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  • रामलला के दर पर पहुंचे दिग्विजय सिंह: पहली बार अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन, बोले काफी अच्छा लगा

    रामलला के दर पर पहुंचे दिग्विजय सिंह: पहली बार अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन, बोले काफी अच्छा लगा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या स्थित भगवान राम मंदिर में पहली बार श्रीरामलला के दर्शन किए अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के बाद यह उनका पहला दौरा था दर्शन के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर आकर काफी अच्छा लगा उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी जल्द स्वस्थ हों और हमारा नेतृत्व करते रहें

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का चंदा दिया था और मंदिर के पूरा होने के बाद दर्शन करने की इच्छा जताई थी अब मंदिर पूरा हो गया है तो वे दर्शन करने आए हैं उनके इस कदम से कांग्रेस के भीतर और राज्य में सियासी हलचल भी बढ़ गई है

    दिग्विजय सिंह के रामलला दर्शन पर सियासत गरमाई पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि राम मंदिर बीजेपी की बपौती नहीं है राघोगढ़ में भी भगवान राम विराजमान हैं वहां उनके नाम की ज्योति जलती है राम मंदिर निर्माण के लिए दिग्विजय सिंह ने चेक से राशि दी थी और मंदिर पूरा होने पर दर्शन करने आए हैं भगराम राम सबके हैं

    वहीं बीजेपी प्रवक्ता डॉ हितेष बाजपेयी ने कहा कि दिग्विजय सिंह चतुर और उद्देश्य परख राजनीति करते हैं राज्यसभा की सीट पर चुनाव होने वाला है और इसी उद्देश्य को लेकर वे पहुंचे होंगे उन्होंने कहा कि वैसे कांग्रेस और राम मंदिर का दृष्टिकोण विरोधाभाषी रहा है

    इस तरह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का रामलला दर्शन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बन गया है उनके कदम ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी समीकरणों को भी नई दिशा दी है

  • कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश

    कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश


    नई दिल्ली: देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने का निर्देश मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह वही दफ्तर है जो लगभग 48 वर्षों तक कांग्रेस की पहचान बना रहा और पार्टी के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का गवाह रहा। सरकार की ओर से कांग्रेस को शनिवार तक इस भवन को खाली करने के लिए कहा गया है, जिससे यह मामला अब सियासी और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को केवल 24 अकबर रोड ही नहीं बल्कि 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस के दफ्तर को भी खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि कांग्रेस ने पिछले वर्ष कोटला मार्ग पर अपने नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ का उद्घाटन कर दिया था, लेकिन अब तक वह पूरी तरह से पुराने दफ्तर से शिफ्ट नहीं हो पाई है। पार्टी की गतिविधियां अभी भी अकबर रोड स्थित भवन में जारी हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

    कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे को लेकर मंथन चल रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि 24 अकबर रोड से उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा है, क्योंकि यह दफ्तर केवल एक कार्यालय नहीं बल्कि पार्टी के इतिहास और संघर्ष का प्रतीक रहा है।

    इस दफ्तर का इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है। ब्रिटिश शासन के समय यह भवन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास स्थान था। बाद में यह म्यांमार की भारत में राजदूत डॉ खिन क्यी का निवास भी रहा, जिनकी बेटी आंग सान सू की ने आगे चलकर नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया। इस तरह यह भवन अंतरराष्ट्रीय और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

    कांग्रेस के लिए यह दफ्तर 1970 के दशक के अंत से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया। 1977 के चुनाव में हार के बाद जब पार्टी में विभाजन हुआ और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट को एक नए केंद्र की जरूरत थी, तब जी वेंकटस्वामी ने अपना बंगला पार्टी को उपलब्ध कराया। यहीं से कांग्रेस की राजनीतिक वापसी की कहानी शुरू हुई। इसके बाद यह दफ्तर इंदिरा गांधी के नेतृत्व से लेकर राजीव गांधी, पी वी नरसिम्हा राव और डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक पार्टी का प्रमुख केंद्र बना रहा।

    समय के साथ इस भवन को पार्टी ने अपनी जरूरतों के अनुसार विस्तार भी दिया, लेकिन हाल के वर्षों में संगठन के पुनर्गठन के चलते पार्टी ने नया मुख्यालय बनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में कोटला मार्ग स्थित इंदिरा भवन’ का उद्घाटन किया गया, जो अब कांग्रेस का नया ठिकाना बन चुका है।

    अब जब सरकार ने पुराने दफ्तर को खाली करने का आदेश दिया है, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक बदलाव भी माना जा रहा है। कांग्रेस इस आदेश को लेकर अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करने पर विचार कर रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस आदेश पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह अपने ऐतिहासिक दफ्तर को लेकर कोई कानूनी लड़ाई लड़ती है या फिर पूरी तरह से नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ से अपने कामकाज को आगे बढ़ाती है।

  • UPA सरकार ने नहीं की देश की चिंता… कांग्रेस पर बरसे PM मोदी, मिडिल ईस्ट तनाव पर की खुलकर बात

    UPA सरकार ने नहीं की देश की चिंता… कांग्रेस पर बरसे PM मोदी, मिडिल ईस्ट तनाव पर की खुलकर बात


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को एक निजी न्यूज चैनल के शिखर सम्मेलन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार (UPA Government) ने देश की चिंता नहीं, बल्कि अपनी सत्ता बचाने की फिक्र में रहकर गलत फैसले लिए। पीएम मोदी ने विशेष रूप से यूपीए काल में जारी किए गए तेल बांडों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए आने वाली पीढ़ियों पर भारी वित्तीय बोझ डाला। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने अपने पत्ते खोले और साफ-साफ बताया कि वे किसके साथ हैं।


    कांग्रेस पर जमकर बरसे

    प्रधानमंत्री ने बताया कि 2004 से 2010 के बीच कांग्रेस सरकार ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड जारी किए थे। उन्होंने कहा कि उस समय पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें संकट में थीं, लेकिन कांग्रेस देश की नहीं, अपनी सत्ता की चिंता कर रही थी। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हवाले से कहा कि उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह फैसला गलत था और इससे आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ पड़ेगा।

    पीएम मोदी ने ‘रिमोट कंट्रोल’ से सरकार चलाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग दूर से सरकार चला रहे थे, उन्होंने सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय लिया, क्योंकि उस समय कोई जवाबदेही नहीं थी। उन्होंने खुलासा किया कि इन बांडों का भुगतान 2020 के बाद शुरू हुआ और ब्याज सहित कुल राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस के इस ‘पाप’ को धोने का काम किया है, जिसकी कीमत कम नहीं रही।


    कई गुटों में बंटी है दुनिया

    वैश्विक परिदृश्य पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया कई गुटों में बंटी हुई है, लेकिन भारत ने मजबूत और व्यापक साझेदारियां बनाई हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच भारत ने खाड़ी देशों से लेकर वैश्विक पश्चिम और दक्षिण तक सभी के साथ विश्वसनीय साझेदारी कायम की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं कि हम किसके साथ हैं? मेरा जवाब है- हम भारत के साथ हैं। हम भारत के हितों, शांति और संवाद के साथ हैं।

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला लड़खड़ा रही है, लेकिन भारत ने विविधीकरण और लचीलेपन का मॉडल पेश किया है। ऊर्जा, उर्वरक और आवश्यक वस्तुओं के मामले में सरकार ने नागरिकों को न्यूनतम परेशानी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। कोरोना महामारी के बाद से लगातार चुनौतियां आईं, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के एकजुट प्रयास से देश हर विपदा से पार पा रहा है।

    उन्होंने हाल की 23 दिनों की उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में भी भारत ने अपनी कूटनीति, निर्णय क्षमता और संकट प्रबंधन की ताकत दिखाई है। दुनिया भारत की नीति और रणनीति से आश्चर्यचकित है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत प्रगति, विकास और विश्वास के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

  • अमेरिकी कांग्रेस में एच-1बी वीजा प्रणाली पर बहस तेज: कौशल आधारित सुधार और नौकरी बदलाव की स्वतंत्रता पर जोर

    अमेरिकी कांग्रेस में एच-1बी वीजा प्रणाली पर बहस तेज: कौशल आधारित सुधार और नौकरी बदलाव की स्वतंत्रता पर जोर


    वॉशिंगटन। अमेरिका में एच-1बी वीजा कार्यक्रम जिसके तहत बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर वहां काम करते हैं इस हफ्ते अमेरिकी कांग्रेस में चर्चा का मुख्य विषय बना। संयुक्त आर्थिक समिति की बैठक में नेताओं और विशेषज्ञों ने मौजूदा लॉटरी आधारित वीजा प्रणाली की समीक्षा की और इसमें सुधार के सुझाव दिए।

    बैठक में प्रमुख मुद्दा यह था कि अमेरिका की बदलती जनसांख्यिकी और कामगारों की कमी को देखते हुए वीजा वितरण प्रणाली को अधिक लचीला और कुशलता आधारित बनाया जाए। कांग्रेस के सदस्य डेविड श्वाइकर्ट ने बताया कि रिटायर होने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जबकि काम करने वाले युवा स्थिर हैं। ऐसे में विदेशी कुशल कामगारों की भूमिका अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।

    विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा सिस्टम में कर्मचारी अधिकतर एक ही नियोक्ता पर निर्भर रहते हैं जिससे उनके वेतन पर दबाव पड़ता है। डॉ. ल्यूक पार्ड्यू ने सुझाव दिया कि अगर कर्मचारियों को नौकरी बदलने की अधिक स्वतंत्रता मिले तो उनकी उत्पादकता और वेतन दोनों बढ़ सकते हैं। हालांकि उन्होंने अंक आधारित (पॉइंट) सिस्टम बनाते समय सावधानी बरतने की चेतावनी दी।

    डैनियल डी. मार्टिनो ने कहा कि स्थायी निवास में देरी और लॉटरी सिस्टम की खामियां हैं। उन्होंने वीजा आवंटन में वेतन और कौशल आधारित चयन की वकालत की ताकि युवा और कुशल कामगारों को प्राथमिकता मिल सके। डॉ. डगलस होल्ट्ज-ईकिन ने भी कौशल आधारित इमिग्रेशन को बढ़ावा देने का समर्थन किया और कहा कि सुधार केवल एच-1बी तक सीमित नहीं होना चाहिए।

    जेरेमी न्युफेल्ड ने बताया कि अन्य देशों के अनुभव से पता चलता है कि सिर्फ पॉइंट सिस्टम पर्याप्त नहीं है। नौकरी का ऑफर मिलने पर अतिरिक्त अंक देने वाला मिश्रित सिस्टम अधिक प्रभावी हो सकता है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कुशल विदेशी कामगार अमेरिकी अर्थव्यवस्था की उत्पादकता बढ़ाते हैं और लंबे समय में वेतन में सुधार करते हैं।

    प्रतिनिधि लॉयड स्मकर ने पूछा कि क्या इमिग्रेशन बढ़ाने से आर्थिक विकास और राष्ट्रीय कर्ज की समस्या में मदद मिल सकती है। इस पर होल्ट्ज-ईकिन ने सहमति जताई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर भी चर्चा हुई जिसमें पार्ड्यू ने कहा कि एआई नौकरियां कम नहीं करेगा बल्कि नई तरह के कौशल की मांग बढ़ाएगा।

    कांग्रेस सदस्य विक्टोरिया स्पार्ट्ज और अन्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इमिग्रेशन नीति में मेहनती और कुशल लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और सिस्टम को समय के साथ बदलना चाहिए ताकि यह बदलती आर्थिक और बाजार की जरूरतों के अनुरूप काम करे।

    अंत में श्वाइकर्ट ने कहा कि प्रतिभा आधारित इमिग्रेशन सुधार अमेरिकी आर्थिक विकास उत्पादकता वेतन और स्थिरता के लिए आवश्यक है। एच-1बी वीजा अभी भी तकनीक और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विदेशी कुशल पेशेवरों के लिए मुख्य मार्ग है और इस पर किसी भी बदलाव पर भारत भी नजर रखता है।

  • कांग्रेस ने असम चुनाव के लिए 22 उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की, अबतक कुल 87 नाम घोषित

    कांग्रेस ने असम चुनाव के लिए 22 उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की, अबतक कुल 87 नाम घोषित


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को 22 उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की। इससे पहले पार्टी 42 उम्मीदवारों वाली पहली और 23 उम्मीदवारों वाली दूसरी सूची जारी कर चुकी है। तीसरी सूची के साथ अब तक कुल 87 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जा चुके हैं।

    पार्टी की ओर से जारी सूची:
    1.कोकराझार (3) (अनुसूचित जनजाति) : मनिक ब्रह्मा
    2.बाओखुंगग्री (4) : सपाली माराक
    3.परबतझोरा (5) : अशराफुल इस्लाम शेख
    4.धुबरी (8) : बेबी बेगम
    5.जलेस्वर (12) : आफताब उद्दीन मोल्लाह
    6.अभयापुरी (16) : प्रदीप सरकार
    7.सिदली चिरांग (19) (अनुसूचित जनजाति) : मातिलाल नरजारी
    8.चेंगा (23) : अब्दुर रहीम अहमद
    9.पाकाबेटबारी (25) : जाकिर हुसैन सिकदार
    10.बक्सा (42) (अनुसूचित जनजाति) : जगदीश मदाई
    11.तामुलपुर (43) (अनुसूचित जनजाति) : रफी डैमारी
    12.उदालगुड़ी (46) (अनुसूचित जनजाति) : सोरेन डैमारी
    13.लाहरीघाट (53) : डॉ. आसिफ मोहम्मद नजर
    14.नागांव-बतरद्राबा (60) : डॉ. दुरलव चमुआ
    15.नदुआर (69) : सुनील चेत्री
    16.रोंगोनादी (74) : जयोन्तो खौंड
    17.लखीमपुर (76) : घना बुरागोहैं
    18.धकुआखाना (77) (अनुसूचित जनजाति) : आनंद नाराह
    19.माकुम (85) : सिबनाथ चेतिया
    20.खुमताई (106) : रोसेलिना तिर्की
    21.होवारघाट (109) (अनुसूचित जनजाति) : संजीब टेरोन
    22.अल्गापुर-कटलीचेड़ा (122) : जुबैर अनाम मजूमदार

  • Assam: प्रद्युत बोरदोलोई ने इस्तीफे की बताई वजह, बोले- कांग्रेस में अकेलापन और अपमानित महसूस किया

    Assam: प्रद्युत बोरदोलोई ने इस्तीफे की बताई वजह, बोले- कांग्रेस में अकेलापन और अपमानित महसूस किया


    नई दिल्ली। असम से कांग्रेस के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन पार्टी के भीतर लगातार अपमान और नेतृत्व से सहानुभूति न मिलने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

    बोरदोलोई ने स्पष्ट किया कि असम कांग्रेस में कई लोग उनसे संपर्क करने के बावजूद बार-बार अपमानजनक व्यवहार कर रहे थे, और इस स्थिति ने उनके लिए पार्टी में अकेलापन बढ़ा दिया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को छोड़ दिया है और इसके लिए खुश नहीं हूं, लेकिन हालात ने मुझे यह निर्णय लेने पर मजबूर किया।”

    इस्तीफा और पार्टी के भीतर मतभेद

    प्रद्युत बोरदोलोई ने यह भी बताया कि वे जीवनभर कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन हाल ही में उनकी स्थिति इतनी कठिन हो गई थी कि इस्तीफा देना अनिवार्य हो गया। उनका इस्तीफा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अध्यक्ष को सौंप दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे असम कांग्रेस में आंतरिक मतभेद और नेताओं के बीच बढ़ते तनाव का संकेत मान रहे हैं।

    सीएम सरमा की प्रतिक्रिया

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि फिलहाल उनका सांसद प्रद्युत बोरदोलोई से कोई संपर्क नहीं है, लेकिन भविष्य में बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राजधानी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि बोरदोलोई ने केंद्रीय गृह मंत्री से संपर्क किया होता, तो उन्हें इसकी जानकारी जरूर होती। फिलहाल ऐसा प्रतीत नहीं होता कि उन्होंने किसी भाजपा नेता से बात की हो।

    विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियां

    असम विधानसभा की कुल 126 सीटों में से बहुमत पाने के लिए 64 सीटें आवश्यक हैं। चुनाव अधिसूचना 16 मार्च को जारी की गई, जबकि नामांकन की अंतिम तारीख 23 मार्च है। नामांकन पत्रों की जांच 24 मार्च को होगी और नाम वापसी की आखिरी तारीख 26 मार्च निर्धारित की गई है। मतदान 9 अप्रैल को होगा और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

    पिछला चुनाव परिणाम

    2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने असम की 126 सीटों में से 60 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के खाते में 29 सीटें आईं जबकि एआईयूडीएफ ने 16 सीटें हासिल कीं। असम गढ़ परिषद को नौ, यूपीपीएल को छह, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को चार, माकपा को एक और सिबसागर सीट पर निर्दलीय उम्मीदार अखिल गोगोई ने जीत दर्ज की थी।

  • Assam: चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, दो बड़े नेताओं ने छोड़ी पार्टी

    Assam: चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, दो बड़े नेताओं ने छोड़ी पार्टी


    दिसपुर।
    विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले असम (Assam) की राजनीति में हलचल मच गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के प्रमुख चेहरों में शुमार नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई (Pradyut Bordoloi) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। दूसरी ओर असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार (Navjyoti Talukdar) ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा असम में आगामी विधानसभा चुनावों से महज कुछ दिनों पहले आया है, जिससे कांग्रेस को गहरा धक्का लगा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे अपने त्यागपत्र में नवज्योति तालुकदार ने पार्टी की कार्यप्रणाली से लंबे समय से चली आ रही असंतुष्टि, समन्वय की कमी और अपनी बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद कोई समाधान न मिलने का हवाला दिया। उन्होंने लिखा है कि ऐसी परिस्थितियों में पार्टी में बने रहना न तो स्वीकार्य है और न ही फलदायी है।

    वहीं, नगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने अपने इस्तीफे पत्र में दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि अत्यंत दुख के साथ, मैं आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं। बता दें कि दोनों इस्तीफा असम विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जब पार्टी के अंदर टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को लेकर गहरी नाराजगी और अंतर्कलह सामने आ रही थी। बोरदोलोई ने हाल ही में पार्टी के असम प्रभारी और अन्य नेताओं को पत्र लिखकर लाहोरीघाट विधानसभा सीट के संभावित उम्मीदवार को लेकर गंभीर आपत्ति जताई थी और इस्तीफे की धमकी भी दी थी।

    इस्तीफे में तालुकदार ने क्या लिखा है?
    दूसरी ओर अपने इस्तीफे में तालुकदार ने साफ-साफ कहा है कि मैं नवज्योति तालुकदार तत्काल प्रभाव से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद, एआईसीसी सदस्य पद तथा प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। इसे इस मामले पर मेरा अंतिम संदेश समझें। मुझे उम्मीद है कि मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा और मेरी सभी जिम्मेदारियां बिना देरी के समाप्त कर दी जाएंगी। बता दें कि यह घटना भूपेन कुमार बोराह के बाद कांग्रेस के लिए बैंक टू बैक तीसरा बड़ा झटका है। फरवरी में एपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोराह ने भी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।

    बता दें कि चुनाव आयोग ने रविवार को असम विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया। प्रदेश की सभी 126 सीटों पर एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा-नीत एनडीए सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस सत्ताधारी दल को हराकर सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरी है। 2021 के चुनाव में एनडीए (भाजपा, एजीपी और यूपीपीएल) ने 75 सीटें जीती थीं, जिसमें भाजपा अकेले 60 सीटों पर काबिज हुई थी। कांग्रेस और एआईयूडीएफ सहित महागठबंधन को मात्र 16 सीटें मिली थीं। 2016 में भाजपा ने 60 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 26 और एआईयूडीएफ को 13 सीटें प्राप्त हुई थीं।

  • तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस ने राजद का गणित बिगाड़ा

    तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ीं, कांग्रेस ने राजद का गणित बिगाड़ा



    नई दिल्ली।  बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन के लिए बड़ा झटका आया है। RJD के उम्मीदवार एडी सिंह के लिए वोट देने के लिए कांग्रेस के तीन और RJD के एक विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए। यह स्थिति RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के लिए चिंता का विषय बन गई है।

    तेजस्वी ने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और मायावती की BSP से समर्थन जुटाकर छह अतिरिक्त वोट जोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन महागठबंधन के अपने चार विधायकों के अनुपस्थित रहने से यह रणनीति कमजोर पड़ गई।

    कांग्रेस के वाल्मीकि नगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, फारबिसगंज के मनोज विश्वास, मनिहारी के मनोहर प्रसाद सिंह और RJD के ढाका के फैसल रहमान वोटिंग में शामिल नहीं हुए। कुल 243 में से 239 विधायकों ने वोट डाला।

    महागठबंधन की योजना थी कि ओवैसी और मायावती के समर्थन से संख्या 35 से बढ़ाकर 41 हो जाएगी। लेकिन चार विधायकों की अनुपस्थिति से यह घटकर 37 रह गई। इससे एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम की जीत की संभावना मजबूत हो गई है।

    तेजस्वी यादव ने विधानसभा में मौजूद रहकर भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी। उन्होंने कहा कि मतदान शाम 4 बजे तक है और परिणाम आने के बाद ही वह इस पर कुछ कहेंगे।

    विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी और कांग्रेस के अंदर मतभेदों को उजागर करती है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी महागठबंधन के सीट बंटवारे में देरी और किचकिच को पराजय के कारणों में गिना गया था, और यही माहौल अब राज्यसभा चुनाव में भी देखने को मिला।

    एनडीए के अन्य चार उम्मीदवार हैं: नीतीश कुमार (JDU अध्यक्ष और CM), नितिन नवीन (BJP अध्यक्ष), रामनाथ ठाकुर (JDU केंद्रीय मंत्री) और उपेंद्र कुशवाहा (RLM अध्यक्ष)। चार विधायकों के वोट न डालने से एनडीए की स्थिति मजबूत हुई है और उनके सभी उम्मीदवार दिल्ली पहुंच सकते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह घटना महागठबंधन के लिए गंभीर चेतावनी है। कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक कमजोरी और मतभेद गठबंधन की सफलता पर असर डाल सकते हैं। तेजस्वी यादव और RJD को अब संगठन मजबूत करने, सहयोग सुनिश्चित करने और वोटिंग रणनीति पर नजर रखने की जरूरत है।

  • पश्चिम एशिया युद्ध की स्थिति में भी अफवाह फैला रही कांग्रेस : मोदी

    पश्चिम एशिया युद्ध की स्थिति में भी अफवाह फैला रही कांग्रेस : मोदी


    गुवाहाटी। प्र
    धानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट और युद्ध की परिस्थितियों के बीच भी कांग्रेस देश में अफवाह फैलाने और गलत जानकारी देने में लगी हुई है, जबकि भाजपा-एनडीए सरकार किसानों के हित, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पूर्वोत्तर के विकास के लिए लगातार काम कर रही है।

    प्रधानमंत्री ने यहां एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान असम के लिए 19,500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह किसी भी स्थिति में देश के प्रति ईमानदार नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि वे 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के भाषण को सुनें। मोदी ने कहा कि पंडित नेहरू ने एक बार कहा था कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच चल रहे युद्ध की वजह से भारत में महंगाई बढ़ रही है। आज कांग्रेस के लोग भी उसी तरह देश को गुमराह करने में लगे हैं, जबकि वैश्विक संकटों का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ता है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा-एनडीए सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक काम किया है। आज भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों का ध्यान रख रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में गैस पाइपलाइन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास पर अभूतपूर्व निवेश किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि किसानों के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ ही समय पहले पूरे देश के करोड़ों किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी गई है। यह योजना देश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन चुकी है।

    उन्होंने कहा कि 2014 से पहले ऐसे लाखों किसान थे जिनके पास न तो मोबाइल फोन था और न ही बैंक खाता, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय समावेशन के माध्यम से करोड़ों किसानों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है और अब तक उनके खातों में सवा चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि भेजी जा चुकी है।

    प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई थी, तब कांग्रेस के लोगों ने इसके बारे में झूठ फैलाया था। कांग्रेस के नेता किसानों से कहते थे कि चुनाव के बाद उन्हें यह पैसा वापस करना पड़ेगा, लेकिन आज यह योजना किसानों के लिए एक मजबूत सहारा बन चुकी है। मोदी ने कहा कि भाजपा-एनडीए सरकार के लिए किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले केंद्र में दस वर्षों तक कांग्रेस की सरकार रही और उस दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के रूप में लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये मिले थे। इसके विपरीत पिछले दस वर्षों में उनकी सरकार ने किसानों को एमएसपी के रूप में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। एमएसपी, सस्ता कृषि ऋण, फसल बीमा और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वैश्विक संकटों का असर भारत की खेती पर कम से कम पड़े।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड महामारी और उसके बाद हुए वैश्विक संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई थी। कई देशों में इसकी कमी हो गई थी, लेकिन भारत सरकार ने किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी। जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत लगभग 3000 रुपये तक पहुंच गई थी, वहीं भारत में किसानों को यह मात्र 300 रुपये में उपलब्ध कराई गई। इसके लिए केंद्र सरकार ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दशक में देश को कृषि और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। लंबे समय तक कांग्रेस सरकारों ने देश को कई क्षेत्रों में विदेशों पर निर्भर बनाए रखा, जिससे अंतरराष्ट्रीय संकटों का सीधा असर भारत के किसानों और आम लोगों पर पड़ता था।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” नीति लागू की है, जिसके तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को सोलर पंप से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि डीजल पर उनकी निर्भरता कम हो सके। असम के विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य आज पूरे पूर्वोत्तर के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि असम की प्रगति का प्रभाव पूरे नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है और यह क्षेत्र देश के विकास में नई गति प्रदान कर रहा है।

    प्रधानमंत्री ने असम के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिक परिवारों का जिक्र किया और कहा कि राज्य सरकार ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करते हुए चाय बागान श्रमिकों को भूमि के पट्टे प्रदान कर रही है। इससे हजारों परिवारों को पहली बार भूमि का अधिकार मिल रहा है। असम आज शांति, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह राज्य पूरे पूर्वोत्तर के उज्ज्वल भविष्य का मार्गदर्शक बनेगा।

  • दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग

    दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग


    भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने महिला दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव होता रहा है और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती चावल को एपीडा से जीआई टैग नहीं दिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार जीआई टैग नहीं दिलाती है तो वे अनशन पर बैठने को भी तैयार हैं।

    दिग्विजय सिंह ने किसानों के हित में केंद्र सरकार को पत्र लिखने और संसद में उठाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर असंतोष जताया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों में किसान उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन जीआई टैग न मिलने के कारण उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित मूल्य नहीं पा रहा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन 2016 में वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। अब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के किसानों को वंचित रखा गया।

    इस अवसर पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान पर भी बात की। उन्होंने फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा बैंक से रिटायरमेंट लेने के बाद कार को घर बनाकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले हैं। दिग्विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह देखकर प्रेरणा मिली और रिटायरमेंट के बाद की योजना पर भी सोचा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा के सेकंड टर्म के बाद तीसरे टर्म के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी का काम जीवन के अंतिम क्षण तक करेंगे, लेकिन आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती किसानों को उचित मूल्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग बेहद जरूरी है, ताकि उनका उत्पाद पाकिस्तान और अन्य देशों के बासमती चावल के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को अब तक किसानों के हित में ठोस कदम नहीं उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और मंत्री मंडल से अपील की कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जल्द से जल्द जीआई टैग दिलवाया जाए और किसानों के आर्थिक नुकसान को रोका जाए।