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  • शिमला के राम मंदिर में ‘निकाह’ को लेकर विवाद, हिंदू संगठनों का विरोध

    शिमला के राम मंदिर में ‘निकाह’ को लेकर विवाद, हिंदू संगठनों का विरोध


    शिमला। शिमला में राम मंदिर परिसर में प्रस्तावित एक निकाह समारोह को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठनों ने मंदिर के हॉल में मुस्लिम परिवार के विवाह समारोह की बुकिंग पर आपत्ति जताते हुए विरोध की चेतावनी दी है। यह मामला पहले से चर्चा में रहे संजौली मस्जिद विवाद के बाद सामने आया है, जिससे शहर में धार्मिक बहस तेज हो गई है।

    हॉल बुकिंग से शुरू हुआ विवाद

    राम बाजार स्थित मंदिर के हॉल में 11 अप्रैल को प्रस्तावित निकाह की जानकारी सामने आने के बाद हिंदू संघर्ष समिति ने विरोध दर्ज कराया।

    समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में इस तरह का आयोजन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। संगठन ने मंदिर प्रबंधन से कार्यक्रम रद्द करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

    सूद सभा की बैठक आज

    मंदिर परिसर का संचालन करने वाली सूद सभा के अध्यक्ष राजीव सूद ने बताया कि इस मुद्दे पर मंगलवार को आपात बैठक बुलाई गई है।

    उन्होंने कहा कि सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हुए निर्णय लिया जाएगा। उनके अनुसार पिछले पांच वर्षों में 15 से अधिक मुस्लिम परिवारों के निकाह इसी हॉल में हो चुके हैं और परिसर में मांस, मछली व मदिरा पर पहले से प्रतिबंध है।

    पहले भी हो चुका है विवाद

    अक्टूबर 2024 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिर परिसर में साईं बाबा की मूर्ति पर आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। इसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा।

    शहर का प्रमुख धार्मिक केंद्र

    राम बाजार में स्थित यह मंदिर शिमला का प्रमुख धार्मिक और सामाजिक स्थल माना जाता है। मंदिर की बहुमंजिला इमारत के ऊपरी तल पर भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं, जबकि नीचे बने बड़े हॉल में वर्षों से सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।
    अब सबकी नजर सूद सभा की बैठक पर है, जिसमें तय होगा कि प्रस्तावित निकाह समारोह को अनुमति दी जाएगी या नहीं।

  • ‘समोसा’ विवाद के पीछे सियासी दरार? AAP में खटपट की इनसाइड स्टोरी

    ‘समोसा’ विवाद के पीछे सियासी दरार? AAP में खटपट की इनसाइड स्टोरी


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी में उभरते युवा चेहरे माने जाने वाले राघव चड्ढा इन दिनों अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाने के साथ-साथ संसद में उनकी भूमिका भी सीमित कर दी है। कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले चड्ढा अब पार्टी के भीतर अलग-थलग नजर आ रहे हैं।

    आतिशी और सौरभ भारद्वाज का हमला

    शुक्रवार को आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने चड्ढा पर तीखा हमला बोला। आरोप है कि विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर चड्ढा ने हस्ताक्षर नहीं किए।

    आतिशी ने सवाल उठाया कि जब विपक्ष एकजुट था तो चड्ढा पीछे क्यों हटे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद में अहम मुद्दों पर वे चुप रहे।

    ‘समोसा’ टिप्पणी पर भी विवाद

    पार्टी नेताओं ने चड्ढा द्वारा संसद में उठाए गए मुद्दों पर भी तंज कसा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि देश के बड़े मुद्दों की बजाय चड्ढा हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत और जूस के पैकेट जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे थे। हालांकि चड्ढा ने इन पर बने मीम्स का स्वागत किया था, लेकिन पार्टी ने इसे गंभीरता की कमी बताया।

    पुरानी नाराजगी भी बनी वजह

    आंतरिक असंतोष की जड़ें 2024 तक जाती बताई जा रही हैं, जब कथित आबकारी मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा आंख के ऑपरेशन के लिए लंदन में थे। इस पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि उस समय वे पार्टी के साथ सक्रिय क्यों नहीं दिखे।

    पंजाब की राजनीति का असर

    2022 में पंजाब में जीत के बाद चड्ढा को ‘सुपर सीएम’ कहा जाने लगा था, जिससे स्थानीय नेताओं में असंतोष बढ़ा। बाद में पार्टी नेतृत्व ने पंजाब पर सीधा नियंत्रण मजबूत किया और चड्ढा की भूमिका सीमित होती चली गई।

    चड्ढा की सफाई

    पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने वीडियो जारी कर कहा कि जनता के मुद्दे उठाना गलत नहीं है और उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने संकेत दिया कि उन्हें बोलने से रोका जा रहा है। उनकी जगह राज्यसभा में उप-नेता के तौर पर अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया है।

    क्या BJP जॉइन करेंगे?

    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चड्ढा भविष्य में भारतीय जनता पार्टी का रुख कर सकते हैं। भगवंत मान ने उन्हें ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ बताया, जबकि दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि चड्ढा को खुद तय करना होगा कि उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा।

    हालांकि फिलहाल चड्ढा की ओर से किसी पार्टी में जाने को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने सियासी हलकों में अटकलों को तेज कर दिया है।

  • वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, TMC की आपत्तियों पर कहा—‘ऐसा हर बार होता है’

    वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, TMC की आपत्तियों पर कहा—‘ऐसा हर बार होता है’

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा होना कोई नई बात नहीं है, यह प्रक्रिया पहले भी होती रही है। अदालत ने साथ ही कहा कि अगर किसी नाम को लेकर आपत्ति है तो चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

    फॉर्म-6 को लेकर TMC ने जताई थी आपत्ति

    तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म-6 जमा किए हैं। फॉर्म-6 का उपयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संसदीय क्षेत्र बदलने के लिए किया जाता है। उनका कहना था कि पूरक सूची आने के बाद भी नए फॉर्म स्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा—पहली बार नहीं

    सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की कि “ऐसा हर बार होता है, इसमें कुछ असामान्य नहीं है।” अदालत ने कहा कि किसी भी नए नाम पर आपत्ति दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध है और संबंधित पक्ष चुनाव आयोग से संपर्क कर सकता है।

    चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्ष

    भारत निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि नियमों के अनुसार उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति हाल ही में 18 वर्ष का हुआ है तो उसे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार है।

    अदालत ने प्रक्रिया समझने की दी नसीहत

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव उसी सूची के आधार पर होते हैं, जो तय तिथि तक अपडेट होती है।

    अदालत ने संकेत दिया कि सभी आपत्तियों पर निर्णय 7 अप्रैल तक लिया जाएगा।

  • 81 प्रतिशत छूट वाला टेंडर बना बहस का मुद्दा एक्सपर्ट बोले इतनी कम कीमत पर जांच संभव नहीं

    81 प्रतिशत छूट वाला टेंडर बना बहस का मुद्दा एक्सपर्ट बोले इतनी कम कीमत पर जांच संभव नहीं

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी जांच को लेकर जारी एक बड़े टेंडर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी National Health Mission द्वारा जारी इस टेंडर में भोपाल की साइंस हाउस मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को ठेका दिया गया है जिसने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना की दरों से 81 दशमलव 2 प्रतिशत कम कीमत पर बोली लगाकर बाजी मार ली

    इसका सीधा अर्थ यह है कि जिस जांच की कीमत सामान्य रूप से 100 रुपए मानी जाती है वह अब लगभग 18 रुपए में की जाएगी यही बिंदु पूरे विवाद का केंद्र बन गया है क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पैथोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इतनी कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण जांच कर पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है

    प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 से सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवाओं को निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित करना शुरू किया था इसी क्रम में 12 फरवरी 2026 को नया टेंडर जारी किया गया जो हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित है इस मॉडल में छोटे स्वास्थ्य केंद्रों से सैंपल लेकर जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में जांच की जाती है जिससे लागत और समय दोनों में कमी लाने का प्रयास किया जाता है

    टेंडर प्रक्रिया के अनुसार CGHS की दरों को आधार मूल्य माना गया और जो कंपनी सबसे अधिक छूट देगी उसे ठेका दिया जाना तय था 9 मार्च 2026 को टेंडर खुलने पर साइंस हाउस ने 81 प्रतिशत से अधिक छूट देकर पहला स्थान हासिल किया और उसे लगभग 36 करोड़ रुपए सालाना यानी पांच साल में करीब 180 करोड़ रुपए का ठेका मिल गया

    हालांकि इस निर्णय के बाद विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पद्माकर त्रिपाठी का कहना है कि CGHS की दरें पहले से ही बाजार मूल्य से काफी कम होती हैं ऐसे में यदि कोई कंपनी इन दरों से भी 80 प्रतिशत से अधिक छूट देती है तो यह सवाल खड़े करता है कि जांच की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी

    वे उदाहरण देते हुए बताते हैं कि कम्प्लीट ब्लड काउंट जैसी सामान्य जांच बाजार में 300 से 400 रुपए तक होती है जबकि CGHS दर लगभग 270 रुपए है इतनी दर पर 81 प्रतिशत छूट के बाद जांच की लागत करीब 50 रुपए रह जाती है जबकि केवल रिएजेंट की लागत ही लगभग 70 रुपए होती है इसके अलावा मशीनों का रखरखाव बिजली और स्टाफ का खर्च अलग होता है ऐसे में इतनी कम कीमत पर सटीक और विश्वसनीय जांच संभव नहीं मानी जा रही

    दूसरी ओर कंपनी के सीईओ पुनीत दुबे ने इस छूट को पूरी तरह व्यावहारिक बताया है उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डायग्नोस्टिक्स सेक्टर में तकनीकी विकास के कारण उपकरण और रिएजेंट की लागत में काफी कमी आई है अब कई चीजें देश में ही कम कीमत पर उपलब्ध हैं जिससे इस तरह की दरें संभव हो पाई हैं

    NHM की एमडी डॉ सलोनी सडाना ने भी टेंडर प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि सभी नियमों का पालन किया गया है और तकनीकी बिड में शामिल कई कंपनियों ने 60 प्रतिशत से अधिक छूट की पेशकश की थी ऐसे में सबसे कम दर देने वाली कंपनी को चयनित किया गया है

    इस बीच कंपनी का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है सितंबर 2025 में आयकर विभाग ने कंपनी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी वहीं कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भी कंपनी पर अनावश्यक जांचों के जरिए भारी भुगतान लेने के आरोप लगाए थे हालांकि कंपनी ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है

    कुल मिलाकर यह मामला अब सिर्फ एक टेंडर तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या जांच की गुणवत्ता को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान हो पाता है या नहीं

  • बॉलीवुड की सबसे चर्चित दुश्मनी दोस्ती में बदली कैटरीना की पार्टी से ईद तक का सफर

    बॉलीवुड की सबसे चर्चित दुश्मनी दोस्ती में बदली कैटरीना की पार्टी से ईद तक का सफर


    नई दिल्ली: मायानगरी मुंबई में रिश्तों का बदलता रंग अक्सर सुर्खियां बनता रहा है और ऐसा ही एक चर्चित किस्सा जुड़ा है सलमान खान और शाहरुख खान के बीच हुई उस कड़वाहट से जिसने एक समय पूरे बॉलीवुड को दो हिस्सों में बांट दिया था यह विवाद साल 2008 में कैटरीना कैफ की बर्थडे पार्टी के दौरान शुरू हुआ था

    कहा जाता है कि उस रात एक मामूली मजाक और तकरार ने अचानक गंभीर रूप ले लिया और दोनों सुपरस्टार्स के बीच तीखी बहस हो गई हालात इतने बिगड़ गए कि बात हाथापाई तक पहुंचने की चर्चा भी सामने आई हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति को संभाल लिया इस घटना के बाद दोनों के रिश्तों में ऐसी दरार आई जो अगले पांच साल तक बनी रही

    इस विवाद के पीछे कई वजहें बताई जाती हैं कुछ लोग इसे ईगो क्लैश मानते हैं तो कुछ इसे उस समय के टीवी शोज की प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखते हैं दरअसल उस दौर में सलमान खान का शो दस का दम काफी सफल रहा था वहीं शाहरुख खान क्या आप पांचवी पास से तेज हैं होस्ट कर रहे थे जो टीआरपी की रेस में पीछे था बताया जाता है कि इसी बात को लेकर मजाक में शुरू हुई छींटाकशी धीरे धीरे गंभीर विवाद में बदल गई

    इस झगड़े का असर सिर्फ दोनों कलाकारों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर पड़ा बॉलीवुड मानो दो खेमों में बंट गया था निर्माता और निर्देशकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई थी कि किसके साथ काम किया जाए क्योंकि एक के साथ काम करने पर दूसरे की नाराजगी का डर बना रहता था अवॉर्ड शो और सार्वजनिक मंचों पर भी दोनों एक दूसरे से दूरी बनाकर रखते थे

    लेकिन वक्त के साथ हालात बदले और साल 2013 में एक खास मौके ने इस जमी बर्फ को पिघला दिया बाबा सिद्दिकी की ईद पार्टी में दोनों खान आमने सामने आए इस मुलाकात को खास बनाने में सलीम खान की भी अहम भूमिका रही बताया जाता है कि जानबूझकर ऐसी बैठने की व्यवस्था की गई जिससे बातचीत की शुरुआत हो सके

    जब सलमान वहां पहुंचे और उन्होंने अपने पिता के पास शाहरुख को बैठे देखा तो उन्होंने पहल करते हुए बातचीत शुरू की इस मुलाकात ने पांच साल पुरानी कड़वाहट को खत्म कर दिया और दोनों ने गिले शिकवे भुलाकर दोस्ती का हाथ बढ़ाया

    बाद में खुद सलमान खान ने भी माना कि वह विवाद बेहद बचकाना था और समय के साथ यह समझ आ गया कि ऐसी बातों का कोई मतलब नहीं होता इस सुलह के बाद न केवल उनके फैंस बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने राहत की सांस ली क्योंकि लंबे समय से बंटी हुई बॉलीवुड की दुनिया एक बार फिर एकजुट हो गई

  • मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति मुंबई मार्च की तैयारी साथ ही मालाड जमीन आवंटन पर

    मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति मुंबई मार्च की तैयारी साथ ही मालाड जमीन आवंटन पर


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है जहां एक ओर मराठा समाज ने आरक्षण को लेकर मुंबई मार्च की तैयारी शुरू कर दी है वहीं दूसरी ओर मुंबई के मालाड इलाके में जमीन आवंटन में कथित गड़बड़ी को लेकर सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं

    मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल ने साफ कहा है कि समुदाय अब दोबारा मुंबई की ओर कूच करने के लिए तैयार है उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वादे पूरे नहीं किए गए तो इसके गंभीर परिणाम होंगे उनका कहना है कि अगर सरकार आरक्षण देने के पक्ष में नहीं थी तो पहले ही संबंधित आदेश जारी नहीं किए जाने चाहिए थे

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मराठा समाज अब पूरी तरह संगठित और जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाला नहीं है इससे साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य में एक बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है

    इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के मालाड इलाके में प्रोजेक्ट प्रभावित व्यक्तियों के लिए जमीन आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए हैं यह मामला तब सामने आया जब विधानसभा में इसे लेकर गंभीर सवाल उठाए गए

    राज्य की शहरी विकास मंत्री माधुरी मिसाल ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच अतिरिक्त मुख्य सचिव के नेतृत्व में की जाएगी और जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक किसी भी तरह की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी

    यह मुद्दा कांग्रेस नेता असलम शेख द्वारा उठाया गया था जिसके बाद भाजपा के योगेश सागर और मुर्जी पटेल ने भी इस पर सवाल खड़े किए

    विधानसभा में आरोप लगाया गया कि जमीन आवंटन के दौरान डेवलपर को ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स और प्रीमियम सामान्य दर से कहीं अधिक दिया गया जिससे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है

     महाराष्ट्र इस समय दो बड़े मुद्दों से जूझ रहा है एक तरफ मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन की आहट तेज हो रही है और दूसरी तरफ जमीन आवंटन में गड़बड़ी के आरोपों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं आने वाले दिनों में इन दोनों मामलों का राजनीतिक और सामाजिक असर और गहरा होने की संभावना है

  • मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई

    मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई


    नई दिल्ली। मुंबई में हाल ही में हुए विवाद के बाद मेयर ऋतु तावड़े की आधिकारिक गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट वाहन से लाल-नीली फ्लैश लाइटें हटा दी गई हैं। यह मामला सबसे पहले सोशल मीडिया पर तब सुर्खियों में आया जब एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या मेयर की गाड़ी को पुलिस जैसी फ्लैश लाइट लगाने की अनुमति है। इस विवाद के बाद आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र लिखकर इस विषय पर आपत्ति जताई और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ऐसी लाइटों का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया।

    विवाद का केंद्र मेयर की गाड़ी के बोनट पर लगी लाल-नीली फ्लैशिंग लाइट थी, जबकि उनके साथ चल रही एस्कॉर्ट स्कॉर्पियो वाहन में भी ऐसी लाइटें थीं। इस वाहन में मेयर के निजी सहायक और प्रोटोकॉल अधिकारी मौजूद थे। लाइटें देखकर लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या मेयर की गाड़ी को विशेष अधिकार दिया गया है।

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ी पर बीकन या फ्लैश लाइट लगाने में कोई रुचि नहीं है और यह प्रशासन की गलती थी। उन्होंने बताया कि जब उन्हें आधिकारिक वाहन दिया गया, तब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि किन लाइटों का प्रयोग किया जा सकता है और किनका नहीं।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस विवाद पर कहा कि जांच में पता चला कि लाल-नीली फ्लैश लाइट गाड़ी की छत पर नहीं बल्कि बोनट पर लगी थी। उन्होंने मेयर को दोषी नहीं ठहराया और कहा कि बिना वजह उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह की फ्लैशिंग लाइटें मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस लीडर की गाड़ियों पर भी लगी थीं, जिन्हें शनिवार को हटा दिया गया। इस विवाद के बाद विपक्ष की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाया कि यह कदम वीआईपी कल्चर के खिलाफ है और केंद्र सरकार ने 2017 में ही सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और विशेष प्रतीकों का उपयोग रोक दिया था।

    2017 में केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और वीआईपी कल्चर के प्रतीकों के उपयोग पर रोक लगाई थी। तब से मुंबई की मेयर की गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी गई थी। इस विवाद ने शहर में फिर से चर्चा छेड़ दी है कि क्या नए नियमों का सही पालन किया जा रहा है और क्या मेयर अपने पद का अनुचित लाभ उठा रही हैं।

    कुल मिलाकर, मुंबई मेयर की गाड़ी पर लगी लाल-नीली फ्लैश लाइट हटाने के बाद विवाद समाप्त हुआ, लेकिन यह मुद्दा वीआईपी कल्चर, प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर एक बार फिर ध्यान खींचता है।

  • रैपर बादशाह के ‘टटीरी’ गाने पर विवाद, हरियाणा में FIR दर्ज; जानिए क्या है पूरा मामला

    रैपर बादशाह के ‘टटीरी’ गाने पर विवाद, हरियाणा में FIR दर्ज; जानिए क्या है पूरा मामला


    मुंबई। मशहूर रैपर और सिंगर Badshah अपने नए हरियाणवी गाने Tattiri को लेकर विवादों में घिर गए हैं। इस गाने के खिलाफ हरियाणा में शिकायत दर्ज होने के बाद पंचकुला के सेक्टर-20 स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गाने के म्यूजिक वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्दों, इशारों और कुछ विजुअल्स पर आपत्ति जताई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म में दिखाई गई लड़कियों के साथ कुछ दृश्य और जेस्चर आपत्तिजनक हैं, जो समाज में गलत संदेश दे सकते हैं।

    इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर बादशाह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 296 और Indecent Representation of Women (Prohibition) Act, 1986 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि गाने के जरिए अश्लीलता को बढ़ावा दिया गया और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    महिला आयोग में भी पहुंची शिकायत

    बताया जा रहा है कि पानीपत की सविता आर्य और रोहतक के वकील राज नारायण पंघाल ने भी इस गाने के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। सविता आर्य ने हरियाणा महिला आयोग में शिकायत की, जबकि पंघाल ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में मामला उठाया है।

    शिकायतकर्ताओं ने गाने की एक लाइन—“आया बादशाह डोली चढ़ाने, इन सबकी घोड़ी बनाने”—पर भी आपत्ति जताई है।

    13 मार्च को होगी सुनवाई

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में बादशाह को 13 मार्च 2026 को सुबह 11:30 बजे सुनवाई के लिए पानीपत में बुलाया गया है।

    ‘टटीरी’ शब्द का मतलब क्या है?
    हरियाणवी बोलचाल में “टटीरी” शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर एक चंचल या आकर्षक लड़की के लिए किया जाता है। हालांकि कई लोग इसे आपत्तिजनक या दोहरे अर्थ वाला शब्द मानते हैं, जिसकी वजह से गाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
    घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी

    घुटी गुं घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी गुं घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी

    आया बादशाह डोली चढ़ाने
    इन सबकी घोड़ी बनाने
    थोड़े पागल थोड़े सयाने
    हम आये इनके प्लांस के घोड़े लगाने

    ऐ.. लौंडे करते बकबक
    हम शत प्रतिशत ये लडके लगभग
    हम पूरी दुनिया में देखो करते करतब
    पर इश बॉय दिल्ली है मरते दम तक

    मैं ही शॉन मैं ही वेन
    मैं ही सीन मैं ही गेम
    मेरे खून में है जीत देख पास आके पेन
    कलाकार का है ब्रेन डबल आर की है क्रेन
    औडेमार्स का है टाइम बुल्गारी की चेन

    इंसान इनसाने मेरा काम इनसाने
    दो ही दोस्त हैं मेरे
    मेरा पेन मेरा पेन मेरी बंदी कोकेन
    मेरे गाने प्रोपेन
    मेरे सर पे है क्राउन मेरे मुँह पे है फेम

    घुटी गुं घुटी गुं करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी गुं घुटी गुं करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    कल्चर किंग!

    अरे छोरा अपनी आली पे आया होया है
    पंजा रेस पे पूरा ही दबाया होया है
    इन गमरों का गेम बजाया होया है
    अकेले ने ही सिस्टम हिलाया होया है

    यह… बिन दानो की चल्ली
    तु भी नल्ला तेरी गैंग भी नल्ली
    तु वेल कनेक्टेड पोलिटिकली
    मैं वेल कनेक्टेड स्पिरिचुअली

    मेन स्ट्रीम कमर्शियल में लिरिकली
    अभी अंडररेटेड मैं क्रिमिनली
    इनकी डाल नहीं गली इनकी ग***े

    जल्ली
    इश साल पूरी कर दूंगा तसल्ली मैं

    घुटी गुं घुटी गुं करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी गुं घुटी गुं करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटीरी
    कल्चर किंग
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटीरी
    म्हारे री मंदरें पे बोलिये टटीरी
    क्या है टटीरी का अर्थ

    अगर आप टटीरी शब्द को गूगल करें तो पाएंगे टटीरी एक मध्यम आकार का जलचर पक्षी होता है। यह पक्षी अपनी खास अवाजा के लिए जाना जाता है। एआई के मुताबिक, “घुटी क्युन घुटी क्युन करे टटेरी” का अर्थ है- टिटहरी, तू ऐसी दबी-दबी या घुटती हुई आवाज़ में क्यों बोल रही है?

    फिलहाल यह मामला कानूनी जांच के दायरे में है और आगे की कार्रवाई जांच और सुनवाई के बाद तय होगी।

  • मंदाना करीमी भारत छोड़ेंगी: कहा‑ भारत ने मुझे धोखा दिया, काम मिलना बंद, ईरान आज़ाद होते ही लौटूंगी

    मंदाना करीमी भारत छोड़ेंगी: कहा‑ भारत ने मुझे धोखा दिया, काम मिलना बंद, ईरान आज़ाद होते ही लौटूंगी



    नई दिल्ली। ईरानी मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री मंदाना करीमी ने बड़ा बयान दिया है कि वह जल्द ही भारत छोड़कर अपने देश ईरान लौटने का निर्णय कर चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि भारत में अब उनकी कोई आवाज़ नहीं बची है और उन्हें ‘भारत ने धोखा दिया’ जैसा महसूस हो रहा है।

    मंदाना, जिन्होंने कई फिल्मों और रियलिटी शो में अपनी पहचान बनाई थी, ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने अपना सारा सामान पहले से ही पैक कर लिया है और जैसे ही ईरान में मौजूदा शासन बदलने का ऐलान होगा, वह तुरंत वहीं लौट जाएँगी। उन्होंने कहा कि वह भारत से अब अपना नाता तोड़ रही हैं।

    क्या कहा मंदाना ने?
    मंदाना ने कहा, “मैं भारत से ब्रेकअप कर रही हूँ। भारत ने मुझे मॉडलिंग और एक्टिंग करियर दिया, लेकिन अब मुझे लगता है कि यहाँ मेरी आवाज़ नहीं सुनी जाती।
    उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन्हें काम बिल्कुल नहीं मिल रहा और उनके कई कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए हैं। इसका कारण वह अपनी खुली राय और ईरान के समर्थन में प्रदर्शन मानती हैं।

    मंदाना ने कहा कि मुंबई में अकेलापन महसूस हुआ, और कुछ पुराने दोस्त भी उनसे दूर हो गए क्योंकि उन्होंने बहुत खुले तौर पर राय व्यक्त की।

    ईरान के प्रति उनकी राय
    मंदाना ने कहा कि उनका सपना एक ऐसा ईरान है जहाँ महिलाएं आज़ाद हों, अपनी मर्जी के कपड़े पहन सकें और किसी भी यूनिवर्सिटी में पढ़ सकें। उन्होंने कहा कि ईरान में राजनीतिक बदलाव आने पर वह तुरंत वापस चली जाएँगी।

    काम और मीडिया में गिरावट
    एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 से उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया, और कई कॉन्ट्रैक्ट भी कैंसिल हो गए। मंदाना ने यह अपने राजनीतिक बयान और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से जोड़कर बताया।
    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि उन्होंने भारतीय मीडिया पर ‘एकतरफ़ा कवरेज़’ का आरोप लगाया है और चाहती हैं कि वैकल्पिक आवाज़ों को भी मंच मिले।


    उनका बॉलीवुड सफर
    मंदाना करीमी का जन्म तेहरान, ईरान में हुआ।
    वह 2010 में मॉडलिंग के लिए भारत आईं और 2013 से मुंबई में ही बस गईं।
    उन्होंने ‘क्या कूल हैं हम 3’, ‘मैं और चार्ल्स’, ‘भाग जॉनी’ जैसी फिल्मों में काम किया और ‘बिग बॉस’ और ‘लॉकअप’ जैसे रियलिटी शो में भी हिस्सा लिया।
    2017 में उनका भारतीय बिजनेसमैन गौरव गुप्ता से विवाह हुआ, लेकिन 2021 में उनका तलाक हो गया था।
    मंदाना करीमी ने कहा है कि वह भारत छोड़ेंगी क्योंकि उन्हें लगता है कि यहाँ उनकी आवाज़ दब गई है और उन्हें धोखा महसूस हुआ है। उन्होंने कहा है कि काम मिलना बंद हो गया है और कॉन्ट्रैक्ट रद्द हो गए हैं। वह ईरान में बदलाव आने पर वापस लौटना चाहती हैं, खासकर महिलाओं के अधिकारों और आज़ादी के लिए।उन्होंने भारतीय मीडिया पर भी आलोचनात्मक टिप्पणी की है कि रिपोर्टिंग एकतरफ़ा है।
  • फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर नहीं थम रहा विवाद, भोपाल में फिर प्रदर्शन जारी

    फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर नहीं थम रहा विवाद, भोपाल में फिर प्रदर्शन जारी

    भोपाल। साेशल मीडिया प्लेटफार्म ओटीटी पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक दिन पहले हुए प्रदर्शन के बाद भोपाल में ब्राह्मण समाज ने शुक्रवार को एक बार फिर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

    एमपी नगर इलाके में हुए इस प्रदर्शन में फिल्म के टाइटल, संवाद, निर्देशन और कलाकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा कि वे किसी भी तरह की सफाई स्वीकार नहीं करेंगे और फिल्म को किसी भी कीमत पर रिलीज नहीं होने देंगे।

    प्रदर्शन के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि फिल्मों को समाज का दर्पण कहा जाता है, लेकिन इस फिल्म के जरिए एक पूरे समाज को गलत और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना जिम्मेदारी के इस तरह का कंटेंट लॉन्च करना गंभीर चूक है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    सरकार पर भी निशाना

    पुष्पेंद्र मिश्रा ने सरकार और प्रशासन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एफआईआर की मांग के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर “सोए हुए हैं”। यूजीसी नियमों और सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की नीतियां समाज को बांटने का काम कर रही हैं।

    मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूतों से रगड़ा

    प्रदर्शन के दौरान फिल्म से जुड़े कलाकारों के खिलाफ नारे लगाए गए। इसी बीच अभिनेता मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूतों से रगड़कर प्रतीकात्मक विरोध किया गया, जिससे मौके पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।