Tag: Congress

  • कांग्रेस में सियासी हलचल तेज, दिग्विजय सिंह ने मोदी-आडवाणी की तस्वीर से दी संदेश

    कांग्रेस में सियासी हलचल तेज, दिग्विजय सिंह ने मोदी-आडवाणी की तस्वीर से दी संदेश




    DigvijaySinghनई दिल्ली।
    कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक से ठीक पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की पुरानी तस्वीर साझा कर सियासत में हलचल मचा दी है। इस तस्वीर में मोदी आडवाणी के पैरों के पास बैठे दिखाई दे रहे हैं, और दिग्विजय सिंह ने इसे संगठन की ताकत और जमीनी कार्यकर्ताओं की अहमियत के रूप में पेश किया।
    सियासी गलियारों में इस पोस्ट को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे भाजपा और आरएसएस की संगठनात्मक मजबूती के संदर्भ में देख रहे हैं, जबकि कई इसे कांग्रेस में जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी और संगठन सुधार की आवश्यकता के इशारे के रूप में मान रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या दिग्विजय सिंह अपने इस पोस्ट के जरिए कांग्रेस नेतृत्व को अप्रत्यक्ष संदेश दे रहे हैं।

    इस पोस्ट को और ज्यादा चर्चा में लाने वाली बात यह है कि दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ-साथ पीएम मोदी को भी टैग किया।

    पोस्ट की टाइमिंग भी काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह CWC बैठक के दौरान किया गया, जिससे इसके राजनीतिक मायने और बढ़ गए।

    19 दिसंबर को भी दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी को लेकर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कांग्रेस संगठन में सुधार और व्यावहारिक विकेंद्रीकरण की जरूरत पर जोर दिया था।

    उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की तरह सुधारों की दिशा में कदम उठाना चाहिए। इस बार की पोस्ट के साथ यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के भीतर संगठन और नेतृत्व को लेकर बहस को तेज कर रहे हैं और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की चेतावनी दे रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दिग्विजय सिंह का यह कदम कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेतृत्व दोनों के लिए संदेश है, जिसमें संगठन की ताकत और सक्रियता की अहमियत को याद दिलाया गया है। इस पोस्ट ने पार्टी के भीतर और बाहर चर्चा की लहर दौड़ा दी है, और यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन की मजबूती ही किसी भी राजनीतिक दल की सफलता की कुंजी है।

  • दोस्तों के साथ नए साल की शुरुआत को बनाएं यादगार भारत की इन 5 जगहों पर करें न्यू ईयर ट्रिप प्लान

    दोस्तों के साथ नए साल की शुरुआत को बनाएं यादगार भारत की इन 5 जगहों पर करें न्यू ईयर ट्रिप प्लान


    नई दिल्ली । नया साल आने में अब गिनती के ही दिन बचे हैं और ऐसे में घूमने-फिरने की प्लानिंग जोरों पर है. ज्यादातर लोग चाहते हैं कि साल की शुरुआत किसी ऐसी जगह से हो जहां मस्ती सुकून और नए अनुभव एक साथ मिलें

    मनाली कसोल

    बर्फ से ढकी वादियां बोनफायर और पहाड़ी कैफे मनाली और कसोल नए साल के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन हैं. यहां दिन में स्नो एक्टिविटीज और रात में म्यूजिक व पार्टी का माहौल मिलता है.

    उदयपुर

    राजस्थान का रॉयल अंदाज न्यू ईयर को यादगार बना देता है. महलों में खास डिनर लोक कलाकारों की प्रस्तुति और आतिशबाजी सेलिब्रेशन को अलग रंग देती है.

    पुडुचेरी

    यहां नया साल शोर से नहीं बल्कि सुकून और खूबसूरती से मनाया जाता है. बीच के किनारे जश्न और व्हाइट टाउन की गलियां अलग ही अनुभव देती हैं.
    ग्रेट रण ऑफ कच्छ
    अगर कुछ हटकर करना चाहते हैं तो रण उत्सव बेहतरीन विकल्प है. सफेद रेगिस्तान लोक संगीत और टेंट स्टे न्यू ईयर को खास बनाते हैं.

    गोकर्ण


    कम भीड़ और शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए गोकर्ण सही जगह है. यहां बीच पर म्यूजिक बोनफायर और दोस्तों के साथ लंबी बातचीत का मजा लिया जा सकता है. चाहे पहाड़ हों समंदर या रेगिस्तान ये डेस्टिनेशन नए साल की शुरुआत को यादगार बना सकती हैं.

  • कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए गांधी परिवार को बताया 'फर्जी गांधी' सीएम योगी के सामने कसा तंज

    कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए गांधी परिवार को बताया 'फर्जी गांधी' सीएम योगी के सामने कसा तंज


    नई दिल्ली ।
    देश के जाने-माने कवि और पूर्व नेता कुमार विश्वास ने एक बार फिर अपने तीखे अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा है. इस बार उनका तंज सीधे देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और महात्मा गांधी को लेकर था. लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास ने कांग्रेस की विचारधारा और इतिहास को लेकर व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कांग्रेस ने कभी सरदार पटेल को अपना बताया ही नहीं.उन्होंने कहा ये लोग तो इतने तेज हैं कि कांग्रेस कार्यालय के बाहर एक पुरखा बिठा रखा था. सरदार पटेल बाहर बैठे थे तो बीजेपी वाले उठा लाए. कांग्रेस बोली पटेल तो हमारे थे.

    नामों में ही उलझी रही कांग्रेस

    कुमार विश्वास ने आगे कहा कि कांग्रेस अपने ही परिवार और नामों में उलझी रही. उन्होंने कहा तुम तो अपने नानाजी पापाजी मम्मीजी चाचीजी में ही लगे रहे. पटेल बाहर बैठे थे तो कोई पूछने वाला ही नहीं था कुमार विश्वास का इशारा कांग्रेस के परिवारवाद की ओर था जिस पर वे पहले भी कई बार सवाल उठा चुके हैं.अपने बयान में कुमार विश्वास यहीं नहीं रुके. उन्होंने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी को गांधी जी को भी ले आना चाहिए. उन्होंने कहा गांधी जी स्वदेशी भी कह रहे हैं आयुर्वेद भी गीता भी पढ़ रहे हैं खादी भी पहन रहे हैं. सारा काम तो वही है जो बीजेपी वाले कहते हैं.

    कांग्रेस के पास फर्जी गांधी कुमार विश्वास
    इसके साथ ही उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के पास पहले से ही तीन फर्जी गांधी’ है इसलिए असली गांधी को लेने में बीजेपी को क्या दिक्कत है.कुमार विश्वास का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में इतिहास और महापुरुषों की विरासत को लेकर राजनीति तेज है. उनके इस तंज को कांग्रेस पर सीधा हमला माना जा रहा है. समर्थक जहां इसे सटीक व्यंग्य बता रहे हैं वहीं कांग्रेस समर्थकों को यह बयान नागवार गुजर रहा है.

  • शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!

    शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!


    नई दिल्ली । कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने सोमवार 22 दिसंबर को नीतीश कुमार सरकार की तरफ से बिहार में बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे कार्यों की जमकर सराहना की, जबकि कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ गठबंधन में है.नालंदा साहित्य महोत्सव में भाग लेने के लिए बिहार आए शशि थरूर ने एक चैनल संग बातचीत में कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बुनियादी ढांचा पहले की तुलना में कहीं बेहतर है. सड़कें बेहतर हैं. लोग देर रात तक सड़कों पर दिखते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. अब तक बिजली, पानी और बाकी सब कुछ ठीक चल रहा है.
    नीतीश के बारे में पूछे जाने पर क्या बोले
    उन्होंने कहा कि मेरा मतलब है, इसमें कोई शक नहीं कि हाल के वर्षों में बहुत सी अच्छी चीजें हुई हैं. नीतीश कुमार के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस सांसद ने टालमटोल करते हुए कहा कि मुझे यहां राजनीति में मत घसीटिए. मैं निश्चित रूप से इस प्रगति को देखकर बहुत खुश हूं. बिहार की जनता और उनके प्रतिनिधि इसके लिए श्रेय के पात्र हैं.

    कांग्रेस का क्या है रिएक्शन

    बिहार में थरूर के बीजेपी संग गठबंधन वाली सरकार की प्रशंसा करने वाली हालिया टिप्पणी पर कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. पिछले महीने दुबई में एक मीडिया कार्यक्रम में थरूर ने राजनीतिक परिदृश्य पर खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हर किसी को वैचारिक रूप से कट्टरपंथी होना पड़ता है और वे दूसरे पक्ष की अच्छाई को नहीं देखते या दूसरे पक्ष के किसी भी व्यक्ति से बात नहीं करते.

    हिजाब विवाद को लेकर क्या कहा था
    बता दें कि 4 बार के सांसद शशि थरूर, प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ बीजेपी की प्रशंसा करने वाले कई बयानों के बाद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपने संबंध खराब होते देख रहे हैं. थरूर हमेशा से यह कहते रहे हैं कि उनकी टिप्पणियां केवल भारत की बेहतर सेवा करने की इच्छा को दर्शाती हैं. इससे पहले शशि थरूर ने हिजाब विवाद को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा था कि यह घटना अनुचित थी.

  • जबलपुर में बीजेपी नेत्री का नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार धर्म परिवर्तन विवाद पर वीडियो वायरल

    जबलपुर में बीजेपी नेत्री का नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार धर्म परिवर्तन विवाद पर वीडियो वायरल


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में बीजेपी की जिला उपाध्यक्ष अंजू भार्गव का एक विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो में अंजू भार्गव ने एक नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार किया है। यह घटना 20 दिसंबर को जबलपुर के गोरखपुर क्षेत्र स्थित एक चर्च परिसर में हुई थी। बताया गया है कि अंजू भार्गव और अन्य हिंदू संगठन के लोग कथित तौर पर धर्म परिवर्तन का विरोध कर रहे थे।
    उनका आरोप था कि चर्च में नेत्रहीन बच्चों का धर्म परिवर्तन किया जा रहा था। इस दौरान एक नेत्रहीन महिला के साथ अंजू भार्गव की बहस हो गई और वीडियो में अंजू भार्गव महिला का मुंह दबाते हुए उसे अपशब्द कहती नजर आ रही हैं। वायरल वीडियो में यह भी दिखाया गया कि भार्गव ने महिला का हाथ पकड़कर धक्का-मुक्की की और कहा कि अगले जन्म में भी वह अंधी ही रहेगी।

    इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस ने भाजपा को घेरते हुए पार्टी पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे क्रूरता का उदाहरण बताते हुए भाजपा की आलोचना की और कहा कि पार्टी अपनी कथनी और करनी में अंतर दिखा रही है।

    भाजपा की चुप्पी

    इस मामले पर अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि इस घटना के बाद से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी है।

    पुलिस का बयान

    इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी ने बीच-बचाव करते हुए स्थिति को शांत करने की कोशिश की लेकिन वीडियो में जो दिखाया गया वह पूरे मामले को और संवेदनशील बना रहा है।यह घटना मध्य प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक माहौल को और तंग कर सकती है जहां धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दे अक्सर विवादों का कारण बनते हैं।

  • उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'

    उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में आगामी बृहन्मुंबई महानगर पालिका बीएमसी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। महाविकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह इस चुनाव को अकेले लड़ेगीजिसके बाद उद्धव गुट और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है। उद्धव गुट के प्रवक्ता आनंद दुबे ने रविवार को कांग्रेस पर तीखा तंज करते हुए कहामुंबई में कांग्रेस पार्टी को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। वह पिछले तीन दशकों से लगातार मुंबई नगर निगम चुनाव हारती आ रही हैतो ऐसे में वह 2026 में कौन सा चमत्कार कर देंगे? कांग्रेस एक पर्यटक की तरह मुंबई आती हैहोर्डिंग्स लगाती हैचुनाव हारती है और फिर घर लौट जाती है।

    उद्धव गुट के प्रवक्ता ने यह बयान वीडियो के माध्यम से दियाजिसमें उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना का बीएमसी से गहरा रिश्ता रहा है और पार्टी पिछले 30 सालों से मुंबई नगर निगम पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस चुनाव में गंभीरता से लेने की कोई वजह नहीं हैक्योंकि वे हमेशा चुनाव हारते हैं। कांग्रेस ने इस तंज का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगी और इसके पीछे वैचारिक विचार है। कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने बयान दियाहम पहले ही अपनी स्थिति को स्पष्ट कर चुके हैं। कांग्रेस पार्टी चुनाव में अकेले बढ़ना चाहती है और उसके पीछे वैचारिक विचार है। हमें इस मामले पर कोई जल्दबाजी नहीं है। पूरी पार्टी ने सोच-समझ कर यह फैसला लिया है। हम उन सभी पार्टियों के खिलाफ लड़ेंगे जो धर्मजातिक्षेत्र और भाषा के आधार पर टकराव पैदा करती हैं।

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब उद्धव गुट ने महाविकास अघाड़ी में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस इसके पक्ष में नहीं थीक्योंकि वह राज ठाकरे के साथ चुनाव लड़ने में असमंजस महसूस कर रही थी। इसके चलते महाविकास अघाड़ी के भीतर एकता बनी रहीलेकिन कांग्रेस और उद्धव गुट के बीच मतभेद उभर आए। बीएमसी पर पिछले कई सालों से शिवसेना का कब्जा रहा है। शुरूआत से ही शिवसेना भाजपा के साथ मिलकर यहां शासन चला रही थी

    । 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जीत दर्ज की थीजबकि भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। उद्धव गुट अब 2022 में विभाजन के बाद बीएमसी पर पुनः कब्जा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैहालांकि इसे पहले से कहीं ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि वह इस चुनाव में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तैयार है और इस बार किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगीचाहे वह महाविकास अघाड़ी हो या कोई अन्य गठबंधन।

  • शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा

    शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल के दिनों में अपने राजनीतिक रुख में बदलाव दिखाया है और पार्टी नेतृत्व के साथ अपने संबंधों में सुधार के संकेत दिए हैं। बीते कुछ समय से थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद की अटकलें आम रही हैं। विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद थरूर ने कई मौकों पर मोदी सरकार की तारीफ की थी जिससे राजनीतिक गलियारों में उनकी नाराजगी और पार्टी से दूरी की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
    हालांकि अब शशि थरूर ने अपने रुख में बदलाव किया है। उन्होंने पार्टी का खुलकर समर्थन करना शुरू कर दिया है और हाल ही में राहुल गांधी द्वारा मनरेगा योजना पर पोस्ट साझा किया है। थरूर ने इसे री-शेयर करते हुए लिखा कि मनरेगा देश की सबसे सफल विकास योजनाओं में शामिल रही है और ग्रामीण गरीबों के लिए यह एक अहम सामाजिक सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना को खत्म करना पीछे की ओर उठाया गया कदम होगा जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। मनरेगा योजना को लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है।
    मोदी सरकार ने मनरेगा की जगह VB-GRAM G बिल संसद में लाकर पारित किया जिसे विपक्षी दल ग्रामीण हितों के खिलाफ मान रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि यह नया कानून मनरेगा की अधिकार और मांग पर आधारित गारंटी व्यवस्था को समाप्त करता है और इसे केंद्र से संचालित राशन-आधारित योजना में बदल देता है। शशि थरूर ने राहुल गांधी के इस संदेश को साझा कर इसे समर्थन दिया।राहुल गांधी ने पोस्ट में मनरेगा के ग्रामीण मजदूरों और महिलाओं पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस योजना ने ग्रामीणों को अपने काम का सही मूल्य दिलाने में मदद की मजदूरी में सुधार किया पलायन को कम किया और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया। उन्होंने चेतावनी दी कि VB-GRAM G इन उपलब्धियों को कमजोर करता है और कोविड काल में मनरेगा की उपयोगिता का उदाहरण देते हुए कहा कि इसने लाखों लोगों को भूख और कर्ज से बचाया।
    थरूर का रुख पहले मोदी सरकार की सराहना करने वाला था लेकिन अब वे पार्टी के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में केरल निकाय चुनावों के दौरान उन्होंने भाजपा की तारीफ की थी लेकिन उसके बाद कई मौकों पर कांग्रेस का समर्थन किया। लोकसभा में भारत के रुपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन शांति विधेयक 2025 पर चर्चा में उन्होंने इसके खामियों को उजागर किया और कहा कि यह रेडियोधर्मी पदार्थों और परमाणु अपशिष्ट से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करता है। इसके अलावा थरूर ने केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव IFFK में 19 फिल्मों के प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी न देने की आलोचना की। उन्होंने इसे सिनेमाई अशिक्षा और नौकरशाही की अत्यधिक सतर्कता करार दिया। थरूर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से अनुमति देने का अनुरोध भी किया। साथ ही उन्होंने फिल्म अभिनेता देव आनंद की फिल्म हरे रामा हरे
  • सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं

    सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं


    नई दिल्ली । भारत सरकार ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित 51 बक्सों में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय पीएमएमएल को वापस करने की मांग की है। यह दस्तावेज 2008 में तात्कालिक प्रधानमंत्री संग्रहालय से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया है। सरकार ने इन दस्तावेजों को निजी संपत्ति मानने से इनकार करते हुए कहा है कि ये सार्वजनिक अभिलेख हैं और इनकी सार्वजनिक पहुंच जरूरी है।

    केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस मुद्दे पर कहा यह कोई निजी पारिवारिक दस्तावेज नहीं हैं। ये भारत के पहले प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय अभिलेख हैं और इन्हें सार्वजनिक अभिलेखागार में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन दस्तावेजों की अदला-बदली को लेकर संसद में कई बार चर्चा हो चुकी है लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया।

    विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक सवाल उठाया कि क्या 2025 में पीएमएमएल के निरीक्षण के दौरान नेहरू के दस्तावेज गायब पाए गए थे। इसके जवाब में शेखावत ने साफ किया कि ये दस्तावेज लापता नहीं हैं बल्कि सोनिया गांधी के पास हैं और उनका स्थान पूरी तरह से ज्ञात है। उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज 2008 में विधिवत तरीके से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन वे अब भी वापस नहीं किए गए हैं।

    शेखावत ने आगे कहा सोनिया गांधी से यह पूछा जाना चाहिए कि क्यों ये दस्तावेज अब तक वापस नहीं किए गए जबकि कई बार पीएमएमएल की ओर से पत्र भेजे गए हैं। अगर कुछ छिपाया जा रहा है तो क्या यह सही है? उन्होंने यह भी जोड़ा कि इतिहास को सही तरीके से समझने और उसमें सही दृष्टिकोण विकसित करने के लिए इन दस्तावेजों तक सभी को पहुंच मिलनी चाहिए। विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए शेखावत से पूछा कि क्या अब वह माफी मांगेंगे क्योंकि यह स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज गायब नहीं थे। कांग्रेस ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक लाभ के लिए तूल दे रही है।

    कुल मिलाकर यह मामला अब एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ सरकार ने नेहरू के दस्तावेजों को सार्वजनिक अभिलेखागार में रखने की जरूरत जताई है वहीं कांग्रेस और गांधी परिवार की ओर से इसे एक निजी और परिवारिक अधिकार बताया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर ममता बनर्जी और सोनिया गांधी किस तरह की प्रतिक्रिया देती हैं और सरकार इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाती है।

  • बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'

    बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस TMC के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए उनकी पार्टी को कांग्रेस की जरूरत नहीं है। हालांकि अभिषेक ने यह भी साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस अब भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है।

    अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कहा कांग्रेस के पास बंगाल में ऐसा कुछ नहीं है जिसकी हमें जरूरत हो या जो वह हमें दे सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल की जबकि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें गठबंधन का प्रस्ताव दिया था जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। अभिषेक ने कहा इसका परिणाम सबके सामने है उनकी सीट अब घटकर एक रह गई है।

    अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कोई भी निर्णय ममता बनर्जी ही लेंगी। उन्होंने कहा जब पार्टी कोई फैसला लेगी तो आपको पता चल जाएगा। फिलहाल कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं है।
    इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भी हमला किया और मनरेगा का नाम बदलने के मुद्दे पर कहा कि इसका नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने सरकार से पश्चिम बंगाल को बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की। केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल का बकाया भुगतान करना चाहिए। मनरेगा का नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा उन्होंने कहा।

    अभिषेक ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बंगाल के खिलाफ काम कर रही है और गांधीजी के नाम को हटाना बंगाल विरोधी कदम है। उन्होंने कहा गांधीजी को ‘महात्मा’ की उपाधि रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी इसलिए बंगाल से गांधीजी का नाम हटाना गलत है।इस बयान ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया है और यह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतियों का इशारा है। अब यह देखना होगा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस क्या कदम उठाती है और कांग्रेस के साथ गठबंधन का कोई नया मोड़ आता है या नहीं।

  • कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'

    कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'


    नई दिल्ली । कांग्रेसी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक विवादित बयान दिया है जिसके बाद राजनीति में हलचल मच गई है। चव्हाण का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि उस दिन भारतीय विमानों के पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की संभावना बहुत अधिक थी।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने एक इंटरव्यू में कहा ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन अगर ग्वालियर बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता तो उसे पाकिस्तान द्वारा बहुत आसानी से मार गिराया जा सकता था। यही कारण था कि एयर फोर्स को पूरी तरह से ग्राउंडेड रखा गया था। चव्हाण ने आगे कहा कि पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे लेकिन ऑपरेशन के अगले चरणों में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई।

    यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के एक्शन को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर जो कि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था एक बड़ा सैन्य अभियान था जिसमें भारतीय वायु सेना और सेना ने एकजुट होकर पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया था। चव्हाण के बयान के बाद विपक्षी दलों और रक्षा विशेषज्ञों ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    चव्हाण का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना और सेना के संचालन पर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान भारतीय सेना और वायु सेना की कार्यप्रणाली को गलत तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि चव्हाण ने अपनी बात तथ्यों पर आधारित रखते हुए रखी है और ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय विमानों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उपाय किए गए थे।

    इससे पहले भारतीय वायु सेना और सेना के कई अधिकारियों ने भी माना था कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन कुछ फैसले धीमे थे क्योंकि पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों को निशाना बनाने का खतरा बहुत ज्यादा था। हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    चव्हाण के बयान ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय वायु सेना के लिए ऐसे ऑपरेशनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई कमजोरी रही थी। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं जो एक संवेदनशील मामला हो सकता है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा बना रहता है और ऐसे बयान से दोनों देशों के सैन्य इतिहास और रणनीति पर चर्चा और विवाद दोनों का सामना करना पड़ सकता है। चव्हाण के बयान को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय और वायु सेना से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इस बयान ने राजनीतिक और रक्षा हलकों में हंगामा मचा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में चव्हाण का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस का कारण बन सकता है और अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।