Tag: Controversy

  • संजय दत्त के विवादित बयानों पर फिर बवाल, जेल से लेकर शांति और राजनीति तक इन मौकों पर घिरे अभिनेता

    संजय दत्त के विवादित बयानों पर फिर बवाल, जेल से लेकर शांति और राजनीति तक इन मौकों पर घिरे अभिनेता


    नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में शेखर सुमन के शो में गांधी जयंती विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत में शांति को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि देश के लोग बेहद अच्छे और बड़े दिल वाले हैं, लेकिन उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई और आलोचकों ने अभिनेता को घेर लिया। इसके बाद संजय दत्त ने पोस्ट कर सफाई दी कि उनकी बात एक स्क्रिप्टेड, हल्की-फुल्की और हास्यपूर्ण बातचीत के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

    यह पहली बार नहीं है जब संजय दत्त अपने शब्दों को लेकर विवादों में आए हों। सितंबर 2026 में महाराष्ट्र के एक कार्यक्रम के दौरान परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बोलने को कहा था। इस पर संजय दत्त ने मजाकिया अंदाज में अपनी येरवडा जेल की सजा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जेल में भी मराठी नहीं सीखी। वीडियो सामने आने के बाद उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई। मामला बढ़ने पर प्रताप सरनाईक ने बताया कि अभिनेता ने फोन करके स्पष्टीकरण दिया और कहा कि अगर उनके मजाक से कोई गलत संदेश गया हो तो वह माफी मांगते हैं। इससे पहले 2017 में फिल्म ‘भूमि’ के प्रमोशन के दौरान बेटी त्रिशाला दत्त को लेकर भी उन्होंने ऐसी टिप्पणी की थी, जिस पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा था कि अगर त्रिशाला फिल्म इंडस्ट्री में आना चाहती हैं तो उन्हें हिंदी भी सीखनी होगी। इसी बातचीत में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि त्रिशाला अभिनेत्री बनना चाहती थीं और वह उनकी टांगें तोड़ देना चाहते थे।

    साल 2012 में अमीषा पटेल से जुड़ा एक मामला भी चर्चा में रहा। एक समारोह में संजय दत्त ने उनके पहनावे को बहुत रिवीलिंग माना और उनसे कपड़े ढकने के लिए कहा। बाद में उनके दुपट्टे से उनका शरीर ढक दिया। इस पर सफाई देते हुए दत्त की तरफ से कहा गया कि वह अमीषा को बहन की तरह मानते हैं और इसी भावना से उन्होंने ऐसा किया था। 2007 में ‘कॉफी विद करण’ के दौरान महिलाओं के साथ संबंधों की संख्या को लेकर दिया गया उनका जवाब भी काफी चर्चित हुआ था। जब उनसे 50, 100, 150, 200 या उससे ज्यादा का विकल्प पूछा गया तो उन्होंने ‘ज्यादा’ कहा था। इसके बाद तीन इच्छाओं के सवाल पर उन्होंने पैसा, आजादी और महिलाएं बताई थीं। 2018 में फिल्म ‘संजू’ में भी उनकी जिंदगी से जुड़ी महिलाओं की संख्या का संदर्भ आया, जिसके बाद उनकी निजी जिंदगी को लेकर बहस हुई।

    साल 2009 में प्रतापगढ़ में समाजवादी पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में दी गई संजय दत्त की स्पीच भी विवादों में रही थी। तत्कालीन बसपा सरकार के दौर में सपा उम्मीदवार अक्षय प्रताप के समर्थन में सभा के दौरान उन्होंने जनता को ‘जादू की झप्पी’ देने की बात कही थी और कहा था कि मौका मिलने पर वह मायावती को भी ऐसा उपहार देना चाहेंगे। इस बयान पर बवाल हुआ और अभिनेता पर महिला को लेकर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगा। इसके अलावा 1993 के मुंबई बम धमाका मामले के दौरान उनके पिता सुनील दत्त से हुई बातचीत का भी जिक्र मिलता है। संजय दत्त के मुताबिक, पुलिस के सामने हथियार रखने की बात स्वीकार करने के बाद उन्होंने पिता से कहा था कि उनकी रगों में मुस्लिम खून है और वह शहर में हो रही घटनाओं को बर्दाश्त नहीं कर सके। यह सुनकर सुनील दत्त बेहद परेशान हुए थे।

    विवादित बयानों के मामले में संजय दत्त अकेले बॉलीवुड अभिनेता नहीं हैं। आमिर खान ने 2015 में देश में बढ़ती असहिष्णुता को लेकर अपनी पत्नी किरण राव की चिंता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि किरण ने भारत छोड़ने की बात तक पूछी थी और उन्हें अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर डर लगता था। इसके बाद आमिर की काफी आलोचना हुई और उन्हें देशद्रोही तक कहा गया। इसी साल शाहरुख खान ने भी असहिष्णुता पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और धार्मिक असहिष्णुता सबसे बड़ा अपराध है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर बवाल हुआ और उन्हें पाकिस्तान चले जाने जैसी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। बाद में शाहरुख ने कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था। 2018 में नसीरुद्दीन शाह ने अपने बच्चों को लेकर चिंता जताते हुए धर्म और भीड़ हिंसा से जुड़ी टिप्पणी की थी, जिसके बाद उनकी भी आलोचना हुई थी।

  • एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा

    एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा


    पेरिस।
    एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को हटाने से जुड़े विवाद में हिंदू संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) को जांच में क्लीन चिट मिल गई है। जांच में सामने आया है कि संगठन ने एफिल टावर प्रशासन से महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई मांग नहीं की थी। पिछले महीने करीब 100 संतों के एफिल टावर दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वहां से हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। इसके विरोध में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था और एफिल टावर एक दिन के लिए बंद रहा था।

    जांच रिपोर्ट के मुताबिक BAPS प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले ही महिला कर्मचारियों को कुछ देर के लिए अपने स्थान से हटने को कहा गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपसी सूचना के आदान-प्रदान के दौरान मूल संदेश का अर्थ बदल गया। कर्मचारियों को स्थायी रूप से स्थान छोड़ने के लिए नहीं कहा गया था, बल्कि कुछ मिनटों के लिए एक-दूसरे से अलग रहने को कहा गया था।

    संचालन कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो छोड़ेंगे पद

    एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो इस साल के अंत में अपने पद से इस्तीफा देंगे। वह 2018 से एफिल टावर के महानिदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

    रुइवो के कार्यकाल में हुई आंतरिक जांच में इस दौरे के आयोजन में ‘परिचालन संबंधी खामियों और कमियों’ की बात सामने आई। कंपनी के बोर्ड ने कहा कि इन खामियों के कारण महिला कर्मचारियों को हटाया जाना ‘अस्वीकार्य’ था।

    क्या था पूरा विवाद?

    5 सितंबर को BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टावर का निजी दौरा किया था। आरोप था कि संगठन की ओर से दौरे के दौरान महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किए जाने की बात सामने आई थी।

    घटना के बाद यूनियन प्रतिनिधि डायने दावोइन ने महिला कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटना दोबारा न होने की मांग की थी। कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद पेरिस शहर के अधिकारियों ने भी मामले की जांच शुरू की।

    एफिल टावर की संचालन कंपनी के बोर्ड अध्यक्ष एरियल वेइल ने कहा कि यहां एक विशेष प्रोटोकॉल विभाग बनाया जाएगा। इसके अलावा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए नए उपाय और प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।

    एफिल टावर का स्वामित्व पेरिस नगर प्रशासन के पास है। यहां हर साल करीब 70 लाख पर्यटक पहुंचते हैं।

    100 साल से अधिक पुरानी है BAPS

    BAPS की स्थापना गुजरात में 100 से अधिक वर्ष पहले हुई थी। यह एक सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू संस्था है। संगठन के साधु ब्रह्मचर्य के कड़े नियमों का पालन करते हैं और अनुयायियों से भी निर्धारित नैतिक नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

  • बेटी रीति के बिग बॉस विवाद पर मनोज तिवारी का रिएक्शन, बोले- ‘बच्चों का बिग बॉस है

    बेटी रीति के बिग बॉस विवाद पर मनोज तिवारी का रिएक्शन, बोले- ‘बच्चों का बिग बॉस है


    नई दिल्ली। बिग बॉस 20 में मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी अपने गेम और विवादों को लेकर लगातार चर्चा में हैं। काजी तौकीर के साथ तीखी बहस और उदिति सिंह को लेकर उनके कथित आपत्तिजनक व्यवहार पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने के बाद अब मनोज तिवारी से भी बेटी के गेमप्ले को लेकर सवाल किए गए। हाल ही में एक कार्यक्रम से बाहर निकलते समय पत्रकारों ने उनसे रीति को लेकर सवाल किया, जिस पर उन्होंने कहा कि बिग बॉस एक गेम है और इसे उसी तरह लिया जाना चाहिए।

    मनोज तिवारी से पूछा- बेटी के लिए इस्तीफा दे दीजिए

    मनोज तिवारी हाल ही में ‘मोदी: द डिकेड दैट चेंज्ड इंडिया’ किताब के लॉन्च कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद जब उनसे रीति के बिग बॉस गेम को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “बच्चों का बिग बॉस है, चलने दो।”

    इसके बाद उन्होंने उन चर्चाओं पर भी सफाई दी, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उन्होंने अपनी बेटी को बिग बॉस में शामिल कराने के लिए सिफारिश की थी। मनोज तिवारी ने कहा कि उन्हें खुद जानकारी नहीं थी कि रीति शो में जा रही हैं।

    इसी दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे कहा, “तो फिर आप उनके लिए इस्तीफा दे दीजिए।” इस सवाल पर मनोज तिवारी हैरान नजर आए और बोले, “आप क्या बोल रहे हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा है।” वायरल वीडियो क्लिप में इसके बाद बातचीत अचानक खत्म हो जाती है।

    ‘बिग बॉस एक खेल है, उसका आनंद लीजिए’

    मनोज तिवारी ने बेटी के विवादों को लेकर कहा कि बिग बॉस को लेकर किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि शो में 24 घंटे कुछ न कुछ होता रहता है और इसे एक खेल की तरह देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद इस तरह का गेम खेल चुके हैं।

    मनोज तिवारी का कहना था कि “बिग बॉस एक खेल है… एक गेम है, उसका आनंद लीजिए।”

    रीति के गेम पर सलमान खान भी कर चुके हैं टिप्पणी

    रीति तिवारी हाल के एपिसोड में काजी तौकीर के साथ विवाद के बाद सुर्खियों में आई थीं। बहस के दौरान उन्होंने काजी पर तीखी टिप्पणियां की थीं और उनके पिता का जिक्र भी किया था। बाद में उन्होंने उस टिप्पणी के लिए माफी मांगी थी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी रीति की आलोचना हुई।

    27 सितंबर के ‘वीकेंड का वार’ एपिसोड में सलमान खान ने भी रीति के व्यवहार और भाषा को लेकर उन्हें टोका। उन्होंने काजी को दी गई धमकी और उदिति सिंह को लेकर की गई टिप्पणियों पर रीति से सवाल किए।

    पहले भी बेटी के गेम पर बोल चुके हैं मनोज तिवारी

    इससे पहले मनोज तिवारी ने पैपराजी से बातचीत में रीति के बिग बॉस सफर को लेकर कहा था कि वह शो को ‘डर-डरकर’ देखते हैं और उम्मीद जताई थी कि सब ठीक रहे। रीति के शो में आने के बाद से उनके गेम और पिता के साथ रिश्ते को लेकर भी कई चर्चाएं सामने आई हैं।

  • गोविंदा संग डेटिंग की अफवाहों के बीच कोमल रानी का सुनीता आहूजा पर गंभीर आरोप

    गोविंदा संग डेटिंग की अफवाहों के बीच कोमल रानी का सुनीता आहूजा पर गंभीर आरोप


    नई दिल्ली । गोविंदा और कोमल रानी स्वर्णकार के कथित रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब सुनीता आहूजा को लेकर कोमल रानी का बयान सामने आया है। कोमल ने सोशल मीडिया पर एक लंबा नोट साझा करते हुए सुनीता के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी और उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, गोविंदा और कोमल रानी के बीच कथित रोमांटिक रिश्ते की अब तक किसी भी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।

    दरअसल, हाल ही में गोविंदा और कोमल रानी को मुंबई के लालबागचा राजा के दर्शन करते हुए देखा गया था। इसके कुछ समय बाद सुनीता आहूजा दक्षिणेश्वर काली मंदिर पहुंचीं। वहां सामने आए एक वीडियो में सुनीता को अपने घर के टूटने की बात कहते हुए सुना गया। इसके बाद गोविंदा और कोमल रानी के कथित रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कोमल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की।

    कोमल ने अपनी पोस्ट में कहा कि जो घर पहले से ही टूटा हुआ हो, उसे कोई दूसरा व्यक्ति नहीं तोड़ सकता। उनकी इस टिप्पणी को सुनीता के बयान का जवाब माना जा रहा है। इसके बाद उन्होंने अपने लंबे नोट में सुनीता पर उनके खिलाफ कथित तौर पर साजिश रचने का आरोप लगाया।

    कोमल ने अपने बयान में सुनीता के व्यवहार को लेकर कई गंभीर दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से अपने पति को मानसिक रूप से परेशान करने, उनके काम में बाधा डालने और उन्हें अलग-थलग करने जैसी स्थिति बनाई गई। कोमल ने यह भी दावा किया कि किसी समर्पित पत्नी से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती।

    अपने बयान में कोमल ने यह सवाल भी उठाया कि किसी व्यक्ति के निजी दर्द को सार्वजनिक रूप से दिखाने के पीछे वास्तविक परेशानी है या कोई सोची-समझी रणनीति। उन्होंने कहा कि उनके नाम का इस्तेमाल किसी कथित एजेंडे के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसी परिस्थितियों में भगवान से अच्छे लोगों की रक्षा की प्रार्थना करती हैं।

    कोमल के इन दावों के बीच यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप उनके अपने बयान का हिस्सा हैं और इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। सुनीता आहूजा की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर कोई विस्तृत जवाब इस खबर में उपलब्ध नहीं है।

    गोविंदा और कोमल रानी के बीच रिश्ते की अफवाहें तब तेज हुईं, जब दोनों को मुंबई एयरपोर्ट पर एक साथ यात्रा करते हुए देखा गया था। कोमल रानी गोविंदा के साथ आने वाली फिल्म ‘रूपा’ में काम कर रही हैं। इसी वजह से दोनों के बीच नजदीकियों को लेकर सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चाएं शुरू हुईं।

    हालांकि, दोनों के कथित अफेयर को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उनके रिश्ते से जुड़ी चर्चाओं को फिलहाल अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी वर्ष 1987 में हुई थी। दोनों के दो बच्चे हैं, बेटी टीना आहूजा और बेटा यशवर्धन आहूजा। सुनीता पिछले कुछ समय में अपनी शादी और निजी जीवन को लेकर सार्वजनिक रूप से कई बातें कह चुकी हैं। दक्षिणेश्वर काली मंदिर से सामने आया उनका हालिया बयान भी इसी सिलसिले में चर्चा में रहा। अब कोमल रानी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।

  • रीति तिवारी की मां पर एक्स स्टेपफादर एकम बावा के गंभीर आरोप, बोले- रिश्ते के दौरान बहुत टॉर्चर हुआ

    रीति तिवारी की मां पर एक्स स्टेपफादर एकम बावा के गंभीर आरोप, बोले- रिश्ते के दौरान बहुत टॉर्चर हुआ

    रीति तिवारी की निजी जिंदगी और पारिवारिक रिश्तों को लेकर चल रही चर्चा के बीच उनके एक्स स्टेपफादर और सिंगर एकम बावा ने कई गंभीर दावे किए हैं। एकम ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए रीति तिवारी और उनकी मां रानी तिवारी पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि रानी और रीति के साथ रहने के दौरान उन्हें काफी परेशानी और कथित तौर पर टॉर्चर का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि वह आने वाले दिनों में इस रिश्ते से जुड़े कई और घटनाक्रम सामने रखेंगे।

    एकम बावा ने अपने एक नए वीडियो में रानी तिवारी के साथ हुई कथित बहस का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रात करीब 9 से 10 बजे के बीच किसी बात को लेकर उनकी और रानी की नोकझोंक हो गई थी। एकम के मुताबिक, इसी दौरान रीति उनके कमरे में आईं और अलमारी में रखे उनके कपड़ों को हैंगर से उतारकर जमीन पर फेंक दिया। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद रीति ने उनसे वहां से निकल जाने के लिए कहा।

    सिंगर ने आगे दावा किया कि उस दौरान रीति और उनकी मां रानी ने उनसे कहा कि वह जो करना चाहते हैं, कर सकते हैं। एकम के अनुसार, उन्होंने दोनों से यह समझने की कोशिश की कि आखिर उनसे इस परिस्थिति में क्या उम्मीद की जा रही है। उनका आरोप है कि रानी और रीति के साथ रहने के दौरान उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    एकम बावा ने यह भी कहा कि वह अब इन घटनाओं को एक-एक करके सामने रखेंगे। उनके मुताबिक, जब तक रीति तिवारी बिग बॉस 20 के घर में रहेंगी, तब तक वह रोज उनके और परिवार के बीच हुए कथित घटनाक्रम से जुड़ी कोई नई बात साझा करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर रीति तिवारी और रानी तिवारी की ओर से कोई जवाब इस जानकारी में सामने नहीं आया है।

    एकम ने इससे पहले भी रानी तिवारी के साथ अपने रिश्ते को लेकर कई बातें साझा की थीं। उनके दावे के मुताबिक, वह वर्ष 2020 से 2025 तक रानी तिवारी और रीति के साथ एक ही फ्लैट में रहे। उन्होंने बताया कि रीति को उनकी मां और उनके रिश्ते के बारे में जानकारी थी।

    अपने पिछले दावों में एकम ने कहा था कि वर्ष 2020 से 2022 तक वह और रानी तिवारी लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। इसके बाद 18 फरवरी 2022 को दोनों ने शादी कर ली। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में रानी और रीति के साथ अपनी तस्वीरें भी साझा की थीं।

    अब एकम के ताजा वीडियो के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उनके आरोपों में पुराने रिश्ते के दौरान हुए कथित विवादों और उनके अनुभवों का जिक्र है। फिलहाल सामने आई जानकारी में एकम बावा के दावों का पक्ष मौजूद है, जबकि रीति तिवारी और रानी तिवारी की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं है। ऐसे में मामले से जुड़े दावों की पुष्टि संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

  • बिग बॉस 20 में रीति तिवारी और काजी तौकीर का विवाद बढ़ा, मनोज तिवारी के नाम से वायरल हुई फर्जी माफी पोस्ट

    बिग बॉस 20 में रीति तिवारी और काजी तौकीर का विवाद बढ़ा, मनोज तिवारी के नाम से वायरल हुई फर्जी माफी पोस्ट

    नई दिल्ली ।बिग बॉस 20 में रीति तिवारी और काजी तौकीर के बीच रैप टास्क के दौरान हुआ विवाद चर्चा में है। शो के आगामी एपिसोड में दोनों के साथ उदिति भी इस टास्क का हिस्सा नजर आएंगी। टास्क के दौरान प्रतियोगियों को एक-दूसरे को रोस्ट करना था। इसी दौरान रीति की कुछ बातों पर काजी ने आपत्ति जताई और दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।

    बताया गया कि रैप टास्क के दौरान काजी ने रीति को बिना गाली दिए रोस्ट किया। इसके बाद रीति की बारी आई तो उन्होंने काजी और उदिति को लेकर अपशब्दों का इस्तेमाल किया। रीति की बातों पर काजी नाराज हो गए और उन्होंने उन्हें इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करने के लिए कहा।

    काजी ने कहा कि रोस्टिंग की भी एक सीमा होती है और इस तरह की बातें उचित नहीं हैं। दोनों के बीच काफी देर तक बहस हुई। इस दौरान उदिति वहां से चली गईं और बाद में उनके रोने की बात सामने आई। काजी ने भी स्पष्ट किया कि वह इस तरह की बातें सुनना स्वीकार नहीं कर सकते।

    विवाद के दौरान काजी ने कैमरे की तरफ देखकर रीति के पिता मनोज तिवारी का भी जिक्र किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर मनोज तिवारी के नाम से एक पोस्ट तेजी से वायरल होने लगी। पोस्ट में दावा किया गया कि उन्होंने अपनी बेटी के व्यवहार पर शर्मिंदगी जताते हुए काजी तौकीर से माफी मांगी है।

    वायरल पोस्ट में मनोज तिवारी की ओर से काजी से माफी मांगने और रीति के कथित व्यवहार को अनुचित बताने की बात लिखी गई थी। पोस्ट सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई और कई लोगों ने इसे मनोज तिवारी की प्रतिक्रिया के तौर पर साझा किया।

    हालांकि, वायरल हो रही यह पोस्ट फर्जी बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मनोज तिवारी ने रीति और काजी के विवाद को लेकर ऐसी कोई पोस्ट नहीं की है और न ही उन्होंने काजी से माफी मांगी है। उनके नाम का इस्तेमाल करके यह फर्जी पोस्ट तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई।

    पोस्ट के कमेंट सेक्शन में भी कई लोगों ने इसकी सत्यता पर सवाल उठाए और इसे फेक बताया। इस वजह से मनोज तिवारी की कथित माफी को लेकर सामने आया दावा वास्तविक प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा है।

    मनोज तिवारी इससे पहले अपनी बेटी रीति के बिग बॉस गेम को लेकर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। कुछ समय पहले उनसे रीति के खेल के बारे में सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा था कि वह रीति का गेम डर-डरकर देखते हैं।

    अब रीति और काजी के बीच हुए विवाद के बाद इस मामले को लेकर आगे शो में क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर नजर बनी हुई है। खासतौर पर वीकेंड का वार में इस विवाद का जिक्र होता है या नहीं, यह आगामी एपिसोड में स्पष्ट होगा।

  • SIR विवाद में 14 आपत्तियों का दावा सामने आने के बाद बढ़ी हलचल, मतदाता सूची और आयोग की प्रक्रिया पर सवाल

    SIR विवाद में 14 आपत्तियों का दावा सामने आने के बाद बढ़ी हलचल, मतदाता सूची और आयोग की प्रक्रिया पर सवाल


    नई दिल्ली ।
    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी इस प्रक्रिया में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने के साथ चुनावी डेटा के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसी बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और दोबारा जोड़ने, चुनावी डेटा तक पहुंच तथा डिजिटल सिस्टम से जुड़े फैसले शामिल हैं। दोनों आयुक्तों ने कुछ मामलों में फैसलों और आदेशों की जानकारी उन्हें नहीं होने तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े सवाल भी उठाए।

    विवाद का एक प्रमुख मुद्दा फॉर्म-6 में किया गया बदलाव है। नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले इस फॉर्म में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी शामिल की गई। आवेदकों से यह जानकारी मांगी गई कि उनका या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR वाली मतदाता सूची में मौजूद था या नहीं।

    विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि वैधानिक फॉर्म में इस तरह का परिवर्तन करने के लिए नियमों में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। इसके बाद सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई। दोनों आयुक्तों की ओर से कुछ बदलावों और प्रक्रियाओं पर असहमति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।

    मतदाता डेटा के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए। आपत्तियों में चुनावी रोल से जुड़े डिजिटल डेटाबेस तक राज्य स्तर के अधिकारियों की पहुंच और रिकॉर्ड में बदलाव करने की व्यवस्था पर चिंता जताई गई। अधिकारियों की वैधानिक भूमिका और तकनीकी सिस्टम के बीच अधिकारों को लेकर भी सवाल सामने आए।

    पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों में दाखिल अपीलों को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई। सुखबीर सिंह संधू ने सवाल उठाया कि मतदाता सूची से संबंधित मामलों में अपील दाखिल करने की अनुमति किसने दी और इस प्रक्रिया की जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं थी।

    गोवा में तकनीकी समस्या से जुड़ा एक मामला भी सामने आया। सॉफ्टवेयर से संबंधित परेशानी के कारण 97 ऐसे मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाए, जिन्हें संबंधित प्रक्रिया के तहत पात्र माना गया था। इस घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया में तकनीकी व्यवस्था की भूमिका को लेकर भी चर्चा बढ़ाई।

    इसी बीच अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए SIR को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बड़े स्तर पर मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव कराने के बजाय चुनाव की स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है। इन दावों को राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

    आशुतोष रांका ने भी चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत सभी प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और निर्णयों पर सहमति थी। आयोग ने अंदरूनी असहमति की उस तस्वीर को स्वीकार नहीं किया है जो आपत्तियों के आधार पर चर्चा में आई है।

    इस तरह SIR विवाद अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है। फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा की व्यवस्था, अधिकारियों की पहुंच और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी बहस के केंद्र में आ गई है। एक तरफ दो आयुक्तों की आपत्तियां चर्चा में हैं, जबकि दूसरी तरफ आयोग सभी प्रमुख फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है।

  • टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर विवाद… कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा ट्रस्ट

    टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर विवाद… कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा ट्रस्ट


    नई दिल्ली।
    टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (टीईडीटी) (Tata Education and Development Trust – TEDT) के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) ने साफ कर दिया है कि ट्रस्ट टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच एन चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) की दोबारा नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद से जुड़े किसी भी कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा। टीईडीटी के कोष का अनुमान करीब 5,000 करोड़ रुपये बताया गया है। मेहली ने टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा को ईमेल भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसकी प्रति टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा और टीईडीटी के दूसरे ट्रस्टी जेएन मिस्त्री को भी भेजी गई है।

    मेहली ने कहा कि ट्रस्टी, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चल रहा मुकदमा पिछले 150 वर्षों में अभूतपूर्व है। उन्होंने विवाद में शामिल लोगों के अनुभव या रवैये पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए टीईडीटी के रुख को स्पष्ट किया। उनका कहना है कि टीईडीटी टाटा संस का शेयरधारक नहीं है और इसलिए इन विवादों से अलग है।


    क्या अभी टीईडीटी का पैसा इस विवाद में खर्च हो रहा है?

    मेहली मिस्त्री के ईमेल में यह नहीं कहा गया है कि टीईडीटी का पैसा फिलहाल इस विवाद से जुड़े कानूनी खर्च में इस्तेमाल किया जा रहा है। ईमेल में ऐसा भी नहीं कहा गया है कि इस तरह के खर्च का कोई प्रस्ताव सामने आया है। उनकी आपत्ति इस आशंका पर आधारित है कि टीईडीटी से भविष्य में ऐसे कानूनी खर्च उठाने को कहा जा सकता है। मेहली ने मांग की है कि उनका ईमेल 20 नवंबर 2026 को होने वाली टीईडीटी बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की अगली बैठक में रखा जाए और रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।


    चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?

    चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को टाटा संस बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। इसके बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने उनके फैसले का सम्मान करते हुए नए चेयरमैन के चयन के लिए चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। लेकिन 17 सितंबर को टाटा संस बोर्ड ने 4:1 के मतदान से चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी। नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया।


    टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी इस विवाद में क्यों अहम?

    विवाद में टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी भी अहम है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी इक्विटी शेयर पूंजी है। दो प्रमुख ट्रस्टों में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास 27.98 फीसदी और सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास 23.56 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 51.54 फीसदी है। बाकी हिस्सेदारी अन्य संबद्ध टाटा ट्रस्ट्स के पास है। टीईडीटी, सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़ा एक संबद्ध ट्रस्ट है, लेकिन मेहली ने स्पष्ट किया है कि टीईडीटी खुद टाटा संस का शेयरधारक नहीं है।


    क्या टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर भी अलग विवाद है?

    चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के मुद्दे के साथ टाटा संस के भविष्य के स्वामित्व को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। टाटा ट्रस्ट्स ने 17 सितंबर को कहा था कि उसने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं दी है। ट्रस्ट्स ने कहा कि लिस्टिंग के अलावा दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए और फैसला लेने से पहले सभी उपलब्ध विकल्पों की जांच और समीक्षा होनी चाहिए। ट्रस्ट्स ने टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध कंपनी बनाए रखने की अपनी स्थिति दोहराई और उसकी धर्मार्थ बहुमत हिस्सेदारी की भूमिका का भी उल्लेख किया।

  • राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    नई दिल्ली ।स्वरा भास्कर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा चर्चा में है। वीडियो में वह अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देती नजर आ रही हैं। अपने बयान में स्वरा ने कहा था कि वह फैसले से काफी दुखी और निराश हुई थीं। उन्होंने यह भी बताया था कि फैसले के बाद उन्होंने अपने परिचित मुस्लिम दोस्तों को संदेश भेजकर माफी मांगी थी।

    वीडियो में स्वरा भास्कर ने कहा था कि राम जन्मभूमि मामले में फैसला आने के बाद उन्हें लगा था कि यह फैसला उचित नहीं था। उन्होंने कहा था कि उस समय वह काफी नाराज थीं और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि देश में ऐसा फैसला कैसे आया। उन्होंने बताया था कि उनके फोन में मौजूद कई मुस्लिम परिचितों को उन्होंने संदेश भेजे थे।

    स्वरा के अनुसार, इन लोगों में शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान और फहाद अहमद समेत कई लोग शामिल थे। उन्होंने कहा था कि एक हिंदू होने के नाते वह अपने मुस्लिम परिचितों को यह बताना चाहती थीं कि फैसले को लेकर उन्हें खेद है और वह इससे सहमत नहीं हैं। उनके इस पुराने बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने स्वरा के बयान की आलोचना की और उनके पुराने रुख को लेकर सवाल उठाए। कई लोगों ने धार्मिक नारे और टिप्पणियां भी कीं। दूसरी ओर, कुछ समर्थकों ने उनके विचार व्यक्त करने के अधिकार का समर्थन किया। उनका तर्क रहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी नागरिक को न्यायिक फैसले पर अपनी व्यक्तिगत राय या असहमति व्यक्त करने का अधिकार है।

    राम जन्मभूमि विवाद पर स्वरा भास्कर पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जता चुकी थीं। 2019 में फैसले के बाद उनके बयानों को लेकर विवाद हुआ था। एक वकील की ओर से उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग किए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, उस समय अटॉर्नी जनरल ने इस कार्रवाई की मांग से असहमति जताई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अयोध्या भूमि विवाद पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए अधिकार देने का फैसला किया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

    फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1949 में विवादित परिसर में मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराए जाने को कानून का उल्लंघन बताया था। अदालत ने विवादित भूमि पर रामलला के अधिकार से संबंधित निष्कर्ष भी दर्ज किए थे। फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ।

    अब स्वरा भास्कर के पुराने बयान का वीडियो फिर सामने आने से उनके 2019 के रुख पर सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है। बयान को लेकर आलोचना और समर्थन, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • UPSC अनुभव साझा करने वाले वीडियो पर आपत्ति के बाद IPS बुशरा बानो को SAP चौथी बटालियन में मिली नई जिम्मेदारी

    UPSC अनुभव साझा करने वाले वीडियो पर आपत्ति के बाद IPS बुशरा बानो को SAP चौथी बटालियन में मिली नई जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में एक मुस्लिम IPS अधिकारी द्वारा अपने यूट्यूब वीडियो में ‘अस्सलामु अलैकुम’ और ‘इंशाल्लाह’ जैसे शब्दों का प्रयोग करने के बाद उनके खिलाफ एक्शन हो गया है। खबर है कि राज्य की भाजपा की सरकार ने IPS अधिकारी डॉ. बुशरा बानो का ट्रांसफर कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वीडियो पर कुछ दक्षिणपंथी समूहों की आपत्ति जताई थी और कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने पब्लिक ऑर्डर का हवाला देते हुए अधिकारी का तबादला कर दिया।

    मामला सामने आने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

    किस वीडियो पर हुआ एक्शन?

    रिपोर्ट के मुताबिक खड़गपुर की एडिशनल एसपी के पद पर तैनात डॉ बुशरा बानो ने यूट्यूब पर एक वीडियो डालकर अभ्यर्थियों के साथ यूपीएससी की तैयारी का अनुभव शेयर किया था। उन्होंने वीडियो में बताया कि सऊदी अरब से लौटने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की ‘रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी’ और वहां की लाइब्रेरी से उन्हें तैयारी में काफी मदद मिली। वो दूसरे अभ्यर्थियों को मोटिवेट भी करती नजर आ रही हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

    क्या हुई आपत्ति?

    इस वीडियो पर ‘हिंदू लीगल फंड’ नामक संगठन ने आपत्ति जताते हुए राज्य की गृह सचिव संघमित्रा घोष को शिकायत भेजी। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि अधिकारी ने वीडियो की शुरुआत ‘अस्सलामु अलैकुम’ से की और ‘इंशाल्लाह’ और ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे शब्द भी कहे। शिकायत की गई कि अधिकारी ने एक बार भी ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम’ नहीं बोला। संगठन ने लिखा कि एक ऑन-ड्यूटी अधिकारी को सार्वजनिक तौर पर शब्दों का इस्तेमाल करते समय निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए।

    शिकायत के बाद अब बुशरा बानो का ट्रांसफर कर दिया गया है। उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर की एडिशनल एसपी पद से हटाकर उन्हें अब स्टेट आर्म्ड पुलिस (SAP) की चौथी बटालियन में ‘डिप्टी कमांडेंट’ बनाया गया है। वहीं चंदननगर पुलिस कमिश्नरेट के एडिशनल डीसी पार्थ घोष को खड़गपुर में बुशरा बानो की जगह नया एडिशनल एसपी तैनात किया गया है।

    भड़क गईं महुआ मोइत्रा

    IPS अधिकारी के ट्रांसफर की खबर आते ही टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा कि देश नफरत और कट्टरता से भरता जा रहा है। महुआ मोइत्रा ने लिखा, “जिस देश के प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन का उद्घाटन सेंगोल और साधुओं के साथ किया था, उस देश में एक मुस्लिम आईपीएस अधिकारी का सिर्फ ‘अस्सलामु अलैकुम’ और ‘इंशाअल्लाह’ कहने पर तबादला कर देना हास्यास्पद है।” उन्होंने आगे कहा, “हम एक ऐसे देश में बदलते जा रहे हैं, जो नफरत और कट्टरता से भरा हुआ है। भगवान ही भारत को बचाए।”