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  • पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर

    पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और व्यवसायी राज कुंद्रा ने साल 2021 में हुई अपनी गिरफ्तारी और उसके बाद जेल में बिताए कठिन समय से जुड़े कई नए पहलुओं को उजागर किया है। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया कि किस प्रकार कानूनी कानूनी समस्याओं के साथ-साथ उन्हें व्यक्तिगत जीवन में भी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। जब वे सलाखों के पीछे थे, तब उनके पास कई तरह की भ्रामक खबरें पहुंच रही थीं, जिसने उन्हें मानसिक रूप से बेहद तोड़ दिया था।

    राज कुंद्रा ने खुलासा किया कि उन्हें अपनी गिरफ्तारी की जानकारी भी काफी नाटकीय ढंग से मिली थी। वे पुलिस स्टेशन केवल पूछताछ में शामिल होने के लिए गए थे, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बारे में जब उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से सवाल किया, तो उन्हें बताया गया कि उच्च अधिकारियों के आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी उनके परिवार और पत्नी शिल्पा शेट्टी को भी मीडिया माध्यमों के जरिए ही मिल सकी थी।

    जेल में बिताए दिनों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि व्यावसायिक स्तर पर भी उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनके भारतीय व्यवसाय में हजारों लोग कार्यरत थे, और उनके अचानक हिरासत में जाने से पूरा काम ठप हो गया। इस दौरान उनकी पत्नी शिल्पा शेट्टी ने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के बजाय तुरंत बंद करने का कठिन फैसला लिया, क्योंकि अनिश्चितता के माहौल में प्रबंधन संभालना लगभग असंभव हो गया था। एक ही झटके में सब कुछ बदल जाने से वे गहरा सदमा महसूस कर रहे थे।

    सबसे अधिक निराशाजनक स्थिति तब पैदा हुई जब जेल के भीतर उन तक यह खबर पहुंची कि उनकी पत्नी उनसे अलग हो रही हैं और तलाक की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। राज कुंद्रा के अनुसार, इस एक अफवाह ने उन्हें अंदर से पूरी तरह झकझोर दिया था। उस समय उन्हें लगा कि जीवन का कोई अर्थ नहीं बचा है, क्योंकि उनके लिए उनका परिवार ही सबसे पहली प्राथमिकता था। मानसिक तनाव इस कदर बढ़ गया था कि वे रातों को सो नहीं पाते थे और उनके मन में बेहद नकारात्मक विचार आने लगे थे।

    हालांकि, बाद में सच्चाई सामने आने और परिवार के स्पष्ट रुख से उन्हें संबल मिला। शिल्पा शेट्टी ने हर परिस्थिति में अपने पति का समर्थन करने का फैसला किया, जिससे उन्हें इस कठिन दौर से बाहर निकलने में मदद मिली। रिहाई के बाद राज कुंद्रा ने अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने का प्रयास शुरू किया और एक नई शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जांच में पूरा सहयोग दे रहे हैं और यदि किसी भी अदालत में वे दोषी पाए जाते हैं, तो वे हर प्रकार की सजा भुगतने के लिए तैयार हैं।

    इस मामले के तार देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े हुए थे, जहां जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में फैली डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की थी। कानूनी जानकारों और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों के विश्लेषकों का मानना है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में मीडिया रिपोर्ट्स का व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। फिलहाल राज कुंद्रा अपने व्यापारिक उपक्रमों को फिर से स्थापित करने और अपनी छवि को सुधारने में जुटे हुए हैं।

  • वंदे मातरम् विवाद पर कंगना रनौत का कांग्रेस पर हमला, कहा बीजेपी विरोध करते करते देश विरोधी सोच तक पहुंची पार्टी

    वंदे मातरम् विवाद पर कंगना रनौत का कांग्रेस पर हमला, कहा बीजेपी विरोध करते करते देश विरोधी सोच तक पहुंची पार्टी

    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी के बीच और तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व को निशाने पर लेते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वंदे मातरम् को भारत की चेतना से जुड़ा बताया और कांग्रेस नेताओं के रुख पर सवाल खड़े किए।

    कंगना रनौत ने कहा कि वंदे मातरम् देश की भावनाओं और चेतना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एक कलाकार होने के नाते वह इस बात को समझती हैं कि किसी कविता या रचना का समाज और देश पर कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि वंदे मातरम् को लेकर इतनी नाराजगी या विरोध की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।

    बीजेपी सांसद ने कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान कैमरे के सामने असहजता दिखाई गई और कैमरा बंद कराने की कोशिश की गई। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस नेताओं की तुलना पाकिस्तान से करते हुए कहा कि उनके अनुसार पड़ोसी देश के लोग भी वंदे मातरम् को लेकर उतनी तीखी प्रतिक्रिया नहीं देते, जितनी कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से देखने को मिल रही है।

    कंगना ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के नेता इस पूरे विवाद के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पहले बीजेपी का विरोध करती थी, लेकिन अब उसकी राजनीति ऐसी दिशा में पहुंच गई है जिसे वह देश विरोधी मानती हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया सामने आने पर ही राजनीतिक विवाद का अगला पक्ष स्पष्ट होगा।

    कंगना रनौत ने यह बयान मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन करने के बाद दिया। 18 अगस्त की सुबह मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने मंदिर में पूजा की और कहा कि सिद्धिविनायक पूरे मुंबई के रक्षक माने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वह मंदिर में दर्शन करने आती हैं।

    इसी दौरान कंगना ने बीजेपी के सामने सोशल मीडिया से जुड़ी एक नई चुनौती का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे दिमागी नक्सलवाद की चुनौती बताया और कहा कि गलत सूचनाओं के प्रसार से निपटना जरूरी है। उनके मुताबिक सोशल मीडिया और रील कल्चर के कारण युवाओं और महिलाओं तक कई बार ऐसी जानकारियां पहुंच रही हैं जो उन्हें भ्रमित कर सकती हैं।

    कंगना ने कहा कि पहले लोगों के विचारों और जानकारी के निर्माण में समाचार पत्रों, किताबों और माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण होती थी, लेकिन अब सोशल मीडिया लोगों के लिए जानकारी का बड़ा माध्यम बन गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत सूचनाओं को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए जागरूकता और तैयारी जरूरी है।

    वंदे मातरम् को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय प्रतीकों, देशभक्ति और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कंगना के बयान के बाद यह विवाद राजनीतिक स्तर पर और तीखा होने की संभावना है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले से जारी वैचारिक टकराव के बीच वंदे मातरम् का मुद्दा भी अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

  • वंदे मातरम विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे का पलटवार, बोले गांधी नेहरू और पटेल की परंपरा के अनुसार ही गीत गाया

    वंदे मातरम विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे का पलटवार, बोले गांधी नेहरू और पटेल की परंपरा के अनुसार ही गीत गाया

    नई दिल्ली । वंदे मातरम को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारतीय जनता पार्टी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। खरगे ने कहा कि उन्होंने वही वंदे मातरम गाया है, जिसे महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेता भी गाते रहे हैं। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है।

    खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर किसी नई परंपरा की शुरुआत नहीं की है। उनके मुताबिक पार्टी लंबे समय से चली आ रही परंपरा का ही पालन कर रही है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या किसी विशेष तरीके से राष्ट्रगीत गाने को अपराध माना जा सकता है।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वंदे मातरम गाना अपराध है तो फिर उन ऐतिहासिक नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने इसी रूप में इसे गाया था। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल का उल्लेख करते हुए अपने तर्क को सामने रखा।

    खरगे ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रीय गीतों और उनसे जुड़ी परंपराएं उसके राजनीतिक अस्तित्व से काफी पहले की हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने करीब नौ दशक से चली आ रही परंपरा को ही आगे बढ़ाया है। उनके बयान में यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दी कि वंदे मातरम को लेकर वर्तमान विवाद को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। खरगे ने कहा कि यदि किसी एक सरकार के निर्णय को ही राष्ट्रीय नियम मान लिया जाए तो भविष्य में सत्ता बदलने पर अलग नियम बनाए जा सकते हैं। उनके अनुसार राष्ट्रीय प्रतीकों और उनसे जुड़ी परंपराओं को राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर बदलने के बजाय व्यापक सहमति के साथ देखा जाना चाहिए।

    वंदे मातरम को लेकर मौजूदा विवाद स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम से जुड़ा है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वंदे मातरम का गायन बीच में रोक दिया गया था। आरोप के अनुसार सोनिया गांधी ने इशारे के माध्यम से गीत को रोकने के लिए कहा था। इसके बाद इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    कांग्रेस की ओर से इस विवाद के बीच अपने रुख को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। खरगे का बयान इसी राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने वंदे मातरम के गायन को ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी ने किसी नई व्यवस्था का पालन नहीं किया।

    वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत रहा है और इसे देश के राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है। राष्ट्रगान जन गण मन से अलग इसकी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूमिका है। इसी वजह से इससे जुड़ी किसी भी राजनीतिक टिप्पणी पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

    मौजूदा विवाद में एक तरफ बीजेपी कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस इसे पुरानी परंपरा और राजनीतिक विवाद का विषय बता रही है। खरगे के बयान के बाद यह बहस और व्यापक हो गई है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप जारी रहने की संभावना है।

  • वंदे मातरम पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद का बयान, बोले दो छंद ही गाऊंगा जेल या फांसी मंजूर

    वंदे मातरम पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद का बयान, बोले दो छंद ही गाऊंगा जेल या फांसी मंजूर

    नई दिल्ली ।वंदे मातरम के पूरे गायन को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह वंदे मातरम के केवल दो छंद ही गाएंगे। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें जेल भेज दिया जाए या फांसी दे दी जाए, लेकिन वह पूरा वंदे मातरम नहीं गाएंगे। उनके इस बयान के बाद राष्ट्रगीत को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    हरिप्रसाद का बयान ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के दौरान राष्ट्रगीत के गायन को लेकर भी विवाद सामने आया था। इस दौरान गीत के पूरे गायन और कार्यक्रम में उसके प्रस्तुतीकरण को लेकर अलग अलग दावे किए गए।

    इसके बाद गोवा में आयोजित कांग्रेस की बैठक में भी वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद गाए जाने का मामला सामने आया। इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। दो छंदों तक सीमित गायन को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठे और पार्टी के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई।

    इसी बीच बीके हरिप्रसाद के बयान ने इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। उन्होंने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि वह वंदे मातरम के दो छंद ही गाएंगे। उनके बयान में जेल और फांसी का उल्लेख किए जाने से राजनीतिक प्रतिक्रिया और तीखी होने की संभावना बढ़ गई है।

    वंदे मातरम भारत का राष्ट्रगीत है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके सम्मान और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके गायन को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा होती रही है। राष्ट्रगीत के कुछ हिस्सों को लेकर ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों पर भी अलग अलग राजनीतिक विचार सामने आते रहे हैं।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने वही वंदे मातरम गाया है जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं से भी जोड़ा जाता है। खरगे ने यह सवाल भी उठाया कि यदि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के नेताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो ऐतिहासिक रूप से इससे जुड़े अन्य नेताओं के रुख पर भी चर्चा होनी चाहिए।

    खरगे ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने देश के राष्ट्रीय गीतों से संबंधित विषयों पर अपने ऐतिहासिक निर्णय पहले ही लिए थे। उनका तर्क है कि किसी एक राजनीतिक दल या सरकार के कहने मात्र से राष्ट्रीय मानक निर्धारित नहीं किए जा सकते।

    वहीं केंद्र सरकार की ओर से वंदे मातरम के सम्मान को लेकर हाल में कड़े प्रावधान किए जाने की चर्चा है। जानबूझकर राष्ट्रगीत का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने से जुड़े मामलों में कार्रवाई की व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक बहस चल रही है।

    स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले के कार्यक्रम में पूरे वंदे मातरम के गायन को भी इस विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में बीके हरिप्रसाद का बयान केवल व्यक्तिगत रुख तक सीमित नहीं रहने वाला है और इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    अब इस मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर आगे क्या रुख अपनाया जाता है और अन्य राजनीतिक दल किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर नजर रहेगी। वंदे मातरम को लेकर सामने आया ताजा विवाद राष्ट्रगीत, ऐतिहासिक परंपरा और राजनीतिक विचारधाराओं के बीच चल रही बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।

  • गोविंदा-सुनीता विवाद के बीच कश्मीरा शाह का प्यार पर भावुक पोस्ट, शादी और बेवफाई को लेकर उठाए गंभीर सवाल

    गोविंदा-सुनीता विवाद के बीच कश्मीरा शाह का प्यार पर भावुक पोस्ट, शादी और बेवफाई को लेकर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब अभिनेत्री कश्मीरा शाह की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ध्यान खींचा है। कश्मीरा ने अपने पोस्ट में प्यार, शादी और रिश्तों में भरोसे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लंबे समय तक कायम रहने वाले सच्चे प्यार के अस्तित्व पर भी अपनी निराशा जाहिर की।

    कश्मीरा शाह ने आसमान की एक तस्वीर साझा करते हुए भावुक अंदाज में लिखा कि क्या सच्चा प्यार वास्तव में वैसा ही होता है, जैसा लोग उसके बारे में सोचते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई व्यक्ति किसी दूसरे इंसान से इतना प्यार कर सकता है कि उसके लिए बहुत कुछ करे और उसे हमेशा खास महसूस कराए।

    अपने संदेश में कश्मीरा ने रिश्तों में बढ़ती दूरी और शादी टूटने की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों को एक-दूसरे को धोखा देते और शादियों को टूटते देखकर वह निराश हैं। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि शायद उन्हें रिश्तों को लेकर अपनी सोच का दोबारा मूल्यांकन करने की जरूरत है।

    कश्मीरा की यह पोस्ट ऐसे समय सामने आई है, जब गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादीशुदा जिंदगी को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। दोनों के बीच लंबे समय से अनबन की खबरें सामने आती रही हैं और हाल के दिनों में दोनों की ओर से दिए गए अलग-अलग बयानों ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है।

    सुनीता आहूजा ने अपने वैवाहिक जीवन को लेकर कई खुलासे किए हैं। उन्होंने गोविंदा पर दूसरी महिलाओं के साथ संबंध होने का आरोप लगाया है। इसी बीच अभिनेता का नाम अभिनेत्री रानी स्वर्णकार के साथ भी जोड़ा जा रहा है। हालांकि इन चर्चाओं को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों के बयानों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    हाल ही में सुनीता आहूजा का एक बयान भी चर्चा में आया था, जिसमें उन्होंने गोविंदा को शुगर डैडी कहकर संबोधित किया था। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में काफी ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद गोविंदा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कम उम्र की अभिनेत्री के साथ उनकी जोड़ी बनने को अफेयर से जोड़ने पर आपत्ति जताई।

    गोविंदा ने कहा कि किसी कम उम्र की अभिनेत्री के साथ काम करने या उनकी जोड़ी बनने का यह अर्थ नहीं है कि दोनों के बीच प्रेम संबंध हैं। उन्होंने बॉलीवुड में ऐसे कई उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि उम्र के बड़े अंतर के बावजूद कलाकार एक साथ फिल्मों में काम करते रहे हैं।

    अभिनेता ने यह भी कहा कि सुनीता उन्हें उनके प्रशंसकों की नजर में नीचे दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ती हैं। उनके इस बयान के बाद दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।

    इस पूरे विवाद के बीच कश्मीरा शाह का पोस्ट सीधे तौर पर गोविंदा और सुनीता के बारे में है या सामान्य तौर पर रिश्तों को लेकर उनकी व्यक्तिगत भावना है, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने अपने संदेश में किसी का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया है। हालांकि पोस्ट के सामने आने का समय ऐसा है कि इसे मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

    कश्मीरा शाह, गोविंदा के भांजे कृष्णा अभिषेक की पत्नी हैं। कृष्णा और गोविंदा के परिवार के बीच भी अतीत में मतभेद सार्वजनिक रूप से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में कश्मीरा की रिश्तों को लेकर की गई टिप्पणी ने मनोरंजन जगत में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

    फिलहाल गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर सामने आ रही चर्चाओं के बीच कश्मीरा का संदेश एक अलग नजरिया पेश करता है। उनके पोस्ट ने प्यार, विश्वास, शादी और रिश्तों में वफादारी जैसे मुद्दों पर सोशल मीडिया पर बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

  • गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश:  के पूर्व मंत्री और रहली विधानसभा क्षेत्र से लगातार नौ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव का एक बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। इसी दौरान उन्होंने अपने आलोचकों पर भी तीखा तंज कसा।

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि बीजेपी में प्रत्येक कार्यकर्ता का अपना महत्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने प्रसंग का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, पार्टी में किसी कार्यकर्ता की अहमियत किसी पद या बाहरी प्रमाण से तय नहीं होती, बल्कि संगठन के प्रति उसकी भूमिका और योगदान महत्वपूर्ण होता है।

    इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। उनके इस बयान की चर्चा इसलिए भी तेज हुई क्योंकि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर उनके नाम से जुड़ा एक स्थानीय विवाद सामने आया था। इसी विवाद को उनके ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति गोपाल भार्गव के गढ़ाकोटा स्थित निवास के बाहर लगे बोर्ड पर एक पर्चा चिपकाता दिखाई दिया था। इस पर्चे में भार्गव को ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ कहकर निशाना बनाया गया था। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी।

    रहली के कार्यक्रम में भार्गव ने इसी तरह की आलोचनाओं का जवाब देते हुए हाथी और कुत्ते का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हाथी अपनी चाल से आगे बढ़ता रहता है और उसके पीछे कुत्ते भौंकते रहते हैं। उनके बयान का आशय यह था कि आलोचना के बावजूद व्यक्ति को अपने रास्ते और काम से विचलित नहीं होना चाहिए।

    भार्गव ने अपने संबोधन में चींटियों और गन्ने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि सार्वजनिक जीवन में आलोचनाएं होती रहती हैं, लेकिन उन्हें अपनी जिम्मेदारी और लक्ष्य से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बीजेपी कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री के समान बताने वाला उनका बयान पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखता है। उन्होंने कहा कि संगठन में कोई सेवक की भूमिका निभाता है तो कोई जनप्रतिनिधि के तौर पर जिम्मेदारी संभालता है। उनके अनुसार, पार्टी में हर स्तर के कार्यकर्ता का अपना महत्व है।

    गोपाल भार्गव का मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वह रहली विधानसभा सीट से लगातार नौ बार निर्वाचित हो चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उनके सार्वजनिक बयानों पर राजनीतिक नजर बनी रहती है।

    इस बार भी उनके बयान के दो हिस्से सबसे अधिक चर्चा में हैं। पहला, बीजेपी के हर कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री जैसा बताना और दूसरा, आलोचकों के लिए ‘भौंकने वालों’ वाली टिप्पणी करना। उनके समर्थक इसे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

    फिलहाल बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, भार्गव ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के महत्व और आलोचनाओं से प्रभावित न होने का संदेश दिया। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विवाद अब उनके बयान के कारण व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

  • वंदे मातरम् विवाद पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले देश से माफी मांगें, सोनिया गांधी पर भी उठाए सवाल

    वंदे मातरम् विवाद पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले देश से माफी मांगें, सोनिया गांधी पर भी उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी को इस मामले में देश से माफी मांगनी चाहिए।

    अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए वंदे मातरम् को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका यह गीत हकदार है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् देश की स्वतंत्रता की लड़ाई से जुड़ा रहा है और करोड़ों भारतीयों की भावनाएं इससे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में इससे संबंधित किसी भी घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम में पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेता मौजूद थे। ध्वजारोहण के बाद वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसी दौरान सोनिया गांधी के एक इशारे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल उठाए और इसे गीत के प्रति कथित आपत्ति से जोड़ दिया।

    अमित शाह ने दावा किया कि वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर कुछ संकेत किया था। उन्होंने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस पर सवाल खड़े किए। हालांकि इस मामले को लेकर कांग्रेस की ओर से अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है और भाजपा के आरोपों को लेकर सियासी बहस जारी है।

    अमित शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह लोगों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण माध्यम बना। स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् का नारा और गीत देशभक्ति की भावना से जुड़ा रहा है।

    गृह मंत्री ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि पार्टी ने राजनीतिक और चुनावी हितों के कारण वंदे मातरम् को पीछे किया। उन्होंने कहा कि देश की भावनाओं से जुड़े इस गीत का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वंदे मातरम् के महत्व को लेकर देश में जागरूकता बढ़ाने की बात कर चुके हैं। भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़कर कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

    कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के घटनाक्रम को लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संघर्ष की ऐतिहासिक स्मृति और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा प्रतीक है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की भूमिका और नेताओं के संकेत पर राजनीतिक चर्चा जारी है।

    वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से आगे बढ़कर व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। अमित शाह की टिप्पणी के बाद भाजपा ने कांग्रेस से माफी की मांग को और प्रमुखता दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

  • राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..

    राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..


    नई दिल्ली । 
    वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी के राजनीतिक रुख, उनके बयानों और विदेश दौरों को लेकर कई सवाल उठाए और कांग्रेस पर भी गंभीर आरोप लगाए।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस का सबसे प्रमुख चेहरा राहुल गांधी हैं, लेकिन उनके बयानों से युवाओं को स्पष्ट दिशा मिलने के बजाय भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश के युवाओं को सही रास्ता दिखाने की जगह उन्हें भटकाने का काम कर रहे हैं।

    वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लगातार देश की आलोचना करता है, उससे वंदे मातरम् और भारत माता के सम्मान की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे पर निशाना साधने की कोशिश की।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के विदेश दौरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो वहां दिए जाने वाले उनके बयानों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक विदेशों में दिए गए कुछ बयानों से भारत के प्रति नकारात्मक सोच सामने आती है और इससे देश की छवि प्रभावित होने का आरोप लगाया।

    केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की मानसिक स्थिति और उनके राजनीतिक व्यवहार को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का स्वभाव ऐसा है कि या तो वह बहुत फ्रस्ट्रेट हैं या मानसिक तनाव में हैं। इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर जॉर्ज सोरोस के एजेंडे के साथ काम करने का आरोप भी लगाया। यह आरोप राजनीतिक स्तर पर पहले भी विवाद का विषय रहा है। हालांकि इस तरह के आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।

    उन्होंने राहुल गांधी को पॉलिटिकल जोकर तक करार दिया और आरोप लगाया कि उनकी राजनीति से देश को नुकसान हो रहा है। गिरिराज सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है।

    वंदे मातरम् भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में विशेष ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता है। इसी वजह से इससे जुड़े किसी भी राजनीतिक विवाद का असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को राष्ट्र सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

    गिरिराज सिंह के बयान के बाद अब कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है। फिलहाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच यह विवाद केवल वंदे मातरम् तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि राहुल गांधी की राजनीति, उनके बयानों और देश से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख को लेकर भी बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की ओर से और राजनीतिक बयान सामने आ सकते हैं।

  • अमेरिका में नई कार की पूजा के दौरान पंडित ने स्वस्तिक बनाने से किया इनकार, सामने आई बड़ी वजह

    अमेरिका में नई कार की पूजा के दौरान पंडित ने स्वस्तिक बनाने से किया इनकार, सामने आई बड़ी वजह

    नई दिल्ली ।विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी सांस्कृतिक जड़ों और धार्मिक परंपराओं को सहेजकर रखने के लिए जाने जाते हैं। चाहे कोई नया घर खरीदना हो या नई गाड़ी, पूजा-पाठ और अनुष्ठान की रस्में पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती हैं। हाल ही में अमेरिका से एक ऐसा ही दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां एक भारतीय मूल की महिला ने अपनी नई कार की वैदिक रीति-रिवाज से पूजा कराई। हालांकि, इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान एक अनोखी स्थिति देखने को मिली, जब पंडित ने गाड़ी पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाने से मना कर दिया।

    सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के अनुसार, अमेरिका में रह रही सारिका नाम की कंटेंट क्रिएटर ने अपनी नई कार की पूजा का आयोजन किया था। इस दौरान धोती-कुर्ता पहने पंडित ने भारतीय परंपरा के अनुसार पूरी विधि से पूजा संपन्न कराई। कार के बोनट पर सिंदूर से भगवान गणेश की आकृति बनाई गई, पुष्प अर्पित किए गए और सुरक्षा की कामना के साथ गंगाजल का छिड़काव किया गया। इसके अतिरिक्त, टायर के नीचे नींबू रखकर गाड़ी आगे बढ़ाने जैसी पारंपरिक रस्म भी पूरी की गई।

    पूजा के दौरान जब महिला ने कार पर ‘ओम’ और ‘स्वस्तिक’ बनाने का अनुरोध किया, तो पंडित ने ‘ओम’ का चिन्ह सहजता से अंकित कर दिया। हालांकि, जब स्वस्तिक बनाने की बात आई तो उन्होंने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। पंडित का यह फैसला किसी धार्मिक मान्यता या मतभेद के कारण नहीं, बल्कि अमेरिका में स्वस्तिक को लेकर व्याप्त गलतफहमी और उससे उत्पन्न होने वाले संभावित विवादों से बचाव के लिए था।

    दरअसल, पश्चिमी देशों में कई लोग सनातन परंपरा के शुभ प्रतीक स्वस्तिक और नाजी जर्मनी के प्रतीक ‘हाकेनक्रूज’ के बीच अंतर नहीं समझ पाते हैं। अमेरिका में अनेक लोग स्वस्तिक को नाजी विचारधारा से जोड़कर देखने की भूल कर बैठते हैं। इसी भ्रम के कारण यह आशंका रहती है कि सार्वजनिक स्थान पर गाड़ी पर स्वस्तिक बना देखकर कोई स्थानीय निवासी विरोध दर्ज करा सकता है या फिर वाहन को क्षति पहुंचा सकता है।

    सांस्कृतिक विशेषज्ञों के अनुसार, हिंदू धर्म में स्वस्तिक को हजारों वर्षों से अत्यंत पवित्र, मंगलकारी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है। किसी भी शुभ कार्य, नए प्रतिष्ठान या वाहन क्रय पर स्वस्तिक का निर्माण अनिवार्य माना जाता है। इसके विपरीत, पश्चिमी समाज में ऐतिहासिक कारणों से इस चिन्ह को लेकर एक नकारात्मक धारणा बनी हुई है। इसी व्यावहारिक समस्या को देखते हुए अमेरिका में कई भारतीय परिवार कार के बाहरी हिस्से पर स्वस्तिक बनाने के बजाय उसे कागज पर बनवाकर गाड़ी के अंदर रख लेते हैं।

    विदेशों में रहने वाले भारतीयों को अक्सर अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करते समय स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों और संवेदनशीलता का ध्यान रखना पड़ता है। मध्य प्रदेश सहित भारत के विभिन्न राज्यों से विदेश गए लोग अपनी संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास करते हैं, लेकिन सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए समय-समय पर व्यावहारिक बदलाव भी अपनाते हैं।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रतीकों को लेकर जागरूकता और सही जानकारी के प्रसार की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय को पंडित जी की समझदारी और व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने एक धार्मिक रस्म को किसी भी संभावित विवाद से बचा लिया।

  • पत्नी सुनीता के बयानों पर अभिनेता गोविंदा का पलटवार, कहा- मुझे बदनाम करने की रची जा रही है साजिश

    पत्नी सुनीता के बयानों पर अभिनेता गोविंदा का पलटवार, कहा- मुझे बदनाम करने की रची जा रही है साजिश

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच जारी आपसी खींचतान अब सार्वजनिक रूप से खुलकर सामने आ गई है। अपनी पत्नी के हालिया बयानों पर चुप्पी तोड़ते हुए अभिनेता ने एक वीडियो संदेश के जरिए कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। गोविंदा ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी उनके पेशेवर जीवन और काम में अड़चनें पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

    सोशल मीडिया पर सामने आए बयान में गोविंदा ने कहा कि उनकी पत्नी उन्हें सार्वजनिक तौर पर नीचा दिखाने और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। अभिनेता ने स्पष्ट किया कि रियलिटी शो ‘लॉकअप’ में वह अपनी मर्जी से नहीं गए थे, बल्कि उनकी पत्नी ने बेटी टीना के जरिए उन्हें वहां आने के लिए कहा था, जिसके बाद वह वहां पहुंचे थे।

    अभिनेता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब उनकी पत्नी अपने कार्यक्रमों में व्यस्त थीं, तब उन्होंने हमेशा उनका सहयोग किया और अपनी सेवाएं दीं। हालांकि, अब जब वे अपने नए प्रोजेक्ट्स और फिल्मों पर काम शुरू कर रहे हैं, तो उनके काम में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है। गोविंदा का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से उनके व्यावसायिक अवसरों और जनमानस में उनकी साख पर असर पड़ रहा है।

    हाल ही में सुनीता आहूजा द्वारा एक अन्य अभिनेत्री को लेकर दी गई टिप्पणियों पर भी गोविंदा ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि फिल्म उद्योग में संघर्ष कर रहे या साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले कलाकारों को इस तरह अपमानित या जलील नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्रदत्त क्षमता और शोहरत का इस्तेमाल दूसरों को नीचा दिखाने के लिए करना किसी को शोभा नहीं देता।

    उल्लेखनीय है कि सुनीता आहूजा कुछ समय पूर्व एक रियलिटी शो का हिस्सा बनी थीं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वे बीच में ही बाहर आ गई थीं। उस दौरान गोविंदा अपनी बेटी के साथ उन्हें लेने पहुंचे थे। इस पारिवारिक विवाद की चर्चा अब पूरे मनोरंजन जगत में जोर-शोर से हो रही है।

    उत्तर भारत और मध्य प्रदेश सहित देश भर में गोविंदा के प्रशंसकों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग अभिनेता के आगामी प्रोजेक्ट्स का इंतजार कर रहे हैं, जबकि यह देखना बाकी है कि इस पारिवारिक बयानबाजी पर आगे क्या स्थिति बनती है।