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  • यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पर CM मोहन यादव का अहम दौरा: 85 एकड़ जमीन का भविष्य तय करने के लिए बैठक, गैस पीड़ितों की भी होगी बात

    यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पर CM मोहन यादव का अहम दौरा: 85 एकड़ जमीन का भविष्य तय करने के लिए बैठक, गैस पीड़ितों की भी होगी बात


    भोपाल। भोपाल के जेपी नगर स्थित यूनियन कार्बाइड (यूका) फैक्ट्री पर शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निरीक्षण किया और गैस राहत से जुड़े अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। यह दौरा इसी बात का संकेत माना जा रहा है कि फैक्ट्री के 85 एकड़ जमीन के उपयोग को लेकर जल्द ही निर्णय लिया जा सकता है। शुक्रवार को जिला प्रशासन और गैस राहत विभाग की टीम जमीन से जुड़े फाइलों की जांच में जुटी रही, जबकि पुलिस विभाग ने डीआरपी लाइन के लिए भी जमीन मांगने का प्रस्ताव रखा है।
    इस सबके बीच यह सवाल उभरकर सामने आया है कि उस जमीन का सही उपयोग क्या होगाक्या उसे विकास के कामों में लाया जाएगा या फिर गैस पीड़ितों की सुविधाओं के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।

    इस दौरान गैस पीड़ित संगठनों ने भी मुख्यमंत्री से मिलने की संभावना जताई। गैस पीड़ित संगठन ‘रचना ढिंगरा’ ने बताया कि वे 2-3 अहम मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग यह है कि कई महिलाओं को एक हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन अभी तक नहीं मिल रही है। साथ ही गैस पीड़ितों के पुनर्वास और स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर बनाई गई राज्य स्तरीय समिति की बैठक पिछले 11 साल से नहीं हुई है।

    संगठन का कहना है कि इन मुद्दों पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि पीड़ितों की हालत आज भी बेहद नाजुक है और उन्हें समय-समय पर सहायता की जरूरत रहती है।

    यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के 40 साल बाद हटाए गए जहरीले कचरे की याद भी ताजा है। पिछले साल जनवरी में फैक्ट्री से 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा हटाया गया था। यह कचरा 12 कंटेनरों में उच्च सुरक्षा के बीच पीथमपुर ले जाया गया था, जहां लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद इसे जलाया गया था।

    हालांकि गैस पीड़ित संगठन अभी भी दावा करते हैं कि फैक्ट्री परिसर में हजारों टन कचरा दफन है, जिसके कारण आसपास के 42 बस्तियों का भूजल प्रदूषित हो चुका है। यह स्थिति आज भी लोगों की सेहत के लिए खतरा बनी हुई है और इसी कारण इलाके में पुनर्वास और पर्यावरण सुरक्षा की मांग लगातार उठती रहती है।

    भोपाल गैस त्रासदी 2-3 दिसंबर 1984 की रात की घटना थी, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में गिना जाता है। उस रात यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के प्लांट CK में टैंक नंबर 610 से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस लीक हुई, जिससे हजारों लोग प्रभावित और मारे गए।

    उस रात की भयावहता का वर्णन आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैलाशों की संख्या इतनी अधिक थी कि उन्हें उठाने के लिए वाहन कम पड़ गए, और धुंध इतनी गहरी थी कि पहचानना भी मुश्किल हो गया।

    याद रहे कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड ने 1969 में प्लांट स्थापित किया था। 1978 में अल्फा नेफ्थॉल और 1979 में MIC उत्पादन की यूनिट शुरू हुई थी। MIC अत्यंत खतरनाक रसायन था और अमेरिका में इसे कड़ी सुरक्षा के साथ एक-एक लीटर की बोतलों में भेजा जाता था, जबकि भारत में इसे बड़े स्टील कंटेनरों में लाया जाता था। 2 दिसंबर की रात टैंक की सफाई के दौरान पानी का रिसाव MIC टैंक में चला गया और ‘रन अवे रिएक्शन’ की वजह से टैंक फट गया, जिससे गैस फैली। इस त्रासदी में शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार 3828 लोग तत्काल मारे गए, जबकि बाद में मौतों और प्रभावितों की संख्या कई गुना बढ़ती गई।

    अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की इस बैठक और निरीक्षण के बाद 85 एकड़ जमीन का उपयोग किस दिशा में होगाक्या यह जमीन पीड़ितों की सुविधा, पर्यावरण सुरक्षा और स्मृति स्थल के रूप में सुरक्षित रखी जाएगी या फिर विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग की जाएगी। साथ ही गैस पीड़ितों की लंबित मांगों पर भी सरकार की क्या कार्रवाई होती है, यह अगले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
  • उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा

    उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को उज्जैन प्रवास के दौरान धार्मिक सामाजिक और विकास से जुड़े कार्यक्रमों में पूरी तरह सक्रिय नजर आए। महाकाल उत्सव के समापन के अगले ही दिन मुख्यमंत्री का यह दौरा आस्था, संवाद और विकास-तीनों आयामों को एक साथ समेटे रहा। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उन्होंने दिन की शुरुआत गोलामंडी क्षेत्र स्थित प्राचीन बृहस्पति महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन से की और प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

    मुख्यमंत्री अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ मंदिर पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से अभिषेक और आरती की गई। पूजा के बाद उन्होंने कहा कि बृहस्पति महादेव मंदिर से उनका पुराना और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। सार्वजनिक जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर वे यहां आशीर्वाद लेने आते रहे हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह उनका पहला बृहस्पतिवार दर्शन था, जिसे उन्होंने अपने लिए विशेष और भावुक क्षण बताया।पूजन के उपरांत मुख्यमंत्री ने उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उज्जैन केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों को लेकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार पूरी गंभीरता और योजना के साथ काम कर रही है। सड़क, पेयजल, स्वच्छता, यात्री सुविधाएं और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आने वाले वर्षों में उज्जैन वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत कर सके।

    धार्मिक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री का अंदाज पूरी तरह बदला नजर आया, जब वे शहर के बीच एक साधारण सी चाय की दुकान पर पहुंचे। यहां उन्होंने आम नागरिकों के साथ बैठकर चाय पी और अनौपचारिक बातचीत की। लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की समस्याएं, रोजमर्रा की जरूरतें और विकास से जुड़ी अपेक्षाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ ध्यान से उनकी बातें सुनीं, बल्कि समाधान का भरोसा भी दिया। जब चाय का भुगतान करने की बारी आई और दुकानदार ने पैसे लेने से मना किया, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए स्वयं भुगतान किया। इस सरल व्यवहार ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।

    इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय के समीप निर्माणाधीन गीता भवन का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह भवन जी प्लस टू संरचना में तैयार किया जा रहा है और अप्रैल 2026 तक इसके पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने निर्माण की गुणवत्ता, प्रगति और समय-सीमा की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और भवन तय समय में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा होना चाहिए।मुख्यमंत्री का यह उज्जैन दौरा साफ संकेत देता है कि उनकी प्राथमिकताओं में आस्था जनता से सीधा संवाद और विकास कार्यों की निगरानी-तीनों समान रूप से शामिल हैं।

  • भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली, CM मोहन यादव ने किसानों को हरी झंडी दिखाकर किया ‘कृषक कल्याण वर्ष’ का शुभारंभ

    भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली, CM मोहन यादव ने किसानों को हरी झंडी दिखाकर किया ‘कृषक कल्याण वर्ष’ का शुभारंभ




    भोपाल।
    भोपाल में रविवार का दिन किसानों के नाम रहा, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोकता बायपास स्थित आरटीओ कार्यालय के पास से 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री खुद ट्रैक्टर की स्टेयरिंग संभालते नजर आए और रैली में शामिल होकर किसानों के साथ कदम से कदम मिलाया। उनके साथ कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और विधायक रामेश्वर शर्मा भी ट्रैक्टर पर सवार रहे। सैकड़ों ट्रैक्टरों की कतार और किसानों का उत्साह राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही दृश्य रच रहा था।

    रैली को रवाना करने से पहले कोकता बायपास क्षेत्र ‘बोल बम’ और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए इतिहास और आस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन आज वही सोमनाथ मंदिर फिर से अपने वैभव में भोलेनाथ के जयकारों से गूंज रहा है।

    उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके संकल्प से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। साथ ही मुख्यमंत्री ने अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण को 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया।

    ट्रैक्टर रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह पिछले वर्ष पूरे प्रदेश में ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ मनाया गया था, उसी तर्ज पर अब सरकार ने पूरे साल को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। यह केवल एक दिन या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सालभर किसानों के हित में योजनाबद्ध और निरंतर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि इस वर्ष के अंत तक किसानों की आय, खेती की लागत और उत्पादन से जुड़े कई ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि कृषक कल्याण वर्ष केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। अब प्रदेश के 16 विभाग मिलकर किसानों के लिए काम करेंगे, ताकि खेती से जुड़े हर पहलू को मजबूत किया जा सके।

    उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर इस समय लगभग 16 प्रतिशत की गति से बढ़ रही है और इसे और आगे ले जाने के लिए किसानों की आय बढ़ाने तथा लागत घटाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रैली के दौरान कहा कि हेलिकॉप्टर से आते समय जहां नजर गई, वहां ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिखाई दे रहे थे। यह तो सिर्फ झांकी है, आने वाले समय में किसान कल्याण की तस्वीर और भी बड़ी होगी।

    रैली के बाद मुख्यमंत्री जंबूरी मैदान पहुंचे, जहां ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों को सरकार की आगामी योजनाओं, कार्यक्रमों और कार्ययोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य खेती को केवल परंपरागत कार्य न मानकर उसे लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित रोजगार का माध्यम बनाना है।

    कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत सरकार का विशेष फोकस उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर रहेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी को एकीकृत करते हुए जिला स्तरीय क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाओं, उच्च उत्पादकता और कृषि प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। एग्री-टेक, ड्रोन सेवाएं, एफपीओ प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि और समृद्ध ग्रामीण क्षेत्र मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसी कारण राज्य सरकार लगातार कृषि बजट में बढ़ोतरी कर रही है। समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी, सोयाबीन उत्पादकों के लिए भावांतर योजना, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना और रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना जैसी कई योजनाएं पहले से संचालित हैं।

    कृषक कल्याण वर्ष-2026 के माध्यम से इन सभी योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा।

    इस भव्य ट्रैक्टर रैली और कार्यक्रम के चलते भोपाल की कई सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया। कोकता बायपास, मिसरोद-सलैया क्षेत्र, खजूरी कला, पटेल नगर चौराहा, प्रेस्टीज कॉलेज के आसपास और जंबूरी मैदान तक जाने वाले मार्गों पर विशेष ट्रैफिक प्लान लागू रहा। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।

    कुल मिलाकर, 1101 ट्रैक्टरों की यह रैली केवल एक शक्ति प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों को केंद्र में रखकर विकास की नई कहानी लिखने जा रही है। ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के जरिए सरकार का लक्ष्य अन्नदाता के सम्मान, आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।

  • मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ने 2 साल बाद भूपेंद्र के क्षेत्र का किया पहला दौरा; राजपूत भी रहे मौजूद

    मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ने 2 साल बाद भूपेंद्र के क्षेत्र का किया पहला दौरा; राजपूत भी रहे मौजूद

    भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव शनिवार को खुरई पहुंचे, यह उनका अपने पद संभालने के दो साल बाद भूपेंद्र सिंह के क्षेत्र का पहला दौरा था। इस अवसर पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव भी यादव के साथ मौजूद रहे। खुरई में आयोजित रोड शो और जनसैलाब ने मुख्यमंत्री को काफी भावुक कर दिया।

    मुख्यमंत्री यादव ने खुरई के लिए 312 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की घोषणा की। यादव ने स्वागत और उत्साह देख कर कहा कि वह यहां ठहरने का मन कर रहे थे। यादव ने पिछले दो सालों में लगभग सभी भाजपा विधायकों के क्षेत्रों का दौरा किया है, लेकिन भूपेंद्र सिंह इस दौरान ज्यादातर दौरों में अनुपस्थित रहे।

    राजनीतिक माहौल पर नजर डालें तो सागर में पिछले दो साल से भूपेंद्र और गोविंद के बीच सियासी प्रतिस्पर्धा जारी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में सागर दौरे के दौरान दोनों नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की थी। इस दौरे के दौरान दोनों नेताओं को एक साथ मंच पर देखा गया।

    राजपूत का भाषण विवाद

    कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री यादव को भाषण के बाद फोन किया। लेकिन इसके बावजूद गोविंद सिंह राजपूत ने अपना भाषण दे दिया। भूपेंद्र ने समय की कमी का हवाला दिया, बावजूद इसके राजपूत ने अपनी बात रखी, जिससे हल्का विवाद देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव का खुरई दौरा दो वर्षों के बाद भूपेंद्र सिंह के क्षेत्र में विकास योजनाओं की घोषणाओं और राजनीतिक समीकरणों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंच पर दोनों नेताओं की उपस्थिति और राजपूत का भाषण विवाद इस दौरे की चर्चा का प्रमुख हिस्सा बना।

  • मध्यप्रदेश में छोटे दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में अनावश्यक निरीक्षणों पर रोक

    मध्यप्रदेश में छोटे दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में अनावश्यक निरीक्षणों पर रोक


    भोपाल! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा निर्देशों के अनुसार मध्यप्रदेश शासन श्रम विभाग द्वारा मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1958 में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। यह संशोधन राज्य में इज ऑफ डुईंग बिजनेस को बढ़ावा देने तथा दुकानदारों एवं प्रतिष्ठान संचालकों पर अनुपालन का अनावश्यक भार कम करने के उद्देश्य से किया गया है। संशोधन के अंतर्गत अब ऐसी दुकानें एवं संस्थान, जिनमें 20 से कम कर्मचारी कार्यरत हैं, उनके यहाँ श्रम निरीक्षकों द्वारा निरीक्षण केवल राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जा सकेगा। इससे अनावश्यक निरीक्षणों पर रोक लगेगी।

    श्रम विभाग के अपर सचिव श्री बसंत कुर्रे ने बताया है कि इस निर्णय से छोटे दुकानदारों एवं उद्यमियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। साथ ही दुकानदारों में स्व-अनुपालन की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा। व्यापार एवं रोजगार सृजन के लिए अनुकूल वातावरण विकसित होगा। इससे समय, संसाधन एवं लागत की बचत होगी।मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा छोटे दुकानदारों के प्रति संवेदनशीलता बरती जा रही है।

    श्रम विभाग ने सभी दुकानदारों, व्यापार संघों एवं उद्यमियों से अपेक्षा की है कि वे श्रम कानूनों का स्वेच्छा से पालन करें और इस सकारात्मक सुधार का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय का विस्तार करें।

  • मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव खाचरौद में 74.35 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की देंगे सौगात

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव खाचरौद में 74.35 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की देंगे सौगात

    भोपाल ! मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को उज्जैन जिले के खाचरौद में 74.35 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के विभिन्‍न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इसमें 48.51 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और 25.84 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खाचरौद में 35.40 करोड़ की लागत से निर्मित सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण करेंगे। साथ ही खाचरौद में 9 करोड़ 10 लाख रूपये की लागत से बनने वाले संयुक्त तहसील कार्यालय भवन का भूमि-पूजन करेंगे।
  • BJP में स्वागत है… CM मोहन यादव ने RSS की तारीफ पर दिग्विजय सिंह को दिया ऑफर

    BJP में स्वागत है… CM मोहन यादव ने RSS की तारीफ पर दिग्विजय सिंह को दिया ऑफर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने भाजपा (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) (Rashtriya Swayamsevak Sangh – RSS) की संगठनात्मक शक्ति की प्रशंसा करने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने दिग्विजय को राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री ने ठुकरा दिया।

    दिग्विजय सिंह ने शनिवार को आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक शक्ति की सराहना करते ‘एक्स’ पर एक पुरानी तस्वीर साझा की थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं तथा उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने पोस्ट में कहा था, ‘‘कोरा वेबसाइट पर मुझे यह फोटो मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।’’

    विवाद खड़ा होने पर सिंह ने कहा था कि उन्होंने केवल संगठन और इसकी शक्ति की तारीफ की है, अन्यथा वह आरएसएस और मोदी के घोर विरोधी हैं। दिग्विजय सिंह की ओर से आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक शक्ति की सराहना किए जाने के बारे में एक समाचार चैनल से बातचीत में मोहन यादव ने रविवार को इंदौर में कहा कि भाजपा है ही इस लायक कि उसकी तारीफ की जाए। उन्होंने कहा, ‘‘दिग्विजय सिंह जी को भी बधाई। आइए, भाजपा में आपका स्वागत है।’’

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के बाद रविवार शाम भोपाल पहुंचे दिग्विजय सिंह से जब मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से भाजपा में शामिल होने को लेकर दिए गए प्रस्ताव के बारे में पूछा गया तो वह ‘अरे छोड़िए’ कहकर आगे बढ़ गए। राजनीतिक हलकों में दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के रूप में देखा जा रहा है।

  • खेल हमारी संस्कृति का प्रमुख पक्ष, हमने बनाया है खेलों को शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    खेल हमारी संस्कृति का प्रमुख पक्ष, हमने बनाया है खेलों को शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेल हमेशा से हमारी भारतीय संस्कृति का एक अहम अंग रहा है। हमारे व्यक्तित्व के विकास में एक प्रमुख पक्ष के रूप में खेलों में हमारे जीवन को दिशा दी है। हमने खेलों को स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है। हमारे खिलाड़ी प्राय: हर खेल में देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खिलाड़ियों से आव्हान किया कि वे चाहे जिस किसी भी खेल के खिलाड़ी रहें, अपनी लगन और मेहनत से हमेशा अपना उत्कृष्ट देने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर में एक निजी स्कूल द्वारा आयोजित 7वें नेशनल रैंकिंग पिकलबॉल टूर्नामेंट-2025 को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश राज्य ऑलम्पिक एसोशिएशन के संरक्षक भी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिककाल से हमारी संस्कृति में खेलों का बड़ा योगदान रहा है। कई मामलों में भारतीयों ने अपने दौर से भी आगे बढ़कर विश्व में खेलों में नाम कमाया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के नवनिर्माण में खिलाड़ियों की भी अहम भूमिका है। खिलाड़ियों के योगदान से हम अपनी भावी पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक वातावरण तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल नए खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं, बल्कि खेल अधोसंरचना के विकास को भी नए आयाम मिल रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सबसे तेज गति से औद्योगिक प्रगति करने वाला राज्य बन रहा है। औद्योगिक विकास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाईयों, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। देश को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश का सर्वाधिक योगदान होगा।

    निजी स्कूल के अध्यक्ष श्री स्वप्निल कोठारी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुषार्थ से ही व्यक्तित्व का विकास होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल की रील से बाहर निकलें, मैदान में आकर परिश्रम करें, तभी वे देश के लिए पसीना और रक्त बहाने के योग्य बनेंगे। उन्होंने सभी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्प ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ में सक्रिय रूप से सहभागी बनकर अधिकतम योगदान देने की अपील की।

    कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट, विधायक श्री रमेश मेंदोला, श्री बलवंत, श्री गणेश अग्रवाल, श्री गोपाल अग्रवाल, श्री सुनील सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित थे। कार्यक्रम में विभिन्न खेलों में नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों का सम्मान भी किया गया।

  • लॉ एंड ऑर्डर से लेकर रोजगार तक CM मोहन यादव का बड़ा बयान: कहा-मंत्री का भाई भी नहीं बचा मार्गदर्शन मिला तो मंत्रिमंडल बदलेगा

    लॉ एंड ऑर्डर से लेकर रोजगार तक CM मोहन यादव का बड़ा बयान: कहा-मंत्री का भाई भी नहीं बचा मार्गदर्शन मिला तो मंत्रिमंडल बदलेगा


    भोपाल /मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल को 13 दिसंबर को दो साल पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने एक चर्चित अखबार के साथ से विशेष बातचीत में अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियों चुनौतियों और आने वाले तीन सालों के रोडमैप को विस्तार से रखा। बातचीत में लॉ एंड ऑर्डर नक्सलवाद रोजगार निवेश कृषि संकट मेट्रो प्रोजेक्ट और मंत्रिमंडल फेरबदल जैसे अहम मुद्दे केंद्र में रहे।

    कानून से ऊपर कोई नहीं मंत्री का भाई भी गिरफ्तार हुआa
    लॉ एंड ऑर्डर पर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार में कानून सबके लिए समान है।उन्होंने कहा अगर कोई गलत करेगा तो वह बचेगा नहीं। मंत्री का भाई भी कानून से ऊपर नहीं है उसे भी गिरफ्तार किया गया है। यही सुशासन है। CM के इस बयान को सख्त प्रशासनिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    नक्सलवाद पर बड़ी उपलब्धि
    मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनाया।उन्होंने कहा कि मंडला बालाघाट और डिंडौरी जैसे जिलों से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है।बीते एक साल में 10 नक्सलियों को ढेर किया गया और कई बार नक्सलियों ने सरेंडर किया। CM ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले नक्सली खुलेआम हिंसा करते थे लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    दिल्ली से सरकार चलने के आरोपों पर पलटवार

    विपक्ष के इस आरोप पर कि मध्य प्रदेश सरकार दिल्ली से चलाई जा रही है मुख्यमंत्री ने कहा-हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री गृह मंत्री और पार्टी नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलता है। केंद्र और राज्य के अच्छे संबंधों से ही विकास तेज होता है।रोजगार पर फोकस: 60 हजार से ज्यादा नौकरियां रोजगार को बड़ी चुनौती मानते हुए CM ने बताया कि बीते दो सालों में 60 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं।उन्होंने कहा- बिजली विभाग में 50 हजार पद, स्वास्थ्य विभाग में 42 हजार पद,पुलिस विभाग में 22500 से अधिक पद,मंजूर किए गए हैं। भविष्य में एक परीक्षा-एक भर्ती सिस्टम लागू करने की भी योजना है।

    पेपर लीक पर सख्ती
    भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के सवाल पर CM ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कोई बड़ा पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पारदर्शी और समयबद्ध परीक्षाएं सरकार की प्राथमिकता हैं।

    निवेश और इंडस्ट्रियल ग्रोथ
    CM ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निवेश सिर्फ कागजों में नहीं जमीन पर उतर रहा है।उन्होंने बताया कि 6 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है।सागर में खाद कारखाने और 30 हजार करोड़ के नए इंडस्ट्रियल पार्क का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास अब हर क्षेत्र में दिख रहा है।

    कृषि और खाद संकट पर जवाब
    कृषि आधारित वर्ष की घोषणा को लेकर CM ने कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है।उन्होंने माना कि कहीं-कहीं वितरण में दिक्कत आती है लेकिन अब SMS और होम डिलीवरी सिस्टम पर काम किया जा रहा है।

    भोपाल मेट्रो और मास्टर प्लान
    भोपाल मेट्रो को लेकर CM ने कहा कि प्रधानमंत्री वीडियो संदेश के जरिए जुड़ेंगे और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में लोकार्पण होगा।भोपाल मास्टर प्लान पर उन्होंने कहा-25 साल का बैकलॉग है दो साल में सब नहीं होगा लेकिन समाधान जरूर निकलेगा।

    मंत्रिमंडल विस्तार पर क्या बोले?
    मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के सवाल पर CM ने साफ कहा-जैसा पार्टी के पार्लियामेंट्री बोर्ड प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलेगा वैसा ही करेंगे।

    सादगी का संदेश: सामूहिक विवाह में बेटे की शादी
    CM ने अपने छोटे बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने के फैसले को सामाजिक संदेश बताया।उन्होंने कहा-दिखावे की शादी समाज पर बोझ डालती है। बड़े लोग फिजूलखर्ची करेंगे तो गरीब कर्ज लेगा।उन्होंने अंतिम संस्कार और विवाह में अनावश्यक खर्च से बचने की अपील भी की। डॉ. मोहन यादव के इंटरव्यू से साफ है कि सरकार सख्त प्रशासन तेज विकास और सामाजिक सादगी को अपनी पहचान बनाना चाहती है। अब देखना यह होगा कि अगले तीन सालों में ये दावे जमीन पर कितने असरदार साबित होते हैं।

  • जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण

    जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन मध्यप्रदेश इस कार्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन के संचालन-संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में जल आपूर्ति प्रभावित न हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। विगत 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाँव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही।

    बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी और प्रबंध संचालक जल निगम श्री के.वी.एस. चौधरी भी उपस्थित थे।

    प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।

    बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य

    बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है।

    वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रु. का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रु. का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएँ 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर हैं।

    विभाग द्वारा तकनीकी और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। जल रेखा मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है। राज्य की सभी 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल जल कर संग्रह व्यवस्था लागू की गई है। इंदौर में IoT (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) आधारित जल आपूर्ति मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इसे अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है।

    ऊर्जा प्रबंधन को देखते हुए 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर स्वीकृत की गई है, जिससे आने वाले 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना पर भी कार्ययोजना तैयार की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए जलदर्पण पोर्टल संचालित है तथा शिकायत निवारण हेतु कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। अभी 64 ग्रामों में 24×7 जल आपूर्ति पायलट रूप में सफल रही है, जिसे आगे और विस्तृत किया जाएगा।

    बैठक में भविष्य के विजन पर जानकारी देते हुए बताया गया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजिटल प्रबंधन, तकनीकी क्षमता संवर्धन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य संस्थान और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सके।