट्रो को लेकर CM ने कहा कि प्रधानमंत्री वीडियो संदेश के जरिए जुड़ेंगे और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में लोकार्पण होगा।भोपाल मास्टर प्लान पर उन्होंने कहा-25 साल का बैकलॉग है दो साल में सब नहीं होगा लेकिन समाधान जरूर निकलेगा।

    मंत्रिमंडल विस्तार पर क्या बोले?
    मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के सवाल पर CM ने साफ कहा-जैसा पार्टी के पार्लियामेंट्री बोर्ड प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलेगा वैसा ही करेंगे।

    सादगी का संदेश: सामूहिक विवाह में बेटे की शादी
    CM ने अपने छोटे बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने के फैसले को सामाजिक संदेश बताया।उन्होंने कहा-दिखावे की शादी समाज पर बोझ डालती है। बड़े लोग फिजूलखर्ची करेंगे तो गरीब कर्ज लेगा।उन्होंने अंतिम संस्कार और विवाह में अनावश्यक खर्च से बचने की अपील भी की। डॉ. मोहन यादव के इंटरव्यू से साफ है कि सरकार सख्त प्रशासन तेज विकास और सामाजिक सादगी को अपनी पहचान बनाना चाहती है। अब देखना यह होगा कि अगले तीन सालों में ये दावे जमीन पर कितने असरदार साबित होते हैं।

  • जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण

    जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन मध्यप्रदेश इस कार्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन के संचालन-संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में जल आपूर्ति प्रभावित न हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। विगत 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाँव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही।

    बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी और प्रबंध संचालक जल निगम श्री के.वी.एस. चौधरी भी उपस्थित थे।

    प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।

    बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य

    बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है।

    वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रु. का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रु. का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएँ 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर हैं।

    विभाग द्वारा तकनीकी और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। जल रेखा मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है। राज्य की सभी 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल जल कर संग्रह व्यवस्था लागू की गई है। इंदौर में IoT (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) आधारित जल आपूर्ति मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इसे अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है।

    ऊर्जा प्रबंधन को देखते हुए 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर स्वीकृत की गई है, जिससे आने वाले 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना पर भी कार्ययोजना तैयार की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए जलदर्पण पोर्टल संचालित है तथा शिकायत निवारण हेतु कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। अभी 64 ग्रामों में 24×7 जल आपूर्ति पायलट रूप में सफल रही है, जिसे आगे और विस्तृत किया जाएगा।

    बैठक में भविष्य के विजन पर जानकारी देते हुए बताया गया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजिटल प्रबंधन, तकनीकी क्षमता संवर्धन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य संस्थान और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सके।

  • सागर–दमोह मार्ग चार लेन में बदलेगा, मंत्री परिषद ने 2059.85 करोड़ की परियोजना को दी स्वीकृति

    सागर–दमोह मार्ग चार लेन में बदलेगा, मंत्री परिषद ने 2059.85 करोड़ की परियोजना को दी स्वीकृति


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्री परिषद बैठक में सागर
    दमोह मार्ग (76.680 किमी) को 2-लेन से 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर में उन्नत करने की 2059.85 करोड़ की परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत स्वीकृति दी गई। इसमें 40% राशि मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा और शेष 60% राशि राज्य बजट से 15 वर्ष तक 6-माही एन्यूटी के रूप में वहन की जाएगी।

    यह महत्वपूर्ण मार्ग सागर और दमोह को जोड़ते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और राष्ट्रीय राजमार्ग-34 से कनेक्टिविटी बढ़ाएगा। उन्नयन से बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि, खनिज, व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को मजबूत गति मिलेगी।

    परियोजना में 13 अंडरपास, 3 वृहद पुल, 9 मध्यम पुल, 1 आरओबी, 13 बड़े और 42 मध्यम जंक्शन का निर्माण, तथा परसोरिया, गढ़ाकोटा, रोन और बान्सा में 4 बायपास शामिल हैं। सड़क सुरक्षा के लिए 21 स्थानों पर कर्व सुधार तथा 13 बड़े जंक्शनों पर VUP प्रस्तावित हैं।

    उल्लेखनीय है कि 10,300 पीसीयू वर्तमान यातायात दबाव और भविष्य में 17,000 पीसीयू की संभावना को देखते हुए 4-लेन निर्माण आवश्यक है। यह मार्ग विंध्य विकास पथ का हिस्सा है, जिससे कटनी दिशा में भविष्य का 4-लेन कॉरिडोर भी सुदृढ़ होगा। मार्ग के उन्नयन से यात्रा समय में कमी, दुर्घटनाओं में गिरावट, ईंधन की बचत और परिवहन तंत्र में व्यापक सुधार होगा। क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि, दमोह के खनिज संसाधनों और कुंडलपुर सहित पर्यटन स्थलों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। यह परियोजना बुंदेलखंड विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • एक भारत-श्रेष्ठ भारत का प्रतिबिंब है राष्ट्रीय बालरंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एक भारत-श्रेष्ठ भारत का प्रतिबिंब है राष्ट्रीय बालरंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भोपाल में प्रतिवर्ष होने वाला राष्ट्रीय बालरंग प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के उद्देश्य को बेहतर तरीके से पूरा कर रहा है। भोपाल का एकता का प्रतिबिंब बन गया है। इस तरह के कार्यक्रम बच्चों में एक-दूसरे के राज्य की संस्कृति को समझने की जिज्ञासा पैदा करते हैं और बच्चों में देश की संस्कृति के प्रति लगाव बढ़ता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार की शाम भोपाल के राष्ट्रीय इंदिरा गांधी मानव संग्रहालय में राष्ट्रीय बालरंग समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोक नृत्य पर केन्द्रित प्रतियोगिता के विजेता राज्यों के बच्चों को ट्राफी भेंट की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग 5 हजार वर्ष पहले भगवान
     आए। उनकी चौसठ कलाओं के ज्ञान से बच्चों को भारतीय प्राचीन कला को जानने का अवसर मिलेगा। मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम उज्जैन में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय बालरंग से यह परिसर मिनी भारत का रूप बन जाता है। यह आयोजन हमें अपने देश की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का मौका देता है। प्रत्येक राज्य की अपनी नृत्य शैली है, जो बालरंग के मंच पर सामने आयी है। लोक नृत्य आंचलिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं। विभिन्न राज्यों के बच्चे जब एक स्थल पर एकत्र होते हैं तो वे एक-दूसरे के राज्य के बारे में जानने का प्रयास करते हैं। इस तरह के भाव बच्चों में जिज्ञासा को बढ़ाने का काम करते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को भारत की विविधता के बारे में अधिक से अधिक जानकारी दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रेष्ठ आयोजन के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को बधाई दी।

    स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने देश के विभिन्न राज्यों से आए बच्चों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शायद ही दुनिया में भारत जैसा देश हो, जिसमें इतने प्रकार की संस्कृतियां आपसी मेल के साथ देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में हर 50 से 75 किलोमीटर में संस्कृति का बदलाव देखने को मिलता है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि कश्मीर देश के मुकुट के समान है। उन्होंने मध्यप्रदेश की मालवा, बुंदेलखंड, बघेली संस्कृति का भी उल्लेख किया। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बच्चों के प्रति विशेष लगाव देखने को मिलता है। मुख्यमंत्री अपनी व्यस्तता के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रमों में निरंतर शामिल होते हैं।

    राष्ट्रीय बालरंग के विजेता

    भोपाल में हुए राष्ट्रीय बालरंग में प्रथम पुरस्कार झारखंड के छऊ लोकनृत्य को मिला। यह नृत्य झारखंड का राजकीय नृत्य है, जिसमें विशिष्ट मुखोटों का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। द्वितीय पुरस्कार हरियाणा के घूमर लोकनृत्य को मिला। इस नृत्य में सामाजिक जीवन, प्रेम, तीज-त्यौहार और लोक कथाओं की झलक देखने को मिलती है। तृतीय पुरस्कार असम के बिहू लोकनृत्य को मिला। यह नृत्य असम की जीवंत आत्मा है और वहां पर यह नृत्य बसंत ऋतु के आगमन पर प्रमुखता के साथ किया जाता है। सांत्वना पुरस्कार मध्यप्रदेश के अहीर नृत्य, हिमाचल प्रदेश के नाटी लोकनृत्य और तीसरा सांत्वना पुरस्कार चंडीगढ़ के भांगड़ा, लुड्डी और झूमर नृत्य को मिला।

    राष्ट्रीय बालरंग समारोह में अनेक लोक नृत्यों और गीतों के माध्यम से भारत की संस्कृति के अनेक रंग, मंच पर दिखे और शानदार कला की अभिव्यक्त हुई। कुल 14 राज्य आंध्रप्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश एवं 5 केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, चण्डीगढ़ एवं लक्षदीप के 400 से अधिक शालेय विद्यार्थियों ने अपने राज्यों के नृत्य की प्रस्तुति दी।

    कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक श्री अमिताभ पांडे, अध्यक्ष नगर निगम भोपाल श्री किशन सूर्यवंशी, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी एवं स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में होगा राष्ट्रीय बालरंग समारोह का समापन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में होगा राष्ट्रीय बालरंग समारोह का समापन

    भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में भोपाल के इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय परिसर, श्यामला हिल्स में शुक्रवार 5 दिसम्बर को शाम 4 बजे राष्ट्रीय बालरंग समारोह का समापन होगा। समापन समारोह में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहेंगे।

    राष्ट्रीय बालरंग समारोह का शुभारंभ शुक्रवार 5 दिसम्बर को मानव संग्रहालय में प्रात: 10:30 बजे होगा। आयोजन में 14 राज्य आंध्रप्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश एवं 5 केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, चण्डीगढ़ एवं लक्षदीप के शालेय विद्यार्थियों के लोक नृत्य दल अपने राज्यों की प्रस्तुति देंगे।

    राष्ट्रीय एकता पर केन्द्रित है बालरंग

    भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है। राष्ट्रीय बालरंग समारोह में विभिन्न प्रांतों के छात्र-छात्राएँ शामिल होकर अपने कला-कौशल के उत्कृष्ट प्रदर्शन से अपने प्रदेश की वैभवशाली लोक संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं। विभिन्न प्रांतों के बच्चों के बीच संस्कृति का आदान-प्रदान होने से राष्ट्रीय एकता और सद्भाव की भावना मजबूत होती है। राष्ट्रीय बालरंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त दल को पुरस्कार स्वरूप एक लाख 11 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त दल को 75 हजार एवं तृतीय स्थान प्राप्त दल को 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की जायेगी। इसके अलावा चयनित 2 दलों को 21-21 हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार भी दिये जायेंगे।