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  • तलाक से लेकर विवादित बयानों तक, Akansha Chamola के 5 बड़े विवाद जिन्होंने बार-बार उन्हें सुर्खियों और ट्रोलिंग के केंद्र में ला खड़ा किया

    तलाक से लेकर विवादित बयानों तक, Akansha Chamola के 5 बड़े विवाद जिन्होंने बार-बार उन्हें सुर्खियों और ट्रोलिंग के केंद्र में ला खड़ा किया

    नई दिल्ली । टेलीविजन अभिनेत्री आकांक्षा चमोला एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने अभिनेता गौरव खन्ना से अलग होने की घोषणा कर सभी को चौंका दिया। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब आकांक्षा विवादों के कारण चर्चा में आई हों। पिछले कुछ वर्षों में उनके कई बयान, सोशल मीडिया गतिविधियां और पेशेवर फैसले उन्हें लगातार ट्रोलिंग और आलोचनाओं के घेरे में लाते रहे हैं।

    आकांक्षा चमोला का पहला बड़ा विवाद उस समय सामने आया था जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह मां नहीं बनना चाहतीं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह बच्चों की जिम्मेदारी उठाने के लिए स्वयं को तैयार नहीं मानतीं और उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि जीवन में संतान होना आवश्यक है। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया, जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स ने उनकी आलोचना भी की। यह बयान लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।

    इसके बाद एक समारोह के दौरान उनका डांस वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। यह कार्यक्रम गौरव खन्ना की सफलता का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया गया था। वायरल वीडियो में आकांक्षा उत्साह के साथ डांस करती दिखाई दीं, जबकि गौरव उन्हें संभालते नजर आए। इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं और अभिनेत्री को एक बार फिर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।

    आकांक्षा अपने डिजिटल प्रोजेक्ट्स को लेकर भी विवादों में रह चुकी हैं। एक वेब सीरीज में उनके कुछ रोमांटिक दृश्यों और प्रमोशनल इवेंट्स के दौरान सह-कलाकारों के साथ उनकी मौजूदगी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस हुई। इन दृश्यों को लेकर इंटरनेट पर कई तरह की टिप्पणियां की गईं, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि पर भी असर पड़ा। हालांकि अभिनेत्री ने इस पर कभी विस्तार से प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने पेशेवर काम को प्राथमिकता देती रहीं।

    कुछ समय पहले आकांक्षा द्वारा साझा की गई एक क्रिप्टिक सोशल मीडिया पोस्ट ने भी काफी हलचल मचा दी थी। पोस्ट में रिश्तों और भावनात्मक दूरी का जिक्र किया गया था, जिसके बाद लोगों ने उनके वैवाहिक जीवन को लेकर अटकलें लगानी शुरू कर दीं। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पोस्ट किसी निजी विवाद से जुड़ी नहीं थी और उसे गलत तरीके से समझा गया। इसके बावजूद यह मामला कई दिनों तक सोशल मीडिया पर चर्चा में बना रहा।

    हालिया विवाद उनके तलाक के ऐलान से जुड़ा है। अभिनेत्री के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे उनका निजी निर्णय बताते हुए सम्मान किया, जबकि कई यूजर्स ने इसे प्रचार का हिस्सा बताया। कुछ का मानना है कि यह कदम उनके नए रियलिटी शो में चर्चा का केंद्र बनने की रणनीति हो सकता है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    लगातार विवादों के बावजूद आकांक्षा चमोला मनोरंजन जगत में सक्रिय हैं और सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत मौजूदगी बनी हुई है। उनके हर बयान और गतिविधि पर लोगों की नजर रहती है, जिसके कारण वह अक्सर चर्चा का विषय बन जाती हैं। आने वाले समय में उनके पेशेवर फैसले और निजी जीवन से जुड़े घटनाक्रम पर भी दर्शकों की नजर बनी रहने की संभावना है।

  • ईडी की छापेमारी पर रीवा में बवाल, जब्ती को लेकर विवाद बढ़ा, विधायक पर साजिश के आरोप से तेज हुई सियासत

    ईडी की छापेमारी पर रीवा में बवाल, जब्ती को लेकर विवाद बढ़ा, विधायक पर साजिश के आरोप से तेज हुई सियासत

     मध्य प्रदेश।  के रीवा जिले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद शुक्रवार को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। जिले के विभिन्न स्थानों पर की गई जांच कार्रवाई के दौरान एक स्थान पर हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब जांच टीम लंबे समय तक चली प्रक्रिया पूरी करने के बाद बाहर निकलने लगी। स्थानीय लोगों और समर्थकों के विरोध के कारण स्थिति कुछ समय के लिए विवादपूर्ण हो गई, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ी।

    जानकारी के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने जिले में कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की थी। इनमें पदमधर कॉलोनी स्थित एक परिसर भी शामिल था, जहां अधिकारियों ने कई घंटों तक दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों की जांच की। कार्रवाई के दौरान टीम ने आवश्यक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पड़ताल की तथा विभिन्न दस्तावेजों का सत्यापन किया।

    बताया गया है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब अधिकारी परिसर से बाहर निकलने लगे तो जब्त किए गए सामान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। संबंधित परिवार का दावा था कि टीम कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज, नकदी और अन्य सामग्री अपने साथ ले जा रही है। वहीं जांच एजेंसी की ओर से प्रक्रिया को कानूनी दायरे में की गई कार्रवाई बताया गया। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस की स्थिति उत्पन्न हुई।

    घटना की जानकारी आसपास के क्षेत्र में फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते परिसर के बाहर भीड़ जमा हो गई और विरोध के स्वर तेज होने लगे। कुछ लोगों ने नारेबाजी करते हुए जांच टीम के प्रति नाराजगी जाहिर की। स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब अधिकारियों के वाहनों को रोकने की कोशिश की गई। हालांकि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जांच टीम को परिसर से सुरक्षित बाहर निकालने में काफी समय लगा। कुछ समय तक अधिकारी परिसर के भीतर ही रहे और बाद में पुलिस सुरक्षा के बीच वहां से रवाना हुए। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी और कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

    इस बीच मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। संबंधित परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। परिवार के प्रतिनिधियों ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की भूमिका हो सकती है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

    राजनीतिक आरोपों के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया। विभिन्न पक्ष इस घटनाक्रम को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। एक ओर जहां समर्थक इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को स्वतंत्र जांच का हिस्सा माना जा रहा है। फिलहाल आरोपों और दावों पर संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उससे जुड़े राजनीतिक आरोप अक्सर सार्वजनिक बहस का विषय बन जाते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के परिणामों का इंतजार करना आवश्यक होता है।

    रीवा में हुई इस घटना ने एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्रवाई, राजनीतिक प्रतिक्रिया और कानून-व्यवस्था के संतुलन को लेकर बहस को हवा दे दी है। आने वाले दिनों में मामले की आगे की जांच और संभावित प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम

    सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं जो फिल्मों की सफलता से इतर सेट पर घटित विवादित वाकयों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। अस्सी के दशक में भी एक ऐसा ही वाकया सामने आया था, जिसने तत्कालीन फिल्म जगत में भारी सनसनी मचा दी थी। यह पूरा मामला हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के सुपरस्टार विनोद खन्ना और दिग्गज अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से जुड़ा हुआ है। वर्ष उन्नीस सौ अस्सी में आई फिल्म ‘प्रेम धर्म’ की शूटिंग के दौरान एक बेहद संवेदनशील और अंतरंग दृश्य को फिल्माते समय ऐसा घटनाक्रम हुआ कि सेट पर मौजूद हर व्यक्ति हैरान रह गया।

    इस बहुचर्चित फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्मकार महेश भट्ट कर रहे थे, जो अपनी फिल्मों में दृश्यों को बेहद यथार्थवादी और भावुक बनाने के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के एक खास सीक्वेंस के लिए विनोद खन्ना और डिंपल कपाड़िया के बीच एक बेहद इंटीमेट और इमोशनल सीन शूट किया जाना तय हुआ था। इस दृश्य को अधिक वास्तविक रूप देने और कलाकारों की झिझक दूर करने के उद्देश्य से निर्देशक महेश भट्ट ने सेट की सभी लाइटों को काफी धीमा करवा दिया था और मुख्य कैमरा टीम को छोड़कर बाकी पूरी यूनिट को भी उस स्थान से थोड़ा दूर रहने के निर्देश दिए गए थे।

    जैसे ही कैमरे ने रोल करना शुरू किया, विनोद खन्ना ने स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार अपनी सह-कलाकार डिंपल कपाड़िया को चूमना शुरू कर दिया। दृश्य के पूरा होते ही निर्देशक महेश भट्ट ने लाउडस्पीकर पर ‘कट’ की घोषणा की, लेकिन विनोद खन्ना दृश्य की भावुकता और तीव्रता में इस कदर खो चुके थे कि उन्होंने निर्देशक की आवाज नहीं सुनी। ‘कट’ बोले जाने के बाद भी वे लगातार डिंपल कपाड़िया को किस करते रहे, जिससे सेट पर असहज स्थिति पैदा हो गई। डिंपल कपाड़िया को शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि उनके सह-कलाकार आखिर क्या कर रहे हैं।

    माहौल को अचानक गंभीर और अजीब होते देख निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी जगह से उठकर बेहद जोर-जोर से ‘कट’ बोलना शुरू किया, जिसके बाद कहीं जाकर विनोद खन्ना होश में आए और पीछे हटे। इस अप्रत्याशित और अचानक हुई घटना से युवा अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया पूरी तरह स्तब्ध और गहरे सदमे में आ गईं। उन्हें विनोद खन्ना के इस अनपेक्षित व्यवहार पर भारी गुस्सा भी आया और वे तुरंत सेट से भागकर सीधे अपने मेकअप रूम की तरफ चली गईं।

    अपने स्वाभिमान और गरिमा को ठेस पहुंचने से आहत अभिनेत्री ने मेकअप रूम के भीतर पहुंचकर खुद को अंदर से पूरी तरह बंद कर लिया और बाहर आने से साफ मना कर दिया। सेट पर पैदा हुए इस गंभीर तनाव को देखते हुए निर्देशक महेश भट्ट ने तुरंत स्थिति को संभाला और वे स्वयं डिंपल कपाड़िया के कमरे के बाहर पहुंचे। उन्होंने अभिनेत्री से इस पूरी घटना के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी और उन्हें आश्वस्त किया कि यह केवल एक भूल थी। दूसरी तरफ, सुपरस्टार विनोद खन्ना भी अपनी इस अनियंत्रित हरकत के बाद बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे थे।

    बॉलीवुड के गलियारों में आज भी इस किस्से को संवेदनशीलता के साथ याद किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि चकाचौंध भरी फिल्मों के निर्माण के दौरान कई बार कलाकारों के लिए स्थितियां कितनी असहज और चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। हालांकि, बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सुलझा लिया गया था, लेकिन सेंसर बोर्ड की कैंची और सेट पर मचे इस बवाल के कारण यह फिल्म और इससे जुड़ा यह विवाद हमेशा-कहमेशा के लिए फिल्मी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

  • मोहनजोदड़ो की 'डांसिंग गर्ल' प्रतिमा के चित्रण पर छिड़ा विवाद, चौतरफा आलोचना के बाद अब मूल तस्वीर ही छापेगा NCERT

    मोहनजोदड़ो की 'डांसिंग गर्ल' प्रतिमा के चित्रण पर छिड़ा विवाद, चौतरफा आलोचना के बाद अब मूल तस्वीर ही छापेगा NCERT

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नौवीं कक्षा की नई पाठ्यपुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की ऐतिहासिक कलाकृति ‘डांसिंग गर्ल’ (नृत्य करती युवती) के चित्रण को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, परिषद द्वारा कला शिक्षा की नई पुस्तक ‘मधुरिमा’ के पहले अध्याय ‘कला का इतिहास’ में मोहनजोदड़ो से प्राप्त इस सुप्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा के वास्तविक रूप में बदलाव करते हुए उसके बिना कपड़ों वाले धड़ को छायांकन (शेडिंग) के जरिए ढका हुआ दिखाया गया था। ऐतिहासिक धरोहर के इस बदले हुए रूप की शिक्षाविदों, पुरातत्वविदों और इतिहासकारों ने तीखी आलोचना की थी। चौतरफा दबाव और विरोध के बीच अब एनसीईआरटी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पाठ्यपुस्तक में इस मूर्ति की मूल और वास्तविक तस्वीर को ही प्रकाशित करने का अंतिम फैसला लिया है।

    इस पूरे मामले पर एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश सकलानी ने एक साक्षात्कार के दौरान आधिकारिक पुष्टि की है। जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या परिषद कक्षा नौ की कला विषय की पुस्तक में संशोधित और विवादित तस्वीर को हटाकर मूल कांस्य प्रतिमा का चित्र शामिल करेगी, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से ‘हां’ में जवाब दिया। उल्लेखनीय है कि इस नई पुस्तक में प्रतिमा के ऊपरी हिस्से के मूल स्वरूप को इस तरह बदला गया था कि शरीर के वे हिस्से साफ दिखाई नहीं दे रहे थे जो वास्तविक पुरातात्विक खोज में नजर आते हैं। इसके विपरीत, परिषद द्वारा ही तैयार की गई कक्षा छठी की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में इसी ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर को उसके मूल और वास्तविक ऐतिहासिक स्वरूप के बेहद करीब दिखाया गया है, जिसने इस विसंगति को और उजागर कर दिया।

    कक्षा छठी की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक समिति के पूर्व प्रमुख रहे माइकल डैनिनो ने इस बदलाव पर अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने खुलासा किया कि इससे पहले उन्हें यह तर्क दिया गया था कि इस प्राचीन प्रतिमा का नग्न स्वरूप छोटे बच्चों की ‘उम्र के अनुसार उपयुक्त नहीं’ है। डैनिनो के अनुसार, उनकी पूरी टीम इस तर्क से असहमत थी और जब उन्होंने कक्षा छठी के शिक्षकों से इस संबंध में बात की, तो उन सभी का कहना था कि क्लासरूम में इस ऐतिहासिक कलाकृति को लेकर कभी कोई समस्या या असहजता नहीं रही। डैनिनो ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि कलाकृति की नग्नता को अनुपयुक्त मानना वास्तव में विक्टोरियन युग की पुरानी और संकीर्ण औपनिवेशिक सोच का हिस्सा है, जबकि वर्तमान में भारतीय शिक्षा व्यवस्था को इन्हीं औपनिवेशिक प्रभावों से मुक्त करने की बातें की जा रही हैं।

    जानकारों का मानना है कि यदि भारतीय कला पर आधारित किसी गंभीर अध्याय में भी किसी ऐतिहासिक कलाकृति को उसके वास्तविक रूप और सही शारीरिक अनुपात में नहीं दिखाया जा सकता, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर समस्या है। इतिहासकारों ने इस बदलाव की तुलना मध्य युग की उस घटना से की है जब चर्च ने अपनी संकीर्ण सोच के कारण ‘डेविड’ की विश्वप्रसिद्ध सुंदर प्रतिमा पर अंजीर का पत्ता जोड़कर उसे गलत रूप में प्रस्तुत किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऐतिहासिक साक्ष्य या कलाकृति की तस्वीरों में इस तरह का मनमाना बदलाव करना एक तरह से ‘नकली कलाकृति’ बनाने जैसा है, जो यह साबित करता है कि जिम्मेदार संस्थाओं में इतिहास और पुरातत्व को प्रस्तुत करने की समझ बेहद कम है।

    ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, यह ‘डांसिंग गर्ल’ मोहनजोदड़ो से प्राप्त लगभग २६०० ईसा पूर्व की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कांस्य प्रतिमा है। सिंधु घाटी सभ्यता की इस अद्भुत कलाकृति को ‘लॉस्ट-वैक्स तकनीक’ (मोम पिघलाकर धातु ढालने की विधि) से बनाया गया था, जो तकनीक आज भी भारत के पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से प्रचलित है। पुरातत्वविदों के अनुसार, कमर पर हाथ रखकर खड़े होने की यह विशिष्ट मुद्रा राजस्थान के हड़प्पा कालीन स्थल ‘भिरड़ाना’ से मिले मिट्टी के बर्तनों के टुकड़ों पर भी अंकित मिली है, जो यह दर्शाती है कि इस मुद्रा का प्राचीन काल में कोई गहरा सांस्कृतिक और कलात्मक महत्व था।

  • ‘राहुल को बलि का बकरा बना रही CPI(M)’: गले लगाने वाले बयान पर बढ़ी सियासी तकरार, कांग्रेस ने किया पलटवार

    ‘राहुल को बलि का बकरा बना रही CPI(M)’: गले लगाने वाले बयान पर बढ़ी सियासी तकरार, कांग्रेस ने किया पलटवार

    नई दिल्ली । विपक्षी राजनीति के केंद्र में एक बार फिर कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक कथित वायरल ऑडियो को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इस विवाद ने न केवल केरल की राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि विपक्षी एकता को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विवाद की शुरुआत उस कथित ऑडियो क्लिप से हुई, जिसमें राहुल गांधी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि वह केरल के वरिष्ठ वामपंथी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को गले नहीं लगाएंगे क्योंकि उनके साथ उनकी राजनीतिक लड़ाई जारी है। ऑडियो सामने आने के बाद इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने लगीं, जिसके बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

    मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी राजनीति व्यक्तिगत संबंधों या प्रतीकात्मक प्रदर्शनों पर आधारित नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक विमर्श विचारधारा और नीतियों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विपक्षी नेताओं के बीच सम्मानजनक संबंध बनाए रखना लोकतांत्रिक राजनीति की आवश्यक शर्त है।

    दूसरी ओर कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए CPI(M) पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि हालिया चुनावी पराजय के बाद वाम दल अपनी राजनीतिक चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी को निशाना बना रहे हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि वास्तविक मुद्दों पर आत्ममंथन करने के बजाय राहुल गांधी के बयान को विवाद का रूप दिया जा रहा है।

    कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी को अनावश्यक रूप से विवाद के केंद्र में लाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी राजनीति में राहुल गांधी की बढ़ती भूमिका से कुछ राजनीतिक दल असहज महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, व्यक्तिगत हमलों से राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं बदला जा सकता और जनता के बीच स्वीकार्यता ही किसी भी नेता की सबसे बड़ी ताकत होती है।

    इस पूरे विवाद के दौरान दोनों दलों ने अपने-अपने राजनीतिक तर्कों को सामने रखा है। कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, जबकि CPI(M) नेताओं ने सम्मानजनक राजनीतिक व्यवहार और वैचारिक स्पष्टता पर जोर दिया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी सहयोग और राज्य स्तरीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल जैसे राज्यों में कांग्रेस और CPI(M) सीधे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कई मुद्दों पर दोनों दल एक साझा मंच पर दिखाई देते रहे हैं। ऐसे में नेताओं के बयानों को लेकर पैदा होने वाले विवाद अक्सर व्यापक राजनीतिक संदेश भी देते हैं और गठबंधन राजनीति की जटिलताओं को उजागर करते हैं।

    फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी के दौर में बदल चुका है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के रुख और प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर केवल केरल की राजनीति तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि व्यापक विपक्षी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

  • 'भारत विरोधी' आफरीदी संग नजर आए मुनव्वर फारूकी, दुबई मुलाकात का वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर कॉमेडियन की जमकर ट्रोलिंग

    'भारत विरोधी' आफरीदी संग नजर आए मुनव्वर फारूकी, दुबई मुलाकात का वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर कॉमेडियन की जमकर ट्रोलिंग

    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत के मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन और रियलिटी शो विजेता मुनव्वर फारूकी इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। इंटरनेट पर उनका एक ताजा वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वे पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और आक्रामक ऑलराउंडर शाहिद आफरीदी के साथ नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आते ही भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा है और लोग कॉमेडियन को उनके इस कदम के लिए बुरी तरह से आड़े हाथों ले रहे हैं।

    यह पूरी घटना संयुक्त अरब अमीरात के दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की बताई जा रही है, जहां दोनों की अचानक मुलाकात हुई थी। वायरल हो रहे वीडियो के दृश्यों में देखा जा सकता है कि पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद आफरीदी अपने मोबाइल फोन पर किसी अन्य व्यक्ति से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत कर रहे हैं। इसी दौरान उनके ठीक पीछे मुनव्वर फारूकी खड़े हुए दिखाई देते हैं, जो काफी सहज और मुस्कुराते हुए फ्रेम में नजर आ रहे हैं। इस संक्षिप्त मुलाकात के फुटेज जैसे ही विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड हुए, वैसे ही इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं।

    भारतीय खेल प्रशंसकों और आम नागरिकों के बीच शाहिद आफरीदी की छवि लगातार विवादों से घिरी रही है। आफरीदी अक्सर विभिन्न वैश्विक मंचों और सार्वजनिक बयानों में भारत, भारतीय नीतियों और देश के अंदरूनी मामलों के खिलाफ जहर उगलते हुए नजर आते हैं। उनके कई पुराने और नए बयान भारतीय नागरिकों को आहत करने वाले रहे हैं, जिसके कारण भारत में उन्हें लेकर भारी नाराजगी और विरोध की भावना रहती है। ऐसे में एक लोकप्रिय भारतीय हस्ती का उनके साथ इस तरह दोस्ताना अंदाज में दिखना कई लोगों को रास नहीं आ रहा है।

    सोशल मीडिया पर मुनव्वर फारूकी को ट्रोल करने वाले यूजर्स लगातार उनके इस रवैए पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो व्यक्ति लगातार भारत के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करता है, उसके साथ भारतीय कलाकारों का इस तरह का जुड़ाव देश की भावनाओं का अपमान है। एक्स और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों पर नेटिजंस मुनव्वर को देशभक्ति और अपनी प्राथमिकताओं को लेकर नसीहत दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करार दिया है, तो कुछ इसे केवल पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं।

    मुनव्वर फारूकी के करियर और विवादों का पुराना नाता रहा है, लेकिन इस बार का विवाद सीधे तौर पर राष्ट्रीय भावनाओं से जुड़ा होने के कारण अधिक तूल पकड़ता जा रहा है। खेल और मनोरंजन के वैश्विक गढ़ दुबई में हुई इस मुलाकात ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच के संवेदनशील सांस्कृतिक और राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। आलोचकों का मानना है कि भारतीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय दौरों पर ऐसी हस्तियों के साथ दिखने से बचना चाहिए जिनकी पहचान भारत विरोधी बयानों से जुड़ी हो।

    फिलहाल इस पूरे मामले पर और सोशल मीडिया पर हो रही चौतरफा फजीहत को लेकर मुनव्वर फारूकी या उनकी टीम की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन इंटरनेट पर इस वीडियो को लेकर शुरू हुआ विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है और नेटिजंस लगातार उनके इस वीडियो को शेयर कर अपनी नाराजगी दर्ज करा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस भारी विरोध का मुनव्वर के आगामी शोज और उनकी फैन फॉलोइंग पर क्या असर पड़ता है।

  • महिला टी20 विश्व कप: पाकिस्तान के खिलाफ 'नो हैंडशेक' विवाद पर कप्तान हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान, कहा- हमारा पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर

    महिला टी20 विश्व कप: पाकिस्तान के खिलाफ 'नो हैंडशेक' विवाद पर कप्तान हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान, कहा- हमारा पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर


    नई दिल्ली।
    महिला टी20 विश्व कप में पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले महामुकाबले से पहले भारतीय खेमे में रणनीतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। इस हाई-प्रोफाइल मैच की संवेदनशीलता और मैदान के बाहर चल रही चर्चाओं के बीच भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। इस दौरान मीडिया जगत में लंबे समय से चर्चा का विषय बनी ‘नो हैंडशेक नीति’ को लेकर कप्तान से तीखे सवाल पूछे गए, जिस पर उन्होंने बेहद परिपक्व और कूटनीतिक रुख अपनाया।

    हालिया क्रिकेट इतिहास पर नजर डालें तो पुरुष एशिया कप 2025 के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए विभिन्न मुकाबलों में एक अलग तरह की कड़ाहट देखी गई है। राइजिंग स्टार्स एशिया कप, अंडर-19 एशिया कप और पिछले महिला विश्व कप के दौरान भी भारतीय खिलाड़ियों द्वारा पाकिस्तानी टीम के साथ मैच के बाद हाथ न मिलाने का चलन सुर्खियों में रहा था। पिछले आईसीसी टूर्नामेंट में खुद हरमनप्रीत कौर और पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना के बीच हाथ न मिलाने की घटना सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी, जिसके बाद से दोनों देशों के खेल प्रेमियों और विश्लेषकों के बीच इस नीति को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।

    मैच की पूर्व संध्या पर आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब कप्तान हरमनप्रीत कौर से इस विशिष्ट व्यवहार और आगामी मैच में इसकी पुनरावृत्ति को लेकर सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने किसी भी प्रकार के नए विवाद को जन्म देने से साफ इनकार कर दिया। हरमनप्रीत ने नीति के अस्तित्व या उसकी वजहों पर कोई भी टिप्पणी करने से परहेज करते हुए सीधे तौर पर खेल को प्राथमिकता दी। उन्होंने बेहद पेशेवर अंदाज में कहा कि भारतीय टीम यहां केवल क्रिकेट खेलने के उद्देश्य से आई है और ड्रेसिंग रूम के भीतर खिलाड़ियों के बीच मैदान से इतर की किसी भी दूसरी चीज या विवाद पर कोई चर्चा नहीं होती है।

    भारतीय कप्तान ने इस ऐतिहासिक मुकाबले से जुड़े मानसिक दबाव को भी स्वीकार किया। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि एक प्रशंसक के रूप में भी उन्होंने हमेशा भारत-पाकिस्तान मैच के असाधारण दबाव को महसूस किया है। अब जबकि वह खुद मैदान पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और टीम की कमान संभाल रही हैं, तो जिम्मेदारी और दबाव का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद, टीम प्रबंधन की ओर से खिलाड़ियों को यही सलाह दी गई है कि वे इस मुकाबले को एक सामान्य क्रिकेट मैच की तरह लें और मैदान पर खेल का पूरा आनंद उठाएं ताकि दबाव उनके प्रदर्शन पर हावी न हो सके।

    रणनीतिक दृष्टिकोण से भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। हरमनप्रीत कौर का मानना है कि किसी भी बड़े आईसीसी टूर्नामेंट में पहला मैच पूरी टीम का लय और आगे का माहौल तय करता है। भारतीय टीम पिछले एकदिवसीय विश्व कप की तरह ही इस बार भी सकारात्मक और आक्रामक सोच के साथ अपने अभियान की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। टीम का प्राथमिक लक्ष्य इस कड़े मुकाबले को जीतकर टूर्नामेंट में अपनी स्थिति को मजबूत करना और अंक तालिका में बढ़त हासिल करना है।

    सांख्यिकीय आंकड़ों की बात करें तो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय महिला टीम का पलड़ा पाकिस्तान पर हमेशा से भारी रहा है। दोनों देशों के बीच अब तक खेले गए कुल मुकाबलों में भारत ने 13 बार जीत का स्वाद चखा है, जबकि पाकिस्तानी टीम केवल तीन बार ही जीत दर्ज करने में सफल हो सकी है। वहीं, अगर सिर्फ महिला टी20 विश्व कप के इतिहास को देखें तो वहां भी भारतीय टीम 6-2 की बड़ी बढ़त के साथ मानसिक रूप से मजबूत स्थिति में है। हालिया फॉर्म भी भारत के पक्ष में है, जहां टीम इंडिया लगातार तीन मैचों में पाकिस्तान को शिकस्त दे चुकी है। इस मजबूत रिकॉर्ड के साथ भारतीय टीम मैदान पर अपनी बादशाहत बरकरार रखने उतरेगी, जबकि पाकिस्तान की टीम इस बड़े मंच पर भारत के खिलाफ अपनी हार के सिलसिले को तोड़ने का प्रयास करेगी।

  • उदय शेट्टी और मजनू भाई के ऑरा पर नाना पाटेकर के बयान का सच; अक्षय कुमार की बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

    उदय शेट्टी और मजनू भाई के ऑरा पर नाना पाटेकर के बयान का सच; अक्षय कुमार की बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का आधिकारिक ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म की विशाल स्टारकास्ट के बीच दर्शकों और प्रशंसकों ने पहले दो भागों के मुख्य आकर्षण रहे उदय शेट्टी यानी नाना पाटेकर और मजनू भाई यानी अनिल कपूर को काफी मिस किया। इसी बीच इंटरनेट पर एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल होने लगा, जिसमें दावा किया गया कि नाना पाटेकर ने इस तीसरी किस्त में अपनी अनुपस्थिति को लेकर फिल्म मेकर्स पर तीखा तंज कसा है। वायरल पोस्ट में लिखा था कि आप 25 एक्टर्स को तो फिल्म में ले लोगे, लेकिन उदय शेट्टी और मजनू भाई जैसा ऑरा कहां से लाओगे। इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई, लेकिन अब इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ चुकी है।

    तथ्यों की जांच करने पर पता चला है कि इंटरनेट पर घूम रहा यह विवादित पोस्ट पूरी तरह से फर्जी और एआई जनरेटेड है। अभिनेता नाना पाटेकर ने ‘वेलकम टू द जंगल’ या उसकी स्टारकास्ट को लेकर ऐसा कोई भी कमेंट या पोस्ट अपने किसी भी सोशल मीडिया हैंडल पर साझा नहीं किया है। तकनीकी उपकरणों की मदद से तैयार किए गए इस झूठे स्क्रीनशॉट ने कुछ ही घंटों में प्रशंसकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी, जिसे अब पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान खुद मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार ने इस विषय पर बात की और स्वीकार किया कि टीम ने नाना पाटेकर और अनिल कपूर को बहुत मिस किया। अक्षय कुमार ने स्पष्ट किया कि इस बार स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार कहानी में बदलाव किए गए हैं।

    फिल्म की नई पटकथा के अनुसार, इस बार उदय और मजनू भाई के भाइयों की एंट्री कहानी में दिखाई गई है। इन नए किरदारों को बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी और अरशद वारसी निभा रहे हैं। सुनील शेट्टी जहां उदय के भाई की भूमिका में नजर आएंगे, वहीं अरशद वारसी ने मजनू के भाई का किरदार निभाया है। फिल्म की विशाल स्टारकास्ट में सुनील शेट्टी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, रवीना टंडन, लारा दत्ता, फरीदा जलाल, जॉनी लीवर, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, राजपाल यादव और कृष्णा अभिषेक जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं।

    रिलीज हुए ट्रेलर की कहानी की बात करें तो इसमें दिखाया गया है कि एक फ्लॉप एक्टर अपने डूबते करियर को बचाने के लिए एक सुपरहिट एक्ट्रेस के साथ फिल्म साइन करता है। इस काल्पनिक फिल्म की पूरी कास्ट और क्रू शूटिंग के सिलसिले में एक सुदूर गांव में जाती है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब गांव वाले इस फिल्मी क्रू को सचमुच की भारतीय सेना समझ बैठते हैं और उनसे गुंडा गैंग के लीडर जैकी श्रॉफ से अपनी सुरक्षा करने की गुहार लगाते हैं। ट्रेलर के अनुसार, इस नकली फिल्म का बजट 2000 करोड़ रुपये दिखाया गया है, जो पूरी कहानी में हास्य और भ्रम की स्थितियां पैदा करता है।

    यह फिल्म सुपरहिट फ्रेंचाइजी ‘वेलकम’ का तीसरा पार्ट है। इस सिलसिले की पहली फिल्म साल 2007 में आई थी, जिसमें अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, नाना पाटेकर, अनिल कपूर और परेश रावल मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद साल 2015 में इसका दूसरा भाग ‘वेलकम बैक’ रिलीज हुआ, जिसमें जॉन अब्राहम और श्रुति हासन के साथ नाना पाटेकर और अनिल कपूर की जोड़ी बरकरार रही थी। अब इस फ्रेंचाइजी का यह तीसरा भाग नए किरदारों और नए ट्विस्ट के साथ 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके प्रति दर्शकों में भारी उत्सुकता बनी हुई है।

  • दुनिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा परियोजना रुकी, तसलीमा नसरीन ने पूछा- अल्पसंख्यकों के अधिकारों का क्या होगा?

    दुनिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा परियोजना रुकी, तसलीमा नसरीन ने पूछा- अल्पसंख्यकों के अधिकारों का क्या होगा?

    नई दिल्ली । बांग्लादेश के गाइबांधा जिले में निर्माणाधीन भगवान राम की विशाल प्रतिमा पर रोक लगाए जाने के बाद देश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पलाशबाड़ी उपजिला स्थित श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में चल रही इस परियोजना को प्रशासनिक स्तर पर रोक दिए जाने से स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल बना हुआ है और विभिन्न सामाजिक तथा धार्मिक समूहों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    मंदिर परिसर में प्रस्तावित प्रतिमा को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद जारी था। स्थानीय स्तर पर कुछ संगठनों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा था, जबकि मंदिर प्रबंधन और समर्थक इसे धार्मिक आस्था तथा सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय बता रहे थे। इसी बीच अधिकारियों द्वारा निर्माण गतिविधियों को रोकने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

    इस घटनाक्रम पर बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांत का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि देश में विभिन्न धार्मिक समुदायों को अपने पूजा स्थलों के निर्माण और विस्तार का अधिकार प्राप्त है, तो अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक गतिविधियों पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक और कानून आधारित व्यवस्था में सभी नागरिकों को समान धार्मिक अधिकार मिलना चाहिए।

    तसलीमा नसरीन ने यह भी चिंता जताई कि किसी धार्मिक परियोजना के विरोध में धमकियों, उकसावे या सामाजिक दबाव का माहौल बनना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, किसी भी विवाद का समाधान संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए, न कि सामाजिक तनाव या टकराव के जरिए। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और उनके धार्मिक अधिकारों की रक्षा किसी भी आधुनिक राष्ट्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

    मामले ने इसलिए भी अधिक ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि संबंधित क्षेत्र में अतीत में मंदिरों और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में निर्माण कार्य पर रोक लगने के बाद स्थानीय हिंदू समुदाय के बीच चिंता और असुरक्षा की भावना बढ़ने की बात भी कही जा रही है। समुदाय के प्रतिनिधियों का मानना है कि धार्मिक आस्था से जुड़ी परियोजनाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से देखा जाना चाहिए।

    इस मुद्दे पर कुछ अन्य सार्वजनिक हस्तियों और सामाजिक विश्लेषकों ने भी अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि धार्मिक विविधता किसी भी समाज की ताकत होती है और विभिन्न समुदायों के पूजा स्थलों के प्रति समान सम्मान बनाए रखना सामाजिक सौहार्द के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बहुसांस्कृतिक समाजों में सहिष्णुता और परस्पर सम्मान ही स्थायी शांति का आधार बनते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक प्रतिमा या निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और सामाजिक समावेशन जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक निर्णय, स्थानीय संवाद और कानूनी प्रक्रियाएं इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक के कारण स्थिति पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है। इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश में धार्मिक अधिकारों और सामाजिक संतुलन से जुड़े प्रश्नों को एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।

  • रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

    रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के प्रमुख संगठन इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। अभिनेता रणवीर सिंह के फिल्म ‘डॉन 3’ को अचानक छोड़ने के बाद मनोरंजन उद्योग में शुरू हुई तीखी बहस के बीच अशोक पंडित ने साफ किया है कि किसी भी कलाकार की व्यावसायिक सफलता और उसके कानूनी अनुबंधों को अलग-अलग चश्मे से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का मकसद केवल फिल्म उद्योग के पेशेवर ताने-बाने की रक्षा करना है।

    हाल ही में वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज फेडरेशन द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ जारी किए गए असहयोग निर्देश (नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव) को वापस लिए जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया था। इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हुए अशोक पंडित ने एक मीडिया बातचीत में बताया कि प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह को उस दौर में अपनी आगामी फिल्म के लिए साइन किया था, जब उनका हालिया स्टारडम वापस नहीं आया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब अभिनेता की लगातार चार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थीं, तब मेकर्स ने उन पर भरोसा जताते हुए ‘डॉन 3’ के लिए बहुत पहले ही अनुबंधित कर लिया था।

    अशोक पंडित के अनुसार, सिनेमाई दुनिया में जब किसी भी कलाकार का करियर ऊंचाइयों को छूने लगता है, तब भी उसे उद्योग के पुराने रिश्तों और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले निर्माताओं को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बेहद सुखद बात है कि अभिनेता की हालिया फिल्म सफल रही है और वे वर्तमान में एक बेहद मजबूत स्थिति में काम कर रहे हैं, लेकिन नैतिकता का तकाजा यही कहता है कि विपरीत परिस्थितियों में हाथ थामने वाले लोगों के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। फिल्म उद्योग पूरी तरह से आपसी विश्वास, लिखित वादों और समय पर किए गए कमिटमेंट के बलबूते ही संचालित होता है।

    बॉलीवुड में स्टारडम के बदलते स्वरूप पर बेहद बेबाकी से टिप्पणी करते हुए फिल्म समीक्षक और संगठन प्रमुख ने कहा कि इस फिल्म नगरी ने समय-समय पर कई ऐतिहासिक और विशाल स्टारडम देखे हैं। उन्होंने महान अभिनेता राजेश खन्ना, शाहरुख खान और सलमान खान के दौर के अभूतपूर्व स्टारडम का उदाहरण देते हुए कहा कि दर्शकों का असीम प्यार निश्चित रूप से अनमोल और सर्वोपरि होता है, परंतु व्यावसायिक प्रोफेशनलिज्म ही इस पूरी इंडस्ट्री की असली और मजबूत बुनियाद है। जनता फिल्मों के लिए तालियां बजाती है और सफलता का जश्न मनाती है, लेकिन फिल्म निर्माण के पर्दे के पीछे आपसी भरोसा सबसे ज्यादा मायने रखता है।

    इसके साथ ही अशोक पंडित ने फिल्म निर्देशक आदित्य धर और उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ की जमकर तारीफ की। उनका मानना है कि इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने हिंदी फिल्म उद्योग को एक बहुत ही जरूरी और नया जीवनदान दिया है। उन्होंने ‘धुरंधर’ को बिजनेस के लिहाज से एक बेहतरीन ऑक्सीजन बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी शानदार फिल्म है जिसने दर्शकों को दोबारा भारी तादाद में सिनेमाघरों तक खींचने का काम किया है। हालांकि, फिल्म की इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाने के साथ ही उन्होंने पुरजोर तरीके से यह स्पष्ट किया कि ‘धुरंधर’ की सफलता को ‘डॉन 3’ के विवाद के साथ मिलाकर बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए।

    अपनी बात को विराम देते हुए आईएफटीडीए के अध्यक्ष ने कहा कि दो अलग-अलग मामलों को आपस में मिलाने से केवल भ्रम और जटिलताएं पैदा होती हैं। फेडरेशन का एकमात्र और व्यापक उद्देश्य फिल्म उद्योग के पूरे इकोसिस्टम को सुरक्षित रखना और छोटे-बड़े सभी हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि संस्था का किसी भी अभिनेता या निर्माता से कोई व्यक्तिगत झगड़ा या शिकायत नहीं है, बल्कि उनकी एकमात्र चिंता यह सुनिश्चित करना है कि देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर काम करने का एक पारदर्शी, पेशेवर और भरोसेमंद माहौल हमेशा कायम रहे।