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  • राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब

    राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब


    इंदौर । इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है इस मामले में डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं बल्कि पार्टी के चरित्र को उजागर करती हैं

    घटना उस समय की है जब इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस की पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धर्म का हवाला देते हुए वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया उनके इस रुख का सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने विरोध किया लेकिन कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है इसी चुप्पी को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को घेरा और कहा कि इस मुद्दे पर पूरी प्रदेश कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद पार्षद ने राष्ट्रीय गीत गाने से मना किया और यह कहते हुए पीछे हट गई कि वह इसे नहीं गाएंगी उन्होंने इसे बेशर्मी की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस की विचारधारा और मानसिकता को दर्शाता है उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता भारत माता की जय बोलने से भी बचते हैं जो देशभक्ति की भावना के विपरीत है

    मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से जवाब मांगा उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह ऐसे बयानों और आचरण का समर्थन करता है या नहीं यदि पार्टी इस मामले में कार्रवाई करने में असमर्थ है तो उसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए

    उन्होंने आगे कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अपने प्राण न्योछावर किए ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं न केवल उन बलिदानों का अपमान हैं बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी समय समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों पर विवाद खड़ा करती रही है

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर बहस छेड़ दी है जहां एक ओर इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक माना जाता है वहीं दूसरी ओर कुछ वर्गों द्वारा इसे लेकर अलग विचार भी सामने आते रहे हैं फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं

  • थाने में जहर से मौत पर बवाल पीड़ित परिवार से मिले पटवारी निष्पक्ष जांच की मांग तेज

    थाने में जहर से मौत पर बवाल पीड़ित परिवार से मिले पटवारी निष्पक्ष जांच की मांग तेज


    छतरपुर । मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में थाने के अंदर जहर खाकर हुई सुरेंद्र सिंह की मौत का मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में अब जीतू पटवारी ने हस्तक्षेप करते हुए इसकी जांच CBI से कराने की मांग उठाई है जिससे पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।

    पटवारी आज छतरपुर जिले के सरानी गांव पहुंचे जहां उन्होंने मृतक सुरेंद्र सिंह के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। परिवार से बातचीत के बाद उन्होंने साफ कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है क्योंकि इसमें गंभीर आरोप सामने आए हैं और स्थानीय स्तर पर जांच को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इस मामले में सबसे बड़ा आरोप छतरपुर की भाजपा विधायक ललिता यादव के पुत्र मोनू यादव पर लगा है। आरोप है कि मोनू यादव ने सुरेंद्र सिंह के साथ मारपीट की थी जिसके बाद यह पूरा घटनाक्रम सामने आया। इस आरोप ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है क्योंकि इसमें राजनीतिक प्रभाव की आशंका भी जताई जा रही है।

    मृतक की पत्नी ने भी इस मामले में गंभीर खुलासा करते हुए बताया कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान सुरेंद्र सिंह ने खुद उसे बताया था कि मोनू यादव ने उसके साथ बुरी तरह मारपीट की थी। इस बयान के बाद परिजनों का आक्रोश और बढ़ गया है और वे लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

    जीतू पटवारी ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में सही तरीके से कार्रवाई नहीं की गई तो वे न्यायालय में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

    यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। थाने के भीतर हुई इस घटना ने पुलिस कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज हो रही है।

    फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है लेकिन बढ़ते राजनीतिक दबाव और परिजनों के आरोपों के बीच अब यह देखना अहम होगा कि क्या इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी जाती है या फिर स्थानीय स्तर पर ही इसका निपटारा किया जाता है।

  • वायरल गर्ल मोनालिसा केस में नया मोड़ नाबालिग होने की पुष्टि के बाद गंभीर धाराएं जुड़ीं

    वायरल गर्ल मोनालिसा केस में नया मोड़ नाबालिग होने की पुष्टि के बाद गंभीर धाराएं जुड़ीं


    खरगोन। प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आई वायरल गर्ल मोनालिसा का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी इस कहानी में अब नया खुलासा हुआ है कि मोनालिसा नाबालिग है। यह जानकारी राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में सामने आई है जिससे पूरे मामले की दिशा बदल गई है और कानूनी पेचीदगियां बढ़ गई हैं।

    दरअसल इस मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रथम दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से शिकायत की थी। 17 मार्च को दर्ज इस शिकायत के बाद आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच दल का गठन किया और पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उन्होंने सभी को चौंका दिया। महेश्वर स्थित शासकीय अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसम्बर 2009 को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर हुआ था। इस आधार पर वह अभी बालिग नहीं है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त होता है।

    इसी बीच मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले की ओर से भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने फरमान खान के खिलाफ महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया था। बाद में इस एफआईआर को अपडेट करते हुए पुलिस ने इसमें अपहरण के साथ साथ POCSO Act के तहत धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अलावा शादी का झांसा देकर बहलाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं जिससे आरोपी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

    इस पूरे मामले पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सनोज मिश्रा ने इस खुलासे को अहम बताते हुए कहा कि अब सच्चाई सामने आ चुकी है और यह स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा नाबालिग है। उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    यह मामला केवल एक वायरल घटना तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब यह कानून व्यवस्था और समाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन गया है। नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इसमें सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

    आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर किसी की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

    प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आई वायरल गर्ल मोनालिसा का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी इस कहानी में अब नया खुलासा हुआ है कि मोनालिसा नाबालिग है। यह जानकारी राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में सामने आई है जिससे पूरे मामले की दिशा बदल गई है और कानूनी पेचीदगियां बढ़ गई हैं।

    दरअसल इस मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रथम दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से शिकायत की थी। 17 मार्च को दर्ज इस शिकायत के बाद आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच दल का गठन किया और पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उन्होंने सभी को चौंका दिया। महेश्वर स्थित शासकीय अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसम्बर 2009 को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर हुआ था। इस आधार पर वह अभी बालिग नहीं है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त होता है।

    इसी बीच मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले की ओर से भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने फरमान खान के खिलाफ महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया था। बाद में इस एफआईआर को अपडेट करते हुए पुलिस ने इसमें अपहरण के साथ साथ POCSO Act के तहत धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अलावा शादी का झांसा देकर बहलाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं जिससे आरोपी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

    इस पूरे मामले पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सनोज मिश्रा ने इस खुलासे को अहम बताते हुए कहा कि अब सच्चाई सामने आ चुकी है और यह स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा नाबालिग है। उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    यह मामला केवल एक वायरल घटना तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब यह कानून व्यवस्था और समाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन गया है। नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इसमें सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

    आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर किसी की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • मस्ती या बदतमीजी अक्षय कुमार का मजाक बना विवाद राजपाल यादव को लेकर फैंस हुए नाराज

    मस्ती या बदतमीजी अक्षय कुमार का मजाक बना विवाद राजपाल यादव को लेकर फैंस हुए नाराज


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं लेकिन इस बार वजह उनकी कोई फिल्म या एक्शन सीन नहीं बल्कि एक स्टेज इवेंट के दौरान कही गई बात है जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। मामला उनकी आने वाली फिल्म भूत बंगला के ट्रेलर लॉन्च इवेंट का है जहां उनके साथ राजपाल यादव सहित फिल्म की पूरी टीम मौजूद थी।

    इवेंट के दौरान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें देखा जा सकता है कि पूरी टीम स्टेज पर बैठी हुई है लेकिन राजपाल यादव के पास कुर्सी नहीं होती। वह खुद जाकर अपनी कुर्सी लाते हैं और बैठने की कोशिश करते हैं। इसी दौरान अक्षय कुमार उन्हें बार बार बैठने के लिए कहते हैं और फिर मजाकिया अंदाज में बोल देते हैं कि बैठ जा नहीं तो खामखा पेल दूंगा। इस पर राजपाल यादव हंसते हुए नजर आते हैं लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई।

    वीडियो सामने आते ही लोगों ने इसे मजाक से ज्यादा अपमानजनक व्यवहार बताया। कई यूजर्स ने कहा कि पब्लिक प्लेटफॉर्म पर इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए खासकर तब जब सामने वाला कलाकार इंडस्ट्री का सम्मानित कॉमेडियन हो। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पहले राजपाल यादव के पास कुर्सी नहीं थी और फिर उसी बात को लेकर मजाक करना गलत संदेश देता है।

    इतना ही नहीं इवेंट के दौरान एक और पल भी चर्चा में आ गया जब राजपाल यादव अक्षय कुमार की तारीफ करते हुए उनके अनुशासन और अभिनय की सराहना करते हैं। इस पर अक्षय कुमार मजाक करते हुए कहते हैं कि तू जब बोलता है तो ऐसा लगता है जैसे किसी कवि सम्मेलन में आया हुआ है। इस टिप्पणी को भी कई लोगों ने हल्के में नहीं लिया और इसे अनावश्यक तंज बताया।

    हालांकि यह भी सच है कि अक्षय कुमार अपनी मस्ती और हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते हैं और कई बार उनके ऐसे मजाक को लोग पसंद भी करते हैं लेकिन इस बार मामला उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में यूजर्स यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या हास्य और अपमान के बीच की सीमा पार हो गई है।

    फिल्म भूत बंगला की बात करें तो यह एक हॉरर कॉमेडी फिल्म है जिसमें अक्षय कुमार के साथ तब्बू वामिका गब्बी परेश रावल और राजपाल यादव अहम भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। फिल्म की रिलीज डेट अब 16 अप्रैल तय की गई है जिसे पहले आगे बढ़ाया गया था।

    वर्क फ्रंट पर अक्षय कुमार के पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं जिनमें वेलकम टू द जंगल, हेरा फेरी 3 और हैवान शामिल हैं। इन फिल्मों को लेकर फैंस में पहले से ही उत्साह बना हुआ है लेकिन इस विवाद ने फिलहाल उनकी छवि को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    अब देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे मामले पर अक्षय कुमार या राजपाल यादव की तरफ से कोई सफाई या प्रतिक्रिया आती है या नहीं लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक मंच पर की गई हल्की फुल्की टिप्पणी भी किस तरह बड़ा मुद्दा बन सकती है।

  • जब सलमान खान ने पहने फटे जूते ट्रोलर्स ने उड़ाया मजाक फैंस ने बताया लाखों का स्टाइल

    जब सलमान खान ने पहने फटे जूते ट्रोलर्स ने उड़ाया मजाक फैंस ने बताया लाखों का स्टाइल

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान एक बार फिर अपने अनोखे स्टाइल को लेकर चर्चा में हैं लेकिन इस बार वजह उनका कोई फिल्मी डायलॉग या नया प्रोजेक्ट नहीं बल्कि उनके जूते हैं जो पहली नजर में फटे हुए दिखाई दिए और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

    हाल ही में सलमान खान को मुंबई एयरपोर्ट पर उनके बॉडीगार्ड शेरा के साथ स्पॉट किया गया। इस दौरान उनका पूरा लुक हमेशा की तरह स्टाइलिश और क्लासी था। उन्होंने ब्लैक एंड व्हाइट चेक शर्ट के साथ ब्लैक पैंट पहनी थी आंखों पर चश्मा था हाथ में उनकी पहचान बन चुका ब्रेसलेट और महंगी घड़ी भी नजर आई। लेकिन जैसे ही कैमरा उनके जूतों पर गया लोगों का ध्यान वहीं अटक गया क्योंकि उनके जूते फटे हुए दिखाई दे रहे थे।

    वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने इस लुक पर जमकर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। कई लोगों को यह समझ नहीं आया कि इतनी बड़ी शख्सियत आखिर फटे जूते क्यों पहन रही है। कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब फटे जूते भी ट्रेंड बन जाएंगे तो कुछ ने इसे अजीब फैशन बताया। वहीं कई लोग ऐसे भी थे जिन्होंने सलमान के इस अंदाज को उनका स्वैग बताते हुए कहा कि भाई जो पहनते हैं वही फैशन बन जाता है।

    जहां एक तरफ ट्रोलिंग हो रही थी वहीं दूसरी तरफ सलमान के फैंस उनके बचाव में उतर आए। उन्होंने बताया कि ये कोई आम फटे जूते नहीं बल्कि लग्जरी ब्रांड बलेनसिएज के डिजाइनर बूट्स हैं जिन्हें जानबूझकर डिस्ट्रेस्ड लुक दिया जाता है ताकि एक अलग और रफ स्टाइल पेश किया जा सके। ये जूते बलेनसिएज डिस्ट्रेस्ड लेदर काउबॉय बूट्स के नाम से जाने जाते हैं और फैशन इंडस्ट्री में काफी पॉपुलर हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इन जूतों की कीमत करीब एक लाख बीस हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक बताई जा रही है। कीमत सामने आने के बाद कई यूजर्स हैरान रह गए और जो लोग पहले इनका मजाक उड़ा रहे थे वे भी सोचने पर मजबूर हो गए कि फैशन की दुनिया में चीजें जितनी अजीब दिखती हैं उतनी ही महंगी भी हो सकती हैं।

    सलमान खान का यह लुक एक बार फिर यह साबित करता है कि वह सिर्फ फिल्मों में ही नहीं बल्कि अपने स्टाइल के जरिए भी लोगों का ध्यान खींचना जानते हैं। उनका हर अंदाज चर्चा का विषय बन जाता है चाहे वह साधारण हो या एक्सपेरिमेंटल।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान अपनी आने वाली फिल्मों को लेकर भी व्यस्त हैं। खबर है कि वह जल्द ही नई एक्शन ड्रामा फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाले हैं जिसमें उनके साथ साउथ इंडस्ट्री की बड़ी एक्ट्रेस नजर आ सकती हैं। ऐसे में फैंस उनके नए प्रोजेक्ट और नए लुक दोनों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • शिमला के राम मंदिर में ‘निकाह’ को लेकर विवाद, हिंदू संगठनों का विरोध

    शिमला के राम मंदिर में ‘निकाह’ को लेकर विवाद, हिंदू संगठनों का विरोध


    शिमला। शिमला में राम मंदिर परिसर में प्रस्तावित एक निकाह समारोह को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठनों ने मंदिर के हॉल में मुस्लिम परिवार के विवाह समारोह की बुकिंग पर आपत्ति जताते हुए विरोध की चेतावनी दी है। यह मामला पहले से चर्चा में रहे संजौली मस्जिद विवाद के बाद सामने आया है, जिससे शहर में धार्मिक बहस तेज हो गई है।

    हॉल बुकिंग से शुरू हुआ विवाद

    राम बाजार स्थित मंदिर के हॉल में 11 अप्रैल को प्रस्तावित निकाह की जानकारी सामने आने के बाद हिंदू संघर्ष समिति ने विरोध दर्ज कराया।

    समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में इस तरह का आयोजन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। संगठन ने मंदिर प्रबंधन से कार्यक्रम रद्द करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

    सूद सभा की बैठक आज

    मंदिर परिसर का संचालन करने वाली सूद सभा के अध्यक्ष राजीव सूद ने बताया कि इस मुद्दे पर मंगलवार को आपात बैठक बुलाई गई है।

    उन्होंने कहा कि सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हुए निर्णय लिया जाएगा। उनके अनुसार पिछले पांच वर्षों में 15 से अधिक मुस्लिम परिवारों के निकाह इसी हॉल में हो चुके हैं और परिसर में मांस, मछली व मदिरा पर पहले से प्रतिबंध है।

    पहले भी हो चुका है विवाद

    अक्टूबर 2024 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिर परिसर में साईं बाबा की मूर्ति पर आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। इसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा।

    शहर का प्रमुख धार्मिक केंद्र

    राम बाजार में स्थित यह मंदिर शिमला का प्रमुख धार्मिक और सामाजिक स्थल माना जाता है। मंदिर की बहुमंजिला इमारत के ऊपरी तल पर भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं, जबकि नीचे बने बड़े हॉल में वर्षों से सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।
    अब सबकी नजर सूद सभा की बैठक पर है, जिसमें तय होगा कि प्रस्तावित निकाह समारोह को अनुमति दी जाएगी या नहीं।

  • ‘समोसा’ विवाद के पीछे सियासी दरार? AAP में खटपट की इनसाइड स्टोरी

    ‘समोसा’ विवाद के पीछे सियासी दरार? AAP में खटपट की इनसाइड स्टोरी


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी में उभरते युवा चेहरे माने जाने वाले राघव चड्ढा इन दिनों अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाने के साथ-साथ संसद में उनकी भूमिका भी सीमित कर दी है। कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले चड्ढा अब पार्टी के भीतर अलग-थलग नजर आ रहे हैं।

    आतिशी और सौरभ भारद्वाज का हमला

    शुक्रवार को आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने चड्ढा पर तीखा हमला बोला। आरोप है कि विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर चड्ढा ने हस्ताक्षर नहीं किए।

    आतिशी ने सवाल उठाया कि जब विपक्ष एकजुट था तो चड्ढा पीछे क्यों हटे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद में अहम मुद्दों पर वे चुप रहे।

    ‘समोसा’ टिप्पणी पर भी विवाद

    पार्टी नेताओं ने चड्ढा द्वारा संसद में उठाए गए मुद्दों पर भी तंज कसा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि देश के बड़े मुद्दों की बजाय चड्ढा हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत और जूस के पैकेट जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे थे। हालांकि चड्ढा ने इन पर बने मीम्स का स्वागत किया था, लेकिन पार्टी ने इसे गंभीरता की कमी बताया।

    पुरानी नाराजगी भी बनी वजह

    आंतरिक असंतोष की जड़ें 2024 तक जाती बताई जा रही हैं, जब कथित आबकारी मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा आंख के ऑपरेशन के लिए लंदन में थे। इस पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि उस समय वे पार्टी के साथ सक्रिय क्यों नहीं दिखे।

    पंजाब की राजनीति का असर

    2022 में पंजाब में जीत के बाद चड्ढा को ‘सुपर सीएम’ कहा जाने लगा था, जिससे स्थानीय नेताओं में असंतोष बढ़ा। बाद में पार्टी नेतृत्व ने पंजाब पर सीधा नियंत्रण मजबूत किया और चड्ढा की भूमिका सीमित होती चली गई।

    चड्ढा की सफाई

    पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने वीडियो जारी कर कहा कि जनता के मुद्दे उठाना गलत नहीं है और उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने संकेत दिया कि उन्हें बोलने से रोका जा रहा है। उनकी जगह राज्यसभा में उप-नेता के तौर पर अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया है।

    क्या BJP जॉइन करेंगे?

    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चड्ढा भविष्य में भारतीय जनता पार्टी का रुख कर सकते हैं। भगवंत मान ने उन्हें ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ बताया, जबकि दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि चड्ढा को खुद तय करना होगा कि उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा।

    हालांकि फिलहाल चड्ढा की ओर से किसी पार्टी में जाने को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने सियासी हलकों में अटकलों को तेज कर दिया है।

  • वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, TMC की आपत्तियों पर कहा—‘ऐसा हर बार होता है’

    वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, TMC की आपत्तियों पर कहा—‘ऐसा हर बार होता है’

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा होना कोई नई बात नहीं है, यह प्रक्रिया पहले भी होती रही है। अदालत ने साथ ही कहा कि अगर किसी नाम को लेकर आपत्ति है तो चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

    फॉर्म-6 को लेकर TMC ने जताई थी आपत्ति

    तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म-6 जमा किए हैं। फॉर्म-6 का उपयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संसदीय क्षेत्र बदलने के लिए किया जाता है। उनका कहना था कि पूरक सूची आने के बाद भी नए फॉर्म स्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा—पहली बार नहीं

    सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की कि “ऐसा हर बार होता है, इसमें कुछ असामान्य नहीं है।” अदालत ने कहा कि किसी भी नए नाम पर आपत्ति दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध है और संबंधित पक्ष चुनाव आयोग से संपर्क कर सकता है।

    चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्ष

    भारत निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि नियमों के अनुसार उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति हाल ही में 18 वर्ष का हुआ है तो उसे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार है।

    अदालत ने प्रक्रिया समझने की दी नसीहत

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव उसी सूची के आधार पर होते हैं, जो तय तिथि तक अपडेट होती है।

    अदालत ने संकेत दिया कि सभी आपत्तियों पर निर्णय 7 अप्रैल तक लिया जाएगा।

  • 81 प्रतिशत छूट वाला टेंडर बना बहस का मुद्दा एक्सपर्ट बोले इतनी कम कीमत पर जांच संभव नहीं

    81 प्रतिशत छूट वाला टेंडर बना बहस का मुद्दा एक्सपर्ट बोले इतनी कम कीमत पर जांच संभव नहीं

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी जांच को लेकर जारी एक बड़े टेंडर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी National Health Mission द्वारा जारी इस टेंडर में भोपाल की साइंस हाउस मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को ठेका दिया गया है जिसने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना की दरों से 81 दशमलव 2 प्रतिशत कम कीमत पर बोली लगाकर बाजी मार ली

    इसका सीधा अर्थ यह है कि जिस जांच की कीमत सामान्य रूप से 100 रुपए मानी जाती है वह अब लगभग 18 रुपए में की जाएगी यही बिंदु पूरे विवाद का केंद्र बन गया है क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पैथोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इतनी कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण जांच कर पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है

    प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 से सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवाओं को निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित करना शुरू किया था इसी क्रम में 12 फरवरी 2026 को नया टेंडर जारी किया गया जो हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित है इस मॉडल में छोटे स्वास्थ्य केंद्रों से सैंपल लेकर जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में जांच की जाती है जिससे लागत और समय दोनों में कमी लाने का प्रयास किया जाता है

    टेंडर प्रक्रिया के अनुसार CGHS की दरों को आधार मूल्य माना गया और जो कंपनी सबसे अधिक छूट देगी उसे ठेका दिया जाना तय था 9 मार्च 2026 को टेंडर खुलने पर साइंस हाउस ने 81 प्रतिशत से अधिक छूट देकर पहला स्थान हासिल किया और उसे लगभग 36 करोड़ रुपए सालाना यानी पांच साल में करीब 180 करोड़ रुपए का ठेका मिल गया

    हालांकि इस निर्णय के बाद विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पद्माकर त्रिपाठी का कहना है कि CGHS की दरें पहले से ही बाजार मूल्य से काफी कम होती हैं ऐसे में यदि कोई कंपनी इन दरों से भी 80 प्रतिशत से अधिक छूट देती है तो यह सवाल खड़े करता है कि जांच की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी

    वे उदाहरण देते हुए बताते हैं कि कम्प्लीट ब्लड काउंट जैसी सामान्य जांच बाजार में 300 से 400 रुपए तक होती है जबकि CGHS दर लगभग 270 रुपए है इतनी दर पर 81 प्रतिशत छूट के बाद जांच की लागत करीब 50 रुपए रह जाती है जबकि केवल रिएजेंट की लागत ही लगभग 70 रुपए होती है इसके अलावा मशीनों का रखरखाव बिजली और स्टाफ का खर्च अलग होता है ऐसे में इतनी कम कीमत पर सटीक और विश्वसनीय जांच संभव नहीं मानी जा रही

    दूसरी ओर कंपनी के सीईओ पुनीत दुबे ने इस छूट को पूरी तरह व्यावहारिक बताया है उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डायग्नोस्टिक्स सेक्टर में तकनीकी विकास के कारण उपकरण और रिएजेंट की लागत में काफी कमी आई है अब कई चीजें देश में ही कम कीमत पर उपलब्ध हैं जिससे इस तरह की दरें संभव हो पाई हैं

    NHM की एमडी डॉ सलोनी सडाना ने भी टेंडर प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि सभी नियमों का पालन किया गया है और तकनीकी बिड में शामिल कई कंपनियों ने 60 प्रतिशत से अधिक छूट की पेशकश की थी ऐसे में सबसे कम दर देने वाली कंपनी को चयनित किया गया है

    इस बीच कंपनी का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है सितंबर 2025 में आयकर विभाग ने कंपनी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी वहीं कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भी कंपनी पर अनावश्यक जांचों के जरिए भारी भुगतान लेने के आरोप लगाए थे हालांकि कंपनी ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है

    कुल मिलाकर यह मामला अब सिर्फ एक टेंडर तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या जांच की गुणवत्ता को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान हो पाता है या नहीं

  • बॉलीवुड की सबसे चर्चित दुश्मनी दोस्ती में बदली कैटरीना की पार्टी से ईद तक का सफर

    बॉलीवुड की सबसे चर्चित दुश्मनी दोस्ती में बदली कैटरीना की पार्टी से ईद तक का सफर


    नई दिल्ली: मायानगरी मुंबई में रिश्तों का बदलता रंग अक्सर सुर्खियां बनता रहा है और ऐसा ही एक चर्चित किस्सा जुड़ा है सलमान खान और शाहरुख खान के बीच हुई उस कड़वाहट से जिसने एक समय पूरे बॉलीवुड को दो हिस्सों में बांट दिया था यह विवाद साल 2008 में कैटरीना कैफ की बर्थडे पार्टी के दौरान शुरू हुआ था

    कहा जाता है कि उस रात एक मामूली मजाक और तकरार ने अचानक गंभीर रूप ले लिया और दोनों सुपरस्टार्स के बीच तीखी बहस हो गई हालात इतने बिगड़ गए कि बात हाथापाई तक पहुंचने की चर्चा भी सामने आई हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति को संभाल लिया इस घटना के बाद दोनों के रिश्तों में ऐसी दरार आई जो अगले पांच साल तक बनी रही

    इस विवाद के पीछे कई वजहें बताई जाती हैं कुछ लोग इसे ईगो क्लैश मानते हैं तो कुछ इसे उस समय के टीवी शोज की प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखते हैं दरअसल उस दौर में सलमान खान का शो दस का दम काफी सफल रहा था वहीं शाहरुख खान क्या आप पांचवी पास से तेज हैं होस्ट कर रहे थे जो टीआरपी की रेस में पीछे था बताया जाता है कि इसी बात को लेकर मजाक में शुरू हुई छींटाकशी धीरे धीरे गंभीर विवाद में बदल गई

    इस झगड़े का असर सिर्फ दोनों कलाकारों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर पड़ा बॉलीवुड मानो दो खेमों में बंट गया था निर्माता और निर्देशकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई थी कि किसके साथ काम किया जाए क्योंकि एक के साथ काम करने पर दूसरे की नाराजगी का डर बना रहता था अवॉर्ड शो और सार्वजनिक मंचों पर भी दोनों एक दूसरे से दूरी बनाकर रखते थे

    लेकिन वक्त के साथ हालात बदले और साल 2013 में एक खास मौके ने इस जमी बर्फ को पिघला दिया बाबा सिद्दिकी की ईद पार्टी में दोनों खान आमने सामने आए इस मुलाकात को खास बनाने में सलीम खान की भी अहम भूमिका रही बताया जाता है कि जानबूझकर ऐसी बैठने की व्यवस्था की गई जिससे बातचीत की शुरुआत हो सके

    जब सलमान वहां पहुंचे और उन्होंने अपने पिता के पास शाहरुख को बैठे देखा तो उन्होंने पहल करते हुए बातचीत शुरू की इस मुलाकात ने पांच साल पुरानी कड़वाहट को खत्म कर दिया और दोनों ने गिले शिकवे भुलाकर दोस्ती का हाथ बढ़ाया

    बाद में खुद सलमान खान ने भी माना कि वह विवाद बेहद बचकाना था और समय के साथ यह समझ आ गया कि ऐसी बातों का कोई मतलब नहीं होता इस सुलह के बाद न केवल उनके फैंस बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने राहत की सांस ली क्योंकि लंबे समय से बंटी हुई बॉलीवुड की दुनिया एक बार फिर एकजुट हो गई