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  • धर्म प्रचार छोड़ने पर साध्वी हर्षा पर हमला, संत समाज से बहिष्कार, सोशल मीडिया पर गालियां और धमकियां!

    धर्म प्रचार छोड़ने पर साध्वी हर्षा पर हमला, संत समाज से बहिष्कार, सोशल मीडिया पर गालियां और धमकियां!



    नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में साध्वी हर्षा रिछारिया ने भारी मन से घोषणा की कि वह धर्म प्रचार का काम छोड़कर वापस अपने पुराने पेशे एंकरिंग में लौट रही हैं। हर्षा का कहना है कि धर्म प्रचार के दौरान उन्हें संत समाज से न सिर्फ स्वीकृति नहीं मिली, बल्कि धमकियां, गंदी-गंदी बातें और धर्म परिवर्तन के ऑफर भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें “धर्म छोड़कर लौट रही” मानकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरे धर्म के लोगों को भी उनके खिलाफ भड़काया जा रहा है।
    हर्षा ने स्पष्ट किया कि वह सनातनी हैं और हमेशा रहेंगी, लेकिन इस मानसिक उत्पीड़न को वह और बर्दाश्त नहीं कर सकतीं।

    हर्षा रिछारिया का नाम देशभर में तब चर्चा में आया जब 4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में वह निरंजनी अखाड़े की भव्य पेशवाई में संतों के साथ रथ पर सवार दिखाई दीं। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और लोग उन्हें ‘महाकुंभ की सबसे सुंदर साध्वी’ कहने लगे। लेकिन इसी प्रसिद्धि के साथ विवाद भी जुड़ गया। कुछ धार्मिक गुरुओं ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह “धर्म को प्रदर्शन का हिस्सा बनाना” है और इससे समाज में गलत संदेश फैलता है।

    हर्षा ने बताया कि इस लोकप्रियता के बाद उन्हें संत समाज में स्वीकृति नहीं मिली। जब भी वह किसी संत से मिलने जातीं, तो उन्हें घंटों इंतजार कराया जाता। उनके पुराने एंकरिंग पेशे को लेकर उन्हें ‘पाप’ का भाव दिया जाता और उनसे सफाई मांगी जाती।

    हर्षा ने कहा कि उन्हें अपने पुराने पेशे पर गर्व है और वही पेशा उन्हें पहचान देता था, लेकिन धर्म के रास्ते पर आने के बाद उन्हें संदेह, तिरस्कार और भेदभाव का सामना करना पड़ा।

    हर्षा का आरोप है कि कुछ धार्मिक ठेकेदार और संत उनके खिलाफ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। दिसंबर 2025 में माघ मेले में शिविर लगाने के लिए जमीन न मिलने की घटना उन्हें सबसे ज्यादा आहत कर गई। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अधिकारियों ने उन्हें जमीन देने का आश्वासन दिया, लेकिन जैसे ही कुछ प्रभावशाली संतों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने अधिकारियों पर दबाव बनाया और जमीन आवंटन की प्रक्रिया रोक दी गई। हर्षा ने कहा कि उन्होंने कभी श्रद्धालुओं से एक पैसा नहीं लिया और सारी व्यवस्था अपने खर्च पर चलाती थीं।

    हर्षा का मानना है कि जब कोई लड़की धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ती है, तो कुछ लोग उसे नीचे गिराने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ उत्पीड़न इसलिए बढ़ा क्योंकि उन्हें “धर्म प्रचार छोड़ने” की बात कहते हुए लोगों को बहस का मौका मिल गया। हर्षा ने यह भी कहा कि उन्हें कुछ लोगों द्वारा धर्म परिवर्तन के ऑफर दिए जा रहे हैं और धमकी भरे संदेश भी मिल रहे हैं।

    अंत में हर्षा ने युवाओं और महिलाओं को सलाह दी कि धर्म से जुड़ने के लिए अपने परिवार और घर के मंदिर तक ही सीमित रहें और किसी के पीछे अंधे होकर न चलें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ धर्म का प्रचार छोड़ा है, सनातन धर्म नहीं। साथ ही कहा कि अगर भविष्य में परिस्थितियां बदलती हैं, तो वह फिर से इस मार्ग पर लौट सकती हैं।

  • सुनीता आहूजा ने गोविंदा पर फिर खोला मोर्चा, कहा- गोविंदा को कभी माफ नहीं करूंगी, सतर्क हो जा बेटा…

    सुनीता आहूजा ने गोविंदा पर फिर खोला मोर्चा, कहा- गोविंदा को कभी माफ नहीं करूंगी, सतर्क हो जा बेटा…


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित कपल सुनीता आहूजा और गोविंदा लंबे समय से अपने रिश्ते को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। कई बार तलाक की अफवाहें आईं, लेकिन दोनों ने उन्हें नकार दिया। वहीं अब सुनीता ने एक बार फिर गोविंदा को लेकर शॉकिंग स्टेटमेंट दिया है, जिसमें उन्होंने गोविंदा के अफेयर और रिश्ते पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी।

    सुनीता ने मिसमालिनी को दिए इंटरव्यू के प्रोमो में कहा, मैं गोविंदा को माफ नहीं करूंगी। मैं नेपाल की हूं।

    इसके बाद उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, खुखरी निकाल दूंगी, ना तो सबकी हालत खराब हो जाएगी। इसलिए बोलती हूं, सतर्क हो जा बेटा अभी भी।
    सुनीता ने आगे बताया कि गोविंदा के आसपास ऐसी लड़कियां अक्सर आती हैं, लेकिन उन्होंने कहा, तुम थोड़ी बेवकूफ हो। तुम 63 के हो गए हो। तुम्हें अभी टीना की शादी करवानी है, यश का करियर है।
    गोविंदा के बेटे यश के करियर में उनके कम शामिल होने पर सुनीता ने कड़ा रुख दिखाया।
    उन्होंने कहा कि गोविंदा ने बेटे की मदद नहीं की और खुद उनसे भी कोई सहयोग नहीं मांगा। उन्होंने कहा, “मैंने उसके मुंह पर बोला कि तू बाप है कि क्या है?

    पिछले साल गणेश चतुर्थी पर सुनीता ने तलाक को लेकर कहा था कि मीडिया उन्हें अलग नहीं कर सकता। उन्होंने कहा था, हमको साथ में देखकर… अगर कुछ होता तो इतने नजदीक थोड़ी दिखते? हमारी दूरियां होती हैं। कोई हम दोनों को अलग नहीं कर सकता। मेरा गोविंदा सिर्फ मेरा है और किसी का नहीं।सूत्रों के मुताबिक सुनीता अपने व्लॉग और इंटरव्यू में गोविंदा के साथ अपने रिश्ते और अनबन पर खुलकर बात करती हैं, लेकिन गोविंदा इस पर कभी प्रतिक्रिया नहीं देते।

  • दिल्ली कॉन्सर्ट में हनी सिंह का विवादित बयान वायरल वीडियो पर दी सफाई बोले- भूल-चूक माफ’

    दिल्ली कॉन्सर्ट में हनी सिंह का विवादित बयान वायरल वीडियो पर दी सफाई बोले- भूल-चूक माफ’


    नई दिल्ली । फेमस सिंगर और रैपर यो यो हनी सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में फंस गए हैं। हाल के दिनों में बैक-टू-बैक गानों और लाइव कॉन्सर्ट्स के जरिए सुर्खियों में बने हनी सिंह का दिल्ली कॉन्सर्ट अब उनके लिए मुश्किलों का कारण बन गया है। इस कॉन्सर्ट के दौरान मंच से की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। दरअसल दिल्ली में आयोजित कॉन्सर्ट के दौरान हनी सिंह ने ठंड के मौसम को लेकर एक अश्लील और अभद्र टिप्पणी की। उन्होंने कार और निजी पलों को लेकर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिन्हें सार्वजनिक मंच पर कहना कई लोगों को नागवार गुजरा।
    इतना ही नहीं इस दौरान कुछ गालियां और अपशब्द भी बोले गए जिसके बाद दर्शकों के एक हिस्से ने नाराजगी जाहिर की। जैसे ही इस बयान की क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आई देखते ही देखते यह वायरल हो गई। वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर हनी सिंह को जमकर ट्रोल किया जाने लगा। कई यूजर्स ने उनके भाषा स्तर और मंच की मर्यादा पर सवाल उठाए। किसी ने लिखा कि उम्र के साथ उनकी समझ कम हो गई है तो किसी ने तंज कसते हुए कहा कि वह फिर से गलत आदतों की ओर लौट रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि एक बड़े कलाकार से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती।

    लगातार बढ़ते विरोध और आलोचना के बीच आखिरकार हनी सिंह ने खुद सामने आकर सफाई दी। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें वह वायरल क्लिप को लेकर अपनी बात रखते नजर आए। हनी सिंह ने कहा कि सुबह से उनका एक वीडियो एडिट करके सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है और पूरी बात को संदर्भ से अलग दिखाया गया है। अपने वीडियो में हनी सिंह ने यह भी बताया कि वह उस शो में मुख्य परफॉर्मर नहीं बल्कि सिर्फ एक गेस्ट के तौर पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि शो से दो दिन पहले उनका कुछ गायनेकोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट के साथ लंच था जहां कुछ विषयों पर बातचीत हुई थी उसी संदर्भ को गलत तरीके से पेश किया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर उनकी किसी बात से किसी को ठेस पहुंची है तो इसके लिए वह माफी मांगते हैं।

    हनी सिंह ने अपने पोस्ट के कैप्शन में साफ शब्दों में लिखा भूल-चूक माफ। उनके इस बयान के बाद कुछ फैंस ने उनका समर्थन किया जबकि कई लोग अब भी उनकी भाषा और सार्वजनिक मंच पर जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। यह पहला मौका नहीं है जब हनी सिंह अपने बयानों या गानों को लेकर विवादों में आए हों। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने सफाई देकर मामला शांत करने की कोशिश की है। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे कितना तूल पकड़ता है और इसका उनके आने वाले कॉन्सर्ट्स और प्रोजेक्ट्स पर क्या असर पड़ता है।

  • मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है

    मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष अबू आजमी ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे पर विवादित टिप्पणी की है। अबू आजमी ने राणे को बौना मंत्री और नेपाली बताते हुए धमकी दी कि अगर उन्हें ताकत मिले तो वह नितेश राणे की जुबान काट देंगे। अबू आजमी का यह बयान नितेश राणे के हालिया हिंदुत्व से जुड़ी टिप्पणियों और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयानबाजी पर आया है। आजमी ने राणे के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा यह बौना मंत्री बोलता है कि मस्जिद में घुसकर मुसलमानों को मारूंगा। क्या हम हिंजड़े हैं क्या हमें मारेगा तू उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके पास शक्ति हो तो वह इस बौने मंत्री की जुबान काट डालेंगे और उसे सबक सिखाएंगे।

    नितेश राणे के बयान पर प्रतिक्रिया

    नितेश राणे के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर दिए गए बयान के बाद यह विवाद उठ खड़ा है। राणे ने कहा था कि वह हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के लिए काम कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के धर्मनिरपेक्षता या ध्रुवीकरण के लिए नहीं। उन्होंने विशेष रूप से रामनवमी या हनुमान जयंती जैसे धार्मिक जुलूसों में पत्थरबाजी की घटनाओं पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जब ईद और मुहर्रम शांतिपूर्वक मनाए जा सकते हैं, तो रामनवमी या हनुमान जयंती पर ऐसा क्यों होता है। राणे ने कहा था कि उनका किसी खास समुदाय से विरोध नहीं है, लेकिन जो लोग जिहाद करना चाहते हैं, उनके खिलाफ उनकी आपत्ति स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग वंदे मातरम नहीं बोलते उन्हें पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए।

    अबू आजमी की कड़ी प्रतिक्रिया

    अबू आजमी ने नितेश राणे के इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि राणे का यह बयान मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ है। उन्होंने सवाल किया कि अगर राणे इतना बहादुर हैं तो क्यों नहीं मस्जिद में जाकर दिखाते हैं कि वह क्या कर सकते हैं। आजमी ने यह भी कहा कि राणे जैसे लोग यह कहते हैं कि अगर देश में रहना है तो वंदे मातरम बोलना होगा, लेकिन वह यह नहीं समझते कि हमें राम नवमी के दिन पानी लेकर खड़ा रहने का गर्व है।

    सपा नेता की भाषा पर सवाल


    आजमी का बयान, जो कि भारतीय राजनीति में एक नई कड़ी विवाद को जन्म दे सकता है, कई लोगों को आपत्ति दे रहा है। उनकी भाषा और बयानों में हिंसा की ओर इशारा करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे असहिष्णुता की ओर बढ़ने वाला कदम बताया है।

  • IND vs BAN विवाद पर तमीम इकबाल की सलाह: जज़्बात से नहीं, भविष्य को ध्यान में रखकर लें फैसले

    IND vs BAN विवाद पर तमीम इकबाल की सलाह: जज़्बात से नहीं, भविष्य को ध्यान में रखकर लें फैसले

    नई दिल्‍ली ।  भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे क्रिकेट विवाद पर बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। तमीम ने कहा कि इस तरह के अहम मामलों में भावनाओं के बजाय जिम्मेदारी और दूरदर्शिता के साथ सोचने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्दबाजी में फैसले लिए गए, तो उसका असर सिर्फ मौजूदा हालात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले एक दशक तक बांग्लादेश क्रिकेट को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

    भारत में टूर्नामेंट पर बांग्लादेश की आपत्ति
    फरवरी से भारत में प्रस्तावित टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस मुद्दे पर असमंजस की स्थिति में है और उसने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए भारत की यात्रा से इनकार किया है। BCB ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से अनुरोध किया है कि बांग्लादेश के मैच सह-मेजबान श्रीलंका में आयोजित किए जाएं। इस बीच विवाद तब और तेज हो गया जब आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान को रिलीज कर दिया। बांग्लादेश में इस फैसले को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों में तल्खी और बढ़ गई है।

    IND-BAN विवाद पर तमीम इकबाल की अपील
    भारत-बांग्लादेश क्रिकेट विवाद को लेकर तमीम इकबाल ने संयम बरतने की अपील की है। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां काफी संवेदनशील हैं और ऐसे माहौल में किसी भी तरह का जल्दबाजी वाला फैसला नुकसानदायक साबित हो सकता है। तमीम का मानना है कि अगर सभी संबंधित पक्ष आपस में संवाद करें तो कई जटिल मुद्दों का समाधान संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को सिर्फ मौजूदा हालात नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी स्थिति और टीम के भविष्य को भी ध्यान में रखना चाहिए। उनका कहना है कि हर फैसला इस सोच के साथ लिया जाना चाहिए कि वह लंबे समय में बांग्लादेश क्रिकेट और खिलाड़ियों के हित में हो।

    BCB को तमीम की सलाह
    तमीम इकबाल ने इस पूरे विवाद पर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि BCB को एक स्वतंत्र संस्था की तरह काम करना चाहिए। तमीम ने माना कि सरकार से संवाद जरूरी है, लेकिन किसी भी बड़े फैसले की जिम्मेदारी अंततः बोर्ड की ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनभावनाएं अक्सर जज्‍बात से संचालित होती हैं, लेकिन अगर हर निर्णय उसी आधार पर लिया जाए तो इतनी बड़ी क्रिकेट संस्था को सही तरीके से चलाना मुश्किल हो जाता है।

    तमीम ने आगाह किया कि आज लिया गया कोई भी कदम आने वाले 10 वर्षों तक बांग्लादेश क्रिकेट की दिशा तय कर सकता है। उनका कहना है कि फैसले भावनाओं से ऊपर उठकर इस बात को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए कि वे देश के क्रिकेट ढांचे और खिलाड़ियों के भविष्य के लिए कितने फायदेमंद हैं। तमीम के इस बयान से साफ है कि भारत–बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों को लेकर चल रहा विवाद केवल मौजूदा टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।

  • मथुरा में नए साल पर सनी लियोन के प्रोग्राम पर बवाल, भड़के साधु-संत, दी आंदोलन की चेतावनी

    मथुरा में नए साल पर सनी लियोन के प्रोग्राम पर बवाल, भड़के साधु-संत, दी आंदोलन की चेतावनी


    नई दिल्ली । नए साल के आगमन पर उत्तर प्रदेश में जगह-जगह रंगारंग कार्यक्रम हो रहे हैं. लेकिन ऐसे ही एक प्रोग्राम को लेकर मथुरा में माहौल गरमा गया. साधु-संत इसको लेकर नाराजगी जाहिर करने लगे और कार्यक्रम रद्द करने की मांग करने लगे. इस बाबत उन्होंने प्रशासन को पत्र लिखा और आंदोलन की चेतावनी भी दी. आखिरकार, साधु-संतों की धमकी व विरोध के चलते सनी लियोन का प्रोग्राम अब कैंसिल हो गया है. आइये जानते हैं पूरा मामला..
    दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने नए साल पर मथुरा में आयोजित होने वाले सनी लियोन के कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया था. उन्होंने होटल ललिता ग्रैंड और होटल द ट्रक में होने वाले इस आयोजन को ब्रजभूमि को कलंकित करने की साजिश बताया था.
    सोमवार को साधु-संतों ने ‘जिंदाबाद-मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया और कार्यक्रम को तुरंत निरस्त करने की मांग की. दिनेश फलाहारी महाराज ने पत्र लिखकर कहा कि यह दिव्य गोलोक भूमि योग, साधना और भजन की है. यहां फूहड़ता और अश्लीलता परोसने की अनुमति नहीं दी जाएगी. संतों का तर्क था कि ऐसी अभिनेत्री, जो पोर्न फिल्मों से जुड़ी रही हों, उनका ब्रज में आना धार्मिक भावनाओं को भड़काने जैसा है. उन्होंने प्रशासन से आयोजकों पर सख्त कार्रवाई करने की अपील की थी. फिलहाल, ये पूरा विवाद गहरा गया है और पुलिस भी अलर्ट हो गई है. मंगलवार को कन्फर्म किया गया कि सनी लियोन का प्रोग्राम रद्द कर दिया गया है.
  • पुंडरीक गोस्वामी यूपी पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उठाया विवाद कौन हैं ये युवा कथावाचक

    पुंडरीक गोस्वामी यूपी पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उठाया विवाद कौन हैं ये युवा कथावाचक


    बहराइच । उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में हाल ही में एक घटना ने विवाद को जन्म दिया जब पुलिस ने एक निजी कार्यक्रम के दौरान युवा कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और कई लोग इसे लेकर सवाल उठाने लगे कि क्या एक निजी आयोजन में पुलिस का इस प्रकार का सम्मान देना उचित था। पुलिस की इस अति भक्ति पर राज्य के डीजीपी ने बहराइच के एसपी से स्पष्टीकरण मांगा है और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

    कौन हैं पुंडरीक गोस्वामी

    पुंडरीक गोस्वामी एक प्रसिद्ध युवा कथावाचक हैं जो वृंदावन से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म 20 जुलाई 1988 को हुआ था और उन्होंने मात्र सात साल की उम्र से कथा सुनानी शुरू कर दी थी। वे उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए थे और वहां से अपनी शिक्षा पूरी की। पुंडरीक गोस्वामी श्रीभूति कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के पुत्र और प्रसिद्ध संत अतुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के पौत्र हैं। पुंडरीक गोस्वामी विश्व भर में गौड़ीय वैष्णव परंपरा का प्रचार कर रहे हैं। वे श्री कृष्ण श्रीमद्भागवतम भगवद गीता चैतन्य चरितामृत और राम कथा पर प्रवचन देते हैं। इसके अलावा वे समाज सेवा में भी सक्रिय हैं और वंचितों के लिए निशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन करते हैं। साथ ही वे गरीब बच्चों को शिक्षा भी प्रदान करते हैं।

    युवाओं के प्रेरणास्त्रोत

    पुंडरीक गोस्वामी ने गोपाल क्लब और निमाई पाठशाला जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत की है जिनके माध्यम से वे युवाओं को भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनके परिवार में 38 पीढ़ियों से भागवत कथा की परंपरा चली आ रही है जो उनके आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का कारण बनती है। ऑक्सफोर्ड से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखी और अब वे श्रीमद माधव-गौडेश्वर पीठम के 38वें आचार्य के रूप में कार्यरत हैं।

    विवाद का केंद्र: गार्ड ऑफ ऑनर

    यह घटना उस समय सामने आई जब पुलिस ने पुंडरीक गोस्वामी को बहराइच में एक निजी कार्यक्रम के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस कार्यक्रम का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं जिससे यह मामला विवाद का विषय बन गया। पुलिस की इस कार्रवाई ने कई सवाल उठाए जिनमें यह प्रमुख था कि क्या एक निजी व्यक्ति को पुलिस द्वारा इस तरह का सम्मान देना उचित था।

    यह घटना राज्य की पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच कुछ असहमति का कारण बन गई और डीजीपी ने बहराइच के एसपी से स्पष्टीकरण मांगा। सोशल मीडिया पर लोग इसे पुलिस की अति भक्ति और अनुशासनहीनता का उदाहरण मान रहे हैं। कई लोगों ने इस सवाल को उठाया कि क्या धार्मिक या सामाजिक व्यक्तित्वों को इस प्रकार का सरकारी सम्मान देना सही है।

    समाज में पुंडरीक गोस्वामी का योगदान

    पुंडरीक गोस्वामी का समाज में योगदान और धार्मिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता सराहनीय है। उन्होंने हमेशा भारतीय संस्कृति भक्ति परंपरा और समाज सेवा में अपनी भूमिका निभाई है। उनका प्रयास युवाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान से जोड़ने का है जो समाज की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है।  हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें सम्मानित करने का तरीका विवादास्पद हो सकता है लेकिन पुंडरीक गोस्वामी की व्यक्तिगत भूमिका और उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। वे आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं जो धार्मिक कार्यों में गहरी रुचि रखते हैं।

    इस विवाद के बावजूद पुंडरीक गोस्वामी का योगदान समाज और धर्म के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें सम्मानित करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा और समाज सेवा के माध्यम से बहुत से लोगों की मदद की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

  • 51 साल छोटी सारा अर्जुन को किस करने पर ट्रोल हुए राकेश बेदी बोले लोगों की आंख में गड़बड़ है

    51 साल छोटी सारा अर्जुन को किस करने पर ट्रोल हुए राकेश बेदी बोले लोगों की आंख में गड़बड़ है


    नई दिल्ली । हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मशहूर अभिनेता राकेश बेदी और युवा अभिनेत्री सारा अर्जुन के बीच एक दृश्य दिखाया गया था। इस वीडियो में राकेश सारा से स्टेज पर मिलने के दौरान उन्हें हग करते हैं और उनके कंधे पर किस करते हैं। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी और राकेश को ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। हालांकि अब राकेश ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है और कहा है कि यह केवल एक सामान्य अभिवादन था।

    राकेश और सारा का रिश्ता

    राकेश बेदी जो कि फिल्म धुरंधर में एक शातिर राजनेता का किरदार निभा रहे हैं और सारा अर्जुन जो उनकी बेटी का रोल निभा रही हैं दोनों के बीच एक मजबूत और पेशेवर बॉन्ड है। राकेश ने इस वीडियो को लेकर ट्रोलिंग का जवाब देते हुए कहा सारा मेरी उम्र से आधी भी नहीं हैं और फिल्म में उन्होंने मेरी बेटी का किरदार निभाया है। जब भी वह सेट पर मुझसे मिलतीं तो वह मुझे वैसे ही गले लगातीं जैसे एक बेटी अपने पिता को गले लगाती है। हमारे बीच एक अच्छा और समझदारी से भरा हुआ रिश्ता है जो स्क्रीन पर भी दिखाई देता है।

    वीडियो की गलत प्रस्तुति

    राकेश बेदी ने कहा कि वायरल वीडियो में यह देखा गया कि उन्होंने सारा के कंधे पर किस किया लेकिन यह पूरी घटना गलत तरीके से पेश की गई। उन्होंने यह भी बताया कि उस इवेंट में दोनों हमेशा की तरह मिल रहे थे और किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार नहीं किया गया था। राकेश का कहना था लोगों की आंख में गड़बड़ है। जब तक आपको सही तरीके से चीजों को नहीं देखा जाएगा तब तक कोई गलतफहमी हो सकती है।

    सारा के माता-पिता भी थे मौजूद

    राकेश ने इस बात को स्पष्ट किया कि जिस समय यह घटना हुई सारा के माता-पिता भी वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा मैं क्यों उन्हें सार्वजनिक रूप से ऐसे स्टेज पर किस करूंगा? उनके माता-पिता वहां थे। यह सब एक सामान्य अभिवादन था और लोग इसे गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। राकेश ने यह भी कहा कि इस तरह की बातें सिर्फ सोशल मीडिया पर मुद्दा बनाने के लिए की जा रही हैं और जो लोग इसे बढ़ा रहे हैं वे अपनी तरफ से गलतफहमियां फैला रहे हैं।

    फैंस का समर्थन

    जहां कुछ लोगों ने राकेश को ट्रोल किया वहीं उनके कई फैंस ने उनका समर्थन भी किया। राकेश ने अपनी सफाई में कहा मैं खुद की तारीफ नहीं कर रहा लेकिन हाल ही में जब मैं अपने दोस्तों के साथ डिनर पर गया था तो एक महिला मेरे पास आई। उसका बेटा शारीरिक और मानसिक रूप से चैलेंज था लेकिन उसे मेरा काम बहुत पसंद था। यह वह चीज है जो मेरे लिए मायने रखती है न कि सोशल मीडिया की नकारात्मक बातें।

    सोशल मीडिया और ट्रोलिंग

    यह घटना यह भी दर्शाती है कि सोशल मीडिया पर कुछ भी वायरल हो सकता है और कभी-कभी इसे गलत तरीके से पेश किया जाता है। ट्रोलिंग आजकल एक आम समस्या बन चुकी है जहां लोग बिना पूरी जानकारी के किसी भी घटना पर राय देते हैं और विवादों को बढ़ावा देते हैं। राकेश बेदी ने इस मामले में अपनी स्थिति को स्पष्ट कर दिया है और यह बताया कि उनका इरादा कभी भी किसी तरह का अनुचित व्यवहार करने का नहीं था।

    इस पूरे विवाद के बाद राकेश बेदी का कहना है कि उनके और सारा के बीच एक स्वस्थ और पेशेवर संबंध है और किसी भी गलतफहमी को जन्म देना गलत है। जहां तक सोशल मीडिया की बात है यह हमेशा एक दोधारी तलवार की तरह होता है जिसमें कभी-कभी चीजों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जाता है। लेकिन राकेश का मानना है कि उन्होंने अपनी भूमिका को पूरी तरह से निभाया है और उनके काम को लोग समझते हैं।

  • हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की प्रेयर मीट में न जाकर लिया सही फैसला मनोज देसाई ने किया खुलासा

    हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की प्रेयर मीट में न जाकर लिया सही फैसला मनोज देसाई ने किया खुलासा


    नई दिल्ली । धर्मेंद्र के निधन के बाद उनके परिवार ने दो अलग-अलग प्रेयर मीट आयोजित की थीं। पहली प्रेयर मीट उनके बेटों सनी और बॉबी देओल द्वारा रखवाई गई थी जबकि दूसरी प्रेयर मीट हेमा मालिनी ने अपने घर में आयोजित की थी। अब इस मामले पर गैलेक्सी थिएटर के मालिक मनोज देसाई ने अपनी राय दी है जिसमें उन्होंने बताया कि हेमा मालिनी का यह कदम एक समझदारी भरा निर्णय था।

    मनोज देसाई ने क्यों कहा ‘हेमा ने सही फैसला लिया

    धर्मेंद्र के निधन से उनके परिवार और फैंस को गहरा सदमा लगा। दोनों प्रेयर मीट के दौरान भारी भीड़ जुटी थी और मनोज देसाई ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विकी लालवाणी से बात करते हुए कहा “हेमा जी ने जो फैसला लिया वह बिल्कुल सही था। किसी भी प्रकार की विवाद से बचने के लिए उन्होंने अलग से प्रेयर मीट रखवाई। अगर वह सनी और बॉबी की प्रेयर मीट में शामिल होतीं तो शायद कोई न कोई विवाद उत्पन्न हो जाता। इसलिए यह सही था कि उन्होंने अपने घर पर एक अलग प्रेयर मीट रखवाई। मनोज का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के बीच के रिश्ते गहरे थे लेकिन इस तरह के संवेदनशील मौकों पर परिवार के भीतर किसी भी तरह की तकरार से बचने के लिए हेमा का कदम समझदारी से लिया गया था।

    प्रेयर मीट में उमड़ी भीड़

    मनोज ने यह भी बताया कि प्रेयर मीट में शामिल होने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग गई थीं। उन्होंने बताया “मेरी कार 86वें नंबर पर थी और मुझे इंतजार करना पड़ा क्योंकि इतनी भीड़ थी। सनी देओल से मेरी मुलाकात हुई और मैंने कहा कि इतनी भीड़ है इसलिए मैं फ्रंट गेट से आ रहा हूं। उन्होंने मुझे धन्यवाद कहा। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि प्रेयर मीट के दौरान भजन भी गाए गए थे और यह एक बहुत ही भावुक अवसर था।

    धर्मेंद्र की प्रेयर मीटएक ऐतिहासिक घटना

    मनोज देसाई ने कहा “मैंने कई आर्टिस्ट की प्रेयर मीट में हिस्सा लिया है जैसे राजेश खन्ना और यश चोपड़ा की प्रेयर मीट में। लेकिन धर्मेंद्र जी जैसी प्रेयर मीट मैंने कभी नहीं देखी। ऐसा लगा जैसे पूरा देश वहां आ गया था। यह बयान इस बात को दर्शाता है कि धर्मेंद्र का प्रभाव इंडस्ट्री में कितना गहरा था और उनके निधन से जो खालीपन हुआ है वह केवल उनके परिवार के लिए नहीं बल्कि पूरे फिल्म इंडस्ट्री के लिए था।

    धर्मेंद्र के निधन के बाद उनके परिवार ने जो भी कदम उठाए वह उनके सम्मान और शांति को बनाए रखने के लिए थे। मनोज देसाई के बयान से यह साफ है कि हेमा मालिनी का अलग प्रेयर मीट रखना एक सही निर्णय था ताकि कोई भी विवाद न हो और धर्मेंद्र की यादों को शांति से श्रद्धांजलि दी जा सके। धर्मेंद्र का योगदान सिनेमा में हमेशा याद रखा जाएगा और उनके चाहने वालों के लिए यह एक अभूतपूर्व क्षण था।

  • कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग

    कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग


    नई दिल्ली । कुमार सानू ने अपनी एक्स वाइफ रीता के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया है और मुआवजे के रूप में 30 लाख रुपये की मांग की है। यह मामला तब सामने आया जब रीता ने कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुमार सानू पर गंभीर आरोप लगाए।

    क्या है मामला

    रीता ने अपने बयानों में दावा किया था कि कुमार सानू ने उनकी प्रेग्नेंसी के दौरान उनका बहुत बुरा व्यवहार किया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि कुमार सानू ने उन्हें भूखा रखा किचन में बंद कर दिया और प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दूध और मेडिकल केयर तक नहीं दिया। रीता का यह भी कहना था कि कुमार सानू ने इस दौरान कोर्ट के मामलों को भी जारी रखा था।

    इन आरोपों को लेकर कुमार सानू ने मानहानि की याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि इन झूठे आरोपों के कारण उनकी इमेज को काफी नुकसान पहुंचा है और उन्होंने मानसिक तनाव का सामना भी किया है। कुमार सानू का कहना है कि इन आरोपों के कारण उनकी पब्लिक इमेज खराब हुई है और इसका असर उनके प्रोफेशनल करियर पर भी पड़ा है।

    याचिका में क्या कहा गया

    याचिका में कहा गया है कि इन बयानों ने सिंगर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है और उन्हें सोशल मीडिया पर भी निगेटिव प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा है। इस मानहानि के मामले में रीता और संबंधित मीडिया पोर्टल्स को लीगल नोटिस भेजा गया है। कुमार सानू ने यह भी कहा कि इन आरोपों से उन्हें आर्थिक और प्रतिष्ठा संबंधी भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा रीता ने यह भी आरोप लगाया था कि शादी के दौरान कुमार सानू के कई अफेयर थे जो मामला और पेचीदा बना रहा है।

    सना रईस खान ने लिया कुमार सानू का पक्ष

    कुमार सानू की ओर से इस मानहानि केस की याचिका वकील सना रईस खान द्वारा दायर की गई है। सना रईस खान बिग बॉस 17 की कंटेस्टेंट भी रह चुकी हैं और उन्होंने ही कुमार सानू का कानूनी प्रतिनिधित्व किया है।

    कुमार सानू और रीता का तलाक

    कुमार सानू और रीता का तलाक 2001 में हुआ था। दोनों का एक बेटा है जान कुमार सानू जो बिग बॉस 14 में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ चुके थे। जान कुमार सानू का नाम भी इस विवाद से जुड़ा है लेकिन अभी तक उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह विवाद सिंगर कुमार सानू और उनकी एक्स वाइफ रीता के बीच बढ़ता जा रहा है। यदि कोर्ट इस मामले में फैसला देता है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि मानहानि के इस केस में क्या परिणति होती है और क्या कुमार सानू को मुआवजा मिलता है।