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  • क्या बोल्डनेस और रोमांस के दम पर हिट होगी यश की नई फिल्म?

    क्या बोल्डनेस और रोमांस के दम पर हिट होगी यश की नई फिल्म?


    नई दिल्ली ।
    दक्षिण भारतीय फिल्मों के जाने-माने अभिनेता यश की आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ अपनी रिलीज से पूर्व ही मीडिया और सोशल मीडिया पर लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। हालांकि, इस बार फिल्म की चर्चा का मुख्य कारण केवल इसका भारी-भरकम बजट या नामचीन स्टारकास्ट नहीं, बल्कि इसके टीज़र, ट्रेलर और गानों में दिखाया जा रहा बोल्ड और इंटीमेट कंटेंट है। हाल ही में जारी हुए ‘मदहोश’ गाने में यश और अभिनेत्री तारा सुतारिया की रोमांटिक केमिस्ट्री को काफी आक्रामक तरीके से पेश किया गया है। इसके बाद से ही फिल्म जगत और दर्शकों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या मेकर्स फिल्म की वास्तविक कहानी और एक्शन के बजाय केवल सेंसुअस कंटेंट के दम पर प्रचार हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

    फिल्म के प्रचार के लिए जारी किए गए शुरुआती टीज़र में यश को ब्राज़ीलियाई मॉडल बीट्रिज टाउफेनबाख के साथ दिखाया गया था। इसके बाद जारी हुए ‘तबाही’ गाने में कियारा आडवाणी के साथ उनके कई विवादित और इंटीमेट सीन्स देखने को मिले, जिसको लेकर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना भी हुई थी। अब तारा सुतारिया के साथ जारी नया वीडियो इस बात की पुष्टि करता है कि फिल्म का प्रचार अभियान मुख्य रूप से बोल्ड रोमांस के इर्द-गिर्द बुना गया है। आज के डिजिटल दौर में जहां कुछ सेकेंड की वायरल क्लिप्स किसी फिल्म का रुख तय करती हैं, वहां इस तरह का प्रमोशनल पैटर्न व्यावसायिक दृष्टि से एक सुविचारित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि, आधिकारिक जानकारियों के अनुसार गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी यह फिल्म केवल रोमांस तक सीमित नहीं है। इसे 1950 से 1970 के दशक के बीच ड्रग्स और गोल्ड माफिया की पृष्ठभूमि पर आधारित एक विशाल गैंगस्टर एक्शन ड्रामा बताया जा रहा है। फिल्म में यश का किरदार एक बेहद खतरनाक और भावनात्मक गैंगस्टर का है, जिसमें पावर स्ट्रगल और फैमिली ड्रामा के तत्व मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके बावजूद, अब तक की प्रचार सामग्री में कहानी के मूल संघर्ष को पीछे रखते हुए केवल रोमांटिक तत्वों को प्रमुखता दी गई है, जिससे दर्शकों का ध्यान इसके वास्तविक कथानक से थोड़ा भटक रहा है।

    भारतीय सिनेमा में यह कोई नया प्रयोग नहीं है जहां किसी फिल्म के टीज़र या गानों में बोल्डनेस का इस्तेमाल कर चर्चा बटोरी जाए और मुख्य फिल्म का विषय पूरी तरह भिन्न हो। ‘तबाही’ गाने पर हुए भारी विवाद और ट्रोलिंग के बावजूद मेकर्स इसी शैली में प्रचार को आगे बढ़ा रहे हैं। आगामी 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म का असली प्रदर्शन इसकी पटकथा पर निर्भर करेगा। फिलहाल, निर्माताओं द्वारा अपनाई गई यह आक्रामक और बोल्ड मार्केटिंग नीति फिल्म को लगातार चर्चा के केंद्र में बनाए रखने में पूरी तरह सफल सिद्ध हो रही है।

  • रियलिटी शो 'लॉक अप 2' में शिल्पा शिंदे के बयान पर मचा बवाल, राम कपूर को लेकर की गई टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

    रियलिटी शो 'लॉक अप 2' में शिल्पा शिंदे के बयान पर मचा बवाल, राम कपूर को लेकर की गई टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

    नई दिल्ली । रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ के हालिया एपिसोड में एक बार फिर विवाद देखने को मिला, जब अभिनेत्री शिल्पा शिंदे ने अभिनेता राम कपूर के साथ एक ही सेल में सोने से इनकार कर दिया। इस दौरान राम कपूर को लेकर की गई उनकी टिप्पणी ने शो के भीतर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया और दर्शकों के बीच भी इस घटना की चर्चा तेज हो गई। शो में पहले से मौजूद मतभेद इस घटना के बाद और अधिक स्पष्ट दिखाई दिए।

    हालिया एपिसोड में साप्ताहिक टास्क के बाद प्रतियोगियों को दो टीमों में बांटा गया। टास्क जीतने वाली टीम को रहने और अन्य सुविधाओं में प्राथमिकता मिली, जबकि दूसरी टीम को सीमित संसाधनों के साथ समय बिताना पड़ा। रात में सोने की व्यवस्था के दौरान शिल्पा शिंदे को उस सेल में भेजने का फैसला किया गया, जहां राम कपूर पहले से मौजूद थे। हालांकि, उन्होंने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए वहां जाने से साफ इनकार कर दिया।

    शो में मौजूद अन्य प्रतिभागियों ने शिल्पा शिंदे को समझाने का प्रयास किया कि दोनों के लिए अलग-अलग बेड की व्यवस्था है और किसी तरह की असुविधा नहीं होगी। इसके बावजूद उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदला। बातचीत के दौरान उन्होंने राम कपूर को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसे कई लोगों ने आपत्तिजनक और बॉडी शेमिंग से जोड़कर देखा। इसके बाद घर के अन्य सदस्य भी इस बहस में शामिल हो गए और माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा।

    स्थिति को संभालने की कोशिश के बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ। अंततः शिल्पा शिंदे की टीम के कुछ सदस्यों ने उनके साथ बाहर ही रात बिताने का फैसला किया। इस घटनाक्रम ने शो के भीतर दोनों टीमों के बीच पहले से मौजूद खींचतान को और बढ़ा दिया। एपिसोड के प्रसारण के बाद इस पूरे मामले पर दर्शकों की भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    शो में शिल्पा शिंदे और राम कपूर के बीच शुरुआत से ही मतभेद देखने को मिले हैं। कई मौकों पर दोनों एक-दूसरे की बातों का विरोध करते और तीखी बहस करते नजर आए हैं। हालिया एपिसोड में भी सोने की व्यवस्था से पहले दोनों के बीच अन्य मुद्दों पर कहासुनी हुई थी, जिससे उनके रिश्तों में तनाव साफ दिखाई दिया। इसी कारण यह नया विवाद भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

    शिल्पा शिंदे इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुकी हैं। हाल के एपिसोड में उन्हें एक अन्य प्रतिभागी की निजी जिंदगी पर टिप्पणी करने के कारण भी फटकार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में लगातार सामने आ रहे विवाद शो के माहौल को और अधिक प्रतिस्पर्धी तथा तनावपूर्ण बना रहे हैं।

    रियलिटी शो में प्रतिभागियों के बीच मतभेद और तीखी बहसें अक्सर देखने को मिलती हैं, लेकिन किसी की शारीरिक बनावट को लेकर की गई टिप्पणी सामाजिक स्तर पर संवेदनशील मानी जाती है। यही वजह है कि इस घटना ने केवल शो के भीतर ही नहीं बल्कि दर्शकों के बीच भी चर्चा को जन्म दिया है। आने वाले एपिसोड में इस विवाद का असर प्रतियोगियों के रिश्तों और खेल की रणनीति पर किस तरह पड़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • न्यायिक गरिमा और आचार संहिता पर उठे गंभीर सवाल: कार्यकाल के दौरान गैस एजेंसी चलाने के विवाद में घिरे पूर्व मुख्य न्यायाधीश

    न्यायिक गरिमा और आचार संहिता पर उठे गंभीर सवाल: कार्यकाल के दौरान गैस एजेंसी चलाने के विवाद में घिरे पूर्व मुख्य न्यायाधीश

    नई दिल्ली । देश की उच्च न्यायपालिका में संवैधानिक पदों पर आसीन न्यायाधीशों के लिए निर्धारित नैतिक आचार संहिता और नियमों की अनदेखी का एक अत्यंत संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और बाद में मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे चुके एक सेवानिवृत्त जस्टिस अपने लगभग 16 वर्षों के लंबे न्यायिक कार्यकाल के दौरान समानांतर रूप से एक एलपीजी गैस वितरण एजेंसी का संचालन भी करते रहे। इस पूरे मामले का आधिकारिक भंडाफोड़ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े एक डीलरशिप विवाद और एजेंसी के पूर्व प्रबंधक की विधवा द्वारा उच्च न्यायालय में दायर की गई एक रिट याचिका के माध्यम से हुआ है, जिसने न्यायिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

    प्राप्त विवरणों और दस्तावेजों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ने वर्ष 1984 में संबंधित व्यक्ति को किचन फ्लेम के नाम से एक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप आवंटित की थी। स्थापित नियमों और अलिखित न्यायिक आचार संहिता के अनुसार, संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीशों के लिए यह अनिवार्य माना जाता है कि उनका सरकार, निजी पक्षों अथवा सार्वजनिक उपक्रमों के साथ किसी भी प्रकार का आर्थिक, व्यावसायिक या संविदात्मक संबंध नहीं होना चाहिए ताकि हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके बावजूद, संबंधित न्यायाधीश नवंबर 2024 में मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होने तक इस व्यावसायिक गैस एजेंसी के वैधानिक मालिक बने रहे, जिसे प्रथम दृष्टया स्थापित सेवा नियमों और नैतिक मापदंडों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।

    अत्यंत महत्वपूर्ण न्यायिक पदों पर आसीन रहने के बावजूद इस व्यावसायिक समझौते को समय-समय पर नवीनीकृत भी कराया जाता रहा। संबंधित न्यायाधीश ने अस्सी के दशक के मध्य में एक अधिवक्ता के रूप में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी, जिसके बाद वर्ष 2008 में वे उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त हुए और वर्ष 2023 में पदोन्नत होकर मुख्य न्यायाधीश बने। इस पूरे सफर के दौरान गैस एजेंसी के अनुबंध को कई बार रिन्यू कराया गया, जिसकी वैधता वर्ष 2030 तक के लिए बढ़ा दी गई थी। तेल कंपनी के साथ हुए सबसे हालिया समझौते के आधिकारिक स्टाम्प पेपर पर संबंधित न्यायाधीश के हस्ताक्षर और तस्वीरें भी मौजूद पाई गईं, जो इस व्यावसायिक गतिविधि में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता को प्रमाणित करती हैं।

    इस पूरे गुत्थी का खुलासा तब हुआ जब उक्त गैस एजेंसी का कामकाज संभालने वाले पूर्व प्रबंधक की विधवा ने मालिकाना हक को अपने नाम पर स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण ली। इसी विधिक प्रक्रिया के दौरान दिसंबर 2025 में प्रशासन के पास एक आधिकारिक जनशिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि गैस एजेंसी के वास्तविक मालिक एक पूर्णकालिक न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे हैं। इस गंभीर शिकायत के आधार पर तेल कंपनी ने संबंधित पूर्व न्यायाधीश को लगातार कई कारण बताओ नोटिस जारी किए। कंपनी का स्पष्ट रुख था कि बिना पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी संवैधानिक पद पर रहते हुए व्यावसायिक एजेंसी चलाना नियमों का उल्लंघन है, इसलिए क्यों न इस आवंटन को रद्द कर दिया जाए।

    न्यायिक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी संबंधित व्यक्ति की ओर से तेल कंपनी द्वारा जारी किए गए किसी भी कारण बताओ नोटिस का कोई विधिक जवाब दाखिल नहीं किया गया। अंततः प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जुलाई के प्रथम सप्ताह में किचन फ्लेम नामक इस एलपीजी डीलरशिप के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। लाइसेंस सस्पेंड होने के बाद पीड़ित परिवार ने दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिनका तर्क है कि मूल आवंटनकर्ता की गलतियों और प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण उन्हें बेवजह आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। यह पूरा मामला एक ऐसे समय में सामने आया है जब न्यायपालिका पहले से ही कुछ अन्य आंतरिक विवादों के कारण असहज स्थिति का सामना कर रही है, और इस नए घटनाक्रम ने न्यायिक शुचिता पर बहस को और तेज कर दिया है।

  • शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस में आगामी 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से ठीक पहले एक बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सपरिवार समन जारी किए जाने के बाद कामरहाटी विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ और कद्दावर विधायक मदन मित्रा ने मंगलवार रात को ही पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व से दूरी बना ली और सुबह होते ही ममता बनर्जी के आधिकारिक कालीघाट गुट को औपचारिक रूप से अलविदा कह दिया। तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद मदन मित्रा ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कई सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा पूरी तरह से गरमा गया है।

    एक प्रमुख बांग्ला समाचार चैनल को दिए गए अपने विस्तृत साक्षात्कार में पूर्व तृणमूल नेता ने पार्टी के भीतर व्याप्त सांगठनिक ढांचे और नेतृत्व की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में खुले मंच से यह दावा किया कि वह इस तथ्य को पूरी तरह साबित कर सकते हैं कि वर्तमान सत्ता पक्ष की टीम में शामिल प्रत्येक दस में से आठ लोग भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। उन्होंने स्वयं को पूरी तरह से पाक-साफ बताते हुए नेतृत्व को खुली चुनौती दी कि यदि कोई भी व्यक्ति उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमाणित कर देता है, तो वह राजनीति छोड़ने के साथ-साथ अत्यंत कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने विपक्ष के खेमे में जाने और वहां मौजूद अन्य नेताओं के संदर्भ में पूछे गए सवालों पर स्पष्ट किया कि परिस्थितिजन्य राजनीति के तहत बड़े सांगठनिक बदलाव अब अवश्यंभावी हो चुके हैं।

    अभिषेक बनर्जी के पार्टी में तेजी से बढ़ते प्रभाव और उनके काम करने के तौर-तरीकों को मुख्य निशाना बनाते हुए मदन मित्रा ने भूतकाल की राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अभिषेक बनर्जी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था, तब उनके सामने संगठन में पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय और सुब्रत बख्शी जैसे अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ चेहरे मौजूद थे। आरोप के अनुसार, इन वरिष्ठ चेहरों को आगे रखकर पृष्ठभूमि से पूरी तरह से समानांतर सत्ता चलाने का प्रयास किया गया। मित्रा ने वर्तमान सांगठनिक गतिविधियों को बेहद नकारात्मक बताते हुए आरोप लगाया कि समकालीन राजनीति में इतनी जटिल और रणनीतिक प्रवृत्तियां किसी अन्य नेता में नहीं हैं और उनके सामने विरोधी राजनीतिक दल जैसे माकपा और भाजपा के नेता भी काफी पीछे नजर आते हैं।

    राजनीतिक हलकों में इस प्रकार के तीखे बयानों के बाद संभावित सुरक्षा खतरों और पार्टी की ओर से होने वाली किसी भी जवाबी कार्रवाई के डर के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का मदन मित्रा ने बेहद बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनके मन से किसी भी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह शांत हैं। उन्होंने आगे पलटवार करते हुए कहा कि उनके ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव बनाने या संगठनात्मक हमला करने का साहस विरोधियों में नहीं है। अभिषेक बनर्जी के क्षेत्रीय जनाधार पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके स्थानीय क्षेत्र के नागरिक भी उनके साथ खड़े नहीं हैं, जिसके संबंध में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिसका आज तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक खंडन जारी नहीं किया जा सका है।

  • बीमारी पर टिप्पणी से भड़कीं हिना खान, शिल्पा शिंदे के बयानों का दिया करारा जवाब, रॉकी जायसवाल ने भी पुराने विवाद उठाकर लगाए गंभीर सवाल

    बीमारी पर टिप्पणी से भड़कीं हिना खान, शिल्पा शिंदे के बयानों का दिया करारा जवाब, रॉकी जायसवाल ने भी पुराने विवाद उठाकर लगाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली ।टेलीविजन जगत की दो चर्चित अभिनेत्रियों हिना खान और शिल्पा शिंदे के बीच शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में शिल्पा शिंदे द्वारा हिना खान की कैंसर से जुड़ी यात्रा पर की गई टिप्पणी के बाद दोनों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे मामले में हिना खान ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की गंभीर बीमारी पर सवाल उठाना या उसका मजाक बनाना संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है। उनके साथ पति रॉकी जायसवाल ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब शिल्पा शिंदे ने हिना खान की कैंसर से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी पर सवाल उठाए। उन्होंने यह टिप्पणी की कि बीमारी को लेकर जिस तरह से बातें सामने आईं, उस पर उन्हें संदेह है और उन्होंने यह भी पूछा कि इलाज इतनी जल्दी कैसे पूरा हो गया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई, जिसके बाद हिना खान ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए स्पष्ट किया कि किसी की स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों पर बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं है।

    हिना खान ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से गुजरने वाले लोगों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान केवल संबंधित व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उन सभी मरीजों को भी प्रभावित कर सकते हैं जो इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सार्वजनिक मंचों पर किसी की बीमारी को लेकर गैर-जिम्मेदार टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

    इस विवाद के दौरान हिना खान और रॉकी जायसवाल ने शिल्पा शिंदे के पुराने यौन उत्पीड़न मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने उस प्रकरण को गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में लगाए गए आरोपों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। हिना ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए जाएं और बाद में वे गलत साबित हों, तो इससे वास्तविक पीड़ितों के लिए न्याय की प्रक्रिया और अधिक कठिन हो सकती है।

    हिना ने यह भी कहा कि यौन उत्पीड़न जैसे मामलों में अत्यधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति की प्रतिष्ठा या मानसिक स्थिति ऐसे आरोपों से प्रभावित हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उनके अनुसार ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदार व्यवहार बेहद आवश्यक है।

    रॉकी जायसवाल ने भी इस पूरे विवाद में अपनी राय रखते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति को दूसरे की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रभाव रखने वाले लोगों के बयान लाखों लोगों तक पहुंचते हैं, इसलिए शब्दों का चयन सोच-समझकर किया जाना चाहिए।

    हिना खान ने यह भी हैरानी जताई कि पुराने विवादों के बावजूद संबंधित पक्षों के बीच बाद में दोबारा पेशेवर सहयोग कैसे हुआ। उनका कहना था कि यदि किसी मामले में इतने गंभीर आरोप लगाए गए थे, तो बाद की परिस्थितियां स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न खड़े करती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि रियलिटी शो के दौरान इस विषय का उल्लेख नहीं किया गया था, जबकि बाद में इसे सार्वजनिक रूप से सामने लाया गया।

    फिलहाल दोनों अभिनेत्रियों के बयानों के बाद यह विवाद मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि अब तक इस विवाद को लेकर किसी पक्ष की ओर से कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों के सार्वजनिक बयानों ने इस मुद्दे को नई बहस का विषय बना दिया है।

  • अदनान शेख के बयान पर उर्फी जावेद का तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस …

    अदनान शेख के बयान पर उर्फी जावेद का तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस …


    नई दिल्ली ।
    सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अदनान शेख की एक टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक पॉडकास्ट के दौरान विधवा और तलाकशुदा महिलाओं पर दिए गए उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कई लोगों ने उनकी भाषा और शब्दों के चयन पर आपत्ति जताई, जबकि अभिनेत्री और सोशल मीडिया हस्ती उर्फी जावेद ने भी इस मामले में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद यह मुद्दा इंटरनेट पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया।

    विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक बातचीत के दौरान अदनान शेख से इस्लाम में चार शादियों से जुड़े विषय पर सवाल पूछा गया। जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति विधवा या तलाकशुदा महिला से विवाह करना चाहता है तो समाज को इसका विरोध नहीं करना चाहिए। हालांकि अपनी बात समझाने के दौरान उन्होंने महिलाओं के लिए एक ऐसा शब्द इस्तेमाल किया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने अपमानजनक और असंवेदनशील माना। बयान सामने आने के बाद उसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो वायरल होने के बाद अभिनेत्री उर्फी जावेद ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि इस तरह की भाषा बोलने की अनुमति ऐसे लोगों को क्यों मिलनी चाहिए। उर्फी ने महिलाओं के सम्मान और गरिमा का मुद्दा उठाते हुए बयान की आलोचना की। उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद और अधिक चर्चा में आ गया तथा सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय व्यक्त की।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई उपयोगकर्ताओं ने भी अदनान शेख के बयान पर आपत्ति दर्ज कराई। लोगों का कहना है कि किसी भी महिला के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। कई प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि यदि उनका उद्देश्य विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्विवाह का समर्थन करना था, तब भी अपनी बात सम्मानजनक और संवेदनशील भाषा में रखी जानी चाहिए थी। वहीं कुछ लोगों ने सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदारी के साथ बयान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सोशल मीडिया पर सार्वजनिक व्यक्तियों के बयानों को लेकर जवाबदेही और संवेदनशीलता पर लगातार चर्चा होती रही है। किसी भी टिप्पणी का प्रभाव लाखों लोगों तक पहुंचता है, इसलिए शब्दों के चयन को लेकर अधिक सतर्क रहने की अपेक्षा की जाती है। विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर दिए गए बयान व्यापक सामाजिक प्रतिक्रिया का कारण बन सकते हैं।

    फिलहाल इस पूरे मामले में अदनान शेख की ओर से विवाद को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर यह बहस जारी है कि सार्वजनिक मंचों पर व्यक्त किए जाने वाले विचारों में भाषा की मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रभावशाली व्यक्तियों के सार्वजनिक बयान समाज में किस तरह का संदेश छोड़ते हैं और उनकी जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है।

  • महाराष्ट्र के मंत्री का आमिर खान पर सीधा हमला: तीसरी शादी को लेकर दिया विवादित बयान, सियासी गलियारों में मची हलचल

    महाराष्ट्र के मंत्री का आमिर खान पर सीधा हमला: तीसरी शादी को लेकर दिया विवादित बयान, सियासी गलियारों में मची हलचल


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता आमिर खान एक बार फिर अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को लेकर बड़े राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता नितेश राणे ने आमिर खान की कथित तीसरी शादी को लेकर बेहद तीखा और आक्रामक रुख अपनाया है। राणे ने अभिनेता पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें ‘लव जिहाद का ब्रांड एंबेसडर’ तक कह डाला है। इस बयान के सामने आने के बाद फिल्म उद्योग से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में एक नई बहस छिड़ गई है और सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा नेता नितेश राणे अपने बेबाक और कड़े बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान आमिर खान के पिछले विवाहों और हालिया चर्चाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ऐसी शादियां समाज में एक खास तरह का संदेश देती हैं, जिसे वे स्वीकार्य नहीं मानते। राणे ने अभिनेता के निजी फैसलों को सामाजिक और धार्मिक चश्मे से देखते हुए उन पर यह गंभीर टिप्पणी की है। महाराष्ट्र की राजनीति में इस बयान को लेकर अचानक से तापमान बढ़ गया है।

    आमिर खान की बात करें तो वे अपनी बेहतरीन फिल्मों और अभिनय के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अपनी शादियों और बयानों के कारण वे अक्सर ट्रोल्स और कुछ राजनीतिक संगठनों के निशाने पर भी रहे हैं। उनकी पहली शादी रीना दत्ता और दूसरी शादी किरण राव से हुई थी, और दोनों ही शादियां आपसी सहमति से तलाक के मोड़ पर खत्म हुईं। हाल के दिनों में उनकी तीसरी शादी से जुड़ी कुछ खबरें और अफवाहें मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तैर रही थीं, जिसने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

    इस पूरे मामले पर अभी तक आमिर खान या उनके आधिकारिक प्रवक्ताओं की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर आमिर खान ऐसे व्यक्तिगत विवादों पर चुप्पी साधे रखना ही पसंद करते हैं, लेकिन फिल्म जगत के कई समर्थकों और प्रशंसकों ने नितेश राणे के इस बयान को पूरी तरह से गैर-जरूरी और किसी के निजी जीवन में अत्यधिक हस्तक्षेप बताया है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी भाजपा पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयानों का सहारा लेने का आरोप लगाया है।

    चुनावों और राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस तरह के संवेदनशील मुद्दों का उछलना कोई नई बात नहीं है। नितेश राणे के इस बयान ने मनोरंजन जगत और राजनीति के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद महज एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर शांत हो जाता है या फिर इस पर बॉलीवुड और अन्य राजनीतिक दलों की तरफ से कोई बड़ी और संगठित प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

  • ढाका में भारत ने जताई कड़ी आपत्ति: सेमिनार में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर किया विरोध

    ढाका में भारत ने जताई कड़ी आपत्ति: सेमिनार में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर किया विरोध


    नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर दिखाए गए कथित गलत नक्शे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह मामला उस समय सामने आया जब एक प्रस्तुति के दौरान भारतीय मानचित्र में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दर्शाया गया।

    यह सेमिनार बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (BIISS) में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का विषय था ‘सार्क को फिर से मजबूत बनाने के रास्ते’। सेमिनार में भारत में बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त रह चुके अहमद तारिक करीम प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शित किए गए नक्शे पर भारतीय पक्ष ने आपत्ति जताई।

    ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सेकंड सेक्रेटरी पूजा कुमारी झा ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रस्तुत किया गया नक्शा गलत है और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस तरह के चित्रण का विरोध करता है।

    करीम ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि यह नक्शा केवल सांकेतिक (प्रतीकात्मक) उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया था और इसमें वास्तविक सीमाओं को प्रदर्शित नहीं किया गया है। हालांकि, भारतीय अधिकारी ने इस स्पष्टीकरण से असहमति जताते हुए दोबारा भारत का आधिकारिक रुख दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।

    बाद में करीम ने पूछा कि क्या पूजा झा भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इस पर उन्होंने स्वयं को भारतीय उच्चायोग की अधिकारी बताया। इसके बाद करीम ने कहा कि उनकी आपत्ति को नोट कर लिया गया है और फिर अपनी प्रस्तुति जारी रखी।

    सेमिनार में बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। अपने संबोधन में उन्होंने दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और सार्क को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संगठन की कार्यक्षमता, वित्तीय मजबूती और बेहतर फॉलो-अप व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही।

    ओबैद ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेश आने वाले महीनों में सार्क सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ नई पहल पर विचार कर रहा है। इनमें ढाका में मौजूद सार्क देशों के राजदूतों के साथ बैठकें और काठमांडू स्थित सार्क सचिवालय के साथ समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने पूजा कुमारी झा की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मौके पर ही भारत का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट रूप से सामने रखा।

  • Lock Upp 2 में आकांक्षा चौधरी और श्रेया कालरा के बीच बढ़ा विवाद, तीखी बहस और आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    Lock Upp 2 में आकांक्षा चौधरी और श्रेया कालरा के बीच बढ़ा विवाद, तीखी बहस और आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    नई दिल्ली । रियलिटी शो Lock Upp 2 में प्रतियोगियों के बीच बढ़ते विवादों का सिलसिला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। हालिया एपिसोड में आकांक्षा चौधरी और श्रेया कालरा के बीच हुआ विवाद दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहा। एक सामान्य बहस से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गया, जिसके दौरान दोनों के बीच तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। एपिसोड के प्रसारण के बाद इस घटना पर सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया सामने आई।

    शो में यह विवाद खाने के प्रबंधन से जुड़े एक टास्क के दौरान शुरू हुआ। श्रेया कालरा उस समय घर के सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रही थीं। बातचीत के दौरान उन्होंने आकांक्षा से पुराने व्यवहार को लेकर माफी मांगने की बात कही। हालांकि दोनों के बीच सहमति नहीं बन सकी और माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गया। बाद में श्रेया ने आकांक्षा के लिए भोजन मंगवाया, लेकिन आकांक्षा ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    इसी दौरान दोनों के बीच हुई बहस में हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। शो में दिखाए गए घटनाक्रम के अनुसार, इस दौरान श्रेया का हाथ आकांक्षा के माथे से लग गया। श्रेया ने इसे अनजाने में हुई घटना बताते हुए माफी भी मांगी, लेकिन इसके बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ। इसके बाद आकांक्षा ने गुस्से में कई तीखी बातें कहीं, जिनकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी होने लगी।

    एपिसोड में आगे दोनों के बीच फिर से बहस हुई, जिसमें व्यक्तिगत टिप्पणियां भी सुनने को मिलीं। प्रसारित दृश्य में आकांक्षा ने श्रेया की निजी जिंदगी को लेकर भी टिप्पणी की, जिसे लेकर दर्शकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। रिपोर्ट्स के अनुसार विवाद के दौरान दोनों के बीच आक्रामक व्यवहार भी देखने को मिला और घर के सामान को लेकर भी तनाव की स्थिति बनी। हालांकि शो के प्रसारित एपिसोड में जो घटनाएं दिखाई गईं, उन्हीं के आधार पर दर्शकों ने अपनी राय व्यक्त की।

    घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में दर्शकों ने अपनी प्रतिक्रिया साझा की। कई यूजर्स ने आकांक्षा चौधरी के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाया गया। कुछ लोगों का मानना था कि श्रेया से हुई टक्कर जानबूझकर नहीं थी, जबकि कुछ दर्शकों ने पूरे घटनाक्रम को रियलिटी शो के दबाव और प्रतिस्पर्धा का परिणाम बताया। वहीं कुछ यूजर्स ने दोनों पक्षों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए।

    रियलिटी शो में प्रतिस्पर्धा के दौरान ऐसे विवाद अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं और दर्शकों की राय भी अलग-अलग होती है। Lock Upp 2 का यह एपिसोड भी इसी कारण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। फिलहाल शो में आगे दोनों प्रतियोगियों के बीच संबंध किस दिशा में बढ़ते हैं और अन्य प्रतिभागी इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर दर्शकों की नजर बनी हुई है। आने वाले एपिसोड में इस पूरे घटनाक्रम का असर घर के माहौल और प्रतियोगिता की रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।

  • शाहरुख खान की फिल्म 'किंग' के 450 करोड़ के भारी-भरकम बजट पर निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने तोड़ी चुप्पी, सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

    शाहरुख खान की फिल्म 'किंग' के 450 करोड़ के भारी-भरकम बजट पर निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने तोड़ी चुप्पी, सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान की आने वाली फिल्म ‘किंग’ को लेकर इन दिनों सिनेमा जगत और सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा बनी हुई है। इस फिल्म को शाहरुख खान के पूरे फिल्मी करियर की अब तक की सबसे महंगी और भव्य फिल्म बताया जा रहा था। मीडिया और सिनेमाई गलियारों में लगातार यह दावा किया जा रहा था कि इस मेगा-प्रोजेक्ट का कुल बजट लगभग 450 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इन तमाम कयासों और बड़ी खबरों के बीच अब फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने खुद सामने आकर सच्चाई बयां की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज करते हुए एक बड़ा बयान दिया है, जिसने फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है।

    फिल्म ‘किंग’ की रिलीज का प्रशंसक काफी समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इस फिल्म के जरिए शाहरुख खान लगभग तीन साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर मुख्य भूमिका में बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी करने जा रहे हैं। इसी भारी उत्सुकता के बीच एक हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि यह फिल्म बजट के मामले में भारतीय सिनेमा के पिछले कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ देगी और इसका निर्माण 450 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व लागत से किया जा रहा है। बजट की यह खबर जैसे ही इंटरनेट पर वायरल हुई, वैसे ही फिल्म को लेकर तरह-तरह की वित्तीय चर्चाएं शुरू हो गईं।

    मध्य प्रदेश। इन तमाम उड़ती खबरों और दावों के बीच बुधवार रात को फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली ट्वीट किया। उन्होंने बजट से जुड़ी खबरों की ओर इशारा करते हुए अपने ट्वीट में सिर्फ एक शब्द लिखा— ‘गलत’। इसके अलावा सिद्धार्थ ने अपने पोस्ट में कोई अन्य स्पष्टीकरण या विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। हालांकि, उनका यह एक शब्द का साफ जवाब इंटरनेट यूज़र्स और समीक्षकों के लिए यह समझने के लिए काफी था कि शाहरुख खान की फिल्म ‘किंग’ का वास्तविक बजट 450 करोड़ रुपये नहीं है और मीडिया में चल रहे आंकड़े महज कोरी अफवाह हैं।

    अगर शाहरुख खान की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों के इतिहास पर नजर डालें, तो उनके करियर में साल 2023 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जवान’ इस सूची में सबसे ऊपर काबिज है। इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म का कुल निर्माण बजट लगभग 400 करोड़ रुपये आंका गया था। वहीं, उनके करियर की दूसरी सबसे बड़ी और महंगी फिल्म ‘पठान’ मानी जाती है, जिसका कुल बजट 350 करोड़ रुपये के आसपास दर्ज किया गया था। यही वजह थी कि कयास लगाए जा रहे थे कि आगामी फिल्म ‘किंग’ इन दोनों ही फिल्मों के बजट रिकॉर्ड को आसानी से पार कर जाएगी, लेकिन निर्देशक के ट्वीट ने इन अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।

    फिल्म के जॉनर और मेकिंग की बात करें तो ‘किंग’ एक हाई-ऑक्टेन एक्शन और स्टंट-बेस्ड फिल्म होने वाली है, जिसमें शाहरुख खान एक बार फिर अपने खतरनाक एक्शन अवतार में दिखाई देंगे। फिल्म की भव्यता को बढ़ाने के लिए इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टंट्स और कई शानदार विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) सीक्वेंसेज का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर मेकर्स पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। यही कारण है कि फिल्म के बजट को लेकर इतनी बड़ी-बड़ी रिपोर्ट्स सामने आ रही थीं।

    बजट के अलावा यह फिल्म अपनी बेहतरीन और कद्दावर स्टार कास्ट को लेकर भी लगातार सुर्खियों बटोर रही है। इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि इसमें शाहरुख खान पहली बार अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करते हुए नजर आने वाले हैं। इसके अलावा फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट में बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रानी मुखर्जी, दीपिका पादुकोण, जयदीप अहलावत, अभिषेक बच्चन और अनिल कपूर जैसे प्रतिभावान और बड़े सितारे भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे, जो इस प्रोजेक्ट को इस साल की सबसे बड़ी मल्टीस्टारर फिल्म बनाते हैं।

    फिल्म की रिलीज टाइमलाइन को लेकर जो जानकारियां सामने आ रही हैं, उसके मुताबिक शाहरुख खान की यह बहुप्रतीक्षित फिल्म इस साल के अंत में बड़े पर्दे पर दस्तक दे सकती है। मेकर्स इसे दिसंबर के महीने में क्रिसमस के खास और बड़े मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज करने की पूरी योजना बना रहे हैं। फिलहाल, निर्देशक सिद्धार्थ आनंद के इस तीखे खंडन के बाद अब फैंस और ट्रेड एक्सपर्ट्स के बीच इस बात की नई बहस छिड़ गई है कि अगर फिल्म का बजट 450 करोड़ रुपये नहीं है, तो आखिर असल लागत कितनी है।