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  • कांग्रेस ने हिमाचल में 71 ब्लॉक अध्यक्ष किए नियुक्त, एक भी महिला को नहीं मिली जगह

    कांग्रेस ने हिमाचल में 71 ब्लॉक अध्यक्ष किए नियुक्त, एक भी महिला को नहीं मिली जगह


    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश में संगठन विस्तार के तहत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ी स्तर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की नियुक्ति की है। कुल 71 ब्लॉक अध्यक्षों की सूची जारी की गई है, लेकिन इस सूची में किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है।

    संगठन विस्तार में नई नियुक्तियां

    कांग्रेस द्वारा जारी सूची के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर नए अध्यक्षों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, ऊना, हमीरपुर, सोलन, सिरमौर, शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे सभी जिलों को शामिल किया गया है।

    नालागढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बने बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति पर हाईकमान का आभार जताया और इसे बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि वे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे और सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलेंगे।

    नेताओं ने जताया नेतृत्व पर भरोसा

    बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन का परिणाम बताया। उन्होंने मुकेश अग्निहोत्री, प्रतिभा सिंह, विक्रमादित्य सिंह और अन्य नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

    जमीनी संगठन को मजबूत करने का दावा

    नवनियुक्त अध्यक्षों ने कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करेंगे और कार्यकर्ताओं के सम्मान को प्राथमिकता देंगे। साथ ही, किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय लेने की बात भी कही गई।

    जिलावार नियुक्तियां पूरी

    सूची के अनुसार सभी जिलों में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है, जिनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, सोलन, सिरमौर, शिमला और अन्य जिले शामिल हैं।

    महिला प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल

    हालांकि संगठन विस्तार के इस कदम के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इतने बड़े स्तर पर नियुक्तियों के बावजूद किसी भी महिला को ब्लॉक अध्यक्ष नहीं बनाया गया। यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नया विषय बन सकता है, खासकर उस समय जब महिला प्रतिनिधित्व और आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है।

  • राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा

    राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा


    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित रन फॉर अंबेडकर और रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन मैराथन 2026 को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला।

    राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का सबसे बड़ा संदेश देश का संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोग अंबेडकर के सिद्धांतों और संविधान को खत्‍म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये ताकतें देश में सभी को समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं। राहुल गांधी के मुताबिक भाजपा के नेता अंबेडकर की प्रतिमा के सामने सम्मान जताते जरूर हैं लेकिन असल में उनका उद्देश्य संविधान को नुकसान पहुंचाना है।

    इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार संविधान पर प्रहार कर रही है और उसके नेता आक्रामक रवैया अपना रहे हैं। उनके अनुसार सरकार परोक्ष रूप से संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। पुनिया ने कहा कि यह मैराथन लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित की गई है ताकि सभी मिलकर अंबेडकर की विचारधारा और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हो सकें।

    महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इसके समर्थन में रही है लेकिन भाजपा के लागू करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के इस बिल को लागू करना उचित नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि इसे नई जनगणना के आधार पर ही लागू किया जाना चाहिए न कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर।

  • राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब

    राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब


    इंदौर । इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है इस मामले में डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं बल्कि पार्टी के चरित्र को उजागर करती हैं

    घटना उस समय की है जब इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस की पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धर्म का हवाला देते हुए वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया उनके इस रुख का सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने विरोध किया लेकिन कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है इसी चुप्पी को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को घेरा और कहा कि इस मुद्दे पर पूरी प्रदेश कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद पार्षद ने राष्ट्रीय गीत गाने से मना किया और यह कहते हुए पीछे हट गई कि वह इसे नहीं गाएंगी उन्होंने इसे बेशर्मी की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस की विचारधारा और मानसिकता को दर्शाता है उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता भारत माता की जय बोलने से भी बचते हैं जो देशभक्ति की भावना के विपरीत है

    मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से जवाब मांगा उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह ऐसे बयानों और आचरण का समर्थन करता है या नहीं यदि पार्टी इस मामले में कार्रवाई करने में असमर्थ है तो उसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए

    उन्होंने आगे कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अपने प्राण न्योछावर किए ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं न केवल उन बलिदानों का अपमान हैं बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी समय समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों पर विवाद खड़ा करती रही है

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर बहस छेड़ दी है जहां एक ओर इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक माना जाता है वहीं दूसरी ओर कुछ वर्गों द्वारा इसे लेकर अलग विचार भी सामने आते रहे हैं फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं

  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने दलित वोट बैंक को साधने के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सभी अपने-अपने स्तर पर दलित वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं। अंबेडकर जयंती के मौके पर यह प्रतिस्पर्धा और भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है।

    भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद से ही दलित वोटों को सहेजने की कवायद शुरू कर दी थी। संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने दलित पेशेवरों के बीच जाकर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया, कई संगोष्ठियों का आयोजन किया और 45 जिलों में सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।

    इसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने अंबेडकर मूर्ति विकास योजना की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसी महान विभूतियों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण और संरक्षण किया जाएगा। आगामी 14 अप्रैल को हर विधानसभा क्षेत्र में इस योजना को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि जनता को जानकारी देंगे। भाजपा का कहना है कि उसकी सरकार ने दलित उत्थान के लिए लगातार काम किया है, जबकि सपा सरकारों में दलितों का उत्पीड़न हुआ।

    समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में मिले उत्साह को आधार बनाकर दलित वर्ग पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। पार्टी ने बसपा से आए नेताओं की मदद से दलित समाज में पैठ बनाने का काम तेज कर दिया है। कांशीराम जयंती और अंबेडकर जयंती मनाने की परंपरा को सपा ने फिर से शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा की दलित नीति केवल चुनावी प्रतीकात्मक राजनीति है और वास्तविक लाभ नहीं पहुंचाती।

    कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में दलित वोटों को साधने के लिए प्रयासरत है। पार्टी ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को बुलाया और कई कार्यक्रम आयोजित किए। कांग्रेस का दावा है कि उसने सरकारों के दौरान दलितों के लिए प्रभावी योजनाएं और कानून बनाए हैं, जबकि भाजपा केवल चुनावी हथकंडे अपनाती है।

    बहुजन समाज पार्टी अपने पारंपरिक जाटव वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पार्टी लगातार प्रमोशन, आरक्षण और गेस्ट हाउस कांड जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को आगाह कर रही है। मायावती दलित राजनीति में प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं और ब्राह्मण-दलित समीकरण को साधने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बदलते राजनीतिक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में दलित वोट कई सीटों पर जीत और हार तय करने वाला है। इसी कारण सभी दल इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है, और यह चुनावी रणनीतियों के केंद्र में है।

  • पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!

    पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) के कुछ नेताओं ने पश्चिम एशिया (West Asia) संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ खड़े नजर आकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल चुके पार्टी सांसद शशि थरूर (MP Shashi Tharoor) के अलावा मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व सीएम कमलनाथ (Former CM Kamal Nath) और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा (Anand Sharma) और मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने पिछले कुछ दिनों में पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग राय जताई है।


    नेताओं की बयानबाजी से कांग्रेस की हुई किरकिरी

    इन प्रमुख नेताओं की बयानबाजी ने कांग्रेस की काफी किरकिरी कराई है। खासकर ऐसे समय जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न होने को लेकर लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। राहुल ने हाल ही में कहा था कि आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। यह स्थिति गलत विदेश नीति के कारण पैदा हुई है।


    आनंद शर्मा, कमलनाथ के बाद सरकार के साथ मनीष तिवारी

    कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पश्चिम एशिया में जारी जंग पर एक टीवी चैनल पर कहा, सरकार संभवतः सही काम कर रही है। अभी दो दिन पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं आनंद शर्मा और कमलनाथ ने भी मौजूदा स्थिति को संभालने के केंद्र के तरीके की सराहना की थी। आनंद शर्मा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि भारत का कूटनीतिक तरीका समझदारी भरा रहा है। इससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है।

    एलपीजी की कोई कमी नहीं है- कमलनाथ
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, एलपीजी की कोई कमी नहीं है। बस ये माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कुछ लोगों राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर डर फैला रहे हैं। शशि थरूर ने पिछले महीने एक लेख में पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार के संयमित रुख का समर्थन करते हुए इसे जिम्मेदारी भरा बताया है। उनके मुताबिक, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हैं।

  • रामलला के दर पर पहुंचे दिग्विजय सिंह: पहली बार अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन, बोले काफी अच्छा लगा

    रामलला के दर पर पहुंचे दिग्विजय सिंह: पहली बार अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन, बोले काफी अच्छा लगा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या स्थित भगवान राम मंदिर में पहली बार श्रीरामलला के दर्शन किए अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के बाद यह उनका पहला दौरा था दर्शन के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर आकर काफी अच्छा लगा उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी जल्द स्वस्थ हों और हमारा नेतृत्व करते रहें

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का चंदा दिया था और मंदिर के पूरा होने के बाद दर्शन करने की इच्छा जताई थी अब मंदिर पूरा हो गया है तो वे दर्शन करने आए हैं उनके इस कदम से कांग्रेस के भीतर और राज्य में सियासी हलचल भी बढ़ गई है

    दिग्विजय सिंह के रामलला दर्शन पर सियासत गरमाई पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि राम मंदिर बीजेपी की बपौती नहीं है राघोगढ़ में भी भगवान राम विराजमान हैं वहां उनके नाम की ज्योति जलती है राम मंदिर निर्माण के लिए दिग्विजय सिंह ने चेक से राशि दी थी और मंदिर पूरा होने पर दर्शन करने आए हैं भगराम राम सबके हैं

    वहीं बीजेपी प्रवक्ता डॉ हितेष बाजपेयी ने कहा कि दिग्विजय सिंह चतुर और उद्देश्य परख राजनीति करते हैं राज्यसभा की सीट पर चुनाव होने वाला है और इसी उद्देश्य को लेकर वे पहुंचे होंगे उन्होंने कहा कि वैसे कांग्रेस और राम मंदिर का दृष्टिकोण विरोधाभाषी रहा है

    इस तरह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का रामलला दर्शन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बन गया है उनके कदम ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी समीकरणों को भी नई दिशा दी है

  • कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश

    कांग्रेस को बड़ा झटका ऐतिहासिक अकबर रोड दफ्तर खाली करने के निर्देश


    नई दिल्ली: देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने का निर्देश मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह वही दफ्तर है जो लगभग 48 वर्षों तक कांग्रेस की पहचान बना रहा और पार्टी के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का गवाह रहा। सरकार की ओर से कांग्रेस को शनिवार तक इस भवन को खाली करने के लिए कहा गया है, जिससे यह मामला अब सियासी और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को केवल 24 अकबर रोड ही नहीं बल्कि 5 रायसीना रोड स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस के दफ्तर को भी खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि कांग्रेस ने पिछले वर्ष कोटला मार्ग पर अपने नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ का उद्घाटन कर दिया था, लेकिन अब तक वह पूरी तरह से पुराने दफ्तर से शिफ्ट नहीं हो पाई है। पार्टी की गतिविधियां अभी भी अकबर रोड स्थित भवन में जारी हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

    कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे को लेकर मंथन चल रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि 24 अकबर रोड से उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा है, क्योंकि यह दफ्तर केवल एक कार्यालय नहीं बल्कि पार्टी के इतिहास और संघर्ष का प्रतीक रहा है।

    इस दफ्तर का इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है। ब्रिटिश शासन के समय यह भवन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास स्थान था। बाद में यह म्यांमार की भारत में राजदूत डॉ खिन क्यी का निवास भी रहा, जिनकी बेटी आंग सान सू की ने आगे चलकर नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया। इस तरह यह भवन अंतरराष्ट्रीय और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

    कांग्रेस के लिए यह दफ्तर 1970 के दशक के अंत से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया। 1977 के चुनाव में हार के बाद जब पार्टी में विभाजन हुआ और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट को एक नए केंद्र की जरूरत थी, तब जी वेंकटस्वामी ने अपना बंगला पार्टी को उपलब्ध कराया। यहीं से कांग्रेस की राजनीतिक वापसी की कहानी शुरू हुई। इसके बाद यह दफ्तर इंदिरा गांधी के नेतृत्व से लेकर राजीव गांधी, पी वी नरसिम्हा राव और डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक पार्टी का प्रमुख केंद्र बना रहा।

    समय के साथ इस भवन को पार्टी ने अपनी जरूरतों के अनुसार विस्तार भी दिया, लेकिन हाल के वर्षों में संगठन के पुनर्गठन के चलते पार्टी ने नया मुख्यालय बनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में कोटला मार्ग स्थित इंदिरा भवन’ का उद्घाटन किया गया, जो अब कांग्रेस का नया ठिकाना बन चुका है।

    अब जब सरकार ने पुराने दफ्तर को खाली करने का आदेश दिया है, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक बदलाव भी माना जा रहा है। कांग्रेस इस आदेश को लेकर अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करने पर विचार कर रही है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस आदेश पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह अपने ऐतिहासिक दफ्तर को लेकर कोई कानूनी लड़ाई लड़ती है या फिर पूरी तरह से नए मुख्यालय इंदिरा भवन’ से अपने कामकाज को आगे बढ़ाती है।

  • UPA सरकार ने नहीं की देश की चिंता… कांग्रेस पर बरसे PM मोदी, मिडिल ईस्ट तनाव पर की खुलकर बात

    UPA सरकार ने नहीं की देश की चिंता… कांग्रेस पर बरसे PM मोदी, मिडिल ईस्ट तनाव पर की खुलकर बात


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को एक निजी न्यूज चैनल के शिखर सम्मेलन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार (UPA Government) ने देश की चिंता नहीं, बल्कि अपनी सत्ता बचाने की फिक्र में रहकर गलत फैसले लिए। पीएम मोदी ने विशेष रूप से यूपीए काल में जारी किए गए तेल बांडों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए आने वाली पीढ़ियों पर भारी वित्तीय बोझ डाला। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने अपने पत्ते खोले और साफ-साफ बताया कि वे किसके साथ हैं।


    कांग्रेस पर जमकर बरसे

    प्रधानमंत्री ने बताया कि 2004 से 2010 के बीच कांग्रेस सरकार ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड जारी किए थे। उन्होंने कहा कि उस समय पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें संकट में थीं, लेकिन कांग्रेस देश की नहीं, अपनी सत्ता की चिंता कर रही थी। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हवाले से कहा कि उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह फैसला गलत था और इससे आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ पड़ेगा।

    पीएम मोदी ने ‘रिमोट कंट्रोल’ से सरकार चलाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग दूर से सरकार चला रहे थे, उन्होंने सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय लिया, क्योंकि उस समय कोई जवाबदेही नहीं थी। उन्होंने खुलासा किया कि इन बांडों का भुगतान 2020 के बाद शुरू हुआ और ब्याज सहित कुल राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस के इस ‘पाप’ को धोने का काम किया है, जिसकी कीमत कम नहीं रही।


    कई गुटों में बंटी है दुनिया

    वैश्विक परिदृश्य पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया कई गुटों में बंटी हुई है, लेकिन भारत ने मजबूत और व्यापक साझेदारियां बनाई हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच भारत ने खाड़ी देशों से लेकर वैश्विक पश्चिम और दक्षिण तक सभी के साथ विश्वसनीय साझेदारी कायम की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं कि हम किसके साथ हैं? मेरा जवाब है- हम भारत के साथ हैं। हम भारत के हितों, शांति और संवाद के साथ हैं।

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला लड़खड़ा रही है, लेकिन भारत ने विविधीकरण और लचीलेपन का मॉडल पेश किया है। ऊर्जा, उर्वरक और आवश्यक वस्तुओं के मामले में सरकार ने नागरिकों को न्यूनतम परेशानी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। कोरोना महामारी के बाद से लगातार चुनौतियां आईं, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के एकजुट प्रयास से देश हर विपदा से पार पा रहा है।

    उन्होंने हाल की 23 दिनों की उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में भी भारत ने अपनी कूटनीति, निर्णय क्षमता और संकट प्रबंधन की ताकत दिखाई है। दुनिया भारत की नीति और रणनीति से आश्चर्यचकित है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत प्रगति, विकास और विश्वास के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

  • अमेरिकी कांग्रेस में एच-1बी वीजा प्रणाली पर बहस तेज: कौशल आधारित सुधार और नौकरी बदलाव की स्वतंत्रता पर जोर

    अमेरिकी कांग्रेस में एच-1बी वीजा प्रणाली पर बहस तेज: कौशल आधारित सुधार और नौकरी बदलाव की स्वतंत्रता पर जोर


    वॉशिंगटन। अमेरिका में एच-1बी वीजा कार्यक्रम जिसके तहत बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर वहां काम करते हैं इस हफ्ते अमेरिकी कांग्रेस में चर्चा का मुख्य विषय बना। संयुक्त आर्थिक समिति की बैठक में नेताओं और विशेषज्ञों ने मौजूदा लॉटरी आधारित वीजा प्रणाली की समीक्षा की और इसमें सुधार के सुझाव दिए।

    बैठक में प्रमुख मुद्दा यह था कि अमेरिका की बदलती जनसांख्यिकी और कामगारों की कमी को देखते हुए वीजा वितरण प्रणाली को अधिक लचीला और कुशलता आधारित बनाया जाए। कांग्रेस के सदस्य डेविड श्वाइकर्ट ने बताया कि रिटायर होने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जबकि काम करने वाले युवा स्थिर हैं। ऐसे में विदेशी कुशल कामगारों की भूमिका अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।

    विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा सिस्टम में कर्मचारी अधिकतर एक ही नियोक्ता पर निर्भर रहते हैं जिससे उनके वेतन पर दबाव पड़ता है। डॉ. ल्यूक पार्ड्यू ने सुझाव दिया कि अगर कर्मचारियों को नौकरी बदलने की अधिक स्वतंत्रता मिले तो उनकी उत्पादकता और वेतन दोनों बढ़ सकते हैं। हालांकि उन्होंने अंक आधारित (पॉइंट) सिस्टम बनाते समय सावधानी बरतने की चेतावनी दी।

    डैनियल डी. मार्टिनो ने कहा कि स्थायी निवास में देरी और लॉटरी सिस्टम की खामियां हैं। उन्होंने वीजा आवंटन में वेतन और कौशल आधारित चयन की वकालत की ताकि युवा और कुशल कामगारों को प्राथमिकता मिल सके। डॉ. डगलस होल्ट्ज-ईकिन ने भी कौशल आधारित इमिग्रेशन को बढ़ावा देने का समर्थन किया और कहा कि सुधार केवल एच-1बी तक सीमित नहीं होना चाहिए।

    जेरेमी न्युफेल्ड ने बताया कि अन्य देशों के अनुभव से पता चलता है कि सिर्फ पॉइंट सिस्टम पर्याप्त नहीं है। नौकरी का ऑफर मिलने पर अतिरिक्त अंक देने वाला मिश्रित सिस्टम अधिक प्रभावी हो सकता है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कुशल विदेशी कामगार अमेरिकी अर्थव्यवस्था की उत्पादकता बढ़ाते हैं और लंबे समय में वेतन में सुधार करते हैं।

    प्रतिनिधि लॉयड स्मकर ने पूछा कि क्या इमिग्रेशन बढ़ाने से आर्थिक विकास और राष्ट्रीय कर्ज की समस्या में मदद मिल सकती है। इस पर होल्ट्ज-ईकिन ने सहमति जताई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर भी चर्चा हुई जिसमें पार्ड्यू ने कहा कि एआई नौकरियां कम नहीं करेगा बल्कि नई तरह के कौशल की मांग बढ़ाएगा।

    कांग्रेस सदस्य विक्टोरिया स्पार्ट्ज और अन्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इमिग्रेशन नीति में मेहनती और कुशल लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और सिस्टम को समय के साथ बदलना चाहिए ताकि यह बदलती आर्थिक और बाजार की जरूरतों के अनुरूप काम करे।

    अंत में श्वाइकर्ट ने कहा कि प्रतिभा आधारित इमिग्रेशन सुधार अमेरिकी आर्थिक विकास उत्पादकता वेतन और स्थिरता के लिए आवश्यक है। एच-1बी वीजा अभी भी तकनीक और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विदेशी कुशल पेशेवरों के लिए मुख्य मार्ग है और इस पर किसी भी बदलाव पर भारत भी नजर रखता है।

  • कांग्रेस ने असम चुनाव के लिए 22 उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की, अबतक कुल 87 नाम घोषित

    कांग्रेस ने असम चुनाव के लिए 22 उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की, अबतक कुल 87 नाम घोषित


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को 22 उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की। इससे पहले पार्टी 42 उम्मीदवारों वाली पहली और 23 उम्मीदवारों वाली दूसरी सूची जारी कर चुकी है। तीसरी सूची के साथ अब तक कुल 87 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जा चुके हैं।

    पार्टी की ओर से जारी सूची:
    1.कोकराझार (3) (अनुसूचित जनजाति) : मनिक ब्रह्मा
    2.बाओखुंगग्री (4) : सपाली माराक
    3.परबतझोरा (5) : अशराफुल इस्लाम शेख
    4.धुबरी (8) : बेबी बेगम
    5.जलेस्वर (12) : आफताब उद्दीन मोल्लाह
    6.अभयापुरी (16) : प्रदीप सरकार
    7.सिदली चिरांग (19) (अनुसूचित जनजाति) : मातिलाल नरजारी
    8.चेंगा (23) : अब्दुर रहीम अहमद
    9.पाकाबेटबारी (25) : जाकिर हुसैन सिकदार
    10.बक्सा (42) (अनुसूचित जनजाति) : जगदीश मदाई
    11.तामुलपुर (43) (अनुसूचित जनजाति) : रफी डैमारी
    12.उदालगुड़ी (46) (अनुसूचित जनजाति) : सोरेन डैमारी
    13.लाहरीघाट (53) : डॉ. आसिफ मोहम्मद नजर
    14.नागांव-बतरद्राबा (60) : डॉ. दुरलव चमुआ
    15.नदुआर (69) : सुनील चेत्री
    16.रोंगोनादी (74) : जयोन्तो खौंड
    17.लखीमपुर (76) : घना बुरागोहैं
    18.धकुआखाना (77) (अनुसूचित जनजाति) : आनंद नाराह
    19.माकुम (85) : सिबनाथ चेतिया
    20.खुमताई (106) : रोसेलिना तिर्की
    21.होवारघाट (109) (अनुसूचित जनजाति) : संजीब टेरोन
    22.अल्गापुर-कटलीचेड़ा (122) : जुबैर अनाम मजूमदार