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  • कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह

    कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह


    नई दिल्‍ली । पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने बयानों से राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने बीजेपी के कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं से कोई सलाह नहीं ली जाती। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने का दर्द अभी भी ताजा है, इसलिए कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं उठता।

    बीजेपी पर हमला:
    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में बड़े फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं की राय की कोई अहमियत नहीं है, हालांकि उनके पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है। इस बयान के साथ उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को पूरी तरह से नकारा किया।

    प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ, सिद्धू पर प्रहार:
    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि मोदी जी का पंजाब के प्रति विशेष स्नेह है। वहीं, नवजोत कौर सिद्धू पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अमरिंदर ने सिद्धू और उनकी पत्नी को ‘अस्थिर’ करार दिया।

    अकाली दल से गठबंधन की जरूरत पर जोर:
    पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए, अमरिंदर सिंह ने बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन करने की सलाह दी। उनका मानना था कि बिना गठबंधन के पंजाब में सरकार बनाना मुश्किल है।

    ‘आप’ सरकार पर तीखा हमला:
    आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी अमरिंदर सिंह ने करारा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब अब सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान केवल टीवी पर चुटकुले सुनाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में असली फैसले दिल्ली से किए जा रहे हैं और मान केवल नाममात्र के मुख्यमंत्री हैं। इसके अलावा, अमरिंदर ने पंजाब को ‘भिखारी राज्य’ करार दिया, जो मुफ्त योजनाओं की वजह से बर्बाद हो गया है।

    बीजेपी-अकाली गठबंधन पर प्रतिक्रिया:
    अमरिंदर सिंह के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन के सुझाव पर बीजेपी नेताओं ने खारिज कर दिया और कहा कि पार्टी अकेले पंजाब में चुनाव लड़ेगी। हालांकि, अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस सुझाव का समर्थन किया और कहा कि बीजेपी पंजाब में अकेले सरकार नहीं बना सकती।

    AAP का पलटवार:
    आम आदमी पार्टी ने अमरिंदर सिंह के ‘भिखारी राज्य’ वाले आरोपों पर तीखा पलटवार किया। ‘आप’ के नेताओं ने अमरिंदर सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि उनकी सरकार के दौरान खनन और केबल माफिया फल-फूल रहे थे। ‘आप’ ने यह भी कहा कि पंजाब की जनता ने पिछले भ्रष्ट शासन के खिलाफ खड़े होकर ‘आप’ को बहुमत दिया।

    कांग्रेस और ‘आप’ का तंज:
    कांग्रेस और ‘आप’ ने कैप्टन के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन सुझाव पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों दल अकेले ही इतने कमजोर हैं कि उनका गठबंधन भी किसी असरदार बदलाव का कारण नहीं बनेगा।

    इस तरह, कैप्टन अमरिंदर सिंह के हमले और उनके सुझावों पर विभिन्न दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। पंजाब की राजनीतिक स्थिति में यह बयान एक नई बहस का आगाज कर सकते हैं।

  • अमरिंदर सिंह का बयान: कहा- भाजपा में मुझसे सलाह नहीं ली जाती, लेकिन कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं

    अमरिंदर सिंह का बयान: कहा- भाजपा में मुझसे सलाह नहीं ली जाती, लेकिन कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं


    ई दिल्‍ली । पंजाब(Punjab) के पूर्व मुख्यमंत्री (Chief Minister)और भारतीय जनता पार्टी(Bharatiya Janata Party) के नेता अमरिंदर सिंह(Amarinder Singh) ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया। भाजपा के कामकाज की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विपरीत, पार्टी उनसे परामर्श नहीं कर रही है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस में लौटने की संभावना को पूरी तरह खारिज किया।

    मीडिया को दिए इंटरव्यू में अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्हें जिस तरह से मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था, उससे वह अब भी आहत हैं, इसलिए कांग्रेस में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि भाजपा में सभी निर्णय दिल्ली में लिए जाते हैं और जमीनी नेताओं से परामर्श नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है, लेकिन मैं खुद को उन पर थोप नहीं सकता।’

    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मोदी का पंजाब के लिए विशेष स्नेह है और वह राज्य के लिए कुछ भी करेंगे। नवजोत कौर सिद्धू के इस बयान पर कि पंजाब में 500 करोड़ रुपये का सूटकेस देने वाला मुख्यमंत्री बनता है, सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी को अस्थिर बताया और सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। सिंह ने कहा कि भाजपा पंजाब में तभी मजबूत हो सकती है जब वह शिरोमणि अकाली दल के साथ हाथ मिलाए। उन्होंने दावा किया कि दोनों दल अंततः एक साथ आएंगे, क्योंकि पंजाब में गठबंधन के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसा
    वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब आतंकवाद के वर्षों के बाद सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसते हुए कहा कि वह केवल टीवी पर आते हैं और चुटकुले सुनाते हैं। सिंह ने आरोप लगाया कि मुफ्त की योजनाओं के कारण पंजाब भिखारी राज्य बन गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मान केवल नाममात्र के मुखिया हैं, जबकि पंजाब के असली फैसले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ले रहे हैं। सिंह ने लोगों से स्थिरता के लिए भाजपा पर विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि भारत की सुरक्षा पंजाब के हितों से जुड़ी हुई है।

  • हिमंत बिस्वा सरमा का तंज, कहा- मैं भूल गया कांग्रेस से आया हूं, कट्टर भाजपाई बनने का रहता है प्रयास

    हिमंत बिस्वा सरमा का तंज, कहा- मैं भूल गया कांग्रेस से आया हूं, कट्टर भाजपाई बनने का रहता है प्रयास


    नई दिल्‍ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma)ने कांग्रेस पर एकबार फिर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वह कट्टर भाजपाई (Hardcore BJP)बनने की कोशिश करते रहते हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वह भूल गए हैं कि वह कांग्रेस से भाजपा (BJP)में आए थे। उन्होंने साल 2015 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे।

    सरमा से जब पूछा गया कि सिर्फ असम नहीं, बल्कि भारत के कई राज्यों में आप भाजपा के गो टू मैन बन गए हैं, अब तो कोई यकीन भी नहीं करता कि आप कांग्रेस से आए हैं। आज तक के कार्यक्रम में पूछे गए इस सवाल का जवाब मजाकिया अंदाज में दिया।

    उन्होंने कहा, ‘मैं भी भूल गया हूं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सबको भूल जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘बीजेपी से ज्यादा तो बीजेपी नहीं हो सकता पर अच्छा बीजेपी होने की कोशिश करता हूं। पूरा कट्टर बीजेपी बन जाऊं, उसका प्रयास तो होता रहता है।’

    क्यों छोड़ी कांग्रेस
    सरमा ने साल 2015 में कांग्रेस छोड़ दी थी। उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति के आरोप लगाए थे। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि जब से उनके बेटे गौरव गोगोई राजनीति में आए हैं, तब से वह मतलबी हो गए है। खास बात है कि वह कांग्रेस में रहते हुए मंत्री बने थे। वहीं, भाजपा में आने के बाद वह मंत्री बने और बाद में असम के मुख्यमंत्री का पद भी संभाला।

    असम की सुरक्षा के लिए सामुदायिक रक्षा तंत्र तैयार करें: हिमंत
    गुरुवार को सरमा ने लोगों से अपील की कि वे राज्य की सुरक्षा के लिए सामुदायिक स्तर पर मिलकर रक्षा तंत्र तैयार करें। सरमा ने लोगों से आग्रह किया कि वे उन लोगों का सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कार करें जो कथित तौर पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमें उन्हें (जो लोग अतिक्रमण करते हैं) आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। लेकिन अगर वे ऊपरी असम के कुछ स्थानों पर पहले से ही मौजूद हैं, तो हम उन्हें वहां से हटा देंगे, जैसा हमने उरीयमघाट में किया था।’

    राज्य सरकार ने नगालैंड के साथ राज्य की सीमा पर उरीयमघाट में रेंगमा संरक्षित वन में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया, जिसमें लगभग 11,000 बीघे (लगभग 1,500 हेक्टेयर) भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान में लगभग 1,800 परिवार प्रभावित हुए, जिनमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के थे। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले असम को ‘सुरक्षित’ नहीं बना सकती है। सभी को उस प्रक्रिया में योगदान देना होगा।

  • शशि थरूर ने ठुकराया वीर सावरकर अवॉर्ड, आयोजकों का दावा: कांग्रेस के डर से पीछे हटे सांसद

    शशि थरूर ने ठुकराया वीर सावरकर अवॉर्ड, आयोजकों का दावा: कांग्रेस के डर से पीछे हटे सांसद


    नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इस बार वजह है वीर सावरकर अवॉर्ड। हाल ही में पुरस्कार आयोजकों ने इस वर्ष के विजेताओं की सूची में थरूर का नाम शामिल किया, लेकिन सांसद ने यह अवॉर्ड स्वीकार करने से साफ इंकार कर दिया।

    थरूर का पक्ष

    शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से ही पता चला कि उन्हें अवॉर्ड के लिए चुना गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इसके बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने इसे स्वीकार किया था। थरूर ने इसे आयोजकों की गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई बताया।

    उन्होंने कहा, “पुरस्कार की प्रकृति, इसे देने वाले संगठन या अन्य विवरणों की जानकारी न होने के कारण, मेरे शामिल होने या पुरस्कार स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।”

    आयोजकों का पलटवार

    वहीं, पुरस्कार आयोजक हाई रेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (HRDS) इंडिया ने थरूर के आरोपों को खारिज कर दिया। HRDS के सचिव अजी कृष्णन ने कहा कि थरूर को काफी पहले ही सूचित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि संगठन और जूरी के चेयरमैन ने थरूर से उनके आवास पर मुलाकात कर उन्हें समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

    कृष्णन ने कहा कि थरूर ने उस समय अन्य अवॉर्ड विजेताओं की सूची भी मांगी और उन्हें वह सूची दे दी गई। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि शायद थरूर कांग्रेस की प्रतिक्रिया के डर से अवॉर्ड लेने से पीछे हटे।

    राजनीतिक बहस

    सावरकर पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाने वाले थरूर का यह कदम अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस पार्टी, जो ऐतिहासिक रूप से सावरकर की विचारधारा की आलोचक रही है, के एक सांसद का पुरस्कार ठुकराना पार्टी लाइन के अनुरूप है।

    हालांकि आयोजकों के दावे ने विवाद को नया आयाम दिया है। अब यह मामला केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस और मीडिया में बड़े पैमाने पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

  • कोई राजनीतिक दल नहीं दे रहा हुमायूं कबीर का साथ, TMC ने विधानसभा में भी दूरी बनाने का फैसला लिया"

    कोई राजनीतिक दल नहीं दे रहा हुमायूं कबीर का साथ, TMC ने विधानसभा में भी दूरी बनाने का फैसला लिया"


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूं कबीर को खास राजनीतिक समर्थन नहीं मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पहले ही निलंबित कर दिया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और लेफ्ट ने भी उनसे किनारा किया है। यहां तक कि सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी दूरी बनाने का फैसला किया है।

    विधायक बने रहने का फैसला करने के बावजूद, कबीर ने सोमवार को दोहराया कि वह इस महीने के अंत में एक नया राजनीतिक दल बनाने की योजना पर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने दावा किया, ‘मैंने अभी तक कांग्रेस से बात नहीं की है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने उनके साथ बातचीत की जिम्मेदारी ली है। अगले विधानसभा चुनाव के लिए मुर्शिदाबाद में कांग्रेस और वाम दलों के साथ सीट के बंटवारे की प्रबल संभावना है।’

    भाजपा बोली- जिन्ना की भाषा बोल रहे
    भाजपा विधायक और बंगाल में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कबीर की बयानबाजी को ‘मुहम्मद अली जिन्ना की भाषा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह ‘बंगाली हिंदुओं के लिए सीधी चुनौती’ है।

    उन्होंने आरोप लगाया, ‘हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि आप अपनी जमीन पर, अपने समुदाय के धन से, कानूनी तौर पर मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे बनाएं। लेकिन रेजिनगर में जो हुआ वह धार्मिक आस्था नहीं थी। यह राज्य के संरक्षण में कट्टरपंथियों का शक्ति प्रदर्शन था।’

    शुभेंदु ने कबीर पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, ‘हुमायूं कबीर अब जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह हुसैन सुहरावर्दी और मुहम्मद अली जिन्ना की भाषा से अलग नहीं है। यह एक चुनौती है, एक युद्धघोष है, यह सह-अस्तित्व की भाषा नहीं है।’

    सीट बदलेगी TMC?
    टीएमसी ने विधानसभा के अंदर भी कबीर से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। टीएमसी नेताओं ने कहा कि सदन में उनके बैठने की व्यवस्था बदली जाएगी। सूत्रों के अनुसार, पार्टी सूत्रों ने बताया कि विधायक बने रहने के उनके फैसले के बाद, तृणमूल कांग्रेस विधायक दल ने सत्तारूढ़ दल के सदस्यों से दूर रखने के लिए कबीर की सीट भाजपा सदस्यों की सीट के पास करने की पहल की है। इससे पहले, कबीर को उनके पूर्व मंत्री पद के कारण सत्ता पक्ष की सीट के पास अगली पंक्ति में सीट दी गई थी।

    तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक निर्मल घोष ने कहा कि पार्टी स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘निलंबित विधायकों को विधानसभा में बैठने की व्यवस्था पर फैसला अगले कुछ दिन में लिया जाएगा।’ पश्चिम बंगाल विधानसभा के कार्यकाल की समाप्ति से पहले सदन का शीतकालीन सत्र और अंतरिम बजट सत्र की बैठक होने की उम्मीद है।

    AIMIM ने क्या कहा
    हुमायूं कबीर ने खुद को पश्चिम बंगाल का ओवैसी बताया था। साथ ही खबरें थीं कि वह AIMIM के साथ गठबंधन भी करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि इस संबंध में ओवैसी से बात हुई है। हालांकि, AIMIM ने विधायक कबीर के साथ चुनावी गठजोड़ से सोमवार को इनकार किया और उनके प्रस्तावों को ‘राजनीतिक रूप से संदिग्ध और वैचारिक रूप से असंगत’ बताया।

    पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद असीम वकार ने कहा, ‘सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कबीर को अधिकारी के राजनीतिक तंत्र का हिस्सा माना जाता है। और यह सर्वविदित है कि अधिकारी भाजपा के राष्ट्रीय स्तरीय नेतृत्व के मुख्य रणनीतिक ढांचे के भीतर काम करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम समुदाय राष्ट्र निर्माण में विश्वास रखता है, उसे तोड़ने में नहीं। वह देश को मजबूत करने वाली ताकतों के साथ खड़ा है और अशांति और विभाजन पैदा करने वालों को नकारता है।’

    कांग्रेस ने निकाली सद्भावना यात्रा
    शनिवार को कांग्रेस ने आरोप लगाया कि टीएमसी और भाजपा, दोनों ही, उस जिले में धार्मिक आशंकाओं का फायदा उठा रहे हैं जहां ऐतिहासिक रूप से साम्प्रदायिक तनाव देखा गया है। कोलकाता में कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक मस्जिद से मंदिर तक ‘सद्भावना रैली’ निकाली और लोगों से अपील की कि वे बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के बाद पैदा हुए साम्प्रदायिक भय के माहौल की वापसी को खारिज करें।

    प्रदेश कांग्रेस प्रमुख शुभंकर सरकार ने कहा, ‘मंदिर और मस्जिद लोगों को ना तो रोजगार देंगे और ना ही भोजन। विभाजन की राजनीति बंद होनी चाहिए।’ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीपीएम ने भी कबीर के फैसले से दूरी बनाई है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

  • वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

    वंदे मातरम् पर संसद में गरमाई बहस अमित शाह ने विपक्ष पर किए तीखे आरोप

     
    नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् पर जारी बहस ने मंगलवार को एक नया मोड़ लिया जब गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस मुद्दे पर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी और अब अमित शाह ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। वंदे मातरम् पर संसद में चल रही यह बहस 9 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में इसकी शुरुआत के बाद और भी तेज हो गई है।

    अमित शाह का बयान

    अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा की आवश्यकता तब भी थी जब यह रचना रची गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चर्चा आजादी के आंदोलन के दौरान भी जरूरी थी और आज भी यह जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत 2047 में एक विकसित राष्ट्र बनेगा तब भी वंदे मातरम् पर चर्चा जारी रहेगी। शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कहा कि यह रचना विदेशी आक्रमणों और सांस्कृतिक चुनौतियों के प्रतिकार के रूप में सामने आई थी।

    गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम् को लेकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय इसका एक बड़ा महत्व था। यह न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन चुका था बल्कि यह भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का भी प्रतीक था। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज वंदे मातरम् को लेकर विवाद उठाना और इसके महत्व को कम करने की कोशिश करना भारतीयता और भारतीय संस्कृति को कमजोर करने जैसा है।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर बयान

    अमित शाह ने इस मुद्दे पर एक और ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए थे और इंदिरा गांधी ने इसके विरोध में खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने हमेशा इस पर विवाद उठाया जबकि वंदे मातरम् ने भारतीय जनमानस को एकजुट किया और यह हर भारतीय का राष्ट्रीय गीत बन गया।

    शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के खिलाफ राजनीति करना भारतीय संस्कृति और भारतीयता के खिलाफ है। उनका यह भी कहना था कि अगर कांग्रेस के नेताओं के विचार इस गीत के खिलाफ थे तो यह पार्टी की सोच का संकेत है कि वह भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को प्राथमिकता नहीं देती।

    विपक्ष पर अमित शाह के आरोप

    अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम् के खिलाफ बोलते हैं वे दरअसल भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद का अपमान कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह गीत हर भारतीय के दिल में गूंजता है और यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता एकता और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस गीत का विरोध कर राजनीति कर रहे हैं और अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल और संसद में गहमागहमी

    वंदे मातरम् पर संसद में चली यह बहस अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। यह मामला केवल एक गीत का नहीं बल्कि भारतीयता संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। अमित शाह के बयान ने विपक्ष को चुप्प रहने की चुनौती दी है वहीं विपक्ष ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यह गीत सभी भारतीयों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसे किसी विशेष पार्टी या विचारधारा से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

    वंदे मातरम् पर यह बहस अब केवल एक गीत तक सीमित नहीं रही बल्कि यह भारतीय संस्कृति राष्ट्रीय एकता और राजनीति से जुड़ा हुआ मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर अमित शाह और उनकी पार्टी इस मुद्दे को भारतीयता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वहीं विपक्ष इसे राजनीति से जोड़ते हुए इसे विवादित बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर भी चर्चा का विषय बना रहेगा और इस पर अधिक राजनीतिक बयानबाजी की संभावना है।

  • दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग

    दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग


    नई दिल्‍ली । कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ वोट चोरी का मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक शख्स ने दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी अर्जी में उस शख्स ने मजिस्ट्रेट कोर्टके उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से साफ तौर पर मना कर दिया गया था। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिकता लेने से तीन साल पहले ही सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया गया था।

    यह केस शुक्रवार को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (PC Act) विशाल गोगने के सामने आया। जज ने इसे 9 दिसंबर को विचार के लिए लिस्ट करने का आदेश दिया है। यह क्रिमिनल रिवीजन अर्जी विकास त्रिपाठी नाम के एक व्यक्ति ने फाइल की है। त्रिपाठी ने अपनी अर्जी में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACMM) वैभव चौरसिया के 11 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है।

    1983 में भारत की नागरिक बनी थीं सोनिया
    त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली चुनाव क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं। अर्जी में त्रिपाठी ने अन्य विवरण देते हुए आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम सबसे पहले 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया था, फिर 1982 में उसे हटा लिया गया था। इसके बाद 1983 में फिर से उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया, जब वह आधिकारिक तौर पर भारत की नागरिक बन गईं।

    कुछ जाली कागजात जमा किए होंगे?
    त्रिपाठी के वकीलों ने आरोप लगाया है कि 1980 में मतदाता सूची में उनका नाम शामिल होने का मतलब है कि तब उन्होंने कुछ जाली कागजात जमा किए थे। वकीलों के मुताबिक यह एक ऐसा केस है जो दिखाता है कि एक संज्ञेय अपराध किया गया है। इससे पहले सितंबर में जज चौरसिया ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि कोर्ट ऐसी जांच नहीं कर सकता क्योंकि इससे संवैधानिक अधिकारियों को सौंपे गए क्षेत्रों में गलत तरीके से उल्लंघन होगा और यह भारत के संविधान के आर्टिकल 329 का उल्लंघन होगा।

  • राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति

    राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह विदेशी मेहमानों को विपक्ष के नेता से नहीं मिलने देती, जबकि पहले यह परंपरा रही है कि किसी भी विदेशी गणमान्य व्यक्ति को विपक्ष के नेता से मिलने की अनुमति दी जाती थी। राहुल गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय विपक्ष के नेताओं को भी विदेशी मेहमानों से मिलने की इजाजत थी।

    राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि विपक्ष के नेता का दृष्टिकोण अलग होता है और विदेशी गणमान्य अतिथि से मिलने का अधिकार उन्हें होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं करते हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब वे विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उन्हें भी बताया जाता है कि विदेशी नेताओं से नहीं मिलना है, जो नीति के अनुसार होता है।

    रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन की भारत यात्रा के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि आम तौर पर यह परंपरा रही है कि विदेश से आने वाले मेहमान विपक्ष के नेता से भी मिलते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के समय यही नियम रहा, लेकिन अब इस परंपरा का पालन नहीं किया जाता। उनका यह भी कहना था कि एलओपी (नेता विपक्ष) एक अलग दृष्टिकोण पेश करते हैं और वह भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। केवल सरकार ही देश का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

    राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद बॉलीवुड और राजनीति जगत की हस्ती कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी की भावनाएं देश के प्रति संदिग्ध हैं। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी अटल बिहारी वाजपेयी के समान बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें भाजपा में शामिल होना चाहिए। कंगना ने ट्वीट या बयान में कहा कि भगवान ने उन्हें जन्म दिया है, जीवन दिया है, वे भी अटल जी बन सकते हैं, इसके लिए उन्हें भाजपा ज्वाइन कर लेना चाहिए।

    कंगना ने कहा, “सरकार के अपने फैसले होते हैं। अटल जी नेशनल असेट थे, पूरे देश को उन पर गर्व था। लेकिन राहुल गांधी की देश के प्रति भावनाएं संदिग्ध हैं। चाहे दंगे फैलाने की योजना हो या देश को टुकड़े करने की साजिश, उनकी नीयत पर संदेह है। अगर वह खुद को अटल जी से तुलना कर रहे हैं तो मैं यही सुझाव दूंगी कि आप भाजपा में शामिल हो जाइए।”

    राहुल गांधी की टिप्पणी पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष का अधिकार है कि वह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और जनता के सामने अपनी राय रखे। थरूर ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी भूमिका निभाने का पूरा अधिकार है और विदेशी नेताओं से मिलने का उनका हक संविधान और परंपरा दोनों के तहत सुरक्षित है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि राहुल गांधी का यह आरोप देश की राजनीतिक परंपरा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। विपक्ष का यह अधिकार है कि वह विदेशी प्रतिनिधियों से मिले और अपने दृष्टिकोण को साझा करे। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि विदेश नीति केवल सरकार तक सीमित नहीं हो सकती, विपक्ष का दृष्टिकोण भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    राहुल गांधी के बयान और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का मानना है कि लोकतंत्र में अलग-अलग दृष्टिकोण रखने वाले नेताओं को भी सम्मान दिया जाना चाहिए और परंपराओं का पालन होना चाहिए। वहीं, भाजपा समर्थक इसे केवल राजनीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर देश में राजनीतिक संवाद और विपक्ष की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। राहुल गांधी का आरोप और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि राजनीतिक बयानबाजी और आलोचना आज भी भारतीय राजनीति में उतनी ही तीव्र है जितनी पहले रही है।

  • मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी

    मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत दूसरे अनुपूरक बजट की मांगें प्रस्तुत किए जाने के बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा शुरू कराई, जिसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों के विधायकों ने अपनी-अपनी बात मजबूती से रखी। कांग्रेस ने जहां अनुपूरक बजट को जनविरोधी करार दिया, तो वहीं भाजपा ने इसे विकासोन्मुखी बताया। शाम साढ़े सात बजे कार्यवाही स्थगित कर इसे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दिया गया।

    गुरुवार को सदन में दूसरे अनुपूरक बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा कि अनुपूरक बजट में पूंजीगत व्यय कम है जिससे रोजगार में कमी आएगी और टैक्स कलेक्शन कम होगा, इससे पता चलता है कि यह प्रदेश के हित में नहीं है। दूसरा अनुपूरक बजट 13155 करोड़ का है। सदन में पिछली बैठक में कहा गया था कि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्र में 5 करोड़ रुपए विकास कार्य के लिए दिए जाएंगे लेकिन आज तक नहीं दिया गया। सरकार भेदभाव कर रही है। इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। विधायकों के ई-ऑफिस के लिए 5-5 लाख रुपये देने की बात कही गई थी। कांग्रेस के कई विधायकों को यह सुविधा नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि किसानों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है इसलिए किसान आंदोलन करने को मजबूर हैं। खल घाट में हुए आंदोलन में 700 किसानों पर अज्ञात के नाम पर केस दर्ज कर दिया गया।

    अनुपूरक बजट पर बोलते हुए कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार पहले यह तो बताए कि जब से यह सरकार बनी है, तब से अब तक कितना कर्जा लिया। इसका क्या उपयोग हो रहा है। मध्य प्रदेश पर 4.50 लाख करोड़ से अधिक कर्ज है। हर साल जो कर्ज लिया गया है, उस पर ब्याज कितना दे रहे हैं। यह जनता को बताएं। मतदाता की जेब में पैसे डालो, वोट लेकर 5 साल राज करो… इस फार्मूले पर सरकार काम कर रही है।

    शेखावत ने कहा कि मैं बहनों के पैसे मिलने खिलाफ नहीं हूं। उनके विकास के खिलाफ भी नहीं हूं, लेकिन सबसे अहम सवाल है कि यह जो कर्ज लिया जा रहा है… चुकेगा कैसे? जनता पर जो बोझ बढ़ा रहा, वह कैसे खत्म होगा? इंदौर में 800 करोड़ रुपए बिना किसी काम के निकल गया और दिखावे के तौर पर एक इंजीनियर पर कार्रवाई हो गई। शेखावत ने इंदौर की खान नदी की शुद्धीकरण पर भी सवाल उठाए, जिसमें लगातार पैसा खर्च हो रहा, लेकिन नदी साफ नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि किसान को खाद नहीं मिल रही है। वह लाइन में लग रहा, डंडे खा रहा है।

    कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने प्रदेश में खाद संकट का मामला उठाते हुए कहा कि किसानों को खाद नहीं मिलता। 24 घंटे लाइन लगने के बाद टोकन मिलता है, उसके बाद फिर खाद मिलने की तारीख दी जाती है। सरकार किसानों को खाद नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर भेदभाव हो रहा है। बीजेपी के विधायकों से 15 करोड़ रुपये के विकास कार्य के प्रस्ताव लिए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस के विधायकों को अनदेखा किया जा रहा है।

    इस पर विधायक सीता शरण शर्मा ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। प्रस्ताव दिए जाते हैं, उसके परीक्षण होते हैं, उसके आधार पर राशि जारी होती है। इस पर राजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों के साथ भी ऐसा क्यों नहीं होता है कि उनसे भी प्रस्ताव लेकर विकास कार्य करने का मौका दिया जाए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने विधायकों के वेतन बढ़ाने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 1 लाख 60 हजार रुपये वेतन बढ़ाने की तैयारी की थी, लेकिन इससे भी रोक दिया गया है। अभी 1 लाख 10 हजार रुपये मिल रहा है। वेतन नहीं भी बढ़ेगा तो भी कांग्रेस विधायक काम करते रहेंगे।

    राजेंद्र कुमार सिंह ने अमरपाटन की 6 पंचायतों को रीवा जिले में शामिल करने का विरोध किया और कहा कि मैहर में बन रहे कलेक्ट्रेट भवन को मैहर से दूर कटनी रोड पर बनाया जा रहा है, जबकि इसे मैहर और अमरपाटन के बीच बनाया जाना चाहिए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने मार्कंडेय घाट पर एक ब्रिज बनाने की मांग की।

    कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अनुपूरक बजट पर कहा कि वैसे तो अल्पसंख्यकों के लिए अल्पसंख्यक विभाग में बजट का प्रावधान नहीं है, लेकिन अब हमें भी इसकी आदत हो गई है। जो भी व्यवस्था रहेगी, उसके हिसाब से चलते रहेंगे, लेकिन सरकर को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि विकास कार्य कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि भोपाल शहर में विकास के काम में तेजी लाना चाहिए।

    कांग्रेस विधायक फुंदेलाल मार्को ने छात्रावास में बच्चों को महुआ खिलाए जाने का विरोध करते हुए कहा– यह बच्चे अपने घर पर भी महुआ खा रहे थे और जब यहां छात्रावास में पहुंचे हैं तो वहां भी चने के साथ महुआ खिलाया जा रहा है। धीरे-धीरे महुआ पीने की आदत डाल दी जाएगी। वे सरकार से मांग करते हैं कि बच्चों के मन में यह भावना खत्म करें कि आदिवासी हैं और उन्हें महुआ पीना पड़ेगा, महुआ ही खाना पड़ेगा। उन्होंने संभागों के लिए नियुक्त किए गए अपर मुख्य सचिवों के साथ विधायकों के संवाद पर भी जोर दिया।

    मार्को ने देश भर में 3000 से अधिक रजिस्टर्ड बूचड़खाने बंद करने की मांग करते हुए कहा कि अगर आप इसे बंद नहीं कर सकते हैं तो दिखावा मत कीजिए। मार्को ने कहा कि जहां गोमाता का वध किया जाता है। ऐसे बूचड़खाने को बंद करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजना चाहिए। यह तय है कि इसका सारे देश में विरोध होगा। सरकार अगर गंभीर है तो दिखावा न करें।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बजट में किसानों, युवाओं और एमएसएमई सेक्टर के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। धान और मक्का के लिए एसएसपी और समर्थन मूल्य का उल्लेख नहीं होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की जेब की चोरी कर रही है और किसानों की समस्याओं से मुंह मोड़ रही है।

    अनुपूरक बजट का बचाव करते हुए भाजपा विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि सरकार का फोकस लाड़ली बहना, आवास, किसान, सिंचाई और उद्योगों पर है। उन्होंने बताया कि रोजगार के लिए 2 लाख 27 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है तथा भावांतर के लिए 500 करोड़ रखे गए हैं।

    होशंगाबाद से भाजपा विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने जो वादे किए, वे पूरे किए हैं। कर्जा कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन हमारी सरकार ने कर्ज लेकर विकास भी किया है। सदन में दोनों पक्षों की तीखी बहस के बीच अनुपूरक बजट पर चर्चा शुक्रवार को भी जारी रहेगी। सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट 13,476 करोड़ रुपये का पेश किया है।