Tag: Congress

  • तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां विजय ने चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय का यह कदम राज्य की सियासत को नए मोड़ पर ले गया है।

    इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने टीवीके प्रमुख से मुलाकात कर औपचारिक रूप से समर्थन पत्र भी सौंपा, जिसके बाद पार्टी मुख्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला।

    कांग्रेस के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में गेमचेंजर माना जा रहा है। पार्टी के प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि विजय के समर्थन मांगने के बाद यह निर्णय लिया गया और शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे मंजूरी दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल विजय को जल्द ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

    हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के 5 विधायक हैं। इस तरह दोनों का कुल आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी 5 सीट कम है। ऐसे में विजय को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।

    तमिलनाडु की सियासत में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, जहां एक तरफ नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाते हैं या राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।

  • देश की सियासत में बड़ा उलटफेर! बंगाल में BJP का ‘जयघोष’, तमिलनाडु में विजय की एंट्री, प्रियंका चतुर्वेदी ने बताए बदलाव के संकेत

    देश की सियासत में बड़ा उलटफेर! बंगाल में BJP का ‘जयघोष’, तमिलनाडु में विजय की एंट्री, प्रियंका चतुर्वेदी ने बताए बदलाव के संकेत


    नई दिल्ली।  देशभर में चुनावी रुझानों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है और अलग-अलग राज्यों से बड़े बदलाव के संकेत सामने आ रहे हैं। इसी बीच Priyanka Chaturvedi ने इन नतीजों को भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का इशारा बताया है।

    उनके मुताबिक, ये चुनाव सिर्फ जीत-हार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की सियासी दिशा बदलने वाले साबित हो सकते हैं। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन की बढ़त ने वामपंथी गढ़ को हिला दिया है, जो लंबे समय से सत्ता में बना हुआ था। इसे एंटी-इनकंबेंसी और बदलाव की चाह का नतीजा माना जा रहा है।

    वहीं तमिलनाडु में Vijay की पार्टी TVK ने जबरदस्त एंट्री करते हुए पारंपरिक दलों DMK और AIADMK को कड़ी टक्कर दी है। यह राज्य की राजनीति में नई शुरुआत और युवा नेतृत्व के उभार के तौर पर देखा जा रहा है।

    पश्चिम बंगाल में Bharatiya Janata Party की मजबूत बढ़त ने सबका ध्यान खींचा है। रुझानों में पार्टी 150 से 200 सीटों के बीच पहुंचती दिख रही है, जो राज्य की राजनीति में बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। वहीं असम और पुडुचेरी में भी बीजेपी और उसके सहयोगियों ने अपनी पकड़ बनाए रखी है।

    प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि इन नतीजों से साफ है कि देश में पुराने राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और नई ताकतें उभर रही हैं। जहां एक तरफ पारंपरिक गढ़ कमजोर पड़ते दिख रहे हैं, वहीं नए नेतृत्व और नई पार्टियां तेजी से जगह बना रही हैं।

    कुल मिलाकर, 2026 के चुनावी रुझान भारतीय राजनीति के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं जहां हर राज्य अपनी अलग कहानी लिख रहा है और आने वाले समय में सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

  • पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया, अमित शाह ने कांग्रेस और टीएमसी पर साधा निशाना

    पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया, अमित शाह ने कांग्रेस और टीएमसी पर साधा निशाना


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। दम दम उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने अपने संबोधन में राज्य की राजनीतिक स्थिति और आगामी मतदान को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरम हो गया है।

    सभा के दौरान उन्होंने दावा किया कि इस बार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है और मौजूदा नेतृत्व को जनता का समर्थन कम होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव की ओर देख रही है और आगामी चुनाव परिणाम इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में उसका प्रभाव काफी कमजोर हो चुका है। उनके अनुसार, कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने में असफल रही है और इस बार भी उसके लिए स्थिति अनुकूल नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने में संघर्ष कर रही है।

    सभा में दिए गए भाषण के दौरान राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने विपक्षी नेताओं की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक विमर्श में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बयान देना आवश्यक है ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान बना रहे।

    इसके अलावा उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि राज्य में कई मुद्दों पर जनता असंतोष व्यक्त कर रही है और यह आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे मतदान के दिन सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान चुनावी माहौल में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास माने जाते हैं। पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है और विभिन्न दल अपनी रणनीति के तहत मतदाताओं को आकर्षित करने में जुटे हुए हैं।

    चुनाव आयोग की निगरानी में राज्य में मतदान प्रक्रिया की तैयारी चल रही है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर प्रचार अभियान को अंतिम चरण में पहुंचा रहे हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदलता दिखाई दे रहा है।

    आने वाले दिनों में मतदान और उसके बाद के परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सभी दल अंतिम चरण के प्रचार में पूरी ताकत लगा रहे हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।

  • सुप्रिया सुले ने की राहुल गांधी की खुलकर तारीफ, बोलीं ईमानदारी का ओलंपिक होता तो…

    सुप्रिया सुले ने की राहुल गांधी की खुलकर तारीफ, बोलीं ईमानदारी का ओलंपिक होता तो…


    नई दिल्ली। एनसीपी एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की खुलकर तारीफ की है। सोमवार 20 अप्रैल को उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को किसी भी जांच एजेंसी से डर नहीं लगता। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि अगर ईमानदारी के लिए ओलंपिक में कोई पदक होता, तो राहुल गांधी निश्चित रूप से उसे जीतते।

    महिला आरक्षण पर उठाए सवाल

    महिला आरक्षण को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि हालिया विधेयक वास्तव में महिलाओं के आरक्षण का नहीं, बल्कि परिसीमन डिलिमिटेशन से जुड़ा मुद्दा था। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक पहले ही 2003 में पारित हो चुका है और इसे राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित भी किया जा चुका है।

    देवेंद्र फडणवीस पर साधा निशाना
    सुले ने देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे यह कहते हैं कि जनगणना के कारण 2029 तक महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो रही है, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि जनगणना प्रक्रिया को तेज करने से किसने रोका। उनके मुताबिक, समय पर जनगणना पूरी कर इसे लागू किया जा सकता था।

    आदिवासी लड़कियों के लापता होने पर जताई चिंता
    उन्होंने महाराष्ट्र में आदिवासी लड़कियों के लापता होने के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। सुले ने कहा कि सत्ताधारी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोप गलत हैं और लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का अधिकार है।

    आईएएस अधिकारी के व्यवहार पर कार्रवाई की मांग

    सुप्रिया सुले ने MHADA के सीईओ संजीव जायसवाल से जुड़े एक कथित मामले का जिक्र करते हुए कहा कि गोरेगांव के मोतीलाल नगर में स्थानीय निवासियों को धमकाने के आरोप वाले वायरल वीडियो पर मुख्यमंत्री को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर ध्यान दिया होगा।

  • महिला आरक्षण पर राजनीति…. कांग्रेस बोली- LS की वर्तमान संख्या के आधार पर तुरंत इसे लागू करे सरकार

    महिला आरक्षण पर राजनीति…. कांग्रेस बोली- LS की वर्तमान संख्या के आधार पर तुरंत इसे लागू करे सरकार


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया और मांग की कि लोकसभा की वर्तमान संख्या में आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए। विपक्षी दल ने यह भी दावा किया कि 17 अप्रैल को लोकसभा (Lok Sabha) में जो विधेयक पारित नहीं सका वह महिला आरक्षण विधेयक नहीं बल्कि परिसीमन विधेयक था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinet) ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक संसद द्वारा 21 सितंबर, 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और अब यह संविधान का हिस्सा है। उन्होंने यहां प्रेसवार्ता में कहा, ”महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक पराजित नहीं हुआ, बल्कि परिसीमन विधेयक पराजित हुआ है, जिसे आप (सरकार) देश पर थोपना चाहते थे।”

    श्रीनेत ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं और महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में छिप रहे हैं।” श्रीनेत ने एक कार्टून प्रदर्शित किया, जिसमें प्रधानमंत्री के पास 543 आमों से भरी टोकरी दिखाई गई है, लेकिन वह महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सा देने से इनकार कर रहे हैं और उनसे कह रहे हैं कि वह उन्हें उनका हिस्सा तभी दे सकते हैं जब वह आमों की संख्या बढ़ाकर 850 कर दें, जो विपक्ष उन्हें करने नहीं दे रहा है। संसद में संविधान संशोधन विधेयक के खारिज होने पर प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कांग्रेस नेता ने अपनी पार्टी के रुख को दोहराते हुए कहा कि अगर मोदी वाकई गंभीर हैं, तो उन्हें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में महिलाओं के लिए तत्काल आरक्षण प्रदान करना चाहिए। सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “आपने इस पर एक शर्त लगा दी है। उस शर्त को हटाइए। आप ही महिला आरक्षण में बाधा डाल रहे हैं, आप पुरुषों को खुश रखना चाहते हैं और उनकी सीटें कम नहीं करना चाहते।”

    मोदी द्वारा महिलाओं से माफी मांगने का जिक्र करते हुए श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री सही थे क्योंकि उन्हें मणिपुर में दंगों के दौरान दो महिलाओं के साथ जो हुआ, हाथरस और उन्नाव में जो हुआ, महिला ओलंपिक खिलाड़ियों के साथ जो हुआ और बिलकीस बानो मामले में दोषियों को जिस तरह सम्मानित किया गया, उसके लिए देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, ”आप (प्रधानमंत्री) सही थे। महिलाएं अपने अपमान को नहीं भूलतीं। आपसे बेहतर यह बात और कौन जान सकता है?”

    श्रीनेत ने कहा कि 240 सांसदों में से केवल 31 महिलाएं हैं, जो मात्र 12 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि देशभर के 1,654 विधायकों में से केवल 164 महिलाएं हैं, जो 10 प्रतिशत से भी कम है। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा के 21 मुख्यमंत्रियों में से केवल एक महिला है। श्रीनेत ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने मूल रूप से 1989 में दिवंगत राजीव गांधी के नेतृत्व में महिला आरक्षण पेश किया था, जिसका अटल बिहारी वाजपेयी, एल के आडवाणी, जसवंत सिंह और राम जेठमलानी जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने विरोध किया था। परिसीमन के मुद्दे पर, कांग्रेस प्रवक्ता ने लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत आनुपातिक वृद्धि के प्रधानमंत्री के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मसौदा विधेयक में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है।

  • कांग्रेस ने हिमाचल में 71 ब्लॉक अध्यक्ष किए नियुक्त, एक भी महिला को नहीं मिली जगह

    कांग्रेस ने हिमाचल में 71 ब्लॉक अध्यक्ष किए नियुक्त, एक भी महिला को नहीं मिली जगह


    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश में संगठन विस्तार के तहत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ी स्तर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की नियुक्ति की है। कुल 71 ब्लॉक अध्यक्षों की सूची जारी की गई है, लेकिन इस सूची में किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है।

    संगठन विस्तार में नई नियुक्तियां

    कांग्रेस द्वारा जारी सूची के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर नए अध्यक्षों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, ऊना, हमीरपुर, सोलन, सिरमौर, शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे सभी जिलों को शामिल किया गया है।

    नालागढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बने बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति पर हाईकमान का आभार जताया और इसे बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि वे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे और सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलेंगे।

    नेताओं ने जताया नेतृत्व पर भरोसा

    बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन का परिणाम बताया। उन्होंने मुकेश अग्निहोत्री, प्रतिभा सिंह, विक्रमादित्य सिंह और अन्य नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

    जमीनी संगठन को मजबूत करने का दावा

    नवनियुक्त अध्यक्षों ने कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करेंगे और कार्यकर्ताओं के सम्मान को प्राथमिकता देंगे। साथ ही, किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय लेने की बात भी कही गई।

    जिलावार नियुक्तियां पूरी

    सूची के अनुसार सभी जिलों में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है, जिनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, सोलन, सिरमौर, शिमला और अन्य जिले शामिल हैं।

    महिला प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल

    हालांकि संगठन विस्तार के इस कदम के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इतने बड़े स्तर पर नियुक्तियों के बावजूद किसी भी महिला को ब्लॉक अध्यक्ष नहीं बनाया गया। यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नया विषय बन सकता है, खासकर उस समय जब महिला प्रतिनिधित्व और आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है।

  • राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा

    राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा


    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित रन फॉर अंबेडकर और रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन मैराथन 2026 को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला।

    राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का सबसे बड़ा संदेश देश का संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोग अंबेडकर के सिद्धांतों और संविधान को खत्‍म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये ताकतें देश में सभी को समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं। राहुल गांधी के मुताबिक भाजपा के नेता अंबेडकर की प्रतिमा के सामने सम्मान जताते जरूर हैं लेकिन असल में उनका उद्देश्य संविधान को नुकसान पहुंचाना है।

    इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार संविधान पर प्रहार कर रही है और उसके नेता आक्रामक रवैया अपना रहे हैं। उनके अनुसार सरकार परोक्ष रूप से संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। पुनिया ने कहा कि यह मैराथन लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित की गई है ताकि सभी मिलकर अंबेडकर की विचारधारा और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हो सकें।

    महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इसके समर्थन में रही है लेकिन भाजपा के लागू करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के इस बिल को लागू करना उचित नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि इसे नई जनगणना के आधार पर ही लागू किया जाना चाहिए न कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर।

  • राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब

    राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब


    इंदौर । इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है इस मामले में डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं बल्कि पार्टी के चरित्र को उजागर करती हैं

    घटना उस समय की है जब इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस की पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धर्म का हवाला देते हुए वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया उनके इस रुख का सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने विरोध किया लेकिन कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है इसी चुप्पी को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को घेरा और कहा कि इस मुद्दे पर पूरी प्रदेश कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद पार्षद ने राष्ट्रीय गीत गाने से मना किया और यह कहते हुए पीछे हट गई कि वह इसे नहीं गाएंगी उन्होंने इसे बेशर्मी की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस की विचारधारा और मानसिकता को दर्शाता है उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता भारत माता की जय बोलने से भी बचते हैं जो देशभक्ति की भावना के विपरीत है

    मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से जवाब मांगा उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह ऐसे बयानों और आचरण का समर्थन करता है या नहीं यदि पार्टी इस मामले में कार्रवाई करने में असमर्थ है तो उसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए

    उन्होंने आगे कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अपने प्राण न्योछावर किए ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं न केवल उन बलिदानों का अपमान हैं बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी समय समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों पर विवाद खड़ा करती रही है

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर बहस छेड़ दी है जहां एक ओर इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक माना जाता है वहीं दूसरी ओर कुछ वर्गों द्वारा इसे लेकर अलग विचार भी सामने आते रहे हैं फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं

  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने दलित वोट बैंक को साधने के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सभी अपने-अपने स्तर पर दलित वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं। अंबेडकर जयंती के मौके पर यह प्रतिस्पर्धा और भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है।

    भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद से ही दलित वोटों को सहेजने की कवायद शुरू कर दी थी। संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने दलित पेशेवरों के बीच जाकर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया, कई संगोष्ठियों का आयोजन किया और 45 जिलों में सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।

    इसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने अंबेडकर मूर्ति विकास योजना की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसी महान विभूतियों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण और संरक्षण किया जाएगा। आगामी 14 अप्रैल को हर विधानसभा क्षेत्र में इस योजना को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि जनता को जानकारी देंगे। भाजपा का कहना है कि उसकी सरकार ने दलित उत्थान के लिए लगातार काम किया है, जबकि सपा सरकारों में दलितों का उत्पीड़न हुआ।

    समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में मिले उत्साह को आधार बनाकर दलित वर्ग पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। पार्टी ने बसपा से आए नेताओं की मदद से दलित समाज में पैठ बनाने का काम तेज कर दिया है। कांशीराम जयंती और अंबेडकर जयंती मनाने की परंपरा को सपा ने फिर से शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा की दलित नीति केवल चुनावी प्रतीकात्मक राजनीति है और वास्तविक लाभ नहीं पहुंचाती।

    कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में दलित वोटों को साधने के लिए प्रयासरत है। पार्टी ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को बुलाया और कई कार्यक्रम आयोजित किए। कांग्रेस का दावा है कि उसने सरकारों के दौरान दलितों के लिए प्रभावी योजनाएं और कानून बनाए हैं, जबकि भाजपा केवल चुनावी हथकंडे अपनाती है।

    बहुजन समाज पार्टी अपने पारंपरिक जाटव वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पार्टी लगातार प्रमोशन, आरक्षण और गेस्ट हाउस कांड जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को आगाह कर रही है। मायावती दलित राजनीति में प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं और ब्राह्मण-दलित समीकरण को साधने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बदलते राजनीतिक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में दलित वोट कई सीटों पर जीत और हार तय करने वाला है। इसी कारण सभी दल इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है, और यह चुनावी रणनीतियों के केंद्र में है।

  • पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!

    पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) के कुछ नेताओं ने पश्चिम एशिया (West Asia) संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ खड़े नजर आकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल चुके पार्टी सांसद शशि थरूर (MP Shashi Tharoor) के अलावा मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व सीएम कमलनाथ (Former CM Kamal Nath) और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा (Anand Sharma) और मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने पिछले कुछ दिनों में पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग राय जताई है।


    नेताओं की बयानबाजी से कांग्रेस की हुई किरकिरी

    इन प्रमुख नेताओं की बयानबाजी ने कांग्रेस की काफी किरकिरी कराई है। खासकर ऐसे समय जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न होने को लेकर लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। राहुल ने हाल ही में कहा था कि आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। यह स्थिति गलत विदेश नीति के कारण पैदा हुई है।


    आनंद शर्मा, कमलनाथ के बाद सरकार के साथ मनीष तिवारी

    कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पश्चिम एशिया में जारी जंग पर एक टीवी चैनल पर कहा, सरकार संभवतः सही काम कर रही है। अभी दो दिन पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं आनंद शर्मा और कमलनाथ ने भी मौजूदा स्थिति को संभालने के केंद्र के तरीके की सराहना की थी। आनंद शर्मा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि भारत का कूटनीतिक तरीका समझदारी भरा रहा है। इससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है।

    एलपीजी की कोई कमी नहीं है- कमलनाथ
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, एलपीजी की कोई कमी नहीं है। बस ये माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कुछ लोगों राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर डर फैला रहे हैं। शशि थरूर ने पिछले महीने एक लेख में पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार के संयमित रुख का समर्थन करते हुए इसे जिम्मेदारी भरा बताया है। उनके मुताबिक, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हैं।