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  • शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!

    शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!


    नई दिल्ली । कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने सोमवार 22 दिसंबर को नीतीश कुमार सरकार की तरफ से बिहार में बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे कार्यों की जमकर सराहना की, जबकि कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ गठबंधन में है.नालंदा साहित्य महोत्सव में भाग लेने के लिए बिहार आए शशि थरूर ने एक चैनल संग बातचीत में कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बुनियादी ढांचा पहले की तुलना में कहीं बेहतर है. सड़कें बेहतर हैं. लोग देर रात तक सड़कों पर दिखते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. अब तक बिजली, पानी और बाकी सब कुछ ठीक चल रहा है.
    नीतीश के बारे में पूछे जाने पर क्या बोले
    उन्होंने कहा कि मेरा मतलब है, इसमें कोई शक नहीं कि हाल के वर्षों में बहुत सी अच्छी चीजें हुई हैं. नीतीश कुमार के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस सांसद ने टालमटोल करते हुए कहा कि मुझे यहां राजनीति में मत घसीटिए. मैं निश्चित रूप से इस प्रगति को देखकर बहुत खुश हूं. बिहार की जनता और उनके प्रतिनिधि इसके लिए श्रेय के पात्र हैं.

    कांग्रेस का क्या है रिएक्शन

    बिहार में थरूर के बीजेपी संग गठबंधन वाली सरकार की प्रशंसा करने वाली हालिया टिप्पणी पर कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. पिछले महीने दुबई में एक मीडिया कार्यक्रम में थरूर ने राजनीतिक परिदृश्य पर खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हर किसी को वैचारिक रूप से कट्टरपंथी होना पड़ता है और वे दूसरे पक्ष की अच्छाई को नहीं देखते या दूसरे पक्ष के किसी भी व्यक्ति से बात नहीं करते.

    हिजाब विवाद को लेकर क्या कहा था
    बता दें कि 4 बार के सांसद शशि थरूर, प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ बीजेपी की प्रशंसा करने वाले कई बयानों के बाद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपने संबंध खराब होते देख रहे हैं. थरूर हमेशा से यह कहते रहे हैं कि उनकी टिप्पणियां केवल भारत की बेहतर सेवा करने की इच्छा को दर्शाती हैं. इससे पहले शशि थरूर ने हिजाब विवाद को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा था कि यह घटना अनुचित थी.

  • जबलपुर में बीजेपी नेत्री का नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार धर्म परिवर्तन विवाद पर वीडियो वायरल

    जबलपुर में बीजेपी नेत्री का नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार धर्म परिवर्तन विवाद पर वीडियो वायरल


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में बीजेपी की जिला उपाध्यक्ष अंजू भार्गव का एक विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो में अंजू भार्गव ने एक नेत्रहीन महिला से अभद्र व्यवहार किया है। यह घटना 20 दिसंबर को जबलपुर के गोरखपुर क्षेत्र स्थित एक चर्च परिसर में हुई थी। बताया गया है कि अंजू भार्गव और अन्य हिंदू संगठन के लोग कथित तौर पर धर्म परिवर्तन का विरोध कर रहे थे।
    उनका आरोप था कि चर्च में नेत्रहीन बच्चों का धर्म परिवर्तन किया जा रहा था। इस दौरान एक नेत्रहीन महिला के साथ अंजू भार्गव की बहस हो गई और वीडियो में अंजू भार्गव महिला का मुंह दबाते हुए उसे अपशब्द कहती नजर आ रही हैं। वायरल वीडियो में यह भी दिखाया गया कि भार्गव ने महिला का हाथ पकड़कर धक्का-मुक्की की और कहा कि अगले जन्म में भी वह अंधी ही रहेगी।

    इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस ने भाजपा को घेरते हुए पार्टी पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे क्रूरता का उदाहरण बताते हुए भाजपा की आलोचना की और कहा कि पार्टी अपनी कथनी और करनी में अंतर दिखा रही है।

    भाजपा की चुप्पी

    इस मामले पर अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि इस घटना के बाद से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी है।

    पुलिस का बयान

    इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी ने बीच-बचाव करते हुए स्थिति को शांत करने की कोशिश की लेकिन वीडियो में जो दिखाया गया वह पूरे मामले को और संवेदनशील बना रहा है।यह घटना मध्य प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक माहौल को और तंग कर सकती है जहां धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दे अक्सर विवादों का कारण बनते हैं।

  • उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'

    उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में आगामी बृहन्मुंबई महानगर पालिका बीएमसी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। महाविकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह इस चुनाव को अकेले लड़ेगीजिसके बाद उद्धव गुट और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है। उद्धव गुट के प्रवक्ता आनंद दुबे ने रविवार को कांग्रेस पर तीखा तंज करते हुए कहामुंबई में कांग्रेस पार्टी को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। वह पिछले तीन दशकों से लगातार मुंबई नगर निगम चुनाव हारती आ रही हैतो ऐसे में वह 2026 में कौन सा चमत्कार कर देंगे? कांग्रेस एक पर्यटक की तरह मुंबई आती हैहोर्डिंग्स लगाती हैचुनाव हारती है और फिर घर लौट जाती है।

    उद्धव गुट के प्रवक्ता ने यह बयान वीडियो के माध्यम से दियाजिसमें उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना का बीएमसी से गहरा रिश्ता रहा है और पार्टी पिछले 30 सालों से मुंबई नगर निगम पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस चुनाव में गंभीरता से लेने की कोई वजह नहीं हैक्योंकि वे हमेशा चुनाव हारते हैं। कांग्रेस ने इस तंज का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगी और इसके पीछे वैचारिक विचार है। कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने बयान दियाहम पहले ही अपनी स्थिति को स्पष्ट कर चुके हैं। कांग्रेस पार्टी चुनाव में अकेले बढ़ना चाहती है और उसके पीछे वैचारिक विचार है। हमें इस मामले पर कोई जल्दबाजी नहीं है। पूरी पार्टी ने सोच-समझ कर यह फैसला लिया है। हम उन सभी पार्टियों के खिलाफ लड़ेंगे जो धर्मजातिक्षेत्र और भाषा के आधार पर टकराव पैदा करती हैं।

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब उद्धव गुट ने महाविकास अघाड़ी में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस इसके पक्ष में नहीं थीक्योंकि वह राज ठाकरे के साथ चुनाव लड़ने में असमंजस महसूस कर रही थी। इसके चलते महाविकास अघाड़ी के भीतर एकता बनी रहीलेकिन कांग्रेस और उद्धव गुट के बीच मतभेद उभर आए। बीएमसी पर पिछले कई सालों से शिवसेना का कब्जा रहा है। शुरूआत से ही शिवसेना भाजपा के साथ मिलकर यहां शासन चला रही थी

    । 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जीत दर्ज की थीजबकि भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। उद्धव गुट अब 2022 में विभाजन के बाद बीएमसी पर पुनः कब्जा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैहालांकि इसे पहले से कहीं ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि वह इस चुनाव में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तैयार है और इस बार किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगीचाहे वह महाविकास अघाड़ी हो या कोई अन्य गठबंधन।

  • शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा

    शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल के दिनों में अपने राजनीतिक रुख में बदलाव दिखाया है और पार्टी नेतृत्व के साथ अपने संबंधों में सुधार के संकेत दिए हैं। बीते कुछ समय से थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद की अटकलें आम रही हैं। विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद थरूर ने कई मौकों पर मोदी सरकार की तारीफ की थी जिससे राजनीतिक गलियारों में उनकी नाराजगी और पार्टी से दूरी की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
    हालांकि अब शशि थरूर ने अपने रुख में बदलाव किया है। उन्होंने पार्टी का खुलकर समर्थन करना शुरू कर दिया है और हाल ही में राहुल गांधी द्वारा मनरेगा योजना पर पोस्ट साझा किया है। थरूर ने इसे री-शेयर करते हुए लिखा कि मनरेगा देश की सबसे सफल विकास योजनाओं में शामिल रही है और ग्रामीण गरीबों के लिए यह एक अहम सामाजिक सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना को खत्म करना पीछे की ओर उठाया गया कदम होगा जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। मनरेगा योजना को लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है।
    मोदी सरकार ने मनरेगा की जगह VB-GRAM G बिल संसद में लाकर पारित किया जिसे विपक्षी दल ग्रामीण हितों के खिलाफ मान रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि यह नया कानून मनरेगा की अधिकार और मांग पर आधारित गारंटी व्यवस्था को समाप्त करता है और इसे केंद्र से संचालित राशन-आधारित योजना में बदल देता है। शशि थरूर ने राहुल गांधी के इस संदेश को साझा कर इसे समर्थन दिया।राहुल गांधी ने पोस्ट में मनरेगा के ग्रामीण मजदूरों और महिलाओं पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस योजना ने ग्रामीणों को अपने काम का सही मूल्य दिलाने में मदद की मजदूरी में सुधार किया पलायन को कम किया और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया। उन्होंने चेतावनी दी कि VB-GRAM G इन उपलब्धियों को कमजोर करता है और कोविड काल में मनरेगा की उपयोगिता का उदाहरण देते हुए कहा कि इसने लाखों लोगों को भूख और कर्ज से बचाया।
    थरूर का रुख पहले मोदी सरकार की सराहना करने वाला था लेकिन अब वे पार्टी के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में केरल निकाय चुनावों के दौरान उन्होंने भाजपा की तारीफ की थी लेकिन उसके बाद कई मौकों पर कांग्रेस का समर्थन किया। लोकसभा में भारत के रुपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन शांति विधेयक 2025 पर चर्चा में उन्होंने इसके खामियों को उजागर किया और कहा कि यह रेडियोधर्मी पदार्थों और परमाणु अपशिष्ट से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करता है। इसके अलावा थरूर ने केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव IFFK में 19 फिल्मों के प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी न देने की आलोचना की। उन्होंने इसे सिनेमाई अशिक्षा और नौकरशाही की अत्यधिक सतर्कता करार दिया। थरूर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से अनुमति देने का अनुरोध भी किया। साथ ही उन्होंने फिल्म अभिनेता देव आनंद की फिल्म हरे रामा हरे
  • सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं

    सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं


    नई दिल्ली । भारत सरकार ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित 51 बक्सों में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय पीएमएमएल को वापस करने की मांग की है। यह दस्तावेज 2008 में तात्कालिक प्रधानमंत्री संग्रहालय से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया है। सरकार ने इन दस्तावेजों को निजी संपत्ति मानने से इनकार करते हुए कहा है कि ये सार्वजनिक अभिलेख हैं और इनकी सार्वजनिक पहुंच जरूरी है।

    केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस मुद्दे पर कहा यह कोई निजी पारिवारिक दस्तावेज नहीं हैं। ये भारत के पहले प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय अभिलेख हैं और इन्हें सार्वजनिक अभिलेखागार में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन दस्तावेजों की अदला-बदली को लेकर संसद में कई बार चर्चा हो चुकी है लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया।

    विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक सवाल उठाया कि क्या 2025 में पीएमएमएल के निरीक्षण के दौरान नेहरू के दस्तावेज गायब पाए गए थे। इसके जवाब में शेखावत ने साफ किया कि ये दस्तावेज लापता नहीं हैं बल्कि सोनिया गांधी के पास हैं और उनका स्थान पूरी तरह से ज्ञात है। उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज 2008 में विधिवत तरीके से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन वे अब भी वापस नहीं किए गए हैं।

    शेखावत ने आगे कहा सोनिया गांधी से यह पूछा जाना चाहिए कि क्यों ये दस्तावेज अब तक वापस नहीं किए गए जबकि कई बार पीएमएमएल की ओर से पत्र भेजे गए हैं। अगर कुछ छिपाया जा रहा है तो क्या यह सही है? उन्होंने यह भी जोड़ा कि इतिहास को सही तरीके से समझने और उसमें सही दृष्टिकोण विकसित करने के लिए इन दस्तावेजों तक सभी को पहुंच मिलनी चाहिए। विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए शेखावत से पूछा कि क्या अब वह माफी मांगेंगे क्योंकि यह स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज गायब नहीं थे। कांग्रेस ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक लाभ के लिए तूल दे रही है।

    कुल मिलाकर यह मामला अब एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ सरकार ने नेहरू के दस्तावेजों को सार्वजनिक अभिलेखागार में रखने की जरूरत जताई है वहीं कांग्रेस और गांधी परिवार की ओर से इसे एक निजी और परिवारिक अधिकार बताया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर ममता बनर्जी और सोनिया गांधी किस तरह की प्रतिक्रिया देती हैं और सरकार इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाती है।

  • बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'

    बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस TMC के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए उनकी पार्टी को कांग्रेस की जरूरत नहीं है। हालांकि अभिषेक ने यह भी साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस अब भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है।

    अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कहा कांग्रेस के पास बंगाल में ऐसा कुछ नहीं है जिसकी हमें जरूरत हो या जो वह हमें दे सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल की जबकि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें गठबंधन का प्रस्ताव दिया था जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। अभिषेक ने कहा इसका परिणाम सबके सामने है उनकी सीट अब घटकर एक रह गई है।

    अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कोई भी निर्णय ममता बनर्जी ही लेंगी। उन्होंने कहा जब पार्टी कोई फैसला लेगी तो आपको पता चल जाएगा। फिलहाल कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं है।
    इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भी हमला किया और मनरेगा का नाम बदलने के मुद्दे पर कहा कि इसका नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने सरकार से पश्चिम बंगाल को बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की। केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल का बकाया भुगतान करना चाहिए। मनरेगा का नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा उन्होंने कहा।

    अभिषेक ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बंगाल के खिलाफ काम कर रही है और गांधीजी के नाम को हटाना बंगाल विरोधी कदम है। उन्होंने कहा गांधीजी को ‘महात्मा’ की उपाधि रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी इसलिए बंगाल से गांधीजी का नाम हटाना गलत है।इस बयान ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया है और यह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतियों का इशारा है। अब यह देखना होगा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस क्या कदम उठाती है और कांग्रेस के साथ गठबंधन का कोई नया मोड़ आता है या नहीं।

  • कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'

    कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'


    नई दिल्ली । कांग्रेसी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक विवादित बयान दिया है जिसके बाद राजनीति में हलचल मच गई है। चव्हाण का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि उस दिन भारतीय विमानों के पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की संभावना बहुत अधिक थी।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने एक इंटरव्यू में कहा ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन अगर ग्वालियर बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता तो उसे पाकिस्तान द्वारा बहुत आसानी से मार गिराया जा सकता था। यही कारण था कि एयर फोर्स को पूरी तरह से ग्राउंडेड रखा गया था। चव्हाण ने आगे कहा कि पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे लेकिन ऑपरेशन के अगले चरणों में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई।

    यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के एक्शन को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर जो कि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था एक बड़ा सैन्य अभियान था जिसमें भारतीय वायु सेना और सेना ने एकजुट होकर पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया था। चव्हाण के बयान के बाद विपक्षी दलों और रक्षा विशेषज्ञों ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    चव्हाण का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना और सेना के संचालन पर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान भारतीय सेना और वायु सेना की कार्यप्रणाली को गलत तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि चव्हाण ने अपनी बात तथ्यों पर आधारित रखते हुए रखी है और ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय विमानों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उपाय किए गए थे।

    इससे पहले भारतीय वायु सेना और सेना के कई अधिकारियों ने भी माना था कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन कुछ फैसले धीमे थे क्योंकि पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों को निशाना बनाने का खतरा बहुत ज्यादा था। हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    चव्हाण के बयान ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय वायु सेना के लिए ऐसे ऑपरेशनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई कमजोरी रही थी। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं जो एक संवेदनशील मामला हो सकता है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा बना रहता है और ऐसे बयान से दोनों देशों के सैन्य इतिहास और रणनीति पर चर्चा और विवाद दोनों का सामना करना पड़ सकता है। चव्हाण के बयान को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय और वायु सेना से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इस बयान ने राजनीतिक और रक्षा हलकों में हंगामा मचा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में चव्हाण का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस का कारण बन सकता है और अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी

    NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ को लेकर अब एनडीए में भी विरोध की स्थिति बन गई है। जहां एक ओर विपक्ष ने इस विधेयक को महात्मा गांधी का अपमान मानते हुए उसका विरोध किया है वहीं एनडीए का एक प्रमुख सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी  भी सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है।

    यह विधेयक मनरेगा योजना के स्थान पर लाया गया है लेकिन विपक्ष और सरकार के सहयोगी दलों में इसके नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तेलुगु देशम पार्टी के सांसद लवु श्री कृष्ण देवरयालु ने विधेयक के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और इस नए बदलाव से उन्हें और ज्यादा बोझ पड़ेगा।

    देवरयालु ने आगे कहा “कुछ सालों से मनरेगा में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और यह विचार संसद के बाहर और अंदर कई बार उठाए गए थे। हाल ही में काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किया गया जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इस योजना का खर्च राज्यों पर डालने का प्रस्ताव खासकर आंध्र प्रदेश जैसे राज्य के लिए सही नहीं है।
    टीडीपी के प्रवक्ता एन विजय कुमार ने इस नए वर्जन का स्वागत तो किया लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार से 40 फीसदी भुगतान के प्रावधान पर पुनः विचार करने की अपील की। उनका कहना था कि इस भुगतान व्यवस्था से राज्यों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

    वहीं कांग्रेस ने भी इस विधेयक पर विरोध जताया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम हटाना उनके अपमान के समान है। कांग्रेस ने इसे एक “राजनीतिक कदम बताया है और दावा किया कि मोदी सरकार गांधी के विचारों से मुंह मोड़ रही है। कांग्रेस ने इसके खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।

    ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस विधेयक को संसद में पेश करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं और उनका नाम किसी योजना से हटाना उनका अपमान नहीं है। यह सरकार गांधीजी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय भी ‘जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला गया था और तब क्या यह पंडित नेहरू का अपमान था?

    चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं और अब इस नए विधेयक के तहत 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इस योजना के लिए प्रावधानित की गई है जो गांवों के समग्र विकास के लिए उपयोग की जाएगी।

    यह विधेयक ध्वनिमत से पास हुआ है लेकिन इसके बावजूद विपक्ष और एनडीए के भीतर ही इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर उन राज्यों के लिए यह विधेयक एक चुनौती बन सकता है जो पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। सरकार की योजना है कि इस विधेयक से ग्रामीण भारत का समग्र विकास होगा और विकसित भारत की दिशा में एक ठोस कदम उठाया जाएगा। लेकिन इसके नाम उद्देश्य और वित्तीय बोझ को लेकर बढ़ते विवाद से यह साफ है कि आगामी दिनों में इस पर और भी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।

  • कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम  बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है

    कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है


    नई दिल्ली । कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद और आंतरिक खींचतान को लेकर चल रही अटकलों के बीच वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी के साथ उनके रिश्ते पूरी तरह सामान्य हैं। हाल ही में दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस की रैली में उनकी गैरमौजूदगी और कुछ अहम बैठकों में शामिल न होने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

    इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने चर्चित समाचार एजेंसी  से बातचीत में साफ कहा कि उनकी तरफ से किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष नहीं है। रैली में शामिल न हो पाने के सवाल पर उन्होंने कहा मैं जरूर अटेंड करता क्यों नहीं करता? लेकिन उस दिन मैं विदेश में था। यह कार्यक्रम मैंने करीब छह महीने पहले तय किया था। थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी गैरहाजिरी को पार्टी से दूरी या असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक है तो थरूर ने दो टूक जवाब दिया बिल्कुल ठीक है। मुझे यह कहने की जरूरत क्यों पड़े? मेरी तरफ से सब कुछ ठीक है। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व के प्रति भरोसे और प्रतिबद्धता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    इस बीच सोशल मीडिया मंच ‘एक्स पर एक यूजर द्वारा किए गए विश्लेषण ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी। यूजर ने अपने लंबे पोस्ट में शशि थरूर और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच कथित वैचारिक विरोधाभास की बात कही थी। पोस्ट में यह तर्क दिया गया था कि यह विरोधाभास दरअसल कांग्रेस पार्टी के भीतर मौजूद दो अलग-अलग वैचारिक प्रवृत्तियों को दर्शाता है।

    यूजर के अनुसार समस्या थरूर और राहुल गांधी के सह-अस्तित्व में नहीं है बल्कि कांग्रेस की उस अक्षमता में है जिसमें पार्टी अलग-अलग विचारधाराओं को चुनने एकजुट करने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से लागू करने में सफल नहीं हो पा रही है। इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने इसे विचारशील विश्लेषण करार दिया।

    थरूर ने लिखा इस विचारशील विश्लेषण के लिए धन्यवाद। कांग्रेस पार्टी में हमेशा एक से अधिक प्रवृत्तियां रही हैं। आपका आकलन निष्पक्ष है और वर्तमान वास्तविकता की एक निश्चित धारणा को प्रतिबिंबित करता है। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वे पार्टी के भीतर वैचारिक विविधता को एक स्वाभाविक और ऐतिहासिक प्रक्रिया मानते हैं न कि टकराव का कारण।

    गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस सांसदों की एक अहम बैठक में भी शशि थरूर शामिल नहीं हुए थे। इस पर भी सवाल उठे थे। हालांकि चर्चित सूत्रों के हवाले से बताया कि थरूर ने बैठक में शामिल न हो पाने की जानकारी पहले ही पार्टी को दे दी थी। सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय वह कोलकाता में प्रभा खैतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद थे।

    कुल मिलाकर शशि थरूर के हालिया बयानों और स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच किसी बड़े टकराव की बात फिलहाल केवल अटकलों तक सीमित है। थरूर ने न सिर्फ अपनी गैरहाजिरी के कारण गिनाए बल्कि यह भी जताया कि पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं का होना कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में उनके बयान कांग्रेस के भीतर एकता और संवाद के महत्व को रेखांकित करते हैं।

  • कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात

    कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात


    नई दिल्‍ली । कर्नाटक(Karnataka) में मुख्यमंत्री पद को लेकर मची खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। हाई कमान के निर्देश पर मुख्यमंत्री के घर हुए दोनों नेताओं के नाश्ते के बाद ऐसा दावा किया जा रहा था कि अब सब ठीक है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से दोनों पक्षों की तरफ से की जा रही बयान बाजी के बाद यह साफ है कि कुछ ठीक नहीं है। हिन्दुस्तान (Hindustan)टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसी खींचतान को लेकर अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया(Siddaramaiah) और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार(DK Shivakumar) 14 दिसंबर को नई दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं।

    कांग्रेस के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में इन दोनों नेताओं की बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी में से किसी एक से हो सकती है। पार्टी के करीबी सूत्र के मुताबिक इस बैठक के लिए समय बहुत कम है लेकिन अगर यह मुलाकात होती है, तो यह कर्नाटक के आगामी हालात के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी।

    कर्नाटक में कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एचटी से कहा, “सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। यदि वे हमारे किसी भी शीर्ष नेता से मिलना चाहते हैं, तो वह हमेशा ऐसा कर सकते हैं।” सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक के नेताओं की कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से यह मुलाकात नई दिल्ली के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के तहत रामलीला मैदान में होने वाली रैली के बाद होगी।

    गौरतलब है कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से दोनों नेताओं की मुलाकात की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों खेमों के बीच में पिछले कई दिनों से खींचतान मची हुई है। 2023 से सत्ता में आने के बाद से दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर तंज कसते रहे हैं। लेकिन 20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने पर इन हमलों की तीव्रता बढ़ गई। शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि जीत के बाद सरकार के आधे पड़ाव पर सत्ता हस्तांतरण की बात हुई थी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका।