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  • AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान

    AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट (Social Media post) को लेकर जबरदस्त विवाद में घिर गए हैं। इस बार मामला देश के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Former President Barack Obama.) और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा (Michelle Obama) से जुड़ा है। ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में ओबामा दंपति को बंदर के रूप में दिखाए जाने के बाद सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस कथित नस्लभेदी कंटेंट को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप पर जमकर निशाना साधा है।

    दरअसल, गुरुवार रात ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट साझा किए। इन्हीं में से एक 62 सेकंड का वीडियो क्लिप सबसे ज्यादा चर्चा में है। शुरुआती जांच में यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया प्रतीत होता है। वीडियो में 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर यह दावा किया गया है कि कुछ अहम राज्यों में वोटिंग मशीनों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी।


    वीडियो में क्या दिखाया गया?

    इस क्लिप के एक हिस्से में दो चिम्पैंजी नजर आते हैं, जिन पर बराक ओबामा और मिशेल ओबामा के मुस्कुराते हुए चेहरे एडिट कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह दृश्य एक लंबे वीडियो से लिया गया है, जिसे पहले एक मीम पेज पर शेयर किया गया था। उसी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप को खुद को “जंगल का राजा” बताते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं, वीडियो में मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत कई अन्य डेमोक्रेटिक नेताओं को भी जानवरों के रूप में पेश किया गया है। बाइडेन को केले खाते हुए चिम्पैंजी के रूप में दर्शाया गया, जिससे डेमोक्रेटिक खेमे में नाराजगी और बढ़ गई।


    डेमोक्रेट्स का तीखा पलटवार

    देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा और उनकी पत्नी के खिलाफ इस तरह के चित्रण को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे नस्लवादी और अपमानजनक करार दिया है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम राजनीतिक मर्यादाओं को तोड़ने वाला है।

    कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ोम ने इस पोस्ट की कड़ी निंदा करते हुए इसे “घिनौना” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “राष्ट्रपति का यह व्यवहार बेहद शर्मनाक है। हर एक रिपब्लिकन को इसकी निंदा करनी चाहिए। अभी।” वहीं, बराक ओबामा के पूर्व वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बेन रोड्स ने भी ट्रंप पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतिहास डोनाल्ड ट्रंप को एक नकारात्मक और विभाजनकारी व्यक्ति के रूप में याद रखेगा।


    पहले भी रहे हैं विवाद

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ओबामा परिवार को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी वह बराक ओबामा और मिशेल ओबामा पर व्यक्तिगत हमले कर चुके हैं और कई मौकों पर उनके बयानों को भड़काऊ और नस्लभेदी बताया गया है। फिलहाल इस वीडियो को लेकर अमेरिका की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। एक ओर ट्रंप समर्थक इसे राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोधी इसे खुले तौर पर नस्लभेदी मानसिकता का उदाहरण बता रहे हैं।

  • RJD में अंदरूनी बगावत: भाई वीरेंद्र ने टिकट कटने पर उठाए तीखे सवाल, कहा- यादव उम्मीदवार ही देना था तो विजय मंडल क्यों हटाए?

    RJD में अंदरूनी बगावत: भाई वीरेंद्र ने टिकट कटने पर उठाए तीखे सवाल, कहा- यादव उम्मीदवार ही देना था तो विजय मंडल क्यों हटाए?



    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अंदर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने टिकट वितरण को लेकर पार्टी नेतृत्व पर सीधे सवाल उठाए हैं। पटना से सामने आए एक वीडियो में वे साफ तौर पर नाराज दिखे और पार्टी के फैसलों पर आपत्ति जताई।

    भाई वीरेंद्र ने दिनारा विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वे और विजय मंडल एक साथ विधायक रहे हैं।

    उन्होंने पूछा कि जब यादव समाज के उम्मीदवार को ही टिकट देना था, तो फिर सिटिंग विधायक विजय मंडल का टिकट क्यों काटा गया? उन्होंने यह भी पूछा कि विजय मंडल में ऐसी क्या कमी थी, जिसके कारण उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला।

    उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के अंदर विजय मंडल का टिकट बचाने के लिए संघर्ष किया था और उनका मानना है कि टिकट कटना गलत फैसला था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने स्थानीय और मजबूत नेताओं को नजरअंदाज कर दूसरे जिलों से आए नेताओं को टिकट दिया, जिससे जमीनी पकड़ कमजोर हुई।

    भाई वीरेंद्र ने कुछ नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा,
    “पार्टी में कुछ लोग सिर्फ नाम के समाजवादी हैं।

    ये एक साथ दो–तीन जिलों की राजनीति करते हैं। जब तक ऐसे लोग टिकट तय करते रहेंगे, तब तक पार्टी को नुकसान होता रहेगा।”

    उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि RJD में अंदरूनी तनाव और असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी नेतृत्व ने पहले ही हार के लिए वोट चोरी का आरोप लगाया था, लेकिन अब टिकट वितरण को लेकर उठ रहे सवालों से राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।

    गौरतलब है कि दिनारा सीट से विजय मंडल 2020 में RJD के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उन्होंने LJP के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह को 8,228 वोटों से हराया था। लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में RJD ने उनका टिकट काटकर शशि शंकर कुमार उर्फ राजेश यादव को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

  • BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल

    BJP का कांग्रेस पर हमला: थरूर की गंभीर की तारीफ पर फिर उठे ‘फतवे’ के सवाल



    नई दिल्ली। नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 से पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय क्रिकेट कोच गौतम गंभीर के साथ सेल्फी शेयर की और उनकी तारीफ की, जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। BJP का आरोप है कि थरूर की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस की राजनीति के खिलाफ है और अब उन्हें पार्टी से ‘फतवा’ मिल सकता है।

    भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस को थरूर की नागपुर यात्रा, गंभीर से मुलाकात या उनकी प्रशंसा में से कौन सी बात ज्यादा खलती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या थरूर के खिलाफ एक और “कांग्रेस फतवा” जारी होने वाला है।

    थरूर ने गंभीर को “प्रधानमंत्री मोदी के बाद सबसे कठिन काम करने वाला इंसान” बताया और कहा कि लाखों लोग उनके फैसलों पर सवाल उठाते हैं, फिर भी वह शांत रहते हैं और आगे बढ़ते हैं। उन्होंने गंभीर की नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए उन्हें सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

    गंभीर ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब समय आएगा, तब कोच के कथित ‘असीमित अधिकार’ पर सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने लिखा कि खुद के खिलाफ खड़ा देखकर उन्हें हंसी आ रही है।

    यह विवाद राजनीतिक स्तर पर बढ़ता जा रहा है, क्योंकि थरूर की आलोचना और प्रशंसा दोनों ही पक्षों के बीच नई बहस का कारण बन गई है।

  • हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”

    हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा हमला बोला है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान मीडिया से बातचीत में सरमा ने दावा किया कि भाजपा में शामिल होने से पहले वे राहुल और प्रियंका की अंदरूनी लड़ाई के शिकार रहे।

    सरमा ने कहा, “गांधी परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हाल के राजनीतिक फैसलों से यह साफ दिखता है कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि प्रियंका गांधी केरल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करें।

    उन्हें असम में भेजा गया, इसका यही मतलब है।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस में राहुल गांधी अपने करीबी नेताओं और गुट के जरिए सत्ता बनाए रखना चाहते हैं, जबकि प्रियंका उस गुट का हिस्सा नहीं हैं। सरमा ने बताया, “मैं 22 साल तक कांग्रेस में रहा हूं, मुझे अंदर की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि प्रियंका को केरल की बजाय असम में जिम्मेदारी दी गई।”

    हिमंत सरमा बीजेपी में शामिल होने के बाद से लगातार कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमलावर रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सियासी जानकार अब इस सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या वाकई राहुल और प्रियंका के बीच अंदरूनी मतभेद हैं, या यह विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

  • स्वर्ण मंदिर के सरोवर को अपवित्र करने पर बवाल… मुस्लिम शख्स ने हाथ-पैर धोए… कुल्ला किया

    स्वर्ण मंदिर के सरोवर को अपवित्र करने पर बवाल… मुस्लिम शख्स ने हाथ-पैर धोए… कुल्ला किया


    अमृतसर।
    पंजाब के अमृतसर (Amritsar) शहर के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर (Famous Golden Temple) में एक मुस्लिम युवक (Muslim youth) न पवित्र सरोवर के पानी से वुजू किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में युवक को सरोवर में पैर डुबोए, मुंह कुल्ला करते और नाक साफ करते देखा जा सकता है, जिससे कई लोगों ने इसे सरोवर को गंदा करने और सिख मर्यादा का उल्लंघन बताया। सिख समुदाय और सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इसे पवित्र स्थल के प्रति अपमान करार दिया, क्योंकि सरोवर केवल स्नान और धार्मिक डुबकी के लिए है, जबकि वुजू के लिए अलग से बहते पानी की व्यवस्था मौजूद है।

    शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मानन ने कहा कि हिंदू और सिख समुदाय मर्यादा जानते हैं, लेकिन अन्य धर्मों के लोग कभी-कभी गलती कर बैठते हैं। एसजीपीसी ने वीडियो की जांच शुरू कर दी है और ऐसे मामलों पर पहले भी चर्चा की जा चुकी है। आरोपी युवक की पहचान दिल्ली निवासी सुभान रंगरेज के रूप में हुई, जो खुद को मुस्लिम शेर कहता है। विवाद बढ़ने के बाद उसने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली। उसने वीडियो जारी कर कहा कि उसे स्वर्ण मंदिर की मर्यादा के बारे में जानकारी नहीं थी और न ही वहां मौजूद किसी ने उसे रोका या बताया।


    वीडियो वायरल होने पर क्या बोला आरोपी

    आरोपी ने बताया कि वह लंबे समय से स्वर्ण मंदिर घूमना चाहता था और सिख धर्म के प्रति गहरा सम्मान रखता है। एक अन्य वीडियो में उसने स्वर्ण मंदिर को भारत की एकता का प्रतीक बताया, जहां सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सब भाई-भाई की तरह रहते हैं। उसने टोपी पहनने के बावजूद किसी की ओर से आपत्ति न करने की बात कही और कहा कि वह दोबारा जाकर व्यक्तिगत रूप से माफी मांगेगा। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे भक्ति का प्रदर्शन बताया, लेकिन अधिकांश ने इसे अनजान होने के बावजूद गलत करार दिया। एसजीपीसी ने सभी से अपील की है कि वे मर्यादा का पालन करें और स्थल को पर्यटन स्थल की तरह न इस्तेमाल करें।

  • धर्म प्रचार छोड़ने पर साध्वी हर्षा पर हमला, संत समाज से बहिष्कार, सोशल मीडिया पर गालियां और धमकियां!

    धर्म प्रचार छोड़ने पर साध्वी हर्षा पर हमला, संत समाज से बहिष्कार, सोशल मीडिया पर गालियां और धमकियां!



    नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में साध्वी हर्षा रिछारिया ने भारी मन से घोषणा की कि वह धर्म प्रचार का काम छोड़कर वापस अपने पुराने पेशे एंकरिंग में लौट रही हैं। हर्षा का कहना है कि धर्म प्रचार के दौरान उन्हें संत समाज से न सिर्फ स्वीकृति नहीं मिली, बल्कि धमकियां, गंदी-गंदी बातें और धर्म परिवर्तन के ऑफर भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें “धर्म छोड़कर लौट रही” मानकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरे धर्म के लोगों को भी उनके खिलाफ भड़काया जा रहा है।
    हर्षा ने स्पष्ट किया कि वह सनातनी हैं और हमेशा रहेंगी, लेकिन इस मानसिक उत्पीड़न को वह और बर्दाश्त नहीं कर सकतीं।

    हर्षा रिछारिया का नाम देशभर में तब चर्चा में आया जब 4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में वह निरंजनी अखाड़े की भव्य पेशवाई में संतों के साथ रथ पर सवार दिखाई दीं। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और लोग उन्हें ‘महाकुंभ की सबसे सुंदर साध्वी’ कहने लगे। लेकिन इसी प्रसिद्धि के साथ विवाद भी जुड़ गया। कुछ धार्मिक गुरुओं ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह “धर्म को प्रदर्शन का हिस्सा बनाना” है और इससे समाज में गलत संदेश फैलता है।

    हर्षा ने बताया कि इस लोकप्रियता के बाद उन्हें संत समाज में स्वीकृति नहीं मिली। जब भी वह किसी संत से मिलने जातीं, तो उन्हें घंटों इंतजार कराया जाता। उनके पुराने एंकरिंग पेशे को लेकर उन्हें ‘पाप’ का भाव दिया जाता और उनसे सफाई मांगी जाती।

    हर्षा ने कहा कि उन्हें अपने पुराने पेशे पर गर्व है और वही पेशा उन्हें पहचान देता था, लेकिन धर्म के रास्ते पर आने के बाद उन्हें संदेह, तिरस्कार और भेदभाव का सामना करना पड़ा।

    हर्षा का आरोप है कि कुछ धार्मिक ठेकेदार और संत उनके खिलाफ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। दिसंबर 2025 में माघ मेले में शिविर लगाने के लिए जमीन न मिलने की घटना उन्हें सबसे ज्यादा आहत कर गई। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अधिकारियों ने उन्हें जमीन देने का आश्वासन दिया, लेकिन जैसे ही कुछ प्रभावशाली संतों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने अधिकारियों पर दबाव बनाया और जमीन आवंटन की प्रक्रिया रोक दी गई। हर्षा ने कहा कि उन्होंने कभी श्रद्धालुओं से एक पैसा नहीं लिया और सारी व्यवस्था अपने खर्च पर चलाती थीं।

    हर्षा का मानना है कि जब कोई लड़की धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ती है, तो कुछ लोग उसे नीचे गिराने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ उत्पीड़न इसलिए बढ़ा क्योंकि उन्हें “धर्म प्रचार छोड़ने” की बात कहते हुए लोगों को बहस का मौका मिल गया। हर्षा ने यह भी कहा कि उन्हें कुछ लोगों द्वारा धर्म परिवर्तन के ऑफर दिए जा रहे हैं और धमकी भरे संदेश भी मिल रहे हैं।

    अंत में हर्षा ने युवाओं और महिलाओं को सलाह दी कि धर्म से जुड़ने के लिए अपने परिवार और घर के मंदिर तक ही सीमित रहें और किसी के पीछे अंधे होकर न चलें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ धर्म का प्रचार छोड़ा है, सनातन धर्म नहीं। साथ ही कहा कि अगर भविष्य में परिस्थितियां बदलती हैं, तो वह फिर से इस मार्ग पर लौट सकती हैं।

  • सुनीता आहूजा ने गोविंदा पर फिर खोला मोर्चा, कहा- गोविंदा को कभी माफ नहीं करूंगी, सतर्क हो जा बेटा…

    सुनीता आहूजा ने गोविंदा पर फिर खोला मोर्चा, कहा- गोविंदा को कभी माफ नहीं करूंगी, सतर्क हो जा बेटा…


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित कपल सुनीता आहूजा और गोविंदा लंबे समय से अपने रिश्ते को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। कई बार तलाक की अफवाहें आईं, लेकिन दोनों ने उन्हें नकार दिया। वहीं अब सुनीता ने एक बार फिर गोविंदा को लेकर शॉकिंग स्टेटमेंट दिया है, जिसमें उन्होंने गोविंदा के अफेयर और रिश्ते पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी।

    सुनीता ने मिसमालिनी को दिए इंटरव्यू के प्रोमो में कहा, मैं गोविंदा को माफ नहीं करूंगी। मैं नेपाल की हूं।

    इसके बाद उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, खुखरी निकाल दूंगी, ना तो सबकी हालत खराब हो जाएगी। इसलिए बोलती हूं, सतर्क हो जा बेटा अभी भी।
    सुनीता ने आगे बताया कि गोविंदा के आसपास ऐसी लड़कियां अक्सर आती हैं, लेकिन उन्होंने कहा, तुम थोड़ी बेवकूफ हो। तुम 63 के हो गए हो। तुम्हें अभी टीना की शादी करवानी है, यश का करियर है।
    गोविंदा के बेटे यश के करियर में उनके कम शामिल होने पर सुनीता ने कड़ा रुख दिखाया।
    उन्होंने कहा कि गोविंदा ने बेटे की मदद नहीं की और खुद उनसे भी कोई सहयोग नहीं मांगा। उन्होंने कहा, “मैंने उसके मुंह पर बोला कि तू बाप है कि क्या है?

    पिछले साल गणेश चतुर्थी पर सुनीता ने तलाक को लेकर कहा था कि मीडिया उन्हें अलग नहीं कर सकता। उन्होंने कहा था, हमको साथ में देखकर… अगर कुछ होता तो इतने नजदीक थोड़ी दिखते? हमारी दूरियां होती हैं। कोई हम दोनों को अलग नहीं कर सकता। मेरा गोविंदा सिर्फ मेरा है और किसी का नहीं।सूत्रों के मुताबिक सुनीता अपने व्लॉग और इंटरव्यू में गोविंदा के साथ अपने रिश्ते और अनबन पर खुलकर बात करती हैं, लेकिन गोविंदा इस पर कभी प्रतिक्रिया नहीं देते।

  • दिल्ली कॉन्सर्ट में हनी सिंह का विवादित बयान वायरल वीडियो पर दी सफाई बोले- भूल-चूक माफ’

    दिल्ली कॉन्सर्ट में हनी सिंह का विवादित बयान वायरल वीडियो पर दी सफाई बोले- भूल-चूक माफ’


    नई दिल्ली । फेमस सिंगर और रैपर यो यो हनी सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में फंस गए हैं। हाल के दिनों में बैक-टू-बैक गानों और लाइव कॉन्सर्ट्स के जरिए सुर्खियों में बने हनी सिंह का दिल्ली कॉन्सर्ट अब उनके लिए मुश्किलों का कारण बन गया है। इस कॉन्सर्ट के दौरान मंच से की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। दरअसल दिल्ली में आयोजित कॉन्सर्ट के दौरान हनी सिंह ने ठंड के मौसम को लेकर एक अश्लील और अभद्र टिप्पणी की। उन्होंने कार और निजी पलों को लेकर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिन्हें सार्वजनिक मंच पर कहना कई लोगों को नागवार गुजरा।
    इतना ही नहीं इस दौरान कुछ गालियां और अपशब्द भी बोले गए जिसके बाद दर्शकों के एक हिस्से ने नाराजगी जाहिर की। जैसे ही इस बयान की क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आई देखते ही देखते यह वायरल हो गई। वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर हनी सिंह को जमकर ट्रोल किया जाने लगा। कई यूजर्स ने उनके भाषा स्तर और मंच की मर्यादा पर सवाल उठाए। किसी ने लिखा कि उम्र के साथ उनकी समझ कम हो गई है तो किसी ने तंज कसते हुए कहा कि वह फिर से गलत आदतों की ओर लौट रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि एक बड़े कलाकार से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती।

    लगातार बढ़ते विरोध और आलोचना के बीच आखिरकार हनी सिंह ने खुद सामने आकर सफाई दी। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें वह वायरल क्लिप को लेकर अपनी बात रखते नजर आए। हनी सिंह ने कहा कि सुबह से उनका एक वीडियो एडिट करके सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है और पूरी बात को संदर्भ से अलग दिखाया गया है। अपने वीडियो में हनी सिंह ने यह भी बताया कि वह उस शो में मुख्य परफॉर्मर नहीं बल्कि सिर्फ एक गेस्ट के तौर पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि शो से दो दिन पहले उनका कुछ गायनेकोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट के साथ लंच था जहां कुछ विषयों पर बातचीत हुई थी उसी संदर्भ को गलत तरीके से पेश किया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर उनकी किसी बात से किसी को ठेस पहुंची है तो इसके लिए वह माफी मांगते हैं।

    हनी सिंह ने अपने पोस्ट के कैप्शन में साफ शब्दों में लिखा भूल-चूक माफ। उनके इस बयान के बाद कुछ फैंस ने उनका समर्थन किया जबकि कई लोग अब भी उनकी भाषा और सार्वजनिक मंच पर जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। यह पहला मौका नहीं है जब हनी सिंह अपने बयानों या गानों को लेकर विवादों में आए हों। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने सफाई देकर मामला शांत करने की कोशिश की है। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे कितना तूल पकड़ता है और इसका उनके आने वाले कॉन्सर्ट्स और प्रोजेक्ट्स पर क्या असर पड़ता है।

  • मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है

    मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष अबू आजमी ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे पर विवादित टिप्पणी की है। अबू आजमी ने राणे को बौना मंत्री और नेपाली बताते हुए धमकी दी कि अगर उन्हें ताकत मिले तो वह नितेश राणे की जुबान काट देंगे। अबू आजमी का यह बयान नितेश राणे के हालिया हिंदुत्व से जुड़ी टिप्पणियों और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयानबाजी पर आया है। आजमी ने राणे के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा यह बौना मंत्री बोलता है कि मस्जिद में घुसकर मुसलमानों को मारूंगा। क्या हम हिंजड़े हैं क्या हमें मारेगा तू उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके पास शक्ति हो तो वह इस बौने मंत्री की जुबान काट डालेंगे और उसे सबक सिखाएंगे।

    नितेश राणे के बयान पर प्रतिक्रिया

    नितेश राणे के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर दिए गए बयान के बाद यह विवाद उठ खड़ा है। राणे ने कहा था कि वह हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के लिए काम कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के धर्मनिरपेक्षता या ध्रुवीकरण के लिए नहीं। उन्होंने विशेष रूप से रामनवमी या हनुमान जयंती जैसे धार्मिक जुलूसों में पत्थरबाजी की घटनाओं पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जब ईद और मुहर्रम शांतिपूर्वक मनाए जा सकते हैं, तो रामनवमी या हनुमान जयंती पर ऐसा क्यों होता है। राणे ने कहा था कि उनका किसी खास समुदाय से विरोध नहीं है, लेकिन जो लोग जिहाद करना चाहते हैं, उनके खिलाफ उनकी आपत्ति स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग वंदे मातरम नहीं बोलते उन्हें पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए।

    अबू आजमी की कड़ी प्रतिक्रिया

    अबू आजमी ने नितेश राणे के इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि राणे का यह बयान मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ है। उन्होंने सवाल किया कि अगर राणे इतना बहादुर हैं तो क्यों नहीं मस्जिद में जाकर दिखाते हैं कि वह क्या कर सकते हैं। आजमी ने यह भी कहा कि राणे जैसे लोग यह कहते हैं कि अगर देश में रहना है तो वंदे मातरम बोलना होगा, लेकिन वह यह नहीं समझते कि हमें राम नवमी के दिन पानी लेकर खड़ा रहने का गर्व है।

    सपा नेता की भाषा पर सवाल


    आजमी का बयान, जो कि भारतीय राजनीति में एक नई कड़ी विवाद को जन्म दे सकता है, कई लोगों को आपत्ति दे रहा है। उनकी भाषा और बयानों में हिंसा की ओर इशारा करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे असहिष्णुता की ओर बढ़ने वाला कदम बताया है।

  • IND vs BAN विवाद पर तमीम इकबाल की सलाह: जज़्बात से नहीं, भविष्य को ध्यान में रखकर लें फैसले

    IND vs BAN विवाद पर तमीम इकबाल की सलाह: जज़्बात से नहीं, भविष्य को ध्यान में रखकर लें फैसले

    नई दिल्‍ली ।  भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे क्रिकेट विवाद पर बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। तमीम ने कहा कि इस तरह के अहम मामलों में भावनाओं के बजाय जिम्मेदारी और दूरदर्शिता के साथ सोचने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्दबाजी में फैसले लिए गए, तो उसका असर सिर्फ मौजूदा हालात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले एक दशक तक बांग्लादेश क्रिकेट को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

    भारत में टूर्नामेंट पर बांग्लादेश की आपत्ति
    फरवरी से भारत में प्रस्तावित टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस मुद्दे पर असमंजस की स्थिति में है और उसने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए भारत की यात्रा से इनकार किया है। BCB ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से अनुरोध किया है कि बांग्लादेश के मैच सह-मेजबान श्रीलंका में आयोजित किए जाएं। इस बीच विवाद तब और तेज हो गया जब आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान को रिलीज कर दिया। बांग्लादेश में इस फैसले को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों में तल्खी और बढ़ गई है।

    IND-BAN विवाद पर तमीम इकबाल की अपील
    भारत-बांग्लादेश क्रिकेट विवाद को लेकर तमीम इकबाल ने संयम बरतने की अपील की है। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां काफी संवेदनशील हैं और ऐसे माहौल में किसी भी तरह का जल्दबाजी वाला फैसला नुकसानदायक साबित हो सकता है। तमीम का मानना है कि अगर सभी संबंधित पक्ष आपस में संवाद करें तो कई जटिल मुद्दों का समाधान संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को सिर्फ मौजूदा हालात नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी स्थिति और टीम के भविष्य को भी ध्यान में रखना चाहिए। उनका कहना है कि हर फैसला इस सोच के साथ लिया जाना चाहिए कि वह लंबे समय में बांग्लादेश क्रिकेट और खिलाड़ियों के हित में हो।

    BCB को तमीम की सलाह
    तमीम इकबाल ने इस पूरे विवाद पर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि BCB को एक स्वतंत्र संस्था की तरह काम करना चाहिए। तमीम ने माना कि सरकार से संवाद जरूरी है, लेकिन किसी भी बड़े फैसले की जिम्मेदारी अंततः बोर्ड की ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनभावनाएं अक्सर जज्‍बात से संचालित होती हैं, लेकिन अगर हर निर्णय उसी आधार पर लिया जाए तो इतनी बड़ी क्रिकेट संस्था को सही तरीके से चलाना मुश्किल हो जाता है।

    तमीम ने आगाह किया कि आज लिया गया कोई भी कदम आने वाले 10 वर्षों तक बांग्लादेश क्रिकेट की दिशा तय कर सकता है। उनका कहना है कि फैसले भावनाओं से ऊपर उठकर इस बात को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए कि वे देश के क्रिकेट ढांचे और खिलाड़ियों के भविष्य के लिए कितने फायदेमंद हैं। तमीम के इस बयान से साफ है कि भारत–बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों को लेकर चल रहा विवाद केवल मौजूदा टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।